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बुधवार, 21 अक्टूबर 2009

कांग्रेस की सदस्यता अब खानापूर्ति नहीं

नई दिल्ली: पार्टी के सदस्यता अभियान को मौसमी खानापूरी से बाहर निकाल कांग्रेस इसे देश में अपनी सियासी जमीन मजबूत करने का माध्यम बनाएगी। इसके लिए पार्टी ने अपनी सभी प्रदेश इकाईयों को साफ हिदायत दी है कि सदस्यता फार्म भरवाने की महज खानापूर्ति न की जाए बल्कि उसको जीवंतता के साथ कांग्रेस के साथ जोड़ा जाए। सदस्यता अभियान के सहारे जमीनी आधार बढ़ाने की इस पहल की समीक्षा के लिए कांग्रेस ने 21 अक्टूबर को सभी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्षों की एक बैठक बुलाई है। एआईसीसी के सभी पदाधिकारी और सभी प्रदेशों के प्रभारियों के साथ राज्य इकाईयों के प्रमुखों की इस बैठक का एकमात्र एजेंडा संगठन चुनाव से पहले सदस्यता अभियान में तेजी लाना है। पार्टी नेतृत्व इस बात से परिचित है कि सदस्यता अभियान का लक्ष्य पूरा करने के लिए कांग्रेस के हर स्तर पर नेता अपनी तरफ से फार्म भरवा सदस्यता शुल्क जमा कराने से भी परहेज नहीं करते। इस पर लगाम कसने के लिए पार्टी ने पहले ही तंत्र बना लिया है और ब्लॉक से लेकर प्रदेश स्तर पर पूरा डाटा बेस बनाया जा रहा है। बुधवार को प्रस्तावित बैठक में प्रदेश अध्यक्षों को विशेष तौर पर लोगों से सीधे जुड़ने पर फोकस करने को कहा जाएगा।

सेनाएं हर खतरे के लिए रहें तैयार : पीएम


नई दिल्ली- रक्षा सेनाओं के आला कमांडरों की बैठक में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आगाह किया है कि बीते एक साल में भारत के पास-पड़ोस के हालात बद से बदतर हो रहे हैं। पीएम ने सेनाओं को आतंक की हर सूरत से मुकाबले के लिए अपनी तैयारियों को मुस्तैद रखने की सलाह दी। मुंबई आतंकी हमले के बाद पहली बार तीनों सेनाओं के कमांडरों से मुखातिब हुए पीएम ने कहा कि आतंक के खेल में सरकारी और गैर-सरकारी, दोनों ही किस्म के खिलाड़ी मौजूद है। भारत एक लोकतंत्र और खुला समाज बताते हुए पीएम ने कहा कि इसीलिए कई बार हमारे लिए आतंक का खतरा काफी ज्यादा होता है। उन्होंने कहा कि इस बीच भले ही कोई बड़ा आतंकी हमला न हुआ हो लेकिन इस बारे में खुफिया सूचनाएं लगातार मिलती रहती हैं कि आतंकी किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में लगे हुए हैं। काबुल में भारतीय दूतावास पर हुए हमले को ऐसी की साजिशों का नमूना बताते हुए पीएम ने कहा कि इस घटना ने एक बार फिर साबित किया है कि हम किस तरह की ताकतों से घिरे हैं। प्रधानमंत्री ने रक्षा सेनाओं को हर तरह के खतरे से मुकाबले के लिए तैयारी की सलाह भी दी। पीएम ने सलाह दी कि भारत के सैनिक दस्तों को किसी भी जगह, हर समय और किन्हीं भी हालात में लड़ने के लिए प्रशिक्षित होना चाहिए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सेनाओं को आधुनिक हथियारों और सुविधाओं के साथ-साथ बेहतर मानव संसाधन मुहैया कराने की कोशिशों में सरकार कोई कसर नहीं छोड़ेगी। प्रधानमंत्री ने प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति में नागरिक प्रशासन को मिलने वाली मदद के लिए सेनाओं को शाबासी भी दी। वहीं रक्षा सेनाओं के कमांडरों को दिए संबोधन में पीएम ने परमाणु अप्रसार को लेकर नए सिरे से शुरू हुए कोशिशों का भी हवाला दिया। पीएम ने कहा कि भारत बहुपक्षीय और भेदभाव रहित फिसाइल मटेरियल कट-आफ ट्रीटी (नाभिकीय पदार्थो का प्रसार नियंत्रित करने के लिए समझौता) पर बातचीत के लिए तैयार है।

बिना इजाजत परिंदा भी नहीं मार पाएगा पर


कामनवेल्थ गेम्स के दौरान राजधानी आने वाले आगंतुकों के मन से आतंकी गतिविधियों का भय भगाने के लिए इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट पर स्पेशल आपरेशन गु्रप (एसओजी) तैयार किया जा रहा है। आईजीआई एयरपोर्ट की अभूतपूर्व सुरक्षा के लिए तैयार किए जा रहे स्पेशल आपरेशन ग्रुप में नेशनल स्क्यूरिटी गार्ड, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल, डायरेक्टर जनरल आफ सिविल एविएशन, ब्यूरो आफ सिविल एविएशन, फारनर रिजनल रजिस्ट्रेशन आफिसर्स एवं दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड आदि एजेंसियों को शामिल किया गया है। स्पेशल आपरेटिंग ग्रुप का नेतृत्व पुलिस उपायुक्त स्तर के अधिकारी के पास होगा। उनकी सहायता के लिए अतिरिक्त पुलिस आयुक्त स्तर के अधिकारियों को तैनात किया जाएगा। एसओजी कामनवेल्थ गेम्स शुरू होने से सात दिन पहले आईजीआई एयरपोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था को अपने हाथों में ले लेगी। गेम्स खत्म होने के अगले एक हफ्ते तक आईजीआई एयरपोर्ट की सुरक्षा एसओजी के हाथ ही होगी। एसओजी के अंतर्गत आने वाली एजेंसियों के कार्य क्षेत्र के निर्धारण के लिए स्पेशल आपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) तैयार किया जा रहा है। कामनवेल्थ गेम्स के दौरान ये सभी एजेंसियां एसओपी के तहत ही आईजीआई एयरपोर्ट की सुरक्षा को चाकचौबंद करेंगी। एयरपोर्ट से जुडे़ एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक कामनवेल्थ गेम्स के दौरान राजधानी में 8000 से अधिक एथिलीट व अधिकारियों के आने की संभावना जताई जा रही है। इन सभी की आईजीआई एयरपोर्ट पर आगमन संबंधी व्यवस्था, सुविधा एवं सुरक्षा को सुव्यवस्थित करने के लिए एसओपी के तहत हर एजेंसी के कार्यो का निर्धारण किया जा रहा है। मसलन एसओपी के तहत आईजीआई एयरपोर्ट की सुरक्षा पर तैनात केंद्रीय औद्योगिक बल को एयरपोर्ट परिसर के आंतरिक एवं बाहृय सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई है। एफआरआरओ को गेम्स के दौरान दिल्ली आने वाले अधिकारियों एवं विशिष्ट अतिथियों के जल्द इमीग्रेशन क्लीयरेंस की जिम्मेदारी सौंपी गई है। डायल के गेस्ट केयर डिपार्टमेंट को खिलाडि़यों, अधिकारियों एवं विशिष्ट अतिथियों के आवभगत की जिम्मेदारी सौंपी गई है। आतंकी साजिशों को नस्तेनाबूत करने के लिए नेशनल सिक्यूरिटी गार्ड (एनएसजी) की विशेष टुकडि़यां तैनात की जाएंगी। एयरपोर्ट परिसर के लगे बाहरी क्षेत्र एवं पार्किंग की सुरक्षा एवं कानून व्यवस्था की जिम्मा दिल्ली पुलिस के हाथों में होगा।

एक एसएमएस ने जगाया इंसानियत का जज्बा


मोबाइल पर महज एसएमएस पढ़कर एक अनजान शख्स की जान बचाने के लिए देखते ही देखते 280 लोग अपना खून देने के लिए तैयार हो गए। इनमें से तो कई तो तुरंत अस्पताल भी पहुंच गए। इन्हीं में से एक ने खून दिया और डेंगू पीडि़त युवक को मौत के मुंह से बाहर खींच लिया। शास्त्री नगर के सेक्टर-13 निवासी दर्शनलाल तिवारी मेरठ में माध्यमिक शिक्षा परिषद कार्यालय में क्लर्क हैं। उनका बेटा अतुल चौ. चरण विश्वविद्यालय में एमए का छात्र है। 10 दिन पहले अचानक हालत बिगड़ने पर अतुल को अस्पताल में भर्ती कराया गया। जांच के बाद डाक्टरों ने उसे डेंगू से पीडि़त बताया और तुरंत खून का इंतजाम करने को कहा। अतुल का ब्लड ग्रुप एबी पॉजीटिव है। दर्शनलाल ने तमाम भागदौड़ की, लेकिन इस ग्रुप का ब्लड कहीं नहीं मिला। उधर, अतुल की हालत बिगड़ती जा रही थी और डॉक्टरों ने खून के बिना उसे बचाने में असमर्थता जता दी। दर्शनलाल को मायूस देख एक टेलीकॉम कंपनी में कार्यरत उनके पड़ोसी प्रवीण तिवारी ने उन्हें एसएमएस के जरिये ब्लड की मांग करने की सलाह दी। वह उन्हें कंपनी के रीजनल कार्यालय लेकर गए। अधिकारियों से बातचीत के बाद 14 अक्टूबर को कंपनी के उपभोक्ताओं के मोबाइल पर एसएमएस कराया। एसएमएस में एबी पॉजीटिव ग्रुप का ब्लड देने की अपील की गई। फिर क्या था, एसएमएस जारी होने के कुछ ही समय बाद दर्शनलाल के पास खून देने के इच्छुक लोगों के फोन आने लगे। उनके पास उसी दिन लगभग 280 फोन आए। फोन करने वालों में मेरठ, बागपत, बुलंदशहर, सहारनपुर, बिजनौर, मुजफ्फरनगर, अलीगढ़, आगरा जिलों के लोग थे। इतना ही नहीं, कई लोग तो खून देने अस्पताल में पहुंच भी गए। इन्हीं में से एक युवक ने अतुल को खून दिया। इसके बाद से उसकी हालत में सुधार होता चला गया। अब वह खतरे से बाहर है। दर्शनलाल कहते हैं कि वह एक एसएमएस फिर कराएंगे और मदद के लिए आगे आने वाले सभी लोगों का आभार जताएंगे।

मंगलवार, 20 अक्टूबर 2009

पाक: हज़ारों का पलायन, मानवीय संकट का ख़तरा




पाकिस्तान के क़बायली इलाक़े दक्षिण वज़ीरिस्तान में तालेबान विद्रोहियों के ख़िलाफ़ सेना के अभियान के कारण वहाँ मानवीय संकट का ख़तरा पैदा हो गया है. सेना का दावा है इस संघर्ष में अब तक 78 तालेबान लड़ाके मारे गए हैं.

रिपोर्टों के अनुसार अफ़ग़ानिस्तान के साथ सटी पाकिस्तान की सीमा पर डेरा इस्माइल ख़ान शहर में एक लाख लोग एकत्र हो गए हैं. ये संघर्ष के कारण विस्थापित हुए आम नागरिक हैं.

पाकिस्तान के उस इलाक़े में कड़ाके की सर्दी पड़ती है और प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने अंतरराष्ट्रीय मदद का अनुरोध किया है.

एक संवाददाता का कहना है कि शरणार्थियों की लंबी कतारें लगीं है और लोग प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष अपने नाम का पंजीकरण करवा रहे हैं.

लेकिन जहाँ कुछ रिपोर्टों के अनुसार उन्हें किसी भी तरह की राहत उपलब्ध नहीं कराई गई है और वे स्थानीय लोगों पर आश्रित हैं वहीं सरकार का दावा है कि विस्थापितों का पंजीकरण हो रहा है और उन्हें तत्काल राशन भी उपलब्ध कराया जा रहा है.
'तालेबान के 78 लड़ाके मारे गए'
पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल अथर अब्बास का कहना है, "सैनिक उस इलाक़े में सफल अभियान चला रहे हैं....ये इलाक़ा पाकिस्तान में आतंकवादी समस्या का केंद्र है...सेना इस इलाक़े में लगभग 12 किलोमीटर अंदर पहुँच गई है."


पाकिस्तानी सेना का दावा है कि अब तक के संघर्ष में 78 चरमपंथी और नौ सैनिक मारे गए हैं. लेकिन इन दावों की स्वतंत्र सूत्रों से पुष्टि नहीं हुई है.

सुरक्षाबलों ने सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण एंगल माल के पहाड़ों पर नियंत्रण कायम करने का दावा भी किया है.

दूसरी तरफ़ तालेबान का दावा है कि अब तक की लड़ाई में उसका कोई लड़ाका मारा नहीं गया है.

दक्षिणी अफ़ग़निस्तान को अफ़ग़ानिस्तान के बाहर इस्लामी चरमपंथियों का पहला बड़ा गढ़ माना जाता है.

ग़ौरतलब है कि इसी संघर्ष के दौरान इस्लामाबाद में अमरीकी सीनेटर जॉन कैरी आजकल पाकिस्तानी नेताओं से मिल रहे हैं. वे अमरीका की ओर से पाकिस्तान को दी जाने वाली अरबों डॉलर की मदद के बारे में भी चर्चा करेंगे.

मैडॉना के संगीत से परेशान पड़ोसी





अगर मैडॉना जैसी कलाकार आपकी पड़ोसी हो तो लोग आपकी क़िस्मत पर रश्क करेंगे. कहां तो उनके प्रशंसक उनकी एक झलक देखने को तरसते हैं और कहां आप सीढ़ी चढ़ते उतरते या लिफ़्ट में यूं ही अचानक उनसे टकरा जाते हैं.

लेकिन न्यूयॉर्क के मैनहैटन इलाक़े में मैडॉना के अपार्टमेन्ट के ऊपर रहने वाली कैरन जॉर्ज अपनी पड़ोसन से परेशान हैं. उन्होने सुप्रीम कोर्ट में मैडॉना के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज कराई है कि वो बहुत ऊंचे संगीत पर रिहर्सल करती हैं.

कैरन ने अपनी शिकायत में लिखा है, “मैडॉना और उनके आमंत्रित अतिथि बारंबार नाचते हैं या बहुत ऊंचे संगीत पर प्रैक्टिस करते हैं”.

मैडॉना की पड़ोसन ये कहकर मैनहैटन स्थित इस इमारत का प्रबंधन करने वाली कम्पनी पर मुक़दमा ठोक रही हैं कि उनकी शिकायतों पर कोई क़दम नहीं उठाया गया.


लेकिन प्रबंधन कम्पनी और मैडॉना की प्रवक्ता ने कोई भी टिप्पणी करने से इंकार कर दिया.

कैरन जॉर्ज ने जो शिकायत दर्ज की है उसमें लिखा है कि जब भी मैडॉना के रिहर्सल होते हैं उन्हे इमारत छोड़ कर जाना पड़ता है, “क्योंकि शोर और कंपन दीवारों से होता हुआ उनके अपार्टमेन्ट तक पहुंचता है जो बर्दाश्त के बाहर होता है”.

उनका कहना है कि उन्होने सबसे पहले 2008 में शिकायत की थी लेकिन कुछ नहीं किया गया.

मैडॉना अपने फ़िल्म निर्देशक पति गाय रिची से तलाक़ होने के बाद इस इमारत की सातवीं मंज़िल के अपार्टमेन्ट में चली गई थीं जहां से न्यूयॉर्क का सेंट्रल पार्क साफ़ दिखाई देता है.

..परदेस जा के परदेसिया, एड्स न लाना पिया


पिया के परदेस कमाने जाने पर पहले महिलाएं एक फिल्मी गाना गुनगुनाती थीं.. परदेस जा के परदेसिया,भूल न जाना पिया। अब इस गाने को बदल कर कहना पड़ रहा हैं.. परदेस जा के परदेसिया, एड्स न लाना पिया। वैशाली जिले में खतरे की घंटी बज चुकी है, यहां एचआईवी पाजिटिव लोगों की संख्या पांच सौ के पार हो चुकी है। जिले में इस वर्ष करीब 1200 लोगों की जांच करायी गयी है। समेकित परामर्श एवं जांच केन्द्र की रिपोर्ट के अनुसार अब तक 518 लोग ऐसे चिह्नित किये गये हैं जो एचआईवी/एड्स के साथ जी रहे हैं। विभिन्न स्त्रोतों से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार जिले में 54 लोगों की मौत हो चुकी है। सबसे ज्यादा संक्रमितों की संख्या हाजीपुर एवं लालगंज प्रखंड में पायी गयी है। कई ऐसे गांव-टोले चिह्नित किये गये हैं, जहां दर्जनों की संख्या में लोग पीडि़त हैं। इस गंभीर बीमारी से महिलाएं और बच्चे तेजी से संक्रमित हो रहे हैं। 14 एड्स संक्रमित बच्चे पहचाने गये हैं। ये सभी अपने पिता की गलती के चलते अनाथ हो गए हैं। एड्स का तेजी से प्रसार होने के पीछे जो महत्वपूर्ण मूल कारण सामने आ रहा हैं, वह है पलायन। राज्य में कई दशकों से जारी आर्थिक बदहाली के चलते मेहनतकश लोगों का रोजी-रोटी के लिए महानगरों का रुख करना जारी है। इनमें जिन लोगों ने पत्नी से दूर रहने के दौरान असुरक्षित यौन संबंध बनाये, उनमें से कुछ को इस लाइलाज बीमारी का शिकार होना पड़ा। बात यहीं रुक जाती, लेकिन इन संक्रमित लोगों ने घर लौट कर पत्नी से संबंध बनाये। बीमारी पत्नी से होकर बच्चों में बंटने लगी। ऐसी नादानी कर वालों में ड्राइवरों की संख्या सबसे ज्यादा है। अशिक्षा और यौन व्यवहार में असावधानी के चलते बीमारी फैलती जा रही है। जागरूकता की भी कमी है। इसे ध्यान में रख कर यूनिसेफ ने इस साल यहां लक्ष्य कार्यक्रम की शुरूआत की है। हाजीपुर, लालगंज, वैशाली, भगवानपुर, महुआ, पातेपुर, महनार, बिदुपुर एवं राघोपुर प्रखंड के 29 गांवों में नारायणी सेवा संस्थान महीनों से काम कर रहा है। 20 गांवों में अब तक रेड रिबन क्लब का गठन किया गया है। 40 लिंक वर्कर एवं 80 स्वयंसेवक काम कर रहे हैं जो न सिर्फ हमउम्र के युवाओं को जागरूक कर रहे हैं, बल्कि एड्स जांच के लिए प्रेरित कर रहे हैं। इसके अलावा सभी चयनित गांवों में ग्राम सहायता समूह का गठन किया गया है। मुखिया एवं सरपंच इसके अध्यक्ष होते हैं। पहली बार गर्भवती महिलाओं की जांच करायी जा रही है ताकि एचआईवी पाजिटिव पाये जाने की स्थिति में सुरक्षात्मक कदम उठाया जा सके। 55 कांडोम डिपो खोला गया है ताकि लोग इसका उपयोग कर सुरक्षित यौन संबंध स्थापित कर सकें। जिला एड्स नियंत्रण इकाई के परियोजना समन्वयक मनीष कुमार शंकर के अनुसार समेकित परामर्श एवं जांच केन्द्र की रिपोर्ट के अनुसार जिले में 518 लोग एचआईवी/एड्स के साथ जी रहे हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं को जागरूक करने के लिए आंगनबाड़ी सेविकाओं, सहायिकाओं तथा आशा कार्यकर्ताओं को विशेष रूप से प्रशिक्षित कर उन्हें लगाया गया है। एड्स संक्रमित लोगों की सूची बनाई जा रही है, ताकि उन्हें सरकारी योजनाओं से लाभान्वित किया जा सके।

कंगारुओं के देश में भी जलते हैं खेत


( डॉ सुखपाल)-

फसल देने के बाद पंजाब के खेत जलते हैं तो उनसे उठने वाला धुआं मीलों तक अपनी कालिख के साथ-साथ लोगों के लिए परेशानी बिखेरता है। कारण यह है कि इन खेतों में गेहूं और धान के साथ पैदा होने वाली पराली को ठिकाने लगाने का कोई उचित तरीका किसान जानते ही नहीं, लिहाजा उसे जला देना ही उनके लिए सबसे सरल काम है। बात सिर्फ पंजाब की ही नहीं है, यहां से हजारों मील दूर विकसित कहे जाने वाले आस्ट्रेलिया में भी किसान अपने खेतों में फसल के साथ पैदा होने वाली पराली जलाते हैं और वहां की सरकार भी इससे परेशान है। इस समस्या से निजात पाने के लिए आस्ट्रेलिया पंजाब की मदद ले रहा है। यह समस्या कितनी गंभीर है, इसका अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि अकेले धान के सीजन में प्रतिवर्ष 18 मिलियन टन से अधिक पराली खेतों में फूंक दी जाती है। पंजाब किसान आयोग के सलाहकार डा. पीएस रंगी ने दैनिक जागरण को बताया कि आस्ट्रेलिया भी पराली जलाने की समस्या से पीडि़त है। इस समस्या का कोई समाधान लेने के उद्देश्य से आस्ट्रेलिया के एनएसडब्ल्यू प्राइमरी इंडस्ट्री विभाग के डा. जैसन कारेन और डा. रजिंदर सिंह पिछले हफ्ते पंजाब दौरे पर थे। पराली जलाने की समस्या को जड़ से उखाड़ फेंकने के संयुक्त अभियान के तहत पिछले सप्ताह पंजाब किसान आयोग, कृषि विभाग, बिजली विभाग, पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड, गैर परंपरागत ऊर्जा विकास एजेंसी, साइंस, टेक्नोलोजी एवं पर्यावरण विभाग, सहकारिता, इंडस्ट्री विभाग और पीएयू के रिसर्च विभाग के उच्च अधिकारियों की बैठक में आस्ट्रेलिया सरकार के उक्त दोनों नुमाइंदे भी उपस्थित थे। पराली जलाने के बजाय उसके सदुपयोग के लिए लुधियाना स्थित पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के इंजीनियरिंग कालेज में रेजेड्यू मैनेजमेंट प्रोजेक्ट चल रहा है। इस प्रोजेक्ट को आस्ट्रेलिया सरकार फंड कर रही है। प्रोजेक्ट में गेहूं की बिजाई करने वाली अत्याधुनिक मशीन हैपी सीडर विकसित की गई है। पंजाब में इस मशीन की सफलता के बाद इसे आस्ट्रेलिया में अपनाने की योजना है। पंजाब सरकार ने इस समस्या से निपटने के लिए जहां हैपी सीडर बिजाई मशीनों को प्रोत्साहित करने के लिए पंजाब किसान आयोग को 40 लाख रुपये की सब्सिडी राशि दे दी है, वहीं पहली बार एक करोड़ 60 लाख रुपये की सब्सिडी बेलर उपकरण मुहैया कराने के लिए पंजाब किसान आयोग को दी गई है। बेलर में पराली को काटने वाला श्रेडर, कटी हुई पराली को एकत्र करने वाला रेकर और उसकी गांठ बांधने वाला बेलर शामिल होता है। इस समूची यूनिट की कीमत लगभग 11 लाख रुपये है जिस पर पंजाब किसान आयोग 5 लाख रुपये तक की सब्सिडी देगा। इस सब्सिडी को किसान, कृषि केंद्र, चीनी मिलें, पेपर मिल, को-जनरेशन यूनिट और बायो ऊर्जा पर आधारित इंडस्ट्री यूनिट भी हासिल कर सकेंगे। बेलर तकनीक से किसान के खेत से पराली के बंडल बनाकर संबंधित को-जनरेशन यूनिटों एवं पेपर मिलों तक पहुंचाया जा सकेगा। हैपी सीडर ड्रिल एक साथ धान के ठूंठ और पराली को काटकर गेहूं की बिजाई करता है। इसके कारण धान का कचरा जलाने या खेत से हटाने की जरूरत नहीं रहती। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार इस तकनीक के माध्यम से ही 85 फीसदी पराली खेत में ही निपटाई जा सकेगी और यह खेत में खाद का भी काम करेगी। पंजाब कृषि विभाग के निदेशक डा. बीएस सिद्धू ने कहा कि पंजाब सरकार किसानों को पराली की समस्या का पक्का हल ढूंढने का गंभीर प्रयास कर रही है। उनमें हैपी सीडर के बाद बेलर तकनीक नई खोज है।

ताकि सरहद में न घुस पाएं भगौड़े तालिबानी


नई दिल्ली : तालिबान के खिलाफ पाकिस्तानी सेना के आक्रामक अभियान के बाद पड़ोस से जुड़ी सीमा पर चौकसी और बढ़ी दी गई है। सेना के सभी अंगों को सतर्क करने के साथ-साथ पाकिस्तान से जुड़ी सीमा पर तैनात सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की गश्त भी तेज कर दी गई है। रक्षा मंत्री ए.के. एंटनी व सेनाध्यक्ष जनरल दीपक कपूर ने भी माना है कि पाकिस्तान के हालात गंभीर हैं, लेकिन आश्वस्त किया कि भारतीय सेनाएं तालिबान से संभावित खतरे का मुकाबला करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। इस बीच जम्मू-कश्मीर के कई संवेदनशील स्थानों पर राष्ट्रीय राइफल्स की दो बटालियनें तैनात की गई हैं। अमेरिका के दबाव में पाकिस्तान को तालिबान के खिलाफ आक्रामक सैन्य अभियान चलाना पड़ रहा है। भारतीय सुरक्षा तंत्र को आशंका है कि पड़ोस में जिस तरह के हालात हैं, उसका कुछ असर भारतीय सीमा या आंतरिक सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। तालिबान लगातार भारत को सबक सिखाने की भी धमकी देता चला आ रहा है। इसके मद्देनजर सीमा व आंतरिक सुरक्षा के मोर्चे पर भारतीय सुरक्षा तंत्र ने सक्रियता बढ़ा दी है। सेना प्रमुख जनरल दीपक कपूर ने कहा है कि अगल-बगल कोई बड़ी घटना होती है तो फर्क तो पड़ता ही है। हालांकि, उन्होंने आगे जोड़ा कि पाकिस्तान में तालिबान जो कर रहा है वह पड़ोसी मुल्क की समस्या है। हमें इस बात में कोई शक नहीं है कि अगर तालिबान ने हमारे देश में कोई नापाक हरकत करने की कोशिश की तो उसे मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। इसी संबंध में रक्षा मंत्री एंटनी ने भी एक कार्यक्रम में कहा, आतंकवाद न सिर्फ हमारी, बल्कि पूरी दुनिया की चिंता का प्रमुख विषय है। मौजूदा समय में सेना की भूमिका बाहरी व आंतरिक सुरक्षा को महफूज रखने में बहुत ज्यादा अहम हो गई है। एंटनी ने भरोसा दिलाया कि भारतीय सेनाएं किसी भी स्थिति और कैसे भी खतरे से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान में चल रहे घटनाक्रम पर गृह मंत्री पी. चिदंबरम की भी रक्षा मंत्री से चर्चा हुई है। गृह मंत्रालय का मानना है कि पाकिस्तान के कट्टरपंथियों की हमदर्दी हासिल करने के लिए तालिबान भारतीय सरजमीं पर हरकत की कोशिश कर सकता है। शायद इन्हीं आशंकाओं का ही असर है कि सेना के आतंक निरोधी दस्ते राष्ट्रीय राइफल्स के दो हजार सैनिकों की जम्मू-कश्मीर में नए स्थानों पर तैनाती की गई है।

आयुर्वेदिक दवाओं पर होगा गारंटी का सरकारी ठप्पा


( डॉ सुखपाल)-मुनाफाखोर कंपनियां कहीं हमें आयुर्वेद के नाम पर बेवकूफ तो नहीं बना रहीं! फिल्मी सितारों के विज्ञापन और लुभावने ऑफर्स के साथ आ रहे आयुर्वेदिक उत्पादों को देख कर ये सवाल ज्यादातर लोगों के मन में उठ रहा होता है। लेकिन अब जल्दी ही आप क्वालिटी की गारंटी का सरकारी ठप्पा देखकर आयुर्वेदिक दवाएं खरीद सकेंगे। स्वास्थ्य मंत्रालय के आयुष (आयुर्वेद, योग व प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्धा और होम्योपैथी) विभाग ने 641 तरह की दवाओं के फार्मूले तय कर लिए हैं। इनमें आयुर्वेदिक उत्पादों में सबसे ज्यादा बिकने वाला च्यवनप्राश भी शामिल है। अब अगले कदम के तौर पर सरकार दवा बनाने वाली कंपनियों की जांच शुरू करने जा रही है। आयुष की सचिव एस जलजा ने बताया कि आयुष ने भारतीय मानक परिषद (क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया) के साथ मिल कर दवा निर्माताओं के लिए एक विशेष योजना शुरू की है। इसके तहत निर्माता अपनी निर्माण प्रक्रिया की जांच करवा कर आयुष का क्वालिटी मार्क हासिल कर सकता है। शुरुआत में यह सर्टीफिकेशन योजना पूरी तरह स्वैच्छिक है। क्वालिटी काउंसिल के विशेषज्ञ दवा निर्माता के परिसर की जांच करेंगे और अगर वह आयुष के मानकों का पूरी तरह पालन करता पाया गया तो उसे सरकारी ठप्पा लगाने का हक मिल जाएगा। आयुर्वेद की लोकप्रिय दवा च्यवनप्राश के बारे में पूछे जाने पर वे कहती हैं कि इसमें लगभग 52 तरह के अवयव मिले होते हैं, लेकिन जिन दवाओं का फार्मोकोपिया या फार्मूला तैयार किया गया है, उसमें यह भी शामिल है। जलजा कहती हैं कि उम्मीद की जानी चाहिए कि सभी बड़ी और मझोली कंपनियां भी इस तरह की मान्यता के लिए आगे आएंगी। आयुर्वेद की दवाओं का लगभग दो सौ करोड़ का सालाना कारोबार करने वाली दिव्य फार्मेसी के प्रमुख आचार्य बालकृष्ण का मानना है कि अब भी आयुर्वेदिक दवाओं को कई देशों में दवा की बजाय हर्बल या फूड प्रॉडक्ट के नाम पर बेचना होता है। इसकी वजह अपने यहां इसके मानकीकरण पर काम न होना है। उनके मुताबिक सरकार का यह प्रयास बेहद देर से उठाया गया लेकिन सराहनीय कदम है। मगर सरकार को यह देखना होगा कि इस प्रक्रिया में कहीं वो वैद्य न मारे जाएं जो अपने ज्ञान के आधार पर बहुत छोटे स्तर पर सबसे विश्वसनीय दवाएं बना रहे हैं। अखिल भारतीय आयुर्वेद महासम्मेलन के अध्यक्ष और प्रसिद्ध वैद्य देवेंद्र त्रिगुणा कहते हैं कि खास कर विदेशों में आयुर्वेदिक दवाओं को व्यापक स्वीकृति दिलाने के लिए यह बेहद जरूरी है। त्रिगुणा के मुताबिक निर्माण के साथ-साथ इसकी बिक्री करने वालों की जांच भी सुनिश्चित करनी चाहिए।

तालिबान को मुंहतोड़ जवाब देगा भारत


तालिबान के खिलाफ पाकिस्तानी सेना के आक्रामक अभियान के बाद पड़ोस से जुड़ी सीमा पर चौकसी और बढ़ी दी गई है। सेना के सभी अंगों को सतर्क करने के साथ पाकिस्तान से जुड़ी सीमा पर तैनात सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की गश्त भी बढ़ा दी गई है। रक्षामंत्री एके एंटनी व सेनाध्यक्ष जनरल दीपक कपूर ने भी माना कि पाकिस्तान के हालात गंभीर हैं, लेकिन उन्होंने यह भी आश्वस्त किया कि भारतीय सेनाएं तालिबानी खतरे से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। अमेरिका के दबाव में पाकिस्तान को तालिबान के खिलाफ आक्रामक सैन्य अभियान चलाना पड़ रहा है। भारतीय सुरक्षा तंत्र को आशंका रही है कि पड़ोस में जिस तरह के हालात हैं, उसका कुछ असर भारतीय सीमा या आंतरिक सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। तालिबान लगातार भारत को सबक सिखाने की भी धमकी देता चला आ रहा है। इसके मद्देनजर सीमा पर व आंतरिक सुरक्षा के मोर्चे पर भारतीय सुरक्षा तंत्र ने सक्रियता बढ़ा दी है। सेना प्रमुख जनरल दीपक कपूर ने माना कि यदि अगल-बगल कोई बड़ी घटना होती है तो फर्क तो पड़ता ही है। हालांकि पाकिस्तान में तालिबान जो कर रहा है वह पड़ोसी मुल्क की समस्या है। हमें इस बात में कोई शक नहीं है कि अगर तालिबान ने हमारे देश में कोई नापाक हरकत करने की कोशिश की तो उसे मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। सेना प्रमुख के बयान से साफ है कि सेनाएं पड़ोस में चल रही हर गतिविधि पर नजर रखे हैं और किसी भी खतरे का सामना करने के इंतजाम भी किए गए हैं। इसी संबंध में रक्षामंत्री एके एंटनी ने भी एक कार्यक्रम में कहा कि आतंकवाद न सिर्फ हमारी, बल्कि पूरी दुनिया की चिंता का प्रमुख विषय है। मौजूदा समय में सेना की भूमिका बाहरी व आंतरिक सुरक्षा को महफूज रखने में बहुत ज्यादा अहम हो गई है। एंटनी ने भरोसा दिलाया कि भारतीय सेनाएं किसी भी स्थिति और कैसे भी खतरे से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। पाकिस्तान में चल रहे घटनाक्रम पर गृहमंत्री पी चिदंबरम की रक्षामंत्री से भी चर्चा हुई। गृह मंत्रालय तालिबान के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई के दूरगामी परिणाम देख रहा है। उनका भी मानना है कि सीधे तो कोई खतरा नहीं है, लेकिन तालिबान पाकिस्तान के कट्टरपंथियों का समर्थन हासिल करने के लिए भारतीय सरजमीं पर किसी हरकत की साजिश रच सकता है। इससे पाकिस्तान के अंदर सेना की कार्रवाई के खिलाफ तालिबानी अपने कुछ हमदर्द जुटा सकते हैं। इसलिए खतरे को नकारा नहींजा सकता है।

दीपावली सेलीब्रेट की तिहाड़ जेल में


नई दिल्ली स्थित तिहाड़ जेल में दीपावली सेलीब्रेट करने पहुंचे आने वाली फिल्म जेल के अभिनेता मनोज वाजपेयी, नील नितिन मुकेश और निर्देशक मधुर भंडारकर। उन्होंने कैदियों के साथ खुशियां बांटीं।

स्मार्ट पति नहीं होने पर दे दी जान


पति के स्मार्ट नहीं होने पर महिला ने फांसी लगाकर जान दे दी। यह महिला की दूसरी शादी थी। सफदरजंग, दिल्ली निवासी ममता की सात साल पहले शादी हुई थी। उससे एक बेटा भी हुआ। पति की मौत हो गई। ममता के सिर से मां-बाप का साया पहले ही उठ चुका था। वह बड़ी बहन के पास रहने लगी। बहन ने ममता की शादी बगैर उसकी पसंद जाने बरौला निवासी गैस एजेंसी में ड्राइवर सुरेश से तय कर दी। दोनों की कोर्ट में तीन साल पहले शादी हो गई। ममता अपने बेटे के साथ बरौला आकर रहने लगी। ममता का पहला पति काफी सुंदर था, जबकि सुरेश उतना सुंदर नहीं था। इस कारण ममता काफी उदास रहती थी। उसने सुरेश से उसके सुंदर न होने की बात भी कही थी। तीन दिनों से वह सुरेश से जिंदगी से जी भर जाने की बात कह रही थी। सुरेश उसे समझा रहा था। रविवार रात सुरेश व ममता के बीच काफी बहस हुई। ममता उसके साथ रहने को तैयार नहीं थी। सुरेश सोमवार सुबह दूध लेने गया। दूध लेकर आया तो ममता फंदे से पंखे के सहारे लटकी थी। उसने तत्काल पुलिस को सूचना दी।

देश का सबसे लंबा फ्लाईओवर


हैदराबाद में सोमवार को मुख्यमंत्री के. रोसैय्या ने देश के सबसे लंबे फ्लाईओवर का उद्घाटन किया। 11.633 किमी. लंबे फ्लाईओवर का नाम पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव के नाम पर पीवीएनआर एक्सप्रेस वे रखा गया है। 4.39 अरब रुपये की लागत से 17.2 मीटर चौड़े फ्लाईओवर का निर्माण चार वर्ष में पूरा हुआ है।

विधायक जस्सी का गनमैन गोली लगने से घायल


डबवाली( डॉ सुखपाल) पंजाब के एक विधायक के गनमैन से अचानक अपनी सर्विस रिवॉल्वर से चली गोली से वह स्वयं घायल हो गया। जिसे उपचार के लिए हरियाणा के नगर डबवाली के सिविल अस्पताल में ले जाया गया। लेकिन उसकी गंभीर हालत को देखते हुए बठिंडा रैफर कर दिया गया। पुलिस सूत्रों के अनुसार विधायक हरमन्दर सिंह जस्सी दीपावली के कारण अपने गांव जस्सी बागवाली में आया हुआ था और उसका गनमैन मंगा सिंह पुत्र दर्शन सिंह गांव छतराना (पटियाला) भी साथ ही था। सूत्रों के अनुसार मंगा सिंह अपने अन्य दो साथियों के साथ गांव जस्सी बागवाली के बराड़ वैष्णों ढाबा पर रविवार रात को करीब 8 बजे खाना खाने के लिए गया था। खाना खाने के बाद जब वह अपने सर्विस रिवॉल्वर को संभाल रहा था तो अचानक रिवॉल्वर से गोली चल गई जो उसके पेट में एक साईड पर लगी। मंगा सिंह को घायल अवस्था में उपचार के लिए निकटवर्ती हरियाणा राज्य के नगर डबवाली के सिविल अस्पताल में ले जाया गया। लेकिन उसकी गंभीर हालत को देखते हुए उसे बठिंडा रैफर कर दिया गया। पता चला है कि इलाज के लिए उसे संगरूर ले जाया गया है। बराड़ वैष्णों ढाबा के मालिक मनदीप सिंह ने बताया कि मंगा सिंह बगैरा ने ढाबे पर खाना खाया और जब वह अपने पिस्तौल को संभालने लगा तो गोली चल गई। थाना संगत प्रभारी संदीप सिंह भाटी ने इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि मंगा सिंह जब पिस्तौल को डब में डालने लगा तो उसकी पिस्तौल बैल्ट में अटक गई जिससे पिस्तौल का टाईगर गार्ड दब गया और गोली चल गई। मामले की जांच पड़ताल की जा रही है।

सोमवार, 19 अक्टूबर 2009

भारत को ईरान का अल्टीमेटम


भारत में ईरान के राजदूत ने संकेत दिए हैं कि अगर भारत तय समयसीमा के अंदर गैस पाइपलाइन पर बातचीत नहीं करता है तो वो चीन के सामने ये पेशकश रख सकता है.

नई दिल्ली में जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि क्या चीन ने पाइपलाइन योजना में रुचि दिखाई है तो उन्होंने हाँ में जवाब दिया.

उनका कहना था, हमने पाकिस्तान के साथ मिलकर पाइपलाइन संधि पर हस्ताक्षर कर लिए. लेकिन भारत चाहे तो अब भी इस संधि का हिस्सा बन सकता है. लेकिन ये पेशकश असीमित समय के लिए नहीं है.

ईरानी राजदूत ने उम्मीद जताई कि त्रिपक्षीय समझौते पर सहमति हो जाएगी ताकि ईरान को किसी और देश से बातचीत न करनी पड़े.

भारत ईरान-पाकिस्तान के साथ मिलकर गैस पाइपलाइन योजना से जुड़ा रहा है लेकिन वो पिछले कुछ समय से बातचीत से दूर है. भारत 2007 में इस बातचीत से अलग हो गया था.

असहमति

भारत का कहना है कि बातचीत से पहले इस बात पर सहमति हो कि पाकिस्तान से गुज़रने वाली पाइपलाइन की ट्राज़िट से जुड़ी कीमत द्विपक्षीय स्तर पर तय की जाए.

मई 2009 में पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी ईरान के दौरे पर गए थे और उसी दौरान दोनों देशों ने गैस पाइपलाइन पर समझौता कर लिया था.

लेकिन ये नहीं बताया गया था कि योजना से जुड़े सारे मुद्दे सुलझा लिए गए हैं या नहीं.

इस गैस पाइपलाइन को शुरू में 2.2 अरब क्यूबिक फ़ीट गैस भारत और पाकिस्तान को पहुँचाना था (दोनों देशों का आधी-आधी गैस).

भारत और पाकिस्तान के बीच आर्थिक मुद्दों पर सहयोग ज़्यादा नहीं है लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि व्यवसायिक रिश्तों को मज़बूत करने से आपसी रिश्ते सुधारने में मदद मिलेगी. रूस के बाद ईरान में गैस का सबसे बड़ा भंडार है.

तुम जियो 100 साल...




एक शोध के मुताबिक ब्रिटेन और अन्य धनी देशों में अब जन्म लेने वाले आधे से ज़्यादा बच्चे 100 वर्ष तक जीवित रहेंगे.

लेंसेट जर्नल में प्रकाशित इस शोध में कहा गया है कि उम्र के अंतिम पड़ाव में लोगों को कम गंभीर बीमारियों से जूझना पड़ेगा.

इस शोध में 30 से ज़्यादा विकसित देशों से मिले आंकड़ों के विश्लेषण के बाद पाया गया कि 80 वर्ष से ज़्यादा की उम्र तक जीवित रहने की संभावना, स्त्री और पुरुष दोनों के लिए, वर्ष 1950 के बाद से दोगुनी हो गई है.

इस शोध के प्रमुख दक्षिणी डेनमार्क विश्वविद्यालय के डैनिश एजिंग रिसर्च सेंटर में काम करने वाले प्रोफ़ेसर कारे क्रिस्टेनसेन ने बताया कि वर्ष 1840 से औसत आयु में वृद्धि हो रही है और इसमें किसी भी तरह की कमी का कोई संकेत नहीं दिख रहा है.

औसत आयु में वृद्धि

वर्ष 1950 में 80 से 90 वर्ष के बीच जीवित रहने वालों की संभावना स्त्रियों के लिए औसतन 15 से 16 प्रतिशत और पुरुषों के लिए 12 प्रतिशत थी. वर्ष 2002 में यह आंकड़ा स्त्रियों के लिए 37 प्रतिशत और पुरुषों के लिए 25 प्रतिशत हो गया

शोध के मुताबिक वर्ष 1920 तक बच्चों की जन्मदर में सुधार से औसत आयु में वृद्धि देखी गई जबकि वर्ष 1970 के बाद विशेष रूप से बुज़ुर्ग लोगों की उम्र में बढ़ोत्तरी से औसत आयु में वृद्धि देखी जा रही है.

प्रोफेसर क्रिस्टेनसेन ने बताया कि वृद्ध और अति वृद्ध लोगों की संख्या में बढ़ोत्तरी से स्वास्थ्य सुविधाओं के सामने परेशानी बढ़ सकती है. हालांकि उनका कहना था, "वर्तमान में जो तथ्य सामने हैं उससे पता चलता है कि न सिर्फ़ लोगों की आयु में बढ़ोत्तरी हुई है, बल्कि गंभीर बीमारियाँ और बुढ़ापे की अन्य शारीरिक परेशानियाँ भी कम हो रही है."

शोधार्थियों का कहना है कि अब जीवन को उम्र के हिसाब से चार चरणों में देखा जा सकता है- बचपन, युवावस्था, युवा बुढ़ापा और वृ्द्ध बुढ़ापा.

अब छलावा मुश्किल


अगर आप उच्च शिक्षा पाने के लिए विदेश जाने के इच्छुक हैं तो बेहतर होगा कि पहले आप यूनेस्को (संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक व सांस्कृतिक संगठन) की वेबसाइट चेक कर लें। इससे आपको उस संस्थान के बारे में पुख्ता जानकारी मिल पाएगी जहां आप अध्ययन करना चाहते हैं। फर्जी शिक्षण संस्थानों की दिनों-दिन बढ़ती संख्या पर रोक लगाने के लिए यूनेस्को ने यह अहम कदम उठाया है।संस्था से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि यूनेस्को की वेब साइट पर करीब 30 देशों में स्थित मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थाओं की सूची उपलब्ध है। इनमें से अधिकांश यूरोपीय देशों के संस्थान हैं। यूनेस्को के इस अधिकारी ने बताया कि अगले कुछ महीनों में ऐसे देशों की संख्या 60 हो जाएगी, जहां के शिक्षण संस्थानों के बारे में वेब साइट पर जानकारी उपलब्ध होगी। भारत में मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थानों की सूची अगले माह तक इस साइट पर उपलब्ध हो जाएगी। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने एजुकेशन कंसल्टेंसी इंडिया लिमिटेड (ईडीसीआईएल) को यह जिम्मेदारी सौंपी है। यूनेस्को इन संस्थानों के बारे में मानदंड तैयार कर रहा है, ताकि छात्र इन संस्थानों के बारे में पुख्ता जानकारी पा सकें। यूनेस्को के एक अधिकारी के मुताबिक अभी तक ऐसा कोई डाटा मौजूद नहीं है, जिससे दुनिया में फर्जी शिक्षण संस्थाओं का पता चल सके।

16 साल की बेटी को जुए में हार गया बाप


महाभारत काल में युधिष्ठिर जुए में अपनी पत्नी द्रौपदी को हार गये थे। पिछले दिनों पश्चिम बंगाल के मालदा में एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी को दांव पर लगा दिया था। और, इसी दीवाली के दिन अत्याधुनिक शहर जमशेदपुर से बिल्कुल सटे घाटशिला में एक बाप ने अपनी 16 साल की बिटिया को दांव पर लगा दिया और हार भी गया। हालांकि इलाकाई पुलिस इससे अनजान थी। जब इस संवाददाता को जानकारी मिली की शहर के ठीक बीच में स्थित एक इलाके में जुआ खेला जा रहा है तो इसका लाइव देखने वह कैमरा लेकर पहुंच गया। जुआ स्थल पर रोशनी मद्धिम थी। कुछ लोग फ्लस, कटपत्ती, रमी आदि से अपनी किस्मत आजमा रहे थे। जब कोई जीतता तो जोर की आवाज होती। हारता तो भी कुछ वैसी ही आवाज। माहौल को मादक बनाने का भी पूरा इंतजाम था। खेल के दौरान शराब भी परोसी जा रही थी। शायद इसीलिए कि हार के गम का अहसास न हो सके और खिलाड़ी अंतिम स्थिति तक दांव लगाते रहें। ज्यों-ज्यों रात चढ़ती गयी नशे के खुमार में लोग लीन होते गये। पंजाब से कुछ कमाकर लौटे एक व्यक्ति (बदला नाम राम प्रकाश) भी पूरे दमखम के साथ खेलने बैठा था। वैसे तो वह लगातार हार रहा था। लेकिन पैग के साथ हौसला भी बढ़ रहा था। पहले नकद राशि हारी। फिर पत्नी के गहने हार गया। इतना होने के बाद गम बर्दाश्त करने को उसने पटियाला पैग लगा लिया। नशा कुछ और चढ़ा तो पहले तो पत्नी को दांव पर लगाने को सोची। संयोगवश पत्नी भाई फोटा (भैयादूज) मनाने अपने मायके गयी थी। तब बेटी का ख्याल आया। वह तुरंत घर गया। तब तक किसी को भान भी नहीं हुआ था कि वह ऐसा करने जा रहा है जिससे पूरी सामाजिक व्यवस्था शर्मशार हो जाएगी। वह नींद में पड़ी 16 साल की बेटी को उठाकर जुआ स्थल तक ले आया। बेटी नींद में थी। वह कुछ समझ नहीं पायी। जुआ स्थल पर बेटी को खड़ाकर पत्ती बांटने को कहा। उस समय सभी बेहद नशे में थे। लड़की पर भी दांव खेला गया। जब पत्ती दिखायी गयी तो उसके होश ठिकाने लग गये। क्योंकि बेटी को भी वह हार चुका था। यह दांव 12 हजार रुपये का लगा था। इसके बाद तो सबके होश ही उड़ गये। जुआ खेल रहे लोगों का तो मानो नशा ही फट गया। दांव में लड़की को जीतने वाला सामाजिक लोकलाज या फिर पुलिसिया डर से बाप को माफ करने की बात कहते हुये जुआ स्थल से ही फरार हो गया। वहां मौजूद सभी लोग भी भागने लगे। मुंह छिपाकर। अंधेरे का लाभ मिला। यह संवाददाता भी तस्वीर नहीं ले सका। सबसे बड़ी बात यह कि शहर के बीच में जुआ खेला जा रहा था। घंटों जुआ चला। शराब का दौर भी चलता रहा। पर पुलिस को कोई जानकारी ही नहीं हुई। न तो जुआ के समय और न ही जुआ के बाद। क्योंकि जब घाटशिला थाना प्रभारी रतिभान सिंह से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस घटना के बारे में कोई जानकारी नहीं है।

बोले सो निहाल..


बंदी छोड़ दिवस पर रविवार को अमृतसर में घुड़सवारी के करतब दिखाते हुए निहंग सिंह।
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मीरी-पीरी के संस्थापक छठे गुरु श्री हरगोबिंद राय की लाडली फौज ने सिख मर्यादाओं व परंपराओं के अनुसार बी ब्लाक के खुले मैदान में कला के जौहर दिखाए। निहंगों के विभिन्न संगठनों के मुखिया अपने अनुयायियों के साथ घी मंडी स्थित गुरुद्वारा फूला सिंह बुर्ज में रविवार सुबह से ही इक"ा होने शुरू हो गए थे। परंपरागत पोशाक के साथ परंपरागत शस्त्र उठाए निहंग सिंहों ने बी ब्लाक में होने वाली खेलों से पहले पूर्वाभ्यास किया। निहंग बलबीर ंिसह 300 मीटर की पगड़ी बांधकर गुरुद्वारा फूला सिंह बुर्ज में पहुंचा। निहंग सिंहों के साथ उनके छोटे बच्चे भी निहंग बाणे में सजे हुए थे। बी ब्लाक के खुले मैदान में निहंग सिंहों ने दो घोडि़यों पर सवार होकर नेजे से जमीन पर से एक टुकड़ा उठाने का करतब दिखाया। बोले सो निहाल, सतश्री अकाल के जयकारों के साथ निहंग बोलो के साथ शुरू हुई इस प्रतियोगिता में पक्का निहंग सिंह खिताब जीतने के लिए युवा निहंगों ने कड़ी मशक्कत की। निहंग सिंह प्यारा सिंह ने बताया कि निहंग सिंह बनना आसान नहीं है। अमृतपान करवाने के बाद किसी भी निहंग सिंह को गुरुद्वारा दमदमा साहिब के नजदीक गुरुद्वारा बेर साहिब में एक महीने का कड़ा अभ्यास करवाया जाता है। जहां उसे प्राचीन शस्त्रों को चलाने की ट्रेनिंग दी जाती है।

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