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रविवार, 29 नवंबर 2009

शिल्पा को अब बेबी का इंतजार


29 नवंबर, 2009
मुंबई। बॉलीवुड अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी को शादी किए एक हफ्ता भी नहीं हुआ और अब वह अपने बेबी के बारे में प्लान कर रही हैं। वह जल्दी से जल्दी मम्मी बनना चाहती हैं। उनका ख्याल है कि वैसे भी उन्होंने शादी काफी लेट की हैं इसलिए बेबी के लिए अब वो और इंतजार नहीं करेंगी। खैर फिलहाल तो ये नव विवाहित जोडा बहामास की खूबसूरत वादियों में हनीमून मनाने जा रहा हैं। पर शेट्टी फैमिली और कुंद्रा फैमिली का वेडिंग सेलीब्रेशन यहीं खत्म नहीं हो रहा।
हनीमून से लौटते ही राज दोनों फैमिलीज को साथ लेकर मैडिटेरियन कू्रज पर क्रिसमस मनाने ले जा रहे हैं। शिल्पा मुस्कुराते हुए इतना थक गई है कि उनके जबडे में भयानक दर्द होने लगा हैं। उनका कहना है कि अब उन्हें समझ आ रहा है कि ज्यादातर सेलिब्रिटी रिसेप्शन को क्यों टाल देते हैं। शिल्पा के अनुसार गेस्ट को संभालने से ज्यादा मुश्किल काम मुस्कुराना हैं।

अश्लीलता से गीता जयंती उत्सव बदरंग


कुरुक्षेत्र विश्वविख्यात ब्रह्मसरोवर तट पर चल रहे कुरुक्षेत्र गीता जयंती उत्सव में पटियाला के नार्थ जोन कल्चरल सेंटर के कलाकारों ने अपने भोंडे प्रदर्शन से उत्सव की बदरंग कर दिया। विवाह-शादियों में नाचने वाले कलाकारों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम के नाम पर अश्लीलता का ऐसा नंगा नाच किया कि वहां से गुजरने वाली महिलाओं की आंखें शर्म से झुक गई। यह सब पुलिस की आंखों के सामने होता रहा और किसी ने उन्हें टोकने की जहमत तक नहीं उठाई। कई सालों से पटियाला के उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (एनजेडसीसी) के कलाकार गीता जयंती उत्सव की शोभा बढ़ा रहे हैं, लेकिन साल-दर साल कलाकारों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ इसके स्तर में गिरावट आ रही है। इस वर्ष समारोह में विधाओं की संख्या बढ़ाने के लिए एनजेडसीसी ने विवाह समारोहों में लड़कियों के वेश में नृत्य करने वालों को ही बुला लिया। इन कलाकारों द्वारा प्रस्तुत भोंडे नृत्य ने समारोह की गरिमा को तार-तार कर दिया। अनुसुइया घाट पर शनिवार दोपहर कार्यक्रम पेश करने आई पटियाला के पांखर निवासी भोलादीन की नाचर टीम में शामिल लड़कियों की वेशभूषा में आए कलाकारों ने तरह-तरह की भावभंगिमाओं से मनचले लोगों को घाट किनारे एकत्रित कर लिया। उसके बाद तो दर्शकों से दस-बीस रुपये के नोट हासिल करने के लिए सभी सीमाएं लांघ दी। दर्शकों ने भी अपने पैसे की पूरी कीमत वसूल की। नोट देने के बदले उन्होंने कलाकारों से छेड़छाड़ की। यह सब वहां उपस्थित पुलिसकर्मी चुपचाप देखते रहे। कार्यक्रम पेश करने के बाद ये कलाकार कार्यक्रम अधिकारी महेंद्र सिंह के पास पहुंचे और पारिश्रमिक के लिए फार्म भरकर दिया। अश्लील कार्यक्रम पेश करने वाले दल के नेता भोलादीन ने बताया कि उनका दल शादियों में नृत्य पेश करता है। अभी वे और उनके कुछ साथी रोपड़ में एक शादी समारोह में भाग लेने जा रहे हैं, जबकि उनके साथ नृत्य पेश कर रही लवली व कुछ साथी घरौंडा में एक विवाह में कार्यक्रम पेश करेंगे।

पेड़ों का सफल ट्रांसप्लांट


हिसार- अब सड़क के आड़े आने वाले पेड़ों को काटने की जरूरत नहीं है। ट्रांसप्लांट तकनीक से उन्हें दूसरे स्थान पर सफलतापूर्वक लगाया जा सकता है। राजस्थान में खेजड़ी के पेड़ों की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले बिश्नोई समाज के जनक गुरु जंभेश्वर महाराज के नाम से विख्यात गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (गुजविप्रौवि) ने इस तकनीक का इस्तेमाल कर पेड़ों को ट्रांसप्लांट करने का करिश्मा कर दिखाया है। इस तकनीक से विश्वविद्यालय के हार्टीकल्चर विभाग ने दो चरणों में खजूर के 38 पेड़ सफलता से ट्रांसप्लांट किए हैं। इसके अलावा सड़क निर्माण के आड़े आ रहे करीब 25 अन्य पेड़ों को भी ट्रांसप्लांट करने का कार्य जारी है। दरअसल पर्यावरणवादी संत के नाम से जुड़े इस विश्वविद्यालय में आधुनिक पर्यावरण संरक्षण की शुरुआत गत अप्रैल माह में तब हुई, जब विश्वविद्यालय प्रशासन नेक (नेशनल एक्रिडीशन काउंसिल) की टीम के स्वागत की तैयारियों में जुटा हुआ था। विश्वविद्यालय को फिर से ए ग्रेड दिलाने के लिए हर क्षेत्र में सुधार किया गया लेकिन नए विश्वविद्यालय में
पेड़ों से ज्यादा संख्या पौधों की थी। इसी दौरान विश्वविद्यालय के कुलपति डा. डीडीएस संधू ने एक खबर पढ़ी की चीन में पेड़ों को ही ट्रांसप्लांट कर दिया जाता है। इस पर उन्होंने विश्वविद्यालय के कार्यकारी अभियंता एवं हार्टीकल्चर विभाग के अध्यक्ष अशोक अहलावत से बात की। इसके बाद अहलावत ने इस पर काम शुारू किया। उन्होंने विश्वविद्यालय के जंगल में खड़े 25 से 30 वर्ष पुराने खजूर के 18 पेड़ों को ट्रांसप्लांट करवाया। यह कार्य इस वर्ष 5 अप्रैल से शुरू हुआ और लगभग एक सप्ताह में पूरा कर लिया गया। पेड़ों का ट्रांसप्लांट पूरी सफल रहता है या नहीं, यह स्पष्ट होने में करीब छह माह का समय लग जाता है। ट्रांसप्लांट किए गए 18 पेड़ों में 15 हरे-भरे शान से खड़े हैं। इसके बाद सिंतबर माह में खजूर के 20 और पेड़ों को ट्रांसप्लांट किया गया। यह कार्य 20 सितंबर से शुरू हुआ और करीब 10 दिनों में पूरा कर लिया गया। इस चरण की सफलता के बारे में पूरी तरह जानकारी तो मार्च, 2010 में चल पाएगी लेकिन अभी इनमें से सारे पेड़ सुरक्षित व अच्छी हालत में हैं। इसके बाद जब विश्वविद्यालय के गेट नंबर तीन से प्रशासनिक भवन तक सड़क चौड़ी करने का काम शुरू हुआ तो इस काम के आड़े भी 25 पेड़ आ गए। चूंकि पेड़ों को काटना उचित नहीं होता, इसलिए इन पेड़ों को भी अब ट्रांसप्लांट किया जा रहा है। यह काम अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में शुरू हुआ है और दिसंबर के अंत तक इसके पूरा हो जाने की उम्मीद है। नए विवि में पुराने पेड़ : संधू विवि कुलपति डा. डीडीएस संधू ने बताया कि गुजविप्रौवि प्रदेश का सबसे नए विश्वविद्यालयों में है, लेकिन पुराने पेड़ों के बिना अच्छा लुक नहीं आ सकता। दूसरी तरफ विश्वविद्यालय का नाम भी पर्यावरण के संरक्षक के नाम पर है, इसलिए यहां पर पेड़ काटना भी ठीक नहीं। इसी जद्दोजहद के दौरान उनकी नजर जब चीन में पेड़ ट्रांसप्लांट की खबर पर पड़ी तो उन्होंने हार्टीकल्चर विभाग से बात की और अशोक अहलावत ने वह काम करके दिखा दिया। इंटरनेट से सीखी तकनीक : अहलावत विश्वविद्यालय के हार्टीकल्चर विभाग के प्रधान एवं कार्यकारी अभियंता अशोक अहलावत ने बताया कि वह अब तक खजूर के 18 पेड़ ट्रांसप्लांट कर चुके हैं तथा अब अशोका, महानीम, नीम व बड़ के पेड़ों को ट्रांसप्लांट करने का काम चल रहा है। उन्होंने बताया कि यह सारा कार्य उन्होंने इंटरनेट की मदद से ट्रांसप्लांट की तकनीक पढ़कर किया है।

माधुरी को दगा दे गई बलुई माटी


इलाहाबाद- ये तो तय है कि ठंडी के बाद गर्मी आयेगी लेकिन माधुरी आयेगी कि नहीं इसमें संशय है। माधुरी गर्मी का वह फल है जिसको लोग बड़े ही चाव से खाना पसंद करते हैं। तरबूज की माधुरी नामक प्रजाति के बारे में जो लोग जानते हैं उनके मुंह में अगर अभी पानी आ गया हो तो बड़ी बात नहीं लेकिन इस फल के बारे में एक विडम्बना जुड़ गयी है। इलाहाबाद, कौशाम्बी और फतेहपुर जिलों में बड़े पैमाने पर पैदा होने वाले इस फसल पर सूखे की मार पड़ गयी है। अबकी तरबूज सोना जैसा हो जाये तो ताज्जुब नहीं। दरअसल तरबूज और खरबूज का उत्पादन नदियों के कछार में होता है। बारिश कम होने की वजह से इस वर्ष गंगा-यमुना में बाढ़ नहीं आयी। इसके कारण पुरानी रेत बह नहीं सकी और बाढ़ के साथ आने वाली उर्वरा बलुई मिट्टी रेत पर नहीं पहुंची। इसी वजह से यहां के तरबूज और खरबूज के उत्पादक किसान सहमे हुए हैं। उनका मानना है कि ऐसी स्थिति में उत्पादन तो प्रभावित होगा ही कहीं लागत भी न डूब जाये। इलाहाबाद, कौशाम्बी, फतेहपुर और मिर्जापुर आदि जिलों में गंगा-यमुना की रेती पर 15 हजार हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्रफल में तरबूज और खरबूज की अच्छी पैदावार है। हर साल नवंबर के अंतिम और दिसंबर के पहले सप्ताह से बुवाई शुरू हो जाती है और मार्च तक फल बाजार में पहुंच जाते हैं। दो महीने तक बाजार पर इनका कब्जा रहता है। अपनी मिठास और गुण के कारण यहां के तरबूज और खरबूज दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, बंगलुरू, भोपाल आदि शहरों के अलावा विदेशों में धूम मचाते हैं। खाड़ी देशों में तो इनकी खूब मांग रहती है। इलाहाबाद के फाफामऊ, गद्दोपुर, भोरहूं, सुमेरी का पूरा, मातादीन का पूरा, मलाक हरहर, रंगपुरा, जैतवार डीह, बहमलपुर सहित दर्जनों गांवों के किसान बताते हैं कि बिना उर्वरा बलुई मिट्टी के तरबूज का उत्पादन मुश्किल है। कई बार ऐसा हो भी चुका है। तरबूज किसान रामकैलाश, विजय बहादुर, रामजियावन, भुल्लर यादव का कहना है कि इस बार तो बालू के रेत भी नहीं डूब सके हैं। इस कारण रेत पर पुराना और नीरस बालू बचा है। इसीलिए हम लोग तरबूज की खेती से कतरा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर तरबूज और खरबूज की पैदावार न होने अथवा कम होने पर एक तो इसके दाम तेजी से बढ़ेंगे और स्वाद भी बदल जाने की बात कही जा रही है। हालांकि यहां के मार्केट में उड़ीसा और कई अन्य जगहों से तरबूज की आमद होती है लेकिन उनमें वह बात नहीं होती जो यहां के तरबूज की प्रजाति हिरमंजी, कोहिनूर और माधुरी में होती है। हालांकि उड़ीसा से आने वाले टांडा नामक तरबूज की प्रजाति अच्छी मानी जाती है। कछार में उर्वरा शक्ति की कमी को कृषि वैज्ञानिक भी सही मान रहे हैं। इस बाबत डॉ.आनंद कहते हैं कि गंगा के पानी में हिमालय की पहाडि़यों से अब भी तमाम तरह की उर्वरा शक्तियां मिट्टी में आती हैं। बारिश के दौरान खेतों की उर्वर मिट्टी भी बह कर नदी में आती है जो रेत पर जम जाती है। तरबूज व्यापारी रमेश खन्ना, हेमंत सोनकर, बब्बू पंडित, ननकेश निषाद कहते हैं कि इस बार तरबूज के महंगे होने के आसार से धंधा भी प्रभावित होगा।

भारत और कनाडा के बीच परमाणु करार




भारत में अपार संभावनाएं.कनाडा के प्रधान मंत्री स्टीफ़ेन हार्पर ने घोषणा की है कि परमाणु उर्जा के क्षेत्र में सहयोग के लिए भारत के साथ बातचीत संपन्न हो चुकी है. अब इस सिलसिले में दोनों देशों के बीच एक समझौता किया जाएगा.

त्रिनिदाद व टोबैगो की राजधानी पोर्ट ऑफ़ स्पेन में राष्ट्रमंडल शिखर सम्मेलन के दौरान बातचीत संपन्न हुई है. कनाडा के प्रधान मंत्री के कार्यालय से जारी किए गए एक वक्तव्य में कहा गया है कि ऐसे समझौते के फलस्वरूप भारत के असैनिक परमाणु उर्जा बाज़ार के साथ साझेदारी बढ़ेगी और कनाडा की कंपनियों को तेज़ी से बढ़ते विश्व की इस अर्थनीति में और सक्रिय होने का मौका मिलेगा. इस समझौते के बाद कनाडा के उद्यम भारत के साथ नियंत्रित रूप से परमाणु सामग्रियों, उपकरणों व तकनीक का आयात व निर्यात कर सकेंगे. सरकारी सूचनाओं के अनुसार परमाणु उर्जा व तकनीक के क्षेत्र में कनाडा के वार्षिक निर्यात का परिणाम लगभग 1 अरब 13 करोड़ डालर के बराबर है. अब भारत का असैनिक परमाणु क्षेत्र इस विशाल बाज़ार के साथ जुड़ पाएगा.

इस वर्ष के आरंभ में कनाडा के व्यापार मंत्री स्टॉकवेल डे ने सूचित किया था कि देश के सरकार नियंत्रित संस्थान ऐटमिक एनर्जी ऑफ़ कनाडा ने भारत के साथ नए परमाणु रिएक्टर के निर्माण के एक प्राथमिक अनुबंध पर हस्ताक्षर किया है. दोनों देशों के बीच समझौते के बाद ऐसी परियोजनाओं को हरी झंडी मिल जाएगी.

कनाडा के रिएक्टर से प्राप्त प्लुटोनियम का परमाणु हथियार के लिए इस्तेमाल के बाद 1974 में कनाडा ने भारत के साथ परमाणु सहयोग ख़त्म कर दिया था. नए समझौते को इस क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग की दिशा में एक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है.

कनाडा आठवां देश है जिसके साथ भारत ने असैन्य परमाणु करार किया है. अमेरिका, रूस, फ्रांस, मंगोलिया, कज़ाखस्तान, अर्जेंटीना और नामीबिया के साथ भारत पहले ही करार कर चुका है.

असर आंकने में जुटी दुनिया


नई दिल्ली: दुनिया भर की सरकारें दुबई के कर्ज संकट के आकलन में जुट गई हैं। अमेरिका, ब्रिटेन से लेकर भारत तक के शेयर बाजार और केंद्रीय बैंक दुबई के कारोबार से जुड़े कंपनियों के जोखिम का हिसाब-किताब निकालने लगे हैं। पर्यवेक्षकों का कहना है कि दुबई के कर्ज संकट की वास्तविक तस्वीर मौजूदा से काफी बड़ी हो सकती है और वैश्विक व खासतौर पर पूर्वी व दक्षिण एशिया बाजार में उम्मीद से ज्यादा हड़कंप मचाने की क्षमता रखती हैं। वैसे दुनिया की निगाहें अबूधाबी की दवा पर हैं जो दुबई को मिल सकती है। लेकिन इस दवा की मात्रा और असर को लेकर असमंजस है। अगला हफ्ता वित्तीय बाजारों के लिए उथल-पुथल भरा हो सकता है। यही कारण है दुनिया की सरकारें अपने वित्तीय बाजारों को ढांढस बंधाने में लगी हैं। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि दुबई संकट कोई बहुत बड़ा नहीं है और इसको लेकर ज्यादा बदहवासी नहीं फैलानी चाहिए। भारत पर भी इसका असर बहुत थोड़ा होगा। दूसरी तरफ प्रवासी भारतीय मामलों के मंत्री वायलार रवि ने कहा है कि दुबई संकट के बावजूद वहां काम करने वाले भारतीय पलायन नहीं करेंगे। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री गार्डन ब्राउन भी आशंकाओं पर पानी डालने आगे आए हैं। दुबई के संकट को लेकर जितनी मुंह उतनी बातें वाली स्थिति है। दुनिया के पर्यवेक्षक मान रहे हैं कि दुबई के बवंडर में तमाम बैंकों और निवेश कंपनियों के खरबों डालर फंस सकते हैं जिनका सीधा संबंध दुबई सरकार की कंपनियों से तो नहीं है मगर उनका दुबई में निवेश रहा है। इसलिए बैंक व वित्तीय निवेश अपनी रिस्क असेसमेंट प्रणाली को सक्रिय कर चुके हैं। माना जा रहा है कि अगले सप्ताह इस संदर्भ में कुछ और खुलासे हो सकते हैं। दुबई को इस संकट से बचाने की वैसे संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में और खासतौर पर इसके पड़ोसी अबूधाबी में जोरदार कोशिशें शुरू हो गई हैं। संकेत यह हैं कि अबूधाबी की अगुवाई में यूएई के कुछ प्रमुख बैंक दुबई को वित्तीय राहत पहुंचाने के लिए एक पैकेज का ऐलान कर सकते हैं। अबूधाबी ने इसी सप्ताह दुबई की प्रमुख निर्माण कंपनियों को 5 अरब डालर की मदद दी है। फरवरी में अबूधाबी का केंद्रीय बैंक 10 अरब डालर दे चुका है। खाड़ी के अन्य देशों ने भी यूएई सरकार पर दुबई को बचाने का दबाव बनाया हुआ है क्योंकि इस संकट का असर पूरे क्षेत्र पर पड़ने की संभावना व्यक्त की जा रही है। अबूधाबी के पास 900 अरब डालर का अतिरिक्त कोष पड़ा हुआ है। अबूधाबी जिन शर्तो पर दुबई को वित्तीय मदद देने को तैयार है उसे अपनाने के लिए दुबई को अपना ढांचा बदलना पड़ सकता है। अबूधाबी का कहना है कि दुबई को अपने रीयल एस्टेट, सेवा व पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था और उदारीकरण के प्रक्रिया को कुछ धीमा करना पड़ेगा। इसके अलावा अबूधाबी और दुबई के शाही परिवारों के बीच आपसी तालमेल पर भी बहुत कुछ निर्भर करेगा। पर्यवेक्षकों का कहना है कि दुबई की बीमारी का जो इलाज अबूधाबी बता रहा है वह इसे आंशिक तौर पर ही राहत देगा। क्योंकि इस संकट से दुबई का पूर ढांचा चरमरा सकता है, जिसके परोक्ष असर बहुत गहरे होंगे।

अभी भी झुक रही है कुतुबमीनार


नई दिल्ली : भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के तमाम दावों के विपरीत विश्वविख्यात स्मारक कुतुबमीनार अभी भी झुक रही है। इसका खुलासा ऑर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया द्वारा पांच साल के बाद इस माह किए गए तकनीकी अध्ययन में हुआ है। मीनार में झुकाव प्रति वर्ष ढाई सेकेंड के आसपास है। ज्ञात हो कि सेकेंड, कोण या झुकाव मापने की डिग्री और मिनट के बाद सबसे छोटी इकाई है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) पिछले साल से कह रहा था कि कुतुब मीनार का झुकाव रुक गया है। एएसआई के अधिकारियों ने बताया था कि उन्होंने कुतुबमीनार के झुकने के कारण के बारे में पता लगा कर पूरा बंदोबस्त कर दिया है। बताया गया था कि बरसाती पानी से मीनार की जड़ में 45 फुट गहराई में लगे लाल पत्थर को नुकसान पहुंचने के कारण मीनार झुक रही थी। इसके बाद कुतुबमीनार के ड्रेन सिस्टम को दुरुस्त किया गया था। मगर ताजा अध्ययन से पता चला है कि कुतुबमीनार अभी भी दक्षिणी पश्चिमी दिशा में झुक रही है। ज्ञात हो कि कुछ माह पहले संसद में इस मामले को लेकर हंगामा हुआ था। इसके बाद केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय ने कुतुबमीनार के झुकाव का पता लगाने के लिए प्रति वर्ष भू-तलीय सर्वेक्षण कराने के निर्देश दिए थे। जिसके आधार पर आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की देहरादून स्थित भू-तलीय अनुसंधान शाखा ने 4 नवंबर से कुतुबमीनार का तकनीकी अध्ययन शुरू किया था, जो अब पूरा हो चुका है। सर्वे के लिए पिछले वर्षो के निर्धारित ईस्ट और वेस्ट बिंदुओं को लिया गया था। पूरे अध्ययन में एक सौ से भी अधिक बार एक ही प्वाइंट से कुतुबमीनार का सर्वेक्षण किया गया। यह सर्वेक्षण तापमान को ध्यान में रखते हुए सुबह, दोपहर, शाम व रात को किया गया। सूत्रों से पता चला है कि इस अध्ययन में इस बात के पुख्ता प्रमाण मिले हैं कि कुतुबमीनार दक्षिण पश्चिम की ओर झुक रही है। जिसके झुकाव की सालाना दर 0.5 से लेकर ढाई सेकेंड के बीच मिली है। इस हिसाब से यदि हम प्रति वर्ष का आकलन करें तो 2004 के बाद अब तक कुतुबमीनार इस दिशा में साढ़े 12 सेकेंड झुक चुकी है। इस मामले की रिपोर्ट संस्थान के देहरादून स्थित कार्यालय द्वारा आगामी कुछ महीनों में ही सरकार को सौंपी जाएगी। ज्ञात हो कि 12 वीं सदी में बनी कुतुबमीनार का 1952, 1972 और 1983 में भूगणितीय सर्वेक्षण किया जा चुका है। मगर इस दौरान कोई गड़बड़ी सामने नहीं आई। एएसआई द्वारा 2004 में कराए सर्वेक्षण में यह बात सामने आई कि 1984-2004 के बीच कुतुबमीनार दक्षिण पश्चिम की दिशा में झुकी थी।

बाल ठाकरे की बहू को कांग्रेस ने दिखाई हरी झंडी मुंबई


मुंबई: शिवसेना सुप्रीमों बाल ठाकरे के परिवार में एक और राजनीतिक बगावत की जमीन तैयार हो गई है। बाल ठाकरे की बहू स्मिता ठाकरे के कांग्रेस में शामिल होने की इच्छा पर कांग्रेसजनों को कोई एतराज नहीं। कांग्रेस का कहना है कि स्मिता ठाकरे बहुत जल्द पार्टी में शामिल होने वाली हैं। कांग्रेस ने यह भी बताना शुरू कर दिया है कि शिवसेना में बाल ठाकरे के बाद किसी के नेतृत्व पर लोगों को भरोसा नहीं रह गया है। स्मिता ने मीडिया के जरिये खुले आम बताया है कि वह शिवसेना से क्षुब्ध हैं और विकल्प खुले रख कर चल रही हैं। उन्होंने सोनिया गांधी और राहुल गांधी की तारीफ करते हुए कांग्रेस में जाने के संकेत भी दिए। इससे जहां कांग्रेस में उत्साह है वहीं शिवसेना को कुछ कहते नहीं बन रहा। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने कहा कि जब स्मिता अपने किसी फैसले का ऐलान करेंगी तभी वह कोई टिप्पणी करेंगे। महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता और पूर्व मंत्री हुसैन दलवई ने स्मिता के कांग्रेस में आने की पुष्टि की। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि वह कब कांग्रेस में शामिल होने जा रही हैं। उन्होंने कहा कि इसकी प्रक्रिया चल रही है। नई दिल्ली में कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता शकील अहमद ने भी कहा कि यह अच्छी बात है कि स्मिता ने कांग्रेस और इसके नेतृत्व में भरोसा जताया है और पार्टी द्वारा किए जा रहे काम को सराहा है। स्मिता की बातों से उत्साहित कांग्रेस के एक और प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि शिवेसना अतीत की पार्टी बन कर रह गई है, जो वर्तमान की अनदेखी कर रही है और भविष्य को नुकसान पहुंचा रही है। सोमवार की सुबह जब मीडिया के जरिये स्मिता के मन की बात सार्वजनिक हुई तो उन्हें और टटोलने के लिए पत्रकारों ने उनके घर का रुख किया। वहां उनके बेटे राहुल पत्रकारों के सामने आए। उन्होंने बताया कि उनकी मां राजनीति में आगे बढ़ना चाहती हैं।

शुक्रवार, 27 नवंबर 2009

अब लद जाएंगे चोली के दिन!




रिसर्चरों ने एक ऐसी डिवाइस तैयार की है जिसके इस्तेमाल से महिलाओं को अब ब्रा पहनने की जरूरत नहीं पड़ेगी
। इस डिवाइस को ब्रेस्ट के नीचे एक सेंटीमीटर से भी कम का चीरा लगाकर फिट किया जाता है और इसका इस्तेमाल आजीवन किया जा सकता है। इस 'इंटरनल ब्रा' के इस्तेमाल के बाद चोली पहनने की दरकार नहीं पड़ेगी, अलबत्ता महिला खिलाड़ियों को इसकी जरूरत पड़ सकती है।

'कप ऐंड अप' नामक इस डिवाइस को तैयार करने वाले इसराइली रिसर्चर एयाल गुर ने बताया कि इसे फिट करने में कम से कम 40 मिनट का वक्त लगता है। यह शेप में बिल्कुल फैब्रिक ब्रा की ही तरह है, लेकिन यह सिलिकन का बना हुआ है।

बेल्जियम के रिसर्चरों ने जिस महिला पर यह प्रयोग किया, उससे पहले उन्हें लगभग एक साल तक कई टेस्ट करने पड़े थे। इस सर्जरी के परिणामों से वह महिला बेहद खुश थी। सर्जरी के दौरान डॉक्टरों ने दोनों ब्रेस्ट के नीचे एक सेंटीमीटर से भी कम का चीरा लगाया और इसके बाद सिलिकन ब्रा को एक सेंटीमीटर अंदर तक फिट किया। टाइटेनियम स्क्रू और किसी मजबूत मेटल वाले बहुत पतले धागे की मदद से इन्हें पसलियों की हड्डियों से इस कदर जोड़ा गया जिससे ब्रेस्ट का शेप वांछित हिसाब से फिट किया जा सके।

इस इंटरनल ब्रा को ऑरबिक्स मेडिकल कंपनी ने तैयार किया है और गुर के मुताबिक यूरोप के बाजारों में यह अगले 18 महीनों के अंदर उपलब्ध हो जाएगा। गुर ने बताया कि बेस्ट अपलिफ्टमेंट की पारंपरिक पद्धति की तुलना में यह सर्जरी कम खर्चीली है।

सेंसेक्स 223 अंक लुढ़का, निफ्टी 64 अंक नीचे



कारोबारी हफ्ते के अंतिम दिन भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुए। बीएसई सेंसेक्स 223 अंकों की कमजोरी के साथ 16,632 पर रहा। निफ्टी 64 अंक की गिरावट के साथ 4,941 पर बंद हुआ। एनएसई के मंझोले सूचकांक सीएनएक्स मिडकैप में 1.49% की कमजोरी रही। बीएसई मिडकैप सूचकांक में 1.35% और बीएसई स्मॉलकैप में 2.14% की गिरावट आयी।
एशियाई शेयर बाजारों में भारी गिरावट के मद्देनजर आज सुबह भारतीय शेयर बाजारों की भी शुरुआत काफी कमजोर हुई। बीएसई सेंसेक्स खुलते ही कल के बंद स्तर से 16,855 से 136 अंक नीचे 16,719 तक चला गया। निफ्टी भी 5,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर के नीचे चला गया। उसके बाद जैसे-जैसे शेयर बाजार का कारोबार आगे बढ़ता गया। वैसे-वैसे शेयर बाजार की गिरावट भी बढ़ती गयी। दोपहर करीब 1.10 बजे बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का सेंसेक्स 618 अंक यानी 3.67% के नुकसान के साथ 16,237 पर चला गया। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी भी 193 अंक यानी 3.85% की जबरदस्त गिरावट के साथ 4813 पर चला गया। लेकिन दोपहर बाद के कारोबार में शेयर बाजार कुछ सँभला और इसकी गिरावट में कमी आयी। आज के कारोबार में सेंसेक्स ने नीचे की ओर 16,210 का आँकड़ा छुआ, जबकि निफ्टी ने नीचे की ओर 4,807 का स्तर छुआ। आखिरकार सेंसेक्स 1.32% और निफ्टी 1,27% की कमजोरी के साथ बंद हुए।

क्षेत्रों के लिहाज से बीएसई में हेल्थकेयर सूचकांक को छोड़ कर अन्य सभी सूचकांक लाल निशान पर रहे। सबसे ज्यादा कमजोरी आईटी सूचकांक में रही। यह सूचकांक 2.2% नीचे लुढ़का। कैपिटल गुड्स सूचकांक, टीईसीके सूचकांक, बैंकिंग सूचकांक, धातु सूचकांक, पीएसयू सूचकांक, एफएमसीजी सूचकांक और तेल-गैस सूचकांक में भी 1% से अधिक की गिरावट दर्ज की गयी। पावर सूचकांक, रियल्टी सूचकांक, ऑटो सूचकांक और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सूचकांक में भी 1% से कम की कमजोरी रही। दूसरी ओर, हेल्थकेयर सूचकांक को 0.08% की मामूली फायदा हुआ।

सेंसेक्स के 25 शेयरों का आज घाटा उठाना पड़ा, जबकि 5 शेयरों को फायदा हुआ। जयप्रकाश एसोसिएट्स को 3%, लार्सन एंड टुब्रो को 2.7%, इन्फोसिस को 2.45%, टीसीएस को 2.4% और स्टरलाइट इंडस्ट्रीज को 2.13% का नुकसान उठाना पड़ा। आईटीसी, एचडीएफसी, आईसीआईसीआई बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज, एनटीपीसी, रिलायंस कम्युनिकेशंस, विप्रो और डीएलएफ के शेयर में भी 1% से अधिक की गिरावट रही। एसीसी, मारुति सुजुकी, हिंदुस्तान यूनिलीवर, टाटा मोटर्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा, बीएचईएल, एचडीएफसी बैंक, ओएनजीसी, एसबीआई, हिंडाल्को इंडस्ट्रीज, टाटा पावर और सन फार्मा के शेयर में भी कमजोरी का रुख रहा। दूसरी ओर, भारती एयरटेल को 0.94%, हीरो होंडा को 0.53%, रिलायंस इन्फ्रा को 0.43%, ग्रासिम इंडस्ट्रीज को 0.30% और टाटा स्टील को 0.27% का मामूली फायदा हुआ।



बाजार आज दोपहर 2.45 बजे
दोपहर बाद के कारोबार में भारतीय शेयर बाजार कुछ सँभलते दिख रहे हैं। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का सेंसेक्स करीब 2.45 बजे 285 अंक के नुकसान के साथ 16,570 पर आ गया है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी भी 84 अंक की गिरावट के साथ 4921 पर आ गया है।



क्षेत्रों के लिहाज से हेल्थकेयर सूचकांक को छोड़ कर अन्य सभी सूचकांक लाल निशान पर हैं। सबसे ज्यादा कमजोरी रियल्टी सूचकांक है। इस सूचकांक में 3.15% की कमजोरी है। सेंसेक्स के दिग्गज शेयरों में जेपी एसोसिएट्स 4.5%, डीएलएफ 3.4%, आईसीआईसीआई बैंक 3.4%, एलएंडटी 3.4% और स्टरलाइट इंडस्ट्रीज 3.2% की कमजोरी है।

बाजार आज दोपहर 1.10 बजे
दोपहर के कारोबार में भारतीय बाजारों की कमजोरी गहरा गयी है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का सेंसेक्स करीब 1.10 बजे 618 अंक यानी 3.67% के नुकसान के साथ 16,237 पर आ गया है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी भी 193 अंक यानी 3.85% की जबरदस्त गिरावट के साथ 4813 पर आ गया है।
भारतीय शेयर बाजार में आज की गिरावट चौतरफा दिख रही है। सभी क्षेत्रों के सूचकांक लाल निशान में हैं। सबसे ज्यादा चोट रियल एस्टेट शेयरों पर पड़ी है। बीएसई का रियल एस्टेट सूचकांक 6.77% लुढ़क गया है। धातु सूचकांक में 5.54%, बैंकिंग में 5.11%, कैपिटल गुड्स में 4.09%, आईटी में 3.62% और तेल-गैस में 3.45% गिरावट है। सबसे कम गिरावट हेल्थकेयर सूचकांक में है, लेकिन यह भी 1.24% नीचे है।
सेंसेक्स के दिग्गज शेयरों में जेपी एसोसिएट्स 6.19%, डीएलएफ 5.62%, आईसीआईसीआई बैंक 5.57%, एलएंडटी 5.31%, स्टरलाइट इंडस्ट्रीज 5.24%, हिंडाल्को 4.73%, एसबीआई 4.57%, टाटा स्टील 4.36% और रिलायंस इंडस्ट्रीज 3.88% नीचे हैं। टीसीएस को 3.82%, एचडीएफसी को 3.5% और मारुति को 3.2% की चोट पड़ी है।

बाजार आज सुबह 10 बजे
एशियाई शेयर बाजारों में भारी गिरावट के मद्देनजर आज सुबह भारतीय शेयर बाजारों की भी शुरुआत काफी कमजोर हुई है। सुबह 10 बजे सेंसेक्स 329 अंक की कमजोरी के साथ 16,526 पर है। निफ्टी 5,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर के नीचे चला गया है। इस समय यह 104 अंकों की गिरावट के साथ 4,901 पर है। एनएसई के मंझोले सूचकांक सीएनएक्स मिडकैप में 2.69% की कमजोरी दिख रही है। बीएसई मिडकैप सूचकांक में 2.38% और बीएसई स्मॉलकैप में 2.20% की गिरावट है।
क्षेत्रों के लिहाज से बीएसई के सभी सूचकांकों के कमजोरी का रुख है। रियल्टी, धातु, बैंकिंग और कैपिटल गुड्स सूचकांकों में सबसे ज्यादा गिरावट दिख रही है। सेंसेक्स के गिरने वाले शेयरों में आईसीआईसीआई बैंक का शेयर सबसे कमजोर चल रहा है। यह करीब 5.4% की गिरावट के साथ 818.90 रुपये पर है। लार्सन एंड टुब्रो, डीएलएफ स्टरलाइट इंडस्ट्रीज में भी 4% अधिक की कमजोरी है।

'वीर' सलमान का सपना


अगले साल 22 जनवरी को बॉलीवुड अभिनेता अपना 20 साल का सपना पूरा करेंगे. उनका ये सपना है उनकी आने वाली फ़िल्म ‘वीर’. बुधवार को मुंबई में इस फ़िल्म की कुछ झलकियां दिखाई गईं.

इस फ़िल्म के साथ सलमान का ख़ासा लगाव है क्योंकि इसकी कहानी उनके पास 20 साल से थी.

सलमान ख़ान ने कहा है कि 20 साल पहले इतनी बड़ी बजट की फ़िल्में नहीं बनतीं थीं इसलिए इस कहानी को फ़िल्म में तब्दील करने में इतना समय लगा. सलमान ख़ान कहते हैं, “ये तीन फ़िल्मों के बजट में एक फ़िल्म बनी है.”

वीर कहानी है एक पिंडारी सैनिक की बहादुरी की, जो न्याय और स्वंत्रतता के लिए संघर्ष करता है. इस फ़िल्म का निर्देशन ‘गदर’ जैसी कामयाब फ़िल्म बनाने वाले अनिल शर्मा ने किया है.

सलमान ख़ान के मुताबिक़ वीर जैसी फ़िल्म बनाने के लिए अनिल शर्मा से बेहतर निर्देशक नहीं मिल सकता था. उन्होंने उम्मीद जताई कि लोग इस फ़िल्म को पसंद करेंगे.

मेहनत

सलमान ख़ान कहते हैं कि इस ऐतिहासिक कहानी के फ़िल्मांकन के दौरान उन्हें कड़ी मेहनत करनी पड़ी. वो मुस्कुराते हुए कहते हैं, “मैं सुबह छह बजे घोड़े पर बैठता था और शाम छह बजे उतरता था.”

फ़िल्म के निर्देशक अनिल शर्मा कहते हैं कि सलमान ख़ान की कहानी का कैनवास बहुत बड़ा था. अनिल शर्मा ने कहा, “सवाल ये नहीं कि इसे बनाने में कितने पैसे या कितना वक़्त लगा. इससे ज़्यादा महत्वपूर्ण है कि जो लोग ये फ़िल्म देखने आएं तो उनका विश्वास ना टूटे.”

इस फ़िल्म का निर्देशन सलमान ख़ान ख़ुद करना चाहते थे लेकिन आख़री में ये ज़िम्मेदारी अनिल शर्मा को दी गई.

सलमान के अलावा ‘वीर’ में ज़रीन ख़ान, लीज़ा लेज़ारुस, मिथुन चक्रवर्ती, जैकी श्रॉफ़, सोहेल ख़ान और भारत डाभोलकर भी अभिनय कर रहे हैं.

काल्पनिक कर्मचारियों को वेतन



दिल्ली नगर निगम में कई हज़ार काल्पनिक कर्मचारी
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दिल्ली सरकार ऐसे 22,853 कर्मचारियों को तनख़्वाह दे रही है जिनका वजूद ही नहीं है.

दिल्ली के मेयर कंवर सेन ने एक बयान में कहा कि इन काल्पनिक कर्मचारियों की तनख़्वाह कुल मिलाकर चार करोड़ 30 लाख डॉलर सालाना बैठती है.

इस घपले का पता तब चला जब प्रशासन ने उपस्थिति दर्ज करने की बायोमिट्रिक प्रणाली लागू की.

संवाददाताओं का कहना है कि ये इस बात का संकेत है कि कुछ सरकारी अधिकारियों ने इन कर्मचारियों की सूची इसलिए बनाई जिससे राज्य कोष से धन निकाल सकें.

दिल्ली नगर निगम में एक लाख से अधिक सफ़ाई कर्मचारी, माली, अध्यापक और अन्य कर्मचारी हैं.

घोटाले की जानकारी

इस मामले की विस्तृत जांच की जाएगी जिससे तथ्यों का पता चल सके. और जिन अधिकारियों ने फ़र्ज़ी कर्मचारियों की सूची बनाकर सरकारी धन खाया है उनके ख़िलाफ़ सख़्त आनुशासनिक कार्रवाई की जाएगी.

कंवर सैन, दिल्ली के मेयर
दिल्ली नगर निगम ने पिछले साल अगस्त के महीने में बायोमिट्रिक प्रणाली लागू की थी.

शहर के मेयर कंवर सेन का कहना है कि निगम में कुल 104,241 कर्मचारी हैं जबकि रिकॉर्ड के अनुसार इनकी संख्या 127,094 दिखाई जा रही थी.

सेन के कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि भुगतान अधिकारियों के आंकड़ों और बायोमिट्रिक प्रणाली में दर्ज कर्मचारियों की संख्या में 22,853 का अंतर है.

सेन ने कहा, "इस मामले की विस्तृत जांच की जाएगी जिससे तथ्यों का पता चल सके और जिन अधिकारियों ने कर्मचारियों की फ़र्ज़ी सूची बनाकर सरकारी धन खाया है उनके ख़िलाफ़ सख़्त आनुशासनिक कार्रवाई की जाएगी."

लंबे समय से ये आशंका व्यक्त की जा रही थी कि नगर निगम को काल्पनिक कर्मचारियों के माध्यम से चूना लगाया जा रहा है लेकिन प्रशासन ने हमेशा इन आरोपों का खंडन किया.

डबवाली समाचार


डबवाली (सुखपाल)- स्थानीय सिरसा रोड स्थित खालसा सीनियर सैकेण्डरी स्कूल के प्रांगण में बने बाबा दीप सिंह, स्टेडियम में आज स्कूल का वाॢषक पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित किया गया।
जिसमें मुख्याति के तौर पर संत मलकीत सिंह जी अध्यक्ष संत भाग सिंह चेरिटेबल ट्रस्ट ख्याला (जालन्धर) ने शिरकत की। जहां संत मलकीत सिंह जी ने रिब्बन काट कर पुरस्कार वितरण कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। वहीं स्कूल की छात्राओं ने शब्द-कीर्तन प्रस्तुत कर समारोह की शोभा बढ़ाई। इस अवसर पर संत मलकीत सिंह ने पण्डाल में उपस्थित छात्र - छात्राओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि विद्यार्थी अपनी पढ़ाई के साथ - साथ खेलकूद प्रतिस्पर्धा में भी बढ़ - चढ़ कर हिस्सा लें ताकि उनका स्वास्थ्य ठीक रह तथा शिक्षा के साथ खेलों में भी अपने स्कूल व अभिभावाकों का नाम रोशन कर सकें। तदोपरान्त जिला स्तर पर आयोजित फुटबाल प्रतियोगिता में अव्वल रही छात्राओं एवं उनके कोच राजन को संत मलकीत ङ्क्षसह जी ने स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर स्कूल प्रसीपल राम सिंह सरां ने स्कूल की वाॢषक रिपोर्ट प्रस्तुत की। इस अवसर पर गुरूद्वारा सिंह सभा के प्रधान बघेल सिंह, सुखमन्द्र सिंह, बहादर सिंह, शिवराज सिंह, जसवन्त सिंह बराड़, जगदेव सिंह मटदादू, सहजिन्द्र सिंह भाटी, जगरूप सिंह, राम सिंह चहल सहित नगर के गणमान्य अतिथि उपस्थित थे।



डबवाली (सुखपाल)- स्थानीय अरोड़वंश आदर्श उच्च विद्यालय के प्रांगण में आयोजित एक कार्यक्रम के अन्तर्गत डॉ. विक्रम मैमोरियल चेरीटेबल ट्रस्ट के चेयरमैन डॉ. पी. के. अग्रवाल द्वारा जरूरतमंद बच्चों को जॢसयां, जूते व वॢदयां वितरित की गई। जिसमें विद्यालय के 65 बच्चों को जॢसयां, 30 बच्चों को 30 जोड़ी जूते एवं 5 बच्चों को वॢदयां दी गई। इस अवसर पर श्रीमती अग्रवाल, आंखों के विशेषज्ञ डॉ. बाघला, अरोड़वंश सभा के प्रधान प्रेम ङ्क्षसह सेठी, ओम प्रकाश सचदेवा, दविन्द्र सेठी, विजय सेठी, डॉ. बलवीर ग्रोवर, रजनीश सेठी एवं गणमान्य अनेक अतिथि उपस्थित थे। कार्यक्रम में आए हुए अतिथियों का स्वागत प्रेम सिंह सेठी, देसराज सेठी व दीदार ङ्क्षसह ने संयुक्त रूप से किया। इस अवसर पर बच्चों को सम्बोधित करते हुए विद्यालय की मुख्याध्यापिका श्रीमती विजय मोंगा ने दान देने की भावना को सर्वोपरि बताया तथा कहा कि समाज में जरूरतमंद की सहायता करना परमात्मा की भक्ति करने के बराबर है। कार्यक्रम के अन्त में विद्यालय के प्रबन्धक बी. डी. छाबड़ा ने इस शीत ऋतु में जरूरतमंद बच्चों की सहायता के लिए ट्रस्ट के पदाधिकारियों एवं आए हुए अतिथियों का आभार व्यक्त किया।



डबवाली (सुखपाल)- उपमण्डल के गांव मलिकपुरा स्थित राजकीय उच्च विद्यालय में स्वच्छता सप्ताह के अन्तर्गत पंचम दिवस बड़े ही हर्षोल्लास व उत्साह से मनाया गया। स्वच्छता सप्ताह के दौरान छात्र-छात्राओं द्वारा निकाली गई स्वच्छता रैली को रवाना करने से पूर्व विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए खण्ड विकास एवं पंचायत अधिकारी झांबर सिंह ने कहा कि इस रैली से लोगों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता आएगी और वे अपने स्वास्थ्य के प्रति भी गंभीर होंगे। यह स्वच्छता रैली सम्पूर्ण गांव का भ्रमण करते
हुए वापस स्कूल प्रांगण में पहुंची। इस अवसर पर विद्यालय के कार्यकारी मुख्याध्यापक सोम प्रकाश शर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा कि स्वच्छता ही हमारे स्वस्थ जीवन का आधार है इसलिए हर व्यक्ति को अपने आसपास स्वच्छता व साफ सुथरा माहौल बनाना चाहिए तथा स्वच्छ और स्वस्थ बच्चे राष्ट्र का धन होते हैं और उत्तम स्वास्थ्य तभी संभव है जब हम अपने आसपास और अपनी शारीरिक सफाई का नियमित ध्यान रखें। इस अवसर पर स्कूल स्टाफ के अतिरिक्त सरपंच श्रीमती नसीब कौर, मघर सिंह, राम प्रताप नम्बरदार, औम प्रकाश, बिट्टू शर्मा, मन्दर सिंह, जगदेव सिंह, जोगिन्दर सिंह(पंच), कौर सिंह,(पंच), हरबन्ता सिंह(पंच), सहजिन्द्र सिंह पटवारी व रणवीर सिंह सहित गांव के गणमान्य अतिथि उपस्थित थे। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में राजकीय प्राथमिक पाठशाला के बच्चों एवं अध्यापकों ने भी अपना योगदान दिया। जो प्रशंसनीय है।

बूटा सिंह ने पंजाब सरकार को चेताया

चंडीगढ़ : राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के चेयरमैन बूटा सिंह ने पंजाब सरकार को चेतावनी दी है कि वह राज्य में दलितों पर अत्याचार के मामलों पर रोक लगाए अन्यथा आयोग ऐसे मामलों में सरकार के खिलाफ कड़ी रिपोर्ट संसद को भेजेगा। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार राज्य में दलितों को कल्याण योजनाओं का पूरा लाभ नहीं दे रही। यहां पंजाब पुलिस के सीनियर अफसरों से राज्य में दलितों पर अत्याचार मामलों पर चर्चा के बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि पंजाब के डीजीपी ने उन्हें ऐसे मामलों में दोषियों पर कार्रवाई का भरोसा दिया है और कार्रवाई के बारे में आयोग को अवगत कराने की बात भी कही है। बूटा सिंह ने कहा कि विभिन्न राज्यों से मिले ब्यौरे के बाद आयोग ने पाया है कि पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार और उड़ीसा में सरकारों का काम दलितों के मामले में तसल्लीबख्श नहीं है। इन राज्यों में दलितों पर अत्याचार के ऐसे मामले भी सामने आए हैं जिनकी मिसाल आजादी से पहले कहीं नहीं मिलती। उन्होंने आज की बैठक का जिक्र करते हुए बताया कि भुलत्थ से कांग्रेसी विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने आयोग के पास तीन शिकायतें भेजी थीं। इन मामलों में डीजीपी पीएस गिल, एडीजीपी राजन गुप्ता और डीआईजी आरपीएस बराड़ आयोग के समक्ष पेश हुए थे। खैरा भी विशेष तौर पर पीडि़तों को लेकर उनसे मिलने आए थे। खैरा ने ढिलवां थाने के अंतर्गत गांव बिजली नंगल कश्मीर सिंह बाजीगर की बेटी के विवाह समारोह के दौरान अकाली समर्थकों द्वारा बारात से मारपीट करने की शिकायत रखी। पीडि़तों द्वारा थाने में शिकायत करने पर पुलिस ने मामला दर्ज करने से इंकार कर दिया। खैरा ने आयोग के समक्ष मंसूरवाला गांव के दलित सरपंच का मामला उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि गांव के अनुसूचित जाति से संबंधित सरपंच जोगा सिंह को बेवजह बर्खास्त कर दिया गया है।

बूढ़े बरगद से डरता है बुढ़ापा


मनुष्य की चार अवस्थाओं में बुढ़ापा सबसे नापसंद अवस्था है पर यह प्रकृति की वह हकीकत है जिसे स्वीकार करना ही पड़ता है। बहरहाल बुढ़ापे की ओर तेजी से बढ़ रहे लोगों के लिए यह खबर काफी राहत देने वाली होगी। अपने कई गुणों के कारण आयुर्वेद चिकित्सा और भारतीय जीवन पद्धति का चहेता रहा बरगद अब बुढ़ापा भी रोकने में कारगर साबित होगा। इसकी हवाई जड़ों में एन्टी आक्सीडेन्ट की उपलब्धता सर्वाधिक पायी गयी है। इसके इसी गुण के कारण वृद्धावस्था की ओर ले जाने वाले कारकों को दूर भगाया जा सकेगा। कभी घर के बूढ़े बुजुर्गो की तरह ग्रामीण भारतीय समाज का अभिन्न व सम्मानित अंग रहे बरगद पर इलाहाबाद विश्वविद्यालय में चल शोध से छन कर ये बातें सामने आयी हैं।

राकेश मारिया ने दी इस्तीफे की धमकी



मुंबई।। मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रान्च के प्रमुख राकेश मारिया ने कहा है कि यदि गृह मंत्रालय उनके खिलाफ शहीद अशोक कामटे की पत्नी विनीता द्वारा लगाये गये आरोपों पर स्पष्टीकरण नहीं देता तो वह इस्तीफा दे देंगे, इस पर विनीता ने शुक्रवार को कहा कि वह अपनी किताब में लिखे प्रत्येक शब्द पर अडिग हैं।

विनीता ने पुणे से फोन पर कहा- किताब में लिखी सामग्री के बारे में किसी के भी द्वारा उठाये गए सवालों का सामना करने के लिए मैं तैयार हूं। मैं प्रत्येक शब्द पर अडिग हूं। पिछले साल आतंकी हमलों के दौरान शहीद हुए आईपीएस अधिकारी कामटे की विधवा ने कहा- किताब सूचना के अधिकार कानून के तहत मुंबई पुलिस द्वारा दिये गए तथ्यों पर आधारित है। मारिया द्वारा अशोक को कामा अस्पताल भेजने का निर्देश देने से इनकार करने की विनीता ने अपनी किताब में आलोचना की है। कामटे इसी जगह आतंकवादियों की गोली का शिकार हुए थे।
खबरों के मुताबिक मारिया ने राज्य के गृह मंत्री आर.आर. पाटिल को कल एक पत्र लिखकर कहा कि यदि सरकार उनके खिलाफ लगे आरोपों पर कोई स्पष्टीकरण नहीं देती या उन्हें नहीं देने देती तो वह इस्तीफा दे देंगे।

मारिया से इस बाबत प्रतिक्रिया नहीं ली जा सकी।
विनीता ने कहा कि पहले वह किताब नहीं लिखना चाहती थीं लेकिन 26 नवंबर की रात के घटनाक्रम को जानने की उनकी इच्छा ने ऐसा कराया।

भारत ने लगाई टेस्‍ट मैचों की सेंचुरी

कानपुर, शुक्रवार, 27 नवम्बर 2009
भारत-श्रीलंका के बीच पहला टेस्‍ट ड्रॉकानपुर टेस्‍ट मैच पर कब्‍जा जमाकर भारत ने टेस्‍ट मैचों में अपनी 100वीं जीत दर्ज की. भारत ने श्रीलंका को एक पारी और 144 रनों से मात दी है. रनों के लिहाज से यह भारत की अब तक की तीसरी सबसे बड़ी जीत है. 1932 से टेस्‍ट मैच खेलने वाली टीम इंडिया ने अपनी पहली जीत 1952 में इं‍ग्‍लैंड को हराकर हासिल की थी. पहली पारी में पांच विकेट लेने वाले श्रीशंत मैन ऑफ द मैच चुने गए.

अंतिम विकेट प्रज्ञान ओझा के खाते में गया. इस पारी में ओझा को दो विकेट मिले हैं. श्रीलंकाई टीम का अंतिम विकेट वेलेगेदरा के रुप में गिरा. इससे पहले युवराज सिंह ने श्रीलंका को नौवां झटका मेंडिस के रूप में दिया था. मेंडिस 27 रन बनाकर युवराज के गेंद का शिकार हुए. इससे पहले मुरलीधरन 29 रन बनाकर आउट हुए. मुरलीधरन 11 गेंद में दो छक्‍का और तीन चौके की मदद से 29 रन बनाकर प्रज्ञान ओझा की गेंद पर बोल्‍ड हुए.

भज्‍जी ने हीरेथ को 13 रन के व्‍यक्‍तिगत स्‍कोर पर एलबीडब्‍ल्‍यू आउट किया. इससे पहले हरभजन ने ही प्रसन्‍ना जयवर्धने को 29 रन पर बोल्‍ड कर छठा विकेट लिया था. मुरलीधरन के आउट होने के बाद मेंडिस क्रीज पर समरवीरा का साथ देने आए हैं. श्रीलंका को पांचवां झटका जहीर खान ने दिया. जहीर ने मैथ्‍यूज को 15 रन पर द्रविड़ के हाथों कैच आउट कराया.

भारत-श्रीलंका के बीच दूसरे टेस्‍ट के तीसरे दिन खेल की समाप्ति तक मेहमान टीम भारी दबाव में आ गई थी. तीसरे दिन खेल खत्‍म होने तक श्रीलंका ने दूसरी पारी में 4 विकेट खोकर 57 रन बनाए थे. समरवीरा 1 रन और मैथ्‍यूज 2 रन बनाकर नाबाद थे. श्रीलंका ने दूसरी पारी में अपना पहला विकेट जल्‍द ही खो दिया. दिलशान महज 11 रन बनाने के बाद श्रीसंत के शिकार बने. मेहमान टीम का दूसरा विकेट परानाविताना के रूप में गिरा. वे 20 रन जोड़कर वीरेंद्र सहवाग की गेंद पर पगबाधा आउट हो गए.

श्रीलंकाई टीम का तीसरा विकेट महेला जयवर्द्धने के रूप में गिरा. जयवर्द्धने 10 रन बनाकर रन आउट हो गए. चौथा झटका हरभजन सिंह ने दिया. कुमार संगकारा 11 रन बनाकर भज्‍जी की गेंद पर बोल्‍ड हो गए.

इससे पहले श्रीलंका की पहली पारी 229 रन पर सिमट गई. श्रीलंका की ओर से महेला जयवर्धने ने 47 रन सर्वाधिक बनाए, वहीं टीम इंडिया में लौटे श्रीसंत ने 75 रन देकर 5 विकेट चटकाए.

टीमें-
भारत: महेन्द्र सिंह धोनी (कप्तान), राहुल द्रविड़, गौतम गम्भीर, वीरेन्द्र सहवाग, सचिन तेंदुलकर, हरभजन सिंह, जहीर खान, वीवीएस लक्ष्मण, युवराज सिंह, प्रज्ञान ओझा और एस. श्रीसंत.

श्रीलंका: कुमार संगकारा (कप्तान), तिलकरत्ने दिलशान, तरंगा परनाविताना, माहेला जयवर्धने, तिलन समरवीरा, एजेंलो मैथ्यूज, प्रसन्ना जयवर्धने, अजंता मेंडिस, रंगना हेराथ, मुथया मुरलीधरन और चानका वेलेगेदरा.

भारत ने लगाई टेस्‍ट मैचों की सेंचुरी

कानपुर, शुक्रवार, 27 नवम्बर 2009
भारत-श्रीलंका के बीच पहला टेस्‍ट ड्रॉकानपुर टेस्‍ट मैच पर कब्‍जा जमाकर भारत ने टेस्‍ट मैचों में अपनी 100वीं जीत दर्ज की. भारत ने श्रीलंका को एक पारी और 144 रनों से मात दी है. रनों के लिहाज से यह भारत की अब तक की तीसरी सबसे बड़ी जीत है. 1932 से टेस्‍ट मैच खेलने वाली टीम इंडिया ने अपनी पहली जीत 1952 में इं‍ग्‍लैंड को हराकर हासिल की थी. पहली पारी में पांच विकेट लेने वाले श्रीशंत मैन ऑफ द मैच चुने गए.

अंतिम विकेट प्रज्ञान ओझा के खाते में गया. इस पारी में ओझा को दो विकेट मिले हैं. श्रीलंकाई टीम का अंतिम विकेट वेलेगेदरा के रुप में गिरा. इससे पहले युवराज सिंह ने श्रीलंका को नौवां झटका मेंडिस के रूप में दिया था. मेंडिस 27 रन बनाकर युवराज के गेंद का शिकार हुए. इससे पहले मुरलीधरन 29 रन बनाकर आउट हुए. मुरलीधरन 11 गेंद में दो छक्‍का और तीन चौके की मदद से 29 रन बनाकर प्रज्ञान ओझा की गेंद पर बोल्‍ड हुए.

भज्‍जी ने हीरेथ को 13 रन के व्‍यक्‍तिगत स्‍कोर पर एलबीडब्‍ल्‍यू आउट किया. इससे पहले हरभजन ने ही प्रसन्‍ना जयवर्धने को 29 रन पर बोल्‍ड कर छठा विकेट लिया था. मुरलीधरन के आउट होने के बाद मेंडिस क्रीज पर समरवीरा का साथ देने आए हैं. श्रीलंका को पांचवां झटका जहीर खान ने दिया. जहीर ने मैथ्‍यूज को 15 रन पर द्रविड़ के हाथों कैच आउट कराया.

भारत-श्रीलंका के बीच दूसरे टेस्‍ट के तीसरे दिन खेल की समाप्ति तक मेहमान टीम भारी दबाव में आ गई थी. तीसरे दिन खेल खत्‍म होने तक श्रीलंका ने दूसरी पारी में 4 विकेट खोकर 57 रन बनाए थे. समरवीरा 1 रन और मैथ्‍यूज 2 रन बनाकर नाबाद थे. श्रीलंका ने दूसरी पारी में अपना पहला विकेट जल्‍द ही खो दिया. दिलशान महज 11 रन बनाने के बाद श्रीसंत के शिकार बने. मेहमान टीम का दूसरा विकेट परानाविताना के रूप में गिरा. वे 20 रन जोड़कर वीरेंद्र सहवाग की गेंद पर पगबाधा आउट हो गए.

श्रीलंकाई टीम का तीसरा विकेट महेला जयवर्द्धने के रूप में गिरा. जयवर्द्धने 10 रन बनाकर रन आउट हो गए. चौथा झटका हरभजन सिंह ने दिया. कुमार संगकारा 11 रन बनाकर भज्‍जी की गेंद पर बोल्‍ड हो गए.

इससे पहले श्रीलंका की पहली पारी 229 रन पर सिमट गई. श्रीलंका की ओर से महेला जयवर्धने ने 47 रन सर्वाधिक बनाए, वहीं टीम इंडिया में लौटे श्रीसंत ने 75 रन देकर 5 विकेट चटकाए.

टीमें-
भारत: महेन्द्र सिंह धोनी (कप्तान), राहुल द्रविड़, गौतम गम्भीर, वीरेन्द्र सहवाग, सचिन तेंदुलकर, हरभजन सिंह, जहीर खान, वीवीएस लक्ष्मण, युवराज सिंह, प्रज्ञान ओझा और एस. श्रीसंत.

श्रीलंका: कुमार संगकारा (कप्तान), तिलकरत्ने दिलशान, तरंगा परनाविताना, माहेला जयवर्धने, तिलन समरवीरा, एजेंलो मैथ्यूज, प्रसन्ना जयवर्धने, अजंता मेंडिस, रंगना हेराथ, मुथया मुरलीधरन और चानका वेलेगेदरा.

ओबामा की दावत में बिन बुलाए मेहमान


वाशिंगटन : ाइट हाउस में मंगलवार को भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के सम्मान में आयोजित राजकीय भोज में दो बिन बुलाए मेहमान भी मौजूद थे। वर्जीनिया के एक अमेरिकी दंपती ने न सिर्फ भोज का लुत्फ उठाया बल्कि वहां मौजूद कई हस्तियों के साथ तस्वीरें भी खिंचवाई। उनका इरादा हालांकि सिर्फ सुर्खियां बटोरना था लेकिन इसे ाइट हाउस की चाकचौबंद सुरक्षा में गंभीर चूक माना जा रहा है। ाइट हाउस में इससे पहले आयोजित हुए राजकीय भोज के दौरान ऐसा कभी नहीं हुआ। अमेरिकी अखबार द वाशिंगटन पोस्ट ने खुलासा किया है कि एक टीवी रियलिटी शो के वर्जीनियाई प्रतिभागी बगैर आधिकारिक निमंत्रण पत्र के राजकीय भोज में पहुंच गए। अखबार के मुताबिक, इस बात का पता तब चला जब उत्तरी वर्जीनिया के तारिक सलाही और मिशेल ने अपनी इस अनोखी उपलब्धि की कहानी सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक पर अपलोड की। दंपती द्वारा फेसबुक पर अपलोड तस्वीरों में वे अमेरिकी उप राष्ट्रपति जो बिडेन, ाइट हाउस के चीफ आफ स्टाफ और टीवी एंकर केटी कोरिक के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। दोनों ने भारतीय संगीतकार ए.आर. रहमान और पेप्सिको की अध्यक्ष इंदिरा नूई के साथ भी तस्वीरें खिंचवाईं। दोनों जब ये तस्वीरें खिंचवा रहे थे भोज में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी मौजूद थे। हालांकि ओबामा और मनमोहन की सुरक्षा को कोई खतरा नहीं था क्योंकि यह दंपती भी कड़ी सुरक्षा जांच की उसी प्रक्रिया से गुजरा था जिससे 300 से ज्यादा मेहमान गुजरे थे।

आ अब लौट चलें


वाशिंगटन,: प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने विश्व भर में फैले भारतीयों से स्वदेश लौटने की अपील की है। उन्होंने कहा कि वे देश में प्रतिभा पलायन की जगह प्रतिभा लाभ की स्थिति देखना चाहते हैं। मनमोहन ने यहां भारतीय-अमेरिकी समुदाय को संबोधित करते हुए भारत और अमेरिका के संबंधों में सुधार के लिए अमेरिका में रहने वाले भारतीयों की जमकर तारीफ की। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ वर्षो के दौरान हम प्रतिभा पलायन की विपरीत स्थिति देख रहे हैं। उन्होंने कहा मैं इसे प्रतिभा लाभ की स्थिति के रूप में देखता हूं। उन्होंने कहा, मैं इस मौके पर उन अमेरिकी भारतीय और भारतीयों को स्वदेश आने का निमंत्रण देना चाहता हूं, जो भारत लौटने के इच्छुक हैं। मनमोहन ने दोनों देशों के बीच अगले चरण के संबंध सुधार में फाइव ई की अहमियत पर जोर दिया। इनमें अर्थव्यवस्था, ऊर्जा, पर्यावरण, शिक्षा और सशक्तिकरण जैसे क्षेत्र शामिल हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, आधुनिक तकनीक और लचीली नीतियों की मदद से अब अमेरिकी भारतीयों के मध्य कार्यस्थल के चुनाव की दिक्कत नहीं रहेगी। वे चाहे भारत में रहें चाहे अमेरिका में आसानी से अपने उद्देश्य पूरे कर पाएंगे।

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