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बुधवार, 2 नवंबर 2011

प्लैटलेट्स ने तोड़ी लोगों की आर्थिक कमर

सामाजिक संस्थाए व् प्रशासन मोंन

डबवाली (यंग फ्लेम)विगत एक माह से क्षेत्र में बुखार का प्रकोप जारी है शहर के अधिकांश अस्पताल बुखार पीडि़तों से भरे पड़े है। प्लैटलेट्स कम हो जाने के केस भारी तादाद में पहली बार सामने रहे है। जिसके चलते अनेक मरीजों को लुधियाना आदि शहरों के बड़े अस्पतालों में इलाज हेतु दाखिल होना पड़ रहा है।
कम आय वर्ग से संबंधित बुखार पीडि़तों को महंगे इलाज के चलते बेहद परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा कोई विशेष राहत नहीं मिल पा रही है। महंगे टैस्टों ने जहां पीडि़तों की कमर तोड़कर रख दी है वहीं कुछ लेबोरेट्रीयों की टैस्ट रिपोर्ट पर सवालिया निशान भी लगे है।
प्लैटलेट्स को बढ़ाने में कारगर रहा 'कीवीÓ फल भी 30 से 40 रूपए प्रति नग बिक रहा है। उधर, बकरी का दूध भी इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। कुछ बकरी पालक तो दूध के बदले में कोई पैसा नहीं ले रहे लेकिन कहीं-कहीं यह 500-600 रूपए प्रति किलो तक बिक रहा है। गौरतलब है कि बकरी के दूध से भी प्लैटलेट्स बढऩे की बाते कहीं जा रही है। हालांकि आर्युवेद एवं होम्योपेथी पद्धति में प्लैटलेट्स बढाने हेतु बेहद कारगर इलाज बताया जा रहा है लेकिन आमजन अभी तक इन पद्धतियों से जुड़ा हुआ नहीं है तथा आमजन गिलोय, आवँला, तुलसी व सस्सी होम्योपेथी दवा को ज्यादा तरजीह नहीं दे रहा है खासकर ग्रामीणों को इन पद्धतियों बारे कोई जानकारी नहीं है तथा ये लोग मजबूरीवश महंगा इलाज करवा रहे है। प्रशासन को चाहिए कि जरूरतमंदों को मुफ्त टैस्ट सुविधा उपलब्ध करवाये तथा बीमारी एवं कारगर इलाज बारे जागरूकता पैदा करने हेतु प्रचार अभियान चलाएं। समाजसेवी संस्थाओं को भी तुरंत इस ओर ध्यान देना चाहिए तथा निशुल्क कैम्प आदि लगाकर अपना योगदान करना चाहिए।

मंगलवार, 1 नवंबर 2011

नियमों की धज्जियां ,मुनादी कर बेची जा रही है लाल परी

मंडी डबवाली
डबवाली इलाके में शराब के कुछ ठेकेदार सभी नियम-कायदों को ताक पर रखकर शराब की बिक्री कर रहे हैं। खासकर हरियाणा व पंजाब की सीमा पर स्थित शराब के ठेकों पर नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। यहां शराब की बिक्री बढ़ाने के लिए न केवल रेटों की प्रतिस्पर्धा की जा रही अपितु लाऊड स्पीकर लगाकर लोगों को सस्ती शराब का लालच देकर ठेकों की ओर आकर्षित किया जा रहा है। मलोट रोड पर स्थित मालवा बाईपास के समीप पंजाब के एक ठेकेदार ने शराब की देसी बोतल का रेट घटाकर 50 रूपए कर दिया तो उसके मुकाबले में हरियाणा के ठेकेदार ने 40 रूपए बोतल के बैनर टांग दिए हैं। दोनों ठेकों पर लाऊड स्पीकर लगाकर मुनादी की जा रही है और लोगों को शराब बेची जा रही है। इस बारे में पंजाब के ठेके पर कार्यरत कारिंदे ने बताया कि दीपावली के बाद शराब की बिक्री कम हो गई है इसलिए रेट घटाएं गए हैं।
उधर, हरियाणा क्षेत्र के ठेके पर कार्यरत कृष्ण कुमार ने आरोप लगाया कि पंजाब के ठेकेदार ने रेट खराब किया है इसलिए उन्हें भी रेट कम करने की घोषणा करनी पड़ी है। दोनों ही ठेकों के कारिंदों को यह नहीं मालूम कि इस प्रकार लाऊड स्पीकर लगाकर शराब बेचना कानूनन मना है। यह कारिंदे तो इस बारे में अनभिज्ञता जताकर नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं लेकिन इन्हीं ठेकों के पास तैनात खड़ी हरियाणा व पंजाब की पुलिस भी आंखें मूंद कर शराब की बिक्री का यह तमाशा देख रही है। शाम ढलते ही इन ठेकों पर नशेडिय़ों का जमावड़ा लग जाता है और सस्ती शराब पीकर कई लोग अक्सर यहां धुत्त पड़े रहते हैं। ठेकों पर हो रही इस हुल्लडबाजी से आसपास के दुकानदार व यहां से गुजरने वाले लोग बेहद परेशान हैं। दुकानदारों की मांग है कि प्रशासन इन ठेकेदारों को कायदे कानून का पाठ पढ़ाए और नियमों की उल्लंघना करने वाले ठेकेदारों के खिलाफ कार्यवाही करे ।

रविवार, 28 अगस्त 2011

पालिका अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष चुनाव हेतु उपायुक्त महोदय के आदेश की उपमंडलाधीश ने नहीं की पालनापालिका अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष चुनाव हेतु उपायुक्त महोदय के


क्यों आम लोग दे रहे है अन्ना हजारे को समर्थन?

डबवाली-डबवाली नगर पालिका के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पद हेतु चुनाव संभवत निकट भविष्य में हो ही जाए। यू तो निदेशक शहरी स्थानीय निकाय, हरियाणा एवं उपायुक्त सिरसा महीनों पहले चुनाव करवाने हेतु आदेश दे चुके हैं लेकिन स्थानीय उपमंडलाधीश महोदय के लिए शायद ये आदेश कोई खास मायने नहीं रखते है।
गौरतलब है कि लगभग एक साल पूर्व नगरपालिका अध्यक्षा श्रीमती सिम्पा जैन व उपाध्यक्ष हरनेक सिंह के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित हो गया था। तब से लेकर आज तक स्थानीय प्रशासन ने नगरपालिका अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष पद हेतु चुनाव नहीं करवाए है। इस बारे में आरटीआई कार्यकर्ता महावीर सहारण द्वारा जब निदेशक शहरी स्थानीय निकाय से जानकारी आरटीआई कानून के तहत मांगी गई तो निदेशक शहरी स्थानीय निकाय ने उपायुक्त सिरसा को आदेश दिए कि डबवाली नगरपालिका के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष पद हेतु चुनाव करवा कर उन्हें सूचित करें। उपायुक्त महोदय ने चुनाव करवाने हेतु स्थानीय उपमंडलाधीश को काफी समय पूर्व ही निर्देष दे दिए थे तथा उपायुक्त कार्यालय से स्मरण पत्र भी भेजे गए लेकिन स्थानीय उपमंडलाधीश ने उपायुक्त महोदय के आदेशों को कोई तवज्जों नहीं दी। जब चुनाव बाबत उपमंडलाधीश डबवाली से पत्रकारों द्वारा पूछा जनता तो वे ये कह कर पल्ला झाड़ लेते थे कि कुछ पार्षद चुनाव नहीं चाहते हैं। इसी दौरान स्थानीय विधायक डॉ. अजय सिंह चौटाला एवं इनेलो-भाजपा के 9 पार्षद चुनाव करवाने हेतु उच्च न्यायलय पहुंच गए। माननीय उच्च न्यायलय ने मामले की सुनवाई करते हुए नोटिस जारी कर दिया है। अब उपायुक्त महोदय द्वारा एक बार फिर उपमंडल अधिकारी (ना.) को आदेश दिए गए है कि आपको नगरपालिका मंडी डबवाली के प्रधान व उपप्रधान का चुनाव करवाकर गजट नोटिफिकेशन के लिए हिन्दी व अंग्रेजी में प्रारूप तैयार करके प्रतियां भिजवाने के लिए लिखा गया था परंतु आपकी और से अभी तक कोई उत्तर प्राप्त नहीं हुआ है। इस मामले में शीघ्र कार्रवाई करके कार्रवाई रिपोर्ट भिजवाएं ताकि निदेशक शहरी स्थानीय निकाय हरियाणा को भेजा जा सके।
इस बारे में जब उपमंडलाधीश डॉ. मुनीश नागपाल से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि कुछ पार्षदों ने मुझे यह लिखकर दिया था कि अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के चुनाव न करवाए जाए। मैंने इस बाबत उच्च अधिकारियों से मार्ग दर्शन मांंगा हुआ है। लेकिन उन्होंने उन पार्षदों के नाम बताने से इंकार कर दिया जिन्होंने चुनाव न करवाने हेतु उन्हें लिखकर दिया हुआ है।
यह समूचा घटनाकर्म यह दर्शाने के लिए काफी है कि आज अन्ना हजारे का समर्थन करने के लिए क्यों पूरा देश उमड़ पड़ा है? अफसरशाही की ताकत कितनी है? तथा उनके लिए लोकतांत्रिक संस्थाएं कितनी मायने रखती है? तथा ये लोग अपनी निरंकुशशाही को मूर्त रूप देने के लिए अपनी कितनी मनमर्जी तक चला सकते है। यह बात यहां साबित हो गई है। इस प्रकरण में एक और तथ्य उभरकर सामने आया है कि अधिकारी वर्ग अगर अपने उच्च अधिकारियों के आदेशों को भी महत्व प्रदान नहीं करते हैं व उनकी पालना नहीं करते हैं तो ये लोग आम जनता के साथ किस रूप में पेश आते होंगे। इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है क्योंकि बेचारी आम जनता इनका क्या बिगाड़ सकती है।

शनिवार, 6 अगस्त 2011

मासूम बच्चों की जिंदगी खतरे में, प्रशासन मौन कभी भी हो सकती है बड़ी दुर्घटना

डबवाली (यंग फ्लेम) क्षेत्र में चल रहे लगभग दर्र्जन भर प्राइवेट स्कूलों में बच्चों को लेकर जाने वालेे इन दिनों खस्ताहाल पुराने मॉडल के हैं। इन वाहनों में मासूमों की जिंदगी सुरक्षित नहीं है। स्कूली वाहनों में सुरक्षा के मापदंड भी पूरे नहीं किए गए है। इन वाहनों में प्राथमिक उपचार किट तो उपलब्ध तो होनी ही क्या थी, बल्कि इन वाहनों में अग्नि शमन यंत्र भी उपलब्ध नहीं है। वैसे कुछ एक वाहनों को छोड़ दिया जाए तो बाकि सभी वाहनों बच्चों को ले जाने के ज्यादातर मापदंड़ों पर खरे नहीं उतरते हैं। ज्यातातर वाहन तो इस समय अव्यवस्थायों के शिकार हैं तथा यनीय हालात से गुजर रहे है। इन स्कूलों में शिक्षण करने वाले विद्यार्थियों को उनके गंतव्य से लेकर स्कूल पंहुचने का जिम्मा उठाने के लिए मारूति वन का प्रयोग किया जा रहा है। उन वैनों में छोटे छोटे बच्चों को पशुओं की भांति ठुंसा जाता है। इतना ही नहीं इन वैनो में निर्धारित मापदंड़ों को ठेंगा दिखाते हुए इनमेें घरेलू गैस सिलैंडर प्रयोग किए जाते हैं। घरेलू गैस के प्रयोग से किसी भी समय हादसा हो सकता है। यह गाडिय़ां 10-15 वर्ष पुरानी हैै। यहां तक कि इन गाडिय़ों का बीमा भी नहीें करवाया गया है। कई वाहनों के पीछे शिकायत नम्बर लिखना तो दूर की बात है, जबकि इन वाहनों की नम्बर प्लेट ही नहीं है। कई वाहन चालक गंतव्य से स्कूल तक पंहुचने की जल्दी में गाड़ी को ओवर स्पीड से चलाते हैं, जिसकी वजह से किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकताहै। कई वाहनों पर तो पीला रंग कि या गया है और ही स्कूल का नाम अंकित है जिससे यह पता नहीं चलता है कि यह वाहन स्कूल का है या कोई अन्य व्यवासयिक है। वहीं इन स्कूली वाहनों में स्वार मासूमों की जिंदगी पर हर समय खतरे की तलवार लटकी रहती है। जबकि स्कूल प्रशासन अभिभावकों से पूरा वाहन खर्च वसूल करता है, तो व्यवस्था को दुरूस्त करने की उनकी जिम्मेवारी बनती है। जिला प्रशासन को इन वाहनों की ओर ध्यान देना चाहिए ताकि मासूमों की जिंदगी दांव पर लगने से बच जाए।

गुरुवार, 7 जुलाई 2011

पटरी से उतर रही है शहर की यातायात व्यवस्था

डबवाली(यंग फ्लेम)शहर की यातायात व्यवस्था सुधरने की बजाय पटरी से उतरती जा रही है। दुकानदार अपनी-अपनी दुकानों के आगे 10 से 15 फीट तक कब्जा जमाए हुए हैं जिस कारण चौड़ी-चौड़ी सड़कें भी संकरी लगने लगी हैं। लगभग शहर के सभी बाजारों में हर समय जाम की स्थिति बनी रहती है। बाजारों को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए समय-समय पर नगरपालिका व पुलिस द्वारा 'औपचारिकताÓ निभाई जाती है मगर दुकानदारों के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि उन्हें किसी की परवाह नहीं है। शहर का सब्जी मंडी मार्ग 40 से 60 फीट तक चौड़ी हैं जहां से एक साथ चार गाडिय़ां निकल सकती है मगर अतिक्रमण की मेहरबानी से चौपहिया गाड़ी तो दूर, बाइक निकालने में भी पसीने आ जाते हैं। दुकानदार खुद तो सड़क पर सामान रखते ही है, साथ ही दुकानों के आगे सब्जी व फल बेचने वाली रेहडिय़ों को भी सड़क पर लगाने की छूट दे देते हैं जिससे समस्या विकराल हो रही है। हालांकि कुछ दुकानदार रेहड़ी वालों का विरोध करते हैं मगर उनकी सुनने वाला कोई नहीं है। कुछ समय पहले नगरपालिका ने बाजारों से अतिक्रमण हटाने के लिए अभियान चलाया था। पुलिस भी अभियान में शामिल हुई थी मगर यह अभियान सफल होने से पहले ही दम तोड़ गया। नगरपालिका के अधिकारियों ने रेहड़ी वालों को तो डराया-धमकाया मगर दुकानदारों का जो सामान सड़क पर रखा हुआ था, उन्हें कुछ नहीं कहा। ऐसे में कार्यप्रणाली पर सवाल भी उठे। अब आलम यह है कि सभी बाजारों में दुकानदारों ने दुकान की बजाय सड़क पर सामान रखा हुआ है जिस कारण वाहन चालकों को खासी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
बेखबर है पुलिस
कॉलोनी रोड, बस स्टैंड रोड के अलावा अन्य बाजारों में यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए पीली लाइन लगाई गई थी। शुरूआत में उस पर अमल भी हुआ था मगर लंबे समय से पुलिस पीली लाइन का पालन कराने के प्रति उदासीन हो गई है। अब तो पीली लाइन का वजूद ही खत्म हो गया है। पुलिस बाजार में स्ििात फाटक पर खड़ी रहकर बाइक सवारों का तो चालान कर देती है मगर बाजारों में सड़क के बीच खड़े होने वाले वाहनों पर कार्रवाई करने का समय नहीं निकाल पाती। अच्छा यह रहेगा कि पुलिस बाइक चालकों का चालान करने में जो सक्रियता दिखाती है, वह बाजार में यातयात सुधारने में लगाए। पुलिस ने कुछ कॉलोनी रोड पर वन वे का नियम लागू किया था मगर वह भी पूरा नहीं हुआ।

पटरी से उतर रही है शहर की यातायात व्यवस्था

डबवाली(यंग फ्लेम)शहर की यातायात व्यवस्था सुधरने की बजाय पटरी से उतरती जा रही है। दुकानदार अपनी-अपनी दुकानों के आगे 10 से 15 फीट तक कब्जा जमाए हुए हैं जिस कारण चौड़ी-चौड़ी सड़कें भी संकरी लगने लगी हैं। लगभग शहर के सभी बाजारों में हर समय जाम की स्थिति बनी रहती है। बाजारों को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए समय-समय पर नगरपालिका व पुलिस द्वारा 'औपचारिकताÓ निभाई जाती है मगर दुकानदारों के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि उन्हें किसी की परवाह नहीं है। शहर का सब्जी मंडी मार्ग 40 से 60 फीट तक चौड़ी हैं जहां से एक साथ चार गाडिय़ां निकल सकती है मगर अतिक्रमण की मेहरबानी से चौपहिया गाड़ी तो दूर, बाइक निकालने में भी पसीने आ जाते हैं। दुकानदार खुद तो सड़क पर सामान रखते ही है, साथ ही दुकानों के आगे सब्जी व फल बेचने वाली रेहडिय़ों को भी सड़क पर लगाने की छूट दे देते हैं जिससे समस्या विकराल हो रही है। हालांकि कुछ दुकानदार रेहड़ी वालों का विरोध करते हैं मगर उनकी सुनने वाला कोई नहीं है। कुछ समय पहले नगरपालिका ने बाजारों से अतिक्रमण हटाने के लिए अभियान चलाया था। पुलिस भी अभियान में शामिल हुई थी मगर यह अभियान सफल होने से पहले ही दम तोड़ गया। नगरपालिका के अधिकारियों ने रेहड़ी वालों को तो डराया-धमकाया मगर दुकानदारों का जो सामान सड़क पर रखा हुआ था, उन्हें कुछ नहीं कहा। ऐसे में कार्यप्रणाली पर सवाल भी उठे। अब आलम यह है कि सभी बाजारों में दुकानदारों ने दुकान की बजाय सड़क पर सामान रखा हुआ है जिस कारण वाहन चालकों को खासी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
बेखबर है पुलिस
कॉलोनी रोड, बस स्टैंड रोड के अलावा अन्य बाजारों में यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए पीली लाइन लगाई गई थी। शुरूआत में उस पर अमल भी हुआ था मगर लंबे समय से पुलिस पीली लाइन का पालन कराने के प्रति उदासीन हो गई है। अब तो पीली लाइन का वजूद ही खत्म हो गया है। पुलिस बाजार में स्ििात फाटक पर खड़ी रहकर बाइक सवारों का तो चालान कर देती है मगर बाजारों में सड़क के बीच खड़े होने वाले वाहनों पर कार्रवाई करने का समय नहीं निकाल पाती। अच्छा यह रहेगा कि पुलिस बाइक चालकों का चालान करने में जो सक्रियता दिखाती है, वह बाजार में यातयात सुधारने में लगाए। पुलिस ने कुछ कॉलोनी रोड पर वन वे का नियम लागू किया था मगर वह भी पूरा नहीं हुआ।

शनिवार, 25 जून 2011

फ्री कोचिंग की निकल गई हवा, आधे से भी कम रह गए विद्यार्थी

डबवाली (यंग फ्लेम) हरियाणा सरकार की ओर से विज्ञान विषय की फ्री कोचिंग देने की योजना की बीच में ही हवा निकल गई है। सिरसा जिले में तो कोचिंग लेने वाले बच्चों की संख्या आधी से भी कम रह गई है। जिले के विभिन्न स्कूलों में चल रही मैथ, फिजिक्स, कैमेस्ट्री व बायोलॉजी की कोचिंग का जायजा लेने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय की ओर से जब निरिक्षक ने जब इन फ्रि चल रही कोचिंग कक्षाओं का दौरा किया तो कोचिंग कक्षाओं में बच्चों की संख्या देखकर हैरान रह गए क्योंकि सभी कक्षाओं में लगभग 650 विद्यार्थी ही मौजूद थे जबकि कोचिंग देने वाली संस्था को 1470 बच्चों की लिस्ट दी गई थी। बच्चों की कम संख्या मिलने के कारण निरिक्षक ने पिछला पूरा रिकार्ड जांच के लिए मांगा है। इसके साथ ही कोचिंग दे रहे शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यता का रिकार्ड भी मांगा है। निरिक्षक के अनुसार सरकार ने 11वीं-12वीं के विज्ञान विषय के बच्चों को गर्मियों में एक जून से नि:शुल्क कोचिंग देने का अभियान शुरू किया था जो 30 जून तक चलेगा। प्रथम दिन तो लगभग 1400 विद्यार्थी कोचिंग लेने आए थे मगर बाद में धीरे-धीरे संख्या कम होती गई।
शिक्षकों में अनुभव की कमी
कोचिंग ले रहे बच्चों से बात की गई तो उन्होंने कहा कि कोचिंग देने के लिए जो शिक्षक लगाए गए हैं उन्हें पढ़ाने का अनुभव कम है। उन्हें स्कूल में जिस तरह से समझाया जाता था, उस तरह से पढ़ाया नहीं जा रहा है, इसलिए उन्हें कोचिंग लेने की बजाय घर पर ही रहकर पढऩा उचित समझा। दूसरी ओर पढ़ाने वाले शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यता पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं और कहा जा रहा है कि पढ़ाने वाले शिक्षकों की जितनी योग्यता होनी चाहिए उतनी नहीं है।
सरकारी पैसे की बर्बादी
इस बारे में शिक्षाविद प्रो. करतार सिंह ने हरियाणा की मुख्य सचिव को एक पत्र भेजा है जिसमें कहा गया है कि फ्री कोचिंग के नाम पर सरकारी पैसे का दुरुपयोग हो रहा है। उन्होंने तर्क दिया है कि न तो पढ़ाने वाले शिक्षकों को अनुभव है तथा न ही उनके पास पूरी शैक्षणिक योग्यता है, लिहाजा कोचिंग देने के लिए नियुक्त एजेंसी को भुगतान न किया जाए क्योंकि यह किसी घोटाले से कम नहीं है। उनका आरोप है कि सभी जिलों में बच्चों की संख्या कम है जबकि बिल अधिक संख्या दिखाकर बनाए जाएंगे। करतार सिंह का कहना है कि उन्होंने इससे पहले हरियाणा के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को शिकायत भेजी थी जिसमें कोचिंग कक्षाओं की जांच करने व भुगतान रोकने की मांग शामिल थी मगर किसी भी जिला शिक्षा अधिकारी ने शिकायत पर गौर करना मुनासिब नहीं समझा।
घोटाले की आशंका
करतार सिंह का कहना है कि इस पूरे मामले में घोटाला होने की आशंका है। फ्री कोचिंग देने की एवज में सरकार एजेंसी को प्रति विद्यार्थी 6 हजार रुपये का भुगतान करेगी। यानि एक बच्चे को कोचिंग देने पर एजेंसी को 6 हजार रुपये मिलेंगे। कोचिंग के लिए बच्चे कम आ रहे हैं मगर एजेंसी चलाने वाले अधिक बच्चों की संख्या दर्ज कर रहे हैं ताकि ज्यादा बिल बनाया जा सके। उन्होंने सरकार से इस पूरे मामले की गहनता से जांच कराने की मांग की है।
क्या कहते है एसडीएम
इस संबंध में जब उपमंडलाधिश मुनीश नागपाल से बात की गई तो उन्होंने कहा कि वह जल्द ही इस बारे में उपमंडल शिक्षा अधिकारी से आंकडे एकत्रित कर मामले की जांच करेंगे।

धड़ल्ले से चल रहे हैं अवैध वाहन

डबवाली (यंग फ्लेम) स्थानीय बठिंडा चौक रेलवे स्टेशन से सवारिया उठाने के लिए दिन प्रतिदिन अवैध वाहनों की संख्या बढ़ती जा रही है लेकिन इन अवैध वाहनों पर नकेल डालने वाला कोई हीं है। इस कारण रोडवेज को आए दिन हजारों रूपए का चुना लग रहा है। यह सब जानते हुए भी प्रशासन रोडवेज के उच्चाधिकारी जान बूझकर आंखें मूंदे हुए है। आज कल डबवाली से सिरसा के लिए 40 से ऊपर अवैध वाहन सवारियां ढोने पर लगे हुए हैं। बताया जा रहा है कि यह वाहन रोजाना 1200 के करीब यात्रियों को अपने वाहनों में उनके गंतव्य तक पहुंचाते है। जिसके लिए वाहन चालक प्रत्येक सवारी से 40 रूपए वसूल करते है। जिसका रोजाना का टोटल करीब 48 हजार रूपए का हरियाणा सरकार को नुकसान हो रहा है लेकिन इस पर प्रशासन हरियाणा रोडवेज के उच्चाधिकारियों द्वारा कोई भी कार्रवाई नही की जा रही। जब कभी भी अगर इन अवैध वाहनों पर कार्रवाई की जाती है तो वह महज खानापूर्ति के लिए की जाती है। बताया जा रहा है कि इन अवैध वाहन चालकों को राजनेताओं का सरक्षण हरियाणा रोडवेज के अधिकारियों पुलिस प्रशासन का आशीर्वाद प्राप्त है। यह अवैध वाहन चालक स्थानीय बठिंडा चौक से अधिकतम सवारियां उठाने की होड़ में रोजाना दुर्घनाओं का कारण बन रहे है और वहीं हरियाणा सरकार को चुना लगा रहे है। अवैध वाहन चालकों ने राष्ट्रीय राज मार्ग क्षेत्र के अन्य मार्गंे पर भी अपना जाल बिछा रखा है वह रोजाना ज्यादा से ज्यादा पैसे कमाने की होड़ में मैक्सी कैब जीप चालक अपने वाहन में क्षमता से अधिक सवारियां बिठा कर मार्गें पर तेज गति से वाहन चलाकर लोगों के जीवन से खिलवाड़ करने से भी नहीं चूकते। एक वाहन चालक अपने वाहन में 15 से 18 सवारियां तक ठूस-ठूस कर भर लेता है। इतना ही काफी नहीं है थोड़े से पैसों के लालच में वाहन चालक इतना अंधा हो जाता है कि सवारियों को पीछे तक लटका लेता है। जिससे अनेकों बार दुर्घनाएं भी हो चुकी है।
इन अवैध वाहन चालकों से रिक्शा चालक भी खासे परेशान है इस संबंध में रिक्शा यूनियन के प्रधान सुखविंद्र सिंह ने बताया कि यह अवैध वाहन चालक रेलवे स्टेशन से ही सिरसा आदि जगहों पर जाने वाली सवारियों को अपने वाहन में बिठा लेते है जिस कारण हरियाणा सरकार व रोडवेज को तो चुना लग ही रहा है रिक्शा चालकों के भी भूखे मरने की नौबत आ गई है। उन्होंने बताया कि जब उन्हें रोकने का प्रयास किया जाता है तो वाहन चालक यह कहने से कुरेज नहीं करते की वह पुलिस प्रशासन व रोडवेज अधिकारियों को रोजाना नजराना भेंट करते है।
इस संबंध में जब एसडीएम मुनीश नागपाल से बात की गई तो उन्होंने कहा कि सड़कों पर चल अवैध वाहनों पर शिकंजा कसने के लिए पुलिस प्रशासन व रोडवेज के अधिकारियों को निर्देश दे दिए गए है और जल्द ही इन पर कार्रवाई की जाएगी।

शुक्रवार, 17 जून 2011

हलके में 40 से 45 गाडिय़ों में लगे है वीआईपी सायरन

डबवाली (यंग फ्लेम) जैसे-जैसे इन्सान तरक्की की ओर बढ़ रहा है उससे वह जागरूक तो हो रहा है लेकिन अपने अधिकारों के साथ समाज के प्रति अपनी जिम्मेवारियों को भुलता जा रहा है। आज के इस मशीनरी युग में इन्सान इतना तेज हो गया है कि इस भागम-भाग दौड़ में अपने आप को अलग दिखाने की कोशिश में लगा रहता है जिसका जिता जागता उदाहरण इन दिनों गांवों तथा शहरों की गलियों में निजी वाहन चालकों द्वारा अपने वाहनों पर सरकारी सायरन लगाकर बजाते हुए आम देखा जा रहे हैं, कानून को ठेंगा दिखाने वाले ऐसे लोग एक ओर जहां यातायात व्यवस्था को धुमिल कर रहे है वहीं दुसरी ओर सायरन व हुटर लगाकर अपने आप को सफेदपोश नेताओं की कतार में खड़ा करने की कोशिश करते हैं तथा ऐसे वाहनों पर प्रशासन द्वारा किसी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं की जाती है, जिससे आम आदमी का कानून व्यवस्था से विशवास उठता जा रहा है। यंग फलेम टीम द्वारा अपने तहकीकात में पाया गया की अकेले डबवाली में ऐसे वाहनों की संख्या 40 से 45 के करीब है, जो बिना किसी खौफ के सायरन व हुटरों का प्रयोग धड़ल्ले से कर रहे हैं ओर प्रशासन आंखे मुंदे हुआ है। वहीं दुसरी ओर उपमण्डल के गांव गोरीवाला, बिज्जूवाली, अबूबशहर, मुन्नावाली, रिसालियाखेड़ा, गोदीकां, तेजाखेड़ा, चौटाला, आसाखेड़ा सहित अनेक गांवों में ऐसे वाहनों की भरमार है। भीड़ वाले इलाके व जाम में अवैध तौर पर इनका प्रयोग जिस तरह से किया जा रहा है, उससे लोगों को परेशान होना पड़ता है, उस समय पुलिस अधिकारी उन पर कार्यवाही करने की बजाए सामने खड़े उनकी तरफ देखते रहते हैं। इस प्रकार मनचले मिजाज के लड़केे व अवैध तौर पर चल रहे टैक्सी वाहन चालक इन सायरनों का सरेआम धड़ल्ले सेे प्रयोग कर रहे हैंं। गांवों व शहरों की गलियों में निजी वाहनों पर अवैध तौर पर लगे पुलिस के सायरन की आवाज कभी भी कहींं भी सूनी जा सकती है। एक वक्त वह भी था जब इन सायरनों का प्रयोग केवल उच्च पदाधिकारी व मंत्री करते थे, लेकिन आज के मनचले लोग अपनी गाडिय़ों पर सायरन लगाकर इस तरह से घुमते हैंं कि जैसे की उनकी गाड़ी किसी वीआईपी की गाड़ी हो। शरारती किस्म के लोग बेमतलब ही हर कहीं मन चाहा वहीं सायरन बजाना शुरू कर देते हैं। क्षेत्र में तो इस तरह के लोगों की दिनों-दिन बढ़ोतरी हो रही है, परंतु पुलिस प्रशासन द्वारा इन लोगों पर कोई कानूनन कार्यवाही नहीं की जा रही है। इन दिनों कानून व्यवस्था काली पट्टी बांंधे एक औरत की भांति बन चुकी है। कानून के सामने अपराध और अपराधियों की कतारें लंबी दर लंबी होती जा रही है। क्षेत्र के लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि निजी वाहनों पर सायरनों का प्रयोग करने वालों पर अंकुश लगाकर उनके खिलाफ कड़ी कानूनन कार्यवाई की जाए, ताकि अवैध तौर पर सरकारी सायरनों का प्रयोग करने वालों से आमजन परेशान ना हो।

क्या कहते हैं प्रशासनिक अधिकारी

गोरीवाला पुलिस चौकी के प्रभारी प्रीतम सिंह का कहना है कि अगर हमारे सामने कोई ऐसा वाहन आया तो उसके खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जाएगी।
सदर थाना डबवाली के प्रभारी रतन सिंह से बात की गई तो उन्होंने कहा कि उच्चाधिकारियों के आदेशानुसार समय-समय पर चैकिंग की जाती है, अगर किसी निजी वाहन पर सायरन लगा मिला तो विभागिय कार्यवाही की जाएगी।
वहीं जब इस बारे में उपमण्डल अधिकारी मुनीश नागपाल से बात की गई तो उन्होंने कहा कि वे जल्द ही ऐसे मनचले लोगों के खिलाफ सख्त कदम उठाएगें, पुलिस प्रशासन के सहयोग से कानून को ठेंगा दिखाने वाले लोगों पर निकेल कसेगें। जब उन्हें यह बताया गया कि डबवाली में ऐसे 40 से 45 के करीब वाहनों पर सायरनों का दुर्रप्रयोग हो रहा है तो वे आश्र्चाय चकित रह गए। और उनके मुंह से निकला 'ओ आई सी'

रविवार, 12 जून 2011

हादसों को दावत दे रहा है टूटा पुल,प्रशासन नहीं दे रहा ध्यान

डबवाली (बलबीर लखौत्रा) गांव खुइया मलकाना के पास भाखड़ा नहर पर क्षतिग्रस्त पुल हादसों को दावत दे रहा है। पुल की रेलिंग पूरी तरह से टूट चुकी है, इसके बावजूद प्रशासन की ओर से पुल को ठीक नहीं कराया जा रहा है जिससे लगता है कि प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है। डबवाली के गांव खुईयां मलकाना के पास से भाखड़ा नहर गुजरती है। गांव खुईयां मलकाना के पास एक पुल है जो कि विभिन्न गाँवों दीवानखेड़ा, मलिकपुरा, किंगरे, सावंतखेड़ा, चोरमार मिठडी, मठ आदि अनेक गांवों को लिंक रोड़ द्वारा एक दूसरे को जोड़ता है।
स्मरण रहे कि भाखड़ा का ये पुल कई गाँवों का मुख्य रस्ता है जिसके ऊपर से सैकड़ों वाहन दिन में गुजरते हैं। हैरानी की बात ये है कि पिछले कुछ दिनों से इस पुल की रैलिंग टूट कर नहर में गिरी हुई है। इससे साफ है कि कोई भी वाहन पुल से गिर सकता है। शायद ऐसा लगता है कि सम्बन्धित अधिकारी भी उस भयंकर समय का इंतजार कर रहे हैं जो कि किसी निर्दोष की जीवन लीला समाप्त करने वाला है। शायद यह सोचकर कि सभी यहां से गुरजने वालों को पता है कि रेलिंग टुटी हुई, इसके बावजूद यहां कोई सुरक्षा के लिए गट्टे आदि नहीं लगाए गए हैं। सोचने वाली बात है कि जरूरी नहीं प्रत्येक व्यक्ति जो इस पुल से वाहन लेकर गुजरता है उसे पुल के टूटा होने की खबर हो, इस कारण कभी भी कोई वाहन पुल से गिरकर हादसे का शिकार हो सकता है। इस बारे में सरपंच का कहना है कि पुल रिपेयर पंचायत के तहत नहीं आता है। इसके लिए संबंधित विभाग के अधिकारियों को कहा गया है। इस संबंध में जब एसडीएम मुनीश नागपाल से बात की गई तो उन्होंने कहा कि इस पुल की मुरम्मत संबंधित विभाग द्वारा जल्द ही करवा दी जाएगी ताकि इस मार्ग पर कोई बड़ा हादसा घटित न हो।

मंगलवार, 23 नवंबर 2010

डबवाली के एमडीएम कार्यालय की पंजीकरण शाखा कटघरे में,दो लिपिकों के खिलाफ रिश्वतखोरी व हेराफेरी का मामला दर्ज

डबवाली- डबवाली के एमडीएम कार्यालय की पंजीकरण शाखा कटघरे में है। थाना शहर पुलिस में एसडीएम कार्यालय में पंजीकरण शाखा में तैनात रहे दो लिपिकों संजीव शर्मा और धर्मपाल के खिलाफ रिश्वतखोरी और दस्तावेजों में हेरफेर करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। मामले जांच डबवाली के डीएसपी बाबू को सौंपी गई है।
ज्ञातव्य हो कि करीब दो माह पूर्व विजीलेंस की एक टीम नेे डीएसपी विजय कक्ड़ के नेतृत्व में अचानक एसडीएम काम्पलेक्स में स्थित ई-दिशा केंद्र में छापा मार कर वहां का रिकार्ड कब्जे में ले लिया था। टीम तहसील परिसर में एक टाइपिस्ट प्रेम कुमार से भारी दस्तावेज बरामद किये थे। जिनमें वाहनों की पंजीकरण की नई कापियां, फार्म, आर्मज़ लाइसेंस के फार्म, ड्राइविंग लाइसेंस सहित कई अन्य कागजात शामिल थे। विजीलेंस के छापे के उपरांत संजीव शर्मा और धर्मपाल का यहां से तबादला कर दिया गया था।
विजीलेंस विभाग की दो माह की जांच के बाद आई रिपोर्ट के बाद थाना शहर पुलिस ने एसडीएम कार्यालय में पंजीकरण शाखा में तैनात रहे संजीव शर्मा और धर्मपाल के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 471, 468 और पीसी एक्ट की धारा 49 व 7-13डी के तहत मामला दर्ज कर लिया है। इस मामले की पुष्टी करते हुए डबवाली डीएसपी बाबू राम ने बताया कि मामला दर्ज करने के उपरांत इसकी जांच आरंभ कर दी गई है। जांच के बाद ही आगामी कार्यवाही की जायेगी। अभी तक इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है।

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