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बुधवार, 10 अगस्त 2011

नामांकन पत्र किया दाखिल

डबवाली (यंग फ्लेम) एसजीपीसी के चुनावों को लेकर आज अपने समर्थकों के साथ जगदेव सिंह मटदादू ने चुनाव अधिकारी एवं एसडीएम मुनीश नगापाल के समक्ष अपना नामांकन पत्र दाखिल किया।

सड़क हादसे में एक की मौत, चार घायल

डबवाली (यंग फ्लेम) बीती रात सिरसा सड़क पर स्थित खेल परिसर के समीप मोटरसाईकिल व मोपड़ की टक्कर में एक युवक की मौत हो गई जबकि एक पुलिसकर्मी सहित चार लोग घायल हो गए। मृतक की पहचान तरसेम सिंह उर्फ सेमा पुत्र मुख्तयार सिंह गांव अलीकां के रूप में हुई है। प्राप्त जानकारी अनुसार थाना शहर में कार्यरत हैड कॉस्टेबल सुंदर सिंह पुत्र बलवीर सिंह गांव खांडा खेड़ी (हांसी) की ड्यूटी 15 अगस्त के अवसर पर खेल परिसर में लगी हुई है और वह चाय पीने हेतु बिजली बोर्ड के कार्यालय के सामने स्थित दुकान पर गया था और वापिसी पर अलीकां गांव से अपनी मोपड़ पर आ रहे तरसेम कुमार उर्फ सेमा के साथ स्टेडियम तक जाने के लिए बैठ गया। जब वह अपनी मोपेड़ को स्टेडियम की और मोडऩे लगा तो डबवाली की ओर से आ रहे तेज गति मोटरसाईकिल पर सवार तीन युवक गुरप्रीत सिंह, बलजीत सिंह व हरदीप सिंह की उनसे जोरदार टक्कर हो गई। जिससे पुलिसकर्मी सहित पांच लोग घायल हो गए। जिन्हें डबवाली की जनसहारा सेवा संस्था के सदस्यों ने संस्था की दोनों एम्बुलैंस द्वारा उपचार के लिए स्थानीय राजकीय अस्पताल में दाखिल करवाया। जहां पर तरसेम सिंह की गंभीर हालत को देखते हुए उसे सिरसा रेफर कर दिया और गुरप्रीत, बलजीत व हरदीप सिंह को उनके परिजन इलाज के लिए बठिंडा ले गए। घायल तरसेम सिंह ने सिरसा के राजकीय अस्पताल में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। स्थानीय पुलिस ने लापरवाही से मोटरसाईकिल चलाने पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।






सत्कार सभा ने जगदेव सिंह मटदादू को दिया समर्थन

डबवाली(यंग फ्लेम)एसजीपीसी के चुनावों में शह मात का खेल आरंभ हो गया है। सिखों की धार्मिक सभा सत्कार सभा ने हरियाणा गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एडहाक)के प्रत्याशी जगदेव सिंह मटादादू को अपना समर्थन दे कर मुकाबले को कड़ा बना दिया है। गुरुद्वारा विश्वकर्मा जी में मंगलवार को सत्कार सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखविंद्र सिंह खालसा की अध्यक्षता में हुई बैठक में हरियाणा गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रत्याशी जगदेव सिंह मटादादू को अपना समर्थन देने के अलावा रतिया हलके में भी हरियाणा गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की उम्मीदवार बीबी जसवीर कौर को अपना समर्थन देने की घोषणा की। सत्कार सभा के अध्यक्ष सुखविंद्र सिंह खालसा ने बताया कि सिरसा सीट पर फैसला मंगलवार शाम तक कर लिया लिया जायेगा। अकाली दल बादल द्वारा मांगे आना के जगसीर सिंह को अपना प्रत्याशी घोषित किया है। अकाली दल बादल के प्रत्याशी जगसीर सिंह मांगे आना के चुनाव की कमान इनेलों ने संभाली हुई। जगदेव सिंह मटदादू बुधवार को अपने लाव लश्कर के साथ अपना नामांकन पत्र दाखिल करेंगे। जबकि जगसीर सिंह 11 अगस्त को ऐलनाबाद के विधायक अभय सिंह चौटाला की मौजूदगी में अपना नामांकन पत्र दाखिल करेंगे। वहीं एक अन्य प्रत्याशी परमजीत सिंह माखा ने डबवाली से हलके से अपना नामांकन पत्र दाखिल कर चुनावी दंगल में उतने का ऐलान किया है।

शनिवार, 6 अगस्त 2011

14 अगस्त तक वितरित कर दी जाएगी पेंशन: डा. ख्यालिया

डबवाली (यंग फ्लेम)उपायुक्त डा. युद्धबीर सिंह ख्यालिया ने पेंशनधारकों के खाते खोलने व स्मार्ट कार्ड बनाने के कार्य की स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि जिला में 1,29,574 पेंशनधारकों के बैंकों में खाते खोले जा चुके हैं। खाते खोलने का कार्य अब तक 97.61 प्रतिशत पूरा हो चुका है। इसके साथ-साथ जिला में 1,12,060 खाताधारकों के स्मार्ट कार्ड भी बनाए जा चुके हैं और इन सब स्मार्ट कार्ड धारकों के खातों में पेंशन की राशि भी जमा करवा दी गई है। जिला में 14 अगस्त तक पेंशन वितरण करने का शत-प्रतिशत कार्य पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि फिनो कंपनी द्वारा जिला में अब तक 157 गांवों में शत-प्रतिशत पेंशनधारकों को पेंशन भी वितरित कर दी गई है। रानियां ब्लॉक में पेंशन वितरण करने का शत-प्रतिशत कार्य पूरा कर लिया गया है। जिला के अंतर्गत आने वाले पांच नगर परिषद व नगरपालिकों के 28 वार्डों में पेंशन वितरित करने का कार्य शत-प्रतिशत पूरा कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि जिला में जो 3168 पेंशनधारक बिना खाता खुलवाए हुए रहे हैं उनमें से कुछ की तो मृत्यु हो चुकी है। जिला में पेंशनधारकों के बैंकों में खाते खुलवाने के लिए खंड मुख्यालयों एवं नगरपालिका एवं नगर परिषद मुख्यालयों पर 12 स्थाई एनरोलमेंट केंद्र बनाए गए हैं। पेंशनधारक के खाते या स्मार्ट कार्ड बनाने संबंधी गलती को सुधारने के लिए स्थानीय जिला रैडक्रॉस सोसायटी के कार्यालय में करेक्शन सेंटर स्थापित किया गया है जिसके साथ-साथ एनरोलमेंट संबंधी कार्यों को सुचारू रूप से चलाने के लिए स्थानीय यूथ हॉस्टल में कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है जिसमें पेंशन संबंधी कार्यों से जुड़े सभी विभागों और कंपनियों के कर्मचारी, अधिकारी एक साथ बैठकर कार्य कर रहे हैं।

रक्तदान कर दी श्रद्धांजलि

डबवाली (यंग फ्लेम)लांयस क्लब सुप्रीम द्वारा आज गिरधारी लाल वधवा मैमोरियल ट्रस्ट के सहयोग से उनकी पुण्यतिथि पर जीएल वधवा एजूकेशन सेंटर पर एक रक्तदान शिविर का आयोजन किया। जिसमें सिरसा से आई शिव शक्ति ब्लड बैंक की टीम ने रक्त एकत्रित किया।
इस मौके पर श्री गिरधारी लाल वधवा को क्लब सदस्यों एवं उनके परिवार सदस्यों ने श्रद्धां-सुमन अर्पित किए। रक्तदान शिविर में कुल 44 यूनीट रक्त एकत्रित किया गया। जिसमें 4 महिलाओं ने भी रक्तदान किया। इस मौके पर लायंस क्लब सदस्य सुमन कामरा, प्रवीन गुप्ता, प्रोमीला रानी, प्रधान गुरदीप कामरा, सचिव राज मिढ़ा, नरेश गुप्ता, बीएस अरोड़ा, योगेश मिढ़ा, विकास जिंदल, सुदेश वर्मा, परमप्रीत सिंह सेठी ने भी रक्तदान किया। इस अवसर पर श्रीमति कंचन वधवा, उनके सुपुत्र अरिहंत वधवा, व राकेश वधवा ने रक्तदान कर अपने पिता स्व. गिरधारी लाल वधवा जी को श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर समाज सेवी पम्मी वधवा, श्रीमति पूनम वधवा, विजय वधवा, श्रीमति नीतू वधवा, देव कुमार शर्मा, राम लाल बागड़ी, औम प्रकाश बाबा, वासदेव मेहता भी उपस्थित थे। अंत में लायंस प्रधान गुरदीप कामरा व राकेश वधवा ने सभी रक्तदानियों का आभार व्यक्त किया।

विभाग की लापरवाही से लगा छात्र को करंट

डबवाली (यंग फ्लेम)गत दिवस आई बरसात से बिजली के खंभे में स्पार्किंग होने से गांव गोदीकां के स्कूल में पढऩे वाले छात्र को करंट लग गया। जानकारी अनुसार गोदीकां निवासी देवेन्द्र पुत्र मदनलाल जो कि गांव के स्कूल में 10वीं कक्षा में पढ़ता है। गत दिन वह स्कूल की छुट्टी होने के बाद अपने अन्य साथियों के साथ खेलता हुआ घर जा रहा था, कि जैसे ही वह खेलते-खेलते गांव में बने रैस्ट हाऊस के पास पहुंचा तो उसके पास एक बिजली का खंभा था, जिसके चारों तरफ बरसाती पानी पड़ा था। देवेन्द्र खंभे के पास से गुजरा और उसे करंट आ गया। उसने बचाव के लिए शोर मचाया तो आस-पास में मौजूद ग्रामिणों ने मौके पर पहुंचकर देवेन्द्र को गांव के एक निजी चिकित्सक के पास पहुंचाया, जहां उसकी हालत को गंभीर देखते हुए उसे मैट्रो हॉस्पीटल सिरसा उपचार हेतू भेज दिया गया। अब देवेन्द्र की हालत सही बताई जा रही है। वहीं गोदीकां के ग्रामिणों ने बताया कि यह सब बिजली विभाग के कर्मचारियों की लापरवाही से हुआ है, बिजली विभाग के कर्मचारियोंं को खंभे की समस्या के बारे में कई बार अवगत करवाया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।

कालुआना फलडी नहर का निर्माण शीघ्र ही करवाया जायेगा-डॉ. सिंह

डबवाली (यंग फ्लेम)इण्यिन नेशनल लोकदल के लोग अपने खिलाफ उनके शासन के दौरान किये गये भ्रष्टाचार के आरोप तय होने पर और कोर्ट में चल रहे केसो से लोगो का ध्यान बंटाने के लिए दुष्प्रचार करके जनता को गुमराह कर रहे है। यह बात ड्डमुख्यमन्त्री हरियाणा चौधरी भुपेन्द्र सिंह हुडडा के पूर्व विशेष कार्यधिकारी डा. के.वी. सिंह ने प्रेस विज्ञप्ति में कही। उन्होने कहा कि इण्डियन नेशदल लोकदल के राज के समय हजारो एकड़ भुमि अपने निजी ट्रस्ट अन्य अपने चेहते ट्रस्टो को बांट दी थी जोकि नगरपालिकाओ तथा पंचायतो से सम्बन्धित थी। ट्रस्ट द्वारा बनाई गई इमारतो मे इनेलो के कार्यालय चल रहे है दुसरी तरफ राजीव गांधी ट्रस्ट को पंचायत द्वारा जनहित में कानुन के दायरे मे आंखो के अस्पताल के लिए भुमि लीज पर दी गई है। इस अस्पताल के बनने से इलाके के लोगो को इलाज की बेहतर सुविधा मिलेगी लोगो को रोजगार भी मिलेगा। आज हरियाणा की भुमि अधिग्रहण निती सर्वश्रेष्ठ निती है फिर भी हरियाणा के मुख्यमन्त्री चौधरी भुपेन्द्र सिंह हुडडा समय की जरूरतो के अनुसार भुमि अधिग्रहण निती में संशोधन करते रहते है। मुख्यमन्त्री हरियाणा जानते है कि किसानो की रोजी रोटी भुमि से ही चलती है इसीलिए खेदड़ थर्मल पलांट के विस्थापित 122 लोगो को सरकारी नौकरी देकर हरियाणा सरकार ने देश मे एक मिसाल कायम की है।
हरियाणा सरकार की नितीयो के चलते हरियाणा के सभी विपक्षी दलो का जनाधार कम हो रहा है। इसी को देखकर इण्यिन नेशनल लोकदल के लोग बौखलाकर लोगो में दुष्प्रचार कर रहे है। डा.सिंह गांव रिसालियाखेड़ा मे महावीर झटवाल के निवास स्थान व मोडी में कश्मीरा सिंह सरपंच के निवास स्थान पर गये तथा हल्का के लोगो की समस्याऐं सुनी कुशलक्षेम पुछा तथा लोगो आश्वासन दिया कि इस हल्के के 15 गांवो की सिंचाई समस्या को हल करने के लिए घघर नदी से कालुआना फलडी नहर का निर्माण शीघ्र ही करवाया जायेगा। इस अवसर पर गांव रिसालियाखेड़ा में गिरधारी लाल सिलग, पालाराम सोनी, जगदीश कुडिय़ा व उनके साथीयो ने कांगेस पार्टी मे आस्था व्यक्त की तथा डा.सिंह को साथ देने का विश्वास दिलाया। डा.सिंह ने इनका स्वागत किया तथा विश्वास दिलाया कि पार्टी मे इनका पुरा मान सम्मान होगा। इस अवसर पर उनके साथ ब्लाक के प्रधान पवन गर्ग, सतपाल गेदर,साहबराम सरपंच,महावीर सोढा,अमरचन्द शर्मा, लाल चन्द मुन्नावाली,विजय सहारण उप प्रधान हल्का डबवाली,विनोद सरपंच गोदीकां,गांधीसिंह,मास्टर हेतराम,सेठ गोविन्दराम,नरेश सहित सेंकड़ो कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित थे।

गुरुवार, 4 अगस्त 2011

बाजारों में धड़ल्ले से हो रहा है पॉलीथीन का प्रयोग

डबवाली (यंग फ्लेम)सरकार द्वारा प्रदेश में पॉलीथीन के प्रयोग पर पूर्ण रूप से पाबंदी लगाई गई है। लेकिन शहर के बाजारों में इसका प्रयोग धड़ल्ले से किया जा रहा है। शायद इन दुकानदारों पर सरकार के आदेशों का कोई प्रभाव नहीं है। इसलिए ये दुकानदार इन आदेशों की धज्जिायां उड़ा रहे है। इस क्रम में पिछले दिनों न्ररपालिका द्वारा पॉलीथीन का प्रयोग रोकने को लेकर अभियान चलाया गया था और इस अभियान के तहत दर्जन भर दुकानदारों के चालान भी काटे गए थे और उन्हे चेतावनी भी थमाई गई थी और तो और जुर्माना भी किया गया था।
इन सब एहतिआतों के बावजूद बाजारों में पॉलीथिन का थोक में प्रयोग किया जा रहा है और सरकार के आदेशों की धज्जिायां उड़ाई जा रही हैं। पिछले दिनों शहर में नगरपालिका द्वारा तमाम दुकानदारों के चालान काटे जाने पर पॉलीथिन का प्रयोग कुछ थम सा गया था और दुकानदारों को रिसाइकिल पोलीथिन का प्रयोग करने का आदेश दिया गया था। लेकिन इसके बाद मार्केट में भले ही रिसाइकिल पोलीथिनों का प्रयोग कुछ दिन हुआ हो पर सब्जी मंडी व बाजारों में इनका प्रयोग धड़ल्ले से किया जा रहा है।
इस बारे में शहर निवासी पवन कुमार ने बताया कि पॉलीथीन से उन्हें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। लोगों द्वारा पॉलीथीन का प्रयोग करने के बाद उन्हें गलियों में फैंक दिया जा है जो कि हवा के साथ उड़कर लोगों के घरों व सीवरेज आदि में चला जाता है जिस कारण लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
इस बारे में जब एसडीएम मुनीश नागपाल से बात की गई तो उन्होंने कहा कि पॉलीथीन के प्रयोग पर न्यायलय के आदेशानुसार प्रतिबंध लगाया गया है। इस बारे में नगरपालिका सचिव के निर्देश दिए गए है कि और जो दुकानदार पॉलीथीन का प्रयोग कर रहे है उनके चालान आदि काटे जाए। उन्होंने लोगों से भी पॉलीथीन का प्रयोग न करने की अपील की व कहा कि बाजार से सामान लाते समय वह अपना थैला साथ लेकर जाए।

जनता को गुमराह कर रहा है इनेलो: केवी सिंह

डबवाली (यंग फ्लेम)मुख्यमंत्री के पूर्व ओएसडी एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता डॉ् केवी सिंह ने कहा है कि विपक्षी पार्टी इनेलो मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की बढती लोकप्रियता से बौखला गया है और इसी कारण मुख्यमंत्री पर अनाप-शनाप आरोप लगाए जा रहे हैं। आज जारी एक बयान में डॉ. केवी सिंह ने कहा कि गुडग़ांव की जिस जमीन के अधिग्रहण को इनेलो मुद्दा बना रहा है, वह जमीन किसानों की सहमति से अधिग्रहण की गई थी। कांग्रेस सरकार ने आज तक एक ईंच जमीन किसी बिल्डर को नहीं दी है। जमीन विकास के लिए अधिग्रहण की जाती है और इसकी एवज में किसानों को पूरा मूल्य तथा नौकरी दी जा रही है। इनेलो शासन में जरूर किसानों को धमकाकर जमीन ली जाती थी जो बाद में बिल्डर्स को बेच दी जाती थी, मगर कांग्रेस शासन में ऐसा नहीं है। मुख्यमंत्री हुड्डा की नीति पाक-साफ है और हरियाणा की भूमि अधिग्रहण नीति की प्रशंसना अन्य प्रदेशों में हो रही है। डॉ. सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री की सोच विकासपरक है। सिरसा जिला में अब तक बिना भेदभाव के रिकार्ड विकास कार्य हुए हैं। अबूबशहर में कीनू प्रसंस्करण प्लांट लगाया गया है जिससे अब सिरसा का कीनू विदेशों में जाने लगा है तथा किसानों को पूरा मूल्य मिल रहा है। इसी तरह सिरसा में ओवरब्रिज बनाया गया है। देवीलाल विश्वविद्यालय को करोड़ों की ग्रांट दी गई है जबकि इनेलो शासन में इतने काम नहीं हुए थे।

62676 विद्यार्थियों को मिला आरटीई से लाभ

डबवाली (यंग फ्लेम) राज्य सरकार के निर्णयानुसार प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों में आठवीं तक की कक्षाओं में पढऩे वाले सभी विद्यार्थियों को नि:शुल्क यूनीफॉर्म उपलब्ध करवाई जा रही है। सिरसा जिला में इस योजना के तहत 2 करोड़ 50 लाख 70 हजार रुपए की राशि खर्च करके 62678 सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों को वर्दी उपलब्ध करवाई जा चुकी हैें जिसमें टाई एवं बैज भी शामिल है। शिक्षा के अधिकार (राइट टू एजुकेशन) की अनुपालना में राज्य सरकार द्वारा पहली बार शुरू की गई इस योजना से सिरसा जिला में पहली से आठवीं तक की कक्षाओं में पढऩे वाले 31650 छात्रों को और 31026 छात्राओं को लाभ हुआ है। उक्त जानकारी देते हुए डा. युद्धबीर सिंह ख्यालिया ने बताया कि उक्त योजना के तहत प्रत्येक विद्यार्थी को प्रतिवर्ष 400 रुपए तक की डे्रस उपलब्ध करवाई गई। स्कूल स्तर पर 300 विद्यार्थियों तक स्कूलों में 12 सदस्यीय स्कूल मैनेजमेंट कमेटी का गठन किया गया है और 300 से 500 तक की विद्यार्थियों की संख्या वाले स्कूलों में 1500 सदस्यीय कमेटियों का गठन किया गया है। जिला मौलिक अधिकारी मधु मित्तल ने बताया कि विभाग द्वारा सरकारी स्कूलों में पढऩे वाले अनुसूचित जाति के बच्चों को पहले से ही नि:शुल्क वर्दी उपलब्ध करवाई जा रही है। चूंकि अनुसूचित जाति के बच्चों को पहले जिस कलर की वर्दी उपलब्ध करवाई गई है उसी कलर की वर्दी सामान्य वर्ग के छात्रों को उपलब्ध करवाई गई है। इस योजना के तहत वर्दी का कलर चेेंज करने का अधिकार स्कूल स्तर पर गठित स्कूल मैनेजमेंट कमेटी को दिया गया है। कमेटी आगे से जिस भी कलर की वर्दी छात्रों के लिए खरीदना चाहेगी वे खरीद सकती है। उन्होंने बताया कि राइट टू एजुकेशन के तहत अब पूरे देश में पहली से आठवीं तक की कक्षाओं को सर्वशिक्षा अभियान के तहत शामिल किया गया है।

इंडिया यंग, लीडरशिप ओल्ड!

कांग्रेस में 'प्रजातांत्रिक राजशाही'
  • कांग्रेस में भविष्यदृष्टा रहे तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने इक्कीसवीं सदी को युवाओं की सदी घोषित किया था। उनका मानना था कि इक्कीसवीं सदी में युवाओं के मजबूत कांधों पर भारत गणराज्य उत्तरोत्तर प्रगति कर सकता है। आज सत्ता और शक्ति के शीर्ष केंद्र की बागडोर उनकी अर्धांग्नी श्रीमति सोनिया गांधी के हाथों में है। राजीव पुत्र राहुल भी चालीस को टच कर रहे हैं। इक्कीसवीं सदी का पहला दशक बीत चुका है, पर फिर भी युवा आज भी पार्श्व में ही रहने पर मजबूर हैं। कमोबेश यही आलम भाजपा सहित अन्य राजनैतिक दलों का है। भारत गणराज्य में प्रजातंत्र की सरेआम शवयात्रा निकाली जा रही है। आम जनता प्रजातंत्र के शव पर सर रखकर गगनभेदी करूण रूदन कर रहा है, किन्तु नीति निर्धारकों और विपक्ष में बैठे नेताओं को इसकी आवाज नहीं सुनाई दे रही है। कांग्रेस में युवाओं को आगे लाने के हिमायती सबसे ताकतवर महासचिव राजा दिग्विजय सिंह ने तो मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनावों के दो साल पहले ही अपने पुत्र जयवर्धन को राघोगढ़ से कांग्रेस का प्रत्याशी तय कर दिया है। अपने आप में यह ''प्रजातांत्रिक राजशाही'' का नायाब उदहारण माना जाएगा।
भारत देश दिनों दिन जवान होता जा रहा है, किन्तु आज भी सियासत की बागड़ोर उमरदराज नेताओं के हाथों में ही खेल रही है। यंगिस्तान की राह इन पुराने नेताओं के हाथों से होकर ही गुजर रही है, किन्तु साठ पार कर चुके नेता आज भी युवाओं को देश की बागडोर सौंपने आतुर नहीं दिख रहे हैं। मनमोहन सिंह के हालिया फेरबदल के बाद जो परिदृश्य उभरकर सामाने आया है उसके अनुसार कैबनेट मंत्रियों की उमर पैंसठ तो मंत्रीमण्डल की औसत आयु साठ साल है। वजीरे आजम सहित 14 मंत्रियों ने सत्तर से ज्यादा सावन देख लिए हैं। अधिकतर मंत्रियों का जन्म गुलाम भारत में हुआ था। सचिन पायलट, अगाथा संगमा और मिलिंद देवड़ा की आयु 35 से कम तो कुमारी सैलजा चालीस के पेटे में हैं।
पिछले कुछ महीनों में यंगिस्तान को तवज्जो मिलने की उम्मीदें बंधी थीं। युवाओं को यह भाव इसलिए नहीं मिला है, कि देश का उमरदराज नेतृत्व उन पर दांव लगाना चाह रहा है, इसके पीछे सीधा कारण दिखाई पड़ रहा है कि देश में 18 से 30 साल तक के करोड़ों मतदाताओं को लुभाने की गरज से साठ की उमर पार कर चुके नेताओं ने यह प्रयोग किया है कि युवाओं को आगे कर युवा मतदाताओं को अपने से जोड़ा जाए। जब लाल बत्ती की बात आती है तो कमान युवाओं के हाथों से खिसलकर फिर साठ की उमर के कांधों पर चली जाती है।
कहने को तो सभी सियासी पार्टियों द्वारा युवाओं को आगे लाने और उनके हाथ में कमान देने की बातें जोरदार तरीके से की जाती हैं, किन्तु विडम्बना ही कही जाएगी कि सियासी दल युवाओं को आगे लाने में कतराती ही हैं। कांग्रेस में नेहरू गांधी परिवार की पांचवी पीढ़ी राहुल गांधी को आगे लाया जा रहा है, वह भी इसलिए कि उनके नाम को भुनाकर राजनेता सत्ता की मलाई काट सकें। वरना अन्य राजनैतिक दल तो इस मामले में लगभग मौन ही साधे हुए हैं।
जितने भी युवा चेहरे आज राजनैतिक परिदृश्य में दिखाई पड़ रहे हैं उनमें से अधिक को 'अनुकंपा नियुक्ति' मिली हुई है। अपने पिता की सींची राजनैतिक जमीन को 'सिंपेथी' वोट के जरिए ये युवा काट रहे हैं, वरना कम ही एसे युवा होंगे जिन पर पार्टी ने दांव लगाया हो और वे जीतकर संसद या विधानसभा पहुंचे हों। राजनीति में स्थापित 'घरानों' के वारिसान को ही पार्टी चुनाव में उतारती है और फिर आगे जाकर अपने पिताओं की उंगली पकड़कर ये देश की दशा और दिशा निर्धारित करते हैं। कांग्रेस में युवाओं को आगे लाने के हिमायती सबसे ताकतवर महासचिव राजा दिग्विजय सिंह ने तो मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनावों के दो साल पहले ही अपने पुत्र जयवर्धन को राघोगढ़ से कांग्रेस का प्रत्याशी तय कर दिया है। यह प्रजातांत्रिक राजशाही का नायाब उदहारण माना जाएगा।
कांग्रेस में सोनिया गांधी (65), मनमोहन सिंह (79), प्रणव मुखर्जी (77), ए.के.अंटोनी (71) के साथ पार्टी में नेताओं की औसत उमर 74 साल है। भाजपा भी इससे पीछे नहीं है अटल बिहारी बाजपेयी (87), एल.के.आड़वाणी (84), राजनाथ सिंह (60), एम.एम.जोशी (77) तो सुषमा स्वराज (59) के साथ यहां औसत उमर 73 दर्ज की गई है। वामदलों में सीपीआईएम में प्रकाश करात (64), सीताराम येचुरी (59), बुद्धदेव भट्टाचार्य (67), अच्युतानंदन (88) के साथ यहां राजनेताओं की औसत उमर 72 तो समाजवादी पार्टी में मुलायम सिंह यादव (71), अमर सिंह (55), जनेश्वर मिश्र (77), रामगोपाल यादव (65) के साथ यह सबसे यंग पार्टी अर्थात यहां औसत उमर 61 है।
सियासी पार्टियों में एक बात और गौरतलब होगी कि जितने भी युवाओं को पार्टियों ने तरजीह दी है, वे सभी जमीनी नहीं कहे जा सकते हैं। ये सभी पार्टियों में पैदा होने के स्थान पर अवतरित हुए हैं। इनमें से हर नेता किसी न किसी का 'केयर ऑफ' ही है, अर्थात यंगस्तान के नेताओं को उनके पहले वाली पीढ़ी के कारण ही जाना जाता है। ग्रास रूट लेबिल से उठकर कोई भी शीर्ष पर नहीं पहुंचा है।
पिछली बार संपन्न हुए आम चुनावों के पहले रायशुमारी के दौरान एक राजनेता ने जब अपने संसदीय क्षेत्र में अपने कार्यकर्ताओं के सामने युवाओं की हिमायत की तो एक प्रौढ़ कार्यकर्ता ने अपनी पीड़ा का इजहार करते हुए कहा कि जब मैं 29 साल पूर्व आपसे जुड़ा था तब युवा था, आज मेरा बच्चा 25 साल का हो गया है, वह पूछता है कि आप तब भी आम कार्यकर्ता थे, आज भी हैं, इन 29 सालों में आपको क्या मिला, आज मैं जवान हो गया हूं, तो किस आधार पर नेताजी युवाओं को आगे लाने की बात करते हैं।
दुनिया के चौधरी अमेरिका में युवाओं और बुजुर्गों के बीच अंतर की एक स्पष्ट फांक दिखाई पड़ती है। अमेरिका जैसे विकसित देश में जहां युवा पर्यावरण, जीवनशैली, रहन सहन और पारिवारिक मूल्यों के बारे में पुरानी पीढ़ी से अपने मत भिन्न रखती है, वहीं दूसरी ओर आधुनिक जीवनशैली के मामले में युवाओं द्वारा तेज गति से बदलाव चाहा जाता है। वैसे हमारी व्यक्तिगत राय में हर राजनैतिक दलों में युवाओं और बुजुर्गों के बीच संतुलन और तालमेल होना चाहिए। यह सच है कि उमर के साथ ही अनुभव का भंडार बढ़ता है, पर यह भी सच है कि उमर बढऩे के साथ ही साथ कार्य करने की क्षमता में भी कमी होती जाती है। जिस गति से युवाओं द्वारा कार्य को अंजाम दिया जाता है उसी तरह मार्गदर्शन के मामले में बुजुर्ग अच्छी भूमिका निभा सकते हैं।
कितने आश्चर्य की बात है कि जिस ब्यूरोक्रेसी (अफसरशाही) की बैसाखी पर चलकर राजनेता देश को चलता है, उसकी सेवानिवृत्ति की उम्र साठ या बासठ साल निर्धारित है, किन्तु जब बात राजनेताओं की आती है तो चलने, बोलने, हाथ पांव हिलाने में अक्षम नेता भी संसद या विधानसभा में पहुंचने की तमन्ना रखते हैं, यह कहां तक उचित माना जा सकता है। राजनैतिक क्षेत्र में युवा को अलग तरीके से परिभाषित किया जाता है। अघोषित तौर पर कहा जाता है कि राजनीति में युवा अर्थात 45 से 65 साल। इस हिसाब से राहुल गांधी को अगर 'अमूल बेबी' कहा जाता है तो इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं होना चाहिए। विडम्बना तो देखिए सरकार में काम करने वालों की सेवानिवृत्ति की उम्र निर्धारित है, किन्तु सरकार चलाने वालों की नहीं!
हमारे विचार से महज कुछ चेहरों के आधार पर नहीं, वरन् विचारों के आधार पर युवाओं को व्यापक स्तर पर राजनीति में आने प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। कब्र में पैर लटकाने वालों को अब राहुल गांधी से प्रेरणा लेना चाहिए। जब 41 बसंत देखने वाले राहुल गांधी कैबनेट में शामिल होने से खुद को दूर रखे हुए हैं तो फिर साठ पार कर चुके नेता आखिर लाल बत्ती के लिए जोड़तोड़ क्यों करते हैं। उन्हें भी चाहिए कि वे युवाओं को आगे लाने के हिमायती बनें पर राजा दिग्विजय सिंह जैसे नहीं जो खुद तो राजनीतिक मलाई चखने की कामना रखते हैं और अपने ही पुत्र को चुनाव में उतारने की घोषणा भी कर देते हैं, जबकि अभी न प्रत्याशी चुनाव के लिए समीति बनी है और न ही चुनावों की तारीखों की ही घोषणा हुई है। बुजुर्ग राजनैताओं का नैतिक दायित्व यह बनता है कि वे सक्रिय राजनीति से सन्यास लेकर अब मार्गदर्शक की भूमिका में आएं और युवाओं को ईमानदारी से जनसेवा का पाठ पढ़ाएं तभी गांधी के सपनों का भारत आकार ले सकेगा।

सामाजिक संस्थाओं ने जताया शोक

डबवाली(यंग फ्लेम)दैनिक समाचार पत्र यंग फ्लेम के मुख्य सम्पादक पाल होम्यो अस्पताल के संचालक डॉ। सुखपाल सिंह के मौसेरे भाई हरजीन्दर सिंह के निधन पर डबवाली युवा कांग्रेस के अध्यक्ष अमन भारद्वाज गांव बिज्जूवाली क्षेत्र के गांवों की सामाजिक संस्थानों राजनितिक लोगों ने एक शोक सभा कर शोक व्यक्त किया। शोक व्यक्त करने वालों में शहीद भगत सिंह युवा कल्ब के प्रधान हेमराज बिरट, आदर्श युवा कल्ब के प्रधान राणा बिरट, सरपंच बिज्जूवाली राजाराम बिरट, सरपंच गोदीकां गिरधारी लाल बिस्सू, सरपंच दारेवाला बलविन्द्र सिंह गिल, सरपंच कालुआना जगदेव सहारण, सरपंच रामगढ़ सतपाल सुथार, पंच देवपाल सोनी, युवा कांग्रेस नेता रोहित मेहता, अनिल कुमार नंदन, विनोद जांगड़ा सहित अनेक लोग मौजूद थे।

शनिवार, 4 जून 2011

छुट्टियों में कोचिंग, ना बाबा ना!

विज्ञान विषय में कक्षा 11 व 12 के बच्चों को पारंगत करने के लिए शिक्षा विभाग द्वारा एक जून से शुरू की गई कोचिंग शुरूआत में ही दम तोड़ गई है। अनुभवी शिक्षकों के अभाव में बच्चे स्कूल में जाकर कोचिंग लेने की बजाय घर पर ही पढऩे को तव्वजों दे रहे हैं। इसी का कारण है कि कोचिंग के तीसरे ही दिन बच्चों की संख्या कम हो गई है। शिक्षा विभाग ने पूरे प्रदेश में विज्ञान विषय के 11वीं तथा 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों को नि:शुल्क कोचिंग देने का निर्णय लिया था। कोचिंग सभी संस्कृति मॉडल विद्यालयों में एक जून से शुरू की जा चुकी है जो 30 जून तक चलेगी। कोचिंग का जिम्मा दो कंपनियों को दिया गया है जिसकी एवज में शिक्षा विभाग कंपनी को प्रति विद्यार्थी 6 हजार रुपये के हिसाब से भुगतान करेगी। कोचिंग के तहत बच्चों को नि:शुल्क पुस्तकें भी देने का प्रावधान रखा गया है। सिरसा जिले में भी कोचिंग संस्कृति मॉडल स्कूल में शुरू की गई है मगर तीसरे दिन ही कोचिंग की हवा निकल गई। जिले भर से विभिन्न सरकारी विद्यालयों में पढऩे वाले लगभग 1470 बच्चों के कोचिंग कक्षाओं में आने की उम्मीद थी। एक जून को उम्मीद के अनुसार करीब 1400 बच्चे स्कूल में पहुंचे। 2 जून को यह संख्या घटकर 990 तक पहुंच गई। तीन जून को कंपनी की ओर से एक टेस्ट लिया गया जिसमें लगभग 1094 बच्चों ने टेस्ट दिया मगर कोचिंग के लिए बच्चों में खास उत्साह दिखाई नहीं दिया। इससे आशंका जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में बच्चों की संख्या और कम हो सकती है। इससे साफ हो गया है कि बच्चों को छुट्टियों में दी जा रही कोचिंग रास नहीं आई है। इससे यही कहा जाएगा कि सरकार कोचिंग के नाम पर पैसों की बर्बादी कर रही है। इस मामले में सिरसा निवासी प्राध्यापक करतार सिंह ने कहा है कि यदि सरकार ने कोचिंग सिस्टम में बदलाव नहीं किया तो पैसों की इस बर्बादी के खिलाफ वे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
अनुभवी शिक्षक नहीं है
एचपीएस स्कूल के प्रिंसिपल रमेश सचदेवा भी मानते हैं कि कोचिंग में बच्चों की संख्या लगातार कम हो रही है। इसके पीछे मुख्य कारण पढ़ाने वाले शिक्षकों में अनुभव की कमी है। उन्होंने शिक्षा विभाग के डायरेक्टर को भी इससे अवगत कराया है जिसमें लिखा है कि शिक्षकों को पढ़ाने का पूरा अनुभव नहीं है जिस कारण बच्चे कम आ रहे हैं। विज्ञान विषय के बच्चों को पढ़ाने के लिए दक्ष शिक्षक होने चाहिए।

गर्मियों की छुट्टियां होती हैं घूमने के लिए

हर साल गर्मियों में बच्चों की छुट्टियां होती है। इसके लिए बच्चे व उनके अभिभावक पूरी साल इंतजार करते हैं ताकि किसी दूसरे स्थान पर घूमने के लिए जा सके। इस बार भी ऐसा ही हुआ है। एक जून को सरकारी विद्यालयों की छुट्टी हो गई। पहले से तय कार्यक्रम के तहत बच्चे घूमने के लिए चले गए। ऐसे में कोचिंग के लिए उतने बच्चे नहीं पहुंच रहे हैं जितने जाने चाहिए थे। बच्चों व उनके अभिभावकों का कहना है कि छुट्टियों की बजाय पढ़ाई के दिनों में ही एक घंटा अलग से कोचिंग दी जाती तो बेहतर होता।

क्या कर पाएंगे बाबा रामदेव?

इस वक्त देश के राजनीतिक परिदृश्य से प्रमुख विपक्षी पार्टियां गायब हैं। पहले अन्ना हजारे और अब बाबा रामदेव राजनीति के केंद्र में दिखाई दे रहे हैं। राजनीतिक पार्टियों ने खुद ही लोगों का भरोसा खोया है और लोग किसी संबल की आस में अन्ना हजारे और बाबा रामदेव के साथ दिखाई पड़ रहे हैं। बाबा रामदेव की अगवानी करने के लिए भारत सरकार के 4 मंत्री दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंचे। शायद ही किसी की अगवानी के लिए 4 मंत्री एक साथ पहुंचते हों। कांग्रेस के कोर ग्रुप की बैठक इस तरह हुई जैसे कोई बड़ी राष्ट्रीय समस्या गई हो।
बाबा रामदेव इस वक्त किसी सुपर हीरो या राष्ट्रीय नायक से कम नहीं लग रहे हैं। लोगों को उम्मीद है कि बाबा कुछ चमत्कार कर दिखाएंगे। विदेशों में जमा भारत के अरबों-खरबों के काले धन को वापस लाने या भ्रष्टाचार के संहार जैसा कुछ।
सवाल यह है कि बाबा अपनी किन मांगों को पूरा करवा पाएंगे? एक मांग जन लोकपाल की है। इस मांग को लेकर अन्ना हजारे लगभग इसी जोशोखरोश के साथ दिल्ली पर चढ़ाई कर चुके हैं। अब अन्ना कह रहे हैं कि सरकार ने उन्हें धोखा दिया और रामदेव सरकार से बच कर रहें। उम्मीद करते हैं कि अन्ना की यह सीख रामदेव के काम आएगी। लेकिन एक सवाल यह भी है कि इतने घोटालों आदि से लगभग विलन बन चुकी सरकार कहीं जन लोकपाल को (अपने मनमुताबिक कुछ हेर-फेर के साथ) लागू करके अपने अगले कार्यकाल के लिए आधार न बना ले।
बाबा रामदेव ने प्रधानमंत्री के पद के लिए सीधे वोटिंग की भी मांग की है। व्यक्तिपूजकों के इस देश में किसी एक व्यक्ति पर श्रद्धा दिखाते हुए उसे भारी वोटों से पीएम चुन लिया जाना कोई बड़ी बात नहीं होगी लेकिन हास्यास्पद स्थिति तब पैदा होगी जब वह पीएम तो होगा लेकिन सरकार में कोई दूसरी पार्टी होगी। ऐसा पीएम आज के पीएम से ज्यादा लाचार होगा।
बाबा की एक मांग है कि भ्रष्टाचारियों के लिए मृत्युदंड का प्रावधान हो। जब रेयरेस्ट ऑफ रेयर क्राइम पर भी फांसी का कई जगह से विरोध हो रहा हो तो वित्तीय अपराध के लिए भारत में मौत की सजा लगभग नामुमकिन दिखती है। बाबा की एक मांग बड़े नोटों पर बैन लगाने की है। इससे भ्रष्टाचार पर क्या फर्क पड़ेगा? क्या भ्रष्टाचारी छोटे नोट नहीं लेंगे या छोटे नोट होने से भ्रष्टाचार कुछ कम होगा? पता नहीं, लेकिन बड़े नोटों के न होने से भी कई दिक्कतें पैदा हो सकती हैं। बाबा रामदेव की एक और मांग है भारतीयों द्वारा विदेशों में जमा काले धन को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित किया जाए। मैं नहीं जानता कि इसे करने से क्या होगा क्योंकि राष्ट्रीय घोषित कर दी गई चीजों के लिए गंभीरता केवल स्कूलों की किताबों में दिखती है।
दरअसल यह देश हर वक्त किसी चमत्कार के लिए प्रतीक्षारत दिखता है। हर बार संसद और विधानसभाओं में पहले से ज्यादा अपराधी पहुंचते हैं लेकिन हम सुधार करने के लिए किसी दूसरे का मुंह ताकते रहते हैं।
दिक्कत इस देश की व्यवस्था में है। इसे राजनीति के जरिए ही बदला जा सकता है। बाबा रामदेव ने इन नेक काम के लिए अपनी राजनीतिक पार्टी 'भारत स्वाभिमान पार्टीÓ बनाई है। अगले लोकसभा चुनावों में इस पार्टी से उम्मीदवारों के मैदान में उतरने की भी संभावना है। बाबा रामदेव की जो लोकप्रियता है और भ्रष्टाचार पर जो भीड़ उनके साथ दिखाई दे रही है, उसके मुकाबले इस पार्टी के उम्मीदवारों का चुनावी मैदान में प्रदर्शन बेहद नगण्य रहने की संभावना है। यहां पर चुनावी सिस्टम हर चीज से अलग है। नेता से लेकर जनता तक। धन और बाहुबल बाहुल्य चुनावों में बाबा कैसे उम्मीदवार खड़े करेंगे? क्या वे उम्मीदवार बिना ज्यादा पैसा खर्च किए, जो कि निश्चित ही ईमानदारी से कमाया नहीं गया होगा, चुनाव जीत सकेंगे। या क्या भ्रष्टाचार पर बाबा-अन्ना के साथ खड़ी जनता जाति-धर्म आदि से अलग आधार पर अपने वोटों को तय कर सकेगी?
खैर यह सब बातें तो बाद में साफ हो पाएंगी, तब तक इंतजार करते हैं, शायद कोई चमत्कार हो ही जाए!

शुक्रवार, 3 जून 2011

Who is Baba Ramdev? A Yoga Guru

As Swamis go, he is rather young - turned 45 last year. Before Baba Ramdev became the latest crusader against corruption, he was best known for his efforts to popularise yoga among increasingly health conscious Indians.

Ramdev is largely a television and video phenomenon. He fired the imagination of an entire segment of TV watchers, who tuned out of daily soap opera to tune into and do yoga with Baba Ramdev.

A wiry man with a full flowing black beard, hair parted and tied back, in red robes, the abiding vision of Ramdev is of a man demonstrating very difficult yoga asanas. He has a considerable following and people flock to his institutes in Haridwar, near Dehradun. The yoga guru claims to cure many ailments through yoga and ayurveda and has courted controversy with his claims of curing AIDS and cancer with yoga, though he later clarified that he had only said yoga helped provide relief to those with AIDS.

As his popularity has grown in the era of multiple television channels, Ramdev has found not just celebrity, but political ambition too. A year ago he announced a new political party - the Bharat Swabhiman - to "cleanse the system." Ramdev said that he would not contest elections but that his party would contest all 543 Lok Sabha seats in the next elections on a manifesto that shall address black money and corruption as the key issues.
And those are the issues that Ramdev has brought out to address in his satyagraha, that he plans to launch tomorrow in the national capital. With a fast, much in the manner of social activist Anna Hazare, who had galvanized mass support with his hunger strike against corruption two months ago. Both Ramdev and Anna are part of a citizens effort to goad the government into making more stringent laws against corruption.

Ramdev was born in 1965 in a Haryana village called Alipur. He was named Ramkishan Yadav. Various biographies say Ramkishan attended school till class 8 and then joined a gurukul where he learnt Sanskrit and Yoga. He later became a sanyasi (one who renounces the world) and took the name Baba Ramdev and began to teach yoga. He later moved to Haridwar, where he continued to offer free yoga lessons. His followers claim he has studied the Hindu scriptures deeply and even taught them in various gurukuls.

Ramdev has set up several trusts, gurukuls and foundations and conducts yoga camps and classes throughout the world. He is known for his focus on pranayama, the ancient breathing exercises that are a fundamental part of yoga.

Rich Tributes paid to Mrs Surinder Kaur Badal by noted National political leaders and religious personalities

CM Expresses gratitude for sharing family’s grief

Malout-Glowing tributes were paid to Mrs Surinder Kaur Badal, the wife of Punjab Chief Minister Mr Parkash Singh Badal and the mother of Deputy Chief Minister Mr Sukhbir Singh Badal by the eminent national political leaders and religious personalities at the Bhog and antim ardaas ceremony organised here today at the New grain market.

Thousands of people from across the state have converged at the venue of bhog ceremony since morning to pay homage to Mrs Badal. Besides scores of regional leaders of various political parties, Cabinet Ministers, Chief Parliamentary Secretaries, top brass of the state civil and Police administration, party workers of SAD-BJP and the members of the Shiromani Gurudwara Prabhandak Committee (SGPC) also attended the bhog and antim ardaas of Mrs Badal.

Expressing gratitude to the people for sharing the grief in this hour of crisis, the Punjab Chief Minister Mr Parkash Singh Badal said that he on the behalf of Badal family was highly indebted to each one of you present here for showing a sense of belonginess and generosity. He said, “It was not only a personal loss to the family but also to the region and its people with whom my wife shared emotional ties since long for ensuring its overall development and their well being”.

Mr Badal profusely thanked the Prime Minister Dr Manmohan Singh who along with his wife shared his heart felt condolences telephonically with him and his family immediately after hearing about the sad demise of Mrs Badal. He also appreciated benevolent gesture of several leaders of national stature, who expressed sympathies with the family cutting across the political affiliations.

Paying tributes to Mrs Surinder Kaur Badal, the former Deputy Prime Minister Mr LK Advani recalled his ties with the Badal family since the formation of Bharatiya Jan Sangh under the leadership of Dr Shayama Prasad Mukherjee and later BJP and now the SAD being one of its the most trustworthy and strongest ally of the National Democratic Alliance (NDA). Mr Advani asked the people to take a vow to eradicate the menace of female foeticide from Punjab as a real tribute to Mrs Badal and also lauded the efforts of Member Parliament Mrs Harsimrat Kaur Badal, who had already launched a crusade against it and positive results were forthcoming.

In his address to offer tributes to Mrs Badal, the former BJP National President and Ex Chief Minister of Uttar Pradesh, Mr Rajnath Singh said she was a multi-faceted personality with the qualities of head and heart. He said Mrs Badal throughout remained a source of inspiration behind Mr Parkash Singh Badal’s successful political career who steered the state as Chief Minister for four terms

Leader of the opposition in the Lok Sabha Mrs Sushma Swaraj said that Mrs Badal was a unique example of womanhood who strived hard for the empowerment of women and played a significant role in championing the cause of women, especially in the rural sector. She said Mrs Badal’s apt handling of domestic affairs gave an opportunity to Mr Badal to emerge as the tallest political figure on the national arena, for which he was even today respected by one and all for his rare political acumen and statesmanship.

Paying homage to Mrs Badal, the Gujrat Chief Minister Mr Narinder Kumar Modi described her as a moving spirit for Mr Parkash Singh Badal’s dynamic political personality and her son Mr Sukhbir Singh Badal’s tremendous abilities and capabilities which had put Punjab in the high orbit of growth and development.

Former Haryana Chief Minister and President of Indian National Lok Dal (INLD) Mr Om Parkash Chautala in his tributes to Mrs Badal said that her immense contribution at the domestic front had enabled the Punjab Chief Minister Mr Parkash Singh Badal to achieve glory in political circles because he could exclusively devote himself to the overall development of state and for the welfare of its people, especially the peasantry. Without mincing any words Mr Chautala said politics was a whole time job and Mr Badal had done justice to it only due to the sheer dedication and motivation of his wife.

Former Member Parliament and Member of Working Committee of All India Congress Committee Mr Jagmeet Singh Brar recalled his affinity with Mrs Badal, who was just like a mother to him and said she was a perfect blend of love, compassion and faith. Mr Brar said that her contribution as a life partner in political life of Mr Badal was remarkable. He quoted, “Race is known by the womenhood”, which goes well with Mrs Badal’s charismatic personality.

In his homage to Mrs Badal the President Lok Bhalai Party and former Union Minister Mr Balwant Singh Ramoowalia said that the real tribute to her would be to ban the extravagant marriages in the state.

Member of National Executive of Communist Party of India Dr Joginder Dayal in his address paid to tributes Mrs Surinder Kaur Badal said that all of us should take a solemn pledge to do away with the social evil of female foeticide which was a slur on the Punjab’s rich cultural legacy.

While paying tributes to Mrs Badal the Managing Editor of the Ajit group of Newspapers Dr Barjinder Singh Hamdard said that she was an icon of Punjab, Punjabi and Punjabiyat as she always stood against the social maladies like dowry and female foeticide.

In his address Giani Gurbachan Singh the Jathedar Sri Akal Takht Sahib said Sardarni Surinder Kaur Badal was a perfect daughter, an accomplished wife and a caring mother who personified the concept of women hood in the right earnest.

Paying homage to Mrs Badal, the Head of Damdami Taksal Baba Harnaam Singh Dhumma said she motivated the people to organise community kitchen (Langar) at Sri Darbar Sahib and Kirtan Darbars in Punjab and other parts of country to propagate the basic tenets of sikhism amongst them especially the common masses.

Earlier Bhai Lakhwinder Singh, Bhai Harjinder Singh Srinagar Waale, Bhai Joginder Singh Riar and Bhai Ravinder Singh performed the gurbani kirtan and the antim ardas was performed by Bhai Kulwinder Singh.

मंगलवार, 22 मार्च 2011

चौधरी भुपेन्द्र सिंह हुड्डा किसानों के खेतों में अंतिम छोर तक पानी पहुचाने के लिए कृतसंकल्प है--डॉ.के.वी.सिंह

डबवाली--हरियाणा के मुख्यमन्त्री चौधरी भुपेन्द्र सिंह हुड्डा  किसानों के खेतों में अंतिम छोर तक पानी पहुचाने के लिए कृतसंकल्प है यह बात मुख्यमन्त्री हरियाणा के पूर्व विशेष कार्यधिकारी डॉ.के.वी.सिंह ने कांग्रेस कार्यालय मे कार्यकर्ताओ की समस्याऐ सुनते हुए कही। डॉ.सिंह ने कहा कि इसलिए हरियाणा सरकार ने वर्ष 2011 को जल संरक्षण वर्ष घोषित किया है। उन्होंने बताया कि किसानों के खेतों मे पुरा पानी पंहुचाने के लिए हल्का डबवाली के कई खालों व नहरों को पक्का करने व टुटी नहरों की मुरम्मत के लिए लगभग पौने तीन करोड़ रूपये खर्च किये जा रहे है। इससे लगभग 15 गांवो के किसानो की लगभग 3500 एकड़ भूमि को फायदा होगा। उपरोक्त निर्माण कार्यो की सूची में जिन नहरों व खालों को प्राथमिकता के तौर पर बनाया जा रहा है, उनमें लोहगढ़ डिट्रीब्युट्री की आरडी 18105/दांऐ की रिमोडलिंग पर लगभग 34.80 लाख रूपये, सक्ताखेड़ा माईनर की आडी 15210 टेल की रिमोउलिंग पर 58.50 लाख, मिठड़ी डिट्रीब्युट्री की आरडी 20964/बांऐ पर 31.80 लाख, मिठड़ी डिट्रीब्युट्री की आरडी 16460/बांऐ पर 15.85 लाख, पाना माईनर की आरडी 23285/बांऐ पर 21.45 लाख, पाना माईनर की आरडी 30395/बांऐ पर 24.55 लाख रूपये खर्च होगे। डॉ. सिंह ने आगे बताया कि उपरोक्त कार्यो के साथ कालुआना लिंक चैनल की आरडी 25370/बांऐ पर घट के निर्माण पर 1.58 लाख, रिसालियाखेड़ा माईनर की आरडी 0 से 12000/टेल रिपेयर पर 3.40लाख, तेजाखेड़ा डिट्रीब्युट्री की आरडी 1000 से 35750 तक की मुरम्मत पर 6.75 लाख, आसाखेड़ा माईनर की आरडी 0 से 42000/टेल की मुरम्मत पर 1.80 लाख रूपये खर्च होगे।    इस अवसर पर उपस्थित ब्लाक कांग्रेस डबवाली ग्रामीण के अध्यक्ष दरबारा सिंह,  ब्लाक मण्डी डबवाली के अध्यक्ष पवन गर्ग, ब्लाक औढां के प्रधान जगसीर सिंह मिठड़ी,  कीरत सिंह लोहगढ, भालईन्द्र सिंह सक्ताखेड़ा, विनोद धरणीया सक्ताखेड़ा, गुरचरण सिंह सक्ताखेड़ा, भूप सिंह नेहरा तेजाखेड़ा, प्रेम कुमार पूर्व सरपंच जोतांवाली, सोहलाल पचार चैटाला, राजेन्द्र सहारण चैटाला, रामकुमार नेहरा तेजाखेड़ा, बुटा सिंह पूर्व सरपंच पाना,  बहाल सिंह मिठड़ी, गुरविन्द्र सिंह मिठड़ी, जसविन्द्र सिंह पाना, मुखराम सिहाग आसाखेड़ा आदि किसानो ने उपरोक्त कार्यो की मंजुरी दिलवाने पर मुख्यमन्त्री चैघरी भुपेन्द्र सिंह हुड्डा व डा.के.वी.सिंह का हार्दिक आभार व धन्यवाद प्रकट किया।

शुक्रवार, 11 मार्च 2011

तेजधार हथियारों से नृशंस हत्या

डबवाली,
गांव डबवाली रास्ते से मिट्टी हटाने को लेकर हुए विवाद में कुछ व्यक्तियों एक व्यक्ति की तेजधार हथियारों से नृशंस हत्या कर दी। मृतक की पहचान जसकरण सिंह पुत्र नछतर सिंह के रूप में की गई है। पुलिस ने इस मामले में हत्या का मामला दर्ज कर एक ही परिवार के चार सदस्यों को नामजद किया है।
मृतक के चाचा जोगिंद्र सिंह ने पुलिस को बताया कि उसका भतीजा जसकरण सिंह अपने दो अन्य व्यक्तियों सुखकरण सिंह और हरमंदर सिंह के साथ डबवाली गांव में चश्मा साहिब गुरुद्वारा रोड़ पर स्थित उनकी 11 एकड़ भूमि में से एक टुकड़े को समतल करने का कार्य कर रहा था। उन्होंने बताया कि खेत कुछ दूरी पर ही एक मकान स्थित है जिसे उनके खेत से साथ लगते रास्ता जाता है। उन्होंने बताया कि मकान के निवासी जगसीर सिंह्र, उनकी पत्नी बयंत कौर व दोनों पुत्र राजविंद्र सिंह व सुखविंद्र सिंह दूरी पर साथ लगते तीन करम के रास्ते में मिट्टी हटाने को लेकर तू तू मैं मैं हो गई। उनका विवाद इतना बढ़ गया कि उन्होंने उस पर तेजधार हथियारों और लाठियों से हमला बोल दिया। उन्होंने बताया कि सुखकरण सिंह और हरमंदर सिंह ने उन्हें रोकने का प्रयास किया तो उन्होंने उन्हें भी धमकी दी और वे अपनी जान बचाने के लिए वहां से भाग गये। हमलावर  जसकरण सिंह पर तब तक वार करते हुए जब तक उसकी उसकी मौत नहीं हो गई उसकी मौत के बाद वे वहां से फरार हो गये। थाना शहर के प्रभारी बलवंत जस्सू ने बताया कि पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ हत्या मामला दर्ज कर उनकी तलाश आरंभ कर दी है। वहीं इस घटना के बाद जिले के पुलिस कप्तान सतिंद्रपाल गुप्ता ने घटना स्थल का दौरा कर घटना की जानकारी ली। इस मौके पर डीएसपी बाबू राम भी मौजूद थे।

तेजधार हथियारों से नृशंस हत्या

डबवाली,
गांव डबवाली रास्ते से मिट्टी हटाने को लेकर हुए विवाद में कुछ व्यक्तियों एक व्यक्ति की तेजधार हथियारों से नृशंस हत्या कर दी। मृतक की पहचान जसकरण सिंह पुत्र नछतर सिंह के रूप में की गई है। पुलिस ने इस मामले में हत्या का मामला दर्ज कर एक ही परिवार के चार सदस्यों को नामजद किया है।
मृतक के चाचा जोगिंद्र सिंह ने पुलिस को बताया कि उसका भतीजा जसकरण सिंह अपने दो अन्य व्यक्तियों सुखकरण सिंह और हरमंदर सिंह के साथ डबवाली गांव में चश्मा साहिब गुरुद्वारा रोड़ पर स्थित उनकी 11 एकड़ भूमि में से एक टुकड़े को समतल करने का कार्य कर रहा था। उन्होंने बताया कि खेत कुछ दूरी पर ही एक मकान स्थित है जिसे उनके खेत से साथ लगते रास्ता जाता है। उन्होंने बताया कि मकान के निवासी जगसीर सिंह्र, उनकी पत्नी बयंत कौर व दोनों पुत्र राजविंद्र सिंह व सुखविंद्र सिंह दूरी पर साथ लगते तीन करम के रास्ते में मिट्टी हटाने को लेकर तू तू मैं मैं हो गई। उनका विवाद इतना बढ़ गया कि उन्होंने उस पर तेजधार हथियारों और लाठियों से हमला बोल दिया। उन्होंने बताया कि सुखकरण सिंह और हरमंदर सिंह ने उन्हें रोकने का प्रयास किया तो उन्होंने उन्हें भी धमकी दी और वे अपनी जान बचाने के लिए वहां से भाग गये। हमलावर  जसकरण सिंह पर तब तक वार करते हुए जब तक उसकी उसकी मौत नहीं हो गई उसकी मौत के बाद वे वहां से फरार हो गये। थाना शहर के प्रभारी बलवंत जस्सू ने बताया कि पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ हत्या मामला दर्ज कर उनकी तलाश आरंभ कर दी है। वहीं इस घटना के बाद जिले के पुलिस कप्तान सतिंद्रपाल गुप्ता ने घटना स्थल का दौरा कर घटना की जानकारी ली। इस मौके पर डीएसपी बाबू राम भी मौजूद थे।

सोमवार, 7 मार्च 2011

ट्रांसपोर्ट मालिकों पर मामला दर्ज

रामा मंडी में दर्ज हुआ हत्या प्रयास का मामला
कालांवाली, 7 मार्च(बिल्लू यादव)
यहां के देसू रोड स्थित आरके आरटीसी ट्रांसपोर्ट पर गत दिवस हुई मारपीट व फायरिंग के मामले में पुलिस ने आईआरबी के जवानों की शिकायत पर ट्रांसपोर्ट मालिकों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। इसी प्रकार का मामला पंजाब भी दर्ज किया गया है। पुलिस ने आईआरबी के सब इंस्पेक्टर बलवंत सिंह की शिकायत पर कालांवाली पुलिस ने ट्रांसपोर्ट मालिक संजीव निवासी कालांवाली, बिट्टा सिंह निवासी डूमवाली व 4-5 अन्य लोगों के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा डालने, मारपीट करने, पिस्तौल छीनने व जान से मारने की धमकी देने के आरोप में मामला दर्ज किया है। अपनी शिकायत में बलवंत सिंह ने बताया कि वे पंजाब सीमा में नाका लगाकर टैक्स चोरी की जांच के लिए वाहनों की तलाशी ले रहे थे कि अचानक एक कैंटर आया। सिपाही मनदीप ने कैंटर को रोकना चाहा मगर कैंटर चालक वहां से भाग निकला और वे पीछा करते हुए कालांवाली में उक्त ट्रांसपोर्ट तक पहुंच गए। उन्होंने बताया कि यहां पर ट्रांसपोर्ट मालिक के साथ ही एक बोलेरो गाड़ी में कुछ अन्य लोग भी आ पहुंचे जिन्होंने उन पर हमला कर दिया। इस हमले में वे गंभीर रूप से घायल हुए हैं। उनका आरोप है कि ट्रांसपोर्ट मालिकों ने उनके पिस्तौल भी छीन लिया है। सूत्रों के अनुसार ट्रांसपोर्ट मालिकों के खिलाफ रामा मंडी में हत्या प्रयास का मामला दर्ज किया है। कालांवाली थाना प्रभारी विक्रम नेहरा ने  मामला दर्ज करने की बात से इनकार किया है और कहा कि मामले की जांच की जा रही है। उल्लेखनीय है कि गत दिवस उक्त ट्रांसपोर्ट पर आईआरबी व ट्रांसपोर्ट संचालकों के बीच झगड़ा हो गया था। झगड़े में आईआरबी के जवानों की गोली बारी में तीन लोग जख्मी भी हुए हैं जबकि जवान भी घायल हैं।

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