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गुरुवार, 24 सितंबर 2009

टूट नहीं रही जाति की बेडि़यां



( डॉ सुखपाल सावंत खेडा)- : भले ही जातिवाद को असभ्य समाज की देन माना जाता है और चुनाव आयोग ने भी जातीय प्रतीक के इस्तेमाल पर पाबंदी लगा रखी है मगर इसके बावजूद सच यह है कि आज भी भारतीय लोकतंत्र में चुनाव के वक्त जातीय समीकरणों का तिकड़म लगाया जाता है। हरियाणा में भी टिकट देने, मंत्री बनाने व मुख्यमंत्री बनाने तक में जातीय तालमेल व नुमाइंदगी को देखा जाता है। हरियाणा में आर्य समाज का आंदोलन भी क्रूर जाति व्यवस्था के सम्मुख बौना पड़ गया। पहली नवंबर 1966 को पंजाब से अलग होकर हरियाणा स्वतंत्र प्रदेश के रूप में अस्तित्व में आया। तबविधानसभा में कुल 54 सदस्य थे। सही मायने में दूसरी विधानसभा ही नवसर्जित हरियाणा की अपनी विधानसभा थी। इसके लिए 9 फरवरी 1967 को चुनाव हुए। तब से आज तक के परिणामों पर नजर डालें तो जातीय आधार पर प्रतिनिधित्व का आंकड़ा सिद्ध करता है कि ताकतवर जातियों में अपना वर्चस्व बढ़ाने की प्रवृति में लगातार इजाफा हो रहा है। दूसरी विधानसभा जो मुश्किल से 15 महीने चली, इसमें सर्वाधिक जनसंख्या वाली जाट जाति के 23 विधायक थे। इसके अलावा 13 बनिया, आठ पंजाबी, सात यादव, दो ब्राह्मण, दो रोड, एक सिख, एक बिश्नोई व 15 दलित विधायक थे। दूसरी विधानसभा में विधायकों की कुल संख्या 81 थी। तीसरी विधानसभा के लिए 12 व 14 मई, 1968 को मतदान हुआ। चुनाव के बाद जो तस्वीर सामने उभरी उसमें जाट 22, पंजाबी 8, बनिया 10, यादव 7, बिश्नोई दो, सैनी 2 व दलित पंद्रह की संख्या में विधायक बने। राज्य की चौथी विधानसभा के लिए 11 मार्च, 1972 को चुनाव हुए। इस बार जाट 23, बनिया 11, पंजाबी 8, यादव 6, ब्राह्मण 5, मुस्लिम 2, गुज्जर 2, राजपूत एक, रोड़ 2, सिख 2, बिश्नोई 2, सैनी एक, कंबोज एक तथा 15 दलित विधायक बने। 5वीं विधानसभा में विधायकों की संख्या नब्बे हुई तो जाट विधायकों की संख्या भी काफी बढ़ गई। इस बार 32 जाट, 8 बनिया, 8 पंजाबी, 5 यादव, 17 दलित विधायक चुने गए। इस चुनाव में आरक्षित सीटों की संख्या 17 हो गई थी। छठी विधानसभा के लिए मई 1982 में चुनाव हुए। इस बार भी जाट विधायकों की संख्या 32 ही थी जबकि बनिया समुदाय की संख्या 5वीं विधानसभा का आधा रह गई यानी कि महज चार विधायक। सातवीं विधानसभा में 26 जाट, 4 बनिया, 9 पंजाबी, 5 यादव, 8 ब्राह्मण व आरक्षित सीटों पर 17 दलित विधायक चुने गए। आठवीं विधानसभा जिसका कार्यकाल 1991 से 1996 तक रहा, में जाटों की संख्या बढ़कर 31 हो गई। इसमें 4 बनिया, 11 पंजाबी, 4 यादव, 4 ब्राह्मण, 5 मुस्लिम, 5 गुर्जर, 3 राजपूत, एक रोड़, 2 सिख व 17 दलित विधायक चुने गए। 9वीं विधानसभा जो 2000 तक चली में 28 जाट, 9 बनिया, 8 पंजाबी, 5 यादव, 6 ब्राह्मण, 3 मुस्लिम, 2 गुज्जर, 3 राजपूत, 2 सिख, 3 बिश्नोई, 2 सैनी, एक कंबोज, एक सुनार व 17 दलित विधायक थे। दसवीं विधानसभा में 32 जाट, 4 बनिया,11 पंजाबी, 6 यादव व 17 दलित विधायक विधानसभा पहुंचे। इस विधानसभा में 32 जाट विधायकों में से 21 इनेलो के खाते में तो 6 कांग्रेसी थे। दो निर्दलीय विधायक भी जाट समुदाय से चुने गए। ग्यारहवीं विधानसभा में जाटों की संख्या घटकर 26 हो गई। इस बार गुज्जर 6, ब्राह्मण 8, बनिया 4, यादव 5, बिश्नोई 3, पंजाबी 8, मुस्लिम 3, राजपूत 4, दलित 17 तथा अन्य से छह विधायक चुनकर विधानसभा पहुंचे।

इनेलो केगढ़ में कांग्रेस को ताकत बढ़ाने की चुनौती


कांग्रेस की पहली सूची आने के बाद विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार अभियान ने एकाएक गति पकड़ ली है। इनेलो अपना गढ़ सुरक्षित रखने की कवायद में जुटी है तो कांग्रेस के समक्ष अपना प्रदर्शन बेहतर करने की चुनौती है। सिरसा जिले में इंडियन नेशनल लोकदल व कांग्रेस के बीच वर्चस्व बरकरार रखने व छीनने की लड़ाई बनी हुई है। आंकड़ों के आइने में जिला के सभी पांचों विधानसभा हलकों को उतारें तो वर्ष 1982 से लेकर अब तक जिले के चार हलकों में लोकदल या इंडियन नेशनल लोकदल का ही दबदबा बना रहा है। हां यह अलग बात है कि जिला मुख्यालय अर्थात सिरसा विधानसभा सीट पर इस दल की दाल कम गली है। इस विधानसभा सीट से राष्ट्रीय दल कांग्रेस ने अपना वर्चस्व कायम रखा है। महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि कांग्रेस सरकार के उद्योग मंत्री लक्ष्मण दास अरोड़ा यहां 1982 से ही अपना सिक्का जमाते रहे हैं। हालांकि 1982 में उन्होंने बतौर आजाद उम्मीदवार 30.61 फीसदी वोट लेकर अपनी जीत दर्ज की लेकिन वर्ष 1991, 2000 तथा 2005 में तीन बार बतौर कांग्रेस प्रत्याशी अपनी जीत दर्ज की। एक अकेली सिरसा विधानसभा सीट को अगर अपवाद मानकर चलें तो शेष चार विधानसभा सीटों ऐलनाबाद, डबवाली, दड़बा व रोड़ी में इंडियन नेशनल लोकदल का ही दबदबा देखा गया है। ऐलनाबाद विधानसभा क्षेत्र में तो लोकदल या इंडियन नेशनल लोकदल के प्रत्याशियों ने वर्ष 1982 से अब तक पांच बार जीत हासिल की है। एक पहलू यह भी है कि इस विधानसभा सीट से भागीराम ने लोकदल या इनेलो के प्रत्याशी के रूप में चार बार चुनावी जीत का सेहरा अपने सिर बांधा है। उन्होंने 1982 व 1987 में लोकदल, 1996 में तत्कालीन समता पार्टी तथा वर्ष 2000 में इंडियन नेशनल लोकदल से विजय प्राप्त की। वर्ष 2005 में भी इनेलो की जीत का सिलसिला जारी रहा और यहां से डा. सुशील इंदौरा विजयी हुए। परिसीमन से पूर्व दड़बा कलां विधानसभा क्षेत्र से तो लोकदल या इंडियन नेशनल लोकदल ने चार बार विजयी पताका फहराई है जबकि कांग्रेस को महज दो बार जीत मिली है। यहां महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि इस हलके से इस दल की महिला प्रत्याशी विद्या बैनीवाल ने तीन बार जीत हासिल की है। वर्ष 1987 में उन्होंने बहादर सिंह को 30.06 फीसदी के मुकाबले 67.69 फीसदी मतों से पराजित किया। इसी तरह उन्होंने वर्ष 1996 तथा 2000 के विधानसभा चुनावों में क्रमश: प्रह्लाद सिंह व डा. केवी सिंह को पराजित कर वर्चस्व बरकरार रखा। डबवाली में भी लोकदल या इंडियन नेशनल लोकदल ने चार बार जबकि कांग्रेस ने दो बार विजय का वरण किया है। यहां से कांग्रेस की प्रत्याशी रही संतोष चौहान सारवान ने वर्ष 1991 में जनता पार्टी के ज्ञान चंद को पराजित किया। इंडियन नेशनल लोकदल ने यहां वर्ष 2000 तथा 2005 में लगातार जीत दर्ज की है। इससे पूर्व 1987 में लोकदल तथा 1996 में तत्कालीन समता पार्टी से मनीराम ने पार्टी को जीत दिलाई। जहां तक परिसीमन से पूर्व रोड़ी विधानसभा क्षेत्र के इतिहास का सवाल है तो यहां भी लोकदल, समता पार्टी या इनेलो के रूप में चार बार जीत हासिल हुई है। इनेलो सुप्रीमो ने 1996 से 2005 तक लगातार तीन बार जीत दर्ज की थी।

68 चेहरे खुश, सैकड़ों मायूस

( डॉ सुखपाल सावंत खेडा)-
आखिर वह लम्हा आ ही गया जिसका सभी को इंतजार था। कांग्रेस ने टिकट की घोषणा कर अपने 68 नेताओं के चेहरों पर मुस्कान बिखेर दी। लेकिन इसके साथ ही सैकड़ों को मायूस भी कर दिया। इसके साथ ही कांग्रेस नेतृत्व के सामने कठिन हालात पैदा होने शुरू हो गए हैं जिन्हें टिकट नहीं मिला उनकी प्रतिक्रिया किस तरह की होती है, आने वाले दिनों में सभी के लिए रोचक मसला हो गया है। कुछ बागी दूसरे दलों की ओर रुख कर सकते हैं तो कुछ पार्टी के खिलाफ मैदान में निर्दलीय उतर सकते हैं। चुनाव में कांग्रेस ही सबसे ज्यादा हाट पार्टी है। हुड्डा के शपथ लेने के बाद से पार्टी का ग्राफ लगातार ऊंचा हुआ है। सरकार के बीच के कार्यकाल में कई बार लगा कि प्रदेश में नए, मजबूत समीकरण चुनाव के दौरान प्रभावी रहेंगे। इसमें बसपा व जनहित के बीच दोस्ती को लेकर पंडित सबसे ज्यादा कयासबाजी कर रहे थे। लेकिन चुनाव सिर पर खड़ा है और न तो बसपा मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है और न ही हरियाणा जनहित कांग्रेस। इनेलो और भाजपा भी अकेले ताल ठोंक रही हैं। दोनों ने चुनाव के लिए लंबी चौड़ी रणनीति भी बनाई है। इसका क्या असर रहता है यह चुनाव के बाद ही पता चलेगा। शक नहीं कि आज कांग्रेस सभी पर बढ़त बनाए हुए है। बाहर के नेताओं को तोड़ कांग्रेस में मिलाने की हुड्डा की रणनीति कामयाब रही है। दूसरे दलों की फिजा इससे बिगड़ी है। लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू भी है। विपक्षी दलों की सोच है कि टिकट तय करना कांग्रेस के लिए वाटर लू सरीखा हो सकता है। नेता का ध्येय येन-केन-प्रकारेण विधायक बनना होता है। कांग्रेस की हवा देखकर ही बहुत सारे नाम इससे जुड़े थे। कांग्रेस हेड क्वार्टर में पांच हजार बायोडाटा टिकट के लिए आए थे। हजारों ने सीधे सीएम और कई दिग्गज नेताओं को अपना जीवन वृत थमाया था। पड़ताल करके नौ सौ के करीब दिल्ली रवाना किए गए थे। राजधानी में लिस्ट और छोटी की गई पर छोटी से छोटी लिस्ट का स्वरूप भी दूसरे दलों की अपेक्षा बहुत बड़ा था। माना जा रहा था कि कांग्रेस नेतृत्व टिकट तय करने में देर इस वजह से भी कर रहा है कि उनके यहां उठने वाले आक्रोश का फायदा विपक्षी को न मिले। नेता मायूस हो भी तो उनके लिए दूसरा चांस न के बराबर हो। नामांकन से दो दिन पहले लिस्ट आ ही गई तो आने वाले कुछ दिन राजनीति के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। बाहर से आए नेताओं में से दो को ही टिकट मिली है। दूसरी लिस्ट आनी बाकी है। अगर बाहर से आए लोगों को अगले दौर में टिकट मिली तो कांग्रेस से जुड़े नेता मायूस हो सकते हैं। कांग्रेस नेतृत्व इन्हें किस तरह से नियंत्रित करता है। राजनीति के पंडित मानते हैं कि कांग्रेस में सेंध लगाने के लिए विपक्षी दलों ने अपनी कुछ टिकट अभी तक घोषित नहीं की हैं। कुछ नेता दूसरी पार्टियों की तरफ रुख भी कर सकते हैं। उधर, कुछ का मानना है कि जिन के पास जनाधार नहीं है, या फिर जिन्हें अपने बूते चुनाव लड़ने में खतरा है, ऐसे लोग पार्टी के भीतर रहने में ज्यादा दिलचस्पी लेंगे। कांग्रेस सत्ता में लौट आई तो वह नुकसान को दूसरे तरीके से पूरा करने का प्रयास करेंगे। जो नेता असेंबली में बैठने का ख्वाब लिए कांग्रेस में शामिल हुए थे और जिनके पास कुछ बेस है, वह यहां टिकट न मिलने पर दूसरों की तरफ रुख कर सकते हैं। माना जा रहा है कि मजबूत स्थिति का हवाला देकर कांग्रेस नेतृत्व तीखे तेवर वालों को शांत करेगा, उन्हें आश्वस्त करेगा कि सरकार बनने पर वह अच्छे से एडजस्ट किए जाएंगे?

सब कुछ उजड़ने के बाद आखिर अब मिला न्याय


( डॉ सुखपाल सावंत खेडा)- तेरह साल तक हत्या के आरोपी होने का कलंक और आठ साल की उम्रकैद की सजा काट चुके पांच लोगों को आखिर हाईकोर्ट से न्याय मिल गया है। जीवित व्यक्ति की हत्या के आरोप में झूठे सबूतों के सहारे उम्रकैद की सजा के निचली अदालत के आदेश को हाईकोर्ट ने रद करते हुए पांचों को रिहा करने और उनमें से प्रत्येक को बीस-बीस लाख का मुआवजा देने का पंजाब सरकार को आदेश दिया। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस एमएस गिल व जस्टिस जितेंद्र चौहान की खंडपीठ ने इस मामले पर बुधवार को अपना फैसला सुनाते हुए पंजाब सरकार के मुख्य सचिव को आदेश दिया कि वह हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार के पास एक करोड़ रुपये जमा करवाएं ताकि तीस दिन के भीतर पांचों पीडि़तों को मुआवजा दिया जा सके। हाईकोर्ट ने इस मामले के जांच अधिकारी एसआई सर्बजीत सिंह व एएसआई दर्शन सिंह के खिलाफ मामला दर्ज करके कार्रवाई के आदेश दिए। कोर्ट ने बरनाला के तत्कालीन एसपी व डीएसपी (जो इस समय सेवानिवृत हो चुके हैं) को भी दोषी माना है। इसके साथ ही कोर्ट ने मृतक घोषित जगसीर सिंह (जो वास्तव में जीवित है और भागकर अपने घर से दूर रह रहा था), उसके परिवार के सदस्यों (जिन्होंने किसी और शव की जगसीर सिंह के शव के रूप में शिनाख्त की थी) व इस मामले में झूठे गवाह बने लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज कर जांच करने के आदेश दिए हैं। मामला क्या है : पुलिस रिकार्ड के अनुसार बरनाला निवासी जगसीर सिंह की 1996 में नछत्तर सिंह, शेरा सिंह, अमरजीत सिंह, निक्का सिंह व सुरजीत सिंह ने हत्या कर दी थी। निचली अदालत ने 2001 में इन सभी को कसूरवार करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। याचिकाकर्ता के वकील के अनुसार पंजाब पुलिस ने इन निर्दोष लोगों को सजा दिलाने के लिए यह दावा पेश किया था कि पुलिस ने जो हथियार बरामद किए हैं, उन पर मृतक जगसीर सिंह का खून लगा हुआ है। बचाव पक्ष के वकील ने कोर्ट को बताया था कि इन पांच लोगों को पुलिस ने पांच दिन तक अवैध हिरासत में रखकर उनका लगातार टार्चर किया जिस कारण उनके शरीर से खून निकलने लगा। पुलिस ने वह खून एकत्र कर उन हथियारों पर लगाया और कहा कि यह खून जगसीर सिंह का है। वकील के अनुसार पुलिस इस खून का लैब में टेस्ट भी करवाया लेकिन पुलिस ने जगसीर सिंह के ब्लड ग्रुप से मिलाने की जहमत नहीं उठाई और न ही कोई अन्य रिपोर्ट तैयार करवाई। पुलिस का मकसद केवल हथियारों पर इंसान का खून लगाना था जिससे वह इन लोगों को कातिल साबित कर सके। पुलिस ने दो खून से सने फावड़े, कुल्हाड़ी, प्रापर्टी के फर्जी कागजात, एक ट्रैक्टर व दो फर्जी गवाह जगसीर की हत्या की गुत्थी सुलझाने के लिए सबूत के तौर पर प्रयोग किए थे। इतना ही नही, पुलिस ने अपने केस को पुख्ता करने के लिए इस केस में दो गवाह करनैल सिंह व जगीर सिंह को भी पेश किया जिन्होंने अपने ब्यान में यह स्वीकार किया था कि इन पांच लोगों ने ही जगसीर सिंह की हत्या की है। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने भी इस मामले पुलिस की कार्रवाई पर हैरानी जताते हुए कहा था कि यह बहुत ही दुखद कदम है। सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने कहा था कि इस झूठी कहानी शामिल सभी पुलिस अधिकारियों, गवाह, जगसीर सिंह व उसके घरवालों के खिलाफ मामला आपराधिक मामला दर्ज होना चाहिए। खंडपीठ ने कहा कि इस मामले में केवल जांच अधिकारी ही नहीं अपितु तत्कालीन एसपी, डीएसपी भी दोषी हैं। 18 सितंबर को हाईकोर्ट ने इस बहस के बाद कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला रिजर्व रख लिया था। उजड़ चुकी है पांचों की दुनिया : जब यह मामला सामने आया कि ये सभी निर्दोष हंै, कोर्ट ने सभी को पैरोल पर रिहा कर दिया था। लेकिन जब पैरोल के बाद बाद शेरा अपने घर गया तो उसकी मां व पत्नी की मौत हो चुकी थी। सुरजीत सिंह की दो बेटी व उसके माता-पिता की इलाज के अभाव में मौत हो चुकी थी। निक्का सिंह की पत्नी ने उसे छोड़कर दूसरा विवाह कर लिया था। अमरजीत सिंह के बच्चों ने रोटी कमाने के चक्कर में अपनी पढ़ाई छोड़ दी थी। हाईकोर्ट से क्या मांग की थी : पांचों ने अपनी सजा व उन्हें दोषी करार देने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए इस मामले में दोषी पुलिस वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। इनके वकील ने हाईकोर्ट में याचिका में कोर्ट से मांग की थी कि इस मामले में पीडि़त प्रत्येक व्यक्ति को 20 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए व इस मामले की जांच करवाई जाए और दोषी लोगों की सजा दी जाए। इस याचिका के बाद ही पुलिस मृतक व्यक्ति का पता लगाने का आदेश दिया था जिस पर पुलिस ने मृतक व्यक्ति को कोर्ट में पेश किया था।

कई विधायक गए, कई दावेदार ढेर


: कांग्रेस प्रत्याशियों की पहली सूची में जहां कइयों के चेहरे पर मुस्कान आई है, वहीं कई विधायकों के टिकट कटे व कई दावेदार टिकट से वंचित रह गए। मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के कई बैल (संघर्ष के साथी) भी टिकट से महरूम हुए। उपमुख्यमंत्री रहे पंचकूला के विधायक चंद्रमोहन फिजा से मोहब्बत के चलते टिकट नहीं पा सके। इसी प्रकार मुख्य संसदीय सचिव रमेश कौशिक की भी कांग्रेस ने राई विधानसभा क्षेत्र से छुट्टी कर दी। ब्राह्मण कोटा पूरा करने के लिए कांग्रेस ने प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष कुलदीप शर्मा को साथ लगती गन्नौर सीट से प्रत्याशी बनाया है पर कुलदीप को टिकट देने से इसी सीट के दो दावेदार सीआईडी के एडीजीपी की पत्नी पूनम राठी और सोनीपत के सांसद जितेंद्र मलिक के भाई हरिंद्र मलिक टिकट से वंचित रहे। हरियाणा विधानसभा के डिप्टी स्पीकर आजाद मुहम्मद को भी पार्टी ने टिकट नहीं दिया। इनकी सीट फिरोजपुर झिरका सीट से पार्टी ने मामन खान को प्रत्याशी बनाया है। समालखा से विधायक भरत सिंह छोक्कर का टिकट काटकर इनके स्थान पर युवा कांग्रेस के प्रदेश प्रधान संजय छोक्कर को प्रत्याशी बनाया है। नीलोखेड़ी सीट आरक्षित हो गई सो यहां से निवर्तमान विधायक जय सिंह राणा घरौंडा से टिकट चाहते थे पर पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया। विधायक छत्तरपाल सिंह का क्षेत्र घिराय समाप्त हो गया वे बरवाला से टिकट चाहते थे। बरवाला से निवर्तमान विधायक रणधीर सिंह धारा हैं। पर पार्टी ने छत्तरपाल या रणधीर सिंह किसी को भी बरवाला से टिकट नहीं दिया। यह दीगर बात है कि रणधीर के भाई पूर्व सांसद जय प्रकाश को साथ लगती आदमपुर सीट दे दी गई और छतरपाल अभी हांसी या नलवा सीट पर नजर गढ़ाए हैं। तकनीकी शिक्षा मंत्री व फरीदाबाद के विधायक एसी चौधरी का अब नई बनी बड़खल पर दावा था। पर पार्टी ने वहां मेवला महाराज पुर के विधायक महेंद्र प्रताप सिंह को टिकट दे दिया है। अभी चौधरी को फरीदाबाद एनआईटी सीट से आशा है। गौरतलब है कि एसी चौधरी ने लोकसभा चुनाव के वक्त पार्टी से बगावत के सुर अपना लिए थे। उन्होंने फरीदाबाद से टिकट ना मिलने पर नाराज होकर कांग्रेस आला कमान सोनिया गांधी को अपना इस्तीफा तक भेज दिया था। कैथल से पार्टी ने शमशेर सिंह सुरजेवाला का टिकट काटा पर उनके साहबजादे बिजली मंत्री रणदीप सिंह सुरजेवाला को कैथल टिकट दे दिया है। गीता भुक्कल को झज्जर से पार्टी प्रत्याशी बनाने के कारण यहां के विधायक हरीराम बाल्मिकी को टिकट नहीं मिल पाया है। अटेली के निर्दलीय विधायक नरेश यादव का हरियाणा की कांग्रेस सरकार को समर्थन मिला हुआ था। यादव को उम्मीद थी कि अटेली से कांग्रेस इस बार उन्हें प्रत्याशी बनाएगी। पर पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया। नरेश यादव ने अटेली से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ने का फैसला कर लिया है। इसी तर्ज पर नूंह के निर्दलीय विधायक हबीबुर रहमान भी पांच साल सरकार के साथ रहने के कारण नूंह सीट पर कांग्रेस की टिकट का दावा कर रहे थे। निवर्तमान विधायकों के इलावा की दिग्गज दावेदार भी टिकट से महरूम रहे हैं। बसपा छोड़कर कांग्रेस में आए देवराज दीवान को कांग्रेस ने सोनीपत से प्रत्याशी नहीं बनाया। पूर्व मंत्री राजकुमार वाल्मिकी नीलोखेड़ी और कान्फैड के चेयरमैन बजरंग दास गर्ग पंचकूला सीट पर ताल ठोंक रहे थे। मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार प्रो.बीरेंद्र सिंह और पूर्व एचसीएस अधिकारी जेपीएस सांगवान बरौदा सीट से टिकट के दावेदार थे। पार्टी ने नई बनी सीट कालका से मजबूत दावेदार ओम प्रकाश गुज्जर को भी टिकट नहीं दिया। बादशाह पुर में प्रदीप जैलदार को पार्टी ने टिकट नहीं दिया। सिरसा में उद्योग मंत्री लक्ष्मण दास को टिकट देने से जिला कांग्रेस प्रधान होशियारी लाल शर्मा और प्रदेश संगठन सचिव नवीन केडिया नाराज चल रहे हैं। फतेहाबाद सीट पर दावा कर रहे प्रहलाद सिंह गिल्लाखेड़ा ने कांग्रेस से बगावत करके निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला कर लिया है। गिल्ला खेड़ा हविपा से कांग्रेस में आए थे और उन्हें किरण चौधरी पर भरोसा था। पृथला सीट पर पलवल क्षेत्र के रघुबीर सिंह तेवतिया को टिकट देने से स्थानीय दावेदार नाराज हैं। इनमें सतबीर डागर और हेम डागर हैं।

मौजूदा विधायकों व नए चेहरों पर भरोसा


( डॉ सुखपाल सावंत खेडा)-: कांग्रेस ने प्रत्याशी घोषित करने में मौजूदा विधायकों और नए चेहरों पर विश्वास जताया है। आज बुधवार को घोषित किए गए 68 विधायकों में से 45 निवर्तमान विधायक और 15 एकदम नए चेहरे हैं जो पहली बार विधानसभा चुनाव के मैदान में हैं। प्रमुख उम्मीदवारों में मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा गढ़ी सांपला किल्लोई, वित्तमंत्री बीरेंद्र सिंह उचाना, खेल मंत्री किरण चौधरी तोशाम, सिंचाई मंत्री कैप्टन अजय सिंह यादव रेवाड़ी, विधानसभा अध्यक्ष रघुबीर सिंह कादियान बेरी, शिक्षामंत्री मांगे राम गुप्ता जींद, कृषिमंत्री हरमोहिंदर सिंह चट्ठा पेहवा, प्रदेश कांग्रेस प्रधान फूलचंद मुलाना मुलाना और प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी प्रधान कुलदीप शर्मा गन्नौर से चुनाव लड़ रहे हैं। वैसे पहली सूची में 8 मंत्री 5 संसदीय सचिव और 5 पूर्व सांसद हैं। 45 निवर्तमान विधायकों में दो निर्दलीय विधायक हैं। पहली सूची में कांग्रेस ने 21 जाट, 3 राजपूत, ब्राह्मण 6, वैश्य 4, पंजाबी 7, कांबोज 1, गुज्जर 3, 11 दलित, अहीर 4, सैणी 1, कुम्हार 1 और 1 बिश्नोई हैं। अभी कांग्रेस ने तीन मुस्लिम और दो सिखों को टिकट दिया है। मुस्लिम प्रत्याशियों में पूर्व मंत्री खुर्शीद अहमद के बेटे आफताब अहमद, मामन खान और अख्तर हुसैन है जबकि सिख में हरमोहिंद्र सिंह चट्ठा और परमजीत सिंह हैं। चट्ठा सरकार में कृषि मंत्री हैं और परमजीत सिंह संसदीय मंत्री थे। पार्टी ने अब तक दस महिलाओं को प्रत्याशी बनाया है। इनमें किरण चौधरी, सावित्री जिंदल, मीना मंडल, कैलाशो सैनी, गीता भुक्कल, शारदा राठौड़, सुमिता सिंह, अनिता यादव, प्रसन्नी देवी और शकुंतला खटक हैं। नई हदबंदी में जिन विधायकों की सीटें इधर उधर हो गई थी उनमें से कुछ को कांग्रेस ने एडजेस्ट भी किया है। बिजली मंत्री रणदीप सुरजेवाला की नरवाना सीट आरक्षित हो गई थी, सो उन्हें कैथल से टिकट दी गई है। मीना मंडल की असंध सामान्य सीट हो गई तो मीना को नीलोखेड़ी से चुनाव मैदान में उतार दिया। गीता भुक्कल की कलायत सामान्य सीट हो गई तो उन्हें झज्जर से प्रत्याशी बना दिया गया। सतविंद्र सिंह राणा की राजौंद सीट समाप्त हो गई तो उन्हें कालका से प्रत्याशी बना दिया गया। कुछ विधायकों या दावेदारों का टिकट भी इधर-उधर किया गया है। कलायत सामान्य होने के बाद गीता भुक्कल नरवाना सीट चाहती थी पर उन्हें झज्जर भेजा है, अंबाला कैंट के निर्वतमान विधायक डीके बंसल को पंचकूला से टिकट दिया है, साल्हावास सीट समाप्त होने के बाद कोसली पर दावा कर रही निर्वतमान विधायक अनिता यादव को अटेली भेज दिया गया, श्रीकृष्ण हुड्डा को किल्लोई से बरौदा भेज दिया गया है। युवा कांग्रेस के खाते से चार को टिकट दिया गया है। इनमें समालखा से संजय छोक्कर, शाहबाद से अनिल ढंढौरी, रादौर से सुरेश ढांडा और घरौंडा से वीरेंद्र राठौड़ हैं। संजय छोक्कर प्रदेश कांग्रेस के प्रधान, वीरेंद्र राठौड़ युवक कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव, सुरेश ढांडा जिला यमुनानगर यूथ कांग्रेस ग्रामीण के अध्यक्ष और ढंढौरी प्रदेश सचिव हैं। दिनेश कौशिक और नरेश शर्मा उन खुशकिस्मत निर्दलीय विधायकों में से हैं जिन्होंने हरियाणा की कांग्रेस सरकार को समर्थन दिया था और अब टिकट मिल गया। कौशिक को पुंडरी जबकि नरेश शर्मा बादली से टिकट दिया है। दोनों अपनी-अपनी सीटों पर निवर्तमान विधायक हैं। वैसे कांग्रेस को 11 निर्दलीय विधायकों ने समर्थन दिया था।

बुधवार, 23 सितंबर 2009

अपने ही घरेलु मैदान में, उतरी पिता -पुत्र की जोड़ी,


( डॉ सुखपाल सावंत खेडा)-

प्रदेश में सत्ता संग्राम की बिसात बिछ चुकी है और अभी से शह-मात का खेल शुरू हो गया है। इस खेल में उतरे दलों के प्यादे अपनी हर कुर्बानी देने को तैयार हैं। लेकिन जब बड़ मोहरे मैदान में आ जाएं तो इनकी चाहत भी अपने घर की सुरक्षा की भावना से ऊपर उठने की होती है ताकि जोश बरकरार रहे। सिरसा जिला के अंतर्गत आने वाले पांचों विधानसभा हलकों में ऐसा कुछ देखने में आ भी रहा है। खासकर इंडियन नेशनल लोकदल के संदर्भ में यह नजारा अब आम हो गया है। गृह जिला के दो विधानसभा हलकों से पार्टी के दो हैवीवेट व पिता-पुत्र के चुनावी मैदान में उतरने से महज राजनीतिक पंडितों का गणित ही नहीं गड़बड़ाया है अपितु इनेलो कार्यकर्ताओं में नई स्फूर्ति का संचार भी हुआ है। दरअसल दोनों ही विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी का दबदबा शुरू से ही रहा है। अगर डबवाली विधानसभा क्षेत्र की अतीत के पन्नों को खंगालें तो वर्ष 1987 में तत्कालीन लोकदल की टिकट पर चुनाव लड़े मनीराम ने जीत दर्ज करते हुए 64.72 फीसदी मत प्राप्त कर विपक्षी प्रत्याशी का हौसला ही पस्त कर दिया था। वर्ष 1996 में भी मनीराम ने 35.81 फीसदी मत प्राप्त कर समता पार्टी के टिकट पर जीत दर्ज की थी। वर्ष 2000 में एक बार फिर जब डा. सीताराम इंडियन नेशनल लोकदल के प्रत्याशी के रूप में इस विधानसभा क्षेत्र से चुनावी मैदान में उतरे तो उन्होंने पार्टी की मत प्रतिशतता में भारी इजाफा करते हुए 62.2 फीसदी मत प्राप्त किए। उनका यह दबदबा वर्ष 2005 में भी बरकरार रहा और इस वर्ष भी उन्होंने भारी मतों से जीत दर्ज की। जहां तक ऐलनाबाद विधानसभा क्षेत्र में इंडियन नेशनल लोकदल के वर्चस्व की बात है तो उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि लोकदल के समय भी पार्टी प्रत्याशी भागीराम ने वर्ष 1982 में 52.27 फीसदी तो 1987 में 58.74 फीसदी मत प्राप्त कर अपना परचम लहराया। भागीराम ने वर्ष 2000 में भी इनेलो प्रत्याशी के रूप में 54 फीसदी से अधिक मत प्राप्त कर इंडियन नेशनल लोकदल के मजबूत जनाधार को दर्शाया। उनकी जीत के सिलसिले को वर्ष 2005 में भी डा. सुशील इंदौरा ने बरकरार रखा और इस सीट पर इनेलो के वर्चस्व को साबित किया। इतनी सशक्त पृष्ठभूमि के साथ ऐलनाबाद व डबवाली विधानसभा क्षेत्र से पार्टी सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला व अजय सिंह चौटाला के उम्मीदवार बनने से राजनीतिक गलियारे में पार्टी द्वारा दिए गए संदेश की चर्चा बनी हुई है। राजनीतिक पंडितों का कहना है कि इससे न केवल ऐलनाबाद व डबवाली सीट जीत के लिहाज से सुरक्षित होने की संभावना बढ़ी है बल्कि रानियां, कालांवाली व सिरसा के उम्मीदवारों के आत्मबल में भी वृद्धि हुई है। इनेलो के सिरसा प्रत्याशी पदम चंद जैन, रानियां के कृष्ण कंबोज भी इस सच्चाई से इनकार नहीं करते। उनका कहना है कि नि:संदेह ओमप्रकाश चौटाला व अजय सिंह चौटाला के मैदान में उतरने की घोषणा ने प्रत्याशियों व कार्यकर्ताओं में नई जान फूंकने का काम किया है।

सिरसा में नए चेहरे ज्यादा सिरसा


डबवाली (सुखपाल सावंत खेडा)- सत्ता का संग्राम अब रोमांचक दौर में प्रवेश करने लगा है। कांग्रेस ने अभी प्रत्याशियों के नामों की घोषणा नहीं की है। जिन पार्टियों ने उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की है, उनमें से अधिकतर नए चेहरे हैं। इनेलो ने रानियां से पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ने वाले कृष्ण कंबोज को मैदान में उतारा है। हरियाणा जनहित कांग्रेस ने राजनीतिक बिसात के धुरंधर व पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला के समक्ष पहली बार चुनाव लड़ रहे देवीलाल को मैदान में उतारा है। यह अलग बात है कि देवीलाल क्षेत्रवासियों के लिए कोई अनजाना नाम नहीं है। वह दड़बा के सरपंच रहे हैं तथा ग्रामीण क्षेत्र में उनकी अच्छी पैठ रही है। हजकां से ही सिरसा में वीरभान मेहता को उतारा गया है। मेहता भी पहली बार विधानसभा के लिए चुनाव लड़ रहे हैं। मेहता काफी समय से राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं। वह कांग्रेस से जुड़े रहे और जिला स्तर से लेकर प्रांत स्तर तक की जिम्मदारियों का भी वहन किया। 2009 लोकसभा चुनाव से ऐन वक्त पहले उन्होंने हरियाणा जनहित कांग्रेस का दामन थाम लिया। भाजपा ने भी रानियां से पार्टी के जिला महासचिव शीशपाल कंबोज को मैदान में उतारा है। कंबोज अपने पैतृक गांव फिरोजाबाद से सरपंच का चुनाव लड़ चुके हैं। सिरसा से माकपा ने भी नए चेहरे पर दांव खेला है। पार्टी ने यहां से बलवीर कौर गांधी को मैदान में उतारा है। एडवोकेट गांधी जनवादी महिला समिति से भी सक्रिय रूप से जुड़ी रही हैं।

करोड़ों की मालकिन हैं किरण चौधरी


तोशाम( डॉ सुखपाल सावंत खेडा)- : कांग्रेस प्रत्याशी किरण चौधरी ने मंगलवार को शपथ पत्र में बताया कि उनके पास बीमा व अन्य बचत राशि के रूप में दो करोड़ 22 लाख 66 हजार की राशि है। शेयर के रूप में 5 लाख की संपत्ति है। आभूषण व अन्य उत्पादों के रूप में करीबन दो करोड़ 20 लाख 61 हजार की संपत्ति की वे मालकिन हैं। नकद राशि के रूप में उनके पास मात्र 16 हजार है। बैंक व अन्य स्रोतों में जमा राशि के रूप में स्वयं के नाम 1 करोड़ 12 लाख 83 हजार तथा पति सुरेंद्र सिंह के साथ सांझे खाते में उनके पास 29 लाख 99 हजार की राशि है। उनके नाम 17 लाख की फोर्ड इंडेवर व 9 लाख की हुंडई ट्रेशन गाड़ी है। महेंद्रगढ़ जिले के माधोगढ़ में 41 कनाल तथा 13 मरले जमीन है, जिसकी कीमत 32 लाख 44 हजार है। भिवानी जिले के चांग गांव में 167 कनाल 10 मरले, भिवानी में पांच एकड़ तथा बापोड़ा में 19 कनाल एक मरला भूमि सुरेंद्र सिंह के साथ संयुक्त रूप से उनके नाम है। अचल संपत्ति में से अपनी पुत्री श्रुति चौधरी के साथ आधा हिस्सा है।

अजय चौटाला से अधिक धनवान उनकी पत्नी


डबवाली,( डॉ सुखपाल सावंत खेडा)- : इनेलो के डबवाली विधानसभा हलका से उम्मीदवार अजय सिंह चौटाला करीब 30 करोड़ रुपये की चल व अचल संपत्ति के मालिक हैं। साथ ही वह लगभग 42 लाख रुपये के बैंक कर्जदार भी हैं। संपत्ति के मामले में अजय से अधिक धनवान उनकी पत्नी हैं। सियासी परिवार के वंशज अजय सिंह चौटाला ने नामांकन भरते हुए अपने शपथपत्र में बताया कि उनके पास 400 ग्राम सोने के जेवरात, पांच किलो चांदी व अन्य हीरे जवाहरात हैं। जबकि उनकी पत्नी नैना सिंह के पास 800 ग्राम सोना व साढे़ आठ किलो चांदी है। उनके परिवार के अन्य सदस्यों के पास 10 किलो चांदी के बर्तन और पांच सौ ग्राम सोना है। उनके पास 2008 माडल की एम क्लास मर्सिडिज बेंज, एक जेन, एक टै्रक्टर व डिस्पोजल की एक महिंद्रा जीप है। उनकी पत्नी नैना सिंह केवल एक ट्रैक्टर के मालिक हैं। अजय के पास इस समय 3 लाख 25 हजार रुपये की नकदी है और 37 लाख 35148 रुपये विभिन्न बैंकों में जमा हैं। उनके पास विभिन्न कंपनियों के 90 हजार रुपये के शेयर भी हैं वहीं उनका व उनकी पत्नी नैना सिंह का 20-20 लाख का बीमा भी है। नैना सिंह के पास 7 लाख 75 हजार रुपये की नकदी के अलावा विभिन्न बैंकों में 7 लाख 60 हजार 185 रुपये हैं तथा उनके परिवार के अन्य सदस्यों के पास 6 लाख 55 हजार रुपये की नकदी तथा बैंकों में 17 लाख 49 हजार रुपये जमा हैं। नैना सिंह के पास सिरसा जिले के गांव नटार में 85 लाख रुपये कीमत की 94 कनाल भूमि है। गैरखेती योग्य भूमि में उनके पास फरीदाबाद में लगभग दो करोड़ तीन लाख रुपये की 3 कनाल 19 मरले के प्लाट व सिरसा के वैदवाला गांव में 11 लाख 10 हजार रुपये की कीमत का 14 मरले रकबा, भंभूर व शेरगढ़ में क्रमश: 37 कनाल 8 मरले व 13 कनाल 10 मरले के पलंथ है। अजय के पास सिरसा की अनाज मंडी में 90 लाख की दुकान, सिरसा में ही बरनाला रोड 50 लाख का 8 कनाल का एक रिहायशी मकान, गुड़गांव में डीएलफ में करीब 2 करोड़ 22 लाख रुपये का रिहायशी मकान, 1 करोड़ 25 लाख रुपये का खैरपुर रोड पर मकान, गुड़गांव के सेक्टर-28 में 1 करोड़ 50 लाख के मूल्य का फ्लैट है। उनकी पत्नी के पास दिल्ली का दिल कहे जाने करोल बाग में हरदयाल सिंह मार्ग पर 2 करोड़ 50 लाख का मकान है। हिसार में 80 लाख की कोठी है।

करोड़पति, कर्जदार है अजय सिंह चौटाला



डबवाली (सुखपाल सावंत खेडा) डबवाली विधानसभा क्षेत्र में मंगलवार से चुनाव लडऩे के इच्छुक आजाद और पार्टियों के प्रत्याशियों के नामांकन पत्र दाखिल करने के साथ ही राजनीतिक हलचल तेज हो गई है और सुस्त चला आ रहा चुनावी मैदान अचानक गर्माने लगा है। हल्का विधानसभा चुनाव के लिए इनेलो प्रत्याशी के रूप में अजय सिंह चौटाला ने अपना नामांकन पत्र सुबह 11.11 पर चुनाव अधिकारी तथा उपमण्डलाधीश सुभाष चन्द्र गाबा के समक्ष प्रस्तुत किया। हालांकि इनेलो ने नामांकन पत्र दाखिल करने के लिए 24 सितम्बर की तिथि घोषित की थी। बताया जाता है कि किसी ज्योतिषी के कहने पर इस तिथि को बदल कर अब 22 सितम्बर को नामांकन दाखिल किया गया। जिसके समय और तिथि का अंक जोड़ चार बनता है। केवल यहीं नहीं बल्कि जिस दिन चुनाव होने हैं उस दिन भी 13 अक्तूबर का जोड़ चार बनता है और जिस दिन 22 अक्तूबर को वोटों के परिणाम आने हैं उनका भी जोड़ चार ही बनता है। अजय सिंह चौटाला ने अपने नामांकन पत्र के साथ जो शपथ पत्र दाखिल किया है उसमें दी गई जानकारी में कहा गया है उस पर सीबीआई की अदालत में धारा 120बी, 420, 467, 468, 471 आईपीसी और 13 (1), 13 (2) पीसी के तहत केस विचारधीन है। इसके अतिरिक्त नकदी के मामले में अजय सिंह के पास 3 लाख 25 हजार और उसकी पत्नी नैना सिंह के पास 7 लाख 75 हजार तथा संयुक्त परिवार में 6 लाख 55 हजार रूपये नकद हैं। जबकि उसके खुद के 37 लाख 35 हजार 148 रूपये 60 पैसे तथा उसकी पत्नी के 7 लाख 60 हजार 185 रूपये 54 रूपये और संयुक्त परिवार के 17 लाख 49 हजार 128 रूपये 46 पैसे बैंकों और कम्पनियों में जमा हैं। जबकि बॉण्डस, विभूतियां और शेयर आदि में 90 हजार रूपये और उनकी पत्नी के 6 लाख 30 हजार रूपये लगे हुए हैं। अजय सिंह के पास व्हीकलों में से एम-क्लॉस मरसीडेस बेंज मॉडल-08, महिन्द्रा जीप मिल्ट्री डिसपोजल मॉडल-1998, फार्म ट्रेक्टर मॉडल-2001 जेन कार मॉडल-2001 के अतिरिक्त, पांच किलोग्राम चांदी, 400 ग्राम सोने के जेवरात इत्यादि के साथ कुल चल सम्पत्ति 2 करोड़ 74 लाख 3 हजार 545 रूपये 16 पैसे बनती है। जबकि उसकी पत्नी के पास चल सम्पत्ति 1 करोड़ 36 लाख 8 हजार 651 रूपये 34 पैसे और संयुक्त परिवार में 2 करोड़ 78 हजार 137 रूपये 45 पैसे चल सम्पत्ति है। अचल सम्पत्ति में जिसमें नॉन एग्रीकल्चर लैंड, व्यवसायिक और रिहायशी भवन, घर और अपार्टमेंटस आदि मिलाकर 851 लाख 69 हजार रूपये की सम्पत्ति बनती है। जोकि फरीदाबाद, जिला सिरसा, गुडग़ांव आदि में हैं। इसी प्रकार उनकी पत्नी के पास 670 लाख रूपये की अचल सम्पत्ति है। संयुक्त परिवार में उनके पास 938 लाख 16 हजार की अचल सम्पत्ति है। जबकि अजय सिंह पर भारतीय स्टेट बैंक, सिरसा का 41 लाख 95 हजार 149 रूपये का ऋण है। अजय सिंह चौटाला के पास कुल चल और अचल सम्पत्ति 20 करोड़ 63 लाख 88 हजार 545 रूपये की बनती है। अजय सिंह चौटाला ने शिक्षा में एलएलबी कर रखी है और राज्य सभा के सदस्य भी हैं। इधर आजाद प्रत्याशी के रूप में नामांकन पत्र दाखिल करने वाले जगदेव सिंह मटदादू ने अपने ब्यौरे में स्वयं को एक करोड़ 98 लाख 60 हजार तथा 25 लाख 60 हजार की अचल और चल सम्पत्ति का मालिक बताया है और उस पर 50 हजार रूपये का कर्ज है।

मंगलवार, 22 सितंबर 2009

युवाओं को लुभाएंगे सभी दल


(डॉ सुखपाल सावंत खेडा)- : हरियाणा विधानसभा के नतीजों में इस दफा युवा वर्ग समीकरण बदलने में खास भूमिका निभाएंगे। इसलिए हर राजनीतिक दल युवा वर्ग को लुभाएगा। राज्य में 25 साल से कम आयु वर्ग वाले करीब 15 लाख मतदाता हैं और युवा वर्ग हरियाणा में बढ़-चढ़ कर मतदान करता रहा है। कुल वोटरों में युवाओं की संख्या 12 फीसदी है। इंडियन नेशनल लोकदल ने युवा वर्ग को आकर्षित करने के लिए खास रणनीति बनाई है। इसके लिए जहां इनेलो बेरोजगारी को मुद्दा बनाएगा वहीं पर यह प्रचार करेगा कि सरकारी नौकरियां सिर्फ एक विशेष जिले में ही दी गई। इसके इलावा इनेलो छंटनी और युवाओं को 10 लाख नौकरियां देने के कांग्रेस सरकार के वादे को मुद्दा बनाकर युवा वर्ग में जा रहा है। युवाओं को लुभाने के लिए इनेलो ने चुनाव घोषणापत्र में बेरोजगारों को तीन हजार रुपये महीना बेरोजगारी भत्ता देने का भी वादा किया है। इसके लिए कालेज छात्राओं को स्कूटी देने का वायदा किया है। हरियाणा में छात्राओं के लिए ऐसा वायदा पहली बार किसी राजनीतिक दल ने किया है। हरियाणा सरकार ने गरीब छात्राओं को साइकिल दी थी। कांग्रेस, हजकां, भाजपा ने अभी अपने घोषणा पत्र जारी नहीं किए पर सूत्र बताते हैं कि यह सभी दल भी युवाओं को लुभाने के लिए खास घोषणाएं कर सकते हैं। राजनीतिक दलों का मानना है कि चुनावी नतीजों में युवा वर्ग की खास भूमिका होगी। राज्य में 25 साल से कम आयु वर्ग वाले करीब 15 लाख मतदाता है और इन पर ही सभी दलों की नजर टिकी है। कांग्रेस में युवाओं को टिकट देने का मुद्दा भी जोर-शोर से उठ रहा है। सभी राजनीतिक दलों की नजर इस बार प्रदेश के युवा वर्ग पर है। सभी दलों का मानना है कि लोकसभा चुनावों में युवा वर्ग की वोट चुनाव नतीजों के समीकरण बदल सकती हैं। 15 लाख मतदाता यह पहली बार वोट के अधिकार का प्रयोग करेंगे। राजनीति के जानकार भी युवा वर्ग को रिझाने में जुटे हैं ताकि युवा वर्ग को अपनी ओर कर चुनाव के नतीजों को बदला जा सके। प्रदेश के कुल मतदाताओं में से युवाओं की भागीदारी 12 फीसदी से अधिक है। अब तक युवा मतदाताओं का मतदान प्रतिशत भी हमेशा 90 फीसदी रहा है। अब युवा पहले की अपेक्षा ज्यादा चुनावों में दिलचस्पी लेते हैं। युवाओं को रिझाने के लिए जहां इनेलो ने घोषणाओं का पिटारा खोल दिया है वहीं कांग्रेस, भाजपा, बसपा व हजपां भी घोषणापत्र में युवाओं के लिए बहुत कुछ करने के वादे करने का दावा कर रही हैं। युवाओं को काबू में करने के लिए राजनीतिक दलों ने कार्यकर्ताओं को भी युवा वर्ग को रिझाने के लिए प्रेरित कर दिया है।

दादू के कार्यक्रम से चांदपुरा में तनाव


सिरसा( डॉ सुखपाल सावंत खेडा)-
: गांव चांदपुरा में सिख नेता बलजीत सिंह दादू के संत समागम से पुलिस ने गांव को पुलिस छावनी में तबदील कर दिया है। डेरा प्रेमी और सिख संगत के बीच किसी अनहोनी को रोकने के लिए जिला प्रशासन ने गांव में पुलिस की तीन बटालियन तैनात किया है। गांव में किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से निपटने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोलों के अलावा अन्य सभी प्रकार के कड़े इंतजाम किए हैं। गांव चांदपुरा के गुरुद्वारे में आयोजित संत समागम में सोमवार को सिख नेता बलजीत सिंह दादू पहंुचना था। इस कारण चांदपुरा में डेरा सिख विवाद होने जैसी आशंका बनी हुई है। प्रशासन गांव में सुरक्षा व्यवस्था को चाक चौबंद करने का प्रबंध कर रहा है। गांव में जगह जगह पुलिस की तैनाती की गई है। गांव में सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने के लिए टोहाना के पुलिस प्रभारी हरीश दत्ता ने गांव का दौरा किया। इस बारे में उन्होंने पुलिस कर्मचारियों को दिशा निर्देश भी जारी किए। उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों भी गांव में गुरुद्वारे संत समागम में सिख नेता बलजीत सिंह दादू के पहुंचने से स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी। इसी प्रकार डेरा प्रेमियों द्वारा नामचर्चा के आयोजन पर भी डेरा सच्चा सौदा के प्रेमियों व सिखों के बीच पिछले दिनों काफी समय तक गांव में तनाव बना रहा।

अजय चौटाला डबवाली से होंगे इनेलो प्रत्याशी



डबवाली ( डॉ सुखपाल सावंत खेडा)- : बेशक इनेलो के सदर ओमप्रकाश चौटाला ने कहा था कि उनके अलावा उनके परिवार से कोई अन्य सदस्य चुनाव नहीं लड़ेगा पर उनके बेटे अजय सिंह चौटाला मंडी डबवाली से चुनाव लड़ेंगे। मंडी डबवाली चौटाला परिवार की गृह सीट है पर यह सीट लंबे समय से आरक्षित थी। अब नई हदबंदी में यह सामान्य सीट है। इनेलो नेता अभय सिंह चौटाला ने आज सोमवार को सात और प्रत्याशी घोषित कर दिए। इससे पहले इनेलो दो किश्तों में 74 प्रत्याशियों की सूची घोषित कर चुकी है। इस प्रकार पार्टी 81 प्रत्याशी घोषित कर चुकी और केवल 9 प्रत्याशी घोषित करना बकाया है। पूर्व उप प्रधानमंत्री देवीलाल के पोते अजय सिंह चौटाला का जन्म पंजाब के फिरोजपुर जिला के पंचकोसी गांव में हुआ। अजय ने जयपुर विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई की। 1980 के दशक में अजय सिंह चौटाला राजनीति में सरगर्म हुए। अजय सिंह चौटाला दो बार राजस्थान में भी विधायक बने हैं। पहली बार वे 1989 मे दाता रामगढ़ विधानसभा और दूसरी बार 1993 में नोहर विधानसभा सीट से विधायक चुने गए। इसके बाद अजय सिंह चौटाला 1999 में भिवानी संसदीय सीट से सांसद चुने गए। पर साल 2004 के लोकसभा चुनाव में हार के बाद अजय सिंह चौटाला राज्यसभा के सांसद चुने गए। अजय सिंह चौटाला ने एशिया, यूरोप, आस्ट्रेलिया, अमेरिका, जापान, चीन आदि विभिन्न देशों की यात्राएं की हैं।

Ajay Chautala will contest from Dabwali



Dabwali, Sep 21(Dr sukhpal) Indian National Lok Dal (INLD) general secretary Ajay Chautala will contest from Dabwali constituency in Sirsa district in the forthcoming October assembly polls.

INLD political affairs committee member Abhey Singh Chautala announced this while declaring the party’s third list, comprising seven candidates, here Monday evening.

INLD, which is the main opposition party to the ruling Congress in Haryana, had earlier declared its candidates for 74 seats out of 90 assembly seats in the state.

The Bhupinder Singh Hooda-led Congress government had sought early polls and recommended the assembly’s dissolution seven months ahead of its term was to end. The Congress, led in 59 assembly segments of the 90-member assembly in the general elections this May, winning nine of ten Lok Sabha seats from the state.

Former chief minister and father of Ajay and Abhey, Om Parkash Chautala is contesting from the Uchana Kalan and Elenabad seats in Jind and Sirsa districts respectively.

Ajay Chautala is former member of parliament (MP) from Bhiwani seat in Haryana. He lost this seat in May 2009 general elections to Shruti Choudhary, the granddaughter of former chief minister Bansi Lal.

Assembly elections in Haryana will be held Oct 13 and the votes will be counted Oct 22.

सोमवार, 21 सितंबर 2009

उलझन बनेगी अलग एसजीपीसी


( डॉ सुखपाल सावंत खेडा)- : सिखों के लिए हरियाणा में अलग गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का मसला चुनाव बाद नए गुल खिलाएगा। झिंडा गुट की तरफ से कुरुक्षेत्र में किए गए शक्ति प्रदर्शन के बाद यह बात आम हो चली है कि नई सरकार के गठन के बाद यह मुद्दा फिर से रफ्तार पकड़ सकता है। एसजीपीसी और पंजाब अलग कमेटी के मसले पर पहले ही अपना विरोध जता चुके हैं। इसलिए तय माना जा रहा है कि जो भी सरकार बनी उसके लिए दोनों तरफ से मुश्किल पैदा होंगी। सिखों को अलग कमेटी देने की कोशिश की गई तो पंजाब और एसजीपीसी से टकराव करना पड़ेगा और नहीं की तो हरियाणा के सिख नेताओं के उग्र तेवरों का सामना करना पड़ सकता है। हरियाणा के गुरुद्वारों के रखरखाव के लिए अलग कमेटी बनाने का जिक्र 2005 में कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में किया था। अन्य पार्टियों ने भी इस मसले पर अपने अपने तरह से वायदे किए थे। सिखों ने इस वायदे को सिर आंखों पर लिया और कांग्रेस को चुनाव में समर्थन दिया। हुड्डा सरकार ने कामकाज संभालने के तुरंत बाद चट्ठा कमेटी बनाकर इस ओर कदम भी बढ़ाया लेकिन उसके बाद काम ज्यादा तेज रफ्तार से नहीं हो सका। लोकसभा चुनाव से ऐन पहले कमेटी ने अपनी रिपोर्ट दी और अलग कमेटी की मांग को काफी हद तक जायज भी ठहराया परंतु उसके बाद से ही नित नए विवाद खड़े होने शुरू हो गए। पहले सिख नेता शुकराना (धन्यवादी) यात्रा को लेकर आपस में उलझ गए। उसके बाद जगदीश झिंडा ने कुरुक्षेत्र में अपने तेवर तीखे किए। उन्हें अभी तक दिल्ली और अकाल तख्त के समक्ष जाकर सफाई देनी पड़ रही है। दूसरा गुट अभी तक शांत है। लेकिन जानकार कहते हैं कि यह विवाद थमने वाला नहीं लगता। उनका कहना है कि चुनाव बाद यह मसला जोर पकड़ेगा। उधर, मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा इसके लिए एक नवंबर 2009 की तारीख तय कर चुके हैं। उनका कहना है कि कई चीजों को ध्यान में रखकर यह किया गया। विरोधी हालांकि इस मसले पर कह रहे हैं कि सरकार चुनाव में राजनीति खेल रही है। सिखों को फुसलाने के लिए एक नवंबर की तारीख रखी गई है। इस संदर्भ में इनेलो का कहना है कि अलग कमेटी सिखों का अपना अलग मसला है। वह मानते हैं कि राजनीतिक दलों को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।

चुनाव मैदान में उतरने को तैयार डेरा सच्चा सौदा

सिरसा( डॉ सुखपाल सावंत खेडा)-
डेरा सच्चा सौदा किसी दल का पिछलग्गू बनने के बजाए खुद राजनीतिक ताकत हासिल करना चाहता है। इसीलिए उसने हरियाणा विस चुनाव में कांग्रेस से गठजोड़ कर मैदान में उतरने की सोची और 30 सीटें मांगी। वहां से मना हो जाने पर डेरा की राजनीतिक विंग सोमवार को टोहना में बैठक करने जा रही है, जिसमें नई रणनीति तय की जाएगी। डेरा प्रेमी अगर सीधे राजनीति करते हैं तो प्रदेश में राजनीति समीकरण बदलना तय है। अभी तक डेरा समर्थक चुनाव में उतरने के बजाए किसी ना किसी दल को समर्थन देते रहे हैं, लेकिन इस बार संगत ने खुद मैदान में उतरने का फैसला किया और कांग्रेस से 30 सीटें मांगी। कांग्रेस ने आतंरिक कलह और टिकट को लेकर मची मारामारी के कारण संगत से गठजोड़ से इनकार कर दिया। 18 सितंबर से नामांकन शुरू हो चुका है पर कांग्रेस एक भी प्रत्याशी घोषित नहीं कर पाई है। इसी के मद्देनजर डेरे की राजनीतिक विंग ने सोमवार को बैठक बुलाई गई है। विंग के सदस्य चांदी राम ने बताया कि सरकार में उनके काम नहीं हो रहे। इसलिए साधु संगत खुद राजनीति में हिस्सेदारी मांग रही है। संगत समर्थक लंबे समय से कांग्रेस से जुड़े हैं पर उन्हें सत्ता में हिस्सेदारी नहीं मिली। इसलिए चुनाव लड़ने का फैसला किया गया है। उन्होंने कहा, बदले राजनीतिक हालात का जायजा लेने के लिए विंग बैठक करने जा रहा है। बेशक डेरा प्रमुख संत गुरमीत राम रहीम की ओर से कभी किसी दल के पक्ष में कोई फतवा जारी नहीं किया गया लेकिन संगत बीते एक दशक से पंजाब और हरियाणा की राजनीति में अपना असर दिखाती रही है। सभी दलों के नेता डेरा प्रमुख से आशीर्वाद लेने आते हैं।

गांव लोहगढ़ में एक नाबालिग से बलात्कार,


डबवाली ( डॉ सुखपाल सावंत खेडा)- गांव लोहगढ़ में एक नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार का मामला थाना सदर पुलिस के पास आया है। प्राप्त जानकारी अनुसार गांव लोहगढ़ निवासी श्रीचन्द ने अपने एक पड़ौसी के बेटे छिन्दा पुत्र प्रेम चन्द पर आरोप लगाया है कि उसने उसके घर में घुस कर उसकी 13 वर्षीय बेटी के साथ मुंह काला किया और उसकी चीख-पुकार सुन कर गांव के लोगों ने लड़की को लड़के की चंगुल से मुक्त करवाया। शिकायतकर्ता के अनुसार वे शनिवार को खेत में काम करने के लिए गये हुए थे और घर पर उसकी 13 वर्षीय लड़की तथा पांच वर्षीय बेटा राजेन्द्र था। दोपहर को करीब 2 बजे उनके पड़ौसी प्रेम चन्द का लड़का छिन्दा घर में घुसा और बर्तन साफ कर रही उसकी बेटी के मुंह पर हाथ लगाकर उसे अपने घर पर ले गया और वहां जाकर उससे मुंह काला किया। पुलिस सूत्रों के अनुसार थाना सदर पुलिस ने लड़की के ब्यान पर आरोपी के खिलाफ धारा 376 आईपीसी के तहत केस दर्ज करके आगामी कार्यवाही शुरू कर दी है।

बैनर व होर्डिग लगाने का स्थान निर्धारित



ओढा,( डॉ सुखपाल सावंत खेडा)- : विधानसभा चुनावों में सभी पाíटयों को आदर्श आचार संहिता के पालन करने के सख्त निर्देश दिए गए है जिसके तहत सभी गावों मे होर्डिंग लगाने के लिए विशेष स्थानों को निर्धारित किया है। इस बारे में खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी राम सिंह ने सभी ग्राम सचिवों को आदेश जारी किया है कि चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित स्थानों के अतिरिक्त कहीं भी अन्य जगहों पर प्रचार सम्बंधी बैनर व होर्डिग न लगाने दिया जाए। इस आदेश में विभिन्न गावों में जगहों के बारे में बताया गया है कि गाव हस्सु, असीर, नारग, तिगड़ी, चट्ठा, खोखर, घुकावाली, माखा, दादू, धर्मपूरा, सिंघपूरा, तारूआना, तिलोकेवाला, खतरावा, तख्तमल, केवल, चकेरिया, मिठड़ी व मलिकपूरा में बस स्टेण्ड के पास तथा देसु मलकाना, चौरमार में गुरुद्वारा के पास और ओढा में कालावाली रोड कैंचियों पर, जगमालवाली व पिपली में कालावाली-डबवाली रोड पर, टप्पी में सिरसा डबवाली हाइवे पर होर्डिग लगाने की जगह निर्धारित की है। इन निर्धारित जगहों के अलावा अन्य स्थलों पर बोर्ड लगाना आचार संहिता का उल्लंघन माना जाएगा।

इनेवा-पिकअप टक्कर में दर्जनों घायल



डबवाली ( डॉ सुखपाल सावंत खेडा)- : गाव गोरीवाला में आज एक इनेवा पिकअप की भयंकर टक्कर में दर्जनों लोग घायल हो गए। घायलों को सड़क के नजदीक कार्य कर रहे किसानों ने अस्पताल पहुचाया। जानकारी अनुसार रामपुरा निवासी इनेवा ड्राइवर विनोद कुमार बिज्जाूवाली रोड पर पेट्रोल पम्प से पेट्रोल डलवाकर रोड पर चढ़ ही रहा था की बिज्जाूवाली की तरफ से आ रही पिकअप से टक्कर हो गई जिससे इनेवा व पिकअप में सवार दर्जनों लोग घायल हो गए। घायलों को एक निजी हस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई व एक व्यक्ति के सिर में ज्यादा चोट के कारण डबवाली रेफर कर दिया गया है। मुक्सर पंजाब निवासी पिकअप ड्राइवर राजेंद्र ने बताया की वे रानिया में भोग पर जाकर वापिस पंजाब लौट रहे थे की अचानक रोड पर चढ़ रही इनेवा से पिकअप की टक्कर हो गई जिससे इनेवा व पिकअप में सवार सभी लोगों को मामूली चोटे आई है। पुलिस घटना की जाच कर रही है।

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