IMPORTANT-------ATTENTION -- PLEASE

-----------------------------------"यंग फ्लेम" परिवार में आपका हार्दिक स्वागत है। "यंग फ्लेम" परिवार आपका अपना परिवार है इसमें आप अपनी गजलें, कविताएं, लेख, समाचार नि:शुल्क प्रकाशित करवा सकते है तथा विज्ञापन का प्रचार कम से कम शुल्क में संपूर्ण विश्व में करवा सकते है। हर प्रकार के लेख, गजलें, कविताएं, समाचार, विज्ञापन प्रकाशित करवाने हेतु आप 093154-82080 पर संपर्क करे सकते है।-----------------------------------------------------------------------------------------IF YOU WANT TO SHOW ANY KIND OF VIDEO/ADVT PROMOTION ON THIS WEBSITE THEN CONTACT US SOON.09315482080------

Young Flame Headline Animator

शनिवार, 24 अक्टूबर 2009

खुफिया विभाग की साइकिल पर सवारी


कंप्यूटर के युग में भी पंजाब पुलिस का खुफिया विभाग पुराने ढर्रे पर ही काम कर रहा है। खुफिया विभाग आज भी जानकारी जुटाने के लिए साइकिल का इस्तेमाल करता है। इसके लिए बकायदा खुफिया विभाग के मुलाजिमों को बीस रुपये प्रति माह साइकिल एलाउंस भी दिया जाता है। सरकार की ओर से दिया जाने वाला बीस रुपये का साइकिल एलाउंस विभाग की कार्यप्रणाली और खुफिया मुलाजिमों की क्षमता पर कई तरह के सवाल खड़े करता है। इतना ही नहीं खुफिया विभाग के जवानों को 25 रुपये प्रतिमाह किट मेन्टेनेंस और 100 रुपये प्रति माह राशन मनी के नाम पर दिए जाते हैं, जो कमरतोड़ मंहगाई के दौर में मजाक सा है। 24 घंटे ड्यूटी करने वाले विभाग के इन जवानों का स्केल दिन में छह घंटे ड्यूटी करने वाले जेबीटी अथवा बीएड अध्यापक से भी कम है। हालांकि इन जवानों को कई बार वेतन आयोग द्वारा अध्यापकों के वेतनमान के बराबर लाने की भी कोशिश की गई। पंजाब विधानसभा में सबसे पहले खुफिया विभाग के कर्मचारियों के हक में सवाल रिटायर डीएसपी नरोट मेहरा व विधायक विशंभर दास ने उठाया था। मगर अभी तक सरकार ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। विधायक दास का कहना है कि आज जिस तरह से आतंकियों व अपराधियों से चुनौती मिल रही है, उसके लिए खुफिया विभाग को मजबूत व कर्मचारियों को उत्साहित करने की जरूरत है। आईजी हेडक्वार्टर पराग जैन भी मानते है कि आज युवा पीढ़ी को इस क्षेत्र में आने के लिए उत्साहित किए जाने की जरूरत है। जल्द ही पंजाब में कम्यूनिटी ओरिएंटेड पुलिस बनाई जा रही है। इसके अलावा जवानों को प्रोफेशनल ट्रेनिंग उनके वेलफेयर और उनको ऊंचा उठाने के लिए विभिन्न प्रोग्राम बनाए गए हैं, जो सरकार के साथ विचार विमर्श के बाद लागू कर दिए जाएंगे। आईजी जोनल संजीव कालड़ा ने भी माना कि लंबे अरसे से इस तरफ ध्यान नहीं दिया गया है। पुलिस मुलाजिमों और खुफिया विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों पर जितना काम का बोझ है उस हिसाब से न तो उनके पास सुविधाएं है और न ही उन्हें मेहनत का पूरा फल मिल रहा है। हालांकि उन्होंने विभाग की तरफ से सरकार को कुछ सुझाव दिए थे। इस संबंध में एक वेलफेयर बैठक इस माह के अंत या अगले माह के शुरू में आयोजित की जाएगी। बैठक में कुछ अहम फैसले लिए जाने की संभावना है। उन्हें उम्मीद है कि सरकार इन सुझावों पर अमल करते हुए कर्मचारियों की दिक्कतों को दूर करने की कोशिश करेगी।

पाक आतंकियों से बचाए परमाणु अस्त्र : भारत

नई दिल्ली: पाकिस्तान में हर रोज हो रहे आतंकी हमलों के मद्देनजर भारत ने विश्व समुदाय का ध्यान वहां मौजूद परमाणु अस्त्रों पर मंडरा रहे खतरों की तरफ दिलाया है। भारतीय विदेश मंत्रालय की सचिव निरुपमा राव ने कहा कि परमाणु हथियार पाक में सक्रिय आतंकियों के पहुंच से दूर रखने की जरूरत हैं। उन्होंने मुंबई हमलों के दोषियों पर कार्रवाई को लेकर पाक के धीमे पड़ने पर भी निराशा जताई है। उन्होंने कहा कि पाक के इस रवैये के पर भारत ने अपनी राय इस्लामाबाद को बता दी है। विदेश सचिव का इशारा सीधे तौर पर यही था कि किसी एक घटना के लिए जिम्मेवार आतंकियों पर नरमी बरतने का ही खामियाजा है कि उसके अपने घर में भी लगातार हमले हो रहे हैं।

पाक के परमाणु ठिकानों तक पहुंच गए आतंकी

इस्लामाबाद: संदिग्ध तालिबान आतंकियों ने पाकिस्तान में फिर खूनी खेल खेला। आतंकियों ने शुक्रवार को एक के बाद एक देशभर में तीन बड़े हमले किए। इनमें से एक हमला तो कामरा वायुसेना ठिकाने पर बोला गया। इसे पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ा अहम ठिकाना माना जाता है। आतंकियों ने बारात ले जा रही बस को उड़ा दिया। एक रेस्तरां के बाहर भी धमाका किया गया। इन हमलों में 26 लोगों की जान चली गई। कई दर्जन लोग जख्मी भी हुए हैं। आतंकियों ने जुमे के दिन पहला हमला पंजाब प्रांत में पाकिस्तानी वायुसेना के कामरा ठिकाने पर बोला। साइकिल सवार आत्मघाती हमलावर ने सुबह सबेरे इस ठिकाने की एक चेक पोस्ट पर खुद को धमाके से उड़ा लिया। जोरदार धमाके की चपेट में आए आठ लोगों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। इनमें से दो वायुसेना के सुरक्षागार्ड थे। इस हमले में करीब डेढ़ दर्जन लोग जख्मी भी हुए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हमलावर की उम्र 20 से 25 साल के बीच थी। सुरक्षा गार्डो ने जैसे ही उसे रोका उसने अपनी सुसाइड जैकेट में धमाका कर दिया। पुलिस का कहना है कि उसकी जैकेट में तबाही मचाने का करीब पांच किलोग्राम सामान भरा था। अमेरिका के सामरिक थिंक टैंक स्ट्रेटफोर के मुताबिक कामरा ठिकाने पर हमले से पाक के परमाणु हथियारों की सुरक्षा को लेकर फिर आशंकाएं उभर सकती हैं। कामरा पाक की वायुसेना का सबसे बड़ा रखरखाव और शोध प्रतिष्ठान बताया जाता है। यह भी कहा जा रहा है कि परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम जंगी विमान भी इस ठिकाने पर ही रखे गए हैं।

सोनिया चुनेंगी मुख्यमंत्री


हरियाणा कांग्रेस विधायक दल का नेता कौन होगा, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी यह तय करेंगी। और जिस नेता को सोनिया चुनेंगी, उसी के सिर पर सजेगा मुख्यमंत्री का ताज। हरियाणा कांग्रेस विधायक दल ने आज शुक्रवार को बैठक कर विधायक दल का नेता चुनने के लिए कांग्रेस आला कमान को तमाम हक दे दिए। इस संबंध में कल दिल्ली में हरियाणा से कांग्रेसी सांसदों की राय भी ली जाएगी। बहुत मुमकिन है कि कल ही सोनिया कांग्रेस विधायक दल के नेता के नाम पर अपनी मुहर लगा देंगी। वर्ष 2005 में भी सरकार बनाने के वक्त विधायक दल ने सभी अधिकार सोनिया गांधी को दे दिए थे पर तब सांसदों से यहीं राय ले ली गई थी। बैठक में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी से तीन पर्यवेक्षक पृथ्वीराज चव्हान, बी हरिप्रसाद और मोहसिना किदवई मौजूद थीं। बैठक में भूपेंद्र सिंह हुड्डा सहित सभी 40 विधायक शामिल हुए जबकि जबकि तीन सांसद केंद्रीय मंत्री सैलजा, डा. अरविंद शर्मा और अवतार सिंह भडाना बैठक में नहीं आए। बैठक में शामिल होने वाले सांसदों में दीपेंद्र सिंह हु़ड्डा, जितेंद्र मलिक, श्रुति चौधरी, अशोक तंवर, राव इंद्रजीत और नवीन जिंदल शामिल हैं। कांग्रेस विधायक दल की बैठक के बाद तीनों पर्यवेक्षकों ने सभी विधायकों से अलग-अलग राय जानी कि वे किसे विधायक दल का नेता बनाना चाहते हैं। विधायकों से कुछ अन्य मुद्दों पर भी राय ली गई। बैठक में चर्चा व उसके बाद विधायकों से राय से तीनों पर्यवेक्षक कांग्रेस हाईकमान को अवगत कराएंगे जिसके आधार पर फैसला लिया जाना है।

छठ की छटा : चार दिन का किराया सात हजार


औरंगाबाद (बिहार)- देश भर में सूर्य नगरी के रूप में चर्चित देव इलाके में छठ के अवसर पर आने वाली भारी भीड़ के चलते यहां महज चार दिन के लिए एक कमरे का किराया सात हजार रुपये तक पहुंच गया है। एक समय था जब छठ के दिनों में देव आने वाले श्रद्धालुओं को यहां के लोग बिना किसी खास खर्चे के अपने घरों में रुकने की सुविधा दे देते थे, लेकिन धीरे-धीरे किराया लेने का चलन शुरू हुआ और आज स्थिति यह है कि तनिक भी ठीक-ठाक जगह का किराया तीन हजार से लेकर सात हजार तक वसूल किया जा रहा है। पिछले वर्ष किराये के रूप में पांच सौ से एक हजार रुपये ही ले रहे थे। किराये में अप्रत्याशित बढ़त के बावजूद छठ व्रतियों की भीड़ बढ़ रही है। देव में ठहरने के ठौर हाउसफुल होने के बाद लोग आस-पास के गांवों में भी जगह तलाशते हैं। एक कांप्लेक्स के मुखिया सूर्यनाथ चौरसिया ने अपने यहां तीन से सात हजार रुपये तक में श्रद्धालुओं को कमरा दिया है। उन्होंने बताया कि झारखंड एवं बिहार के उत्तरी कोने से पहुंचे लोगों ने कमरा आरक्षित कराने के लिए अग्रिम पैसा दे दिया था। देव के सीतालाल गली, मल्लाह टोली, जंगी मुहल्ला, नया बाजार, आनंदी बाग, बरई बिगहा, सोती मुहल्ला आदि में एक कमरे का किराया एक से तीन हजार रुपये तक लिया गया। प्रशासन ने भी श्रद्धालुओं के लिए दस हजार वर्ग फीट में पंडाल लगाया है। एसडीओ जयंत कुमार सिंह ने बताया कि जिले के गणमान्य नागरिकों के सहयोग से यह व्यवस्था की गई है। देव स्थित ऐतिहासिक सूर्य मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी है। शाम को सूर्य कुंड तालाब के पास भी श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। तालाब में Fान कर श्रद्धालुओं ने खरना की रस्म पूरी की और दीप जलाकर प्रसाद ग्रहण किया। देव में छठ पूजा अनुष्ठान की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। देव में छठ का महत्व पूरे देशभर में है। यहां कार्तिक और चैत मास में छठ पर्व करने देश के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। मान्यता है कि देव में सूर्य की उपासना करने वालों को मनोवांछित फल मिलता है। छठ के दौरान लगने वाला विशाल मेला से देव लघु कुंभ बन जाता है।

शिकायती पत्र के साथ वसंुधरा का त्यागपत्र


केंद्रीय नेतृत्व को थकाने के बाद अंतत: शुक्रवार को भाजपा नेता वसुंधरा राजे ने राजस्थान के नेता प्रतिपक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी से मिलकर अपना इस्तीफा सौंपा। कुछ घंटों बाद पार्टी के संसदीय बोर्ड ने उसे स्वीकार भी कर लिया। चुनावों में लगातार हार से पस्त भाजपा की ओर से अनुशासन को लेकर जितनी सख्ती दिखाई जा रही है उतनी ही तारें टूटती भी जा रही हैं। अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी को तीन महीने तक टालने के बाद शुक्रवार को वसुंधरा राजे ने नेता प्रतिपक्ष पद से इस्तीफा तो दे दिया, लेकिन जमकर अपनी भड़ास भी निकाली। तीन लाइन के इस्तीफे के साथ तीन पेज का शिकायती पत्र संसदीय बोर्ड के सभी सदस्यों को भेजा गया। सूत्र बताते हैं कि पत्र में उन्होंने इस्तीफा लेने के तरीके पर आपत्ति जताते हुए संगठन के कई पहलू पर भी सवाल उठाया है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि 1952 से लेकर वर्षो तक उनकी मां विजया राजे सिंधिया के कार्यो की भी पार्टी ने अवहेलना की है। पत्र में पार्टी के कुछ नेताओं की भूमिका और खेमेबाजी पर भी सवाल उठाया गया है। उन्होंने कहा है कि हाल के चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन के लिए कई लोग जिम्मेदार हैं। उन्हें भी इस्तीफा देना चाहिए था। कुल मिलाकर उन्होंने फिर से वही सारे मुद्दे छेड़ दिए हैं जिसपर पार्टी लगाम लगाने की कोशिश करती रही है। शुक्रवार की शाम बोर्ड ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया, लेकिन यह अंत तक साफ नहीं हो पाया कि उन्होंने इस्तीफा किसे दिया। यह संकेत है कि उन्होंने इस्तीफा आडवाणी को ही सौंपा। गौरतलब है कि राजस्थान में हुई पार्टी की हार के बाद से ही उनपर इस्तीफा देने का दबाव था, लेकिन वह लगातार इसे टालती आ रही थीं। परेशान पार्टी ने शुक्रवार को आगे की कार्रवाई के लिए बोर्ड की बैठक बुलाई थी, लेकिन उसे शाम तक के लिए टाल दिया। इस बीच वसुंधरा ने अपना इस्तीफा सौंप दिया। इस्तीफा स्वीकार होने के बाद शाम को वसुंधरा ने अटल बिहारी वाजपेयी से भी मुलाकात की। बाहर पत्रकारों के एक सवाल के जवाब में उन्होंने खुद को पार्टी की अनुशासित कार्यकर्ता बताया। इधर बोर्ड की बैठक के बाद पार्टी नेता अनंत कुमार ने बताया कि महाराष्ट्र, हरियाणा और अरुणाचल प्रदेश में विधायक दल के नेता के चुनाव के लिए केंद्र से पर्यवेक्षक भेजे जाएंगे। राज्यसभा में पार्टी के नेता अरुण जेटली और अनंत कुमार महाराष्ट्र जाएंगे। जबकि विजय गोयल और थावर चंद गहलोत हरियाणा के पर्यवेक्षक हैं। विजय चक्रवर्ती अरुणाचल प्रदेश जाएंगे।

शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2009

अकालियों ने पंजाब के बाहर खोला खाता


अकाली दल ने पहली बार पंजाब के बाहर चुनाव जीतकर अपना आधार फैलने के सबूत दिए हैं। यूं तो पार्टी पहले भी दिल्ली आदि राज्यों में विधानसभा चुनाव लड़ती रही है मगर उसे जीत नसीब हुई इस बार हरियाणा के विधानसभा चुनाव में। अकाली प्रत्याशी चरणजीत सिंह ने कालियांवाली सीट जीतकर इनेलो के हाथ मजबूत किए हैं जिसने अकाली दल को राज्य में दो सीटें दी थी। हरियाणा में प्रतिशत के लिहाज से किसी दल का यह सबसे बढि़या प्रदर्शन है क्योंकि उसके दो में से एक उम्मीदवार ने जीतकर पार्टी का जीत का प्रतिशत 50 फीसदी रखा है। अन्य कोई दल उसके बराबर नहीं ठहरता। हरियाणा ही नहीं, पंजाब में भी कई राजनीतिक पार्टियां अकाली दल द्वारा राज्य से बाहर चुनाव लड़ने का मजाक उड़ाती रही हैं और किसी को भी यह उम्मीद नहीं थी कि अकाली दल हरियाणा में चुनाव जीतने की क्षमता रखता है। हालांकि पहले भी अकाली दल हरियाणा विधानसभा चुनाव में एक-दो बार जीत दर्ज कर चुका है मगर तब उसके प्रत्याशी पार्टी चुनाव चिन्ह पर चुनाव नहीं लड़े थे। इस बार तकड़ी के जरिए अकाली दल ने हरियाणा में खाता खोला है। इस जीत के जरिए सुखबीर सिंह बादल क्षेत्रीय राजनीति में अपनी छाप छोड़ने में कामयाब रहे हैं। उन्होंने दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान अपने प्रत्याशी मैदान में उतारे थे मगर तब अकाली दल कोई सीट नहीं जीत पाया था। दिल्ली का अनुभव हरियाणा में काम आया है। अकाली राजनीति में इस जीत को ऐतिहासिक जीत माना जा रहा है। यह जीत अकाली दल के लिए टानिक का काम करेगी। जीत से उत्साहित अकाली दल अब केवल पंजाब की सीमाओं तक ही बंध कर नहीं रहेगा बल्कि खुद को राष्ट्रीय स्तर तक स्थापित करने के सपने को पूरा करने के करीब पहुंचेगा। सुखबीर बादल ने इस जीत पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि हरियाणा के सिखों ने कांग्रेस द्वारा अलग गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी गठित करने का ऐलान करके सिखों में फूट डालकर उन्हें कमजोर करने की घटिया चाल का हुड्डा के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार को ऐसा करारा जवाब दिया है कि वह साधारण बहुमत के लिए अन्य दलों की मिन्नत पर मजबूर है। सुखबीर बादल ने कहा कि हरियाणा के किसानों ने सरकार की किसान विरोधी नीतियों और भूमि अधिग्रहण करने की गलत नीति से दुखी होकर इस चुनाव में कांग्रेस को सजा दी है। उन्होंने कहा कि हालांकि कांग्रेस ने नरमे के एमएसपी में थोड़ी बढ़ोतरी करके हरियाणा के किसानों को प्रभावित करने का प्रयास किया था मगर हरियाणा के लोगों का फतवा कांग्रेस की तानाशाही नीतियों के खिलाफ राज्य के समूह नागरिकों के भारी रोष का प्रतीक है। बादल ने कहा कि अब कांग्रेस को जनमत को संजीदगी से स्वीकार करते हुए चुनावी राजनीति से किनारा कर लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह हरियाणा के लोगों द्वारा उनके प्रति दिखाए विश्वास पर बड़ा फº महसूस करते हैं क्योंकि वह हरियाणा में जहां भी चुनाव प्रचार के लिए गए, वहां इनेलो-अकाली दल के प्रत्याशियों को कामयाबी मिली।

कौन होगा काबिज हरियाणा के सिंहासन पर?

अभी-अभी विशेष--


जैसे आसार थे नतीजे बिल्कुल वैसे ही सामने आए और सिंहासन का खेल उलझ गया। कौन बनेगा हरियाणा का मुख्यमंत्री, कौन सी पार्टी संभालेगी सत्ता और कौन किसके साथ जाएगा? नतीजे सामने आए तो स्वीप-स्वीप की दुहाई देने वाली कांग्रेस पूर्ण बहुमत भी प्राप्त करने की स्थिति में नहीं रही। पूरे चुनाव में शोर मचा रहा कि विपक्ष बिखरा है और किसी का किसी से गठबंधन नहीं। ऐसे में कांग्रेस कुछ ज्यादा ही आश्वस्त थी। दोपहर 12 बजे तक चुनाव नतीजे स्पष्ट कर गए थे कि सब कुछ अस्पष्ट सा होने जा रहा है। सत्ता की चाबी कहीं और ही घूमनी शुरू हो गई। कांग्रेस को मिली 40 सीटें, इनेलो-अकाली दल को मिली 32 सीटें, भाजपा चार पर आकर अटक गई तो हजकां छह सीटें हासिल कर ली। बसपा तो एक पर ही सिमट गई और रह गए निर्दलीय विधायक, जो तादाद में सात हैं। अब सरकार बनाने के समीकरण बैठें तो कैसे बैठें? शाम तक सभी कांग्रेसी दिग्गज और हजकां सुप्रीमो कुलदीप बिश्नोई दिल्ली जा पहुंचे। बातचीत सभी की सभी से चल रही है। कांग्रेसी तो पहले पहुंचे सोनिया दरबार में। स्पष्ट बहुमत नहीं मिला तो भूपेंद्र सिंह हुड्डा के लिए हाईकमान के सामने अपने ही कांग्रेसी साथियों ने परेशानी तो शुरू करनी ही थी। चर्चा है कि हाईकमान के सामने बहुत कुछ खुलकर बोला-कहा गया। हाईकमान खुश भी नहीं है। विपक्ष को इतना कम आंकना हुड्डा के लिए सुखद नहीं रहा। फिर कांग्रेस में दावेदारों की कमी भी कहां है। दावा भी ठोकते रहेंगे और अपने आपको दावेदार कहने से गुरेज भी करते रहेंगे। लेकिन बात तो फिर वहीं आकर अटक गई। हाईकमान के मानने से भी क्या होगा, बात तो आंकड़े की है। 40 को 46 बनाने के लिए चाबी तो किसी को देनी पड़ेगी। तो हजकां के कुलदीप बिश्नोई के छह विधायक कांग्रेस को भी चाहिए, और निर्दलियों को काबू में किए हुए इनेलो को भी क्योंकि आंकड़ा पूरा करने के लिए और विधायक चाहिए ही। कांग्रेस के सामने अब झारखंड के चुनाव भी हैं। यहां पिटती है तो असर तो दूसरे राज्यों के चुनाव पर पड़ेगा ही। ऐसे में शर्तो का खेल तो कांग्रेस को मानना ही पड़ेगा और जिसके पास चाबी है, वह पहले मांग भी तो बड़ी ही रखेगा। जो राजनीतिक हालात आज हरियाणा में बने हैं ऐसे में अपने राजनीतिक भविष्य के लिए हजकां सुप्रीमो को बहुत सोच-समझकर फैसला लेना होगा। कांग्रेस ने भजनलाल जैसे कद्दावर नेता को, जिसने कभी 67 सीटें लाकर कांग्रेस की झोली में सत्ता डाली थी, दरकिनार कर दिया था। भजनलाल ने उम्र के इस पड़ाव में हरियाणा जनहित कांग्रेस बनाई जिसे उनके बेटे कुलदीप बिश्नोई ने अस्तित्व दिया। हालांकि हजकां केवल छह सीटें लाई है लेकिन हालात ऐसे हैं कि आज हजकां सत्ता पर काबिज होने के लिए दोनों बड़े दलों की जरूरत है। फिलहाल तो सत्ता का मामला दोनों दलों कांग्रेस व इनेलो में फंसा हुआ है। बात इनेलो की करें तो चुनाव में सबसे असरदार कारगुजारी रही है उसकी। जब हर कोई इनेलो को नजरअंदाज कर रहा था और उस पर दांव तक लगाने को तैयार नहीं था, तब इनेलो अंदरखाते अपनी तैयारी में जुटी थी। किसी राष्ट्रीय नेता को चुनाव प्रचार के लिए बुलाए बिना इनेलो ने अपनी साख के सहारे तिहाई से ज्यादा सीटें हथिया लीं। यह करिश्मा पार्टी ने ओमप्रकाश चौटाला, अजय व अभय चौटाला के नेतृत्व में किया है। खास बात यह भी है कि चौटाला दो सीटों से चुनाव लड़े और दोनों पर ही जीते। फिलहाल जोड़-तोड़ का दौर तेज है। विपक्ष के पास 50 सीटें तो हैं मगर वह बिखरी हुई हैं। मिलकर सरकार बनाने का तजुर्बा कामयाब रहेगा, इसमें संदेह है लेकिन इतना तय है कि सरकार बनाने के लिए पूरा मोल-भाव छोटे दल व निर्दलीय विधायक कर रहे हैं। सरकार किसी भी दल की बने मगर इतना तय है कि इस बार फिर सरकार में एक उपमुख्यमंत्री होगा।

सिंहासन से सभी दूर



हरियाणा विधानसभा चुनाव में मतदाता ने किसी भी राजनीतिक दल को बहुमत नहीं दिया, सभी को सत्ता के चौराहे पर छोड़ दिया है। सरकार बनाने के लिए आवश्यक जादुई आंकड़े 45 सीटों के करीब कोई भी दल नहीं पहुंच पाया। कांग्रेस में जीत का इतना जोश था कि चुनाव छह महीने पहले करवा दिए पर उसे केवल 40 सीटें ही मिलीं जबकि साल 2005 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 67 सीटों पर जीत दर्ज की थी। दूसरी तरफ, 2005 में केवल 9 सीटें जीतने वाली इनेलो ने 31 सीटें जीतीं। साथ ही उसके सहयोगी अकाली दल ने भी एक सीट जीत ली। इनेलो को इस चुनाव में जबरदस्त बढ़त मिली है। बीजेपी ने 4 सीटों पर जीत दर्ज करवाई है जबकि साल 2005 के चुनाव में केवल 2 ही सीटें बीजेपी ने जीती थी। हजकां को मतदाता ने छह सीटों पर ही जितवाया है। बेशक हजकां सुप्रीमो कुलदीप बिश्नोई सरकार बनाने का दावा कर रहे थे। पिछले कई चुनावों की तरह बीएसपी को इस बार भी केवल एक ही सीट पर जीत हासिल हुई है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा गढ़ी सांपला सीट पर सबसे अधिक अंतर 72100 वोटों जीते जबकि हजकां प्रत्याशी सतपाल सांगवान दादरी सीट पर सबसे कम अंतर केवल 145 वोटों से जीते हैं। टाप पांच सीटें कांग्रेस के हिस्से में ही आई हैं। भूपेंद्र सिंह हुड्डा के बाद, किरण चौधरी, विनोद शर्मा, शकुंतला खटक व गीता मातेनहेल का नंबर आता है। रेवाड़ी से लगातार छठी बार जीतकर कैप्टन अजय यादव ने रिकार्ड बनाया है। विभिन्न दलों से कांग्रेस में आए लोगों को मतदाताओं ने पसंद नहीं किया। इनेलो छोड़कर कांग्रेस की टिकट पर संपत सिंह विजयी हुए हैं। संपत सिंह ने हजकां प्रत्याशी जसमा देवी को हराया है जो पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल की धर्मपत्नी हैं। प्रदेश की 17 आरक्षित सीटों में से इनेलो को 10 और कांग्रेस को 7 सीटें जीती हैं। इस बार केवल 9 महिलाएं विजयी हुई जबकि साल 2005 के चुनाव में 11 महिलाएं विधायक बनी थीं।

मोबाइल पर लेते रहे नतीजों की जानकारी


उत्तरकाशी ब्रेक के नाम पर चंद दिनों के लिए सियासत से दूरी तो ठीक है, लेकिन जब तीन राज्यों में पार्टी के चुनावी प्रदर्शन का सवाल हो तो भला कांग्रेसी युवराज कैसे खुद को इससे अलग रख पाते। सो गुरुवार सुबह दयारा की मंद-मंद ठंडी हवाओं के बीच हिमालय की बर्फ से ढकी चोटियों को निहारते राहुल गांधी अपने मोबाइल संग अपनी पार्टी के क्षत्रपों की परफार्मेस पर भी नजर रखते रहे। अब इसे तीन राज्यों के विधानसभा चुनाव नतीजे आने से पहले ही पार्टी के प्रति आत्मविश्र्वास कहें या फिर खूबसूरत वादियों का असर, लेकिन गुरुवार को राहुल बेहद खुश नजर आए। शायद यह उनकी जिंदगी का पहला मौका था जब समुद्र तल से दस हजार फीट की ऊंचाई पर बैठकर उन्होंने सियासी बिसात पर शह-मात के खेल का लुत्फ लिया। राहुल ने अपनी दिनचर्या की शुरुआत योगाभ्यास से की। इसके बाद कुछ देर तक उन्होंने अपने भांजा-भांजी के साथ फुटबाल खेला। हालांकि, इस दौरान उनका मोबाइल फोन लगातार बजता रहा। इस दौरान राहुल ने सुरक्षा प्रमुख को भी योग के गुर सिखाए। इसके बाद राहुल मोबाइल फोन पर व्यस्त हो गए। लगातार फोन पर बात करने के साथ ही वह अपने साथियों को शुरुआती रुझानों की सूचना देते रहे। दोपहर बाद राहुल ट्रैकिंग करते हुए दयारा से करीब चार किमी ऊपर बकरियां टाप तक भी गए। सूत्रों के मुताबिक राहुल शुक्रवार को दयारा से ही हेलीकाप्टर के जरिए दिल्ली रवाना हो जाएंगे। उल्लेखनीय है कि बुग्याल में पेड़ों की झुरमुट के बीच राहुल गांधी का शिविर लगा है, जिसके चारों ओर विशेष सुरक्षा बल का पहरा है। शिविर के सौ मीटर की परिधि तक किसी को जाने की इजाजत नहीं है। बुधवार को राहुल से मिलने के लिए वार्सू व रैथल गांव के लोग बड़ी संख्या में दयारा पहुंचे थे, लेकिन सुरक्षा बलों ने उन्हें दो सौ मीटर की दूरी पर ही रोक दिया।

कलह से पस्त भाजपा और फिसली

विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद भाजपा में अब नेतृत्व को लेकर अंदरूनी संघर्ष गहराने के आसार बढ़ने लगे हैं। निराशा से हताशा की ओर बढ़ रही भाजपा मानने लगी है कि संघर्ष न थमा तो स्थिति गंभीर हो सकती है। दरअसल भाजपा में जल्द ही संगठन चुनाव होने हैं, वहीं कुछ ही दिनों में झारखंड का चुनावी शंखनाद भी होने वाला है। ऐसे में संघ का असर और बढ़े तो आश्चर्य नहीं। गुरुवार को हार स्वीकारते हुए पार्टी प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने साफ संकेत दिये कि हार के पीछे बड़ा कारण अंदरूनी कलह है। उन्होंने कहा, हमें कार्यकर्ताओं और समर्थकों के सामने एक सुर और स्वर में बात करनी चाहिए। तीन राज्यों मंें हार के बाद भाजपा के लिए चुनौती बढ़ गई है। महाराष्ट्र में जहां चुनाव के समय दूसरे मुद्दों के साथ-साथ नेताओं का भी संघर्ष दिखा, वहीं नतीजों के बाद गोपीनाथ मुंडे ने राष्ट्रीय नेतृत्व में युवाओं को लाने की बात कहकर संकेत दे दिया है कि संगठन चुनाव बहुत आसान नहीं होगा। कई राज्यों में भी संगठन चुनाव होने हैं। हरियाणा में पार्टी को कुछ उत्साहजनक नतीजे तो मिले हैं, लेकिन यह बहस भी छिड़ गई है कि वहां अकेले उतरने का फैसला कितना सही था। दबे छुपे इसके पीछे आपसी संघर्ष की बात सामने आने लगी है।

सात निर्दलियों ने हासिल की जीत

हुड्डा अपनी माता जी से दुलार लेते हुए,
---------------------------------


हरियाणा राज्य की 12वीं विधानसभा में इस बार सात निर्दलीय विधायक जीतकर आए हैं। पिछली बार के चुनाव में 11 आजाद विधायकों ने जीत हासिल की थी, मगर इस बार निर्दलीय विधायकों की संख्या घटकर सात रह गई है। 67 में सिर्फ नौ महिलाएं ही चुनाव जीतीं चंडीगढ़ : हरियाणा की 12वीं विधानसभा चुनाव में 67 महिलाएं चुनावी समर में मैदान में उतरी थीं, जिनमें मात्र नौ ही चुनाव जीतने में सफल हुई हैं। इनमें कांग्रेस की छह, इनेलो की दो और एक भाजपा की है। हरियाणा में अकालियों का खाता खुला चंडीगढ़ : अकाली दल ने पहली बार पंजाब के बाहर चुनाव जीत कर अपना आधार फैलने के सबूत दिए हैं। यूं तो पार्टी पहले भी दिल्ली आदि राज्यों में विधानसभा चुनाव लड़ती रही है मगर उसे जीत नसीब हुई इस बार हरियाणा के विधानसभा चुनाव में। अकाली प्रत्याशी चरणजीत सिंह ने कालियांवाली सीट जीत कर इनेलो के हाथ मजबूत किए हैं जिसने अकाली दल को राज्य में दो सीटें दी थीं। जीत के बावजूद हजकां प्रत्याशी की जमानत जब्त करनाल : जीत हासिल करने के बावजूद असंध विधानसभा क्षेत्र से हजकां प्रत्याशी पंडित जिलेराम शर्मा अपनी जमानत नहीं बचा पाए। उन्हें जमानत बचाने के लिए निर्धारित वोट नहीं मिले। इस क्षेत्र में कुल एक लाख 28 हजार 218 मत पड़े। प्रत्येक प्रत्याशी को जमानत बचाने के लिए कुल मतों का 1/6 हासिल करना होता है। इस नियम पर जिलेराम शर्मा समेत कोई भी प्रत्याशी खरा नहीं उतरा। जिलेराम को 20 हजार 266 मत मिले हैं।

कुछ यूं दी गई बधाइयां ..



चुनाव परिणाम आने के बाद कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में जोश भर गया, लिहाजा उन्होंने कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को कुछ इस अंदाजा में बधाइयां दीं।

मेहमानों को सड़कें खूबसूरत दिखाने की तैयारी


विदेशी मेहमानों को सड़कें किस तरह की दिखें, इसके लिए लंबी माथापच्ची के बाद सौंदर्यीकरण की योजना पर जमीन पर उतारने की कवायद शुरू हो गई। खेलों के लिए सड़कों के सौंदर्यीकरण योजना का दिल्ली के पहले प्रोजक्ट का राष्ट्रीय राजमार्ग-24 पर सैंपल तैयार किया गया है। इसमें दस से अधिक प्रजाति के पौधे, बेल व पेड़ लगाए गए हैं। योजना इस प्रकार तैयार की गई है कि इस हरियाली के बाद पूरा इलाका बदला-बदला नजर आएगा। योजना के तहत जो पौधे लगाए गए हैं, वे सभी देशी हंै। लोक निर्माण विभाग के सचिव के.के. शर्मा ने बुधवार शाम दौरा कर गाजियाबाद से निजामुद्दीन की ओर आने वाले मार्ग पर बनाए गए सैंपल को ओके कर दिया है। इसे शीघ्र ही दिल्ली के मुख्य सचिव राकेश मेहता और मुख्यमंत्री शीला को भी दिखाया जाएगा। सरकार से स्वीकृति मिल जाती है तो इसी के अनुरूप इस मार्ग को सुंदर बनाने का काम शुरू कर दिया जाएगा। कामनवेल्थ गेम्स के चलते जो रूट खिलाडि़यों को लाने-ले जाने के निर्धारित किए गए हैं, उन्हें सुंदर बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसी के तहत यमुना खादर में स्थित खेल गांव से यमुना स्पो‌र्ट्स कांप्लैक्स तक के रूट के सौंदर्यीकरण करने के लिए एनएच-24 पर मदर डेयरी पुलिया के पास संजय झील के सामने दोनों मार्गो पर सौ-सौ मीटर के सैंपल बनाए गए हैं। इसके अलावा मार्ग के सेंट्रल वर्ज को विकसित किया जा रहा है। इस पर पिछले 10 दिन से काम चल रहा है। सैंपल दो प्रकार के बनाए गए हैं। इसमें से गाजियाबाद की ओर से निजामुद्दीन की ओर जाने वाले मार्ग पर बने सैंपल को लोक निर्माण विभाग ने स्वीकृति दे दी है। इसमें हाइकस बैंजामीना, हाइकस ब्लैक आई व हाईकस रिजलाल्ट आदि के पेड-पौधे लगाए गए हैं। वे पेड़ लगाए गए हैं, जो छह से सात फुट तक ऊंचे हो जाते हैं। बीच-बीच में लाल फूल देने वाला हिमेलिया तथा पीला बड़ा फूल देने वाला टिकोमा लगाया गया है। यूनीपैंसिस व बैंगू (बांस) के पेड़ लगाए गए हैं। बार्डर के लिए इनर्मी लगाई गई है। जमीन को सुंदर बनाने के लाल घास लगाई गई है। इस रोड से जुड़ने वाले दूसरे मार्ग रोड संख्या-56 को गाजीपुर लालबत्ती से आनंद विहार बस अड्डा जाने वाले मार्ग का भी सौंदर्यीकरण किया जाएगा। इसके लिए एक सप्ताह बाद प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इस रोड के लिए अलग तरह के पौधे लगाए जाएंगे।

हुड्डा की राह में खड़ी हुई सैलजा और किरण चौधरी


हरियाणा में कांग्रेस भले ही बहुमत से कुछ पीछे रह गई हो, लेकिन पार्टी के कई नेता मुख्यमंत्री पद की दौड़ में आगे निकलने कोशिश में जुट गए हैं। चुनाव नतीजों की घोषणा के साथ ही गुरुवार शाम भूपेंद्र सिंह हुड्डा, कुमारी सैलजा और किरण चौधरी ने अपने-अपने तर्को के साथ पार्टी हाईकमान के यहां हाजिरी लगाई। राज्य में पार्टी के खराब प्रदर्शन का ठीकरा केंद्रीय नेताओं ने प्रदेश नेतृत्व के सिर फोड़ा है। इसके लिए उसके अति उत्साह को जिम्मेदार बताया गया है। कांग्रेस को उम्मीद से कमजोर चुनाव नतीजों के चलते जहां निर्दलीय व दूसरी पार्टी के समर्थन की तलब है, वहीं उसे हुड्डा के नाम पर सहमति न बनने की भी आशंका है। खासकर हजकां से समर्थन की नौबत आने पर। केंद्रीय मंत्री कुमारी सैलजा और बंसीलाल की बहू किरण चौधरी मुख्यमंत्री पद की दौड़ में हैं। सोनिया गांधी से मुलाकात करने गए भूपेंद्र सिंह हुड्डा जब10 जनपथ से बाहर निकले, ठीक उसी समय सैलजा सोनिया से मिलने गईं। उसके थोड़ी देर बाद किरण चौधरी भी पहुंच गईं। पार्टी महासचिव बीके हरिप्रसाद ने राज्य में वहां के नेतृत्व के अति उत्साह को कोसा। उनका कहना है कि हरियाणा के चुनाव नतीजे पार्टी की उम्मीदों पर खरे नहीं उतरते। हरिप्रसाद ने कहा कि निर्दलीय व हजकां जैसी पार्टियों के पास समर्थन के लिए जाना ही पड़ेगा। ऐसे में उनकी ओर से आई शर्त को नजरअंदाज करना भी संभव नहीं होगा। लोकसभा चुनाव में 10 में नौ सीटें जीतने के बाद मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने समय से छह महीने पहले चुनाव कराने के प्रस्ताव पर पार्टी हाईकमान से मुहर लगवा ली। टिकट बंटवारे से लेकर चुनाव प्रचार के तौर तरीके की पूरी छूट हुड्डा को मिली थी। चुनाव की कमान भी उनके हाथ में ही थी। प्रदेश कांग्रेस के दूसरे धड़े के नेताओं को नजरअंदाज किया गया। यही वजह थी कि पूरे चुनाव के दौरान ये नेता खिंचे-खिंचे रहे। जाहिर तौर पर अब हुड्डा चौतरफा निशाने पर हैं। प्रदेश कांग्रेस के बड़े नेताओं में चौधरी विरेंद्र सिंह चुनाव हार गए हैं, जो मुख्यमंत्री पद की दावेदारी में सबसे आगे थे।

गुरुवार, 22 अक्टूबर 2009

Elections is causing direct impact on routine functioning of Haryana State.


Sirsa (Dr sukhpal): Elections is causing direct impact on routine functioning of Haryana State.

The latest report from Sirsa says that university authorities have stayed celebration of the birth anniversary of Shaheed Bhagat Singh on the university campus by students citing violation of the model code of conduct, and asking to organize this event after haryana assembly elections.

It is to mention that,All-India Students Federation (AISF) had proponed birth anniversary of Shaheed Bhagat Singh function of September 28, to September 24 due to the Dussehra festival and invited Vice- Chancellor KC Bhardwaj as the chief guest for their programme, named “Ek Sham, Bhagat Singh ke Naam”.

..तो धम्मपद नहीं, गांधी का स्वराज चाहिए


मुझे यदि धम्मपद और गांधी के स्वराज में से किसी एक को चुनने का विकल्प दिया जाए तो मैं नि:संकोच स्वराज को चुनुंगा। तमाम समस्याओं का हल गांधी के दर्शन में ही है..आवश्यकता है इसे आत्मसात करने की..। यह कहना है बौद्ध संत व दलाईलामा के प्रमुख सहयोगी और तिब्बत की निर्वासित सरकार के प्रधानमंत्री सामदोंग रिंपोछे का जो इन दिनों गांधी कथा के प्रचार का जिम्मा उठाए हुए हैं। उनके सरकारी कार्यालय में दैनिक जागरण की उनसे बातचीत तो गांधी कथा पर शुरू हुई, लेकिन संदर्भ स्वराज और अहिंसा के मर्म तक भी पहुंचे। अहिंसा के मूल सिद्धांत पर आधारित बौद्ध धर्म व उसके प्रमुख अनुयायी होने के बावजूद महात्मा गांधी एवं उनके दर्शन के प्रचार की आवश्यकता को स्पष्ट करते हुए उनका कहना है, बुद्ध की अहिंसा धर्म और नीति तक सीमित होकर रह गई। श्रीलंका, कंबोडिया, थाईलैंड एवं बर्मा जैसे बौद्ध राष्ट्र पुलिस और सेना के बिना शासन की कल्पना तक नहीं कर पाए। दूसरी ओर गांधी ने उसे जीवन के हर पहलू, यहां तक कि राजनीति तक में उतार दिया। भारत की आजादी की लड़ाई, दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद की लड़ाई उन्होंने अहिंसा के बल पर लड़ी और सफल रहे। वही पहले व्यक्ति थे जिन्होंने सेना और पुलिसविहीन राष्ट्र व स्वराज की कल्पना की। रिंपाछे ने बताया कि बुद्ध और महावीर जैसे महात्माओं के कारण भारत समेत पूरे विश्व में करीब ढाई हजार साल से अहिंसा का उपदेश सुनने को मिल रहा है, लेकिन दुर्भाग्यवश आम लोगों के दैनिक जीवन का हिस्सा नहीं बन पाया। इसे सिर्फ आत्मिक उत्थान व धर्म का तरीका भर माना गया है। इसे दैनिक जीवन में उतारने और इसके माध्यम से अपनी बात मनवाने की ताकत बनाने का श्रेय पूरी तरह से महात्मा गांधी को जाता है। यह दीगर है कि आजादी के बाद उनके सिद्धांतों पर अमल नहीं हो पाया, लेकिन मेरा आज भी दृढ़ विश्वास है कि बिना सेना, पुलिस एवं बल प्रयोग के शासन संभव है। दलाईलामा के सहयोगी रिंपोछे का मानना है कि गांधी के स्वराज को ईमानदारी से अपनाएं तो विश्वव्यापी आतंकवाद, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी एवं मंदी जैसी समस्या का हल इसी में है। यदि पूरा मानव समाज अहिंसा के सिद्धांत का दृढ़ता से पालन करे और अपनी समस्याओं का हल अहिंसक तरीके से तलाश करे तो स्वत: ही हिंसा, आतंकवाद और लड़ाई-झगड़े खत्म हो जाएंगे। इसी तरह ग्राम स्वराज के सिद्धांत पर चलते हुए वस्तुओं का उतना ही ग्रामीण स्तर पर उत्पादन और संग्रह हो जितनी आवश्यकता है तो मंदी नहीं रहेगी। मौजूदा स्थिति को घातक बताते हुए उनका कहना है कि यह वैश्वीकरण और मशीनीकरण का दौर है। कारखानों में बेतहाशा उत्पादन, अधिक से अधिक वस्तुओं का संग्रह, मुनाफाखोरी, और अपनी आवश्यकता देखे बिना सिर्फ दूसरों को देखकर अस्त्र-शस्त्र समेत तमाम विलासता के सामान खरीदने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। हर आदमी, समाज और राष्ट्र चाहे-अनचाहे इस दौड़ में है। इससे उबरने का एकमात्र रास्ता संस्कारों में परिवर्तन है जो गांधी दर्शन में है।

Cricketer Yuvraj Singh's father loses election

Dabwali, Oct 22 : Former Indian cricketer Yograj Singh, who is the father of cricket star Yuvraj Singh, Thursday lost his maiden election from Haryana's Panchkula assembly seat.
Yograj, who was fielded by the Indian National Lok Dal (INLD), was defeated by Congress candidate Devender Kumar Bansal from the Panchkula seat, adjoining state capital Chandigarh, by over 12,250 votes.

Yuvraj had not come to campaign for his father, who had put up posters of his celebrity son.

At one point Yograj was trailing at fourth place among main candidates but recovered later to end runner-up in the election.

Yograj had played one test match and six one day internationals for India against Australia in 1980 during a trip Down-under.

Chautala defeats finance minister by 621 votes



Dabwali,(Dr sukhpal): Indian National Lok Dal (INLD) president and former Haryana chief minister Om Prakash Chautala Thursday pulled off a tough win Thursday when he defeated state Finance Minister Birender Singh in the Uchana Kalan assembly seat.

Chautala defeated Singh by a margin of just 621 votes on this seat in what is perhaps the biggest contest among all 90 assembly seats in the state.

Birender Singh, a powerful Jat community leader from Jind district, was aspiring to be chief minister if the Congress returned to power.

Chautala, who contested two assembly seats, was leading from the Ellenabad seat in Sirsa district by over 16,000 votes and was expected to win that comfortably as well.

Akali Dal wins its first assembly seat in Haryana



Dabwali, Dr sukhpal: Punjab's ruling Shiromani Akali Dal Thursday scored its first electoral win in Haryana with its candidate Charanjeet Singh getting elected from the Kalanwali (reserved) assembly seat.

Charanjeet Singh defeated Sushil Kumar Indora of the Congress by over 12,500 votes.

This is the first electoral victory for the Akali Dal in Haryana. The Akalis had an electoral alliance with the Indian National Lok Dal (INLD) in the state in this election even though its candidates fought under the Akali Dal symbol.

Indora had left the August this year to join the ruling Congress.

The only other Akali Dal candidate, Charanjeet Kaur, however, lost the Ambala city assembly seat to Congress candidate and former union minister Venod Sharma by over 35,500 votes.

SHARE ME

IMPORTANT -------- ATTENTION ---- PLEASE

-----------------------------------"यंग फ्लेम" परिवार में आपका हार्दिक स्वागत है। "यंग फ्लेम" परिवार आपका अपना परिवार है इसमें आप अपनी गजलें, कविताएं, लेख, समाचार नि:शुल्क प्रकाशित करवा सकते है तथा विज्ञापन का प्रचार कम से कम शुल्क में संपूर्ण विश्व में करवा सकते है। हर प्रकार के लेख, गजलें, कविताएं, समाचार, विज्ञापन प्रकाशित करवाने हेतु आप 093154-82080 पर संपर्क करे सकते है।-----------------------------------------------------------------------------------------IF YOU WANT TO SHOW ANY KIND OF VIDEO/ADVT PROMOTION ON THIS WEBSITE THEN CONTACT US SOON.09315482080------

SITE---TRACKER


web site statistics

ब्लॉग आर्काइव

  © template Web by thepressreporter.com 2009

Back to TOP