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शनिवार, 21 नवंबर 2009

अमेरिका से सामरिक रिश्ते बढ़ाएगा भारत



नई दिल्ली
अगले सप्ताह महाशक्ति अमेरिका और 53 सदस्यों वाले राष्ट्रमंडल के साथ भारत अपनी
कूटनीति को नया आयाम देगा। अमेरिका से आपसी सामरिक रिश्तों को नई गहराई देने के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह शनिवार को वॉशिंगटन के लिए रवाना होंगे। इसके बाद वह त्रिनिदाद की राजधानी पोर्ट ऑफ स्पेन में राष्ट्रमंडल सम्मेलन में आतंकवाद के खिलाफ भारत के अभियान को मजबूत करेंगे।

ओबामा-मनमोहन मुलाकात 24 को: राष्ट्रपति ओबामा के पहले राजकीय अतिथि के तौर पर आमंत्रित प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की राष्ट्रपति बाराक ओबामा से 24 नवंबर को बातचीत के बाद दोनों देशों के बीच आतंकवाद के खिलाफ सहयोग के लिए सहमति के एक ज्ञापन पर हस्ताक्षर शिखर बैठक की महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी। यह समझौता आतंकवाद के खिलाफ भारत अमेरिका साझा लड़ाई को नई ताकत देगा, लेकिन परमाणु सहयोग समझौते के बाकी बचे मसलों को प्रधानमंत्री के दौरे में अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद नहीं है।

जारी होगा साझा बयान: सूत्रों के मुताबिक ओबामा-मनमोहन बातचीत के बाद राजनीतिक और सामरिक मसलों पर सहयोग को और पुख्ता बनाने के लिए दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक महत्व का एक साझा बयान भी जारी किया जाएगा जो दोनों देशों के बीच सामरिक साझेदारी को नया आयाम देगा।

एटमी करार का मुद्दा : सूत्रों ने प्रधानमंत्री के अमेरिका दौरे के बारे में बताया कि दोनों देशों के आला अधिकारी परमाणु समझौते की बारीकियों के बारे में बातचीत जल्द पूरा करेंगे और इस पर समझौता कुछ दिनों के भीतर होगा। हालांकि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने एक अमेरिकी दैनिक से इस आशय की उम्मीद जाहिर की है कि दोनों देश परमाणु सहयोग समझौते के बाकी मसलों को जल्द सुलझा लेंगे। इनमें परमाणु ईंधन की रिप्रोसेसिंग और एनरिचमेंट टेक्नॉलजी का अधिकार हासिल करना शामिल है। इन मसलों पर जल्द ही कोई सहमति होने की उम्मीद सूत्रों ने जाहिर की। इनके अलावा बाराक ओबामा और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की मौजूदगी में दोनों देशों के रिश्तों को व्यापक आधार देने के लिए आपसी महत्व के कई अन्य समझौतों पर हस्ताक्षर किए जाएंगे जिससे दोनों देशों के बीच जनता स्तर पर सहयोग और रिश्तों को नया आयाम मिलेगा।

खुलेंगे कई नए आयाम: इन समझौतों में शामिल है सिंह-ओबामा ज्ञान पहल, नवीकरणीय ऊर्जा पर सहयोग के लिए सहमति के ज्ञापन, बौद्धिक सम्पदा अधिकार, कृषि आदि में परस्पर सहयोग। सूत्रों ने कहा कि साठ के दशक में जिस तरह अमेरिका ने भारत की हरित क्रांति में मदद की थी इसी तरह भारत में पर्यावरण, ऊर्जा उत्पादन और कृषि के क्षेत्र में एक नई हरित क्रांति का सूत्रपात ओबामा- मनमोहन बातचीत के दौरान किया जाएगा।

अफ-पाक नीति पर चर्चा: ओबामा और मनमोहन की 24 नवंबर को वाइट हाउस में बातचीत के दौरान अफगानिस्तान और पाकिस्तान के मसले पर खासकर बातचीत होगी। आतंकवाद के मसले पर भारत अपनी चिंताएं जाहिर करते हुए पाकिस्तान में आतंकवादी ढांचे को तोड़ने में अमेरिकी सहयोग पर चर्चा होगी। यहां विदेश मंत्रालय के एक सूत्र ने कहा कि अमेरिका की नई अफ-पाक रणनीति की सफलता में भारत के हित जुड़े हैं। इसलिए इस पर भी विस्तार से मनमोहन सिंह ओबामा से बातचीत करेंगे।

राष्ट्रमंडल सम्मेलन 27-28 को: प्रधानमंत्री अमेरिका दौरा के बाद त्रिनिदाद की राजधानी पोर्ट ऑफ स्पेन में हो रहे राष्ट्रमंडल सम्मेलन में भी भाग लेने जाएंगे। यह सम्मेलन 27 और 28 नवंबर को होगा। सम्मेलन में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति के भाग नहीं लेने की रिपोर्टें हैं। राष्ट्रमंडल सम्मेलन में भी आतंकवाद के खिलाफ भारत अपनी कूटनीति जारी रखेगा। इस मसले पर 53 सदस्यों वाले राष्ट्रमंडल शिखर बैठक से भी एक साझा बयान जारी होगा।

शादीशुदा से प्यार




सृष्टि ( विजय स ): क्या शादी के बाद भी तुम मुझे इतना ही प्यार करोगे ?
विजय : क्यों नहीं ? मुझे तो शादी - शुदा गर्ल्स बहुत पसंद हैं।


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इटली में दो पाकिस्तानी मूल के नागरिक गिरफ्तार



ब्रेसिया, मुंबई पर धावा बोलने वाले हमलावरों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के लिए एक एजेंसी का संचालन करने वाले पाकिस्तानी पिता पुत्र को शनिवार को इटली के उत्तरी शहर ब्रेसिया से गिरफ्तार कर लिया गया। ब्रेसिया पुलिस ने कहा है कि दोनों को तड़के मारे गए छापे में गिरफ्तार किया गया।

पुलिस ने अपने बयान में कहा है कि दोनों संदिग्ध वित्त हस्तांतरण एजेंसी का संचालन करते थे और उन्होंने 26 नवंबर को मुंबई पर किए आतंकवादी हमलों के लिए वित्तीय सहायता मुहैया कराई थी। ब्रेसिया के आतंकवाद निरोधक पुलिस प्रमुख स्टीफेनो फोंजी के अनुसार, मुंबई पर हमले से पूर्व इंटरनेट फोन एकाउंट को सक्रिय करने के लिए उन्होंने पैसे भेजे थे और हमलावरों तथा उनके साथियों ने इस फोन का उपयोग किया था।

फोंजी ने कहा कि एफबीआई ने उन्हें सूचना दी थी कि हमलावरों को इटली से पैसे मुहैया कराए गए थे इसके बाद इतालवी पुलिस ने दिसंबर में जांच शुरू कर दी थी। ये पैसे एक पाकिस्तानी के नाम से हस्तांतरित कराए गए जो कभी इटली नहीं गया और कथित अपराधों में शामिल नहीं रहा।

पाकिस्तानी पिता पुत्र पर अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद को मदद करने और बढ़ावा देने के साथ-साथ अवैध वित्तीय गतिविधियां चलाने का आरोप है। नई दिल्ली में सूत्रों ने कहा कि इटली अधिकारियों ने गिरफ्तारी के संबंध में भारत सरकार को सूचित कर दिया है। भारतीय अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश में है कि इन आरोपियों के संबंध डेविड हेडली और तहव्वुर हुसैन राणा के साथ है या नहीं।

लश्कर ए तय्यबा के निर्देश पर भारत में कई बड़े आतंकी हमले करने की साजिश रचने के आरोप में एफबीआई ने बीते महीने दोनों को अमेरिका में गिरफ्तार किया था।

एक और जल विवाद

पंजाब व हरियाणा के बीच जल विवाद में एक और अध्याय जुड़ गया है। हरियाणा के सिंचाई मंत्री कैप्टन अजय सिंह यादव ने पंजाब में बन रहे शाहपुर कंडी बांध के निर्माण पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सिंचाई मंत्री यादव की अगुवाई में हरियाणा सरकार के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज शुक्रवार को केंद्रीय जल संसाधन मंत्री पवन कुमार बंसल से दिल्ली में मुलाकात की। बैठक में सिंचाई विभाग के वित्तायुक्त केके जालान, मुख्यमंत्री के सलाहकार आरएन पराशर और केंद्र सरकार के अधिकारी शामिल थे। कैप्टन यादव ने कहा कि शाहपुर कंडी परियोजना को केंद्रीय वित्तीय सहायता और मंजूरी देने से पहले हरियाणा को भी विश्वास में लिया जाए क्योंकि वह भी रावी का को-बेसिन राज्य है। साथ ही भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) से भी इस संबंध में विचार-विमर्श किया जाना चाहिए। कैप्टन यादव ने कहा कि 2001 में जब पंजाब ने योजना आयोग से इस परियोजना की मंजूरी ली थी तब योजना आयोग ने मंजूरी के साथ शर्त रखी थी कि परियोजना के संबंध में पंजाब रावी के अपने को-बेसिन राज्यों हरियाणा व राजस्थान से भी इस संबंध में विचार-विमर्श करे, पर वास्तविकता यह है कि गत आठ वर्षो में पंजाब ने हरियाणा से कोई बात नहीं की है। उन्होंने दावा किया कि पंजाब ने केंद्र सरकार की टेक्नीकल एप्रेजल लेने से पहले यह तथ्य छिपाया कि हरियाणा और बीबीएमबी से इस विषय में कोई बातचीत नहीं की गई। कैप्टन यादव ने कहा कि चूंकि यह पानी रावी में से लिया जाएगा इसलिए इस बांध से तैयार होने वाली बिजली में हरियाणा का भी हिस्सा होना चाहिए। सिंचाई मंत्री ने कहा कि इससे पहले भी थीन बांध से बिजली के बंटवारे का झगड़ा पंजाब व हरियाणा में चल रहा है। उत्तर राज्य परिषद ने हालांकि कहा था कि केंद्र सरकार थीन बांध की बिजली के बंटवारे के विवाद को निपटाए लेकिन अगर यह विवाद नहीं निपटाया जा सकता तो सुप्रीमकोर्ट में इसका रेफ्ररेंस दिया जाए पर आज तक ये दोनों ही काम नहीं हुए। इस प्रकार थीन बांध की बिजली के बंटवारे का विवाद अभी भी निपटा नहीं है और ऊपर से यह नया विवाद शुरू हो जाएगा। पंजाब थीन बांध से कितना पानी रिलीज करता है, उसकी मात्रा की जानकारी भी वह हरियाणा को नहीं देता। किशाऊ, रेणुका व लख्वार व्यासी बांधों के लिए बॉडी बनाई जाए कैप्टन यादव ने कहा कि यमुना पर बनने वाले किशाऊ, रेणुका व लख्वार व्यासी बांधों के लिए बीबीएमबी की तर्ज पर संबंधित छह राज्यों की एक बॉडी बनाई जानी चाहिए ताकि कोई अंतरराज्यीय विवाद पैदा न हो। इसके साथ ही इन छह राज्यों में इस पानी के बंटवारे के लिए नया समझौता होना चाहिए क्योंकि पुराना समझौता रद हो चुका है। उन्होंने इस परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना बनाने के लिए केंद्र सरकार का आभार भी व्यक्त किया।

खली पंजाब पुलिस से करेंगे दो-दो हाथ

व‌र्ल्ड रेसलिंग इंटरटेनमेंट (डब्ल्यूडब्ल्यूई) में अपनी फौलादी ताकत से दुनिया भर में धूम मचाने वाले दलीप सिंह राणा उर्फ द ग्रेट खली अपनी नौकरी बचाने के लिए पंजाब पुलिस के साथ दो-दो हाथ करने को तैयार हैं। खली का कहना है कि वह पंजाब पुलिस के साथ अपनी लड़ाई में पहला दौर बेशक हार गए हैं, लेकिन उनकी लड़ाई जारी रहेगी। आखिरकार जीत उन्हीं की होगी। खली ने अपनी लड़ाई जारी रखने का ऐलान करते हुए कहा, देखते जाइए आगे-आगे होता है क्या। मैं निलंबन और विभागीय जांच के खिलाफ लड़ाई जारी रखूंगा। मैं इसे लेकर चिंतित नहीं हूं। याद रहे गुरुवार को पंजाब पुलिस ने खली को सहायक पुलिस निरीक्षक पद (एएसआई) से निलंबित कर दिया था। पंजाब पुलिस ने खली के खिलाफ यह कार्रवाई करीब एक साल तक नौकरी से गैर हाजिर रहने के कारण किया। खली जालंधर स्थित पंजाब आ‌र्म्ड पुलिस (पीएपी) की सातवीं बटालियन में तैनात हैं। वर्ष 1993 में पीएपी के साथ जुड़ने वाले खली को एएसआई की नौकरी के लिए पंजाब पुलिस की ओर से 14,000 रुपये मासिक वेतन मिलता है। एक समय उनके लिए यह बड़ी रकम थी। लेकिन आज की तारीख में उनके लिए यह रकम कौड़ी का मोल रखती है। फिर भी खली अपनी नौकरी बचाने के लिए पंजाब पुलिस से दो-दो हाथ करने को तैयार हैं। पृष्ठ 2 कालम 1

द ग्रेट खली के गुरु डा. हस्तीर काफी निराश हैं खली से,

जालंधर : सन् 1994 में रामा मंडी में क्लिनिक चलाने वाले डा. रणधीर हस्तीर के पास 7 फुट ऊंचा एक नौजवान पहुंचा। नौजवान के पांव में फोड़ा हो गया था। डा. हस्तीर खिलाडि़यों और पुलिस के जवानों का इलाज करने के लिए जाने जाते थे। अपने क्लिनिक में आए युवक का इलाज करते हुए डा. हस्तीर ने उसके शरीर की बनावट देख कर जौहरी की तरह हीरे की पहचान कर ली, बस जरूरत थी उसे निखारने की। डा. हस्तीर ने उससे बाडी बिल्डिंग में अपना भाग्य आजमाने की बात कही और युवक के मानने पर डा. हस्तीर ने अपना सब कुछ झोंक कर उस युवक के शरीर को फौलाद बनाना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे यह फौलाद ग्रेट खली बन विश्वविख्यात हो गया। लेकिन आज डा. हस्तीर काफी निराश हैं क्योंकि जिस युवक को फौलाद बना कर उन्होंने दुनिया पर छा जाने के लिए तैयार किया, वह युवक आज उनकी तरफ देखता भी नहीं है। द ग्रेट खली के बारे में सुनाते हुए डा. हस्तीर ने बताया कि जब खली उनके पास आया था तो उसका वजन महज 117 किलो था जो उसके शरीर के हिसाब से काफी कम था। उन्होंने कहा कि खली उनको गुरु मान चुका था तो उनकी जिम्मेदारी बनती थी कि उसे अलग पहचान दिलवाएं। उन्होंने बताया कि खली के पास इतने पैसे नहीं थे कि वह अपने बारे में कुछ सोच पाता तो उसके सारे खर्च वहन का जिम्मा भी उन्होंने उठाया। उन्होंने बताया कि दिन-रात एक कर दिलीप सिंह का शरीर सौष्ठव बनाया और विदेशों में रहने और ट्रेनिंग का खर्चा भी उठाया। उन्होंने बताया कि 1999 में खली को पूरी तरह से तैयार कर डब्ल्यूडब्ल्यूई में खेलने लायक बना दिया। डा. हस्तीर ने बताया कि इस दौरान दिलीप सिंह खली ने एलपरो रेसलिंग, हेयवर्ड यूएसए के साथ तारा फिटनेस के तहत करार किया जो आज तक उनके पास है। 2006 में दिलीप सिंह उर्फ खली रेसलिंग में चला गया और द ग्रेट खली के नाम से मशहूर हो गया। उन्होंने बताया कि इसके बाद खली ने कांट्रेक्ट की बात तो दूर रही, गुरु शिष्य परंपरा को भी भूल गया और दोबारा उनकी तरफ मुड़ कर भी नहीं देखा। उन्होंने बताया कि कई लोगों ने उन्हें कहा कि करार को सबूत बना कर खली के खिलाफ केस करें लेकिन गुरु होने के नाते उनका मन कभी नहीं माना। उन्होंने बताया कि इस दौरान खली ने उनको 25 हजार रुपये दे करार खत्म करने की बात कही, लेकिन जिस शिष्य पर लाखों रुपये बर्बाद किए उससे ऐसे मजाक की आशा नहीं थी। उन्होंने बताया खली कभी उनको गुरु कह उनके चरण स्पर्श करता था और आज आसमान का चमकता सितारा बन उनको धूल भी नहीं समझ रहा। डा. हस्तीर ने कहा कि इसका उनको अफसोस नहीं है लेकिन इस बात अफसोस जरूर है कि दोबारा उनसे किसी शिष्य पर इतना भरोसा नहीं होगा।

फिल्मी कहानी का सुखद अंत


सुबह का भूला शाम को घर लौट आए, तो उसे भूला नहीं कहते। इसी बात को मान कर पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल ने अपने बेटे एवं पूर्व उपमुख्यमंत्री चंद्रमोहन को माफ कर दिया और उनकी घर वापसी पर मुहर लगा दी है। भजनलाल ने चंद्रमोहन को बेदखल करने संबंधी निर्णय को भी वापस ले लिया है। इसके साथ ही चंद्रमोहन साढ़े ग्यारह महीने बाद अपने परिवार में लौट आए हैं। घर वापसी की प्रक्रिया शुक्रवार को उनके दिल्ली स्थित आवास पर पूरी हुई। पूर्व मुख्यमंत्री एवं हरियाणा जनहित कांग्रेस के सांसद भजनलाल ने संवाददाता को फोन पर बताया कि चंद्रमोहन को परिवार से बेदखल करने संबंधी निर्णय को शुक्रवार को वापस ले लिया है। यह निर्णय चंद्रमोहन के व्यवहार और आचरण में आए परिवर्तन के मद्देनजर किया गया है। उल्लेखनीय है कि पूर्व मुख्यमंत्री एवं हजकां संरक्षक भजनलाल के बडे़ पुत्र एवं तत्कालीन उपमुख्यमंत्री चंद्रमोहन ने 7 दिसंबर 2008 को इस्लाम धर्म कबूल कर अनुराधा बाली से शादी कर ली थी। उनके इस कदम पर प्रदेश सरकार ने उन्हें उपमुख्यमंत्री के पद से हटा दिया था। पूरे घटनाक्रम से भजनलाल परिवार ने अपने को दरकिनार करते हुए चंद्रमोहन को संपत्ति से बेदखल करते हुए परिवार से भी निकालने की घोषणा कर दी थी।

entrepreneurial skills among management students must be the moto


“To become job creators instead of job seekers, we need to develop entrepreneurial skills among management students. There is a strong case for the generalization of management education instead of the so called specialization which requires remedial steps to face the challenges of an era of continuous change in business environment. Change is the law of nature. Every thing should change except the love for change. But the changes in India are taking place so rapidly that anything becomes obsolete after certain period of time”, observed Professor (Dr.) M.M. Goel, Chairman Dept. of Economics, Kurukshetra University while addressing the management students of Shree Siddhivinayak Group, Shahpur (Bilaspur) here today. He was delivering the extension lecture on ‘Excellence Models for Entrepreneurs in Post Reform Era’.
Recalling the success story of late Shri O.P. Jindal- a self made industrialist, ‘A Man of Steel’ Professor Goel appealed the Haryana Government to include his story of vision, hard work and wealth of victory in courses of study for entrepreneurship at the graduate level which will always be a motivation for self employment to unemployed youth for all times to come.
To solve the problem of unemployment, the only solution is developing entrepreneurship at small level and self-employment opportunities. This requires the motivation of youth for self-employment and entrepreneurial skills for maximizing the economic, social and environmental benefits to the people for optimal resource utilization.
We need to create the equality of opportunity coming from education, skills and jobs for men and women who needs to modify their mental make up in present era of competition both healthy as well as unhealthy at all levels, said Professor Goel.
A trainer and motivator of repute for management professionals Professor Goel believes that crisis of faith and ethics in marketing are the root causes of deteriorating marketing standards and are serious issues of concern for polluting relationship between marketer and the customer of today. Earlier Dr. R.S. Wadhawan, Director of the Institute introduced and welcomed Professor Goel. The main objective of the entrepreneurial development programmes is to provide necessary guidance relating to enterprise launching and its successful running besides enhancing the entrepreneurial skills among the participants stated Dr. Wadhawan in a press release.

छह माह तक बर्फ में कैद रहेंगे 20 हजार लोग चंबा,


पांगी की कहानी

सर्दी के मौसम आते ही बीस हजारकी आबादी वाली पांगी घाटी में हालात बदल जाते हैं। छह माह तक बर्फ की कैद से छूटने की आस में इनमें से कई सांसें अटक जाती हैं। हेलीकाप्टर की एक उड़ान के लिए हफ्तों तक पंजीकरण कार्यालय के बाहर लाइनें लगती हैं। छह माह तक देश-दुनिया से कटी रहने वाली पांगी घाटी में सर्दियों में घाटी का तापमान दस डिग्री सेल्सियस से भी कम रहता है। हेलीकाप्टर के बिना चंबा जिला मुख्यालय तक पहुंचना संभव नहीं है। हालांकि यहां रहने वाले अनाज का भंडारण पहले ही कर लेते हैं, लेकिन बीमारी तो किसी को पूछ कर नहीं आती। ऐसी स्थिति में केवल हेलीकाप्टर ही फरिश्ता बनता है। पांगी तक पहुंचने का सबसे नजदीकी रास्ता साच पास है जिससे चंबा से आठ घंटे में पांगी पहुंचा जा सकता है, लेकिन 15 अक्टूबर के बाद यह बंद हो जाता है क्योंकि यहां आठ से दस फुट तक बर्फ जमा हो जाती है। दूसरा रास्ता कुल्लू-मनाली से है। यहां से रोहतांग दर्रे को पार करके पांगी पहुंचा जा सकता है। जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले से भी एक रास्ता है, लेकिन इस पर केवल छोटे वाहन चल सकते हैं। दोनों मार्ग बंद हो जाने पर वैकल्पिक रूप से यही इस्तेमाल होता है। पर सुरक्षा की दृष्टि से इस मार्ग का इस्तेमाल इतना सरल नहीं है। अब सरकारी हेलीकाप्टर ही एकमात्र उपाय बाकी बचता है।

शुक्रवार, 20 नवंबर 2009

शिवसैनिकों की गुंडागर्दी, न्यूज चैनल पर हमला





मुंबई।। मुंबई में न्यूज़ चैनल आईबीएन लोकमत के कायार्लय पर हमले की खबर है। प्राथमिक जानकारी के अनुसार,
हमले के पीछे शिवसैनिकों का हाथ है।

न्यूज चैनल का कार्यालय विक्रोली में है। शिवसैनिकों ने कार्यालय में घुसकर न सिर्फ तोड़फोड़ की बल्कि कर्मचारियों को भी पीटा। सीसीटीवी फुटेज के अनुसार, शिवसैनिकों ने रिसेपशनिस्ट को पीटा और कई अन्य महिला पत्रकारों के साथ छेड़खानी की। सीसीटीवी की फुटेज में साफ दिखाया जा रहा है कि हमलावरों के हाथ में लाठियां हैं और वे तोड़फोड़ मचा रहे हैं। अब तक 7 हमलावर पुलिसवालों के हवाले किए जा चुके हैं।

हालिया जानकारी के अनुसार हमले में लोग घायल भी हुए हैं। अभी तक यह नहीं पता चल सका है कि आखिर किस वजह से यह हमला किया गया है। इधर एनसीपी के नेता आरआर पाटिल ने इसकी घोर निंदा की है। मुंबई में तोड़फोड़ के स्थल पर जेसीपी पहुंच गए हैं।

कुर्बान = न्यूयॉर्क + फना


फिल्म समीक्षा



बैनर : धर्मा प्रोडक्शन्स, यूटीवी मोशन पिक्चर्स
निर्माता : हीरू जौहर, करण जौहर
निर्देशक : रेंसिल डीसिल्वा
संगीत : सलीम-सुलैमान
कलाकार : सैफ अली खान, करीना कपूर, विवेक ओबेरॉय, ओम पुरी, दीया मिर्जा, किरण खेर
केवल वयस्कों के लिए * 17 रील * 2 घंटे 37 मिनट
रेटिंग : 2/5

आदित्य चोपड़ा और करण जौहर की दोस्ती जगजाहिर है। दोनों अक्सर मुलाकात करते रहते हैं और संभव है कि किसी दिन उन्होंने एक कहानी को लेकर गपशप की हो। इसके बाद दोनों उस कहानी पर फिल्म बनाने में जुट गए। लगभग एक सी कहानी पर थोड़े से फेरबदल के साथ ‘न्यूयॉर्क’ और ‘कुर्बान’ सामने आईं। करण ने ‘कुर्बान’ में ‘फना’ को भी जोड़ दिया है।

9/11 की घटना के बाद कई फिल्मों का निर्माण किया गया है और हर फिल्मकार ने आतंकवाद के बारे में अपना न‍जरिया पेश किया है। अमेरिका में जो हुआ, निंदनीय है और बदले में अमेरिका ने जो कार्रवाई की वह भी निंदनीय है क्योंकि मरने वालों में अधिकांश बेकसूर थे।

‘कुर्बान’ के जरिये भी आतंकवाद को अपने तरीके से विश्लेषित किया गया है। कुछ लोग अपने फायदे के लिए इस्लाम की गलत व्याख्या कर आतंकवाद को बढ़ावा देते हैं, जो कि गलत है। वही दूसरी ओर आतंकवादियों को ढूँढने के नाम पर अमेरिका ने अफगानिस्तान और इराक में बेकसूर लोगों को मारा है वह भी आतंकवाद ही है। फिल्म की सोच भले ही सही हो, लेकिन अपनी बात कहने के लिए जो ड्रामा रचा गया है वह खामियों के साथ-साथ उबाऊ भी है।


एहसान (सैफ अली खान) और अवंतिका (करीना कपूर) दिल्ली के एक ही कॉलेज में पढ़ाते कम और रोमांस ज्यादा करते हैं। अवंतिका अमेरिका से कुछ दिनों के लिए दिल्ली आई है और अब वापस अमेरिका जाने वाली हैं। एहसान भी अपना करियर छोड़ उसके साथ अमेरिका चला जाता है और दोनों शादी कर लेते हैं।

अवंतिका के पैरो तले जमीन उस समय खिसक जाती है जब उसे पता चलता है कि एहसान एक आतंकवादी संगठन से जुड़ा हुआ है और उसके इरादे खतरनाक हैं। साथ ही उसने अमेरिका में प्रवेश के लिए अवंतिका का उपयोग किया है। अवंतिका को हिदायत दी जाती है कि वह चुप रहे वरना उसके पिता को मार दिया जाएगा।

रियाज़ (विवेक ओबेरॉय) आधुनिक सोच वाला युवा मुसलमान है,जो पेशे से पत्रकार है। रियाज़ इस बात से भी वाकिफ है कि अमेरिकियों ने इराक में ‍क्या किया है। उसकी गर्लफ्रेंड (दीया मिर्जा) उस विमान दुर्घटना में मारी गई, जिसकी साजिश एहसान और उसके साथियों ने रची थी।

अवंतिका को यह बात मालूम पड़ गई थी और उसने दीया के लिए टेलीफोन पर संदेश भी छोड़ा था, जो रियाज़ ने बाद में सुना। रियाज़ अपने तरीके से मामले को निपटाने के लिए एहसान की गैंग में शामिल हो जाता है। किस तरह एहसान को एहसास होता है कि वह गलत राह पर है, यह फिल्म का सार है।

निर्देशक रेंसिल डीसिल्वा ने कहानी को वास्तविकता के नजदीक रखने की कोशिश की है, लेकिन कहानी में कुछ ऐसी खामियाँ हैं, जो हजम नहीं होती। मिसाल के तौर पर विवेक ओबेरॉय बजाय पुलिस को बताने के मामले को अपने हाथ में लेता है, जबकि सारे अपराधी उसके सामने बेनकाब हो चुके थे।

अमेरिकी पुलिस को तो भारतीय पुलिस से भी कमजोर बताया गया है। एक आतंकवादी के रूप में सैफ के फोटो पुलिस के पास मौजूद रहते हैं, लेकिन सैफ एअरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और यूनिवर्सिटी में बेखौफ घूमता रहता है। कई दृश्यों में फिल्म के नाम पर कुछ ज्यादा ही छूट ‍ले ली गई है।


सैफ का किरदार बीच फिल्म में अपनी धार खो देता है। न तो वह आतंकवादी लगता है और न ही ऐसा इंसान जिसकी सोच प्यार की वजह से बदल रही है। उनके किरदार को ठीक से पेश नहीं किया गया है।

फिल्म के प्रचार में इसे एक प्रेम कहानी बताया गया है, लेकिन सैफ और करीना के प्रेम में गर्माहट नजर नहीं आती। रोमांस और सैफ का असली चेहरा सामने आने वाली बात फिल्म के आरंभ में ही दिखा दी गई है, लेकिन उसके बाद कहानी बेहद धीमी गति से आगे बढ़ती है।

फिल्म के मुख्य कलाकारों सैफ, करीना और विवेक का अभिनय ठीक ही कहा जा सकता है। वे और बेहतर कर सकते थे। तकनीकी रूप से फिल्म बेहद सशक्त है, चाहे फोटोग्राफी हो, एक्शन सीन हो, बैकग्राउंड म्यूजिक हो। एक-दो गाने भी सुनने लायक हैं। संपादन में कसावट की कमी महसूस होती है।

कुल मिलाकर ‘कुर्बान’ न तो कुछ ठोस बात सामने रख पाती है और न ही मनोरंजन कर पाती है।

नीली वर्दी पर जवान लाल


हिमाचल प्रदेश में पुलिस जवानों की वर्दी बदलने को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक तरफ जहां पुलिस जवान खाकी वर्दी की बजाए नई प्रस्तावित नीली वर्दी पर विरोध जता रहे हैं, वहीं विभाग ने जवानों को नीली वर्दी मुहैया करवाने के लिए खरीद प्रक्रिया शुरू कर दी है। वर्दी न बदलने का प्रस्ताव कई जिलों से कर्मियों ने पुलिस मुख्यालय को भेजा है, लेकिन विभाग अपने निर्णय पर कायम है। गोवा को छोड़कर देश के दूसरे राज्यों में अब भी पुलिस की वर्दी खाकी ही है। अब हिमाचल में यह पहल की जा रही है। पुलिस की वर्दी में बदलाव के पीछे यही तर्क दिया जा रहा है कि आम लोगों में पुलिस की खाकी वर्दी को लेकर जो धारणा है उसे बदला जाए और आम जनता पुलिस को मित्रवत समझे। पुलिस और आम जनता के बीच दोस्ताना संबंध बनाने के मकसद से प्रदेश पुलिस के पूर्व डीजीपी व वर्तमान सीबीआई निदेशक अश्वनी कुमार ने जवानों की वर्दी नीली करने की योजना बनाई थी। जिसके बाद सरकार ने भी इस प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी। हालांकि पिछले एक साल से विभाग जवानों को नीली वर्दी मुहैया करवाने पर जुटा है। लेकिन अब तक विभाग को अच्छी क्वालिटी की वर्दी नहीं मिल पाई है। दूसरी ओर नई वर्दी को लेकर पुलिस जवानों का विरोध भी जारी है। प्रदेश पुलिस फोर्स में 16 हजार से अधिक जवान हैं। इन जवानों को इस साल अभी तक न तो खाकी वर्दी मिल पाई और न ही नीली वर्दी। पुलिस जवानों को वर्दी न मिलने की मुख्य वजह खाकी वर्दी का रेट कंटै्रक्ट रद करना और नीली वर्दी के सेंपल फेल होना है। शिमला सहित प्रदेशभर के पुलिस जवान नई वर्दी से हाय-तौबा कर रहे हैं। हिमाचल प्रदेश पुलिस महासंघ ने भी नीली वर्दी का विरोध किया है। महासंघ का आरोप है कि विभाग के आला अधिकारी छोटे कर्मचारियों में भिन्नता लाने के मकसद से ही वर्दी में बदलाव कर रहे हैं। उन्होंने चेताया कि अगर पुलिस की खाकी वर्दी में बदलाव किया गया तो महासंघ अदालत में इस मामले को ले जाने से नहीं हिचकेगा। पुलिस विभाग के प्रवक्ता विनोद कुमार धवन का कहना है कि नीली वर्दी को लेकर कोई विवाद नहीं है। सरकार ने पुलिस की वर्दी नीली करने के लिए मंजूरी प्रदान कर दी है और विभाग नई वर्दी की खरीद की प्रक्रिया में जुटा है। अच्छी क्वालिटी की नीली वर्दी आ जाने के बाद जवानों को आवंटित कर दी जाएगी।

शिल्पा की शादी में नवांशहर भी दीवाना


(नवांशहर) : अपना रूपी (राज कुंद्रा) कल तक नवांशहर की गलियों में खेलता था। अब उसकी शादी हो रही है। शादी भी कोई ऐसी-वैसी नहीं, बल्कि बालीवुड स्टार शिल्पा शेट्टी से। भला ऐसी सुपर-डुपर शादी पर नवांशहर क्यों न इतराए। यही वजह है कि आजकल नवांशहर की गलियों में राज-शिल्पा की शादी के चर्चे हैं और यहां से शादी में हिस्सा लेने के लिए राज की बुआ का परिवार खंडाला के लिए रवाना भी हो चुका है। शिल्पा शेट्टी के भावी पति प्रसिद्ध उद्योगपति राज कुंद्रा भले ही दुनिया की नजर में बड़े व्यवसायी हों, लेकिन बचपन में नवांशहर की गलियों में खेले राज कुंद्रा यहां के वासियों के लिए वहीं नटखट रूपी हैं जो बचपन में महीनों छुट्टियों में नवांशहर की गलियों में खेलते रहे हैं। यही कारण हैं कि राज कुंद्रा की 22 नवंबर को बालीवुड अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी से शादी को लेकर नवांशहर वासी काफी उत्साहित हैं। नवांशहर की भट्टी कालोनी में राज कुंद्रा की बुआ का भी परिवार रहता है। 22 नवंबर को खंडाला में हो रही इस शादी में राज की बुआ राम लुभाई व फूफा यशपाल मुरगई तथा उनके बेटे संदीप मुरगई, रमन मुरगई समेत परिवार के कुल 10 सदस्य बारात की शोभा बढ़ाएंगे। ध्यान रहे कि शिल्पा के भावी पति राज कुंद्रा का पैतृक घर लुधियाना में है। उनके पिता श्री बालकृष्ण कुंद्रा वर्ष 1966 में इंग्लैंड चले गए थे। वहां उन्होंने व्यवसाय शुरू किया और आज इंग्लैंड में वह डायमंड व गोल्ड के बिजनेस में मिलेनियर हैं। इसके अलावा कुंद्रा परिवार के यूके, पाकिस्तान व भारत में भी कई व्यवसाय हैं। राज कुंद्रा की दो बहनें रेनू व रीना हैं। रेनू इंग्लैंड में व रीना लुधियाना में ब्याही हैं। वीरवार को नवांशहर में राज की बुआ श्रीमती राम लुभाई फूफा यशपाल मुरगई व परिवार के 10 लोग शादी के लिए रवाना हो गए। वे खंडाला में 22 नवंबर को शादी में भाग लेने के बाद 24 नवंबर को मुंबई में ग्रैंड हयात होटल में रिसेप्शन पार्टी में भी वह भाग लेंगे। इसी बीच 21 नवंबर को खंडाला में ही संगीत की रात दलेर मेहंदी भी आए मेहमानों का मनोरंजन करेंगे। बारात में शामिल होने गए संदीप मुरगई व रमन मुरगई के बच्चे सारांश, आकांक्षा, रिदम, सरगम का कहना है कि वह शिल्पा शेट्टी के लिए एक सरप्राइज गिफ्ट लेकर जा रहे हैं जो शादी के समय ही खोला जाएगा। जबकि राज कुंद्रा के भाई संदीप मुरगई व उनकी पत्नी अंजू मुरगई, रमन मुरगई व उनकी पत्नी रंजू मुरगई का कहना है कि वह राज व शिल्पा शेट्टी की शादी में खूब धमाल मचाएंगे।

तेरह खरब रु. हुए तो साफ होगी गंगा


सरकार सारे संसाधन झोक दे और निजी क्षेत्र को भी शामिल कर ले फिर भी भागीरथी को दस साल से पहले मुक्ति नहीं मिलनी वाली। क्योंकि पिछले गंगा एक्शन प्लान की नाकामी के बाद अब लक्ष्य को बढ़ाकर 2020 कर दिया गया है। यह लक्ष्य भी उसी कीमत पर पूरा होगा जब कि पर्याप्त संसाधन जुट सकें। इस नये लक्ष्य को पाने के लिए जल शोधन संयंत्र व अन्य आधारभूत संसाधन जुटाने होंगे जिसमें कुल 1,32000 करोड़ रुपये का खर्च आयेगा। इसी बढ़ते आर्थिक बोझ को बांटने के लिए सरकार ने निजीक्षेत्र को शामिल करने का प्रस्ताव किया है। सुप्रीम कोर्ट में पेश अपनी रिपोर्ट में सरकार ने माना है कि अगर जवाहर लाल नेहरू नेशनल अर्बन रिन्युवल (जेएनएनयूआरएम) की सारी योजनायें पूरी क्षमता से लागू कर दी जायें (जो कि संभव नहीं दिखता)तो भी तो भी सिर्फ कानपुर और पटना में गंगा को मैला कर रहे सीवर साफ हो सकेंगे। ऋषिकेश, हरिद्वार, इलाहाबाद, वाराणसी और हावड़ा का सीवर फिर भी गंगा को अपवित्र करता रहेगा। वैसे गंगा को साफ करने का दारोमदार सिर्फ निजी क्षेत्र पर ही नहीं राज्य व स्थानीय निकाय टैक्स, यूजर चार्ज और म्युनिसपल बांड के जरिए धन एकत्र करेंगे जो कि गंगा की सफाई में काम आयेगा। सरकार मानती है कि गंगा अभी भी गंदी है और कई जगह इसका पानी पीने लायक तो दूर नहाने लायक भी नहीं है। सरकार को इस बात की भी बड़ी चिंता है कि राज्य अपने यहां बने सीवर शोधन संयंत्रों का रखरखाव ठीक ढंग से नहीं कर पा रहे हैं। देश का 26 फीसदी हिस्सा गंगा बेसिन में आता है। गंगा में रोजाना 12000 मिलियन लीटर (एमएलडी)घरेलू सीवर गिरता है। जिसमें सिर्फ 3,750 एमएलडी सीवर ही साफ हो पाता है। बाकी गंगा का मैला कर रहा है। यानि मौजूदा जरूरत को पूरा करने के लिए ही अभी 8,250 एमएलडी क्षमता के शोधन संयंत्रों की जरूरत है। जबकि 2020 का लक्ष्य पाने के लिए इसके अलावा 11,250 एमएलडी की और जरूरत होगी। घरेलू सीवर के अलावा उद्योग भी गंगा को मैला करते हैं। गंगा में बहाई जा रही गंदगी में इनका हिस्सा 20 फीसदी है।

संक्रमण के भय से कांपे लोग


स्वाइन फ्लू ने प्रदेश को अपनी चपेट में ले लिया है। बृहस्पतिवार को इस संक्रामक बीमारी के पांच नए केस मिले। रोज नए मामले सामने आने से खासकर पानीपत, सोनीपत, अंबाला व भिवानी जिले के लोगों में दहशत व्याप्त है। बृहस्पतिवार को पानीपत में दो नए पाजिटिव केस मिले तथा 16 नमूने जांच के लिए भेजे गए। जिले में अब तक 13 केस पाजिटिव मिल चुके हैं, जबकि 124 नमूने जांच के लिए भेजे जा चुके हैं। डिप्टी सीएमओ डा. अश्वनी गर्ग का कहना है कि जो केस पाजिटिव मिले हैं, उनका उपचार चल रहा है। सोनीपत में भी दो नए स्वाइन फ्लू केस की पुष्टि हुई। विभाग ने बीस से अधिक सैंपल दिल्ली एनआईसीडी जांच के लिए भेज दिया। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के मुताबिक दो नए मामलों में एक 12 साल का तथा दूसरा 16 साल का है। इसमें से 16 साल का मरीज सिक्का कालोनी का है। इस मरीज के परिजन भी विगत दिनों स्वाइन फ्लू की चपेट में आए थे। कार्यवाहक सिविल सर्जन डा. जसवंत सिंह पूनिया ने बताया कि विभाग के पास अब तक कुल 76 सैंपल की रिपोर्ट आ गई है तथा कुल स्वाइन फ्लू का आंकड़ा 16 पहंुच गया। अंबाला के नारायणगढ़ कस्बे से चंडीगढ़ इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने जाने वाले 18 साल के युवक में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है। अंबाला छावनी में कान्वेंट आफ जीसस मैरी, चमन वाटिका जैसे स्कूलों से एक-एक सैंपल लेकर जांच के लिए चंडीगढ़ भेजे गए हैं। इसी तरह छावनी में दो व्यस्क लोगों के सैंपल लिए गए। जिला नोडल आफिसर डा. सुरेंद्र मोहन ने 18 साल के इंजीनियरिंग के छात्र को स्वाइन फ्लू होने की पुष्टि की है। स्वास्थ्य विभाग के पास सैंपल की संख्या 62 तक पहुंच गई है। साथ ही जिले में पाजीटिव पाए जाने वाले मरीजों की संख्या 17 बताई गई है। उधर, भिवानी में बृहस्पतिवार को केएम पब्लिक व भिवानी पब्लिक स्कूल के आठ विद्यार्थियों के नमूने लिए गए। होम्योपैथी में स्वाइन फ्लू का उपचार : चंडीगढ़ : अब होम्योपैथी में स्वाइन फ्लू का उपचार संभव है। यह जानकारी डा. बतरा ग्रुप के चेयरमैन व एमडी डा. मुकेश बतरा ने दी। उन्होंने बताया कि सर्दियों में कई बीमारियां जकड़ लेती हैं। इनमें खांसी, दमा बुखार के अलावा सांस की बीमारियां प्रमुख हैं। अगर होम्योपैथी दवाओं से उपचार किया जाए तो फायदा हो सकता है।

पीजिए जनाब! डेग-डेग पर हाजिर है शराब


मुजफ्फरपुर - इसे राज्य सरकार की उत्पाद नीति का कमाल कहें या उपलब्धि! उत्तर बिहार के गांवों-कस्बों में जरूरत पड़ने पर भले ही दवा न मिले, देशी-विदेशी शराब ऑलटाइम उपलब्ध है। नशाखोरी की वजह से जिलों की विधि व्यवस्था लड़खड़ाए तो लड़खड़ाए, साल-दर-साल लक्ष्य से ज्यादा राजस्व वसूली से उत्पाद विभाग तो मस्ती में झूम रहा है। बगहा में आलम यह है कि होटलों व पान दुकानों पर खुलेआम शराब की बिक्री होती है। इस गोरखधंधे में विभागीय अफसरों और पुलिस की मिलीभगत भी है। बेतिया में देशी शराब का अवैध धंधा परवान पर है। उत्पाद निरीक्षक दिनबंधु की मानें तो पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष दुकानों की संख्या बढ़ी है। इस वर्ष देशी शराब की 8 दुकानें हैं, जबकि पिछले वर्ष 6 थीं। जिले में दुकानों की संख्या बढ़ने से लोगों की परेशानियां भी बढ़ी हैं। मोतिहारी में भी धड़ल्ले से शराब बेची जा रही है। चौक-चौराहों पर शाम होते ही जाम टकराने वालों की भीड़ उमड़ने लगती है। देशी व विदेशी शराब पिलाने के लिए उत्पाद विभाग ने 174 दुकानों की व्यवस्था कर रखी है। इस वर्ष अक्टूबर तक देशी शराब 11 लाख लीटर, विदेशी शराब चार लाख 25 हजार लीटर व बीयर दस लाख 30 हजार लीटर बिक चुकी है। सीतामढ़ी भी किसी से पीछे नहीं है। हर मोड़ पर शराब की दुकानें मिल जाएंगी। यहां शराबखोरों की जमात में युवाओं की संख्या बढ़ती जा रही है। हाल के दिनों में कई ऐसी घटनाएं हुई हैं, जिनमें युवा शामिल थे। पुलिस भी स्वीकारती है कि शराबखोरी से अपराध बढ़ रहा है। जिले में कभी पंद्रह से बीस किमी की दूरी पर शराब की दुकानें होती थीं। मधुबनी भी पूरी तरह परेशान है। क्या गांव, क्या शहर, चहुंओर चौक-चौराहोंपर शराबियों का बोलबाला है। कोई भी दिन ऐसा नहीं होगा, जब शराबी राह चलते लोगों को तंग नहीं करते हों। युवा तो मानों शराब में डुबकी लगा रहे हैं। जिले में 220 देशी शराब की दुकानें पंचायत स्तर पर स्वीकृत हैं। इनमें 181 बंदोबस्त हैं, जबकि मिश्रित शराब की दुकानें नगर परिषद में 47 तथा पंचायतों में 133 हैं। शराब के कारण यहां क्राइम भी बढ़ रहा है। वहीं पंडौल, सकरी, रहिका के थानाध्यक्षों के मुताबिक शराब पीकर हो हल्ला के ज्यादातर मामले दर्ज ही नहीं होते हैं। समस्तीपुर में सरकारी शराब की दुकानों ने सामाजिक तानाबाना बिगाड़ कर रख दिया है। हर गांव, हर युवा चपेट में है। मारपीट व दंगा फसाद की वारदातें बढ़ गई हैं। यह दीगर बात है कि ये मामले पुलिस तक नहीं पहुंचते। शराबी नशा उतरते ही क्षमा मांग कर मामले निबटा लेते हैं। जिले की लगभग सभी पंचायतों में देसी शराब की दुकानें हैं। गत वित्तीय वर्ष में 2753. 75 करोड़ राजस्व की प्राप्ति हुई थी। इस वर्ष लक्ष्य का लगभग लगभग 60 फीसदी राजस्व प्राप्त हो चुका है। मछली और मखाना के लिए मशहूर दरभंगा भी शराबियों की जद में है। पान दुकानों पर खुलेआम शराब उपलब्ध है। शायद ही कोई चौराहा हो जहां शराब नहीं बिकती। मुनाफा कमाने की नीयत से कम्पोजिट शराब दुकान के मालिक ही अपने पोषक क्षेत्र की पान दुकानों व किराना दुकानों में शराब की सप्लाई करते हैं। हैरत की बात तो यह है कि इस गोरखधंधे से उत्पाद विभाग भी पूरी तरह वाकिफ है, पर कोई कार्रवाई नहीं होती।

आग का दरिया है ये नौकरी......


मिर्जा गालिब ने अपने एक शेर में इश्क को आग का दरिया बताते हुए इसमें डूब कर गुजरने की बात कही थी। वक्त गुजरा। इश्क के मायने बदल गए और गालिब साहब के शेर के भी। मौजूदा दौर कारपोरेट दौर है। अब आपको इश्क के लिए नहीं वरन नौकरी के लिए आग के दरिया से गुजरना होगा। जी हां। कारपोरेट दुनिया में नौकरी की चाहत है तो आपके लिए सलीके से कपड़े पहनना, नफासत से पेश आना और फर्राटेदार अंग्रेजी बोलना ही काफी नहीं, वरन उससे आगे भी कई इम्तिहानों से गुजरना होगा। इम्तिहान भी कोई आसान नहीं, जलते अंगारे पर कूदना, पहाड़ को काट कर अपने लिए रास्ता बनाना वगैरह-वगैरह..। अमृतसर के कारपोरेट कंपनियों में कार्यरत मुलाजिम आज कुछ ऐसे ही कठिन इम्तिहानों से गुजरे और गुरु द्रोणाचार्य की भूमिका में रहे दिल्ली से आए स्पेशल ट्रेनर पीएस राठौर। देर शाम बेस्ट मैरियन होटल में कान्फेडरेशन आफ इंडियन इंडस्ट्री (सीआईआई) द्वारा आयोजित कारपोरेट अधिकारियों व कर्मचारियों के ट्रेनिंग शिविर में राठौर ने काम करने के तरीके बताए। राठौर के नेतृत्व में 35 कारपोरेट प्रशिक्षुओं ने जलते व दहकते अंगारे से गुजर कर अपने डर को बाहर निकाला। इसके बाद गुब्बारे फुलाना, लोहे की रॉड को गले से जमीन के साथ लगा कर मोड़ने के हैरतअंगेज कारनामे करवाए उन्होंने कहा कि यह कोई जादू अथवा भ्रम नहीं है बल्कि व्यक्ति के भीतर ही इतना साम‌र्थ्य है कि वह हर काम को आसानी से कर सकता है।

ए.बी.सी.डी. से नाता नहीं और नाम है इंगलिश गांव

चौकिए नहीं, यह इंगलिश गांव है। सरकारी दस्तावेजों में भी इसका यही नाम है। जिला मुख्यालय से तकरीबन 17 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस गांव की ख्याति महज नाम के चलते ही है। यहां पहुंचते ही इसकी काली तस्वीर खुद सामने आ जाती है। लगभग बारह सौ की आबादी वाले इस गांव में महज दो ग्रेजुएट हैं, वह भी इत्तफाकन। तीस फीसदी लोग ही अक्षर से परिचित हैं। अमरपुर प्रखंड के इंगलिश गांव की जीवन शैली भी देहाती ही नहीं ठेठ देहाती है। नाम के विपरीत यहां की दशा शैक्षिक विकास की पोल भी खोल रही है। जिला शिक्षा पदाधिकारी के अनुसार शैक्षिक विकास के लिए हर आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। इसका प्रतिफल भी सामने आया है और अब इस गांव के शत प्रतिशत बच्चे स्कूल जा रहे हैं। परंतु यहां शिक्षा केन्द्र के नाम पर महज एक प्राथमिक विद्यालय है। इसके बाद की शिक्षा के लिए बच्चों को तीन किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। गरीबी की मार से बेहाल यहां के लोग बच्चों को मैट्रिक तक की शिक्षा देने के बजाय दिल्ली व पंजाब सहित अन्य शहरों में काम के लिए भेजना ज्यादा मुनासिब समझते हैं। फलाफल यहां मैट्रिक पास छात्रों की संख्या भी अंगुलियों पर गिनी जा सकती है। गांव के प्रथम ग्रेजुएट अरुण कुमार राय भी मानते हैं कि नाम के अनुरूप यहां शिक्षा की स्थिति बदतर है। गौरतलब है कि इस गांव में मंडल, राय के साथ महादलित समुदाय के लोग रहते हैं। अधिकांश लोगों के जीने का जरिया मजदूरी अथवा कृषि है। पेट की भूख ने लोगों को शिक्षा से विमुख कर रखा है। यह स्थिति कहीं न कहीं कल्याणकारी योजनाओं में गड्डमड्ड का भी खुला संकेत है। हालांकि इस गांव के लोगों को यह गर्व जरूर है कि पूरे जिले में ही नहीं पूरे अंग क्षेत्र में उनके गांव का नाम चर्चित है। गांववासी परशुराम राय, जवाहर राय, दिलीप राय आदि बताते हैं कि इस गांव के नाम के पीछे बड़ी कहानी है। स्वतंत्रता संग्राम के समय यह क्षेत्र सेनानियों का मुख्य केन्द्र था। यहां से फिरंगियों के खिलाफ जंग की योजनाएं बनतीं थीं। जब इसकी भनक लगी तो फिरंगियों ने यहां एक कैम्प ही स्थापित कर दिया। बसेरा बन जाने के बाद अंग्रेजों ने क्षेत्र के लोगों पर जमकर कहर बरपाया। उसी समय से इस गांव को लोग इंगलिश गांव के नाम से पुकारने लगे। स्वतंत्रता प्राप्ति तक यह गांव खौफ का पर्याय बना रहा। हालांकि अब यहां निवास कर रहे लोग अपने मधुर व्यवहार व निश्चछलता के लिए जाने जाते हैं, जिन्हें ठगने में किसी ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है। गांव तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क तो है, लेकिन अन्य बुनियादी सुविधाएं कहीं नहीं दिखतीं। ग्रामीणों के मुताबिक गांव में मध्य व उच्च विद्यालयों के लिए वे कई बार जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों के दरवाजे खटखटा चुके हैं, लेकिन उनकी आवाज हर जगह अनसुनी ही रही है। उन्हें भी यह बात साल रही है कि उनके इंगलिश गांव के सत्तर फीसदी लोग हिन्दी भी नहीं पढ़ पाते हैं।

राजधानी में गन्ने की सियासत


गन्ना मूल्य पर नए अध्यादेश के विरोध में सड़क से लेकर संसद तक जारी जबरदस्त उबाल के दबाव में केंद्र सरकार ने अध्यादेश में जरूरी बदलाव के संकेत दिए हैं। राजधानी में गन्ने की सियासत पर उबाल का आलम यह रहा कि शीत सत्र के पहले ही दिन संसद ठप हो गई और नई लोकसभा सबसे हंगामाखेज दिन से रूबरू हुई। विपक्ष ही नहीं संप्रग के सहयोगियों द्रमुक और तृणमूल कांग्रेस ने भी गन्ना मूल्य पर सरकार को कठघरे में खड़ा किया। गन्ना मूल्य के सियासी उबाल की आंच का ही असर था कि लोकसभा ठप होने के तत्काल बाद प्रधानमंत्री ने संसद भवन में ही वरिष्ठ मंत्रियों की बैठक बुलाई। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी, कृषि मंत्री शरद पवार, गृहमंत्री चिदंबरम, कानून मंत्री वीरप्पा मोइली के अलावा कानून मंत्रालय के कुछ शीर्ष अधिकारी भी इस बैठक में शरीक हुए। गन्ने की सियासत का रथ विपक्षी खेमे में जाते देख कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने भी प्रधानमंत्री से मुलाकात की। प्रधानमंत्री की बैठक में ही गन्ने के उचित व लाभकारी मूल्य (एफआरपी) अध्यादेश पर पुनर्विचार करने का निर्णय लिया गया। सूत्रों के अनुसार किसानों और विपक्षी दलों के जबरदस्त विरोध को देखते हुए सरकार अध्यादेश में अब उचित गन्ना मूल्य देने के लिए चीनी मिलों को उत्तरदायी बनाने का कदम उठा सकती है। बताया जाता है कि कानून मंत्रालय को तत्काल जरूरी सुझाव देने को कहा गया है। शरद पवार ने बैठक के बाद कहा कि सरकार गन्ना मूल्य अध्यादेश पर संसद में चर्चा करने को तैयार है। इस मुद्दे पर घिरी सरकार की बेचैनी का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि गन्ना अध्यादेश पर सुलह की राह निकालने के लिए सोमवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई है। अध्यादेश को लेकर कांग्रेस में भी अंदरूनी तौर पर विरोध के स्वर साफ सुनाई दे रहे हैं। चूंकि पार्टी सरकार की अगुवा है इसलिए नेता खुले तौर पर बोलने से जरूर बच रहे हैं, मगर उनका साफ कहना है कि गन्ना मूल्य की कीमतों का मसला चीनी मिलों पर छोड़ना किसानों को शेर के आगे डालने जैसा है। गन्ने पर सियासत को लेकर मिले इस मौके को न गंवाते हुए सपा और रालोद सहित तमाम विपक्षी दलों ने लोकसभा में पहले ही दिन हंगामाखेज विरोध के जरिये सरकार की घेरेबंदी की। पहले प्रश्नकाल नहीं चलने दिया और फिर पूरे दिन के लिए सदन की बैठक स्थगित करा दी। सदन की बैठक शुरू होते ही मुलायम सिंह और अजित सिंह ने गन्ना अध्यादेश को किसानों के पेट पर लात मारने वाला कदम बताते हुए विरोध की आवाज बुलंद की। इन दोनों की अगुवाई में सपा-रालोद के सांसद आसन के सामने जाकर किसानों की लूट बंद करने के नारे लगाने लगे। भाजपा सहित अन्य विपक्षी दलों के सांसद भी अध्यादेश के विरोध में सरकार के खिलाफ उठ खड़े हुए। सरकार की हालात तब विचित्र दिखी जब तृणमूल कांग्रेस और द्रमुक के सदस्यों ने भी अध्यादेश को लेकर सवाल खड़े किए। लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने दोबारा12 बजे सदन चलाने की पूरी कोशिश की, मगर हंगामा थमता न देख सदन पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया। विपक्ष के तेवरों को देखते हुए शुक्रवार को भी संसद चलने के आसार कम ही हैं।

अज्ञात पुरूष का शव बरामद

डबवाली (सुखपाल)- स्थानीय बठिण्डा चौंक के निकट लगभग 50 वर्षीय अज्ञात पुरूष का शव बरामद होने से आस-पास के क्षेत्र में सनसनी फैल गई। मौके पर पहुंची शहर थाना पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेते हुए पुलिस ऐम्बूलैंस द्वारा स्थानीय सिविल अस्पताल में लाया गया है। समाचार लिखे जाने तक शव की पहचान नहीं हो पाई है तथा पुलिस ने अपनी प्रारम्भिक जांच के पश्चात शव को शनाख्त हेतु मुर्दाघर में रखा है।

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