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बुधवार, 14 मार्च 2012

प्रकाश सिंह बादल पांचवीं बार बने पंजाब के मुख्यमंत्री

चंडीगढ़, -प्रकाश सिंह बादल ने बुधवार को पंजाब के मुख्यमंत्री के तौर पर पांचवीं बार शपथ ली। लगातार दूसरी बार अकाली-भाजपा गठबंधन सरकार के उप मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने वाले उनके पुत्र सुखबीर बादल सहित कैबिनेट रैंक के 17 अन्य मंत्रियों ने भी आज शपथ ग्रहण की।
चंडीगढ़ से करीब 25 किलोमीटर दूर चप्पड़ चिड़ी में आयोजित शपथग्रहण समारोह में राज्यपाल शिवराज वी पाटिल ने बादल [मुख्यमंत्री], उनके 50 वर्षीय पुत्र सुखबीर [उप मुख्यमंत्री] और कैबिनेट रैंक के 16 मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। कैबिनेट रैंक के 16 मंत्रियों में से 14 शिअद से और चार भाजपा से हैं। शपथ ग्रहण समारोह में भाजपा, तृणमूल काग्रेस, राकापा, जनता दल [यू] और इनेलो सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता शामिल हुए।
इस अवसर पर मौजूद नेताओं में लालकृष्ण आडवाणी, नितिन गडकरी, राजनाथ सिंह, वसुंधरा राजे, नवजोत सिद्धू [सभी भाजपा से], मुकुल राय, रचपाल सिंह, केडी सिंह [तृणमूल काग्रेस], केंद्रीय मंत्री प्रफुल्ल पटेल [राकापा], जनता दल यू के प्रमुख शरद यादव और इंडियन नेशनल लोकदल [इनेलो] के नेता ओमप्रकाश चौटाला भी सम्मिलित थे। गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल भी इस मौके पर मौजूद थे।
बादल ने मंत्रिमंडल के गठन का काम आज एक साथ ही पूरा कर दिया जिसमें मुख्यमंत्री सहित 18 मंत्री ही हो सकते हैं। अकाली-भाजपा गठबंधन ने विधानसभा चुनाव में 68 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत प्राप्त किया था। काग्रेस को केवल 46 सीटें मिली थीं। बादल सीनियर ने 1997 से 2002 तक और 2007 से 2012 तक दो बार पाच साल का कार्यकाल पूरा किया है।
गठबंधन की आठ महिला विधायकों [शिअद 6 और भाजपा 2] में से केवल बीबी जागीर कौर को मंत्रिमंडल में शामिल किया है जो एसजीपीसी की पूर्व अध्यक्ष हैं। मंत्रिमंडल में बादल परिवार के चार सदस्य हैं। बादल सीनियर और उनके पुत्र के अतिरिक्त अन्य पारिवारिक सदस्य अदेश प्रताप सिंह कैरों [बादल सीनियर के दामाद] और विक्रम सिंह मजीठिया [सुखबीर के साले] हैं।
बादल ने ज्यादातर अपने पूर्व मंत्रियों में भरोसा जताया और सरकार में केवल चार नए चेहरों को ही जगह दी है। इनमें भगत चुनी लाल और अनिल जोशी [दोनों भाजपा से तथा सुरजीत सिंह रखड़ा और शरणजीत सिंह ढिल्लों- दोनों शिअद] हैं। रखड़ा ने पंजाब काग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह के पुत्र रनिंदर को हराया था। लोकसभा के पूर्व उपाध्यक्ष चरणजीत सिंह अटवाल को नवगठित विधानसभा का कार्यवाहक अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
सन् 1966 में पंजाब के पुनर्गठन के बाद से एसएडी ने भाजपा के साथ मिलकर सत्ता में लगातार दूसरी बार आकर एक रिकार्ड बनाया है। इस बार के चुनाव में गठबंधन ने अपने आकड़े में वृद्धि करते हुए 68 सीटें हासिल कीं, जबकि 2007 में इसे 67 सीटें मिली थीं। पिछली बार भाजपा के 19 विधायक थे, लेकिन इस बार उसके 12 विधायक ही रह गए।
बादल सीनियर और सुखबीर क्रमश: लांबी तथा जलालाबाद सीटों से निर्वाचित हुए थे। इन दोनों के अतिरिक्त शपथ लेने वालों में भगत चुनी लाल [भाजपा जालंधर पश्चिम], सरवन सिंह फिल्लौर [शिअद-करतारपुर आरक्षित], अदेश प्रताप कैरों [शिअद-पट्टी], अजीत सिंह कोहड़ [शिअद-शाहकोट], गुलजार सिंह रानिके [शिअद-अटारी] , मदन मोहन मित्तल [भाजपा-आनंदपुर साहिब], परमिंदर सिंह ढींडसा [शिअद-सुनाम], जनमेजा सिंह शेखों [शिअद-मौर], तोता सिंह [शिअद-धर्मकोट] , जागीर कौर [शिअद-भोलथ], सुरजीत कुमार ज्ञानी [भाजपा-फजिलका] , बिक्रम सिंह मजीठिया [शिअद-मजीठा], सिकंदर सिंह मलूका [शिअद-रामपुरा फूल], अनिल जोशी [भाजपा-अमृतसर उत्तर], सुरजीत सिंह रखड़ा [श्अिद-समाना] और शरणजीत सिंह ढिल्लों [शिअद-साहनीवाल] शामिल हैं।
पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन [पीसीए] का मोहाली स्थित स्टेडियम आज सूना था जहा पाच साल पहले बादल सरकार ने शपथ ली थी। इस बार शपथ ग्रहण के लिए चप्पड़ चिड़ी को चुना गया जहा शिअद-भाजपा सरकार ने अपने पिछले कार्यकाल में फतेह बुर्ज स्मारक की स्थापना की थी।
सिख इतिहास के अत्यंत सम्मानित योद्धा बंदा सिंह बहादुर ने अजीतगढ़ जिले के चप्पड़ चिड़ी में 1710 में मुगल सेना की कमान संभाल रहे वजीर खान को लड़ाई में हराया था। यह स्थान राज्य की राजधानी से 25 किलोमीटर दूर है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार अकाली-भाजपा गठबंधन अपने परंपरागत पंथिक एजेंडे को त्यागकर विकास और शाति के एजेंडे पर लगातार दूसरी बार सत्ता में आया है।
शपथ ग्रहण समारोह में पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और बिहार के मुख्यमंत्रियों ममता बनर्जी, जयललिता और नीतीश कुमार को भी आमंत्रित किया गया था, लेकिन अन्य कार्यो में व्यस्त होने का कारण बताकर उन्होंने आने में असमर्थता जताई,

'परमात्मा चाहता था कि जो सर्वे मैंने किया, वह सच साबित हो जाए'

http://youngflamenews.blogspot.in/2012/03/65.html

डबवाली (यंग फ्लेम) चुनाव चाहे लोकसभा के हों, या विधानसभा के, या फिर स्थानीय निकाय के। हर बार चुनावों में राजनीतिक पंडित या विश्लेषक अपने-अपने अनुमान लगाते हैं। बड़े-बड़े मीडिया ग्रुप, टीवी चैनल आदि प्री-पोल अथवा एग्जिट पोल करवाते हैं। इस बहाने यह अनुमान लगाने की कोशिश की जाती है कि परिणाम क्या रहेगा। अनेक वर्षों से हम देखते आए हैं कि ऐसे एग्जिट पोल मुंह के बल गिरे हैं। मतदाता आजकल बेहद समझदार हो गया है। वह किसी को भी अपने दिल की थाह नहीं देता। ऐसे में यह अंदाजा लगाना बड़ा कठिन हो जाता है कि चुनाव में कौनसा दल विजयी होगा या फिर किसकी सरकार आएगी। हालिया पंजाब विधानसभा चुनाव की बात करें तो सब जानते हैं कि पूरे देश का मीडिया, सभी राजनीतिक जानकार, कांग्रेसी और यहां तक कि कुछ हद तक अकाली व भाजपाई भी अंदरखाने यही कह-सुन रहे थे कि इस बार तो कांग्रेस पार्टी की ही सरकार आएगी। असल में बहुत हद तक उनका अनुमान पंजाब के 46 साल के रिकार्ड पर टिका था। यह रिकार्ड चीख-चीखकर बोल रहा था कि पंजाब में आज तक कभी कोई सरकार दोबारा सत्ता में नहीं आई। यानी 5 साल कांग्रेस तो 5 साल अकाली-बीजेपी। लेकिन असलियत क्या है, वास्तविक परिणाम क्या रहने वाले हैं, उनके पीछे कारक क्या रहेंगे, क्या-क्या फैक्टर काम करेंगे और कौन-कौनसे नहीं करेंगे, इन सब बातों का गहन विश्लेषण किसी ने नहीं किया था। और, जिसने किया, वह आज पूरे पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के इस हिस्से में छा गया है। हालांकि विश्लेषण और भी बड़े-बड़े राजनीतिक पंडितों ने किए, मगर जैसे मां सरस्वती उनकी ही जुबान पर विराजमान होनी थीं। यह हैं, डबवाली निवासी तथा सहारण होटल के संचालक व वरिष्ठ पत्रकार महावीर सहारण। पिछली अनेक बार की तरह इस बार भी पंजाब विधानसभा 2012 चुनावों का परिणाम 6 मार्च को आने से लगभग 72 घंटे पहले श्री सहारण ने 'यंग फ्लेम' के माध्यम से जो राजनीतिक विश्लेषण किया था, वह लगभग अक्षरश: सत्य साबित हुआ है। बादल सरकार की वापिसी किसी करिश्मे से कम नहीं कहीं जा सकती है। तमाम मीडिया, ंजाब की नौकरशाही व प्रदेश की अधिकांश जनता द्वारा यह दावा किया जा रहा था कि कांग्रेस शत-प्रतिशत जीत रही है। लेकिन महावीर सहारण तथ्यों सहित अपनी बात पर अडिग थे कि किसी भी सूरत में कांग्रेस का सत्ता में आना मुमकिन नहीं है। अब चुनाव परिणामों के बाद श्री सहारण से एक विशेष बातचीत हमने 'यंग फ्लेम' के पाठकों के लिये की। प्रस्तुत हैं,

उक्त बातचीत के मुख्य अंश:

सहारण साहब, आपने जो पंजाब की 117 सीटों का आंकलन किया था, यह लगभग पूरी तरह सटीक रहा। यह कैसे संभव हुआ?
मैं विगत 3 दशकों से पंजाब, हरियाणा, राजस्थान के चुनावों के बारे में आंकलन कर रहा हूं और हर बार मैंने जो आंकलन किया है, उनके नतीजे लगभग उसके मुताबिक ही आये हैं। सबसे पहले मैंने 1980 में उत्तर भारत के जो 9 राज्यों में चुनाव हुए थे, तब चुनाव नतीजों के बारे में नवभारत टाइम्स ने एक प्रश्नावली देकर प्रतियोगिता करवाई थी, जिसमें पूरे देश में मुझे दूसरा स्थान प्राप्त हुआ था। उस समय मेरी उम्र मात्र 15 वर्ष थी तथा इसके बाद मैं लगातार जहां भी चुनाव हो रहे होते हैं, उन हल्कों में खड़े उम्मीदवारों की स्थिति, जातिगत समीकरण, भीतरघात, मुख्य पार्टी की करगुजारी, उम्मीदवारों द्वारा चलाया गया चुनाव अभियान आदि प्रत्येक पहलू का बारीकी से अध्ययन करने के बाद उस हल्के का संभावित नतीजा तैयार करता हूं तथा निष्पक्ष रूप से जब यह आंकलन करता हूं, तभी नतीजा सटीक आता है। यह हैरानी की बात है कि पंजाब प्रदेश की सभी सरकारी एजेंसियां, भारत सरकार की सरकारी एजेंसियां और यहां तक कि सभी न्यूज़ चैनल्स का ओपीनियन पोल, सभी समाचार पत्र और अकाली-भाजपा के अधिकांश समर्थक भी राज्य में कांग्रेस सरकार आने की बात कर रहे थे, परंतु हुआ इसके बिल्कुलल उलट। मैंने जो विश्लेषण किया, उसमें हरेक हल्के में कौन उम्मीदवार जीत रहा है और क्यूं जीत रहा है, विस्तार से बताया। अब आप 4 मार्च का 'यंग फ्लेम' पड़े http://youngflamenews.blogspot.in/2012/03/65.html चुनावी नतीजों के साथ मिलान करें, आपको पता लग जाएगा कि चुनावी सर्वेक्षण कितना सटीक रहा है। अगर जिला और माझा-मालवा क्षेत्रवार बात करें, तो इसमें 1 प्रतिशत भी फर्क नहीं है, 100 फीसदी वही बात हुई है।

क्या आपने सारे पंजाब में घूमकर ये विस्तृत आंकलन तैयार किया था या किसी और माध्यम से?
जी नहीं, मैं कहीं नहीं जाता हूं, लेकिन हल्कावाइज फीडबैक विभिन्न सूत्रों से ले लेता हूं तथा क्षेत्र विशेष की आम जनता अपने उम्मीदवारों के बारे में, प्रमुख पार्टी की कारगुजारी के बारे में क्या सोचती है, इसके बारे में मेरा आंकलन, मेरे नतीजे को सही करने में मदद करता है।
हमें याद है कि जब राजस्थान में 1993 में विधानसभा चुनाव हुए थे, तब आपने लिखा था कि गंगानगर विधानसभा सीट से तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरोसिंह शेखावत तीसरे नंबर पर रहेंगे, यह केवल आपने ही कहा था। कैसे संभव हो पाई यह सटीक भविष्यवाणी?
उस वक्त श्रीगंगानगर जिले की सभी सीटों का मेरे द्वारा किया गया सर्वेक्षण एक समाचार पत्र में छपा था तथा उस वक्त कोई कतरफा लहर नहीं थी। भादरा, टिब्बी, संगरिया से आज़ाद उम्मीदवार और हनुमानगढ़ से भाजपा दो सीटें पर जीती थी। किसी एक पार्टी की लहर वहां उस वक्त नज़र नहीं आ रही थी, कहीं कांग्रेस जीत रही थी, कहीं भाजपा। जिला श्रीगंगानगर की सभी सीटों का नतीजा मेरे आंकलन के मुताबिक ही रहा। उस वक्त संगरिया के बारे में मैंने लिखा था कि आजाद उम्मीदवार स. गुरजंटसिंह विजयी होंगे, भाजपा के शिवप्रकाश सहारण दो नंबर पर, तत्कालीन विधायक का. हेतराम तीन नंबर पर तथा कांग्रेस प्रत्याशी भजनलाल (तत्कालीन मुख्यमंत्री हरियाणा चौ. भजनलाल के रिश्तेदार) चौथे स्थान पर रहेंगे। जब नतीजा आया तो क्रम यही रहा। श्रीगंगानगर मे तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत के बारे मे आंकलन यही था कि वे तीसरे स्थान पर रहेंगे। कांग्रेस के राधेश्याम तथा जनता दल के सुरेंद्र राठौड़ में 2000 से कम वोटों का मार्जिन रहने का अनुमान लगाया था। नतीजा, राधेश्याम मात्र 1700 वोटों से जीते और भैरोंसिंह स्वत: ही तीसरे नंबर पर चले गये। हालांकि उस आंकलन में यह भी लिखा था कि भैरोंसिंह मौजूदा मुख्यमंत्री हैं और पुन: बनेंगे। लेकिन श्रीगंगानगर से वह पराजित होंगे और फिर से सीएम बने भी।
हमने यह भी सुना था कि पिछले विधानसभा चुनाव में भी आपने पंजाब की सीटों के बारे में अखबारों में छपवाया था और तब भी वही सीटें आई थीं, जो कि आपने पहले से भविष्यवाणी की थी?
मैंने कहा था कि वर्ष 2007 में हुए विधानसभा चुनावों में मालवा बैल्ट में अकाली दल को बुरी तरह से पराजित होना पड़ेगा। हालांकि तब कोई भी इस बात पर विश्वास नहीं कर रहा था तथा बठिंडा, मानसा, मोगा आदि जिलों की मालवा पट्टी में 33 में से शिअद-भाजपा को केवल 5 सीटें ही प्राप्त हुई थीं।

वर्ष 2009 में हरियाणा विधानसभा चुनावों में भी आपने जो भविष्यवाणी की थी, वह एकदम सही बैठी?
हरियाणा विधानसभा चुनाव में सभी सर्वेक्षण व अ$खबारी पंडित चौ. ओमप्रकाश चौटाला की इंडियन नेशनल लोकदल (इनैलो) को केवल 10-12 सीटों पर ही जीता हुआ मान रहे थे। लेकिन मैंने 32 सीटों पर इनैलो के जीतने का आंकलन किया था तथा भाजपा की 4 सीटों पर विजय दिखाई थी। 10 सीटों पर नज़दीकी मुकाबला बताया था। नतीजा भी हूबहू यही आया।

सहारण साहब, जब आपने बठिंडा से हरमिंद्रसिंह जस्सी के हारने की बात कही तो हमे भी यकीन नहीं हुआ। इस बात पर तो कोई विश्वास कर ही नहीं सकता था कि खुद डेरा सच्चा सौदा मुखी कि समधी होने केबावजूद वो कैसे हार सकते हैं?
बठिंडा से सरूपचंद सिंगला, मानसा से प्रेम मित्तल, संगरूर से प्रकाश गर्ग तथा फरीदकोट से दीप मल्होत्रा, डेरा बस्सी से एन.के.शर्मा, आदमपुर से पवन टिन्नू को चुनाव मैदान में उतारने की रणनीति उपमुख्यमंत्री सुखबीर बादल की थी। उस वक्त इसे कोई भी समझ नहीं पाया था, लेकिन मंैने इसको बखूबी भांप लिया था तथा एक ऐसा वर्ग, जो आम तौर पर कांग्रेस के पक्ष में मतदान करता है, ने जातिगत समीकरणों को तरजीह देते हुए शिअद के पक्ष में भारी मतदान किया। इसलिये इन सभी सीटों पर कांग्रेस की बुरी तरह से पराजय हुई तथा कोई भी आदमी 6 मार्च से पहले इस बात को स्वीकार करने को तैयार नहीं था। जहां तक बठिंडा की बात है, डेरा सच्चा सौदा प्रेमी फैक्टर वोट बैंक के खिला$फ गैर डेरा प्रेमी वोट बैंक लामबंद हो गया था तथा उन्होंने उत्साहजनक तरीके से मतदान किया, जोकि सरूप सिंगला की जीत का मुख्य कारण बना।

सहारण जी, आपने मनप्रीत बादल के गिदड़बाहा और मौड़ में तीसरे स्थान पर रहने की बात कही थी और यह बात भी शत-प्रतिशत सच साबित हुई है। इसके साथ ही पीपीपी द्वारा अकाली दल की बजाय कांग्रेस को नुकसान का आपका जो आंकलन था, वो वाकई बिल्कुल सही था और आज कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी द्वारा खुले तौर पर इसे स्वीकार भी किया जा रहा है।
मनप्रीत बादल ने सिर्फ विधानसभा हल्का गिदड़बाहा में ही कांगे्रेस का फायदा किया है, बाकी प्रदेश, खासकर मालवा में उनके द्वारा वामपंथियों से समझौता कांग्रेस की हार का बड़ा कारण बना है। क्योंकि वामपंथी परंपरागत रूप से कंग्रेस के पक्ष में मतदान करते रहे हैं, यह बात मतगणना यानी 6 मार्च से पहले कोई भी समझ नहीं पाया। जबकि मैंने पुरजोर तरीके से मुख्यमंत्री स. बादल साहब, उपमुख्यमंत्री सुखबीर बादल एवं सांसद हरसिमरत कौर बादल को कही कि मनप्रीत फैक्टर ही आपको सत्ता में वापसी करवा रहा है, जबकि आज तो यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी भी हार का ठीकरा पी.पी.पी. पर फोड़ रही हैं, लेकिन 6 मार्च से पहले उनके सलाहकार ये बात नहीं भांप पाये कि मनप्रीत से उन्हें कितना नुकसान होने जा रहा है। उल्टे कांग्रेस तो खुश थी कि मनप्रीत की वजह से शिअद-भाजपा गठबंधन हार रहा है।

भाजपा को कोई भी व्यक्ति 3-4 से अधिक सीटें नहीं दिखा रहा था, आपने ही उसके दहाई का आंकड़ा पार करने की बात कही थी। वो कैसे?
मेरे आंकलन में तो ये भी लिखा है कि भाजपा प्रत्याशी जहां चुनाव लड़ रहे हैं, ऐसी कम से कम 5-6 सीटें हैं, जिस पर कांग्रेस 3 नंबर पर है तथा वह भाजपा को 4-5 पर कैसे समेट सकती है? भाजपा को दर्जन सीटें मिलने के पीछे यही कारण मैंने भांपा। आमतौर पर सट्टा बाजार पर चुनावों के संबंध में लोग विश्वास करतेे हैं, लेकिन इस बार सट्टा बाजार के दावे भी धरे के धरे रह गये, ऐसे नतीजे सामने आये।
लोगों की स्मरण शक्ति बहुत कमजोर है, लोग जल्दी भूल जाते हैं। सट्टा बाजार का आंकलन मेरे मुताबिक कभी भी सही नहीं रहा। वर्ष 2009 में हरियाणा में सट्टा बाजार चौ. चौटाला को 12 सीटेें दर्शा रहा था, जबकि वस्तुत: 32 सीटें आईं। अब 5 मार्च तक सट्टा बाजार पंजाब में शिअद-भाजपा की सरकार बनाने वालों को 1 रू. के 5 रू. दे रहा था। क्या नतीजा आया? शिअद-भाजपा गठबंधन को 68 सीटें मिलीं, जोकि अपने आप में बड़ी जीत कही जा सकती है।

आपके मुताबिक शिरोमणी अकाली दल-भाजपा की हैरतअंगेज जीत के क्या कारण रहे?
मुख्यमंत्री प्रकाशसिंह बादल लगातार 5 साल तक जनता के बीच में रहे। विकास कार्यों की झड़ी उन्होंने लगाई। हालांकि कांग्रेस यही प्रचार करती रही कि हजारों करोड़ का कर्ज प्रदेश पर है। कांग्रेस के मुख्यमंत्री पद के दावेदार अमरेन्द्रसिंह कभी जनता के बीच नहीं गए तथा उन्हें चुनावी सभाओं में 'खुंडा' भेंट करके कांग्रेसी खुश होते रहे, लेकिन प्रदेश की जनता, जो कि आतंकवाद का दौर झेल चुकी है, ने इसे पसंद नहीं किया। मुख्यमंत्री बादल को सहयोगी के रूप में सुखबीर बादल व सांसद हरसिमरत बादल का भी बड़ा सहारा मिला। एक लाख युवाओं को मैरिट के आधार पर नौकरियां दिए जाने के कारण कांग्रेस द्वारा भ्रष्टाचार केआरोपों को लोगों ने स्वीकार नहीं किया। बाकी तमाम फैक्टर जो जीत का कारण रहे, वे हमने चुनाव पूर्व सर्वेक्षण में ही दर्शा दिए थे। अब मीडिया उन कारणों के बारे में अपनी लकीर पीट रहा है।

नतीजे आने के बाद जब आप मुख्यमंत्री प्रकाशसिंह बादल से मिले तो उनकी क्या प्रतिक्रिया थी?
मुख्यमंत्री प्रकाशसिंह बादल, उपमुख्यमंत्री सुखबीर बादल, सांसद हरसिमरत बादल से जब मैं मिला, तो उन्होंने बेहद हैरान होते हुए कहा कि कैसे आपने यह सब बता दिया, जबकि कोई भी इस बात के नजदीक तक नहीं था। मैंने कहा कि मेरे द्वारा किए जाने वाले तथ्यात्मक विश्लेषण की अबकी बार परीक्षा थी तथा परमात्मा ने इस परीक्षा में मुझे पास होने में मदद की है। परमात्मा की कृपा के अलावा कोई ऐसी चीज नहीं थी, जो अबकी बार मेरे द्वारा किए गए सर्वेक्षण को सही साबित कर सके।

भाजपा गठबंधन को 65 सीटों पर बढ़त, बागी, भीतरघात व मनप्रीत के मोर्चें ने कांग्रेस को पीछे धकेला

महावीर सहारण
9354862355

डबवाली- पंजाब प्रदेश में मतदाता अब की बार रिवायत वाकई बदलने जा रहे है। अकाली-भाजपा गठजोड़ हैरानीजनक तौर पर लगातार दूसरी बार सता सम्भालने के नजदीक पहुंच गया है। प्रदेश भर में कहीं भी सतारूढ़ गठबंधन को एन्टी-एनकम्बैंसी फैक्टर का बड़ा नुकसान होने की कोई सूचना नहीं है। हालांकि चुनावी घोषणा से पूर्व कांग्रेस की बढ़त मानी जा रही थी। मनप्रीत बादल द्वारा अकालीदल से बगावत कांग्रेसी खेमे के लिए वरदान समझी जा रही थी । मालवा के बड़े इलाके को प्रभावित करने वाला डेरा सच्चा सौदा का समर्थक वोट बैंक भी कांग्रेस के पक्ष में एकतरफा माना जा रहा था। परंतु टिकट बंटवारे से कांग्रेस में हुई बड़ी बगावत से हालात पलटने शुरू हुए तथा उसके बाद प्रदेश की राजनीति में घटा प्रत्येक घटनाक्रम अकाली-भाजपा गठबंधन के पक्ष में होता चला गया। जैसे कि मनप्रीत बादल द्वारा वामपंथियों से समझौता कांग्रेस के लिए बेहद नुकसान देह रहा। साथ ही सिरसा के सच्चा सौदा डेरा ने भी कांग्रेस के पक्ष में पिछले चुनाव की तरह स्पष्ट ऐलान करने से इंकार कर दिया। तथा एक दर्जन सीटों पर डेरा प्रेमियों द्वारा अकाली दल गठबंधन के पक्ष में मतदान करने की पुख्ता सूचनाऐं है। प्रदेश में मनप्रीत बादल के नेतृत्व में 115 सीटों पर सांझा मोर्चा चुनाव लड़ा, जिन में 22 सीटों पर वामपंथियों ने उम्मीदवार उतारे। गौरतलब है कि वामपंथियों ने पिछले चुनाव में कांग्रेस का समर्थन किया था। मनप्रीत के मोर्चे की तरफ सतापक्ष से नाराज होने वाले काफी मतदाताओं का रूझान देखा गया। यह भी कांग्रेस के लिए नुकसान देह माना जा रहा है। चूंकि सांझा मोर्चा न बनता तो इन मतों का झुकाव स्वाभाविक रूप से कांग्रेस के पक्ष में होना था। इसके अलावा चुनाव आयोग द्वारा शुरूआती दौर में की गई जबरदस्त सख्ती अंत में खोखली साबित हुई तथा कथित रूप से पैंसों का जो खुला खेल हुआ उसमें भी कांग्रेस पिछड़ती दिखाई दी। कुल मिलाकर वरिष्ठतम मुख्यमंत्री स. प्रकाश सिंह बादल ने राजनीतिक चार्तुय का जैसा सटीक प्रदर्शन चुनावी चक्रव्यूह के प्रत्येक क्षेत्र में किया यह बेमिसाल कहा जा सकता है। एक-दो नेताओं को छोड़कर सभी नामवर नेताओं या उनके प्रभावशाली संबंधियों को चुनाव मैदान में उतारा। जोकि अधिकांश स्थानों पर जीत की ओर अग्रसर है। प्रदेश में प्रभावी किसान जत्थेबंदी प्रधानो ं के साथ-साथ संत समाज प्रमुखों को भी गठबंधन के पक्ष में चुनावी मुहिम चलाने हेतु रजामंद किया साथ ही डेरा प्रेमियों का एक हिस्सा भी अपने पक्ष करने में सफल रहे है कांग्रेस के मुकाबले सतारूढ़ गठबंधन का घोषणापत्र भी मतदाताओं को आकर्षित करने में सफल रहा। वहीं सुखबीर बादल व हरसिमरत कौर बादल के जोशीले भाषणों से जनसभाओं में अकाली कार्यकर्ताओं को उत्साहित होते देखा गया। वहीं कैप्टन अमरेंद्र सिंह का जादू बड़ी बगावत के चलते ढलता सा प्रतीत होता रहा। तथा राजेंद्र कौर भ_ल व जगमीत बराड़ जैसे दूसरे नेता प्रदेश में अपना प्रभाव नही छोड़ पाए।
माझा, दोआबा में हालांकि सतारूढ़ गठबंधन पिछला प्रदर्शन नहीं दोहरा पा रहा है। वैसे भी जब किसी चुनाव में अगर बड़ी लहर न हो तो स्थानीय समीकरण ही जीत हार तय किया करते है। ऐसे ही हालातों में बागी उम्मीदवार या भीतरघात चुनावी नतीजों को पूरी तरह से बदलने में सफल हो जाते है। परिसिमन के चलते चुनाव क्षेत्रों में हुई फेरबदल चुनावी नतीजों को प्रभावित कर रही है तथा सुच्चा सिंह छोटेपुर व हंसराज जोसन जैसे कई बागी प्रत्याशी दो-दो हलकों के नतीजों को प्रभावित कर रहे है। कांग्रेस के बागी उम्मीदवारों या भीतरघात से पार्टी को जिन सीटों पर यकीनन हार का सामना करना पड़ रहा है उनमें सुजानपुर, पठानकोट, गुरदासपुर, कांदिया, डेरा बाबा नानक, मजीठा, अमृतसर (पूर्वी), बाबा बकाला, जालंधर (उतरी), जालंधर(केंट), मुकेरिया, चब्बेवाल, बलाचौर, आनंदपुर साहिब, चमकौर साहिब, खरड़, डेरा बस्सी, फतेहगढ़ साहिब, अमलोह, साहनेवाल, बाघापुराना, फिरोजपुर शहर, जलालाबाद, बल्लुआना, गिदढ़बाहा, मलोट, कोटकपुरा, रामपुरा फूल, भदोड़, शुतराना,जीरा शामिल है। अकाली-भाजपा गठजोड़ को बागियों के चलते निम्रलिखित स्थानों पर हार का सामना करना पड़ सकता है। तरनतारन, आत्म नगर, अबोहर, घनौर, महलकलां, नवां शहर। डेरा बस्सी व फतेहगढ़ साहिब ऐसी सीटे है जहां अकाली दल एवं कांग्रेस दोनों के ही बागी है। इसके अलावा ऐसे हलके हैं जहां कांग्रेस छोड़कर पीपीपी की टिकट पर चुनाव लड़ रहे व सीपीआई, सीपीएम के चिन्ह पर चुनावी किस्मत आजमा रहे मजबूत प्रत्याशी अकाली दल गठबंधन की जीत का कारण बन रहे ळै। इसमें बठिंडा देहाती, भूच्चो मंडी, तलवंडी साबो, बुडलाडा, होशियारपुर, मानसा आदि है। बसपा भी फाजिल्का, आदमपुर तथा मलेरकोटला जैसी सीटों पर भारी तादाद में कांग्रेस के वोट बैंक में सेंध लगा रही है।
माझा में पिछली बार 21 सीटों पर सत्तारूढ़ गठबंधन को विजय प्राप्त हुई थी। अब थोड़ी कमजोरी यहां है। पठानकोट जिले की पठानकोट व सुजानपुर सीटों पर कांग्रेस की यकीनी हार है। भाजपा के अश्विनी शर्मा के लिए कांग्रेस के बागी अशोक शर्मा ने राह आसान कर दी है। जबकि सुजानपुर में भाजपा के दिनेश बब्बू, बागी कांग्रेसी नरेशपुरी पर भारी है। यहां कांग्रेस के विनय महाजन तीसरे स्थान पर है।भोआ में भाजपा एवं कांग्रेस के क्रमश: सीमा देवी व बलबीर राज दोनों को भीतरघात से जूझना पड़ रहा है। थोड़ी बढ़त कांग्रेस की यहां है। गुरदासपुर जिले में बटाला सीट पर अश्विनी सेखड़ी (कांग्रेस) की जीत तय है तो गुरदासपुर से अकालीदल के गुरबचन सिंह बब्बेहाली बढिय़ा काम एवं कांग्रेस के भीतरघात के सहयोग से आसान जीत दर्ज कर रहे है। दीना नगर में भाजपा कांग्रेस में नजदीकी मुकाबला है। कांग्रेस के बागी सुच्चा सिंह छोटेपुर ने कांदिया में जहां सेवा सिंह सेखवा (अकालीदल) की राह आसान कर दी। वहीं डेरा बाबा नानक से सूच्चा सिंह लंगाह (अकालीदल) को भी राहत दे रहे हैं। फतेहगढ़ चूडिय़ा में निर्मल सिंह काहलो (अकालीदल) कांग्रेस के तृप्त राजेंद्र सिंह बाजवां पर भारी पड़ रहे है। रिर्जव हलके हरगोबिंदपुर से भी अकालीदल के देशराज घुग्गा की कांग्रेस के बलविंद्र सिंह लाड़ी पर साफ बढ़त है। तरनतारन जिले में अकालीदल का दबदबा बरकरार है। तरनतारन हलका में अकाली बागी दविंद्र सिंह लाली का कांग्रेस के धर्मवीर अग्हिोत्री से मुकाबला है। यहां मौजूदा विधायक हरमीत सिंह संधु पिछे रह गए है। पट्टी से आदेश प्रताप केरो व खेमकरण से बिरसा सिंह बल्टोहा साफ जीत दर्ज कर रहे है। खडूर साहिब हलका से मांझे के दिग्गज अकाली नेता रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा कांग्रेसी रमनजीत सिंह पर भारी माने जा रहे है। अमृतसर जिला में सत्तारूढ़ गठबंधन को बढ़त हासिल हो रही है। अजनाला से अकाली अमरपाल बोनी कांग्रेस के हरप्रताप अजनाला से आगे है। सांसद डॉ. रतन सिंह अजनाला का यह क्षेत्र अकाली दल का परम्परागत गढ़ माना जाता है। मजीठा में विक्रम सिंह मजीठिया बड़ी जीत दर्ज कर रहे है। राजा सांसी में सुखविंद्र सिंह सरकारिया व अकाली वीर सिंह लोपोके में बड़ी टक्कर है। परंतु सरकारिया को थोड़ी बढ़त है। जंडियाला रिर्जव में भी इसी प्रकार का मामला है यहां भी सरदूल सिंह (कांग्रेस)व बलजीत सिंह जलाल (अकालीदल) में नजदीकी टक्कर है। अटारी रिर्जव में अकाली गुलजार सिंह राणिके आरामदायक स्थिति में है। तो बाबा बकाला रिजर्व में भी कांग्रेस की बगावत ने अकाली मनजीत सिंह मना को जीत के राह पर ला दिया है। अमृतसर (उतरी) में भाजपा के अनिल जोशी बेहद मजबूत है तो अमृतसर (पश्चिमी)में यहीं स्थिति कांग्रेस के राजकुमार वेरका की है। अमृतसर केंद्रीय में कांग्रेस के ओपी सोनी भाजपा के तरूण चुघ पर भारी पड़ रहे है। अमृतसर (पूर्वी) में डॉ. नवजोत कौर सिधु की राह कांग्रेस की लड़ाई ने आसान कर दी है। अमृतसर (दक्षिण) में अकाली उम्मीदवार इन्द्रवीर सिंह बुलारिया कांग्रेस के जसबीर सिंह डिम्पा पर भारी पड़ रहे है। हालांकि गुरप्रताप टिक्का (अकाली बागी) उनका नुकसान कर रहे है। माझा में अकाली-भाजपा 15 सीटों पर तथा कांग्रेस 6 पर बढ़त बना पायी है जबकि 4 स्थानों पर कड़ा मुकाबला है।
दोआबा के कपूरथला जिला के कपूरथला हलका में कांग्रेस के गुरजीत राणा को अकाली दल के सर्वजीत मक्कड़ ने कड़ी टक्कर दी है। पीपीपी के रघुवीर सिंह ने मुकाबला तिकोना बनाने का प्रयास किया। कुल मिलाकर गुरजीत राणा की राह आसान नहीं है। तो भुुलत्थ में बीबी जागीर कौर पिछली हार का बदला चुकाती प्रतीत हो रही है। सुल्तानपुर लोधी में अकाली डॉ. उपीन्द्रजीत कौर की जीत तय है। वहीं फगवाड़ा से भाजपा के पूर्व आईएएस सोम प्रकाश विधानसभा में पहुंच जाएंगे। जालंधर जिला हैरानी जनक नतीजे दे सकता है। नकोदर से अमरजीत समरा (कांग्रेसी) की हालत पतली है। अकाली गुरप्रताप सिंह बडाला अपने पिता कुलदीप बडाला की हार का बदला लेने के बेहद नजदीक माने जा रहे है। शाहकोट में भी अकाली दिग्गज अजीत सिंह कोहाड़ कांग्रेस के कर्नल सीडी सिंह कम्बोज पर भारी पड़ रहे है। फिल्लोर (सु.) व करतारपुर (सु.) में कांग्रेसी संतोख सिंह व जगजीत सिंह मजबूत स्थिति में है लेकिन आदमपुर मं अकाली व कांग्रेस दोनों ही प्रत्याशी बसपा से जुडे रहे है। यहां बसपा के साथ इनका तिकोना मुकाबला है लेकिन अकाली पवन टिनू को बढ़त है। जालंधर पश्चमी में सांसद पत्नी सुमन केपी जीत के नजदीक है। वहीं जालंधर केंदी्रय में मनोरंजन कालिया भी सीट बचा ले जा रहे है लेकिन जालंधर उतरी में कांग्रेस दिग्गज अवतार हैनरी को बागी दिनेश ढल्ल ने झटका दिया है। यहां भाजपा के केडी भंडारी की लॉटरी खुल रही है। जालंधर केंट में जगवीर सिंह बराड़ का पीपीपी छोडऩा घातक साबित हुआ है तथा प्रसिद्ध हॉकी खिलाड़ी प्रगट सिंह का स्कूप गोल में तबदील होने जा रहा है। होशियारपुर जिला के मुकेरियां हलके से कांग्रेस मुकाबले से बाहर है। यहां पूर्व विधानसभा स्पीकर केवल कृष्ण के पुत्र रजनीश बब्बी का भाजपा के अरूणेश शाकर से मुकाबला है। दसूहा में भाजपा के अमरजीत शाही व कांग्रेस के रमेश चंद्र डोगरा में कड़ी टक्कर है। शाम चौरासी (सु.)में कांग्रेस के चौधरी राम लुभाया की अकाली महेंद्र कौर जोश पर थोड़ी बढ़त हासिल है। होशियारपुर में भाजपा के तीक्षण सूद की प्रतिष्ठा दाव पर है। कांग्रेस के सुंदर शाम अरोड़ा उन्हें कड़ी टक्कर दे रहे है। परंतु वे भीतरघात से नहीं बच पाए है। चब्बेवाल (सु.)में अकाली सोहन सिंह ठंडल जीत रहे है तो उड़मुड़ में मुकाबला सख्त है। यहां अकाली प्रत्याशी को थोड़ी बगावत झेलनी पड़ी है। गढशंकर में लव कुमार गोल्ड़ी के लिए चिंताजनक खबरे है यहां भाजपा से सीट बदलकर अकालीदल ने सुरेंद्र सिंह राठा को मैदान में उतारा था। यह दाव अकाली दल के लिए चलता दिखाई दे रहा है। नवांशहर में कांग्रेस की गुरइकबाल कौर की जीत भी तय मानी जा रही है। जबकि बंगा (सु.) में सोहन सिंह अकालीदल व तरलोचन सिंह कांग्रेसी में पलड़ा थोडा कांग्रेस का झुका हुआ लग रहा है। बलाचोर में अकाली दल के चौ. नंद लाल जीत की और है दोआबा में 23 सीटों में कांग्रेस 9 सीटों, अकाली भाजपा 8 सीटों पर जीत दर्ज कर रही है। जबकि एक पर आजाद व 5 सीटों पर नजदीकी मुकाबला है।
अब बारी मालवा की है। मालवा को दो भागों में चुनावी स्थिति मुताबिक बांटा गया है। पटियाला, फतेहगढ़ साहिब, रोपड़, मोहाली जिलों की कुल 31 सीटें है। यह इलाका मालवा के बाकि इलाके से अपेक्षाकृत रूप से हर क्षेत्र में आगे है। यहां कांग्रेस का प्रदर्शन प्रभावशाली रहने जा रहा है जबकि बठिंडा, मानसा, संगरूर आदि 8 जिलों की 38 सीटों पर अब की बार अकाली शानदार जीत दर्ज करने जा रहे है। रोपड़ जिला के आनंदपुर साहिब से भाजपा के मनमोहन मित्तल व चमकौर साहिब (सु.) से अकाली जगमीत कौर संधु को बढ़त है तो रूपनगर में कांग्रेस के रमेशदत्त शर्मा आगे है। मोहाली जिला के खरड़ में कांग्रेस की भीतरघात अकाली उजागर सिंह बड़ाली के लिए वरदान साबित हुई है। यहीं स्थिति मोहाली में कांग्रेस के बलबीर सिंह संधु की है। रामुवालिया पिछड़े हुए प्रतीत होते है। डेरा बस्सी में कांग्रेसी बागी दीपइंद्र ढिल्लों व अकाली एनके शर्मा में बेहद नजदीकी मुकाबला है। ै। बस्सी पठाना (सु.) में सांसद परमजीत कौर गुलशन के पति रिटायर्ड जस्टिस निर्मल सिंह जीत के करीब है। फतेहगढ़ साहिब में चौकोने मुकाबले में प्रेम सिंह चंदूमाजरा के राजनीतिक कौशल की परिक्षा है। यहां अकाली-कांग्रेस दोनों को बागियों से जूझना पड़ रहा है। लुधियाना जिला अकाली-भाजपा के लिए निराशाजनक नतीजे देने जा रहा है। खन्ना में स्व. बेअंत सिंह के पौत्र गुरकीरत सिंह कोटली की स्थिति अकाली दिग्गज जगदेव सिंह तलवंडी के पुत्र रणजीत सिंह तलवंडी के मुकाबले बेहतर है। यंहा पीपीपी ने मुकाबला तिकोना बना दिया।वंहीे समराला में कांग्रेसी अमरीक सिंह ढिल्लो, कृपाल सिंह खीरनियां (अकाली) पर भारी पड़ रहे है। साहनेवाल में जरूर अकाली पूर्व सांसद सरनजीत सिंह ढिल्लो जीत की राह पर है। गिल (सु.) में भी कांग्रेसी मलकीत सिंह दाखा भारी है। रायकोट (सु.) में अकाली विक्रमजीत सिंह खालसा व कांग्रेसी गुरचरण सिंह बोयारोय में मुकाबला कड़ा है। यह जत्थेदार तलवंडी का इलाका है। हलका दाखा में अकाली मनप्रीत अयाली ने कांग्रेस के मजबूत माने जा रहे जस्सी खंगूड़ा को पीछे धकेल दिया है। जगरांव (सु.) में भी नोकरशाह रहे एसआर कलेर कांग्रेस के ईशर सिंह मेहरबान पर भारी पड़ रहे है।। हलका पायल (सु.) में लोकसभा के पूर्व डिप्टी स्पीकर चरणजीत अटवाल (अकाली) की भी जीत तय है। लुधियाना शहर में बैंस बंधुओं ने अकाली-भाजपा के समीकरण बिगाड़ दिए है। लुधियाना पूर्व में कांग्रेसी गुरमेल सिंह पहलवान का अकाली दल के रणजीत सिंह ढिल्लो से सख्त मुकाबला है। यहां कांग्रेसी बागी जगमोहन शर्मा के आखिरी समय में चुनाव मैदान से हट जाने के कारण कांग्रेस को थोड़ी बढ़त है। आत्मनगर में बागी सिमरजीत बैंस जीत रहे है। लुधियाना दक्षिण में हाकम सिंह ग्यासपुरा को बढ़त है। लुधियाना केंद्रीय में भाजपा के सतपाल गोसाईं कांग्रेस के सुरेंद्र डावर को कड़ी टक्कर दे रहे है। यहीं स्थिति लुधियाना पश्चमी में है यंहा कांग्रेस के भारत कुमार आशु व भाजपा के सतपाल गोसाईं के बीच मुकाबला है। लेकिन लुधियाना उतरी में भाजपा के प्रवीण बांसल (उपमेयर)को कांग्रेस के राकेश पांडे पर बढ़त हासिल है। पटियाला जिला भी कांग्रेस के पक्ष में जा रहा है। नाभा रिर्जव में पुराने प्रतिद्वंदी साधु सिंह धरमसोत (कांग्रेस) व बलवंत सिंह शाहपुर (अकाली) में फिर कड़ी टक्कर है। कांग्रेस थोड़ी आगे है। पटियाला शहर में अमरेंद्र सिंह को जो बढ़त है वैसी स्थिति समाना में उनके युवराज रणइंद्र की नहीं है। यहां अकाली दल के सुरजीत रखड़ा उन्हें टक्कर दे रहे है। रणइंद्र चुनाव हार भी सकते है। पटियाला देहाती में स्व. गुरचरण सिंह टोहड़ा की बेटी कुलदीप कौर टोहड़ा को ब्रह्म महेंद्रा (कांगे्रस)पर बढ़त हासिल है। हालांकि बागी अकाली सतबीर खटड़ा ने उनका नुकसान किया है। शुतराना रिर्जव सीट पर अकाली दल प्रत्याशी विरेंद्र कौर लुम्बा को स्पष्ट बढ़त है। यहां वामपंथी उम्मीदवार ने कांग्रेस का बड़ा नुकसान किया है। राजपुरा में राज खुराना (भाजपा) अपनी बिरादरी की 42 हजार वोटों के समर्थन से एकबार फिर जीत की और बढ़ रहे है। कांग्रेस के हरदयाल कम्बोज यहां पिछड़ गए है। घनौर में अकाली बागी ने कांग्रेस के मदन लाल जलालपुर की राह सुगम कर दी है। तो सनोर में दिग्गज कांग्रेसी लाल सिंह को तेजिंद्र पाल संधु (अकालीदल)ने खतरे में डाल दिया है यंहा भी समाना की तरह हैरानी जनक नतीजा आ सकता है । इस प्रकार मालवा के इस हिस्से की 31 सीटों में 12 कांग्रेस व 12 अकाली-भाजपा जीत दर्ज कर सकते है। 2 स्थानों पर आजाद प्रत्याशियों को बढ़त है जबकि 5 स्थानों पर कड़ा मुकाबला है।
अब मालवा का वो इलाका जिस में 38 सीटे है तथा पिछले चुनाव में कांग्रेस की यहां बल्ले-बल्ले हो गई थी। परंतु यह इलाका ही अब अकाली-भाजपा को दोबारा सत्ता में लाने जा रहा है। डेरा सिरसा के समर्थकों ने पिछली बार एकतरफा मतदान कांग्रेस के पक्ष में ही किया था परंतु अब की बार हालात पूरी तरह से बदल गए तथा डेरा समर्थकों ने दोनों पक्षों को ही खुश रखा है। मोगा जिले में निहाल सिंहवाला में राजविंदर कौर (अकालीदल) व बाघपुराना में महेंशइंद्र सिंह (अकालीदल) आसान जीत दर्ज कर रहे है। तो धरमकोट में तोता सिंह (अकालीदल) ने अपने सियासी कौशल व परम्परागत रूप से मजबूत अकाली क्षेत्र का फायदा उठा कर बढ़त बना ही ली। अकाली दल से ऐन मौके पर कांग्रेस में जाकर उम्मीदवार बने सुखजीत सिंह लोहगढ़ को कांगे्रस समर्थकों (मालती थापर गुट) की अंदरूनी मार झैलनी पड़ी है। मोगा में मामला बेहद नजदीकी बना हुआ है। पूर्व डीजीपी परमजीत सिंह गिल (अकालीदल) ने वाकई मंझे हुए राजनीतिज्ञ की तरह चुनाव लड़ा। यहां पीपीपी ने भी टक्कर दी है। जोगेद्रपाल जैन के लिए राह आसान नहीं है। फिरोजपुर जिले की कांग्रेस की सब से आसान मानी जा रही गुरूहरसहाय सीट पर भी जबरदस्त टक्कर हुई। राणा सोढी को पूर्व सांसद जोरा सिंह मान के लड़के बरदेव सिंह मान (अकाली दल) ने अहसास करवा दिया कि राजनीति में सब कुछ इतना आसान नहीं होता। जीरा भी अबकी बार कांग्रेस के हाथ से निकल रहा है। हरी सिंह जीरा ने नरेश कटारिया (कांग्रेस विधायक) पर बढ़त बना ली है। फिरोजपुर शहर में भाजपा के विधायक सुखपाल सिंह ननु की बढ़त है कांग्रेसी बागी रविंद्र बबल ने कांग्र्रेस उम्मीदवार परमिंदर पिंकी की जीत पर ब्रेकर लगा दिए है। फिरोजपुर देहाती रिर्जव में भी कांग्रेस-अकालीदल में बराबरी का मुकाबला है। फाजिल्का जिला की चारों सीटें कांगे्रस हार रही है। जिला बनाने का सबसे ज्यादा फायदा भाजपा के सुरजीत ज्याणी को हो रहा है। फाजिल्का में ज्याणी असानी से जीत रहे है। जलालाबाद से बागी होकर चुनाव लड़ रहे हंसराज जोसन कम्बोज बिरादरी के कद्दावर नेता है की टिकट काट कर कांग्रेस ने आत्मघाती कदम उठाया है। जोसन कई हलकों में कांग्रेस का नुकसान कर गए। जलालाबाद में सुखबीर बादल को बढ़त है। तो बल्लुआना में कांग्रेस बागी प्रकाश भटी एवं पीपीपी के रमेश मेघवाल ने गुरतेज सिंह घुडिय़ाना की लॉटरी खोल दी है। अबोहर में आजाद शिवलाल शौली ने जातिगत समीकरणों के सहारे ताकतवर सुनील जाखड़ पर बढ़त बना ली है। मुक्तसर जिला की लम्बी सीट पर मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल जीत रहे है। तो मुक्तसर में कांग्रेस की कर्ण बराड़ की राह आसान है। मलोट में अकाली दल के हरप्रीत सिंह अगर जीत रहे है तो उन्हें कांग्रेस के बागी बलदेव सिंह बलमगढ़ व हरबंस 'गरीबÓ का शुक्रगुजार होना चाहिए। गिदड़बाहा में मनप्रीत बादल तो यकीनन हार रहे है। कांग्रेस से आकर अकालीदल की टिकट पर चुनाव लड़ रहे संत सिंह बराड़ को कांग्रेस के एक धड़े का खुला समर्थन भी मिला। जिसके चलते कांग्रेसी राजा बडिंग़ पिछड़ गए है। फरीदकोट की जैतो रिर्जव से गुरदेव बादल आरामदायक स्थिति में है तो कोटकपुरा में बागी उपेंद्र शर्मा ने रिपजीत बराड़ की हार तय कर दी है। यहां अकाली दल के मनतार बराड़ की स्थिति बेहद मजबूत है। फरीदकोट में अकालीदल के दीप मलहोत्रा ने भी मुकाबला कांटे का बना दिया है। यहां शहर में अकाली दल को बढ़त है। भीतरघात यहां भी कांग्रेस की लुटिया डूबो सकता है। मानसा की बुढलाढा व मानसा से क्रमश: अचिंत सिंह समाओं व प्रेम मित्तल अकाली दल के लिए वरदान साबित हो रहे है। तो सरदुलगढ़ में भुंदड-मोफर में जबरदस्त टक्कर है। बठिंडा जिले की तलवंडी सीट से अमरजीत सिंह सिधु (अकालीदल) को बढ़त है तो भूच्चो मंडी से भी प्रीतम सिंह कोटभाई (अकालीदल) जीत रहे है। रामपुरा फूल में सिकंदर सिंह मलूका अबकी बार गुरप्रीत कांगड़ (कांग्रेस) से हार का बदला लेते हुए प्रतीत हो रहे है। यहां अमरजीत शर्मा (बागी कांग्रेस) ने कांगड का नुकसान किया है। यहीं स्थिति भठिंडा देहाती में दर्शन सिंह कोटफत्ता की है। यहां भी मक्खन सिंह (कांग्रेस) के वोट बैंक में सीपीआई प्रत्याशी सुरजीत सोही ने सेंध लगा दी है। मोड़ में भी मनप्रीत बादल की जीत यकीनी नहीं है। यहां अकाली दल के जनमेजा सिंह सेंखों शुरूआत में पिछड़े माने जा रहे थे ने कांग्रेस के मंगत राय बांसल को कड़ी टक्कर दी है। यहां भी नतीजा हैरानी जनक हो सकता है। बठिंडा शहरी सीट पर कांग्रेस की पक्की जीत भी सरूप सिंगला (अकाली दल) के चक्रव्यूह के चलते सशंय के घेरे में आ गई है। संगरूर जिले के लहरागागा में रजिदं्र कौर भळल को खतरा बना हुआ है। दिड़वा (सुरक्षित) में अकाली बलबीर घुन्नस जीत रहे है। सुनाम में सुखदेव सिंह ढीढ़ंसा की साख दाव पर है। यहां परमिंद्र ढीढंसा को अमन अरोड़ा से कड़ी टक्कर मिल रही है। मलेरकोटला में कांग्रेस की रजिया सुल्तान भी कड़े मुकाबले में निसारा आलम से जूझ रही है। यहां बसपा ने कांग्रेस का बड़ा नुकसान किया जो रजिया सुल्तान के लिए घातक सिद्ध हुआ है व अकाली दल की लॉटरी यहां निकल सकती है। धूरी में तिकोना मुकाबला है। पंरत ूकांग्रेस के अरविंद्र खन्ना का हाथ ऊपर है। अमरगढ़ (सु.) में सुरजीत सिंह धीमान (कांग्रेस) व इकबाल सिंह झूंदा (अकालीदल) को पीपीपी के अजीत सिंह चंदुराईयां जबरदस्त टक्कर दे रहे है। संगरूर में अकाली प्रकाश गर्ग की स्थिति सांझा मोर्चे के बलदेव मान व कांग्रेस के सुरेंद्र पाल सिबीया के मुकाबले थोड़ी बेहतर है। बरनाला में मलकीत कीतू (अकालीदल) व केवल सिंह ढिल्लो (कांग्रेस) में बड़ी टक्कर है। कीतू यहां पिछली हार का बदला चुकाने के करीब है। तो भदोड़ (सु.) में पूर्व नोकरशाह दरबारा सिंह गुरू गायक मोहम्मद सदीक पर भारी पड़ रहे है या सीपीआई के खुशियां सिंह कितनी सेंध कांग्रेस के मतों में लगा पाए इस पर हार-जीत निर्भर है। महलकलां (सु.) में कांग्रेस की हरचंद कौर घनोरी का हाथ ऊपर बताया जा रहा है। इस क्षेत्र की 38 सीटों में से अकाली भाजपा को 18 सीटों पर बढ़त है जबकि 8 सीटों पर कांग्रेस आगे है। पीपीपी 2 सीटों पर बढ़त बनाऐ हुए है व10 सीटों पर कड़ा मुकाबला है
इस प्रकार अकाली भाजपा को 117 में से 53 सीटों पर स्पष्ट बढ़त मिल रही है वही कांग्रेस 35 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है आजाद व अन्य 5 सीटों पर आगे है जबकि 24 सीटों पर कड़ा मुकाबला है कड़े मुकाबले वाली 24 सीटें अगर दोनो प्रमुख दलों में 12-12 बांट दे तो अकाली दल गठबंधन का 65 सीटों के साथ दोबारा सत्ता में लोटना तय माना जा रहा है।


कांग्रेस के अधिकांश दिग्गज हार के कगार पर
डबवाली-पंजाब में सत्ता पर काबिज होने का दावा कर रही कांग्रेस शायद इस जमीनी सच्चाई से मुंह मोड़ रही है कि उस के अधिकांश दिग्गज नेताओं को बड़े मुकाबले का सामना करना पड़ा है। लाल सिंह (सनोर), राजेंद्र कौर भ_ल(लहरा गागा), राणा गुरमीत सोढ़ी (गुरूहरसहाय), राणा गुरजीत सिंह (कपूरथला), अमरजीत समरा (नकोदर), जीत महेंद्र (तलवंड़ी साबो), हरमिंदर सिंह जस्सी (बठिंडा), रजिया सुल्तान (मलेरकोटला), सुनील जाखड़ (अबोहर), अवतार हैनरी (जालंधर उत्तरी), सुखपाल खेहरा (भुलत्थ) जोकि कांग्रेस सरकार आने पर मंत्री पद के गंभीर दावोदार थे। इनमें से अधिकांश को हार का सामना करना पड़ सकता है। उधर, दिग्गज नेताओं के करीबी संबंधी रणइंद्र सिंह (समाना)कैप्टन अमरेंद्र सिंह के पुत्र, विक्रम सिंह बांजवा (साहनेवाल)राजेंद्र कौर भ_ल के दामाद, रिपजीत बराड़ (कोटकपुरा) जगमीत बराड़ के भाई, हरबंस कौर (बस्सी पठाना) पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शमशेर सिंह दूलो की पत्नी, कांदिया से सांसद प्रताप सिंह बाजवा की पत्नी चरणजीत कौर बाजवा के हालात बेहद नाजुक बताजे जा रहे है। राहुल गांधी द्वारा अलाट किए गए यूथ कोटे के प्रत्याशी कुलजीत सिंह नागरा (फतेहगढ़ साहिब), शैलिंद्र शैली (मजीठा), अमरिंन्द्र राजा वडिंग (गिदड़बाहा) तथा राजविंद्र सिंह लकी (बलाचोर) भी चुनावी जीत से कोसों दूर बताये जा रहे है। इन हालातों के चलते ही कांग्रेस अब 70+ सीटें जीतने का दावा करने से पीछे हट गई है।

भाजपा पार करेगी दहाई का आंकड़ा
2002 में कांग्रेस को सत्ता प्राप्त करने में इसलिए आसानी हो गई थी कि भाजपा केवल 3 सीटें ही जीत पाई थी। अब की बार भी चुनाव के शुरूआती चरण में ऐसी ही क्यासबाजिया लगाई जा रही थी लेकिन भाजपा ने कुछ टिकटे बदली तो कुछ जिताऊ उम्मीदवार भी उतारे। परंतु सही मायनों में तो कांग्रेस के बागियों ने ही भाजपा की राह आसान की है। अनिल जोशी (अमृतसर उत्तरी), मनोरंजन कालिया (जालंधर केंद्रीय), सुरजीत ज्याणी (फाजिल्का), सोमप्रकाश (फगवाड़ा), प्रवीण कुमार बांसल (लुधियाना उत्तरी) तथा राज खुराना (राजपुरा) सीधे मुकाबले में विरोधियों पर भारी पड़ रहे है तथा इनमें अधिकांश सीटे भाजपा जीत सकती है। लेकिन कांग्रेस के बागियों ने दिनेश बब्बू (सुजानपुर), अश्विनी शर्मा (पठानकोट), डॉ. नवजोत कौर सिधु (अमृतसर पूर्वी), केडी भंडारी (जालंधर उत्तरी), अरूणेश शाकर (मुकेरिया), तीक्षण सूद (होशियारपुर), मदन मोहन मित्तल (आनंदपुर साहिब), सुखपाल सिंह ननु (फिरोजपुर शहर), की स्थिति को मजबूत कर दिया है तथा उपरोक्त सीटों में अधिकांश पर भाजपा विजय पताका फहरा सकती है व कुल मिलाकर भाजपा का आंकड़ा दहाई को पार कर सकता है।

मनप्रीत के लिए विधानसभा का दरवाजा दूर
मनप्रीत बादल के नेतृत्व में बने सांझे मोर्चे ने अकाली-भाजपा का कम और कांग्रेस का ज्यादा नुकसान किया है तथा यह मोर्चा 2-3 स्थानों को छोड़कर जीतने की स्थिति में नहीं है। मनप्रीत बादल अपनी परम्परागत सीट गिदड़बाहा से तो तीसरे स्थान पर फिसल सकते है तथा मौड़ में भी कुछ पाकेट में ही उन्हें वोट मिले है तथा उनकी जीत की बात हलके में नहीं कही जा रही है। वामपंथियों के टकसाली वोट ले जाकर कांग्रेस का नुकसान तो मोर्चे ने किया ही है साथ ही एन्टी-एनकम्बैंसी वोटों का बड़ा हिस्सा भी उन्होंने ले जाकर कांग्रेस की बढ़त को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यूथ वोट भी मनप्रीत के प्रत्याशियों को अच्छी तादाद में मिला है। लेकिन जैसे कि उम्मीद जताई जा रही थी कि मनप्रीत बादल अकाली दल को तगड़ा झटका देगा। ऐसा नही हो पाया। बल्कि इस मोर्चे के चलते कांग्रेस को ही कुछ हद तक नुकसान झैलना पड़ा है।

रविवार, 31 जुलाई 2011

रिक्शा चालक की निर्मम हत्या, खून से सने कपडे मिले

डबवाली-बीती रात किलियांवाली मंडी में ट्रक यूनियन के पास एक रिक्शा चालक का शव बरामद किया है। मृतक के चेहरे और सिर पर चोटों के काफी निशान हैं। किलियांवाली ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस को मौके मृतककी खून लथपथ कमीज के अलावा ट्रक यूनियन के पास खून के धब्बे मिलने साथ ही मृतक के जमीन पर घसीटे जाने के निशान मिले है। मृतक रिक्शा चालक की पहचान चरनजीत उर्फ चाँद पुत्र संत राम निवासी नरसिंह कालोनी के तौर पर हुई है।
प्राप्त जानकारी अनुसार नरसिंह कालोनी का निवासी 28 वर्षीय चरनजीत रिक्शा चलाता था। जिसका लगभग 7 साल पहले अपनी पत्नी के साथ तलाक हो गया चुका है। जिसके बाद वह अपने भाई रूप लाल के साथ रहता था परन्तु कभी कभार ही घर पर जाता था। उसकी आज प्रात:काल ट्रक यूनियन किल्यांवाली के नज़दीक एक खाली प्लाट में उसकी लाश बरामद हुई। जिसके चेहरे, सिर और पेट पर जख्मों के गहरे निशान थे।
घटना की सूचना पर मिलने पर किलियांवाली चौकी के प्रभारी जीत सिंह मौके पर पहुँच गए। पुलिस को जाँच दौरान ट्रक यूनियन के बरामदो में एक तख्तपोश पर खून के निशान भी मिले है, जिन्हें हत्यारों द्वारा पानी के साथ साफ करने का भी प्रयास किया गया लेकिन वे इसमें सफल नहीं हो पाये। पुलिस को ट्रक यूनियन के साथ लगती गली में से खून के साथ लथपथ मृतक चरनजीत का कमीज़ और बनियान भी बरामद हुए है। पुलिस ने मौके पर चरनजीत को ज़मीन पर घसीटे जाने के निशान भी मिले है।
लम्बी के थाना प्रमुख गुरप्रीत सिंह बेस ने मौके पर पहुँच कर स्थिति का जायज़ा लेकर मौके पर मिले खून से लथपथ कमीज और अन्य प्रमाणों को देखा। उन्होंने बताया कि मृतक के भाई रूप लाल के बयानों के आधार पर अनजाने व्यक्ति खि़लाफ़ हत्या की धारा के अंतर्गत मामला दर्ज करके जाँच आरंभ कर दी गई है। सिवल हस्पताल मलोट में से पोस्टमार्टम उपरांत मृतक की लाश वारिसों को सौंप दी गई।
इस घटना के साथ क्षेत्र के रिक्शा चालकों में शोक की लहर दौड़ गई। रिक्शा यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष सुखविन्दर सिंह ने पुलिस से हत्यारों को खोज कर उन्हें सजा दिलाये जाने की मांग की है।
चित्र 31 डीबीएल1- ट्रक यूनियन के पास मिले रिक्शा चालक के शव के बाद जांच करती हुई पुलिस।
चित्र 31 डीबीएल2- हत्या के बाद बरामद रिक्शा चालक के कपड़े।

मंगलवार, 26 जुलाई 2011

नहर टूटी, 250 एकड़ धान की फसल खराब

डबवाली (यंग फ्लेम) गांव भीटीवाला के निकट रविवार की शाम को खुडिडयां्-शहणा खेड़ा नहर के टूट जाने से क्षेत्र की करीब 250 एकड़ धान की फसल खराब हो गई। इसके अलावा डेढ़ दर्जन से अधिक मोटर भी बेकार हो गई हैं। नहर में बुर्जी नंबर 37000 के पास करीब पंद्रह फुट की दरार पड़ गई है। सूचना मिलने पर नहरी विभाग ने हेड से पानी की सप्लाई बंद करा दी है। जानकारी के अनुसार कमजोर किनारों के होने की वजह से शाम के करीब चार बजे अचानक नहर में दरार पड़ गई। पानी का तेज बहाव होने के चलते कुछ समय में ही करीब ढाई सौ एकड़ धान की फसल पानी में डूब गई। जैसे ही किसानों को नहर टूटने का पता चला तो उन्होंने तुरंत नहरी विभाग को सूचना दी। गांव भीटीवाला के प्रभावित किसानों जज सिंह पुत्र गुरचंद सिंह, भूपिंद्र सिंह पुत्र बाबू सिंह, जरनैल सिंह पुत्र संपूर्ण सिंह, जगजीत सिंह पुत्र डल्ल सिंह, गुरप्रीत सिंह पुत्र जगजीत सिंह, सोहन सिंह पुत्र हरचंद सिंह, मंदर सिंह दलीप सिंह, बलदेव सिंह पुत्र गंढ़ा सिंह, गुरमेल सिंह पुत्र मिं_ू सिंह, गुरराज सिंह पुत्र गुरतेज सिंह, गुरजंट सिंह पुत्र दिलवार सिंह, सरदूल सिंह पुत्र नाहर सिंह ने बताया कि नहर के किनारों को मजबूत करने के लिए वह नहरी विभाग को दस बार अर्जियां दे चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इतना ही नहीं मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल से भी नहर के किनारों को मजबूत कराने की गुहार लगा चुके हैं। उधर, नहरी विभाग के जेई जय चंद ने बताया कि हेड से पानी की सप्लाई बंद कर दी गई है। वह मौके पर पहुंच रहे हैं और तुरंत ही दरार को भरने का कार्य शुरू करा देंगे।

सिखवाला में बन रहा सरकारी डिग्री कॉलेज

डबवाली (यंग फ्लेम) मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल की अध्यक्षता में पंजाब सरकार द्वारा राच्य में उच्च शिक्षा सुविधाओं का समीकरण करने के लिए उच्च तौर प्रयास किये जा रहे हैँ। इसलिए राच्य में 17 वें सरकारी डिग्री कॉलेज स्थापित किये जा रहे हैं।
इसी लड़ी के तहत मलोट उप मण्डल के गांव सिखवाला में राच्य सरकार द्वारा बनाया जा रहा डिग्री कॉलेज आने वाले कुछ दिनों में बनकर तैयार हो जायेगा। इन नये बने रहे कॉलेजों में चालू शैक्षिणक सैशन से ही पढ़ाई शुरू करने के निर्देश मुख्यमंत्री पहले ही दे चुके हैं।
इस संबंध में विस्तापूर्वक जानकारी देते हुए अतिरिक्त उपायुक्त दर्शन सिंह ग्रेवाल ने बताया कि इस कॉलेज के निर्माण पर पंजाब सरकार 10 करोड़ रूपए खर्च कर रही है। इस दो मंजिला शानदार ईमारत बन रही है, जिसकी प्रबंधकी ?लॉक व विज्ञान ?लॉक का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है जबकि आर्टस ?लॉक व आई.सी.टी ?लॉक कार्य तेजी से जारी है व आने वाले कुछ दिनों कार्य पूर्ण हो जायेगा। इस कॉलेज कवर क्षेत्र (कवर एरिया) 44 हजार वर्ग फुट होगा। यह कॉलेज पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ से संबंधित होगा। इस कॉलेज में सभी आधुनिक विषयों की पढ़ाई करवाई जायेगी।
इस अवसर पर निर्माण कार्यों की देखरेख कर रहे बी.एड.आर विभाग के एस.डी.ओ अरमनाथ के अनुसार 15 एकड़ के रकबे में बने रहे इस कॉलेज का निर्माण जल्द पूरा हो जायेगा व ईमारत शिक्षा विभाग को सौंप दी जायेगी।
इस कॉलेज की मलोट से दूरी 23 किलोमीटर व लम्बी से 8 किलोमीटर है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि पहले इस क्षेत्र में कोई सरकारी कॉलेज नहीं था। अब सरकार द्वारा इस कॉलेज खोलने से क्षेत्र के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा मिल सकेगी व इसकी फीस की कम होगी। यह कॉलेज नारी शिक्षा के लिए वरदान होगा, क्योंकि ग्रामीण क्षेत्र में ही कॉलेज होने के कारण अब लोग लड़कियों को भी उच्च शिक्षा के लिए कॉलेज भेज सकेंगे। गांव सिखवाला में बन रहे इस कॉलेज से पड़ौसी जिले फिरोजपुर से लगते विधानसभा हलका बल्लूआना के विद्यार्थियों को भी होगा।

शुक्रवार, 22 जुलाई 2011

दिन दिहाडे सरेआम महिला को तेजधार हथियार से गोदा, मोत

22 जुलाई 2011
- म्रतका के पती ने ही दिया रोन्गटे खडे करने वाली उक्त घटना को अन्जाम
- परिजनो के बयान के बाद ही होगी कार्रवाई - पुलिस
- क्या परिजनो ने बयान ना दिये तो आजाद रहेगा सरेआम हत्या करने वाला दरिन्दा पति?

मलोट (श्री मुक्तसर साहिब)
मलोट के बिरला रोड पर एक व्यक्ती ने अपनी ही पत्नी को दिन दिहाडे सरेबाजार काट डाला। बताया जा रहा है कि अपनी पत्नी की ह्त्या उसने घरेलू कलेश से तन्ग आकर की है।
जानकारी के अनुसार बिरला रोड पर वार्ड नं. 9 मे रहने वाली संतोष रानी लोगों के घरों में कार्य कर घर का खर्च चलाती थी। शुकरवार को जब वह अपने कार्य से वापिस आ रही थी तो बिरला रोड पर पहले ही से तैयार खड़े उसके पति पप्पू ने उस पर छुरे से हमला बोल दिया तथा अन्धाधुन्द वार किये जिससे वह गंभीर रूप में घायल हो गई। यही कुछ ही क्षणो मे तडफ़ती हुई महिला ने घटना स्थल पर ही दम तोड दिया। तीन बच्चो की मा मृतका के दो बच्चे शादीशुदा है। इस संबंध में मृतका के लड़के ने बताया कि उसका पिता मानसिक तौर पर परेशान रहता था व घर में लड़ाइर झगड़ा करता था, जबकि दूसरी ओर महिला के पति पप्पू का कहना है कि उसकी पत्नी उससे मारपीट करती थी। आज भी दोनों में हाथापाई दौरान यह घटना हुई। मामले की जांच कर रहे त्रिलोकचंद ने बताया कि मृतका संतोष रानी का शव अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है तथा मृतका के परिवार द्वारा बयान लिखवाने पर ही कार्यवाही की जायेगी लेकिन क्या सरेआम हत्या करने वाले उक्त व्यक्ती के खिलाफ़ परिवार के लोगो ने बयान ना दिया तो क्या उस पर कार्रवाई नही होगी?

बुधवार, 29 जून 2011

पशु मेला ग्राऊंड पर लटका ताला, व्यापारी असमंजस में

डबवाली (यंग फ्लेम)उत्तर भारत मे अपनी अलग पहचान बना चुका किलियांवाली का पशू मेला किसी न किसी कारण अक्सर ही र्सुिखयो बना रहता है यहां की प्रसिद्ध पशू मण्डी उस समय सुर्खियों मे आई जब कुछ वर्ष पूर्व डबवाली मे गौ हत्या काण्ड का प्रदा फाश हुआ जिसके तार सीधे ही इस पशु मण्डी से जुड़े पाए गए क्यू कि इसी मेले से गौ तस्कर अपने दरिंदगी भरे कार्य को बे खोफ अंजाम देते रहे। गांव डबवाली के गौ हत्या काण्ड सामने आने से लोगों मे खलबली मच गई व चारो और विरोध प्रदर्शन होने से सोई हुई सरकारों की नींद खुल गई लोंगे के भारी रोष को देखते हुए पंजाब सरकार ने भी इस पशु मेले को कुछ समय के लिय बंद करवा दिया था। उस समय गौ हत्या की गंभीरता को समझते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने गौ हत्या काण्ड की कड़े शब्दों मे निन्दा की थी व एैलान किया था इस पशु मेले को आधुनिक पशु मेला मैदान का रूप देकर एसी घटनायों पर अंकुश लगाने का प्रयास किया जाऐगा श्री बादल ने अपने इस वायदे को पूरा करते हुए किलियांवाली मंडी मे एक विशाल पशु मेला ग्रांउण्ड का निर्माण कर 21 जून मंगलवार को उद्धघाटन कर पशु व्यापरियों के लिय खोल दिया था । लेकिन हर रविवार को लगने वाले इस पशु मेले में दूर दराज आए पशु व्यापारियों का उत्साह उस वक्त ठण्डा पड़ गया जब उन्होने नवनिर्मित पशु मेला ग्राउण्ड के मुख्य द्वार पर ताला लटका देखा जब इस बारे मे पशु मण्डी के ठेकेदारों गुरचरण सिंह, अवतार सिंह,सुखपाल सिंह भाटी,मनजिंद्र सिंह बिट्टू व बब्बू दानेवालिया से बातचीत की तो उन्होने कहा कि लाल फीता शाही के चलते अभी तक पशु मेला ग्रंाउण्उ की चाबियां नही सोंपी गई और न इस बारे मे उनसे कोई भी विचार विर्मश किया गया है ठेकेदारों ने अपने संयुक्त बयान मे कहा किइसमे कोई संदेह नही कि यह पशु मेला ग्राउण्उ उतर भारत मे अपनी तरह का पहला पशु मेला ग्राउण्ड है जिसमे पशु व व्यापारियों के हर सुविधा प्रदान की गई है लेकिन विशाल ग्रांउण्ड के रखरखाव व स्कोयटी के विशेष प्रंबध नही किया गया है। वही दुसरी और उन्हाने कहा कि इस मेला ग्राउण्ड मे बिजली पानी व अन्य खर्चों को लेकर सरकार ने अभी तक साफ नही किया है। जिसके चलते पशु व्यपारी व ठेकेदार असंमजस की स्थिति मे है । उधर, जब इस बारे मे मुक्तसर के डी. डी. पी.औ अमरिद्रं सिंह सरां से दूरभाष पर बात की गई तो उन्होने बताया कि प्रशासन इस मेला ग्राउण्ड के रखरखाव के लिय माली, सफााई कर्मचारी व अन्य स्टाफ की नियुक्ति करने उपरांत इस पशु मेला ग्राउण्ड को व्यापारियों को सोंप दिया जाऐगा तथा आने वाले रविवार को पशु मण्डी नवनिर्मित पशु मेला ग्राउण्उ मे लगााई जाएगी।

मंगलवार, 21 जून 2011

ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਪੰਜਾਬ ਵਲੋਂ ਆਧੁਨਿਕ ਪਸ਼ੂ ਮੰਡੀ ਦਾ ਉਦਘਾਟਨ ,मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह ने पशुमेला मैदान का उदघाटन किया

ਸੰਗਤ ਦਰਸ਼ਨ ਪ੍ਰੋਗਰਾਮ 1.5 ਕਰੋੜ ਦੀਆਂ ਗਾਂਟਾਂ ਵੰਡੀਆਂ ਸਵਰਗੀ ਬੀਬੀ ਸੁਰਿੰਦਰ ਕੌਰ ਬਾਦਲ ਜੀ ਦੀ ਯਾਦ ਵਿਚ ਲਾਈਬ੍ਰੇਰੀ ਦਾ ਉਦਘਾਟਨ
ਮੰਡੀ ਕਿਲਿਆਂ ਵਾਲੀ
ਪੰਜਾਬ ਰਾਜ ਵਿਚ ਪਸ਼ੂ ਵਪਾਰ ਲਈ ਬੇਹਤਰ ਸਹੁਲਤਾਂ ਪ੍ਰਦਾਨ ਕਰਨ ਲਈ ਪਸ਼ੂ ਮੰਡੀਆਂ ਦੇ ਬੁਨਿਆਦੀ ਢਾਂਚੇ ਦੀ ਉਸਾਰੀ ਕੀਤੀ ਜਾ ਰਹੀ ਹੈ ਤਾਂ ਜੋ ਇੰਨ•ਾਂ ਪਸ਼ੂ ਮੰਡੀਆਂ ਦਾ ਆਧੁਨਿਕੀਕਰਨ ਕਰਨ ਦੇ ਨਾਲ ਨਾਲ ਰਾਜ ਵਿਚ ਵਧੀਆਂ ਨਸਲਾਂ ਦੇ ਪਸ਼ੂ ਪੈਦਾ ਕਰਕੇ ਪਸ਼ੂ ਵਪਾਰ ਵਿਚ ਚੋਖਾ ਵਾਧਾ ਕੀਤਾ ਜਾ ਸਕੇ ਅਤੇ ਪਸ਼ੂ ਪਾਲਕਾਂ ਦੀ ਆਰਥਿਕ ਸਥਿਤੀ ਨੂੰ ਬੇਹਤਰ ਸੁਧਾਰਿਆ ਜਾ ਸਕੇ
ਇਹ ਜਾਣਕਾਰੀ ਸ: ਪਰਕਾਸ਼ ਸਿੰਘ ਬਾਦਲ ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਪੰਜਾਬ ਨੇ ਅੱਜ ਜ਼ਿਲ•ਾ ਸ੍ਰੀ ਮੁਕਤਸਰ ਸਾਹਿਬ ਦੇ ਕਸਬਾ ਕਿਲਿਆਂ ਵਾਲੀ ਵਿਖੇ 759.05 ਲੱਖ ਰੁਪਏ ਦੀ ਲਾਗਤ ਨਾਲ ਉਸਾਰੀ ਗਈ ਆਧੁਨਿਕ ਪਸ਼ੂ ਮੰਡੀ ਦਾ ਉਦਘਾਟਨ ਕਰਨ ਉਪਰੰਤ ਦਿੱਤੀ। ਉਨ•ਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਸਾਲ 2010 ਵਿਚ ਪੰਜਾਬ ਸਰਕਾਰ ਵਲੋਂ ਪਸ਼ੂ ਮੇਲਾ ਮੈਦਾਨਾਂ ਦਾ ਆਧੁਨਿਕੀਕਰਨ ਕਰਨ ਦਾ ਫੈਸਲਾ ਲਿਆ ਗਿਆ ਸੀ ਜਿਸ ਵਿਚ ਕਿਲਿਆਂ ਵਾਲੀ ਜ਼ਿਲ•ਾ ਸ੍ਰੀ ਮੁਕਤਸਰ ਸਾਹਿਬ, ਵੱਲਾ ਜ਼ਿਲ•ਾ ਸ੍ਰੀ ਅਮ੍ਰਿੰਤਸਰ ਸਾਹਿਬ, ਨਬੀਪੁਰ ਜ਼ਿਲ•ਾ ਸ੍ਰੀ ਫਤਿਹਗੜ• ਸਾਹਿਬ ਅਤੇ ਸੁਭਾਨ ਪੁਰ ਜ਼ਿਲ•ਾ ਕਪੂਰਥਲਾ ਸਾਮਿਲ ਸਨ ਜ਼ਿਨ•ਾਂ ਵਿਚੋਂ ਪਹਿਲੇ ਪੜਾਅ ਅਧੀਨ ਕਸਬਾ ਕਿਲਿਆਂ ਵਾਲੀ ਦਾ ਪਸ਼ੂ ਮੇਲਾ ਮੈਦਾਨ ਮੁੰਕਮਲ ਕਰ ਲਿਆ ਗਿਆ ਹੈ ਅਤੇ ਦੂਜੇ ਪੜਾਅ ਵਿਚ ਧਨੌਲਾ ਜ਼ਿਲ•ਾ ਬਰਨਾਲਾ, ਨਾਭਾ ਜ਼ਿਲ•ਾ ਪਟਿਆਲਾ, ਜਗਰਾਂਓ ਜ਼ਿਲ•ਾ ਲੁਧਿਆਣਾ ਅਤੇ ਕੁਰਾਲੀ ਜ਼ਿਲ•ਾ ਸਾਹਿਬਜਾਦਾ ਅਜੀਤ ਸਿੰਘ ਨਗਰ ਰੱਖੇ ਗਏ ਹਨ। ਉਨ•ਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਕਿਲਿਆਂ ਵਾਲੀ ਵਿਖੇ ਉਸਾਰਿਆ ਗਿਆ ਪਸ਼ੂ ਮੇਲਾ ਮੈਦਾਨ ਉੱਤਰ ਭਾਰਤ ਦਾ ਪਹਿਲਾਂ ਪਸੂ ਮੇਲਾ ਮੈਦਾਨ ਹੈ ਜਿਸ ਵਿਚ ਅਤਿ ਆਧੁਨਿਕ ਸਹੁਲਤਾਂ ਮੁਹਈਆਂ ਕਰਵਾਈਆਂ ਗਈਆਂ ਹਨ।
ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਪੰਜਾਬ ਨੇ ਹੋਰ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿੰਦਿਆਂ ਅੱਗੇ ਦਸਿਆ ਕਿ ਰਾਜ ਵਿਚ ਡੇਅਰੀ ਅਤੇ ਪਸ਼ੂ ਪਾਲਣ ਧੰਦੇ ਨੂੰ ਉਤਸਾਹਿਤ ਕਰਨ ਲਈ ਤਿੰਨ ਡੇਅਰੀ ਸਿਖਲਾਈ ਕੇਂਦਰ ਵੇਰਕਾ ਜ਼ਿਲ•ਾ ਅਮ੍ਰਿੰਤਸਰ, ਗਿੱਲ ਜ਼ਿਲ•ਾ ਮੋਗਾ ਅਤੇ ਅਬੁਲ ਖੁਰਾਣਾ ਜ਼ਿਲ•ਾ ਸ੍ਰੀ ਮੁਕਤਸਰ ਸਾਹਿਬ ਵਿਖੇ ਸਥਾਪਿਤ ਕੀਤੇ ਗਏ ਹਨ। ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਤਲਵਾੜਾ ਅਤੇ ਕਾਲਝਰਾਨੀ ਵਿਖੇ ਪਸ਼ੂ ਧਨ ਲਈ ਦੋ ਖੇਤਰੀ ਖੋਜ ਕੇਂਦਰ ਵੀ ਸਥਾਪਿਤ ਕੀਤੇ ਗਏ ਹਨ। ਉਨ•ਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਰਾਜ ਵਿਚ 19 ਵੈਟਰਨਰੀ ਹਸਪਤਾਲਾਂ ਦੀਆਂ ਇਮਾਰਤਾਂ ਦੀ ਉਸਾਰੀ ਮੁੰਕਮਲ ਕੀਤੀ ਗਈ ਅਤੇ 9 ਵੈਟਰਨਰੀ ਪੋਲੀਕਲੀਨਕ ਜ਼ਿਲ•ਾ ਪੱਧਰ ਤੇ ਖੋਲੇ ਗਏ ਹਨ। ਉਨ•ਾਂ ਇਹ ਵੀ ਕਿਹਾ ਕਿ ਕਿਸਾਨਾਂ ਦਾ ਆਰਥਿਕ ਪੱਧਰ ਉੱਚਾ ਚੁੱਕਣ ਲਈ ਸਰਕਾਰੀ ਮਦਦ ਨਾਲ 4000 ਡੇਅਰੀ ਫਾਰਮ ਖੋਲੇ ਗਏ ਹਨ ਅਤੇ 8 ਹੋਰ ਵੈਟਰਨਰੀ ਕਾਲਜਾਂ ਨੂੰ ਖੋਲਣ ਦੀ ਮੰਜੂਰੀ ਦਿੱਤੀ ਗਈ ਹੈ। ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਪੰਜਾਬ ਨੇ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਹੁਣ ਤੱਕ ਪੰਜਾਬ ਸਰਕਾਰ ਨੇ 25 ਪਸ਼ੂ ਧਨ ਮੇਲੇ ਆਯੋਜਿਤ ਕੀਤੇ ਹਨ। ਇਸ ਤੋਂ ਉਪਰੰਤ ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਪੰਜਾਬ ਨੇ ਗੁਰੂ ਨਾਨਕ ਕਾਲਜ ਆਫ ਮੈਨੇਜਮੈਂਟ ਅਤੇ ਟੈਕਨੋਲਾਜੀ ਕਿਲਿਆਂ ਵਾਲੀ ਵਿਖੇ ਸਵਰਗੀ ਬੀਬੀ ਸੁਰਿੰਦਰ ਕੌਰ ਬਾਦਲ ਜੀ ਦੀ ਯਾਦ ਵਿਚ ਉਸਾਰੀ ਗਈ ਲਾਈਬ੍ਰੇਰੀ ਦਾ ਉਦਘਾਟਨ ਵੀ ਕੀਤਾ।
ਇਸ ਮੌਕੇ ਪ੍ਰੈਸ ਪੱਤਰਕਾਰਾਂ ਦੇ ਸਵਾਲਾਂ ਦਾ ਜਵਾਬ ਦਿੰਦਿਆਂ ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਪੰਜਾਬ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਚੋਣਾਂ ਕਦੋਂ ਕਰਵਾਉਣੀਆਂ ਹਨ ਇਹ ਫੈਸਲਾ ਭਾਰਤ ਦੇ ਚੋਣ ਕਮਿਸ਼ਨ ਨੇ ਕਰਨਾ ਹੈ। ਅਸੀਂ ਹਰ ਸਮੇਂ ਚੋਣਾਂ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹਾਂ ਭਾਵੇਂ ਉਹ ਮਿੱਥੇ ਸਮੇਂ ਤੇ ਕਰਵਾਉਣ ਜਾ ਇਸ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ।
ਲੰਬੀ ਵਿਧਾਨ ਸਭਾ ਹਲਕੇ ਦੇ ਪਿੰਡਾਂ ਵਿਚ ਆਯੋਜਿਤ ਸੰਗਤ ਦਰਸ਼ਨ ਪ੍ਰੋਗਰਾਮ ਦੇ ਤਹਿਤ ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਪੰਜਾਬ ਨੇ ਲੋਕਾਂ ਦੇ ਭਾਰੀ ਇੱਕਠਾਂ ਨੂੰ ਸੰਬੋਧਨ ਕਰਦਿਆਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਦੇਸ਼ ਵਿਚ ਗਰੀਬੀ, ਅਨਪੜ•ਤਾ ਅਤੇ ਬੇਰੁਜਗਾਰੀ ਲਈ ਕੇਂਦਰ ਦੀਆਂ ਕਾਂਗਰਸ ਸਰਕਾਰਾਂ ਜਿੰਮੇਵਾਰ ਹਨ ਜਿੰਨ•ਾਂ ਨੇ ਅਜੇ ਤੱਕ ਕੋਈ ਵੀ ਸਾਰਥਿਕ ਨੀਤੀਆਂ ਨਹੀਂ ਬਣਾਈਆਂ ਜਿਸ ਨਾਲ ਇੰਨ•ਾਂ ਅਲਾਮਤਾਂ ਤੋਂ ਛੁਟਕਾਰਾ ਪਾਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ। ਉਨ•ਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਸੰਗਤ ਦਰਸ਼ਨ ਪ੍ਰੋਗਰਾਮ ਲੋਕਾਂ ਦੀ ਸਹੁਲਤ ਲਈ ਸੁਰੂ ਕੀਤੇ ਗਏ ਹਨ ਜਿਸ ਨਾਲ 'ਲੋਕਾਂ ਦੀ ਸਰਕਾਰ ਲੋਕਾਂ ਦੇ ਦੁਆਰ' ਦੇ ਮਨਸ਼ੇ ਨਾਲ ਰਾਜ ਦੇ ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ ਮੌਕੇ ਤੇ ਹੀ ਉਨ•ਾਂ ਦੀਆਂ ਸਮਸਿਆਵਾਂ ਦਾ ਹੱਲ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਪਿੰਡਾਂ ਅਤੇ ਸ਼ਹਿਰਾਂ ਦੇ ਵਿਕਾਸ ਲਈ ਵਿਕਾਸ ਗ੍ਰਾਂਟਾਂ ਦਿੱਤੀਆਂ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ। ਅੱਜ ਦੇ ਸੰਗਤ ਦਰਸ਼ਨ ਪ੍ਰੋਗਰਾਮ ਤਹਿਤ ਪਿੰਡ ਮਾਨ ਨੂੰ 3.05 ਲੱਖ, ਪਿੰਡ ਗੱਗੜ ਨੂੰ 8.40 ਲੱਖ, ਮਿਠੜੀ ਬੁੱਧ ਗਿਰ ਨੂੰ 13.50 ਲੱਖ, ਸਿੰਘੇ ਵਾਲਾ ਨੂੰ 6 ਲੱਖ, ਢਾਣੀ ਸਿੰਘੇ ਵਾਲਾ ਨੂੰ 18 ਲੱਖ, ਫਤੂਹੀਵਾਲਾ ਨੂੰ 23.20 ਲੱਖ, ਵੜਿੰਗ ਖੇੜਾ ਨੂੰ 30.70 ਲੱਖ, ਪਿੰਡ ਕਿਲਿਆਂ ਵਾਲੀ ਨੂੰ 13.60 ਲੱਖ ਅਤੇ ਮੰਡੀ ਕਿਲਿਆਂ ਵਾਲੀ ਨੂੰ 33.90 ਲੱਖ ਰੁਪਏ ਦੀ ਗ੍ਰਾਂਟ ਸਮੇਤ ਕੁੱਲ 1 ਕਰੋੜ 50 ਲੱਖ ਰੁਪਏ ਦੀਆਂ ਗਾਂਟਾਂ ਵੰਡੀਆਂ।
ਹੋਰਨਾਂ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਇਸ ਮੌਕੇ ਮੇਜ਼ਰ ਭੁਪਿੰਦਰ ਸਿੰਘ ਢਿਲੋਂ, ਸ: ਮਨਜੀਤ ਸਿੰਘ ਬਰਕੰਦੀ ਜ਼ਿਲ•ਾ ਪ੍ਰਧਾਨ ਸ੍ਰੋਮਣੀ ਅਕਾਲੀ ਦਲ, ਸ: ਅਵਤਾਰ ਸਿੰਘ ਬੰਨਵਾਲਾ, ਹਰਮੀਤ ਸਿੰਘ ਭਿਟੀਵਾਲਾ ਚੇਅਰਮੈਨ, ਅਕਾਸ਼ਦੀਪ ਸਿੰਘ ਪ੍ਰਧਾਨ ਐਸ.ਓ.ਆਈ. ਜਸਪਾਲ ਸਿੰਘ ਸਰਪੰਚ, ਸ੍ਰੀ ਕੇ.ਜੀ. ਐਸ. ਚੀਮਾ ਵਿਸ਼ੇਸ ਪਿੰ੍ਰਸੀਪਲ ਸਕੱਤਰ ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਪੰਜਾਬ, ਸ੍ਰੀ ਅਰਸ਼ਦੀਪ ਸਿੰਘ ਥਿੰਦ ਡਿਪਟੀ ਕਮਿਸ਼ਨਰ ਸ੍ਰੀ ਮੁਕਤਸਰ ਸਾਹਿਬ, ਸ੍ਰੀ ਅਮਿਤ ਢਾਕਾ ਐਡੀਸ਼ਨਲ ਡਿਪਟੀ ਕਮਿਸ਼ਨਰ (ਵਿਕਾਸ), ਸ੍ਰੀ ਇੰਦਰ ਮੋਹਨ ਸਿੰਘ ਐਸ.ਐਸ.ਪੀ. ਸ੍ਰੀ ਮੁਕਤਸਰ ਸਾਹਿਬ, ਸ੍ਰੀ ਭੁਪਿੰਦਰ ਮੋਹਨ ਸਿੰਘ ਸਹਾਇਕ ਕਮਿਸ਼ਨਰ, ਦਲਵਿੰਦਰਜੀਤ ਸਿੰਘ ਐਸ.ਡੀ.ਐਮ., ਸ੍ਰੀ ਐਚ. ਐਸ. ਸਰਾਂ ਡੀ.ਡੀ.ਪੀ.ਓ. ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਸਿੰਘ ਨਿਗਰਾਨ ਇੰਜਨੀਅਰ ਪੰਚਾਇਤੀ ਰਾਜ, ਸ੍ਰੀ ਪ੍ਰਵੀਨ ਗਾਂਧੀ ਕਾਰਜਕਾਰੀ ਇੰਜਨੀਅਰ ਪੰਚਾਇਤੀ ਰਾਜ ਵੀ ਹਾਜਰ ਸਨ।


मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह ने पशुमेला मैदान का उदघाटन किया

डबवाली-पंजाब राज्य में पशु व्यपारियों को बेहतर सुविधाए प्रदान करने के लिए पशु मंडियो को विस्तार किया जा रहा है इसी कडी में आज किलियावाली मंडी में 759.5 लाख रूपऐ की लागत से बने पशुमेला मैदान का उदघाटन पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह ने अपने करकमलों द्वारा किया। उदघाटन उपरान्त श्री बादल ने कहा कि किलियावाली मंडी में विस्तार किया गया पशुमेला मैदान उत्तर भारत का पहला पशुमेला मैदान है जिसमें सभी आधुनिक सुविधाऐं मुहइया करवाई गई है। मुख्यमंत्री बादल ने कहा कि राज्य में पशुपालन को बढावा देने के लिए तीन डेयरी सिखलाई कैन््रद्र अमृतसर, मौगा व मुक्तसर जिला में स्थापित किऐ गऐ है इसके इलावा तलवाडा व कालझरानी में पशुधन के लिए खेतरीखोज कै न्द्र भी स्थापित किया है उन्होने कहा कि प्रेदश में 19 वेटनरी अस्पताल की इमारतो की उसारी कार्य किया गया है तथा 9 वेटनरी जिला पोलिकलिनक खोले गऐ है उन्होने कहा कि किसानो की आर्थिक स्थिति को ऊंचा उठाने के लिए सरकारी सहायता से चार हजार डेयरी फार्म खोले गऐ है तथा आठ नऐ वेटनरी कालेंज खोलने की मजुरी दी गई है। मुख्यमंत्री बादल ने बताया कि पंजाब सरकार की और से अब तक 25 पशुधन मेले आयोजित किऐ गऐ है इस बवसर पर मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने किलियावाली मंडी में स्थिति गुरूनानक कालेंज आँफ मेनेजमैंट एव टेेकनोलजी द्वारा स्थापित स्वर्गीय बीबी सुरेन्द्र कौर की याद में लाईबरेरी का उदघाटन किया। इस अवसर पर मेजर भुपेन्द्र ढिल्लो,मनजीत बरकंदी,अवतार सिंह बनवाला , हरमीत सिंह भिटीवाला,अकाश दीप सिंह,जसपाल सिंह सरपंच,के.जी.एस.चीमा,अर्शदीप सिंह थिंद,वेद प्रकाश जिंदल,अरूण जिंदल, नीरज जिंदल,प्रिसीपल इन्दिरा अरोड़ा वअन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे

शनिवार, 18 जून 2011

अध्यापकों ने किया प्रदर्शन, फूंकी अर्थी

डबवाली (यंग फ्लेम)निकटवर्ती गांव में सिघेंवाला में आज बेरोजगार अध्यापक संगठनों द्वारा पंजाब खेत मजदूर यूनियन, भारतीय किसान यूनियन(एकता) और सर्व भारत नौजवान सभा के सहयोग से पंजाब सरकार की अर्थी फंूकी सरकार से विरोध में नारेबाजी की। इस अवसर पर बीएड, ईटीटी, डीपीएड एवं आर्ट एंड क्राफट अध्यापक संगठनों के सदस्य बलजीत सिंह कंदू,खेड़ा, सुखजिंद्र सिंह, नवजीप सिंह, राजेंद्र सिंह, ने प्रदेश सरकार द्वारा बेरोजगारों को रोजगा देने की बजाए योग्यता जांचने के बहाने से उनकी 25-25 वर्ष की पढ़ाई को नजर अंदाज करते हुए 90 मिनट का टैस्ट लेने के बहाने उन्हें परेशान किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि गत 5 जून को अपनी मांगों को लेकर लंबी पहुंचे अध्यापकों पर किए गए अत्याचार के विरोध में वह गांव-गांव जाकर सरकार की कब्र खोदने व टीईटी को रद्द करवाने के लिए यह मुहिम शुरू की है। इसके तहत बेरोजगार अध्यापकों द्वारा दूसरें संगठनों के सहयोग से गांव-गांव में सरकार के विरोध में प्रदर्शन किए जा रहे है। इस मौके पर पंजाब खेत मजदूर यूनियन के जिला प्रधान नानक सिंह, किसान यूनियन (एकता) के सदस्य गुरपाश सिंह, सर्वभारत नौजवान सभा के अश्वनी कुमार ने कहा कि सरकार पढ़े-लिखे नौज्वानों को नौकरी देने की बजाए उन्हें बेजह से परेशान कर रही है। यह सरकार के अत्यचार को एक जागरूक समाज द्वारा किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जाएगा। इस मौके पर तारा चंद, गुरविंद्र सिंह, इकबाल सिंह, विजय कुमार शर्मा, जगवीर सिंह आदि संगठनों के सदस्य उपस्थित थे।

शुक्रवार, 3 जून 2011

Rich Tributes paid to Mrs Surinder Kaur Badal by noted National political leaders and religious personalities

CM Expresses gratitude for sharing family’s grief

Malout-Glowing tributes were paid to Mrs Surinder Kaur Badal, the wife of Punjab Chief Minister Mr Parkash Singh Badal and the mother of Deputy Chief Minister Mr Sukhbir Singh Badal by the eminent national political leaders and religious personalities at the Bhog and antim ardaas ceremony organised here today at the New grain market.

Thousands of people from across the state have converged at the venue of bhog ceremony since morning to pay homage to Mrs Badal. Besides scores of regional leaders of various political parties, Cabinet Ministers, Chief Parliamentary Secretaries, top brass of the state civil and Police administration, party workers of SAD-BJP and the members of the Shiromani Gurudwara Prabhandak Committee (SGPC) also attended the bhog and antim ardaas of Mrs Badal.

Expressing gratitude to the people for sharing the grief in this hour of crisis, the Punjab Chief Minister Mr Parkash Singh Badal said that he on the behalf of Badal family was highly indebted to each one of you present here for showing a sense of belonginess and generosity. He said, “It was not only a personal loss to the family but also to the region and its people with whom my wife shared emotional ties since long for ensuring its overall development and their well being”.

Mr Badal profusely thanked the Prime Minister Dr Manmohan Singh who along with his wife shared his heart felt condolences telephonically with him and his family immediately after hearing about the sad demise of Mrs Badal. He also appreciated benevolent gesture of several leaders of national stature, who expressed sympathies with the family cutting across the political affiliations.

Paying tributes to Mrs Surinder Kaur Badal, the former Deputy Prime Minister Mr LK Advani recalled his ties with the Badal family since the formation of Bharatiya Jan Sangh under the leadership of Dr Shayama Prasad Mukherjee and later BJP and now the SAD being one of its the most trustworthy and strongest ally of the National Democratic Alliance (NDA). Mr Advani asked the people to take a vow to eradicate the menace of female foeticide from Punjab as a real tribute to Mrs Badal and also lauded the efforts of Member Parliament Mrs Harsimrat Kaur Badal, who had already launched a crusade against it and positive results were forthcoming.

In his address to offer tributes to Mrs Badal, the former BJP National President and Ex Chief Minister of Uttar Pradesh, Mr Rajnath Singh said she was a multi-faceted personality with the qualities of head and heart. He said Mrs Badal throughout remained a source of inspiration behind Mr Parkash Singh Badal’s successful political career who steered the state as Chief Minister for four terms

Leader of the opposition in the Lok Sabha Mrs Sushma Swaraj said that Mrs Badal was a unique example of womanhood who strived hard for the empowerment of women and played a significant role in championing the cause of women, especially in the rural sector. She said Mrs Badal’s apt handling of domestic affairs gave an opportunity to Mr Badal to emerge as the tallest political figure on the national arena, for which he was even today respected by one and all for his rare political acumen and statesmanship.

Paying homage to Mrs Badal, the Gujrat Chief Minister Mr Narinder Kumar Modi described her as a moving spirit for Mr Parkash Singh Badal’s dynamic political personality and her son Mr Sukhbir Singh Badal’s tremendous abilities and capabilities which had put Punjab in the high orbit of growth and development.

Former Haryana Chief Minister and President of Indian National Lok Dal (INLD) Mr Om Parkash Chautala in his tributes to Mrs Badal said that her immense contribution at the domestic front had enabled the Punjab Chief Minister Mr Parkash Singh Badal to achieve glory in political circles because he could exclusively devote himself to the overall development of state and for the welfare of its people, especially the peasantry. Without mincing any words Mr Chautala said politics was a whole time job and Mr Badal had done justice to it only due to the sheer dedication and motivation of his wife.

Former Member Parliament and Member of Working Committee of All India Congress Committee Mr Jagmeet Singh Brar recalled his affinity with Mrs Badal, who was just like a mother to him and said she was a perfect blend of love, compassion and faith. Mr Brar said that her contribution as a life partner in political life of Mr Badal was remarkable. He quoted, “Race is known by the womenhood”, which goes well with Mrs Badal’s charismatic personality.

In his homage to Mrs Badal the President Lok Bhalai Party and former Union Minister Mr Balwant Singh Ramoowalia said that the real tribute to her would be to ban the extravagant marriages in the state.

Member of National Executive of Communist Party of India Dr Joginder Dayal in his address paid to tributes Mrs Surinder Kaur Badal said that all of us should take a solemn pledge to do away with the social evil of female foeticide which was a slur on the Punjab’s rich cultural legacy.

While paying tributes to Mrs Badal the Managing Editor of the Ajit group of Newspapers Dr Barjinder Singh Hamdard said that she was an icon of Punjab, Punjabi and Punjabiyat as she always stood against the social maladies like dowry and female foeticide.

In his address Giani Gurbachan Singh the Jathedar Sri Akal Takht Sahib said Sardarni Surinder Kaur Badal was a perfect daughter, an accomplished wife and a caring mother who personified the concept of women hood in the right earnest.

Paying homage to Mrs Badal, the Head of Damdami Taksal Baba Harnaam Singh Dhumma said she motivated the people to organise community kitchen (Langar) at Sri Darbar Sahib and Kirtan Darbars in Punjab and other parts of country to propagate the basic tenets of sikhism amongst them especially the common masses.

Earlier Bhai Lakhwinder Singh, Bhai Harjinder Singh Srinagar Waale, Bhai Joginder Singh Riar and Bhai Ravinder Singh performed the gurbani kirtan and the antim ardas was performed by Bhai Kulwinder Singh.

शनिवार, 28 मई 2011

सुरेंद्र कौर बादल की अस्थियां चुनने के बाद जल प्रवाह

डबवाली (यंग फ्लेम)गांव बादल के रामबाग में बीबी सुरेंद्र कौर बादल के फूल चुनते वक्त मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल सुखबीर सिंह बादल अपने आंसूओं को रोक सकें। उनकी आंखों में आंसू देखकर वहां पर मौजूद पार्टी कार्यकर्ता आम लोगों की भी आंखें नम हो गई। बीबी सुरेंद्र कौर के फूल चुनने के लिए मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल, सुखबीर सिंह बादल, उनकी बेटी परनीत कौर, दामाद आदेश प्रताप सिंह कैरों, हरसिमरत कौर बादल, गुरदास सिंह बादल, भाई इंद्रजीत सिंह पौत्रा आनतवीर सिंह बादल, पौत्री हरकीरत कौर गुलीन कौर, दोहते दिलशेर सिंह जय कैंरो, हरदीप इंद्र सिंह बादल, मेजर भूपेंद्र सिंह बादल, महेशइंद्र सिंह बादल, परमजीत सिंह लाली, सर्वजीत सिंह बादल हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला, बिक्रमजीत सिंह के अलावा अनेक परिवारिक सदस्य मौजूद थे। ससे पूर्व शिरोमणी गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधा अवतार सिंह मक्कड़ द्वारा रदास की गई। फूल चुनने के उपरांत उपमुख्यमंत्री सुखबी सिंह बादल अपनी माता की अस्थियों को एक कलश लेकर श्री कीरतपुर साहिब के लिए रवाना हो गए। जहां उन्हें जल प्रवाह कर दिया गया।

मंगलवार, 17 मई 2011

क्या फैसला अकालियों का, ऐलान दिल्ली का

मामला मुक्तसर जिला कांग्रेस अध्यक्ष की नियुक्ति का
डबवाली-नई दिल्ली स्थित कांग्रेस पार्टी की हाईकमांड द्वारा पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारियों की जारी नई सूची में सिख प्रभाव और जागीरदार राजनीतिज्ञों का गढ़ माने जाते जिला श्री मुक्तसर साहब में एक व्यापारी व साधारण नेता श्री गुरदास गिरधर को जिलाध्यक्ष नियुक्त कर मुख्य मंत्री श्री प्रकाश सिंह बादल के गृह जिले में सत्ता पक्ष अकाली दल के लिए आगामी विधानसभा चुनावों में अप्रत्यक्ष रूप में रास्ता आसान कर दिया है।
हमेशा से बड़े-बड़े जागीरदार जटट् सिक्ख नेताओं की राजनीति के प्रभाव में इस जिले में जहाँ मुक्तसर, मलोट और गिद्दड़बाहा शहरी इलाके होने के बावजूद सिक्ख वोट बैंक व सिखी पर आधारत राजनीति का दबदबा रहा है। जिस के तहत यहां पंजाब के पूर्व मुख्य मंत्री स्व. श्री हरचरन सिंह बराड़, अकाली राजनीति के बाबा बोहड माने जाते रहे श्री तेजा सिंह बादल, मौजूदा मुख्य मंत्री श्री प्रकाश सिंह बादल और दरवेश राजनीतिज्ञ के रूप में प्रख्यात रहे स्व: जत्थेदार जगदेव सिंह खुडड्ीयां (सांसद फरीेदकोट लोकसभा क्षेत्र), पूर्व सांसद व वरिष्ठ कांग्रेस नेता, श्री जगमीत सिंह बराड़, भाई शमिन्दर सिंह और पूर्व विधायक श्री दर्शन सिंह मराड़ सरीखे नेता अपने-अपने समय और पैठ के मुताबिक मुक्तसर जिल की सियासत भारी रहे हैं।
यह भी जमीनी हकीकत है कि पंजाब के सीमावर्ती जिले मुक्तसर ने पंजाब की राजनीति पर बहुल लंबे समय तक एकछत्र राज किया है, जो कि मौजूदा समय में भी बरकरार है। इस जिले में चाहे कि हिंदु वोटरों की संख्या काफी है परन्तु फिर भी वह इतनी नहीं कि सिक्ख वोटों को किसी पक्ष से प्रभावित कर सके। जिले में बाकी राजसी पार्टियां ही नहीं बल्कि धर्म निष्पक्ष पार्टी के तौर पर जानी जाती कांग्रेस पार्टी के संदर्भ में इतिहास गवाह है कि पिछले काफी समय से कांग्रेस पार्टी के जिलाध्यक्ष के पद पर सिक्ख नेता ही काबज होते रहे हैं। जिसके चलते सिख बहुसंख्यक इस जिले में कांग्रेस का सिख वोट बैंक चाहे अकाली दल पर भारी नहीं पड़ सका परन्तु मुकाबला करन के पूर्णतय समर्थ जरूर रहा।
राजनैतिक पयवेक्षको का यह भी मानना है कि सैंकड़े एकड़ जमीनें और करोड़ों-अरबों की जायदादों वाले जागीरदार नेताओं की राजनीतिक सरजमीं (जिला मुक्तसर) पर जहां राजनीति का एक दाव खेलते समय करोड़ों रुपए तक की खर्च करने की परवाह नहीं की जाती, वहां एक आम साधारण और व्यापारी नेता द्वारा जिल में बडे स्तर पर गुटबाजी की शिकार कांग्रेस पार्टी को उभार कर सत्तापक्ष अकाली दल (बादल) और पी.पी.पी. के साथ आमने -सामने की लड़ाई में से कांग्रेस की किश्ती पार निकाल सकना असंभव माना जा रहा है।
कांगे्रस आलाकमान द्वारा मुक्तसर जिलेके तीन विधानसभा क्षेत्र मुक्तसर, गिद्दड़बाहा और मलोट के फिरोज़पुर लोकसभा क्षेत्र के अधीनस्थ आने कारण इस लोकसभा क्षेत्र से दो बार किस्मत आजमा चुके कांग्रेस के हाई-प्रोफाइल नेता और अखिल भारतीय कांग्रेस के स्थायी सदस्य श्री जगमीत सिंह बराड़ की सिफ़ारिश पर मुक्तसर जिले के कांग्रेस अध्यक्ष की नियुक्ति की है। परंतु इस सब बीच कांग्रेस आलाकमान शायद यह भूल बैठी कि मुक्तसर जिले में पंजाब के मौजूदा मुख्य मंत्री श्री प्रकाश सिंह बादल का गृह विधानसभा क्षेत्र लम्बी भी पडता है। जहां से सिर्फ मुक्तसर जिले की सियासत नहीं बल्कि समूचे प्रदेश की अकाली राजनीति का कहानीयां गढी जाती है और लम्बी विधानसभा क्षेत्र का राजनैतिक दृश्य ही पूरे जिले की राजनैतिक धुरी को तय करता है। ऐसे में बाबा बोहड सीनियर बादल और परिपक्व मुहिमबाज उप मुख्य मंत्री सुखबीर सिंह बादल के सामने श्री गुरदास गिरधर जैसे सीधे और आर्थिक पक्ष से आम साधारण व्यक्ति के ज्यादा प्रभावशाली साबित होने के बारे शंका जाहर की जा रही है। जबकि दूसरे तरफराजनीतिक पर्यवेक्षको की राय में श्री मुक्तसर साहिब जिले में ऐसा गतिशील और बेबाक नेता जिला कांग्रेस अध्यक्ष के पद पर नियुक्त किया जाना चाहिए था, जो कि कैप्टन अमरिन्दर सिंह की तर्ज पर प्रदेश के मौजूदा हाकिमों को उन को गृह जिले में सख्त टक्कर दे कर अकालियों के सूबे पर 25 वर्षों तक राज करने के सपनों को नेसताबूत कर सके।
पार्टी के एक नेता ने नाम ना छापने की शर्त पर कहा कि पार्टी के इस फैसले से लगता है कि जैसे जिला कांग्रेस कमेटी श्री मुक्तसर साहिब के अध्यक्ष का फैसला सुखबीर सिंह बादल ने किया है और इसका ऐलान आल इंडिया कांग्रेस समिति हैडक्र्वाटर से हुआ है।
इसी दौरान संपर्क करने पर जिला श्री मुक्तसर साहब के नवनियुक्त अध्यक्ष श्री गुरदास गिरधर ने खुद को जन्मजात व टकसाली कांग्रेसी करार देते कहा कि वह स्वतंत्रता सेनानी श्री बिहारी लाल के पुत्र हैं और उन की जिले के ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में पूरी पैठ है। सिख राजनीति से भरपूर जिले में हिंदु वर्ग के साथ संबन्धित होने बावजूद खुद को प्रभावशाली अध्यक्ष के तौर पर साबित करनेके बारे उन्होने कहा कि कांग्रेस एक धर्म निष्पक्ष पार्टी है जहां धर्म और जाति-पात से पहले लोकहित हैं।

बुधवार, 24 नवंबर 2010

समयसारिणी को लेकर रोडवेज व प्राईवेट बस कम्पनी के करिन्दे आपस में भिड़, लगाया जाम

डबवाली- स्थानीय पंजाब बस अड्डा पर समय सारिणी को लेकर पंजाब बस रोडवेज के कर्मचारी व एक प्राईवेट बस के कर्मचारियों की आपस में भिड़न्त हो गई। इस झगड़े में प्राईवेट बस के कर्मचारियों ने पंजाब रोडवेज के परिचालक के साथ हाथापाई कर उसका कैश बैग और टिकटें काटने वाली मशीन छीन ली और वहां से फरार हो गए। घटना के बाद प्राईवेट बस के कर्मचारियों के खिलाफ कार्यवाही की मांग को लेकर पंजाब रोडवेज के कर्मचारियों ने पंजाब बस स्टैंड पर जाम लगा दिया। रोड़ जाम होने के कारण बस अड्डे के दोनों ओर वाहनों की लम्बी कतारें लग गई। आधे घंटे के बाद किलियांवाली पुलिस चौकी के कर्मचारियों ने मौके पर पहुंच कर जाम को खुलवाया। पंजाब रोडवेज की दिल्ली से फिरोजपुर तक चलने वाली बस पीबी05-एम6096 के चालक परमजीत सिंह और परिचालक जसवीर सिंह ने बताया कि उनका पंजाब बस अड्डे से 11.55 से रवाना होने का समय है। उन्होंने आरोप लगाया है कि नोरदन ट्रांस्पोर्ट कंपनी के चालक व परिचालक बिना परमिट और बिना समय में उनके अधिकृत समय में धक्केशाही कर अपनी बस किलियांवाली मुक्तसर मार्ग पर चला रहे हैं। जिसका आज उन्होंने विरोध किया तो वे मारपीट पर उतर आये और उनका कैश बैग जिसमें आठ हजार रूपयों के करीब की नगदी और टिकटें काटे जाने वाली मशीन छीन कर फरार हो गये। उन्होंने बताया कि इस की शिकायत किलियांवाली पुलिस को दे दी गई है। पुलिस इस मामले की जांच कर रही है। इस बारे में जब अड्डा इंचार्ज देवेन्द्र पाल ङ्क्षसह से दूरभाष पर बात की गई तो उन्होंने बताया कि रोडवेज की बस चलने का समय 11.55 ही है। इस समय के दौरान नोरदर्न बस के जिन कर्मचारियों ने रोडवेज के कर्मचारियों से हाथापाई की है उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाऐगी। सूचना उपरान्त मौका पर पहुंचे थाना लम्बी के एसएचओ हरमिन्द्र चमेली ने कहा कि किसी को भी कानून अपने हाथ में नहीं लेने दिया जाऐगा तथा यातायात को बाधित करने वालों को भी बख्शा नहीं जाऐगा।

बुधवार, 17 नवंबर 2010

लुधियाना को बनाया जाएगा सोलर सिटी

लुधियाना-केंद्र सरकार ने प्रदेश के 3 जिलों लुधियाना, अमृतसर जालंधर को सोलर सिटी के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। यहां सोलर एनर्जी पैदा करने की संभावनाओं का पता लगाने के लिये 90 लाख रुपये भी दिये जा चुके हैं। यह सर्वेक्षण छह माह में मुकम्मल किया जाना है।
यह जानकारी पंजाब एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी के संयुक्त निदेशक इंजी. रविंदर सिंह ने दी। पीएचडी चैंबर, रिन्यूवेबल एनर्जी केंद्र सरकार व पंजाब एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (पेडा) के सहयोग से रिन्युवेबल ऑप्शन फॉर इंडस्ट्रियल यूनिट विषय पर आयोजित सेमीनार को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पंजाब, सोलर एनर्जी के प्रयोग के मामले में हरियाणा से काफी पीछे है।
सभी व्यवसायिक केंद्रों, होटलों, अस्पतालों इत्यादि में सोलर ऊर्जा का उपयोग किया जाना आवश्यक है। इस संबंध में 2006 में नोटिफिकेशन भी जारी हो चुका है। रिहायशी निर्माण में भी सोलर ऊर्जा के उपयोग को आवश्यक बताया गया है, लेकिन स्थानीय निकाय विभाग इसे लागू नहीं करवा पाया।
उन्होंने बताया कि जवाहर लाल नेहरू नेशनल सोलर मिशन के तहत राज्यों को सोलर ऊर्जा जनरेशन व सोलर वाटर हीटिंग के लिये लक्ष्य निर्धारित किये गए हैं। जिसके तहत प्रदेश में 30 फीसदी सब्सिडी की व्यवस्था भी की गई है। गुरदासपुर, अमृतसर, तरनतारण व फिरोजपुर जिलों में सब्सिडी सीमा 90 फीसदी रखी गई है। उक्त जिलों के गांव में स्ट्रीट लाइटें लगवाने इत्यादि के लिये 5.5 करोड़ रुपये भी जारी हो चुके हैं। इस दौरान सोलर वाटर हीटिंग प्रोजेक्ट भारत सरकार के प्रोजेक्ट मैनेजर अजीत गुप्ता ने कहा गैर रिवायती ऊर्जा स्तोत्रों का इस्तेमाल कर वातावरण को दूषित होने से बचाया जा सकता है। उन्होंने उद्यमियों से कहा कि वे सरकार की स्कीमों का लाभ उठाकर बिजली के क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो सकते हैं।
डॉ. संत राम ने कहा कि औद्योगिक संस्थायें रूफ टॉप फोटो वालटिक एनर्जी का प्रयोग कर बिजली का उत्पादन कर सकती हैं। लुधियाना जैसे नगर में सोलर ऊर्जा का प्रयोग कर 30 से 40 फीसदी ऊर्जा की बचत की जा सकती है। इस दौरान पेडा के जीएम अनुपम नंदा ने बताया कि वाटर हीटर के लिये 30 फीसदी सब्सिडी और गोबर गैस प्लांट स्थापित करने में 22 हजार रुपये की लागत में से 8 हजार रुपये सब्सिडी दी जाती है। जिससे रोजाना 6 क्यूबिक मीटर गैस तैयार होती है। जो एक सिलंडर के बराबर है। यह ग्रामीण क्षेत्रों के लिये काफी लाभदायक है। इस दौरान पीएचडी चैंबर के कनवीनर उपकार सिंह आहूजा, जिला उद्योग केंद्र के जीएम विश्वबंधु सहित कई लोग उपस्थित रहे।

शिकायत की तो कांग्रेसी नेता को गोली मारी

लुधियाना-तीन दिन पहले लुधियानामालेरकोटला रोड पर स्थित मिलाप पैलेस में गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हुए कांग्रेसी नेता रेशम सिंगला ने लुधियाना डीएमसी में होश में आने के बाद पुलिस को अपना बयान दर्ज कराया। रेशम ने बताया कि उन्हें गोली मारी गई थी। जबकि उनके बयान से पहले यह शंका जताई जा रही थी कि पिस्तौल जमीन पर गिरने से गोली स्वयं चल गई थी। डीएसपी रत्न सिंह बराड़ ने बताया कि पहले घटना के बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं थी पर रेशम के होश में आने के बाद उनके ब्यानों के आधार पर धारा 307 के अधीन थाना पायल में पैलेस के मैनेजर कमल पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। रेशन के अनुसार वह पैलेस में 14 नवंबर को वैवाहिक प्रबंध के बारे में पैलेस मैनेजर से बातचीत करने गया था। प्रबंध सही ना होने पर दोपहर को जब वह दोबारा शिकायत करने गया तो मैनेजर कमल ने रोष में आकर उसे गोली मार दी। उल्लेखनीय है रेशम सिंगला की हालत गंभीर है तथा डाक्टरों के अनुसार उनके शरीर का नीचला हिस्सा बेजान हो चुका है। यहां यह भी बताने योग्य है कि मैनेजर कमल के विरुद्ध पहले भी लोगों पर पिस्तौल तानने के किस्से सामने आएं हैं। इस घटना को लेकर स्थानीय कांग्रेसी वर्करों लोगों में काफी रोष पाया जा रहा है

मंगलवार, 27 जुलाई 2010

सीवरेज लाईन चॉक,लोक परेशान सम्बन्धित विभाग न दे धियन

डबवाली- नगर के साथ लगती पंजाब क्षेत्र की मण्डी किलियांवाली में स्थित बाल मन्दिर स्कूल के समीप सीवरेज लाईन चॉक होने से स्कूल के छात्र-छात्राऐं, अभिभावकों, शिक्षकों तथा प्रबन्ध समिति को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
प्रिंसीपल देवगण ने बताया कि स्कूल के पास से गुजर रही सीवरेज की लाईन पिछले 20 दिनों से चॉक है तथा जिसके चलते सीवरेज का दुर्गन्धयुक्त गन्दा पानी एक से डेढ़ फुट तक स्कूल के मुख्य दरवाजे पर खड़ा है। उन्होंने बताया कि उनके द्वारा स्थानीय सम्बन्धित विभाग को कई बार मौखिक तथा लिखित रूप से अवगत करवाया जा चुका है तथा इसके अतिरिक्त स्कूल की प्रबन्ध समिति द्वारा उपमण्डल अधिकारी (ना.) मलोट, जनस्वास्थ्य विभाग के अभियन्ता मलोट, उपायुक्त महोदय मुक्तसर को भी कई बार लिखा जा चुका है। परन्तु परिणाम शून्य ही रहा। उन्होंने रोष व्यक्त करते हुए बताया कि आज प्रात: उनके स्कूल की छात्रा कंवलप्रीत सूर्या तथा दिव्यांगी अपने साईकलों पर स्कूल आ रही थी कि स्कूल के मुख्य दरवाजे के सामने साईकल से गिर कर चोटिल हो गई तथा उनका स्कूल बैग भी पानी से भीग गया। जिसके फलस्वरूप कीमती किताबें भीग कर नष्ट हो गई। उन्होंने तुरन्त उक्त घटना की जानकारी छात्राओं के अभिभावकों तथा प्रबन्ध समिति को दी। वहां पर पहुंचे अभिभावकों, शिक्षक वर्ग तथा प्रबन्ध समिति सदस्यों ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर सम्बन्धित विभाग ने पिछले 20 दिनों से चॉक हुई सीवरेज व्यवस्था को शीघ्र ही सुचारू नहीं किया तो उनके कार्यालय के समक्ष धरना दिया जाऐगा।

शुक्रवार, 15 जनवरी 2010

पंजाब के मंत्रियों की गाडि़यों का चक्काजाम करेंगे ड्राइवर

चंडीगढ़,पंजाब विधानसभा के आगामी बजट सत्र के दौरान मंत्रियों व अधिकारियों के वाहनों का चक्का जाम करेंगे ड्राइवर। यह खुलासा गुरुवार को यहां पंजाब गवर्नमेंट ड्राइवर व टेक्निकल इंप्लाइज यूनियन के पदाधिकारियों व विभिन्न जिलों से आए कर्मचारी नेताओं ने किया। यूनियन नेताओं ने कहा कि फरवरी के पहले सप्ताह पंजाब के सभी जिलों में जिला स्तर पर व प्रदेश स्तर पर यूनियन के पदाधिकारियों का चुनाव कर लिया जाएगा। नेताओं ने कहा कि पहले सभी जिला स्तर पर ड्राइवरों की मांगों को लेकर चक्का जाम किया जाएगा फिर पंजाब विधानसभा के बजट सत्र दौरान मंत्रियों व अधिकारियों के वाहनों का चक्का जाम करके रोष प्रदर्शन किया जाएगा। यूनियन नेताओं ने कहा कि राज्य में ड्राइवरों से हो रहे भेदभाव को बंद करके पंजाब के सरकारी ड्राइवरों को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेशों अनुसार 700 रुपए स्पेशल पे की अदायगी शुरू की जाए। पंजाब के सभी सरकारी वाहनों का बीमा करवाया जाए और किसी हादसे में ड्राइवरों से कुल क्लेम का 50 प्रतिशत लिया जाना बंद किया जाए। डाक्टरों व नर्सो की तर्ज पर ड्राइवरों को भी पल्स पोलियो की ड्यूटी पर जाने का भत्ता दिया जाए। ड्राइवरों को केंद्र की तर्ज पर ओवरटाइम व कनवेंस अलाउंस दिया जाए।

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