डबवाली- कम्युनिस्ट पार्टी के स्थानीय नेता कामरेड गणपत राम तथा अखिल भारतीय बाल्मीकि न्याय मंच के प्रतिनिधि सुरेश गोगा के संयुक्त नेतृत्व में आज दलित समाज के लोगों ने स्थानीय सिविल हस्पताल में डाक्टरों की कमी व जन सुविधाओं के अभाव को लेकर रोष प्रदर्शन किया तथा हस्पताल परिसर में धरना दिया। धरने का नेतृत्व कर रहे का. गणपत राम ने बताया कि हस्पताल में पूरी तरह अव्यवस्था फैली हुई है। हस्पताल में न तो कोई चिकित्सक है और न ही कोई चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी। जिसके चलते किसी भी रोगी का स्वस्थ होना मुश्किल है। उन्होंने हस्पताल के एसएमओ डॉ. विनोद महिपाल से मांग की कि जल्द ही चिकित्सकों तथा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को नियुक्त किया जाऐ ताकि हस्पताल में आने वाले रोगियों का सही तथा उचित उपचार हो सके। एसएमओ डॉ. विनोद महिपाल ने धरने पर बैठे लोगों को आश्वासन दिया कि उन्होंने चिकित्सकों तथा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की भर्ती के लिए अपने उच्चाधिकारियों को लिखित में अवगत करवाया है तथा जल्द ही हस्पताल में रिक्त पड़े विभिन्न पदों पर नियुक्तियां करवा दी जाऐंगी।
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शुक्रवार, 9 जुलाई 2010
लोहगढ़ हैड पर राजस्थान कनाल नहर की ईंटें खिसकने नहर टूटने का खत्तरा मण्डराने लगा
डबवाली- हरियाणा तथा पंजाब प्रदेश में आई बाढ़ से लोगों में हाहाकार मचा हुआ है। हांसी-बुटाना घग्घर नदी आई दरारों से अभी खत्तरा टला ही नहीं था कि उपमण्डल के गांव लोहगढ़ हैड पर राजस्थान कनाल नहर की ईंटें खिसकने से 20 से 25 फुट लम्बे तथा 10 से 15 फुट गहरे गढे बनने से कभी भी नहर टूटने का खत्तरा मण्डराने लगा है। जिसके चलते नहर के साथ स्थित ढाणियों के ग्रामीणों में भय का माहौल पाया जा रहा है। गांव लोहगढ़ के सरपंच नछत्तर सिंह, ब्लॉक समिति के सदस्य गुरप्रीत सिंह, लखवीर सिंह, सुखेदव सिंह, सुखदर्शन सिंह, कुलदीप सिंह, बलकरण सिंह सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि नहर की ईंटें खिसकने व गढों को लेकर ङ्क्षसचाई विभाग गिद्दड़वाह के उच्चाधिकारियों को कई बार शिकायतें दी जा चुकी हैं। लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने बताया कि विभागीय अधिकारियों द्वारा रिपेयर के नाम पर आनन-फानन में मिट्टी के गट्टे दरारों में भरवाकर चले जाते हैं। जो पानी के तेज बहाव में बह जाते हैं। परन्तु नियमानुसार नहर की रिपेयर नहीं की जाती। ग्रामीणों ने बताया कि इस वर्ष की शुरूआत में जनवरी से मार्च तक रिपेयर करने को लेकर नहरबन्दी की गई थी परन्तु रिपेयर के नाम पर एक भी ईंट नहीं लगाई गई। गांव के सरपंच नछत्तर ङ्क्षसह ने बताया कि नहर के साथ स्थित ढाणी हजारां सिंह वाली के निवासी ग्रामीण दिन-रात भय के माहौल में सांस ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि पंजाब प्रदेश द्वारा बाढ़ का पानी राजस्थान कनाल में छोड़ देने से पानी का उफान अपने पूरे यौवन पर है। उन्होंने आशंका जताई की बरसात के बाद पानी का स्तर ओर अधिक बढऩे से नहर कभी भी टूट सकती है। जिसके फलस्वरूप साथ लगते गांव लोहगढ़ के साथ - साथ जोतांवाली, सकता खेड़ा, मुन्नावाली तथा ढाणियों के अतिरिक्त 5 किलोमीटर के एरिया तक रेलवे लाईन को भी खत्तरा हो सकता है। ग्रामीणों ने बताया कि ङ्क्षसचाई विभाग के अधिकारियों द्वारा उनकी इस समस्या के प्रति ध्यान न दिया गया तो वह शीघ्र ही पंजाब प्रदेश के मुख्यमन्त्री प्रकाश सिंह बादल से मुलाकात करेंगे। इस बारे में सम्बन्धित विभाग के जेई सुखचरण सिंह के मोबाईल नम्बर 98147-00710 पर सम्पर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि इस बारे में उच्चाधिकारियों को अवगत करवा दिया गया है तथा वह शीघ्र ही लोहगढ़ का दौरा करेंगे।
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छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाईयों के मालिकों को अपने उद्योगों के एफ्यूलैंट ट्रीटमेंट प्लांटों का स्तर बढ़ाने के निर्देश
सिरसा,9 जुलाई -प्रदेश के पर्यावरण विभाग द्वारा सभी छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाईयों के मालिकों को अपने उद्योगों में पर्याप्त क्षमता के एफ्यूलैंट ट्रीटमेंट प्लांटों का स्तर बढ़ाने के निर्देश दिए गए है। यदि किसी उद्योग में विभाग के मापदंडों के अनुसार ट्रीटमेंट प्लांट नहीं पाए जाते तो उसके खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाएगी। यह बात प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड हरियाणा के चेयरमैन डा. ए.एस चहल ने आज सिरसा जिला के बकरियांवाली कचरा प्रबंधन प्लांट में दौरा करने के पश्चात स्थानीय लोक निर्माण विभाग के विश्राम गृह में पत्रकारों से कही। उनके इस दौरे में उनके साथ पर्यावरण विभाग के वित्तायुक्त श्री जी. प्रसन्ना कुमार, उपायुक्त श्री सी.जी रजिनीकांथन प्रशासनिक अधिकारी व पर्यावरण विभाग अधिकारी भी थे।
उन्होंने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों द्वारा औद्योगिक इकाईयों में औचक निरीक्षण किया जा रहा है। जो भी औद्योगिक इकाईयां प्रदूषण नियंत्रण के मापदंडों में खरा नहीं उतर रही उनके खिलाफ कार्यवाही की जा रही है ओर नोटिस दिए जा रहे है। प्रदेश में औद्योगिक वेस्ट के अलावा प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण शहरों और कस्बों से निकलने वाला कूड़ा कचरा है। विभाग द्वारा राज्य स्तर पर निर्णय लिया गया है कि प्रदेश के सभी शहरों में कचरा प्रबंधन प्लांट स्थापित किए जाएंगे। अभी तक हरियाणा के सिरसा और अंबाला शहर में कचरा प्रबंधन प्लांट स्थापित किए जा चुके है। प्रदेश के अधिकतर शहरों व कस्बों में कचरा प्रबंधन प्लांट स्थापित करने की प्रक्रिया शुरु है। कई शहरों में इसके लिए जमीन अधिग्रहण का कार्य कर लिया गया है। इसके साथ-साथ शहरों में सीवरेज का पानी भी प्रदूषण का एक कारण है। इस पानी को ट्रीट करके खेती योग्य बनाने व अन्य कार्यों में प्रयोग लाने के लिए सभी शहरों में राज्य स्तर पर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगवाने का निर्णय लिया गया है।
उन्होंने बताया कि शहरों में स्थापित अस्पतालों, पैथोलॉजिकल लैब व अन्य स्थानों से निकलने वाले बायोमैडीकल गैस के डिस्पोजल के लिए भी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा कुछ पार्टियों को अनापत्ति प्रमाण पत्र दिया गया है। इन पार्टियों द्वारा बायोमैडीकल वेस्ट का डिस्पोजल सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सभी अस्पतालों, नर्सिंग होम इत्यादि को निर्देश दिए गए है कि वे 31 जुलाई तक अपने-अपने प्रतिष्ठानों में बायोमैडीकल वेस्ट स्टोर करने के लिए इंतजाम करे। यदि कोई संस्थान या प्रतिष्ठान इन मापदंडों पर खरा नहीं उतरेगा तो उसके खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जाएगी।
श्री चहल ने बताया कि प्रदेश में पेंट, रंग रोगन की फैक्टरियों से निकलने वाले वेस्ट के प्रबंधन के लिए विभाग द्वारा हेम्स नामक कंपनी से समझौता किया गया है। यह कंपनी फरीदाबाद जिले के पाली गांव में हजर्ड देश प्लांट लगाएगी। इस प्रकार के वेस्ट को अप्रभावित करके जमीन के अंदर दबाया जाएगा और उस जमीन के ऊपर पार्क जैसी जगह विकसित की जाएगी। इसके साथ-साथ हरियाणा में पॉलीथीन के प्रयोग पर भी रोक लगाई हुई है। कोई भी व्यक्ति चालीस माइक्रो से कम पॉलीथीन का प्रयोग न तो कर सकता है और न ही उसका उत्पादन कर सकता है। इसके साथ-साथ चालीस माइक्रो से अधिक के पॉलीथीन का साईज भी 12 318 इंच से छोटा नहीं होना चाहिए। पॉलीथीन के प्रयोग पर विभाग द्वारा पूरी सख्ताई बरती जा रही है। प्रदेश में विभागीय मापदंडों के खिलाफ पॉलीथीन का प्रयोग करने पर 800 से भी अधिक लोगों के चालान किए जा चुके है। सिरसा जिला में तीन दर्जन से भी अधिक लोगों के चालान किए गए है। उन्होंने स्थानीय प्रशासन के साथ सिरसा जिले के बकरियांवाली स्थित कचरा प्रबंधन प्लांट का दौरा किया और प्लांट का कार्य देख रही कंपनी के अधिकारियों से कहा कि वे विभिन्न प्रकार के कचरे की छिटाई करके खाद तैयार करे, तभी उनकी खाद की बिक्री हो पाएगी। उन्होंने कहा कि इस प्लांट में कुछ कमियां पाई गई। इसीलिए अधिकारियों को निर्देश दिए है कि वे इसे शीघ्र दुरुस्त करवाए जिससे आसपास के क्षेत्र में किसी प्रकार का प्रदूषण न फैले। प्रदूषण की समस्या को लेकर स्थानीय बकरियांवाली गांव के किसानों ने भी अपनी शिकायत उनके सामने रखी। उन्होंने आश्वासन दिया कि उनकी समस्या का शीघ्र समाधान किया जाएगा। उन्होंने आज स्थानीय मिल्क प्लांट और जगदंबा पेपर मील का दौरा कर निरीक्षण किया।
उन्होंने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों द्वारा औद्योगिक इकाईयों में औचक निरीक्षण किया जा रहा है। जो भी औद्योगिक इकाईयां प्रदूषण नियंत्रण के मापदंडों में खरा नहीं उतर रही उनके खिलाफ कार्यवाही की जा रही है ओर नोटिस दिए जा रहे है। प्रदेश में औद्योगिक वेस्ट के अलावा प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण शहरों और कस्बों से निकलने वाला कूड़ा कचरा है। विभाग द्वारा राज्य स्तर पर निर्णय लिया गया है कि प्रदेश के सभी शहरों में कचरा प्रबंधन प्लांट स्थापित किए जाएंगे। अभी तक हरियाणा के सिरसा और अंबाला शहर में कचरा प्रबंधन प्लांट स्थापित किए जा चुके है। प्रदेश के अधिकतर शहरों व कस्बों में कचरा प्रबंधन प्लांट स्थापित करने की प्रक्रिया शुरु है। कई शहरों में इसके लिए जमीन अधिग्रहण का कार्य कर लिया गया है। इसके साथ-साथ शहरों में सीवरेज का पानी भी प्रदूषण का एक कारण है। इस पानी को ट्रीट करके खेती योग्य बनाने व अन्य कार्यों में प्रयोग लाने के लिए सभी शहरों में राज्य स्तर पर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगवाने का निर्णय लिया गया है।
उन्होंने बताया कि शहरों में स्थापित अस्पतालों, पैथोलॉजिकल लैब व अन्य स्थानों से निकलने वाले बायोमैडीकल गैस के डिस्पोजल के लिए भी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा कुछ पार्टियों को अनापत्ति प्रमाण पत्र दिया गया है। इन पार्टियों द्वारा बायोमैडीकल वेस्ट का डिस्पोजल सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सभी अस्पतालों, नर्सिंग होम इत्यादि को निर्देश दिए गए है कि वे 31 जुलाई तक अपने-अपने प्रतिष्ठानों में बायोमैडीकल वेस्ट स्टोर करने के लिए इंतजाम करे। यदि कोई संस्थान या प्रतिष्ठान इन मापदंडों पर खरा नहीं उतरेगा तो उसके खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जाएगी।
श्री चहल ने बताया कि प्रदेश में पेंट, रंग रोगन की फैक्टरियों से निकलने वाले वेस्ट के प्रबंधन के लिए विभाग द्वारा हेम्स नामक कंपनी से समझौता किया गया है। यह कंपनी फरीदाबाद जिले के पाली गांव में हजर्ड देश प्लांट लगाएगी। इस प्रकार के वेस्ट को अप्रभावित करके जमीन के अंदर दबाया जाएगा और उस जमीन के ऊपर पार्क जैसी जगह विकसित की जाएगी। इसके साथ-साथ हरियाणा में पॉलीथीन के प्रयोग पर भी रोक लगाई हुई है। कोई भी व्यक्ति चालीस माइक्रो से कम पॉलीथीन का प्रयोग न तो कर सकता है और न ही उसका उत्पादन कर सकता है। इसके साथ-साथ चालीस माइक्रो से अधिक के पॉलीथीन का साईज भी 12 318 इंच से छोटा नहीं होना चाहिए। पॉलीथीन के प्रयोग पर विभाग द्वारा पूरी सख्ताई बरती जा रही है। प्रदेश में विभागीय मापदंडों के खिलाफ पॉलीथीन का प्रयोग करने पर 800 से भी अधिक लोगों के चालान किए जा चुके है। सिरसा जिला में तीन दर्जन से भी अधिक लोगों के चालान किए गए है। उन्होंने स्थानीय प्रशासन के साथ सिरसा जिले के बकरियांवाली स्थित कचरा प्रबंधन प्लांट का दौरा किया और प्लांट का कार्य देख रही कंपनी के अधिकारियों से कहा कि वे विभिन्न प्रकार के कचरे की छिटाई करके खाद तैयार करे, तभी उनकी खाद की बिक्री हो पाएगी। उन्होंने कहा कि इस प्लांट में कुछ कमियां पाई गई। इसीलिए अधिकारियों को निर्देश दिए है कि वे इसे शीघ्र दुरुस्त करवाए जिससे आसपास के क्षेत्र में किसी प्रकार का प्रदूषण न फैले। प्रदूषण की समस्या को लेकर स्थानीय बकरियांवाली गांव के किसानों ने भी अपनी शिकायत उनके सामने रखी। उन्होंने आश्वासन दिया कि उनकी समस्या का शीघ्र समाधान किया जाएगा। उन्होंने आज स्थानीय मिल्क प्लांट और जगदंबा पेपर मील का दौरा कर निरीक्षण किया।
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छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाईयों के मालिकों को अपने उद्योगों के एफ्यूलैंट ट्रीटमेंट प्लांटों का स्तर बढ़ाने के निर्देश
सिरसा,9 जुलाई -प्रदेश के पर्यावरण विभाग द्वारा सभी छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाईयों के मालिकों को अपने उद्योगों में पर्याप्त क्षमता के एफ्यूलैंट ट्रीटमेंट प्लांटों का स्तर बढ़ाने के निर्देश दिए गए है। यदि किसी उद्योग में विभाग के मापदंडों के अनुसार ट्रीटमेंट प्लांट नहीं पाए जाते तो उसके खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाएगी। यह बात प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड हरियाणा के चेयरमैन डा. ए.एस चहल ने आज सिरसा जिला के बकरियांवाली कचरा प्रबंधन प्लांट में दौरा करने के पश्चात स्थानीय लोक निर्माण विभाग के विश्राम गृह में पत्रकारों से कही। उनके इस दौरे में उनके साथ पर्यावरण विभाग के वित्तायुक्त श्री जी. प्रसन्ना कुमार, उपायुक्त श्री सी.जी रजिनीकांथन प्रशासनिक अधिकारी व पर्यावरण विभाग अधिकारी भी थे।
उन्होंने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों द्वारा औद्योगिक इकाईयों में औचक निरीक्षण किया जा रहा है। जो भी औद्योगिक इकाईयां प्रदूषण नियंत्रण के मापदंडों में खरा नहीं उतर रही उनके खिलाफ कार्यवाही की जा रही है ओर नोटिस दिए जा रहे है। प्रदेश में औद्योगिक वेस्ट के अलावा प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण शहरों और कस्बों से निकलने वाला कूड़ा कचरा है। विभाग द्वारा राज्य स्तर पर निर्णय लिया गया है कि प्रदेश के सभी शहरों में कचरा प्रबंधन प्लांट स्थापित किए जाएंगे। अभी तक हरियाणा के सिरसा और अंबाला शहर में कचरा प्रबंधन प्लांट स्थापित किए जा चुके है। प्रदेश के अधिकतर शहरों व कस्बों में कचरा प्रबंधन प्लांट स्थापित करने की प्रक्रिया शुरु है। कई शहरों में इसके लिए जमीन अधिग्रहण का कार्य कर लिया गया है। इसके साथ-साथ शहरों में सीवरेज का पानी भी प्रदूषण का एक कारण है। इस पानी को ट्रीट करके खेती योग्य बनाने व अन्य कार्यों में प्रयोग लाने के लिए सभी शहरों में राज्य स्तर पर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगवाने का निर्णय लिया गया है।
उन्होंने बताया कि शहरों में स्थापित अस्पतालों, पैथोलॉजिकल लैब व अन्य स्थानों से निकलने वाले बायोमैडीकल गैस के डिस्पोजल के लिए भी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा कुछ पार्टियों को अनापत्ति प्रमाण पत्र दिया गया है। इन पार्टियों द्वारा बायोमैडीकल वेस्ट का डिस्पोजल सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सभी अस्पतालों, नर्सिंग होम इत्यादि को निर्देश दिए गए है कि वे 31 जुलाई तक अपने-अपने प्रतिष्ठानों में बायोमैडीकल वेस्ट स्टोर करने के लिए इंतजाम करे। यदि कोई संस्थान या प्रतिष्ठान इन मापदंडों पर खरा नहीं उतरेगा तो उसके खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जाएगी।
श्री चहल ने बताया कि प्रदेश में पेंट, रंग रोगन की फैक्टरियों से निकलने वाले वेस्ट के प्रबंधन के लिए विभाग द्वारा हेम्स नामक कंपनी से समझौता किया गया है। यह कंपनी फरीदाबाद जिले के पाली गांव में हजर्ड देश प्लांट लगाएगी। इस प्रकार के वेस्ट को अप्रभावित करके जमीन के अंदर दबाया जाएगा और उस जमीन के ऊपर पार्क जैसी जगह विकसित की जाएगी। इसके साथ-साथ हरियाणा में पॉलीथीन के प्रयोग पर भी रोक लगाई हुई है। कोई भी व्यक्ति चालीस माइक्रो से कम पॉलीथीन का प्रयोग न तो कर सकता है और न ही उसका उत्पादन कर सकता है। इसके साथ-साथ चालीस माइक्रो से अधिक के पॉलीथीन का साईज भी 12 318 इंच से छोटा नहीं होना चाहिए। पॉलीथीन के प्रयोग पर विभाग द्वारा पूरी सख्ताई बरती जा रही है। प्रदेश में विभागीय मापदंडों के खिलाफ पॉलीथीन का प्रयोग करने पर 800 से भी अधिक लोगों के चालान किए जा चुके है। सिरसा जिला में तीन दर्जन से भी अधिक लोगों के चालान किए गए है। उन्होंने स्थानीय प्रशासन के साथ सिरसा जिले के बकरियांवाली स्थित कचरा प्रबंधन प्लांट का दौरा किया और प्लांट का कार्य देख रही कंपनी के अधिकारियों से कहा कि वे विभिन्न प्रकार के कचरे की छिटाई करके खाद तैयार करे, तभी उनकी खाद की बिक्री हो पाएगी। उन्होंने कहा कि इस प्लांट में कुछ कमियां पाई गई। इसीलिए अधिकारियों को निर्देश दिए है कि वे इसे शीघ्र दुरुस्त करवाए जिससे आसपास के क्षेत्र में किसी प्रकार का प्रदूषण न फैले। प्रदूषण की समस्या को लेकर स्थानीय बकरियांवाली गांव के किसानों ने भी अपनी शिकायत उनके सामने रखी। उन्होंने आश्वासन दिया कि उनकी समस्या का शीघ्र समाधान किया जाएगा। उन्होंने आज स्थानीय मिल्क प्लांट और जगदंबा पेपर मील का दौरा कर निरीक्षण किया।
उन्होंने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों द्वारा औद्योगिक इकाईयों में औचक निरीक्षण किया जा रहा है। जो भी औद्योगिक इकाईयां प्रदूषण नियंत्रण के मापदंडों में खरा नहीं उतर रही उनके खिलाफ कार्यवाही की जा रही है ओर नोटिस दिए जा रहे है। प्रदेश में औद्योगिक वेस्ट के अलावा प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण शहरों और कस्बों से निकलने वाला कूड़ा कचरा है। विभाग द्वारा राज्य स्तर पर निर्णय लिया गया है कि प्रदेश के सभी शहरों में कचरा प्रबंधन प्लांट स्थापित किए जाएंगे। अभी तक हरियाणा के सिरसा और अंबाला शहर में कचरा प्रबंधन प्लांट स्थापित किए जा चुके है। प्रदेश के अधिकतर शहरों व कस्बों में कचरा प्रबंधन प्लांट स्थापित करने की प्रक्रिया शुरु है। कई शहरों में इसके लिए जमीन अधिग्रहण का कार्य कर लिया गया है। इसके साथ-साथ शहरों में सीवरेज का पानी भी प्रदूषण का एक कारण है। इस पानी को ट्रीट करके खेती योग्य बनाने व अन्य कार्यों में प्रयोग लाने के लिए सभी शहरों में राज्य स्तर पर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगवाने का निर्णय लिया गया है।
उन्होंने बताया कि शहरों में स्थापित अस्पतालों, पैथोलॉजिकल लैब व अन्य स्थानों से निकलने वाले बायोमैडीकल गैस के डिस्पोजल के लिए भी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा कुछ पार्टियों को अनापत्ति प्रमाण पत्र दिया गया है। इन पार्टियों द्वारा बायोमैडीकल वेस्ट का डिस्पोजल सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सभी अस्पतालों, नर्सिंग होम इत्यादि को निर्देश दिए गए है कि वे 31 जुलाई तक अपने-अपने प्रतिष्ठानों में बायोमैडीकल वेस्ट स्टोर करने के लिए इंतजाम करे। यदि कोई संस्थान या प्रतिष्ठान इन मापदंडों पर खरा नहीं उतरेगा तो उसके खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जाएगी।
श्री चहल ने बताया कि प्रदेश में पेंट, रंग रोगन की फैक्टरियों से निकलने वाले वेस्ट के प्रबंधन के लिए विभाग द्वारा हेम्स नामक कंपनी से समझौता किया गया है। यह कंपनी फरीदाबाद जिले के पाली गांव में हजर्ड देश प्लांट लगाएगी। इस प्रकार के वेस्ट को अप्रभावित करके जमीन के अंदर दबाया जाएगा और उस जमीन के ऊपर पार्क जैसी जगह विकसित की जाएगी। इसके साथ-साथ हरियाणा में पॉलीथीन के प्रयोग पर भी रोक लगाई हुई है। कोई भी व्यक्ति चालीस माइक्रो से कम पॉलीथीन का प्रयोग न तो कर सकता है और न ही उसका उत्पादन कर सकता है। इसके साथ-साथ चालीस माइक्रो से अधिक के पॉलीथीन का साईज भी 12 318 इंच से छोटा नहीं होना चाहिए। पॉलीथीन के प्रयोग पर विभाग द्वारा पूरी सख्ताई बरती जा रही है। प्रदेश में विभागीय मापदंडों के खिलाफ पॉलीथीन का प्रयोग करने पर 800 से भी अधिक लोगों के चालान किए जा चुके है। सिरसा जिला में तीन दर्जन से भी अधिक लोगों के चालान किए गए है। उन्होंने स्थानीय प्रशासन के साथ सिरसा जिले के बकरियांवाली स्थित कचरा प्रबंधन प्लांट का दौरा किया और प्लांट का कार्य देख रही कंपनी के अधिकारियों से कहा कि वे विभिन्न प्रकार के कचरे की छिटाई करके खाद तैयार करे, तभी उनकी खाद की बिक्री हो पाएगी। उन्होंने कहा कि इस प्लांट में कुछ कमियां पाई गई। इसीलिए अधिकारियों को निर्देश दिए है कि वे इसे शीघ्र दुरुस्त करवाए जिससे आसपास के क्षेत्र में किसी प्रकार का प्रदूषण न फैले। प्रदूषण की समस्या को लेकर स्थानीय बकरियांवाली गांव के किसानों ने भी अपनी शिकायत उनके सामने रखी। उन्होंने आश्वासन दिया कि उनकी समस्या का शीघ्र समाधान किया जाएगा। उन्होंने आज स्थानीय मिल्क प्लांट और जगदंबा पेपर मील का दौरा कर निरीक्षण किया।
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सिरसा जिला में 15 अरब 23 करोड़ 47 लाख 29 हजार रुपए के ऋण दिए गए
सिरसा,9 जुलाई- सिरसा जिला में विभिन्न राष्ट्रीय कृत एवं कृषि विकास बैंको द्वारा वर्ष 2009-10 के दौरान विभिन्न क्षेत्रों के लिए 15 अरब 23 करोड़ 47 लाख 29 हजार रुपए के ऋण दिए गए, जबकि बैंकों द्वारा 13 अरब 28 करोड़ 32 लाख 99 हजार रुपए के ऋण देने का लक्ष्य रखा गया था। इस प्रकार से बैंकों द्वारा अपने लक्ष्य से आगे बढ़कर 112 प्रतिशत की प्राप्ति की है।
यह जानकारी देते हुए उपायुक्त श्री सी.जी रजिनीकांथन ने बताया कि सबसे अधिक ऋण की राशि कृषि के क्षेत्र में प्रदान की गई। इस क्षेत्र में 12 अरब 83 करोड़ 33 लाख 68 हजार रुपए की राशि के ऋण प्रदान किए गए। इस क्षेत्र के लिए ऋण देने का लक्ष्य 11 अरब 57 करोड़ 53 लाख 74 हजार रुपए निर्धारित किया गया था। कृषि के क्षेत्र में 111 प्रतिशत लक्ष्य की प्राप्ति की गई। उन्होंने बताया कि सबसे अधिक ऋण जिला स्थित पंजाब नैशनल बैंकों की शाखाओं द्वारा प्रदान किया गया।
उन्होंने बताया कि लघु उद्योग के क्षेत्र में 1 अरब 12 करोड़ 34 लाख रुपए के ऋण दिए गए थे। इस क्षेत्र में 1 अरब 4 करोड़ 74 लाख 89 हजार रुपए के ऋण देने का लक्ष्य रखा गया था। इस प्रकार से इस क्षेत्र में 107 प्रतिशत लक्ष्य की प्राप्ति की गई। इसके साथ-साथ जिला में अन्य व्यापारिक गतिविधियां बढ़ाने और रोजगार स्थापित करने के उद्देश्य से भी विभिन्न राष्ट्रीय कृत एवं कृषि बैंकों द्वारा 1 अरब 27 करोड़ 79 लाख 59 हजार रुपए की राशि के ऋण दिए गए। इस प्रकार से इस क्षेत्र में भी 140 प्रतिशत लक्ष्य की प्राप्ति की गई।
श्री रजिनीकांथन ने बताया कि जिला में स्वर्णजयंती ग्राम स्वरोजगार योजना और स्वर्णजयंती शहरी स्वरोजगार योजना के तहत विभिन्न बैंकों द्वारा गत वर्ष के दौरान मार्च के अंत तक 8 करोड़ 20 लाख रुपए की राशि उपलब्ध करवाई गई। स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना के तहत 6 करोड़ 20 लाख रुपए और स्वर्णजयंती शहरी स्वरोजगार योजना के तहत 2 करोड़ रुपए की राशि उपलब्ध करवाई गई। स्वर्ण जयंती ग्रामीण स्वरोजगार योजना के तहत बैंकों द्वारा निर्धारित लक्ष्य से दोगुनी राशि इन योजना के तहत उपलबध करवाकर महिलाओं और युवाओं के लिए रोजगार स्थापित करवाए गए।
यह जानकारी देते हुए उपायुक्त श्री सी.जी रजिनीकांथन ने बताया कि सबसे अधिक ऋण की राशि कृषि के क्षेत्र में प्रदान की गई। इस क्षेत्र में 12 अरब 83 करोड़ 33 लाख 68 हजार रुपए की राशि के ऋण प्रदान किए गए। इस क्षेत्र के लिए ऋण देने का लक्ष्य 11 अरब 57 करोड़ 53 लाख 74 हजार रुपए निर्धारित किया गया था। कृषि के क्षेत्र में 111 प्रतिशत लक्ष्य की प्राप्ति की गई। उन्होंने बताया कि सबसे अधिक ऋण जिला स्थित पंजाब नैशनल बैंकों की शाखाओं द्वारा प्रदान किया गया।
उन्होंने बताया कि लघु उद्योग के क्षेत्र में 1 अरब 12 करोड़ 34 लाख रुपए के ऋण दिए गए थे। इस क्षेत्र में 1 अरब 4 करोड़ 74 लाख 89 हजार रुपए के ऋण देने का लक्ष्य रखा गया था। इस प्रकार से इस क्षेत्र में 107 प्रतिशत लक्ष्य की प्राप्ति की गई। इसके साथ-साथ जिला में अन्य व्यापारिक गतिविधियां बढ़ाने और रोजगार स्थापित करने के उद्देश्य से भी विभिन्न राष्ट्रीय कृत एवं कृषि बैंकों द्वारा 1 अरब 27 करोड़ 79 लाख 59 हजार रुपए की राशि के ऋण दिए गए। इस प्रकार से इस क्षेत्र में भी 140 प्रतिशत लक्ष्य की प्राप्ति की गई।
श्री रजिनीकांथन ने बताया कि जिला में स्वर्णजयंती ग्राम स्वरोजगार योजना और स्वर्णजयंती शहरी स्वरोजगार योजना के तहत विभिन्न बैंकों द्वारा गत वर्ष के दौरान मार्च के अंत तक 8 करोड़ 20 लाख रुपए की राशि उपलब्ध करवाई गई। स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना के तहत 6 करोड़ 20 लाख रुपए और स्वर्णजयंती शहरी स्वरोजगार योजना के तहत 2 करोड़ रुपए की राशि उपलब्ध करवाई गई। स्वर्ण जयंती ग्रामीण स्वरोजगार योजना के तहत बैंकों द्वारा निर्धारित लक्ष्य से दोगुनी राशि इन योजना के तहत उपलबध करवाकर महिलाओं और युवाओं के लिए रोजगार स्थापित करवाए गए।
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बच्चों की बहादुरी के लिए अवॉर्ड देने हेतु आवेदन आमंत्रित
सिरसा, 9 जुलाई -प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही इंडियन काउंसिल फॉर चाइल्ड वैलफेयर योजना के तहत बच्चों की बहादुरी के लिए अवॉर्ड देने हेतु आवेदन आमंत्रित किए गए है जिनकी अंतिम तिथि 30 सितम्बर 2010 है।
यह जानकारी जिला उपायुक्त सी.जी रजिनीकांथन ने देते हुए बताया कि उक्त योजना के तहत उन बहादुर बच्चों को सम्मानित किया जाता है जिन्होंने बहादुरी के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करते हुए अपनी जान की परवाह न करते हुए दूसरों की रक्षा की हो। ऐसे बच्चों को मैडल, प्रमाण पत्र व नकद राशि देकर सम्मानित किया जाता है।
उन्होंने बताया कि जिन बच्चों की आयु 6 से 18 वर्ष के बीच की हो और उन्होंने किसी खतरे की स्थिति के समय बहादुरी से काम किया हो, ऐसे बच्चों के लिए प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही उक्त योजना के तहत प्रत्येक वर्ष अवार्ड कार्यक्रम आयोजित कर सम्मानित किया जाता है। इस कार्यक्रम में देश के प्रतिष्ठित व्यक्ति शिरकत करते है।
श्री रजिनीकांथन ने बताया कि इस योजना के तहत बहादुर बच्चों को विभिन्न प्रकार के अवार्ड जैसे भारत अवार्ड, गीता चोपड़ा अवार्ड, संजय चोपड़ा अवार्ड, बापू गांधी अवार्ड तथा सामान्य अवार्ड इत्यादि देकर प्रधानमंत्री द्वारा गणतंत्र दिवस के एक दिन के पूर्व सम्मानित किया जाता है। इस योजना के तहत बच्चों द्वारा बहादुरी का कार्य 1 जुलाई 2009 से 30 जून 2010 के बीच के समय सीमा में किया जाना चाहिए तभी वह 2011 के अवार्ड कार्यक्रम के लिए आवेदन कर सकते है। इस आवेदन पत्र में प्रार्थियों को अपने द्वारा किए गए बहादुरी के कार्य की पूर्ण जानकारी 250 शब्दों में लिखकर दस्ती तौर पर देनी होगी। जैसे एफआईआर, सीडी या टेप या किसी समाचार पत्र में आई खबर की कटिंग आदि देनी होगी। आवेदक जिस स्कूल का विद्यार्थी हो उसे स्कूल के प्राध्यापक/प्राचार्य द्वारा आवेदन पत्र सत्यापित करवाना होगा या संंबंधित जिला परिषद के अध्यक्ष/ग्राम सरपंच से करवाया जा सकता है। इसके साथ जिला के उपायुक्त/पुलिस अधीक्षक तथा राज्य बाल कल्याण परिषद से भी सत्यापित करवाना होगा।
उन्होंने बताया कि अवार्ड के लिए बच्चों का चयन भारतीय बाल कल्याण परिषद द्वारा गठित हाई पावर कमेटी द्वारा किया जाता है। इस कमेटी में भारत के राष्ट्रपति के सचिव, उपराष्ट्रपति, मानवीय संसाधन विकास मंत्रालय, महिला एवं बाल विकास, युवा एवं खेल मंत्रालय, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, रेल मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, गृह मंत्रालय, श्रम मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय, सूचना एवं प्रसारण विभाग, दूरदर्शन विभाग, पुलिस विभाग सहित कुछ एन.जी.ओ व परिषद के सदस्यों को शामिल किया गया है।
यह जानकारी जिला उपायुक्त सी.जी रजिनीकांथन ने देते हुए बताया कि उक्त योजना के तहत उन बहादुर बच्चों को सम्मानित किया जाता है जिन्होंने बहादुरी के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करते हुए अपनी जान की परवाह न करते हुए दूसरों की रक्षा की हो। ऐसे बच्चों को मैडल, प्रमाण पत्र व नकद राशि देकर सम्मानित किया जाता है।
उन्होंने बताया कि जिन बच्चों की आयु 6 से 18 वर्ष के बीच की हो और उन्होंने किसी खतरे की स्थिति के समय बहादुरी से काम किया हो, ऐसे बच्चों के लिए प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही उक्त योजना के तहत प्रत्येक वर्ष अवार्ड कार्यक्रम आयोजित कर सम्मानित किया जाता है। इस कार्यक्रम में देश के प्रतिष्ठित व्यक्ति शिरकत करते है।
श्री रजिनीकांथन ने बताया कि इस योजना के तहत बहादुर बच्चों को विभिन्न प्रकार के अवार्ड जैसे भारत अवार्ड, गीता चोपड़ा अवार्ड, संजय चोपड़ा अवार्ड, बापू गांधी अवार्ड तथा सामान्य अवार्ड इत्यादि देकर प्रधानमंत्री द्वारा गणतंत्र दिवस के एक दिन के पूर्व सम्मानित किया जाता है। इस योजना के तहत बच्चों द्वारा बहादुरी का कार्य 1 जुलाई 2009 से 30 जून 2010 के बीच के समय सीमा में किया जाना चाहिए तभी वह 2011 के अवार्ड कार्यक्रम के लिए आवेदन कर सकते है। इस आवेदन पत्र में प्रार्थियों को अपने द्वारा किए गए बहादुरी के कार्य की पूर्ण जानकारी 250 शब्दों में लिखकर दस्ती तौर पर देनी होगी। जैसे एफआईआर, सीडी या टेप या किसी समाचार पत्र में आई खबर की कटिंग आदि देनी होगी। आवेदक जिस स्कूल का विद्यार्थी हो उसे स्कूल के प्राध्यापक/प्राचार्य द्वारा आवेदन पत्र सत्यापित करवाना होगा या संंबंधित जिला परिषद के अध्यक्ष/ग्राम सरपंच से करवाया जा सकता है। इसके साथ जिला के उपायुक्त/पुलिस अधीक्षक तथा राज्य बाल कल्याण परिषद से भी सत्यापित करवाना होगा।
उन्होंने बताया कि अवार्ड के लिए बच्चों का चयन भारतीय बाल कल्याण परिषद द्वारा गठित हाई पावर कमेटी द्वारा किया जाता है। इस कमेटी में भारत के राष्ट्रपति के सचिव, उपराष्ट्रपति, मानवीय संसाधन विकास मंत्रालय, महिला एवं बाल विकास, युवा एवं खेल मंत्रालय, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, रेल मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, गृह मंत्रालय, श्रम मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय, सूचना एवं प्रसारण विभाग, दूरदर्शन विभाग, पुलिस विभाग सहित कुछ एन.जी.ओ व परिषद के सदस्यों को शामिल किया गया है।
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हरियाणा सरकार द्वारा प्रदेश के सभी शहरों में कचरा प्रबंधन प्लांट स्थापित करने का निर्णय
चंडीगढ़,9 जुलाई-हरियाणा सरकार द्वारा प्रदेश के सभी शहरों में कचरा प्रबंधन प्लांट स्थापित करने का निर्णय लिया गया है और अब तक हरियाणा के सिरसा तथा अंबाला शहर में कचरा प्रबंधन प्लांट स्थापित किए जा चुके है।
इस संबंध में जानकारी देते हुए हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन डॉ0 ए.एस चहल ने आज बताया कि प्रदेश के अधिकतर शहरों व कस्बों में कचरा प्रबंधन संयंत्र स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू है तथा कई शहरों में इसके लिए जमीन अधिग्रहण का कार्य कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि शहरों में सीवरेज का पानी भी प्रदूषण का एक कारण है। इस पानी को साफ करके खेती योग्य बनाने व अन्य कार्यों में प्रयोग लाने के लिए सभी शहरों में राज्य स्तर पर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगवाने का निर्णय लिया गया है।
हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन डॉ0 ए.एस चहल ने आज सिरसा जिला के बकरियांवाली कचरा प्रबंधन संयंत्र का दौरा किया। इस अवसर पर उन्होंने बताया कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों द्वारा औद्योगिक इकाईयों में औचक निरीक्षण किया जा रहा है, जो भी औद्योगिक इकाईयां प्रदूषण नियंत्रण के मापदंडों में खरा नहीं उतर रही उनके खिलाफ कार्यवाही की जा रही है और नोटिस दिए जा रहे है। प्रदेश में औद्योगिक वेस्ट के अलावा प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण शहरों और कस्बों से निकलने वाला कूड़ा कचरा है।
उन्होंने कहा कि हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा सभी छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाईयों के मालिकों को अपने उद्योगों में पर्याप्त क्षमता के एफ्यूलैंट ट्रीटमेंट प्लांटों का स्तर बढ़ाने के निर्देश दिए गए है। यदि किसी उद्योग में विभाग के मापदंडों के अनुसार ट्रीटमेंट प्लांट नहीं पाए जाते तो उसके खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाएगी।
उन्होंने बताया कि शहरों में स्थापित अस्पतालों, पैथोलॉजिकल लैब व अन्य स्थानों से निकलने वाले बायोमैडीकल गैस के डिस्पोजल के लिए भी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा कुछ पार्टियों को अनापत्ति प्रमाण पत्र दिया गया है। इन पार्टियों द्वारा बायोमैडीकल वेस्ट का डिस्पोजल सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सभी अस्पतालों, नर्सिंग होम इत्यादि को निर्देश दिए गए है कि वे 31 जुलाई तक अपने-अपने प्रतिष्ठानों में बायोमैडीकल वेस्ट स्टोर करने के लिए इंतजाम करें, यदि कोई संस्थान या प्रतिष्ठान इन मापदंडों पर खरा नहीं उतरेगा तो उसके खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जाएगी।
श्री चहल ने बताया कि प्रदेश में पेंट, रंग रोगन की फैक्टरियों से निकलने वाले वेस्ट के प्रबंधन के लिए विभाग द्वारा हेम्स नामक कंपनी से समझौता किया गया है। यह कंपनी फरीदाबाद जिले के पाली गांव में हजर्ड देश प्लांट लगाएगी। इस प्रकार के वेस्ट को अप्रभावित करके जमीन के अंदर दबाया जाएगा और उस जमीन के ऊपर पार्क जैसी जगह विकसित की जाएगी। उन्होंने कहा कि हरियाणा में पॉलीथीन के प्रयोग पर पूर्णत: प्रतिबंध लगाया गया है। पॉलीथीन के प्रयोग पर विभाग द्वारा पूरी सख्ताई बरती जा रही है। प्रदेश में विभागीय मापदंडों के खिलाफ पॉलीथीन का प्रयोग करने पर 800 से भी अधिक लोगों के चालान किए जा चुके है। सिरसा जिला में तीन दर्जन से भी अधिक लोगों के चालान किए गए है।
उन्होंने कचरा प्रबंधन संयंत्र का कार्य देख रही कंपनी के अधिकारियों से कहा कि वे विभिन्न प्रकार के कचरे की छिटाई करके खाद तैयार करे, तभी उनकी खाद की बिक्री हो पाएगी। उन्होंने कहा कि इस प्लांट में कुछ कमियां पाई गई इसीलिए अधिकारियों को निर्देश दिए है कि वे इसे शीघ्र दुरुस्त करवाए जिससे आसपास के क्षेत्र में किसी प्रकार का प्रदूषण न फैले।
इस संबंध में जानकारी देते हुए हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन डॉ0 ए.एस चहल ने आज बताया कि प्रदेश के अधिकतर शहरों व कस्बों में कचरा प्रबंधन संयंत्र स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू है तथा कई शहरों में इसके लिए जमीन अधिग्रहण का कार्य कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि शहरों में सीवरेज का पानी भी प्रदूषण का एक कारण है। इस पानी को साफ करके खेती योग्य बनाने व अन्य कार्यों में प्रयोग लाने के लिए सभी शहरों में राज्य स्तर पर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगवाने का निर्णय लिया गया है।
हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन डॉ0 ए.एस चहल ने आज सिरसा जिला के बकरियांवाली कचरा प्रबंधन संयंत्र का दौरा किया। इस अवसर पर उन्होंने बताया कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों द्वारा औद्योगिक इकाईयों में औचक निरीक्षण किया जा रहा है, जो भी औद्योगिक इकाईयां प्रदूषण नियंत्रण के मापदंडों में खरा नहीं उतर रही उनके खिलाफ कार्यवाही की जा रही है और नोटिस दिए जा रहे है। प्रदेश में औद्योगिक वेस्ट के अलावा प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण शहरों और कस्बों से निकलने वाला कूड़ा कचरा है।
उन्होंने कहा कि हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा सभी छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाईयों के मालिकों को अपने उद्योगों में पर्याप्त क्षमता के एफ्यूलैंट ट्रीटमेंट प्लांटों का स्तर बढ़ाने के निर्देश दिए गए है। यदि किसी उद्योग में विभाग के मापदंडों के अनुसार ट्रीटमेंट प्लांट नहीं पाए जाते तो उसके खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाएगी।
उन्होंने बताया कि शहरों में स्थापित अस्पतालों, पैथोलॉजिकल लैब व अन्य स्थानों से निकलने वाले बायोमैडीकल गैस के डिस्पोजल के लिए भी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा कुछ पार्टियों को अनापत्ति प्रमाण पत्र दिया गया है। इन पार्टियों द्वारा बायोमैडीकल वेस्ट का डिस्पोजल सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सभी अस्पतालों, नर्सिंग होम इत्यादि को निर्देश दिए गए है कि वे 31 जुलाई तक अपने-अपने प्रतिष्ठानों में बायोमैडीकल वेस्ट स्टोर करने के लिए इंतजाम करें, यदि कोई संस्थान या प्रतिष्ठान इन मापदंडों पर खरा नहीं उतरेगा तो उसके खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जाएगी।
श्री चहल ने बताया कि प्रदेश में पेंट, रंग रोगन की फैक्टरियों से निकलने वाले वेस्ट के प्रबंधन के लिए विभाग द्वारा हेम्स नामक कंपनी से समझौता किया गया है। यह कंपनी फरीदाबाद जिले के पाली गांव में हजर्ड देश प्लांट लगाएगी। इस प्रकार के वेस्ट को अप्रभावित करके जमीन के अंदर दबाया जाएगा और उस जमीन के ऊपर पार्क जैसी जगह विकसित की जाएगी। उन्होंने कहा कि हरियाणा में पॉलीथीन के प्रयोग पर पूर्णत: प्रतिबंध लगाया गया है। पॉलीथीन के प्रयोग पर विभाग द्वारा पूरी सख्ताई बरती जा रही है। प्रदेश में विभागीय मापदंडों के खिलाफ पॉलीथीन का प्रयोग करने पर 800 से भी अधिक लोगों के चालान किए जा चुके है। सिरसा जिला में तीन दर्जन से भी अधिक लोगों के चालान किए गए है।
उन्होंने कचरा प्रबंधन संयंत्र का कार्य देख रही कंपनी के अधिकारियों से कहा कि वे विभिन्न प्रकार के कचरे की छिटाई करके खाद तैयार करे, तभी उनकी खाद की बिक्री हो पाएगी। उन्होंने कहा कि इस प्लांट में कुछ कमियां पाई गई इसीलिए अधिकारियों को निर्देश दिए है कि वे इसे शीघ्र दुरुस्त करवाए जिससे आसपास के क्षेत्र में किसी प्रकार का प्रदूषण न फैले।
श्रीमती सोनिया गांधी ने दूरभाष पर हुड्डा से बाढ़ एवं राहत कार्यों की जानकारी हासिल
चण्डीगढ़-9 जुलाई- संयुक्त प्रगतिशील गठबन्धन की चेयरपर्सन श्रीमती सोनिया गांधी ने आज दूरभाष पर हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा से राज्य के कुछ जिलों में आई बाढ़ एवं राहत कार्यों की जानकारी हासिल की। उन्होंने राज्य में आई इस प्राकृतिक आपदा पर अपनी चिन्ता भी व्यक्त की।
मुख्यमंत्री श्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने राहत एवं बचाव कार्यों पर निगरानी रखने के लिए अपने मंत्रिमण्डल के सदस्यों को जिम्मेवारी सौंपी है। वित्त, वन एवं पर्यावरण मंत्री कै0 अजय सिंह यादव तथा मुख्य संसदीय सचिव श्री धर्मवीर को कुरूक्षेत्र जिले की, जन स्वास्थ्य अभियान्त्रिकी एवं संसदीय कार्य मंत्री श्री रणदीप सिंह सुरजेवाला व मुख्य संसदीय सचिव श्री प्रहलाद सिंह गिल्लाखेड़ा को कैथल जिले की तथा स्वास्थ्य, शिक्षा एवं समाज कल्याण मंत्री श्रीमती गीता भुक्कल व मुख्य संसदीय सचिव राव दान सिंह को अम्बाला जिले में बाढ़ राहत एवं बचाव कार्यों की देखरेख की जिम्मेवारी सौंपी है।
हरियाणा लोक निर्माण (भवन एवं सड़कें) विभाग के प्रमुख अभियन्ता श्री महेश कुमार ने आज कहा है कि बाढ़ से क्षतिग्रस्त हुए अम्बाला-कैथल मार्ग की आवश्यक मरम्मत की गई है और आज सायं 7 बजे तक हल्के वाहनों के लिए इसे खोल दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि पानी उतरने के बाद 15 दिनों के अन्दर-अन्दर राजमार्ग सड़कों की मरम्मत का कार्य पूरा कर लिया जाएगा। प्रमुख जिला सड़कों का कार्य एक महीने के अन्दर-अन्दर पूरा किया जाएगा।
मुख्यमंत्री श्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने राहत एवं बचाव कार्यों पर निगरानी रखने के लिए अपने मंत्रिमण्डल के सदस्यों को जिम्मेवारी सौंपी है। वित्त, वन एवं पर्यावरण मंत्री कै0 अजय सिंह यादव तथा मुख्य संसदीय सचिव श्री धर्मवीर को कुरूक्षेत्र जिले की, जन स्वास्थ्य अभियान्त्रिकी एवं संसदीय कार्य मंत्री श्री रणदीप सिंह सुरजेवाला व मुख्य संसदीय सचिव श्री प्रहलाद सिंह गिल्लाखेड़ा को कैथल जिले की तथा स्वास्थ्य, शिक्षा एवं समाज कल्याण मंत्री श्रीमती गीता भुक्कल व मुख्य संसदीय सचिव राव दान सिंह को अम्बाला जिले में बाढ़ राहत एवं बचाव कार्यों की देखरेख की जिम्मेवारी सौंपी है।
हरियाणा लोक निर्माण (भवन एवं सड़कें) विभाग के प्रमुख अभियन्ता श्री महेश कुमार ने आज कहा है कि बाढ़ से क्षतिग्रस्त हुए अम्बाला-कैथल मार्ग की आवश्यक मरम्मत की गई है और आज सायं 7 बजे तक हल्के वाहनों के लिए इसे खोल दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि पानी उतरने के बाद 15 दिनों के अन्दर-अन्दर राजमार्ग सड़कों की मरम्मत का कार्य पूरा कर लिया जाएगा। प्रमुख जिला सड़कों का कार्य एक महीने के अन्दर-अन्दर पूरा किया जाएगा।
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शॉपिंग कॉम्पलैक्स में वाणिज्यिक स्थलों की सार्वजनिक नीलामी 3 अगस्त को
चण्डीगढ़-9 जुलाई- हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं ढांचागत विकास निगम द्वारा औद्योगिक मॉडल टाऊनशिप (आईएमटी) मानेसर के सैक्टर-1 के शॉपिंग कॉम्पलैक्स में वाणिज्यिक स्थलों की सार्वजनिक नीलामी 3 अगस्त, 2010 को की जाएगी।
निगम के एक प्रवक्ता ने आज यहाँ इस सम्बन्ध में जानकारी देते हुए बताया कि इनमें बेसमैंट सहित 14 बूथ व बेसमैंट सहित 10-10 दो-मंजिले व तीन-मंजिले शॉप-कम-ऑफिस के स्थल शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि कानूनी रूप से अधिकार प्राप्त कोई भी व्यक्ति बोली में भाग ले सकता है। इच्छुक पार्टियों को बोली में भाग लेने के लिए अपने नाम के पंजीकरण के समय 2.50 लाख रुपये का बैंक ड्राफ्ट, जो एचएसआईआईडीसी के पक्ष में मानेसर में देय हो, जमा करवाना होगा। असफल बोलीदाताओं की बयाना राशि बोली बन्द होने के बाद वापस लौटा दी जाएगी। उन्होंने बताया कि अधिक जानकारी के लिए निगम के पंचकूला, आईएमटी मानेसर तथा सी-8, बाबा खडग़सिंह मार्ग, नई दिल्ली कार्यालय में सम्पर्क किया जा सकता है।
क्रमांक-2010
निगम के एक प्रवक्ता ने आज यहाँ इस सम्बन्ध में जानकारी देते हुए बताया कि इनमें बेसमैंट सहित 14 बूथ व बेसमैंट सहित 10-10 दो-मंजिले व तीन-मंजिले शॉप-कम-ऑफिस के स्थल शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि कानूनी रूप से अधिकार प्राप्त कोई भी व्यक्ति बोली में भाग ले सकता है। इच्छुक पार्टियों को बोली में भाग लेने के लिए अपने नाम के पंजीकरण के समय 2.50 लाख रुपये का बैंक ड्राफ्ट, जो एचएसआईआईडीसी के पक्ष में मानेसर में देय हो, जमा करवाना होगा। असफल बोलीदाताओं की बयाना राशि बोली बन्द होने के बाद वापस लौटा दी जाएगी। उन्होंने बताया कि अधिक जानकारी के लिए निगम के पंचकूला, आईएमटी मानेसर तथा सी-8, बाबा खडग़सिंह मार्ग, नई दिल्ली कार्यालय में सम्पर्क किया जा सकता है।
क्रमांक-2010
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औद्योगिकीय भूखण्डों के आबंटन के लिए आवेदन आमन्त्रित
चण्डीगढ़-9 जुलाई- हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं ढांचागत विकास निगम द्वारा अपनी करनाल, साहा तथा नरवाना औद्योगिक सम्पदाओं में औद्योगिकीय भूखण्डों के आबंटन के लिए आवेदन आमन्त्रित किए हैं।
निगम के एक प्रवक्ता ने आज यहाँ इस सम्बन्ध में जानकारी देते हुए बताया कि सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ पूर्ण रूप से भरे हुए आवेदन 31 अगस्त, 2010 तक निगम के कार्यालय में पहुँच जाने चाहिएं। उन्होंने बताया कि आवेदन 100 रुपये के नकद भुगतान से निगम के कार्यालय या निगम की वैबसाईट 222.द्धह्यद्बद्बस्रष्.शह्म्द्द से डाऊनलोड किए जा सकते हैं।
प्रवक्ता ने बताया कि इनमें करनाल में विभिन्न आकार के कुल 54, साहा में 60 तथा नरवाना में 171 प्लॉट होंगे। उन्होंने बताया कि हरियाणा अधिवासी विकलांग श्रेणी के उद्यमकर्ताओं के लिए प्लाटों में दो प्रतिशत तक का आरक्षण होगा। यह आरक्षण उन्हें विकलांग व्यक्तियों (समान अवसर, अधिकार की सुरक्षा और पूर्ण भागीदारी) अधिनियम-1995 के तहत दिया जायेगा। प्लॉट आबंटन समिति का निर्णय अन्तिम होगा और इसके विरूद्घ कोई अपील नहीं की जा सकेगी। प्लॉटों का आबंटन ''जहाँ है, जैसे हैÓÓ आधार पर किया जाएगा।
निगम के एक प्रवक्ता ने आज यहाँ इस सम्बन्ध में जानकारी देते हुए बताया कि सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ पूर्ण रूप से भरे हुए आवेदन 31 अगस्त, 2010 तक निगम के कार्यालय में पहुँच जाने चाहिएं। उन्होंने बताया कि आवेदन 100 रुपये के नकद भुगतान से निगम के कार्यालय या निगम की वैबसाईट 222.द्धह्यद्बद्बस्रष्.शह्म्द्द से डाऊनलोड किए जा सकते हैं।
प्रवक्ता ने बताया कि इनमें करनाल में विभिन्न आकार के कुल 54, साहा में 60 तथा नरवाना में 171 प्लॉट होंगे। उन्होंने बताया कि हरियाणा अधिवासी विकलांग श्रेणी के उद्यमकर्ताओं के लिए प्लाटों में दो प्रतिशत तक का आरक्षण होगा। यह आरक्षण उन्हें विकलांग व्यक्तियों (समान अवसर, अधिकार की सुरक्षा और पूर्ण भागीदारी) अधिनियम-1995 के तहत दिया जायेगा। प्लॉट आबंटन समिति का निर्णय अन्तिम होगा और इसके विरूद्घ कोई अपील नहीं की जा सकेगी। प्लॉटों का आबंटन ''जहाँ है, जैसे हैÓÓ आधार पर किया जाएगा।
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बाढ़ से प्रभावित चार जिलों में नियन्त्रण कक्ष स्थापित
चण्डीगढ़,9 जुलाई- हरियाणा सरकार ने प्रदेश के बाढ़ से प्रभावित चार जिलों नामत: अम्बाला, कुरूक्षेत्र, कैथल तथा यमुनानगर में किसी भी प्रकार की सहायता व अन्य जानकारी के लिए सम्बन्धित जिलों के मुख्यालयों में नियन्त्रण कक्ष स्थापित किए हैं।
एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि इनमें अम्बाला जिले के लिए जिला राजस्व अधिकारी को मोबाइल संख्या 8059444007, उपायुक्त आवास 2530401 व 2552200 पर सम्पर्क किया जा सकता है। इसी प्रकार, कुरूक्षेत्र जिले के सम्बन्ध में जिला राजस्व अधिकारी से मोबाइल नं0 94661120965, उपायुक्त कार्यालय से 220271, 220935 व 221035 पर सम्पर्क किया जा सकता है। कैथल उपायुक्त कार्यालय से दूरभाष संख्या 224240, 234528, 222489 तथा यमुनानगर जिले के उपायुक्त कार्यालय से 237801 पर सम्पर्क किया जा सकता है।
क्रमांक-2010
एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि इनमें अम्बाला जिले के लिए जिला राजस्व अधिकारी को मोबाइल संख्या 8059444007, उपायुक्त आवास 2530401 व 2552200 पर सम्पर्क किया जा सकता है। इसी प्रकार, कुरूक्षेत्र जिले के सम्बन्ध में जिला राजस्व अधिकारी से मोबाइल नं0 94661120965, उपायुक्त कार्यालय से 220271, 220935 व 221035 पर सम्पर्क किया जा सकता है। कैथल उपायुक्त कार्यालय से दूरभाष संख्या 224240, 234528, 222489 तथा यमुनानगर जिले के उपायुक्त कार्यालय से 237801 पर सम्पर्क किया जा सकता है।
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गुरुवार, 8 जुलाई 2010
सिविल अस्पताल में फैली अव्यवस्था को लेकर ग्रामीण भडके
डबवाली-चौटाला गांव में एक ही परिवार के 6 जनों की मौत की लोमहर्षक घटना के बाद वहां के सिविल अस्पताल में फैली अव्यवस्था को लेकर ग्रामीण भड़क गये। उन्होंने अस्पताल में से चिकित्सकों को बाहर निकाल कर अस्पताल के गेट को बंद कर दिया और वहां पर धरना लगा कर बैठ गये। चार घंटे बाद मौके पर पहुंचे डबवाली के तहसीलदार राजेंद्र कुमार और डिप्टी सीएमओं डा. गौर शंकर सोमानी ने लोगों की शिकायतें सुनने के बाद उचित कार्यवाही किये जाने का आश्वासन दे कर लोगों को शांत किया और अस्पताल खुलवाया। पूर्व विधायक डा. सीता राम ने आरोप लगाया कि चौटाला गांव का सिविल अस्पताल रैफर अस्पताल बन गया है। यहां पर फैली अव्यवस्था के कारण अस्पताल कम और कबूतर खाना ज्यादा बन गया है। ग्रामीणों को छोटे से छोटे उपचार के लिए डबवाली या संगरिया के निजी चिकित्सकों के पास जाना पड़ता है। कुछ कर्मचारी अस्पताल में हाजरी लगा कर घरों को लौट जाते है। आपात सेवाओं का भी बूरा हाल है। उन्होंने बताया कि जब हादसे के शिकार इस परिवार को सिविल अस्पताल में लाया गया तो एक स्टाफ नर्स ही मौजूद थी बाद में बुलाये जाने पर चिकित्सक ओम प्रकाश ने आ कर इनका उपचार आरंभ किया इसके बाद एक अन्य चिकित्सक कुलविंद्र कौर वहां पर पहुंची। गांव के पीला राशन कार्ड धारक लाल चंद ने सिविल अस्पताल में तैनात चिकित्सक कुलविंद्र कौर पर उसका उपचार न करने का आरोप लगाया। डिप्टी सीएमओं डॉ. गौरी शंकर तथा तहसीलदार राजेंद्र सिंह ने जब सिविल अस्पताल का निरीक्षण किया तो अस्पताल की लैब में रखे गये फ्रिज में सैंपल और अन्य साजो सामान की बजाय खाना रखा गया मिला है और यही हाल अन्य परिसरों में था। बेड टूटे हुए और दागदार बेडशीट और भवन के अंदर ही जमा र्इंटों और रेत के ढेर वहां की कारगुजारियों की पोल खोल रहे थे। का. प्रहलाद राय भारू खेड़ा और भाला राम भारू खेड़ा ने आरोप लगाया कि सरकारी अस्पताल के कर्मचारियों की कार्यप्रणाली जनता के लिए जानलेवा सिद्ध हो रही है। उन्होंने कहा कि अधिकारी वर्ग भी पर्याप्त ध्यान नहीं दे रहा है जिससे जनता त्रासद है। उप जिला चिकित्सा अधिकारी डा.गौरी शंकर ने पूरे मामले की जांच करवाये जाने का आश्वासन देते हुए ड्यूटी पर तैनात चिकित्सकों का चार्ट अस्पताल के नोटिस बोर्ड पर लगाने और अस्पताल परिसर में उपलब्ध दवाईयों का मात्रा का विवरण भी उपलब्ध करवाने के आदेश दिये। उन्होंने कहा कि कार्य में कौताही किसी भी कीमत पर सहन नहीं होगी। वहीं पूर्व विधायक ने तहसीलदार राजेंद्र कुमार से पीडि़त परिवार की आर्थिक सहायता दी जाने की गुजारिश की। बाद में तहसीलदार राजेंद्र कुमार पीडि़त परिवार के घर पर गये और उनके परिजनों को ढांढस बंधवाते हुए हर संभव सहायता देने का आश्वासन दिया।
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दिलदहला देने वाले हादसे में वीरवार को छटे घायल,कालू राम ने दम तोड़ा
डबवाली-उपमण्डल के गांव चौटाला में दिलदहला देने वाले हादसे में वीरवार को छटे घायल और परिवार के मुखिया कालू
राम ने भी जख्मों
को ताप न सहते हुए सिरसा के सिविल अस्पताल में दम तोड़ दिया। इस हादसे में इस परिवार के पांच जने पहले ही काल का ग्रास बन चुके है जिसमें कालू राम की बुधवार पत्नी राम मुर्ति, लड़की कविता, सोना, लड़के सुनील और गोविंद शामिल है। कालू राम को गंभीर अवस्था में डबवाली से सिरसा के सिविल अस्पताल में बेहतर उपचार के लिए रेफर किया गया था। वीरवार प्रात: उन्होंने अंतिम सांस ली। कालू राम और उसकी पुत्री सोना रानी का पोस्टमार्टम सिरसा के सिविल अस्पताल में किया गया। जबकि राममुर्ति, कविता, गोविंद और सुनील का पोस्टमार्टम डबवाली के सिविल अस्पताल में करवाकर शव उनके परिजनों को सौंप दिए गए हैं। डबवाली सदर पुलिस ने इस हादसे में कालू राम के पिता भजन लाल की शिकायत पर कालू राम के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया है। इस मामले में भजन लाल ने अपने ब्यान में कहा है कि उसके पुत्र कालू राम चाय में सल्फास की गोलियां मिला कर अपनी पत्नी राम मुर्ति लड़के सुनील व गोविंद और पुत्रियां कविता तथा सोना को पिला दी जिससे उनकी मौत हो गई। उन्होंने इस हादसे के कारण को तो खुलासा नहीं बताया। लेकिन बताया जाता है कि घरेलू कलह इस हादसे का कारण बना। तीन दिन कालू राम और विमला देवी में जमकर तकरार हुई जो इस हादसे का कारण बनी। कालू राम के चचेरे भाई महावीर सिंह ने बताया कि पूरे परिवार को जहर देने के बाद उसने की घटना की जानकारी स्वयं उसको दी और बताया कि वह तो अपना काम कर आया है आगे तू संभाल लेना।
राम ने भी जख्मों
को ताप न सहते हुए सिरसा के सिविल अस्पताल में दम तोड़ दिया। इस हादसे में इस परिवार के पांच जने पहले ही काल का ग्रास बन चुके है जिसमें कालू राम की बुधवार पत्नी राम मुर्ति, लड़की कविता, सोना, लड़के सुनील और गोविंद शामिल है। कालू राम को गंभीर अवस्था में डबवाली से सिरसा के सिविल अस्पताल में बेहतर उपचार के लिए रेफर किया गया था। वीरवार प्रात: उन्होंने अंतिम सांस ली। कालू राम और उसकी पुत्री सोना रानी का पोस्टमार्टम सिरसा के सिविल अस्पताल में किया गया। जबकि राममुर्ति, कविता, गोविंद और सुनील का पोस्टमार्टम डबवाली के सिविल अस्पताल में करवाकर शव उनके परिजनों को सौंप दिए गए हैं। डबवाली सदर पुलिस ने इस हादसे में कालू राम के पिता भजन लाल की शिकायत पर कालू राम के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया है। इस मामले में भजन लाल ने अपने ब्यान में कहा है कि उसके पुत्र कालू राम चाय में सल्फास की गोलियां मिला कर अपनी पत्नी राम मुर्ति लड़के सुनील व गोविंद और पुत्रियां कविता तथा सोना को पिला दी जिससे उनकी मौत हो गई। उन्होंने इस हादसे के कारण को तो खुलासा नहीं बताया। लेकिन बताया जाता है कि घरेलू कलह इस हादसे का कारण बना। तीन दिन कालू राम और विमला देवी में जमकर तकरार हुई जो इस हादसे का कारण बनी। कालू राम के चचेरे भाई महावीर सिंह ने बताया कि पूरे परिवार को जहर देने के बाद उसने की घटना की जानकारी स्वयं उसको दी और बताया कि वह तो अपना काम कर आया है आगे तू संभाल लेना।
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सरकार अपने नजदीकी व साहूकारों को 2700 परमिट देकर रोडवेज विभाग को बंद करना चाहती है -बैनीवाल
सिरसा 8 जुलाई-आज रोडवेज प्रांगण में डिपो प्रधान गुरबख्श रंधावा की अध्यक्षता में कार्यकारिणी की बैठक का आयोजन किया गया जिसका संचालन सचिव जयचन्द कम्बोज ने किया। बैठक में विशेष रूप से मुख्य वक्ता के रूप में हरियाणा रोडवेज कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के राज्य प्रधान जयप्रकाश बैनीवाल तथा राज्य महासचिव सरबत सिंह पूनियां उपस्थित थे।
कर्मचारियों को सम्बोधित करते हुए राज्य प्रधान जयप्रकाश बैनीवाल ने कहा कि हरियाणा की शत प्रतिशत जनता की पहली पसंद रोडवेज की सरकारी बसें ही हैं। सरकार यह सब कुछ जानते हुए भी अपने नजदीकी व साहूकारों को 2700 परमिट देकर रोडवेज विभाग को बंद करना चाहती है जिसे बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। महासचिव सरबत सिंह पूनियां ने अपने सम्बोधन में सरकार को चेतावनी दी कि यदि सरकार ने परमिट देने का ऐलान किया तो सभी कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे तथा रोडवेज का चक्का जाम किया जाएगा जिसकी सारी जिम्मेवारी सरकार की होगी। उन्होंने कर्मचारियों से एकजुट रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इस सम्बन्ध में संयुक्त कमेटी ने अपने सभी बंदोबस्त कर लिए हैं तथा टीमों का गठन कर लिया है जो गांव-गांव में जाकर लोगों के बीच सरकार की हठधर्मिता की चर्चा करेंगे, पंचायतों एवं छात्रों को प्राईवेट बस संचालकों की मनमर्जी से वाकिफ करवाएंगे तथा सरकार से 8 हजार नई बसों की मांग करेंगे जिससे 50 हजार बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा। इस अवसर पर जिला उपप्रधान माजोका ने कच्चे कर्मचारियों को तुरन्त पक्का करने तथा नए चालक-परिचालकों की तुरन्त भर्ती की मांग की ताकि रोडवेज का कार्य सुगम हो तथा जनता को बढिय़ा सुविधा मिल सके। बैठक में जिला प्रधान सोहन सिंह रंधावा, त्रिपाठी, चन्द्रशेखर धम्मी, गुरादित्ता कम्बोज बाजेकां, रतीराम साहुवाला, मदन लाल चावला, सुरजीत सिंह अरोड़ा, सतबीर सिंह, लाभ सिंह, अशोक कुमार, भूप सिंह मंगालिया, केवल कृष्ण गौड़, कुलबीर सिंह आदि कर्मचारी नेताओं ने भाग लिया।
कर्मचारियों को सम्बोधित करते हुए राज्य प्रधान जयप्रकाश बैनीवाल ने कहा कि हरियाणा की शत प्रतिशत जनता की पहली पसंद रोडवेज की सरकारी बसें ही हैं। सरकार यह सब कुछ जानते हुए भी अपने नजदीकी व साहूकारों को 2700 परमिट देकर रोडवेज विभाग को बंद करना चाहती है जिसे बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। महासचिव सरबत सिंह पूनियां ने अपने सम्बोधन में सरकार को चेतावनी दी कि यदि सरकार ने परमिट देने का ऐलान किया तो सभी कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे तथा रोडवेज का चक्का जाम किया जाएगा जिसकी सारी जिम्मेवारी सरकार की होगी। उन्होंने कर्मचारियों से एकजुट रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इस सम्बन्ध में संयुक्त कमेटी ने अपने सभी बंदोबस्त कर लिए हैं तथा टीमों का गठन कर लिया है जो गांव-गांव में जाकर लोगों के बीच सरकार की हठधर्मिता की चर्चा करेंगे, पंचायतों एवं छात्रों को प्राईवेट बस संचालकों की मनमर्जी से वाकिफ करवाएंगे तथा सरकार से 8 हजार नई बसों की मांग करेंगे जिससे 50 हजार बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा। इस अवसर पर जिला उपप्रधान माजोका ने कच्चे कर्मचारियों को तुरन्त पक्का करने तथा नए चालक-परिचालकों की तुरन्त भर्ती की मांग की ताकि रोडवेज का कार्य सुगम हो तथा जनता को बढिय़ा सुविधा मिल सके। बैठक में जिला प्रधान सोहन सिंह रंधावा, त्रिपाठी, चन्द्रशेखर धम्मी, गुरादित्ता कम्बोज बाजेकां, रतीराम साहुवाला, मदन लाल चावला, सुरजीत सिंह अरोड़ा, सतबीर सिंह, लाभ सिंह, अशोक कुमार, भूप सिंह मंगालिया, केवल कृष्ण गौड़, कुलबीर सिंह आदि कर्मचारी नेताओं ने भाग लिया।
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झाड़ली पावर प्लांट से बिजली उत्पादन ढाई माह में : दीपेंद्र
500 मेगावाट के लिए ब्वायलर लाईट अप हुआ
चण्डीगढ, 8 जुलाई-रोहतक संसदीय क्षेत्र के सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा है कि बिजली हब के रूप में विकसित हो रहे झाड़ली क्षेत्र में इंदिरा गांधी सुपर थर्मल पावर प्लांट से अगले ढाई माह में बिजली का उत्पादन शुरू हो जाएगा। उन्होंने बताया झज्जर जिले के झाड़ली क्षेत्र में 1500 (3&500)मेगावाट इंदिरा गांधी सुपर थर्मल पावर प्लांट की 500 मेगावाट की पहली इकाई का ब्वायलर लाईट अप कर दिया गया है जो इस पावर प्रोजेक्ट की निर्माण गतिविधियों में महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। सांसद ने कहा इस पावर प्लांट की पहली इकाई के ब्वायलर के लाईट अप होने से इसमें बिजली उत्पादन की प्रक्रिया की तकनीकी शैली से जांच होगी तथा करीब दो से ढाई माह के अंतराल में प्लांट की पहली इकाई बिजली उत्पादन(सिंक्रोनाइजेशन)के लिए तैयार हो जाएगी।
हुड्डा ने कहा कि बिजली उत्पादन की दिशा में आत्मनिर्भर होने जा रहे हरियाणा प्रदेश में विपक्षी नेताओं के पास बिजली के नाम पर राजनीति करने का कोई अवसर नहीं बचेगा चूंकि थोड़े ही समय बाद प्रदेश बिजली के मामले में पूरी तरह से स्वावलंबी होगी। सांसद ने बताया कि अरावली पावर कंपनी प्राइवेट लिमिटेड, एनटीपीसी, एचपीजीसीएल व आईपीजीसीएल के संयुक्त तत्वावधान में झाड़ली क्षेत्र में निर्माणाधीन 1500 मेगावाट का सुपर थर्मल पावर प्लांट प्रदेश के लोगों को बिजली की किल्लत से निजात दिलाने में हरियाणा सरकार का ठोस कदम है। जिसका स्वरूप अब प्रत्यक्ष रूप से सामने आना शुरू हो गया है।
दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि इंदिरा गांधी सुपर थर्मल पावर प्लांट की 500 मेगावाट की पहली इकाई के ब्वायलर के लाइट अप से ब्वायलर के हीट लेने, उसमें वायु व तैलिय पदार्थों सहित बिजली उत्पादन की प्रक्रिया की जांच हो जाएगी और करीब दो से ढाई माह पश्चात से इस इकाई से बिजली का उत्पादन मिलना शुरू हो जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट से संबंधित उच्चअधिकारियों से विभिन्न तकनीकी पहलुओं पर हुई बातचीत के बाद यह स्पष्ट है कि पावर प्लांट की 500-500 मेगावाट की दूसरी व तीसरी इकाई का निर्माण कार्य भी युद्ध स्तर पर चल रहा है और दूसरी इकाई का ब्वायलर लाईट अप अक्टूबर 2010 के पहले सप्ताह तक तथा तीसरी इकाई का ब्वायलर लाईट अप जनवरी 2011 तक कर दिया जाएगा जिसके दो-दो माह अंतराल के बीच ही इन इकाईयों से भी बिजली का उत्पादन शुरू हो जाएगा।
सांसद ने कहा कि झाड़ली के इंदिरा गांधी सुपर थर्मल पावर प्लांट की 500 मेगावाट की पहली इकाई से होने वाले बिजली उत्पादन के लिए बिजली संप्रेषण का भी कार्य पूरा कर लिया गया है ताकि उत्पादन के साथ ही उत्पादित बिजली का नियमित संप्रेषण सुनिश्चित हो सके। ब्वायलर लाईट अप से पहली इकाई का तकनीकी कार्य लगभग पूरा हो गया है और साथ-साथ दोनों अन्य इकाईयों में भी तकनीकी कार्य पूरा करने के लिए निर्माण कार्य तीव्रता से चल रहा है।
सांसद ने कहा कि प्रदेश से बिजली किल्लत को दूर करने की दिशा में जिस दृष्टिकोण से मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने थर्मल पावर प्लांट स्थापित कराने का सिलसिला शुरू किया था अब उसके सार्थक परिणाम भी सामने आने लगे हैं। उम्मीद की जानी चाहिए कि पांच हजार मेगावाट बिजली उत्पादन के लक्ष्य को हरियाणा प्रदेश शीघ्र पूरा कर लेगा। सांसद ने कहा कि बिजली उत्पादन परियोजनाओं के पूर्ण होने से जहां पूरे प्रदेश में बिजली आपूर्ति में महत्वपूर्ण सुधार होगा वहीं झाड़ली व खानपुर खुर्द के बिजली प्रोजेक्ट के 20 किलोमीटर के दायरे मेें आने वाले गांवों में 24 घंटे बिजली मुहैया होगी और झज्जर जिला विश्व के मानचित्र पर बिजली हब के रूप में अपनी पहचान कायम करेगा।
चण्डीगढ, 8 जुलाई-रोहतक संसदीय क्षेत्र के सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा है कि बिजली हब के रूप में विकसित हो रहे झाड़ली क्षेत्र में इंदिरा गांधी सुपर थर्मल पावर प्लांट से अगले ढाई माह में बिजली का उत्पादन शुरू हो जाएगा। उन्होंने बताया झज्जर जिले के झाड़ली क्षेत्र में 1500 (3&500)मेगावाट इंदिरा गांधी सुपर थर्मल पावर प्लांट की 500 मेगावाट की पहली इकाई का ब्वायलर लाईट अप कर दिया गया है जो इस पावर प्रोजेक्ट की निर्माण गतिविधियों में महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। सांसद ने कहा इस पावर प्लांट की पहली इकाई के ब्वायलर के लाईट अप होने से इसमें बिजली उत्पादन की प्रक्रिया की तकनीकी शैली से जांच होगी तथा करीब दो से ढाई माह के अंतराल में प्लांट की पहली इकाई बिजली उत्पादन(सिंक्रोनाइजेशन)के लिए तैयार हो जाएगी।
हुड्डा ने कहा कि बिजली उत्पादन की दिशा में आत्मनिर्भर होने जा रहे हरियाणा प्रदेश में विपक्षी नेताओं के पास बिजली के नाम पर राजनीति करने का कोई अवसर नहीं बचेगा चूंकि थोड़े ही समय बाद प्रदेश बिजली के मामले में पूरी तरह से स्वावलंबी होगी। सांसद ने बताया कि अरावली पावर कंपनी प्राइवेट लिमिटेड, एनटीपीसी, एचपीजीसीएल व आईपीजीसीएल के संयुक्त तत्वावधान में झाड़ली क्षेत्र में निर्माणाधीन 1500 मेगावाट का सुपर थर्मल पावर प्लांट प्रदेश के लोगों को बिजली की किल्लत से निजात दिलाने में हरियाणा सरकार का ठोस कदम है। जिसका स्वरूप अब प्रत्यक्ष रूप से सामने आना शुरू हो गया है।
दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि इंदिरा गांधी सुपर थर्मल पावर प्लांट की 500 मेगावाट की पहली इकाई के ब्वायलर के लाइट अप से ब्वायलर के हीट लेने, उसमें वायु व तैलिय पदार्थों सहित बिजली उत्पादन की प्रक्रिया की जांच हो जाएगी और करीब दो से ढाई माह पश्चात से इस इकाई से बिजली का उत्पादन मिलना शुरू हो जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट से संबंधित उच्चअधिकारियों से विभिन्न तकनीकी पहलुओं पर हुई बातचीत के बाद यह स्पष्ट है कि पावर प्लांट की 500-500 मेगावाट की दूसरी व तीसरी इकाई का निर्माण कार्य भी युद्ध स्तर पर चल रहा है और दूसरी इकाई का ब्वायलर लाईट अप अक्टूबर 2010 के पहले सप्ताह तक तथा तीसरी इकाई का ब्वायलर लाईट अप जनवरी 2011 तक कर दिया जाएगा जिसके दो-दो माह अंतराल के बीच ही इन इकाईयों से भी बिजली का उत्पादन शुरू हो जाएगा।
सांसद ने कहा कि झाड़ली के इंदिरा गांधी सुपर थर्मल पावर प्लांट की 500 मेगावाट की पहली इकाई से होने वाले बिजली उत्पादन के लिए बिजली संप्रेषण का भी कार्य पूरा कर लिया गया है ताकि उत्पादन के साथ ही उत्पादित बिजली का नियमित संप्रेषण सुनिश्चित हो सके। ब्वायलर लाईट अप से पहली इकाई का तकनीकी कार्य लगभग पूरा हो गया है और साथ-साथ दोनों अन्य इकाईयों में भी तकनीकी कार्य पूरा करने के लिए निर्माण कार्य तीव्रता से चल रहा है।
सांसद ने कहा कि प्रदेश से बिजली किल्लत को दूर करने की दिशा में जिस दृष्टिकोण से मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने थर्मल पावर प्लांट स्थापित कराने का सिलसिला शुरू किया था अब उसके सार्थक परिणाम भी सामने आने लगे हैं। उम्मीद की जानी चाहिए कि पांच हजार मेगावाट बिजली उत्पादन के लक्ष्य को हरियाणा प्रदेश शीघ्र पूरा कर लेगा। सांसद ने कहा कि बिजली उत्पादन परियोजनाओं के पूर्ण होने से जहां पूरे प्रदेश में बिजली आपूर्ति में महत्वपूर्ण सुधार होगा वहीं झाड़ली व खानपुर खुर्द के बिजली प्रोजेक्ट के 20 किलोमीटर के दायरे मेें आने वाले गांवों में 24 घंटे बिजली मुहैया होगी और झज्जर जिला विश्व के मानचित्र पर बिजली हब के रूप में अपनी पहचान कायम करेगा।
पूनिया को मातृशोक,जाट मंच ने जताया शोक
सिरसा, 8 जुलाई।युवा जाट विकास मंच के वरिष्ठ सदस्य जयसिंह पूनिया की माता के निधन पर मंच द्वारा जाट धर्मशाला में शोक सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मंच के प्रधान महेन्द्र भाकर, संरक्षक अमर सिंह घोटिया, कोषाध्यक्ष मोहन लाल पूनिया, सचिव राजेन्द्र कड़वासरा, प्रवक्ता डॉ. दिनेश सिद्धू, रणजीत जाखड़, रामकुमार ज्याणी, धर्मपाल ज्याणी, सरपंच रामनिवास जांदू, हेतराम सहारण, रामेश्वर भाकर, सुभाष सींवर, सुभाष खोथ, महेन्द्र घणघस, एडवोकेट वेदप्रकाश मैहला, सुरेन्द्र जाखड़ आदि ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
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अंबाला के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को 20 जुलाई तक मुख्यालय न छोडने के आदेश
चंडीगढ़--अम्बाला प्रशासन द्वारा अंबाला के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को 20 जुलाई तक मुख्यालय न छोडने के आदेश दिए हैं ताकि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में चल रहे राहत कार्य सुचारू रखे जा सकें। इन आदेशों की अवहेलना करने वाले अधिकारी व कर्मचारी के विरूद्ध सख्त कार्यवाही अमल में लाई जायेगी और किसी विशेष परिस्थिति में उपायुक्त कार्यालय से अग्रिम अनुमति लेकर ही मुख्यालय छोड़ा जा सकता है। अंबाला जिला प्रशासन ने जनता से अनुरोध किया कि जिस क्षेत्र में बाढ़ के कारण मानव जीवन और पशुधन का नुकसान हुआ है, उसके लिए सम्बन्धित व्यक्ति उपायुक्त कैम्प कार्यालय में सहायता हेतु आवेदन कर सकते हैं।
इस संबंध में एक सरकारी प्रवक्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि मानव जीवन व पशुधन के नुकसान के लिए राज्य सरकार की योजना के तहत सम्बन्धित व्यक्तियों को मुआवजा दिया जायेगा। इसके लिए जिला राजस्व अधिकारी को निर्देश दिए गए हैं कि वह राजस्व विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों के माध्यम से जिला के जिन क्षेत्रों में बाढ़ आई है, वहां फसलों और मकानों के नुकसान की भी सूचना एकत्रित करें ताकि सरकार की योजना के तहत इस तरह के नुकसान के मुआवजे हेतु आवश्यक कार्यवाही अमल में लाई जा सके।
जिला प्रशासन ने सभी सामाजिक व धार्मिक संस्थाओं से अनुरोध किया कि वे बाढ़ प्रभावित लोगों को भोजन व पानी उपलब्ध करवाने में प्रशासन का सहयोग करें। प्रशासन ने बाढ़ पीडि़त लोगों की सेवा में गत तीन दिनों से जुटे हुए शिरोमणी गुरूद्वारा प्रबन्धक कमेटी और गीता गोपाल संस्था के पदाधिकारियों का आभार व्यक्त किया और आग्रह किया है कि स्थिति सामान्य होने तक बाढ़ पीडि़त लोगों के लिए खाने की सेवा जारी रखें। बाढ़ पीडि़त लोगों के लिए गुरूद्वारा मंजी साहिब, बादशाही बाग,लखनौर साहिब, पंजोखरा साहिब, भानोखेड़ी में लंगर तैयार किया जा रहा है और शिरोमणी गुरूद्वारा प्रबन्धक कमेटी के प्रयासों से गुरूद्वारा नाडा साहब व गुरूद्वारा दुख निवारण साहिब पटियाला से भी लंगर भिजवाया जा रहा है।
इसके अलावा, अंबाला जिला प्रशासन द्वारा अम्बाला शहर व अम्बाला छावनी के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को भोजन, पानी व अन्य आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करने के लिए नोडल अधिकारी तैनात किए हैं। अम्बाला छावनी क्षेत्र में अतिरिक्त उपायुक्त श्रीमति रेनू फुलिया और अम्बाला शहर में एसडीएम मुकेश आहूजा को नोडल अधिकारी बनाया गया है।
प्रशासन द्वारा धार्मिक और सामाजिक संगठनों द्वारा तैयार किए जा रहे खाने के सही वितरण के लिए नगराधीश अरविन्द शर्मा को नोडल अधिकारी बनाया है। शिरोमणी गुरूद्वारा प्रबन्धक कमेटी के सदस्य गुरदीप सिंह भानोखेड़ी को गुरूद्वारों के माध्यम से बाढ़ पीडि़त लोगों के लिए खाना उपलब्ध करवाने का अनुरोध किया गया है। प्रशासन ने अन्य सामाजिक संगठनों से भी इस कार्य में सहयोग का अनुरोध किया और कहा कि वह अपने नजदीकी बाढ़ पीडि़त इलाकों में लोगों को इस तरह के खाने की आपूर्ति में सहयोग दें।
जनस्वास्थ्य विभाग को कल दोपहर तक शहर के सभी क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गये है और कहा गया है कि जब तक सभी क्षेत्रों में नलकूपों और नहरी पेयजल सिस्टम से पानी आपूर्ति संभव न हो पाए, तब तक पानी के टैंकर से प्रत्येक व्यक्ति तक पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की जाये। अम्बाला शहर और छावनी में 125 हॉर्सपॉवर के 12 जनरेटर स्थापित किए गए हैं जिनके सहयोग से पेयजल नलकूप चलाकर सम्बन्धित क्षेत्रों में पानी वितरित करने के साथ साथ अम्बाला शहर और छावनी में 12-12 टैंकरों से पानी आपूर्ति की जा रही है और प्रत्येक टैंकर दिन में कम से कम आठ चक्कर लगायेगा। उन्होने उपायुक्त को यह जानकारी भी दी कि अम्बाला शहर में नहरी पेयजल आधारित पानी आपूर्ति आरंभ की जा चुकी है। इसी प्रकार जनस्वास्थ्य और नगर निगम के अधिकारियों को जलभराव वाले क्षेत्रों से पानी तुरंत निकलवाने के निर्देश दिए गये है।
प्रशासन पानी से उत्पन्न होने वाली बीमारियों के बचाव के लिए आवश्यक दवाईंयों के 5000 पैकेट तैयार करवा रहा है ताकि आवश्यकता अनुसार प्रभावित क्षेत्रों में इनका वितरण किया जा सके। जिन क्षेत्रों में बाढ़ के कारण पशु इत्यादि मरने की सूचना है, उन्हे नगर निगम के अधिकारी तुरंत उठवाना सुनिश्चित किया जा रहा है ताकि मरे पशुओं के कारण गंदगी और बदबू न फैलने पाए। इसी प्रकार ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषकर नग्गल क्षेत्र में लोगों को खाना और पीने का पानी उपलब्ध करवाने के लिए भी निर्देश दिए गए।
प्रशासन द्वारा बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के लोगों से अपील की है कि वह पानी को ऊबालकर पीयें। इसके अतिरिक्त जिन घरों में अभी तक पानी है, वे बिजली के स्विच इत्यादि का सावधानी से प्रयोग करें ताकि किसी प्रकार के जानी नुकसान से बचा जा सके। लोगों से अनुरोध किया गया है कि वह पके हुए भोजन का भंडारण न करें क्योंकि बासा भोजन बीमारी का कारण हो सकता है और प्रशासन द्वारा सभी बाढ पीडि़त लोगों को प्रतिदिन ताजा खाना उपलब्ध करवाया जायेगा। प्रशासन ने लोगों को प्राकृतिक संकट की इस घड़ी में धैर्य बनाए रखने, अफवाहों से सावधान रहने और समाज विरोधी विचाराधारा के लोगों की भडकाने वाली गतिविधियों से सचेत रहने का भी अनुरोध किया है।
इस संबंध में एक सरकारी प्रवक्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि मानव जीवन व पशुधन के नुकसान के लिए राज्य सरकार की योजना के तहत सम्बन्धित व्यक्तियों को मुआवजा दिया जायेगा। इसके लिए जिला राजस्व अधिकारी को निर्देश दिए गए हैं कि वह राजस्व विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों के माध्यम से जिला के जिन क्षेत्रों में बाढ़ आई है, वहां फसलों और मकानों के नुकसान की भी सूचना एकत्रित करें ताकि सरकार की योजना के तहत इस तरह के नुकसान के मुआवजे हेतु आवश्यक कार्यवाही अमल में लाई जा सके।
जिला प्रशासन ने सभी सामाजिक व धार्मिक संस्थाओं से अनुरोध किया कि वे बाढ़ प्रभावित लोगों को भोजन व पानी उपलब्ध करवाने में प्रशासन का सहयोग करें। प्रशासन ने बाढ़ पीडि़त लोगों की सेवा में गत तीन दिनों से जुटे हुए शिरोमणी गुरूद्वारा प्रबन्धक कमेटी और गीता गोपाल संस्था के पदाधिकारियों का आभार व्यक्त किया और आग्रह किया है कि स्थिति सामान्य होने तक बाढ़ पीडि़त लोगों के लिए खाने की सेवा जारी रखें। बाढ़ पीडि़त लोगों के लिए गुरूद्वारा मंजी साहिब, बादशाही बाग,लखनौर साहिब, पंजोखरा साहिब, भानोखेड़ी में लंगर तैयार किया जा रहा है और शिरोमणी गुरूद्वारा प्रबन्धक कमेटी के प्रयासों से गुरूद्वारा नाडा साहब व गुरूद्वारा दुख निवारण साहिब पटियाला से भी लंगर भिजवाया जा रहा है।
इसके अलावा, अंबाला जिला प्रशासन द्वारा अम्बाला शहर व अम्बाला छावनी के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को भोजन, पानी व अन्य आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करने के लिए नोडल अधिकारी तैनात किए हैं। अम्बाला छावनी क्षेत्र में अतिरिक्त उपायुक्त श्रीमति रेनू फुलिया और अम्बाला शहर में एसडीएम मुकेश आहूजा को नोडल अधिकारी बनाया गया है।
प्रशासन द्वारा धार्मिक और सामाजिक संगठनों द्वारा तैयार किए जा रहे खाने के सही वितरण के लिए नगराधीश अरविन्द शर्मा को नोडल अधिकारी बनाया है। शिरोमणी गुरूद्वारा प्रबन्धक कमेटी के सदस्य गुरदीप सिंह भानोखेड़ी को गुरूद्वारों के माध्यम से बाढ़ पीडि़त लोगों के लिए खाना उपलब्ध करवाने का अनुरोध किया गया है। प्रशासन ने अन्य सामाजिक संगठनों से भी इस कार्य में सहयोग का अनुरोध किया और कहा कि वह अपने नजदीकी बाढ़ पीडि़त इलाकों में लोगों को इस तरह के खाने की आपूर्ति में सहयोग दें।
जनस्वास्थ्य विभाग को कल दोपहर तक शहर के सभी क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गये है और कहा गया है कि जब तक सभी क्षेत्रों में नलकूपों और नहरी पेयजल सिस्टम से पानी आपूर्ति संभव न हो पाए, तब तक पानी के टैंकर से प्रत्येक व्यक्ति तक पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की जाये। अम्बाला शहर और छावनी में 125 हॉर्सपॉवर के 12 जनरेटर स्थापित किए गए हैं जिनके सहयोग से पेयजल नलकूप चलाकर सम्बन्धित क्षेत्रों में पानी वितरित करने के साथ साथ अम्बाला शहर और छावनी में 12-12 टैंकरों से पानी आपूर्ति की जा रही है और प्रत्येक टैंकर दिन में कम से कम आठ चक्कर लगायेगा। उन्होने उपायुक्त को यह जानकारी भी दी कि अम्बाला शहर में नहरी पेयजल आधारित पानी आपूर्ति आरंभ की जा चुकी है। इसी प्रकार जनस्वास्थ्य और नगर निगम के अधिकारियों को जलभराव वाले क्षेत्रों से पानी तुरंत निकलवाने के निर्देश दिए गये है।
प्रशासन पानी से उत्पन्न होने वाली बीमारियों के बचाव के लिए आवश्यक दवाईंयों के 5000 पैकेट तैयार करवा रहा है ताकि आवश्यकता अनुसार प्रभावित क्षेत्रों में इनका वितरण किया जा सके। जिन क्षेत्रों में बाढ़ के कारण पशु इत्यादि मरने की सूचना है, उन्हे नगर निगम के अधिकारी तुरंत उठवाना सुनिश्चित किया जा रहा है ताकि मरे पशुओं के कारण गंदगी और बदबू न फैलने पाए। इसी प्रकार ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषकर नग्गल क्षेत्र में लोगों को खाना और पीने का पानी उपलब्ध करवाने के लिए भी निर्देश दिए गए।
प्रशासन द्वारा बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के लोगों से अपील की है कि वह पानी को ऊबालकर पीयें। इसके अतिरिक्त जिन घरों में अभी तक पानी है, वे बिजली के स्विच इत्यादि का सावधानी से प्रयोग करें ताकि किसी प्रकार के जानी नुकसान से बचा जा सके। लोगों से अनुरोध किया गया है कि वह पके हुए भोजन का भंडारण न करें क्योंकि बासा भोजन बीमारी का कारण हो सकता है और प्रशासन द्वारा सभी बाढ पीडि़त लोगों को प्रतिदिन ताजा खाना उपलब्ध करवाया जायेगा। प्रशासन ने लोगों को प्राकृतिक संकट की इस घड़ी में धैर्य बनाए रखने, अफवाहों से सावधान रहने और समाज विरोधी विचाराधारा के लोगों की भडकाने वाली गतिविधियों से सचेत रहने का भी अनुरोध किया है।
बुधवार, 7 जुलाई 2010
बिजली के करंट के कारण मारे गये तीन व्यक्तियों के परिजनों को सरकार की ओर से 3-3लाख रूपए की आर्थिक सहायता
चंडीगढ़, 7 जुलाई- हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने आज हाल ही में तेज बारिश के चलते अंबाला में आई बाढ़ के दौरान बिजली के करंट के कारण मारे गये तीन व्यक्तियों के परिजनों को सरकार की ओर से दो-दो लाख रूपए व जिला रैड क्रास सोसायटी की तरफ से एक-एक लाख रूपए की आर्थिक सहायता देने की भी घोषणा की।
मुख्यमंत्री ने आज अंबाला में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ क्षेत्र के बाढग़्रस्त क्षेत्रों का दौरा किया और बाढ़ की स्थिति का जायजा लिया।श्री हुड्डï ने अम्बाला शहर पंजाब सीमा पर घग्गर नदी पर जाकर पानी का जायजा भी लिया और बाढ़ के पानी से प्रभावित शहर के मनमोहन नगर, गीता नगरी, बलदेव नगर, अम्बाला सदर के शास्त्री कालोनी, बस स्टैंड क्षेत्र का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया।
उन्होंने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों के लिए खाने और पानी की चीजों के साथ साथ बाढ़ के बाद उत्पन्न होने वाली बिमारियों को रोकने के लिए आवश्यक दवाईयों का प्रबन्ध करने के निर्देश दिये। उन्होने अधिकारियों को पानी निकासी के लिए अतिरिक्त पम्प सैटस लगाने के भी निर्देश दिए और कहा कि बाढ़ राहत कार्य में किसी प्रकार की कौताही बर्दाशत नही की जायेगी।
बाद में लोक निर्माण विभाग विश्राम गृह अम्बाला छावनी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद फसलों और मकानों के नुकसान का आकलन किया जायेगा और नुकसान की रिपोर्ट के आधार पर ही उचित मुआवजा दिया जायेगा। उन्होने कहा कि घग्गर नदी और टांगरी नदी मेंं अत्याधिक पानी आ जाने के कारण बाढ़ की स्थिति पैदा हुई है और गत वर्षों की तुलना में इस वर्ष तीन गुणा अधिक पानी आया है। प्रशासन द्वारा राहत कार्य किए जा रहे हैं और पानी निकासी का कार्य भी निरंतर जारी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अम्बाला के साथ साथ कुरूक्षेत्र जिला में भी फसलों और मकानों का नुकसान हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि राहत कार्यों में प्रशासनिक अमले के साथ साथ सेना का भी सहयोग लिया जा रहा है और अब घग्गर, टांगरी सहित सतलुज-यमुना लिंक नहर का जलस्तर भी कम हो रहा है।
एक अन्य प्रश्र के उत्तर में कहा कि अधिक पानी के कारण बिजली व्यवस्था प्रभावित हुई है और व्यवस्था को शीघ्र से शीघ्र सामान्य करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होने यह भी कहा कि सरकार द्वारा बाढ़ पीडि़त क्षेत्रों के लोगों को हर संभव सहायता उपलब्ध करवाई जायेगी और इसके लिए उन्होने सभी सम्बन्धित विभागों के उच्च अधिकारियों से विचार-विमर्श किया है।
इस अवसर पर हरियाणा विधानसभा के अध्यक्ष श्री हरमोहिन्द्र सिंह च_ा, सांसद नवीन जिंदल, विधायक अनिल विज, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव छत्तर सिंह, लोक निर्माण विभाग के वित्तायुक्त एवं प्रधान सचिव एस.एस. ढिल्लों, अम्बाला मंडल के आयुक्त अनिल कुमार, अम्बाला रेंज के आईजी के.के. सिन्धु, मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार सुंदर पाल, पूर्वमंत्री एवं चौधरी निर्मल सिंह के अलावा जिला प्रशासन के वरिष्ठï अधिकारी एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री ने आज अंबाला में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ क्षेत्र के बाढग़्रस्त क्षेत्रों का दौरा किया और बाढ़ की स्थिति का जायजा लिया।श्री हुड्डï ने अम्बाला शहर पंजाब सीमा पर घग्गर नदी पर जाकर पानी का जायजा भी लिया और बाढ़ के पानी से प्रभावित शहर के मनमोहन नगर, गीता नगरी, बलदेव नगर, अम्बाला सदर के शास्त्री कालोनी, बस स्टैंड क्षेत्र का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया।
उन्होंने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों के लिए खाने और पानी की चीजों के साथ साथ बाढ़ के बाद उत्पन्न होने वाली बिमारियों को रोकने के लिए आवश्यक दवाईयों का प्रबन्ध करने के निर्देश दिये। उन्होने अधिकारियों को पानी निकासी के लिए अतिरिक्त पम्प सैटस लगाने के भी निर्देश दिए और कहा कि बाढ़ राहत कार्य में किसी प्रकार की कौताही बर्दाशत नही की जायेगी।
बाद में लोक निर्माण विभाग विश्राम गृह अम्बाला छावनी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद फसलों और मकानों के नुकसान का आकलन किया जायेगा और नुकसान की रिपोर्ट के आधार पर ही उचित मुआवजा दिया जायेगा। उन्होने कहा कि घग्गर नदी और टांगरी नदी मेंं अत्याधिक पानी आ जाने के कारण बाढ़ की स्थिति पैदा हुई है और गत वर्षों की तुलना में इस वर्ष तीन गुणा अधिक पानी आया है। प्रशासन द्वारा राहत कार्य किए जा रहे हैं और पानी निकासी का कार्य भी निरंतर जारी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अम्बाला के साथ साथ कुरूक्षेत्र जिला में भी फसलों और मकानों का नुकसान हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि राहत कार्यों में प्रशासनिक अमले के साथ साथ सेना का भी सहयोग लिया जा रहा है और अब घग्गर, टांगरी सहित सतलुज-यमुना लिंक नहर का जलस्तर भी कम हो रहा है।
एक अन्य प्रश्र के उत्तर में कहा कि अधिक पानी के कारण बिजली व्यवस्था प्रभावित हुई है और व्यवस्था को शीघ्र से शीघ्र सामान्य करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होने यह भी कहा कि सरकार द्वारा बाढ़ पीडि़त क्षेत्रों के लोगों को हर संभव सहायता उपलब्ध करवाई जायेगी और इसके लिए उन्होने सभी सम्बन्धित विभागों के उच्च अधिकारियों से विचार-विमर्श किया है।
इस अवसर पर हरियाणा विधानसभा के अध्यक्ष श्री हरमोहिन्द्र सिंह च_ा, सांसद नवीन जिंदल, विधायक अनिल विज, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव छत्तर सिंह, लोक निर्माण विभाग के वित्तायुक्त एवं प्रधान सचिव एस.एस. ढिल्लों, अम्बाला मंडल के आयुक्त अनिल कुमार, अम्बाला रेंज के आईजी के.के. सिन्धु, मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार सुंदर पाल, पूर्वमंत्री एवं चौधरी निर्मल सिंह के अलावा जिला प्रशासन के वरिष्ठï अधिकारी एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
सरकार द्वारा हाथ पर हाथ रखे रहने की वजह से लोगों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा--चौटाला
चंडीगढ़,7 जुलाई: इनेलो ने हुड्डा सरकार की नालायकी के कारण बारिश व बाढ से कुरुक्षेत्र व अम्बाला सहित प्रदेश के कई जिलों में लोगों को हुए जानमाल के भारी नुकसान पर दुख जताते हुए सरकार से तुरन्त युद्धस्तर पर बचाव कार्य करने और लोगों को राहत पहुंचाए जाने के साथ-साथ प्रभावित लोगों को मुआवजा दिए जाने की मांग की है। इनेलो प्रमुख व हरियाणा के पूर्व मुख्यमन्त्री चौधरी ओमप्रकाश चौटाला ने कहा बाढ व बारिश की सम्भावना को देखते हुए सरकार द्वारा पहले से बचाव व राहत सम्बन्धी तैयारियां न किए जाने और हाथ पर हाथ रखे रहने की वजह से लोगों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। उन्होंने कहा कि सरकार की नालायकी का खमियाजा प्रदेश की जनता को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने इनेलो कार्यकत्र्ताओं से बाढ व बारिश से प्रभावित लोगों की जी-जान से मदद करने और उन्हें हर सम्भव सहायता प्रदान किए जाने का भी आह्वान किया।
श्री चौटाला ने कहा कि उनके कार्यकाल में हर साल बारिश के मौसम से पहले बाढ नियन्त्रण बोर्ड की बैठक बुलाकर न सिर्फ ड्रेनों व बरसाती नालों की साफ-सफाई के पुख्ता इंतजाम किए जाते थे बल्कि बैठक में प्रदेश के सभी जिला उपायुक्तों व पुलिस अधीक्षकों सहित आला अधिकारियों और सिंचाई व ड्रेनेज विभाग के इंजीनियरों से भारी बारिश अथवा बाढ आने की स्थिति में किए जाने वाले इंतजामों पर चर्चा कर व्यापक कार्य योजना तैयार की जाती थी। इसी कार्ययोजना पर अमल करते हुए बैठक के एक पखवाड़े बाद जमीनी स्तर पर उन तैयारियों का जायजा लिया जाता था ताकि प्रदेश के लोगों को भारी बारिश अथवा बाढ के दौरान जानमाल का नुकसान न उठाना पड़े। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार ने पिछले पांच साल में बाढ नियन्त्रण बोर्ड की बैठक बुलाकर कोई पुख्ता इंतजाम करने की बजाय कागजी दावों पर ही जोर रखा। अब एक-दो दिन की बारिश ने सरकार के सारे फर्जी दावों की न सिर्फ पोल खोल दी बल्कि बारिश आते ही सरकार के हाथ-पांव फूल गए और लोगों को राहत व मदद पहुंचाने के मामले में भी प्रशासन व सरकार ने हाथ खड़े कर दिए।
इनेलो प्रमुख ने कहा कि कुरुक्षेत्र, अम्बाला सहित प्रदेश के कई जिलों में लाखों लोग बारिश व बाढ के पानी से घिरे हुए हैं और उनके घरों व व्यापारिक संस्थानों में चार से पांच फीट तक पानी भरा हुआ है। इन लोगों को निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने, इनके घरों व मकानों से पानी की निकासी किए जाने, इन लोगों के लिए खाने की सामग्री व पीने के पानी का भी अभी तक सरकार व प्रशासन ने व्यापक बंदोबस्त नहीं किया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमन्त्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा खाली अखबारी बयानबाजी करने व अपनी नालायकी पर पर्दा डालने के लिए हवाई जहाज में बैठकर लोगों के घरों व मकानों के ऊपर तो चक्कर लगा सकते हैं लेकिन इससे बाढ से घिरे हुए लोगों पर क्या गुजर रही है और उनकी हालत क्या है, इसका सही अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। उन्होंने बारिश व बाढ़ से प्रभावित लोगों को हुए नुकसान का तुरन्त सर्वे करवाए जाने और उन्हें पूरा मुआवजा व राहत प्रदान किए जाने की भी मांग की है।
श्री चौटाला ने कहा कि बाढ व बारिश के कारण प्रभावित जिलों में मवेशियों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। इसलिए मवेशियों को बचाने के प्रयास भी तुरन्त किए जाने चाहिए और पानी से फैलने वाली बीमारियों को रोकने के लिए विशेष डॉक्टरी टीमें गठित करने व राहत कैम्प भी लगाए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि ये बेहद चिन्ताजनक है कि अगर बारिश नहीं होती तो फसलें प्रभावित होने से प्रदेश का किसान वर्ग बर्बाद हो जाता है और अगर थोड़ी सी भी बारिश होती है तो भी सरकार की नालायकी से प्रदेश की जनता व किसान वर्ग को बर्बादी झेलनी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि 1995 में जब प्रदेश में भयंकर बाढ आई थी तो मेवात के इलाके में बीमारियां फैलने पर इनेलो कार्यकत्र्ताओं ने डॉक्टरों व मेडिकल टीम को साथ लेकर जगह-जगह कैम्प लगाकर लोगों को राहत पहुंचाने का काम किया था। इसलिए अब भी पार्टी कार्यकत्र्ताओं को लोगों की जानमाल की रक्षा करने के लिए जी-जान से प्रयास करने चाहिए।
इनेलो के प्रदेश अध्यक्ष अशोक अरोड़ा व पार्टी के प्रधान महासचिव अजय सिंह चौटाला ने बाढ व बारिश से कुरुक्षेत्र, अम्बाला सहित प्रदेश के कुछ जिलों में हुए भारी नुकसान पर चिन्ता जताते हुए इसे सरकार की व्यापक विफलता बताया है। इनेलो नेताओं ने कहा कि अगर सरकार व प्रशासन बाढ व बारिश की सम्भावनाओं को देखते हुए पहले से व्यापक इंतजाम करती तो आज लोगों को इतना भारी नुकसान न उठाना पड़ा। उन्होंने कहा कि सरकार अपनी जिम्मेदारी निभाने में पूरी तरह से विफल रही है और समय रहते इंतजाम करने की बजाय संकट की घड़ी में लोगों को प्रकृति के रहमोकर्म पर छोड़ दिया गया है। उन्होंने पार्टी कार्यकत्र्ताओं से प्रभावित लोगों को हर सम्भव मदद पहुंचाने का भी आग्रह किया।
श्री चौटाला ने कहा कि उनके कार्यकाल में हर साल बारिश के मौसम से पहले बाढ नियन्त्रण बोर्ड की बैठक बुलाकर न सिर्फ ड्रेनों व बरसाती नालों की साफ-सफाई के पुख्ता इंतजाम किए जाते थे बल्कि बैठक में प्रदेश के सभी जिला उपायुक्तों व पुलिस अधीक्षकों सहित आला अधिकारियों और सिंचाई व ड्रेनेज विभाग के इंजीनियरों से भारी बारिश अथवा बाढ आने की स्थिति में किए जाने वाले इंतजामों पर चर्चा कर व्यापक कार्य योजना तैयार की जाती थी। इसी कार्ययोजना पर अमल करते हुए बैठक के एक पखवाड़े बाद जमीनी स्तर पर उन तैयारियों का जायजा लिया जाता था ताकि प्रदेश के लोगों को भारी बारिश अथवा बाढ के दौरान जानमाल का नुकसान न उठाना पड़े। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार ने पिछले पांच साल में बाढ नियन्त्रण बोर्ड की बैठक बुलाकर कोई पुख्ता इंतजाम करने की बजाय कागजी दावों पर ही जोर रखा। अब एक-दो दिन की बारिश ने सरकार के सारे फर्जी दावों की न सिर्फ पोल खोल दी बल्कि बारिश आते ही सरकार के हाथ-पांव फूल गए और लोगों को राहत व मदद पहुंचाने के मामले में भी प्रशासन व सरकार ने हाथ खड़े कर दिए।
इनेलो प्रमुख ने कहा कि कुरुक्षेत्र, अम्बाला सहित प्रदेश के कई जिलों में लाखों लोग बारिश व बाढ के पानी से घिरे हुए हैं और उनके घरों व व्यापारिक संस्थानों में चार से पांच फीट तक पानी भरा हुआ है। इन लोगों को निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने, इनके घरों व मकानों से पानी की निकासी किए जाने, इन लोगों के लिए खाने की सामग्री व पीने के पानी का भी अभी तक सरकार व प्रशासन ने व्यापक बंदोबस्त नहीं किया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमन्त्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा खाली अखबारी बयानबाजी करने व अपनी नालायकी पर पर्दा डालने के लिए हवाई जहाज में बैठकर लोगों के घरों व मकानों के ऊपर तो चक्कर लगा सकते हैं लेकिन इससे बाढ से घिरे हुए लोगों पर क्या गुजर रही है और उनकी हालत क्या है, इसका सही अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। उन्होंने बारिश व बाढ़ से प्रभावित लोगों को हुए नुकसान का तुरन्त सर्वे करवाए जाने और उन्हें पूरा मुआवजा व राहत प्रदान किए जाने की भी मांग की है।
श्री चौटाला ने कहा कि बाढ व बारिश के कारण प्रभावित जिलों में मवेशियों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। इसलिए मवेशियों को बचाने के प्रयास भी तुरन्त किए जाने चाहिए और पानी से फैलने वाली बीमारियों को रोकने के लिए विशेष डॉक्टरी टीमें गठित करने व राहत कैम्प भी लगाए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि ये बेहद चिन्ताजनक है कि अगर बारिश नहीं होती तो फसलें प्रभावित होने से प्रदेश का किसान वर्ग बर्बाद हो जाता है और अगर थोड़ी सी भी बारिश होती है तो भी सरकार की नालायकी से प्रदेश की जनता व किसान वर्ग को बर्बादी झेलनी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि 1995 में जब प्रदेश में भयंकर बाढ आई थी तो मेवात के इलाके में बीमारियां फैलने पर इनेलो कार्यकत्र्ताओं ने डॉक्टरों व मेडिकल टीम को साथ लेकर जगह-जगह कैम्प लगाकर लोगों को राहत पहुंचाने का काम किया था। इसलिए अब भी पार्टी कार्यकत्र्ताओं को लोगों की जानमाल की रक्षा करने के लिए जी-जान से प्रयास करने चाहिए।
इनेलो के प्रदेश अध्यक्ष अशोक अरोड़ा व पार्टी के प्रधान महासचिव अजय सिंह चौटाला ने बाढ व बारिश से कुरुक्षेत्र, अम्बाला सहित प्रदेश के कुछ जिलों में हुए भारी नुकसान पर चिन्ता जताते हुए इसे सरकार की व्यापक विफलता बताया है। इनेलो नेताओं ने कहा कि अगर सरकार व प्रशासन बाढ व बारिश की सम्भावनाओं को देखते हुए पहले से व्यापक इंतजाम करती तो आज लोगों को इतना भारी नुकसान न उठाना पड़ा। उन्होंने कहा कि सरकार अपनी जिम्मेदारी निभाने में पूरी तरह से विफल रही है और समय रहते इंतजाम करने की बजाय संकट की घड़ी में लोगों को प्रकृति के रहमोकर्म पर छोड़ दिया गया है। उन्होंने पार्टी कार्यकत्र्ताओं से प्रभावित लोगों को हर सम्भव मदद पहुंचाने का भी आग्रह किया।
लेबल:
हुड्डा सरकार,
CM of haryana,
inld,
OP Chautala
अग्रसैन कॉलोनी में बनाई गई गलियां लोगों के लिए जी का जंजाल बनी
सिरसा- नगर परिषद द्वारा अग्रसैन कॉलोनी में बनाई गई गलियां लोगों के लिए जी का जंजाल बन गई हैं। लाखों रुपये राशि खर्च कर बनाई गई इन गलियों में लेवल का कोई हिसाब नहीं रखा गया, जिसके कारण पिछले 24 घंटे से अग्रसैन कॉलोनी की मुख्य गली में एक-एक फुट पानी ठहरा हुआ है। लोगों का अपने घर से बाहर निकलना भी मुश्किल हो चुका है। दुपहिया वाहन इस पानी में ठहर जाते हैं, जबकि पैदल आने-जाने वालों को भारी दिक्कत पेश आ रही है। दरअसल नगर परिषद द्वारा ठेकेदारों के माध्यम से अग्रसैन कॉलोनी की विभिन्न गलियों का निर्माण किया गया है। इस कॉलोनी की मुख्य गली (स्टेट बैंक वाली) का निर्माण दो चरणों में किया गया। पहले चरण में गली का लेवल ऊंचा रखा गया, जबकि दूसरे चरण में इस गली का लेवल नीचा रखा गया है। ठेकेदारों द्वारा गली के लेवल को समान न रखने पर कॉलोनी वासियों द्वारा अपना विरोध पहले भी जाहिर किया गया था। मगर नगर परिषद की ओर से जनता की इस समस्या का कोई निदान नहीं किया गया। कल हुई बारिश ने गली निर्माण में बरती गई खामियों को उजागर कर दिया। कॉलोनी में गली निर्माण में एक समान लेवल न रखने के कारण नीची गलियों में एक से डेढ़-डेढ़ फुट तक पानी का जमाव हो गया है। कॉलोनी की कुछ गलियों का लेवल ऊंचा होने के कारण नीची गलियों में ठहरा पानी बाहर नहीं निकल रहा और यहां झील जैसी स्थिति बन गई है।
नगर परिषद की ओर से अग्रसैन कॉलोनी में बनवाई गई गलियों के मामले में जल निकासी हेतु झरना निर्माण में बरती गई कोताही भी सामने आई है। ठेकेदार की ओर से पानी निकासी हेतु झरने नहीं रखे गये, जिसके कारण बरसाती पानी की निकासी नहीं हो रही। नगर परिषद के साथ-साथ जलापूर्ति एवं स्वच्छता विभाग की कार्यप्रणाली भी सामने आई है। पिछले 24 घंटे से अधिक समय से इस कॉलोनी में जमा हुए पानी की निकासी का कोई बंदोबस्त नहीं किया गया है, जिसके कारण कॉलोनीवासियों में भारी रोष बना हुआ है।
नगर परिषद की ओर से अग्रसैन कॉलोनी में बनवाई गई गलियों के मामले में जल निकासी हेतु झरना निर्माण में बरती गई कोताही भी सामने आई है। ठेकेदार की ओर से पानी निकासी हेतु झरने नहीं रखे गये, जिसके कारण बरसाती पानी की निकासी नहीं हो रही। नगर परिषद के साथ-साथ जलापूर्ति एवं स्वच्छता विभाग की कार्यप्रणाली भी सामने आई है। पिछले 24 घंटे से अधिक समय से इस कॉलोनी में जमा हुए पानी की निकासी का कोई बंदोबस्त नहीं किया गया है, जिसके कारण कॉलोनीवासियों में भारी रोष बना हुआ है।
लेबल:
डबवाली समाचार,
सिरसा समाचार,
dabwali news,
sirsa news
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