न देने से लोगों में रोष पाया जा रहा है। आज प्रात: बठिंडा रोड पर स्थित गुरू नानक शटरिंग स्टोर के मालिक सुच्चा सिंह के घर अचानक दर्जन के करीब बंदर घुय आए और अन्होंने वहां जमकर उत्पाद मचाया। बंदरों के डर से परिवार केे सभी सदस्य घर से बाहर निकल गए। तभी सुच्चा सिंह ने अपने घर में पटाखों की आवाज कर बंदरों को बाहर निकाला। उधर, वार्ड 12 में स्थित गलियों में भी बंदरों ने आज खूब उत्पाद मचाया। शहरवासियों ने प्रशासन से इन बंदरों को पकड़ कर दूर जंगलों छोडऩे की मांग की है। ताकि शहरवासियों को इनके उत्पात से बचाया जा सके।
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गुरुवार, 15 मार्च 2012
बंदरों ने मचाया उत्पात, लोग परेशान
डबवाली- शहर व आसपास गांवों में बंदरों का आतंक बदस्तुर जारी है। बंदरों के आतंक से आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन प्रशासन द्वारा इस और ध्यान
न देने से लोगों में रोष पाया जा रहा है। आज प्रात: बठिंडा रोड पर स्थित गुरू नानक शटरिंग स्टोर के मालिक सुच्चा सिंह के घर अचानक दर्जन के करीब बंदर घुय आए और अन्होंने वहां जमकर उत्पाद मचाया। बंदरों के डर से परिवार केे सभी सदस्य घर से बाहर निकल गए। तभी सुच्चा सिंह ने अपने घर में पटाखों की आवाज कर बंदरों को बाहर निकाला। उधर, वार्ड 12 में स्थित गलियों में भी बंदरों ने आज खूब उत्पाद मचाया। शहरवासियों ने प्रशासन से इन बंदरों को पकड़ कर दूर जंगलों छोडऩे की मांग की है। ताकि शहरवासियों को इनके उत्पात से बचाया जा सके।
न देने से लोगों में रोष पाया जा रहा है। आज प्रात: बठिंडा रोड पर स्थित गुरू नानक शटरिंग स्टोर के मालिक सुच्चा सिंह के घर अचानक दर्जन के करीब बंदर घुय आए और अन्होंने वहां जमकर उत्पाद मचाया। बंदरों के डर से परिवार केे सभी सदस्य घर से बाहर निकल गए। तभी सुच्चा सिंह ने अपने घर में पटाखों की आवाज कर बंदरों को बाहर निकाला। उधर, वार्ड 12 में स्थित गलियों में भी बंदरों ने आज खूब उत्पाद मचाया। शहरवासियों ने प्रशासन से इन बंदरों को पकड़ कर दूर जंगलों छोडऩे की मांग की है। ताकि शहरवासियों को इनके उत्पात से बचाया जा सके।
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सड़क हादसे में युवकों की दर्दनाक मौत
डबवाली- बुधवार रात राष्ट्रीय राज मार्ग नं. 10 पर हुए एक सड़क हादसे में दो युवकों की दर्दनाक मौत हो गई। मृतकों की पहचान धर्मवीर गोदारा पुत्र रामदास तथा नरेश सोनी पुत्र प्यारेलाल निवासी ऐलनाबाद के रूप में हुई है। प्राप्त जानकारी अनुसार मृतक धर्मवीर गोदारा व नरेश सोनी मलोट से सिरासा एक विवाह समारोह में शामिल होने जा रहे थे कि गांव चोरमार व टप्पी के बीच उनकी कार सड़क पर खड़े एक ट्राले से टकरा गई। जिसमें दोनों की घटना स्थल पर ही मौत हो गई। वहां से गुजर रहे किसी राहगीर ने हादसे की सूचना डबवाली जन सहारा सेवा संस्था के प्रधान आरके नीना व निकटवर्ती पुलिस थाना ओढां को दी। सूचना पाकर संस्था के सदस्य व ओढां पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों के शवों को गाड़ी से बाहर निकाला गया। ओढां पुलिस द्वारा आवश्यक कार्रवाई उपरांत संस्था की एम्बुलैंस द्वारा दोनों शवों को सिरसा के सामान्य अस्पताल में पहुंचाया गया। पुलिस ने ट्राले को अपने कब्जे में ले लिया है और विभिन्न धराओं के तहत मामला दर्ज कर चालक की तलाश शुरू कर दी गई है। आज प्रात: दोनों शवों का पोस्टमार्टक करवाकर परिजनों को सौंप दिया गया।
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निक्का सिंह को सुनाई गई फांसी की सजा से उसके परिवार में मातम का माहौल
डबवाली-
गांव सांवतखेड़ा में वृद्धा की हत्या के मामले में अदालत द्वारा निक्का सिंह को सुनाई गई फांसी की सजा से उसके परिवार में मातम का माहौल है। वहीं दूसरी ओर मृतक महिला के परिजनों इसे न्यायालय का इंसाफ बता रहे है। हालांकि गांव इस मामले में पूरी तरह से खामोश है। वहां पर फांसी की चर्चा तो जरूर है लेकिन इस पर प्रतिक्रिया कोई है।
जिला अतिरिक्त सत्र न्यायालय सिरसा द्वारा मंगलवार को हत्या के मामले में दोषी करार देते हुए फांसी दिये जाने के हुकम के बाद निक्का सिंह के घर पर मातम पसरा हुआ है। परिजन न्यायालय के इस निर्णय से स्तब्ध है।
पत्रकारों की टीम गांव सांवत खेड़ा में निक्का सिंह के घर पहुंची तो निक्का सिंह की माता तेज कौर घर के एक कोने में चारपाई पर पड़ी पुत्र को मिली फांसी की सजा पर आंसू बहा रही थी। कुछ ऐसा ही हाल उसके भाई जग्गा सिंह, चचेरी बहन रानी कौर और गांव के चौकीदार का दायित्व निभा रहे ताया हंसराज का है।
पत्रकारों के समक्ष उसके आंखों से अश्रु धारा बहाते हुए माँ तेज कौर ने कहा कि उसके बेटे के खिलाफ षड्यंत्र करार देते कहा कि न तो गुरदेव कौर के परिवार के साथ कोई दुश्मनी थी और न ही कोई रंजिश थी। बल्कि उनके परिवारों में मेहनत मजदूरी कर अपने बच्चों को जवान किया है। उन्होंने कहा कि हम गरीबों को दो जून की रोटी के लाले पड़े रहते है। इस मामले को लेकर उनका परिवार बिखर गया है। निक्का सिंह की पत्नी हरजिंद्र कौर घटना के दो माह बाद मायके संगरिया चली गई। वहीं उसके भाई जग्गा सिंह ने नम आंखों से कहा कि न्याय तो कुदरत करेंगी लेकिन वे अपने भाई को इंसाफ दिलाने के लिए उच्च न्यायालय में अपील करेंगे।
वहीं दूसरी ओर मृतका गुरदेव कौर के परिवार में न्यायालय द्वारा 395 दिनों को छोटे अंतराल में दिये गये ऐतिहासिक फैसले से संतुष्टि का माहौल है। अपने घर पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए मृतका के भाई अजायब सिंह ने बताया कि अदालत ने तेजी से सौ फीसदी न्याय दे कर अपराधियों को सबक सिखाया है। इससे भविष्य में कुकृत्य को करने से पहले अदालत का फैसला जरूर याद आयेगा। वहीं उसके भतीजे शिवराज सिंह ने अपनी मृतक बुआ की तस्वीर हाथों में ले उसके अपने परिवार की प्रेरणास्त्रोत व बड़ी बजुर्ग बताते हुए कहा कि उसकी कमी महसूस होती है लेकिन अदालत के फैसले से उन्हें राहत मिली है।
इसके गांव के आम लोगों से बात करने पर निक्का सिंह को फांसी की सजा होने की जानकारी होने के बावजूद मुद्दई और मुजरिम एक ही गांव के होने के कारण कोई प्रतिक्रिया व्यक्त करने से बचते रहे।
जिला अतिरिक्त सत्र न्यायालय सिरसा द्वारा मंगलवार को हत्या के मामले में दोषी करार देते हुए फांसी दिये जाने के हुकम के बाद निक्का सिंह के घर पर मातम पसरा हुआ है। परिजन न्यायालय के इस निर्णय से स्तब्ध है।
पत्रकारों की टीम गांव सांवत खेड़ा में निक्का सिंह के घर पहुंची तो निक्का सिंह की माता तेज कौर घर के एक कोने में चारपाई पर पड़ी पुत्र को मिली फांसी की सजा पर आंसू बहा रही थी। कुछ ऐसा ही हाल उसके भाई जग्गा सिंह, चचेरी बहन रानी कौर और गांव के चौकीदार का दायित्व निभा रहे ताया हंसराज का है।
पत्रकारों के समक्ष उसके आंखों से अश्रु धारा बहाते हुए माँ तेज कौर ने कहा कि उसके बेटे के खिलाफ षड्यंत्र करार देते कहा कि न तो गुरदेव कौर के परिवार के साथ कोई दुश्मनी थी और न ही कोई रंजिश थी। बल्कि उनके परिवारों में मेहनत मजदूरी कर अपने बच्चों को जवान किया है। उन्होंने कहा कि हम गरीबों को दो जून की रोटी के लाले पड़े रहते है। इस मामले को लेकर उनका परिवार बिखर गया है। निक्का सिंह की पत्नी हरजिंद्र कौर घटना के दो माह बाद मायके संगरिया चली गई। वहीं उसके भाई जग्गा सिंह ने नम आंखों से कहा कि न्याय तो कुदरत करेंगी लेकिन वे अपने भाई को इंसाफ दिलाने के लिए उच्च न्यायालय में अपील करेंगे।
वहीं दूसरी ओर मृतका गुरदेव कौर के परिवार में न्यायालय द्वारा 395 दिनों को छोटे अंतराल में दिये गये ऐतिहासिक फैसले से संतुष्टि का माहौल है। अपने घर पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए मृतका के भाई अजायब सिंह ने बताया कि अदालत ने तेजी से सौ फीसदी न्याय दे कर अपराधियों को सबक सिखाया है। इससे भविष्य में कुकृत्य को करने से पहले अदालत का फैसला जरूर याद आयेगा। वहीं उसके भतीजे शिवराज सिंह ने अपनी मृतक बुआ की तस्वीर हाथों में ले उसके अपने परिवार की प्रेरणास्त्रोत व बड़ी बजुर्ग बताते हुए कहा कि उसकी कमी महसूस होती है लेकिन अदालत के फैसले से उन्हें राहत मिली है।
इसके गांव के आम लोगों से बात करने पर निक्का सिंह को फांसी की सजा होने की जानकारी होने के बावजूद मुद्दई और मुजरिम एक ही गांव के होने के कारण कोई प्रतिक्रिया व्यक्त करने से बचते रहे।
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बुधवार, 14 मार्च 2012
प्रकाश सिंह बादल पांचवीं बार बने पंजाब के मुख्यमंत्री
चंडीगढ़, -प्रकाश सिंह बादल ने बुधवार को पंजाब के मुख्यमंत्री के तौर पर पां
चवीं बार शपथ ली। लगातार दूसरी बार अकाली-भाजपा गठबंधन सरकार के उप मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने वाले उनके पुत्र सुखबीर बादल सहित कैबिनेट रैंक के 17 अन्य मंत्रियों ने भी आज शपथ ग्रहण की।
चंडीगढ़ से करीब 25 किलोमीटर दूर चप्पड़ चिड़ी में आयोजित शपथग्रहण समारोह में राज्यपाल शिवराज वी पाटिल ने बादल [मुख्यमंत्री], उनके 50 वर्षीय पुत्र सुखबीर [उप मुख्यमंत्री] और कैबिनेट रैंक के 16 मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। कैबिनेट रैंक के 16 मंत्रियों में से 14 शिअद से और चार भाजपा से हैं। शपथ ग्रहण समारोह में भाजपा, तृणमूल काग्रेस, राकापा, जनता दल [यू] और इनेलो सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता शामिल हुए।
इस अवसर पर मौजूद नेताओं में लालकृष्ण आडवाणी, नितिन गडकरी, राजनाथ सिंह, वसुंधरा राजे, नवजोत सिद्धू [सभी भाजपा से], मुकुल राय, रचपाल सिंह, केडी सिंह [तृणमूल काग्रेस], केंद्रीय मंत्री प्रफुल्ल पटेल [राकापा], जनता दल यू के प्रमुख शरद यादव और इंडियन नेशनल लोकदल [इनेलो] के नेता ओमप्रकाश चौटाला भी सम्मिलित थे। गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल भी इस मौके पर मौजूद थे।
बादल ने मंत्रिमंडल के गठन का काम आज एक साथ ही पूरा कर दिया जिसमें मुख्यमंत्री सहित 18 मंत्री ही हो सकते हैं। अकाली-भाजपा गठबंधन ने विधानसभा चुनाव में 68 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत प्राप्त किया था। काग्रेस को केवल 46 सीटें मिली थीं। बादल सीनियर ने 1997 से 2002 तक और 2007 से 2012 तक दो बार पाच साल का कार्यकाल पूरा किया है।
गठबंधन की आठ महिला विधायकों [शिअद 6 और भाजपा 2] में से केवल बीबी जागीर कौर को मंत्रिमंडल में शामिल किया है जो एसजीपीसी की पूर्व अध्यक्ष हैं। मंत्रिमंडल में बादल परिवार के चार सदस्य हैं। बादल सीनियर और उनके पुत्र के अतिरिक्त अन्य पारिवारिक सदस्य अदेश प्रताप सिंह कैरों [बादल सीनियर के दामाद] और विक्रम सिंह मजीठिया [सुखबीर के साले] हैं।
बादल ने ज्यादातर अपने पूर्व मंत्रियों में भरोसा जताया और सरकार में केवल चार नए चेहरों को ही जगह दी है। इनमें भगत चुनी लाल और अनिल जोशी [दोनों भाजपा से तथा सुरजीत सिंह रखड़ा और शरणजीत सिंह ढिल्लों- दोनों शिअद] हैं। रखड़ा ने पंजाब काग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह के पुत्र रनिंदर को हराया था। लोकसभा के पूर्व उपाध्यक्ष चरणजीत सिंह अटवाल को नवगठित विधानसभा का कार्यवाहक अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
सन् 1966 में पंजाब के पुनर्गठन के बाद से एसएडी ने भाजपा के साथ मिलकर सत्ता में लगातार दूसरी बार आकर एक रिकार्ड बनाया है। इस बार के चुनाव में गठबंधन ने अपने आकड़े में वृद्धि करते हुए 68 सीटें हासिल कीं, जबकि 2007 में इसे 67 सीटें मिली थीं। पिछली बार भाजपा के 19 विधायक थे, लेकिन इस बार उसके 12 विधायक ही रह गए।
बादल सीनियर और सुखबीर क्रमश: लांबी तथा जलालाबाद सीटों से निर्वाचित हुए थे। इन दोनों के अतिरिक्त शपथ लेने वालों में भगत चुनी लाल [भाजपा जालंधर पश्चिम], सरवन सिंह फिल्लौर [शिअद-करतारपुर आरक्षित], अदेश प्रताप कैरों [शिअद-पट्टी], अजीत सिंह कोहड़ [शिअद-शाहकोट], गुलजार सिंह रानिके [शिअद-अटारी] , मदन मोहन मित्तल [भाजपा-आनंदपुर साहिब], परमिंदर सिंह ढींडसा [शिअद-सुनाम], जनमेजा सिंह शेखों [शिअद-मौर], तोता सिंह [शिअद-धर्मकोट] , जागीर कौर [शिअद-भोलथ], सुरजीत कुमार ज्ञानी [भाजपा-फजिलका] , बिक्रम सिंह मजीठिया [शिअद-मजीठा], सिकंदर सिंह मलूका [शिअद-रामपुरा फूल], अनिल जोशी [भाजपा-अमृतसर उत्तर], सुरजीत सिंह रखड़ा [श्अिद-समाना] और शरणजीत सिंह ढिल्लों [शिअद-साहनीवाल] शामिल हैं।
पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन [पीसीए] का मोहाली स्थित स्टेडियम आज सूना था जहा पाच साल पहले बादल सरकार ने शपथ ली थी। इस बार शपथ ग्रहण के लिए चप्पड़ चिड़ी को चुना गया जहा शिअद-भाजपा सरकार ने अपने पिछले कार्यकाल में फतेह बुर्ज स्मारक की स्थापना की थी।
सिख इतिहास के अत्यंत सम्मानित योद्धा बंदा सिंह बहादुर ने अजीतगढ़ जिले के चप्पड़ चिड़ी में 1710 में मुगल सेना की कमान संभाल रहे वजीर खान को लड़ाई में हराया था। यह स्थान राज्य की राजधानी से 25 किलोमीटर दूर है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार अकाली-भाजपा गठबंधन अपने परंपरागत पंथिक एजेंडे को त्यागकर विकास और शाति के एजेंडे पर लगातार दूसरी बार सत्ता में आया है।
शपथ ग्रहण समारोह में पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और बिहार के मुख्यमंत्रियों ममता बनर्जी, जयललिता और नीतीश कुमार को भी आमंत्रित किया गया था, लेकिन अन्य कार्यो में व्यस्त होने का कारण बताकर उन्होंने आने में असमर्थता जताई,
चवीं बार शपथ ली। लगातार दूसरी बार अकाली-भाजपा गठबंधन सरकार के उप मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने वाले उनके पुत्र सुखबीर बादल सहित कैबिनेट रैंक के 17 अन्य मंत्रियों ने भी आज शपथ ग्रहण की।चंडीगढ़ से करीब 25 किलोमीटर दूर चप्पड़ चिड़ी में आयोजित शपथग्रहण समारोह में राज्यपाल शिवराज वी पाटिल ने बादल [मुख्यमंत्री], उनके 50 वर्षीय पुत्र सुखबीर [उप मुख्यमंत्री] और कैबिनेट रैंक के 16 मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। कैबिनेट रैंक के 16 मंत्रियों में से 14 शिअद से और चार भाजपा से हैं। शपथ ग्रहण समारोह में भाजपा, तृणमूल काग्रेस, राकापा, जनता दल [यू] और इनेलो सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता शामिल हुए।
इस अवसर पर मौजूद नेताओं में लालकृष्ण आडवाणी, नितिन गडकरी, राजनाथ सिंह, वसुंधरा राजे, नवजोत सिद्धू [सभी भाजपा से], मुकुल राय, रचपाल सिंह, केडी सिंह [तृणमूल काग्रेस], केंद्रीय मंत्री प्रफुल्ल पटेल [राकापा], जनता दल यू के प्रमुख शरद यादव और इंडियन नेशनल लोकदल [इनेलो] के नेता ओमप्रकाश चौटाला भी सम्मिलित थे। गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल भी इस मौके पर मौजूद थे।
बादल ने मंत्रिमंडल के गठन का काम आज एक साथ ही पूरा कर दिया जिसमें मुख्यमंत्री सहित 18 मंत्री ही हो सकते हैं। अकाली-भाजपा गठबंधन ने विधानसभा चुनाव में 68 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत प्राप्त किया था। काग्रेस को केवल 46 सीटें मिली थीं। बादल सीनियर ने 1997 से 2002 तक और 2007 से 2012 तक दो बार पाच साल का कार्यकाल पूरा किया है।
गठबंधन की आठ महिला विधायकों [शिअद 6 और भाजपा 2] में से केवल बीबी जागीर कौर को मंत्रिमंडल में शामिल किया है जो एसजीपीसी की पूर्व अध्यक्ष हैं। मंत्रिमंडल में बादल परिवार के चार सदस्य हैं। बादल सीनियर और उनके पुत्र के अतिरिक्त अन्य पारिवारिक सदस्य अदेश प्रताप सिंह कैरों [बादल सीनियर के दामाद] और विक्रम सिंह मजीठिया [सुखबीर के साले] हैं।
बादल ने ज्यादातर अपने पूर्व मंत्रियों में भरोसा जताया और सरकार में केवल चार नए चेहरों को ही जगह दी है। इनमें भगत चुनी लाल और अनिल जोशी [दोनों भाजपा से तथा सुरजीत सिंह रखड़ा और शरणजीत सिंह ढिल्लों- दोनों शिअद] हैं। रखड़ा ने पंजाब काग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह के पुत्र रनिंदर को हराया था। लोकसभा के पूर्व उपाध्यक्ष चरणजीत सिंह अटवाल को नवगठित विधानसभा का कार्यवाहक अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
सन् 1966 में पंजाब के पुनर्गठन के बाद से एसएडी ने भाजपा के साथ मिलकर सत्ता में लगातार दूसरी बार आकर एक रिकार्ड बनाया है। इस बार के चुनाव में गठबंधन ने अपने आकड़े में वृद्धि करते हुए 68 सीटें हासिल कीं, जबकि 2007 में इसे 67 सीटें मिली थीं। पिछली बार भाजपा के 19 विधायक थे, लेकिन इस बार उसके 12 विधायक ही रह गए।
बादल सीनियर और सुखबीर क्रमश: लांबी तथा जलालाबाद सीटों से निर्वाचित हुए थे। इन दोनों के अतिरिक्त शपथ लेने वालों में भगत चुनी लाल [भाजपा जालंधर पश्चिम], सरवन सिंह फिल्लौर [शिअद-करतारपुर आरक्षित], अदेश प्रताप कैरों [शिअद-पट्टी], अजीत सिंह कोहड़ [शिअद-शाहकोट], गुलजार सिंह रानिके [शिअद-अटारी] , मदन मोहन मित्तल [भाजपा-आनंदपुर साहिब], परमिंदर सिंह ढींडसा [शिअद-सुनाम], जनमेजा सिंह शेखों [शिअद-मौर], तोता सिंह [शिअद-धर्मकोट] , जागीर कौर [शिअद-भोलथ], सुरजीत कुमार ज्ञानी [भाजपा-फजिलका] , बिक्रम सिंह मजीठिया [शिअद-मजीठा], सिकंदर सिंह मलूका [शिअद-रामपुरा फूल], अनिल जोशी [भाजपा-अमृतसर उत्तर], सुरजीत सिंह रखड़ा [श्अिद-समाना] और शरणजीत सिंह ढिल्लों [शिअद-साहनीवाल] शामिल हैं।
पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन [पीसीए] का मोहाली स्थित स्टेडियम आज सूना था जहा पाच साल पहले बादल सरकार ने शपथ ली थी। इस बार शपथ ग्रहण के लिए चप्पड़ चिड़ी को चुना गया जहा शिअद-भाजपा सरकार ने अपने पिछले कार्यकाल में फतेह बुर्ज स्मारक की स्थापना की थी।
सिख इतिहास के अत्यंत सम्मानित योद्धा बंदा सिंह बहादुर ने अजीतगढ़ जिले के चप्पड़ चिड़ी में 1710 में मुगल सेना की कमान संभाल रहे वजीर खान को लड़ाई में हराया था। यह स्थान राज्य की राजधानी से 25 किलोमीटर दूर है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार अकाली-भाजपा गठबंधन अपने परंपरागत पंथिक एजेंडे को त्यागकर विकास और शाति के एजेंडे पर लगातार दूसरी बार सत्ता में आया है।
शपथ ग्रहण समारोह में पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और बिहार के मुख्यमंत्रियों ममता बनर्जी, जयललिता और नीतीश कुमार को भी आमंत्रित किया गया था, लेकिन अन्य कार्यो में व्यस्त होने का कारण बताकर उन्होंने आने में असमर्थता जताई,
'परमात्मा चाहता था कि जो सर्वे मैंने किया, वह सच साबित हो जाए'
http://youngflamenews.blogspot.in/2012/03/65.html
डबवाली (यंग फ्लेम) चुनाव चाहे लोकसभा के हों, या विधानसभा के, या फिर स्थानीय निकाय के। हर बार चुनावों में राजनीतिक पंडित या विश्लेषक अपने-अपने अनुमान लगाते हैं। बड़े-बड़े मीडिया ग्रुप, टीवी चैनल आदि प्री-पोल अथवा एग्जिट पोल करवाते हैं। इस बहाने यह अनुमान लगाने की कोशिश की जाती है कि परिणाम क्या रहेगा। अनेक वर्षों से हम देखते आए हैं कि ऐसे एग्जिट पोल मुंह के बल गिरे हैं। मतदाता आजकल बेहद समझदार हो गया है। वह किसी को भी अपने दिल की थाह नहीं देता। ऐसे में यह अंदाजा लगाना बड़ा कठिन हो जाता है कि चुनाव में कौनसा दल विजयी होगा या फिर किसकी सरकार आएगी। हालिया पंजाब विधानसभा चुनाव की बात करें तो सब जानते हैं कि पूरे देश का मीडिया, सभी राजनीतिक जानकार, कांग्रेसी और यहां तक कि कुछ हद तक अकाली व भाजपाई भी अंदरखाने यही कह-सुन रहे थे कि इस बार तो कांग्रेस पार्टी की ही सरकार आएगी। असल में बहुत हद तक उनका अनुमान पंजाब के 46 साल के रिकार्ड पर टिका था। यह रिकार्ड चीख-चीखकर बोल रहा था कि पंजाब में आज तक कभी कोई सरकार दोबारा सत्ता में नहीं आई। यानी 5 साल कांग्रेस तो 5 साल अकाली-बीजेपी। लेकिन असलियत क्या है, वास्तविक परिणाम क्या रहने वाले हैं, उनके पीछे कारक क्या रहेंगे, क्या-क्या फैक्टर काम करेंगे और कौन-कौनसे नहीं करेंगे, इन सब बातों का गहन विश्लेषण किसी ने नहीं किया था। और, जिसने किया, वह आज पूरे पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के इस हिस्से में छा गया है। हालांकि विश्लेषण और भी बड़े-बड़े राजनीतिक पंडितों ने किए, मगर जैसे मां सरस्वती उनकी ही जुबान पर विराजमान होनी थीं। यह हैं, डबवाली निवासी तथा सहारण होटल के संचालक व वरिष्ठ पत्रकार महावीर सहारण। पिछली अनेक बार की तरह इस बार भी पंजाब विधानसभा 2012 चुनावों का परिणाम 6 मार्च को आने से लगभग 72 घंटे पहले श्री सहारण ने 'यंग फ्लेम' के माध्यम से जो राजनीतिक विश्लेषण किया था, वह लगभग अक्षरश: सत्य साबित हुआ है। बादल सरकार की वापिसी किसी करिश्मे से कम नहीं कहीं जा सकती है। तमाम मीडिया, ंजाब की नौकरशाही व प्रदेश की अधिकांश जनता द्वारा यह दावा किया जा रहा था कि कांग्रेस शत-प्रतिशत जीत रही है। लेकिन महावीर सहारण तथ्यों सहित अपनी बात पर अडिग थे कि किसी भी सूरत में कांग्रेस का सत्ता में आना मुमकिन नहीं है। अब चुनाव परिणामों के बाद श्री सहारण से एक विशेष बातचीत हमने 'यंग फ्लेम' के पाठकों के लिये की। प्रस्तुत हैं,
उक्त बातचीत के मुख्य अंश:
सहारण साहब, आपने जो पंजाब की 117 सीटों का आंकलन किया था, यह लगभग पूरी तरह सटीक रहा। यह कैसे संभव हुआ?
मैं विगत 3 दशकों से पंजाब, हरियाणा, राजस्थान के चुनावों के बारे में आंकलन कर रहा हूं और हर बार मैंने जो आंकलन किया है, उनके नतीजे लगभग उसके मुताबिक ही आये हैं। सबसे पहले मैंने 1980 में उत्तर भारत के जो 9 राज्यों में चुनाव हुए थे, तब चुनाव नतीजों के बारे में नवभारत टाइम्स ने एक प्रश्नावली देकर प्रतियोगिता करवाई थी, जिसमें पूरे देश में मुझे दूसरा स्थान प्राप्त हुआ था। उस समय मेरी उम्र मात्र 15 वर्ष थी तथा इसके बाद मैं लगातार जहां भी चुनाव हो रहे होते हैं, उन हल्कों में खड़े उम्मीदवारों की स्थिति, जातिगत समीकरण, भीतरघात, मुख्य पार्टी की करगुजारी, उम्मीदवारों द्वारा चलाया गया चुनाव अभियान आदि प्रत्येक पहलू का बारीकी से अध्ययन करने के बाद उस हल्के का संभावित नतीजा तैयार करता हूं तथा निष्पक्ष रूप से जब यह आंकलन करता हूं, तभी नतीजा सटीक आता है। यह हैरानी की बात है कि पंजाब प्रदेश की सभी सरकारी एजेंसियां, भारत सरकार की सरकारी एजेंसियां और यहां तक कि सभी न्यूज़ चैनल्स का ओपीनियन पोल, सभी समाचार पत्र और अकाली-भाजपा के अधिकांश समर्थक भी राज्य में कांग्रेस सरकार आने की बात कर रहे थे, परंतु हुआ इसके बिल्कुलल उलट। मैंने जो विश्लेषण किया, उसमें हरेक हल्के में कौन उम्मीदवार जीत रहा है और क्यूं जीत रहा है, विस्तार से बताया। अब आप 4 मार्च का 'यंग फ्लेम' पड़े http://youngflamenews.blogspot.in/2012/03/65.html चुनावी नतीजों के साथ मिलान करें, आपको पता लग जाएगा कि चुनावी सर्वेक्षण कितना सटीक रहा है। अगर जिला और माझा-मालवा क्षेत्रवार बात करें, तो इसमें 1 प्रतिशत भी फर्क नहीं है, 100 फीसदी वही बात हुई है।
क्या आपने सारे पंजाब में घूमकर ये विस्तृत आंकलन तैयार किया था या किसी और माध्यम से?
जी नहीं, मैं कहीं नहीं जाता हूं, लेकिन हल्कावाइज फीडबैक विभिन्न सूत्रों से ले लेता हूं तथा क्षेत्र विशेष की आम जनता अपने उम्मीदवारों के बारे में, प्रमुख पार्टी की कारगुजारी के बारे में क्या सोचती है, इसके बारे में मेरा आंकलन, मेरे नतीजे को सही करने में मदद करता है।
हमें याद है कि जब राजस्थान में 1993 में विधानसभा चुनाव हुए थे, तब आपने लिखा था कि गंगानगर विधानसभा सीट से तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरोसिंह शेखावत तीसरे नंबर पर रहेंगे, यह केवल आपने ही कहा था। कैसे संभव हो पाई यह सटीक भविष्यवाणी?
उस वक्त श्रीगंगानगर जिले की सभी सीटों का मेरे द्वारा किया गया सर्वेक्षण एक समाचार पत्र में छपा था तथा उस वक्त कोई कतरफा लहर नहीं थी। भादरा, टिब्बी, संगरिया से आज़ाद उम्मीदवार और हनुमानगढ़ से भाजपा दो सीटें पर जीती थी। किसी एक पार्टी की लहर वहां उस वक्त नज़र नहीं आ रही थी, कहीं कांग्रेस जीत रही थी, कहीं भाजपा। जिला श्रीगंगानगर की सभी सीटों का नतीजा मेरे आंकलन के मुताबिक ही रहा। उस वक्त संगरिया के बारे में मैंने लिखा था कि आजाद उम्मीदवार स. गुरजंटसिंह विजयी होंगे, भाजपा के शिवप्रकाश सहारण दो नंबर पर, तत्कालीन विधायक का. हेतराम तीन नंबर पर तथा कांग्रेस प्रत्याशी भजनलाल (तत्कालीन मुख्यमंत्री हरियाणा चौ. भजनलाल के रिश्तेदार) चौथे स्थान पर रहेंगे। जब नतीजा आया तो क्रम यही रहा। श्रीगंगानगर मे तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत के बारे मे आंकलन यही था कि वे तीसरे स्थान पर रहेंगे। कांग्रेस के राधेश्याम तथा जनता दल के सुरेंद्र राठौड़ में 2000 से कम वोटों का मार्जिन रहने का अनुमान लगाया था। नतीजा, राधेश्याम मात्र 1700 वोटों से जीते और भैरोंसिंह स्वत: ही तीसरे नंबर पर चले गये। हालांकि उस आंकलन में यह भी लिखा था कि भैरोंसिंह मौजूदा मुख्यमंत्री हैं और पुन: बनेंगे। लेकिन श्रीगंगानगर से वह पराजित होंगे और फिर से सीएम बने भी।
हमने यह भी सुना था कि पिछले विधानसभा चुनाव में भी आपने पंजाब की सीटों के बारे में अखबारों में छपवाया था और तब भी वही सीटें आई थीं, जो कि आपने पहले से भविष्यवाणी की थी?
मैंने कहा था कि वर्ष 2007 में हुए विधानसभा चुनावों में मालवा बैल्ट में अकाली दल को बुरी तरह से पराजित होना पड़ेगा। हालांकि तब कोई भी इस बात पर विश्वास नहीं कर रहा था तथा बठिंडा, मानसा, मोगा आदि जिलों की मालवा पट्टी में 33 में से शिअद-भाजपा को केवल 5 सीटें ही प्राप्त हुई थीं।
वर्ष 2009 में हरियाणा विधानसभा चुनावों में भी आपने जो भविष्यवाणी की थी, वह एकदम सही बैठी?
हरियाणा विधानसभा चुनाव में सभी सर्वेक्षण व अ$खबारी पंडित चौ. ओमप्रकाश चौटाला की इंडियन नेशनल लोकदल (इनैलो) को केवल 10-12 सीटों पर ही जीता हुआ मान रहे थे। लेकिन मैंने 32 सीटों पर इनैलो के जीतने का आंकलन किया था तथा भाजपा की 4 सीटों पर विजय दिखाई थी। 10 सीटों पर नज़दीकी मुकाबला बताया था। नतीजा भी हूबहू यही आया।
सहारण साहब, जब आपने बठिंडा से हरमिंद्रसिंह जस्सी के हारने की बात कही तो हमे भी यकीन नहीं हुआ। इस बात पर तो कोई विश्वास कर ही नहीं सकता था कि खुद डेरा सच्चा सौदा मुखी कि समधी होने केबावजूद वो कैसे हार सकते हैं?
बठिंडा से सरूपचंद सिंगला, मानसा से प्रेम मित्तल, संगरूर से प्रकाश गर्ग तथा फरीदकोट से दीप मल्होत्रा, डेरा बस्सी से एन.के.शर्मा, आदमपुर से पवन टिन्नू को चुनाव मैदान में उतारने की रणनीति उपमुख्यमंत्री सुखबीर बादल की थी। उस वक्त इसे कोई भी समझ नहीं पाया था, लेकिन मंैने इसको बखूबी भांप लिया था तथा एक ऐसा वर्ग, जो आम तौर पर कांग्रेस के पक्ष में मतदान करता है, ने जातिगत समीकरणों को तरजीह देते हुए शिअद के पक्ष में भारी मतदान किया। इसलिये इन सभी सीटों पर कांग्रेस की बुरी तरह से पराजय हुई तथा कोई भी आदमी 6 मार्च से पहले इस बात को स्वीकार करने को तैयार नहीं था। जहां तक बठिंडा की बात है, डेरा सच्चा सौदा प्रेमी फैक्टर वोट बैंक के खिला$फ गैर डेरा प्रेमी वोट बैंक लामबंद हो गया था तथा उन्होंने उत्साहजनक तरीके से मतदान किया, जोकि सरूप सिंगला की जीत का मुख्य कारण बना।
सहारण जी, आपने मनप्रीत बादल के गिदड़बाहा और मौड़ में तीसरे स्थान पर रहने की बात कही थी और यह बात भी शत-प्रतिशत सच साबित हुई है। इसके साथ ही पीपीपी द्वारा अकाली दल की बजाय कांग्रेस को नुकसान का आपका जो आंकलन था, वो वाकई बिल्कुल सही था और आज कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी द्वारा खुले तौर पर इसे स्वीकार भी किया जा रहा है।
मनप्रीत बादल ने सिर्फ विधानसभा हल्का गिदड़बाहा में ही कांगे्रेस का फायदा किया है, बाकी प्रदेश, खासकर मालवा में उनके द्वारा वामपंथियों से समझौता कांग्रेस की हार का बड़ा कारण बना है। क्योंकि वामपंथी परंपरागत रूप से कंग्रेस के पक्ष में मतदान करते रहे हैं, यह बात मतगणना यानी 6 मार्च से पहले कोई भी समझ नहीं पाया। जबकि मैंने पुरजोर तरीके से मुख्यमंत्री स. बादल साहब, उपमुख्यमंत्री सुखबीर बादल एवं सांसद हरसिमरत कौर बादल को कही कि मनप्रीत फैक्टर ही आपको सत्ता में वापसी करवा रहा है, जबकि आज तो यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी भी हार का ठीकरा पी.पी.पी. पर फोड़ रही हैं, लेकिन 6 मार्च से पहले उनके सलाहकार ये बात नहीं भांप पाये कि मनप्रीत से उन्हें कितना नुकसान होने जा रहा है। उल्टे कांग्रेस तो खुश थी कि मनप्रीत की वजह से शिअद-भाजपा गठबंधन हार रहा है।
भाजपा को कोई भी व्यक्ति 3-4 से अधिक सीटें नहीं दिखा रहा था, आपने ही उसके दहाई का आंकड़ा पार करने की बात कही थी। वो कैसे?
मेरे आंकलन में तो ये भी लिखा है कि भाजपा प्रत्याशी जहां चुनाव लड़ रहे हैं, ऐसी कम से कम 5-6 सीटें हैं, जिस पर कांग्रेस 3 नंबर पर है तथा वह भाजपा को 4-5 पर कैसे समेट सकती है? भाजपा को दर्जन सीटें मिलने के पीछे यही कारण मैंने भांपा। आमतौर पर सट्टा बाजार पर चुनावों के संबंध में लोग विश्वास करतेे हैं, लेकिन इस बार सट्टा बाजार के दावे भी धरे के धरे रह गये, ऐसे नतीजे सामने आये।
लोगों की स्मरण शक्ति बहुत कमजोर है, लोग जल्दी भूल जाते हैं। सट्टा बाजार का आंकलन मेरे मुताबिक कभी भी सही नहीं रहा। वर्ष 2009 में हरियाणा में सट्टा बाजार चौ. चौटाला को 12 सीटेें दर्शा रहा था, जबकि वस्तुत: 32 सीटें आईं। अब 5 मार्च तक सट्टा बाजार पंजाब में शिअद-भाजपा की सरकार बनाने वालों को 1 रू. के 5 रू. दे रहा था। क्या नतीजा आया? शिअद-भाजपा गठबंधन को 68 सीटें मिलीं, जोकि अपने आप में बड़ी जीत कही जा सकती है।
आपके मुताबिक शिरोमणी अकाली दल-भाजपा की हैरतअंगेज जीत के क्या कारण रहे?
मुख्यमंत्री प्रकाशसिंह बादल लगातार 5 साल तक जनता के बीच में रहे। विकास कार्यों की झड़ी उन्होंने लगाई। हालांकि कांग्रेस यही प्रचार करती रही कि हजारों करोड़ का कर्ज प्रदेश पर है। कांग्रेस के मुख्यमंत्री पद के दावेदार अमरेन्द्रसिंह कभी जनता के बीच नहीं गए तथा उन्हें चुनावी सभाओं में 'खुंडा' भेंट करके कांग्रेसी खुश होते रहे, लेकिन प्रदेश की जनता, जो कि आतंकवाद का दौर झेल चुकी है, ने इसे पसंद नहीं किया। मुख्यमंत्री बादल को सहयोगी के रूप में सुखबीर बादल व सांसद हरसिमरत बादल का भी बड़ा सहारा मिला। एक लाख युवाओं को मैरिट के आधार पर नौकरियां दिए जाने के कारण कांग्रेस द्वारा भ्रष्टाचार केआरोपों को लोगों ने स्वीकार नहीं किया। बाकी तमाम फैक्टर जो जीत का कारण रहे, वे हमने चुनाव पूर्व सर्वेक्षण में ही दर्शा दिए थे। अब मीडिया उन कारणों के बारे में अपनी लकीर पीट रहा है।
नतीजे आने के बाद जब आप मुख्यमंत्री प्रकाशसिंह बादल से मिले तो उनकी क्या प्रतिक्रिया थी?
मुख्यमंत्री प्रकाशसिंह बादल, उपमुख्यमंत्री सुखबीर बादल, सांसद हरसिमरत बादल से जब मैं मिला, तो उन्होंने बेहद हैरान होते हुए कहा कि कैसे आपने यह सब बता दिया, जबकि कोई भी इस बात के नजदीक तक नहीं था। मैंने कहा कि मेरे द्वारा किए जाने वाले तथ्यात्मक विश्लेषण की अबकी बार परीक्षा थी तथा परमात्मा ने इस परीक्षा में मुझे पास होने में मदद की है। परमात्मा की कृपा के अलावा कोई ऐसी चीज नहीं थी, जो अबकी बार मेरे द्वारा किए गए सर्वेक्षण को सही साबित कर सके।
डबवाली (यंग फ्लेम) चुनाव चाहे लोकसभा के हों, या विधानसभा के, या फिर स्थानीय निकाय के। हर बार चुनावों में राजनीतिक पंडित या विश्लेषक अपने-अपने अनुमान लगाते हैं। बड़े-बड़े मीडिया ग्रुप, टीवी चैनल आदि प्री-पोल अथवा एग्जिट पोल करवाते हैं। इस बहाने यह अनुमान लगाने की कोशिश की जाती है कि परिणाम क्या रहेगा। अनेक वर्षों से हम देखते आए हैं कि ऐसे एग्जिट पोल मुंह के बल गिरे हैं। मतदाता आजकल बेहद समझदार हो गया है। वह किसी को भी अपने दिल की थाह नहीं देता। ऐसे में यह अंदाजा लगाना बड़ा कठिन हो जाता है कि चुनाव में कौनसा दल विजयी होगा या फिर किसकी सरकार आएगी। हालिया पंजाब विधानसभा चुनाव की बात करें तो सब जानते हैं कि पूरे देश का मीडिया, सभी राजनीतिक जानकार, कांग्रेसी और यहां तक कि कुछ हद तक अकाली व भाजपाई भी अंदरखाने यही कह-सुन रहे थे कि इस बार तो कांग्रेस पार्टी की ही सरकार आएगी। असल में बहुत हद तक उनका अनुमान पंजाब के 46 साल के रिकार्ड पर टिका था। यह रिकार्ड चीख-चीखकर बोल रहा था कि पंजाब में आज तक कभी कोई सरकार दोबारा सत्ता में नहीं आई। यानी 5 साल कांग्रेस तो 5 साल अकाली-बीजेपी। लेकिन असलियत क्या है, वास्तविक परिणाम क्या रहने वाले हैं, उनके पीछे कारक क्या रहेंगे, क्या-क्या फैक्टर काम करेंगे और कौन-कौनसे नहीं करेंगे, इन सब बातों का गहन विश्लेषण किसी ने नहीं किया था। और, जिसने किया, वह आज पूरे पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के इस हिस्से में छा गया है। हालांकि विश्लेषण और भी बड़े-बड़े राजनीतिक पंडितों ने किए, मगर जैसे मां सरस्वती उनकी ही जुबान पर विराजमान होनी थीं। यह हैं, डबवाली निवासी तथा सहारण होटल के संचालक व वरिष्ठ पत्रकार महावीर सहारण। पिछली अनेक बार की तरह इस बार भी पंजाब विधानसभा 2012 चुनावों का परिणाम 6 मार्च को आने से लगभग 72 घंटे पहले श्री सहारण ने 'यंग फ्लेम' के माध्यम से जो राजनीतिक विश्लेषण किया था, वह लगभग अक्षरश: सत्य साबित हुआ है। बादल सरकार की वापिसी किसी करिश्मे से कम नहीं कहीं जा सकती है। तमाम मीडिया, ंजाब की नौकरशाही व प्रदेश की अधिकांश जनता द्वारा यह दावा किया जा रहा था कि कांग्रेस शत-प्रतिशत जीत रही है। लेकिन महावीर सहारण तथ्यों सहित अपनी बात पर अडिग थे कि किसी भी सूरत में कांग्रेस का सत्ता में आना मुमकिन नहीं है। अब चुनाव परिणामों के बाद श्री सहारण से एक विशेष बातचीत हमने 'यंग फ्लेम' के पाठकों के लिये की। प्रस्तुत हैं,
उक्त बातचीत के मुख्य अंश:
सहारण साहब, आपने जो पंजाब की 117 सीटों का आंकलन किया था, यह लगभग पूरी तरह सटीक रहा। यह कैसे संभव हुआ?
मैं विगत 3 दशकों से पंजाब, हरियाणा, राजस्थान के चुनावों के बारे में आंकलन कर रहा हूं और हर बार मैंने जो आंकलन किया है, उनके नतीजे लगभग उसके मुताबिक ही आये हैं। सबसे पहले मैंने 1980 में उत्तर भारत के जो 9 राज्यों में चुनाव हुए थे, तब चुनाव नतीजों के बारे में नवभारत टाइम्स ने एक प्रश्नावली देकर प्रतियोगिता करवाई थी, जिसमें पूरे देश में मुझे दूसरा स्थान प्राप्त हुआ था। उस समय मेरी उम्र मात्र 15 वर्ष थी तथा इसके बाद मैं लगातार जहां भी चुनाव हो रहे होते हैं, उन हल्कों में खड़े उम्मीदवारों की स्थिति, जातिगत समीकरण, भीतरघात, मुख्य पार्टी की करगुजारी, उम्मीदवारों द्वारा चलाया गया चुनाव अभियान आदि प्रत्येक पहलू का बारीकी से अध्ययन करने के बाद उस हल्के का संभावित नतीजा तैयार करता हूं तथा निष्पक्ष रूप से जब यह आंकलन करता हूं, तभी नतीजा सटीक आता है। यह हैरानी की बात है कि पंजाब प्रदेश की सभी सरकारी एजेंसियां, भारत सरकार की सरकारी एजेंसियां और यहां तक कि सभी न्यूज़ चैनल्स का ओपीनियन पोल, सभी समाचार पत्र और अकाली-भाजपा के अधिकांश समर्थक भी राज्य में कांग्रेस सरकार आने की बात कर रहे थे, परंतु हुआ इसके बिल्कुलल उलट। मैंने जो विश्लेषण किया, उसमें हरेक हल्के में कौन उम्मीदवार जीत रहा है और क्यूं जीत रहा है, विस्तार से बताया। अब आप 4 मार्च का 'यंग फ्लेम' पड़े http://youngflamenews.blogspot.in/2012/03/65.html चुनावी नतीजों के साथ मिलान करें, आपको पता लग जाएगा कि चुनावी सर्वेक्षण कितना सटीक रहा है। अगर जिला और माझा-मालवा क्षेत्रवार बात करें, तो इसमें 1 प्रतिशत भी फर्क नहीं है, 100 फीसदी वही बात हुई है।
क्या आपने सारे पंजाब में घूमकर ये विस्तृत आंकलन तैयार किया था या किसी और माध्यम से?
जी नहीं, मैं कहीं नहीं जाता हूं, लेकिन हल्कावाइज फीडबैक विभिन्न सूत्रों से ले लेता हूं तथा क्षेत्र विशेष की आम जनता अपने उम्मीदवारों के बारे में, प्रमुख पार्टी की कारगुजारी के बारे में क्या सोचती है, इसके बारे में मेरा आंकलन, मेरे नतीजे को सही करने में मदद करता है।
हमें याद है कि जब राजस्थान में 1993 में विधानसभा चुनाव हुए थे, तब आपने लिखा था कि गंगानगर विधानसभा सीट से तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरोसिंह शेखावत तीसरे नंबर पर रहेंगे, यह केवल आपने ही कहा था। कैसे संभव हो पाई यह सटीक भविष्यवाणी?
उस वक्त श्रीगंगानगर जिले की सभी सीटों का मेरे द्वारा किया गया सर्वेक्षण एक समाचार पत्र में छपा था तथा उस वक्त कोई कतरफा लहर नहीं थी। भादरा, टिब्बी, संगरिया से आज़ाद उम्मीदवार और हनुमानगढ़ से भाजपा दो सीटें पर जीती थी। किसी एक पार्टी की लहर वहां उस वक्त नज़र नहीं आ रही थी, कहीं कांग्रेस जीत रही थी, कहीं भाजपा। जिला श्रीगंगानगर की सभी सीटों का नतीजा मेरे आंकलन के मुताबिक ही रहा। उस वक्त संगरिया के बारे में मैंने लिखा था कि आजाद उम्मीदवार स. गुरजंटसिंह विजयी होंगे, भाजपा के शिवप्रकाश सहारण दो नंबर पर, तत्कालीन विधायक का. हेतराम तीन नंबर पर तथा कांग्रेस प्रत्याशी भजनलाल (तत्कालीन मुख्यमंत्री हरियाणा चौ. भजनलाल के रिश्तेदार) चौथे स्थान पर रहेंगे। जब नतीजा आया तो क्रम यही रहा। श्रीगंगानगर मे तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत के बारे मे आंकलन यही था कि वे तीसरे स्थान पर रहेंगे। कांग्रेस के राधेश्याम तथा जनता दल के सुरेंद्र राठौड़ में 2000 से कम वोटों का मार्जिन रहने का अनुमान लगाया था। नतीजा, राधेश्याम मात्र 1700 वोटों से जीते और भैरोंसिंह स्वत: ही तीसरे नंबर पर चले गये। हालांकि उस आंकलन में यह भी लिखा था कि भैरोंसिंह मौजूदा मुख्यमंत्री हैं और पुन: बनेंगे। लेकिन श्रीगंगानगर से वह पराजित होंगे और फिर से सीएम बने भी।
हमने यह भी सुना था कि पिछले विधानसभा चुनाव में भी आपने पंजाब की सीटों के बारे में अखबारों में छपवाया था और तब भी वही सीटें आई थीं, जो कि आपने पहले से भविष्यवाणी की थी?
मैंने कहा था कि वर्ष 2007 में हुए विधानसभा चुनावों में मालवा बैल्ट में अकाली दल को बुरी तरह से पराजित होना पड़ेगा। हालांकि तब कोई भी इस बात पर विश्वास नहीं कर रहा था तथा बठिंडा, मानसा, मोगा आदि जिलों की मालवा पट्टी में 33 में से शिअद-भाजपा को केवल 5 सीटें ही प्राप्त हुई थीं।
वर्ष 2009 में हरियाणा विधानसभा चुनावों में भी आपने जो भविष्यवाणी की थी, वह एकदम सही बैठी?
हरियाणा विधानसभा चुनाव में सभी सर्वेक्षण व अ$खबारी पंडित चौ. ओमप्रकाश चौटाला की इंडियन नेशनल लोकदल (इनैलो) को केवल 10-12 सीटों पर ही जीता हुआ मान रहे थे। लेकिन मैंने 32 सीटों पर इनैलो के जीतने का आंकलन किया था तथा भाजपा की 4 सीटों पर विजय दिखाई थी। 10 सीटों पर नज़दीकी मुकाबला बताया था। नतीजा भी हूबहू यही आया।
सहारण साहब, जब आपने बठिंडा से हरमिंद्रसिंह जस्सी के हारने की बात कही तो हमे भी यकीन नहीं हुआ। इस बात पर तो कोई विश्वास कर ही नहीं सकता था कि खुद डेरा सच्चा सौदा मुखी कि समधी होने केबावजूद वो कैसे हार सकते हैं?
बठिंडा से सरूपचंद सिंगला, मानसा से प्रेम मित्तल, संगरूर से प्रकाश गर्ग तथा फरीदकोट से दीप मल्होत्रा, डेरा बस्सी से एन.के.शर्मा, आदमपुर से पवन टिन्नू को चुनाव मैदान में उतारने की रणनीति उपमुख्यमंत्री सुखबीर बादल की थी। उस वक्त इसे कोई भी समझ नहीं पाया था, लेकिन मंैने इसको बखूबी भांप लिया था तथा एक ऐसा वर्ग, जो आम तौर पर कांग्रेस के पक्ष में मतदान करता है, ने जातिगत समीकरणों को तरजीह देते हुए शिअद के पक्ष में भारी मतदान किया। इसलिये इन सभी सीटों पर कांग्रेस की बुरी तरह से पराजय हुई तथा कोई भी आदमी 6 मार्च से पहले इस बात को स्वीकार करने को तैयार नहीं था। जहां तक बठिंडा की बात है, डेरा सच्चा सौदा प्रेमी फैक्टर वोट बैंक के खिला$फ गैर डेरा प्रेमी वोट बैंक लामबंद हो गया था तथा उन्होंने उत्साहजनक तरीके से मतदान किया, जोकि सरूप सिंगला की जीत का मुख्य कारण बना।
सहारण जी, आपने मनप्रीत बादल के गिदड़बाहा और मौड़ में तीसरे स्थान पर रहने की बात कही थी और यह बात भी शत-प्रतिशत सच साबित हुई है। इसके साथ ही पीपीपी द्वारा अकाली दल की बजाय कांग्रेस को नुकसान का आपका जो आंकलन था, वो वाकई बिल्कुल सही था और आज कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी द्वारा खुले तौर पर इसे स्वीकार भी किया जा रहा है।
मनप्रीत बादल ने सिर्फ विधानसभा हल्का गिदड़बाहा में ही कांगे्रेस का फायदा किया है, बाकी प्रदेश, खासकर मालवा में उनके द्वारा वामपंथियों से समझौता कांग्रेस की हार का बड़ा कारण बना है। क्योंकि वामपंथी परंपरागत रूप से कंग्रेस के पक्ष में मतदान करते रहे हैं, यह बात मतगणना यानी 6 मार्च से पहले कोई भी समझ नहीं पाया। जबकि मैंने पुरजोर तरीके से मुख्यमंत्री स. बादल साहब, उपमुख्यमंत्री सुखबीर बादल एवं सांसद हरसिमरत कौर बादल को कही कि मनप्रीत फैक्टर ही आपको सत्ता में वापसी करवा रहा है, जबकि आज तो यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी भी हार का ठीकरा पी.पी.पी. पर फोड़ रही हैं, लेकिन 6 मार्च से पहले उनके सलाहकार ये बात नहीं भांप पाये कि मनप्रीत से उन्हें कितना नुकसान होने जा रहा है। उल्टे कांग्रेस तो खुश थी कि मनप्रीत की वजह से शिअद-भाजपा गठबंधन हार रहा है।
भाजपा को कोई भी व्यक्ति 3-4 से अधिक सीटें नहीं दिखा रहा था, आपने ही उसके दहाई का आंकड़ा पार करने की बात कही थी। वो कैसे?
मेरे आंकलन में तो ये भी लिखा है कि भाजपा प्रत्याशी जहां चुनाव लड़ रहे हैं, ऐसी कम से कम 5-6 सीटें हैं, जिस पर कांग्रेस 3 नंबर पर है तथा वह भाजपा को 4-5 पर कैसे समेट सकती है? भाजपा को दर्जन सीटें मिलने के पीछे यही कारण मैंने भांपा। आमतौर पर सट्टा बाजार पर चुनावों के संबंध में लोग विश्वास करतेे हैं, लेकिन इस बार सट्टा बाजार के दावे भी धरे के धरे रह गये, ऐसे नतीजे सामने आये।
लोगों की स्मरण शक्ति बहुत कमजोर है, लोग जल्दी भूल जाते हैं। सट्टा बाजार का आंकलन मेरे मुताबिक कभी भी सही नहीं रहा। वर्ष 2009 में हरियाणा में सट्टा बाजार चौ. चौटाला को 12 सीटेें दर्शा रहा था, जबकि वस्तुत: 32 सीटें आईं। अब 5 मार्च तक सट्टा बाजार पंजाब में शिअद-भाजपा की सरकार बनाने वालों को 1 रू. के 5 रू. दे रहा था। क्या नतीजा आया? शिअद-भाजपा गठबंधन को 68 सीटें मिलीं, जोकि अपने आप में बड़ी जीत कही जा सकती है।
आपके मुताबिक शिरोमणी अकाली दल-भाजपा की हैरतअंगेज जीत के क्या कारण रहे?
मुख्यमंत्री प्रकाशसिंह बादल लगातार 5 साल तक जनता के बीच में रहे। विकास कार्यों की झड़ी उन्होंने लगाई। हालांकि कांग्रेस यही प्रचार करती रही कि हजारों करोड़ का कर्ज प्रदेश पर है। कांग्रेस के मुख्यमंत्री पद के दावेदार अमरेन्द्रसिंह कभी जनता के बीच नहीं गए तथा उन्हें चुनावी सभाओं में 'खुंडा' भेंट करके कांग्रेसी खुश होते रहे, लेकिन प्रदेश की जनता, जो कि आतंकवाद का दौर झेल चुकी है, ने इसे पसंद नहीं किया। मुख्यमंत्री बादल को सहयोगी के रूप में सुखबीर बादल व सांसद हरसिमरत बादल का भी बड़ा सहारा मिला। एक लाख युवाओं को मैरिट के आधार पर नौकरियां दिए जाने के कारण कांग्रेस द्वारा भ्रष्टाचार केआरोपों को लोगों ने स्वीकार नहीं किया। बाकी तमाम फैक्टर जो जीत का कारण रहे, वे हमने चुनाव पूर्व सर्वेक्षण में ही दर्शा दिए थे। अब मीडिया उन कारणों के बारे में अपनी लकीर पीट रहा है।
नतीजे आने के बाद जब आप मुख्यमंत्री प्रकाशसिंह बादल से मिले तो उनकी क्या प्रतिक्रिया थी?
मुख्यमंत्री प्रकाशसिंह बादल, उपमुख्यमंत्री सुखबीर बादल, सांसद हरसिमरत बादल से जब मैं मिला, तो उन्होंने बेहद हैरान होते हुए कहा कि कैसे आपने यह सब बता दिया, जबकि कोई भी इस बात के नजदीक तक नहीं था। मैंने कहा कि मेरे द्वारा किए जाने वाले तथ्यात्मक विश्लेषण की अबकी बार परीक्षा थी तथा परमात्मा ने इस परीक्षा में मुझे पास होने में मदद की है। परमात्मा की कृपा के अलावा कोई ऐसी चीज नहीं थी, जो अबकी बार मेरे द्वारा किए गए सर्वेक्षण को सही साबित कर सके।
भाजपा गठबंधन को 65 सीटों पर बढ़त, बागी, भीतरघात व मनप्रीत के मोर्चें ने कांग्रेस को पीछे धकेला
महावीर सहारण
9354862355
डबवाली- पंजाब प्रदेश में मतदाता अब की बार रिवायत वाकई बदलने जा रहे है। अकाली-भाजपा गठजोड़ हैरानीजनक तौर पर लगातार दूसरी बार सता सम्भालने के नजदीक पहुंच गया है। प्रदेश भर में कहीं भी सतारूढ़ गठबंधन को एन्टी-एनकम्बैंसी फैक्टर का बड़ा नुकसान होने की कोई सूचना नहीं है। हालांकि चुनावी घोषणा से पूर्व कांग्रेस की बढ़त मानी जा रही थी। मनप्रीत बादल द्वारा अकालीदल से बगावत कांग्रेसी खेमे के लिए वरदान समझी जा रही थी । मालवा के बड़े इलाके को प्रभावित करने वाला डेरा सच्चा सौदा का समर्थक वोट बैंक भी कांग्रेस के पक्ष में एकतरफा माना जा रहा था। परंतु टिकट बंटवारे से कांग्रेस में हुई बड़ी बगावत से हालात पलटने शुरू हुए तथा उसके बाद प्रदेश की राजनीति में घटा प्रत्येक घटनाक्रम अकाली-भाजपा गठबंधन के पक्ष में होता चला गया। जैसे कि मनप्रीत बादल द्वारा वामपंथियों से समझौता कांग्रेस के लिए बेहद नुकसान देह रहा। साथ ही सिरसा के सच्चा सौदा डेरा ने भी कांग्रेस के पक्ष में पिछले चुनाव की तरह स्पष्ट ऐलान करने से इंकार कर दिया। तथा एक दर्जन सीटों पर डेरा प्रेमियों द्वारा अकाली दल गठबंधन के पक्ष में मतदान करने की पुख्ता सूचनाऐं है। प्रदेश में मनप्रीत बादल के नेतृत्व में 115 सीटों पर सांझा मोर्चा चुनाव लड़ा, जिन में 22 सीटों पर वामपंथियों ने उम्मीदवार उतारे। गौरतलब है कि वामपंथियों ने पिछले चुनाव में कांग्रेस का समर्थन किया था। मनप्रीत के मोर्चे की तरफ सतापक्ष से नाराज होने वाले काफी मतदाताओं का रूझान देखा गया। यह भी कांग्रेस के लिए नुकसान देह माना जा रहा है। चूंकि सांझा मोर्चा न बनता तो इन मतों का झुकाव स्वाभाविक रूप से कांग्रेस के पक्ष में होना था। इसके अलावा चुनाव आयोग द्वारा शुरूआती दौर में की गई जबरदस्त सख्ती अंत में खोखली साबित हुई तथा कथित रूप से पैंसों का जो खुला खेल हुआ उसमें भी कांग्रेस पिछड़ती दिखाई दी। कुल मिलाकर वरिष्ठतम मुख्यमंत्री स. प्रकाश सिंह बादल ने राजनीतिक चार्तुय का जैसा सटीक प्रदर्शन चुनावी चक्रव्यूह के प्रत्येक क्षेत्र में किया यह बेमिसाल कहा जा सकता है। एक-दो नेताओं को छोड़कर सभी नामवर नेताओं या उनके प्रभावशाली संबंधियों को चुनाव मैदान में उतारा। जोकि अधिकांश स्थानों पर जीत की ओर अग्रसर है। प्रदेश में प्रभावी किसान जत्थेबंदी प्रधानो ं के साथ-साथ संत समाज प्रमुखों को भी गठबंधन के पक्ष में चुनावी मुहिम चलाने हेतु रजामंद किया साथ ही डेरा प्रेमियों का एक हिस्सा भी अपने पक्ष करने में सफल रहे है कांग्रेस के मुकाबले सतारूढ़ गठबंधन का घोषणापत्र भी मतदाताओं को आकर्षित करने में सफल रहा। वहीं सुखबीर बादल व हरसिमरत कौर बादल के जोशीले भाषणों से जनसभाओं में अकाली कार्यकर्ताओं को उत्साहित होते देखा गया। वहीं कैप्टन अमरेंद्र सिंह का जादू बड़ी बगावत के चलते ढलता सा प्रतीत होता रहा। तथा राजेंद्र कौर भ_ल व जगमीत बराड़ जैसे दूसरे नेता प्रदेश में अपना प्रभाव नही छोड़ पाए।
माझा, दोआबा में हालांकि सतारूढ़ गठबंधन पिछला प्रदर्शन नहीं दोहरा पा रहा है। वैसे भी जब किसी चुनाव में अगर बड़ी लहर न हो तो स्थानीय समीकरण ही जीत हार तय किया करते है। ऐसे ही हालातों में बागी उम्मीदवार या भीतरघात चुनावी नतीजों को पूरी तरह से बदलने में सफल हो जाते है। परिसिमन के चलते चुनाव क्षेत्रों में हुई फेरबदल चुनावी नतीजों को प्रभावित कर रही है तथा सुच्चा सिंह छोटेपुर व हंसराज जोसन जैसे कई बागी प्रत्याशी दो-दो हलकों के नतीजों को प्रभावित कर रहे है। कांग्रेस के बागी उम्मीदवारों या भीतरघात से पार्टी को जिन सीटों पर यकीनन हार का सामना करना पड़ रहा है उनमें सुजानपुर, पठानकोट, गुरदासपुर, कांदिया, डेरा बाबा नानक, मजीठा, अमृतसर (पूर्वी), बाबा बकाला, जालंधर (उतरी), जालंधर(केंट), मुकेरिया, चब्बेवाल, बलाचौर, आनंदपुर साहिब, चमकौर साहिब, खरड़, डेरा बस्सी, फतेहगढ़ साहिब, अमलोह, साहनेवाल, बाघापुराना, फिरोजपुर शहर, जलालाबाद, बल्लुआना, गिदढ़बाहा, मलोट, कोटकपुरा, रामपुरा फूल, भदोड़, शुतराना,जीरा शामिल है। अकाली-भाजपा गठजोड़ को बागियों के चलते निम्रलिखित स्थानों पर हार का सामना करना पड़ सकता है। तरनतारन, आत्म नगर, अबोहर, घनौर, महलकलां, नवां शहर। डेरा बस्सी व फतेहगढ़ साहिब ऐसी सीटे है जहां अकाली दल एवं कांग्रेस दोनों के ही बागी है। इसके अलावा ऐसे हलके हैं जहां कांग्रेस छोड़कर पीपीपी की टिकट पर चुनाव लड़ रहे व सीपीआई, सीपीएम के चिन्ह पर चुनावी किस्मत आजमा रहे मजबूत प्रत्याशी अकाली दल गठबंधन की जीत का कारण बन रहे ळै। इसमें बठिंडा देहाती, भूच्चो मंडी, तलवंडी साबो, बुडलाडा, होशियारपुर, मानसा आदि है। बसपा भी फाजिल्का, आदमपुर तथा मलेरकोटला जैसी सीटों पर भारी तादाद में कांग्रेस के वोट बैंक में सेंध लगा रही है।
माझा में पिछली बार 21 सीटों पर सत्तारूढ़ गठबंधन को विजय प्राप्त हुई थी। अब थोड़ी कमजोरी यहां है। पठानकोट जिले की पठानकोट व सुजानपुर सीटों पर कांग्रेस की यकीनी हार है। भाजपा के अश्विनी शर्मा के लिए कांग्रेस के बागी अशोक शर्मा ने राह आसान कर दी है। जबकि सुजानपुर में भाजपा के दिनेश बब्बू, बागी कांग्रेसी नरेशपुरी पर भारी है। यहां कांग्रेस के विनय महाजन तीसरे स्थान पर है।भोआ में भाजपा एवं कांग्रेस के क्रमश: सीमा देवी व बलबीर राज दोनों को भीतरघात से जूझना पड़ रहा है। थोड़ी बढ़त कांग्रेस की यहां है। गुरदासपुर जिले में बटाला सीट पर अश्विनी सेखड़ी (कांग्रेस) की जीत तय है तो गुरदासपुर से अकालीदल के गुरबचन सिंह बब्बेहाली बढिय़ा काम एवं कांग्रेस के भीतरघात के सहयोग से आसान जीत दर्ज कर रहे है। दीना नगर में भाजपा कांग्रेस में नजदीकी मुकाबला है। कांग्रेस के बागी सुच्चा सिंह छोटेपुर ने कांदिया में जहां सेवा सिंह सेखवा (अकालीदल) की राह आसान कर दी। वहीं डेरा बाबा नानक से सूच्चा सिंह लंगाह (अकालीदल) को भी राहत दे रहे हैं। फतेहगढ़ चूडिय़ा में निर्मल सिंह काहलो (अकालीदल) कांग्रेस के तृप्त राजेंद्र सिंह बाजवां पर भारी पड़ रहे है। रिर्जव हलके हरगोबिंदपुर से भी अकालीदल के देशराज घुग्गा की कांग्रेस के बलविंद्र सिंह लाड़ी पर साफ बढ़त है। तरनतारन जिले में अकालीदल का दबदबा बरकरार है। तरनतारन हलका में अकाली बागी दविंद्र सिंह लाली का कांग्रेस के धर्मवीर अग्हिोत्री से मुकाबला है। यहां मौजूदा विधायक हरमीत सिंह संधु पिछे रह गए है। पट्टी से आदेश प्रताप केरो व खेमकरण से बिरसा सिंह बल्टोहा साफ जीत दर्ज कर रहे है। खडूर साहिब हलका से मांझे के दिग्गज अकाली नेता रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा कांग्रेसी रमनजीत सिंह पर भारी माने जा रहे है। अमृतसर जिला में सत्तारूढ़ गठबंधन को बढ़त हासिल हो रही है। अजनाला से अकाली अमरपाल बोनी कांग्रेस के हरप्रताप अजनाला से आगे है। सांसद डॉ. रतन सिंह अजनाला का यह क्षेत्र अकाली दल का परम्परागत गढ़ माना जाता है। मजीठा में विक्रम सिंह मजीठिया बड़ी जीत दर्ज कर रहे है। राजा सांसी में सुखविंद्र सिंह सरकारिया व अकाली वीर सिंह लोपोके में बड़ी टक्कर है। परंतु सरकारिया को थोड़ी बढ़त है। जंडियाला रिर्जव में भी इसी प्रकार का मामला है यहां भी सरदूल सिंह (कांग्रेस)व बलजीत सिंह जलाल (अकालीदल) में नजदीकी टक्कर है। अटारी रिर्जव में अकाली गुलजार सिंह राणिके आरामदायक स्थिति में है। तो बाबा बकाला रिजर्व में भी कांग्रेस की बगावत ने अकाली मनजीत सिंह मना को जीत के राह पर ला दिया है। अमृतसर (उतरी) में भाजपा के अनिल जोशी बेहद मजबूत है तो अमृतसर (पश्चिमी)में यहीं स्थिति कांग्रेस के राजकुमार वेरका की है। अमृतसर केंद्रीय में कांग्रेस के ओपी सोनी भाजपा के तरूण चुघ पर भारी पड़ रहे है। अमृतसर (पूर्वी) में डॉ. नवजोत कौर सिधु की राह कांग्रेस की लड़ाई ने आसान कर दी है। अमृतसर (दक्षिण) में अकाली उम्मीदवार इन्द्रवीर सिंह बुलारिया कांग्रेस के जसबीर सिंह डिम्पा पर भारी पड़ रहे है। हालांकि गुरप्रताप टिक्का (अकाली बागी) उनका नुकसान कर रहे है। माझा में अकाली-भाजपा 15 सीटों पर तथा कांग्रेस 6 पर बढ़त बना पायी है जबकि 4 स्थानों पर कड़ा मुकाबला है।
दोआबा के कपूरथला जिला के कपूरथला हलका में कांग्रेस के गुरजीत राणा को अकाली दल के सर्वजीत मक्कड़ ने कड़ी टक्कर दी है। पीपीपी के रघुवीर सिंह ने मुकाबला तिकोना बनाने का प्रयास किया। कुल मिलाकर गुरजीत राणा की राह आसान नहीं है। तो भुुलत्थ में बीबी जागीर कौर पिछली हार का बदला चुकाती प्रतीत हो रही है। सुल्तानपुर लोधी में अकाली डॉ. उपीन्द्रजीत कौर की जीत तय है। वहीं फगवाड़ा से भाजपा के पूर्व आईएएस सोम प्रकाश विधानसभा में पहुंच जाएंगे। जालंधर जिला हैरानी जनक नतीजे दे सकता है। नकोदर से अमरजीत समरा (कांग्रेसी) की हालत पतली है। अकाली गुरप्रताप सिंह बडाला अपने पिता कुलदीप बडाला की हार का बदला लेने के बेहद नजदीक माने जा रहे है। शाहकोट में भी अकाली दिग्गज अजीत सिंह कोहाड़ कांग्रेस के कर्नल सीडी सिंह कम्बोज पर भारी पड़ रहे है। फिल्लोर (सु.) व करतारपुर (सु.) में कांग्रेसी संतोख सिंह व जगजीत सिंह मजबूत स्थिति में है लेकिन आदमपुर मं अकाली व कांग्रेस दोनों ही प्रत्याशी बसपा से जुडे रहे है। यहां बसपा के साथ इनका तिकोना मुकाबला है लेकिन अकाली पवन टिनू को बढ़त है। जालंधर पश्चमी में सांसद पत्नी सुमन केपी जीत के नजदीक है। वहीं जालंधर केंदी्रय में मनोरंजन कालिया भी सीट बचा ले जा रहे है लेकिन जालंधर उतरी में कांग्रेस दिग्गज अवतार हैनरी को बागी दिनेश ढल्ल ने झटका दिया है। यहां भाजपा के केडी भंडारी की लॉटरी खुल रही है। जालंधर केंट में जगवीर सिंह बराड़ का पीपीपी छोडऩा घातक साबित हुआ है तथा प्रसिद्ध हॉकी खिलाड़ी प्रगट सिंह का स्कूप गोल में तबदील होने जा रहा है। होशियारपुर जिला के मुकेरियां हलके से कांग्रेस मुकाबले से बाहर है। यहां पूर्व विधानसभा स्पीकर केवल कृष्ण के पुत्र रजनीश बब्बी का भाजपा के अरूणेश शाकर से मुकाबला है। दसूहा में भाजपा के अमरजीत शाही व कांग्रेस के रमेश चंद्र डोगरा में कड़ी टक्कर है। शाम चौरासी (सु.)में कांग्रेस के चौधरी राम लुभाया की अकाली महेंद्र कौर जोश पर थोड़ी बढ़त हासिल है। होशियारपुर में भाजपा के तीक्षण सूद की प्रतिष्ठा दाव पर है। कांग्रेस के सुंदर शाम अरोड़ा उन्हें कड़ी टक्कर दे रहे है। परंतु वे भीतरघात से नहीं बच पाए है। चब्बेवाल (सु.)में अकाली सोहन सिंह ठंडल जीत रहे है तो उड़मुड़ में मुकाबला सख्त है। यहां अकाली प्रत्याशी को थोड़ी बगावत झेलनी पड़ी है। गढशंकर में लव कुमार गोल्ड़ी के लिए चिंताजनक खबरे है यहां भाजपा से सीट बदलकर अकालीदल ने सुरेंद्र सिंह राठा को मैदान में उतारा था। यह दाव अकाली दल के लिए चलता दिखाई दे रहा है। नवांशहर में कांग्रेस की गुरइकबाल कौर की जीत भी तय मानी जा रही है। जबकि बंगा (सु.) में सोहन सिंह अकालीदल व तरलोचन सिंह कांग्रेसी में पलड़ा थोडा कांग्रेस का झुका हुआ लग रहा है। बलाचोर में अकाली दल के चौ. नंद लाल जीत की और है दोआबा में 23 सीटों में कांग्रेस 9 सीटों, अकाली भाजपा 8 सीटों पर जीत दर्ज कर रही है। जबकि एक पर आजाद व 5 सीटों पर नजदीकी मुकाबला है।
अब बारी मालवा की है। मालवा को दो भागों में चुनावी स्थिति मुताबिक बांटा गया है। पटियाला, फतेहगढ़ साहिब, रोपड़, मोहाली जिलों की कुल 31 सीटें है। यह इलाका मालवा के बाकि इलाके से अपेक्षाकृत रूप से हर क्षेत्र में आगे है। यहां कांग्रेस का प्रदर्शन प्रभावशाली रहने जा रहा है जबकि बठिंडा, मानसा, संगरूर आदि 8 जिलों की 38 सीटों पर अब की बार अकाली शानदार जीत दर्ज करने जा रहे है। रोपड़ जिला के आनंदपुर साहिब से भाजपा के मनमोहन मित्तल व चमकौर साहिब (सु.) से अकाली जगमीत कौर संधु को बढ़त है तो रूपनगर में कांग्रेस के रमेशदत्त शर्मा आगे है। मोहाली जिला के खरड़ में कांग्रेस की भीतरघात अकाली उजागर सिंह बड़ाली के लिए वरदान साबित हुई है। यहीं स्थिति मोहाली में कांग्रेस के बलबीर सिंह संधु की है। रामुवालिया पिछड़े हुए प्रतीत होते है। डेरा बस्सी में कांग्रेसी बागी दीपइंद्र ढिल्लों व अकाली एनके शर्मा में बेहद नजदीकी मुकाबला है। ै। बस्सी पठाना (सु.) में सांसद परमजीत कौर गुलशन के पति रिटायर्ड जस्टिस निर्मल सिंह जीत के करीब है। फतेहगढ़ साहिब में चौकोने मुकाबले में प्रेम सिंह चंदूमाजरा के राजनीतिक कौशल की परिक्षा है। यहां अकाली-कांग्रेस दोनों को बागियों से जूझना पड़ रहा है। लुधियाना जिला अकाली-भाजपा के लिए निराशाजनक नतीजे देने जा रहा है। खन्ना में स्व. बेअंत सिंह के पौत्र गुरकीरत सिंह कोटली की स्थिति अकाली दिग्गज जगदेव सिंह तलवंडी के पुत्र रणजीत सिंह तलवंडी के मुकाबले बेहतर है। यंहा पीपीपी ने मुकाबला तिकोना बना दिया।वंहीे समराला में कांग्रेसी अमरीक सिंह ढिल्लो, कृपाल सिंह खीरनियां (अकाली) पर भारी पड़ रहे है। साहनेवाल में जरूर अकाली पूर्व सांसद सरनजीत सिंह ढिल्लो जीत की राह पर है। गिल (सु.) में भी कांग्रेसी मलकीत सिंह दाखा भारी है। रायकोट (सु.) में अकाली विक्रमजीत सिंह खालसा व कांग्रेसी गुरचरण सिंह बोयारोय में मुकाबला कड़ा है। यह जत्थेदार तलवंडी का इलाका है। हलका दाखा में अकाली मनप्रीत अयाली ने कांग्रेस के मजबूत माने जा रहे जस्सी खंगूड़ा को पीछे धकेल दिया है। जगरांव (सु.) में भी नोकरशाह रहे एसआर कलेर कांग्रेस के ईशर सिंह मेहरबान पर भारी पड़ रहे है।। हलका पायल (सु.) में लोकसभा के पूर्व डिप्टी स्पीकर चरणजीत अटवाल (अकाली) की भी जीत तय है। लुधियाना शहर में बैंस बंधुओं ने अकाली-भाजपा के समीकरण बिगाड़ दिए है। लुधियाना पूर्व में कांग्रेसी गुरमेल सिंह पहलवान का अकाली दल के रणजीत सिंह ढिल्लो से सख्त मुकाबला है। यहां कांग्रेसी बागी जगमोहन शर्मा के आखिरी समय में चुनाव मैदान से हट जाने के कारण कांग्रेस को थोड़ी बढ़त है। आत्मनगर में बागी सिमरजीत बैंस जीत रहे है। लुधियाना दक्षिण में हाकम सिंह ग्यासपुरा को बढ़त है। लुधियाना केंद्रीय में भाजपा के सतपाल गोसाईं कांग्रेस के सुरेंद्र डावर को कड़ी टक्कर दे रहे है। यहीं स्थिति लुधियाना पश्चमी में है यंहा कांग्रेस के भारत कुमार आशु व भाजपा के सतपाल गोसाईं के बीच मुकाबला है। लेकिन लुधियाना उतरी में भाजपा के प्रवीण बांसल (उपमेयर)को कांग्रेस के राकेश पांडे पर बढ़त हासिल है। पटियाला जिला भी कांग्रेस के पक्ष में जा रहा है। नाभा रिर्जव में पुराने प्रतिद्वंदी साधु सिंह धरमसोत (कांग्रेस) व बलवंत सिंह शाहपुर (अकाली) में फिर कड़ी टक्कर है। कांग्रेस थोड़ी आगे है। पटियाला शहर में अमरेंद्र सिंह को जो बढ़त है वैसी स्थिति समाना में उनके युवराज रणइंद्र की नहीं है। यहां अकाली दल के सुरजीत रखड़ा उन्हें टक्कर दे रहे है। रणइंद्र चुनाव हार भी सकते है। पटियाला देहाती में स्व. गुरचरण सिंह टोहड़ा की बेटी कुलदीप कौर टोहड़ा को ब्रह्म महेंद्रा (कांगे्रस)पर बढ़त हासिल है। हालांकि बागी अकाली सतबीर खटड़ा ने उनका नुकसान किया है। शुतराना रिर्जव सीट पर अकाली दल प्रत्याशी विरेंद्र कौर लुम्बा को स्पष्ट बढ़त है। यहां वामपंथी उम्मीदवार ने कांग्रेस का बड़ा नुकसान किया है। राजपुरा में राज खुराना (भाजपा) अपनी बिरादरी की 42 हजार वोटों के समर्थन से एकबार फिर जीत की और बढ़ रहे है। कांग्रेस के हरदयाल कम्बोज यहां पिछड़ गए है। घनौर में अकाली बागी ने कांग्रेस के मदन लाल जलालपुर की राह सुगम कर दी है। तो सनोर में दिग्गज कांग्रेसी लाल सिंह को तेजिंद्र पाल संधु (अकालीदल)ने खतरे में डाल दिया है यंहा भी समाना की तरह हैरानी जनक नतीजा आ सकता है । इस प्रकार मालवा के इस हिस्से की 31 सीटों में 12 कांग्रेस व 12 अकाली-भाजपा जीत दर्ज कर सकते है। 2 स्थानों पर आजाद प्रत्याशियों को बढ़त है जबकि 5 स्थानों पर कड़ा मुकाबला है।
अब मालवा का वो इलाका जिस में 38 सीटे है तथा पिछले चुनाव में कांग्रेस की यहां बल्ले-बल्ले हो गई थी। परंतु यह इलाका ही अब अकाली-भाजपा को दोबारा सत्ता में लाने जा रहा है। डेरा सिरसा के समर्थकों ने पिछली बार एकतरफा मतदान कांग्रेस के पक्ष में ही किया था परंतु अब की बार हालात पूरी तरह से बदल गए तथा डेरा समर्थकों ने दोनों पक्षों को ही खुश रखा है। मोगा जिले में निहाल सिंहवाला में राजविंदर कौर (अकालीदल) व बाघपुराना में महेंशइंद्र सिंह (अकालीदल) आसान जीत दर्ज कर रहे है। तो धरमकोट में तोता सिंह (अकालीदल) ने अपने सियासी कौशल व परम्परागत रूप से मजबूत अकाली क्षेत्र का फायदा उठा कर बढ़त बना ही ली। अकाली दल से ऐन मौके पर कांग्रेस में जाकर उम्मीदवार बने सुखजीत सिंह लोहगढ़ को कांगे्रस समर्थकों (मालती थापर गुट) की अंदरूनी मार झैलनी पड़ी है। मोगा में मामला बेहद नजदीकी बना हुआ है। पूर्व डीजीपी परमजीत सिंह गिल (अकालीदल) ने वाकई मंझे हुए राजनीतिज्ञ की तरह चुनाव लड़ा। यहां पीपीपी ने भी टक्कर दी है। जोगेद्रपाल जैन के लिए राह आसान नहीं है। फिरोजपुर जिले की कांग्रेस की सब से आसान मानी जा रही गुरूहरसहाय सीट पर भी जबरदस्त टक्कर हुई। राणा सोढी को पूर्व सांसद जोरा सिंह मान के लड़के बरदेव सिंह मान (अकाली दल) ने अहसास करवा दिया कि राजनीति में सब कुछ इतना आसान नहीं होता। जीरा भी अबकी बार कांग्रेस के हाथ से निकल रहा है। हरी सिंह जीरा ने नरेश कटारिया (कांग्रेस विधायक) पर बढ़त बना ली है। फिरोजपुर शहर में भाजपा के विधायक सुखपाल सिंह ननु की बढ़त है कांग्रेसी बागी रविंद्र बबल ने कांग्र्रेस उम्मीदवार परमिंदर पिंकी की जीत पर ब्रेकर लगा दिए है। फिरोजपुर देहाती रिर्जव में भी कांग्रेस-अकालीदल में बराबरी का मुकाबला है। फाजिल्का जिला की चारों सीटें कांगे्रस हार रही है। जिला बनाने का सबसे ज्यादा फायदा भाजपा के सुरजीत ज्याणी को हो रहा है। फाजिल्का में ज्याणी असानी से जीत रहे है। जलालाबाद से बागी होकर चुनाव लड़ रहे हंसराज जोसन कम्बोज बिरादरी के कद्दावर नेता है की टिकट काट कर कांग्रेस ने आत्मघाती कदम उठाया है। जोसन कई हलकों में कांग्रेस का नुकसान कर गए। जलालाबाद में सुखबीर बादल को बढ़त है। तो बल्लुआना में कांग्रेस बागी प्रकाश भटी एवं पीपीपी के रमेश मेघवाल ने गुरतेज सिंह घुडिय़ाना की लॉटरी खोल दी है। अबोहर में आजाद शिवलाल शौली ने जातिगत समीकरणों के सहारे ताकतवर सुनील जाखड़ पर बढ़त बना ली है। मुक्तसर जिला की लम्बी सीट पर मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल जीत रहे है। तो मुक्तसर में कांग्रेस की कर्ण बराड़ की राह आसान है। मलोट में अकाली दल के हरप्रीत सिंह अगर जीत रहे है तो उन्हें कांग्रेस के बागी बलदेव सिंह बलमगढ़ व हरबंस 'गरीबÓ का शुक्रगुजार होना चाहिए। गिदड़बाहा में मनप्रीत बादल तो यकीनन हार रहे है। कांग्रेस से आकर अकालीदल की टिकट पर चुनाव लड़ रहे संत सिंह बराड़ को कांग्रेस के एक धड़े का खुला समर्थन भी मिला। जिसके चलते कांग्रेसी राजा बडिंग़ पिछड़ गए है। फरीदकोट की जैतो रिर्जव से गुरदेव बादल आरामदायक स्थिति में है तो कोटकपुरा में बागी उपेंद्र शर्मा ने रिपजीत बराड़ की हार तय कर दी है। यहां अकाली दल के मनतार बराड़ की स्थिति बेहद मजबूत है। फरीदकोट में अकालीदल के दीप मलहोत्रा ने भी मुकाबला कांटे का बना दिया है। यहां शहर में अकाली दल को बढ़त है। भीतरघात यहां भी कांग्रेस की लुटिया डूबो सकता है। मानसा की बुढलाढा व मानसा से क्रमश: अचिंत सिंह समाओं व प्रेम मित्तल अकाली दल के लिए वरदान साबित हो रहे है। तो सरदुलगढ़ में भुंदड-मोफर में जबरदस्त टक्कर है। बठिंडा जिले की तलवंडी सीट से अमरजीत सिंह सिधु (अकालीदल) को बढ़त है तो भूच्चो मंडी से भी प्रीतम सिंह कोटभाई (अकालीदल) जीत रहे है। रामपुरा फूल में सिकंदर सिंह मलूका अबकी बार गुरप्रीत कांगड़ (कांग्रेस) से हार का बदला लेते हुए प्रतीत हो रहे है। यहां अमरजीत शर्मा (बागी कांग्रेस) ने कांगड का नुकसान किया है। यहीं स्थिति भठिंडा देहाती में दर्शन सिंह कोटफत्ता की है। यहां भी मक्खन सिंह (कांग्रेस) के वोट बैंक में सीपीआई प्रत्याशी सुरजीत सोही ने सेंध लगा दी है। मोड़ में भी मनप्रीत बादल की जीत यकीनी नहीं है। यहां अकाली दल के जनमेजा सिंह सेंखों शुरूआत में पिछड़े माने जा रहे थे ने कांग्रेस के मंगत राय बांसल को कड़ी टक्कर दी है। यहां भी नतीजा हैरानी जनक हो सकता है। बठिंडा शहरी सीट पर कांग्रेस की पक्की जीत भी सरूप सिंगला (अकाली दल) के चक्रव्यूह के चलते सशंय के घेरे में आ गई है। संगरूर जिले के लहरागागा में रजिदं्र कौर भळल को खतरा बना हुआ है। दिड़वा (सुरक्षित) में अकाली बलबीर घुन्नस जीत रहे है। सुनाम में सुखदेव सिंह ढीढ़ंसा की साख दाव पर है। यहां परमिंद्र ढीढंसा को अमन अरोड़ा से कड़ी टक्कर मिल रही है। मलेरकोटला में कांग्रेस की रजिया सुल्तान भी कड़े मुकाबले में निसारा आलम से जूझ रही है। यहां बसपा ने कांग्रेस का बड़ा नुकसान किया जो रजिया सुल्तान के लिए घातक सिद्ध हुआ है व अकाली दल की लॉटरी यहां निकल सकती है। धूरी में तिकोना मुकाबला है। पंरत ूकांग्रेस के अरविंद्र खन्ना का हाथ ऊपर है। अमरगढ़ (सु.) में सुरजीत सिंह धीमान (कांग्रेस) व इकबाल सिंह झूंदा (अकालीदल) को पीपीपी के अजीत सिंह चंदुराईयां जबरदस्त टक्कर दे रहे है। संगरूर में अकाली प्रकाश गर्ग की स्थिति सांझा मोर्चे के बलदेव मान व कांग्रेस के सुरेंद्र पाल सिबीया के मुकाबले थोड़ी बेहतर है। बरनाला में मलकीत कीतू (अकालीदल) व केवल सिंह ढिल्लो (कांग्रेस) में बड़ी टक्कर है। कीतू यहां पिछली हार का बदला चुकाने के करीब है। तो भदोड़ (सु.) में पूर्व नोकरशाह दरबारा सिंह गुरू गायक मोहम्मद सदीक पर भारी पड़ रहे है या सीपीआई के खुशियां सिंह कितनी सेंध कांग्रेस के मतों में लगा पाए इस पर हार-जीत निर्भर है। महलकलां (सु.) में कांग्रेस की हरचंद कौर घनोरी का हाथ ऊपर बताया जा रहा है। इस क्षेत्र की 38 सीटों में से अकाली भाजपा को 18 सीटों पर बढ़त है जबकि 8 सीटों पर कांग्रेस आगे है। पीपीपी 2 सीटों पर बढ़त बनाऐ हुए है व10 सीटों पर कड़ा मुकाबला है
इस प्रकार अकाली भाजपा को 117 में से 53 सीटों पर स्पष्ट बढ़त मिल रही है वही कांग्रेस 35 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है आजाद व अन्य 5 सीटों पर आगे है जबकि 24 सीटों पर कड़ा मुकाबला है कड़े मुकाबले वाली 24 सीटें अगर दोनो प्रमुख दलों में 12-12 बांट दे तो अकाली दल गठबंधन का 65 सीटों के साथ दोबारा सत्ता में लोटना तय माना जा रहा है।
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डबवाली- पंजाब प्रदेश में मतदाता अब की बार रिवायत वाकई बदलने जा रहे है। अकाली-भाजपा गठजोड़ हैरानीजनक तौर पर लगातार दूसरी बार सता सम्भालने के नजदीक पहुंच गया है। प्रदेश भर में कहीं भी सतारूढ़ गठबंधन को एन्टी-एनकम्बैंसी फैक्टर का बड़ा नुकसान होने की कोई सूचना नहीं है। हालांकि चुनावी घोषणा से पूर्व कांग्रेस की बढ़त मानी जा रही थी। मनप्रीत बादल द्वारा अकालीदल से बगावत कांग्रेसी खेमे के लिए वरदान समझी जा रही थी । मालवा के बड़े इलाके को प्रभावित करने वाला डेरा सच्चा सौदा का समर्थक वोट बैंक भी कांग्रेस के पक्ष में एकतरफा माना जा रहा था। परंतु टिकट बंटवारे से कांग्रेस में हुई बड़ी बगावत से हालात पलटने शुरू हुए तथा उसके बाद प्रदेश की राजनीति में घटा प्रत्येक घटनाक्रम अकाली-भाजपा गठबंधन के पक्ष में होता चला गया। जैसे कि मनप्रीत बादल द्वारा वामपंथियों से समझौता कांग्रेस के लिए बेहद नुकसान देह रहा। साथ ही सिरसा के सच्चा सौदा डेरा ने भी कांग्रेस के पक्ष में पिछले चुनाव की तरह स्पष्ट ऐलान करने से इंकार कर दिया। तथा एक दर्जन सीटों पर डेरा प्रेमियों द्वारा अकाली दल गठबंधन के पक्ष में मतदान करने की पुख्ता सूचनाऐं है। प्रदेश में मनप्रीत बादल के नेतृत्व में 115 सीटों पर सांझा मोर्चा चुनाव लड़ा, जिन में 22 सीटों पर वामपंथियों ने उम्मीदवार उतारे। गौरतलब है कि वामपंथियों ने पिछले चुनाव में कांग्रेस का समर्थन किया था। मनप्रीत के मोर्चे की तरफ सतापक्ष से नाराज होने वाले काफी मतदाताओं का रूझान देखा गया। यह भी कांग्रेस के लिए नुकसान देह माना जा रहा है। चूंकि सांझा मोर्चा न बनता तो इन मतों का झुकाव स्वाभाविक रूप से कांग्रेस के पक्ष में होना था। इसके अलावा चुनाव आयोग द्वारा शुरूआती दौर में की गई जबरदस्त सख्ती अंत में खोखली साबित हुई तथा कथित रूप से पैंसों का जो खुला खेल हुआ उसमें भी कांग्रेस पिछड़ती दिखाई दी। कुल मिलाकर वरिष्ठतम मुख्यमंत्री स. प्रकाश सिंह बादल ने राजनीतिक चार्तुय का जैसा सटीक प्रदर्शन चुनावी चक्रव्यूह के प्रत्येक क्षेत्र में किया यह बेमिसाल कहा जा सकता है। एक-दो नेताओं को छोड़कर सभी नामवर नेताओं या उनके प्रभावशाली संबंधियों को चुनाव मैदान में उतारा। जोकि अधिकांश स्थानों पर जीत की ओर अग्रसर है। प्रदेश में प्रभावी किसान जत्थेबंदी प्रधानो ं के साथ-साथ संत समाज प्रमुखों को भी गठबंधन के पक्ष में चुनावी मुहिम चलाने हेतु रजामंद किया साथ ही डेरा प्रेमियों का एक हिस्सा भी अपने पक्ष करने में सफल रहे है कांग्रेस के मुकाबले सतारूढ़ गठबंधन का घोषणापत्र भी मतदाताओं को आकर्षित करने में सफल रहा। वहीं सुखबीर बादल व हरसिमरत कौर बादल के जोशीले भाषणों से जनसभाओं में अकाली कार्यकर्ताओं को उत्साहित होते देखा गया। वहीं कैप्टन अमरेंद्र सिंह का जादू बड़ी बगावत के चलते ढलता सा प्रतीत होता रहा। तथा राजेंद्र कौर भ_ल व जगमीत बराड़ जैसे दूसरे नेता प्रदेश में अपना प्रभाव नही छोड़ पाए।
माझा, दोआबा में हालांकि सतारूढ़ गठबंधन पिछला प्रदर्शन नहीं दोहरा पा रहा है। वैसे भी जब किसी चुनाव में अगर बड़ी लहर न हो तो स्थानीय समीकरण ही जीत हार तय किया करते है। ऐसे ही हालातों में बागी उम्मीदवार या भीतरघात चुनावी नतीजों को पूरी तरह से बदलने में सफल हो जाते है। परिसिमन के चलते चुनाव क्षेत्रों में हुई फेरबदल चुनावी नतीजों को प्रभावित कर रही है तथा सुच्चा सिंह छोटेपुर व हंसराज जोसन जैसे कई बागी प्रत्याशी दो-दो हलकों के नतीजों को प्रभावित कर रहे है। कांग्रेस के बागी उम्मीदवारों या भीतरघात से पार्टी को जिन सीटों पर यकीनन हार का सामना करना पड़ रहा है उनमें सुजानपुर, पठानकोट, गुरदासपुर, कांदिया, डेरा बाबा नानक, मजीठा, अमृतसर (पूर्वी), बाबा बकाला, जालंधर (उतरी), जालंधर(केंट), मुकेरिया, चब्बेवाल, बलाचौर, आनंदपुर साहिब, चमकौर साहिब, खरड़, डेरा बस्सी, फतेहगढ़ साहिब, अमलोह, साहनेवाल, बाघापुराना, फिरोजपुर शहर, जलालाबाद, बल्लुआना, गिदढ़बाहा, मलोट, कोटकपुरा, रामपुरा फूल, भदोड़, शुतराना,जीरा शामिल है। अकाली-भाजपा गठजोड़ को बागियों के चलते निम्रलिखित स्थानों पर हार का सामना करना पड़ सकता है। तरनतारन, आत्म नगर, अबोहर, घनौर, महलकलां, नवां शहर। डेरा बस्सी व फतेहगढ़ साहिब ऐसी सीटे है जहां अकाली दल एवं कांग्रेस दोनों के ही बागी है। इसके अलावा ऐसे हलके हैं जहां कांग्रेस छोड़कर पीपीपी की टिकट पर चुनाव लड़ रहे व सीपीआई, सीपीएम के चिन्ह पर चुनावी किस्मत आजमा रहे मजबूत प्रत्याशी अकाली दल गठबंधन की जीत का कारण बन रहे ळै। इसमें बठिंडा देहाती, भूच्चो मंडी, तलवंडी साबो, बुडलाडा, होशियारपुर, मानसा आदि है। बसपा भी फाजिल्का, आदमपुर तथा मलेरकोटला जैसी सीटों पर भारी तादाद में कांग्रेस के वोट बैंक में सेंध लगा रही है।
माझा में पिछली बार 21 सीटों पर सत्तारूढ़ गठबंधन को विजय प्राप्त हुई थी। अब थोड़ी कमजोरी यहां है। पठानकोट जिले की पठानकोट व सुजानपुर सीटों पर कांग्रेस की यकीनी हार है। भाजपा के अश्विनी शर्मा के लिए कांग्रेस के बागी अशोक शर्मा ने राह आसान कर दी है। जबकि सुजानपुर में भाजपा के दिनेश बब्बू, बागी कांग्रेसी नरेशपुरी पर भारी है। यहां कांग्रेस के विनय महाजन तीसरे स्थान पर है।भोआ में भाजपा एवं कांग्रेस के क्रमश: सीमा देवी व बलबीर राज दोनों को भीतरघात से जूझना पड़ रहा है। थोड़ी बढ़त कांग्रेस की यहां है। गुरदासपुर जिले में बटाला सीट पर अश्विनी सेखड़ी (कांग्रेस) की जीत तय है तो गुरदासपुर से अकालीदल के गुरबचन सिंह बब्बेहाली बढिय़ा काम एवं कांग्रेस के भीतरघात के सहयोग से आसान जीत दर्ज कर रहे है। दीना नगर में भाजपा कांग्रेस में नजदीकी मुकाबला है। कांग्रेस के बागी सुच्चा सिंह छोटेपुर ने कांदिया में जहां सेवा सिंह सेखवा (अकालीदल) की राह आसान कर दी। वहीं डेरा बाबा नानक से सूच्चा सिंह लंगाह (अकालीदल) को भी राहत दे रहे हैं। फतेहगढ़ चूडिय़ा में निर्मल सिंह काहलो (अकालीदल) कांग्रेस के तृप्त राजेंद्र सिंह बाजवां पर भारी पड़ रहे है। रिर्जव हलके हरगोबिंदपुर से भी अकालीदल के देशराज घुग्गा की कांग्रेस के बलविंद्र सिंह लाड़ी पर साफ बढ़त है। तरनतारन जिले में अकालीदल का दबदबा बरकरार है। तरनतारन हलका में अकाली बागी दविंद्र सिंह लाली का कांग्रेस के धर्मवीर अग्हिोत्री से मुकाबला है। यहां मौजूदा विधायक हरमीत सिंह संधु पिछे रह गए है। पट्टी से आदेश प्रताप केरो व खेमकरण से बिरसा सिंह बल्टोहा साफ जीत दर्ज कर रहे है। खडूर साहिब हलका से मांझे के दिग्गज अकाली नेता रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा कांग्रेसी रमनजीत सिंह पर भारी माने जा रहे है। अमृतसर जिला में सत्तारूढ़ गठबंधन को बढ़त हासिल हो रही है। अजनाला से अकाली अमरपाल बोनी कांग्रेस के हरप्रताप अजनाला से आगे है। सांसद डॉ. रतन सिंह अजनाला का यह क्षेत्र अकाली दल का परम्परागत गढ़ माना जाता है। मजीठा में विक्रम सिंह मजीठिया बड़ी जीत दर्ज कर रहे है। राजा सांसी में सुखविंद्र सिंह सरकारिया व अकाली वीर सिंह लोपोके में बड़ी टक्कर है। परंतु सरकारिया को थोड़ी बढ़त है। जंडियाला रिर्जव में भी इसी प्रकार का मामला है यहां भी सरदूल सिंह (कांग्रेस)व बलजीत सिंह जलाल (अकालीदल) में नजदीकी टक्कर है। अटारी रिर्जव में अकाली गुलजार सिंह राणिके आरामदायक स्थिति में है। तो बाबा बकाला रिजर्व में भी कांग्रेस की बगावत ने अकाली मनजीत सिंह मना को जीत के राह पर ला दिया है। अमृतसर (उतरी) में भाजपा के अनिल जोशी बेहद मजबूत है तो अमृतसर (पश्चिमी)में यहीं स्थिति कांग्रेस के राजकुमार वेरका की है। अमृतसर केंद्रीय में कांग्रेस के ओपी सोनी भाजपा के तरूण चुघ पर भारी पड़ रहे है। अमृतसर (पूर्वी) में डॉ. नवजोत कौर सिधु की राह कांग्रेस की लड़ाई ने आसान कर दी है। अमृतसर (दक्षिण) में अकाली उम्मीदवार इन्द्रवीर सिंह बुलारिया कांग्रेस के जसबीर सिंह डिम्पा पर भारी पड़ रहे है। हालांकि गुरप्रताप टिक्का (अकाली बागी) उनका नुकसान कर रहे है। माझा में अकाली-भाजपा 15 सीटों पर तथा कांग्रेस 6 पर बढ़त बना पायी है जबकि 4 स्थानों पर कड़ा मुकाबला है।
दोआबा के कपूरथला जिला के कपूरथला हलका में कांग्रेस के गुरजीत राणा को अकाली दल के सर्वजीत मक्कड़ ने कड़ी टक्कर दी है। पीपीपी के रघुवीर सिंह ने मुकाबला तिकोना बनाने का प्रयास किया। कुल मिलाकर गुरजीत राणा की राह आसान नहीं है। तो भुुलत्थ में बीबी जागीर कौर पिछली हार का बदला चुकाती प्रतीत हो रही है। सुल्तानपुर लोधी में अकाली डॉ. उपीन्द्रजीत कौर की जीत तय है। वहीं फगवाड़ा से भाजपा के पूर्व आईएएस सोम प्रकाश विधानसभा में पहुंच जाएंगे। जालंधर जिला हैरानी जनक नतीजे दे सकता है। नकोदर से अमरजीत समरा (कांग्रेसी) की हालत पतली है। अकाली गुरप्रताप सिंह बडाला अपने पिता कुलदीप बडाला की हार का बदला लेने के बेहद नजदीक माने जा रहे है। शाहकोट में भी अकाली दिग्गज अजीत सिंह कोहाड़ कांग्रेस के कर्नल सीडी सिंह कम्बोज पर भारी पड़ रहे है। फिल्लोर (सु.) व करतारपुर (सु.) में कांग्रेसी संतोख सिंह व जगजीत सिंह मजबूत स्थिति में है लेकिन आदमपुर मं अकाली व कांग्रेस दोनों ही प्रत्याशी बसपा से जुडे रहे है। यहां बसपा के साथ इनका तिकोना मुकाबला है लेकिन अकाली पवन टिनू को बढ़त है। जालंधर पश्चमी में सांसद पत्नी सुमन केपी जीत के नजदीक है। वहीं जालंधर केंदी्रय में मनोरंजन कालिया भी सीट बचा ले जा रहे है लेकिन जालंधर उतरी में कांग्रेस दिग्गज अवतार हैनरी को बागी दिनेश ढल्ल ने झटका दिया है। यहां भाजपा के केडी भंडारी की लॉटरी खुल रही है। जालंधर केंट में जगवीर सिंह बराड़ का पीपीपी छोडऩा घातक साबित हुआ है तथा प्रसिद्ध हॉकी खिलाड़ी प्रगट सिंह का स्कूप गोल में तबदील होने जा रहा है। होशियारपुर जिला के मुकेरियां हलके से कांग्रेस मुकाबले से बाहर है। यहां पूर्व विधानसभा स्पीकर केवल कृष्ण के पुत्र रजनीश बब्बी का भाजपा के अरूणेश शाकर से मुकाबला है। दसूहा में भाजपा के अमरजीत शाही व कांग्रेस के रमेश चंद्र डोगरा में कड़ी टक्कर है। शाम चौरासी (सु.)में कांग्रेस के चौधरी राम लुभाया की अकाली महेंद्र कौर जोश पर थोड़ी बढ़त हासिल है। होशियारपुर में भाजपा के तीक्षण सूद की प्रतिष्ठा दाव पर है। कांग्रेस के सुंदर शाम अरोड़ा उन्हें कड़ी टक्कर दे रहे है। परंतु वे भीतरघात से नहीं बच पाए है। चब्बेवाल (सु.)में अकाली सोहन सिंह ठंडल जीत रहे है तो उड़मुड़ में मुकाबला सख्त है। यहां अकाली प्रत्याशी को थोड़ी बगावत झेलनी पड़ी है। गढशंकर में लव कुमार गोल्ड़ी के लिए चिंताजनक खबरे है यहां भाजपा से सीट बदलकर अकालीदल ने सुरेंद्र सिंह राठा को मैदान में उतारा था। यह दाव अकाली दल के लिए चलता दिखाई दे रहा है। नवांशहर में कांग्रेस की गुरइकबाल कौर की जीत भी तय मानी जा रही है। जबकि बंगा (सु.) में सोहन सिंह अकालीदल व तरलोचन सिंह कांग्रेसी में पलड़ा थोडा कांग्रेस का झुका हुआ लग रहा है। बलाचोर में अकाली दल के चौ. नंद लाल जीत की और है दोआबा में 23 सीटों में कांग्रेस 9 सीटों, अकाली भाजपा 8 सीटों पर जीत दर्ज कर रही है। जबकि एक पर आजाद व 5 सीटों पर नजदीकी मुकाबला है।
अब बारी मालवा की है। मालवा को दो भागों में चुनावी स्थिति मुताबिक बांटा गया है। पटियाला, फतेहगढ़ साहिब, रोपड़, मोहाली जिलों की कुल 31 सीटें है। यह इलाका मालवा के बाकि इलाके से अपेक्षाकृत रूप से हर क्षेत्र में आगे है। यहां कांग्रेस का प्रदर्शन प्रभावशाली रहने जा रहा है जबकि बठिंडा, मानसा, संगरूर आदि 8 जिलों की 38 सीटों पर अब की बार अकाली शानदार जीत दर्ज करने जा रहे है। रोपड़ जिला के आनंदपुर साहिब से भाजपा के मनमोहन मित्तल व चमकौर साहिब (सु.) से अकाली जगमीत कौर संधु को बढ़त है तो रूपनगर में कांग्रेस के रमेशदत्त शर्मा आगे है। मोहाली जिला के खरड़ में कांग्रेस की भीतरघात अकाली उजागर सिंह बड़ाली के लिए वरदान साबित हुई है। यहीं स्थिति मोहाली में कांग्रेस के बलबीर सिंह संधु की है। रामुवालिया पिछड़े हुए प्रतीत होते है। डेरा बस्सी में कांग्रेसी बागी दीपइंद्र ढिल्लों व अकाली एनके शर्मा में बेहद नजदीकी मुकाबला है। ै। बस्सी पठाना (सु.) में सांसद परमजीत कौर गुलशन के पति रिटायर्ड जस्टिस निर्मल सिंह जीत के करीब है। फतेहगढ़ साहिब में चौकोने मुकाबले में प्रेम सिंह चंदूमाजरा के राजनीतिक कौशल की परिक्षा है। यहां अकाली-कांग्रेस दोनों को बागियों से जूझना पड़ रहा है। लुधियाना जिला अकाली-भाजपा के लिए निराशाजनक नतीजे देने जा रहा है। खन्ना में स्व. बेअंत सिंह के पौत्र गुरकीरत सिंह कोटली की स्थिति अकाली दिग्गज जगदेव सिंह तलवंडी के पुत्र रणजीत सिंह तलवंडी के मुकाबले बेहतर है। यंहा पीपीपी ने मुकाबला तिकोना बना दिया।वंहीे समराला में कांग्रेसी अमरीक सिंह ढिल्लो, कृपाल सिंह खीरनियां (अकाली) पर भारी पड़ रहे है। साहनेवाल में जरूर अकाली पूर्व सांसद सरनजीत सिंह ढिल्लो जीत की राह पर है। गिल (सु.) में भी कांग्रेसी मलकीत सिंह दाखा भारी है। रायकोट (सु.) में अकाली विक्रमजीत सिंह खालसा व कांग्रेसी गुरचरण सिंह बोयारोय में मुकाबला कड़ा है। यह जत्थेदार तलवंडी का इलाका है। हलका दाखा में अकाली मनप्रीत अयाली ने कांग्रेस के मजबूत माने जा रहे जस्सी खंगूड़ा को पीछे धकेल दिया है। जगरांव (सु.) में भी नोकरशाह रहे एसआर कलेर कांग्रेस के ईशर सिंह मेहरबान पर भारी पड़ रहे है।। हलका पायल (सु.) में लोकसभा के पूर्व डिप्टी स्पीकर चरणजीत अटवाल (अकाली) की भी जीत तय है। लुधियाना शहर में बैंस बंधुओं ने अकाली-भाजपा के समीकरण बिगाड़ दिए है। लुधियाना पूर्व में कांग्रेसी गुरमेल सिंह पहलवान का अकाली दल के रणजीत सिंह ढिल्लो से सख्त मुकाबला है। यहां कांग्रेसी बागी जगमोहन शर्मा के आखिरी समय में चुनाव मैदान से हट जाने के कारण कांग्रेस को थोड़ी बढ़त है। आत्मनगर में बागी सिमरजीत बैंस जीत रहे है। लुधियाना दक्षिण में हाकम सिंह ग्यासपुरा को बढ़त है। लुधियाना केंद्रीय में भाजपा के सतपाल गोसाईं कांग्रेस के सुरेंद्र डावर को कड़ी टक्कर दे रहे है। यहीं स्थिति लुधियाना पश्चमी में है यंहा कांग्रेस के भारत कुमार आशु व भाजपा के सतपाल गोसाईं के बीच मुकाबला है। लेकिन लुधियाना उतरी में भाजपा के प्रवीण बांसल (उपमेयर)को कांग्रेस के राकेश पांडे पर बढ़त हासिल है। पटियाला जिला भी कांग्रेस के पक्ष में जा रहा है। नाभा रिर्जव में पुराने प्रतिद्वंदी साधु सिंह धरमसोत (कांग्रेस) व बलवंत सिंह शाहपुर (अकाली) में फिर कड़ी टक्कर है। कांग्रेस थोड़ी आगे है। पटियाला शहर में अमरेंद्र सिंह को जो बढ़त है वैसी स्थिति समाना में उनके युवराज रणइंद्र की नहीं है। यहां अकाली दल के सुरजीत रखड़ा उन्हें टक्कर दे रहे है। रणइंद्र चुनाव हार भी सकते है। पटियाला देहाती में स्व. गुरचरण सिंह टोहड़ा की बेटी कुलदीप कौर टोहड़ा को ब्रह्म महेंद्रा (कांगे्रस)पर बढ़त हासिल है। हालांकि बागी अकाली सतबीर खटड़ा ने उनका नुकसान किया है। शुतराना रिर्जव सीट पर अकाली दल प्रत्याशी विरेंद्र कौर लुम्बा को स्पष्ट बढ़त है। यहां वामपंथी उम्मीदवार ने कांग्रेस का बड़ा नुकसान किया है। राजपुरा में राज खुराना (भाजपा) अपनी बिरादरी की 42 हजार वोटों के समर्थन से एकबार फिर जीत की और बढ़ रहे है। कांग्रेस के हरदयाल कम्बोज यहां पिछड़ गए है। घनौर में अकाली बागी ने कांग्रेस के मदन लाल जलालपुर की राह सुगम कर दी है। तो सनोर में दिग्गज कांग्रेसी लाल सिंह को तेजिंद्र पाल संधु (अकालीदल)ने खतरे में डाल दिया है यंहा भी समाना की तरह हैरानी जनक नतीजा आ सकता है । इस प्रकार मालवा के इस हिस्से की 31 सीटों में 12 कांग्रेस व 12 अकाली-भाजपा जीत दर्ज कर सकते है। 2 स्थानों पर आजाद प्रत्याशियों को बढ़त है जबकि 5 स्थानों पर कड़ा मुकाबला है।
अब मालवा का वो इलाका जिस में 38 सीटे है तथा पिछले चुनाव में कांग्रेस की यहां बल्ले-बल्ले हो गई थी। परंतु यह इलाका ही अब अकाली-भाजपा को दोबारा सत्ता में लाने जा रहा है। डेरा सिरसा के समर्थकों ने पिछली बार एकतरफा मतदान कांग्रेस के पक्ष में ही किया था परंतु अब की बार हालात पूरी तरह से बदल गए तथा डेरा समर्थकों ने दोनों पक्षों को ही खुश रखा है। मोगा जिले में निहाल सिंहवाला में राजविंदर कौर (अकालीदल) व बाघपुराना में महेंशइंद्र सिंह (अकालीदल) आसान जीत दर्ज कर रहे है। तो धरमकोट में तोता सिंह (अकालीदल) ने अपने सियासी कौशल व परम्परागत रूप से मजबूत अकाली क्षेत्र का फायदा उठा कर बढ़त बना ही ली। अकाली दल से ऐन मौके पर कांग्रेस में जाकर उम्मीदवार बने सुखजीत सिंह लोहगढ़ को कांगे्रस समर्थकों (मालती थापर गुट) की अंदरूनी मार झैलनी पड़ी है। मोगा में मामला बेहद नजदीकी बना हुआ है। पूर्व डीजीपी परमजीत सिंह गिल (अकालीदल) ने वाकई मंझे हुए राजनीतिज्ञ की तरह चुनाव लड़ा। यहां पीपीपी ने भी टक्कर दी है। जोगेद्रपाल जैन के लिए राह आसान नहीं है। फिरोजपुर जिले की कांग्रेस की सब से आसान मानी जा रही गुरूहरसहाय सीट पर भी जबरदस्त टक्कर हुई। राणा सोढी को पूर्व सांसद जोरा सिंह मान के लड़के बरदेव सिंह मान (अकाली दल) ने अहसास करवा दिया कि राजनीति में सब कुछ इतना आसान नहीं होता। जीरा भी अबकी बार कांग्रेस के हाथ से निकल रहा है। हरी सिंह जीरा ने नरेश कटारिया (कांग्रेस विधायक) पर बढ़त बना ली है। फिरोजपुर शहर में भाजपा के विधायक सुखपाल सिंह ननु की बढ़त है कांग्रेसी बागी रविंद्र बबल ने कांग्र्रेस उम्मीदवार परमिंदर पिंकी की जीत पर ब्रेकर लगा दिए है। फिरोजपुर देहाती रिर्जव में भी कांग्रेस-अकालीदल में बराबरी का मुकाबला है। फाजिल्का जिला की चारों सीटें कांगे्रस हार रही है। जिला बनाने का सबसे ज्यादा फायदा भाजपा के सुरजीत ज्याणी को हो रहा है। फाजिल्का में ज्याणी असानी से जीत रहे है। जलालाबाद से बागी होकर चुनाव लड़ रहे हंसराज जोसन कम्बोज बिरादरी के कद्दावर नेता है की टिकट काट कर कांग्रेस ने आत्मघाती कदम उठाया है। जोसन कई हलकों में कांग्रेस का नुकसान कर गए। जलालाबाद में सुखबीर बादल को बढ़त है। तो बल्लुआना में कांग्रेस बागी प्रकाश भटी एवं पीपीपी के रमेश मेघवाल ने गुरतेज सिंह घुडिय़ाना की लॉटरी खोल दी है। अबोहर में आजाद शिवलाल शौली ने जातिगत समीकरणों के सहारे ताकतवर सुनील जाखड़ पर बढ़त बना ली है। मुक्तसर जिला की लम्बी सीट पर मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल जीत रहे है। तो मुक्तसर में कांग्रेस की कर्ण बराड़ की राह आसान है। मलोट में अकाली दल के हरप्रीत सिंह अगर जीत रहे है तो उन्हें कांग्रेस के बागी बलदेव सिंह बलमगढ़ व हरबंस 'गरीबÓ का शुक्रगुजार होना चाहिए। गिदड़बाहा में मनप्रीत बादल तो यकीनन हार रहे है। कांग्रेस से आकर अकालीदल की टिकट पर चुनाव लड़ रहे संत सिंह बराड़ को कांग्रेस के एक धड़े का खुला समर्थन भी मिला। जिसके चलते कांग्रेसी राजा बडिंग़ पिछड़ गए है। फरीदकोट की जैतो रिर्जव से गुरदेव बादल आरामदायक स्थिति में है तो कोटकपुरा में बागी उपेंद्र शर्मा ने रिपजीत बराड़ की हार तय कर दी है। यहां अकाली दल के मनतार बराड़ की स्थिति बेहद मजबूत है। फरीदकोट में अकालीदल के दीप मलहोत्रा ने भी मुकाबला कांटे का बना दिया है। यहां शहर में अकाली दल को बढ़त है। भीतरघात यहां भी कांग्रेस की लुटिया डूबो सकता है। मानसा की बुढलाढा व मानसा से क्रमश: अचिंत सिंह समाओं व प्रेम मित्तल अकाली दल के लिए वरदान साबित हो रहे है। तो सरदुलगढ़ में भुंदड-मोफर में जबरदस्त टक्कर है। बठिंडा जिले की तलवंडी सीट से अमरजीत सिंह सिधु (अकालीदल) को बढ़त है तो भूच्चो मंडी से भी प्रीतम सिंह कोटभाई (अकालीदल) जीत रहे है। रामपुरा फूल में सिकंदर सिंह मलूका अबकी बार गुरप्रीत कांगड़ (कांग्रेस) से हार का बदला लेते हुए प्रतीत हो रहे है। यहां अमरजीत शर्मा (बागी कांग्रेस) ने कांगड का नुकसान किया है। यहीं स्थिति भठिंडा देहाती में दर्शन सिंह कोटफत्ता की है। यहां भी मक्खन सिंह (कांग्रेस) के वोट बैंक में सीपीआई प्रत्याशी सुरजीत सोही ने सेंध लगा दी है। मोड़ में भी मनप्रीत बादल की जीत यकीनी नहीं है। यहां अकाली दल के जनमेजा सिंह सेंखों शुरूआत में पिछड़े माने जा रहे थे ने कांग्रेस के मंगत राय बांसल को कड़ी टक्कर दी है। यहां भी नतीजा हैरानी जनक हो सकता है। बठिंडा शहरी सीट पर कांग्रेस की पक्की जीत भी सरूप सिंगला (अकाली दल) के चक्रव्यूह के चलते सशंय के घेरे में आ गई है। संगरूर जिले के लहरागागा में रजिदं्र कौर भळल को खतरा बना हुआ है। दिड़वा (सुरक्षित) में अकाली बलबीर घुन्नस जीत रहे है। सुनाम में सुखदेव सिंह ढीढ़ंसा की साख दाव पर है। यहां परमिंद्र ढीढंसा को अमन अरोड़ा से कड़ी टक्कर मिल रही है। मलेरकोटला में कांग्रेस की रजिया सुल्तान भी कड़े मुकाबले में निसारा आलम से जूझ रही है। यहां बसपा ने कांग्रेस का बड़ा नुकसान किया जो रजिया सुल्तान के लिए घातक सिद्ध हुआ है व अकाली दल की लॉटरी यहां निकल सकती है। धूरी में तिकोना मुकाबला है। पंरत ूकांग्रेस के अरविंद्र खन्ना का हाथ ऊपर है। अमरगढ़ (सु.) में सुरजीत सिंह धीमान (कांग्रेस) व इकबाल सिंह झूंदा (अकालीदल) को पीपीपी के अजीत सिंह चंदुराईयां जबरदस्त टक्कर दे रहे है। संगरूर में अकाली प्रकाश गर्ग की स्थिति सांझा मोर्चे के बलदेव मान व कांग्रेस के सुरेंद्र पाल सिबीया के मुकाबले थोड़ी बेहतर है। बरनाला में मलकीत कीतू (अकालीदल) व केवल सिंह ढिल्लो (कांग्रेस) में बड़ी टक्कर है। कीतू यहां पिछली हार का बदला चुकाने के करीब है। तो भदोड़ (सु.) में पूर्व नोकरशाह दरबारा सिंह गुरू गायक मोहम्मद सदीक पर भारी पड़ रहे है या सीपीआई के खुशियां सिंह कितनी सेंध कांग्रेस के मतों में लगा पाए इस पर हार-जीत निर्भर है। महलकलां (सु.) में कांग्रेस की हरचंद कौर घनोरी का हाथ ऊपर बताया जा रहा है। इस क्षेत्र की 38 सीटों में से अकाली भाजपा को 18 सीटों पर बढ़त है जबकि 8 सीटों पर कांग्रेस आगे है। पीपीपी 2 सीटों पर बढ़त बनाऐ हुए है व10 सीटों पर कड़ा मुकाबला है
इस प्रकार अकाली भाजपा को 117 में से 53 सीटों पर स्पष्ट बढ़त मिल रही है वही कांग्रेस 35 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है आजाद व अन्य 5 सीटों पर आगे है जबकि 24 सीटों पर कड़ा मुकाबला है कड़े मुकाबले वाली 24 सीटें अगर दोनो प्रमुख दलों में 12-12 बांट दे तो अकाली दल गठबंधन का 65 सीटों के साथ दोबारा सत्ता में लोटना तय माना जा रहा है।
कांग्रेस के अधिकांश दिग्गज हार के कगार पर
डबवाली-पंजाब में सत्ता पर काबिज होने का दावा कर रही कांग्रेस शायद इस जमीनी सच्चाई से मुंह मोड़ रही है कि उस के अधिकांश दिग्गज नेताओं को बड़े मुकाबले का सामना करना पड़ा है। लाल सिंह (सनोर), राजेंद्र कौर भ_ल(लहरा गागा), राणा गुरमीत सोढ़ी (गुरूहरसहाय), राणा गुरजीत सिंह (कपूरथला), अमरजीत समरा (नकोदर), जीत महेंद्र (तलवंड़ी साबो), हरमिंदर सिंह जस्सी (बठिंडा), रजिया सुल्तान (मलेरकोटला), सुनील जाखड़ (अबोहर), अवतार हैनरी (जालंधर उत्तरी), सुखपाल खेहरा (भुलत्थ) जोकि कांग्रेस सरकार आने पर मंत्री पद के गंभीर दावोदार थे। इनमें से अधिकांश को हार का सामना करना पड़ सकता है। उधर, दिग्गज नेताओं के करीबी संबंधी रणइंद्र सिंह (समाना)कैप्टन अमरेंद्र सिंह के पुत्र, विक्रम सिंह बांजवा (साहनेवाल)राजेंद्र कौर भ_ल के दामाद, रिपजीत बराड़ (कोटकपुरा) जगमीत बराड़ के भाई, हरबंस कौर (बस्सी पठाना) पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शमशेर सिंह दूलो की पत्नी, कांदिया से सांसद प्रताप सिंह बाजवा की पत्नी चरणजीत कौर बाजवा के हालात बेहद नाजुक बताजे जा रहे है। राहुल गांधी द्वारा अलाट किए गए यूथ कोटे के प्रत्याशी कुलजीत सिंह नागरा (फतेहगढ़ साहिब), शैलिंद्र शैली (मजीठा), अमरिंन्द्र राजा वडिंग (गिदड़बाहा) तथा राजविंद्र सिंह लकी (बलाचोर) भी चुनावी जीत से कोसों दूर बताये जा रहे है। इन हालातों के चलते ही कांग्रेस अब 70+ सीटें जीतने का दावा करने से पीछे हट गई है।
भाजपा पार करेगी दहाई का आंकड़ा
2002 में कांग्रेस को सत्ता प्राप्त करने में इसलिए आसानी हो गई थी कि भाजपा केवल 3 सीटें ही जीत पाई थी। अब की बार भी चुनाव के शुरूआती चरण में ऐसी ही क्यासबाजिया लगाई जा रही थी लेकिन भाजपा ने कुछ टिकटे बदली तो कुछ जिताऊ उम्मीदवार भी उतारे। परंतु सही मायनों में तो कांग्रेस के बागियों ने ही भाजपा की राह आसान की है। अनिल जोशी (अमृतसर उत्तरी), मनोरंजन कालिया (जालंधर केंद्रीय), सुरजीत ज्याणी (फाजिल्का), सोमप्रकाश (फगवाड़ा), प्रवीण कुमार बांसल (लुधियाना उत्तरी) तथा राज खुराना (राजपुरा) सीधे मुकाबले में विरोधियों पर भारी पड़ रहे है तथा इनमें अधिकांश सीटे भाजपा जीत सकती है। लेकिन कांग्रेस के बागियों ने दिनेश बब्बू (सुजानपुर), अश्विनी शर्मा (पठानकोट), डॉ. नवजोत कौर सिधु (अमृतसर पूर्वी), केडी भंडारी (जालंधर उत्तरी), अरूणेश शाकर (मुकेरिया), तीक्षण सूद (होशियारपुर), मदन मोहन मित्तल (आनंदपुर साहिब), सुखपाल सिंह ननु (फिरोजपुर शहर), की स्थिति को मजबूत कर दिया है तथा उपरोक्त सीटों में अधिकांश पर भाजपा विजय पताका फहरा सकती है व कुल मिलाकर भाजपा का आंकड़ा दहाई को पार कर सकता है।
मनप्रीत के लिए विधानसभा का दरवाजा दूर
मनप्रीत बादल के नेतृत्व में बने सांझे मोर्चे ने अकाली-भाजपा का कम और कांग्रेस का ज्यादा नुकसान किया है तथा यह मोर्चा 2-3 स्थानों को छोड़कर जीतने की स्थिति में नहीं है। मनप्रीत बादल अपनी परम्परागत सीट गिदड़बाहा से तो तीसरे स्थान पर फिसल सकते है तथा मौड़ में भी कुछ पाकेट में ही उन्हें वोट मिले है तथा उनकी जीत की बात हलके में नहीं कही जा रही है। वामपंथियों के टकसाली वोट ले जाकर कांग्रेस का नुकसान तो मोर्चे ने किया ही है साथ ही एन्टी-एनकम्बैंसी वोटों का बड़ा हिस्सा भी उन्होंने ले जाकर कांग्रेस की बढ़त को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यूथ वोट भी मनप्रीत के प्रत्याशियों को अच्छी तादाद में मिला है। लेकिन जैसे कि उम्मीद जताई जा रही थी कि मनप्रीत बादल अकाली दल को तगड़ा झटका देगा। ऐसा नही हो पाया। बल्कि इस मोर्चे के चलते कांग्रेस को ही कुछ हद तक नुकसान झैलना पड़ा है।
मंगलवार, 13 मार्च 2012
हत्यारे को सुनाई फांसी की सजा
11 फरवरी 2011 को डबवाली के सांवतखेड़ा में हुई थी महिला की हत्या
सुनाया है। न्यायाधीश ने गुरदेव कौर की हत्या के आरोपी निक्का सिंह पुत्र बंता सिंह निवासी सांवतखेड़ा को दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई है। मामले के अनुसार सांवतखेड़ा निवासी बुजुर्ग महिला गुरदेव कौर रोजाना की तरह 11 फरवरी 2011 को भी दोपहर को मसीता रोड पर घूमने निकली थी मगर शाम तक घर नहीं लौटी। उसके बाद गुरदेव कौर के भतीजे हरमीक सिंह व अन्य परिजनों ने गुरदेव कौर की तलाश शुरू की तो गांव के पास ही सरसो के खेत से महिला का शव मिला। मृतका के हाथ उसी के दुप्पटे से बंधे हुए थे और सलवार से पैर बंधे हुए थे। इसकी सूचना मिलने पर डबवाली पुलिस भी मौके पर गई थी और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया था। उस समय पुलिस ने अज्ञात लोगों पर हरमीक की शिकायत पर हत्या व दुष्कर्म का केस दर्ज किया था। पुलिस ने अपनी जांच को आगे बढ़ाते हुए 27 फरवरी 2011 को शक के आधार पर सांवतखेड़ा निवासी निक्का सिंह पुत्र बंता सिंह को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में निक्का सिंह ने हत्या की बात कबूल करते हुए यह भी बताया था कि उसने महिला के कानों से सोने की बालियां भी चुराई थी जो उसके घर से पुलिस ने बरामद की थी। निक्का सिंह द्वारा हत्या की बात कबूल करने के बाद पुलिस ने उसे अदालत में पेश कर दिया जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। तब से ही यह केस अदालत में चल रहा था जहां नीलिमा सांगला की अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है। जादा जानकारी के लिए क्लिक करे ---http://youngflamenews.blogspot.in/2011/02/blog-post_8840.html
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सोमवार, 21 नवंबर 2011
देसूजोधा मर्डर केस में क्लीन चिट दिए जाने से मृतकों के परिजनों व गांव वासियों में रोष
डबवाली- देसूजोधा मर्डर केस की जांच कर रही क्राईम ब्रांच द्वारा मर्डर केस में सम्मलिप्त लुधियाना के राजवीर सिंह उसकी पत्नी परमजीत कौर व सुखजीत सिंह सुब्बाखेड़ा कीे क्लीन चिट
दिए जाने से मृतकों के परिजनों व गांव वासियों में रोष रोष पाया जा रहा है। जांच से क्षुब्ध गांव वासियों ने आज गांव के गुरूद्वारा में आसपास के गांवों के लोगों की एक बैठक बुलाई। जिसमें आसपास के गांव जोगेवाला, पन्नीवाला मोरिका, पन्नीवाला रूलदु, फूल्लो, हस्सू, मांगेआना, चट्ठा, चक्क हीरा सिंह वाला, सेखु व अन्य गांवों के लोग भाराी संख्या में शामिल हुए।
बैठक में ग्रामीणों को संबोधित कर रहे जत्थेदार मलकीत सिंह ने कहा कि 15 मई को गांव देसूजोधा में प्रसिद्ध कबड्डी खिलाड़ी दर्शन सिंह मट्टू व उसके भाई कौर सिंह का जिन लोगों ने दिन-दिहाड़े बेरहमी से कत्ल कर दिया उन्हें क्राईम ब्रांच की पुलिस उनके राजनितिक प्रभाव व पैसों के बल पर केस से बाहर करने पर तुली हुई है। जो गांव वासियों को कभी भी मंजूर नहीं होगा।
दिए जाने से मृतकों के परिजनों व गांव वासियों में रोष रोष पाया जा रहा है। जांच से क्षुब्ध गांव वासियों ने आज गांव के गुरूद्वारा में आसपास के गांवों के लोगों की एक बैठक बुलाई। जिसमें आसपास के गांव जोगेवाला, पन्नीवाला मोरिका, पन्नीवाला रूलदु, फूल्लो, हस्सू, मांगेआना, चट्ठा, चक्क हीरा सिंह वाला, सेखु व अन्य गांवों के लोग भाराी संख्या में शामिल हुए।उन्होंने कहा कि अगर 24 नवम्बर तक क्राईम ब्रांच द्वारा दी गई क्लीनचीट वाले केस में सम्मलिप्त राजवीर सिंह, परमजीत कौर व सुखजीत सिंह निवासी सुब्बाखेड़ा को गिरफ्तार नहीं किया गया तो वह आंदोलन पर उतर आएंगे। उसके लिए चाहे उन्हें रेल रोकों व सड़क जाम जैसे आंदोलन छेडऩे पड़े तो भी वह पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि मृतक दर्शन सिंह मट्टू एक कबड्डी खिलाड़ी था। जिसके नेतृत्व में हरियाणा के कबड्डी खिलाडिय़ों ने अनेकों अवार्ड जीत कर गांव व पूरे हरियाणा का नाम रोशन किया था। इसलिए वह मंगलवार को कबड्डी टीम के भारतीय कप्तान सुखवीर सिंह से मिलेंगे जोकि दर्शन सिंह मट्टू के साथी खिलाड़ी रह चुके है। स. मलकीत सिंह जत्थेदार ने कहा कि जब एसपी साहब डीएपी बाबू लाल, एसडीएम डबवाली ने जांच दौरान उक्त लोगों को आरोपी करार दिया था तो क्राईम ब्रांच की पुलिस मोबाईल रेंज का हवाला देकर उन्हें निर्दोष साबित कैसे कर सकती है।
इस बैठक को संबोधित कर रहे अखिल भारतीय बाबरिया समाज के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह देसूजोधा ने कहा कि हरियाणा का नाम रोशन करने वाले कबड्डी खिलाड़ी दर्शन सिंह मट्टू व उसके भाई कौर सिंह के हत्यारों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि दर्शन सिंह मट्टू जैसे कबड्डी खिलाड़ी ने बड़ी-बड़ी टीमों को हराकर अपने इलाके व गांव के लिए एक मिसाल कायम की थी जोकि किसी भी खिलाड़ी के लिए मान की बात थी। उन्होंने कहा कि मृतक दर्शन् सिंह मट्टू के परिजनों को न्याय दिलाने के लिए पूरे देश के कबड्डी खिलाडिय़ों को एक जूट करंेगे और उनको न्याय दिलाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है।
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एचपीएस एस सीनियर सैकण्डरी स्कूल में वर्कशॉप का आयोजन
डबवाली- एचपीएस एस सीनियर सैकण्डरी स्कूल में पर वर्तमान युग में सफलता पूर्वक परवरिश कैसे करें विषय पर एक वर्कशॉप का आयोजन गत शाम किया गया जिसमें गिनिज़ बुक के
वल्र्ड रिकार्ड होल्डर दिल्ली से पधारे मुहम्मद फैज़ल ने परवरिश के सिद्धांत, बच्चे के लिए स्वास्थ्यवर्द्धक तथा क्षमतावान वातावरण कैसे बनांए, अपनी परवरिश शैली का अवलोकन कैसे करें तथा बच्चों के मनोविज्ञान को समझने की विधांए बताई। उन्होंने बताया कि परवरिश की विधांए सीखाने के लिए किसी स्कूल या कालेज में अथवा विष्वविद्यालय में कोई डिग्री अथवा कोर्स नहीं करवाया जाता जबकि आधुनिक युग में यह अति आवश्यक हो गया है। अक्सर अभिभावक अपनी इच्छांए बच्चों पर थोंपते हैं अथवा वे अपने जीवन में जो नहीं कर पाए उन्हें पूरा करने के लिए बच्चों पर बड़े-बड़े सपने लालच के साथ लाद देते हैं।
उन्होंने बताया कि जन्म के समय न तो कोई चोर पैदा होता है और न ही कोई झूठ बोलना सीख कर आता है। इसमें अधिकतर योगदान माता-पिता का अथवा वातावरण को होता है जिसमें वह रहता है। उन्होंने वर्कशॉप के दौरान बताया कि बहाने बनाने वाले बच्चे अपनी आँखे किधर फेरते हैं, झूठ बोलने वाले कैसे, लीक पीटने वाले किधर तथा जीवन में आगे बढऩे वाले बच्चे कैसे देखते हैं। जरूरत है माता-पिता को वह सब समझने की। इसके लिए उन्होंने अभिभावक को कम्पयूटर व प्रोजैक्टर की मदद से विस्तार पूर्वक समझाया। उन्होंने पेरंटिग के बारे में बोलते हुए कहा कि जन्म के बाद से लेकर यौवन तक के विकास की शैली ही पेर्टिंग है अर्थात् परवरिश है। उन्होंने कहा कि केवल बड़ा कर देना अथवा खाना-खिलाना, कपड़े आदि देना फीस देकर स्कूल भेजना पेर्टिंग नहीं है। पेंर्टिंग के बारे में उन्होंने बहुत सी बातें टिप्स के रूप में बताई जिससे परवरिश का भी अपना एक आनंद आने लगता है। उन्होंने कहा कि तुलना के आधार पर परवरिश नकारात्मक परवरिश है। 7 वर्ष तक के बच्चों को तो कभी भी न्यूज़ नहीं दिखानी चाहिए। बच्चों को टी.वी. या विडियो गेम्ज़ से रोकें नहीं अपितु अच्छे चैनल तथा अच्छी गेम्ज़ लेकर दें व दिखांए। बच्चों को थैंक्स गीविंग विधा अर्थात् आभार व्यक्त करना जरूर सीखांए। बच्चों को पैसे की मैनेज़मैंट तथा टाईम की मैपेज़मैंट जरूर सीखांए। अधिकतर विकास की बातें रात 9 बजे से सुबह 7 बजे की बीच ही सम्पन्न होती हैं। बच्चे के खाना खाने के समय, उसके द्वारा अपनी पुस्तकें व युनिफार्म आदि उचित स्थान पर रखने के साथ-साथ घर को भी साफ व सुन्दर बनाना तथा आडोस-पडोस में व्यवहार करना जरूरी सीखांए। 7 वर्ष की उम्र तक सीखी गई बातें कभी भूलती नहीं और उसके बाद सीखी बतांए अक्सर बिगड़ जाती हैं।उन्होंने बताया कि बच्चों की सदैव बिना की शर्त के मदद करें तथा मदद लें। अपने बच्चों को सामान्य बनने दो विशेष वह खुद बन जाएगा। बच्चों से आज ही बुढापे का सहारा ढूंढना उचित नहीं। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान माता-पिता बनने पर चुटकी लेते हुए कहा कि हालांकि वे अभी स्वयं पिता नहीं बने परन्तु अपने बचपन तथा अच्छी परवरिश का ही वे परिणाम मानते हैं कि वे आज इस विशय पर 100 से अधिक वर्कशॉप कर चुके हैं। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अभिभावकों को मुहम्मद फैजल द्वारा वैदिक गणित के भी अनेकों सूत्रों का प्रयोग करना सीखाया। अभिभावकों ने न केवल इसमें रूचि ली अपितु प्रबंधक समिति द्वारा किए गए इस प्रयास के लिए आभार भी व्यक्त किया। कार्यक्रम का शुभारम्भ माँ सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलन कर मुहम्मद फैजल, विद्यालय संचालिका सुजाता सचदेवा तथा बाल विभाग की प्रमुख मैडम नोरीन दास ने किया।
कार्यक्रम का संचालन मैडम रमनदीप कौर सिद्धू ने बाखूबी किया। कार्यक्रम के अंत में विद्यालय प्रबंधक समीति की और से मुहम्मद फैजल को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
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झगड़े में एक युवक घायल
डबवाली- - रात कोर्ट कॉम्पलैक्स के सामने स्थित सुंदर नगर में हुए झगड़े में एक युवक के घायल होने का समाचार प्राप्त हुआ है। स्थानीय राजकीय अस्पताल में उपचाराधीन सन्नी पुत्र खुशीराम ने बताया कि बीती रात उसके दोस्त हैप्पी व कुलदीप अपनी बौलेरो गाड़ी में उसको घर छोडऩे आए थे तो उनकी गली में जंटा सिंह व गीता सिंह का ट्रैक्टर खड़ा था तो उसने उनको ट्रैक्टर हटाने को कहा तब तो उन्होंने ट्रैक्टर हटा लिया लेकिन जब उसके दोस्ते उसे घर छोड़कर वापिस आए तो उक्त लोगों ने ट्रैक्टर हटाने से मना कर दिया और उसके दोस्तों से झगड़ा करने लगे। उनका शोर सुनकर जब वह गली में आया और उन्हें ट्रैकटर हटाने के लिए कहा तो उक्त लोगों ने ट्रैक्टर के हैंडल से उसके सिर पर वार कर दिया। जिससे वह बेहोश होकर वहीं गिर पड़ा। उसे घायलावस्था मेंं उसके मकान मालिक हरबंस लाल सेठी ने उपचार हेतु राजकीय अस्पताल में दाखिल करवाया। इस झगड़े की सूचना थाना शहर पुलिस को दे दी गई है और पुलिस मामले की जांच कर रही है।
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रेलगाड़ी की चपेट में आने से घायल
डबवाली-स्थानीय कबीर बस्ती के समीप विवाह समारोह में आया एक व्यक्ति रेलगाड़ी की चपेट में आने से घायल हो गया। उसे घायलावस्था में डबवाली जन सहारा सेवा संस्था के सदस्यों ने संस्था की एम्बुलैंस द्वारा उपचार हेतु राजकीय अस्पताल में दाखिल करवाया। प्राप्त जानकारी अनुसार गांव नंदगढ़ निवासी कुलवंत सिंह पुत्र जगराज सिंह अपने साले की शादी में कबीर बस्ती अपने ससुराल आया हुआ था कि आज दोपहर वह रेल लाईन पार कर रहा थ कि अचानक रेलगाड़ी की चपेट में आ गया। समाचार लिखे जाने तक घायल का राजकीय अस्पताल में उपचार चल रहा था।
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गुरुवार, 3 नवंबर 2011
पूजनीय होने के बावजूद भी बेसहारा है गाय
डबवाली-आज गोपाष्टमी है अर्थात गौपूजन का दिन। माना जाता है कि गाय में 33 करोड़ देवी देवताओं का वास होता है। जो मनुष्य गौ सेवा करता है वह संपूर्ण संसारिक व परलौकिक सुखों को प्राप्त करता है। उसे सभी तीर्थों का पुण्य भी प्राप्त होता है।डबवाली में इस समय दो गौशालाएं बनी हुई हैं जिनमें कितनी ही बेसहारा गऊओं को आश्रय मिला हुआ है। इन गौशालाओं में करीब 1200 गाय रह रही हैं। इन गौशालाओं की गाय रखने की क्षमता करीब इतनी ही है। इस कारण से शहर में बेसहारा होकर घूमने वाली सैंकडों गऊओं को यहां आश्रय नहीं दिया जा सकता। इसके अलावा गऊओं के पालन पोषण पर होने वाले खर्च को लेकर भी आर्थिक अभाव से जूझ रही गौशालाएं बेसहारा गऊओं को आश्रय देने से कतराती हैं।
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बुधवार, 2 नवंबर 2011
प्लैटलेट्स ने तोड़ी लोगों की आर्थिक कमर
सामाजिक संस्थाए व् प्रशासन मोंन
प्लैटलेट्स को बढ़ाने में कारगर रहा 'कीवीÓ फल भी 30 से 40 रूपए प्रति नग बिक रहा है। उधर, बकरी का दूध भी इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। कुछ बकरी पालक तो दूध के बदले में कोई पैसा नहीं ले रहे लेकिन कहीं-कहीं यह 500-600 रूपए प्रति किलो तक बिक रहा है। गौरतलब है कि बकरी के दूध से भी प्लैटलेट्स बढऩे की बाते कहीं जा रही है। हालांकि आर्युवेद एवं होम्योपेथी पद्धति में प्लैटलेट्स बढाने हेतु बेहद कारगर इलाज बताया जा रहा है लेकिन आमजन अभी तक इन पद्धतियों से जुड़ा हुआ नहीं है तथा आमजन गिलोय, आवँला, तुलसी व सस्सी होम्योपेथी दवा को ज्यादा तरजीह नहीं दे रहा है खासकर ग्रामीणों को इन पद्धतियों बारे कोई जानकारी नहीं है तथा ये लोग मजबूरीवश महंगा इलाज करवा रहे है। प्रशासन को चाहिए कि जरूरतमंदों को मुफ्त टैस्ट सुविधा उपलब्ध करवाये तथा बीमारी एवं कारगर इलाज बारे जागरूकता पैदा करने हेतु प्रचार अभियान चलाएं। समाजसेवी संस्थाओं को भी तुरंत इस ओर ध्यान देना चाहिए तथा निशुल्क कैम्प आदि लगाकर अपना योगदान करना चाहिए।
डबवाली (यंग फ्लेम)विगत एक माह से क्षेत्र में बुखार का प्रकोप जारी है शहर के अधिकांश अस्पताल बुखार पीडि़तों से भरे पड़े है। प्लैटलेट्स कम हो जाने के केस भारी तादाद में पहली
बार सामने आ रहे है। जिसके चलते अनेक मरीजों को लुधियाना आदि शहरों के बड़े अस्पतालों में इलाज हेतु दाखिल होना पड़ रहा है।
कम आय वर्ग से संबंधित बुखार पीडि़तों को महंगे इलाज के चलते बेहद परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा कोई विशेष राहत नहीं मिल पा रही है। महंगे टैस्टों ने जहां पीडि़तों की कमर तोड़कर रख दी है वहीं कुछ लेबोरेट्रीयों की टैस्ट रिपोर्ट पर सवालिया निशान भी लगे है।
बार सामने आ रहे है। जिसके चलते अनेक मरीजों को लुधियाना आदि शहरों के बड़े अस्पतालों में इलाज हेतु दाखिल होना पड़ रहा है।प्लैटलेट्स को बढ़ाने में कारगर रहा 'कीवीÓ फल भी 30 से 40 रूपए प्रति नग बिक रहा है। उधर, बकरी का दूध भी इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। कुछ बकरी पालक तो दूध के बदले में कोई पैसा नहीं ले रहे लेकिन कहीं-कहीं यह 500-600 रूपए प्रति किलो तक बिक रहा है। गौरतलब है कि बकरी के दूध से भी प्लैटलेट्स बढऩे की बाते कहीं जा रही है। हालांकि आर्युवेद एवं होम्योपेथी पद्धति में प्लैटलेट्स बढाने हेतु बेहद कारगर इलाज बताया जा रहा है लेकिन आमजन अभी तक इन पद्धतियों से जुड़ा हुआ नहीं है तथा आमजन गिलोय, आवँला, तुलसी व सस्सी होम्योपेथी दवा को ज्यादा तरजीह नहीं दे रहा है खासकर ग्रामीणों को इन पद्धतियों बारे कोई जानकारी नहीं है तथा ये लोग मजबूरीवश महंगा इलाज करवा रहे है। प्रशासन को चाहिए कि जरूरतमंदों को मुफ्त टैस्ट सुविधा उपलब्ध करवाये तथा बीमारी एवं कारगर इलाज बारे जागरूकता पैदा करने हेतु प्रचार अभियान चलाएं। समाजसेवी संस्थाओं को भी तुरंत इस ओर ध्यान देना चाहिए तथा निशुल्क कैम्प आदि लगाकर अपना योगदान करना चाहिए।
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मंगलवार, 1 नवंबर 2011
दशमेश कालेज में चल रहा यूथ फेस्टीवल संपन्न
डबवाली- दशमेश गल्र्स कालेज आफ एजूकेशन गांव बादल में चल रहे यू
थ फेस्टीवल में चौथे व अंतिम दिन पुरस्कार वितरण समागम में मु य मेहमान के तौर पर सिंचाई मंत्री जनमेजा सिंह ने समूलियत की। इस दौरान उन्होंने विजयी विद्यार्थियों को पुरस्कार ाी वितरित किए। इस अवसर पर प्रिंसिपल एसएस संघा ने मेहमानों का स्वागत किया तथा कालेज की प्राप्तियों का वर्णन किया। मु य मेहमान ने यूनिवर्सिटी द्वारा करवाए जा रहे इस कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के कार्यक्रम युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ते हैं। उन्होंने कहा कि ाुशी की बात है कि समय के सा
थ धीरे धीरे आज की युवा पीढ़ी पश्चिमी स यता के प्र ााव से बाहर आती जा रही है। उन्होंने कालेज की प्राप्तियों की सराहना करते हुए प्रिंसिपल व स्टाफ को बधाई दी। उन्होंने इस दौरान मेजबान कालेज को 2 ला ा रुपए ग्रांट राशी देने की घोषणा ाी की। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने प्रति ााशाली विद्यार्थियों को पुरस्कार वितरित किए।
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थ फेस्टीवल में चौथे व अंतिम दिन पुरस्कार वितरण समागम में मु य मेहमान के तौर पर सिंचाई मंत्री जनमेजा सिंह ने समूलियत की। इस दौरान उन्होंने विजयी विद्यार्थियों को पुरस्कार ाी वितरित किए। इस अवसर पर प्रिंसिपल एसएस संघा ने मेहमानों का स्वागत किया तथा कालेज की प्राप्तियों का वर्णन किया। मु य मेहमान ने यूनिवर्सिटी द्वारा करवाए जा रहे इस कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के कार्यक्रम युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ते हैं। उन्होंने कहा कि ाुशी की बात है कि समय के सा
थ धीरे धीरे आज की युवा पीढ़ी पश्चिमी स यता के प्र ााव से बाहर आती जा रही है। उन्होंने कालेज की प्राप्तियों की सराहना करते हुए प्रिंसिपल व स्टाफ को बधाई दी। उन्होंने इस दौरान मेजबान कालेज को 2 ला ा रुपए ग्रांट राशी देने की घोषणा ाी की। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने प्रति ााशाली विद्यार्थियों को पुरस्कार वितरित किए।वार गायन में मेजबान कालेज की नवजोत कौर अव्वल
दशमेश गल्र्स कालेज आफ एजूकेशन गांव बादल में चल रहे यूथ फेस्टीवल में हुए मुकाबलों में वार गायन में मेजबान कालेज की नवजोत कौर ने बाजी मारी। दूसरा स्थान गुरु गोबिंद सिंह कालेज गिद्दड़बाहा की अमनदीप कौर व तीसरा केनवे कालेज अबोहर के संदीप ने हासिल किया।
इसके अलावा कविशरी में श्री सत्यसांई कालेज कराईवाला प्रथम, देशमेश कालेज बादल द्वितीय, डीएवी कालेज अबोहर तृतीय, कली में डीएवी कालेज अबोहर प्रथम, श्री सत्यसांई कालेज कराईवाला द्वितीय, लाला जगत नारायण कालेज जलालाबाद तृतीय व ट्रेडिशनल सांग लेडिज में दशमेश कालेज बादल प्रथम केनवे कालेज अबोहर द्वितीय तथा डीएवी कालेज अ
बोहर तृतीय स्थान पर रहा। इसी तरह पं ाी डिजाइन में डीएवी कालेज अबोहर ने प्रथम, देव समाज कालेज फिरोजपुर द्वितीय, दशमेश कालेज बादल तृतीय, मेंहदी में कलगीधर कालेज मलोट प्रथम, लाला जगतनारायण जलालाबाद द्वितीय, गुरु गोबिंद सिंह कालेज गिद्दड़बाहा तृतीय व फुलकारी में देव समाज कालेज फिरोजपुर प्रथम, बावा निहाल सिंह कालेज द्वितीय तथा डीएवी कालेज अबोहर ने तृतीय स्थान हासिल किया।
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सरकारी स्कूलों के अध्यापकों की फरलो पर लगेगी लगाम
डबवाली-सरकारी स्कूलों के अध्यापक अब 'फरलो पर स्कूल से गायब नहीं हो सकेंगे। प्रदेश सरकार ने अध्यापकों की हाजिरी दर्ज करने के लिए सरकारी स्कूलों में विशेष अटेंडैंस उपकरण लगाने का काम शुरू कर दिया है। इस उपकरण में प्रत्येक अध्यापक व स्कूल के अन्य कर्मचारियों के अंगूठे व उंगलियों के निशान स्कैन रहेंगे। जब भी कोई अध्यापक स्कूल में पहुंचेंगा तो उसे सबसे पहले इस उपकरण में अपना अंगूठा लगाकर हाजिरी दर्ज करवानी होगी। यह उपकरण अध्यापक की उपस्थिति का सही समय रिकॉर्ड करेगा।डबवाली के ख्ड शिक्षा अधिकारी बलविंद्र सिंह भंगू के मुताबिक डबवाली उपमंडल के 20 हाई व 9 सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में यह उपकरण लगाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उपकरण लगाने के बाद सभी अध्यापकों व स्टाफ सदस्यों के फिंगर प्रिंट इसमें स्कैन किए जाएंगे और इसके पश्चात हाजिरी की नईं प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
जिला शिक्षा अधिकारी कुमकुम ग्रोवर के मुताबिक फिलहाल इस योजना के तहत जिले के सभी हाई व कई सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में यह हाजिरी उपकरण लगाए जा रहे हैं लेकिन जल्द ही प्राईमरी स्कूलों में भी इस प्रकार के उपकरण लगा दिए जाएंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि नई हाजिरी प्रक्रिया के शुरू होने के बाद स्कूलों में अध्यापकों की उपस्थिति के मामले में सुधार आएगा।
हाजिरी उपकरणों के माध्यम से अंगूठा व उंगली के निशान आदि दर्ज कर हाजिरी लगाने की जो योजना अब हरियाणा में शुरू की जा रही है वह योजना करीब एक साल पहले पंजाब के सरकारी स्कूलों में लागू की गई थी। योजना लागू होने के बाद पंजाब के सरकारी स्कूलों में अध्यापकों की उपस्थिति में व्यापक सुधार दर्ज किया गया। अध्यापकों की लेटलतीफी पर भी अंकुश लगा है। पंजाब में इस योजना के सफल होने के बाद अब हरियाणा में भी इस प्रकार की पहल कर सरकारी स्कूलों में सुधार की योजना को अमली जामा पहनाया जा रहा है।
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लाखों रूपए के जेवरात सहित फरार हुई नौकरानी गिरफ्तार
डबवाली-मकान मालिकों को चकमा देकर घर से लाखों रूपए कीमत के सोने के जेवरात लेकर फरार हुई नौकरानी को शहर पुलिस ने गिरफ्तार करने में सफलता हासिल कर ली है।
गौरतलब है कि वार्ड 15 में मलकीत सिंह गंगा वाली गली के निवासी आरएमपी डॉ. विजय सिंह के घर से उनके घर में काम करने वाली एक नौकरानी सर्वजीत कौर उर्फ परमजीत कौर करीब 12 तोले सोने के जेवरात उड़ाकर ले गई थी। इन जेवरात में एक हार, दो चुडिय़ा, दो कांटे व एक टिका आदि थे। गत 27 अक्टूबर को डॉ. विजय सिंह ने घर से जेवर चोरी करने के आरोप में घर में काम करने वाली महिला सर्वजीत कौर उर्फ परमजीत कौर के खिलाफ मामला दर्ज करवाया।इस मामले में कार्यवाही करते हुए शहर पुलिस ने डबवाली के वार्ड 15 में ही एक किराए के मकान में रह रही सर्वजीत कौर उर्फ परमजीत कौर को गिरफ्तार कर लिया।
एसआई घड़सा राम ने बताया कि आरोपी महिला को पुलिस ने सेामवार को ज्यूडिशियल मैजिस्ट्रेट पायल बांसल की अदालत में पेश किया। अदालत ने उसे एक दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। उन्होंने कहा कि रिमांड अवधि के दौरान महिला से पूछताछ कर चोरीशुदा जेवरात बरामद करने का प्रयास किया जाएगा।
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इंदिरा गांधी व सरदार पटेल को याद किया
डबवाली-ब्लाक कांग्रेस कमेटी शहर डबवाली द्वारा सोमवार को पूर्व प्रधानमन्त्री स्वर्गीय इन्दिरा गांधी के 27 वें बलिदान दिवस व पूर्व गृहमन्त्री व लौह पुरूष सरदार वल्लभ भाई पटेल के जन्मदिवस को लेकर सिरसा रोड़ पर स्थित कांग्रेस कार्यालय में आढ़ती एसोसिएशन के पूर्व प्रधान प्रकाश चन्द बांसल की अध्यक्षता में एक श्रद्वांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस सभा में कर्मचन्द शर्मा, बख्तावरमल दर्दी, केशवशर्मा, सन्दीप चौधरी, विनोद बांसल व हल्का युवा कांग्रेस के डेलीगेट संजय मिढा ने श्रीमति गांधी को श्रद्वांजलि दी। वक्ताओं ने इन्दिरा गांधी को महिला शक्ति की प्रतीक दुर्गा की संज्ञा देते हुए कहा कि उन्होने अपनी दृढ इच्छा शक्ति के बल पर पूरे विश्व में भारत का लोहा मनवाया और 1971 की लड़ाई में पाकिस्तान को नाकों चने चबवाये तथा बांग्लादेश को आजाद करवाया। उन्होंने कहा कि स्व. इन्दिरा गांधी ने ही भारत को परमाणु शक्ति सम्पन्न देशों की कतार में खड़ा किया था। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने लौह पुरूष सरदार वल्लभ भाई पटेल को भी याद किया और कहा कि सरदार पटेल ने देसी रियासतो का एकीकरण किया जिसकी बदौलत ही आज भारत एक अखण्ड देश के रूप में विद्यमान है। अन्त में ब्लॉक कांगे्रस डबवाली के अध्यक्ष पवन गर्ग ने सभी कार्यकर्ताओं का इस सभा में पंहुचने पर धन्यवाद किया। इस अवसर पर पूर्व ब्लाक प्रधान रामजी लाल , डॉ. भारत भूषण छाबड़ा, जयचन्द रहेजा, संगठन सचिव राकेश बाल्मीकि, भोलाराम रोड़ी, युवा कांग्रेस के शहरी प्रधान अमन भारद्वाज, मास्टर जगदीश शर्मा, मनवीर मान, नरेन्द्र जोईया, सन्नी बत्तरा व डा.के.वी.सिंह के निजी सचिव बजरंग थालोड़ उपस्थित थे।
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सीढिय़ों से गिरकर वृद्धा की मौत
डबवाली-वार्ड 5 के पब्लिक क्लब क्षेत्र में सोमवार को एक वृद्ध महिला अपने घर में सीढिय़ों से गिर गई। घायल महिला को जब इलाज के लिए अस्पताल ले जाया जा रहा था तो रास्तें में ही उसकी मौत हो गई।
मिली जानकारी के मुताबिक 82 वर्षीय आशावती पत्नी नत्थू राम पिछले कई वर्षों से अपने भतीजे ओम प्रकाश सेठी के घर पर ही रहती थी। सोमवार सुबह जब वह घर की छत्त पर जाने के लिए घर की सीढिय़ा चढ़ रही थी तो अचानक उसका पांव फिसल गया। इससे वह संभल नहीं पाई और सीढिय़ों से लुढ़कती हुई नीचे आ गिरी। इस हादसे में वह बुरी तरह घायल हो गई। परिजन उसे घायलावस्था में उठाकर जब उसे अस्पताल ले जा रहे थे तो रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। अस्पताल पहुंचने पर जांच के बाद चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।दो के जीवन में किया उजाला
वृद्धा आशावती के मरणोपरांत परिजनों ने उसके नेत्रदान का पुनीत कार्य संपन्न करवाया। इस प्रकार आशावती इस दुनियां से जाते-जाते भी दो लोगों के अंधरे जीवन को रोशन कर गई।
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भतीजी व भानजी ने दी पार्थिव शरीर को मुखाग्नि
डबवाली-
अपने बुजुर्गों की अर्थी को महिलाओं द्वारा कंधा देने की डेरा सच्चा सौदा की मुहिम शहरों के बाद अब गांवों में भी पहुंच गई है। उपमंडल डबवाली के गांव देसूजोधा में रविवार को एक 90 वर्षीय बुजुर्ग को अपनी भतीजी व भानजी का कंधा नसीब हुआ। यही नही बुजुर्ग के पुत्र के साथ-साथ भतीजी व भानजी ने बुजुर्ग के पार्थिव शरीर को मुखाग्नि देकर एक नई परंपरा की शुरूआत भी की।
मिली जानकारी के मुताबिक गांव देसूजोधा में एक बुजुर्ग तेजा सिंह का शनिवार को करीब 90 वर्ष की आयु में देहांत हो गया। तेजा सिंह ताउम्र अविवाहित रहे थे। उन्होंने अपने भाई राजेंद्र सिंह के पुत्र गुरमेल इंसा को गोद लिया हुआ था। तेजा सिंह का पूरा परिवार डेरा सच्चा सौदा से जुड़ा हुआ है। ऐसे में डेरा सच्चा सौदा की मुहिम से प्रेरित होकर घर की बेटियों को भी अर्थी को कंधा देने के लिए कहा गया।इस प्रकार महिलाओं को पुरूषों के बराबर हक दिलाने के लिए डेरा सच्चा सौदा द्वारा शुरू की गई उपरोक्त मुहिम की साध संगत व अन्य लोगों ने मुक्तकंठ से प्रशंसा की। ुजुर्ग तेजा सिंह के मरणोपरांत नेत्रदान करवाकर उनके परिजनों ने एक मिसाल भी कायम की। पुत्र गुरमेल इंसा व अन्य परिजनों की इच्छा पर सिरसा से शाह सतनाम अस्पताल की टीम ने गांव में पहुंचकर नेत्रदान का पुनीत कार्य संपन्न करवाया। इस प्रकार स्व. तेजा सिंह की आंखें उनके मरणोपरांत भी इस दुनियां के रंग देखेंगी।
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नियमों की धज्जियां ,मुनादी कर बेची जा रही है लाल परी
मंडी डबवाली
डबवाली इलाके में शराब के कुछ ठेकेदार सभी नियम-कायदों को ताक पर रखकर शराब की बिक्री कर रहे हैं। खासकर हरियाणा व पंजाब की सीमा पर स्थित शराब के ठेकों पर नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। यहां शराब की बिक्री बढ़ाने के लिए न केवल रेटों की प्रतिस्पर्धा की जा रही अपितु लाऊड स्पीकर लगाकर लोगों को सस्ती शराब का लालच देकर ठेकों की ओर आकर्षित किया जा रहा है। मलोट रोड पर स्थित मालवा बाईपास के समीप पंजाब के एक ठेकेदार ने शराब की देसी बोतल का रेट घटाकर 50 रूपए कर दिया तो उसके मुकाबले में हरियाणा के ठेकेदार ने 40 रूपए बोतल के बैनर टांग दिए हैं। दोनों ठेकों पर लाऊड स्पीकर लगाकर मुनादी की जा रही है और लोगों को शराब बेची जा रही है। इस बारे में पंजाब के ठेके पर कार्यरत कारिंदे ने बताया कि दीपावली के बाद शराब की बिक्री कम हो गई है इसलिए रेट घटाएं गए हैं।
उधर, हरियाणा क्षेत्र के ठेके पर कार्यरत कृष्ण कुमार ने आरोप लगाया कि पंजाब के ठेकेदार ने रेट खराब किया है इसलिए उन्हें भी रेट कम करने की घोषणा करनी पड़ी है। दोनों ही ठेकों के कारिंदों को यह नहीं मालूम कि इस प्रकार लाऊड स्पीकर लगाकर शराब बेचना कानूनन मना है। यह कारिंदे तो इस बारे में अनभिज्ञता जताकर नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं लेकिन इन्हीं ठेकों के पास तैनात खड़ी हरियाणा व पंजाब की पुलिस भी आंखें मूंद कर शराब की बिक्री का यह तमाशा देख रही है। शाम ढलते ही इन ठेकों पर नशेडिय़ों का जमावड़ा लग जाता है और सस्ती शराब पीकर कई लोग अक्सर यहां धुत्त पड़े रहते हैं। ठेकों पर हो रही इस हुल्लडबाजी से आसपास के दुकानदार व यहां से गुजरने वाले लोग बेहद परेशान हैं। दुकानदारों की मांग है कि प्रशासन इन ठेकेदारों को कायदे कानून का पाठ पढ़ाए और नियमों की उल्लंघना करने वाले ठेकेदारों के खिलाफ कार्यवाही करे ।
डबवाली इलाके में शराब के कुछ ठेकेदार सभी नियम-कायदों को ताक पर रखकर शराब की बिक्री कर रहे हैं। खासकर हरियाणा व पंजाब की सीमा पर स्थित शराब के ठेकों पर नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। यहां शराब की बिक्री बढ़ाने के लिए न केवल रेटों की प्रतिस्पर्धा की जा रही अपितु लाऊड स्पीकर लगाकर लोगों को सस्ती शराब का लालच देकर ठेकों की ओर आकर्षित किया जा रहा है। मलोट रोड पर स्थित मालवा बाईपास के समीप पंजाब के एक ठेकेदार ने शराब की देसी बोतल का रेट घटाकर 50 रूपए कर दिया तो उसके मुकाबले में हरियाणा के ठेकेदार ने 40 रूपए बोतल के बैनर टांग दिए हैं। दोनों ठेकों पर लाऊड स्पीकर लगाकर मुनादी की जा रही है और लोगों को शराब बेची जा रही है। इस बारे में पंजाब के ठेके पर कार्यरत कारिंदे ने बताया कि दीपावली के बाद शराब की बिक्री कम हो गई है इसलिए रेट घटाएं गए हैं।
उधर, हरियाणा क्षेत्र के ठेके पर कार्यरत कृष्ण कुमार ने आरोप लगाया कि पंजाब के ठेकेदार ने रेट खराब किया है इसलिए उन्हें भी रेट कम करने की घोषणा करनी पड़ी है। दोनों ही ठेकों के कारिंदों को यह नहीं मालूम कि इस प्रकार लाऊड स्पीकर लगाकर शराब बेचना कानूनन मना है। यह कारिंदे तो इस बारे में अनभिज्ञता जताकर नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं लेकिन इन्हीं ठेकों के पास तैनात खड़ी हरियाणा व पंजाब की पुलिस भी आंखें मूंद कर शराब की बिक्री का यह तमाशा देख रही है। शाम ढलते ही इन ठेकों पर नशेडिय़ों का जमावड़ा लग जाता है और सस्ती शराब पीकर कई लोग अक्सर यहां धुत्त पड़े रहते हैं। ठेकों पर हो रही इस हुल्लडबाजी से आसपास के दुकानदार व यहां से गुजरने वाले लोग बेहद परेशान हैं। दुकानदारों की मांग है कि प्रशासन इन ठेकेदारों को कायदे कानून का पाठ पढ़ाए और नियमों की उल्लंघना करने वाले ठेकेदारों के खिलाफ कार्यवाही करे ।
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