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गुरुवार, 15 अप्रैल 2010

बापू बाजार में चोरी

उदयपुर--शहर के बापू बाजार में मंगलवार की रात 6 व्यापारिक प्रतिष्ठानों से नकदी सहित लाखों का माल चोरी हो गया। चोरो ने एक छत से दुकान में प्रवेश किया और एक के बाद एक छह प्रतिष्ठानों से माल चुराया। पिछले पंद्रह दिनों में एक ही अंदाज में चोरी की इस दूसरी बड़ी वारदात से व्यापारियों में दहशत का माहौल है। चोरी की बढ़ती वारदातों से पुलिस कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। गौरतलब है कि शक्तिनगर में गत 30 मई को चोरों ने छत और रोशनदान से दुकानों में घुसकर लाखों की चोरी की वारदात को अंजाम दिया है।
साड़ी शोरूम से एक लाख की नकदी चोरी : शक्तिनगर निवासी अशोक पुत्र गोविंदराम कालरा के महाराजा साड़ी पैलेस के चार मंजिला शोरूम से एक लाख रुपए नकद व कुछ सिक्के ले गए। तिजोरी भी तोड़ दी।
विज्ञापन एजेंसी व फोटोग्राफर की दुकान में चोरी : बापूबाजार टाउनहॉल लिंक रोड के सामने स्थित सेक्टर 11 निवासी शिवकुमार पुत्र मांगीलाल कसारा की विज्ञापन एजेंसी शिवा एडवरटाइजिंग एवं मार्केटिंग में चोरी हुई। शिवकुमार का बेटा दीपक ऑफिस खोलने आया तो देखा कि दरवाजा कब्जे सहित उखाड़ा हुआ था और अलमारी सहित सारा सामान बिखरा पड़ा था। यहां से चोर 19 हजार 987 रुपए और एक मोबाइल चुरा लिया।
इसी इमारत में दूसरे फ्लोर पर फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी और एलबम तैयार करने की एजेंसी पुष्पक डिजिटल से चोर लकड़ी का दरवाजे का तोड़ अंदर घुसे। यहां से 15 सौ रुपए नकद, दो तोला सोने का लॉकेट और एक अंगूठी चुरा ले गए। यहां काम करने वाला पायड़ा निवासी लोकेश सालवी जब सुबह आया तो घटना का पता चला। उसने मालिक उमेश चौहान को सूचना दी। चोरों ने यहां बल्लियां फंसाकर दरवाजा तोड़ा।

यहां भी हुई चोरी
चार मंजिला रेडिमेड शोरूम मालिक मेहता भवन, सुंदरवास निवासी प्रकाश पुत्र गोविंदलाल मेहता ने बताया कि चोर15 हजार नकद, रेडिमेड कपड़े चुरा कर ले गए।
भूपालपुरा निवासी हरकलाल पुत्र भोलीलाल दुग्गड़ की क्वालिटी प्लास्टिक एजेंसी में गल्ला तोड़कर दो हजार रुपए ले गए।
रामा इंजीनियरिंग की इमारत के प्रथम तल पर मेडिकल व्यवसायी प्रकाश डिस्ट्रीब्यूटर्स से तिजोरी तोड़कर करीब 30 हजार नकदी चोरी हुई। दुकान मालिक जवाहरनगर निवासी रामप्रकाश पुत्र लोकुमल सिंधी ने बताया कि चोर उनके पड़ोस में निर्माणाधीन इमारत से उनकी इमारत पर चढ़े और दरवाजा उखाड़ कर वारदात कर गए।

सिपाही थके हारे, चोरों के वारे न्यारे!

पुलिस गश्त के बावजूद पंद्रह दिनों में पुलिस नियंत्रण कक्ष से कुछ ही दूरी पर हुई चोरी की दो बड़ी वारदातों पर पुलिस कार्रवाई पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। शक्तिनगर में हुई चोरी की वारदात के अनुसंधान में पुलिस अब तक यह पता लगा पाई है कि इस प्रकार की वारदात डेरों में रहने वाले युवक करते हैं। पुलिस किसी डेरे में दबिश देती, उससे पहले चोरों ने दूसरी बड़ी वारदात को अंजाम दे दिया। दोनों ही वारदातों में एक ही मोडस ऑपरेंडी सामने आई है। दूसरी वारदात में घटना स्थल पर मिले फिंगर प्रिंट, फुटमार्क से मिलान करवाया जा रहा है। अगर ये प्रिंट मिलते हैं तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि दोनों वारदातों को एक ही गिरोह ने अंजाम दिया है। इस गिरोह में शामिल युवाओं की उम्र भी 20 से 25 साल के बीच बताई जा रही है। चोरों ने शक्तिनगर में वारदात के दौरान मोमबत्ती जलाई थी और बापूबाजार में इमरजेंसी लाइट। पहली वारदात में धूम्रपान किया था और दूसरी में शौच करके चले गए।

दुकानदार : गश्त बढ़ाएं
विज्ञापन एजेंसी के शिवकुमार रावत का कहना है कि अब तक सुरक्षित माने जाने वाला बापूबाजार भी चोरों के निशाने पर है। पुलिस सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध करें ताकि भविष्य में ऐसी वारदातें नहीं हो।

पुलिस : गिरोह की तलाश
एएसपी तेजराजसिंह का कहना है कि शक्तिनगर और बापू बाजार की वारदात को एक ही तरीका है। ऐसे गिरोह के सदस्यों के फिंगर प्रिंट निकलवाए हैं। खानाबदोश के डेरों में तलाशी की जा रही है। पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है।

अंबेडकर पर राहुल-माया टकराए

अंबेडकर नगर/लखनऊ अंबेडकर नगर में दलितों के जिस मसीहा की जयंती पर राजनीतिक घमासान मचा था, उसमें दोनों ही पक्ष अपने-अपने रुख से टस से मस नहीं हुए। माया सरकार ने राहुल को अंबेडकर प्रतिमा पर माल्यार्पण नहीं करने दिया तो कांग्रेस महासचिव ने मंच पर ही उनकी तस्वीर पर माल्यार्पण कर उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया। दस मिनट के अपने संबोधन में राहुल ने मायावती के मूर्तिप्रेम पर अपरोक्ष रूप से कटाक्ष करते हुए कहा कि केंद्र से वह गरीबों के लिए धन भेजते हैं, लेकिन लखनऊ आकर न जाने वह कहां चला जाता है। जवाब मायावती ने लखनऊ से दिया। उन्होंने कहा कि इन स्थलों-स्मारकों का किसी भी स्तर पर कितना ही विरोध क्यों न हो, उनकी पार्टी और सरकार तिल भर भी नहीं झुकेगी। राहुल गांधी जिस वक्त मंच पर चढ़े, उस वक्त अंबेडकर नगर का तापमान 43 डिग्री सेल्सियस पार कर रहा था, लेकिन राहुल के भाषण ने प्रदेश के सियासी पारे को और बढ़ा दिया। राहुल ने कहा कि वह जब गरीबों के घर जाते हैं, उनकी बात करते हैं तो कुछ लोगों को ऐतराज होता है। लोग सवाल उठाते हैं कि राहुल ऐसा क्यों कर रहे हैं। प्रदेश सरकार को तो मनरेगा और शिक्षा के अधिकार जैसे कानून भी पसंद नहीं आ रहे, जबकि दोनों का सबसे ज्यादा लाभ दलितों को मिलना है। राहुल ने चुनौती देने के अंदाज में कहा, मैं गरीबों की आवाज उठाता रहूंगा। युवाओं के लिए रोजगार लाऊंगा। सवाल करने वाले सवाल करते रहें, हम पीछे हटने वाले नहीं। उन्होंने व्यंगात्मक लहजे में कहा कि वह प्रदेश के विकास के लिए पैसा भेजते हैं, लखनऊ पहुंचकर वह पैसा न जाने कहां चला जाता है? राहुल की इच्छा कार्यक्रम स्थल से 500 मीटर की दूरी पर स्थित डा. अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने की भी थी, किन्तु प्रशासन ने अनुमति नहीं दी। उसका कहना था कि राहुल चाहे तो बसपा रैली के बाद ऐसा कर सकते हैं। इसके लिए उसने सुरक्षा का हवाला दिया। राहुल गांधी ने यहां से दस यात्राओं को भी रवाना किया। उधर, लखनऊ में मायावती ने साफ कहा कि स्थलों-स्मारकों का किसी भी स्तर पर कितना ही विरोध क्यों न हो, उनकी पार्टी और सरकार तिलभर भी नहीं झुकने वाली। आजादी के 63 वर्षो के दौरान, कांग्रेस ने 50 सालों तक केंद्र में और 38 वर्षो तक यूपी में राज किया। इस दौरान उसने अपनी जातिवादी मानसिकता के चलते न केवल बाबा साहब बल्कि अन्य की घोर उपेक्षा की। उसने बाबा साहब को भारत रत्‍‌न से सम्मानित करना भी उचित नहीं समझा। केंद्र में गैर कांग्रेसी सरकार होने पर बसपा के दबाव में डॉ. अंबेडकर को भारत रत्‍‌न से सम्मानित किया गया। उन्होंने कहा कि आज जब बसपा सरकार भव्य स्मारक, पार्क, विश्र्वविद्यालय, जिला आदि बनाकर इन महापुरुषों को उचित आदर सम्मान दे रही है तो कांग्रेस, भाजपा और अन्य विरोधी पार्टियों को बहुत बुरा लग रहा है। ये पार्टियां इन मामलों को कोर्ट कचहरी तक में खींचने का काम कर रही हैं। बसपा प्रमुख ने कहा कि चाहे जितना विरोध हो, बसपा सरकार इन महापुरुषों को आदर सम्मान देने में कोई कोर कसर बाकी नहीं रखेगी।

भटक गए बाहरी राज्यों के महाकुंभ श्रद्धालु

हरिद्वार- महाकुंभ शाही स्नान की इच्छा रखने वाले दूसरे राज्यों के लाखों श्रद्धालु वेस्ट यूपी में ही भटकते रहे। इनमें से हजारों श्रद्धालुओं ने ग्रामीणों की सलाह पर मुख्य गंगनहर में ही डुबकी लगा ली। इसके बाद उन्होंने हरिद्वार का रुख किया। भोला की झाल, खतौली और गढ़ में भी श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। मंगलवार को हरिद्वार में बढ़ी भीड़ के कारण शाम पांच बजे ही सारे रास्ते सील कर दिए गए। इसी कारण नागालैंड, राजस्थान, हरियाणा, कर्नाटक, मध्यप्रदेश, दिल्ली, गुजरात से आए हजारों वाहनों को गाजियाबाद, मेरठ, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, बागपत से डायवर्ट कर दिया गया। अलग-अलग रास्तों से हरिद्वार पहुंचे लोगों को कई किलोमीटर अतिरिक्त रास्ता तय करना पड़ा। बहुत से वाहन तो रास्ता भटककर कहीं और ही पहुंच गए। ऐसे वाहनों के बारे में लगातार सूचना मिलती रही। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर इन चालकों को रास्ता बताया लेकिन तब तक सुबह हो चुकी थी। गुजरात से आई बस के चालक राम अवतार पटेल ने बताया कि उसे जब रास्ता नहीं मिला तो वह बुढ़ाना रोड से होते हुए मुख्य गंगनहर कांवड़ पटरी पर पहुंच गया। कोई रास्ता बताने वाला नहीं था, तो वह भोला की झाल पर आ गया। यहां ग्रामीणों ने बताया कि मुख्य गंगनहर में भी हरिद्वार गंगा का पानी आ रहा है तो श्रद्धालुओं ने यहीं स्नान कर लिया।

भाजपा फिर बचाव में आई ममता ने आंखें दिखाई

दिल्ली/कोलकाता, एजेंसी: नक्सल मुद्दे पर जहां मुख्य विपक्षी दल भाजपा पी. चिदंबरम का खुला समर्थन कर रही है वहीं सरकार में शामिल तृणमूल कांग्रेस गृह मंत्री के लिए लगातार मुसीबत खड़ी कर रही है। तृणमूल कांग्रेस की मुखिया और केंद्रीय रेल मंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि माकपा ने पश्चिमी मिदनापुर जिले में माओवाद निरोधी संयुक्त अभियान को अगवा कर लिया है और चिदंबरम इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। ममता ने कहा कि लालगढ़ में एक भी माओवादी नहीं है। वहां माकपा कैडरों के इशारे पर आदिवासियों व विपक्षी समर्थकों के खिलाफ केंद्र और राज्य सरकार का संयुक्त पुलिस अभियान चल रहा है। ममता ने कहा कि उनके पास इस बात के साक्ष्य हैं कि जंगल महल में 200 माकपा कैडरों के कैंप चल रहे हैं। उन्होंने चिदंबरम से सवाल किया कि वह बताएं कि क्या माकपा कैडरों को संरक्षण देने और विपक्षी समर्थकों की हत्या के लिए लालगढ़ में संयुक्त ऑपरेशन चलाया जा रहा है? ममता ने कहा कि दर्जनों कैंपों में हथियारों का जखीरा मौजूद है। इसके सहारे प्रतिदिन तृणमूल समर्थकों की हत्या की जा रही है। बंगाल में तुगलकी शासन चल रहा है। जब दंगे के लिए गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी से पूछताछ हो सकती है तो नंदीग्राम में मारे गए लोगों के लिए बुद्धदेव से क्यों नहीं हो सकती। ममता के इतर भाजपा ने चिदंबरम का समर्थन करते हुए कहा है कि इस युद्ध जैसी स्थिति में देश को एक स्वर में बोलने की जरूरत है। भाजपा ने कहा कि इस समस्या से लड़ने के बारे में सरकार और सत्तारूढ़ पार्टी में एक राय नहीं है। भाजपा प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि दिग्विजय सिंह द्वारा चिदंबरम के दृष्टिकोण की सार्वजनिक आलोचना इस बात का सुबूत है कि माओवाद के खिलाफ लड़ाई के मामले पर कांग्रेस में मतभेद हैं। उन्होंने कहा कि दिग्विजय के बयान ने हमारी इस आशंका को पक्का कर दिया है कि केंद्रीय बल बिना किसी उचित तैयारी के भेजे गए थे।

मुस्लिमों को आवास आरक्षण के पक्ष में शरद पवार

मंुबई, एजेंसियां: एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार को आवासीय योजनाओं में मुस्लिमों को आरक्षण देने की संभावना तलाश करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अनेक गरीब मुस्लिम यह शिकायत करते हैं कि वे आवासीय योजना में भाग नहीं ले पाते। पवार ने इस मुद्दे पर आवास राज्य मंत्री सचिन अहीर को गौर करने के लिए कहा है। एनसीपी की मुंबई इकाई की एक बैठक में पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच पवार ने कहा कि नवी मुंबई निगम परिषद के चुनावी परिणामों ने यह साबित कर दिया है कि लोग लंबे समय तक संकीर्ण राजनीति को समर्थन नहीं देते। एनसीपी प्रमुख ने कहा कि मुंबई की सबसे बड़ी खासियत यही ह कि यहा आने वाला हर भारतीय पूरे सम्मान के साथ रह सकता है। उन्होंने कहा कि अगर मुंबई में इस लोकतांत्रिक और जनवादी रवैए को चोट पहुंचती है तो इसका भविष्य खतरे में पड़ सकता है। पवार ने कहा कि अगर हम जमीन से जुड़े और नई पीढ़ी के नेताओं को मौका देंगे तो एनसीपी का खुद-ब-खुद विस्तार होगा और इसकी पकड़ मजबूत होगी। पवार ने पार्टी की शहर इकाई से अगले दो साल में होने वाले बंबई नगर निगम चुनाव के लिए रणनीति तय करने को कहा। उन्होंने कहा कि 15 साल से बीएमसी पर काबिज शिवसेना-भाजपा को बिजली और पानी के मुद्दे पर घेरने की तैयारी की जाए।

सरकार को घेरने के लिए विपक्ष फिर तैयार

नई दिल्ली-संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण के पहले ही दिन सरकार व विपक्ष आमने सामने होंगे। सरकार को सबसे पहले दंतेवाड़ा के नक्सली हमले पर विपक्ष के सवालों का जवाब देना होगा और उसके बाद विदेश राज्यमंत्री शशि थरूर के ताजा विवाद से जूझना होगा। मुख्य विपक्षी दल भाजपा व उसके सहयोगी दलों ने साफ कर दिया है कि वे दोनों सदनों में दंतेवाड़ा की घटना पर प्रश्नकाल स्थगित करने की मांग करेंगे और अगर सरकार नहीं मानी तो सदन नहीं चलने देंगे। सरकार भी जवाबी तैयारी में है और विपक्ष को कोई मौका देने के पहले ही गृह मंत्री बयान दे सकते हैं। विभिन्न मुद्दों पर सदन के भीतर कायम विपक्षी एकता सरकार के लिए अभी भी मुसीबत बनी हुई है। महिला आरक्षण विधेयक व रंगनाथ मिश्रा आयोग की रिपोर्ट पर तीखे मतभेद भी विपक्षी एकता को तोड़ नहीं सके हैं। ऐसे में बृहस्पतिवार से शुरू हो रहे बजट सत्र के दूसरे चरण में सरकार की मुसीबतें कायम रहेंगी। सरकार के सबसे महत्वपूर्ण वित्त विधेयक पर कटौती प्रस्तावों को लेकर विपक्षी एकता की चुनौती से जूझने के अलावा उसे अन्य प्रमुख राष्ट्रीय महत्व के ज्वलंत मुद्दों पर भी विपक्ष के तीखे तीरों का सामना करना पड़ेगा। विपक्षी हमलों की शुरुआत छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में नक्सली हमले से होगी। भाजपा ने पहले अपनी खुद की बैठक की और बाद में राजग के सहयोगी दलों के नेताओं के साथ बैठक कर इस मुद्दे पर दोनों सदनों में प्रश्नकाल स्थगित करने के नोटिस देने का फैसला किया है। राजग ने मांग की है सबसे पहले सरकार इस मामले पर बयान दे उसके बाद ही कोई और कामकाज करे। अगर सरकार नहीं मानी तो कार्यवाही नहीं चलने दी जाएगी। हालांकि सरकार इस मामले पर विपक्ष को कोई मौका नहीं देगी। सूत्रों के अनुसार गृहमंत्री इस मामले पर बिना किसी मांग के खुद ही बयान देंगे। इस मुद्दे के बाद राजग ने शशि थरूर के मुद्दे पर सरकार को घेरने का फैसला किया है। राजग की बैठक के बाद लोकसभा में भाजपा के उप नेता गोपीनाथ मुंडे ने कहा कि थरूर ने अपनी महिला मित्र को लाभ पहुंचाने के लिए अपने पद का दुरुपयोग किया है। यह भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत सीधा मामला है और प्रधानमंत्री को मामले टालने के बजाए सीधे कार्रवाई करना चाहिए। वामपंथी दलों ने भी इस मामले पर सरकार को घेरने का ऐलान किया है। शुरुआत में विपक्ष की इन दोनों चुनौतियों से जूझने के बाद सरकार को वित्त विधयेक पर विपक्ष के कटौती प्रस्तावों का सामना करना पड़ेगा। भाजपा, वामदल व अन्य सभी गैर संप्रग दलों (बसपा को छोड़कर) ने दो टूक कहा है कि महंगाई, डीजल व पेट्रोल में की कीमतों में की गई बढ़ोतरी के मुद्दों पर जो भी कटौती प्रस्ताव होंगे, उनका सभी दल समर्थन करेंगे।

सुबूत मिले तो थरूर पर कार्रवाई: पीएम


वाशिंगटन--अपने विवादों से तीसरी बार प्रधानमंत्री की विदेश यात्रा में खलल डाल चुके शशि थरूर से मनमोहन सिंह खफा तो नजर आए लेकिन इसका इजहार उन्होंने संतुलित तरीके से किया। परमाणु सुरक्षा सम्मेलन के समापन के बाद यहां मीडिया से रूबरू होते हुए प्रधानमंत्री ने कह दिया कि अगर जरूरी हुआ तो सुबूत के आधार पर थरूर के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। थरूर के एक और विवाद में फंसने के बाद उन्हें मंत्रिमंडल से हटाए जाने की विपक्ष की मांग पर उन्होंने कहा कि मैंने यह सब कुछ सुना है लेकिन मेरे पास तथ्य मौजूद नहीं हैं। शनिवार को लौटकर तथ्य हासिल करूंगा और उनके आधार पर यदि जरूरी हुआ तो थरूर के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। मुझे लगता है यही सही तरीका होगा। प्रधानमंत्री ने यह भी जोड़ा कि मैं सुनी सुनाई बातों या अखबार में छपी बातों के आधार पर कोई फैसला नहीं कर सकता। थरूर की वजह से लगातार तीसरी बार अपनी विदेश यात्रा पर असहज हो चुके पीएम खफा जरूर हैं। फरवरी में रियाद में थरूर ने भारत-पाक के बीच वार्ताकार की जरूरत के संदर्भ में बयान देकर मनमोहन को सफाई देने पर विवश कर दिया था। पिछले साल सितंबर में आसियान बैठक के दौरान भी पीएम का सामना थरूर के कैटल क्लास विवाद से हुआ था। हर बार थरूर की कुर्सी बचा ले गए पीएम पर इस बार दबाव ज्यादा है, क्योंकि मामला जुबान फिसलने का नहीं, बल्कि केंद्रीय मंत्री के आचरण का है। यह आईपीएल में कोच्चि की टीम में थरूर की महिला मित्र सुनंदा पुष्कर की 70 करोड़ रुपये की फ्री इक्विटी का मसला है। भाजपा और वामदलों समेत पूरे विपक्ष ने थरूर को साउथ ब्लाक से बाहर कराने की लामबंदी कर ली है। प्रकाश करात और एबी बर्धन तो जांच मुकम्मल होने तक थरूर को एक मिनट के लिए भी विदेश मंत्रालय की कुर्सी पर देखना नहीं चाहते हैं।

बुधवार, 7 अप्रैल 2010

महिला बिल लोकतंत्र के लिए खतरा

सहारनपुर: समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने कहा है कि महिला आरक्षण बिल लोकतंत्र के लिए खतरा है। उन्होंने महिला विधेयक को मुसलमानों का वजूद मिटाने की साजिश करार देते हुए कहा, हम महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन इस बिल से गांव देहात की पिछड़ी व मुस्लिम महिलाएं कभी संसद नहीं जा सकतीं। सिर्फ धनाढ्य परिवार की महिलाओं को ही इसका लाभ होगा। मुलायम सिंह ने मंगलवार को यहां एक सम्मेलन और पत्रकारों से बातचीत में कहा कि केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा, केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण विधेयक की आड़ में महंगाई का मुद्दा ही दबा दिया है। उन्होंने कहा, तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी ने इस बिल का विरोध कर प्रशंसनीय काम किया है। सपा प्रमुख ने कहा, सूबे की हालत बेहद चिंताजनक है। देश के सबसे बड़े राज्य उप्र में एक ऐसी सरकार आई है, जिसने पूरे समाज को अलग-थलग करने की कोशिश की है। लोकतंत्र को खत्म करने वाली इस सरकार में एक लाख से ज्यादा लोगों को झूठे मुकदमों में जेल भेजा गया है।

शिक्षा अधिकार पर दबाव में केंद्र सरकार

नई दिल्ली-शिक्षा का अधिकार पर राज्यों के तेवर से केंद्र सरकार दबाव में दिखाई देने लगी है। सरकार की मुश्किल से जमीनी हकीकत पर उतारना है। इसमें सबसे बड़ी मुश्किल वित्तीय प्रबंधन है। केंद्र जहां इसका बड़ा जिम्मा राज्यों पर थोपना चाहता है वहीं बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और कर्नाटक जैसे गैर संप्रग राज्यों की ओर से सौ फीसदी केंद्रीय मदद की मांगें उठने लगी हैं। दबी जुबान संप्रग शासित राज्यों में भी सुगबुगाहट के बाद मानव संसाधन मंत्रालय नए सिरे से वित्तीय समीकरण तय करने पर विचार करने लगा है। शिक्षा के अधिकार को लागू कर केंद्र सरकार ने अपनी पीठ तो थपथपा ली पर राज्यों ने साफ कर दिया है कि सूबे के संसाधन पर केंद्र इसका श्रेय आसानी से नहीं ले पाएगा। गौरतलब है कि केंद्र ने शिक्षा के अधिकार के लिए होने वाली तैयारियों पर राज्य और केंद्र के बीच 55:45 फीसदी वित्तीय भार वहन करने का प्रस्ताव रखा था। उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती हों या बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार उन्होंने दूसरे ही दिन साफ कर दिया कि वह इसके लिए तैयार नहीं हैं। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और कर्नाटक सरकार भी उनके साथ खड़ी नजर आई। अपने सीमित संसाधन का हवाला देते हुए उन्होंने केंद्र से इसका पूरा भार उठाने को कहा है।

सकते में आया केंद्र बदलेगा रणनीति

नई दिल्ली-दंतेवाड़ा के नक्सली हमले में 76 जवानों को गंवाने के बाद सकते में आई केंद्र सरकार अब संयुक्त अभियान की रणनीति बदलने पर विचार को मजबूर हो गई है। आंतरिक सुरक्षा तंत्र को मानना पड़ा कि नक्सलियों के खिलाफ इस ऑपरेशन में खामी के चलते जवानों को जान से हाथ धोना पड़ा। अब तक के सबसे बड़े नक्सली हमले के बाद केंद्र सरकार को सख्त कार्रवाई का संकेत देने में ही छह घंटे से ज्यादा लग गए। प्रधानमंत्री निवास पर हुई राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की बैठक के बाद ही केंद्र सरकार नक्सलियों को मुंहतोड़ जवाब देने का ऐलान कर सकी। नक्सलियों के अब तक के सबसे बड़े हमले के बाद देश का पूरा आंतरिक सुरक्षा तंत्र ही नहीं, प्रधानमंत्री कार्यालय भी सकते में आ गया। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने गृह मंत्री पी. चिदंबरम को फोन कर घटना की पूरी जानकारी ली। इसके बाद शाम को राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की बैठक भी हुई, हालांकि बाद में प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा कि बैठक पहले से निर्धारित थी और इसमें चीन के साथ सीमा पर बुनियादी ढांचा तैयार करने पर चर्चा हुई, लेकिन इस बैठक के बाद ही केंद्र सरकार नक्सलियों के खिलाफ आक्रामक तेवरों में दिखाई पड़ी। बैठक के बाद गृह सचिव जीके पिल्लै ने दो टूक कहा कि सरकार इस हमले का मुंहतोड़ जवाब देगी। नक्सली हत्यारे हैं और उन पर किसी तरह की मुरव्वत नहीं की जाएगी। गृह मंत्री, रक्षा मंत्री, थल व वायु सेना अध्यक्ष और सुरक्षा सलाहकार सहित वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में हुई इस बैठक से पहले गृह मंत्री ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री व अधिकारियों से बात कर इस संयुक्त अभियान में चूक की बात स्वीकारी। इस घटना के बाद सरकार संयुक्त अभियान की मौजूदा रणनीति पर दोबारा विचार करने को मजबूर हो गई है। सुरक्षा परिषद की बैठक के बाद गृह सचिव जीके पिल्लै ने इस तरफ इशारा भी किया। उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन में कोई बड़ी चूक हुई है, जिसके चलते हमें इतने जवानों से हाथ धोना पड़ा। सूत्रों के अनुसार, संयुक्त अभियान को ज्यादा अचूक बनाने के लिए केंद्र अब हथियारों के साथ-साथ सर्विलांस उपकरणों पर ज्यादा जोर देगा। गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, नक्सल विरोधी अभियान में शामिल बलों के पास हथियारों की कमी नहीं है। जरूरत सर्विलांस सिस्टम को और मजबूत बनाने की है। इसके तहत साउंड सेंसर, नाइट विजन उपकरण, इंफ्रारेड डिवाइस जैसे साजो-सामान से सुरक्षा बलों को लैस किया जाएगा। फिलहाल नक्सल विरोधी अभियान में लगे सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट भी जारी कर दिया गया है। पीएमओ के प्रवक्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंहन को इस घटना से गहरा दु:ख व आघात पहुंचा है।

नक्सलियों ने भेदा खुफिया तंत्र

नई दिल्ली -नक्सलियों ने अब तक के सबसे बड़े इस हमले के लिए शिकंजा भी बेहद अचूक तैयार किया था। उन्होंने सुरक्षा बलों के खुफिया तंत्र में घुसपैठ कर उस इलाके में नक्सल ट्रेनिंग कैंप चलने की झूठी सूचना भिजवाई। कार्रवाई के लिए जब सुरक्षा बल पहुंचे तो उन पर तीन तरफ से घात लगा कर जबर्दस्त हमला किया गया। सुरक्षा बलों के खुफिया नेटवर्क में नक्सलियों की घुसपैठ कितनी तगड़ी थी, इस बात का अंदाजा इसी बात से लग जाता है कि वहां उपलब्ध सारी फोर्स इस सूचना पर कार्रवाई के लिए निकल पड़ी। गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि ऐसी सूचना पर फौरी कार्रवाई तभी होती है, जब सूत्र बहुत पुराना और विश्वसनीय हो। इसके बावजूद इतने बड़े अभियान पर निकलने से पहले उसे दूसरे सूत्रों से भी पक्का किया जाता है। इसलिए लगता है कि नक्सलियों ने वहां के सरकारी खुफिया नेटवर्क में बहुत जोरदार पैठ बनाई थी। सीआरपीएफ की डेढ़ कंपनी हमले के इरादे से निकल पड़ी। नक्सलियों की कामयाबी में कुछ योगदान वहां मौजूद सुरक्षा बलों की ओर से लिया गया रणनीतिक फैसला भी हो सकता है। ऐसे ऑपरेशन को संचालित करने वाले एक वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि आम तौर पर अभियान में शामिल सारे लोग एक साथ किसी जगह नहीं जाते। जबकि नक्सलियों ने जिस जगह सुरक्षा बलों को घेरकर मारा वह तीन तरफ से ऊंची पहाडि़यों से घिरा मैदान जैसा इलाका था। लिहाजा सुरक्षा बलों को पलटवार का कोई मौका भी नहीं मिल पाया। ऐसे में सुरक्षा बलों के पास सिर्फ छुपकर खुद को बचाना ही एकमात्र चारा था। जवानों ने पेड़ की ओट ली, लेकिन नक्सलियों ने वहां पहले से ही प्रेशर माइंस लगाई हुई थीं। ज्यादातर मौतें इन प्रेशर माइंस के फटने से हुईं। यह हमला नक्सलियों के बेहतर खुफिया तंत्र और गुरिल्ला रणनीति के साथ ही आधुनिकतम तकनीक के इस्तेमाल में बढ़ती उनकी महारथ के संकेत दे रहा है। इस हमले में नक्सलियों ने बारूदी सुरंग रोधी गाड़ी (एमपीवी) को भी उड़ा दिया। गृह मंत्रालय के अधिकारी बताते हैं कि नक्सलियों की ट्रेनिंग में इस्तेमाल होने वाला ऐसा दस्तावेज हाल ही में बरामद किया गया था जिसमें एमपीवी उड़ाने की तकनीक समझाई गई है, लेकिन यहां उन्होंने इस तकनीक का इस्तेमाल भी कर दिखाया। इस तकनीक में एमपीवी को उड़ाने के लिए काफी बड़ी मात्रा में विस्फोटक की जरूरत होती है।

शुक्रवार, 12 मार्च 2010

सोनिया का पार्टी सांसदों को डिनर संदेश

नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने बीती रात अपने सांसदों को खाने पर आमंत्रित किया। महिला आरक्षण बिल के खिलाफ कांग्रेस में उठी विरोध की आवाजों के चलते इस मौके को सोनिया की डिनर कूटनीति मानी गई, मगर बिल का विरोध कर रहे किसी सांसद को उन्होंने मनाने की कोशिश नहीं की। यह मात्र मेल-मिलाप जैसा माहौल था, मगर इसके पीछे जो संदेश था वह सबको समझ में आ रहा था। गौरतलब है कि गुरूवार को कांग्रेस के किशनगंज के सांसद मोहम्मद असरार-उल-हक ने बगावती तेवर अपनाते हुए साफ कहा था कि वह महिला आरक्षण बिल की मौजूदा शक्ल के खिलाफ हैं और अपना यह संदेश सोनिया गांधी तक पहुंचाएंगे। मगर उनके स्वरों का इस मौके पर कोई प्रभाव नजर नहीं आया।
सूत्रों ने बताया कि यह मौका सिर्फ खाने और मेलमिलाप तक ही सीमित रहा और इसमें महिला आरक्षण बिल को लेकर कोई बात ना तो नाराज सांसदों ने की और ना ही आलाकमान ने। खास बात यह रही कि सोनिया ने डिनर में मंत्रियों और कांग्रेस पार्टी के पदाधिकारियों के साथ सांसदों के संबंधी भी शामिल थे। इससे पहले गुरूवार को कांग्रेस ने बिल पर कुछ नरम रूख अख्तियार कर लिया था। सोनिया गांधी की अध्यक्षता में हुई कांग्रेस कोर ग्रुप की बैठक के बाद साफ कर दिया गया था कि बिल पेश करने से पहले सबसे राय-मशविरा लिया जाएगा। बैठक में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, प्रणव मुखर्जी, पी. चिदंबरम भी मौजूद थे। सरकार को 16 मार्च को खत्म हो रहे बजट सत्र के पहले दौर में ही हर हाल में वित्त विधेयक पास कराना है। इसके लिए लोकसभा की कार्यवाही का चलते रहना जरूरी है। वित्त विधेयक पास करवाने के बाद सरकार के पास नाराज पार्टियों को मनाने और बीच का रास्ता निकालने का पर्याप्त समय मिलेगा। सोनिया गांधी का निजी एजेंडा बन चुके महिला आरक्षण बिल को सरकार ज्यादा दिन नहीं लटका पाएगी, मगर कांग्रेसी सांसदों की मुखर होती आवाजें सरकार के सामने नई चुनौती बनकर उभरी है, जिससे निपटने में कई मुश्किलों का सामना करना प़डेगा।

रेलवे का निजीकरण नहीं, व्यावसायीकरण होगा: ममता

नई दिल्ली। रेलवे विनियोग विधेयक और इस मंत्रालय की लेखानुदान मांगों को गुरूवा को राज्यसभा ने पारित कर दिया। रेलवे के इन विधेयकों पर दो दिन चली चर्चा का जवाब देते हुए रेल मंत्री ममता बनर्जी ने सदन को आश्वस्त किया कि रेलवे का निजीकरण नहीं होगा लेकिन संसाधन जुटाने के लिए रेलवे की जमीन का व्यावसायिक उपयोग किया जाएगा। हमें अपने 14 लाख कर्मचारियों से वादा है कि हम निजीकरण नही करेंगे। लेकिन हम सबको यह भी सोचना होगा कि परियोजनाओं के लिए पैसा क्या आसमान से आएगा। रेलवे बोर्ड के तहत एक विशेष कार्यबल गठित किया जा रहा है जिसे विभिन्न ढांचागत परियोजनाओं को पूरा करने के लिए एकल खिडकी (सिंगल विंडो) के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा।

दुबई में भारत का मोस्टवांटेड गिरफ्तार

दुबई। सऊदी अरब के उपराष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम की भारत यात्रा से पहले यहां की पुलिस ने मोस्टवांटेड भारतीय अपराधी गुलाम हैदर दाऊद मधिया को दुबई से गिरफ्तार किया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार मधिया को फरवरी में पाश इलाके अमीरात हिल्स स्थित उसके घर से गिरफ्तार किया गया। उसने अपनी गिरफ्तारी का विरोध नहीं किया और अपने पिछले अपराध भी कबूल कर लिए। पुलिस के अनुसार मधिया सऊदी अरब में कोई गैरकानूनी काम नहीं रहा था। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि उसे भारत को प्रत्यर्पित किया जाएगा अथवा नहीं। मधिया को देश से बाहर भेजने के लिए 1996 में दुबई के अटार्नी जनरल से अनुरोध किया गया था। मधिया हत्या के एक मामले में इकबाल मिर्ची के साथ सह आरोपी है। मिर्ची की गिनती दुनिया में मादक पदार्थो के दस बडे तस्करों में होती है।
मधिया की गिरफ्तारी के लिए इंटरपोल ने वारंट जारी किया था जिसके बाद 1997 में उसे मलावी में गिरफ्तार किया गया था। दुबई पहुंचने से पहले ही वह जमानत लेकन पाकिस्तान भाग गया।

बरेली में कफ्र्यू में ढील नहीं

बरेली(बरेली)। बरेली शहर के गुरूवार को देर रात हुई हिंसा की ताजा घटनाओं के बाद व्यास तनाव के मद्देनजर हिसांग्रस्त चार क्षेत्रों में कफ्र्यू में आज भी कोई ढील नही दी गई। शहर में धार्मिक उन्माद भडकाने के आरोप में 8 मार्च को गिरफ्तार इत्तेहाद मिल्लत कॉसिल (आईएमसी)के अध्यक्ष मौलाना तौकीर रजा खां की रिहाई के बाद गुरूवार को देर रात दो समुदाय के लोग आमने सामने आ गए। इस दौरान शहर के बारादरी क्षेत्र के कालीबाडी, कटरा चांद खां, जगतपुर और शहातमगंज इलाको में हिंसा, पथराव और आगजनी की घटनाएं हुई। दोनों पक्षों ने जमकर नारेबाजी एवं पथराव किया तथा कई दुकानों को आग के हवाले कर दिया सुरक्षा बलों ने काफी मशक्कत के बाद हालात पर काबू पाया। शहर में हो रही इन घटनाओं के बीच आधी रात के करीब भारतीय जनता पार्टी की उत्तर प्रदेश इकाई के महामंत्री और बरेली शहर क्षेत्र के विधायक राजेश अग्रवाल और पूर्व केन्द्रीय मंत्री संतोष गंगवार ने दंगे के दोषियों की शिनाख्त कर उन्हें सजा दिलाये जाने की मांग को लेकर जिलाधिकारी आवास के बाहर धरना शुरू कर दिया गया ।
पुलिस उपमहानिरीक्षक और जिलाधिकारी द्वारा जेल में बंद निर्दोष लोगों को रिहा कराने का आश्वासन दिये जाने पर करीब दो घंटे बाद धरना समाप्त किया गया। इस बीच अधिकारिक सूत्रों नं दावा किया कि शहर में आज स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और अब तक कहीं से किसी अप्रिय घटना की कोई सूचना नही मिली है। प्रशासन के आदेश पर शहर के सभी स्कूल, कालेज आज बंद रहे और सिर्फ बोर्ड परीक्षाएं ही हो रही है। यह आदेश शहर के सभी इंजीनियरिंग तथा प्रबंधन कालेजों पर भी प्रभावी है।

चार की जिन्दा जलाकर हत्या

अमेठी। यूपी के अमेठी गौरीगंज थाने के गांव में अन्नीबैजल में कल देर रात एक परिवार के चार सदस्यों की जिन्दा जलाकर हत्या कर दी गई। पुलिस सूत्रों के अनुसार परिवार के मुखिया ने हत्या का आरोप लगाते हुए सात व्यक्तियों के खिलाफ केस दर्ज करवाया। दर्ज रिपोर्ट में कहा गया है कि कल रात जब उसकी तीन बेटियां और एक छ: महीने का बच्चा फंू स से बने छप्पर के नीचे सो रहे थे तभी जमीनी विवाद को लेकर उनसे रंजिश रखने वालों ने छप्पर में आग लगा दी जिससे चारों की झुलसकर मौत हो गई।

अब गूगल पर आवाज से सर्च करें

लखनउ। अंग्रेजी और हिन्दी में सर्च करने के बाद अब गूगल की वेबसाइट पर आवाज से सर्च करने की सेवा का फायदा लोग उठा सकते हैं। गूगल इंडिया के उत्पाद प्रबंधक जगजीत चावला ने बुधवार को यहां कहा कि मोबाइन फोन के इस्तेमाल करने वाले गूगल में जाकर जो कुछ भी कहेंगे वह सर्च होकर सामने आ जाएगा। यह बात हिंदी, अंग्रेजी के अलावा अन्य भारतीय भाषाओं में भी कही जा सकती है। उन्होने कहा कि इंटरनेट ने भारत में सात करोड लोगों के जीवन को छुआ है। इसमें केवल 13 प्रतिशत लोग ही अग्रेजी में इसका प्रयोग करते हैं, जबकि शेष 87 प्रतिशत हिंदी या अन्य भाषाओं में इसका प्रयोग करते हैं।

सोमवार, 8 मार्च 2010

रणथम्भौर अभयारण्य के दो शावकों की मौत

सवाईमाधोपुर/जयपुर। सवाईमाधोपुर के रणथम्भौर बाघ अभयारण्य के दो बाघ सवाईमाधोपर और करौली जिले की सीमा पर चिरोली गांव के पास मृत मिले। प्रारम्भिक जांच रिपोर्ट में सामने आया कि 22 और 24 महीने के नर बाघों के शव के निकट एक शिकार की गई बकरी और बाघ द्वारा की गई तथा उल्टीयां मिलने से अंदाजा लगाया जा रहा है कि दोनों बाघों की मौत संभवत विषैले खाने से हुई है।



शुक्रवार, 5 मार्च 2010

थाली-20 रुपये के लिए 63 जिंदगियां खत्म

मनगढ़ (प्रतापगढ़): कृपालु महाराज की ओर से एक थाली, एक रुमाल और बीस रुपये का एक नोट 37 बच्चों और 26 महिलाओं के लिए मौत का संदेश लेकर आया। सिर्फ इतना हासिल करने के लिए यहां सुबह से भीड़ जुटना शुरू हो गई थी। लगभग दस बजे तक यह आलम था कि लोगों को संभालना मुश्किल हो रहा था। मनगढ़ में भक्तिधाम मंदिर कुंडा तहसील मुख्यालय से सात किमी की दूरी पर है। यहां पिछले साल कृपालु महाराज की पत्‍‌नी पद्मा देवी की तेरहवींपर भी बड़ा जमावड़ा हुआ था। इस साल उनकी बरसी थी। इसकी सूचना पिछले एक पखवाड़े से दी जा रही थी। होली के अवसर पर कृपालु महाराज यहां हर साल रहते हैं। उनके दर्शन का लालच और साथ में कुछ पाने की इच्छा से भीड़ अनुमान से अधिक जुट गई। आसपास के गांवों से भक्तिधाम मंदिर में जुटे अधिकांश लोग दो जून की रोटी के लिए रोज जुगत भिड़ाते हैं। महिलाएं अपने साथ बच्चों को इसलिए लेकर आई थीं ताकि वे तीन-तीन, चार-चार थालियां हासिल कर सकें। यही लालच और अव्यवस्था उनके लिए काल बन गया।

पक्ष-विपक्ष की लामबंदी तेज

नई दिल्ली,-लोस व राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण देने संबंधी विधेयक पर संसद में लामबंदी तेज हो गई है। बिल के मौजूदा स्वरूप पर विपक्ष बंटा हुआ है। सपा, राजद व जद (यू) ने विधेयक के विरोध का ऐलान कर दिया है जबकि भाजपा व वामदलों ने इसका समर्थन करने की घोषणा की है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने महिला दिवस पर इसे देश की महिलाओं के लिए दिया जाने वाला तोहफा करार दिया है तो विधेयक विरोधियों की नाराजगी कम करने के लिए कानून मंत्री ने पिछड़ा वर्ग आरक्षण को अलग मुद्दा बताते हुए उसके लिए अलग पहल करने का सुझाव दिया है। वहीं, राज्यसभा की कार्यमंत्रणा समिति ने विधेयक को सोमवार को सदन में पेश करने और उस पर चर्चा व पारित कराने के लिए चार घंटे का समय आवंटित कर दिया है। विधेयक को पेश करने व उसे पारित कराने के लिए माहौल बनाने में जुटी सरकार की तरफ से कानून मंत्री वीरप्पा मोइली ने नई पहल करते हुए कहा है कि संविधान संशोधन के जरिए लोकसभा में अनुसूचित जाति जनजातियों को आरक्षण प्रदान किया गया है लेकिन अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए ऐसा कोई आरक्षण नहीं है। जब तक यह नहीं होता, महिला आरक्षण के मामले में ऐसा नहीं कर सकते हैं। अगर विधेयक के विरोधी अन्य पिछड़ा वर्ग के प्रतिनिधित्व को लेकर बेहद इच्छुक है तो पहले उन्हें लोस और विस में अन्य पिछड़ा वर्ग की महिलाओं और पुरुषों के आरक्षित स्थान के लिए राष्ट्रीय आम सहमति कायम करनी चाहिए। यह पूरी तरह अलग मुद्दा है और यह काम इस विधेयक को पारित करने के बाद भी हो सकता है। विपक्षी दलों का मानना है कि इस समय बिना सहमति विधेयक लाने का सरकार का इरादा केवल विपक्षी एकता को तोड़ने का है। सूत्रों के अनुसार विपक्ष के सभी दल अपनी अपनी रणनीति के मुताबिक इस विधेयक का समर्थन व विरोध तो करेंगे, लेकिन अन्य मुद्दों पर उनकी एकता बरकरार रहेगी। संविधान संशोधन विधेयक होने के नाते सदन का व्यवस्थित होना और उसकी संख्या का बहुमत के सदन में होने और उसमें भी दो तिहाई का समर्थन जरूरी है। मौजूदा स्थिति में सदन का व्यवस्थित होना संभव नहीं दिखता है। पहले के विधेयक पेश होने के मौकों पर भी दोनों सदन भारी हंगामे के गवाह रह चुके हैं। सपा, राजद व जद (यू) ने साफ कर दिया है कि विधेयक का वे विरोध करेंगे। सपा की तरफ से लोकसभा में मुलायम सिंह यादव ने बुधवार को ही चेतावनी दे दी थी। गुरुवार को राज्यसभा में रामगोपाल यादव ने भी दो टूक कहा कि जद (यू) नेता नीतीश व शरद यादव, राजद नेता लालू यादव, सपा नेता मुलायम सिंह यादव और बसपा नेता मायावती इस मामले पर एकजुट हों। साथ ही वे संयुक्त बैठक कर विचार करें कि पिछड़ों के खिलाफ किस तरह की साजिश की जा रही है। इसके खिलाफ रणनीति भी बनायें ताकि यह साजिश सफल न होने पाये। लालू यादव ने कहा है कि हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने विधेयक के मौजूदा स्वरूप का विरोध करते हुए कहा कि देश की राष्ट्रपति महिला हैं, लोकसभा की अध्यक्ष महिला हैं, कांग्रेस अध्यक्ष और संप्रग की अध्यक्ष भी महिला हैं और वे यहां महिला कोटे के कारण नहीं आईं हैं।

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