डबवाली -जनस्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का खामियाजा आमजन को भुगतना पड़ रहा है। उक्त घटना स्थानीय वार्ड नम्बर 5 डॉ. सन्तोष अरोड़ा वाली गली की है। कांग्रेसी नेता डॉ. अरोड़ा व समाजसेवी काहन चन्द यादव सहित अन्य गलीवासियोंं ने संयुक्त रूप से बताया कि विगत कई दिनों से गली में दूषित पेयजल की आपूर्ति हो रही थी। इसके सन्दर्भ में समस्या के समाधान के लिए विभागीय कर्मचारियों ने गली में गड्ढा खोदा तथा उसे ठीक प्रकार से भरा नहीं गया। जिसके चलते बुधवार की प्रात: ईंटों से भरी एक ट्राली इस गड्ढे में धंस जाने से फंस गई। उन्होंने बताया कि इससे पूर्व भी दोपहिया चालक इस गड्ढे के कारण दुर्घटना का शिकार हो चुके हैं।
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बुधवार, 9 फ़रवरी 2011
सरकार की दौहरी नीति को दोगली नीति करार--भारूखेड़ा
डबवाली -अखिल भारतीय खेत मजदूर यूनियन के जिला प्रधान भालाराम भारूखेड़ा ने आज जारी एक प्रैस ब्यान में सरकार की दौहरी नीति को दोगली नीति करार दिया है। उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार एपीएल कार्डों पर 15 किलोग्राम गेहूँ देने की घोषणा करती है तथा दूसरी तरफ कार्ड धारकों को 5 किलोग्राम गेहूँ का वितरण किया जा रहा है। जबकि गरीबी हटाने के नाम पर गुलाबी व पीले कार्डों का काटा जा रहा है। उन्होंने कहा कि पंचायतों व प्रशासन की लापरवाही के चलते मनरेगा योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रही है। अगर प्रशासन ने मनरेगा योजना के तहत विकास कार्य जल्द शुरू नहीं करवाया तो मजदूर यूनियन पूरे हरियाणा में आन्दोलन करेगी। उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय खेत मजदूर यूनियन द्वारा राज्य स्तरीय कन्वैंशन आगामी 13 फरवरी को हिसार में बुलाई गई है।
बस व ट्रक की टक्कर में बस ड्राईवर घायल, बस में बैठे यात्री बाल-बाल बच गए
डबवाली- पंजाब क्षेत्र के निकटवर्ती गांव रूल्दूङ्क्षसहवाला के समीप बस व ट्रक की टक्कर में बस ड्राईवर के घायल होने का समाचार मिला है। प्राप्त जानकारी अनुसार बुधवार प्रात: एक निजी ट्रांस्पोर्ट कंपनी की बस गांव पक्कां से डबवाली की ओर आ रही थी कि सामने से आ रहे एक ट्रक से टक्कर हो गई। जिससे बस का अगला शीशा टूट कर ड्राईवर के ऊपर गिर गया। जिससे ड्राइवर को चोटें आई। जबकि बस में बैठे यात्री बाल - बाल बच गए और ट्रक ड्राईवर ट्रक छोड़ कर मौका से फरार हो गया। वहां पर उपस्थित लोगों ने घायल बस ड्राईवर कुलविंद्र सिंह गांव पक्कां निवासी को डबवाली के राजकीय अस्पताल में ईलाज के लिए दाखिल करवाया व बस में बैठी सवारियों को पीछे आ रही एक अन्य बस में बिठाकर बस अड्डा तक पहुंचाया।
जेएनयू सेक्स रैकेट मामले ने तूल पकड़ना शुरू किया
नई दिल्ली।
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय(जेएनयू) में एक छात्र द्वारा तैयार वीडियो क्लिप में छात्र एवं छात्रा को आपत्तिजनक अवस्था में दिखाए जाने के अगले दिन मंगलवार को जेएनयू प्रशासन ने कहा कि उसे अपनी आंतरिक जांच रिपोर्ट का इंतजार है और इसके बाद ही पुलिस में मामला दर्ज करने के संबंध में फैसला किया जाएगा। जेएनयू के एक अधिकारी ने बताया कि मुख्य कुलानुशासक (प्रॉक्टर) एच.सी. बोहिदार की देखरेख में मामले की आंतरिक जांच की जा रही है।
अधिकारी ने आईएएनएस से कहा, "मुख्य कुलानुशासक मामले की जांच कर रहे हैं। इस सम्बंध में कई छात्रों से पूछताछ की गई है। वह संभवत: एक सप्ताह में अपनी रिपोर्ट कुलपति को सौंपेंगे।" अधिकारी ने कहा कि वीडियो क्लिप कथित तौर पर पिछले वर्ष तैयार किया गया, लेकिन आंतरिक रिपोर्ट आने के बाद ही मामला दर्ज कराने के सम्बंध में फैसला किया जाएगा। मीडिया में आई खबरों के अनुसार वीडियो में छात्र-छात्रा को ताप्ती छात्रावास में आपत्तिजनक अवस्था दिखाया गया है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने पर ही इसकी पुष्टि की जाएगी।
अधिकारी ने बताया कि छात्र-एवं छात्रा स्कूल ऑफ लैंग्वेजेज में पढ़ते हैं, जबकि कथित तौर पर वीडियो तैयार करने वाला छात्र कम्यूटर एप्लीकेशंस का छात्र है।अधिकारी ने यह भी कहा कि छात्रा पिछले वर्ष जेएनयू छोड़ चुकी है। पुलिस उपायुक्त (दक्षिण) एच.जी.एस. धालीवाल के मुताबिक पुलिस इस मामले
में विश्वविद्यालय की पुष्टि का इंतजार कर रही है। विश्वविद्यालय इस मामले की जांच कर रहा है।जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय(जेएनयू) में एक छात्र द्वारा तैयार वीडियो क्लिप में छात्र एवं छात्रा को आपत्तिजनक अवस्था में दिखाए जाने के अगले दिन मंगलवार को जेएनयू प्रशासन ने कहा कि उसे अपनी आंतरिक जांच रिपोर्ट का इंतजार है और इसके बाद ही पुलिस में मामला दर्ज करने के संबंध में फैसला किया जाएगा। जेएनयू के एक अधिकारी ने बताया कि मुख्य कुलानुशासक (प्रॉक्टर) एच.सी. बोहिदार की देखरेख में मामले की आंतरिक जांच की जा रही है।
अधिकारी ने आईएएनएस से कहा, "मुख्य कुलानुशासक मामले की जांच कर रहे हैं। इस सम्बंध में कई छात्रों से पूछताछ की गई है। वह संभवत: एक सप्ताह में अपनी रिपोर्ट कुलपति को सौंपेंगे।" अधिकारी ने कहा कि वीडियो क्लिप कथित तौर पर पिछले वर्ष तैयार किया गया, लेकिन आंतरिक रिपोर्ट आने के बाद ही मामला दर्ज कराने के सम्बंध में फैसला किया जाएगा। मीडिया में आई खबरों के अनुसार वीडियो में छात्र-छात्रा को ताप्ती छात्रावास में आपत्तिजनक अवस्था दिखाया गया है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने पर ही इसकी पुष्टि की जाएगी।
अधिकारी ने बताया कि छात्र-एवं छात्रा स्कूल ऑफ लैंग्वेजेज में पढ़ते हैं, जबकि कथित तौर पर वीडियो तैयार करने वाला छात्र कम्यूटर एप्लीकेशंस का छात्र है।अधिकारी ने यह भी कहा कि छात्रा पिछले वर्ष जेएनयू छोड़ चुकी है। पुलिस उपायुक्त (दक्षिण) एच.जी.एस. धालीवाल के मुताबिक पुलिस इस मामले
धालीवाल ने संवाददाताओं से कहा, "लड़की और उसका दोस्त इस कांड में शामिल थे जबकि एक अन्य लड़के ने कथित तौर पर उनका वीडियो तैयार किया था। जेएनयू ने अभी इस मामले की पुष्टि नहीं की है।" गौरतलब है कि यह घटना जेएनयू प्रशासन के संज्ञान में पिछले सप्ताह उस समय आई थी जब सुरक्षा विभाग ने विश्वविद्यालय के कुलानुशासक (प्रॉक्टर) कार्यालय को इसकी जानकारी दी थी।
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शर्मसार हुआ दिल्ली का जेएनयू, विश्वविद्यालय में सेक्स रैकेट
जेएनयू कैंपस की ये घिनौनी तस्वीरें इस विद्यालय के अंदर चलने वाले सेक्स रैकेट का खुलासा करते हैं। जेएनयू के अंदर चलने वाले सेक्स रैकेट की ख़बरें हमने दो दिन पहले भी दी थीं- फोटो सा.मिडडे।

दिल्ली स्थित जेएनयू कैंपस जो दुनिया में मशहूर है इन दिनों सेक्स रैकेट को लेकर चर्चा में है
इन ख़बरों के बाद जेएनयू प्रशासन हरकत में आया बताया जाता है। आखिर उसे जो अब अपनी लाज बचानी है। इससे जुड़ी ख़बरें आप हमारे कॉलम अपराध में जाएं। फोटो.सा.मिडडे।
यह दिल्ली का जेएनयू कैंपस है... आप खुद देखिए यहां कैसी पढ़ाई जाती है
दिल्ली।
जेएनयू में बनी ब्लू फिल्म लोगों में चर्चा का खास कारण बना हुआ है। कहा जाता है कि इसके पीछे एक संगठित गिरोह काम कर रहा है।
फिलहाल ख़बर यही है कि जेएनयू प्रशासन हरकत में है और मामले की जांच में लग गया है।

दिल्ली स्थित जेएनयू कैंपस जो दुनिया में मशहूर है इन दिनों सेक्स रैकेट को लेकर चर्चा में है
इन ख़बरों के बाद जेएनयू प्रशासन हरकत में आया बताया जाता है। आखिर उसे जो अब अपनी लाज बचानी है। इससे जुड़ी ख़बरें आप हमारे कॉलम अपराध में जाएं। फोटो.सा.मिडडे।
यह दिल्ली का जेएनयू कैंपस है... आप खुद देखिए यहां कैसी पढ़ाई जाती है
दिल्ली।
जेएनयू में बनी ब्लू फिल्म लोगों में चर्चा का खास कारण बना हुआ है। कहा जाता है कि इसके पीछे एक संगठित गिरोह काम कर रहा है।
फिलहाल ख़बर यही है कि जेएनयू प्रशासन हरकत में है और मामले की जांच में लग गया है। सोमवार, 7 फ़रवरी 2011
सही-सही जानकारी कराए दर्ज
डबवाली-कोई भी व्यक्ति जनगणना से संबंधित तथ्यों की जानकारी सूच
ना प्राप्ति के अधिकार के तहत नहीं मांग सकता, इसलिए आमजन को चाहिए कि वे जनगणना के लिए घर द्वार पर आए प्रगणकों को संबंधित तथ्यों की सही-सही जानकारी दे। यह बात अतिरिक्त उपायुक्त एवं प्रिंसिपल जनगणना अधिकारी पंकज चौधरी ने आज स्थानीय पंचायत भवन में आयोजित पत्रकार वार्ता में कही। उन्होंने कहा कि जिला में जनगणना के दूसरे चरण का कार्य आगामी 9 फरवरी से 28 फरवरी तक चलाया जाएगा। 28 फरवरी की रात्रि को प्रगणक विभिन्न जगहों पर जाकर बेघर लोगों की गणना करेंगे। इसके बाद 1 मार्च से 5 मार्च तक रिवीजनल राउंड होगा जिसमें 9 फरवरी से 28 फरवरी तक किसी की मृत्यु या जन्म के कारण हुए बदलाव को दर्ज किया जाएगा। उन्होंने बताया कि जनगणना के दूसरे दौर को समुचित तौर से संपन्न करने के लिए जिला को कुल 2138 खंडों में बांटा गया है जिनमें 3271 प्रगणक और सुपरवाईजर की ड्यूटी लगाई गई है। इन सभी सुपरवाईजर और प्रगणकों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। ये सभी प्रगणक घर-घर जाकर निर्धारित प्रोफार्मा में जानकारी दर्ज करेंगे। इस प्रोफार्मा में 29 कॉलम दिए गए है। इन सभी कॉलम की जानकारी प्रगणकों द्वारा पुर्णतया गोपनीय रखी जाएगी। यहां तक की जनगणना के दौरान दर्ज की गई जानकारी को किसी भी न्यायालय में साक्ष्य के रुप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता। चौधरी ने बताया कि जनगणना से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर ही केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा विकासकारी और जनकल्याणकारी योजनाएं तैयार की जाती है। इस वर्ष होने वाली जनगणना आजाद भारत की सातवीं जनगणना है। जनगणना के इन आंकड़ों से यह भी पता चल पाएगा कि विकास के मामले में देश कहा खड़ा है। उन्होंने बताया कि जनगणना से प्राप्त आंकड़ों का प्रयोग आम आदमी और देश के हित के लिए है। उन्होंने कहा कि आगामी 9 फरवरी का दिन जनगणना दिवस के रुप में मनाया जाएगा। उन्होंने परिवार अनुसूची प्रोफार्मा में दिए गए कुल 29 प्रश्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनमें व्यक्ति का नाम, मुखिया से संबंध, लिंग, जन्मतिथि, वर्तमान वैवाहिक स्थिति, विवाह के समय आयु, धर्म, जाति, विकलांगता, मातृभाषा, अन्य भाषाओं का ज्ञान, साक्षरता की स्थिति, शिक्षा ग्रहण की स्थिति, प्राप्त शिक्षा का स्तर, कार्य से संबंधित, जन्मस्थान, पुनर्वास स्थान, स्थान परिवर्तन का कारण, स्थान परिवर्तन के बाद निवास की अवधि व अन्य प्रश है। उन्होंने एक प्रश्र का जवाब देते हुए कहा कि जिन अध्यापकों की ड्यूटी जनगणना कार्यों में लगी है वे स्कूल छुट्टी के समय से दो घंटे पूर्व स्कूल छोड़कर जनगणना का कार्य करेंगे। इसी प्रकार से जिन अध्यापकों की ट्रेनिंग में ड्यूटी लगी है वे भी दो घंटे पूर्व जनगणना का कार्य देखेंगे। उन्होंने बताया कि जनगणना के कार्य को सुचारु रुप से संपन्न करने के लिए जिला में 9 चार्ज व एयरफोर्स स्टेशन,सिरसा को स्पैशल चार्ज बनाया गया है। इस अवसर पर डबवाली के उपमंडल अधिकारी मुनीश नागपाल, जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी अमीचंद सिहाग, जिला परिषद के उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुभाष जसूजा व जनगणना अधिकारी सुनील ग्राट उपस्थित थे।
ना प्राप्ति के अधिकार के तहत नहीं मांग सकता, इसलिए आमजन को चाहिए कि वे जनगणना के लिए घर द्वार पर आए प्रगणकों को संबंधित तथ्यों की सही-सही जानकारी दे। यह बात अतिरिक्त उपायुक्त एवं प्रिंसिपल जनगणना अधिकारी पंकज चौधरी ने आज स्थानीय पंचायत भवन में आयोजित पत्रकार वार्ता में कही। उन्होंने कहा कि जिला में जनगणना के दूसरे चरण का कार्य आगामी 9 फरवरी से 28 फरवरी तक चलाया जाएगा। 28 फरवरी की रात्रि को प्रगणक विभिन्न जगहों पर जाकर बेघर लोगों की गणना करेंगे। इसके बाद 1 मार्च से 5 मार्च तक रिवीजनल राउंड होगा जिसमें 9 फरवरी से 28 फरवरी तक किसी की मृत्यु या जन्म के कारण हुए बदलाव को दर्ज किया जाएगा। उन्होंने बताया कि जनगणना के दूसरे दौर को समुचित तौर से संपन्न करने के लिए जिला को कुल 2138 खंडों में बांटा गया है जिनमें 3271 प्रगणक और सुपरवाईजर की ड्यूटी लगाई गई है। इन सभी सुपरवाईजर और प्रगणकों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। ये सभी प्रगणक घर-घर जाकर निर्धारित प्रोफार्मा में जानकारी दर्ज करेंगे। इस प्रोफार्मा में 29 कॉलम दिए गए है। इन सभी कॉलम की जानकारी प्रगणकों द्वारा पुर्णतया गोपनीय रखी जाएगी। यहां तक की जनगणना के दौरान दर्ज की गई जानकारी को किसी भी न्यायालय में साक्ष्य के रुप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता। चौधरी ने बताया कि जनगणना से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर ही केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा विकासकारी और जनकल्याणकारी योजनाएं तैयार की जाती है। इस वर्ष होने वाली जनगणना आजाद भारत की सातवीं जनगणना है। जनगणना के इन आंकड़ों से यह भी पता चल पाएगा कि विकास के मामले में देश कहा खड़ा है। उन्होंने बताया कि जनगणना से प्राप्त आंकड़ों का प्रयोग आम आदमी और देश के हित के लिए है। उन्होंने कहा कि आगामी 9 फरवरी का दिन जनगणना दिवस के रुप में मनाया जाएगा। उन्होंने परिवार अनुसूची प्रोफार्मा में दिए गए कुल 29 प्रश्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनमें व्यक्ति का नाम, मुखिया से संबंध, लिंग, जन्मतिथि, वर्तमान वैवाहिक स्थिति, विवाह के समय आयु, धर्म, जाति, विकलांगता, मातृभाषा, अन्य भाषाओं का ज्ञान, साक्षरता की स्थिति, शिक्षा ग्रहण की स्थिति, प्राप्त शिक्षा का स्तर, कार्य से संबंधित, जन्मस्थान, पुनर्वास स्थान, स्थान परिवर्तन का कारण, स्थान परिवर्तन के बाद निवास की अवधि व अन्य प्रश है। उन्होंने एक प्रश्र का जवाब देते हुए कहा कि जिन अध्यापकों की ड्यूटी जनगणना कार्यों में लगी है वे स्कूल छुट्टी के समय से दो घंटे पूर्व स्कूल छोड़कर जनगणना का कार्य करेंगे। इसी प्रकार से जिन अध्यापकों की ट्रेनिंग में ड्यूटी लगी है वे भी दो घंटे पूर्व जनगणना का कार्य देखेंगे। उन्होंने बताया कि जनगणना के कार्य को सुचारु रुप से संपन्न करने के लिए जिला में 9 चार्ज व एयरफोर्स स्टेशन,सिरसा को स्पैशल चार्ज बनाया गया है। इस अवसर पर डबवाली के उपमंडल अधिकारी मुनीश नागपाल, जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी अमीचंद सिहाग, जिला परिषद के उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुभाष जसूजा व जनगणना अधिकारी सुनील ग्राट उपस्थित थे। कमेटियों की देखरेख में होंगे कार्य
डबवाली-जिला परिषद की बैठक आज यहां पंचायत भवन में हुई जिस
की अध्यक्षता परिषद के चेयरमैन डॉ. सीताराम ने की। बैठक में जिला परिषद की कार्यकारी अधिकारी एवं एडीसी पंकज चौधरी, डबवाली के एसडीएम डॉ. मुनीष नागपाल, डीडीपीओ एसी सिहाग सहित अन्य अधिकारी व जिला पार्षद मौजूद थे। बैठक में चालू वित्तवर्ष की आय-व्यय का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया गया और कार्यों की समीक्षा की गई। बैठक में जिला परिषद की ओर से करवाए जाने वाले सभी प्रकार के विकास कार्यों की निगरानी के लिए कमेटिया गठित करने का प्रस्ताव रखा गया। प्रस्ताव में कहा गया कि जिस संबंधित विभाग के तहत कार्य करवाया जाए उसकी अलग से कमेटी बनाई जाए ताकि कार्य अच्छी प्रकार से हो सके। इसके अलावा बैठक में पिछड़ा क्षेत्र अनुदान स्कीम के तहत आगामी वित्तवर्ष के लिए एस्टीमेन तैयार करने पर चर्चा हुई। डॉ. सीताराम ने सभी विभागाध्यक्षकों को अपने-अपने विभाग से संबंधित प्रस्ताव व एस्टीमेट तैयार करने का निर्देश दिया।
की अध्यक्षता परिषद के चेयरमैन डॉ. सीताराम ने की। बैठक में जिला परिषद की कार्यकारी अधिकारी एवं एडीसी पंकज चौधरी, डबवाली के एसडीएम डॉ. मुनीष नागपाल, डीडीपीओ एसी सिहाग सहित अन्य अधिकारी व जिला पार्षद मौजूद थे। बैठक में चालू वित्तवर्ष की आय-व्यय का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया गया और कार्यों की समीक्षा की गई। बैठक में जिला परिषद की ओर से करवाए जाने वाले सभी प्रकार के विकास कार्यों की निगरानी के लिए कमेटिया गठित करने का प्रस्ताव रखा गया। प्रस्ताव में कहा गया कि जिस संबंधित विभाग के तहत कार्य करवाया जाए उसकी अलग से कमेटी बनाई जाए ताकि कार्य अच्छी प्रकार से हो सके। इसके अलावा बैठक में पिछड़ा क्षेत्र अनुदान स्कीम के तहत आगामी वित्तवर्ष के लिए एस्टीमेन तैयार करने पर चर्चा हुई। डॉ. सीताराम ने सभी विभागाध्यक्षकों को अपने-अपने विभाग से संबंधित प्रस्ताव व एस्टीमेट तैयार करने का निर्देश दिया।
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सीएचसी डबवाली में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी को पूरा करने की गुजारिश
डबवाली-अखिल बाल्मीकि समाज न्याय मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरेश गोगा ने चौ. राव नरेन्द्र राव सिंह स्वास्थ्य मन्त्री हरियाणा को एक पत्र लिखकर सीएचसी डबवाली में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी को पूरा करने की गुजारिश की है। उन्होंने अपने पत्र में लिखा है कि डबवाली नगर हरियाणा, पंजाब व राजस्थान की सीमा पर स्थित है तथा इस उपमण्डल के अन्तर्गत 73 गांव पड़ते हैं। जिसके चलते आस-पास के क्षेत्रीय लोग अपना ईलाज करवाने के लिए सिविल अस्पताल में आते हैं परन्तु सिविल अस्पताल में चिकित्सकों की कमी के चलते उन्हें काफी दिक्कतें उठानी पड़ती हैं। इसके अलावा डबवाली नगर नेशनल हाईवे संख्या 64 पर स्थित है तथा भारी वाहनों की आवा-जाई से दिन प्रति दिन कोई न कोई सड़क दुर्घटना होती रहती है। दुर्घटनाओं के घायलों को उपचार हेतु यहां लाया जाता है परन्तु हड्डी रोग विशेषज्ञ, एमडी मेडीसिन विशेषज्ञ के न होने से उन्हें सिरसा व बठिण्डा रैफर कर दिया जाता है। सिरसा यहां से 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। जिससे मरीज का जीवन संकट में पड़ जाता है। श्री गोगा ने स्वास्थ्य मन्त्री से हड्डी रोग विशेषज्ञ, ईएनटी विशेषज्ञ, एमडी मैडीसिन तथा नेत्र रोग विशेषज्ञ चिकित्सकों को शीघ्र नियुक्त किए जाने की मांग की है। श्री गोगा के अनुसार उन्होंने उक्त पत्र की एक प्रति डबवाली विधायक चौ. अजय चौटाला को भी प्रेषित की है।
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रविवार, 6 फ़रवरी 2011
ਨਵੇਂ 'ਕਾਲੇ ਕਾਨੂੰਨ' ਪੰਜਾਬੀਆਂ ਦੇ ਮੁੱਢਲੇ ਅਧਿਕਾਰਾਂ ਦਾ ...
ਭਾਰਤੀ ਸੰਵਿਧਾਨ ਦੀ ਡਰਾਫਟਿੰਗ ਕਮੇਟੀ ਦੇ ਚੇਅਰਮੈਨ ਡਾ। ਭੀਮ ਰਾਓ ਅੰਬੇਦਕਰ ਨੇ 25 ਨਵੰਬਰ 1949 ਨੂੰ ਵਿਧਾਨਿਕ ਅਸੈਂਬਲੀ ਵਿਚ ਤੀਜੀ ਵਾਰ ਪੜ੍ਹੇ ਗਏ ਵਿਧਾਨ 'ਤੇ ਹੋਈ ਬਹਿਸ ਸਮੇਂ ਕਿਹਾ ਸੀ ਕਿ
''26 ਜਨਵਰੀ 1950 ਨੂੰ ਅਸੀਂ ਇਕ ਵਿਰੋਧਾਂ ਭਰੀ ਜ਼ਿੰਦਗੀ 'ਚ ਦਾਖਲ ਹੋ ਰਹੇ ਹਾਂ-ਸਿਆਸਤ ਵਿਚ ਅਸੀਂ ਇਕ ਬੰਦਾ-ਇਕ ਵੋਟ -ਇਕ ਮੁੱਲ ਦੇ ਅਸੂਲ ਨੂੰ ਮਾਨਤਾ ਦੇਵਾਂਗੇ। ਸਾਡੇ ਸਮਾਜਿਕ ਅਤੇ ਆਰਥਿਕ ਢਾਂਚੇ ਦੇ ਤਰਕ ਵਜੋਂ ਹੀ ਅਸੀਂ ਸਾਡੀ ਸਮਾਜਿਕ ਅਤੇ ਆਰਥਿਕ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਵਿਚ ਇਕ ਬੰਦਾ ਅਤੇ ਇੱਕ ਮੁੱਲ ਦੇ ਅਸੂਲ ਨੂੰ ਰੱਦ ਕਰਨਾ ਜਾਰੀ ਰੱਖਾਂਗੇ... ਜਿੱਥੋਂ ਤੱਕ ਸੰਭਵ ਹੈ, ਸਾਨੂੰ ਲਾਜ਼ਮੀ ਇਹ ਵਿਰੋਧ ਵੱਧ ਤੋਂ ਵੱਧ ਨੇੜਲੀ ਘੜੀ ਖ਼ਤਮ ਕਰਨਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ....।''
ਪਰ ਸੰਵਿਧਾਨ ਲਾਗੂ ਹੋਣ ਤੋਂ ਅੱਜ ਤੱਕ ਸਾਰੇ ਮੁਲਕ ਅੰਦਰਲੇ ਸਮਾਜਿਕ ਅਤੇ ਆਰਥਿਕ ਢਾਂਚੇ 'ਚ ਇਹ ਪਾੜਾ ਨਾ ਸਿਰਫ਼ ਜਾਰੀ ਰਹਿ ਰਿਹਾ ਹੈ ਸਗੋਂ ਇਹ ਕਈ ਗੁਣਾ ਹੋਰ ਵਧਿਆ ਹੈ। ਇਹ ਇਸ ਪਾੜੇ ਦਾ ਸਿਖਰ ਹੀ ਹੈ, ਕਿ ਅੱਜ ਦੇਸ਼ ਦੇ ਅੰੰਨ ਭੰਡਾਰ ਭਰਨ ਵਾਲੇ ਕਿਸਾਨ ਅਤੇ ਖੇਤ ਮਜ਼ਦੂਰ ਲੱਖਾਂ ਦੀ ਤਾਦਾਦ 'ਚ ਖੁਦਕੁਸ਼ੀਆਂ ਕਰਨ ਤੱਕ ਜਾ ਪੁੱਜੇ ਹਨ ਅਤੇ ਦੇਸ਼ ਦੀ 40 ਤੋਂ 60 ਪ੍ਰਤੀਸ਼ਤ ਆਬਾਦੀ ਅੱਜ ਦੇ ਜਮਾਨੇ 'ਚ 20 ਰੁਪਏ ਰੋਜ਼ਾਨਾ 'ਚ ਗੁਜਾਰਾ ਕਰਨ ਲਈ ਮਜਬੂਰ ਹੈ। ਸਿਤਮ ਜਰੀਫੀ ਤਾਂ ਇਹ ਹੈ ਕਿ ਸਾਡੇ 'ਤੇ ਰਾਜ ਕਰਨ ਵਾਲੇ ਲੋਕ ਇਸ ਪਾੜੇ ਨੂੰ ਘਟਾਉਣ ਦੀ ਥਾਂ ਇਸ ਹਾਲਤ 'ਚੋਂ ਲੋਕਾਂ ਦੇ ਉਠ ਰਹੇ ਹੱਕੀ ਸੰਘਰਸ਼ਾਂ ਨੂੰ ਖੂਨ 'ਚ ਡੁਬੋਣ ਲਈ ਭਾਰਤੀ ਸੰਵਿਧਾਨ ਦੇ ਆਰਟੀਕਲ 19 ਦੇ ਤਹਿਤ ਦਿੱਤੇ ਜਮਹੂਰੀ ਅਧਿਕਾਰਾਂ ਦਾ ਹੀ ਖਾਤਮਾ ਕਰਨ 'ਤੇ ਉੱਤਰ ਆਏ ਹਨ। ਪੰਜਾਬ ਦੀ ਮੌਜੂਦਾ ਅਕਾਲੀ-ਭਾਜਪਾ ਸਰਕਾਰ ਵਲੋਂ ਪਿਛਲੇ ਵਰ੍ਹੇ ਬਣਾਏ ਗਏ ਦੋ ਨਵੇਂ ਕਾਨੂੰਨ 'ਪੰਜਾਬ ਜਨਤਕ ਤੇ ਨਿੱਜੀ ਸੰਪਤੀ ਨੁਕਸਾਨ ਰੋਕੂ ਕਾਨੂੰਨ 2010' ਅਤੇ 'ਪੰਜਾਬ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਸੁਰੱਖਿਆ ਗਰੁੱਪ ਕਾਨੂੰਨੂੰ 2010' ਇਸਦੀ ਤਾਜ਼ਾ ਤੇ ਉਘੜਵੀਂ ਉਦਾਹਰਨ ਹੈ।
ਸੰਪਤੀ ਦਾ ਨੁਕਸਾਨ ਰੋਕਣ ਦੇ ਨਾਂਅ ਹੇਠ ਲਿਆਂਦੇ ਗਏ ਪਹਿਲੇ ਕਾਨੂੰਨ ਦੇ ਤਹਿਤ ਕਿਸੇ ਕਿਸਮ ਦੇ ਵੀ ਰੋਸ ਪ੍ਰਦਰਸ਼ਨ ਨੂੰ ਜ਼ਿਲ੍ਹਾ ਮੈਜਿਸਟ੍ਰੇਟ ਦੀ ਪ੍ਰਵਾਨਗੀ ਨਾਲ ਹੀ ਨੱਥੀ ਕਰ ਦਿੱਤਾ ਹੈ, ਭਾਵੇਂ ਪ੍ਰਵਾਨਗੀ ਨਾ ਮਿਲਣ 'ਤੇ ਦਸ ਦਿਨਾਂ 'ਚ ਸਰਕਾਰ ਕੋਲ ਅਪੀਲ ਦੀ ਮਦ ਰੱਖੀ ਗਈ ਹੈ ਪ੍ਰੰਤੂ ਇਸ 'ਤੇ ਫੈਸਲਾ ਲੈਣ ਲਈ ਕੋਈ ਸਮਾਂ ਸੀਮਾ ਤਹਿ ਨਾ ਕਰਕੇ ਇਕ ਤਰ੍ਹਾਂ ਰੋਸ ਪ੍ਰਦਰਸ਼ਨਾਂ 'ਤੇ ਪੂਰਨ ਪਾਬੰਦੀ ਦੀ ਹਾਲਤ ਪੈਦਾ ਕਰ ਦਿੱਤੀ ਗਈ ਹੈ। ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਹੁਣ ਤੱਕ ਰੋਸ ਪ੍ਰਦਰਸ਼ਨਾਂ ਦੀ ਗੈਰ ਕਾਨੂੰਨੀ ਢੰਗ ਨਾਲ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਵੀਡੀਓਗ੍ਰਾਫੀ ਨੂੰ ਨਾ ਸਿਰਫ਼ ਕਾਨੂੰਨੀ ਮਾਨਤਾ ਦੇ ਦਿੱਤੀ ਗਈ ਸਗੋਂ ਅਦਾਲਤ 'ਚ ਇਸਨੂੰ ਪੁਖਤਾ ਸਬੂਤ ਵਜੋਂ ਭੁਗਤਾਉਣ ਦਾ ਵੀ ਰਾਹ ਪੱਧਰਾ ਕਰ ਦਿੱਤਾ ਗਿਆ। ਇਸ ਕਾਨੂੰਨ ਦੀ ਧਾਰਾ 7 (1) ਕਹਿੰਦੀ ਹੈ ਕਿ ਬਿਨਾਂ ਆਗਿਆ ਪ੍ਰਦਰਸ਼ਨ ਕਰਨ 'ਤੇ ਇਸਦੇ ਆਯੋਜਕ ਨੂੰ 2 ਸਾਲ ਤੱਕ ਕੈਦ ਤੇ 20 ਹਜ਼ਾਰ ਰੁਪਏ ਜੁਰਮਾਨਾ ਕੀਤਾ ਜਾਵੇਗਾ ਅਤੇ ਜੇਕਰ ਬਿਨਾਂ ਆਗਿਆ ਪ੍ਰਦਰਸ਼ਨ 'ਚ ਅੱਗ ਜਾਂ ਵਿਸਫੋਟਕ ਪਦਾਰਥ ਨਾਲ ਕਿਸੇ ਸੰਪਤੀ ਦਾ ਨੁਕਸਾਨ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਕਾਨੂੰਨ ਦੀ ਧਾਰਾ 7 (3) ਤਹਿਤ 7 ਸਾਲ ਦੀ ਸਜ਼ਾ ਤੇ 70 ਹਜ਼ਾਰ ਰੁਪਏ ਦਾ ਜੁਰਮਾਨਾ ਕੀਤਾ ਜਾਵੇਗਾ। ਜਦੋਂਕਿ ਹੋਏ ਨੁਕਸਾਨ ਦੇ ਬਰਾਬਰ ਦੀ ਅਦਾਇਗੀ ਵੱਖਰੀ ਕਰਨੀ ਪਵੇਗੀ, ਜਿਸਦਾ ਪ੍ਰਬੰਧ ਧਾਰਾ 8 (1) 'ਚ ਕੀਤਾ ਗਿਆ ਹੈ। ਪਿਛਲੇ ਥੋੜ੍ਹੇ ਸਮੇਂ 'ਚ ਹੀ ਪੰਜਾਬ ਸਰਕਾਰ ਤੇ ਪੁਲਿਸ ਵਲੋਂ ਕਿਸਾਨ ਮਜ਼ਦੂਰ ਸੰਘਰਸ਼ਾਂ ਨੂੰ ਰੋਕਣ ਲਈ ਦਰਜਨਾਂ ਹੀ ਇਰਾਦਾ ਕਤਲ ਵਰਗੇ ਝੂਠੇ ਕੇਸ ਕਿਸਾਨ ਮਜ਼ਦੂਰ ਆਗੂਆਂ 'ਤੇ ਪਾਏ ਗਏ ਹਨ ਅਤੇ ਬਦਲੇ ਦੀ ਰਾਜਨੀਤੀ ਦੇ ਤਹਿਤ ਆਪਣੇ ਸਿਆਸੀ ਵਿਰੋਧੀਆਂ 'ਤੇ ਪਰਚੇ ਦਰਜ ਕਰਨ ਦੀ ਗੱਲ ਆਮ ਬਣੀ ਹੋਈ ਹੈ। ਇਸ ਨਵੇਂ ਕਾਨੂੰਨ ਤਹਿਤ ਕਿਸੇ ਸੰਪਤੀ ਦਾ ਨੁਕਸਾਨ ਖੁਦ ਹੀ ਕਰਕੇ ਜਾਂ ਕਰਾਕੇ ਪੁਲਿਸ ਤੇ ਸਰਕਾਰ ਨੇ ਜਥੇਬੰਦੀਆਂ ਦੇ ਆਗੂਆਂ ਨੂੰ ਲੰਮਾ ਸਮਾਂ ਜੇਲ੍ਹਾਂ 'ਚ ਸੁੱਟਣ ਤੇ ਭਾਰੀ ਆਰਥਿਕ ਬੋਝ ਹੇਠ ਨੱਪਣ ਲਈ ਆਪਣੇ ਜਾਬਰ ਕਦਮਾਂ ਨੂੰ ਕਾਨੂੰਨੀ ਪੁਸ਼ਾਕ ਹੀ ਪਹਿਨਾਈ ਹੈ। ਸਾਡੇ ਕਾਨੂੰਨ ਦੀ ਮਿਹਰਬਾਨੀ ਕਰਕੇ ਅਕਸਰ ਹੀ ਰਾਹਗੀਰਾਂ ਨੂੰ ਜਾਂ ਫੁੱਟਪਾਥਾਂ 'ਤੇ ਨਰਕ ਭੋਗਦੇ ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ ਗੱਡੀਆਂ ਹੇਠ ਦਰੜਨ ਵਾਲੇ ਅਮੀਰਜਾਦੇ ਜਾਂ ਸਰਕਾਰ ਦੇ ਸਿਖਰਲੇ ਟੰਬਿਆਂ 'ਤੇ ਬੈਠੇ ਲੋਕ ਹਮੇਸ਼ਾ ਸਜ਼ਾ ਤੋਂ ਬਚ ਜਾਂਦੇ ਹਨ, ਇਸੇ ਕਰਕੇ ਅਜਿਹੇ ਮੌਕਿਆਂ 'ਤੇ ਆਮ ਲੋਕਾਂ ਦਾ ਗੁੱਸਾ ਇਨ੍ਹਾਂ ਗੱਡੀਆਂ 'ਤੇ ਨਿਕਲਣਾ ਕੋਈ ਅਲੋਕਾਰੀ ਗੱਲ ਨਹੀਂ, ਪਰ ਮੌਜੂਦਾ ਕਾਨੂੰਨ ਅਜਿਹੇ ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ ਵੀ 7 ਸਾਲ ਕੈਦ ਤੇ 70 ਹਜ਼ਾਰ ਜੁਰਮਾਨੇ ਤੋਂ ਬਿਨਾਂ ਨੁਕਸਾਨ ਦੀ ਭਰਪਾਈ ਦੀ ਮਾਰ ਹੇਠ ਲਿਆਉਂਦਾ ਹੈ।
ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਸੁਰੱਖਿਆ ਗਰੁੱਪ ਕਾਨੂੰਨ ਪਹਿਲੇ ਤੋਂ ਵੀ ਜਾਬਰ ਤੇ ਹਿੰਸਕ ਹੋ ਨਿਬੜਦਾ ਹੈ। ਕਹਿਣ ਨੂੰ ਤਾਂ ਇਹ ਕਾਨੂੰਨ ਕੌਮ ਵਿਰੋਧੀ ਸ਼ਕਤੀਆਂ ਨੂੰ ਦਬਾਉਣ ਅਤੇ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਖਤਰੇ ਵਾਲੇ ਵਿਅਕਤੀਆਂ ਨੂੰ ਸਪੈਸ਼ਲ ਸੁਰੱਖਿਆ ਦੇਣ ਦੇ ਨਾਂਅ 'ਤੇ ਲਿਆਂਦਾ ਗਿਆ ਹੈ। ਪਰ ਇਸਦੀ ਧਾਰਾ 14 ਇਸ ਗੱਲ ਦਾ ਖੁਲਾਸਾ ਕਰਦੀ ਹੈ ਕਿ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਸੁਰੱਖਿਆ ਗਰੁੱਪ 'ਚ ਤਾਇਨਾਤ ਕੋਈ ਮੁਲਾਜ਼ਮ ਜਾਂ ਅਧਿਕਾਰੀ ਜੇਕਰ ਕਿਸੇ ਨੂੰ ਗੋਲੀ ਵੀ ਮਾਰ ਦੇਵੇ ਤਾਂ ਉਸ ਵਿਰੁੱਧ ਕਾਨੂੰਨੀ ਕਾਰਵਾਈ ਨਹੀਂ ਹੋ ਸਕਦੀ ਕਿਉਂਕਿ ਉਸਨੇ ਅਜਿਹਾ ਕੰਮ ਸੁਰੱਖਿਆ ਦੀ ਨੇਕ ਨੀਯਤ ਨਾਲ ਜੋ ਕੀਤਾ ਹੈ। ਇਸ ਕਾਨੂੰਨ ਦੀ ਧਾਰਾ 2 (ਅ) ਮੁਤਾਬਕ 'ਕੌਮ ਵਿਰੋਧੀ ਤਾਕਤ' ਉਹ ਵਿਅਕਤੀ ਜਾਂ ਸੰਗਠਨ ਹੈ ਜੋ ਆਪਣੇ ਮੰਤਵ ਲਈ ਕੋਈ ਗੈਰਕਾਨੂੰਨੀ ਕੰਮ ਕਰਦਾ ਹੈ।' ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦਫਾ 144 ਦੀ ਉਲੰਘਣਾ, ਜਨਤਕ ਥਾਵਾਂ 'ਤੇ ਸਿਗਰਟ ਬੀੜੀ ਪੀਣਾ ਜਾਂ ਟ੍ਰੈਫਿਕ ਦੇ ਨਿਯਮਾਂ ਦੀ ਉਲੰਘਣਾ ਵੀ ਗੈਰਕਾਨੂੰਨੀ ਹੋਣ ਕਰਕੇ ਸਬੰਧਤ ਵਿਅਕਤੀ ਇਸ ਕਾਨੂੰਨ ਮੁਤਾਬਕ ਕੌਮ ਵਿਰੋਧੀ ਸ਼ਕਤੀ ਹੋਵੇਗਾ ਤੇ ਉਹਦੇ ਨਾਲ ਉਥੇ ਹੀ ਨਜਿੱਠਿਆ ਜਾਵੇਗਾ। ਇਹ ਗੱਲ ਕਿਸੇ ਤੋਂ ਲੁਕੀ ਨਹੀਂ ਕਿ ਅਨੇਕਾਂ ਸਿਆਸਤਦਾਨ ਭੂ-ਮਾਫੀਆ, ਰੇਤ ਮਾਫੀਆ 'ਚ ਵਟੇ ਹੋਏ ਹਨ ਅਤੇ ਸੂਦਖੋਰ ਆੜਤੀਏ ਕਿਸਾਨਾਂ ਦੀਆਂ ਜਮੀਨਾਂ ਕੌਡੀਆਂ ਦੇ ਭਾਅ ਹਥਿਆਉਣ ਦੇ ਧੰਦੇ ਵਿਚ ਲੱਗੇ ਹੋਏ ਹਨ। ਅਜਿਹੇ ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ ਹੀ ਸਪੈਸ਼ਲ ਸੁਰੱਖਿਆ ਦਿੱਤੀ ਜਾਣੀ ਹੈ। ਇਉਂ ਇਨ੍ਹਾਂ ਹਿੱਸਿਆਂ ਨੂੰ ਆਪਣੀ ਅੰਨ੍ਹੀ ਲੁੱਟ ਨੂੰ ਵਧਾਉਣ ਖਾਤਰ ਇਸ ਕਾਨੂੰਨ ਤਹਿਤ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਸੁਰੱਖਿਆ ਦੇ ਨਾਂਅ ਹੇਠ ਕਤਲ ਕਰਨ ਤੱਕ ਦਾ ਲਾਇਸੰਸ ਦੇ ਦਿੱਤਾ ਗਿਆ ਹੈ। ਇਸ ਹਾਲਤ 'ਚ ਭਲਾ ਗਣਤੰਤਰ ਦਿਵਸ 'ਤੇ ਸੰਵਿਧਾਨ ਦੇ ਆਮ ਲੋਕਾਂ ਲਈ ਕੀ ਅਰਥ ਰਹਿ ਜਾਂਦੇ ਹਨ?
ਇਸ ਵਿਚੋਂ ਤਾਂ ਇਹੀ ਸਿੱਟਾ ਨਿਕਲਦਾ ਹੈ ਕਿ ਹਾਲਾਤਾਂ ਨੇ ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ ਇਸ ਚੁਰਾਹੇ 'ਤੇ ਲਿਆ ਖੜ੍ਹਾਇਆ ਹੈ ਕਿ ਉਨ੍ਹਾਂ ਕੋਲ ਹੁਣ ਹੋਰ ਕੋਈ ਚਾਰਾ ਨਹੀਂ ਸਿਵਾਏ ਇਸਦੇ ਕਿ ਉਹ ਮੌਜੂਦਾ ਰਾਜ ਪ੍ਰਬੰਧ (ਸਮੇਤ ਸੰਵਿਧਾਨ ਦੇ) ਨੂੰ ਵਗਾਹ ਮਾਰਨ ਲਈ ਤਲੀ ਧਰਕੇ ਉਠ ਖੜੇ ਹੋਣ ਜਿਵੇਂ ਕਿ ਡਾ. ਅੰਬੇਦਕਰ ਵਲੋਂ ਵੀ ਭਵਿੱਖਬਾਣੀ ਕੀਤੀ ਗਈ ਸੀ ''.....ਨਹੀਂ ਤਾਂ ਉਹ ਜਿਹੜੇ ਇਸ ਨਾਬਰਾਬਰੀ ਦੀ ਮਾਰ ਝੱਲਦੇ ਹਨ, ਸਿਆਸੀ ਜਮਹੂਰੀਅਤ ਦੇ ਇਸ ਤਾਣੇ ਬਾਣੇ ਨੂੰ ਉਡਾ ਦੇਣਗੇ-ਜਿਹੜਾ ਇੰਨੀ ਮਿਹਨਤ ਨਾਲ ਉਸਾਰਿਆ ਗਿਆ ਹੈ....।'' ਇਹ ਸ਼ਬਦ ਇਸੇ ਗੱਲ ਦੀ ਤਰਜਮਾਨੀ ਕਰਦੇ ਹਨ ਕਿ ਮੌਜੂਦਾ ਸਮੇਂ 'ਚ ਵਿਰਾਟ ਰੂਪ ਧਾਰ ਚੁੱਕੇ ਨੁਕਸ 'ਆਜ਼ਾਦੀ' ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਸਿਰਜੇ ਗਏ ਤਾਣੇ-ਬਾਣੇ ਵਿਚ ਹੀ ਸਮੋਏ ਹੋਏ ਸਨ। ਜਿਸਦੀ ਪੁਸ਼ਟੀ ਵਿਧਾਨਕ ਅਸੰਬਲੀ ਦੇ ਪ੍ਰਧਾਨ ਵਜੋਂ ਡਾ: ਰਾਜਿੰਦਰ ਪ੍ਰਸਾਦ ਵੱਲੋਂ ਵੀ ਕੀਤੀ ਗਈ ਸੀ ਕਿ ''ਸਾਡੇ ਕਾਨੂੰਨ ਵਿਚ ਅਜਿਹੀਆਂ ਮੱਦਾਂ ਹੈਗੀਆਂ ਜਿਹੜੀਆਂ ਕਈਆਂ ਨੂੰ ਇੱਕ ਜਾਂ ਦੂਜੇ ਨੁਕਸ ਤੋਂ ਇਤਰਾਜ਼ਯੋਗ ਲੱਗਦੀਆਂ ਹਨ। ਸਾਨੂੰ ਮੰਨਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਕਿ ਨੁਕਸ ਮੁਲਕ ਅੰਦਰਲੀ ਸਮੁੱਚੀ ਲੋਕਾਈ ਦੀ ਹਾਲਤ 'ਚ ਸਮੋਏ ਹੋਏ ਹਨ।'' ਇਨ੍ਹਾਂ ਨੁਕਸਾਂ ਦੀ ਉੱਘੜਵੀਂ ਉਦਾਰਹਣ ਸੰਵਿਧਾਨ ਘੜਨੀ ਦੀ ਬਣਤਰ ਤੋਂ ਵੀ ਸਪੱਸ਼ਟ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਕਿ ਇਸਦੇ ਮੈਂਬਰਾਂ ਦੀ ਚੋਣ 90 ਫ਼ੀਸਦੀ ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ ਬਾਹਰ ਰੱਖ ਕੇ 1935 ਦੇ ਐਕਟ ਦੇ ਆਧਾਰ 'ਤੇ ਹੀ ਕੀਤੀ ਗਈ ਸੀ।
ਲਛਮਣ ਸਿੰਘ ਸੇਵੇਵਾਲਾ
ਲੇਖਕ ਪੰਜਾਬ ਖੇਤ ਮਜ਼ਦੂਰ ਯੂਨੀਅਨ ਦੇ ਜਨਰਲ ਸਕੱਤਰ ਹਨ
''26 ਜਨਵਰੀ 1950 ਨੂੰ ਅਸੀਂ ਇਕ ਵਿਰੋਧਾਂ ਭਰੀ ਜ਼ਿੰਦਗੀ 'ਚ ਦਾਖਲ ਹੋ ਰਹੇ ਹਾਂ-ਸਿਆਸਤ ਵਿਚ ਅਸੀਂ ਇਕ ਬੰਦਾ-ਇਕ ਵੋਟ -ਇਕ ਮੁੱਲ ਦੇ ਅਸੂਲ ਨੂੰ ਮਾਨਤਾ ਦੇਵਾਂਗੇ। ਸਾਡੇ ਸਮਾਜਿਕ ਅਤੇ ਆਰਥਿਕ ਢਾਂਚੇ ਦੇ ਤਰਕ ਵਜੋਂ ਹੀ ਅਸੀਂ ਸਾਡੀ ਸਮਾਜਿਕ ਅਤੇ ਆਰਥਿਕ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਵਿਚ ਇਕ ਬੰਦਾ ਅਤੇ ਇੱਕ ਮੁੱਲ ਦੇ ਅਸੂਲ ਨੂੰ ਰੱਦ ਕਰਨਾ ਜਾਰੀ ਰੱਖਾਂਗੇ... ਜਿੱਥੋਂ ਤੱਕ ਸੰਭਵ ਹੈ, ਸਾਨੂੰ ਲਾਜ਼ਮੀ ਇਹ ਵਿਰੋਧ ਵੱਧ ਤੋਂ ਵੱਧ ਨੇੜਲੀ ਘੜੀ ਖ਼ਤਮ ਕਰਨਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ....।''ਪਰ ਸੰਵਿਧਾਨ ਲਾਗੂ ਹੋਣ ਤੋਂ ਅੱਜ ਤੱਕ ਸਾਰੇ ਮੁਲਕ ਅੰਦਰਲੇ ਸਮਾਜਿਕ ਅਤੇ ਆਰਥਿਕ ਢਾਂਚੇ 'ਚ ਇਹ ਪਾੜਾ ਨਾ ਸਿਰਫ਼ ਜਾਰੀ ਰਹਿ ਰਿਹਾ ਹੈ ਸਗੋਂ ਇਹ ਕਈ ਗੁਣਾ ਹੋਰ ਵਧਿਆ ਹੈ। ਇਹ ਇਸ ਪਾੜੇ ਦਾ ਸਿਖਰ ਹੀ ਹੈ, ਕਿ ਅੱਜ ਦੇਸ਼ ਦੇ ਅੰੰਨ ਭੰਡਾਰ ਭਰਨ ਵਾਲੇ ਕਿਸਾਨ ਅਤੇ ਖੇਤ ਮਜ਼ਦੂਰ ਲੱਖਾਂ ਦੀ ਤਾਦਾਦ 'ਚ ਖੁਦਕੁਸ਼ੀਆਂ ਕਰਨ ਤੱਕ ਜਾ ਪੁੱਜੇ ਹਨ ਅਤੇ ਦੇਸ਼ ਦੀ 40 ਤੋਂ 60 ਪ੍ਰਤੀਸ਼ਤ ਆਬਾਦੀ ਅੱਜ ਦੇ ਜਮਾਨੇ 'ਚ 20 ਰੁਪਏ ਰੋਜ਼ਾਨਾ 'ਚ ਗੁਜਾਰਾ ਕਰਨ ਲਈ ਮਜਬੂਰ ਹੈ। ਸਿਤਮ ਜਰੀਫੀ ਤਾਂ ਇਹ ਹੈ ਕਿ ਸਾਡੇ 'ਤੇ ਰਾਜ ਕਰਨ ਵਾਲੇ ਲੋਕ ਇਸ ਪਾੜੇ ਨੂੰ ਘਟਾਉਣ ਦੀ ਥਾਂ ਇਸ ਹਾਲਤ 'ਚੋਂ ਲੋਕਾਂ ਦੇ ਉਠ ਰਹੇ ਹੱਕੀ ਸੰਘਰਸ਼ਾਂ ਨੂੰ ਖੂਨ 'ਚ ਡੁਬੋਣ ਲਈ ਭਾਰਤੀ ਸੰਵਿਧਾਨ ਦੇ ਆਰਟੀਕਲ 19 ਦੇ ਤਹਿਤ ਦਿੱਤੇ ਜਮਹੂਰੀ ਅਧਿਕਾਰਾਂ ਦਾ ਹੀ ਖਾਤਮਾ ਕਰਨ 'ਤੇ ਉੱਤਰ ਆਏ ਹਨ। ਪੰਜਾਬ ਦੀ ਮੌਜੂਦਾ ਅਕਾਲੀ-ਭਾਜਪਾ ਸਰਕਾਰ ਵਲੋਂ ਪਿਛਲੇ ਵਰ੍ਹੇ ਬਣਾਏ ਗਏ ਦੋ ਨਵੇਂ ਕਾਨੂੰਨ 'ਪੰਜਾਬ ਜਨਤਕ ਤੇ ਨਿੱਜੀ ਸੰਪਤੀ ਨੁਕਸਾਨ ਰੋਕੂ ਕਾਨੂੰਨ 2010' ਅਤੇ 'ਪੰਜਾਬ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਸੁਰੱਖਿਆ ਗਰੁੱਪ ਕਾਨੂੰਨੂੰ 2010' ਇਸਦੀ ਤਾਜ਼ਾ ਤੇ ਉਘੜਵੀਂ ਉਦਾਹਰਨ ਹੈ।
ਸੰਪਤੀ ਦਾ ਨੁਕਸਾਨ ਰੋਕਣ ਦੇ ਨਾਂਅ ਹੇਠ ਲਿਆਂਦੇ ਗਏ ਪਹਿਲੇ ਕਾਨੂੰਨ ਦੇ ਤਹਿਤ ਕਿਸੇ ਕਿਸਮ ਦੇ ਵੀ ਰੋਸ ਪ੍ਰਦਰਸ਼ਨ ਨੂੰ ਜ਼ਿਲ੍ਹਾ ਮੈਜਿਸਟ੍ਰੇਟ ਦੀ ਪ੍ਰਵਾਨਗੀ ਨਾਲ ਹੀ ਨੱਥੀ ਕਰ ਦਿੱਤਾ ਹੈ, ਭਾਵੇਂ ਪ੍ਰਵਾਨਗੀ ਨਾ ਮਿਲਣ 'ਤੇ ਦਸ ਦਿਨਾਂ 'ਚ ਸਰਕਾਰ ਕੋਲ ਅਪੀਲ ਦੀ ਮਦ ਰੱਖੀ ਗਈ ਹੈ ਪ੍ਰੰਤੂ ਇਸ 'ਤੇ ਫੈਸਲਾ ਲੈਣ ਲਈ ਕੋਈ ਸਮਾਂ ਸੀਮਾ ਤਹਿ ਨਾ ਕਰਕੇ ਇਕ ਤਰ੍ਹਾਂ ਰੋਸ ਪ੍ਰਦਰਸ਼ਨਾਂ 'ਤੇ ਪੂਰਨ ਪਾਬੰਦੀ ਦੀ ਹਾਲਤ ਪੈਦਾ ਕਰ ਦਿੱਤੀ ਗਈ ਹੈ। ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਹੁਣ ਤੱਕ ਰੋਸ ਪ੍ਰਦਰਸ਼ਨਾਂ ਦੀ ਗੈਰ ਕਾਨੂੰਨੀ ਢੰਗ ਨਾਲ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਵੀਡੀਓਗ੍ਰਾਫੀ ਨੂੰ ਨਾ ਸਿਰਫ਼ ਕਾਨੂੰਨੀ ਮਾਨਤਾ ਦੇ ਦਿੱਤੀ ਗਈ ਸਗੋਂ ਅਦਾਲਤ 'ਚ ਇਸਨੂੰ ਪੁਖਤਾ ਸਬੂਤ ਵਜੋਂ ਭੁਗਤਾਉਣ ਦਾ ਵੀ ਰਾਹ ਪੱਧਰਾ ਕਰ ਦਿੱਤਾ ਗਿਆ। ਇਸ ਕਾਨੂੰਨ ਦੀ ਧਾਰਾ 7 (1) ਕਹਿੰਦੀ ਹੈ ਕਿ ਬਿਨਾਂ ਆਗਿਆ ਪ੍ਰਦਰਸ਼ਨ ਕਰਨ 'ਤੇ ਇਸਦੇ ਆਯੋਜਕ ਨੂੰ 2 ਸਾਲ ਤੱਕ ਕੈਦ ਤੇ 20 ਹਜ਼ਾਰ ਰੁਪਏ ਜੁਰਮਾਨਾ ਕੀਤਾ ਜਾਵੇਗਾ ਅਤੇ ਜੇਕਰ ਬਿਨਾਂ ਆਗਿਆ ਪ੍ਰਦਰਸ਼ਨ 'ਚ ਅੱਗ ਜਾਂ ਵਿਸਫੋਟਕ ਪਦਾਰਥ ਨਾਲ ਕਿਸੇ ਸੰਪਤੀ ਦਾ ਨੁਕਸਾਨ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਕਾਨੂੰਨ ਦੀ ਧਾਰਾ 7 (3) ਤਹਿਤ 7 ਸਾਲ ਦੀ ਸਜ਼ਾ ਤੇ 70 ਹਜ਼ਾਰ ਰੁਪਏ ਦਾ ਜੁਰਮਾਨਾ ਕੀਤਾ ਜਾਵੇਗਾ। ਜਦੋਂਕਿ ਹੋਏ ਨੁਕਸਾਨ ਦੇ ਬਰਾਬਰ ਦੀ ਅਦਾਇਗੀ ਵੱਖਰੀ ਕਰਨੀ ਪਵੇਗੀ, ਜਿਸਦਾ ਪ੍ਰਬੰਧ ਧਾਰਾ 8 (1) 'ਚ ਕੀਤਾ ਗਿਆ ਹੈ। ਪਿਛਲੇ ਥੋੜ੍ਹੇ ਸਮੇਂ 'ਚ ਹੀ ਪੰਜਾਬ ਸਰਕਾਰ ਤੇ ਪੁਲਿਸ ਵਲੋਂ ਕਿਸਾਨ ਮਜ਼ਦੂਰ ਸੰਘਰਸ਼ਾਂ ਨੂੰ ਰੋਕਣ ਲਈ ਦਰਜਨਾਂ ਹੀ ਇਰਾਦਾ ਕਤਲ ਵਰਗੇ ਝੂਠੇ ਕੇਸ ਕਿਸਾਨ ਮਜ਼ਦੂਰ ਆਗੂਆਂ 'ਤੇ ਪਾਏ ਗਏ ਹਨ ਅਤੇ ਬਦਲੇ ਦੀ ਰਾਜਨੀਤੀ ਦੇ ਤਹਿਤ ਆਪਣੇ ਸਿਆਸੀ ਵਿਰੋਧੀਆਂ 'ਤੇ ਪਰਚੇ ਦਰਜ ਕਰਨ ਦੀ ਗੱਲ ਆਮ ਬਣੀ ਹੋਈ ਹੈ। ਇਸ ਨਵੇਂ ਕਾਨੂੰਨ ਤਹਿਤ ਕਿਸੇ ਸੰਪਤੀ ਦਾ ਨੁਕਸਾਨ ਖੁਦ ਹੀ ਕਰਕੇ ਜਾਂ ਕਰਾਕੇ ਪੁਲਿਸ ਤੇ ਸਰਕਾਰ ਨੇ ਜਥੇਬੰਦੀਆਂ ਦੇ ਆਗੂਆਂ ਨੂੰ ਲੰਮਾ ਸਮਾਂ ਜੇਲ੍ਹਾਂ 'ਚ ਸੁੱਟਣ ਤੇ ਭਾਰੀ ਆਰਥਿਕ ਬੋਝ ਹੇਠ ਨੱਪਣ ਲਈ ਆਪਣੇ ਜਾਬਰ ਕਦਮਾਂ ਨੂੰ ਕਾਨੂੰਨੀ ਪੁਸ਼ਾਕ ਹੀ ਪਹਿਨਾਈ ਹੈ। ਸਾਡੇ ਕਾਨੂੰਨ ਦੀ ਮਿਹਰਬਾਨੀ ਕਰਕੇ ਅਕਸਰ ਹੀ ਰਾਹਗੀਰਾਂ ਨੂੰ ਜਾਂ ਫੁੱਟਪਾਥਾਂ 'ਤੇ ਨਰਕ ਭੋਗਦੇ ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ ਗੱਡੀਆਂ ਹੇਠ ਦਰੜਨ ਵਾਲੇ ਅਮੀਰਜਾਦੇ ਜਾਂ ਸਰਕਾਰ ਦੇ ਸਿਖਰਲੇ ਟੰਬਿਆਂ 'ਤੇ ਬੈਠੇ ਲੋਕ ਹਮੇਸ਼ਾ ਸਜ਼ਾ ਤੋਂ ਬਚ ਜਾਂਦੇ ਹਨ, ਇਸੇ ਕਰਕੇ ਅਜਿਹੇ ਮੌਕਿਆਂ 'ਤੇ ਆਮ ਲੋਕਾਂ ਦਾ ਗੁੱਸਾ ਇਨ੍ਹਾਂ ਗੱਡੀਆਂ 'ਤੇ ਨਿਕਲਣਾ ਕੋਈ ਅਲੋਕਾਰੀ ਗੱਲ ਨਹੀਂ, ਪਰ ਮੌਜੂਦਾ ਕਾਨੂੰਨ ਅਜਿਹੇ ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ ਵੀ 7 ਸਾਲ ਕੈਦ ਤੇ 70 ਹਜ਼ਾਰ ਜੁਰਮਾਨੇ ਤੋਂ ਬਿਨਾਂ ਨੁਕਸਾਨ ਦੀ ਭਰਪਾਈ ਦੀ ਮਾਰ ਹੇਠ ਲਿਆਉਂਦਾ ਹੈ।
ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਸੁਰੱਖਿਆ ਗਰੁੱਪ ਕਾਨੂੰਨ ਪਹਿਲੇ ਤੋਂ ਵੀ ਜਾਬਰ ਤੇ ਹਿੰਸਕ ਹੋ ਨਿਬੜਦਾ ਹੈ। ਕਹਿਣ ਨੂੰ ਤਾਂ ਇਹ ਕਾਨੂੰਨ ਕੌਮ ਵਿਰੋਧੀ ਸ਼ਕਤੀਆਂ ਨੂੰ ਦਬਾਉਣ ਅਤੇ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਖਤਰੇ ਵਾਲੇ ਵਿਅਕਤੀਆਂ ਨੂੰ ਸਪੈਸ਼ਲ ਸੁਰੱਖਿਆ ਦੇਣ ਦੇ ਨਾਂਅ 'ਤੇ ਲਿਆਂਦਾ ਗਿਆ ਹੈ। ਪਰ ਇਸਦੀ ਧਾਰਾ 14 ਇਸ ਗੱਲ ਦਾ ਖੁਲਾਸਾ ਕਰਦੀ ਹੈ ਕਿ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਸੁਰੱਖਿਆ ਗਰੁੱਪ 'ਚ ਤਾਇਨਾਤ ਕੋਈ ਮੁਲਾਜ਼ਮ ਜਾਂ ਅਧਿਕਾਰੀ ਜੇਕਰ ਕਿਸੇ ਨੂੰ ਗੋਲੀ ਵੀ ਮਾਰ ਦੇਵੇ ਤਾਂ ਉਸ ਵਿਰੁੱਧ ਕਾਨੂੰਨੀ ਕਾਰਵਾਈ ਨਹੀਂ ਹੋ ਸਕਦੀ ਕਿਉਂਕਿ ਉਸਨੇ ਅਜਿਹਾ ਕੰਮ ਸੁਰੱਖਿਆ ਦੀ ਨੇਕ ਨੀਯਤ ਨਾਲ ਜੋ ਕੀਤਾ ਹੈ। ਇਸ ਕਾਨੂੰਨ ਦੀ ਧਾਰਾ 2 (ਅ) ਮੁਤਾਬਕ 'ਕੌਮ ਵਿਰੋਧੀ ਤਾਕਤ' ਉਹ ਵਿਅਕਤੀ ਜਾਂ ਸੰਗਠਨ ਹੈ ਜੋ ਆਪਣੇ ਮੰਤਵ ਲਈ ਕੋਈ ਗੈਰਕਾਨੂੰਨੀ ਕੰਮ ਕਰਦਾ ਹੈ।' ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦਫਾ 144 ਦੀ ਉਲੰਘਣਾ, ਜਨਤਕ ਥਾਵਾਂ 'ਤੇ ਸਿਗਰਟ ਬੀੜੀ ਪੀਣਾ ਜਾਂ ਟ੍ਰੈਫਿਕ ਦੇ ਨਿਯਮਾਂ ਦੀ ਉਲੰਘਣਾ ਵੀ ਗੈਰਕਾਨੂੰਨੀ ਹੋਣ ਕਰਕੇ ਸਬੰਧਤ ਵਿਅਕਤੀ ਇਸ ਕਾਨੂੰਨ ਮੁਤਾਬਕ ਕੌਮ ਵਿਰੋਧੀ ਸ਼ਕਤੀ ਹੋਵੇਗਾ ਤੇ ਉਹਦੇ ਨਾਲ ਉਥੇ ਹੀ ਨਜਿੱਠਿਆ ਜਾਵੇਗਾ। ਇਹ ਗੱਲ ਕਿਸੇ ਤੋਂ ਲੁਕੀ ਨਹੀਂ ਕਿ ਅਨੇਕਾਂ ਸਿਆਸਤਦਾਨ ਭੂ-ਮਾਫੀਆ, ਰੇਤ ਮਾਫੀਆ 'ਚ ਵਟੇ ਹੋਏ ਹਨ ਅਤੇ ਸੂਦਖੋਰ ਆੜਤੀਏ ਕਿਸਾਨਾਂ ਦੀਆਂ ਜਮੀਨਾਂ ਕੌਡੀਆਂ ਦੇ ਭਾਅ ਹਥਿਆਉਣ ਦੇ ਧੰਦੇ ਵਿਚ ਲੱਗੇ ਹੋਏ ਹਨ। ਅਜਿਹੇ ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ ਹੀ ਸਪੈਸ਼ਲ ਸੁਰੱਖਿਆ ਦਿੱਤੀ ਜਾਣੀ ਹੈ। ਇਉਂ ਇਨ੍ਹਾਂ ਹਿੱਸਿਆਂ ਨੂੰ ਆਪਣੀ ਅੰਨ੍ਹੀ ਲੁੱਟ ਨੂੰ ਵਧਾਉਣ ਖਾਤਰ ਇਸ ਕਾਨੂੰਨ ਤਹਿਤ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਸੁਰੱਖਿਆ ਦੇ ਨਾਂਅ ਹੇਠ ਕਤਲ ਕਰਨ ਤੱਕ ਦਾ ਲਾਇਸੰਸ ਦੇ ਦਿੱਤਾ ਗਿਆ ਹੈ। ਇਸ ਹਾਲਤ 'ਚ ਭਲਾ ਗਣਤੰਤਰ ਦਿਵਸ 'ਤੇ ਸੰਵਿਧਾਨ ਦੇ ਆਮ ਲੋਕਾਂ ਲਈ ਕੀ ਅਰਥ ਰਹਿ ਜਾਂਦੇ ਹਨ?
ਇਸ ਵਿਚੋਂ ਤਾਂ ਇਹੀ ਸਿੱਟਾ ਨਿਕਲਦਾ ਹੈ ਕਿ ਹਾਲਾਤਾਂ ਨੇ ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ ਇਸ ਚੁਰਾਹੇ 'ਤੇ ਲਿਆ ਖੜ੍ਹਾਇਆ ਹੈ ਕਿ ਉਨ੍ਹਾਂ ਕੋਲ ਹੁਣ ਹੋਰ ਕੋਈ ਚਾਰਾ ਨਹੀਂ ਸਿਵਾਏ ਇਸਦੇ ਕਿ ਉਹ ਮੌਜੂਦਾ ਰਾਜ ਪ੍ਰਬੰਧ (ਸਮੇਤ ਸੰਵਿਧਾਨ ਦੇ) ਨੂੰ ਵਗਾਹ ਮਾਰਨ ਲਈ ਤਲੀ ਧਰਕੇ ਉਠ ਖੜੇ ਹੋਣ ਜਿਵੇਂ ਕਿ ਡਾ. ਅੰਬੇਦਕਰ ਵਲੋਂ ਵੀ ਭਵਿੱਖਬਾਣੀ ਕੀਤੀ ਗਈ ਸੀ ''.....ਨਹੀਂ ਤਾਂ ਉਹ ਜਿਹੜੇ ਇਸ ਨਾਬਰਾਬਰੀ ਦੀ ਮਾਰ ਝੱਲਦੇ ਹਨ, ਸਿਆਸੀ ਜਮਹੂਰੀਅਤ ਦੇ ਇਸ ਤਾਣੇ ਬਾਣੇ ਨੂੰ ਉਡਾ ਦੇਣਗੇ-ਜਿਹੜਾ ਇੰਨੀ ਮਿਹਨਤ ਨਾਲ ਉਸਾਰਿਆ ਗਿਆ ਹੈ....।'' ਇਹ ਸ਼ਬਦ ਇਸੇ ਗੱਲ ਦੀ ਤਰਜਮਾਨੀ ਕਰਦੇ ਹਨ ਕਿ ਮੌਜੂਦਾ ਸਮੇਂ 'ਚ ਵਿਰਾਟ ਰੂਪ ਧਾਰ ਚੁੱਕੇ ਨੁਕਸ 'ਆਜ਼ਾਦੀ' ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਸਿਰਜੇ ਗਏ ਤਾਣੇ-ਬਾਣੇ ਵਿਚ ਹੀ ਸਮੋਏ ਹੋਏ ਸਨ। ਜਿਸਦੀ ਪੁਸ਼ਟੀ ਵਿਧਾਨਕ ਅਸੰਬਲੀ ਦੇ ਪ੍ਰਧਾਨ ਵਜੋਂ ਡਾ: ਰਾਜਿੰਦਰ ਪ੍ਰਸਾਦ ਵੱਲੋਂ ਵੀ ਕੀਤੀ ਗਈ ਸੀ ਕਿ ''ਸਾਡੇ ਕਾਨੂੰਨ ਵਿਚ ਅਜਿਹੀਆਂ ਮੱਦਾਂ ਹੈਗੀਆਂ ਜਿਹੜੀਆਂ ਕਈਆਂ ਨੂੰ ਇੱਕ ਜਾਂ ਦੂਜੇ ਨੁਕਸ ਤੋਂ ਇਤਰਾਜ਼ਯੋਗ ਲੱਗਦੀਆਂ ਹਨ। ਸਾਨੂੰ ਮੰਨਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਕਿ ਨੁਕਸ ਮੁਲਕ ਅੰਦਰਲੀ ਸਮੁੱਚੀ ਲੋਕਾਈ ਦੀ ਹਾਲਤ 'ਚ ਸਮੋਏ ਹੋਏ ਹਨ।'' ਇਨ੍ਹਾਂ ਨੁਕਸਾਂ ਦੀ ਉੱਘੜਵੀਂ ਉਦਾਰਹਣ ਸੰਵਿਧਾਨ ਘੜਨੀ ਦੀ ਬਣਤਰ ਤੋਂ ਵੀ ਸਪੱਸ਼ਟ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਕਿ ਇਸਦੇ ਮੈਂਬਰਾਂ ਦੀ ਚੋਣ 90 ਫ਼ੀਸਦੀ ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ ਬਾਹਰ ਰੱਖ ਕੇ 1935 ਦੇ ਐਕਟ ਦੇ ਆਧਾਰ 'ਤੇ ਹੀ ਕੀਤੀ ਗਈ ਸੀ।ਲਛਮਣ ਸਿੰਘ ਸੇਵੇਵਾਲਾ
ਲੇਖਕ ਪੰਜਾਬ ਖੇਤ ਮਜ਼ਦੂਰ ਯੂਨੀਅਨ ਦੇ ਜਨਰਲ ਸਕੱਤਰ ਹਨ
बुधवार, 2 फ़रवरी 2011
मानसिक परेशानी के चलते गले में फांसी का फंदा डालकर अपनी जीवन लीला समाप्त की
डबवाली-उपमण्डल के गांव आसाखेड़ा में एक व्यक्ति ने मानसिक परेशानी के चलते
गले में फांसी का फंदा डालकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। मृतक की पहचान पृथ्वी नाथ पुत्र राम नाथ गंगानगर निवासी के रूप में हुई है। मौका पर पहुंची पुलिस टीम ने शव को अपने कब्जे में लेकर आवश्यक कार्रवाई करने उपरान्त शव को पोस्टमार्टम के लिए डबवाली के राजकीय अस्पताल ले आए। प्राप्त जानकारी अनुसार मृतक की पत्नी नीलम रानी ने बताया कि उसका पति गांव आसाखेड़ा में आरएमपी डाक्टर था और गांव में ही अपना क्लिनिक चलाता था तथा वह गांव में ही स्वास्थ्य केन्द्र में एएनएम के तौर पर कार्यरत है उसने बताया कि उसका पति पृथ्वी नाथ पिछले कुछ समय से मानसिक तौर पर परेशान रहता था और बीती रात वह अलग कमरे में सोया था। जब उसने प्रात: उठकर देखा कि कमरे में उसका पति पंखे के साथ लटक रहा था तो उसने इसकी सूचना गांव के सरपंच राम कुमार व अन्य लोगों को दी तो गांव के सरपंच ने इसकी सूचना तुरन्त पुलिस चौकी में दूरभाष पर दी। सूचना मिलते ही चौटाला पुलिस चौकी ईंचार्ज कृष्ण लाल अपने पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे और लटक रहे शव को गांववासियों के सहयोग से नीचे उतारा और उसे डबवाली के राजकीय अस्पताल में ले आए। जहां पर मृतक की पत्नी नीलम रानी के ब्यान पर आईपीसी की धारा 174 के तहत कार्रवाई करते हुए शव का पोस्टमार्टम करवाकर शव परिजनों को सौंप दिया।
गले में फांसी का फंदा डालकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। मृतक की पहचान पृथ्वी नाथ पुत्र राम नाथ गंगानगर निवासी के रूप में हुई है। मौका पर पहुंची पुलिस टीम ने शव को अपने कब्जे में लेकर आवश्यक कार्रवाई करने उपरान्त शव को पोस्टमार्टम के लिए डबवाली के राजकीय अस्पताल ले आए। प्राप्त जानकारी अनुसार मृतक की पत्नी नीलम रानी ने बताया कि उसका पति गांव आसाखेड़ा में आरएमपी डाक्टर था और गांव में ही अपना क्लिनिक चलाता था तथा वह गांव में ही स्वास्थ्य केन्द्र में एएनएम के तौर पर कार्यरत है उसने बताया कि उसका पति पृथ्वी नाथ पिछले कुछ समय से मानसिक तौर पर परेशान रहता था और बीती रात वह अलग कमरे में सोया था। जब उसने प्रात: उठकर देखा कि कमरे में उसका पति पंखे के साथ लटक रहा था तो उसने इसकी सूचना गांव के सरपंच राम कुमार व अन्य लोगों को दी तो गांव के सरपंच ने इसकी सूचना तुरन्त पुलिस चौकी में दूरभाष पर दी। सूचना मिलते ही चौटाला पुलिस चौकी ईंचार्ज कृष्ण लाल अपने पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे और लटक रहे शव को गांववासियों के सहयोग से नीचे उतारा और उसे डबवाली के राजकीय अस्पताल में ले आए। जहां पर मृतक की पत्नी नीलम रानी के ब्यान पर आईपीसी की धारा 174 के तहत कार्रवाई करते हुए शव का पोस्टमार्टम करवाकर शव परिजनों को सौंप दिया। अधिकारी शहर के पानी, सीवरेज व सफाई व्यवस्था के बारे में आ रही शिकायतों को गम्भीरता से लेते हुए उनका समाधान तुरन्त करें--डॉ. केवी सिंह
डबवाली -मुख्यमन्त्री हरियाणा के पूर्व विशेष कार्याधिकारी डॉ. केवी सिंह ने डबवाली शहर में पेयजल, सीवरेज व सफाई व्यवस्था के बारे में लगातार आ रही शिकायतों के संदर्भ में बुधवार को जनस्वास्थ्य विभाग के उपमण्डल अभियन्ता व जन स्वास्थ्य विभाग के कनिष्ठ अभियंताओं के साथ शहर में लगातार घरों में गन्दे पेयजल आपूर्ति की शिकायतों के समाधान के लिए चर्चा की तथा इन समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन समस्याओं को पाँच दिनों के अंदर - अंदर हल करें। शहर की सफाई व्यवस्था में सुधार लाने के लिए डॉ. सिंह ने नगरपालिका सचिव व सफाई निरीक्षक के साथ भी बैठक की तथा शहर की सफाई व्यवस्था को सुधारने के दिशा-निर्देश देते हुए डॉ.सिंह ने कहा कि सभी अधिकारी शहर के पानी, सीवरेज व सफाई व्यवस्था के बारे में आ रही शिकायतों को गम्भीरता से लेते हुए उनका समाधान तुरन्त करें। डॉ. सिंह ने कहा कि जन समस्याओं के बारे में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाऐगी। इस अवसर पर उनके साथ शहरी प्रधान पवन गर्ग, डबवाली ग्रामीण प्रधान दरबारा सिंह, ब्लॉक औढ़ा प्रधान जगसीर सिंह मिठड़ी, पार्षद विनोद बांसल, संदीप चौधरी, मनवीर सिंह मान, दीपक बाबा व निजी सचिव बजरंग लाल उपस्थित थे।
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हरियाणा सरकार मुर्दाबाद के गगनभेदी नारों के बीच समस्त बिजली बोर्ड कर्मचारी पूरे दिन हड़ताल पर रहे
डबवाली- हुड्डा सरकार मुर्दाबाद, लुटेरों का टोला मुर्दाबाद, हरियाणा सरकार मुर्दाबाद के गगनभेदी नारों के बीच समस्त बिजली बोर्ड कर्मचारी पूरे दिन हड़ताल पर रहे। बिजली
कॢमयों ने दी चेतावनी-अगर हमारी मांगे शीघ्र ही न मानी गई तो आन्दोलन को तेज कर दिया जाऐगा तथा सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई लड़ी जाऐगी। बिजली बोर्ड कार्यालय के समक्ष हड़ताली कर्मचारियों का नेतृत्त्व कर रहे बिजली बोर्ड के यूनिट प्रधान केवल कृष्ण व सर्कल सचिव औम प्रकाश शर्मा ने संयुक्त रूप से बताया कि उक्त हड़ताल हरियाणा बिजली बोर्ड कर्मचारी ज्वाईंट एक्शन कमेटी के आह्वान पर की गई है। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार बिजली कर्मचारियों की मांगे न मानकर कर्मचारियों को आन्दोलन करने पर मजबूर कर रही है। उन्होंने कहा कि जिस तरह हरियाणा सरकार द्वारा विगत में पानीपत व गुडग़ांवा सर्कल के जिन विभागों का निजीकरण किया गया है उनको तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए। बिजली निगमों में लम्बे समय से वर्क लोड के अनुसार के पदों के पुर्नगठन का कार्य को शीघ्र पूरा किया जाए। ठेका प्रणाली बन्द की जाए तथा कच्चे कर्मचारियों को पक्का किया जाए तथा उन्हें न्यूनतम वेतन के साथ - साथ सभी सुविधाऐं प्रदान की जाऐं। ड्यूटी पर मृत्यु होने के उपरान्त उसके नजदीकी आश्रित को दस लाख रूपये का मुआवजा दिया जाए। इस अवसर पर मनोज शर्मा, चन्द भान नेहरा, जोगिन्द्र सैनी, जसविन्द्र कुमार, राम किशन, विजय पाण्डे, जगदीश मैहता, गुरबख्श जेई, राज कुमार, हवा ङ्क्षसह सहित यूनियन के अनेक कर्मचारी मौजूद थे। वैकल्पिक व्यवस्था-रितेश जैन एसडीओ हिसार तथा दीवान चन्द विजीलैंस हिसार ने अपने संयुक्त ब्यान में कहा कि बिजली निगम कर्मचारियों की हड़ताल के मद्देनज़र निगम के अधिकारियों ने बिजली व्यवस्था को दुरूस्त बनाए रखने के लिए उनकी नियुक्ति की है। उन्होंने कहा कि हड़ताल का समर्थन करते हुए विरोध स्वरूप वह काले बिल्ले लगाकर कार्य करेंगे। इसके अतिरिक्त एक्सियन बीके रंजन तथा एसडीओ गुलशन वधवा भी काले बिल्ले लगाकर हड़ताल में शामिल रहे।
कॢमयों ने दी चेतावनी-अगर हमारी मांगे शीघ्र ही न मानी गई तो आन्दोलन को तेज कर दिया जाऐगा तथा सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई लड़ी जाऐगी। बिजली बोर्ड कार्यालय के समक्ष हड़ताली कर्मचारियों का नेतृत्त्व कर रहे बिजली बोर्ड के यूनिट प्रधान केवल कृष्ण व सर्कल सचिव औम प्रकाश शर्मा ने संयुक्त रूप से बताया कि उक्त हड़ताल हरियाणा बिजली बोर्ड कर्मचारी ज्वाईंट एक्शन कमेटी के आह्वान पर की गई है। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार बिजली कर्मचारियों की मांगे न मानकर कर्मचारियों को आन्दोलन करने पर मजबूर कर रही है। उन्होंने कहा कि जिस तरह हरियाणा सरकार द्वारा विगत में पानीपत व गुडग़ांवा सर्कल के जिन विभागों का निजीकरण किया गया है उनको तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए। बिजली निगमों में लम्बे समय से वर्क लोड के अनुसार के पदों के पुर्नगठन का कार्य को शीघ्र पूरा किया जाए। ठेका प्रणाली बन्द की जाए तथा कच्चे कर्मचारियों को पक्का किया जाए तथा उन्हें न्यूनतम वेतन के साथ - साथ सभी सुविधाऐं प्रदान की जाऐं। ड्यूटी पर मृत्यु होने के उपरान्त उसके नजदीकी आश्रित को दस लाख रूपये का मुआवजा दिया जाए। इस अवसर पर मनोज शर्मा, चन्द भान नेहरा, जोगिन्द्र सैनी, जसविन्द्र कुमार, राम किशन, विजय पाण्डे, जगदीश मैहता, गुरबख्श जेई, राज कुमार, हवा ङ्क्षसह सहित यूनियन के अनेक कर्मचारी मौजूद थे। वैकल्पिक व्यवस्था-रितेश जैन एसडीओ हिसार तथा दीवान चन्द विजीलैंस हिसार ने अपने संयुक्त ब्यान में कहा कि बिजली निगम कर्मचारियों की हड़ताल के मद्देनज़र निगम के अधिकारियों ने बिजली व्यवस्था को दुरूस्त बनाए रखने के लिए उनकी नियुक्ति की है। उन्होंने कहा कि हड़ताल का समर्थन करते हुए विरोध स्वरूप वह काले बिल्ले लगाकर कार्य करेंगे। इसके अतिरिक्त एक्सियन बीके रंजन तथा एसडीओ गुलशन वधवा भी काले बिल्ले लगाकर हड़ताल में शामिल रहे।
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मंगलवार, 1 फ़रवरी 2011
ਸਾਡਾ ਨੈਸ਼ਨਲ 'ਟਰੈਕਟਰ'
ਇਕਬਾਲ ਸਿੰਘ ਸ਼ਾਂਤ ਕਹਿੰਦੇ ਨੇ ਦੇਸ਼ ਤਰੱਕੀ ਦੀਆਂ ਲੀਹਾਂ 'ਤੇ ਵਧ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਅਗਲੇ ਦੋ ਦਹਾਕਿਆਂ 'ਚ ਦੁਨੀਆਂ ਵਿਚ ਮਹਾਂਸ਼ਕਤੀ ਵਜੋਂ ਸਥਾਪਿਤ ਹੋ ਜਾਵਾਂਗੇ। ਪਰ ਕਿਹਦੇ ਸਹਾਰੇ ? ਸਫ਼ੈਦ ਕੱਪੜਿਆਂ ਦੀ ਆੜ 'ਚ ਕਾਲੀਆਂ ਕਰਤੂਤਾਂ ਨਾਲ ਦੇਸ਼ 'ਤੇ ਰਾਜ ਕਰਨ ਵਾਲੇ ਲੀਡਰਾਂ ਸਹਾਰੇ ਜਾਂ ਫਿਰ ਦੇਸ਼ ਦੀ ਪੜ੍ਹੀ-ਲਿਖੀ ਜਮਾਤ, ਜਿਸਨੂੰ ਜੀ 2-ਸਪੈਕਟ੍ਰਮ, ਜਿਹੇ ਘਪਲਿਆਂ ਰਾਹੀਂ ਅਰਥਚਾਰੇ ਨੂੰ ਢਾਹ ਲਾਉਣ ਤੋਂ ਵਿਹਲ ਨਹੀਂ ਜਾਂ ਫਿਰ ਦੇਸ਼ ਦਾ ਭਵਿੱਖ ਨੌਜਵਾਨਾਂ ਵਰਗ, ਜਿਹੜਾ ਨਸ਼ਿਆਂ ਅਤੇ ਸੈਕਸ ਦੀ ਮਾਰ ਹੇਠ ਆਪਣੀ ਪ੍ਰਜਨਣ ਤਾਕਤ ਤੱਕ ਵੀ ਗਵਾਉਂਦਾ ਜਾ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਪਰ ਦੇਸ਼ ਦੇ ਲੀਡਰਾਂ ਨੂੰ ਭਰੋਸਾ ਹੈ। ਆਪਣੇ ਨੈਸ਼ਨਲ ਟਰੈਕਟਰ (ਜੁਗਾੜੂ ਸੋਚ) 'ਤੇ। ਜਿਸਦੇ ਜਰੀਏ ਸਾਡਾ ਕੌਮੀ ਚਰਿੱਤਰ (ਨੈਸ਼ਨਲ ਕਰੈਕਟਰ) ਦਿਨੋਂ-ਦਿਨ -ਨੈਸ਼ਨਲ ਟਰੈਕਟਰ ਵਿਚ ਤਬਦੀਲ ਹੁੰਦਾ ਜਾ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਸਭ ਤੋਂ ਮੰਦਭਾਗੀ ਗੱਲ ਹੈ ਕਿ ਇਸਦੇ ਚਾਰ ਟਾਇਰ ਵੀ ਬਰਾਬਰ ਦੇ ਨਹੀਂ ਭਾਵ ਕਿਸੇ ਪਾਸੇ ਕੋਈ ਨਿਯਮ ਨਹੀਂ, ਨੀਤੀ ਨਹੀਂ। ਹਰ ਪਾਸੇ ਦਿਖਾਈ ਦੇ ਰਹੀ ਹੈ ਸਿਰਫ਼ ਅੱਗੇ ਵਧਣ ਦੀ ਦੌੜ।
ਅੱਜ ਅਸੀਂ ਚੰਦਰਮਾਂ 'ਤੇ ਵਾਸੇ ਦੀਆਂ ਗੱਲਾਂ ਕਰਦੇ ਹਾਂ ਪਰ ਸਾਡੇ ਦੇਸ਼ ਦੀ 75 ਫ਼ੀਸਦੀ ਤੋਂ ਵੀ ਵੱਧ ਜਨਤਾ ਨੂੰ ਸੜਕਾਂ 'ਤੇ ਵਹੀਕਲ ਚਲਾਉਣ ਦੀ ਅਕਲ ਨਹੀਂ। ਹਨ੍ਹੇਰੇ 'ਚ ਸਾਹਮਣਿਓਂ ਆਉਂਦੀ ਗੱਡੀ ਨੂੰ ਰਾਹ ਵਿਖਾਉਣ ਲਈ ਡਿੱਪਰ ਮਾਰਨ ਦੀ ਸੁਰਤ ਨਹੀਂ। ਲੋਕਾਂ ਵਿਚ ਸਾਫ਼-ਸਫ਼ਾਈ ਪ੍ਰਤੀ ਭਾਵਨਾ ਇੰਨੀ ਘੱਟ ਹੈ ਕਿ ਉਹ ਘਰ ਦਾ ਕੂੜਾ ਸੜਕ ਵਿਚਕਾਰ ਸੁੱਟਣ ਤੋਂ ਨਹੀਂ ਝਿਜਕਦੇ। ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ ਬਿਜਲੀ ਤੇ ਟੈਕਸ ਦੀ ਚੋਰੀ ਕਰਕੇ ਇੰਝ ਮਜ਼ਾ ਆਉਂਦਾ ਹੈ ਜਿਵੇਂ ਪਾਕਿਸਤਾਨ ਤੋਂ ਕ੍ਰਿਕਟ ਦਾ ਮੈਚ ਜਿੱਤ ਲਿਆ ਹੋਵੇ। ਅਜੇ ਤਾਂ ਸ਼ੁਕਰ ਹੈ ਕਿ ਟੈਲੀਫੋਨ ਅਤੇ ਮੋਬਾਇਲਾਂ ਦੇ ਮੀਟਰ ਲੋਕਾਂ ਦੇ ਘਰਾਂ ਵਿਚ ਨਹੀਂ ਲੱਗੇ ਨਹੀਂ ਤਾਂ ਇਨ੍ਹਾਂ ਜੁਗਾੜੂ ਲੋਕਾਂ ਨੇ ਇਨ੍ਹਾਂ 'ਤੇ ਵੀ ਕੁੰਡੀਆਂ ਲਾਉਣ 'ਚ ਕੋਈ ਕਸਰ ਨਹੀਂ ਛੱਡਣੀ ਸੀ।
ਸਾਡੇ 'ਨੈਸ਼ਨਲ ਟਰੈਕਟਰ' ਦਾ ਇੰਨਾ ਬੋਲਬਾਲਾ ਹੈ ਕਿ ਸਾਡੇ ਬਹੁਤੇ ਵਕੀਲ ਅਪਰਾਧੀਆਂ ਨੂੰ ਸਜ਼ਾ ਦਿਵਾਉਣ ਦੀ ਬਜਾਏ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਕਾਨੂੰਨ ਦੇ ਸ਼ਿਕੰਜ਼ੇ 'ਚੋਂ ਬਚਣ ਦੀਆਂ ਘੁੰਡੀਆਂ ਸਿਖਾਉਂਦੇ ਹਨ। ਅਦਾਲਤਾਂ 'ਚ ਇਨਸਾਫ਼ ਲਈ ਜ਼ਿੰਦਗੀਆਂ ਲੰਘ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ ਪਰ ਉਥੋਂ ਮਿਲਦੀ ਹੈ ਸਿਰਫ਼ ਤਰੀਕ ਤੇ ਤਰੀਕ... ਅਤੇ ਅੰਕਲ ਜੱਜਾਂ ਦੀ ਭੂਮਿਕਾ ਨੇ ਵੀ ਨਿਆਂਪਾਲਿਕਾ 'ਤੇ ਪ੍ਰਸ਼ਨ ਚਿੰਨ੍ਹ ਲਗਾ ਦਿੱਤਾ ਹੈ।
ਖਾਕੀ ਵਰਦੀ ਦੀ ਹਾਲਤ ਇਹ ਹੈ ਹਾਕਮਾਂ ਦੇ ਪਿੰਡ ਬਾਦਲ 'ਚ ਪ੍ਰਜਾਪਤ ਕੁਲਵੰਤ ਸਿੰਘ ਦਾ ਪਰਿਵਾਰ ਮਹੀਨਿਆਂ ਤੋਂ ਆਪਣੇ ਖੇਤ ਨੂੰ ਲਾਂਘੇ ਲਈ ਦਰ-ਦਰ ਭਟਕ ਰਿਹਾ ਹੈ ਪਰ ਉਸਨੂੰ ਖਾਕੀ ਵਰਦੀ ਦੇ ਜ਼ੋਰ 'ਤੇ ਖੇਤ ਨੂੰ ਲਾਂਘਾ ਤਾਂ ਦੂਰ ਖੰਘਣ ਦੀ ਇਜਾਜ਼ਤ ਵੀ ਨਹੀਂ ਦਿੱਤੀ ਜਾ ਰਹੀ। ਇਹ ਸਿਰਫ਼ ਹਾਕਮਾਂ ਦੇ ਪਿੰਡ ਦੀ ਸਥਿਤੀ ਹੈ ਬਾਕੀ ਸੂਬੇ ਅਤੇ ਦੇਸ਼ 'ਚ ਖਾਕੀ ਦੀਆਂ ਕਾਰਗੁਜਾਰੀਆਂ ਕਿਸੇ ਤੋਂ ਲੁਕੀਆਂ ਨਹੀਂ।
ਸਾਡੇ 62 ਸਾਲਾ ਗਣਤੰਤਰ ਦੀ ਪ੍ਰਾਪਤੀ ਹੈ ਕਿ ਮੋਇਆਂ ਨੂੰ ਪੈਨਸ਼ਨਾਂ ਮਿਲ ਰਹੀਆਂ ਹਨ, ਜਿਉਂਦੇ ਜੀਅ ਪੈਨਸ਼ਨਾਂ ਖਾਤਰ ਸੰਗਤ ਦਰਸ਼ਨਾਂ ਵਿਚ ਭਟਕ ਰਹੇ ਹਨ। ਚਿੱਟਕੱਪੜਿਆਂ ਤੇ ਧਨਾਢਾਂ ਦੇ ਕੁੱਤੇ ਲੂਵੀ ਮਹਿੰਗੇ ਬਿਸਕੁੱਟ ਖਾਂਦੇ ਹਨ ਤੇ ਮਹਿੰਗੀਆਂ ਕਾਰਾਂ 'ਤੇ ਘੁੰਮਦੇ ਹਨ, ਜਦੋਂ ਕਿ ਗਰੀਬਾਂ ਦੇ ਬੱਚੇ ਦੋ ਡੰਗ ਦੀ ਰੋਟੀ ਖਾਤਰ ਢਾਬਿਆਂ 'ਤੇ ਜੂਠੇ ਭਾਂਡੇ ਮਾਂਜਣ ਨੂੰ ਮਜ਼ਬੂਰ ਹਨ। ਬਾਲ ਮਜ਼ਦੂਰੀ ਖਿਲਾਫ਼ ਕਾਨੂੰਨ ਤਾਂ ਹੈ ਪਰ ਭੁੱਖੇ ਬੱਚਿਆਂ ਦੇ ਢਿੱਡ ਭਰਨ ਦਾ ਕੋਈ ਜੁਗਾੜ ਨਹੀਂ। ਸਰਕਾਰੀ ਗੋਦਾਮਾਂ 'ਚ ਕਰੋੜਾਂ ਟਨ ਅਨਾਜ ਸੜ ਰਿਹਾ ਹੈ ਪਰ ਲੋੜਵੰਦਾਂ ਨੂੰ ਖਾਣ ਦੀ ਇਜਾਜ਼ਤ ਨਹੀਂ।
ਦੇਸ਼ ਵਿਚ ਧਰਮਾਂ ਦੀ ਗਿਣਤੀ ਦਿਨੋਂ ਦਿਨ ਵਧ ਰਹੀ ਹੈ ਪਰ ਸਮਾਜਿਕ ਇਖ਼ਲਾਕ ਖ਼ਤਮ ਹੋ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਕੋਈ ਕਿਸੇ ਸਾਧ ਦੀ ਡਫ਼ਲੀ ਵਜਾ ਰਿਹਾ ਹੈ ਤੇ ਕਿਸੇ ਉਤੇ ਫਲਾਣੇ ਬਾਬੇ ਦਾ ਜਨੂੰਨ ਸਵਾਰ ਹੈ। ਦੇਸ਼ ਪ੍ਰਤੀ ਲੋਕਾਂ 'ਚ ਐਨਾ ਕੁ ਦੇਸ਼ ਪ੍ਰੇਮ ਬਚਿਆ ਹੈ ਕਿ ਅਜਿਹੇ ਅਖੌਤੀ ਸਾਧਾਂ ਦੀਆਂ ਕਰਤੂਤਾਂ 'ਤੇ ਪਰਦਾ ਪਾਉਣ ਲਈ ਪਲਾਂ 'ਚ ਲੱਖਾਂ-ਕਰੋੜਾਂ ਦੀ ਸਰਕਾਰੀ ਜਾਇਦਾਦਾਂ ਤੇ ਸਰਕਾਰੀ ਗੱਡੀਆਂ ਮੋਟਰਾਂ ਨੂੰ ਅੱਗ ਦੀ ਭੇਟ ਚਾੜ੍ਹ ਦਿੱਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ।
ਕਦੇ ਸੋਚਿਆ ਕਿਸੇ ਨੇ ਕਿ ਕੋਈ ਵੀ ਧਰਮ ਜਾਂ ਪੰਥ ਲੜਾਈ ਝਗੜੇ ਜਾਂ ਫਸਾਦ ਦੀ ਸਿੱਖਿਆ ਨਹੀਂ ਦਿੰਦਾ। ਧਰਮ ਤੇ ਸਮਾਜਕ ਠੇਕੇਦਾਰੀਆਂ ਨੇ ਅਜਿਹੀ ਸਥਿਤੀ ਪੈਦਾ ਕਰ ਦਿੱਤੀ ਹੈ ਕਿ ਦੁਖੀ ਹੋਇਆ ਮਨ ਕਰਦੈ ਕਿ ਦੇਸ਼ ਵਿਚ ਧਰਮਾਂ 'ਤੇ ਪਾਬੰਦੀ ਲਗਾ ਦਿੱਤੀ ਜਾਵੇ ਤੇ ਕਿਸੇ ਨੂੰ ਰੱਬ ਦਾ ਨਾਂਅ ਲੈਣ ਦੀ ਇਜ਼ਾਜਤ ਵੀ ਨਾ ਹੋਵੇ। ਅੱਜ ਧਰਮ ਦੀ ਆੜ ਵਿਚ ਔਰਤਾਂ ਦੀ ਆਬਰੂ ਨਾਲ ਖਿਲਵਾੜ ਕੀਤਾ ਜਾ ਰਿਹਾ ਹੈ ਤੇ ਹਰ ਪਾਸੇ ਸਿਰਫ਼ ਭਾਵਨਾਵਾਂ ਦਾ ਵਪਾਰ ਭਾਰੂ ਹੋ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਲੱਖਾਂ ਪੜ੍ਹੇ-ਲਿਖੇ ਬੇਰੁਜ਼ਗਾਰ ਮੁੰਡੇ ਕੁੜੀਆਂ ਆਪਣੇ ਹੱਕਾਂ ਖਾਤਰ ਸੜਕਾਂ ਦੀ ਖਾਕ ਛਾਣਦੇ ਹੋਏ ਜ਼ਬਰ ਦਾ ਸ਼ਿਕਾਰ ਬਣ ਰਹੇ ਹਨ।
ਅਜਿਹੇ ਹਾਲਾਤਾਂ ਵਿਚ ਆਪਣੇ ਹੱਥੋਂ ਵਿਉਂਤੀ ਦੁਨੀਆਂ ਦੇ ਅਜੋਕੇ ਸਾਇਬਰ ਇਨਸਾਨਾਂ ਤੋਂ ਡਰਦਾ ਰੱਬ ਵੀ ਵਿਚਾਰਾ ਕਿਸੇ ਖੂੰਜੇ ਰੋਣ ਰੋਣਹਾਕਾ ਹੋਇਆ ਬੈਠਾ ਹੈ ਪਰ ਲੱਗਦੈ ਕਿ ਹੁਣ ਉਹਦੇ ਹੱਥੋਂ ਵੀ ਬਾਜ਼ੀ ਖੁੰਝ ਗਈ ਹੈ। ਮਹਿੰਗਾਈ ਸਿਖ਼ਰਾਂ ਨੂੰ ਪੁੱਜ ਗਈ ਐ ਤੇ ਗੰਢਿਆਂ ਤੇ ਟਮਾਟਰਾਂ ਨੇ ਰਸੋਈ ਦਾ ਜਾਇਕਾ ਵਿਗਾੜ ਰੱਖਿਆ ਹੈ।
ਦੇਸ਼ ਦਾ ਭਵਿੱਖ ਮੰਨੀ ਜਾਂਦੀ ਨਵੀਂ ਪੀੜੀ ਨੂੰ ਪੜ੍ਹਾ-ਲਿਖਾ ਕੇ ਚਰਿੱਤਰਵਾਨ ਬਣਾਉਣ ਵਾਲੇ ਸਰਕਾਰੀ ਸਕੂਲਾਂ ਦੇ ਅਧਿਆਪਕਾਂ ਨੂੰ ਵੀ ਆਪਣੀ ਕਾਬਲੀਅਤ 'ਤੇ ਭਰੋਸਾ ਨਹੀਂ ਜਾਪਦਾ ਤਦੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਆਪਣੇ ਜੁਆਕ ਕਾਨਵੈਂਟ ਸਕੂਲਾਂ ਵਿਚੋਂ ਸਿੱਖਿਆ ਹਾਸਲ ਕਰਦੇ ਹਨ। ਸਮਾਜ ਦਾ ਚੌਥਾ ਥੰਮ ਮੀਡੀਆ ਵੀ ਥਾਂ-ਥਾਂ ਖੁਰਦਾ ਨਜ਼ਰ ਆ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਪੇਡ ਖ਼ਬਰਾਂ ਤੇ ਮੀਡੀਆ ਦੇ ਕੌਮੀ ਪੱਧਰ ਦੇ ਝੰਡਾਬਰਦਾਰਾਂ ਦੇ ਨਾਂ 2ਜੀ-ਸਪੈਕਟ੍ਰਮ ਘਪਲੇ 'ਚ ਆਉਣ ਨਾਲ ਗਣਤੰਤਰ ਦੀ ਇੱਕ ਹੋਰ ਚੂਲ ਹਿਲਦੀ ਨਜ਼ਰ ਆ ਰਹੀ ਹੈ।ਇਹ ਵੀ ਸਾਡਾ ਕੌਮੀ ਚਰਿੱਤਰ ਹੈ ਕਿ ਆਮ ਜਨਤਾ ਲਈ ਆਈਆਂ ਸਰਕਾਰੀ ਗਰਾਂਟਾਂ ਵਿਚੋਂ ਸਿਰਫ਼ 20 ਤੋਂ 25 ਫ਼ੀਸਦੀ ਹਿੱਸਾ ਹੀ ਹਕੀਕੀ ਤੌਰ 'ਤੇ ਲੱਗਦਾ ਹੈ। ਤਦੇ ਅੱਜ ਦੇਸ਼ ਦਾ ਲੱਖਾਂ ਹਜ਼ਾਰਾਂ ਕਰੋੜ ਰੁਪਇਆ ਸਵਿਸ ਬੈਂਕ ਦੇ ਖਾਤਿਆਂ ਦਾ ਸ਼ਿੰਗਾਰ ਬਣ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਸੰਵਿਧਾਨ ਗਠਨ ਦੇ 62 ਵਰਿਆਂ ਬਾਅਦ ਵੀ ਜ਼ਮੀਨੀ ਪੱਧਰ 'ਤੇ ਹਾਲਾਤ ਇਹ ਹਨ ਕਿ ਦੇਸ਼ ਦੀ 70-75 ਫ਼ੀਸਦੀ ਜਨਤਾ ਨੂੰ ਆਪਣੇ ਮੁੱਢਲੇ ਅਧਿਕਾਰਾਂ ਅਤੇ ਕਾਨੂੰਨੀ ਕਦਰਾਂ-ਕੀਮਤਾਂ ਦਾ ਹੀ ਗਿਆਨ ਨਹੀਂ ਤੇ ਉਹ ਅੰਨ੍ਹੇ-ਬੋਲਿਆਂ ਵਾਂਗ ਅਖੌਤੀ ਸਿਆਸਤਦਾਨਾਂ ਦੀ ਬਿਨਾਂ ਇਖਲਾਕੀ ਸੋਚ ਪਹਿਚਾਣੇ ਵੋਟ ਪਾ ਦਿੰਦੇ ਹਨ। ..'ਤੇ ਫਿਰ ਵੋਟਾਂ ਦੀ ਭੀਖ ਮੰਗਣ ਵਾਲੇ ਆਗੂ ਜਿੱਤਣ ਮਗਰੋਂ ਲੋਕਾਂ ਦੀ ਮਾਇਆ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਹੀ ਭੀਖ ਵਜੋਂ ਦਿੰਦੇ ਹਨ। ਵੋਟਾਂ ਦੀ ਖਰੀਦੋ-ਫਰੋਖ਼ਤ ਨੇ ਵੀ ਸਮੁੱਚੀਆਂ ਲੋਕਤੰਤਰਿਕ ਕਦਰਾਂ-ਕੀਮਤਾਂ ਨੂੰ ਲਗਭਗ ਢਹਿ-ਢੇਰੀ ਕਰਕੇ ਰੱਖ ਦਿੱਤਾ ਹੈ।
ਅੱਜ ਦੇਸ਼ 'ਚ ਜ਼ਮੀਰ, ਇਖਲਾਕ, ਰਿਸ਼ਤਿਆਂ ਅਤੇ ਹਿੰਦੁਸਤਾਨੀਅਤ ਦੀ ਭਾਵਨਾ ਮਰਨ ਕੰਢੇ ਹੈ ਪਰ ਫਿਰ ਵੀ ਹਰ ਕੋਈ ਖੁਸ਼ ਹੈ ਕਿਉਂਕਿ ਇਹੋ ਵਰਤਾਰਾ ਅੱਜ-ਕੱਲ ਦੇ ਲੋਕਾਂ ਦੇ ਫਿੱਟ ਹੈ। ਰਾਜਸੀ ਆਗੂ ਆਪਣੇ ਸੌੜੇ ਹਿੱਤਾਂ ਲਈ ਗਰੀਬ ਜਨਤਾ ਨੂੰ ਰੁਜ਼ਗਾਰ ਦੇਣ ਦੀ ਥਾਂ ਆਟਾ-ਦਾਲ, ਸ਼ਗੁਨ ਸਕੀਮ ਤੇ ਮੁਫ਼ਤ ਬਿਜਲੀ ਜਿਹੀਆਂ ਰਿਆਇਤਾਂ ਦੇ ਕੇ ਮਾਨਸਿਕ ਤੇ ਆਰਥਿਕ ਤੌਰ 'ਤੇ ਅਪਾਹਜ ਕਰ ਰਹੇ ਹਨ।
ਪੰਜ ਵਰ੍ਹੇ ਵੇਖਦਿਆਂ ਨੂੰ ਹੋ ਗਏ ਬਾਪੂ ਤੋਂ ਲੰਬੀ 'ਚੋਂ ਸੇਮ ਨਹੀਂ ਨਿਕਲੀ, ਪੁੱਤ ਵੱਲੋਂ ਐਲਾਨਿਆ ਬਠਿੰਡੇ ਦੀਆਂ ਝੀਲਾਂ ਵਾਲਾ ਫਾਈਵ ਸਟਾਰ ਹੋਟਲ ਦਾ ਕਿਧਰੇ ਨਾਮੋ ਨਿਸ਼ਾਨ ਨਹੀਂ ਦਿਸਦਾ। ਬਾਪੂ ਨੇ ਇੱਕ-ਇੱਕ ਪਿੰਡ 'ਚ 5-5 ਖੇਡ ਕਿੱਟਾਂ ਵੰਡ ਕੇ ਵੋਟਾਂ ਦੀ ਬਿਸਾਤ ਵਿਛਾਈ ਹੈ। ਅਜੇ ਸਾਂਝੀ ਕੰਧ ਵਾਲੇ 'ਸ਼ਰੀਕਾਂ' ਦਾ ਸਿਆਸੀ ਖੌਫ਼ ਸਿਰ ਲੂ'ਤੇ ਹੈ ਅਤੇ ਉੱਪਰੋਂ ਘਰ ਵਿਚੋਂ ਉੱਠੇ 'ਨਵੇਂ ਸ਼ਰੀਕਾਂ' ਨੇ ਸੇਵੀਆਂ ਦੀ ਸਾਂਝੀ ਕੜਾਹੀ 'ਚ ਲੂਣ ਪਾ ਕੇ ਨਵੀਂ ਭਸੂੜੀ ਪਾ ਰੱਖੀ ਹੈ।
ਜਿੱਥੇ ਇੱਕ ''ਕਾਕਾ'' ਕਾਮਰੇਡਾਂ ਦੀ ਤਰਜ਼ 'ਤੇ 25 ਸਾਲਾਂ ਦੀ 'ਸਰਦਾਰੀ' ਭਾਲਦੈ ਤੇ ਦੂਜਾ 'ਨਿਜਾਮ' ਬਦਲਣ ਦਾ ਦਾਅਵਾ ਕਰਕੇ ਜਾਗੋ ਕੱਢਦੈ ਫਿਰਦੈ। ਸੂਬੇ ਦੇ ਕਾਂਗਰਸੀ ਵਿਰੋਧੀ ਧਿਰ ਦੀ ਭੂਮਿਕਾ ਭੁਲਾ ਪਿਛਲੇ ਚਾਰ ਵਰ੍ਹਿਆਂ ਤੋਂ ਆਪਣੇ ਰਵਾਇਤੀ ਕੁੱਕੜ-ਕਲੇਸ਼ ਵਿਚ ਉਲਝੇ ਹੋਏ ਹਨ।
ਪਿਆਰੇ ਪਾਠਕੋ! ਮੈਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਸ ਲੇਖ ਰਾਹੀਂ ਸਿਸਟਮ ਵਿਚ ਗਣਤੰਤਰ ਦਿਵਸ ਮੌਕੇ ਕੋਈ ਸੁਧਾਰ ਲਿਆਉਣ ਲਈ ਕੋਈ ਅਪੀਲ ਨਹੀਂ ਕਰ ਰਿਹਾ, ਕਿਉਂਕਿ ਇਹੋ ਲੂਲੂ-ਜਿਹਾ ਵਰਤਾਰਾ ਦੇਸ਼ ਦੇ 96 ਫ਼ੀਸਦੀ ਲੋਕਾਂ ਦੇ ਹੱਡਾਂ ਵਿਚ ਪੂਰੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਰਚ-ਮਿੱਚ ਚੁੱਕਿਆ ਹੈ। ਮੇਰੀ ਕਲਮ ਰਾਹੀਂ ਲਿਖੀਆਂ ਸਤਰਾਂ ਤਾਂ ਸਿਰਫ਼ ਦੇਸ਼ ਦੇ ਚਾਰ ਫ਼ੀਸਦੀ ਲੋਕਾਂ ਦੀ ਆਵਾਜ਼ ਹਨ। ਜਿਹੜੀ ਸ਼ਾਇਦ ਕਦੇ-ਕਦਾਈ ਪਰ ਗੂੰਜਦੀ ਹਮੇਸ਼ਾਂ ਰਹੇਗੀ।
ਅੱਜ ਸਿਰਫ਼ ਲੋੜ ਹੈ ਤਾਂ ਦੇਸ਼ ਦੇ ਭ੍ਰਿਸ਼ਟ ਚਿੱਟਕੱਪੜਿਆਂ ਦੀ ਸਫ਼ੈਦ ਪੁਸ਼ਾਕ ਨੂੰ ਸਿਆਹ ਕਾਲੇ ਰੰਗ ਵਿਚ ਤਬਦੀਲ ਕਰਨ ਦੀ, ਤਾਂ ਜੋ ਪਾਕ ਚਿੱਟਾ ਰੰਗ ਕਲੰਕਿਤ ਤੇ ਦਾਗਦਾਰ ਹੋਣੋਂ ਬਚ ਸਕੇ ਤੇ ਸ਼ਾਇਦ ਸਾਡਾ 'ਟਰੈਕਟਰ' ਬਣਿਆ 'ਕਰੈਕਟਰ' ਮੁੜ ਤੋਂ ਬਹਾਲ ਹੋ ਸਕੇ।
रिश्वत लेते पटवारी रंगे हाथ काबू
डबवाली-जमीन की इंतकाल के लिए एक किसान से साढ़े पांच हजार रुपए की रिश्वत लेते विजिलैंस की टीम ने रंगे हाथों एक पटवारी को गिरफ्तार कर लिया। पटवारी के खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज करवाया गया है तथा आगामी कार्रवाई की जा रही है। जानकारी के अनुसार रामपुरा बिश्रोईयां गांव के किसान राजेंद्र ने गांव के पटवारी हरमीत सिंह निवासी पीपली को जमीन की इंतकाल करने के लिए कहा। आरोप है कि पटवारी ने उससे साढ़े आठ हजार रुपए की रिश्वत की मांग कर दी। इस पर राजेंद्र ने उस समय उसे तीन हजार रुपए दे दिए तथा बकाया राशि आज देने की बात कही। इसी दौरान उसने पटवारी के खिलाफ रिश्वत लेने की शिकायत विजिलैंस विभाग को दी, जिस पर विजिलैंस टीम के इंस्पैक्टर जिले सिंह, एएसआई फतेहसिंह, हवलदार इंद्र सिंह, जीवनदास, सुरेंद्र व बलराम उक्त गांव में गए तथा राजेंद्र को रंग लगे 500-500 के 11 नोट दिए। राजेंद्र उसी समय पटवारी हरमीत सिंह के पास गया और उसे उक्त नोट थमा दिए और पटवारी ने उन्हें अपनी जेब में रख लिया। उसी समय वहां छिपी विजिलैंस की टीम ने पटवारी को पकड़ लिया तथा उसके हाथ धुलाए तो पानी का रंग लाल हो गया।
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लापरवाह अधिकारियों पर गिरेगी गाज: तंवर
सिरसा- सांसद अशोक तंवर ने कहा कि अधिकारी अपने कार्यों में लापरवाही बरतने से बाज आएं और रुके हुए विकास कार्यों को तेजी से पूरा करवाएं अन्यथा लापरवाह अधिकारियों से सख्ती से निपटा जाएगा। वे आज लघु सचिवालय में जिला सतर्कता एवं निगरानी कमेटी की बैठक में उपस्थित अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उनके साथ उपायुक्त सीजी रजिनीकांथन, पुलिस अधीक्षक सतेंद्र गुप्ता, अतिरिक्त उपायुक्त पंकज चौधरी, एसडीएम एसके जैन, नगराधीश हरीश भाटिया, भूपेश मेहता, ओमप्रकाश केहरवाला, सुरेन्द्र दलाल, तेजभान पनिहारी, डा. सुभाष जोधपुरिया, तिलकराज चन्देल सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद थे। तंवर ने कहा कि अक्सर देखा गया है कि लोग अधिकारियों के दफ्तरों में चक्कर लगाते रहते हैं लेकिन अधिकारी सुनवाई नहीं करते। इसलिए ऐसे अधिकारी लापरवाही को छोड़कर अपनी ड्यूटी ढंग से निभाएं। उन्होंने कहा कि जनसमस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर निपटाते हुए केंद्र व प्रदेश सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के बारे में जनता को जागरूक करके उनका लाभ पहुंचाएं। सांसद ने कहा कि जिला में चल रहे विकास कार्यों में तेजी लाकर उन्हें शीघ्रता से पूरा करवाएं और जो निर्माण कार्य किसी भी वजह से रुके हुए हैं उन्हें शीघ्र पूरा करवाया जाए। शहर में जगह-जगह सफाई और सीवरेज की समस्या को हल करवाएं, कार्य की समय सीमा तय करें, शिक्षा से वंचित बच्चों को पाठशालाओं में भेजने का बंदोबस्त करें, झुग्गी बस्तियों के लिए बनी परियोजनाओं को भी हकीकत के पटल पर लागू करवाने में गंभीरता दिखाएं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जितने भी सरकारी भवन बनकर तैयार हैं उनकी सूची तैयार करके दें ताकि मुख्यमंत्री से उनका उद्घाटन करवाकर जनता को समर्पित किया जा सके। गैस की कालाबाजारी पर सख्ती दिखाते हुए सांसद ने गैस सिलेंडरों का भंडारण करने, कालाबाजारी करने और समय पर आपूर्ति न करने वाले गैस एजेंसी संचालकों के खिलाफ मुकदमे दर्ज करवाने तथा गैस की कालाबाजारी रोकने के लिए कमेटी का गठन करने व गैस कालाबाजारी की सूचना देने वाले को पुरस्कृत करने के निर्देश दिए। उन्होंने पीडब्ल्यूडी व मार्केटिंग बोर्ड अधिकारियों को टूटी सड़कों का निर्माण करवाने व रिपेयर करने के निर्देश दिए।
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लापरवाह अधिकारियों पर गिरेगी गाज: तंवर
सिरसा- सांसद अशोक तंवर ने कहा कि अधिकारी अपने कार्यों में लापरवाही बरतने से बाज आएं और रुके हुए विकास कार्यों को तेजी से पूरा करवाएं अन्यथा लापरवाह अधिकारियों से सख्ती से निपटा जाएगा। वे आज लघु सचिवालय में जिला सतर्कता एवं निगरानी कमेटी की बैठक में उपस्थित अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उनके साथ उपायुक्त सीजी रजिनीकांथन, पुलिस अधीक्षक सतेंद्र गुप्ता, अतिरिक्त उपायुक्त पंकज चौधरी, एसडीएम एसके जैन, नगराधीश हरीश भाटिया, भूपेश मेहता, ओमप्रकाश केहरवाला, सुरेन्द्र दलाल, तेजभान पनिहारी, डा. सुभाष जोधपुरिया, तिलकराज चन्देल सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद थे। तंवर ने कहा कि अक्सर देखा गया है कि लोग अधिकारियों के दफ्तरों में चक्कर लगाते रहते हैं लेकिन अधिकारी सुनवाई नहीं करते। इसलिए ऐसे अधिकारी लापरवाही को छोड़कर अपनी ड्यूटी ढंग से निभाएं। उन्होंने कहा कि जनसमस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर निपटाते हुए केंद्र व प्रदेश सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के बारे में जनता को जागरूक करके उनका लाभ पहुंचाएं। सांसद ने कहा कि जिला में चल रहे विकास कार्यों में तेजी लाकर उन्हें शीघ्रता से पूरा करवाएं और जो निर्माण कार्य किसी भी वजह से रुके हुए हैं उन्हें शीघ्र पूरा करवाया जाए। शहर में जगह-जगह सफाई और सीवरेज की समस्या को हल करवाएं, कार्य की समय सीमा तय करें, शिक्षा से वंचित बच्चों को पाठशालाओं में भेजने का बंदोबस्त करें, झुग्गी बस्तियों के लिए बनी परियोजनाओं को भी हकीकत के पटल पर लागू करवाने में गंभीरता दिखाएं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जितने भी सरकारी भवन बनकर तैयार हैं उनकी सूची तैयार करके दें ताकि मुख्यमंत्री से उनका उद्घाटन करवाकर जनता को समर्पित किया जा सके। गैस की कालाबाजारी पर सख्ती दिखाते हुए सांसद ने गैस सिलेंडरों का भंडारण करने, कालाबाजारी करने और समय पर आपूर्ति न करने वाले गैस एजेंसी संचालकों के खिलाफ मुकदमे दर्ज करवाने तथा गैस की कालाबाजारी रोकने के लिए कमेटी का गठन करने व गैस कालाबाजारी की सूचना देने वाले को पुरस्कृत करने के निर्देश दिए। उन्होंने पीडब्ल्यूडी व मार्केटिंग बोर्ड अधिकारियों को टूटी सड़कों का निर्माण करवाने व रिपेयर करने के निर्देश दिए।
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कालांवाली में गैस एजेंसी पर छापा
नहीं मिला स्टोक रजिस्टर
सिरसा,-सिरसा के एसडीएम एसके जैन ने आज एक शिकायत पर कालांवाली स्थित करणी गैस एजेंसी पर छापा मारा। छापे के दौरान एजेंसी से स्टोक रजिस्टर ही गायब मिला जिस कारण गैस वितरण में गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है। आज सुबह एसडीएम एसके जैन, कालांवाली के नायब तहसीलदार संजय बिश्रोई, खाद्य आपूर्ति विभाग के इंस्पेक्टर राजदीप व कालांवाली थाना प्रभारी विक्रम नेहरा करणी गैस एजेंसी पर पहुंचे। एसडीएम ने एजेंसी संचालक से स्टोक रजिस्टर दिखाने को कहा मगर रजिस्टर नहीं मिला। इसके बाद पूरी टीम करीब दो घंटे से अधिक समय तक एजेंसी पर रही और पूरे रिकार्ड की जांच की। अधिकारियों ने एजेंसी पर भरे हुए व खाली जितने भी गैस सिलेंडर थे, सबका रिकार्ड नोट कर लिया है। खाद्य आपूर्ति विभाग कालांवाली के इंस्पेक्टर राजदीप ने स्टोक रजिस्टर न होने की पुष्टि करते हुए बताया कि उक्त एजेंसी के खिलाफ लगातार शिकायत मिल रही थी कि होम डिलीवरी में दिक्कत आ रही है। बुकिंग के कई दिन बाद भी गैस नहीं देने की शिकायत के आधार पर ही आज एजेंसी पर जांच की गई है। उन्होंने बताया कि एजेंसी के पूरे रिकार्ड की जांच की जा रही है।
सिरसा,-सिरसा के एसडीएम एसके जैन ने आज एक शिकायत पर कालांवाली स्थित करणी गैस एजेंसी पर छापा मारा। छापे के दौरान एजेंसी से स्टोक रजिस्टर ही गायब मिला जिस कारण गैस वितरण में गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है। आज सुबह एसडीएम एसके जैन, कालांवाली के नायब तहसीलदार संजय बिश्रोई, खाद्य आपूर्ति विभाग के इंस्पेक्टर राजदीप व कालांवाली थाना प्रभारी विक्रम नेहरा करणी गैस एजेंसी पर पहुंचे। एसडीएम ने एजेंसी संचालक से स्टोक रजिस्टर दिखाने को कहा मगर रजिस्टर नहीं मिला। इसके बाद पूरी टीम करीब दो घंटे से अधिक समय तक एजेंसी पर रही और पूरे रिकार्ड की जांच की। अधिकारियों ने एजेंसी पर भरे हुए व खाली जितने भी गैस सिलेंडर थे, सबका रिकार्ड नोट कर लिया है। खाद्य आपूर्ति विभाग कालांवाली के इंस्पेक्टर राजदीप ने स्टोक रजिस्टर न होने की पुष्टि करते हुए बताया कि उक्त एजेंसी के खिलाफ लगातार शिकायत मिल रही थी कि होम डिलीवरी में दिक्कत आ रही है। बुकिंग के कई दिन बाद भी गैस नहीं देने की शिकायत के आधार पर ही आज एजेंसी पर जांच की गई है। उन्होंने बताया कि एजेंसी के पूरे रिकार्ड की जांच की जा रही है।
शनिवार, 29 जनवरी 2011
नशे जैसी भयंकर बिमारी से घिरते,व्यक्ति कब मौत के मुंह में चला जाए पता नहीं चलता
डबवाली- नशा युवा वर्ग को किस और ले जा रहा है यह सब जानते हुए भी अधिकांश युवक नशे जैसी भयंकर बिमारी से घिरते जा रहे हैं। नशा करने वाला व्यक्ति कब मौत के मुंह में चला जाए पता नहीं चलता। इसी की एक ताजा घटना में वार्ड नं.7 में स्थित प्रेम नगर निवासी करीब 20 वर्षिय युवक प्रिंस वीरवार सायं घर आकर सोया और कब उसकी मौत हो गई कोई नहीं जानता। मृतक पिं्रस अपने घर में अपना मानसिक संतुलन खो चुकी 50 वर्षिय वृद्ध माता सविता रानी के साथ रहता था। पड़ौस में रहने वाले पूर्व नगरपार्र्षद राज रानी के पति इनेलो नेता रवि कुुमार कुक्कड़ ने बताया कि दोनों मां-बेटा करीब 10 वर्ष पूर्व इस गली में गांव मसीतां से आकर रह रहे थे। उन्होंने बताया कि मृतक प्रिंस की माता सविता रानी मानसिक तौर पर परेशान रहती है और सुबह होते ही घर से निकल जाती है और सारा दिन गलियों में इधर-उधर भटकती रहती है और आसपड़ोस से भोजन मांग कर अपना पेट भरती है। पूर्व नगर पार्षद ने बताया कि शुक्रवार सायं घर के बाहर बैठी मृतक की मां हर आने जाने वाले को कह रही थी कि पिं्रस सोया पड़ा है उठ नहीं रहा। और यह कहती हुई घर से बाहर निकल गई। तभी मौहल्ले की कुछ महिलाओं ने घर में प्रवेश किया तो देखा कि प्रिंस बैड पर बेसुध लेटा हुआ था। उन्होंने तुरंत इसकी सूचना पड़ोस में रहने वाले एक निजि चिकित्सक को दी। तो चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया। तो इनेलो नेता रवि कुक्कड़ ने इसकी सूचना गांव मसीतां में रह रहे मृतक के नजदीकी रिश्तेदार व मलोट में रह रही पिं्रस की बुआ किरण बाला को दी। सूचना मिलते ही शनिवार प्रात: वह अपने अन्य रिश्तेदारों के साथ डबवाली के प्रेम नगर में पहुंचे और देखकर सतंभ रह गए कि प्रिंस का मृत शरीर बैड पर पड़ा था और अपने बेटे की मौत से बेखबर मां गलियों में इधर-उधर भटक रही थी। उन्होंने तुरंत मौहल्लावासियों की मदद से मृतक प्रिंस का स्थानीय रामबाग में अंतिम संस्कार कर दिया। मृतक प्रिंस की बुआ किरण बाला व चाचा संदीप नेे बताया कि प्रिंस के पिता सुरेश कुमार की बीमारी के चलते करीब 15 वर्ष पूर्व उनका देहांत हो गया था। उनके निधन के बाद प्रिंस की माता अपना मानसिक संतुलन खो बैठी और प्रिंस ने कुछ वर्ष पूर्व पानीपत में अपनी पुश्तैनी जायदाद को बैचकर गांव मसीतां से डबवाली के प्रेम नगर में आकर रहने लगा। यहां आकर वह बुरी संगत में पड़कर नशे का आदि हो गया था। बहुत समझाने पर भी वह समझाा नहीं। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने घर के अंदर प्रवेश किया तो वह देखकर हैरत में पड़ गए की मृतक प्रिंस ने नशे की पुर्ति के लिए अपने घर का सारा सामान ही बेच दिया। यहां तक की उसके घर में लगे लोहे के दरवाजे भी उतार का बेच दिए। उन्होंने बताया कि अब पूरे घर में एक डबल बैड व दो गद्दों के इलावा कुछ नहीं बचा था।
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मोटरसाइकिल चोरी मामले में वांछित आरोपी कुलविंद्र डबवाली क्षेत्र से काबू
डबवाली-डबवाली पुलिस ने मोटरसाइकिल चोरी मामले में वांछित आरोपी कुलविंद्र पुत्र मक्खन सिंह निवासी काखांवाली जिला मुक्तसर पंजाब को शहर डबवाली क्षेत्र से काबू कर लिया है। इस घटना में चोरीशुदा मोटरसाइकिल को शहर डबवाली पुलिस पहले ही बरामद कर चुकी है। आरोपी ने पुछताछ के दौरान कार चोरी की एक घटना को अंजाम देना भी स्वीकार किया है। कस्बा डबवाली से हुई इस कार को भी पुलिस ने पहले ही बरामद कर लिया था और आरोपी की तलाश थी। आरोपी को आज डबवाली अदालत में पेश किया जाएगा।
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हजकां छोड़कर कांग्रेस में जाने वाले विधायकों को मंत्रीमंडल में जगह देकर हुड्डा सरकार ने संवैधानिक व्यवस्था का उल्लंघन किया-- चौटाला
डबवाली- इनेलो के प्रदेश के प्रधान महासचिव व डबवाली के विधायक डॉ. अजय सिंह चौटाला ने कहा कि हजकां छोड़कर कांग्रेस में जाने वाले विधायकों को मंत्रीमंडल में जगह देकर हुड्डा सरकार ने न केवल संवैधानिक व्यवस्था का उल्लंघन किया है बल्कि नैतिकता की सभी सीमाओं को पार कर दिया।
सिरसा स्थित चौटाला हाउस में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने सरकार पर प्रहार करते हुए कहा कि सरकार एक ओर विकास कार्यों का गुणगान कर रही है जबकि वास्तविकता यह है कि सरकार के कोष में अपने कर्मचारियों को वेतन देने तक की राशि नहीं है। ऐसे में सरकार के विकासपरक दावों का अंदाजा सहज लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि हुड्डा सरकार में किए गए मंत्रीमंडल विस्तार से प्रदेश के आर्थिक ढांचे पर अनावश्यक बोझ पड़ेगा। डॉ. अजय सिंह चौटाला ने कहा कि किसानों की जमीन सस्ते में लेकर उन्हें देश के बड़े बिल्डर्स को सौंपकर उनसे मोटा कमीशन प्राप्त करने वाली हुड्डा सरकार की जांच होनी चाहिए क्योंकि भूमि अधिग्रहण मुद्दे पर प्रदेश कांग्रेस सरकार ने लाखों करोड़ का घोटाला किया है। इनेलो नेता ने कहा कि आज प्रदेश की हालत यह है कि आम आदमी जहां महंगाई के बोझ तले दबा है वहीं प्रदेशभर में टूटी सड़कें और चहुंओर पसरी गंदगी प्रदेश में हुए विकास को बयां कर रही हैं।
डॉ. अजय सिंह चौटाला ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर जो तल्ख टिप्पणियां की हैं वह समूची सरकार को शर्मसार करने वाली हैं मगर केंद्र सरकार हठधर्मिता से शासन चलाने पर तुली है। उन्होंने कहा कि 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाले एवं विदेशों में जमा काला धन के मसले पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा भ्रष्टाचार को संवैधानिक दर्जा दिए जाने जैसी टिप्पणी से समूची सरकार शर्मिंदा हुई है जिससे देशवासियों के समक्ष केंद्र की यूपीए सरकार की पोल खुली है। उन्होंने कहा कि इन बड़े मसलों पर सख्त टिप्पणियों के बावजूद सरकार ने सारी नैतिकता ताक पर रखकर शासन का रही है। उन्होंने टिप्पणी की कि नैतिकता एवं कांग्रेस का दूर दूर तक कोई रिश्ता नहीं है जो जाहिर है। इस अवसर पर इनेलो पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद थे।
सिरसा स्थित चौटाला हाउस में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने सरकार पर प्रहार करते हुए कहा कि सरकार एक ओर विकास कार्यों का गुणगान कर रही है जबकि वास्तविकता यह है कि सरकार के कोष में अपने कर्मचारियों को वेतन देने तक की राशि नहीं है। ऐसे में सरकार के विकासपरक दावों का अंदाजा सहज लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि हुड्डा सरकार में किए गए मंत्रीमंडल विस्तार से प्रदेश के आर्थिक ढांचे पर अनावश्यक बोझ पड़ेगा। डॉ. अजय सिंह चौटाला ने कहा कि किसानों की जमीन सस्ते में लेकर उन्हें देश के बड़े बिल्डर्स को सौंपकर उनसे मोटा कमीशन प्राप्त करने वाली हुड्डा सरकार की जांच होनी चाहिए क्योंकि भूमि अधिग्रहण मुद्दे पर प्रदेश कांग्रेस सरकार ने लाखों करोड़ का घोटाला किया है। इनेलो नेता ने कहा कि आज प्रदेश की हालत यह है कि आम आदमी जहां महंगाई के बोझ तले दबा है वहीं प्रदेशभर में टूटी सड़कें और चहुंओर पसरी गंदगी प्रदेश में हुए विकास को बयां कर रही हैं।
डॉ. अजय सिंह चौटाला ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर जो तल्ख टिप्पणियां की हैं वह समूची सरकार को शर्मसार करने वाली हैं मगर केंद्र सरकार हठधर्मिता से शासन चलाने पर तुली है। उन्होंने कहा कि 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाले एवं विदेशों में जमा काला धन के मसले पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा भ्रष्टाचार को संवैधानिक दर्जा दिए जाने जैसी टिप्पणी से समूची सरकार शर्मिंदा हुई है जिससे देशवासियों के समक्ष केंद्र की यूपीए सरकार की पोल खुली है। उन्होंने कहा कि इन बड़े मसलों पर सख्त टिप्पणियों के बावजूद सरकार ने सारी नैतिकता ताक पर रखकर शासन का रही है। उन्होंने टिप्पणी की कि नैतिकता एवं कांग्रेस का दूर दूर तक कोई रिश्ता नहीं है जो जाहिर है। इस अवसर पर इनेलो पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद थे।
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