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रविवार, 18 अक्टूबर 2009

इनका दिवाला, उनकी दीवाली !


इस बार बिहार में लालू ब्रांड पटाख़ों की काफ़ी बिक्री हुई है
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बिहार में धनतेरस और दीपावली के मौक़े पर बाज़ार में बहार आ गई. कार, टीवी, फ़्रिज, गहने, पटाख़े और मिठाइयों की रिकार्ड-तोड़ बिक्री हुई.

यह सब देख-सुन कर कुछ लोग बेहद चिढ़ गए हैं. वो कहते हैं, "बिहार के गांवों में विकास-योजनाओं का दिवाला निकाल देने वाले भ्रष्टाचारियों की दीवाली है ये."

कारोबारियों से जुड़ी एजेंसियों द्वारा मोटे तौर पर किए गए आंकलन के मुताबिक़ अकेले पटना शहर में पचीस करोड़ रूपए के पटाखे और दो करोड़ रूपए की मिठाइयां बिक जाने की पुष्टि हुई है.

कुछ स्थानीय कारोबारियों के ज़रिए बाज़ार में उतारे गए उन पटाखों की ख़ूब बिक्री हुई है, जिन के डब्बों या रैपरों पर लालू प्रसाद, राबड़ी देवी, नीतीश कुमार और राम विलास पासवान के चित्र छपे हुए हैं.

इस सिलसिले में लालू प्रसाद ने चुटकी ली है कि "लालू ब्रांड पटाखा-बम के आगे नीतीश ब्रांड फुलझड़ी की भला क्या औक़ात हो सकती है?"

राम विलास छाप चक्करघिन्नी पर व्यंग्य करते हुए यहाँ लोग कहते हैं कि 'ये छुर्छुरी वाली घिरनी पासवान जी की राजनीति से बड़ा मेल खाती है'

इनके अलावा लादेन और कसाब के नाम और तस्वीर छाप वाले पटाख़ा-बम भी यहाँ ख़ूब चर्चा में हैं.

आर्थिक मंदी या सूखे के संकट से बिलकुल बेपरवाह ख़रीदारों की भीड़ देख कर बाज़ार की बांछें खिली हुई हैं.

गांवों में भले ही महंगाई ने ग़रीब किसानों का दिवाला निकाल दिया हो, शहरों में तो धन-पशुओं की दीवाली उफान पर दिख रही है.

हर्ष-उल्लास से मनी दीवाली


इस बार दीवाली में बाज़ार में रौनक देखी जा रही है



पूरी दुनिया में प्रकाश पर्व दीवाली हर्ष और उल्लास के साथ मनाई गई.

लोगों ने नए कपड़े पहने, पटाखे फोड़े, मिठाइयाँ बाँटीं और समृद्धि के लिए प्रार्थनाएँ की गईं.

चरमपंथी हमलों के ख़तरों को देखते हुए सुख, समृद्धि और शांति का प्रतीक माने जाने वाले इस त्यौहार के लिए भारत में सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए थे.

इस अवसर पर राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने लोगों के बीच शांति और सांप्रदायिक सौहार्द का संदेश दिया.

उपराष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी देशवासियों को दीवाली की शुभकामनाएँ दीं.

विदेशों में दीवाली
अपने घर और देश से दूर रह रहे लाखों भारतीयों ने शनिवार को धूम-धाम से दीवाली मनाई.

लोगों ने अपने घरों को सजाया और मित्रों के साथ मिलकर तरह-तरह से दीवाली मनाई. दुनिया भर में कई जगह भारतीय छुट्टी पर रहे.

अमरीका में राष्ट्रपति बराक ओबामा ने दो दिन पहले ही दीवाली मना ली थी, बाद में भारतीय दूतावास ने दीवाली पर कई आयोजन किए.

लंदन में प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन ने भी अपने सरकारी निवास, 10, डाउनिंग स्ट्रीट में दीवाली मनाई. बराक ओबामा की तरह उन्होंने भी वैदिक मंत्रोचार के साथ विश्व शांति के लिए प्रार्थना की.

नेपाल में भारत की तरह ही ज़ोरशोर से दीवाली मनाई गई, तो श्रीलंका में राष्ट्रपति ने तमिलों को बेहतर भविष्य का आश्वासन देते हुए उम्मीद जताई कि तमिल जल्द ही शरणार्थी शिविरों से अपने घरों को वापस लौट सकेंगे.

संयुक्त अरब अमीरात और मलेशिया में भी दीवाली उत्साह से मनाए जाने की ख़बरें हैं.

जगमग दीवाली और शुभकामनाएँ
भारत में शुक्रवार की शाम पटाखों की एक फ़ैक्ट्री में आग लग जाने से 32 लोगों की मौत हो गई. लेकिन शेष भारत में दीवाली के शांतिपूर्ण माहौल के बीच उत्साह से मनाए जाने की ख़बरें हैं.

लोगों ने अपने घरों को लाइटों और दीयों से सजाया और पटाख़े फोड़े.

हर वर्ष की तरह लोगों ने एक दूसरे के घर मिठाइयाँ भी पहुँचाईं.

परंपरा के अनुसार अभी दीवाली दो दिन और चलती रहेगी.

दिल्ली सहित देश के सभी शहरों में सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए थे.

इस बीच राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और उपराष्ट्रपति ने लोगों को शुभकामनाएँ दीं.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपने संदेश में कहा कि दीवाली लोगों के बीच दोस्ती और भाईचारे को मजबूत करने का पर्व है.

जहाँ पिछले वर्ष दीवाली में दुनिया भर में आर्थिक मंदी की वजह से बाज़ार में सुस्ती छाई थी वहीं इस वर्ष बाज़ार में चहल-पहल रही.

For candidates, no Diwali celebrations until Oct 22


Chandigarh, October 18(Dr SUKHPAL)-For the 1,221 candidates in fray for 90 seats of the Haryana Vidhan Sabha, Diwali celebrations are on hold till October 22 when the counting takes place.

Though only one in 14 of these candidates will make it to the 12th Vidhan Sabha of the state, yet all will be fingers crossed till the final count.

How many sitting legislators will make it to the next House and will the number of successful women candidates cross the unlucky number of 13 are some of the questions that await answers.

Elections to the 12th Vidhan Sabha have been unique for more reasons than one. Not only they were these held six months in advance, but also recorded the highest-ever voting percentage of 72.71 in 42 years.Another interesting aspect has been the voting pattern.

For example three of the state’s showcase cities, Gurgaon, Faridabad and Panchkula, went the Mumbai way, recording a low turnout. Mumbai saw a poor turnout despite the fact that Mumbaikers have been venting their anger after the 26/11 terrorist attack.

While 14 of the assembly segments polled more than 80 per cent votes, these three constituencies did not touch the 60 per cent mark and were the lowest in the list.

This is all the more intriguing since these are the three constituencies that have witnessed either maximum investment or the highest expenditure in infrastructure development.Thirtysix assembly segments witnessed a polling of 75 per cent or more. Only six constituencies polled less than 60 per cent, the other three being Kharkauda (57.17), Ballabgarh (59.63) and Badkhal (55.73).

Another unique feature of the 12th Vidhan Sabha elections is that it saw five major parties, national and regional, contesting on their own without alliances.

The only alliance, a minor one, was between the SAD and the INLD.

The BJP, the BSP and the HJC, the Congress and the INLD virtually contested every seat. Also, the SAD made its debut in electoral politics in Haryana by contesting Ambala City and Kallanwali seats under its own election symbol.

And when the results are declared on October 22, one of the Lals that dominated the state political scenario ever since it came into being in 1962, would be there in the House.

Last of the Lals - Bhajan Lal - is now a member of the Lok Sabha. His wife, Jasma Devi and son, Kuldip Bishnoi, have their political fortunes locked in the EVMs of the Nalwa and Adampur constituencies.

His other son, Chand Mohammad, alias Chander Mohan, could not contest with the Congress denying him the ticket.The other two Lals, Devi Lal and Bansi Lal, are no more but their progenies are in the race to make it to the 12th Vidhan Sabha.

शनिवार, 17 अक्टूबर 2009

HAPPY DIWALI



हैप्पी दीवाली


शिमला में प्रकाश पर्व की पूर्व संध्या पर आतिशबाजी से आसमान में दीवाली लिखने की कोशिश।

हर नागरिक के फिंगर प्रिंट लेगी सरकार


2011 की जनगणना के लिए जब सरकारी कर्मचारी आपके दरवाजे आएंगे तो वे आपसे सभी अंगुलियों के निशान (फिंगर प्रिंट) देने को कह सकते हैं। यही नहीं, आपकी आंख का स्कैन (इलेक्ट्रानिक चित्र) भी किया जा सकता है। दरअसल, इसका इस्तेमाल देश के हर नागरिक को खास नंबर देने की महत्वाकांक्षी सरकारी योजना में किया जाएगा। यूनिक आईडेंटीफिकेशन नंबर (यूआईडी) योजना के तहत पहला नंबर अगले एक से डेढ़ साल के अंदर जारी होने की उम्मीद है। इसे सबसे पहले महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून (मनरेगा) के लाभार्थियों को दिया जाएगा। लेकिन, यूनिक आईडेंटीफिकेशन अथारिटी आफ इंडिया (यूआईडीएआई) के प्रमुख नंदन नीलेकणि ने स्पष्ट किया है कि 16 अंकों वाला यह नंबर हर व्यक्ति को अलग पहचान तो देगा लेकिन इससे किसी को कोई अधिकार नहीं मिलेंगे, मसलन नागरिकता सरीखे। नीलेकणि ने उन आशंकाओं को खारिज कर दिया कि यूआईडी के जरिए अवैध बांग्लादेशी अप्रवासी भारत की नागरिकता हासिल कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि यूआईडी किसी को कोई अधिकार नहीं देगा। नीलेकणि ने कहा, गृह मंत्रालय के साथ हमने एक करार किया है। इसके तहत वर्ष 2011 की जनगणना में बायोमीट्रिक तरीके भी इस्तेमाल किए जाएंगे। जनगणना के दौरान हर व्यक्ति की सभी अंगुलियों के निशान भी लिए जाएंगे। आंख के स्कैन का विकल्प भी खुला है। नीलेकणि ने कहा, इस योजना के लिए कई हजार करोड़ रुपये की जरूरत होगी। लेकिन, रकम कहां से आएगी यह अभी तक तय नहीं हुआ है। उन्होंने उन खबरों का खंडन किया कि इस प्रोजेक्ट पर करीब डेढ़ लाख करोड़ रुपये खर्च होंगे। यूआईडी का मुख्य मकसद गरीब और हाशिए पर चले गए लोगों तक सरकारी योजनाओं का वास्तविक लाभ पहुंचाना है। पहचान के अभाव में ऐसे लोग सरकारी कार्यक्रमों का लाभ उठाने से वंचित रह जाते हैं।

बिजली विभाग की मेहरबानी-दीपावली पर गुलजार रहेगा हरियाणा


दीपावली पर हरियाणा का चप्पा-चप्पा पूरी तरह से गुलजार रहने वाला है। बिजली विभाग ने कुछ ऐसी ही व्यवस्था की है। आज पूरे राज्य में थोड़ी देर के लिए भी बिजली कट नहीं लगेगा। बिजली विभाग ने पावर एक्सचेंज दिल्ली और तीन प्रमुख प्राइवेट कंपनियों से बिजली खरीदकर अपने पास स्टोर कर ली है, ताकि हरियाणा के लोगों की दीपावली पूरी तरह से जगमगा सके। उत्तर हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम (सिस्टम आपरेशन) के महाप्रबंधक नवीन जैन ने दावा किया है कि दीपावली के दिन चूंकि राज्य भर में औद्योगिक संस्थान बंद रहेंगे और उनमें उत्पादन नहीं होगा, इसलिए वहां से बचने वाली बिजली भी लोगों में वितरित कर दी जाएगी। उनके अनुसार दीपावली पर उपभोक्ताओं को सुबह के समय 200 मेगावाट, दोपहर के समय 225 मेगावाट और रात के समय 500 मेगावाट अतिरिक्त बिजली की जरूरत पड़ेगी। इस बिजली का पूरा बंदोबस्त कर लिया गया है। उत्तर हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम को शुक्रवार तक 1567 मेगावाट और दक्षिण हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम को 1631 मेगावाट बिजली का अलाटमेंट हुआ है। इन दोनों निगमों की सप्लाई 1730 और 1956 मेगावाट की रही है। राज्य में बिजली उत्पादन करीब दो हजार मेगावाट है और चार सौ मेगावाट बिजली एनटीपीसी से ली रही है। लोगों की जरूरत को पूरा करने के लिए बाकी बिजली का इंतजाम प्राइवेट संस्थानों से किया गया है। महाप्रबंधक नवीन जैन के अनुसार छोटी दीपावली पर भी करीब 200 मेगावाट अतिरिक्त बिजली की खपत हुई है, जिसका बंदोबस्त कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि दीपावली पर निर्बाध रूप से विद्युत आपूर्ति के लिए पावर एक्सचेंज दिल्ली, एनटीपीसी, टाटा और जीएमआर कंपनियों से बिजली खरीदी गई है। उन्होंने दावा किया कि दीपावली के त्यौहार पर पूरे राज्य में कहीं कोई कट नहीं लगेगा। इस बारे में सभी अधीक्षण अभियंताओं को निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि दीपावली पर शाम के समय बिजली की अधिक खपत संभव है।

सोच समझकर चलाएं पटाखे, हो सकती है सजा


( डॉ सुखपाल सावंत खेडा)- : दीपावली के त्यौहार के मद्देनजर राज्य में पटाखे चलाने का समय निर्धारित किया गया है। शाम छह बजे से रात दस बजे के बीच आप और आपके परिवार के सदस्य आतिशबाजी कर सकते हैं। इस समय अवधि के बाद यदि आपने पटाखे चलाए तो शिकायत होने पर पांच साल की सजा और एक लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने आतिशबाजी से नुकसान के मद्देनजर यह गाइड लाइन तैयार की है। बोर्ड अधिकारियों का मानना है कि आतिशबाजी से न केवल ब्रांकाइटिस और अस्थमा की बीमारियां फैलेंगी, बल्कि ध्वनि और वायु प्रदूषण भी बढ़ेगा। दीपावली के दिन पूरे राज्य में छह से दस गुणा तक प्रदूषण फैलने की आशंका जाहिर करते हुए बोर्ड अधिकारियों ने कहा है कि आतिशबाजी चलाने में बरती जाने वाली सावधानी से लोगों को ही लाभ मिलेगा। अस्पताल, शिक्षण संस्थान, अदालतें और धर्म स्थानों के करीब सौ मीटर के दायरे में आतिशबाजी चलाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया गया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रवक्ता ने बताया कि बेहतर यही होगा कि दीपावली के त्यौहार की खुशियां मिलजुलकर बांटी जाए। यदि लोग आतिशबाजी करना भी चाहते हैं तो रात दस बजे के बाद इससे बचें। दूसरी तरफ स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने आतिशबाजी के दौरान लगने वाली चोटों के मद्देनजर प्रत्येक जिले के सरकारी अस्पताल में बर्न वार्ड स्थापित किए हैं। प्रत्येक बर्न वार्ड में नेत्र विश्ेषज्ञ समेत चिकित्सकों की पूरी टीम उपलब्ध रहेगी। इस बारे में जिला सिविल सर्जनों को व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। उनसे दीपावली के दिन मिठाई की दुकानों की नियमित चेकिंग करने को भी कहा गया है। स्वास्थ्य विभाग को आशंका है कि दीपावली के दिन नकली दूध, खोया, मावा और नकली घी की बिक्री हो सकती है, जो कि लोगों के स्वास्थ्य के लिए घातक है। सिविल सर्जनों को निर्देश दिए गए हैं कि वह टीम बनाकर मिठाई की दुकानों पर छापामारी करें और यदि कोई दुकानदार लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले उत्पाद बेचता पाया जाता है तो उसके विरुद्ध चालान काटकर कड़ी से कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाए। प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा और राज्यपाल जगन्नाथ पहाडि़या ने राज्य के लोगों को दीपावली की शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने लोगों से प्रदूषण रहित दीपावली मनाने का आग्रह किया और कामना जाहिर की है कि यह दीपावली प्रदेश में अमन, शांति, सुख और समृद्धि लेकर आए। इनेलो प्रमुख एवं पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला, पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल, हजकां सुप्रीमो कुलदीप बिश्नोई, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष कृष्णपाल गुर्जर और बसपा के राष्ट्रीय महासचिव मान सिंह मनहेड़ा ने भी राज्यवासियों को दीपावली की शुभकामनाएं देते हुए यह त्यौहार मिलजुलकर मनाने का आह्वान किया है।

दिवाली ने दूर की मंदी की अमावस


नई दिल्ली : इस बार दिवाली बहुत कुछ बदल रही है। अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदल रही है, उपभोक्ता बाजार के हालात बदल रही है, इस बाजार से जुड़ी कंपनियों की सेहत सुधार रही है। सबसे अहम, नई नौकरियों के रास्ते खोल रही है। इससे निवेशकों के सामने निवेश के नए मौके आ रहे हैं। जुलाई 2009 से शुरू हुई दूसरी तिमाही अर्थव्यवस्था के लिए सुधार के संकेत लेकर आई। पिछले साल शुरू हुई मंदी में कमर तुड़वा बैठी कंज्यूमर ड्यूरेबल कंपनियों की सेहत फिर से सुधरने लगी है। उस पर त्योहारों के इस मौसम ने ऐसी मेहरबानी की कि इस क्षेत्र की कंपनियों की बिक्री में त्योहारों के दौरान औसतन 35-40 फीसदी की वृद्धि होने की खबर है। पछले 45 दिनो में सैमसंग की टीवी की बिक्री में 100 फीसदी, फ्लैट टीवी की बिक्री में दो सौ फीसदी, वाशिंग मशीन की बिक्री में 60 फीसदी, फ्रिज की बिक्री में 80 फीसदी की वृद्धि हुई है। एलजी के उत्पादों की बिक्री भी आम महीनों की तुलना में दोगुनी हो गई है। अर्थव्यवस्था में सुधार का अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि देश की सबसे बड़ी संगठित रिटेल कंपनी फ्यूचर ने एक दिन में 75 करोड़ रुपये के केवल इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों की बिक्री की है। मौजूदा हफ्ते के दौरान कंपनी ने 500 करोड़ रुपये के इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों की बिक्री का लक्ष्य रखा है। आम तौर पर इतनी बिक्री कंपनी एक महीने में करती है। तकरीबन यही हाल ऑटो क्षेत्र का भी है। एक अक्टूबर, 2009 के बाद के पहले 15 दिनों के दौरान ही मारुति और हुंडई ने इतनी कारों की बिक्री की है जो पिछले वर्ष के दौरान पूरे त्योहारी सीजन की बिक्री से ज्यादा है। दोनों कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों ने जागरण को बताया कि उन्हें पूरी उम्मीद है कि आने वाले कुछ महीनों तक रिकार्ड बिक्री का यह सिलसिला जारी रहेगा। हालांकि अर्थव्यवस्था में हो रहे सुधार ने आम आदमी के लिए बचत के रास्ते भी सीमित किए हैं। महंगाई की दर बढ़ने के साथ-साथ ब्याज दरों में बढ़ोतरी आशंका भी बढ़ती जा रही है। बैंकों ने डिपॉजिट पर ब्याज दरें घटाने की शुरुआत भी कर दी है। ऐसे में बचत के लिए लोगों के सामने अब दूसरे विकल्पों को अपनाना होगा। पिछले कुछ महीनों से होम लोन देने में आनाकानी कर रहे निजी क्षेत्र के प्रमुख बैंकों (आईसीआईसीआई और एचडीएफसी) ने भी अपने दिल उदार कर लिए हंै।

चिडि़या उड़ाना-मवेशी हांकना भी रोजगार की गारंटी


नई दिल्ली( डॉ सुखपाल सावंत खेडा)- अगर आप चिडि़या उड़ाना और मवेशी हांकना जानते हैं तो आपको रोजगार की गारंटी मिल सकती है। सरकार इन कामों को भी नरेगा में शामिल करने की तैयारी में है। सरकार का मानना है कि इससे जहां खेतों को चिडि़यों के चुगने से बचाया जा सकता है, वहीं वन्य जीवों की सुरक्षा भी हो सकेगी। राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (नरेगा) में कुछ और कार्यो को शामिल किये जाने की मांग को देखते हुए इस प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है। यह जानकारी केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री सीपी. जोशी ने दैनिकजागरण से बातचीत में दी। उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़ और असम ने इस तरह के प्रस्ताव भेजे हैं। पहाड़ और सघन जंगलों के आसपास की खेती को वन्य जीवों से नुकसान पहुंचता है जबकि कृषि की क्षति रोकने के लिए कुछ जगहों पर जिस तरह के उपाय किये गये हैं, उनसे भी वन्य जीवों की क्षति हो रही है। असम में जंगली हाथियों से खेती को नुकसान पहुंच रहा है, जबकि हिमाचल प्रदेश और छत्तीसगढ़ में जंगली जानवरों और चिडि़यों से। खेती को बचाने और छोटे-छोटे खेतों में खड़ी फसल की सुरक्षा के लिए मजदूरों की नियुक्ति करनी पड़ती है। देश के विभिन्न क्षेत्रों से नील गायों की हत्या करने की अनुमति मांगी गई है, पर सांप्रदायिक संवेदनशीलता के मद्देनजर ऐसा करना संभव नहीं हो पा रहा है। इन राज्यों में खेती को बचाने के लिए नरेगा की मदद भी नहीं मांगी गई है।

गांवों के लिए अलग मेडिकल कालेज

नई दिल्ली- केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद ने कहा है कि गांवों में डाक्टरों की कमी को दूर करने के लिए सरकार जल्दी ही मेडिकल शिक्षा का वैकल्पिक माडल लागू करने वाली है। इससे गांवों से ज्यादा डाक्टर तैयार हो सकेंगे और ये उसी इलाके की सेवा भी कर सकेंगे। आजाद के मुताबिक मौजूदा व्यवस्था के साथ ही एक वैकल्पिक मेडिकल शिक्षा व्यवस्था भी शुरू की जा रही है। इसके तहत दस हजार से कम आबादी वाले गांवों के छात्रों को ही दाखिला दिया जाएगा। इस समानांतर व्यवस्था की वजह से गांव के छात्रों के लिए मेडिकल शिक्षा ज्यादा सुलभ हो जाएगी। मगर इनके लिए शर्त सिर्फ यह रहेगी कि एक नियत समय तक उन्हें गांवों में ही रह कर प्रैक्टिस करनी होगी। मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया (एमसीआई) इसके लिए प्रस्ताव तैयार कर चुका है। जल्दी ही इसे लागू किया जाएगा। आजाद ने कहा कि इस तरह शहरों और गांवों के बीच की खाई पाटी जा सकेगी। हालांकि इस पूरी प्रक्रिया में कहीं भी मेडिकल शिक्षा की क्वालिटी से समझौता नहीं किया जाएगा। सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के विकास के लिए निजी क्षेत्र का पूरा सहयोग लेने की कोशिश कर रही है। कंपनियों को मेडिकल कालेज खोलने की इजाजत देने और नए मेडिकल कालेज खोलने के नियमों में दी गई ढिलाई के बाद अब कुछ वर्षो के अंदर ही देश में मेडिकल पेशेवरों की कमी दूर हो जाएगी। आजाद व‌र्ल्ड मेडिकल एसोसिएशन की आम सभा में बोल रहे थे। इस मौके पर राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने डाक्टरों से कहा कि मरीज आपकी ओर बेहद उम्मीद से आता है इसलिए उसकी अपेक्षा पर खरा उतरना चाहिए। डाक्टर का सबसे पहला ध्येय मरीज की भलाई होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अपने देश में चिकित्सा के क्षेत्र में ऐसी खोज की जानी चाहिए जिससे इलाज सस्ता हो सके। इस लिहाज से वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों का भी सहयोग अहम हो सकता है।

शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2009

गर्म धरती पर गर्म बहस




धरती को मिलनेवाली कुल ऊर्जा में से 98 प्रतिशत का स्रोत सूर्य है

ग्लोबल वॉर्मिंग का शोर कुछ ऐसा है कि लगता है साल-दर-साल गर्मी बढ़ती जा रही है.

मगर तथ्य कुछ और है – हाल के समय में सबसे गर्म साल 1998 था और पिछले 11 साल में धरती के तापमान में कोई वृद्धि नहीं हुई है.

ऐसा होनेवाला है इसकी भविष्यवाणी भी नहीं हुई थी और ना ही ऐसा हुआ कि धरती को गर्म करनेवाली कार्बन डाइऑक्साइड गैसों का उत्सर्जन कम हो गया हो.

इसी सबके बीच एक सवाल उठ खड़ा हुआ है – कि हो क्या रहा है, धरती का तापमान बढ़ भी रहा है कि नहीं?

जलवायु परिवर्तन के लिए मानवीय गतिविधियों को ज़िम्मेदार बतानेवाली मान्यता पर संदेह करनेवाला पक्ष कहता है कि वे तो ऐसा पहले से ही कह रहे थे.

उनकी दलील है कि धरती के गर्म-ठंडे होने का एक चक्र बना हुआ है जो प्रकृति पर निर्भर करता है और मानवों का इसपर कोई नियंत्रण नहीं है.

लेकिन दूसरी तरफ़ दूसरा पक्ष उनके इस दावे पर सवाल उठाता है और वह सूर्य को धरती के तापमान की वृद्धि से जोड़ने की बात को सही नहीं मानता.

दोनों पक्ष आनेवाले वर्षों के बारे में बिल्कुल उल्टे दावे कर रहे हैं – एक कहता है कि धरती और गर्म होगी – दूसरा कहता है कि धरती ठंडी होगी.

संदेह
ग्लोबल वॉर्मिंग की प्रचलित मान्यता पर संदेह करनेवाला पक्ष कहता है कि 20वीं शताब्दी के आख़िरी कुछ दशकों में धरती का तापमान बढ़ा अवश्य है लेकिन ये हुआ है सूर्य के कारण जो धरती तक पहुँचनेवाली समस्त ऊर्जा की 98 प्रतिशत ऊर्जा का स्रोत है.

प्रशांत महासागर में गर्मी के चक्र के बाद अब ठंड का चक्र आ गया है, और ऐसे में कहा जा सकता है कि आनेवाले 30 वर्ष ठंडे वर्ष रहेंगे.

प्रोफ़ेसर डॉन ईस्टरबुक, वेस्टर्न वाशिंगटन विश्वविद्यालय

लेकिन दो वर्ष पहले ब्रिटेन की रॉयल सोसायटी ने एक शोध कर धरती के तापमान को सूर्य से जोड़ने के इस दावे को रद्द कर दिया.

जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र की अंतर्सरकारी समिति के लिए योगदान देनेवाले लीड्स विश्वविद्यालय के पियर्स फ़ोर्स्टर कहते हैं,"पिछले 20 से 40 वर्षों में धरती के तापमान में जो वृद्धि हुई है उसके लिए सूर्य को ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता."

लेकिन मौसम की दीर्घकालीन भविष्यवाणियाँ करनेवाली ब्रिटेन स्थित एक संस्था वेदरऐक्शन से जुड़े सौर वैज्ञानिक पियर्स कॉर्बिन का दावा है कि सौर कण धरती पर जितना समझा जाता है उससे कहीं अधिक असर डालते हैं.

उनका तो दावा है कि सूर्य धरती के तापमान की वृद्धि के लिए लगभग पूरा-का-पूरा ज़िम्मेदार सूर्य ही है.

वे अपनी इस खोज को लेकर इतने उत्साहित हैं कि वे इस महीने के अंत में लंदन में अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों के सामने एक बड़ा एलान करने जा रहे हैं और यदि उनके दावे की पुष्टि होती है तो फिर ग्लोबल वॉर्मिंग को लेकर सारी समझ और बहस की दिशा बदल सकती है.

चक्र
पिछले 20 से 40 वर्षों में धरती के तापमान में जो वृद्धि हुई है उसके लिए सूर्य को ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता.

पियर्स फ़ोर्स्टर, लीड्स विश्ववविद्यालय

धरती के तापमान को लेकर एक बहस समुद्र से भी जुड़ती है.

पिछले वर्ष नवंबर में वेस्टर्न वाशिंगटन विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर डॉन ईस्टरबुक ने एक शोध किया था जो कहता है कि धरती और सागर के तापमानों का संबंध एक-दूसरे से जुड़ा है.

उनका शोध कहता है कि सागरों के ठंडे-गर्म होने का एक चक्र होता है जो आमतौर पर 30-30 वर्षों का चक्र होता है.

1945 से 1977 तक धरती का तापमान बहुत ठंडा था और तब ग्लोबल कूलिंग को एक बड़ी चुनौती बताया जा रहा था. इस दौरान प्रशांत महासागर की सतह का तापमान भी ठंडा था

फिर 80 और 90 के दशक में प्रशांत महासागर की सतह का तापमान औसत से अधिक था और इस समयावधि में धरती का तापमान भी बढ़ा हुआ था.

मगर पिछले कुछ वर्षों में प्रशांत का तापमान कम हुआ है और अब तो वो ठंडा भी हो रहा है.



वैज्ञानिकों के अनुसार प्रशांत महासागर के पानी के ठंडे-गर्म होने का एक चक्र चलता है
प्रोफ़ेसर ईस्टरब्रुक कहते हैं,"प्रशांत महासागर में गर्मी के चक्र के बाद अब ठंड का चक्र आ गया है, और ऐसे में कहा जा सकता है कि आनेवाले 30 वर्ष ठंडे वर्ष रहेंगे."

जलवायु परिवर्तन को मानवीय क्रियाकलापों से जोड़े जाने पर संदेह करनेवाला पक्ष कहता है कि सागरों के साथ धरती के तापमान का ये संबंध इस बात का प्रमाण है कि उनका दावा सही है.

वे कहते हैं कि इसके अलावा भी कई और प्राकृतिक कारण हैं धरती के तापमान के बढ़ने और घटने के पीछे और यदि मानवीय गतिविधियों से कुछ होता भी होगा तो उसका प्रभाव प्रकृति के प्रभाव के सामने बहुत छोटा होता होगा.

प्रतिदावा
दूसरी तरफ़ मानवीय क्रियाकलापों को ग्लोबल वॉर्मिंग के लिए ज़िम्मेदार ठहरानेवाला पक्ष दावा करता है कि उनकी सोच बिल्कुल ठोस है.

ब्रिटेन के मौसम विभाग का कहना है कि वे अपनी भविष्यवाणियाँ करते समय सूर्य और समुद्र के प्रभाव का ध्यान रखते हैं और इसमें नया कुछ भी नहीं है.

उनका कहना है कि इसके अलावा ये भी है कि ऐसा कभी भी नहीं हुआ है कि तापमान किसी निश्चित दर से बढ़ता या घटता हो, कई बार अस्थायी तौर पर गर्मी बढ़ती है तो कई बार अस्थायी तौर पर ठंड.

ब्रितानी मौसम वैज्ञानिकों का दावा है कि 2010 से 2015 के बीच कम से कम आधे साल 1998 के साल की तुलना में अधिक गर्म रहेंगे.

लेकिन दूसरा पक्ष इससे सहमत नहीं है और उसका दावा है कि कम-से-कम 2030 तक तो ऐसी कोई सूरत नहीं आनेवाली है जब तापमान 1998 के जितना होगा.

कुल मिलाकर धरती के गर्म और ठंडे होने को लेकर बहस में कुछ भी निश्चित नहीं लगता.

निश्चित केवल एक चीज़ लगती है – कि ये बहस गर्म है.

मुकेश का वेतन अब सिर्फ़ 15 करोड़


भारत के सबसे धनी व्यावसायी और उद्योगपति मुकेश अंबानी ने अपने वेतन में दो तिहाई कटौती करने की घोषणा की है.

उन्होंने अपने वेतन में कटौती की घोषणा ऐसे समय में की है जब देश में कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के वेतन को लेकर बहस चल रही है.

रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के प्रमुख मुकेश अंबानी ने कहा है कि वे वर्ष 2009 में सिर्फ़ 15 करोड़ रुपयों का वेतन लेंगे जबकि वर्ष 2008 में उनका वेतन 44 करोड़ रुपए था.

अपने मुख्य प्रबंध निदेशक (सीएमडी) के इस फ़ैसले की घोषणा करते हुए रिलायंस इंडस्ट्रीज़ लिमि़टेड (आरआईएल) ने कहा है, "यह कंपनियों के कार्यकारी अधिकारियों को मिलने वाले वेतनों के लिए आत्मसंयंम का उदाहरण पेश करने की उनकी इच्छा को प्रदर्शित करता है."

उल्लेखनीय है कि भारत के कंपनी मामलों के मंत्री सलमान ख़ुर्शीद ने सलाह दी थी कि कंपनियों को 'अश्लील' तनख़्वाहों में कटौती करनी चाहिए, बाद में योजना आयोग के उप सभापति मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने भी इससे सहमत होते हुए कहा था कि वेतन 'अशोभनीय' नहीं होने चाहिए.

लेकिन कंपनियों ने इससे असहमति जताते हुए कहा था कि सबसे बेहतर है कि तनख़्वाहें कंपनियों के बोर्ड रुम में तय हों.

रिलायंस इंडस्ट्रीज़ ने कहा है, "कंपनी बोर्ड की वेतन संबंधी समिति ने फ़ैसला किया है कि आरआईएल के सीएमडी की तनख़्वाह अब 15 करोड़ होगी."

कंपनी के अनुसार यह फ़ैसला लिया गया है कि अब लाभांश देने की बजाय सभी अधिकारियों के वेतन के लिए अधिकतम सीमा तय कर दी जाएगी.

मुकेश अंबानी का वेतन अब भारत के कई कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के वेतन से कम हो गया है.

इसी साल मार्च में उनके छोटे भाई अनिल अंबानी ने भी घोषणा की थी कि वे वर्ष 2008-09 के लिए अपने समूह की पाँच कंपनियों में से किसी से भी वेतन और कमीशन नहीं लेंगे.

ओबामा ने मनाई दीवाली





अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने व्हाइट हाउस में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच दीप जलाकर दीवाली मनाई और लोगों को इस पर्व की शुभकामना दी.

व्हाइट हाउस में व्यक्तिगत तौर पर दीवीली मनाने वाले ओबामा अमरीका के पहले राष्ट्रपति बन गए.

व्हाइट हाउस के ईस्ट रूम में बुधवार को आयोजित एक कार्यक्रम ओबामा ने कहा, ‘‘मैं समझता हूं कि यह उपयुक्त समय है जब हम इस कार्य की शुरूआत छुट्टियों के समय दिवाली से कर रहे हैं, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है और जिसे दुनिया के महानतम धर्मों में से एक के तमाम अनुयायी मनाते हैं.’’

यह पहली बार है जब किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने व्हाइट हाउस में दीवाली मनाई. और इस तरह से अमरीका में दीपों के इस त्योहार का जिसे दुनिया भर में करोड़ों हिंदुओं, जैनियों, सिखों और कुछ बौद्ध धर्मावलंबियों द्वारा मनाया जाता है, आधिकारिक सम्मान हुआ है.

आगामी शनिवार को यहां अमेरिका और दुनिया भर के हिंदू, जैन, सिख और कुछ बौद्ध धर्मावलंबी छुट्टियों के अवसर पर दिया यानी दीपक जलाकर दीवाली मनाएंगे जो अंधकार पर प्रकाश और अज्ञानता पर ज्ञान की जीत का प्रतीक है.

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा

ओबामा ने कहा, ‘‘आगामी शनिवार को यहां अमेरिका और दुनिया भर के हिंदू, जैन, सिख और कुछ बौद्ध धर्मावलंबी छुट्टियों के अवसर पर दिया यानी दीपक जलाकर दीवाली मनाएंगे जो अंधकार पर प्रकाश और अज्ञानता पर ज्ञान की जीत का प्रतीक है.’’

व्हाइट हाउस में आयोजित इस समारोह में भारतीय समुदाय के कई गणमान्य लोग उपस्थित थे. इस मौके पर ओबामा की कैबिनेट के क़रीब आधा दर्ज़न सदस्य और अमरीकी प्रशासन में शामिल कई भारतीय अमेरिकी सदस्य भी उपस्थित थे.

अमरीका के दौरे पर गए केंद्रीय वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा और अमरीका में भारत की राजदूत मीरा शंकर ने भी इस मौक़े की शोभा बढ़ाई.

दीप प्रज्ज्वलित करने से ठीक पहले श्री शिव विष्णु मंदिर के पंडित नारायण आचार्य दिगालाकोटे ने वैदिक मंत्रोच्चार किया.

इस मौक़े पर ओबामा ने कहा कि वैसे तो यह एक खुशी का मौक़ा है लेकिन साथ ही इस मौक़े पर हमें उन लोगों को भी याद करना चाहिए जो कम भाग्यशाली हैं. साथ ही हमें ज़रूरतमंद लोगों तक पहुंचने की अपनी प्रतिबद्धता को भी याद करना चाहिए.

इस मौक़े पर उपस्थित जन समुदाय को अपने चिर- परिचित अंदाज़ में संबोधित करते हुए ओबामा ने कहा, ‘मैं व्हाइट हाउस में दिया जलाकर बहुत ख़ुश महसूस कर रहा हूं और आप सभी को दीवाली की शुभकामना और साल मुबारक.’


ओबामा ने इस अवसर पर एशियन अमेरिकन एंड पैसिफिक आइलैंडर्स (एएपीआई) और व्हाइट हाउस के लिए सलाहकार आयोग को पुनर्गठित करने की भी घोषणा की जिसकी पहल पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने दस साल पहले की थी.

बच्चा घर पर, तलाश हवा में



पुलिस ने घर की दो बार तलाशी ली लेकिन वे बच्चो को ढूँढ़ नहीं सके
अमरीका में छह साल के एक बच्चे के बारे में यह भ्रम हो गया कि वह हीलियम भरे एक गुब्बारे में उड़ गया है और इसके बाद पूरे देश में ख़बर फैल गई और अफ़रा-तफ़री मच गई.

हीलियम का गुब्बारा दो घंटे तक उड़ता रहा और टेलीविज़न चैनल इस गुब्बारे का सीधा प्रसारण करते रहे.

सेना का एक हैलिकॉप्टर इस आशंका के साथ उस गुब्बारे का पीछा करता रहा कि कहीं बच्चा उसमें से गिर न जाए.

लेकिन बाद में पता चला कि बच्चा अपने ही घर के ऊपर वाले कमरे में ही था.

पुलिस का कहना है कि वह एक बक्से में छिपा बैठा था.

पिता की डाँट के कारण

यह घटना कोलोरैडो की है.

पिता की डाँट से मैं डर गया था इसलिए मैं अपने घर के सबसे ऊपर बने कमरे में जाकर छिप गया था

फ़ाल्कन
हीलियम का यह गुब्बारा घर पर ही बना हुआ था जिसका उपयोग बच्चे फ़ाल्कन हीने के पिता रिचर्ड हीने मौसम की जानकारी हासिल करने के लिए किया करते हैं.

अफ़रा-तफ़री की शुरुआत उस समय हुई जब फ़ाल्कन के भाई ने कहा कि जब हीलियम का यह गुब्बारा उड़ा तो फ़ाल्कन उस पर सवार था.

पुलिस ने उस बच्चे के भाई से कई बार पूछताछ की लेकिन हर बार उसने यही कहा कि उसका भाई गुब्बारे पर सवार था.

इसके बाद तो क्या था, टेलीविज़न चैनलों ने ख़बरें प्रसारित करनी शुरु कर दीं और उस गुब्बारे का सीधा प्रसारण करना शुरु कर दिया.

इस बीच पुलिस ने घर की दो बार तलाशी ली लेकिन वह पर्याप्त नहीं था.

हीलियम का गुब्बारा सात हज़ार फ़ुट की ऊँचाई तक उड़ गया और नीचे आने से पहले चालीस किलोमीटर दूर तक चला गया.

जब गुब्बारा नीचे आया तो बचाव दल की गाड़ियों ने उसे चारों ओर से घेर लिया लेकिन उससे जुड़ा बास्केट नहीं था और बच्चे के उसमें होने का सवाल ही नहीं था.


इस गुब्बारे की वजह से डेनवर हवाई अड्डे पर यातायात भी प्रभावित हुआ
मामला तब ख़त्म हुआ जब लैरिमर काउंटी के शेरिफ़ जिम ऑल्डरडेन ने घोषणा की - "बच्चा अपने घर में ही मिल गया है."

गुरुवार को गुब्बारे के अचानक ही उड़ जाने के बाद शोर-शराबा शुरु हो गया.

पुलिस को सूचना दी गई और फिर पुलिस ने आकर घर वालों और पड़ोसियों से जानकारी हासिल की कि गुब्बारा किस दिशा में उड़ा.

फ़ाल्कन के भाई ने पुलिस को बताया कि उसने अपने भाई को गुब्बारे के बास्केट में चढते हुए देखा था.

यह तो बच्चे के मिल जाने के बाद पता चला कि गुब्बारे के उड़ने से पहले वह उतर गया था.

बच्चे फ़ाल्कन ने बताया कि गुरुवार को वह गुब्बारे के बास्केट में चढ़ गया था और इससे उसके पिता नाराज़ हो गए थे और उन्हें डाँटा था.

फ़ाल्कन का कहना है, "पिता की डाँट से मैं डर गया था इसलिए मैं अपने घर के सबसे ऊपर बने कमरे में जाकर छिप गया था."

यह पूछने पर कि जब गुब्बारा नीचे आया तो फ़ाल्कन उसमें नहीं था, उसके पिता ने कहा, "मैने सोचा कि वह गुब्बारे से नीचे गिर गया होगा."

उन्होंने कहा, "अब मन को तसल्ली मिली है, अब हम फ़ाल्कन का ज़्यादा ख़याल रखेंगे."

नवजात बच्चे में रीढ़ की हड्डी नहीं जुंडला


(करनाल): दादुपुर रोड़ान की महिला ममता के नवजात बच्चे की रीढ़ में हड्डी नहीं है। परिजनों ने चिकित्सक पर लापरवाही का आरोप लगाया है। वहीं चिकित्सक ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा कि वह किसी भी जांच के लिए तैयार हैं। ममता और उसके पति सुरेंद्र सिंह ने बताया कि उनके दो बच्चे की मौत गर्भ में ही हो चुकी है। अगला बच्चा सही-सलामत जन्म ले, इसके लिए सुरेद्र अपनी गर्भवती पत्‍‌नी को लेकर करनाल के एक निजी अस्पताल में पहुंचा। वहां डाक्टर ने बच्चा सही पैदा होने का आश्र्वासन देकर इलाज शुरू कर दिया। समय पर ममता जांच भी करवाती रही। ममता ने बच्चे को जन्म तो दिया, लेकिन उसकी रीढ़ की हड्डी ही नहीं है। यही नहीं उसकी कमर में ऐसा फोड़ा है जो दिन-प्रतिदिन बड़ा होता जा रहा है। उसने आक्रोश जताते हुए कहा कि यदि चिकित्सक ने प्रसव पूर्व की गई जांच में ही इस बात का खुलासा कर देता तो उसके बच्चे की जान पर नहीं बन आती। दंपति बच्चे के इलाज के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहा है। उन्होंने इस मामले को अदालत में ले जाने की चेतावनी दी है। वहीं, ममता का इलाज करने वाले डा. राकेश वर्मा ने सही तरीके से इलाज करने का दावा किया है। उन्होंने कहा कि शायद ममता ने अन्य स्थान से दवाई ली हो, जिसके कारण यह स्थिति बन गई। उन्होंने कहा उन पर लगाया गया आरोप निराधार है। वह इस मामले में जांच के लिए भी तैयार हैं।

अब पश्मीना बकरी की क्लोनिंग की तैयारी


नई दिल्ली: भैंस का क्लोन तैयार करने के बाद नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टीट्यूट (एनडीआरआई) पशुओं की विलुप्त होती प्रजातियों का क्लोन बनाने की तैयारी कर रहा है। सबसे पहले जम्मू-कश्मीर में मिलने वाली पश्मीना बकरी का क्लोन तैयार किया जाएगा। बेहतरीन गुणवत्ता वाली ऊन के लिए दुनिया भर में मशहूर यह बकरी अब विलुप्त होने के कगार पर है। एनडीआरआई के निदेशक ए.के. श्रीवास्तव ने कहा, हम उम्मीद कर रहे हैं कि पश्मीना बकरी का क्लोन तैयार करने की परियोजना पर अगले दो माह में काम शुरू हो जाएगा। उल्लेखनीय है कि देश में पश्मीना ऊन की बहुत मांग है। पश्मीना या छांगथांगी बकरी जम्मू-कश्मीर के लद्दाख और हिमाचल प्रदेश के लाहौल व स्पिीति इलाके में पाई जाती है। निदेशक ने कहा कि पश्मीना बकरी की क्लोनिंग से अच्छी गुणवत्ता वाले ऊन का उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि यह परियोजना जम्मू-कश्मीर के शेर-ए-कश्मीर कृषि विश्वविद्यालय के सहयोग से शुरू की जा रही है।

जब भी कोई विदेशी राष्ट्राध्यक्ष या पर्यटक भारत आता है तो दुनिया में प्रेम के प्रतीक माने जाने वाले ताज महल को देखने जरूर आता है। गुरुवार को अर्र्जेटीना की राष्ट्रपति क्रिस्टिना फर्र्नाडिस भी यहां आने से अपने को रोक नहींपाईं और ताज के सामने फोटो खिंचवाई।

घनी आबादी में लगाए जा रहे मोबाइल टावर पर कोर्ट सख्त


लखनऊ- इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने प्रदेश में मोबाइल फोन टावरों के मकड़जाल से उत्पन्न प्रदूषण व वातावरण पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव के मामले में कड़ी टिप्पणी की है। पीठ ने यह जानना चाहा है कि मोबाइल कम्पनियों के टावर व्यक्तिगत लोगों की छतों पर और संस्थानों पर किस नियम कायदे से बेतहाशा लगाये जा रहे हैं। यह आदेश न्यायमूर्ति प्रदीप कांत व न्यायमूर्ति रितुराज अवस्थी की खंडपीठ ने याची सुरेश चन्द्र सिंह की ओर से प्रस्तुत याचिका पर दिए। इस मामले में अगली सुनवाई 23 अक्टूबर को नियत की गयी है। अदालत ने कहा कि यह बहुत महत्वपूर्ण प्रश्न है कि घनी आबादी में जहां पर आम आदमी निवास करता है उन घरों की छतों पर और बस्तियों में आम आदमी की जिंदगी पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले इन मोबाइल टावरों को लोगों की मर्जी से लगाया जा रहा है अथवा उनकी गैर मर्जी से। पीठ ने कहा 24 घंटे प्रदूषण को फैलाने वाले तथा बड़े-बड़े जनरेटरों और मशीनों के चलने से आम जनजीवन के स्वास्थ्य और पर्यावरण को भारी नुकसान हो रहा है तथा लोगों के जीवन पर इसका विपरीत असर पड़ रहा है। पीठ ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि आम जनता के विरोध के बावजूद भी घनी आबादी में यह फोन टावर किस नियम कायदे से लगाये जा रहे हैं। पीठ ने कहा कि राज्य सरकार ने इस मामले में 2008 में कुछ दिशा निर्देश तय किए थे किंतु आज तक वह लागू नहीं किए गए, इसलिए यह जांच का विषय है। सरकार जांच करे कि मोबाइल कंपनियां किस विभाग व अधिकारी से अथवा स्थानीय निवासियों से सहमति प्राप्त कर यह टावर लगा रही है। बाराबंकी जिले में टावर लगाए जाने के मामले में याची ने एसडीएम को आवेदन दिया जिस पर उपजिलाधिकारी व जिलाधिकारी ने टावर निर्माण पर रोक लगा दी थी लेकिन टावर कंपनी के लोग नहीं माने।

सालासर धाम बुलाए कैसेट का विमोचन




डबवाली( डॉ सुखपाल सावंत खेडा)- राजस्थान में स्थित बालाजी के पावनधाम सालासर में गत दिवस डबवाली निवासी हरियाणा की मशहूर भजन गायिका रजनी हरियाणवी की सुरीली आवाज में गाए भजनों की कैसेट ''सालासर धाम बुलाए'' का विमोचन बड़ी धूमधाम से हुआ। जिसे सालासर धाम के पुजारी ने अपने करकमलों से किया। भजन गायिका रजनी हरियाणवी ने बताया कि भजनों की कैसेट व सीडी पूरे हरियाणा व राजस्थान में हाथों-हाथ बिक रही है। जहा इस कैसेट में उनके द्वारा गाए गीतों को लिख कर नरेश नरसी, पवन शिब्बू व तारा हिन्दोवाला ने खूब वाहवाही लूटी है। वहीं रामू एवं सुनील ने भजनों को संगीत देकर चार चान्द लगा दिए। रजनी हरियाणवी द्वारा गाए भजन ''माँ अंजनी के प्यारे, सालासर धाम बुलाऐ'' ने पूरे हरियाणा व राजस्थान में धूम मचाए हुए है। रजनी हरियाणवी ने आगे बताया कि वह अब ''खाटू जी श्याम के प्यारे'' कैसेट की रिकार्डिग करने जा रहे है। जो शीघ्र ही मार्केट में आ जाऐगी।

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