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शुक्रवार, 20 नवंबर 2009

राजधानी में गन्ने की सियासत


गन्ना मूल्य पर नए अध्यादेश के विरोध में सड़क से लेकर संसद तक जारी जबरदस्त उबाल के दबाव में केंद्र सरकार ने अध्यादेश में जरूरी बदलाव के संकेत दिए हैं। राजधानी में गन्ने की सियासत पर उबाल का आलम यह रहा कि शीत सत्र के पहले ही दिन संसद ठप हो गई और नई लोकसभा सबसे हंगामाखेज दिन से रूबरू हुई। विपक्ष ही नहीं संप्रग के सहयोगियों द्रमुक और तृणमूल कांग्रेस ने भी गन्ना मूल्य पर सरकार को कठघरे में खड़ा किया। गन्ना मूल्य के सियासी उबाल की आंच का ही असर था कि लोकसभा ठप होने के तत्काल बाद प्रधानमंत्री ने संसद भवन में ही वरिष्ठ मंत्रियों की बैठक बुलाई। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी, कृषि मंत्री शरद पवार, गृहमंत्री चिदंबरम, कानून मंत्री वीरप्पा मोइली के अलावा कानून मंत्रालय के कुछ शीर्ष अधिकारी भी इस बैठक में शरीक हुए। गन्ने की सियासत का रथ विपक्षी खेमे में जाते देख कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने भी प्रधानमंत्री से मुलाकात की। प्रधानमंत्री की बैठक में ही गन्ने के उचित व लाभकारी मूल्य (एफआरपी) अध्यादेश पर पुनर्विचार करने का निर्णय लिया गया। सूत्रों के अनुसार किसानों और विपक्षी दलों के जबरदस्त विरोध को देखते हुए सरकार अध्यादेश में अब उचित गन्ना मूल्य देने के लिए चीनी मिलों को उत्तरदायी बनाने का कदम उठा सकती है। बताया जाता है कि कानून मंत्रालय को तत्काल जरूरी सुझाव देने को कहा गया है। शरद पवार ने बैठक के बाद कहा कि सरकार गन्ना मूल्य अध्यादेश पर संसद में चर्चा करने को तैयार है। इस मुद्दे पर घिरी सरकार की बेचैनी का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि गन्ना अध्यादेश पर सुलह की राह निकालने के लिए सोमवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई है। अध्यादेश को लेकर कांग्रेस में भी अंदरूनी तौर पर विरोध के स्वर साफ सुनाई दे रहे हैं। चूंकि पार्टी सरकार की अगुवा है इसलिए नेता खुले तौर पर बोलने से जरूर बच रहे हैं, मगर उनका साफ कहना है कि गन्ना मूल्य की कीमतों का मसला चीनी मिलों पर छोड़ना किसानों को शेर के आगे डालने जैसा है। गन्ने पर सियासत को लेकर मिले इस मौके को न गंवाते हुए सपा और रालोद सहित तमाम विपक्षी दलों ने लोकसभा में पहले ही दिन हंगामाखेज विरोध के जरिये सरकार की घेरेबंदी की। पहले प्रश्नकाल नहीं चलने दिया और फिर पूरे दिन के लिए सदन की बैठक स्थगित करा दी। सदन की बैठक शुरू होते ही मुलायम सिंह और अजित सिंह ने गन्ना अध्यादेश को किसानों के पेट पर लात मारने वाला कदम बताते हुए विरोध की आवाज बुलंद की। इन दोनों की अगुवाई में सपा-रालोद के सांसद आसन के सामने जाकर किसानों की लूट बंद करने के नारे लगाने लगे। भाजपा सहित अन्य विपक्षी दलों के सांसद भी अध्यादेश के विरोध में सरकार के खिलाफ उठ खड़े हुए। सरकार की हालात तब विचित्र दिखी जब तृणमूल कांग्रेस और द्रमुक के सदस्यों ने भी अध्यादेश को लेकर सवाल खड़े किए। लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने दोबारा12 बजे सदन चलाने की पूरी कोशिश की, मगर हंगामा थमता न देख सदन पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया। विपक्ष के तेवरों को देखते हुए शुक्रवार को भी संसद चलने के आसार कम ही हैं।

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