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गुरुवार, 15 अप्रैल 2010

अंबेडकर पर राहुल-माया टकराए

अंबेडकर नगर/लखनऊ अंबेडकर नगर में दलितों के जिस मसीहा की जयंती पर राजनीतिक घमासान मचा था, उसमें दोनों ही पक्ष अपने-अपने रुख से टस से मस नहीं हुए। माया सरकार ने राहुल को अंबेडकर प्रतिमा पर माल्यार्पण नहीं करने दिया तो कांग्रेस महासचिव ने मंच पर ही उनकी तस्वीर पर माल्यार्पण कर उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया। दस मिनट के अपने संबोधन में राहुल ने मायावती के मूर्तिप्रेम पर अपरोक्ष रूप से कटाक्ष करते हुए कहा कि केंद्र से वह गरीबों के लिए धन भेजते हैं, लेकिन लखनऊ आकर न जाने वह कहां चला जाता है। जवाब मायावती ने लखनऊ से दिया। उन्होंने कहा कि इन स्थलों-स्मारकों का किसी भी स्तर पर कितना ही विरोध क्यों न हो, उनकी पार्टी और सरकार तिल भर भी नहीं झुकेगी। राहुल गांधी जिस वक्त मंच पर चढ़े, उस वक्त अंबेडकर नगर का तापमान 43 डिग्री सेल्सियस पार कर रहा था, लेकिन राहुल के भाषण ने प्रदेश के सियासी पारे को और बढ़ा दिया। राहुल ने कहा कि वह जब गरीबों के घर जाते हैं, उनकी बात करते हैं तो कुछ लोगों को ऐतराज होता है। लोग सवाल उठाते हैं कि राहुल ऐसा क्यों कर रहे हैं। प्रदेश सरकार को तो मनरेगा और शिक्षा के अधिकार जैसे कानून भी पसंद नहीं आ रहे, जबकि दोनों का सबसे ज्यादा लाभ दलितों को मिलना है। राहुल ने चुनौती देने के अंदाज में कहा, मैं गरीबों की आवाज उठाता रहूंगा। युवाओं के लिए रोजगार लाऊंगा। सवाल करने वाले सवाल करते रहें, हम पीछे हटने वाले नहीं। उन्होंने व्यंगात्मक लहजे में कहा कि वह प्रदेश के विकास के लिए पैसा भेजते हैं, लखनऊ पहुंचकर वह पैसा न जाने कहां चला जाता है? राहुल की इच्छा कार्यक्रम स्थल से 500 मीटर की दूरी पर स्थित डा. अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने की भी थी, किन्तु प्रशासन ने अनुमति नहीं दी। उसका कहना था कि राहुल चाहे तो बसपा रैली के बाद ऐसा कर सकते हैं। इसके लिए उसने सुरक्षा का हवाला दिया। राहुल गांधी ने यहां से दस यात्राओं को भी रवाना किया। उधर, लखनऊ में मायावती ने साफ कहा कि स्थलों-स्मारकों का किसी भी स्तर पर कितना ही विरोध क्यों न हो, उनकी पार्टी और सरकार तिलभर भी नहीं झुकने वाली। आजादी के 63 वर्षो के दौरान, कांग्रेस ने 50 सालों तक केंद्र में और 38 वर्षो तक यूपी में राज किया। इस दौरान उसने अपनी जातिवादी मानसिकता के चलते न केवल बाबा साहब बल्कि अन्य की घोर उपेक्षा की। उसने बाबा साहब को भारत रत्‍‌न से सम्मानित करना भी उचित नहीं समझा। केंद्र में गैर कांग्रेसी सरकार होने पर बसपा के दबाव में डॉ. अंबेडकर को भारत रत्‍‌न से सम्मानित किया गया। उन्होंने कहा कि आज जब बसपा सरकार भव्य स्मारक, पार्क, विश्र्वविद्यालय, जिला आदि बनाकर इन महापुरुषों को उचित आदर सम्मान दे रही है तो कांग्रेस, भाजपा और अन्य विरोधी पार्टियों को बहुत बुरा लग रहा है। ये पार्टियां इन मामलों को कोर्ट कचहरी तक में खींचने का काम कर रही हैं। बसपा प्रमुख ने कहा कि चाहे जितना विरोध हो, बसपा सरकार इन महापुरुषों को आदर सम्मान देने में कोई कोर कसर बाकी नहीं रखेगी।

भटक गए बाहरी राज्यों के महाकुंभ श्रद्धालु

हरिद्वार- महाकुंभ शाही स्नान की इच्छा रखने वाले दूसरे राज्यों के लाखों श्रद्धालु वेस्ट यूपी में ही भटकते रहे। इनमें से हजारों श्रद्धालुओं ने ग्रामीणों की सलाह पर मुख्य गंगनहर में ही डुबकी लगा ली। इसके बाद उन्होंने हरिद्वार का रुख किया। भोला की झाल, खतौली और गढ़ में भी श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। मंगलवार को हरिद्वार में बढ़ी भीड़ के कारण शाम पांच बजे ही सारे रास्ते सील कर दिए गए। इसी कारण नागालैंड, राजस्थान, हरियाणा, कर्नाटक, मध्यप्रदेश, दिल्ली, गुजरात से आए हजारों वाहनों को गाजियाबाद, मेरठ, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, बागपत से डायवर्ट कर दिया गया। अलग-अलग रास्तों से हरिद्वार पहुंचे लोगों को कई किलोमीटर अतिरिक्त रास्ता तय करना पड़ा। बहुत से वाहन तो रास्ता भटककर कहीं और ही पहुंच गए। ऐसे वाहनों के बारे में लगातार सूचना मिलती रही। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर इन चालकों को रास्ता बताया लेकिन तब तक सुबह हो चुकी थी। गुजरात से आई बस के चालक राम अवतार पटेल ने बताया कि उसे जब रास्ता नहीं मिला तो वह बुढ़ाना रोड से होते हुए मुख्य गंगनहर कांवड़ पटरी पर पहुंच गया। कोई रास्ता बताने वाला नहीं था, तो वह भोला की झाल पर आ गया। यहां ग्रामीणों ने बताया कि मुख्य गंगनहर में भी हरिद्वार गंगा का पानी आ रहा है तो श्रद्धालुओं ने यहीं स्नान कर लिया।

भाजपा फिर बचाव में आई ममता ने आंखें दिखाई

दिल्ली/कोलकाता, एजेंसी: नक्सल मुद्दे पर जहां मुख्य विपक्षी दल भाजपा पी. चिदंबरम का खुला समर्थन कर रही है वहीं सरकार में शामिल तृणमूल कांग्रेस गृह मंत्री के लिए लगातार मुसीबत खड़ी कर रही है। तृणमूल कांग्रेस की मुखिया और केंद्रीय रेल मंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि माकपा ने पश्चिमी मिदनापुर जिले में माओवाद निरोधी संयुक्त अभियान को अगवा कर लिया है और चिदंबरम इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। ममता ने कहा कि लालगढ़ में एक भी माओवादी नहीं है। वहां माकपा कैडरों के इशारे पर आदिवासियों व विपक्षी समर्थकों के खिलाफ केंद्र और राज्य सरकार का संयुक्त पुलिस अभियान चल रहा है। ममता ने कहा कि उनके पास इस बात के साक्ष्य हैं कि जंगल महल में 200 माकपा कैडरों के कैंप चल रहे हैं। उन्होंने चिदंबरम से सवाल किया कि वह बताएं कि क्या माकपा कैडरों को संरक्षण देने और विपक्षी समर्थकों की हत्या के लिए लालगढ़ में संयुक्त ऑपरेशन चलाया जा रहा है? ममता ने कहा कि दर्जनों कैंपों में हथियारों का जखीरा मौजूद है। इसके सहारे प्रतिदिन तृणमूल समर्थकों की हत्या की जा रही है। बंगाल में तुगलकी शासन चल रहा है। जब दंगे के लिए गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी से पूछताछ हो सकती है तो नंदीग्राम में मारे गए लोगों के लिए बुद्धदेव से क्यों नहीं हो सकती। ममता के इतर भाजपा ने चिदंबरम का समर्थन करते हुए कहा है कि इस युद्ध जैसी स्थिति में देश को एक स्वर में बोलने की जरूरत है। भाजपा ने कहा कि इस समस्या से लड़ने के बारे में सरकार और सत्तारूढ़ पार्टी में एक राय नहीं है। भाजपा प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि दिग्विजय सिंह द्वारा चिदंबरम के दृष्टिकोण की सार्वजनिक आलोचना इस बात का सुबूत है कि माओवाद के खिलाफ लड़ाई के मामले पर कांग्रेस में मतभेद हैं। उन्होंने कहा कि दिग्विजय के बयान ने हमारी इस आशंका को पक्का कर दिया है कि केंद्रीय बल बिना किसी उचित तैयारी के भेजे गए थे।

मुस्लिमों को आवास आरक्षण के पक्ष में शरद पवार

मंुबई, एजेंसियां: एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार को आवासीय योजनाओं में मुस्लिमों को आरक्षण देने की संभावना तलाश करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अनेक गरीब मुस्लिम यह शिकायत करते हैं कि वे आवासीय योजना में भाग नहीं ले पाते। पवार ने इस मुद्दे पर आवास राज्य मंत्री सचिन अहीर को गौर करने के लिए कहा है। एनसीपी की मुंबई इकाई की एक बैठक में पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच पवार ने कहा कि नवी मुंबई निगम परिषद के चुनावी परिणामों ने यह साबित कर दिया है कि लोग लंबे समय तक संकीर्ण राजनीति को समर्थन नहीं देते। एनसीपी प्रमुख ने कहा कि मुंबई की सबसे बड़ी खासियत यही ह कि यहा आने वाला हर भारतीय पूरे सम्मान के साथ रह सकता है। उन्होंने कहा कि अगर मुंबई में इस लोकतांत्रिक और जनवादी रवैए को चोट पहुंचती है तो इसका भविष्य खतरे में पड़ सकता है। पवार ने कहा कि अगर हम जमीन से जुड़े और नई पीढ़ी के नेताओं को मौका देंगे तो एनसीपी का खुद-ब-खुद विस्तार होगा और इसकी पकड़ मजबूत होगी। पवार ने पार्टी की शहर इकाई से अगले दो साल में होने वाले बंबई नगर निगम चुनाव के लिए रणनीति तय करने को कहा। उन्होंने कहा कि 15 साल से बीएमसी पर काबिज शिवसेना-भाजपा को बिजली और पानी के मुद्दे पर घेरने की तैयारी की जाए।

सरकार को घेरने के लिए विपक्ष फिर तैयार

नई दिल्ली-संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण के पहले ही दिन सरकार व विपक्ष आमने सामने होंगे। सरकार को सबसे पहले दंतेवाड़ा के नक्सली हमले पर विपक्ष के सवालों का जवाब देना होगा और उसके बाद विदेश राज्यमंत्री शशि थरूर के ताजा विवाद से जूझना होगा। मुख्य विपक्षी दल भाजपा व उसके सहयोगी दलों ने साफ कर दिया है कि वे दोनों सदनों में दंतेवाड़ा की घटना पर प्रश्नकाल स्थगित करने की मांग करेंगे और अगर सरकार नहीं मानी तो सदन नहीं चलने देंगे। सरकार भी जवाबी तैयारी में है और विपक्ष को कोई मौका देने के पहले ही गृह मंत्री बयान दे सकते हैं। विभिन्न मुद्दों पर सदन के भीतर कायम विपक्षी एकता सरकार के लिए अभी भी मुसीबत बनी हुई है। महिला आरक्षण विधेयक व रंगनाथ मिश्रा आयोग की रिपोर्ट पर तीखे मतभेद भी विपक्षी एकता को तोड़ नहीं सके हैं। ऐसे में बृहस्पतिवार से शुरू हो रहे बजट सत्र के दूसरे चरण में सरकार की मुसीबतें कायम रहेंगी। सरकार के सबसे महत्वपूर्ण वित्त विधेयक पर कटौती प्रस्तावों को लेकर विपक्षी एकता की चुनौती से जूझने के अलावा उसे अन्य प्रमुख राष्ट्रीय महत्व के ज्वलंत मुद्दों पर भी विपक्ष के तीखे तीरों का सामना करना पड़ेगा। विपक्षी हमलों की शुरुआत छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में नक्सली हमले से होगी। भाजपा ने पहले अपनी खुद की बैठक की और बाद में राजग के सहयोगी दलों के नेताओं के साथ बैठक कर इस मुद्दे पर दोनों सदनों में प्रश्नकाल स्थगित करने के नोटिस देने का फैसला किया है। राजग ने मांग की है सबसे पहले सरकार इस मामले पर बयान दे उसके बाद ही कोई और कामकाज करे। अगर सरकार नहीं मानी तो कार्यवाही नहीं चलने दी जाएगी। हालांकि सरकार इस मामले पर विपक्ष को कोई मौका नहीं देगी। सूत्रों के अनुसार गृहमंत्री इस मामले पर बिना किसी मांग के खुद ही बयान देंगे। इस मुद्दे के बाद राजग ने शशि थरूर के मुद्दे पर सरकार को घेरने का फैसला किया है। राजग की बैठक के बाद लोकसभा में भाजपा के उप नेता गोपीनाथ मुंडे ने कहा कि थरूर ने अपनी महिला मित्र को लाभ पहुंचाने के लिए अपने पद का दुरुपयोग किया है। यह भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत सीधा मामला है और प्रधानमंत्री को मामले टालने के बजाए सीधे कार्रवाई करना चाहिए। वामपंथी दलों ने भी इस मामले पर सरकार को घेरने का ऐलान किया है। शुरुआत में विपक्ष की इन दोनों चुनौतियों से जूझने के बाद सरकार को वित्त विधयेक पर विपक्ष के कटौती प्रस्तावों का सामना करना पड़ेगा। भाजपा, वामदल व अन्य सभी गैर संप्रग दलों (बसपा को छोड़कर) ने दो टूक कहा है कि महंगाई, डीजल व पेट्रोल में की कीमतों में की गई बढ़ोतरी के मुद्दों पर जो भी कटौती प्रस्ताव होंगे, उनका सभी दल समर्थन करेंगे।

सुबूत मिले तो थरूर पर कार्रवाई: पीएम


वाशिंगटन--अपने विवादों से तीसरी बार प्रधानमंत्री की विदेश यात्रा में खलल डाल चुके शशि थरूर से मनमोहन सिंह खफा तो नजर आए लेकिन इसका इजहार उन्होंने संतुलित तरीके से किया। परमाणु सुरक्षा सम्मेलन के समापन के बाद यहां मीडिया से रूबरू होते हुए प्रधानमंत्री ने कह दिया कि अगर जरूरी हुआ तो सुबूत के आधार पर थरूर के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। थरूर के एक और विवाद में फंसने के बाद उन्हें मंत्रिमंडल से हटाए जाने की विपक्ष की मांग पर उन्होंने कहा कि मैंने यह सब कुछ सुना है लेकिन मेरे पास तथ्य मौजूद नहीं हैं। शनिवार को लौटकर तथ्य हासिल करूंगा और उनके आधार पर यदि जरूरी हुआ तो थरूर के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। मुझे लगता है यही सही तरीका होगा। प्रधानमंत्री ने यह भी जोड़ा कि मैं सुनी सुनाई बातों या अखबार में छपी बातों के आधार पर कोई फैसला नहीं कर सकता। थरूर की वजह से लगातार तीसरी बार अपनी विदेश यात्रा पर असहज हो चुके पीएम खफा जरूर हैं। फरवरी में रियाद में थरूर ने भारत-पाक के बीच वार्ताकार की जरूरत के संदर्भ में बयान देकर मनमोहन को सफाई देने पर विवश कर दिया था। पिछले साल सितंबर में आसियान बैठक के दौरान भी पीएम का सामना थरूर के कैटल क्लास विवाद से हुआ था। हर बार थरूर की कुर्सी बचा ले गए पीएम पर इस बार दबाव ज्यादा है, क्योंकि मामला जुबान फिसलने का नहीं, बल्कि केंद्रीय मंत्री के आचरण का है। यह आईपीएल में कोच्चि की टीम में थरूर की महिला मित्र सुनंदा पुष्कर की 70 करोड़ रुपये की फ्री इक्विटी का मसला है। भाजपा और वामदलों समेत पूरे विपक्ष ने थरूर को साउथ ब्लाक से बाहर कराने की लामबंदी कर ली है। प्रकाश करात और एबी बर्धन तो जांच मुकम्मल होने तक थरूर को एक मिनट के लिए भी विदेश मंत्रालय की कुर्सी पर देखना नहीं चाहते हैं।

जो बच्चा स्कूल का काम नहीं कर पाता वह स्कूल व ट्यूश्न के काम को वक्त कैसे दे सकता है--बांसल

डबवाली-बच्चों के बारह घंटों को बच्चों के ही रहने दें और आठ घंटे स्कूल के स्कूल वालों के पास ही रहने दें केवल शेश चार घंटों के कुश्ल प्रबंधन से ही आप अपने बच्चों को अव्वल बना सकते हैं, ये शब्द सरदार सुच्चा सिंह बांसल ने स्थानीय हरियाणा पब्लिक स्कूल के प्रांगण अभिभावक मिलन कार्यशाला के दौरान अभिभावकों, अध्यापकों एवं प्रबंधक समिति को सम्बोधित करते हुए कहे।उन्होंने कहे कि जरूरत से अधिक बोलना अथवा न बोलना, जरूरत से अधिक सुनना अथवा सुनाना आदि-आदि ऐसे विकार हैं जो अध्यापक द्वारा कक्षा में एक समान शिक्षा देने के बावजूद भी बच्चों के शैक्षिक परिणामों में तथा बौद्धिक क्षमता में बहुत अंतर पाया जाता है। अक्सर बच्चे केवल अध्यापक को सुनते हैं सुनाते नहीं। अध्यापक से पूछते नहीं, अध्यापक की हां में हां मिलाते रहते हैं।
इसका मुख्य दोष वे ट्यूश्न तथा गाइड़ प्रणाली को मानते हैं। जो बच्चा स्कूल का काम नहीं कर पाता वह स्कूल व ट्यूश्न के काम को वक्त कैसे दे सकता है। ट्यूश्न तथा गाइड़ें कन्फूयजऩ पैदा करती हैं। बच्चे के विकास में बाधक बनती हैं। अक्सर बच्चे माता-पिता से स्कूल तथा अध्यापक की शिकायत करते रहते हैं और माता-पिता भी उस शिकायत के आधार पर अध्यापकों के प्रति तथा स्कूल के प्रति कुठांए स्थापित कर लेते हैं जैसे के दूरगामी परिणाम कभी अच्छे नहीं निकलते। उन्होंने कहा कि वे माता-पिता जो अपने बच्चे को अध्यापकों को सौंप देते हैं उनका विकास उसी प्रकार होता है जैसे कृष्ण का हुआ था।
वर्तमान में शिक्षा क्षेत्र की अनेकों समस्याओं को तथा विशेष कर गणित विषय की समस्या का मूल कारण संयुक्त परिवारों का विघटन है। इस कारण से अनेक बच्चे आज प्यार के लिए भटकते रहते हैं और अक्सर पथ विचलित हो जाते हैं। इसके साथ-ही-साथ उन्होंने अभिभावकों को यह जानकारी दी की वे किस प्रकार एचपीएस के बच्चों को समय-समय पर इवैल्यूऐट करेंगे तथा किस प्रकार वे गणित, सांईस आदि विषयों के लिए प्रशिक्षण देंगे।
बच्चों को केवल शैक्षिक दृष्टि से ही न देखें अपितु उनके दिनभर आचार, विचार तथा व्यवहार का भी अवलोकन करें तथा उसे अच्छा देखें नहीं दिखें। विद्यालय जाकर बच्चे की रिपोर्ट लें व दें। प्रत्येक माता-पिता यह प्रयास करेें कि उनका बच्चा प्रतिदिन यह सूचि बनाए कि मुझे यह आता है और यह नहीं आता है। यह जरूर ध्यान करे कि वह अपनी समस्यांए अपने टीचर से कहता है अथवा नहीं।
इस प्रकार अध्यापकों की तीन घंटे की वर्कशाप में उन्होंने अध्यापकों को सीबीएसई की शिक्षा कार्यविधि के बारे में जानकारी दी तथा शिक्षक किस प्रकार स्वयं का विकास करके ही बच्चों को विकास कर सकता है। उन्होंने की यदि टीचर की चैकिंग के उपरान्त यदि कोई गल्ती रह जाती है तो वह गल्ती पीढिय़ों तक चलती रहती है। विद्यालय निदेशक एवं प्राचार्य आचार्य रमेश सचदेवा ने बताया कि इस वर्ष अध्यापकों के प्रशिक्षण तथा बच्चों के सर्वांगीन विकास के लिए विशेष कार्यशालांए देश के विभिन्न शिक्षाविद्दों द्वारा लगाई जांऐगी तथा डबवाली को ऐजूकेश्न सीटी बनाने का वे एचपीएस की ओर से विशेष प्रयास किया जाता रहेगा।

मंगलवार, 13 अप्रैल 2010

एक ही गौत्र में शादी को वैज्ञानिक दृष्टि से भी अनुचित माना जाता है --अजय सिंह चौटाला

डबवाली - ग्रामीण आंचल में खेले जाने वाले पारम्परिक खेल दिनों-दिनों पिछड़ते जा रहे हैं और हुड्डा सरकार की ओर से इन खेलों को बढ़ावा देने के लिए कोई प्रयास नहीं किए गए। इनेलो इन खेलों को बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत है और अगले वर्ष होने वाले विश्व कबड्डी प्रतियोगिता का एक मैच डबवाली शहर में करवाया जाएगा। यह बात इनेलो के प्रधान महासचिव व स्थानीय विधायक डॉ. अजय सिंह चौटाला ने कही। वे आज पार्टी कार्यालय में हलके के लोगों की समस्याऐं सुनने से पूर्व पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
एक सवाल के जवाब में डॉ. चौटाला ने कहा कि एक ही गौत्र में शादी को वैज्ञानिक दृष्टि से भी अनुचित माना जाता है और हमारी वैदिक संस्कृति भी यही रही है कि सबगौत्र और दूधगौत्र में विवाह न किया जाए। उन्होंने कहा कि खाप पंचायतों का अतीत में एक गौरवशाली इतिहास रहा है और हत्या तक के मामलों को पंचायतें आपस में मिल बैठकर सुलझाती रही हैं। उन्होंने कहा कि सामाजिक मामलों को निपटाने के लिए राज्य सरकार को भी पहल करनी चाहिए।
पुरानी सामाजिक परम्पराओं व संस्कारों की रक्षा के लिए हिन्दू विवाह अधिनियम में संशोधन किए जाने को लेकर हुड्डा सरकार राज्य विधानसभा में अगर कोई प्रस्ताव लाती है तो इनेलो इसका समर्थन करेगी। इनेलो विधायक ने कहा कि हरियाणा सरकार व मुख्यमन्त्री की इस मामले में चुप्पी बेहद निन्दनीय है और सरकार को इस मामले में अपना स्टैंड स्पष्ट करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पंचायतें समाज को जोडऩे में अहम् भूमिका निभाती रही हैं और अब भी उसे आपसी पे्रम-प्यार और भाईचारा बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए जिससे सामाजिक परम्पराऐं व संस्कार भी कायम रह सकें और समाज में कटुता व टकराव की स्थिति भी पैदा न हो। इनेलो विधायक ने प्रदेश में दिनोंदिन पैदा हो रहे बिजली-पानी संकट और बिगड़ती कानून व्यवस्था की स्थिति पर भी गहरी चिन्ता जताते हुए कहा कि सरकार लोगों की मूलभूत समस्याओं और दिक्कतों को सुलझाने की तरफ कोई ध्यान नहीं दे रही है। उन्होंने कहा कि अभी गर्मी का मौसम शुरू हुआ है और अभी बिजली-पानी का इतना गम्भीर संकट बना हुआ है। प्रदेश में 60 प्रतिशत जोहड़ सूख चुके हैं और पशुओं के पीने के पानी के लाले पड़ गए हैं। उन्होंने कहा कि अभी से यह हाल है तो इससे सहज ही अन्दाजा लगाया जा सकता है कि आने वाले दिनों में भीषण गर्मी के दौरान प्रदेश की क्या स्थिति होगी। विधायक अजय चौटाला ने कहा कि डबवाली में रेलवे फाटकों के मामले पर वह पूरी तरह से गंभीर हैं और इस समस्या का हल निकलवाने के लिए वह लगातार प्रयास कर रहे हैं और इस दिशा में संबंधित मंत्रालयों से बातचीत की है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में सड़कों का बुरा हाल है और सरकार सिरसा क्षेत्र के साथ लगातार भेदभाव बरत रही है। उन्होंने कहा कि डबवाली संगरिया जैसी मुख्य सड़क का बुरा हाल है वहीं गांवों को शहरों से जोडऩे वाली सड़कें जर्जर हो चुकी हैं। सवालों के जवाब में इनेलो नेता ने कहा कि प्रदेश में होने वाले पंचायत व स्थानीय निकायों के चुनाव पूरी तरह से भाईचारे के चुनाव होते हैं और लोगों को इन चुनावों में आपसी भाईचारा बरकरार रखते हुए मिल-जुलकर अच्छे प्रतिनिधियों का चयन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इनेलो ने स्थानीय निकाय चुनाव अपने चुनाव चिह्न पर लडऩे का अभी तक कोई फैसला नहीं किया है और अन्य दल अगर अपने चुनाव चिह्न पर स्थानीय निकाय चुनाव लड़ेंगे तो इनेलो भी इस पर विचार करेगी। इस अवसर पर राधेराम गोदारा, सरदार जगरूप सिंह सकता खेड़ा, महावीर सहारण, रणबीर सिंह राणा, टेक चंद छाबड़ा, गुरजीत सिंह, महेंद्र डूडी, गिरधारी बिस्सु, सर्वजीत मसीतां, बलदेव कुमार, दर्शन मान, गुरजीत सिंह, प्रहलाद सिंह सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित थे।

संतोषजनक परिणाम ने आने के कारण प्राचार्य व प्रबंधक समितियां भी दिन प्रतिदिन चिंतित- -बांसल

डबवाली- अंथक मेहनत के बावजूद भी संतोषजनक परिणाम ने आने के कारण केवल विद्यार्थी, अभिभावक और अध्यापक ही नहीं अपितु विद्यालयों के प्राचार्य व प्रबंधक समितियां भी दिन प्रतिदिन चिंतित होकर हर तलाशने में लगी रहती हैं। यह कटु सत्य शिक्षाविद्द एवं परामर्श दाता सरदार सुच्चा सिंह बांसल ने स्थानीय हरियाणा पब्लिक स्कूल तथा एचपीएस डे-बोर्डिंग सीनयिर सैंकण्डरी स्कूल में अपने वक्तव्य के दौरान कहे।
उन्होंने कहा कि मन भावन परिणाम पाने के लिए आत्म मंथन बहुत जरूरी है और दैनिक क्रिया कलापों के इलावा कार्य करने वाले ही अपनी उम्मीद से भी दुगना प्राप्त कर सकते हैं। डा. प्रेम चंद सचदेवा मैमोरियल आदर्श शिक्षा समिति द्वारा अपने क्षेत्र में बच्चों को अव्वल बनाने के लिए सरदार सुच्चा सिंह एवं उनकी टीम की सेवाओं के द्वारा तथा निरंतर अभिभावकों को भी नाना प्रकार के प्रयोंगों से अवगत करवाने का निर्णय लिया है।
आज अपने दो सत्रों में उन्होंने बच्चों को किस प्रकार वे समय प्रबंधन सीखें तथा दैनिक खुद का होम वर्क कैसे करें जैसे नाना प्रयोंगों से बच्चों को अवगत करवाया तथा उन्हें विद्यालय आने से पूर्व क्या करना चाहिए तथा विद्यालय आकर क्या करना चाहिए जैसे अनेंकों पहलुओं पर बच्चों को जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अध्यापक से कभी भी कोई बात छिपानी नहीं चाहिए। कभी भी अध्यापक से सवाल पूछते समय डरना नहीं चाहिए।
गणित में शतप्रतिशत् अंत प्राप्त करना बहुत जरूरी है परन्तु उसके किए टेबलज़ याद करना तथा अबाक्स के द्वारा बच्चों को तीव्र गणना के लिए उन्होंने प्रबंधक समिति को विशेष कक्षांए लगवाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि वे इस विद्यालय से पूर्व 1198 विद्यालयों में अपने सेवांए दे चुके हैं परन्तु एचपीएस को वे गोद ले रहे हैं और बच्चों को, अध्यापकों को तथा अभिभावकों को शिक्षा के लिए किस प्रकार के सार्थक प्रयास करने की जरूरत है तथा किस प्रकार की सकारात्मक सोच की जरूरत है के बारे में अवगत करवाया तथा आगे भी करवाते रहने का विश्वास दिलाया।
समय प्रबंधन, सिनक्रोनाईजेशन तथा स्टैस मैनेजमैंट जेसे अनेकों पहलुओं पर बच्चों व अध्यापकों का माग्रदर्शन किया। उन्होंनें बताया कि सुलेख कैसे सुधारा जाता है, रीडिंग स्किल कैसे विकसित की जाती है तथा स्वयं की वैक्बलैरी कैसे बनाई जाती है। दिनचर्या के आधार पर ही हम सफलता की कसौटी पर खरे उतर सकते हैं। अच्छी दिनचर्या बनाने के लिए किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए तथा माता-पिता को इसमें क्या सहयोग देना चाहिए इस विषय पर वे कल सांय 4.30 बजे एचपीएस डबवाली में अभिभावकों की भी एक लघु कार्यशाला का आयोजन करेंगे जिसमें अन्य विद्यालयों के अभिभावक भी उनसे मिल सकते हैं।
एचपीएस प्रबंधक समिति ने सत्र 2010-11 को आदर्श एवं व्यवहारिक शिक्षा ज्ञान के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। इस का सम्पूर्ण संचालन सरदार सुच्चा सिंह बंासल ने करने का विश्वास दिलाया।

बुधवार, 7 अप्रैल 2010

महिला बिल लोकतंत्र के लिए खतरा

सहारनपुर: समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने कहा है कि महिला आरक्षण बिल लोकतंत्र के लिए खतरा है। उन्होंने महिला विधेयक को मुसलमानों का वजूद मिटाने की साजिश करार देते हुए कहा, हम महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन इस बिल से गांव देहात की पिछड़ी व मुस्लिम महिलाएं कभी संसद नहीं जा सकतीं। सिर्फ धनाढ्य परिवार की महिलाओं को ही इसका लाभ होगा। मुलायम सिंह ने मंगलवार को यहां एक सम्मेलन और पत्रकारों से बातचीत में कहा कि केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा, केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण विधेयक की आड़ में महंगाई का मुद्दा ही दबा दिया है। उन्होंने कहा, तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी ने इस बिल का विरोध कर प्रशंसनीय काम किया है। सपा प्रमुख ने कहा, सूबे की हालत बेहद चिंताजनक है। देश के सबसे बड़े राज्य उप्र में एक ऐसी सरकार आई है, जिसने पूरे समाज को अलग-थलग करने की कोशिश की है। लोकतंत्र को खत्म करने वाली इस सरकार में एक लाख से ज्यादा लोगों को झूठे मुकदमों में जेल भेजा गया है।

शिक्षा अधिकार पर दबाव में केंद्र सरकार

नई दिल्ली-शिक्षा का अधिकार पर राज्यों के तेवर से केंद्र सरकार दबाव में दिखाई देने लगी है। सरकार की मुश्किल से जमीनी हकीकत पर उतारना है। इसमें सबसे बड़ी मुश्किल वित्तीय प्रबंधन है। केंद्र जहां इसका बड़ा जिम्मा राज्यों पर थोपना चाहता है वहीं बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और कर्नाटक जैसे गैर संप्रग राज्यों की ओर से सौ फीसदी केंद्रीय मदद की मांगें उठने लगी हैं। दबी जुबान संप्रग शासित राज्यों में भी सुगबुगाहट के बाद मानव संसाधन मंत्रालय नए सिरे से वित्तीय समीकरण तय करने पर विचार करने लगा है। शिक्षा के अधिकार को लागू कर केंद्र सरकार ने अपनी पीठ तो थपथपा ली पर राज्यों ने साफ कर दिया है कि सूबे के संसाधन पर केंद्र इसका श्रेय आसानी से नहीं ले पाएगा। गौरतलब है कि केंद्र ने शिक्षा के अधिकार के लिए होने वाली तैयारियों पर राज्य और केंद्र के बीच 55:45 फीसदी वित्तीय भार वहन करने का प्रस्ताव रखा था। उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती हों या बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार उन्होंने दूसरे ही दिन साफ कर दिया कि वह इसके लिए तैयार नहीं हैं। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और कर्नाटक सरकार भी उनके साथ खड़ी नजर आई। अपने सीमित संसाधन का हवाला देते हुए उन्होंने केंद्र से इसका पूरा भार उठाने को कहा है।

सकते में आया केंद्र बदलेगा रणनीति

नई दिल्ली-दंतेवाड़ा के नक्सली हमले में 76 जवानों को गंवाने के बाद सकते में आई केंद्र सरकार अब संयुक्त अभियान की रणनीति बदलने पर विचार को मजबूर हो गई है। आंतरिक सुरक्षा तंत्र को मानना पड़ा कि नक्सलियों के खिलाफ इस ऑपरेशन में खामी के चलते जवानों को जान से हाथ धोना पड़ा। अब तक के सबसे बड़े नक्सली हमले के बाद केंद्र सरकार को सख्त कार्रवाई का संकेत देने में ही छह घंटे से ज्यादा लग गए। प्रधानमंत्री निवास पर हुई राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की बैठक के बाद ही केंद्र सरकार नक्सलियों को मुंहतोड़ जवाब देने का ऐलान कर सकी। नक्सलियों के अब तक के सबसे बड़े हमले के बाद देश का पूरा आंतरिक सुरक्षा तंत्र ही नहीं, प्रधानमंत्री कार्यालय भी सकते में आ गया। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने गृह मंत्री पी. चिदंबरम को फोन कर घटना की पूरी जानकारी ली। इसके बाद शाम को राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की बैठक भी हुई, हालांकि बाद में प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा कि बैठक पहले से निर्धारित थी और इसमें चीन के साथ सीमा पर बुनियादी ढांचा तैयार करने पर चर्चा हुई, लेकिन इस बैठक के बाद ही केंद्र सरकार नक्सलियों के खिलाफ आक्रामक तेवरों में दिखाई पड़ी। बैठक के बाद गृह सचिव जीके पिल्लै ने दो टूक कहा कि सरकार इस हमले का मुंहतोड़ जवाब देगी। नक्सली हत्यारे हैं और उन पर किसी तरह की मुरव्वत नहीं की जाएगी। गृह मंत्री, रक्षा मंत्री, थल व वायु सेना अध्यक्ष और सुरक्षा सलाहकार सहित वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में हुई इस बैठक से पहले गृह मंत्री ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री व अधिकारियों से बात कर इस संयुक्त अभियान में चूक की बात स्वीकारी। इस घटना के बाद सरकार संयुक्त अभियान की मौजूदा रणनीति पर दोबारा विचार करने को मजबूर हो गई है। सुरक्षा परिषद की बैठक के बाद गृह सचिव जीके पिल्लै ने इस तरफ इशारा भी किया। उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन में कोई बड़ी चूक हुई है, जिसके चलते हमें इतने जवानों से हाथ धोना पड़ा। सूत्रों के अनुसार, संयुक्त अभियान को ज्यादा अचूक बनाने के लिए केंद्र अब हथियारों के साथ-साथ सर्विलांस उपकरणों पर ज्यादा जोर देगा। गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, नक्सल विरोधी अभियान में शामिल बलों के पास हथियारों की कमी नहीं है। जरूरत सर्विलांस सिस्टम को और मजबूत बनाने की है। इसके तहत साउंड सेंसर, नाइट विजन उपकरण, इंफ्रारेड डिवाइस जैसे साजो-सामान से सुरक्षा बलों को लैस किया जाएगा। फिलहाल नक्सल विरोधी अभियान में लगे सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट भी जारी कर दिया गया है। पीएमओ के प्रवक्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंहन को इस घटना से गहरा दु:ख व आघात पहुंचा है।

फिल्मों में आजकल अशीलता व नग्रता परोसी जा रही है -मेहर मित्तल

डबवाली- पंजाबी व हिन्दी फिल्मों में आजकल अशीलता व नग्रता परोसी जा रही है। इसलिए दर्शक फिल्मों से दूर होते जा रहे हैं। यह बात आज यहां प्रजापति ब्रह्मकुमार ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा स्थापित गीता पाठशाला में योगीराज सूर्य प्रकाश के साथ पहुंचे पंजाबी फिल्मों के प्रख्यात हास्य कलाकार मेहर मित्तल ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहे। उन्होंने बताया कि अपने 35 वर्षों के लम्बे कार्यकाल के दौरान 200 से अधिक फिल्मों में अभिन्य कर चुकें हैं तथा पिछले दिनों अपनी अन्तिम फिल्म की शूङ्क्षटग पूरी करके फिल्मों को अलविदा कह चुके हैं। श्री मित्तल इन दिनों ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के साथ मिलकर अध्यात्मिक प्रचार से जुड़े हुए हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें फिल्मों में अभिन्य के लिए फिल्मों का सबसे सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार दादा साहेब फाल्के आवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है। इस वार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि फिल्मों की लाईफ बड़ी चकाचौंध भरी है, दूर से यह बड़ी आसान नज़र आती है परन्तु हकीकत में बहुत मुश्किल है। उन्होंने इस चकाचौंध भरी लाईफ में कभी भी मास-मदिरा का सेवन नहीं किया। तदोपरान्त मेहर मित्तल ने गीता पाठशाला में उपस्थित संगतों को अपने अध्यात्मिक प्रवचनों से मन्त्र मुग्ध कर दिया। इस दौरान उन्होंने अपने अन्दाज में हास्य चुटकले सुनाकर श्रोताओं को लोटपोट कर दिया। इस अवसर पर नामधारी ऑटो स्पेयर पार्टस के संचालक दरिया ङ्क्षसह नामधारी ने भी उनसे मुलाकात की।

नक्सलियों ने भेदा खुफिया तंत्र

नई दिल्ली -नक्सलियों ने अब तक के सबसे बड़े इस हमले के लिए शिकंजा भी बेहद अचूक तैयार किया था। उन्होंने सुरक्षा बलों के खुफिया तंत्र में घुसपैठ कर उस इलाके में नक्सल ट्रेनिंग कैंप चलने की झूठी सूचना भिजवाई। कार्रवाई के लिए जब सुरक्षा बल पहुंचे तो उन पर तीन तरफ से घात लगा कर जबर्दस्त हमला किया गया। सुरक्षा बलों के खुफिया नेटवर्क में नक्सलियों की घुसपैठ कितनी तगड़ी थी, इस बात का अंदाजा इसी बात से लग जाता है कि वहां उपलब्ध सारी फोर्स इस सूचना पर कार्रवाई के लिए निकल पड़ी। गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि ऐसी सूचना पर फौरी कार्रवाई तभी होती है, जब सूत्र बहुत पुराना और विश्वसनीय हो। इसके बावजूद इतने बड़े अभियान पर निकलने से पहले उसे दूसरे सूत्रों से भी पक्का किया जाता है। इसलिए लगता है कि नक्सलियों ने वहां के सरकारी खुफिया नेटवर्क में बहुत जोरदार पैठ बनाई थी। सीआरपीएफ की डेढ़ कंपनी हमले के इरादे से निकल पड़ी। नक्सलियों की कामयाबी में कुछ योगदान वहां मौजूद सुरक्षा बलों की ओर से लिया गया रणनीतिक फैसला भी हो सकता है। ऐसे ऑपरेशन को संचालित करने वाले एक वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि आम तौर पर अभियान में शामिल सारे लोग एक साथ किसी जगह नहीं जाते। जबकि नक्सलियों ने जिस जगह सुरक्षा बलों को घेरकर मारा वह तीन तरफ से ऊंची पहाडि़यों से घिरा मैदान जैसा इलाका था। लिहाजा सुरक्षा बलों को पलटवार का कोई मौका भी नहीं मिल पाया। ऐसे में सुरक्षा बलों के पास सिर्फ छुपकर खुद को बचाना ही एकमात्र चारा था। जवानों ने पेड़ की ओट ली, लेकिन नक्सलियों ने वहां पहले से ही प्रेशर माइंस लगाई हुई थीं। ज्यादातर मौतें इन प्रेशर माइंस के फटने से हुईं। यह हमला नक्सलियों के बेहतर खुफिया तंत्र और गुरिल्ला रणनीति के साथ ही आधुनिकतम तकनीक के इस्तेमाल में बढ़ती उनकी महारथ के संकेत दे रहा है। इस हमले में नक्सलियों ने बारूदी सुरंग रोधी गाड़ी (एमपीवी) को भी उड़ा दिया। गृह मंत्रालय के अधिकारी बताते हैं कि नक्सलियों की ट्रेनिंग में इस्तेमाल होने वाला ऐसा दस्तावेज हाल ही में बरामद किया गया था जिसमें एमपीवी उड़ाने की तकनीक समझाई गई है, लेकिन यहां उन्होंने इस तकनीक का इस्तेमाल भी कर दिखाया। इस तकनीक में एमपीवी को उड़ाने के लिए काफी बड़ी मात्रा में विस्फोटक की जरूरत होती है।

गुरुवार, 25 मार्च 2010

गूंगी लड़की से छेड़छाड़

औढ़ां-गांव खाईशेरगढ़ में एक नाबालिग गूंगी लड़की के साथ छेड़छाड़ का मामला प्रकाश में आया है। ओढ़ां पुलिस ने लड़की के पिता बलबीर राम की शिकायत पर उसी गांव के रवींद्र कुमार पुत्र महावीर के खिलाफ बुरी नीयत से छेड़छाड़ करने का मामला दर्ज करके छानबीन शुरू कर दी है। बलबीर राम ने अपने बयान में बताया कि उसकी 15 वर्षीय लड़की विनोद कुमारी जो कि बोल नहीं सकती वो अपनी छोटी बहन मलकीत कौर के साथ घास लेने गई थी। जब वो घास काट रही थी तो सरसों के खेत से निकलकर रवींद्र उसके साथ छेड़छाड़ करने लगा और विनोद कुमारी का हाथ पकड़कर उसे सरसों के खेत में ले जाने लगा कि उसकी छोटी बहन मलकीत ने देख लिया और शोर मचा दिया। शोर सुनकर पड़ोसी खेत वाले किसान मदन लाल व उसके साथी भागकर आए तो उन्हें देखकर रवींद्र कुमार फरार हो गया। दोनों बहनों ने घर आकर यह बात अपने माता पिता को बताई तथा उसके पिता ने ओढ़ां थाना में आकर उसके खिलाफ मामला दर्ज करवा दिया। इस विषय में पूछे जाने पर राजमल एसआई ने बताया कि रवींद्र की तलाश जारी है और उसे शीघ्र ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

भाई ने बहन पर गोली चलाई

डबवाली-गांव गिदडख़ेड़ा में एक भाई ने गोली चला कर अपनी बहन को घायल कर दिया। जिसे घायल अवस्था में उपचार के लिए डबवाली के सिविल अस्पताल में लाया गया।
घायल 26 वर्षीय शुगना देवी पत्नी राजेन्द्र कुमार निवासी जण्डवाला बिश्नोइयां ने बताया कि उसकी ननद 25 वर्षीय राज बाला गांव गिदडख़ेड़ा में उसके भाई धर्मपाल के साथ शादीशुदा है। मंगलवार की रात को धर्मपाल और राजबाला के बीच किसी बात को लेकर झगड़ा हो गया। इसकी सूचना पाकर वह तथा उसका पति राजेन्द्र कुमार गांव गिदड़खेड़ा बुधवार सुबह पहुंच गये।
उन्होंने धर्मपाल को समझाने-बुझाने का प्रयास किया लेकिन गुस्से में आये धर्मपाल ने अपने माता-पिता पर ईंटें फेंकी और बाद में मकान की छत पर चढ़ गया और पिस्तौल से फायर कर दिया। पिस्तौल की गोली से निकले छर्रे उसकी छाती और आंख के निचले भाग पर लगे।
इस संबंध में चौटाला पुलिस चौकी के प्रभारी एएसआई सूरजभान से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि उन्हें घटना की शिकायत मिली है और वह मामले की जांच कर रहे हैं।
इस सन्दर्भ में घायल का इलाज कर रहे चिकित्सक डॉ. राजकुमार ने बताया कि शुगना देवी के छर्रा लगा है या नहीं इसको जानने के लिए पीडि़ता का स्वेब लेकर मधुबन प्रयोगशाला में जांच के लिए भेज दिया गया है।

बुधवार, 24 मार्च 2010

प्लॉटों एवं खाली भूमि पर किए जा रहे अवैध कब्जों के विरोध में अब पीडि़तो ने एकजुट होना शुरू किया

डबवाली- डबवाली में कुछ प्रभावशाली लोगों द्वारा प्लॉटों एवं खाली भूमि पर किए जा रहे अवैध कब्जों के विरोध में अब पीडि़तो ने एकजुट होना शुरू कर दिया है। बीती रात हरियाणा कर्मचारी महासंघ के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के अवास पर उन लोगों ने एक बैठक की, जिनके खाली पड़े प्लॉटों पर अवैध कब्जे हो चुके हैं। बैठक में अवैध कब्जे करने वालों के खिलॉफ आन्दोलन चलाने का निर्णय लिया गया तथा आगामी माह की 15 तारीख को पुन: एक बैठक का आयोजन कर प्लॉट बचाओ संघर्ष समिति का गठन किया जाऐगा तथा भू - माफिया का पर्दाफाश किया जाऐगा। आज जारी एक प्रैस विज्ञप्ति में श्री कपूर ने बताया कि इन तथाकथित भू-माफिया द्वारा डबवाली गांव, शिव नगर, प्रेम नगर व धालीवाल नगर में अवैध कब्जे किए गए हैं तथा इस सन्दर्भ में उन्होंने उपायुक्त सिरसा को एक पत्र भी लिखा है।

अवैध सम्बन्धों के चलते हुए आपसी झगड़े में 60 वर्षीय महिला घायल

डबवाली- उपमण्डल के गांव मसीतां में बीते दिवस देर रात्रि अवैध सम्बन्धों के चलते हुए आपसी झगड़े में 60 वर्षीय महिला के घायल होने का मामला प्रकाश में आया है। जिसे घायलावस्था में उपचार के लिए स्थानीय सिविल हस्पताल में दाखिल करवाया गया। उपचाराधीन महिला मथारी देवी ने बताया कि वह गांव मसीतां की निवासी है तथा संयुक्त परिवार में रहती है। उसके दो भतीजे मदन लाल एवं गुगन राम पुत्रान पाली राम हैं, दोनों इसी परिवार का हिस्सा हैं। गुगन राम विवाहित है तथा मानसिक तौर पर परेशानी के चलते कुछ समय से अस्वस्थ रहता है। जिसके चलते उसकी पत्नी सरोज के उसके दूसरे भतीजे 25 वर्षीय मदन लाल के साथ तथाकथित अवैध सम्बन्ध स्थापित हो गए हैं। बीते दिवस जब उन्हें इस बात का पता चला तो उन्होंने इस पर ऐतराज जताते हुए मदन लाल को समझाना चाहा। इससे क्षुब्ध मदन लाल, उसकी माता कलावन्ती एवं गुगन राम की पत्नी सरोज ने वहां पर पड़ी एक लाठी उसके सिर पर दे मारी तथा उसे घायल कर दिया। मारपीट का शोर सुनकर आस-पड़ोस के लोग एकत्रित हो गए तथा उसे इनके चंगुल से छुड़ाकर उपचार हेतु सिविल हस्पताल में दाखिल करवाया।

मोटरसाईकल सवार युवक गम्भीर रूप से घायल

डबवाली-पंजाब क्षेत्र के निकटवर्ती गांव डूमवाली के निकट हुए बाईक व टैम्पू के मध्य एक सड़क हादसे में मोटरसाईकल सवार युवक गम्भीर रूप से घायल हो गया। जबकि टैम्पू पर सवार अन्य पांच लोग घायल हो गए। सड़क हादसे की सूचना मिलते ही डबवाली जनसहारा सेवा संस्था के प्रधान आरके नीना तथा संस्था के सदस्य तुरन्त ऐम्बूलैंस लेकर घटनास्थल पर पहुंचे तथा सभी घायलों को उपचार हेतु स्थानीय सिविल हस्पताल में दाखिल करवाया। जहां पर प्राथमिक चिकित्सा के पश्चात हादसे में घायल 25 वर्षीय अमीं लाल पुत्र भगवान दास निवासी जैतो की गम्भीर हालत को देखते हुए उसे बठिण्डा रैफर कर दिया। इस हादसे में अन्य घायलों की पहचान सोनू पुत्र दर्शन सिंह एवं बनवारी लाल के तौर पर हुई है, शेष घायलों के विषय में जानकारी उपलब्ध नहीं हो पाई। इसी सड़क मार्ग पर देर सायं हुए एक अन्य हादसे में दो स्कूटर सवार युवक घायल हो गए। जिनकी पहचान जिम्मी व रिशु पुत्रान बलविन्द्र सिंह वार्ड नम्बर 11 डबवाली निवासी के रूप में हुई है।

सड़क हादसे में एक युवक की दर्दनाक मौत

डबवाली(सुखपाल) -डबवाली-मलोट सड़क मार्ग पर यहां से 8 किलोमीटर दूर स्थित गांव मैहना के समीप हुए सड़क हादसे में एक युवक की दर्दनाक मौत हो गई। जबकि तीन अन्य गम्भीर रूप से घायल हो गए। जिन्हें उपचार के लिए स्थानीय सिविल हस्पताल में दाखिल करवाया गया। हादसे की मिली जानकारी अनुसार एक कैंटर दिल्ली से फरूट व सब्जी लेकर कोटकपूरा के लिए चला था तथा उन्होंने यह फरूट व सब्जी मलोट, मुक्तसर व कोटकपूरा उतारनी थी कि गांव मैहना के निकट मलोट की ओर से आ रहे एक ट्रक ने कैंटर को जबरदस्त टक्कर मार दी। जिसके फलस्वरूप कैंटर व ट्रक की साईडें बिल्कुल खत्म हो गई। सिविल हस्पताल में उपचाराधीन विजय कुमार पुत्र चिमन लाल निवासी जलालाबाद ने बताया कि वह कैंटर का मालिक है तथा जब यह हादसा हुआ तब वह तथा सुनील पुत्र हन्स राज कैंटर में ही सो रहे थे। उक्त सड़क हादसे में 19 वर्षीय महेन्द्र सिंह पुत्र गुरनैब सिंह निवासी तपा मण्डी तहसील बरनाला की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे की सूचना मिलते ही डबवाली जनसहारा सेवा संस्था के अध्यक्ष आरके नीना ऐम्बूलैंस लेकर अपनी टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे तथा सभी घायलों को उपचार हेतु सिविल हस्पताल में दाखिल करवाया। जहां प्राथमिक उपचार के पश्चात घायलों की गम्भीर हालत को देखते हुए बठिण्डा रैफर कर दिया। हादसे की सूचना पर लम्बी पुलिस भी पहुंच गई तथा वह हादसे की जांच कर रही है।

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