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बुधवार, 23 जून 2010

चुनाव पत्रक में आई त्रुटियों को दूर करने का आग्रह किया

डबवाली-शिरोमणी अकाली दल पंच प्रधानी जिला बठिण्डा के बलकरण सह खालसा, खालसा एक्शन कमेटी हाकूवाला के बचित्र सिंह, श्री गुरू ग्रन्थ साहिब सत्कार सभा अलीकां से शिवराज सिंह एवं औढां से जसवीर सिंह तथा अखाड़ा शहीद बाबा दीप सिंह गत्तका पार्टी स्थानीय इकाई के कुलवन्त सिंह द्वारा संयुक्त रूप से माननीय उपमण्डलाधीश डॉ. मुनीष नागपाल की मार्फत एक ज्ञापन माननीय प्रधानमन्त्री महोदय भारत सरकार को सौंपा। जिसमें पंजाब प्रदेश में होने वाले शिरोमणी प्रबन्धक कमेटी के चुनावों के लिए बनाए गए चुनाव पत्रक में आई त्रुटियों को दूर करने का आग्रह किया है। आज प्रात: दिए पत्र में
उन्होंने मांग की है कि भारतीय संविधान के अनुसार मतदान की आयु 18 वर्ष निर्धारित है तथा आयु सीमा 18 वर्ष क्यों नहीं की गई। गुरमति अनुसार प्रत्येक जाति बराबर है तथा जातिवाद का कॉलम हटाया जाए
तथा प्रत्येक पुरूष या महिला के नाम के साथ सिंह तथा कौर का लिखना आवश्यक किया जाए। व्यक्ति हर प्रकार के नशे से दूर तथा केशधारी होना चाहिए तथा प्रत्येक व्यक्ति का फोटोयुक्त पहचान पत्र होना जरूरी किया जाना चाहिए तथा उसी व्यक्ति को मतदान का अधिकार दिया जाना चाहिए जिसका पहचान पत्र बना हुआ हो। उन्होंने मांग की है कि चुनाव पत्रक में आई त्रुटियों को तुरन्त प्रभाव से दूर कर शीघ्र ही नया पत्रक जारी किया जाना चाहिए। जिसमें सिक्ख सिधान्तों को प्रमुखता तथा बल मिले। उन्होंने प्रधानमन्त्री भारत सरकार के अलावा गृह राज्यमन्त्री तथा गुरूद्वारा चुनाव कमीशन को भी पत्र लिखकर
त्रुटियों को सुधारने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो वे संषर्घ करने को
मजबूर होंगे।

मंगलवार, 22 जून 2010

''5वीं ऐतिहासिक श्री अमरनाथ यात्रा के लिए जा रहे 165 श्रद्धालुओं का जत्था 28 जून को होगा रवाना

डबवाली-अखिल भारतीय वैश्य महासम्मेलन के राज्य उपाध्यक्ष सुरेन्द्र सिंगला के सानिन्ध्य में ''5वीं ऐतिहासिक श्री अमरनाथ यात्रा के लिए जा रहे 165 श्रद्धालुओं का जत्था 28 जून को प्रात: 6 बजे स्थानीय श्री वैष्णों माता मन्दिर से भगवान शिव शंकर की पूजा-अर्चना के पश्चात् रवाना होगा।
महासम्मेलन के शाखा महामंत्री राकेश गर्ग भीटीवाला ने बताया कि यात्रा पर जाने वाले सभी श्रद्धालुओं को महासम्मेलन द्वारा पंजीकरण के पश्चात् आज यहां श्री वैष्णों माता मन्दिर में महासम्मेलन के शाखा अध्यक्ष प्रीतम बांसल द्वारा फोटोयुक्त पहचान पत्र प्रदान किए गए। इस अवसर पर उपाध्यक्ष जसवन्त राय गर्ग, गौतम गोयल सहित बड़ी संख्या में गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। उन्होंने बताया कि एक आवश्यक बैठक कल 23 जून को रात्रि 8 बजे 'अन्नपूर्णा रिसोर्टÓ में रखी गई है। राज्य उपाध्यक्ष सुरेन्द्र सिंगला ने बताया कि यात्रा पर जाने वाले सभी 165 यात्रियों से यात्रा पर आने वाली खर्च राशि का आधा हिस्सा प्राप्त किया गया है जबकि आधे हिस्से की राशि एक लाख आठ हजार रूपये उद्योगपति रामनाथ जिन्दल, कृष्ण लाल गुम्बर, राजन सिंगला, प्रीतम बांसल, मंगत राय बांसल ठेकेदार एवं शाम लाल जिन्दल गंगा द्वारा प्रदान की जा रही है। सुप्रसिद्ध ज्योतिषी रमेश सचदेवा द्वारा यात्रियों के सम्मान में श्री वैष्णों माता मन्दिर में जलपान का आयोजन किया जा रहा है। सिंगला ने बताया कि यहां से जाने वाले सभी यात्रियों का जत्था 1 जुलाई को प्रारम्भ होने वाली यात्रा में बालटाल के 14 किलोमीटर कठिन पहाड़ी रास्ते से प्राकृतिक रूप से पवित्र गुफा में प्रवेश्स करेंगे।

स्किन एवं हैल्थ से संबंधित जानकारियां देने के लिए शिविर आयोजित

डबवाली - बीते दिवस हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड नेटवर्किंग कम्पनी के तत्वाधान में स्थानीय मीना बाजार स्थित श्रीराम मार्किट में गुरनाज ब्यूटी पार्लर पर स्किन एवं हैल्थ से संबंधित जानकारियां देने के लिए एक शिविर आयोजित किया गया।
जिसकी अध्यक्षता श्रीमति विमल बजाज द्वारा की गई। उन्होंने उपस्थित लोगों को आधुनिक परिवेश में सौन्दर्य बरकरार रखने संबंधित बेहद महत्त्पूर्ण टिप्स दिए। उन्होंने कहा कि आज नामी गिरामी कम्पनियों के सौन्दर्य उत्पादों के नाम पर बाजार में नकली प्रोडक्ट्स की भरमार है, इनसे बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित ब्यूटी पार्लर से ही अपनी साजसज्जा करवानी चाहिए तथा घटिया किस्म के सौंदर्य उत्पादों जैसे क्रीम, पाउडर शैम्पू इत्यादि से परहेज करना चाहिए।
इस अवसर पर कम्पनी के हैल्थ कन्सलटैंट स्किन एवं हैल्थ विशेषज्ञ डॉ. हितेश ने भी उपस्थिति को सम्बोधित किया हैल्थ टिप्स देते हुए उन्होंने कहा कि अगर हम अपने खान पान पर ध्यान दें तथा भोजन में हरी सब्जियों का प्रयोग ज्यादा करें। अधिक से अधिक पानी पीऐं तो हम अपने स्वास्थ्य के साथ साथ सुन्दरता को लम्बी आयु तक बरकरार रख सकते हं।

आर्य समाज मण्डी डबवाली तथा आर्य विद्या मन्दिर ऐजुकेशन सोसायटी को सुचारू रूप से चलाने के लिए तदर्थ समिति का गठन

डबवाली- आचार्य बलदेव जी प्रधान आर्य प्रतिनिधि सभा हरियाणा ने आदेश संख्या 1755 दिनाँक 10 जून 2010 के माध्यम से आर्य समाज मण्डी डबवाली तथा आर्य विद्या मन्दिर ऐजुकेशन सोसायटी को सुचारू रूप से चलाने के लिए तदर्थ समिति का गठन किया है। इस तदर्थ समिति को आर्य समाज तथा आर्य विद्या मन्दिर ऐजुकेशन सोसायटी के समस्त अधिकार दिए गए हैं तथा आदेश के अनुसार मनौनित पदाधिकारियों में प्रधान के पद पर सन्तोष कुमार दुआ, उप-प्रधान औम प्रकाश छाबड़ा, मन्त्री सुदेश कुमार आर्य, कोषध्यक्ष भारत मित्र छाबड़ा, प्रचार मन्त्री के पद पर डॉ. अशोक आर्य का चयन किया गया है। इसके अतिरिक्त डॉ. एनडी वधवा, मनोज कुमार, जगरूप सिंह, जगदीश राय आदि को सदस्यों की सूची में रखा गया है। यह जानकारी देते हुए प्रचार मन्त्री डॉ. अशोक आर्य ने बताया कि उक्त तदर्थ समिति तुरन्त प्रभाव से अपना कार्यभार शीघ्र ही आरम्भ कर देगी ताकि आर्य समाज व आर्य विद्या मन्दिर ऐजुकेशन सोसायटी में चल रही अव्यवस्था, अनियमितताओं को दूर किया जा सके।

हरियाणा पत्रकार संघ चार दिवसीय भ्रमण से लौटा

डबवाली(यंगफ्लेम):हरियाणा पत्रकार संघ सिरसा का दल चार दिवसीय दौरे के बाद सिरसा लौट आया है। यह दल हरियाणा पत्रकार संघ के जिलाध्यक्ष पवनदीप सिंह जौली व महासचिव पंकज धींगड़ा की अगुवाई में कुल्लू-मनाली के भ्रमण के लिए रवाना हुआ था। इस दल में कोषाध्यक्ष रमेश बिश्रोई, सचिव महेंद्र घणघस, प्रदीप सचदेवा, रोहित लढ़ा, नकुल जसूजा, राजेश चिंडालिया, संजीव शर्मा, डबवाली से फतेह सिंह आजाद, वासुदेव मेहता, सुखपाल सिंह सांवतखेडा, राजीव वढेरा, कालांवाली से श्रवण प्रजापति, नरेश महेश्वरी, बिल्लू यादव, बड़ागुढ़ा से रेशम सिंह शामिल थे। यह दल 16 जून को सिरसा से रवाना हुआ था। भ्रमण से लौटे हरियाणा पत्रकार संघ के जिला महासचिव पंकज धींगड़ा ने बताया कि दल ने सबसे पहले मनाली के प्रसिद्ध हडिम्बा मंदिर में दर्शन किए। इसके बाद पत्रकार क्लब हाऊस पहुंचे, जहंा उन्होंने खूब आनंद उठाया। उन्होंने बताया कि अगले दिन पत्रकारों का दल रोहतांग के लिए रवाना हुआ। जहां उन्होंने बर्फबारी का जमकर आनंद उठाया।
यहां पर इन दिनों जमकर बर्फबारी हुई है और दुनियाभर से लोग यहां बर्फबारी का आनंद उठाने के लिए पहुंचे हुए थे। उन्होंने बताया कि पत्रकारों ने मनाली व माल रोड पर मनोरंजन करने तथा वहां की हवा व फिजा का आनंद उठाने के बाद लौटते हुए कुल्लू व तेहगढ़ साहिब श्री गुरुद्वारा में जाकर माथा टेका और विश्व कल्याण कीकामना की।

सोमवार, 14 जून 2010

नि:शुल्क 5 दिवसीय योग शिविर का शुभारम्भ

डबवाली- पतंजलि योग समिति व भारत स्वाभिमान के संयुक्त तत्वाधान में सीनिसर सिटीजन वैल्फेयर ऐसोसिऐशन के लिए स्थानीय सामुदायिक भवन में आज से नि:शुल्क 5 दिवसीय योग शिविर का शुभारम्भ ऐसोसिऐशन के अध्यक्ष सहजिन्द्र सिंह भाटी ने प्रात: 5 बजे किया। ओ३म् ध्वनि व गायत्री मन्त्र के साथ शुरू हुए इस शिविर में योग याधकों को सम्बोधित करते हुए योग शिक्षक वियोगी हरि ने बताया कि बुढ़ापा व जवानी में कोई अधिक अन्तर नहीं है। एक विचार मनुष्य को बूढ़ा बना देता है वो हताश निराश होकर बैठ जाता है। एक दूसरा विचार चलने की प्रेरणा देता है। वह व्यक्ति जवान कहलाता है। समय बदला अनुशासन मनुष्य को सदा जवान रख सकते हैं। एक विचार ने राज कुमार सिद्धार्थ को महात्मा बुद्ध बना दिया, एक विचार ने मोहन दास कर्मचन्द बैरिस्टर को महात्मा गांधी बना दिया। एक विचार ने इन्जीनियर लादेन को आतंकवादी बना दिया। अत: सीनियर सिटीजन को भी पैंशन लेकर घर नहीं बैठना। आज समाज को उनकी ओर अधिक आवश्यकता है। अत: अपना महत्त्व समझें। योग शिक्षक वियोगी हरि ने योग साधकों को श्वासों के नियन्त्रण की कला प्राणायाम का अभ्यास करवाया। उन क्रियाओं का क्रम समय अवधि व लाभ पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि बुढ़ापा दवाओं के सहारे हस्पताल में न कटे। अत: अपने दिन की शुरूआत योग से करें। सीनियर सिटीजन समाज को अपनी उपयोगिता दिखाऐं व लम्बी आयु के अनुभवों से समाज का मार्ग दर्शन करें। शिविर का समापन हास्यासन से हुआ। पुनश्च: शिविर में ऐसोसिऐशन के सचिव शशिकान्त, चिमन लाल मिढा, प्राचार्य दर्शन सिंह व अनेक सदस्य उपस्थित रहे तथा उन्होंने समिति के अध्यक्ष अशोक सोनी का धन्यवाद किया।

आर्ट ऑफ लिविंग का 6 दिवसीय शिविर सम्पन्न

डबवाली- स्थानीय बाल मन्दिर सीनियर सैकेंडरी स्कूल के प्रांगण में आर्ट ऑफ लिविंग के तत्वाधान में चल रहा 6 दिवसीय शिविर आज सम्पन्न हुआ। जिसमें मैडम सविता शर्मा ने बताया कि हमें हर व्यक्ति हर परिस्थिति जैसे है उन्हें वैसे ही स्वीकार करना चाहिए। जब हम उसे नहीं स्वीकार करते तो हम दु:खी हो जाते हैं। जैसे हम कार में जा रहे हैं जल्दी पहुंचना है और जाते - जाते कार पंक्चर हो जाती है तो हम परेशान हो जाते हैं। अब जो हो गया उसे स्वीकार करें तो हम कुछ ओर सोच सकते हैं। नहीं तो हमें गुस्सा आता रहेगा। इसी तरह उन्होंने बताया कि हमें हर किसी में जो भी गुण है। उसकी तारीफ करनी चाहिए। जबकि हम उल्टा करते हैं। हम उसमें जो कमी है उसके बारे में बात करते हैं। जब हम किसी के गुणों की तारीफ करते हैं तो वो गुण हमारे में आने लगते हैं। जबकि हम बुराई करते हैं तो हम भारी होने लगते हैं। जब हम किसी की तारीफ करते हैं तो वो तारीफ उस भगवान की होती है। जिसने उसे बनाया है। जैसे हम किसी पेंटिंग की तारीफ करते हैं तो वो तारीफ पेंटिंग की नहीं होती बल्कि पेंटर की होती है। जिसने उसे बनाया है। हमें किसी की तारीफ दिल से करनी चाहिए और बुराई दिमाग से करनी चाहिए। क्योंकि हम जब भी दिल से करते हैं तो दिल खोलकर करते हैं। क्योंकि जब बुराई दिमाग से करेंगे तो सोचकर करेंगे कि करें या न करें। लेकिन हम उल्टा करते हैं तारीफ दिमाग से सोच - सोच कर करते हैं बुराई दिल खोलकर करते हैं। डॉ. प्रेम छाबड़ा ने नरेश शर्मा, हरदेव गोरखी, इन्द्रजीत, युधिष्टर, योगेश, नरेश गुप्ता, भूपिन्द्र सूर्या, प्रवीण, निरंजन, रविन्द्र मोंगा, कौर सिंह, मनीष बांसल, संजय बांसल, संजीव कालड़ा, आशा रानी, सीमा वर्मा, ममता, सरिता, सुरिन्द्र निर्दोष, किरण शर्मा सहित आए हुए सभी का धन्यवाद किया। सभी लोगों ने मिलकर स्कूल में सफाई कर्मचारी भगवान दास की बहन की शादी के लिए 5500 रूपयों व कुछ सामान का योगदान दिया।
डॉ. प्रेम छाबड़ा ने बाल मन्दिर स्कूल की प्रबन्धक कमेटी व खास तौर पर अरूण जिन्दल का धन्यवाद दिया। जिनके सहयोग से ये कैम्प कामयाब हुआ। क्योंकि उन्होंने स्कूल में कैम्प लगाने का स्थान दिया।
उन्होंने ईस्टवुड स्कूल के संजम, मैडम पुष्पिन्द्र व बीना राय का भी धन्यवाद किया। जिनकी बदौलत आर्ट ऑफ लिविंग की शुरूआत हुई। स्कूल में चपड़ासी के पद पर कार्यरत चौरसिया का भी आभार जताया।

दिन दिहाड़े मोबाईल छीन कर फरार

डबवाली- स्थानीय कॉलोनी रोड़ स्थित सिटी हाई स्कूल वाली गली से अज्ञात मोटरसाईकिल सवार युवक साईकिल सवार से दिन दिहाड़े मोबाईल छीन कर फरार हो गए। प्राप्त जानकारी अनुसार कॉलोनी रोड़ पर स्थित बैण्ड बॉक्स ड्राईक्लीनर्ज पर कपड़े प्रैस करने वाले युवक सुनील कुमार पुत्र सतपाल निवासी वार्ड नम्बर 8 ने बताया कि वह दोपहर 1 बजे के करीब सिटी हाई स्कूल वाली गली में प्रैस किए कपड़े देकर अपनी साईकिल पर आ रहा था कि पीछे से अचानक मोटरसाईकिल पर सवार 3 युवकों ने उसे धक्का देकर उसे नीचे गिरा दिया और उसका मोबाईल मैजिक वन छीन कर फरार हो गए। जिसकी कीमत लगभग 1500 रूपये के करीब है। इस घटना की जानकारी थाना शहर डबवाली में दे दी गई है।
बैण्ड बॉक्स ड्राईक्लीनर्ज के मालिक त्रिलोक मैहता ने बताया कि कॉलोनी रोड़ पर शरारती तत्व युवकों का जमावड़ा लगा रहता है। जिससे आने - जाने वाली महिलाओं को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। कॉलोनी रोड़ पर स्थित दुकानदारों ने पुलिस प्रशासन से अपील की है कि इन शरारती तत्व युवकों पर नकेल डालने का कार्य करे ताकि ऐसी घटनाओं पर अंकुश लग सके।

संदिग्ध परिस्थितियों में नशा मुक्ति केंद्र पर व्यक्ति की मौत

डबवाली: बठिडा रोड स्थित नई किरण नशा मुक्ति केंद्र में उपचाराधीन एक व्यक्ति की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मृतक की पहचान प्रीतम लाल पुत्र मक्खन सिंह निवासी चक निधान वाला जिला फिरोजपुर के रूप में की गई है। प्रीतम ¨सह फिरोजपुर थाने में वायरलेस आपरेटर के पद पर तैनात था। प्रीतम ¨सह को कल ही नई दिशा नशा मुक्ति केंद्र में नशा छुड़ाने के लिए भर्ती करवाया था। प्रीतम सिंह को जब सिविल अस्पताल में लाया गया तब उसकी मौत हो चुकी थी। मृतक के भाई तिलक राज ने पुलिस को दिये बयान में बताया कि उसका भाई शराब के नशे का आदि था। कल ही वह छुट्टी पर घर वापस आया था और उसके शराब के नशे को छुड़वाने के लिए उन्होंने उसे डबवाली के नई किरण नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती करवाया था। उन्होंने बताया कि आज दोपहर बाद केंद्र से उनके पास फोन आया कि प्रीतम सिंह की हालत गंभीर है। वे तुरंत ही वहा से रवाना हो कर डबवाली के सिविल अस्पताल में पहुंचे लेकिन उनके पहुचने से पहले ही उसकी मौत हो चुकी थी। पुलिस ने मृतक के भाई बयान पर सीआरपीसी की धारा 174 के तहत कार्रवाई करते हुए शव का पोस्टमार्टम करवाकर उसके परिजनों को सौंप दिया। सिविल अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डा. टीआर मित्तल ने बताया कि जब प्रीतम को सिविल अस्पताल में लाया तब उसकी मौत हो चुकी थी। उन्होंने बताया कि बिना जाच के मौत के कारणों का तो पता नहीं लग सकता है। लेकिन जो लक्षण केंद्र संचालकों ने उन्हे बताये हैं उससे प्रथम दृष्टा में लगता है कि प्रीतम सिंह को हृदयाघात हुआ हो। हृदयाघात होने के कई कारण हो सकते हैं। जिसमें एकदम से नशा छुड़ाना भी एक कारण हो सकता है। गौरतलब है कि एक अरसा पूर्व अग्निकाड स्थल के पास बनाये गये नई दिशा नशा मुक्ति केंद्र पर उपचाराधीन रोगी के साथ मारपीट करने के कारण रोगी मौत हो गई थी। जिसके कारण विभाग ने अवैध तौर पर चल रहे नशा मुक्ति केंद्रों पर छापामारी का अभियान चलाया था। इसके उपरात आज फिर नशा मुक्ति केंद्र पर हुई मौत से कई सवाल खड़े हो गये है। कि बिना चिकित्सकों की देखरेख चल रहे ये केंद्र कहीं जाने अनजाने में यहा पर भर्ती लोगों की मौत का कारण तो नहीं बन रहे?

- रिपोर्ट के मुताबिक होगी कार्यवाही

मामले की जाच कर रहे सहायक उपनिरीक्षक सूबे सिंह ने बताया कि पोस्ट मार्टम रिपोर्ट में मृत्यु का कारण स्पष्ट होने के बाद आगामी कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने बताया मृतक के परिजनों ने अपने बयान में रिपोर्ट आने के बाद उचित कानूनन कार्यवाही करने के लिए कहा है। - क्या कहते हैं केंद्र संचालक नई किरण नशा मुक्ति केंद्र के संचालक सुनील गुलाटी ने बताया कि दोपहर करीब साढे़ बारह बजे प्रीतम सिंह की अचानक तबीयत खराब हो गई और वह जोर-जोर से सास लेने लगा उसे तुरत सिविल अस्पताल में ले जाया गया लेकिन रास्ते में उसने दम तोड़ दिया। उन्होंने बताया कि इस समय केंद्र में 33 व्यक्तियों का उपचार चल रहा है और काउसलिंग द्वारा नशा छोड़ने के लिए प्रेरित किया जाता है।

कैसे तैयार हो खिलाड़ी? प्राध्यापक पड़ रहे खेलों पर भारी

आनंद त्रिपाठी,सिरसा-हरियाणा में जहा एक ओर प्रदेश सरकार खेलों को लेकर अपनी प्रतिबद्धता जाहिर करने में जुटी है, वहीं दूसरी ओर अब तक राज्य में शारीरिक शिक्षा प्राध्यापकों (लेक्चरार) के पदो को ही सृजित नहीं किया गया है। प्रदेश के लगभग 2 हजार से अधिक वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में प्राध्यापकों के स्थान पर डीपीई से काम चलाया जा रहा है। शिक्षा विभाग की माने तो समूचे प्रदेश भर में लगभग 16 डाइटों पर ही यह पद सृजित कर नियुक्ति की गई है। एक तरफ तो सरकार स्पोटर्स टैलेंट हंट के नाम पर ग्रामीण अंचल के खिलाड़ियों को विभिन्न प्रकार की सुविधाएं देने की बात कर रही है वहीं विद्यालयों में शारीरिक शिक्षा के प्राध्यपक पदों का सृजन न किया जाना सरकार की खेल के प्रति प्रतिबद्धता के पहलू पर सवालिया चिंह लगता है। बाहर के खिलाड़ियों को अपने प्रदेश से खेलने पर सारी सुविधाएं देने का दंभ भरने वाली सरकार का खेल के प्रतिबद्धता को लेकर यह स्याह पहलू है। स्पोटर्स टैलेंट हट के माध्यम से समूचे प्रदेश के ग्रामीण अंचल के प्रतिभावान खिलाड़ियों को खोजने का काम किया जा रहा है। वहीं शारीरिक शिक्षा के प्राध्यापक न होने से ग्रामीण अंचल के विद्यालयों में पढ़ रहे प्रतिभावान खिलाड़ियों को निखारने का काम सही से नहीं हो पा रहा है। कहा जाता है कि कोई भी इमारत नीवं की मजबूती पर स्थिर होती है लेकिन यहा तो नीवं निर्माणकर्ता ही नहीं है तो इमारत की बुलंदगी की बात करना बेमानी सी लगती है। यही बात प्रदेश के वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों के खिलाड़ियो पर लागू हो रही है। सरकार प्रवक्ता पदों को सृजित करने की बजाय कक्षा दस तक की कक्षाओं को शिक्षित करने की योग्यता रखने वाले डीपीई द्वारा समूचे प्रदेश में काम चला रही है। इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी आशा किरण ग्रोवर से पूछा गया तो उन्होंने स्वीकार करते हुए बताया कि डीपीई ही हर जगह कक्षाएं ले रही है। फिलहाल अभी तक किसी पद का सृजन नहीं किया गया है।



बोर्ड ने भी नहीं दिया ध्यान ,जारी रहा गोरखधधा

आनंद त्रिपाठी,सिरसा-सेंट्रल सीनियर सेकेंण्डरी स्कूल द्वारा किए गए फर्जीवाड़ें के संबंध में किसे जिम्मेदार ठहराया जाए? निदेशालय को,बोर्ड को,जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय को अथवा स्कूल को,जब सब के सब एक के बाद एक गुत्थगुत्थ नजर आ रहे है। विभाग के अधिकारियों अथवा शिक्षा विभाग की नियामक संस्था द्वारा वर्षो से चल रहे इस फर्जीवाड़े को नजरअंदाज किया जाना काफी सवाल छोड़ता है। इस संबंध में सबसे बड़ा सवाल निदेशालय पर ही खड़ा हो जाता है कि बार-बार जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा स्मरण दिलाए जाने के बावजूद निदेशालय ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसी क्रम में शिक्षा निदेशालय के बाद बोर्ड भी कटघरे में खड़ा नजर आ रहा है। जिसने विद्यालय द्वारा भेजे गए मान्यता पत्र को अपने पत्र से मिलाए बगैर ही परीक्षा फर्म को स्वीकार कर विगत 9 वर्षों में हजारों बच्चों को परीक्षा दिला दी। बोर्ड द्वारा इस तरह की ढिलाइ बोर्ड की कार्यशैली पर काफी बड़ा सवाल खड़ा करती है। इतना ही नहीं हरियाणा माध्यमिक शिक्षा बोर्ड,भिवानी की भूमिका भी संदेह के घेरे है। शिक्षा विभाग के नियमों के अनुसार जब किसी भी विद्यालय को मान्यता दी जाती है तब उसकी चार प्रतिलिपि बनाई जाती है। जिसमें से एक निदेशालय में रखी जाती है बाकी एक-एक विद्यालय,जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय तथा हरियाणा शिक्षा बोर्ड भिवानी को भेज दी जाती है। निश्चय ही किसी दशा में बदलाव किए जाने पर चारों में बदलाव होना चाहिए लेकिन इस मामले में विद्यालय और जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय की प्रतिलिपि में बदलाव है जबकि निदेशालय और बोर्ड की प्रतिलिपि उक्त से इतर है। बोर्ड की भूमिका की बात करें,तो यह है कि मान्यता प्राप्त करने के बाद जब विद्यालय द्वारा परीक्षा फार्मो को काउटर साईन कराकर बोर्ड के पास भेजा जाता है। तब विद्यालय द्वारा प्राप्त किया गया पत्र भी फार्मो के संलगन् किया जाता है,जिसकी पुष्टि जिला शिक्षा विभाग भी करता है। बोर्ड को निदेशालय द्वारा भेजे गए मान्यता पत्र से मिलान करने तथा जाच करने का विषय होता है लेकिन इस विद्यालय के संबंध में नीतियों को सर्वथा अभाव पाया गया और बगैर मिलान किए ही परीक्षा फार्म स्वीकार कर बच्चों को परीक्षा में बैठने की अनुमति दे दी। उसके बाद चला वर्षों तक का गोरखधधा सभी के सामने में है। स्कूल द्वारा 9 साल तक किए गए इस फर्जीवाड़े में सभी तार एक-दुसरे से जुड़े नजर आ रहे है। निदेशालय जहा मामले में चुप्पी साधे बैठा रहा वहीं जिला शिक्षा कार्यालय उपलब्ध पत्र के आधार पर काउटर साईन करने की बात कहता रहा। बोर्ड ने इस संबंध में कोई संज्ञान ही नहीं लिया और न ही कभी जाचा की जो पत्र उसके पास उपलब्ध है वह विद्यालय द्वारा भेजे गए पत्र से मेल भी खाता है अथवा नहीं। हरियाणा माध्यमिक शिक्षा बोर्ड,भिवानी के नवनियुक्त शेखर विद्यार्थी का कहना है कि इस संबंध में अभी तक फिलहाल कोई जानकारी नहीं है लेकिन अगर ऐसा मामला है तो इसे संज्ञान में लेकर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में जिम्मेदार किसी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। बिना काउटर साईन के फार्म हुए जमा उप जिला शिक्षा अधिकारी दर्शना ने बताया कि उक्त विद्यालय को 2001 से अस्थाई मान्यता मिली है और विगत के वर्षो में कार्यालय द्वारा काउटर साईन भी किया जाता रहा है लेकिन न्यायालय द्वारा दिए गए फैसले को ध्यान में रखते हुए इस बार विद्यालय के किसी भी फार्म पर काउटर साईन नहीं किया गया है। उधर भिवानी बोर्ड के सूत्र की माने तो उक्त विद्यालय ने बिना काउंटर साईन के ही फार्म जमा करा दिए है अब यह देखना दिलचस्प होगा कि बिना काउटर साईन को बोर्ड भेजे गए सैकड़ों विद्यार्थियों के फार्म का बोर्ड क्या करता है। हालाकि बोर्ड के एक लिपिक की माने तो ऐसे मामले में बोर्ड द्वारा फार्म स्वीकार नहीं किए जाने चाहिए।



डाक परिचय पत्र बनाएगा सेवाओं को सुगम

सिरसा-डाक सेवाओं का लाभ लेने वाले उपभोक्ताओं को सेवाओं का सुगम प्रयोग करने के लिए विभाग द्वारा डाक पहचान पत्र जारी किया जाएगा। इस कार्ड को बनवाने के बाद उपभोक्ता को डाक से जुड़ी सेवाओं के लिए अन्य पहचान पत्र दिखाने की जरूरत नहीं होगी। 15 जून से प्रदेश के 16 बड़े डाकघरों में इस सेवा का शुभारभ हो जाएगा। डाक विभाग द्वारा दी जाने वाली सेवाएं जैसे रजिस्ट्री लेने, स्पीड पोस्ट लेने, मनीआर्डर लेने सहित अनेक सेवाओं के लिए प्राप्तकर्ता को विभिन्न प्रकार के अपने परिचय दिखाकर ये सेवाएं दी जाती थी। अब विभाग द्वारा तीन वर्ष की अवधि के लिए उपभोक्ता को डाक परिचय पत्र जारी किया जाएगा जिसकी फीस 240 रुपये विभाग द्वारा वसूल की जाएगी। तीन वर्ष बाद कार्ड को नवीनीकरण करवाने के लिए उपभोक्ता को 140 रुपये की फीस अदा करनी होगी। 15 जून से प्रदेश के अंबाला सिटी, अंबाला मुख्य डाकघर, यमुनानगर, भिवानी, फरीदाबाद, गुड़गाव, नारनौल, हिसार, सिरसा, करनाल, पानीपत, जींद, रोहतक, कुरुक्षेत्र, बहादुरगढ़ व सोनीपत में इस योजना का शुभारभ किया जाएगा। डाक विभाग के मंडल अधीक्षक जेपी सैनी ने बताया कि इस कार्ड को बनवाने के लिए उपभोक्ता को दो फोटो व अपने परिचय का कोई प्रमाण देना होगा। उन्होंने बताया कि डाक परिचय का फार्म भरने के बाद विभाग द्वारा उपभोक्ता के मूल निवास व अन्य जानकारियों की जाच की जाएगी और उसके बाद उसे कार्ड जारी कर दिया जाएगा। सिरसा के सहायक अधीक्षक अनिल रोज ने बताया कि 15 जून को डाक परिचय पत्र बनाने का कार्य शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि परिचय पत्र बनवाने के लिए मुख्य डाकघर में फार्म उपलब्ध है। उन्होंने यह भी बताया कि जिला के किसी भी उपभोक्ता को डाक परिचय पत्र बनवाने के लिए मुख्य डाकघर में ही आवेदन करना होगा।

बसेरा बनता गया, पेड़ उजड़ते रहे

ऐलनाबाद-पेड़ों को नष्ट कर पर्यावरण के दुश्मन बने शहरी और ग्रामीण लोगों के साथ-साथ सरकारी अमला भी इसके लिए कम दोषी नहीं है। दो दशक पूर्व ग्रामीण क्षेत्रों के कुओं, तालाबों, जोहड़ों व गावों के चारों तरफ बनी घिरनी रास्ते पर पेड़ों के झुंड के झुंड बने दिखाई देते थे। इसी तरह शहर से निकलते ही शुरू हो जाता था, हरियाली का आलम। लोगों ने इन तालाबों, जोहड़ों पर कब्जे कर अपना बसेरा स्थापित कर लिया तो वहीं शहरी क्षेत्र के बढ़ने से भवनों, पेट्रोल पंप, कारखानों आदि का निर्माण होने लगा। इस तरह जैसे-जैसे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों से निकलकर आगे बढ़ने लगे तो सबसे पहले कुल्हाड़ी पेड़ों पर चली। ये कुल्हाड़ी ऐसी चलनी शुरू हुई कि अब तक चली आ रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में पुरातन संस्कृति की धरोहर माने जाने वाले जोहड़, तालाब, कुएं के इर्द-गिर्द पेड़ों के अंबार लगे होते थे, जिन पर पक्षियों को सुंदर आवाज के मधुर गायन सभी को मोहित करते थे। प्रभावशाली लोगों की शह पर इन कब्जे होने शुरू हुए। ज्यों-ज्यों लोगों ने इन पर अपना हक जताना शुरू किया तो सबसे पहले रास्ते में आने वाले पेड़ों को काटा गया जो कि प्रकृति का संतुलन कायम रखने में सहायक है। ऐलनाबाद खंड में भी ऐसे अनेक गाव है, जहा पर बड़े-बड़े पेड़ों पर चहचहाहट करते हुए सुंदर पक्षी नजर आते थे। उन्हीं पेड़ों को काटकर लोगों ने अपने बसेरे बना लिए। आबादी बढ़ने के साथ-साथ लोगों ने अपना व्यावसायिक कारोबार शुरू करने के लिए सैकड़ों पेड़ों की बलि चढ़ाकर उस जगह को खाली करवाया। ऐलनाबाद शहर की तलवाड़ा रोड़, डबवाली रोड़, सिरसा रोड़, ममेरा रोड आदि पर भी दो दशक पहले बड़े-बड़े विशाल वृक्ष सड़कों-खेतों पर दिखाई देते थे, लेकिन अब पेड़ों की जगह कालोनिया बनी नजर आती है। कमोबेश गावों में भी इसी तरह के मिलते-जुलते हालात है। बड़े-बड़े पीपल, बरगद के पेड़ों को पक्षी अपना बसेरा मानते थे। उन्हीं पेड़ों को काटकर लोगों ने उन्हीं जगहों पर अपना बसेरा बना लिया है। जोहड़ पायतन की जगह पर कब्जे हो गए है। पुराने कुएं, जिन पर कभी ग्रामीण महिलाओं की भीड़ लगी रहती थी, उन्हीं कुओं की मिटती संस्कृति पर आज ग्रामीणों का कोई ध्यान नहीं रह गया है।

शनिवार, 12 जून 2010

पहले परमात्मा ने जवीन दिया और कुछ ही घन्टों बाद उसे अपने पास बुला लिया।

डबवाली-परमात्मा जब चाहे जिसे जीवन दे दे और बक किसे अपने पास बुला ले। यह कोई नहीं जानता। पहले परमात्मा ने जवीन दिया और कुछ ही घन्टों बाद उसे अपने पास बुला लिया। ऐसी ही एक घटना वार्ड नम्बर 12 निवासी 40 वर्षीय विनोद कुमार पुत्र रमेश कुमार सब्जी विक्रेता के साथ घटी, हुआ यूं कि बीती रात 10 बजे के करीब सब्जी की दुकान मंगल कर अपने घर आ रहा था कि रेलवे स्टेशन पर मालगाड़ी खड़ी होने से वह रेलगाड़ी के नीचे से जाने लगा तो अचानक रेलगाड़ी चल पड़ी और वह लाईन के बीचो बीच लेट गया और उसके ऊपर से रेलगाड़ी के कई डिब्बे निकल गए और उसे खरोंच तक नहीं आई और उसने रेलवे लाईन से उठ कर परमात्मा को हाथ जोड़ कर धन्यवाद किया और कहा कि परमात्मा ने उसे नया जीवन दिया है और उसने रास्ते में एक दुकान से प्रसाद लिया और मन्दिर में भगवान को भोग लगाया फिर घर पहुंच कर इस घटना की जानकारी अपनी पत्नी व पिता को देते हुए प्रसाद दिया लेकिन भगवान को कुछ और ही मन्जूर था। जब रोज की भान्ति आज प्रात: 4 बजे वह सब्जी मण्डी में सब्जी खरीदने हेतु गया तो 5 बजे के करीब उसे अचानक दिल का दोरा पड़ा और वह वहीं गिर पड़ा। वहां मौजूद उसके साडू रोशन लाल मोंगा ने उसे तुरन्त स्थानीय हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. अग्रवाल के पास उपचार हेतु लाया गया तब तक वह अपने परिवार को रोता बिलखता छोड़ इस दुनिया से हमेशा के लिए विदा ले चुका था। आज दोपहर विनोद कुमार के पाथव शरीर को उसके बेटे आकाश ने मुखाग्रि दी। शव यात्रा में सब्जी आढ़तिया ऐसोसिऐशन के सदस्य, सब्जी के थोक व खुदरा विक्रेता, सामाजिक व धामक संस्थाओं के प्रतिनिधि, इनेलो नेता व कार्यकर्ताओं सहित नगर के अन्य गणमान्य व्यक्ति शामिल थे।

शुक्रवार, 11 जून 2010

गौवंश का वध हेतु ले जाया जाना अभी भी जारी

डबवाली-डबवाली के साथ लगते किलियांवाली मण्डी क्षेत्र से गौवंश का वध हेतु ले जाया जाना अभी भी जारी है। हालांकि गौ तस्करों ने अब अपनी रणनीति में बदलाव कर लिया है।
गौरतलब है कि कुछ समय पहले तो भारी तादाद में गौवंश ट्रकों एवं कैंटरों में ठूंस-ठूंस भर कर उत्तर प्रदेश खुले तौर पर वधशालाओं में ले जाया जाता रहा है। डबवाली में जब गौ हत्या काण्ड का खुलासा हुआ तब जहां क्षेत्र के सामाजिक, धाॢमक संगठनों के पदाधिकारियों की आँख खुली वहीं युवाओं ने भी अपने स्तर पर संगठन बनाकर इस गौरखधन्धे पर नकेल कसने का अच्छा खासा प्रयास किया। जिसके चलते ये युवक सप्ताह में दो-तीन दिन जब मेले दौरान पशुओं का आवागमन ज्यादा होता है तब मुख्य मार्गों पर नाकाबन्दी करके इस कृत्य पर लगाम कसने का प्रयास किया। इसके अतिरिक्त फतेहाबाद व हिसार जिलों में भी कुछ स्थानों पर युवाओं के संगठनों ने गौवंश ले जाने वालों की जाँच पड़ताल अपने स्तर पर शुरू कर दी व शक्कशुबहा वाले गौवंश को ट्रकों से उतारना भी शुरू कर दिया था।
लेकिन अब अधिकांश स्थानों पर युवाओं द्वारा स्थापित की गई समितियां इस कार्य से लगभग पीछे हट चुकी हैं तथा गौवंश तस्करों का धन्धा अब बेरोकटोक जारी है। मजेदार पहलु यह है कि गौ तस्कर डबवाली से फतेहाबाद के आस-पास की बिल्टी ही कैंटरों एवं ट्रकों की बनाते हैं तथा यहां से कैंटर में तीन व ट्रक में छ: गाय ले जाते हैं। वहां से अन्य वाहनों में दस-दस, बारह-बारह गौ वंश को ठूंस कर वधशालाओं तक ले जाया जाता है। दुधारू गायों के बछड़ा-बछड़ी की टांगे बांध कर ट्रक के टूल में फेंक दिए जाते हैं। इस प्रकार समाज सेवा के नाम पर फतेहाबाद के आस-पास के युवा अब अपनी रूचि छोड़ चुके हैं। जिसके चलते गौवंश तस्करों को मनमाने ढंग से फतेहाबाद के आस-पास के इलाकों में वाहनों में पलटी करके गौवंश को उत्तर प्रदेश ले जाना सुगम हो गया है।

गुरुवार, 10 जून 2010

डबवाली- स्थानीय सिरसा रोड़ स्थित हरियाणा बिजली बोर्ड कार्यालय के समक्ष हरियाणा ज्वाईंट एक्शन कमेटी के आह्वान पर आज बिजली बोर्ड कर्मचारियों ने गेट मीटिंग कर अपनी मांगों को लेकर हरियाणा सरकार के खिलॉफ जमकर नारेबाजी कर रोष प्रदर्शन किया। ज्वाईंट एक्शन कमेटी के स्थानीय सचिव औम प्रकाश शर्मा, केवल कृष्ण, चन्दभान नेहरा, राम कुमार, जगदीश राए, जोगिन्द्र सैनी, विजय पाण्डे ने बताया कि गत दिवस चण्डीगढ़ में बोर्ड ऑफ डायरैक्टर की हुई बैठक में उत्तर हरियाणा की तर्ज पर दक्षिण हरियाणा में भी मीटर रीडर, बिल डिस्ट्रीब्यूटर व चपड़ासी की पोस्ट को खत्म किए जाने का जो निर्णय लिया गया है। वह सरासर गलत है। उन्होंने बताया कि अगर हरियाणा सरकार ने ऐसा किया तो पूरे प्रदेश के बिजली कर्मचारी आन्दोलन करने पर मजबूर हो जाऐंगे।

चोरों के होंसले बुलन्द,खाकी का भी भय नहीं रहा।

डबवाली- आज कल चोरों के होंसले इतने बुलन्द हैं कि उन्हें खाकी का भी भय नहीं रहा। बीती देर रात्रि चोरों ने स्थानीय तहसील कॉॅम्लैक्स परिसर एवं डीएसपी कार्यालय के निकट रखे एक टी स्टाल के खोखे को निशाना बनाया तथा उसमें रखा कुङ्क्षकग गैस सिलेंडर चुरा लिया। उक्त चोरी की घटना का आज प्रात: 7 बजे पता चला जब वह अपनी टी स्टाल पर पहुंचा तो उसने देखा कि खोखे के बाहर लगे ताले टूटे हुए थे तथा उसमें पड़ा सारा सामान इधर - उधर बिखरा पड़ा था। टी स्टाल के संचालक सोनू ने बताया कि वह बीती देर सायं अपना कार्य निपटा कर रोज की भान्ति स्टाल मंगल कर घर गया था परन्तु जब वह आज प्रात: आया तो उसकी स्टाल पर लगे ताले टूटे हुए थे, देखने पर एक कुङ्क्षकग गैस सिलेंडर गायब पाया। उक्त चोरी की सूचना थाना शहर डबवाली में दे दी गई है तथा पुलिस चोरों की तालाश कर रही है।

काश- हम भी पुरुष होते

लंदन।क्या महिलाओं को कभी इस बात का अफसोस होता है कि ईश्वर ने उन्हें पुरुष क्यों नहीं बनाया। ब्रिटेन में किए गए एक सर्वे के मुताबिक मासिक धर्म के तनाव से तंग आकर महिलाएं कई बार खुद के पुरुष न होने पर अफसोस जाहिर करती हैं। अखबार ‘डेली एक्सप्रेस के मुताबिक 15 प्रतिशत महिलाओं ने कबूल किया कि मासिक धर्म के तनाव के कारण जब उन्हें मानसिक व्याधियों से गुजरना पड़ता है, तब उन्हें पुरुष न होने का अफसोस होता है। 9 प्रतिशत महिलाएं मानती हैं कि अंदरूनी और बाहरी शारीरिक संरचना के मामले में पुरुष ज्यादा सहज महसूस करते हैं। 2048 महिलाओं पर कराए गए सर्वे से पता चला कि 12 प्रतिशत महिलाएं किसी भी हालत में गर्भधारण के लिए तैयार नहीं होती हैं। 87 फीसदी महिलाओं ने स्वीकार किया कि वे जवानी की ओर कदम रखते वक्त अपने शरीर में हो रहे बदलावों को लेकर सहज नहीं होती हैं। कुल मिलाकर, महिलाओं को अपने स्त्रीत्व से प्यार है और इनमें से 36फीसदी ने इसके लिए यह दलील दी है कि उन्हें अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करने की आजादी होती है। http://youngflame.com/hindi-news/काश-हम-भी-पुरुष-होते/

Love relationships

What’s your relationship secret?
From keeping secret diaries to meeting up with ex-flames, couples keep a lot of secrets from each other. How much is too much, asks Kalpana Sharma. Wat’s your secret?
I can’t sleep… I feel so lonali... Today, I kept looking at the cell phone, waiting for his sms or call… It’s 12:30 now, he must be busy with work or is he busy with her? Going to bed now, with thieling of emptiness. Goodnight!” This is a page out of Anita Nath’s secret diary. Anita (name changed) shares, “I don’t miss a day of writing my diary. I do it when my husband is sleeping or away. I keep it hidden in my bookshelf, so he has no clue. Sometimes, I’ve vented out my feelings after our rows and the next day, when I read it, I freak out imagining his reaction.” She adds, “It gives me my own personal space and a secret partner.”
Psychologists say that even the healthiest couples hide things from each other. Adds psychologist Seema Hingorrany, “We are social beings, but we all have this inner persona that we don’t want anyone to know. Such secrets give you space to grow and carve a personal identity. It is an extremely common phenomenon and termed the ‘Me & I’ syndrome. It provides a sense of contentment.” This sense of bliss is also attained through keeping up with clandestine hobbies. PR manager Aarti Jadhav lets out her secret, “I love photography and click random pictures. My sweetheart isn’t aware of it. I do this in my own time and love it. This is my way of unwinding.”
It’s her special “me” time that she doesn’t have any plans to share, not even with her soulmate. Some follow different hobbies, keep away email passwords and cell phones, some secretly watch porn, catch up with friends privately, and others do it for their families. Says Preeti Sharma (name changed), “I have been sending money to my parents without my husband’s knowledge. I don’t want him to think badly of my family, who need the money. I am not cheating my husband, this is a personal matter.”
Sometimes, this need to create a personal space comes from having a controlling partner. It can also be credited to one’s upbringing, where people who have been punished for owning up resort to such self-defence tactics. However, even small deceptions can rock a relationship and at times, there is a fine line between what’s harmless and what’s not. We have cases where people catch up with their ex-flames once in a while just to unwind. Of course, with their better halves having no idea of the rendezvous! Confesses Rishi Singh (name changed), “I am still in touch with my ex, but that doesn’t change my equation with my wife. We have met on rare occasions, but I know it won’t go down well with my wife, so I simply don’t tell her.”
There’s a thin line dividing privacy and secrecy. Even if a secret is minor, honesty is always at a premium in a relationship, despite knowing that there may be an adverse reaction waiting. Suggests marriage counsellor Kamal Khurana, “As long as you are indulging in something harmless, which doesn’t change the importance you give your relationship, it is safe. ‘Privacy’ is good for a relationship but ‘secrecy’ can create havoc. For example, watching porn is ‘privacy’ as many do it for enjoyment. But having a net affair is ‘secrecy’, which can threaten the relationship. The rule is that if you want your relationship grounded in trust, walking on the secret zone should be avoided.” Psychologist Varsha remembers a case where a married woman had a few shots of vodka for the first time on New Year’s Eve in her husband’s absence and decided never to tell him. She explains, “She enjoyed the high but feared being judged. So, she kept it from him. In many cases, people text their exes, for the thrill.”
Coming clean with your past is a worthy achievement but people should tread this path carefully. Shares Roopa (name changed), “On the day of my marriage, I told my husband about my past, even showed him letters and gifts. He was receptive and I felt on top of the world. However, soon we started having tiffs and often he would bring up my ex. It made me feel foolish.” Many experts are against total honesty. Says Seema, “I advise couples not to divulge their past. In an insecure moment, the thought of you with another man or woman may create serious conflicts. I have known many couples who could never trust their partner again after knowing their colourful past.” Writer Shilpi Kaur believes that it may be wise to keep some stuff away from a partner’s watchful gaze. She says, “When a friend couldn’t return money I had loaned him on time, I ended up telling my boyfriend and regretted it. I don’t want them judged or be told how I should handle them.” When the partner comes face to face with revelations, it’s natural to feel hurt. Psychologist Rajendra Barve suggests, “If it’s harmless, give your partner space and it will strengthen your relationship.” Author Tuhin Sinha, who recently got married, echoes the thought. “Now that I am married, I try to involve my wife in everything I do, as far as possible.” He does miss a few things, “Earlier, I could just pack my bags and go away on vacation without anyone questioning my whereabouts. I can’t do that anymore.” Khurana concludes, “Whenever you plan to keep something secret, ask yourself if you should. Listen to what your heart says.” Sure, honesty is the best policy, but at the end of the day, it’s fine to keep some tidbits of your life to yourself as long as they don’t harm your marital ties.

KALPANA SHARMA

पानी बना ज़हर

इकबाल सिंह शांत
क्या पानी के बिना जीवन संभव हैं इसका उत्तर नहीं होगा। लेकिन अगर धरती का जल ही जहरीला हो जाए फिर जीवन कैसे बचेगा। कम से कम पांच दरिया वाली धरती पंजाब में तो भू-जल की स्थिति बेहद ङ्क्षचताजनक है। सूबे के तीन जिलों मुक्तसर, बठिण्डा ओर लुधियाना में नार्ईट्रेट की मात्रा बेइंतहा बढ़ चुकी है। इस जहरीले पानी के इस्तेमाल से लोग कैंसर और अन्य घातक बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। यह सनसनीखेज खुलासा किसी सरकारी ऐजन्सी से नहीं, बल्कि बेंगलूर के एक गैर सरकारी संगठन ग्रीन पीस इण्डिया ने किया है। पंजाब के तीनों जिलों के विभिन्न गांवों से पानी के नमूनों की जांच के आधार पर ग्रीन पीस द्वारा तैयार रिपोर्र्ट के मुताबिक यह बात भी सामने आई कि इन जिलों में धरती के पानी में नाईटे्रट की खतरनाक मात्रा किसी कुदरती प्रकोप से नहीं बढ़ी है, बल्कि इसके लिए धरती पुत्र किसान सबसे ज्यादा जिम्मेदार हैं। जिन्होंने अपनी जमीनों की फसल की पैदावार बढ़ाने के लालच में रासायनिक खादों का अंधाधुंध इस्तेमाल किया। नतीजतन नाईटे्रट ने मिट्टी को अपना निशाना बनाने के साथ धरती के पानी को भी अपनी चपेट में ले लिया है। उल्लेखनीय है कि पंजाब की धरती का पानी यूरेनियमयुक्त है। अब नाईट्रोजन की अधिकता ओर यूरेनियम के प्रभाव से प्रभावित जिलों में लोग कैंसर व अन्य गंभीर बीमारियों का शिकार बन रहे हैं। रिपोर्ट में लुधियाना, मुक्तसर व बठिण्डा जिलों के खेतों में रासायनिक खादों की सबसे अधिक खपत होने की तसदीक की गई है। यह परीक्षण करने के लिए लुधियाना और मुक्तसर में 18-18 और बठिण्डा में 14 धान एवं गेहूं के खेतों से भू-जल के नमूने लिए गए। इस सर्वेक्षण में तीनों जिलों के 9 ब्लॉक और 14 गांव कवर किए गए। जांच के बाद जो नतीजा सामने आया, वो काफी भयावह था। मुख्यमंत्री के गृह जिले मुक्तसर के ब्लॉक गिद्दड़बाहा के गांव दोदा के नमूने में पानी में नाईटे्रट की मात्रा बहुत अधिक, सुरक्षित-निर्धारित मानक पांच मिलीग्राम प्रति लीटर से कहीं ज्यादा 143 पाई गई। बठिण्डा जिले के सीमावर्ती गांव पथराला के भू-जल में भी नाईट्रेट की मात्रा 643 तक दर्ज की गई। जगरांव, लुधियाना व गिद्दड़बाहा के पानी के नमूनों में नाईट्रेट की उच्च उपस्थिति देखी गई। जबकि पायल, फल, रायकोट, मलोट के क्षेत्रों में पानी के नमूनों में नाईट्रेट पाई गई। इन नमूनों की जांच में बठिण्डा के गांव रायकेकलां से लिए गए 7 नमूनों में से तीन में नाईट्रेट की उच्च उपस्थिति 611, 516 व 532 दर्ज की गई। भू-जल के नमूने वाले कुल 14 गांवों में से 8 में नाईट्रेट की उपस्थिति उच्च मात्रा में पाई गई। ग्रीन पीस इण्डिया की कम्युनिकेशन अधिकारी प्रीति हरमन का कहना है कि किसानों द्वारा खेतों में रासायनिक खादों के अत्यधिक उपयोग से भू-जल दूषित हुआ है। भू-जल को पीने के लिए उपयोग करने के कारण नाईट्रेट मनुष्य के शरीर में जा रहा है। किसानों द्वारा अपनी फसलों की अधिक मात्रा में नाईट्रेट की तय दर 223 किलोग्राम प्रति हैक्टेयर से कहीं ज्यादा 322 किलो प्रति हैक्टेयर रासायनिक खादों का उपयोग किया गया। इतनी मात्रा में नाईट्रोजन सीधे तोर पर मनुष्य के स्वासथ्य को प्रभावित करने में सक्षम है। खेतों में रासायनिक खादों का अतयधिक उपयोग न केवल मिट्टी की उर्वरता को नष्ट कर खाद्य उत्पादन को प्रभावित करता है, बल्कि पेयजल को प्रदूषित कर लोगों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डालता है। वैसे भी हरित क्रान्ति के बाद नाइरट्रोजन के बढ़ते प्रकोप से मनुष्य अदूता नहीं है। क्योंकि नाईटे्रटयुक्त फसलें ही मनुष्य के रोजाना खानपान का हिस्सा हैं। वहीं रही सही कसर नाईट्रोजन से दूषित भू-जल पूरी कर रहा है। इससे कैंसर व अन्य गंभीर बीमररियां फैल रही हैं। प्रीति हरमन का यह भी कहना है कि किसान तो अधिक फसल लेने के लालच में रासायनिक खाद का अधिक उपयोग करते हैं। जबकि सरकार इनके दुषपरिणामों से भलिभान्ति परिचित होने के बावजूद हर साल खाद पर सैंकड़ों करोड़ रूपए की सब्सिडी देकर बराबर की जिम्मेदार बनी हुई है। जिसके चलते रासायनिक खादें आम लोगों के लिए मौत का कारण बन रही हैं। उनका कहना है कि सरकार को चाहिए कि रासायनिक खादों पर सैंकड़ों करोड़ रूपए सबिसडी के तोर पर खर्च करने की बजाय वह किसानों को आर्गेनिक खेती के प्रति उत्साहित करें ताकि खेती के जरिए जीवन के साथ खिलवाड़ को बंद किया जा सके। खेती विरासत मिशन के कार्यकारी निदेशक व वरिष्ठ पर्यावरणविद् मदर दत्त भू-जल में नाईट्रोजन की अत्यधिक मात्रा को बड़ा संकट मानते हैं। उन्होंने कहा कि इन जिलों में दूषित भू-जल के कारण कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों ने अपना जाल बिछाया हुआ है। इस क्षेत्र के गांवों में एक-एक घर में कैंसर से पीडि़त एक से ज्यादा मरीज होना आम बात है। जबकि इससे पहले बड़ी संख्या में लोग कैंसर व अन्य नामुराद बीमारियों के कारण अपनी जिन्दगी से हाथ धो चुके हैं। उमिन्दर दत्त कहते हैं, वक्त रहते लोगों को भू-जल के दूषित प्रभाव से मुक्त करने के लिए सरकार को रासायनिक खादों की जगह आर्गेनिक खेती को बढ़ावा देना चाहिए। वह चेताते हैं कि अगर सरकार ने पानी में जहर व किसानों को फॢटलाईजर्स के नुक्सान के प्रति सचेत नहीं किया तो मालवा के घर-घर में अपनी जड़ें फैला रही कैंसर की नामुराद बीमारी एक दिन पूरे पंजाब को निगल जाऐगी। रिपोर्ट में बठिण्डा जिले के जज्जल व ग्याना कैंसर के पिन-प्वाईंट बताए गए हैं। जिसके चलते इन गांवों में बहुत से परिवार कैंसर से तबाह हो चुके हैं। हालात यह हैं कि राजस्थान के बीकानेर में कैंसर का इलाज कराने वाले मरीजों में ज्यादातर पंजाब मालवा क्षेत्र के बठिण्डा व मुक्तसर जिलों के हैं। यही नहीं, मालवा का कैंसर रेलवे पर भ दा गया है। अबोहर से बीकानेर वाया बठिण्डा जाने वाली रेलगाड़ी 339 अप केंसर ट्रेन के नाम से जानी जाने लगी है। एक अनुमान के मुताबिक एक महीने में सिर्फ बठिण्डा स्टेशन से बीकानेर जाने वाले यात्रियों की संख्या लगभग 200 है। जबकि क्षेत्र के दूसरे शहरों के रेलवे स्टेशनों से बीकानेर जाने वाले मरीजों की गिनती इससे जुदा है। यह भी एक जमीनी सच है कि माली हालत खराब होने के कारण कैंसर से पीडि़त बहुत सारे लोग अपना पूरा इलाज करवाने से भी महरूम हैं। कैंसर की रोकथाम के लिए पंजाब सरकार द्वारा साल भर पहले बठिण्डा के सिविल हस्पताल कॉम्पलैक्स में एक कैंसर हस्पताल का शिलान्यास भी किया गया था लेकिन बात अभी तक उससे आगे नहीं बढ़ पाई। आदेश मेडिकल साइंसेज एण्ड रिसर्च (भुच्चो) निदेशक प्रसीपल (लेफ्टिनेट) डॉ. जीपीआई सिंह कहते हैं कि भू-जल नाईट्रेट ज्यादा होने से मनुष्य में कई तरह के कैंसर के अलावा बच्चों में ब्लू बेबी सड्रोम और गर्भवती महिलाओं में कई तरह की बीमारियां होने का खतरा रहता है। ग्रीन पीस इण्डिया के सहयोग से किए गए इस अभियान के तहत विदेशी वैज्ञानिक टोरांडो ने भू-जल जांच के बारे में सार्वजनिक जानकारी दे कर लोगों को सचेत किया। उन्होंने गांव पथराला के किसान गुरसेवक ङ्क्षसह के खेत में ट्यूबवैल से पानी लेकर विशेष मशीन से मौके पर ही परीक्षण किया। यहां जांच के दौरान भू-जल में नाईट्रेट की मात्रा 582 मिलीग्राम प्रति लीटर पाई गई। जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मानकों के अनुसार पानी में 5.2 मिलीग्राम प्रति लीटर तक नाईट्रेट की मौजूदगी स्वास्थ्य के अनुकूल मानी जाती है। उन्होंने बताया कि खेतों में किसानों द्वारा बेहिसाब रासायनिक खाद डालने के कारण नाईट्रेट अब भूमि को पार करके भू-जल में मिल गया है। उल्लेखनीय है कि जब इसी जगह मार्च में भू-जल परीक्षण किया गया था तो उस समय नाईटे्रट की मात्रा मात्र 643 के करीब दर्ज की गई थी। टोरांडों ने चिन्ता जताई कि भू-जल में नाईटे्रट की मात्रा अधिक होने से लागों में कई तरह के कैंसर पुलने के अलावा बच्चों में ब्लू बेबी सड्रोम के लक्षण और गर्भवती महिलाओं में भी चातरनाक बीमारियां पनपने की आशंका रहती है। इस मौके पर मौजूद उमरिन्दर दत्त ने बताया कि ग्रीन पीस से पहले पंजाब सरकार के सहयोग से पीजीआई चंडीगढ़ ने भी कैंसर को लेकर सर्वेक्षण किया था। उन्होंने राय जाहिर की कि टुकड़ों में बंटे अध्ययन से कुछ फायदा होने वाला नहीं। अब जरूरत है केन्द्र व पंजाब सरकार को योजना बनाने की कि वह बठिण्डा में विशेष केन्द्र स्थापित कर पर्यावरण में पैदा हुए असंतुलन से लोगों की सेहत पर पडऩे वाले प्रभाव का पता लगाऐं एवं शोध द्वारा उसका निराकरण करें। उधर सरकारी आंकड़ों के अनुसार ही गांव पथराला में साल 2009 से लेकर अब तक 13 लोग कैंसर का शिकार हो चुके हैं। गांव की डिस्पैंसरी में तेनात फार्मासिस्ट सुरेश शाद ने बताया कि कैंसर पीडि़तों में से 6 रोगियों की मौत भी हो चुकी है। पीडि़तों में से 6 को पेट, तीन को गले और बाकी को बच्चेदानी का कैंसर था। रासायनिक खादों के नुक्सान से जागरूक हुए जैतों गांव के किसान गुरमेल सिंह ढिल्लों रासायनिक खाद को तैयार कर अपने चार एकउ़ में से दो एकड़ जमीन पर पिछले 6 साल से जैविक खेती कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि जैविक खेती से उत्पन्न फसलें मनुष्य की सुहत के लिजए हानिकारक भी नहीं और इसकी फसल का बाजार में अच्छा मूल्य भी हासिल होता है।
आठ साल में 1347 मौतें
बठिण्डा जिले में कैंसर अब अपना विकराल रूप ले चुका है। जिसकी चपेट में बच्चे व नौजवान भी तेजी से आ रहे हैं। अगर सेहत विभाग के आंकड़ों पर नज़र डाली जाए तो जिले में 28 ऐसे कैंसर रोगियों का पता चला है। जिनकी आयु मात्र 2 वर्ष से लेकर 25 साल की है। इनमें से 2 साल तक की आयु के बच्चों को ब्लॅड कैंसर भी है। जबकि 7 से 14 साल तक की आयु के बच्चे कैंसर के चलते जिन्दा लाश में तबदील हो चुके हैं। कैंसर पीडि़तों के अभिभावक अपने बच्चों के इलाज करवाने के चक्कर में एक तरह से कंगाल हो चुके हैं। जो क्षमतावान है,वह अपने परिवार के कैंसर पीडि़त सदस्यों को राजस्थान के बीकानेर हस्पताल तक ले जाते हैं तथा शेष दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। जिले में कैंसर के मद्देनज़र करवाए गए सर्वेक्षण के अनुसार साल 2001 से 2009 के दौरान कुल 1347 लोग काल का ग्रास बन चुके हैं। जबकि 871 लोग अभी भी कैंसरा के चलते जिन्दगी और मौत के बीच झूल रहे हैं। इस बददतर स्थिति के बावजूद बठिण्डा में अब राज्य सरकार को ध्यान आया कि यहां कैंसर हस्पताल खोला जाए। उधर जिला प्रशासन के माध्यम से राज्य सरकार ने एक साल के दौरान 166 कैंसर रोगियों को इलाज के लिए 25 लाख रूपए की आथक सहायाता दी। सेहत विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में साल 2001 से लेकर 2009 के दौरान मरने वाले कैंसर पीडि़त रोगियों में से 623 पुरूष व 724 महिलाऐं थी फिलहाल 240 पुरूष और 631 महिलाओं का उपचार किया जा रहा है। महिला रोगियों में ब्रस्ट व यूराईटिस के मामले सबसे ज्यादा हैं। मुख्यमन्त्री प्रकाश सिंह बादल ने बठिण्डा के सिविल हस्पताल कॉम्लैक्स में मैक्स हैल्थ केयर द्वारा स्थापित कैंसर हस्पताल का शिलान्यास हाल ही में किया है। जिसमें कैंसर व दिल के रोगियों के उपचार के लिए आधुनिक सुविधाऐं होंगी। हालांकि इस हस्पताल में उपचार करवा पाना आम रोगियों के लिए कितना संभव होगा। यह भी जग जाहिर

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