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सोमवार, 5 अक्टूबर 2009

प्रदेश में धनकुबेरों की जंग



हरियाणा विधानसभा चुनाव में इस बार धन कुबेरों में महाभारत हो रही है। सभी प्रमुख दलों ने टिकट वितरण में करोड़पतियों को दिल खोलकर टिकट बांटे हैं। सबसे अधिक धनकुबेर कांग्रेस में हैं। कांग्रेस के 90 प्रत्याशियों में से 72 करोड़पति हैं और यह कुल उम्मीदवारों का 80 फीसदी है। हरियाणा विधानसभा चुनाव के लिए दायर हलफनामों में 251 प्रत्याशी करोड़पति हैं। इनमें इनेलो के 56 प्रत्याशी, हजकां के 44 प्रत्याशी, भाजपा के 41 प्रत्याशी, बीएसपी के 29 प्रत्याशी, अकाली दल के दो प्रत्याशी और समाजवादी पार्टी का एक प्रत्याशी करोड़पति है। फरीदाबाद के 21 प्रत्याशी, गुड़गांव व हिसार के 18-18 प्रत्याशी, भिवानी के 16 प्रत्याशी, करनाल के 15 प्रत्याशी, महेंद्रगढ़ व सिरसा के 14-14 प्रत्याशी, सोनीपत, झज्जर, कुरुक्षेत्र के 13-13 प्रत्याशी, रेवाड़ी, अंबाला व यमुनानगर के 12-12 प्रत्याशी, जींद व कैथल के 11-11 प्रत्याशी, पानीपत, पंचकूला व रोहतक के 9-9 प्रत्याशी और फतेहाबाद के 8 प्रत्याशी करोड़पति हैं। प्रमुख सियासी पार्टियों की औसत जायदाद की बात करेंगे तो कांग्रेस के प्रत्याशियों की औसत जायदाद पांच करोड़, इनेलो व हजकां के प्रत्याशियों की तीन करोड़, भाजपा के प्रत्याशियों की जायदाद दो करोड़ है। एक तरफ जहां चुनाव में करोड़पतियों की भरमार है वहीं पर ऐसी प्रत्याशी भी हैं गुजारे लायक धन भी नहीं है। पानीपत जिला की इसराना सीट से समस्त भारतीय पार्टी के प्रत्याशी राम निवास के पास कोई भी चल या अचल संपति नहीं है। पृथला सीट से हजकां प्रत्याशी निर्मला पांचाल के पास केवल 1500 रुपये, नरवाना सीट पर सीपीआई प्रत्याशी सतपाल सरोहा के पास 2500 रुपये, गुहला सीट पर एनसीपी प्रत्याशी रोशन के पास 10 हजार रुपये और लोहारू सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी सुधा राम के पास महज 25 हजार रुपये हैं। इन सभी प्रत्याशियों के पास कोई अचल संपत्ति नहीं है।

32 साल से चौथे गियर में चला रहे हैं स्कूटर


( डॉ सुखपाल सावंत खेडा)-

मैं आजाद हूं। यही परिचय देते हैं सीमा शुल्क विभाग से छह साल पहले बतौर सुपरिटेंडेंट रिटायर हुए सुरिंदर सिंह आजाद। उनका जन्म 9 अगस्त 1942 को हुआ था। इसी दिन महात्मा गांधी जी ने नमक आंदोलन शुरू किया था। उनके पिता पिशौरा सिंह उस समय गांधी जी के आंदोलन को लेकर जम्मू गए थे। जब लौटे तो उन्हें बेटे के जन्म की खबर मिली। उन्होंने कहा हमारे यहां आजाद पैदा हुआ है। इसलिए उन्होंने यह नाम रखा। अमृतसर के भारत नगर निवासी सुरिंदर सिंह आजाद दुनियां के शायद पहले शख्स होंगे जिनके नाम एक विश्व रिकार्ड यह भी है कि उन्होंने सबसे अधिक 14 विश्व रिकार्ड अब तक बना चुके हैं, और 10 विश्व रिकार्ड के लिए उनकी फाइलों पर सर्च का काम चल रहा है। उनके नाम 1997 से अब तक लिम्का बुक ऑफ व‌र्ल्ड रिकार्ड में 14 रिकार्ड दर्ज हैं। हाल में ही उनके नाम एक विश्व रिकार्ड यह भी है कि चार पीढि़यों ने एक साथ परिवार समेत आंखें दान करने का है। 97 वर्षीय पिता पिशौरा सिंह, 67 वर्षीय सुरिंदर सिंह आजाद, पत्नी तरसेम कौर, बेटा हरमिंदर सिंह, गुरजीत सिंह, बहू हरविंदर कौर, सुखविन्द्र कौर, पोता तजिंदर सिंह, सरबजीत सिंह, हरप्रीत सिंह, हर्षप्रीत सिंह, पोती सिमरनजीत कौर, रुपिंदर कौर ने एक साथ आंखें दान की हैं। इस आंखें दान करने में एक ही परिवार के सबसे बुजुर्ग व सबसे छोटी छह वर्षीय पोती का नाम दर्ज है। आजाद ने अब तक 14 विश्व रिकार्ड बनाए। इनमें अधिकांश रिकार्ड ताली बजाकर या चुटकियां बजाते हुए बनाए हैं। पहला विश्व रिकार्ड उन्होंने विदेशी धरती पर नौ इंच छाती फुलाकर बनाया। 1977 वह पत्नी के साथ स्कूटर पर जा रहे थे। तभी एक्सीडेंट होने से उनके हाथ में चोट लग गई। स्कूटर का गियर बदलने में तकलीफ हो रही थी। उन्होंने चौथे गियर में ही स्कूटर चलाना पड़ा। चौथे गियर में स्कूटर चलाना इतना उन्हें भाया कि पिछले 32 साल से चौथे गियर में ही स्कूटर चला रहे हैं। यह भी आजाद का विश्व रिकार्ड है। 31 दिसंबर 1999 के रात की बारह बजे उन्होंने पहले दोनों हाथों से अलग-अलग भाषा में 1999 को बाय-बाय लिखा और ठीक 12 बजकर एक मिनट पर उन्होंने एक 2000 के आगमन पर एक साथ दोनों हाथों व मंुह से 2000 वेलकम लिखा।

जनता ने औरों का राज भी देखा और कांग्रेस का भी




( डॉ सुखपाल सावंत खेडा)- : जहां अमन-चैन रहता है, वहां विकास होता है। भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार ने हरियाणा में कानून का राज स्थापित कर विकास को गति प्रदान की। इसके विपरीत हरियाणा की जनता ने उन लोगों का राज भी देखा है जिन्होंने इस प्रदेश को तबाह कर दिया था। उनमें और कांग्रेस में यही फर्क है। वे अपने निजी स्वार्थ पूरा करने में लगे थे जबकि कांग्रेस जनता की खुशहाली व तरक्की के लिए काम रही है। आज पूरे हरियाणा की तरक्की सबके सामने है। कांग्रेस ने प्रदेश की तस्वीर बदल डाली है। यह कहना है कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का। वह विधानसभा चुनाव में अपनी पार्टी के प्रत्याशियों के पक्ष में आज रविवार को करनाल व सिरसा में चुनावी जनसभाओं को संबोधित कर रही थीं। सोनिया ने वाल्मीकि जयंती की बधाई देते हुए विश्वास जताया कि जनता अतीत में प्रदेश को तबाह करने वाली ताकतों को नकार देगी। इसके साथ ही कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के चुनाव प्रचार की शुरुआत हो गई है। सोनिया करनाल में लगभग 12 मिनट और सिरसा में भी लगभग इतना ही समय जनता से रूबरू हुई। इस दौरान उनकी झलक पाने के लिए लोग बेताब रहे। विपक्ष पर वार करते हुए सोनिया ने कहा कि आपने वे दिन भी देखें हैं जब डंडे का राज था। उनके जमाने में 2300 करोड़ का बजट था और इसमें भी प्रदेश की जनता पर कितना खर्च हुआ, यह सब जानते हैं। मुख्यमंत्री हुड्डा की पीठ थपथपाते हुए उन्होंने कहा कि पिछले साढ़े चार साल से प्रदेश में शांति व विकास की लहर चल रही है। आज हरियाणा सरकार ...जनता ने औरों.. का बजट 11 हजार करोड़ का है जो पहले से पांच गुणा ज्यादा है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व में यूपीए सरकार ने हरियाणा की दिल खोलकर मदद की है। किसान भाइयों के जो 71 हजार करोड़ रुपये के कर्ज माफ किए गए हैं, उससे हरियाणा के किसानों को भरपूर लाभ मिला है और उनके परिवारों को एक नई रोशनी मिली है। कांग्रेस हाईकमान ने जय जवान, जय किसान का नारा दिया। किसान देश के अन्नदाता है और कांग्रेस पार्टी उसका दर्द अच्छी तरह समझती है, इसलिए हरियाणा में 1600 करोड़ रुपये के बिजली के बिल भी माफ किए गए जिससे किसानों व छोटे दुकानदारों को राहत मिली है। हरियाणा देश का पहला ऐसा राज्य है जिसने कर्ज नहीं चुकाने पर किसानों को जेल भेजने का काला कानून भी समाप्त किया। इसके अलावा आज प्रदेश में नहरें बन रही हैं तो बिजलीघर भी बनाए जा रहे हैं, उद्योगों में पूंजी लगाई जा रही है। कमजोर तबके, बुजुर्गो व महिलाओं के लिए अनेक योजनाएं चल रही हैं। जय जवान का सांकेतिक नारा देते हुए उन्होंने कहा कि मैं जब भी यहां आती हूं हरियाणा के मेहनती किसानों व बहादुर सैनिकों की तस्वीर सामने उभर आती है। पूरा देश यहां के किसानों व जवानों पर गर्व करता है। सोनिया गांधी ने स्थानीय समस्याओं के समाधान में सरकार की भूमिका को भी बखूबी उल्लेखित किया। उन्होंने कहा कि सिरसा की तरक्की आपके सामने है। यहां बन रही यूनिवर्सिटी के लिए कांग्रेस की सरकार पैसे दे रही है तो कालेज के लिए भी धन की कमी नहीं रहने दी जाएगी। रेलवे ओवरब्रिज, एक ट्रामा सेंटर, कोर्ट काम्प्लैक्स भी यहां बनाए गए हैं। इसके साथ-साथ ज्यादा पानी इकट्ठा करने के लिए काम किया जा रहा है जिससे हजारों एकड़ जमीन की सिंचाई होगी। यहां की जमीन के रिकार्ड को कंप्यूटराइज्ड किया गया है। ये तमाम उपलब्धियां कांग्रेस सरकार की कार्यप्रणाली को खुद ही उजागर करती हैं। सोनिया गांधी ने कांग्रेस प्रत्याशियों को जनता से रूबरू कराते हुए उन्हें जिताने की अपील की। मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा सोनिया गांधी के मार्गदर्शन में कांग्रेस प्रत्येक वर्ग को साथ लेकर आगे बढ़ी। उन्होंने कहा कि गरीबों को दो लाख 37 हजार 100-100 गज के प्लाट बांटे गए हैं। गन्ने व गेहूं का देश में सबसे ज्यादा मूल्य हरियाणा के किसानों को दिया गया है। बुढ़ापा पेंशन बढ़ाई गई तो साथ ही उन्हें मुफ्त दवा देने की योजना लागू की गई। सांसद डा. अरविंद शर्मा ने सोनिया गांधी का अभिनंदन करते हुए कहा कि इस धरती पर जब भी गांधी परिवार का सदस्य आया है तो इस क्षेत्र ने तेजी से विकास किया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि करनाल संसदीय क्षेत्र कांग्रेस भारी बहुमत से जीत दर्ज करेगी। डा. शर्मा ने सोनिया गांधी को स्मृतिचिह्न व शाल भेंट की। कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष फूलचंद मुलाना ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर उनके साथ प्रदेश कांग्रेस प्रभारी पृथ्वीराज चव्हाण, केंद्रीय मंत्री कुमारी शैलजा, सांसद डा. रामप्रकाश, सांसद अशोक तंवर, पूर्व मंत्री विनोद शर्मा, वरिष्ठ कांग्रेस नेत्री विप्लव ठाकुर, चुनाव प्रभारी राजू भाई परमार, सिरसा जिला कांग्रेस प्रधान होशियारी लाल शर्मा समेत करनाल व सिरसा जिले के सभी हलकों के कांग्रेस प्रत्याशी मौजूद थे। वापस लाएंगे हरियाणा.. करीब पांच मिनट तक कुलदीप बिश्नोई को बोलने नहीं दिया। हजकां सुप्रीमो का अभिवादन करने के लिए उनके समर्थकों ने मंच के सामने बनी दोनों डी तोड़ दी। करीब 15 मिनट के भाषण में कुलदीप ने यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी को महंगाई और मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा को बेरोजगारी के लिए जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने बार-बार चौ. भजनलाल के सपनों के उन्नत हरियाणा का जिक्र किया। जनक्रांति महारैली के मंच पर चौ. भजनलाल, उनकी धर्मपत्नी जसमा देवी और रेणुका बिश्नोई पूरे समय मौजूद रहे। हलका प्रत्याशियों के लिए भी मंच पर बैठने की व्यवस्था की गई थी। प्रत्येक हजकां प्रत्याशी ने मंच पर आने के बाद भजनलाल और जसमा देवी के पांव छूकर आशीर्वाद लिया तथा कुलदीप से हाथ मिलाया। कुलदीप के भाषण के बाद चौ. भजनलाल करीब दो मिनट तक बोले। उन्होंने कहा कि कुलदीप मेरा बेटा है, उसे राज चलाना आता है, आप उसमें मेरी छवि देखकर वोट दे दो। भजनलाल ने कहा कि उन्होंने कुलदीप को हर व्यक्ति के काम करने के लिए बोल दिया है। कुलदीप के मुख्यमंत्री बनने के बाद प्रदेश के किसी भी व्यक्ति को अपने काम कराने में परेशानी नहीं आएगी। कुलदीप ने कहा कि उनके परिवार पर करीब 50 साल से लोगों का आशीर्वाद चला आ रहा है। इस अवधि में चौ. भजनलाल के जो काम अधूरे रह गए हैं, हजकां सरकार उन्हें पूरा करने का काम करेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव से पहले महंगाई और बेरोजगारी खत्म करने का वादा किया था, मगर दोनों समस्याओं में बढ़ोतरी हुई। पेट्रोल और डीजल के दामों में वृद्धि हो गई तथा लोगों को बिजली, पानी और सिंचाई के लिए जल उपलब्ध नहीं हो सका। मुख्यमंत्री सिर्फ अपने हलके में बिजली और पानी देकर पूरे प्रदेश की वाहवाही बटोरने का इरादा रखते हैं, जो कभी पूरा नहीं हो सकेगा। कुलदीप बिश्नोई ने कहा कि चौ. भजनलाल ने कभी बिरादरी और क्षेत्रवाद की राजनीति नहीं की है। वह छत्तीस बिरादरियों के नेता हैं और पूरे प्रदेश में उन्होंने दिल खोलकर नौकरियां बांटी हैं। भजनलाल ने उन्हें भी यही राजनीतिक दीक्षा दी है। कुलदीप ने कहा कि हजकां राज्य में बेरोजगारी निरोधक कानून लागू कर प्राइवेट संस्थानों में हरियाणा के 80 प्रतिशत युवाओं को नौकरियां प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि यदि 365 दिन की अवधि में वह राज्य में 1.10 लाख नौकरियां नहीं दे पाए तो 366वें दिन खुद ही मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे देंगे। हजकां सुप्रीमो ने याद कराया कि उन्होंने केंद्रीय मंत्री और भजनलाल ने राज्यपाल के पद ठुकराकर संघर्ष का रास्ता चुना है। अगर फिर भी उन्हें संघर्ष का फल नहीं दिया गया तो पवित्र राजनीति करने वाला कोई नेता संघर्ष की हिम्मत नहीं जुटा सकेगा। कुलदीप ने कहा कि इनेलो सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला का प्रदेश में जनाधार खत्म हो चुका है और भूपेंद्र हुड्डा की बातों पर लोगों को यकीन नहीं रहा है। यही कारण है कि यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी को हरियाणा के दौरे पर बुलाया गया है, मगर उन्हें जो रिपोर्ट मिली है, उसके मुताबिक सोनिया की रैलियों में लोग नहीं जुट पाए हैं। हजकां सुप्रीमो ने दो लाख तक के कर्जे माफ करने का ऐलान किया और कहा कि यदि लोग चाहें तो आज ही इतना कर्ज ले सकते हैं। मुख्यमंत्री बनते ही वह एक झटके में सारा कर्ज माफ कर देंगे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस एसवाईएल और हांसी बुटाना नहरों में पानी नहीं ला सकी है। किसान के खेतों की टेल तक भी पानी नहीं पहुंचा है। चौ. भजनलाल ने एसवाईएल नहर निर्माण के लिए जितना काम किया, उससे ज्यादा काम मुख्यमंत्री हुड्डा आज तक नहीं करा पाए हैं। उन्होंने रैली में पहुंचे प्रत्येक व्यक्ति से कम से कम सौ वोट पोल कराने का अनुरोध किया और दावा किया कि राज्य में जल्दी ही आम आदमी की सरकार बनने वाली है। हजकां के वरिष्ठ नेता धर्मपाल मलिक और यूथ विंग के प्रदेश अध्यक्ष राकेश कांबोज ने कहा कि उनकी पार्टी की सरकार आते ही प्रदेश की सभी समस्याएं खत्म हो जाएंगी। पूर्व सांसद रामजी लाल, पार्टी प्रत्याशी विनोद भयाणा, रण सिंह मान, राव नरेंद्र सिंह, पंडित जिले राम शर्मा, सतपाल सांगवान, कुसुम शर्मा, पवन शाहपुर, देवी लाल और निहाल सिंह मताणा ने भी जनक्रांति महारैली को संबोधित किया। महारैली के बाद करीब बीस मिनट तक कुलदीप अपने समर्थकों से खुले तौर पर मिलते रहे।

रविवार, 4 अक्टूबर 2009

लोटे, चौटाला तो, बदली चुनावी फिजा


( डॉ सुखपाल सावंत खेडा)-

ऐलेन ने तोहफा क्या मांगा..हिसार के तत्कालीन कमिश्नर राबर्ट हच ने अपनी पत्नी ऐलेन को ऐलनाबाद ही उपहार में दे दिया..पहले इस हलके का नाम खरियल हुआ करता था..ऐलेन को ऐलनाबाद से खासा लगाव हो गया..इनेलो सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला को भी इस हलके से बेहद लगाव है। 1968 में जब यह सीट सामान्य हुआ करती थी, तब चौटाला ने ऐलनाबाद से पहला चुनाव लड़ा और पहली बार एमएलए बने। 1972 के बाद ऐलनाबाद रिजर्व सीट हो गई..तब भी चौटाला और यहां के लोगों के बीच यारी कम नहीं हुई..2005 के चुनाव तक ऐलनाबाद के लोगों ने इनेलो के भागी राम को पांच बार और सुशील इंदौरा को दो बार चुनाव जितवाया..इस बार हलका फिर ओपन हो गया..चौटाला को मौका मिला तो उन्होंने खुद ही यहां से चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया। जी हां..ऐलनाबाद हलके की राजनीतिक स्थितियां कुछ ऐसी ही हैं। यह हलका चौटाला परिवार का गढ़ माना जाता है। इनेलो सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला करीब चार दशक बाद दूसरी बार ऐलनाबाद से चुनाव लड़ रहे हैं। उनके भाई प्रताप चौटाला यहां से 1967 में चुनाव जीत चुके हैं..अभी तक हुए दस चुनाव में से आठ बार यहां इनेलो का कब्जा रहा है। इस बार कांग्रेस ने पूर्व विधायक भरत सिंह बैनीवाल को चुनावी समर में उतारा है। भाजपा ने अमीरचंद मेहता, हजकां ने देवीलाल दड़बा और बसपा ने प्रसन्न सिंह खोसा पर दांव खेला है। भरत सिंह दड़बा से कांग्रेस के विधायक रह चुके हैं। इस बार दड़बा हलका खत्म हो गया है। इस हलके के कई गांव ऐलनाबाद में आ गए तो कांग्रेस ने बैनीवाल को चौटाला से मुकाबले खड़ा कर दिया है। लीकां गांव के कृष्णलाल और मसीतां के प्रहलाद की मानें तो बड़े चौटाला हलके में दो या तीन बार आए हैं..उन पर पूरे सूबे में पार्टी के प्रचार की जिम्मेदारी है..लोगों ने चौटाला को कह दिया, ऐलनाबाद का चुनाव यहां के लोग लड़ेंगे..आप तो सिर्फ सूबे में प्रचार पर निकल जाओ। मठदादू गांव के अजैब सिंह और मौजगढ़ सुंदर के अनुसार ऐलनाबाद का चुनाव एकतरफा है। नामधारी समुदाय के लोग थोड़ा बहुत इलेक्शन को प्रभावित कर सकते हैं। उनकी सोच कांग्रेस के प्रति है, मगर फैसला ऐन वक्त पर बदलता है। बेनीवाल की भी ठीक पोजीशन है। रिसालिया के कृष्णलाल, ऐलनाबाद के अश्विनी और किशनपुरा के सविंद्र की मानें तो यहां का चुनाव लोग खुद लड़ रहे हैं। उन्हें भरोसा है कि चौटाला और ऐलनाबाद के लोगों की यारी दूसरे प्रत्याशियों पर भारी पड़ सकती है।

पूरे मोहल्ले के वोटों का सौदा!



( डॉ सुखपाल सावंत खेडा)-
मेरे मोहल्ले में एक हजार वोट है, मोहल्ला वासी मेरे कहने अनुसार ही किसी प्रत्याशी को वोट डालेंगे, मैं मोहल्ले का पूरा वोट आपके पक्ष में डलवा दूंगा, यदि आप कुछ खर्च करते हैं। चुनाव के मौसम का फायदा उठाते हुए वोटों के ठेकेदार इस तरह की सौदेबाजी करने में जुट गए हैं। वे प्रत्याशियों को वोटों का लालच देकर अपनी जेब भरने में जुटे हैं। वहीं प्रत्याशी भी अपनी जीत पक्की करने के लिए हर संभव प्रयास करे रहे हैं, तथा इस तरह के ठेकेदारों को झांसे में आकर उन पर पैसा लुटा रहे हैं। पिछले चुनावों की बात करें तो, चुनाव आयोग का इतना डंडा नहीं होता था। बैनर, पंपलेट व होर्डिग पर प्रत्याशी दिल खोलकर खर्च करते थे। जिस प्रत्याशी के बैनर, पोस्टर व पंपलेट अथवा लोगों की जेबों पर प्रत्याशी या पार्टी के बिल्ले ज्यादा दिखाई देते थे, उसकी जीत का आंकलन करने में आम लोगों को भी दिक्कत नहीं होती थी। लेकिन पिछले दो चुनावों से चुनाव आयोग की सख्ती से यह सब पूरी तरह कंट्रोल हो गया है। जेब पर लगने वाले चुनावी बिल्ले गायब हो गए हैं। प्रत्याशी भी अपनी स्थिति का ठीक से आंकलन नहीं कर पा रहा है। ऐसे में कुछ वोटों के ठेकेदारों की चांदी हो गई है। वे प्रत्याशियों का आंकलन करने लगे हैं, किस मोहल्ले में अमुक प्रत्याशी कितना वोट, और पैसा खर्च कर उस वोट को कैसे मोड़ा जा सकता है, इसके लिए प्रत्याशियों से ठेका कर रहे हैं। यह ठेका वोटों के अनुसार हो रहा है। मोहल्लेवासियों को हवा तक नहीं है, कि उन्हीं के मोहल्ले का एक व्यक्ति पूरे मोहल्ले के वोटों का ठेका कर किसी प्रत्याशी से पैसे ले लिए हैं। क्या ठेकेदार प्रत्याशी से लिए गए पैसे के अनुसार अपने मोहल्ले का उतना वोट उसके पक्ष में डलवा पाएगा। यह प्रत्याशियों को भी नहीं पता है। लेकिन उन्हें जीतना है, ऐसे में उन्हें इन ठेकेदारों पर विश्वास करना पड़ रहा है। वोट के लिए ठेकेदारों द्वारा मांगी गई कीमत भी चुका रहे हैं। कई ठेकेदार ऐसे भी हैं, जो एक नहीं कई-कई प्रत्याशियों को झांसा देकर अपना उल्लू सीधा कर रहे हैं। प्रत्याशियों को समझना चाहिए कि लोगों के बीच उनकी छवि ही उन्हें हरा जिता सकती है। वोटों के ठेकेदार सिर्फ मौके का फायदा उठा सकते हैं, किसी पक्ष या विपक्ष में वोट नहीं डलवा सकते।

दूसरे दौर में शह-मात का घमासान हुआ तेज



( डॉ सुखपाल सावंत खेडा)-
ग्यारहवीं विधानसभा के लिए बिछाई गई चुनावी बिसात में शह-मात का दूसरा दौर आरंभ हो चुका है। इनेलो सुप्रीमो का गृहक्षेत्र होने के कारण यहां न केवल आम लोगों की नजर टिकी हुई है बल्कि सत्ताधारी दल कांग्रेस के आलाकमान भी प्रतिपक्ष को घर में घेरने की पुरजोर कोशिश में है। शायद यही वजह है कि चुनावी शतरंज में कांग्रेस ने अपनी रानी अर्थात पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी को यहां आगे कर दिया है। 4 अक्टूबर को आयोजित होने वाली सिरसा की विशाल रैली में सोनिया गांधी के साथ-साथ पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं के पहुंचने की संभावना बनी हुई है। इनेलो सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला का गृहक्षेत्र होने के कारण कांग्रेस आलाकमान इस चुनाव में उन्हें घर में ही घेरने की जुगत में है। यही वजह है कि जहां लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी ने जनसभा को संबोधित किया था वहीं इस विधानसभा चुनाव में खुद सोनिया गांधी पहुंच रही हैं। चुनावी विश्लेषकों की मानें तो यह कांग्रेस की सधी हुई चाल है और पार्टी इस चुनाव में सिरसा जिले में इनेलो को पछाड़ने के लिए कोई कसर नहीं रखना चाहती है। 4 अक्टूबर को आयोजित होने वाली कांग्रेस की सिरसा रैली में सोनिया गांधी के साथ पार्टी के प्रदेश प्रभारी पृथ्वीराज चव्हाण, मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष फूलचंद मुलाना, चुनावी घोषणापत्र कमेटी के चेयरमैन व सांसद डा. रामप्रकाश सहित अनेक पार्टी नेता शिरकत करेंगे। डा. रामप्रकाश के अनुसार राज्यसभा सदस्य हनुमंत राव भी इसमें आ सकते हैं। दरअसल, कांग्रेस इस रैली के माध्यम से न केवल इनेलो को घर में घेरने की जुगत कर रही है बल्कि सोनिया गांधी को सिरसा बुलाकर एक तीर से कई निशाने भी साधना चाहती है। सच तो यह है कि टिकट वितरण के उपरांत पार्टी में उपजे आक्रोश पर पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी के आगमन से शीतल जल का फुहारा दिया जाएगा। सिरसा व डबवाली जैसी महत्वपूर्ण विधानसभा सीट से टिकट नहीं पाने वाले कुछ लोगों ने बगावत का झंडा उठाया था। हालांकि डबवाली में यह बगावत आज भी जारी है। संभव है कि सोनिया गांधी के आगमन से पार्टी कार्यकर्ताओं के मनोबल को ऊंचा उठाने में मदद मिले।

डबवाली विधानसभा क्षेत्र के 14 गांव अतिसंवेदनशील




डबवाली( डॉ सुखपाल सावंत खेडा)- 13 अक्टूबर को होने वाले विधानसभा चुनाव को सुव्यवस्थित, स्वतंत्र व निष्पक्ष करवाने के मद्देनजर डबवाली निर्वाचन विधानसभा क्षेत्र में 14 गांवों के अति संवेदनशील व 18 गांव के विभिन्न मतदान केंद्रों को संवेदनशील की श्रेणी में रखा गया है। डबवाली विधानसभा क्षेत्र के रिटर्निग अधिकारी सुभाषा गाबा ने बताया कि डबवाली में मतदान केंद्र 42 से 45 को अति संवेदनशील की श्रेणी में अंकित किया गया है। गांव लोहगढ़ में मतदान केंद्र 52, 52ए व 53 को, गांव अबूबशहर में 55 से 58, गांव हस्सू में 72, जगमालवाली के मतदान केंद्र 74 व 75 को, आसाखेड़ा में 88 व 89 तथा गांव चौटाला में मतदान केंद्र 91, 91ए, 92, 92ए, 93, 93ए, 95, 95ए, 96 व 96ए को अति संवेदनशील मतदान केंद्रों की श्रेणी में रखा गया है। उन्होंने बताया कि गांव जंडवाला बिश्रनेइयां में बूथ नंबर 99 व 100 व गंगा में बूथ नंबर 101 से 105 तक, जंडवाला जाटान में बूथ नंबर 117 को, रामपुरा बिश्रनेईयां में बूथ नंबर 118, कालुआना में बूथ नंबर 122, 122ए, 123, 124, 124ए, ओढां में बूथ नंबर 137 से 140 तक तथा घुक्कांवाली के बूथ नंबर 141 व 142 को अति संवेदनशील मतदान केंद्र घोषित किया गया है। रिटर्निग अधिकारी ने बताया कि डबवाली में 2, 4, 8, 10, 10ए, 14, 14ए, 15, 15ए व बूथ नंबर 20 को, जोगेवाला में बूथ नंबर 24 व 25 को, देसूजोधा में बूथ नंबर 28, 29, 30 नौरंग में बूथ नंबर 34, 35, अलीकां में बूथ नंबर 46, 47, शेरगढ़ में बूथ नंबर 48, सांवतखेड़ा में बूथ नंबर 50, 51, जोतांवाली में बूथ नंबर 54, मसीतां में 62, 62ए, 63, 63ए, मिठड़ी में बूथ नंबर 79, भारूखेड़ा में 98, मटदादू में बूथ नंबर 111 व 112, चोरमार खेड़ा में बूथ नंबर 115, 116, गोदिकां में बूथ नंबर 121, अहमदपुर दारेवाला में 125 व 126, रामगढ़ माजरा में बूथ नंबर 128, नुहियांवाली में बूथ नंबर 134, 135, बनवाला में बूथ नंबर 143, 144 को संवेदनशील मतदान केंद्र घोषित किया गया है। डबवाली विधानसभा क्षेत्र में पोलिंग स्टेशनों को क्रिटिकल मतदान केंद्र की श्रेणी में रखा गया है जिनमें भारूखेड़ा के बूथ नंबर 98, कालूआना के बूथ नंबर 122, 123 व 124, रामगढ़ माजरा, रिसालियाखेड़ा का बूथ नंबर 128 व गांव घुक्कांवाली का बूथ नंबर 141 व 142 शामिल है।

काग्रेस ने विकास नहीं विनाश किया




ऐलनाबाद,,( डॉ सुखपाल सावंत खेडा)-
काग्रेस ने प्रदेश का विकास नहीं विनाश किया है। यदि विकास हुआ है तो सिफ हुड्डा परिवार का हुआ है, न कि प्रदेश का। यह बात पूर्व विधायक अभय सिंह चौटाला ने की। वे शनिवार को ऐलनाबाद हलके के गावा केसूपुरा, कोटली, कुतावड़ा, रत्ताखेड़ा, हुम्मायु खेड़ा, शेखू खेड़ा, किरपाल पट्टी, तलवाड़ा, मौजू खेड़ा आदि गावों में चुनावी सभाओं को संबोधित कर रहे थे। गावों में पहुंचने पर अभय सिंह चौटाला का जोरदार स्वागत किया गया। इनेलो नेता ने कहा कि महंगाई बढ़ाना और कालाबाजारी करना काग्रेस का फितरत रही है। उन्होंने कहा कि देश व प्रदश में जब जब काग्रेस सत्तासीन हुई है तब तब आम लोगों का जीना दुभर हुआ है वहीं कालाबाजारी करने वालों की चांदी रही है। उन्होंने कहा कि काग्रेस आम लोगों की नहीं बल्कि पूंजीपतियों की पार्टी है। उन्होंने कहा कि पूरे पाच वर्ष तक महंगाई से आम आदमी को जीना मुहाल रखा बावजूद इसके सरकार के मंत्री महंगाई भविष्य में और बढ़ने की बात कह रहे है। ऐसी सरकार को अब चलता करने का समय आ गया है।

अभय सिंह चौटाला ने इनेलो प्रमुख व ऐलनाबाद हलके से प्रत्याशी ओमप्रकाश चौटाला के लिए वोटों की अपील करते हुए कहा कि इनेलो की सरकार बनने पर सिरसा क्षेत्र के लोगों के बिजली व पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए भटकना नहीं पड़ेगा बल्कि सरकार के लोग आपके पास आकर आपकी समस्याओं का समाधान करेगे। अभय सिंह चौटाला ने कहा कि 13 अक्टूबर को हरियाणा के प्रदेश में एक महत्वपूर्ण दिन होगा और लोगों को काग्रेस के कुशासन से पीछा छुड़वा कर अपनी मनचाही सरकार बनाने का मौका मिलेगा। उन्होंने कहा कि इनेलो 36 बिरादरी की पार्टी है और इस बार इसे सत्ता सौंपकर प्रदेश को विकास की पटरी पर फिर से लाने का काम करे। आज उनके साथ अजय सिंह झोरड़, ब्यूटी टेलर, अभय सिंह खोड, सहित अन्य इनेलो नेता उपस्थित थे।

कांग्रेस में आज नया उत्साह भरेंगी सोनिया




सिरसा,( डॉ सुखपाल सावंत खेडा)-
: कांग्रेस के चुनाव प्रचार को गति देने के लिए यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी रविवार को हरियाणा पहुंच रही हैं। सोनिया गांधी करनाल और सिरसा में दो बड़ी चुनाव रैलियों को संबोधित करेंगी। उनके चुनाव प्रचार में मामूली संशोधन किया गया है। सोनिया गांधी को पहले सिरसा और बाद में करनाल में रैलियों को संबोधित करना था, लेकिन नए शेड्यूल के मुताबिक अब सोनिया गांधी की पहली रैली करनाल में होगी जबकि दूसरी रैली सिरसा में है। हरियाणा में सोनिया गांधी का यह पहला दौरा है। अभी तक मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा राज्य में चुनाव प्रचार की बागडोर संभाले हुए हैं। सोनिया गांधी के हरियाणा दौरे के बाद पार्टी को राज्य की चुनावी फिजा पूरी तरह से कांग्रेस के पक्ष में होने की उम्मीद दिखाई पड़ रही है। कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के हरियाणा दौरे को लेकर बेहद उत्साहित हैं। करनाल व सिरसा में सोनिया की जनसभाओं के चलते दोनों जिलों के आसपास के कई विधानसभा क्षेत्रों पर उसका असर पड़ने की संभावना है।करनाल से कांग्रेस प्रत्याशी सुमिता सिंह और सिरसा से लक्ष्मणदास अरोड़ा चुनाव लड़ रहे हैं। दोनों प्रत्याशियों ने दावा किया है कि सोनिया गांधी के दौरे के बाद राज्य में नया माहौल दिखाई पड़ेगा। कांग्रेस ने सोनिया गांधी के दौरे के बाद प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह को भी हरियाणा के दौरे पर बुलाने की कार्य योजना तैयार की है। जल्दी ही राहुल गांधी के कार्यक्रमों को भी फाइनल टच दिया जा सकता है। कांग्रेस के प्रांतीय कार्यकारी प्रधान कुलदीप शर्मा के अनुसार मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा के चुनाव प्रचार और सोनिया गांधी के आगमन के बाद राज्य में कांग्रेस द्वारा जीती जाने वाली सीटों की संख्या निस्संदेह बढ़ जाएगी। सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद : सोनिया गांधी के हरियाणा दौरे को लेकर चाक चौबंद व्यवस्थाएं की गई हैं। करनाल और सिरसा में अतिरिक्त पुलिस बल लगाया गया है। रैली स्थलों से करीब पांच सौ मीटर की दूरी तक पुलिस बल तैनात है। संदिग्ध प्रवृत्ति के लोगों की चेकिंग की जा रही है, मगर चुनाव के मद्देनजर उन्हें तंग नहीं होने दिया जा रहा है। प्रथम पृष्ठ का शेष

शनिवार, 3 अक्टूबर 2009

चाचा भतीजे में आगे निकलने की होड़



( डॉ सुखपाल सावंत खेडा)- सिरसा जिले की डबवाली विधानसभा सीट का तेजाखेड़ा चौक..यहां से एक सड़क चौटाला गांव की तरफ जाती है और दूसरी पंजाब के अबोहर फाजिल्का-बठिंडा की ओर। आधा शहर पंजाब में पड़ता है और आधा हरियाणा में..चौटाला गांव की ओर जाने वाली सड़क पर चाय की कई दुकानें हैं..चौक के दाई तरफ अस्थायी बस स्टैंड बना है..उसके पास ही इनेलो के प्रधान महासचिव एवं राज्यसभा सदस्य अजय चौटाला के चुनाव प्रचार का बोर्ड टंगा है तो बगल में मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा के ओएसडी रहे डा. केवी सिंह का बोर्ड है.. साइड में भाजपा की रेणु शर्मा के चुनाव प्रचार का बोर्ड दिखाई पड़ता है.. पास ही रवि चौटाला का काफी छोटा बोर्ड नजर आ रहा है। तेजाखेड़ा चौक के दाई तरफ नजर पड़ते ही महसूस होता है कि डबवाली में चुनाव हो रहा है, मगर अबोहर फाजिल्का रोड पर ऐसा कोई नजारा नहीं है। यह हिस्सा पंजाब का माना जाता है। डबवाली के मतदाता दो हिस्सों में बंटे हैं। पता नहीं लगता कि कौन डबवाली विधानसभा सीट का वोटर है और कौन नहीं। बात करने पर अहसास होता है कि पंजाब की साइड में रहने वाले लोग डबवाली के मतदाता नहीं हैं, लेकिन जो मतदाता हैं, उनकी यहां के चुनाव में बेहद रुचि है। चौटाला गांव की ओर जाने वाली सड़क पर चाय की दुकान में पांच-छह आदमी बैठे हैं। उनके हाथ में अखबार है। कुरेदने पर बोले, डबवाली में गजब का मुकाबला है। कांग्रेस के केवी सिंह रिश्ते में चाचा हैं तो इनेलो के अजय चौटाला उनके भतीजे। बीच में रवि ने भी टांग अड़ा रखी है। आजाद चुनाव लड़ रहे रवि अपने चचेरे भाई अजय और केवी के खानदान से ताल्लुक रखते हैं। डबवाली के प्रेम नगर में रहने वाले मदनलाल को कांग्रेस पर इसलिए गुस्सा है, क्योंकि उनके परिवार के सदस्यों के पीले कार्ड रद कर दिए गए हैं। मदनलाल बोला, गोलगप्पे की रेहड़ी से जीवन बसर हो रहा है। पीले कार्ड पर राशन मिल जाया करता था, थोड़ा काम चल जाता था, मगर अब वह भी नहीं रहा। किसी का बीपीएल का कार्ड नहीं बन रहा है। पेंशन बंद हो गई है। समझ में नहीं आता क्या होगा। रिमालिया खेड़ा गांव के कृष्ण लाल की मानें तो डबवाली हमेशा इनेलो का गढ़ रहा है। बरसों बाद यह सीट ओपन हुई है। पहले यहां से रिजर्व सीट पर डा. सीता राम चुनाव जीतते रहे हैं। वह भी चौटाला गांव के हैं। डबवाली में अब कुछ गांव रोड़ी के आ गए तो कुछ गांव आसपास के जुड़े हैं। हलका ओपन होने के बाद अजय चौटाला को खुद चुनाव लड़ने का मौका मिला तो लोग उत्साहित हैं। डबवाली के साधू राम ने बात आगे बढ़ाई। साधू बोला, यहां कोई समस्या नहीं है। केवी सिंह सीएम के नजदीकी हैं, लेकिन डबवाली में आज तक रेलवे पुल की समस्या का समाधान नहीं हो सका है। डबवाली का रेलवे फाटक अक्सर बंद रहता है। सरकार में रहते हुए भी जब कोई काम नहीं कर सकता तो कोई भी जीते, किसी को क्या फर्क पड़ता है। डबवाली गांव के दर्शन और गोरीवाला के सुरेश को बढ़ती महंगाई की चिंता है। उनके अनुसार पूरे प्रदेश में सूखा पड़ा, लेकिन किसी ने डबवाली की ओर आकर झांका तक नहीं है। वोट के लिए हर कोई गली-गली घूम रहा है। लोग वोट उसी को देंगे, जिसमें राज करने की ताकत होगी। उनका इशारा अजय चौटाला की तरफ था। राजपुरा के अरनेक ने बात काटते हुए कहा, शहर में जोर केवी सिंह है, उसका यहां पेट्रोल पंप भी है, तभी रत्ताखेड़ा का अजैब बोला, खाली पेट्रोल पंप से क्या होगा, पूरा इलाका और गांव ही चौटाला का है। रामगढ़ के पहल सिंह की मानें तो डबवाली में कोई चुनावी मुद्दा नहीं है। डबवाली में सिर्फ चौटाला और केवी सिंह में से किसी एक की जीत, यही मुद्दा यहां काम करेगा। चुनाव की इस चर्चा के बीच रवि चौटाला की रिक्शा प्रचार करते हुए जब आगे बढ़ी तो लोग बोले, सारी वोट कांग्रेस की खराब होंगी। भाजपा की रेणु शर्मा, हजकां के कुलदीप भांभु और बसपा के प्रीत मोहिंदर का चुनाव यहां चर्चा में भी दिखाई नहीं पड़ रहा है। यह अलग बात है कि पोस्टरबाजी में भाजपा की रेणु इनेलो के अजय चौटाला और कांग्रेस के केवी सिंह को छोड़कर बाकी प्रत्याशियों में कहीं आगे हैं। डबवाली में अगर डंका है तो इनेलो का। बाकी दलों में दूसरे नंबर पर आने की होड़ मची है।

देश की सबसे अमीर महिला पड़ रहीं प्रतिद्वंद्वियों पर भारी!



देश की सबसे अमीर महिला एवं भू-राजस्व मंत्री सावित्री जिंदल हिसार के चुनावी समर में अपने प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवारों पर भारी पड़ रही हैं। धुआंधार चुनाव प्रचार की कमी के बावजूद सावित्री जिंदल के विरोधी उम्मीदवार उनकी राह में रोड़ा नहीं अटका पा रहे हैं। इसकी प्रमुख वजह सावित्री जिंदल के समक्ष हेवीवेट प्रत्याशियों की कमी को माना जा रहा है। भू-राजस्व मंत्री सावित्री जिंदल कुरुक्षेत्र के कांग्रेस सांसद नवीन जिंदल की माता और पूर्व मंत्री स्व. ओमप्रकाश जिंदल की धर्मपत्‍‌नी हैं। ओमप्रकाश जिंदल के देहावसन के बाद सावित्री ने राजनीति में पदार्पण किया और रिकार्ड मतों से उपचुनाव जीता। इस बार भी सावित्री जिंदल कांग्रेस के टिकट पर हिसार के चुनावी समर में हैं। हजकां ने यहां से पार्षद रामनिवास राड़ा, इनेलो ने नगर परिषद के पूर्व प्रधान हनुमान ऐरन, भाजपा ने जिला शहरी अध्यक्ष रवि सैनी और बसपा ने राजेंद्र कुमार को चुनाव मैदान में उतारा है। हजकां के रामनिवास राड़ा नगर परिषद अध्यक्ष बिहारी लाल के भाई हैं। बिहारी लाल को जिंदल खेमे का मजबूत साथी माना जाता है। चुनाव प्रचार के लिहाज से हिसार का चुनाव धीरे-धीरे गति पकड़ रहा है। प्रमुख स्थानों पर चुनाव कार्यालय खोल दिए गए हैं और बाजारों में जनसभाओं का दौर आरंभ हो गया है। कांग्रेस प्रत्याशी सावित्री जिंदल के पार्टी दफ्तरों में हालांकि भीड़ दिखाई दे रही है, लेकिन चुनाव प्रचार में इनेलो के हनुमान ऐरन और हजकां के रामनिवास राड़ा उनसे कहीं आगे हैं। हिसार में सीवरेज, सड़क, बिजली और पानी के मुद्दों को यदि नजर अंदाज कर दिया जाए तो मतदाता प्रत्याशी की छवि के आधार पर कोई फैसला लेने को तैयार बैठे हैं। मैयड़ गांव के सुखबीर सिंह और रायपुर के राजबीर सिंह की मानें तो पूर्व मंत्री हरि सिंह सैनी के कांग्रेस में शामिल होने का लाभ पार्टी को मिलेगा। पूर्व इनेलो की राज्यसभा सदस्य स्व. सुमित्रा महाजन के राजनीतिक खेमे से कोई मजबूत उम्मीदवार खड़ा नहीं होने का फायदा भी कांग्रेस को मिल सकता है। सुमित्रा महाजन पूर्व विधायक ओमप्रकाश महाजन की धर्मपत्‍‌नी थी। हरि सिंह सैनी और महाजन दो नेता ऐसे हैं, जिनका हिसार की राजनीति में अच्छा खासा हस्तक्षेप रहा है। इनेलो के हनुमान ऐरन को हिसार में व्यापारियों का काफी समर्थन मिल रहा है, लेकिन मजबूत प्रत्याशी के अभाव में हिसार पंजाबी बाहुल्य सीट होने के बावजूद संशय की स्थिति में है। धांसू के जसविंद्र सिंह और तलवंडी राणा के उमेश प्रसाद के अनुसार हजकां उम्मीदवार हिसार में कांग्रेस को अच्छी टक्कर दे सकता था।

भजन की विरासत बढ़ा पाएंगे कुलदीप?


शुक्रवार का दिन। शाम के करीब सात बजे होंगे। मैं जैसे ही काली रावण गांव पहुंचा तो चौपाल पर बैठे कुछ लोग चुनाव की चर्चा में मशगूल दिखाई पड़े। इनमें कुछ दिहाड़ीदार थे तो कुछ चौधरी से दिखने वाले। सूबे सिंह हाल ही में हिसार से आदमपुर लौटा है। जलेबियों का लिफाफा उसके साथ में हैं। वह अपने घर भी नहीं गया और शामिल हो गया चुनाव की चर्चा में। मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा के विकास के दावे से बात आरंभ हुई। जलेबी मुंह में रखते हुए मनबीर बोला, भाई..जलेबी बड़ी करारी है..आदमपुर तो चौधरी साहब का गढ़ है। इसमें सेंध लगाना इतना आसान नहीं है। आदमपुर का कोई परिवार ऐसा नहीं, जिस पर भजनलाल का अहसान न हो। अब चौधरी के अहसान का बदला चुकाने का समय आ गया है। सूबे सिंह ने बात आगे बढ़ाई। वह बोला, चौधरी की सेहत ठीक नहीं रहती। इसीलिए उन्होंने अपने बेटे कुलदीप को इस बार का चुनाव लड़वाया है। चुनाव के बाद कुछ चक्कर चला तो ठाठ उसी के होंगे। टक्कर तो कांग्रेस वाला जयप्रकाश (जेपी) भी खूब देगा, लेकिन भजनलाल परिवार का बाल भी बांका नहीं होगा। सदलपुर के राजबीर और कौली गांव के सुमेर चंद की मानें तो आदमपुर में कुलदीप बिश्नोई के परिवार की हुकूमत चलती हैं। इस हलके के लोगों ने अभी तक 12 चुनाव देखे हैं। इनमें दो उपचुनाव भी शामिल हैं। राजबीर बोला, 1986 में जब ताऊ देवीलाल के नाम की आंधी थी, उस समय भजनलाल ने आदमपुर से रिकार्ड जीत हासिल की थी। 1998 के उपचुनाव में कुलदीप बिश्नोई ने आदमपुर से 20 हजार और 2008 के उपचुनाव में भजनलाल ने 27 हजार मतों से जीत हासिल कर दूसरे दलों के लिए तमाम संभावनाएं खत्म कर दी हैं। धांसू गांव का प्रताप बोला, हुड्डा के सारे काम ठीक हैं। आदमी भी बढि़या है, लेकिन लोन माफ करने में थोड़ी गड़बड़ हो गई। प्रताप के मुताबिक कर्ज माफी योजना का लाभ उन लोगों को मिला जो डिफाल्टर हैं। जिन लोगों को लाभ चाहिए था, वह उससे वंचित रह गए। प्रताप ने चर्चा आगे बढ़ाई, बोला..इस बार के चुनाव में कोई मुद्दा नहीं है। बस हुड्डा ही मुद्दा है। लोग चाहते हैं कि हुड्डा की सरकार आए और बरवाला वाला जेपी भी यूं ही आगे बढ़ता जाए। खारिया के शमशेर सिंह और सीसवाल के रणदीप की राय कुछ अलग तरह की है। इनमें एक मास्टर है तो दूसरा सरकारी कर्मचारी। दोनों बोले, पूरे हरियाणा में सरकार चाहे किसी की भी आए, लेकिन आदमपुर में डंका कुलदीप का ही बाजैगा। धांसू के प्रताप को शमशेर की राय से थोड़ी तकलीफ हुई। वह बोला, चश्मे वाला राजेश गोदारा भी कमजोर नहीं है। वह भी कुलदीप को टक्कर देगा। जेपी भी मजबूत है। कुछ वोट कमल के फूल वाला पवन खारिया और कुछ हाथी वाला राजेश प्रजापत भी काटेगा। फिर..इलैक्शन इतना आसान कहां से रहा। खैरमपुर के सुदेश प्रजापत और दड़ौली के रामप्रताप सिंह की राय में आदमपुर के लिए जेपी नए कंडीडेट हैं। उन्हें बरवाला में टिकट नहीं मिला तो आदमपुर आ गए। नलवा की ही बात ले लो, वहां कुलदीप की मां जसमा देवी का इलैक्शन एकतरफा है। आदमपुर के 26 गांव नलवा में आ गए और 22 गांव बवानीखेड़ा के चले गए। ऐसे में आदमपुर में कुलदीप और नलवा में उनकी मां जसमा देवी के लिए कतई मुश्किल नहीं है। बालसमंद का जोगेंद्र बोला, भई, नलवा में कांग्रेस के प्रो. संपत का इलेक्शन भी जोर पकड़ रहा है। आने वाले दिनों में क्या रहेगा, अभी कुछ नहीं कहा जा सकता, लेकिन इतना जरूर मानना पड़ेगा, आदमपुर में कुलदीप व जेपी और नलवा में जसमा व संपत में कांटे की टक्कर है।

फ्लैक्स बोर्ड व टैक्सियों का काम ठंडा



सिरसा,( डॉ सुखपाल सावंत खेडा)-
एक जमाना था जब चुनाव नजदीक आते ही जहां हर तरफ रौनक दिखाई देती वहीं शहर चुनाव प्रचार सामग्री से रंगीन हो जाता था और महीनों तक टैक्सी स्टेडों पर गाड़ियां उपलब्ध नहीं होती थी। मगर चुनाव आयोग के डंडे के चलते अब न तो शहर में चुनावी चहल पहल नजर आ रही है और न ही टैक्सी स्टेडों पर गाड़ियों की मारामारी है। शहरी क्षेत्र के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्र में यदि हम जाकर देखें तो चुनावों के दिन नहीं लगते। चुनाव आयोग द्वारा आदर्श आचार संहिता के नाम से जो उम्मीदवारों पर शिकंजा कसा है उसके चलते सभी उम्मीदवार अपनी चमड़ी बजाने की कोशिश में है। पहले जब चुनाव आते थे तो फ्लैक्स बोर्ड से शहर सज जाता था मगर अब चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित स्थान पर ही 10-15 होर्डिग लगे हुए है। फ्लैक्स बोर्ड बनाने वाले ओंकार एडवरजाइजर के संचालक कुलदीप सिंह से जब बातचीत की गई तो उसने बताया कि पूर्व के चुनाव में उन्हे एक महीने पूर्व ही इतना काम मिल जाता था कि चुनाव के दौरान उन्हे अतिरिक्त स्टाफ की व्यवस्था करनी पड़ती थी लेकिन अब चुनाव आयोग के डंडे के चलते उनका काम मात्र पांच-सात प्रतिशत ही शेष बचा है। उन्होंने बताया कि जो नियमित रूप से काम करने वाले लड़के भी फुर्सत में बैठे है। उन्होंने कहा कि हर वर्ष दीपावली के पर्व पर उनका काम काफी बढ़ जाता है मगर इस बार हर कोई व्यवसायी अपने व्यवसाय को चुनावों के साथ जोड़ते हुए फ्लैक्स बोर्ड बनवाने में परहेज कर रहा है। उन्होंने बताया कि पहले तो नेताओं के साथ-साथ कार्यकर्ता भी अपने घरों पर व सार्वजनिक स्थानों पर फ्लैक्स बोर्ड लगवाते थे मगर उनका बोर्ड भी उम्मीदवार के खाते में गिने जाने के कारण कार्यकर्ताओं ने फ्लैक्स बोर्ड बनवाने बंद कर दिए है। इसके अलावा शहर स्थित साई फ्लैक्स, गणपति फ्लैक्स, सुरेद्रा फ्लैक्स, सिडाना फ्लैक्स व पंकज फ्लैक्स सभी का काम चुनाव प्रचार के चलते भी गर्मी नहीं पकड़ पाया है। इसी प्रकार सिरसा नगर के टाउन पार्क टैक्सी स्टेड, हाथी पार्क टैक्सी स्टेड, गुरु तेग बहादुर मार्केट टैक्सी स्टेड, डबवाली रोड स्थित टैक्सी स्टेड पर चुनाव प्रचार के चलते भी गाड़ियों की बुकिंग नहीं हो रही है। सिरसा के सभी टैक्सी स्टेडों पर चलने वाली लगभग 300 टैक्सियों में से करीब डेढ़ दर्जन टैक्सियां ही चुनाव प्रचार में लगी हुई है। टैक्सी ड्राइवर राजकुमार, मांगू राम, कृष्ण कुमार, ब्रह्मदास आदि ने बताया कि इस समय टैक्सी स्टेड से सूमो गाड़ी 800 रुपये, बुलेरो तथा स्कार्पियो 1100, जाइलो तथा इनोवा 1500 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से मिलती है लेकिन चुनाव प्रचार के लिए उम्मीदवारों द्वारा इस किराये पर 24 घंटे के लिए गाड़ी किराये पर बुक कराई जाती है। उन्होंने बताया कि वे अपनी गाड़ियों की दिहाड़ी 12 घंटे के हिसाब से गिनती है मगर उम्मीदवार उन्हे 24 घंटे के लिए एक दिहाड़ी देते है इसलिए वे चुनाव प्रचार में गाड़ियां लगाने के लिए खुश नहीं है। उनका कहना है कि कई दफा चुनाव हारने के बाद उम्मीदवार द्वारा उनकी दिहाड़ी देने पर भी आनाकानी की जाती है। उन्होंने बताया कि पहले चुनाव प्रचार के लिए उम्मीदवारों द्वारा एक माह पूर्व ही गाड़ियां बुक करने के लिए टैक्सी स्टेडों पर संपर्क किया जाता था मगर अब चुनाव आयोग द्वारा प्रचार के लिए टैक्सी लगाने के लिए मंजूरी लेने की प्रक्रिया के कारण उम्मीदवारों में भी गाड़ियां किराये पर लगाने के लिए उदासीनता बरती जा रही है। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में अधिकतर कार्यकर्ताओं के पास अपनी गाड़ियां है और वे अपने प्रत्याशी के प्रचार के लिए स्वयं की गाड़ी प्रयोग करते है इसलिए भी प्रचार के लिए किराये की गाड़ियों की जरूरत कम महसूस की जा रही है।

हथियार लेकर घूमने पर होगी कड़ी



ऐलनाबाद( डॉ सुखपाल सावंत खेडा)-
आगामी 13 अक्टूबर को विधानसभा के लिए होने वाले चुनावों के मद्देनजर क्षेत्र में धारा 144 जारी है, ताकि आम चुनाव शातिपूर्वक, स्वतंत्र, निष्पक्ष तथा सुव्यवस्थित ढग से संपन्न हो सके। धारा 144 का उल्लंघन कोई भी न कर पाए, इसके लिए व्यवस्था के व्यापक बंदोबस्त किए गए है। बावजूद इसके अगर किसी को धारा का उल्लंघन करते पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। यह बात शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत में एसडीएम मनजीत सिंह ने कही। उन्होंने कहा कि ऐलनाबाद के अधीन आने वाले सभी शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के मतदाता बिना किसी आतंक व भय के अपने संवैधानिक मताधिकार का प्रयोग कर सके, इसके लिए शाति एवं कानून व्यवस्था सुनिश्चित किया जाना नितात आवश्यक है। उन्होंने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग से प्राप्त निर्देशों एवं उक्त सभी परिस्थितियों के मद्देनजर धारा 144 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग किया गया है। उन्होंने निर्देशित किया कि इस अवधि के दौरान कोई भी व्यक्ति क्षेत्र की राजस्व सीमा के भीतर अपने पास विस्फोटक पदार्थ, आग्नेय शस्त्र जैसे रिवाल्वर, पिस्तौल, राइफल, बंदूक, एमएल गन व अन्य हथियार जैसे गंडासा, फरसा, तलवार, भाला, चाकू, छुरी, बरछी, गुप्ती, खुखरी, बल्लभ, कटार, धारिया, बघनखा, शेरपंजा, किसी धातु से शस्त्र के रूप में बने मोटे घातक हथियार, लाठी आदि को सार्वजनिक स्थलों पर लेकर नहीं घूमेगा, न ही प्रदर्शन करेगा और न ही साथ लेकर चलेगा, परतु वे व्यक्ति जो नि:शक्त अथवा अतिवृद्ध है एवं लाठी के सहारे के बिना नहीं चल सकते है वे लाठी का प्रयोग करने के लिए स्वतंत्र रहेगे। सिख समुदाय के व्यक्तियों को उनकी धार्मिक परपरा के अनुसार नियमान्तर्गत निर्धारित कृपाण रखने की छूट रहेगी। इसी प्रकार कोई भी व्यक्ति साप्रदायिक सद्भावना को ठेस पहुंचाने वाले नारे नहीं लगाएगा, न ही भाषण, उद्बोधन देगा, न ही ऐसे पंपलेट, पोस्टर, चुनाव सामग्री छपवाएगा, छापेगा, वितरण करेगा या वितरित करवाएगा, न ही ऐसे आडियो, विडियो कैसेट के माध्यम से किसी प्रकार का प्रचार-प्रसार करेगा या करवाएगा। यह आदेश पर्वो के दौरान पुलिस स्वीकृति के तहत आयोजित धार्मिक समारोह, जुलूसों व कार्यक्रमों पर लागू नहीं होगा। कोई भी व्यक्ति उपखंड मजिस्ट्रेट या कार्यपालक मजिस्ट्रेट की लिखित पूर्व अनुमति के बिना जुलूस, सभा एवं सामाजिक बैठक का आयोजन नहीं कर सकेगा, परतु यह प्रतिबंध विवाह समारोह, शवयात्रा पर लागू नहीं होगा। कोई भी व्यक्ति उपखंड मजिस्ट्रेट या कार्यपालक मजिस्ट्रेट की पूर्व अनुमति के बिना लाउडस्पीकर, रेडियो, एंपलीफायर, टेप अथवा अन्य ध्वनि प्रसारक यंत्रों का उपयोग नहीं कर सकेगा ।

कांग्रेस व इनेलो आमने-सामने:



( डॉ सुखपाल सावंत खेडा)-
हरियाणा में विकास व जनहित के मुद्दों पर कांग्रेस और इनेलो आमने-सामने आ गई हैं। मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की विकास व जनहित के अन्य मुद्दों पर खुली बहस की चुनौती इंडियन नेशनल लोकदल ने स्वीकार कर ली है। हुड्डा ने कल वीरवार को कैथल जिला के पंुडरी विधानसभा क्षेत्र में जनसभा को संबोधित करते हुए विपक्षी दलों को विकास व अन्य मुद्दों पर खुली बहस करने की चुनौती दी थी। हुड्डा ने दावा किया था कि शिक्षा, दलित कल्याण, रोजगार, सड़क व बिजली के मुद्दे पर जितना काम हमारी सरकार ने किया है, उतना पहले किसी सरकार ने नहीं किया। इसके लिए विपक्षी दल बेशक उनसे खुली बहस कर लें। इंडियन नेशनल लोकदल के राष्ट्रीय महासचिव अजय सिंह चौटाला ने शुक्रवार को हुड्डा की चुनौती को स्वीकार करते हुए कहा कि वह विकास व प्रदेश हित के अन्य मामलों पर हुड्डा से खुली बहस को तैयार हैं। यहां जारी अपने बयान में अजय ने कहा कि वह हुड्डा से किसी भी टेलीविजन कार्यक्रम, प्रेस क्लब या खुले मंच पर इनेलो के पांच साल बनाम कांग्रेस के साढे़ चाल साल के कामों पर बहस करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि इस साल जनवरी महीने में मैंने जनाक्रोश यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री हुड्डा के समक्ष सरकार के कारनामों के संबंध में कई सवाल उठाए थे पर हुड्डा ने एक भी सवाल का जवाब नहीं दिया। अजय ने कहा कि कांग्रेस कभी भी अपने वायदों पर खरी नहीं उतरी। सत्ता में आने से पूर्व कांग्रेस ने जो वायदे किए थे, उनको पूरा नहीं किया। दस लाख युवकों को रोजगार देने का जो वादा कांग्रेस ने किया था, वह तो पूरा नहीं किया बल्कि छंटनी के नाम पर हजारों युवकों को नौकरियों से निकाल दिया। महंगाई को अपनी चरम सीमा पर पहंुचा दिया। प्रदेश की जनता पेयजल व बिजली के भारी संकट से गुजर रही है। न तो पीने के लिए पानी है और न ही बिजली की उचित व्यवस्था। चौटाला ने कहा कि कांग्रेस हरियाणा को विकास में नंबर वन बताकर राग अलाप रही है और इस बात के प्रचार में पिछले दिनों जनता के खून पसीने की कमाई भी लुटा बैठी है। लेकिन असलियत यह है कि कांग्रेस ने हरियाणा को अपराध, भ्रष्टाचार, महंगाई, लूटपाट, चोरी, हत्या आदि में नंबर वन बनाया है।

शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2009

सौ वोट बहाल करेंगे भरोसा


लोकसभा चुनाव के बाद से ईवीएम की प्रासंगिकता को लेकर घमासान मचा हुआ है। कई राजनीतिज्ञ बैलेट से मतदान को ज्यादा कारगर बता रहे हैं। अलबत्ता, आयोग अभी भी मानता है कि ईवीएम ही लोकतंत्र में सरकार चुनने का कारगर साधन है। हां, इसको लेकर जो संशय उठे हैं उनका निदान करने के लिए प्लानिंग तैयार कर ली गई है। योजना है कि मतदान प्रक्रिया आरंभ होने से पहले सभी पोलिंग स्टेशन पर मॉक पोल (मशीन का ट्रायल) करवाया जाए। मॉक पोल मतदान से एक घंटा पहले करवाते हुए कम से कम सौ वोट डलवाकर प्रक्रिया को जांचा जाएगा। फिर मशीन को खाली करके पोलिंग एजेंटों को दिखाकर मतदान प्रक्रिया शुरू करवाई जाएगी। मॉडल कोड में किसी प्रकार की गड़बड़ी न हो इस बात का विशेष ध्यान रखा जाएगा। गड़बड़ी नजर आती है तो इसकी सूचना चुनाव आयोग को तुरंत देने के निर्देश हैं। कुल मिलाकर आयोग की कोशिश है कि राजनीतिज्ञों का भरोसा मशीनी वोटिंग सिस्टम पर बहाल किया जाए। आयोग मानता है कि ईवीएम जल्द और निष्पक्ष चुनाव कराने का बेहतरीन तरीका है। चुनाव में करोड़ों मतदाता अपने अधिकार का इस्तेमाल करते हैं। हरियाणा में असेंबली के लिए 1 करोड़ 31 लाख 13 हजार 11 मतदाताओं के लिए 13 हजार 524 मतदान केंद्र स्थापित किए गए हैं। मतदाताओं में 71 लाख 47 हजार पुरूष तथा 59 लाख 65 हजार 911 महिला मतदाता हैं। राज्य में 87 हजार 956 सर्विस मतदाता है, जिसमें 57 हजार 756 पुरूष और 30 हजार 200 महिला सर्विस मतदाता हैं। चुनाव प्रक्रिया को पूरी तरह से मशीनी बनाने के लिए 16 हजार ईवीएम की जरूरत थी। सेंटर से हरियाणा के लिए 27 हजार ईवीएम भेजी गई हैं। यानि, जरूरत से 11 हजार ज्यादा। आयोग कहता है कि एहतियात के तौर पर अतिरिक्त मशीन भेजी गई हैं। मशीनों की कोई खेप कंडम निकल जाए तो अतिरिक्त स्टाक से तत्काल जरूरत पूरी कर ली जाए। मशीनों को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। 27 हजार मशीनें कड़ी सुरक्षा व्यवस्था में जिलों को ट्रेजरी रूम में रखी गई हैं। किसी जिले में सबसे सुरक्षित स्थान ट्रेजरी को ही माना जाता है। यह जगह शहर के बीचों-बीच होती है और अक्सर वहां करोड़ों रुपये कैश रखा होता है इसलिए चौबीस घंटे गहन सुरक्षा करने की जरूरत होती है। ईवीएम की निगरानी का काम बाहर से आए जवानों के सुपुर्द किया गया है। चीफ इलेक्शन अफसर सज्जन सिंह कहते हैं कि संदेह को हर कदम पर दूर किया जा रहा है। उनका कहना है कि इलेक्ट्रोनिक वोटिंग मशीन का चुनाव प्रक्रिया में बहुत ही अहम रोल है। इसमें किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ नही हो सकती है। यह मशीन पूर्णतया टेंपर प्रूफ है। उन्होंने बताया कि निर्देश जारी किए गए हैं कि जिला निर्वाचन अधिकारी एल्फाबेटिकली आधार पर एक वोट लिस्ट तैयार करवाएं और इसके लिए पोलिंग स्टेशन के बाहर प्रशासन द्वारा नियुक्त एक आदमी की डयूटी लगाएं ताकि वोट डालने आने वाले वोटर को अपना नाम तलाश करने में किसी प्रकार की परेशानी ना आएं। मशीन को रिटर्निग आफिसर स्वयं चैक करें जिससे संदेह ना रहें। उन्होंने यह भी कहा कि ईवीएम को उम्मीदवार या उसके पोलिंग एजेंट को भी मतदान शुरू होने से पहले टेस्ट जरूर करवा दें। सज्जन कहते हैं कि ईवीएम को लेकर केंद्रीय चुनाव आयोग खुद सतर्कता बरत रहा है। पहले हिदायत मिल चुकी है कि मशीनों के आने जाने से लेकर उसके रखरखाव से जुड़ी हर प्रक्रिया पर नजर रखी जाए।

ताऊ नैया पार लगा दे....



....और ताऊ तबीयत ठीक सै ना., ताऊ राम-राम, रै ताऊ नै कुर्सी दे। कुछ ऐसे ही वाक्य आजकल चुनाव मैदान में डटे प्रत्याशियों के कार्यालयों में खूब सुनने को मिल रहे हैं। गांव में तो कहानी इससे भी आगे बढ़कर है। ताऊ मेरी नैया पार लगा दे, आगे तो तेरी बल्ले-बल्ले कर दूंगा, चाय, बीड़ी और सिगरेट की कमी नहीं होने दूंगा। इस शब्द के साथ प्रत्याशी बुजुर्गो के पैर छूकर आशीर्वाद लेना नहीं भूल रहे हैं। बुजुर्गो को भी पता है कि चुनावी धुआं शांत होते ही, चुनावी चाय वाले चूल्हे बुझ जाएंगे, हाथ में माचिस तो होगी पर सुलगाने के लिए सिगरेट या बीड़ी नहीं होगी। चुनावी कार्यालयों में चाय, पानी से लेकर सिगरेट व बीड़ी का भी पूरा इंतजाम बुजुर्गो के लिए किया गया है। एक ऐसे ही चुनावी कार्यालय में बैठे बुजुर्ग, प्रत्याशी द्वारा किए गए इस चुनावी इंतजाम का मजा ले रहे थे कि जन संपर्क करने के बाद प्रत्याशी भी कुछ देर के लिए वहां पहुंचे। प्रत्याशी ने वहां बैठे बुजुर्गो से हाल चाल पूछने के बाद, चुनाव में अपनी स्थिति के बारे में भी पूछा। बुजुर्गो ने भी एक स्वर में जवाब दिया कि बेटा बस चारों तरफ तेरी ही बल्ले-बल्ले है। बुजुर्गो की इतनी बात सुन नेताजी गदगद हो गए और बोले तुम सारे ताऊ मेरी नैया पार लगा दो, मैं तुम्हारी बल्ले-बल्ले कर दूंगा। इसके बाद नेताजी बुजुर्गो का आशीर्वाद लेने के बाद आगे अपने चुनाव प्रचार की ओर बढ़ गए। लेकिन चुनावी कार्यालय में बैठे बुजुर्गो की चर्चा इसके बाद शुरू हो गई। एक बुजुर्ग ने कहा कि आज तक म्हारी बल्ले-बल्ले किसी ने भी नहीं की। यह नेता हमारा भला क्या करेंगे जो सिर्फ अपने भले के अलावा किसी और के बारे में नहीं सोचते। चुनाव में म्हारी वोटों की इन्हें जरूरत है। इस समय चाहे जितना सम्मान करालो, इसके बाद पांच साल तक नहीं दिखाई देंगे। फिर हमें अपने घर वालों से मिलने वाले सम्मान पर ही जीना होगा। तब इन नेताओं को हमारे चाय व बीड़ी का बिल्कुल भी ख्याल नहीं होगा। बुजुर्गो की इन चर्चाओं से साफ है कि जनता जिसको वोट देने जा रही है, उसकी असलियत से रूबरू है। किंतु फिर भी वोट उसकी को देंगे, क्योंकि उनका अनुभव पुराना है, ऐसे ही नेताओं की कतार है, यह तो उनके मोहल्ले व गांव का है, कुछ तो करेगा।

सभी दलों का जातिगत गुणा-भाग


( डॉ सुखपाल सावंत खेडा)-
: चुनावी महाभारत में चुनावी दल और उनके उम्मीदवार जीत के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना चाहते। वोटरों को अपने पक्ष में करने के लिए जाति कार्ड खेलने से नहीं चूकते। हालांकि चुनाव आयोग ने चुनाव में जाति या मजहब के किसी भी प्रकार से प्रयोग करने पर पाबंदी लगा रखी है। पर फिर भी पूरे भारत की तरह हरियाणा में भी चुनाव जातिगत समीकरणों के आधार पर लड़ा जाता है। जातिगत समीकरणों के चलते कई को टिकट मिल जाता है और कई का टिकट कट जाता है। पूरे प्रदेश में सभी जातियों के प्रतिनिधित्व के आधार पर टिकटों का बंटवारा होता है। पर इतना जरूर है कि हरियाणा में कभी सार्वजनिक मंच पर कोई भी नेता किसी जाति विशेष की बात न करके 36 बिरादरी के साथ की ही बात करता है। हरियाणा की चुनावी राजनीति का एक पहलू जाट-गैर जाट के राजनीति का है। बाकी तमाम बातों के लिए यह भी देखा जाता है कि किसने कितने जाट प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है। हरियाणा विधानसभा चुनाव 2009 में जहां इनेलो ने जाटों व सिखों को सबसे अधिक टिकटें थमाई हैं, वहीं कांग्रेस ने जाट, पंजाबी और ब्राह्मण प्रत्याशियों के बीच तालमेल बैठाया है। इनेलो ने 30 जाट व सात सिखों को टिकट दिया है। इनेलो के सिख प्रत्याशियों में जट्ट सिखों की भरमार है। दूसरी तरफ कांग्रेस ने 27 जाट, सात ब्राह्मण, सात पंजाबी और दो सिखों को वोट दिया है। जाटों को टिकट देने में भाजपा व हजकां पीछे हैं। भाजपा ने 21 और हजकां ने 14 सीटें जाटों को दी हैं। पर हजकां व भाजपा ने ब्राह्मणों को जमकर टिकटें दी हैं। हजकां ने 14 ब्राह्मण व नौ पंजाबी और भाजपा ने 10 ब्राह्मण और नौ पंजाबियों को टिकट दिए हैं। हजकां ने तीन और भाजपा ने एक सिख को चुनाव मैदान में उतारा है। कांग्रेस, इनेलो, हजकां तीनों ने पांच-पांच अहीर प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं जबकि भाजपा ने चार अहीर प्रत्याशी बनाए हैं। बहुजन समाज पार्टी की मौजूदगी में इस बार राजनीतक दलों ने आरक्षित सीटों पर प्रत्याशी चयन में विशेष रणनीति बनाई है। हरियाणा विधानसभा के लिए 90 में से 17 सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं। सो किसी भी राजनीतिक दल के 17 से कम अनुसूचित जाति के प्रत्याशी नहीं हो सकते। सामान्य सीटों पर दलितों को टिकट देने की अभी हरियाणा में कोई गंभीर परंपरा शुरु नहीं हुई है। बहरहाल इस बार हरियाणा विधानसभा में दलित प्रत्याशियों के वर्गीकरण का चलन जरूर शुरु हुआ है। हर राजनीतिक दल अपने दलित प्रत्याशियों का वर्गीकरण कर रहा है। पहली बार राजनीतिक दलों ने गैर चर्मकार जातियों को भी तवज्जो दी है। इस बार राजनीति दलों ने दलितों की तरह राजनीतिक दलों ने प्रत्याशी चयन में पिछड़ा वर्ग का कार्ड भी खेला है। पिछड़ा वर्ग को सबसे अधिक टिकटें भाजपा ने दी हैं। भाजपा ने 19 प्रत्याशी पिछड़ा वर्ग से उतारे हैं। इनेलो ने इस बार पिछड़ा वर्ग को 16 टिकट, हजकां ने 15 टिकट और कांग्रेस ने 13 टिकटें दी हैं। हर पार्टी में पिछड़ा वर्ग की अहीर, सैनी, कांबोज व गुर्जर जातियों को ही टिकट दी हैं। कुम्हार व जांगिड़ आदि को कोई कोई टिकट ही दी गई है। हरियाणा के मेवात क्षेत्र में मुस्लिमों को टिकटें देने का चलन हैं। इनेलो ने सबसे अधिक चार मुस्लिम प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं जबकि कांग्रेस ने 3, हजकां ने दो और भाजपा ने केवल एक ही मुस्लिम को प्रत्याशी बनाया है। भाजपा ने सबसे अधिक वैश्य प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतारे हैं। भाजपा ने 7 वैश्यों को टिकटें दी हैं। हजकां ने 5 और कांग्रेस व इनेलो ने 4-4 प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है।

नशे में धुत्त पुलिस ड्राईवर ने दीवार में ठोंकी गाड़ी


ओढा,( डॉ सुखपाल सावंत खेडा)- नशे में धुत्त पुलिस लाईन के एक ड्राइवर ने तेज गति से गाड़ी चलाते में हुए गाव में ले जाकर घर की दीवार में जा ठोंकी जिससे दिवार गिर पड़ी और दीवार के पास घर का कोई सदस्य न होने के कारण कोई बड़ा हादसा होने से टल गया। पुलिस ने उक्त कर्मचारी को पकड़ कर उसके खिलाफ लापरवाही से गाड़ी चलाने का मामला दर्ज कर अदालत में पेश किया है। जानकारी अनुसार पुलिस लाइन में ड्राईवर रणधीर सिंह पुत्र राम सिंह डबवाली से डयूटी कर शराब के नशे में सिरसा वापिस आ रहा था। कि नशे ंमें होने के कारण वह रास्ता भूलकर गाव ओढा में गाड़ी लेकर घुस गया। तेज गति से जा रही गाड़ी अनियंत्रित होकर ईटों के चट्टे से भिड़ती हुई दीवार से जा टकराई। जिसमें दीवार बुरी तरह क्षति ग्रस्त होकर गिर गई। सौभाग्य रहा कि घर का कोई भी सदस्य उस दीवार के पास नही था और बच्चे भी दीवार दूर खेल रहे थे। इस दुर्घटना में किसी को चोट नही आई है। ओढा पुलिस ने घर की मालिक परमजीत कौर पत्‍‌नी अजायब सिंह के बयान पर चालक के खिलाफ लापरवाही से गाड़ी चलाने की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज करते हुए काबू कर डबवाली न्यायालय में पेश किया है।

राजा बिल गेट्स के सामने 140 देश रंक


न्यूयार्क: दुनिया की चूलें हिला देने वाली ग्लोबल मंदी बिल गेट्स की बादशाहत को नहीं डिगा पाई। बिजनेस पत्रिका फो‌र्ब्स की दिग्गज अमेरिकी दौलतमंदों की सूची में माइक्रोसाफ्ट के संस्थापक व चेयरमैन गेट्स इस साल भी नंबर वन रहे। वह लगातार 16 सालों से अमेरिकी पत्रिका की 400 रईसों की इस सूची में शीर्ष पर जमे हुए हैं। बीते साल सितंबर से शुरू हुए वित्तीय वबंडर के चलते इस सूची के 400 दौलतमंदों की सामूहिक संपत्ति में 300 अरब डालर की कमी आई है। वह कितने धनी हैं इसका अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि दुनिया में ऐसे 140 से ज्यादा मुल्क कुल संपत्ति के मामले उनके सामने गरीब नजर आते हैं। ऐसे देशों में कोस्टारिका, उरुग्वे और बोलीविया जैसे देश शामिल हैं। म्यांमार और तंजानिया की कुल जीडीपी से उनकी संपत्ति कुछ ही कम है। यह तब है, जब आर्थिक संकट के कारण इस साल उनकी दौलत में 7 अरब डालर (करीब 334 अरब रुपये) की कमी आई है। इसके बावजूद अभी भी गेट्स की कुल संपत्ति 50 अरब डालर (करीब 2,385 अरब रुपये) है। फो‌र्ब्स ने वीरवार को अपनी सूची जारी की है। इसमें बिल गेट्स के बाद वारेन बफेट को दूसरे पायदान पर रखा गया है। इस सूची में चार भारतीय मूल के लोगों ने भी जगह बनाई है। इनमें 1.65 अरब डालर (करीब 71 अरब रुपये) के साथ भरत देसाई 212वें स्थान पर हैं। भरत अमेरिकी साफ्टवेयर फर्म सिंटेल के मुखिया हैं। वेंचर कैपिटलिस्ट और गूगल के संस्थापक निदेशकों में से एक कवितर्क राम श्रीराम 1.45 अरब डालर (करीब 69 अरब रुपये) के साथ 272वें पायदान पर हैं। 1.40 अरब डालर (करीब 66 अरब रुपये) के साथ साफ्टवेयर उद्यमी रोमेश वाधवानी को 277 वें स्थान पर जगह मिली है। वहीं वेंचर कैपिटलिस्ट विनोद खोसला 347 वें पायदान पर हैं। खोसला की कुल संपत्ति 1.1 अरब डालर है।

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