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सोमवार, 2 नवंबर 2009

पिंडी फिर निशाने पर, धमाके में 30 मरे





पिछले हफ़्ते पेशावर में हुए हमले में सौ के लगभग लोग मारे गए थे.
पाकिस्तान के रावलपिंडी शहर में एक आत्मघाती हमले में कम से कम 30 लोग मारे गए और कई अन्य घायल हुए हैं.

पुलिस के अनुसार यह हमला शहर के केंद्र में स्थित मॉल रोड पर शालीमार होटल के पास नैशनल बैंक के अहाते में हुआ. जब हमला हुआ तो उस समय सरकारी कर्मंचारी बैंक से वेतन ले रहे थे.

एक वरिष्ट पुलिस अधिकारी राव इक़बाल ने बीबीसी को बताया कि यह एक आत्मघाती हमला था और मोटरसाईकल पर सवार हमलावर ने बैंक की पार्किंग में आ कर अपने आप को धमाके से उड़ा दिया.

पुलिस अधिकारी ने इस हमले में 30 लोगों के मारे जाने की पुष्टि की है और कहा है कि कई अन्य लोग घायल भी हुए हैं. घायलों को करीबी अस्पतालों में भरती करवाया गया और कई लोगों की स्थिति गंभीर बताई जा रही है.

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि धमाके से कई आस पास की इमारतों के शीशे टूट गए हैं और सुरक्षाकर्मियों ने इलाक़े को घेरे में ले लिया है.

ये शहर का भीड़भाड़ वाला इलाका है जहां कुछ बड़े होटल हैं और पाकिस्तान का फ़ौजी मुख्यालय भी वहां से ज़्यादा दूर नहीं है.

एक प्रत्यक्षदर्शी शाहिद रिज़वान ने बीबीसी को बताया कि हमलावर ने बैंक के बाहर क़तार में लगे लोगों के करीब आकर अपने आप को धमाके से उड़ा दिया. उन्हों ने कहा कि मरने वालों में एक महिला और बच्चे भी शामिल हैं जो पास ही एक कार में बैठे हुए थे.

पाकिस्तानी सेना की तरफ़ से दक्षिणी वज़ीरिस्तान में शुरू हुए अभियान के बाद से जो चरमपंथी हमलों का सिलसिला शुरू हुआ है उसमें अबतक तीन सौ के लगभग लोगों की मौत हो चुकी है.

पाकिस्तान में इन हमलों के मद्देनज़र संयुक्त राष्ट्र ने उत्तर पश्चिमी पाकिस्तान से अपने अंतरराष्ट्रीय कर्मचारियों को हटाने की घोषणा की है.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान कि मून ने एक बयानी जारी कर कहा है कि यह फ़ैसला 'इलाक़े की ख़राब होती सुरक्षा को ध्यान में रखकर किया गया है.'

इस बीच पाकिस्तानी सरकार ने तहरीक ए तालिबान के प्रमुख हकीमुल्ला महसूद को पकड़वाने के लिए छह लाख डॉलर के इनाम का एलान किया है.

नहीं चलेगा गुटखा-शैम्पू पाउच


केंद्र सरकार ने शैम्पू, गुटखा, पान मसाला, नमकीन और बिस्किट के प्लास्टिक व धातु से बने पाउचों पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव रखा है। इस संबंध में केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने प्लास्टिक निर्माण, उपयोग और अपशिष्ट प्रबंधन अधिनियम 2009 के नियमों पर प्रभावित पक्षों से विचार मांगे हैं। इस अधिनियम के अनुसार कोई भी व्यक्ति प्लास्टिक या धातु के ऐसे पाउचों का प्रयोग नहीं कर सकता जिनका पुनर्चक्रण नहीं किया जा सकता। नियमों में यह भी कहा गया कि भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के मानदंडों को पूरा करने वाले बायो डिग्रेडेबल (दोबारा प्रयोग में लाए जा सकने वाले पदार्थ) प्लास्टिक फिल्म से बने पाउचों के ही इस्तेमाल की इजाजत दी जाएगी। जनता और उद्योग जगत के विचारों पर दिसंबर के अंत तक गौर किया जाएगा। अगर मौजूदा नियमों को ही स्वीकार किया गया तो रोजमर्रा के सामान बनाने वाली और खाद्य प्रसंस्करण कंपनियों सहित विभिन्न उद्योगों को पर्यावरण के अनुकूल सामग्री का ही प्रयोग करना होगा। पर्यावरण मंत्रालय में संयुक्त सचिव राजीव गाबा ने कहा, ये प्रस्ताव गत वर्ष दिल्ली हाईकोर्ट की ओर से गठित चोपड़ा समिति के सुझावों के बाद आया है। दिल्ली हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश आरसी चोपड़ा की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय समिति ने स्वास्थ्य व पर्यावरण को होने वाले नुकसान का हवाला देते हुए धातु तत्वों से युक्त रंगीन थैलियों पर भी प्रतिबंध लगाने का सुझाव दिया था। इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर राज्य सरकार ने गत जनवरी में राजधानी में अधिसूचना जारी कर होटलों, अस्पतालों, शापिंग माल और बाजारों में प्लास्टिक थैलियों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया था। प्रतिबंध तोड़ने पर 15 हजार रुपये का जुर्माना लगाने का भी प्रावधान है।

कैमूर पहाड़ी पर कैद है सम्राट अशोक का शिलालेख


एलेन च अंतलेन जंबुदीपसि। यही वह प्रारंभिक पंक्ति है, जो कैमूर पहाड़ी पर मौजूद मौर्य सम्राट अशोक के लघु शिलालेख पर अंकित है। ब्राह्मी लिपि में लिखित इस पंक्ति का अर्थ है जम्बू द्वीप (भारत) में सभी धर्मो के लोग सहिष्णुता से रहें। आज यह शिलालेख पहाड़ी पर वर्षो से ताले में कैद है। इतिहासकार, पुरातत्वविद् व पर्यटक शिलालेख को पढ़ने की चाहत में थककर पहाड़ी पर पहुंचने के बाद वहां से निराश होकर लौटते हैं। खासकर बौद्ध पर्यटक ज्यादा निराश होते हैं। सासाराम से सटी चंदतन पीर नाम की पहाड़ी पर अशोक महान के इस शिलालेख को लोहे के दरवाजे में कैद कर दिया गया है। इसपर इतनी बार चूना पोता गया है कि इसका अस्तित्व ही मिटने को है। यह स्थल पुरातत्व विभाग के अधीन है, पर इसपर दावा स्थानीय मरकजी दरगाह कमेटी का है, कमेटी ने ही यह ताला जड़ा है। जिला प्रशासन से लेकर राज्य सरकार तक गुहार लगाकर थक चुके पुरातत्व विभाग ने अब इस विरासत से अपन हाथ खड़े कर लिए हैं। इतिहास गवाह है कि सम्राट अशोक ने तीसरी शताब्दी ई. पूर्व देशभर में आठ स्थानों पर लघु शिलालेख लगाये थे। इनमें से बिहार में एकमात्र शिलालेख सासाराम में है। शिलालेख उन्हीं स्थानों पर लगाए गए थे जहां से होकर व्यापारी या आमजन गुजरते थे। सम्राट अशोक ने यहां रात भी गुजारी थी। ृव्यूठेना सावने कटे 200506 सत विवासता। इस पंक्ति में कहा गया है कि अशोक ने कुल 256 रातें जनता के दु:खदर्द को जानने को महल से बाहर गुजारी थीं। पुरातत्व विभाग के सहायक नीरज कुमार बताते हैं कि चार वर्ष पूर्व आये कुछ बौद्ध पर्यटकों ने तत्कालीन डीएम विवेक कुमार सिंह से मिलकर बंद ताले पर विरोध जताया था। डीएम के स्थिति पर रिपोर्ट मांगने पर विभाग ने पूरी स्थिति स्पष्ट की थी। मई 2009 में पुरातत्व विभाग, पटना ने डीएम, एसपी, एसडीओ को पत्र लिख शिलालेख के संरक्षण की मांग की थी। अफसरों ने वस्तुस्थिति का जायजा लेकर हर पक्षों को सुना था, परंतु मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। फिलवक्त वहां पुरातत्व का एक बोर्ड तक नहीं है, जिससे आम आदमी जान सके कि महत्वपूर्ण शिलालेख यहां है। ... शेष पृष्ठ 17 पर

गुरु दे चरणां च..



पश्चिम लाहौर के करीब फरूकाबाद में रविवार को गुरुद्वारा सच्चा सौदा में मत्था टेकने के बाद बाहर आते सिख श्रद्धालु।

बड़ा खतरा बनता जा रहा छोटा-सा मोबाइल


इलेक्ट्रानिक कचरा यानी ई-वेस्ट से पर्यावरण को होने वाले नुकसान की चर्चा जोरों पर है। इन चर्चाओं में मोबाइल फोन का नाम भी जुड़ गया है। बाजार में रोजाना आ रहे नए मोबाइल सेटों के चलते पुराने सेट बेकार होते जा रहे हैं। कूड़ा बन चुके इन सेटों से निकलने वाला जहर पर्यावरण के लिए सबसे बड़ा खतरा बनता जा रहा है। वैज्ञानिकों का मानना है कि 2012 तक धरती पर 8 हजार टन मोबाइल फोन का कचरा जमा हो जाएगा। ग्लोबल कंसलटेंसी डेलोइट के मुताबिक तेजी से बढ़ता सेलफोन कचरा पर्यावरण पर सबसे बड़ा खतरा है जिसका जल्द से जल्द प्रबंधन किए जाने की जरूरत है। एक आकलन के अनुसार तेजी से बदलती तकनीक के चलते हर साल ज्यादा से ज्यादा मोबाइल कूड़े के ढेर बनते जा रहे हैं। डेलोइट कंसलटिंग इंडिया के क्षेत्रीय प्रबंध निदेशक पराग साइगांवकर ने बताया, दोबारा प्रयोग में लाने की उपयुक्त विधि के अभाव में 2012 तक 8 हजार टन मोबाइल का जहरीला कचरा धरती पर जमा हो जाएगा। इसके पर्यावरण व इंसानों पर खासे दुष्प्रभाव पड़ेंगे। भारत में जहां मोबाइल फोन का तेजी से बढ़ता कारोबार है, मोबाइल कचरे पर नियंत्रण के लिए कोई नीति बनाए जाने की जरूरत है। ताकि पारिस्थितिकी पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को रोका जा सके। यह समस्या उस समय शुरू हुई जब अवैध रूप से मोबाइल कचरे को फेंका जाने लगा। मोबाइल फोन से विषैले पदार्थो का रिसाव भूमिगत जल में हो सकता है जो भविष्य में एक बड़ी समस्या बन सकता है। एक अनुमान के मुताबिक 2008-12 के बीच मोबाइल फोन कचरे में नौ फीसदी की बढ़ोत्तरी हो जाएगी। इसमें से 80 फीसदी कचरा पर्यावरण के लिहाज से घातक होगा। साइगांवकर के मुताबिक एशिया, यूरोप और अमेरिका के 65 फीसदी मोबाइल फोन उपभोक्ता दो साल में अपना सेट बदल लेते हैं। मतलब साफ है कि हर दो साल में लगभग 10 करोड़ मोबाइल कूड़े में फेंक दिए जाते हैं।

आप ही बताएं, स्विच दबाएं कैसे?


वाह बिजली कभी-कभी, आह बिजली बार-बार। कभी अनापूर्ति की तबाही तो कभी बिलों की गफलत। काका हाथरसी की वह पंक्ति सटीक बैठती है - बिजली कड़क के बोली, मैं मार दूंगी गोली, अब आप ही बताएं स्विच को दबाएं कैसे..? पूरे उत्तर बिहार में बिजली बिल को लेकर कुछ ऐसा ही आलम बना है। यहां के किसी जिले में मीटर रीडिंग नहीं हो रही और मनमाने तरीके से बिल बनाकर भेजा जा रहा है। आप हैरान होइए, परेशान होइए, पर बिल तो भरना ही होगा। अधिकारी कहते हैं कि मीटर रीडरों की कमी है। मजबूरी है। क्या करें? मुजफ्फरपुर शहर में करीब 42 हजार उपभोक्ता है। इनमें से करीब 10-12 हजार को प्रतिमाह त्रुटिपूर्ण बिल मिलते हैं। कई बार तो रकम जमा करने के बावजूद नए बिल में एरियर के रूप में पुराने बिल को जोड़ दिया जाता है। पहले जब शहरी क्षेत्र में उपभोक्ताओं की संख्या 23 से 24 हजार थी, उस समय मीटर रीडरों की संख्या यहां 20 थी। अब जबकि उपभोक्ता 42 हजार से अधिक हैं तो मात्र 12 मीटर रीडरों से काम चल रहा है। बिहार राज्य विद्युत बोर्ड के प्रावधान के अनुसार एक रीडर प्रतिमाह 1200 मीटरों की रीडिंग करेगा, जबकि अभी एक रीडर को करीब साढ़े तीन हजार मीटर रीडिंग करनी पड़ रही है। गड़बड़ी और विलंब स्वाभाविक है। तिरहुत विद्युत आपूर्ति क्षेत्र के महाप्रबंधक अविनाश कुमार सिंह कहते हैं कि आउटसोर्सिग से मीटर रीडिंग कराने की योजना बनाई जा रही है। सीतामढ़ी में चौबीस घंटे में भले चार घंटे बिजली नसीब नहीं हो, लेकिन बिल के करंट से उपभोक्ता चित्त हैं। शहर तक में एक साल में एक बार भी मीटर की रीडिंग नहीं ली जाती। विभाग हमेशा अंदाजन ही बिल भेजता है। कार्यपालक अभियंता सुधीर कुमार कहते हैं कि सुधार के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा। बेतिया नगर मुख्यालय में मीटर की जांच होती ही नहीं। कारण, रीडर के कई पद खाली हैं। कार्यपालक अभियंता सुखलाल राम कहते हैं कि संबंधित पदाधिकारियों को सूचना दी गई है, लेकिन समाधान नहीं हो पाया है। यहां एक घर में चालीस यूनिट खपत की बात हुई थी, पर हर घर इससे ज्यादा बिजली खपत कर रहा है। मोतिहारी में विभागीय अधिकारी का दो टूक जवाब था, क्या करें, रीडर गिनती के रह गए हैंै। मजबूरी है दो-तीन महीने पर एक बार रीडिंग कराना और एकमुश्त बिल भेजना। मधुबनी विद्युत प्रमंडल के अंतर्गत करीब पचास हजार उपभोक्ता हैं। कुटीर ज्योति कार्यक्रम एवं डीएसआई (देहाती क्षेत्रों का घरेलू कनेक्शन) के तहत बने 37 हजार उपभोक्ताओं के पास मीटर ही नहीं है। ऐसे लोगों को को प्रतिमाह 84.80 रुपये बतौर बिल निर्धारित है। शेष बचे उपभोक्ताओं के घर लगे मीटरों की ही रीडिंग होती है। कार्यपालक अभियंता पीके झा स्वीकार करते हैं कि तीन मीटर रीडर हैं। इनसे प्रतिमाह रीडिंग कराना संभव नहीं है। उधर, झंझारपुर प्रमंडल में भी दो मीटर रीडर के सहारे ही काम चल रहा है। समस्तीपुर का तो जुदा ही आलम है। यहां तो बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन देने पर ही बिल आने शुरू हो जाते हैं। जितवारपुर के राजेन्द्र शर्मा, वारिसनगर के भोला पंडित, पूसा के राजेन्द्र पासवान आदि कुछ ऐसे ही भुक्तभोगी हैं। अधीक्षण अभियंता बताते हैं कि ऐसी शिकायतें अब तक उनके पास नहीं आई हैं। वैसे कभी-कभी लैक आफ इंफार्मेशन या कंप्यूटर की गड़बड़ी के कारण ऐसा हो सकता है। दरभंगा में मीटर रीडिंग होते कई सालों से नहीं देखा गया। उपभोक्ताओं को तीन-तीन साल से बिल नहीं भेजा गया है। अब बिल आना तो तय है, लेकिन लोगों के कलेजे कांप रहे हैं कि यह हजारों-हजार में आएगा और उसका भुगतान महंगा होगा। ढाई साल पहले ठेका पर सेवानिवृत जवानों को मीटर रीडिंग के लिए लगाया गया था, लेकिन उनकी रीडिंग पर आपत्तियां होने से उन्हें काम से रोक दिया गया। विभाग कर्मियों की कमी का रोना रोता है और निदान कुछ भी नहीं दिखता।

डांस पे


नई दिल्ली के वसंत कुंज स्थित रियान इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल में आयोजित डांस इंडिया डांस के ऑडिशन के लिए आई युवतियां।

खुलेआम बेचे जा रहे ऑटो के परमिट

राजधानी में चंद फाइनेंसरों ने ऑटो चालन पर कब्जा जमाया हुआ है। लेकिन परिवहन विभाग कुछ नहीं कर रहा है। विभाग को पता है कि किसी भी वाहन का परमिट निजी नहीं होता, उस पर सरकार का नियंत्रण होता है। इसकी खरीद-फरोख्त नहीं की जा सकती है। बावजूद इसके ऐसा हो रहा है। परिवहन विभाग ने इसको आरटीआई के जवाब में स्वीकार भी कर लिया है, पर कार्रवाई सिफर है। दूसरी ओर कुछ लोगों के पास 50-50 ऑटो रिक्शा हैं। आरटीआई के जवाब में यह जानकारी मिली है कि कृष्णानगर निवासी बल्लभ को। उन्होंने परिवहन विभाग से सूचना के अधिकार के तहत दी याचिका में कहा था कि अगस्त में समाचार पत्र दैनिक जागरण में प्रकाशित और टीवी चैनल में दिखाया गया था कि ऑटो डीलरों द्वारा ओपन स्कूटर मार्केट में एक ऑटो रिक्शा, जिसका कंपनी प्राइस लगभग 1,35,000 रुपए का ब्लैक में 4,70,000 में बेचा जा रहा है। उन्होंने पूछा था कि क्या परिवहन मंत्री, परिवहन मंत्री कार्यालय व परिवहन विभाग को इसकी जानकारी है। इसके साथ ही क्या जानकारी दी जाए कि क्या कार्रवाई की गई। परिवहन विभाग के उपायुक्त ने जवाब दिया कि चूंकि वाहनों की संख्या मांग से बहुत कम है इसलिए पुराने वाहन मालिक अपने ऑटो रिक्शा मनमानी कीमत पर बेच रहे हैं। इसमें परमिट की कीमत वाहन मालिकों द्वारा ली जा रही है। दिल्ली में ऑटो रिक्शाओं की संख्या बढ़ाने का मामला विचाराधीन हैं। कार्रवाई संबंधी सवाल को विभाग टाल गया। ध्यान देने वाली बात है कि कोई व्यक्ति खरीदी गई किसी गाड़ी को परमिट समेत बेच तो सकता है, लेकिन परमिट की खरीद-बिक्री नहीं कर सकता। राजधानी में 56,204 ऑटो रिक्शा पंजीकृत हैं। एक अन्य आरटीआई में याचिका दायर कर झील निवासी रमेश नागपाल ने पूछा था कि डीएल1आरके एवं डीएल1आरएल सिरीज के 0001 से 9999 तक ऐसे कितने ऑटो रिक्शा स्वामी हैं, जिनके पास 50 से अधिक ऑटो रिक्शा रजिस्टर्ड हैं। इसके जवाब में बताया गया कि कंप्यूटर द्वारा प्राप्त वांछित सूचना के अनुसार ऐसे 3,269 स्वामी हैं। हालांकि इनके पिता का नाम व पता भिन्न हो सकता है। सूत्र बताते हैं कि ऐसे ऑटो स्वामियों की संख्या करीब 1000 है, जिनके पास 50 से ज्यादा ऑटो हैं। नागपाल के अनुसार एक ऑटो से एक दिन में न्यूनतम 300 रुपए की कमाई होती है। इस तरह अगर किसी के पास 50 ऑटो हैं तो वह साल में करीब 54 लाख रुपए कमा लेता है। लेकिन अधिकतर मालिक इन्कम टैक्स विभाग में सही कमाई के आधार पर टैक्स नहीं देते हैं। इस बारे में भी आरटीआई के माध्यम से परिवहन विभाग से पूछा गया था कि क्या विभाग ऐसे ऑटो मालिकों की जानकारी इन्कम टैक्स विभाग को देता है। इसके जवाब में विभाग ने कहा था कि हमारे यहां ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। विशेष बात यह है कि 50 से ज्यादा ऑटो रखने वालों में फाइनेंसरों की संख्या ही अधिक है।

पुलिस पर चला पुलिस का डंडा


यातायात नियम का उल्लंघन करने पर पुलिस वालों के सामने क्षमा याचना करते लोगों को आपने अक्सर देखा होगा। लेकिन रविवार का नजारा उलटा था। जिसे देख लोग भी आश्चर्य चकित थे। नियम का पालन कराने वाले ही नियमों के उल्लंघन में फंस गए। फिर वहीं हुआ जो वे करते हैं, लाख क्षमा याचना के बाद भी उनका चालान कट गया। 2500 पुलिस वालों का यातायात नियम के उल्लंघन पर चालान काटा गया। यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले पुलिस कर्मियों के खिलाफ रविवार को तीन घंटे का अभियान चलाया गया। इसमें अधिकारियों ने हिस्सा लिया। इन तीन घंटों ने नियम का पालन करने वालों की पोल खोल दी। इस दौरान 2500 पुलिस कर्मी यातायात नियम का उल्लंघन करते मिले। उनका चालान किया गया। इनमें नोएडा और बाहर तैनात पुलिस कर्मी भी थे। शहर भर में अभियान को छह जगहों पर चलाया गया। इसमें एसपी यातायात, एसपी सिटी, सीओ यातायात व इंस्पेक्टर यातायात ने हिस्सा लिया। एसएसपी अशोक कुमार सिंह ने बताया कि पुलिस कर्मचारियों के यातायात नियमों के उल्लंघन करने की शिकायत मिल रही है। इससे आम जनता भी यातायात नियमों का उल्लंघन करने को प्रेरित होती थी। इसी को ध्यान में रखकर नियमों का उल्लंघन करने वाले पुलिस कर्मियों के खिलाफ अभियान चलाया गया। अभियान रजनीगंधा, डीएनडी, गोलचक्कर, सेक्टर 14ए, सेक्टर 37 चौराहा, झुंडपुरा में चलाया गया। यातायात माह शुरू : यातायात पुलिस ने रविवार से यातायात माह प्रारंभ कर दिया है। इसमें एक माह तक लोगों को यातायात नियमों का पालन करने के फायदे बताए जाएंगे। यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा। लोगों को यातायात नियमों के बारे में बताया जाएगा। जागरूकता अभियान के साथ यातायात माह प्रारंभ हुआ। जिसमें यातायात पुलिस ने पूरे शहर में 150 जगह यातायात नियमों से संबंधित बैनर लगाए।

बा अदब, बा मुलाहजा..नवाब साहब आ रहे हैं!


नवाब मियां सैयद नकी रजा। उम्र करीब 70 बरस। पता-कश्मीरी मोहल्ला, लखनऊ, लेकिन यह उनकी पूरी पहचान नहीं है। असल पहचान को जिंदा रखने के लिए इस बुजुर्ग को कितने पापड़ बेलने पड़ रहे हैं, जरा गौर फरमाइये। नवाब साहब अवध की बहू बेगम के वंशज हैं। उन्हें वसीका (अंग्रेजों के जमाने से नवाबों की संपत्तियों के बदले उनके वंशजों को मिलने वाली पेंशन) मिलता है। नवाब साहब के घर से वसीका दफ्तर तक रिक्शे का किराया 25 रुपये है। यानि वसीका लेने के लिए उन्हें किराये के 50 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। इस उम्र में आने-जाने और दफ्तर में लगने वाले दो-तीन घंटे का वक्त भी कितना तकलीफदेह होता होगा, उसे भी आसानी से समझा जा सकता है। नवाब साहब को वसीका कितना मिलता है, यह सुनकर आप चौक जाएंगे। सिर्फ दो रुपये 98 पैसे महीने! इस बावत सवाल करने पर नवाब साहब नाराज हो जाते हैं, कहते हैं, तो क्या मैं अपनी पहचान को भी खत्म कर दूं? यही तो एक दस्तावेजी सबूत है, वर्ना एक अरब की आबादी में कौन यकीन करेगा कि यह बूढ़ा बहू बेगम का वंशज है। मैं अपनी तकलीफ, आराम के लिए अपनी आने वाली नस्लों से नइंसाफी नहीं कर सकता। अपने जीते जी, मैं ऐसा नहीं होने दूंगा। अपनी पहचान जिंदा बनाए रखने के लिए जद्दोजहद करने वाले नवाब मियां सैयद नकी रजा अकेले नहीं है। अवध के शासकों के करीब 1700 वशंज इस तरह की जद्दोजहद में शामिल हैं। सभी को वसीका मिल रहा है, लेकिन यह रकम एक रुपये, दो रुपये, पांच रुपये, दस रुपये बीस रुपये है। कुछ ही खुशकिस्मत हैं, जिन्हें चार सौ या पांच सौ रुपये मिलते हैं। इनके लिए रकम उतनी महत्वपूर्ण नहीं है, जितना अपनी पहचान को जिंदा रखना। यही वजह है कि जो रकम सुनने में बहुत मामूली लगती है, उसे हासिल करने के लिए होने वाली जहमत उनके लिए कोई मायने नहीं रखती। वाजिद अली शाह के खानदानी शाह आलम से ही मिलिए। सवा पांच रुपये महीने वसीका मिलता है। वह खुद सवाल करते हैं, सवा पांच रुपये इस दौर में क्या मायने रखते हैं? पर इसे लेने में उनके सौ रुपये खर्च हो जाते हैं। इसके लिए इतनी जिद्दोजहद क्यों? जवाब लगभग वही, बात सवा पांच रुपये की नहीं है। बात अपनी जड़ों को सींचते रहने की है। हम जिस रोज सवा पांच रुपये लेना छोड़ देंगे, उस दिन हम अपनी जड़ काट देंगे। ऊपर से जो नस्ल चली आ रही है, वह कहां तक पहुंची यह पहचान खत्म। हम कौन हैं, हमारे बच्चे किस खानदान से ताल्लुक रखते हैं, यह पहचान भी खत्म। शाह आलम कहते हैं, सवा पांच रुपये के लिए सवा पांच हजार रुपये खर्च करने पड़ेंगे तो भी मैं तैयार रहूंगा। एक और वसीकेदार हैं काजिम अली खां। वह मोहम्मद अली शाह के वजीर रफीकउददौला बहादुर के वंशज हैं। इन्हें 26 रुपये वसीका मिलता है। कबूतरबाजी के शौकीन खां साहब कहते हैं कि उनके कबूतर ही महीने में तीन सौ रुपये का दाना खा जाते हैं। साढ़े पांच रुपये पाने वाली मलका बेगम भी पहचान के लिए जूझ रही हैं।

रविवार, 1 नवंबर 2009

पाकिस्तान को 'कड़ा जवाब' देंगे




भारत के गृह मंत्री पी चिदंबरम ने पाकिस्तान के ख़िलाफ़ कड़ा रवैय्या अपनाते हुए कहा है कि अगर पाकिस्तान की तरफ़ से अगर कोई और आतंकी हमला होता है तो उसका ‘कड़ा जवाब’ दिया जाएगा.

चिदंबरम ने पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा कि वो भारत के साथ खेल न खेले और मुंबई पर हुआ हमला ‘आखिरी खेल’ होना चाहिए.

तमिलनाडु के मदुरै शहर में शनिवार की देर रात एक जनसभा को संबोधित करते हुए चिदंबरम ने कहा, ‘‘ सीमा पार से आतंकवाद को रोकने के लिए हम हर दिन ताकत बढ़ा रहे हैं. मैं पाकिस्तान को चेतावनी देता हूं कि वो हमारे साथ खेल न खेले. मुंबई आखिरी खेल होना चाहिए. ये सब यहीं ख़त्म होना चाहिए.’’

तमिल भाषा में लोगों को संबोधित करते हुए उनका कहना था, ‘‘अगर पाकिस्तान से चरमपंथी और आतंकवादी भारत के ख़िलाफ़ हमले करते रहे तो वो न केवल हराए जाएंगे बल्कि इसका कड़ा जवाब दिया जाएगा.’’

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान से घुसपैठिए भेजने की किसी भी कोशिश का भारत कड़ा जवाब देगा. उनका कहना था कि भारत ऐसे प्रयासों को रोकने में पूरी तरह सक्षम है.

चिदंबरम ने कहा कि वो लगातार पाकिस्तान को चेतावनी देते रहे हैं कि वो भारत के मामलों में दखल न दे लेकिन अगर वो ऐसा करते रहे तो उनके साथ सख्ती से निपटा जाएगा.

एक हजार करोड़ स्वाह


ज्वालामुखी बने आयल डिपो में आग का तांडव जारी


जयपुर के सीतापुरा औद्योगिक क्षेत्र में ज्वालामुखी बने आयल डिपो में अब तक लाखों लीटर तेल जल गया। इस तेल से एक लाख छोटे चौपहिया वाहन एक साल तक चलाए जा सकते थे। जयपुर में रोजाना दो लाख लीटर पेट्रोल और दस लाख लीटर डीजल खर्च होता है। इस हिसाब से छह महीने का पेट्रोल और एक माह का डीजल आग में खत्म हो गया। अब तक की पड़ताल में करीब एक हजार करोड़ के नुकसान की जानकारी मिली है। इसमें आयल का नुकसान पांच सौ करोड़ का और इतना ही सीतापुरा औद्योगिक क्षेत्र में स्थित इकाइयों एवं शिक्षण संस्थानों को आर्थिक नुकसान हुआ है। आग से 50 औद्योगिक इकाइयां और नौ कालेज तबाह हो गए हैं। इससे दस हजार लोगों के बेरोजगार होने की आशंका है। इनमें से अधिकांश इकाइयों के चालू होने में छह माह से एक साल तक का समय लग सकता है। आग पर काबू पाने में एक-दो दिन और लगेंगे : आग तीसरे दिन शनिवार को भी जलती रही। हालांकि आग की लपटें पहले से कुछ कम हुई हैं। पचास घंटे के प्रयास के बावजूद आयल डिपो में लगी आग नहीं बुझ पाई। इससे प्रशासनिक, इंडियन आयल कारपोरेशन (आईओसी) और सेना के अधिकारियों की चिंता बढ़ती जा रही है। टैंकों से निकल रही धुएं की लपटें दस-दस किमी दूर तक दिखाई दे रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि टैंकरों में अभी बीस फीसदी ईधन बचा हुआ है इसलिए आग पर काबू पाने में एक-दो दिन और लग सकते हैं। तीन शव और मिले : शनिवार को आग की लपटें पहले के मुकाबले कुछ कम हुईं तो विशेषज्ञ डिपो के निकट पहुंचे। इस दौरान उन्हें तीन शव नजर आए। इसमें दो आईओसी के इंजीनियर के शव हैं। अब तक आठ लोगों के मरने की और सौ लोगों के घायल होने की पुष्टि की है। गर्मी से गल रहे तीन टैंक : विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मी के कारण तीन टैंक गल रहे हैं। अगर इनका गलना जारी रहता है तो टैंकों से पेट्रोल, डीजल का रिसाव हो सकता है। इससे आग एक बार फिर भड़क सकती है। इसलिए सेना के जवान टैंको से कुछ दूरी पर मिट्टी के गड्ढे खोद रहे हैं जिससे रिसने वाला ईधन इनमें चला जा। दस हजार परिवार अन्यत्र भेजे : डिपो से दस से पंद्रह किमी दूर तक के दस हजार परिवारों को अन्यत्र स्थानों पर भेज गया है। ये परिवार आश्रय स्थलों में ठहरे हुए हैं। दूर-दूर से बुलाए विशेषज्ञ : मथुरा और दिल्ली से आए विशेषज्ञ के साथ-साथ सेना के जवान, पुलिस, प्रशासनिक अधिकारी आसपास जमे हुए हैं। जो आग की लपटें कम होते ही बचाव कार्य शुरू करने की तैयारी में हैं।

84 दंगों को लेकर अमिताभ भी घेरे में

( डॉ सुखपाल)


वर्ष 1984 के सिख विरोधी दंगों को लेकर बालीवुड के बिग बी अमिताभ बच्चन भी घेरे में आ गए हैं। हुआ यह कि सीबीआई द्वारा सिख विरोधी दंगे में आरोपी जगदीश टाइटलर के बचाव में अदालत के समक्ष पेश की गई 18 मिनट की सीडी में टाइटलर के साथ महानायक अमिताभ, आरके धवन और तत्कालीन एडिशनल कमिश्नर गौतम कोल भी मौजूद हैं। यह सीडी देखने के बाद दंगा पीडि़तों के वकील एचएस फुल्का ने कई गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने सीबीआई से पूछा कि सीडी में वीडियोग्राफी का समय और तिथि क्यों दर्ज नहीं है? सीडी की सत्यता एवं समय जांचने के लिए अमिताभ, धवन व कोल से पूछताछ क्यों नहीं की गई? इतना ही नहीं, शोकसभा स्थल पर जहां जगदीश टाइटलर की मौजूदगी दिखाई गई है, वहां बवाल हुआ था और पुलिस ने लाठीचार्ज तक किया था। इस संबंध में स्वयं गौतम कोल ने मामला दर्ज कर कार्रवाई की थी। उक्त कार्रवाई रिपोर्ट की प्रति के आधार पर टाइटलर की मौजूदगी की भी जांच सीबीआई ने नहीं की है। फुल्का ने सीबीआई द्वारा अदालत के समक्ष सबूत के तौर पर पेश की गई सभी आठ वीडियो सीडी देखने और उनकी जांच की भी मांग की जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। एसीएमएम राकेश पंडित की अदालत ने सीबीआई को निर्देश दिया कि वह 16 नवंबर को दोपहर तीन बजे कड़कड़डूमा कोर्ट स्थित प्रासीक्यूशन ब्रांच में पीडि़त पक्ष के अधिवक्ता को टाइटलर से संबंधित सभी सीडी दिखाए। अदालत ने मामले की सुनवाई के लिए अगली तिथि एक दिसंबर मुकर्रर की है। इस दिन वादी एवं परिवादी पक्षों के अधिवक्ताओं के बीच सीबीआई द्वारा पेश की गई क्लोजर रिपोर्ट के गवाह सुरेंद्र सिंह के बयान पर जिरह होगी। उल्लेखनीय है कि वर्ष 1984 के सिख विरोधी दंगे में सीबीआई ने जगदीश टाइटलर को क्लीन चिट देने के लिए उनकी दिनचर्या को आधार बनाया था। उसमें सीबीआई ने छह वीडियो टेप टाइटलर और दो वीडियो टेप दूरदर्शन से हासिल किए थे जिसमें दंगों के समय टाइटलर की मौजूदगी पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की शोकसभा पर दिखाई गई थी।

अजगरी मंसूबों के आगे विकास की दीवार

अरुणाचल की जमीन पर चीन की गिद्ध दृष्टि के सामने भारत ने विकास की बड़ी दीवार उठानी शुरू कर दी है। अरुणाचल से जुड़ी अपनी सीमा को अभेद्य छावनी बना चुके चीन के मंसूबे भांपते हुए भारत सरकार ने अपनी न्यूनतम प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने पर काम तेज कर दिया है। अरुणाचल प्रदेश में न्यूनतम प्रतिरोधक क्षमता का मतलब है मजबूत बुनियादी ढांचा, ताकि वहां सामरिक रूप से भारत प्रभावी रहे। इसीलिए चीन की सभी आपत्तियों को दरकिनार करते हुए बिना शोर मचाए, भारत ने अरुणाचल प्रदेश में विकास की रफ्तार तेज कर दी। यहां विकास के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा है दुर्गम पहाडि़यां व संपर्क मार्गो की कमी। इसे समझते हुए गृह मंत्रालय ने विकास की दृष्टि व सामरिक महत्व वाली 10 सड़कों के 196 किलोमीटर मार्ग की परियोजनाओं पर तीन माह पहले काम शुरू किया और दुर्गम पहाडि़यां काट कर 132 किलोमीटर राह समतल कर डाली। करीब 15 किलोमीटर सड़क पूरी तरह तैयार है। गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने मंत्रालय के कामकाज की जो रिपोर्ट जारी की, उससे साफ है कि सड़कों का जाल बिछाने का काम बेहद संजीदा तरीके से बिना किसी शिथिलता के आगे बढ़ रहा है। आंकड़ों पर नजर फिरायें तो अक्टूबर में 46.33 किलोमीटर सड़क का बुनियादी काम पूरा हो गया। साथ ही करीब पांच किलोमीटर सड़क पूरी तरह तैयार कर ली गई। इससे पिछले माह, यानी सितंबर में 45.27 किमी सड़क का बुनियादी काम पूरा हुआ, जबकि करीब पांच किलोमीटर सड़क पूरी तरह तैयार कर ली गई। अगस्त में भी 40.08 किलोमीटर सड़क का बुनियादी ढांचा तैयार हुआ और करीब 5.40 किमी. सड़क मुकम्मल की गई। वैसे, चीन से तुलना किया जाए तो यह विकास कुछ भी नहीं है। लेकिन केंद्र मान रही है कि चीन ने जिस तेजी से अपना बुनियादी ढांचा तैयार किया है, वह भारत के लिए मुश्किल है और उसकी जरूरत भी नहीं है। इसीलिए, सामरिक महत्व की जगहों पर सड़कें बनाने के साथ-साथ अरुणाचल प्रदेश ग्रामीण सड़क परियोजना के तहत पूरे प्रदेश में सड़कों का जाल बिछाने की तैयारी चल रही है।

चूडि़यों के शहर में कलाइयों की आजमाइश

( डॉ सुखपाल)-


यह चूडि़यों का शहर है, पर इन दिनों यहां कलाइयों की आजमाइश चल रही है। मुलायम सिंह के विरोधी उपचुनाव के बहाने उन्हें सपा के इस गढ़ में ही आइना दिखाने की चालें चल रहे हैं, तो सपा प्रमुख ने विरोधियों को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए अपनी पुत्रवधू डिम्पल को मैदान में उतार दिया है। बहू के पक्ष में पूरा परिवार फिरोजाबाद में डेरा डाले हुए है, तो कांग्रेस उम्मीदवार राजबब्बर के पक्ष में खुद राहुल गांधी ने वोट मांगकर संकेत दे दिया कि राजनीतिक दलों के लिए यह उपचुनाव किस कदर प्रतिष्ठापूर्ण है। बसपा ने एसपी सिंह बघेल को उम्मीदवार बनाया है जो सपा के टिकट पर जलेसर से सांसद रहे और पिछले चुनाव से पहले सपा से नाता तोड़ बसपा से चुनाव लड़े थे। इनके बीच भाजपा पांचवें सवार की तरह मैदान में है। अखिलेश यादव ने फिरोजाबाद सीट छोड़ते वक्त ही संकेत दे दिया था कि डिम्पल मैदान में उतर सकती हैं। जाहिर है, सपा के लिए यह प्रतिष्ठा की सीट बन गई है। शायद इसीलिए मुलायम सिंह ने यहां खुद कमान सम्भाल रखी है। प्रो.रामगोपाल, शिवपाल सिंह यादव, स्वयं अखिलेश, सांसद धर्मेन्द्र यादव पार्टी के तमाम दिग्गजों को लेकर दिनरात एक किये हैं। डिम्पल अपने को यहां की बहू बताकर वोट मांग रही हैं। कांग्रेस उम्मीदवार राजबब्बर पिछला चुनाव फतेहपुर सीकरी से कम मतों के अन्तर से हार गए थे। उनकी उम्मीदवारी का फैसला राहुल गांधी का था, इसलिए कांग्रेस के लिए भी यह प्रतिष्ठा की सीट बन गई है। राहुल की रैली के बाद यहां के सियासी महौल में काफी बदलाव देखने को मिल रहा है। इससे पहले दिग्विजय सिंह, रीता जोशी, प्रमोद तिवारी, सलमान खुर्शीद अजहरुद्दीन व जगदम्बिका पाल जैसे जैसे नेता यहां आ चुके हैं। बसपा की उम्मीदें कांग्रेस और सपा के बीच मत विभाजन पर टिकी हैं। सरकार के मंत्रियों की पूरी फौज यहां जुटी है। रामवीर उपाध्याय, नसीमुद्दीन सिद्दीकी, जयवीर सिंह और नारायण सिंह इनमें मुख्य हैं। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डा.रमापति राम त्रिपाठी पार्टी उम्मीदवार भानुप्रताप सिंह के पक्ष में सभाएं कर चुके हैं। इस संसदीय क्षेत्र में पांच विधानसभा क्षेत्र आते हैं। शिकोहाबाद में अशोक यादव व जसराना में रामप्रकाश यादव निर्दलीय हैं, जबकि फिरोजाबाद से शेख नासरुद्दीन सिद्दीकी व टूंडला से राकेश बाबू बसपा विधायक हैं। सिरसागंज के विधायक ठा.जयवीर सिंह प्रदेश सरकार में मंत्री हैं।

उप्र में राहुल की राह रोकेंगे दो राजकुमार


कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी की नजर यदि उत्तर प्रदेश में पार्टी की खोई जमीन वापस लाने पर है, तो वहां अब उनके ही हमउम्र दो अलग-अलग पार्टियों के राजकुमार उनकी राह रोकेंगे। लगभग तीन साल तक जुदा रास्तों के बावजूद राहुल को जवाब देने के लिए वे एक साथ आ गए हैं। मुलायम सिंह के सांसद पुत्र अखिलेश यादव और चौधरी अजित सिंह के सांसद पुत्र जयंत चौधरी वैसे तो इसकी शुरुआत फीरोजाबाद सीट पर कांग्रेस व उसके युवराज को निशाने पर लेकर करेंगे, लेकिन यह सिलसिला आगे भी चलता रहेगा। जानकारों का कहना है कि जयंत चौधरी चार नवम्बर को फीरोजाबाद लोकसभा सीट के लिए होने जा रहे उपचुनाव में सपा प्रत्याशी व अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव का प्रचार करने यूं ही नहीं जा रहे हैं। जनसभा के लिए भी टूंडला (वैशालीपुरम्) को चुना गया है। वह भी अनायास नहीं है। कांग्रेस प्रत्याशी राज बब्बर टूंडला में ही पले-बढ़े हैं, लिहाजा उन्हें व उनकी कांग्रेस को जवाब भी वहीं से दिया जाएगा। राहुल गांधी ने शुक्रवार को फीरोजाबाद में राज बब्बर के प्रचार के लिए हुई जनसभा में बीते बीस साल में उत्तर प्रदेश के पिछड़ने के लिए विपक्ष (खास कर सपा) पर निशाना साधा था। इसलिए जयंत व अखिलेश इस चुनाव में कांग्रेस और उसके भविष्य की असलियत मतदाताओं को बताएंगे। सपा प्रमुख मुलायम के पुत्र अखिलेश यादव व रालोद मुखिया अजित के पुत्र जयंत चौधरी अपने-अपने दलों के भावी सितारे हैं। दोनों दलों को अपने इन राजकुमारों से बहुत उम्मीदें हैं। वे नेता इन युवा नेताओं में अपना व पार्टी का भविष्य देख रहे हैं। तर्क यह भी है कि सपा व रालोद के दोनों सांसदों के पास उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में उनके पिता की राजनीतिक विरासत व संगठन है। वे युवा भी हैं और दोनों ने अच्छी पढ़ाई भी कर रखी है। इसलिए वे कांग्रेस और उसके युवराज को पूर्वी, मध्य और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हर तरह से जवाब दे सकते हैं। इसकी शुरुआत फिलहाल फीरोजाबाद उपचुनाव से होगी, लेकिन यह सिलसिला आगे भी चलेगा। वजह यह है कि लोकसभा चुनाव के महज पांच महीने के भीतर कांग्रेस जिस तरह से जीतकर उभर रही है, उस खतरे का अहसास दोनों दलों को है। लिहाजा उत्तर प्रदेश में राहुल गांधी को रोकना दोनों पार्टियों के लिए जरूरी हो गया है।

हरियाणा दिवस पर विशेष : यह कैसी उपलब्धि




हरियाणा के उदय के बाद हम 75 लाख 90 हजार से 2 करोड़ 11 लाख से अधिक हो गए। जनगणना के मामले में बेशक चीन विश्व में सबसे ऊपर हो पर घनत्व के मामले में हरियाणा ने उसको भी पछाड़ दिया है। वह भी सामान्य नहीं, बल्कि यहां का घनत्व चीन से लगभग दोगुना हो चुका है। प्रदेश का फरीदाबाद जिला ऐसा है, जिसकी जनसंख्या हर 9.7 साल में दोगुनी हो जाती है। इतनी तेज गति से जनसंख्या वृद्धि होने के कारण सरकार भी चिंतित है और इस वृद्धि को रोकने के लिए कारगर उपाय खोज रही है। जनगणना के मुताबिक हरियाणा की आबादी उदय के समय 75.90 लाख थी, जो अब 178.57 प्रतिशत बढ़ चुकी है। 2001 में प्रदेश की आबादी 211.4 लाख हो चुकी थी। वर्तमान में यह आंकड़ा कहां तक पहुंच गया होगा, अंदाजा लगाया जा सकता है। यहां गौर करने लायक बात यह है कि आबादी तो लगातार बढ़ रही है पर सुविधाएं व दूसरी जरूरतें बहुत कम पूरी हो पा रही हंै। प्रदेश में 2001 तक भी 55.5 प्रतिशत परिवारों के पास प्रसाधन (शौचालय) की सुविधा उपलब्ध नहीं है, जबकि ग्रामीण हरियाणा में 71.3 प्रतिशत परिवार इस सुविधा से वंचित हैं तथा 48.4 प्रतिशत घरों में बाथरूम नहीं हैं। 23.2 प्रतिशत परिवारों के पास गंदे जल की निकासी की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। भारत का घनत्व 325 है, जबकि हरियाणा का जनसंख्या घनत्व 478 है। अमेरिका का घनत्व 30 व कनाडा का घनत्व केवल 3 है। जनसंख्या के मामले में विश्र्व में सबसे अग्रणी माने जाने वाले चीन का घनत्व केवल 237 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है, जो कि हरियाणा से लगभग आधा है। देश में दस लाख से अधिक की आबादी वाले 35 शहर हैं, जिनमें फरीदाबाद शहर भी शामिल हैं। इस शहर की आबादी 10.55 लाख है और हर 9.7 वर्ष में दोगुनी हो जाएगी। देश के बड़े राज्यों में हरियाणा की शहरी जनसंख्या वृद्धि की प्रतिशतता सर्वोच्च है। हमको सबसे पहले जनसंख्या वृद्धि पर रोक लगाने के लिए कारगर कदम उठाने होंगे।

मिली जीत


आस्ट्रेलिया 229/5 भारत 230/4 युवराज 78 (96 गेंद) धौनी 70 ( 75 गेंद) नई दिल्ली में तीसरे वनडे में शतकीय साझेदारी के दौरान एक-दूसरे को बधाई देते कप्तान महेंद्र सिंह धौनी और युवराज सिंह। भारत ने मैच 6 विकेट से जीता।

डेरीबा मर्गा ने जीती दिल्ली हाफ मैराथन


नई दिल्ली। मैराथन में अफ्रीकी देशों का दबदबा कायम रखते हुए विश्व और गत चैम्पियन इथोपिया के डेरिबा मर्गा ने रविवार को यहां एयरटेल दिल्ली हाफ मैराथन का पुरुष वर्ग का खिताब जीत लिया जबकि महिला वर्ग में कीनिया की विश्व चैम्पियन मैरी किटानी ने बाजी मारी।

भारतीयों में सेना के दीपचंद सहराम पुरुष जबकि उत्तर प्रदेश की सुकन्या माली महिला वर्ग में चैम्पियन रही। गत चैम्पियन मर्गा अपने खिताब की सफलतापूर्वक रक्षा करते हुए 59 मिनट 54 सेकेंड का समय लेकर चैम्पियन बने। मर्गा के हमवतन इशेकू वेनदिनु एक घंटा और दो सेकेंड का समय लेकर दूसरे स्थान पर रहे जबकि एक घंटा और चार सेकेंड के साथ कीनिया के विल्सन किटसैंग को तीसरे स्थान से संतोष करना पड़ा।

दूसरी तरफ महिला वर्ग में विश्व चैम्पियन मैरी ने इथोपियाई धावकों की कड़ी चुनौती से उबरते हुए एक घंटा छह मिनट और 54 सेकेंड के साथ दिल्ली हाफ मैराथन के खिताब पर कब्जा जमाया। इथोपिया की आएलु व्युडे [एक घंटा सात मिनट 58 सेकेंड] और अबेरु केबिडे [एक घंटा सात मिनट 59 सेकेंड] क्रमश: दूसरे और तीसरे स्थान पर रही।

मैराथन चैम्पियन को 25000 डालर की इनामी राशि मिली जबकि दूसरे स्थान पर रहने वाले धावक को 15000 डालर और तीसरे स्थान पर रहने वाले धावक को 10000 डालर दिए गए। भारतीय धावकों में पिछले साल तीसरे स्थान पर रहने वाले दीपचंद ने अपने प्रदर्शन में सुधार करते हुए एक घंटा चार मिनट का समय लिया जबकि रेलवे के संतोष कुमार एक घंटा पांच मिनट दस सेकेंड के साथ दूसरे स्थान पर रहे।

पुरुष वर्ग में रेलवे के ही सोजी मैथ्यूज को एक घंटा पांच मिनट 18 सेकेंड के साथ तीसरे स्थान से संतोष करना पड़ा। दीपचंद, संतोष और मैथ्यूज सभी धावकों के बीच क्रमश: 17वें, 18वें और 19वें स्थान पर रहे।

भारतीय धावकों के महिला वर्ग में उत्तर प्रदेश का दबदबा रहा और शीर्ष तीन स्थान उसी की धावकों की झोली में गए।

सुकन्या एक घंटा 20 मिनट 11 सेकेंड के साथ भारतीय महिलाओं में सर्वश्रेष्ठ रही जबकि गोरखपुर की अनुराधा सिंह ने एक घंटा 22 मिनट सात सेकेंड के साथ दूसरा स्थान हासिल किया। ए दोनों कुल धावकों में क्रमश: 22वें और 24वें स्थान पर रही।

महिला वर्ग में तीसरा स्थान आगरा की कमलेश बघेल ने हासिल किया। वह एक घंटा 23 मिनट 45 सेकेंड का समय लेकर कुल 25वें स्थान पर रहीं।

गोल्फ तो बस बहाना है, कश्मीर को स्वर्ग दिखाना है


जहाज से नीचे उतरते हुए लगा कि जो लोग यह कहते हैं कि स्वर्ग आसमान से उपर कहीं है, वे शायद झूठ बोलते हैं क्योंकि हमने जहाज में बैठे हुए ऊपर से कश्मीर देखा तो महसूस हुआ कि स्वर्ग नीचे ही है, यह उद्गार यहां रॉयल स्पि्रंग गोल्फ कोर्स में भाग लेने आए 20 देशों के राजदूतों ने व्यक्त किए। जिसे देखो, वही कहता था कि इट्स अमेजिंग, वंडरफुल, हैवन ऑन द अर्थ। माहौल ही कुछ ऐसा था। गुनगुनी धूप, एक तरफ जब्रवान की पहाडि़यां और दूसरी तरफ डल झील, बीच में हरी-हरी घास से ढका रॉयल स्पि्रंग गोल्फ कोर्स। अंबैस्डर्स गोल्फ कप प्रतियोगिता में मलेशिया, दक्षिण अफ्रीका,जिंबाबवे, कंबोडिया, ईरान, थाईलैंड समेत विभिन्न 20 मुल्कों के राजदूत अपने हाथ आजमा रहे थे। राज्य के पर्यटन मंत्री न्वांग रिगजिन जोरा ने कहा कि हम इन्हें यहां के हालात दिखाने लाए हैं। ये लोग जब वापस अपने देश जाएंगे तो हमारे पर्यटन राजदूत बनकर जाएंगे। हम चाहते हैं कि कश्मीर फिर से दुनिया भर के पर्यटकों की पहली पसंद बने। गोल्फ में हाथ आजमाने के बाद जिंबाबवे के राजदूत जोनाथन उपवांशे कश्मीर की खूबसूरती की तारीफ करते हुए कहा कि जहाज में बैठे जब हमने ऊपर से कश्मीर को देखा तो अपनी आंखों पर यकीन ही नहीं हुआ कि धरती का एक हिस्सा इतना खूबसूरत है। इस बार तो मैं यहां गोल्फ खेलने आया हूं ,लेकिन जल्द ही मेरी यहां बतौर पर्यटक बन सपरिवार आने की तमन्ना है। दक्षिण अफ्रीका के राजदूत फ्रांसिल मैलॉय ने कहा कि टूडे इज द मोस्ट मेमोरेबल एंड एंजायबेल डे ऑफ माई होल लाइफ। आय एम वैरी थैंक्सफुल टू लोकल गवर्नमेंट हू गेव में दिस आपाच्र्यूनिटी को प्ले गोल्फ हियर।

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