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रविवार, 11 अक्टूबर 2009

कांग्रेस की नई लीडरशिप गांव-देहात से :


राहुल कांग्रेस अपनी नई लीडरशिप गांव-देहात से पैदा करने का इरादा रखती है। इस उद्देश्य के लिए एनएसयूआई व युवक कांग्रेस गांवों को अपनी कर्मभूमि बनाकर आम आदमी, किसान और दलित के हितों की लड़ाई लड़ेंगी। कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने युवक कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष संजय छोक्कर के समर्थन में समालखा अनाज मंडी में शनिवार को आयोजित जनसभा में भविष्य का अपना दृष्टिकोण रखा। करीब दस मिनट तक हिंदी में बेबाक बोलते हुए राहुल ने कहा कि विपक्ष के पास चुनाव लड़ने के लिए कोई मुद्दा नहीं है। उसे सिर्फ आतंकवाद और जिन्ना दिखाई पड़ते हैं। उसे गरीब और दलित की रोजी-रोटी की कोई चिंता नहीं है। विपक्षी नेताओं ने आज तक आम आदमी के बीच जाकर उसका हालचाल पूछने की पहल नहीं की और जब कांग्रेस ने ऐसा किया तो उसके पसीने छूट रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह एनएसयूआई और युवक कांग्रेस के पदाधिकारियों को गांव-गांव आम आदमी के बीच भेजेंगे। उनकी यह फौज किसान और दलित के हितों की लड़ाई लड़कर कांग्रेस की नई लीडरशिप गांव-देहात से पैदा करेगी। राहुल ने इंडिया शाइनिंग के नारे पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि कांग्रेस का आम आदमी की सरकार का नारा टीवी से नहीं बल्कि गरीब की झुग्गी-झोंपड़ी और दलित के घर से निकला है। उन्होंने कहा कि हरियाणा विधानसभा के चुनाव में दो विचारधाराओं के बीच टक्कर है। एक विचारधारा सोनिया गांधी, मनमोहन सिंह और भूपेंद्र हुड्डा के नेतृत्व वाली आम आदमी की सरकार की है और दूसरी विचारधारा वातानुकूलित कमरों में बैठकर इंडिया शाइनिंग का झूठा नारा देने वालों की है। फैसला जनता को करना है, वह किस विचारधारा का साथ देगी। कांग्रेस महासचिव ने प्रदेश की बागडोर फिर से मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा के हाथों में सौंपने का संकेत देते हुए कहा कि केंद्र की तरह राज्य में भी आम आदमी की सरकार होगी और इस सरकार के संचालक पूंजीपति अथवा चुनिंदा नेता नहीं बल्कि गरीब, पिछड़े, मजदूर, किसान व युवा होंगे। मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा ने गठबंधन की राजनीति पर प्रहार करते हुए राहुल गांधी की तारीफों के पुल बांधे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पक्ष में छत्तीस बिरादरी के लोग एकजुट हो रहे हैं। उन्हें जातीय समीकरणों की बजाय सिर्फ विकास पर भरोसा है। लोगों को इस विधानसभा चुनाव में पार्टी की नीति, नीयत और नेता को ध्यान में रखते हुए मतदान करना चाहिए। कांग्रेस के प्रांतीय प्रभारी पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि राज्य में उनकी पार्टी को सत्ता नहीं बल्कि सेवा का मौका चाहिए। समालखा से कांग्रेस प्रत्याशी संजय छोक्कर ने कहा कि राहुल गांधी ने देश में राजनीति के मायने बदले हैं। युवक कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सांसद अशोक तंवर, कांग्रेस पर्यवेक्षक विप्लव ठाकुर, पर्यवेक्षक बीडी कल्ला, पानीपत ग्रामीण की प्रत्याशी प्रसन्नी देवी, शाहबाद के प्रत्याशी अनिल धंतौडी, घरौंडा के प्रत्याशी वीरेंद्र राठौर, युवक कांग्रेस के प्रांतीय उपाध्यक्ष पंकज पूनिया और किसान सेल के चेयरमैन नीटू मान ने भी जनसभा को संबोधित किया। राहुल ने वल्लभगढ़ व नारनौल में भी जनसभाओं को संबोधित किया।

शांति के नोबेल से भारत बेचैन


विश्व शांति दूत के नए अवतार में आ चुके अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा का हाथ भारत की परमाणु स्वतंत्रता तक पहुंच सकता है। परमाणु हथियारों की होड़ पर अंकुश के लिए ओबामा को शाबासी का प्रतीक माना जा रहा नोबेल पुरस्कार भारत के लिए दंड साबित हो सकता है। यानी परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) और सीटीबीटी का फंदा भारत के गले में कसने की पहले से ज्यादा आक्रामक रणनीति व्हाइट हाउस में बन रही हो तो अचरज नहीं होना चाहिए। अगर इसमें थोड़ा भी शक हो तो ओबामा की कुछ पंक्तियां दूर कर देंगी जो नोबेल की घोषणा के तुरंत बाद उन्होंने अपने बयान में कहीं थीं। मैं नोबल सम्मान को आगे की कार्रवाई के लिए आदेश के तौर पर स्वीकार कर रहा हूं। यह है ओबामा की पहली प्रतिक्रिया। इसके तुरंत बाद की लाइन तो भारत के होश उड़ाने के लिए काफी है। अब परमाणु हथियारों की होड़ को आगे रोकने और सभी नाभिकीय अस्त्रों को ठिकाने लगाने की सख्त जरूरत है। भारतीय कूटनीतिक खेमे को इसके निहितार्थ निकालने में ज्यादा मशक्कत की जरूरत नहीं पड़ी। अमेरिका संग परमाणु करार की रणनीति पर काम कर रहे विदेश मंत्रालय के अफसरों के माथे पर पसीना सब कुछ बयां करता है। एक उच्च पदस्थ अधिकारी ने तो कह भी दिया एनपीटी की पदचाप नजदीक आती सुनाई दे रही है। भारत को इस पर दस्तखत की जगह अमेरिका को अंगूठा दिखाने की ठोस रणनीति बना लेनी चाहिए। आईएईए के प्रमुख अल बरदेई की भारत के रुख पर मुहर इस लिहाज से बड़ा अस्त्र साबित होगी। वैसे एनपीटी की प्रासंगिकता को लेकर भारत विश्व बिरादरी के बीच माहौल बनाने की पूरी तैयारी कर रहा है। वहीं,अफसरों का यह तर्क भी गले उतरता है कि परमाणु अप्रसार का राग लगातार ऊंची करने के पीछे ओबामा का मकसद अपनी आवाज नोबेल पुरस्कार समिति तक ही पहुंचाने का था। इस रणनीति की पुष्टि के लिए साउथ ब्लाक में दो अहम प्रमाणभी पेश किए जा रहे हैं। पहला, इटली में जी-आठ की बैठक में एनपीटी पर दस्तखत की अनिवार्यता वाला प्रस्ताव। दूसरा,एक पखवाड़ा पहले संयुक्त राष्ट्र में एनपीटी व सीटीबीटी को लेकर ऐसा ही दूसरा प्रस्ताव। दोनों का एक ही मकसद है। भारत जैसे एनपीटी पर दस्तखत न करने वाले मुल्कों की परमाणु महत्वाकांक्षा को पूरा होने से रोकना। सूत्रों के अनुसार, नोबेल पुरस्कार मिलने के बाद ओबामा के पास अब परमाणु मामलों पर भारत से असहमति जताने का नैतिक बल पहले से ज्यादा बढ़ गया है। यानि परमाणु ऊर्जा संव‌र्द्धन और परमाणु ईधन के दोबारा प्रसंस्करण की तकनीक हासिल करने के नजदीक जा रहे भारत की राह में रोड़ा आ सकता है।

शनिवार, 10 अक्टूबर 2009

नोबेल शांति पुरस्कार ने दुनिया को चौंकाया


लंदन/नई दिल्ली, एजेंसी : नोबेल समिति ने इस वर्ष शांति पुरस्कार के 205 दावेदारों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा का चयन कर सारी दुनिया को हैरत में डाल दिया, क्योंकि राष्ट्रपति के रूप में उनका कार्यकाल अभी महज आठ महीने का ही है। नोबेल शांति पुरस्कार के लिए जितनी हैरत ओबामा का चयन करने से हुई उतनी ही उन्हें यह सम्मान देने के संदर्भ में जारी वक्तव्य से हुई। इस वक्तव्य में नोबेल समिति ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति तथा लोगों के बीच सहयोग को मजबूती देने की उनकी असाधारण कोशिश के लिए उन्हें इस पुरस्कार के लिए चुना गया। वक्तव्य में ओबामा के परमाणु हथियार मुक्त विश्व के दृष्टिकोण की भी प्रशंसा की गई है। यह संभवत: पहली बार है जब किसी शासनाध्यक्ष के दृष्टिकोण को नोबेल शांति पुरस्कार देने का प्रमुख आधारबनाया गया है। नार्वे की राजधानी ओस्लो में ओबामा को नोबेल शांति पुरस्कार देने की घोषणा होते ही अमेरिका सहित दुनिया भर में आश्चर्य मिश्रित प्रतिक्रिया हुई। अपेक्षा के अनुरूप इस्लामी जगत के लोगों को नोबेल समिति का फैसला रास नहीं आया। जहां विभिन्न राष्ट्राध्यक्षों ने अमेरिकी राष्ट्रपति को बधाई दी वहीं अनेक विचारकों और आम लोगों ने कहा कि ओबामा को नोबेल शांति पुरस्कार तो ठीक है, लेकिन आखिर यह दिया किसलिए गया है? भारत में भी दोनों राष्ट्रीय दलों-कांग्रेस और भाजपा के नेताओं ने सवाल किया कि आखिर इस सम्मान को हासिल करने के लिए मेरिट के आधार पर ओबामा ने किया क्या है?

शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2009

अब कहां रहा वह उत्साह!.....


अब कहां रहा वह उत्साह! एक समय था जब चुनाव होते ही चारों ओर रौनक छा जाती थी लोकतंत्र का यह महापर्व नेताओं, उनके कार्यकर्ताओं ही नहीं मतदाताओं में भी उत्साह भर देता था। समय के साथ चुनाव का ढंग भी बदला और रंग भी। इसके साथ ही इसकी रौनक भी गायब होती गई और जनसंपर्क व प्रचार के तौर-तरीके भी बदल गए। एक वक्त था जब गली मोहल्ले में नेता के पहंुचने से पहले ढोल-नगाड़ों से उनका स्वागत होता था, लोग उनकी बातें सुनते थे। आज तिकड़मों से भीड़ जुटानी पड़ती है। अप्रैल-मई में हुए लोकसभा चुनावों में कई राष्ट्रीय स्तर के नेताओं ने सोशल नेटवर्किग साइट्स के जरिए मतदाताओं से संपर्क साधा, वहीं विधानसभा चुनाव में भी नेता इस तरीके का इस्तेमाल कर रहे हैं। सीनियर सिटीजन क्लब के प्रधान ओपी मिगलानी कहते हैं कि पहले लोगों में चुनाव के समय शादी सा उत्साह होता था। शहर पार्टी कार्यालयों में मेला सा लगता था और गांवों से लोगों का हुजूम उमड़ता था। संचार के साधनों के अभाव में दूसरे क्षेत्रों में चुनावी माहौल जानने की बड़ी उत्सुकता रहती थी। आजकल पार्टियों के कट्टर समर्थक ही नेताओं को समय देते हैं। आम आदमी में बहुत दिलचस्पी नहीं दिखती। वरिष्ठ साहित्यकार दर्शनलाल आजाद का कहना है कि भले ही चुनाव प्रचार के तौर तरीके बदल गए हों, चाहे चौपाल की चुनावी सभा के विचार-विमर्श की जगह ब्लाग या एसएमएस ने ले ली हो, लेकिन न तो नेताओं का मिजाज बदला है और न ही समाज के प्रति उनकी भावना। चुनाव प्रचार में प्रयुक्त किए जाने वाले विभिन्न संसाधनों पर पानी की तरह पैसा बहाया जाता है और जनता के पैसे का दुरुपयोग होता है।

जे मुंडिया वे साढी टौर तूं बेखनी ............


भले ही गायक इंद्रजीत हसनपुरी वीरवार को हमें छोड़ कर चले गए, लेकिन उनके अमर गीत जे मुंडिया वे साढी टौर तूं बेखनी गड़बा ले दे चांदी दा., ढाई दिन न जवानी नाल चलदी कुरती मलमल दी., चरखा मेरा रंगला विच सोने दिया मेखां, वे मैं तैनूं याद करां जदों चरखे वल वेखां. तथा जदों-जदों वी बनेरे बोले कां. हमेशा सर्वत्र गूंजते रहेंगे। बेशक, हसनपुरी का नाम बतौर गीतकार चमकता रहा है, लेकिन उनकी पुख्ता पहचान साहित्यकार, फिल्मकार, चित्रकार व शायर के तौर पर भी है। वे कला को सिर्फ मनोरंजन का साधन ही नहीं अपितु संदेश संप्रेषण व सुधार का सशक्त माध्यम भी मानते थे। रफी, मन्ना डे व शमशाद ने दी उनके गीतों को आवाज : उनके लिखे गीतों की यही विशेषता है कि शमशाद बेगम, मुहम्मद रफी, मन्ना डे, जगजीत सिंह, सुरिंदर कौर, आशा भोंसले, गुरदास मान तथा हंसराज हंस जैसे गायकों को उन्हें सुरों से सजाने में कोई हिचक नहीं हुई। हसनपुरी के लिखे गीत करीब छह दशकों से लोगों की जुबां पर है। कौन पंजाबी भूल सकता है हसनपुरी रचित गीतों को। करीब दो दर्जन पंजाबी व आधा दर्जन हिंदी फिल्मों में उनके गीतों का फिल्मांकन हो चुका है। पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री को भी दिया योगदान : पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री को हसनपुरी ने तीन बेहतरीन फिल्में भी दी हैं। इनमें तेरी-मेरी इक जिंदड़ी, दाज तथा सुखी परिवार शामिल हैं। टेलीफिल्म व धारावाहिक के निर्माण में भी हसनपुरी ने अपनी छाप छोड़ी है। साडा पिंड, उजाड़ दी सफर, मस्यां दी रात को लोग शायद भी भूले होंगे। उनकी फिल्में या धारावाहिक सीधे तौर पर सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार करती हैं या फिर देशभक्ति की भावना प्रोत्साहित करते हैं। यही वजह रही है कि फिल्म तेरी-मेरी इक जिंदड़ी में धरम भाजी ने मुफ्त काम किया था। ये नए कलाकारों के मसीहा भी रहे हैं। कम से कम दर्जन नाम ऐसे हैं, जिन्हें इन्होंने कला के क्षेत्र में परिचित करवाया। रिक्शा चालक चांदीराम से 1950 में अपना पहला गीत रिकार्ड करवा कर उन्हें गायन व अभिनय के क्षेत्र में स्थापित किया। गजल गायक जगजीत सिंह ने इनके गीत तेरी-मेरी इक जिंदड़ी से पा‌र्श्वगायन की शुरुआत की थी। इनके अतिरिक्त के.दीप, नरिंदर बाबा, वरिंदर, मेहर मित्तल, धीरज कुमार जैसे लोगों को भी स्थापित करने का श्रेय इन्हें प्राप्त है। इनकी निजी जिंदगी उतार-चढ़ाव से भरी रही है। सन 1933 में पैदा हुए हसनपुरी को पिता की मौत के बाद 15 वर्ष की आयु में परिवार से दूर 15 रुपये माह की नौकरी करनी पड़ी थी। वे बताते थे कि उनके पिता स्वर्गीय जसवंत सिंह दिल्ली के तत्कालीन प्रमुख ठेकेदार शोभा सिंह (लेखक व पत्रकार खुशवंत सिंह के पिता) के सहयोगी ठेकेदार थे। गूंजते रहेंगे जे मुंडेया वे साडी टोर तूं वेखणी.. जैसे अमर गीत फिल्म स्टार धमें्रद के साथ इंद्रजीत सिंह हसनपुरी।

भिखारियों का कुंभ जुटेगा महाकुंभ में

हरिद्वार महाकुंभ की तैयारियों में लगे मेला प्रशासन के लिए भिखारी मुसीबत बने हुए हैं। पुलिस प्रशासन जहां महाकुंभ मेला क्षेत्र को भिखारी मुक्त करने की योजना बना रहा है वहीं सेक्टर व जोन में बंटने वाले इस क्षेत्र की तर्ज पर भिखारी भी व्यवस्थित होने की तैयारी में हैं। इनमें बांग्लादेशी भिखारी भी प्रशासन के लिए चिंता का सबब बने हुए हैं। इन भिखारियों में किसी के हिस्से में हरकी पैड़ी है, तो कोई पंतद्वीप, मंसा देवी, चंडी देवी मंदिरों के बाहर कटोरे पकड़े हुए है। मेला क्षेत्र के लिए भिखारियों की भी व्यवस्थाओं में बड़े बदलाव होने तय हैं। दिल्ली, यूपी, बिहार, प. बंगाल व उड़ीसा से इन दिनों पहुंचे भिखारी इसके लिए बाकायदा कार्ययोजना तैयार कर रहे हैं। महाकंुभ शुरू होने से कुछ दिन पहले इनके कुनबे व संगी साथी भी यहां पहुंचेंगे। वे अपने-अपने इलाकों में बंट जाएंगे। भिखारियों के इन जत्थों में पांच वर्ष के बच्चों से लेकर 70 साल के बूढ़े तक शामिल रहते हैं। ये सभी अपनी उम्र व शारीरिक बनावट आदि के अनुसार भीख मांगने के तरीके अपनाते हैं। पिछली बार अ‌र्द्धकुंभ में भी भिखारियों को मेला क्षेत्र से हटाने की योजना धरी की धरी रह गई थी। श्रद्धालुओं को डरा धमकाकर दान पुण्य करने को मजबूर करना भी भीख मांगने का एक तरीका है। चार-पांच साल से हरिद्वार में बांग्लादेशी भिखारियों की तादाद बढ़ती जा रही है। हालांकि पुलिस के पास इनका कोई रिकार्ड नहीं है। कनखल, पंतद्वीप, गंगनहर पटरी पर अनेक जगहों पर बांग्लादेश भिखारी झुग्गी झोपडि़यां डालकर रह रहे हैं। डीआईजी कुंभ मेला आलोक कुमार के मुताबिक एक जनवरी, 2010 से भिखारियों को मेला क्षेत्र से हटाकर रोशनाबाद स्थित भिक्षुकगृह में रखा जाएगा।

..लेकिन चोरों ने नहीं बख्शा


टायलेट में जन्म लेते ही ट्रेन से गिरे बच्चे को तो भगवान ने बचा लिया, लेकिन उसकी मां अपने सामान को चोरों से नहीं बचा पाई। चोरों ने पुरुलिया सदर अस्पताल में भर्ती रिंकू देवी की नकदी के साथ मोबाइल चोरी कर लिया। उड़ीसा के सुंदरगढ़ के लालिम पाड़ा निवासी इस दंपत्ति के पास अब न घर लौटने के लिए ट्रेन किराया है और न ही खाने के पैसे। अस्पताल में चोरी की घटना की जानकारी मिलते ही दक्षिण-पूर्व रेलवे मेंस यूनियन के ज्वाइंट सेक्रेटरी मलय बनर्जी ने अपने साथियों के साथ चंदा कर महिला के पति भोला राय को तीन हजार रुपये दिए। मलय बनर्जी ने जागरण को बताया कि पूरे घटना क्रम से आद्रा डिवीजन के डीआरएम एके गारेकर को अवगत करा दिया गया है। डीआरएम ने बताया कि मां व बच्चे के इलाज व खाने की उचित व्यवस्था की जाएगी। नवजात शिशु का वजन दो किलो चार सौ ग्राम है। अस्पताल की नर्सो ने बच्चे का नाम मृत्युंजय रखा है, जबकि पुरुलिया स्टेशन के रेलकर्मी प्यार से बच्चे को दुरंत नाम से पुकार रहे हैं। सदर अस्पताल के डीएमओ डा. स्वपन सरकार ने बताया कि बच्चा व मां को दोनों चिकित्सकों के देखरेख में रखा गया है।

गुरुवार, 8 अक्टूबर 2009

कृषि व्यवस्था में सुधार का कांग्रेस को सीधा लाभ

( डॉ सुखपाल सावंत खेडा)-
हरियाणा विधानसभा चुनाव के लिए मतदान की तारीख ज्यों-ज्यों नजदीक आ रही है वैसे ही चुनावी माहौल में गर्मी बढ़ने लगी है। हरेक दल ने मतदाताओं को लुभाने के लिए घोषणापत्र के जरिए दाना तो फेंका है मगर मतदाता इन दलों के हरियाणा में अब तक किए शासन की कसौटी पर इन वादों को परखने के मूड में है। राज्य के मतदाताओं का रुझान देखें तो मतदाता की कसौटी पर केवल और केवल कांग्रेस ही खरी उतरती नजर आ रही है। किसान हरियाणा में सबसे बड़ा मतदाता वर्ग है और राज्य में किसी दल का सत्ता का खेल बनाने व बिगाड़ने में किसान वर्ग का बड़ा हाथ रहा है। चुनावी रैलियां हों या साल भर होनेवाली राजनीतिक रैलियां, किसानों ने रैलियों के जरिए राजनीति में अपनी सक्रियता जाहिर करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। चाहे चौटाला रहे हों या भजनलाल अथवा स्व. चौधरी बंसीलाल, हरेक के मुख्यमंत्रित्वकाल में किसानों को सरकारी लाठी-गोली झेलनी पड़ी है। भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व वाली सरकार ही अब तक ऐसी साबित हुई है जिससे किसान संतुष्ट नजर आया। पहले के दौर को निकट से देखनेवाले हुड्डा ने 2005 में सत्ता संभालने पर किसानों की ताकत को जाना और उनके कल्याण के लिए न केवल योजनाएं बनाई बल्कि उन्हें निजी दिलचस्पी लेकर हूबहू लागू भी कराया। हुड्डा ने जब हरियाणा की बागडोर संभाली थी तब किसान वर्ग सबसे ज्यादा समस्याओं से जूझ रहा था। उन्होंने साढ़े चार साल के थोड़े से अरसे में इन समस्याओं को एक-एक कर निपटा दिया और यही कारण है कि राज्य का किसान एक बार फिर उन्हें सत्तासीन देखना चाहता है। जिन समस्याओं का निदान हुड्डा ने किया उनमें से कई तो दशकों से लंबित पड़ी थीं और इस दौरान शासन करने वाली कथित किसान हितैषी पार्टियों ने भी इन समस्याओं को नजरअंदाज ही किया। मौजूदा सरकार की सबसे बड़ी खूबी यह भी रही कि उसने अफसरशाही के भरोसे रहने की बजाय इन समस्याओं के निपटारे के लिए किसानों को भागीदार बनाया और उनसे सलाह-मशविरा करके ही किसान वर्ग के लिए कल्याणकारी योजनाएं बनाई। नेताओं द्वारा शोषित किसान वर्ग को इस भागीदारी का लाभ यह मिला कि ये योजनाएं शत-प्रतिशत फलदायक साबित हुई। किसान वर्ग को बरगलाने वाले दलों का राजनीतिक खेल समझ चुके किसान ने पिछले लोकसभा चुनाव में भी हुड्डा सरकार की नीतियों पर मुहर लगाई और अब विधानसभा चुनाव में भी उसी परंपरा को आगे बढ़ाता दिख रहा है। किसानों को भरोसा कांग्रेस ने कोई एक दिन में नहीं जीता है बल्कि हुड्डा की नेक नीयति, बेदाग छवि का इसमें बड़ा योगदान रहा है। अब तक सत्ता संभालने वाले मुख्यमंत्री जहां सत्ता सुख मिलते ही किसान को भूलने लगते थे वहीं हुड्डा ने जनता खासकर किसानों के बीच जाकर काम करना शुरू किया। साढ़े चार साल पहले मुख्यमंत्री का पद संभालने पर हुड्डा ने राज्य में भय, भ्रष्टाचार, अत्याचार व आतंक का राज खत्म करते हुए व्यवस्था परिवर्तन का वादा किया था। यह बदलाव अब प्रदेश के हर भाग में नजर आ रहा है। पहले किसानों ने सरकार और सरकार के करीब कुछ उद्योगपतियों-व्यापारियों द्वारा किसानों की जमीन को कौडि़यों के भाव पर हथियाने का दौर भी देख था लेकिन अब हालात बदल गए हैं। कांग्रेस सरकार भूमि अधिग्रहण करने संबंधी ऐसी नई नीति लेकर आई जिससे किसानों के दिन बदलने लगे क्योंकि इस नीति के तहत मुआवजा राशि न्यूनतम फ्लोर दर से तय की गई है। इस समय गुड़गांव विकास योजना के दायरे में आती भूमि के मुआवजे का न्यूनतम फ्लोर रेट 20 लाख रुपये प्रति एकड़, एनसीआर व पंचकूला में 16 लाख रुपये और बाकी पूरे हरियाणा में आठ लाख रुपये प्रति एकड़ तय है। इस मुआवजे में यदि सोलेशियम की राशि मिला दी जाए तो यह काफी ज्यादा बढ़ जाती है। हरियाणा में मार्केट रेट पर भूमि की फ्लोर दरें तय करने वाली यह पहली सरकार है। इस नीति में साथ भी यह भी जोड़ा गया है कि हरियाणा आधारभूत ढांचा विकास निगम के माध्यम से अधिग्रहीत की जाने वाली भूमि पर इन दरों के अलावा सालाना प्रति एकड़ 15,000 रुपये की रायल्टी 33 साल तक दी जाएगी जिसमें हर साल 500 रुपये प्रति एकड़ का इजाफा होगा।इसके अलावा एसईजेड और टेक्नालाजी पार्को के लिए भूमि अधिग्रहण पर रायल्टी के रूप में 33 साल तक 30,000 रुपये प्रति एकड़ दिए जाने का फैसला किया गया है, इस रायल्टी में सालाना 1000 रुपये प्रति एकड़ की दर से वृद्धि होती रहेगी। हुड्डा सरकार के इस फैसले का असर यह रहा कि किसान के घर पैसा पहुंचने लगा है और उस पर साहूकारों व बैंकों का दबाव भी खत्म होने की कगार पर है। किसान अपने मौजूदा और चार साल पहले के दौर की तुलना करें तो खुशहाली का यह असर साफ नजर आता है क्योंकि किसान के घर आज जरूरत के हर सामान के अलावा महंगी गाडि़यां भी हैं और उस पर किसी तरह के कर्जे का बोझ भी नहीं है। पिछले दिनों आए एक सर्वे में कहा गया है कि समूचे भारत में सबसे ज्यादा करोड़पति किसान हरियाणा के हैं। हुड्डा ने किसान के दुख दर्द को कितना समझा इसका एक और प्रमाण हैं कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेस हाइवे योजना के दायरे में आते किसान। पूर्व इनेलो सरकार ने इस योजना के तहत आती भूमि के अधिग्रहण का कुल मुआवजा 150 करोड़ रुपये तय किया था। इससे स्थानीय किसान काफी असंतुष्ट था और खुद को अपनी कथित हितैषी सरकार के हाथों ठगा महसूस कर रहा था। किसानों ने गुहार भी लगाई मगर चौटाला सरकार में किसान की सुनवाई नहीं हुई। इस दौरान 2005 में हुआ सत्ता परिवर्तन। हुड्डा हालांकि पूर्व सरकार के फैसले को बदलने के लिए बाध्य नहीं थे मगर उन्होंने सत्ता संभालते ही इन किसानों को मुआवजे की दर में करीब पांच गुणा तक की बढ़ोतरी कर दी और यह मुआवजा डेढ़ सौ करोड़ से बढ़ कर 650 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। इसके साथ ही कांग्रेस सरकार ने एक और ऐतिहासिक फैसला किया जिसके तहत एक एकड़ जमीन का मालिक किसान भी बैंक से टै्रक्टर के लिए कर्ज ले सकता है। पूर्व सरकारों के शासनकाल में इसके लिए पांच एकड़ भूमि बैंक के पास गिरवी रखने की शर्त थी। किसान हुड्डा सरकार पर इसलिए भी भरोसा जता रहा है क्योंकि उसने न केवल उसका मान-सम्मान बहाल किया बल्कि उस पर से मानसिक दबाव भी कम कराया। पूर्व सरकारों के दौर में बैंकों का कर्जा चुकाने में नाकाम रहे किसानों को गांवों से हथकड़ी लगाकर गिरफ्तार किया जाता था और जेल में उसे दी जाने वाली रोटी का खर्च तक उसके ब्याज में जोड़ दिया जाता था। बैंक अपने कर्जे की वसूली के लिए उसकी जमीन को बहुत कम दाम में नीलाम करा देते थे। लेकिन हुड्डा ने किसानों की पगड़ी के सम्मान को बरकरार रखने के लिए छोटे किसानों व दस्तकारों के 830 करोड़ रुपये के कर्ज माफ कर दिए और केंद्र की कांग्रेस नेतृत्व वाली सरकार ने देशभर में 71,000 करोड़ रुपये के जो ऋण माफ किए थे उसमें भी 2136 करोड़ की कर्जा माफी का लाभ हरियाणा को मिला। सहकारी बैंकों की ब्याज दर भी हुड्डा ने 14 प्रतिशत से कम करके सात प्रतिशत कर दी। कई हलकों का दौरा करने पर यह बात सामने आई है कि किसान फिर कांग्रेस पर भरोसा जता रहा है। जो किसान गांवों में कांग्रेस को बैठक के लिए जगह तक मुहैया कराने में आनाकानी करता था आज खुद कांग्रेस प्रत्याशियों के लिए सभाओं का आयोजन कर रहा है।

विस चुनाव में इनेलो ने चलाया युवा कार्ड

( डॉ सुखपाल सावंत खेडा)-

हरियाणा में इस बार युवा वर्ग पर इनेलो अपनी पकड़ बनाने में कामयाब रही है। कांग्रेस ने राहुल गांधी के जरिए युवा कार्ड खेलने की जो चाल चली थी वह कांग्रेस के टिकट बंटवारे तक मंद पड़ गई। इनेलो सबसे ज्यादा युवाओं को टिकट देकर इस मामले में कांगे्रस को पछाड़ने में सफल रही है। चर्चाओं के अनुसार युवा वर्ग के लिए सबसे ज्यादा घोषणाएं इनेलो ने ही की हैं। उसके घोषणापत्र में युवाओं के लिए कई ऐसी योजनाएं हैं जो इस समय युवाओं को उसके साथ बहुत नजदीक से जोड़ रही हैं। बेरोजगार युवाओं को बेरोजगारी भत्ता, मुफ्त शिक्षा और नौकरियों में भारी-भरकम आरक्षण से युवा इनेलो की ओर खिंचे चले आ रहे हैं। इनेलो ने कालेज जाने वाली छात्राओं को स्कूटी देने का भी वायदा किया है। कुछ समय पहले तक कांग्रेस यह प्रचारित कर रही थी कि युवा वर्ग उसके साथ है। राहुल गांधी के रूप में कांगेस ने युवा चेहरा राष्ट्रीय स्तर पर पेश भी किया था मगर उनका यह जादू हरियाणा में छाप छोड़ने में नाकाम रहा। कांग्रेस ने टिकटें बांटी तो युवा संगठन से दो-तीन लोगों को ही टिकटें मिली। हालात यह बन पड़े कि कांग्रेस के इस दोहरे चेहरे से खफा युवा इनेलो की ओर आकर्षित होने लगे। चर्चाओं के अनुसार युवाओं में अजय व अभय चौटाला एक रोल माडल बन कर उभरे हैं। उन्हें लगता है कि हरियाणा का भविष्य इनेलो के हाथ में सौंपने पर उनकी कई समस्याओं की जड़ मिट सकती है क्योंकि यह युवा जोड़ी युवाओं से सीधे जुड़े होने के कारण उनकी समस्याओं को नजदीक से जानती है। हरियाणा में पिछले साढ़े चार साल के कांग्रेस शासन दौरान बढ़ी बेरोजगारी से त्रस्त युवा वर्ग इसी कारण अब उम्मीद भरी नजरों से इनेलो की ओर देख रहा है क्योंकि इनेलो के पूर्व शासन से वाकिफ युवा जानते हैं कि यही पार्टी उन्हें बिना पक्षपात के नौकरियां दे सकती है। कांग्रेस शासन में नौकरियां तो मिली मगर केवल रोहतक व झज्जर के युवकों को। बाकी पूरे हरियाणा में बेरोजगारों की तादाद इसी कारण ज्यादा बढ़ी है।

नशा मुक्ति केंद्रों पर नजर रखेगी कमेटी

पंजाब एंव हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब, हरियाणा व चंडीगढ़ के नशा मुक्ति केंद्रों की स्थिति के लिए कमेटी का गठन किया है। इस दो सदस्य कमेटी में एडवोकेट आलोक जैन व एडवोकेट एडीएस सुखीजा शामिल है। यह कमेटी निरीक्षण के बाद अपनी स्टेटस रिपोर्ट कोर्ट को सौंपेगी। कमेटी के सदस्य तीन राज्यों के केंद्रो में दी जाने वाली सुविधाओं के लिए निरीक्षण करेंगे। जिस पर स्टेटस रिपोर्ट में सुधार की दिशा में सुझाव दिए जाएंगे। इसके साथ ही कोर्ट ने पंजाब, हरियाणा व चंडीगढ़ के पेश होने वाले काउंसिल को भी निर्देश दिए हैं कि अपनी तरफ वे भी कमेटी के सदस्यों को इस दिशा में जरूरी सूचना मुहैया कराए। जिसमें उन्हें यह बताना हो कि इन राज्यों में किन-किन जगहों पर नशे की रोक के लिए केंद्र उपलब्ध होंगे। साथ ही उन्हें इन राज्यों की किसी भी जगह पर कमेटी के सदस्यों के निरीक्षण के दौरान जरूरी प्रबंध करने होंगे। जिसमें ठहरने व ट्रांसपोटेशन सुविधा तक शामिल होगी, बल्कि समय मिलते ही सभी को निरीक्षण के वक्त भी उपलब्ध रहना होगा। कोर्ट ने अपने निर्देश में यह भी कहा है कि निरीक्षण से पहले संबधित जिले के उपायुक्त को सूचित करना भी जरूरी होगा, ताकि केंद्रों में निरीक्षण के दौरान कमेटी के सदस्यों के साथ किसी वरिष्ठ सदस्य को नियुक्त किए जा सके। कोर्ट ने युवाओं के बीच नशे की लत पर चिंता जताई है। साथ ही पंजाब व हरियाणा की रवैये पर भी असंतुष्टि जताई है। जिन्होंने इस पर रोक लगाने के लिए ठोस कदम नहीं उठाया है। इस मसले पर पंजाब सरकार ने कोर्ट में पेश की गई स्टेटस रिपोर्ट भी पेश की थी।

एक और नोबेल पर भारत का नामलंदन, एजेंसियां : दुनिया के प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कार के साथ भारतीय मूल के एक और शख्स का नाम जुड़ गया है। भारतीय मूल के अमेरिकी वेंकटरमन रामकृष्णन ने नोबेल पुरस्कार जीत कर दुनिया में भारत का नाम रोशन किया है। उन्हें रसायन विज्ञान के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम करने के लिए वर्ष 2009 का नोबेल पुरस्कार मिलेगा। उन्हें इस पुरस्कार के लिए अमेरिकी वैज्ञानिक थामस ए. स्टेट्ज और इजरायल की वैज्ञानिक अदा ई. योनथ के साथ संयुक्त रूप से चुना गया है। इन तीनों को राइबोसोम की संरचना और इसकी कार्यप्रणाली के संबंध में महत्वपूर्ण अध्ययन के लिए यह सम्मान दिया जाएगा। रायल स्वीडिश एकेडेमी आफ साइंसेज की ओर से यह घोषणा की गई। एकेडेमी के मुताबिक तीनों वैज्ञानिकों ने राइबोसोम का त्रिविमीय (3-डी) माडल बनाया, जिससे यह पता चला कि किस तरह विभिन्न एंटीबायोटिक और राइबोसोम आपस में जुड़े रहते हैं। वेंकटरमन ने थामस और योनाथ के साथ मिल कर राइबोसोम के बारे में कई उपयोगी ... एक और नोबेल पर भारत का नाम जानकारियां इकट्ठी कीं, जिनकी मदद से कई बीमारियों से बचाव के लिए एंटीबायोटिक बनाने में मदद मिली। इन तीनों ने एक्स-रे क्रिस्टलोग्राफी तकनीक से उन लाखों परमाणुओं की गतिविधियों का अध्ययन किया जो हमारे शरीर की कोशिका में प्रोटीन का निर्माण करने वाले राइबोसोम का निर्माण करते हैं। भारी प्रतिष्ठा और रकम : रसायन विज्ञान के क्षेत्र में इस अद्भुत योगदान के लिए तीनों वैज्ञानिकों को नोबेल पुरस्कार के रूप में 14 लाख अमेरिकी डालर (करीब सात करोड़ रुपये) मिलेंगे। यह रकम तीनों में बराबर-बराबर बंटेगी। इसके साथ ही इन वैज्ञानिकों को जो प्रतिष्ठा मिलेगी, वह तो अनमोल है। साथियों का आभार : वेंकटरमन ने इस पुरस्कार के लिए अपने साथी वैज्ञानिकों और सहयोगियों का आभार जताया है। अति मुदित वेंकटरमन ने कहा, मैं अपने प्रखर सहयोगियों, छात्रों और मेरे लैब में काम करने वाले तमाम शोधकर्ताओं का तहे दिल से ऋणी हूं, क्योंकि विज्ञान सामूहिकता से जुड़ा क्षेत्र है। लैब या नोबेल विजेताओं की फैक्ट्री : अपने मित्रों के बीच वेंकी नाम से लोकप्रिय वेंकटरमन इन दिनों कैंब्रिज, इंग्लैंड के एमआरसी लेबोरेटरी आफ मोलेक्यूलर बायोलाजी के स्ट्रक्चरल स्टडीज डिवीजन के प्रमुख हैं। वह नोबेल पुरस्कार पाने वाले इस लेबोरेटरी के तेरहवें वैज्ञानिक हैं। 69 साल की स्टेट्ज येल यूनिवर्सिटी में मोलेक्यूलर बायोफिजिक्स एंड बायोकेमिस्ट्री विभाग में प्रोफेसर हैं, जबकि योनाथ इजरायल के वेजमैन इंस्टीट्यूट आफ साइंस में स्ट्रक्चरल बायोलाजी विभाग में प्रोफेसर हैं।

बुधवार, 7 अक्टूबर 2009

अपने मसीहा का कर्ज उतारेंगे किसान


( डॉ सुखपाल सावंत खेडा)-

हरियाणा के किसान इस बार विधानसभा चुनाव में अपने मसीहा स्व. चौ देवीलाल का कर्ज उतारने के मूड में हैं। चौ. देवीलाल देश के एकमात्र ऐसे नेता थे जिन्होंने किसानों की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर बनाई थी। किसानों को एक वोट बैंक के तौर पर प्रयोग करती आई कांग्रेस के खिलाफ किसानों को उन्होंने ही एकजुटता का पाठ पढ़ाते हुए यह संदेश दिया था कि किसान की अपनी साख, पहचान व सम्मान है। प्रदेश के मुख्यमंत्री से लेकर देश के उप प्रधानमंत्री के ओहदे तक पहुंचे चौ. देवीलाल की राजनीति हमेशा ही किसानों के आसपास घूमती रही थी। किसानों के बीच से उठकर वह चाहे कितने भी ऊंचे पद तक पहुंचे हों, मगर उन्होंने कभी अपने अतीत को भुलाने का प्रयास नहीं किया। उनकी सोच हमेशा ही किसान हितैषी रही। कहना न होगा कि किसानों ने भी चौ. देवीलाल को हमेशा सिर-आंखों बिठाया। चौ. देवीलाल ने अपने पुत्र ओम प्रकाश चौटाला को भी अपनी किसान की पहचान को जीवित रखने को कहा था और चौटाला उनकी सीख पर खरे भी उतरे। मौजूदा कांग्रेस सरकार ने किसान नेताओं को अपने पक्ष में करने के लिए कई ऐसे फैसले लिए जिनका असर व्यापारिक तौर पर साफ नजर आया। किसान नेताओं को मौजूदा सरकार ने इस कद्र अपने वश में किए रखा कि इन नेताओं ने प्रदेश सरकार की किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ आवाज तक नहीं उठाई। प्रदेश सरकार किसानों को जमीन की बिक्री में करोड़ों मिलने का दावा चाहे करती हो, मगर जब यह जमीन ही नहीं रहेगी तो किसान की पहचान भी कहां दिखेगी। हुड्डा सरकार के इस फैसले का खतरनाक असर प्रदेश के सामाजिक ढांचे पर यह हुआ है जमीन न रहने से किसान खेती कहां करता और इससे किसान अपने ही घर में अपनी पहचान को तरसने लगा है। सभी यह जानते हैं कि किसान को व्यापार नहीं आता और न ही वह किसी के मातहत नौकरी कर सकता है, ऐसे में अब वह अपने वजूद को बचाने की जद्दोजहद में लगा है। अब एक बार फिर किसान वर्ग को उम्मीद है कि मौजूदा सरकार द्वारा उनकी गरीबी का फायदा उठाने के लिए अपने कुछ साथी-सहयोगियों का साथ देने के दिन गुजरने वाले हैं और जल्द ही चौ. देवीलाल का परिवार एक बार फिर उनकी पहचान व सम्मान को लौटाएगा।

कांग्रेस जनहितैषी पार्टी : दीपेंद्र


डबवाली( डॉ सुखपाल सावंत खेडा)- : रोहतक के सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ही प्रदेश को स्वच्छ व पारदर्शी प्रशासन दे सकती है। प्रदेश में पिछले साढे़ चार वर्ष के दौरान मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा द्वारा बनाई गई योजनाओं के परिणामस्वरूप सामाजिक क्रांति के नए दौर की शुरुआत हुई है। वह मंगलवार को कांग्रेस प्रत्याशी केवी सिंह के समर्थन में रोड शो के दौरान बोल रहे थे। दीपेंद्र हुड्डा ने मंगलवार को डबवाली विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बनवाला, बिज्जूवाली, गोरीवाला, गंगा, जण्डवाला बिश्नोईयां, चौटाला, अबूबशहर और सकताखेड़ा गांव सहित डबवाली शहर में कांग्रेस प्रत्याशी डा. केवी के पक्ष में चुनाव प्रचार किया। रोड शो के दौरान सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा का सभी गांवों में जोरदार स्वागत हुआ। रोड शो के दौरान ग्रामीणों को संबोधित करते हुए दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी स्पष्ट बहुमत लेकर सत्ता में आएगी। उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेश में कांग्रेस पार्टी की लहर चल रही है। उन्होंने कहा कि पिछले साढ़े चार वर्ष के दौरान मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सभी वर्गो को ध्यान में रखते हुए अनेक प्रकार की योजनाएं लागू की। उन योजनाओं के बलबूते पर ही आज पूरे देश में हरियाणा की विशेष पहचान बनी है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने बिना भेदभाव के हरेक गांव व शहर का सम्मान रूप से विकास कराने का काम किया है। हरियाणा के इतिहास में यह पहला अवसर है कि लोगों ने सत्तासीन पार्टी को ही दोबारा सत्ता सौंपने का मन बनाया है। उन्होंने कहा कि डा. केवी सिंह एक ईमानदार व संघर्षशील व्यक्ति हैं और उन्होंने डा. सिंह का बहुत करीबी से देखा है। इस अवसर पर डा. के.वी. सिंह ने लोगों को अपने पक्ष में मतदान की अपील की और विश्वास दिलाया कि उनकी कलम हमेशा लोगों की भलाई के लिए ही कार्य करेगी। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालातों से स्पष्ट है कि कांग्रेस पार्टी भारी बहुमत से सत्ता में आएगी और डबवाली के लोगों का राज में हिस्सा तभी बनेगा जब कांग्रेस पार्टी का प्रत्याशी जीत कर विधान सभा में पहुंचेगा।

सुहागिनों ने हाथों पर रचाई मेहंदी

( डॉ सुखपाल सावंत खेडा)-


करवाचौथ के व्रत की तैयारियों को लेकर मंगलवार को सुहागिनों ने बाजारों में खूब खरीददारी की। दिन भर बाजारों में रौनक लगी रही। महिलाओं ने करवाचौथ व्रत पर अपने श्रृंगार से संबंधित सामान खरीदा। बुधवार को चंद्रमा के उदय होने पर ही सुहागिनें व्रत को पूरा करेगी। करवाचौथ को लेकर बाजारों में मेहंदी रचने वाले कलाकारों ने भी मंगलवार को खूब चांदी कूटी। 100 रुपये के हिसाब से उन्होंने प्रति महिला के हाथों पर मेहंदी के डिजाइन बनाए। महिलाओं ने बड़े चाव के साथ मोहता मार्केट पहुंचकर इन कलाकारों से अपने हाथों पर मेहंदी लगवाई। कुछ महिलाओं ने अपने घर पर ही मेहंदी रचाई जबकि कुछ युवतियों ने घर-घर जाकर सुहागिनों के हाथों में मेहंदी रचाई। इसी प्रकार करवाचौथ के व्रत के लिए बाजारों में मिठाई की दुकान पर चीनी के करवे भी महिलाओं द्वारा खरीदे गए। मिठाई की दुकानों पर मट्िठयां व घेवर सजाए हुए थे। चूड़ी भंडारों पर भी मंगलवार को पूरी चहल पहल रही। सुहागिनों ने दुकानों पर जाकर अपने मनपसंद की चूड़ियों की खरीददारी की। चूडि़यों की दुकानों पर ही उन्होंने अपने हाथों में चूड़ियां पहनी। कपड़े की दुकानों से सुहागिनों ने नए कपड़े खरीदे। करवाचौथ के व्रत पर महिलाएं साज सज्जा के लिए नए कपड़ों की जमकर खरीददारी कर रही है। इसी प्रकार ब्यूटी पार्लरों के पास भी दिन भर अपने चेहरे को निखारने के लिए महिलाओं की भीड़ लगी रही। पति की लंबी आयु की कामना को लेकर व्रत रखने वाली सुहागिन महिलाएं इस दिन अपने आपको सुंदर व आकर्षित रूप में रखती हैं। फल विक्रेताओं का काम भी करवाचौथ के एक दिन पूर्व गर्म रहा। इस व्रत के दिन अपनी भूख को शांत करने के लिए महिलाएं फलों का सहारा लेंगी। कुछ महिला संगठनों द्वारा करवाचौथ के अवसर पर बुधवार को अनेक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाएगा। विभिन्न मोहल्लों में महिलाएं टोलियों में इकट्ठी होकर पूजा अर्चना करेगी।

मुर्दा को जिंदा कर बेच ली करोड़ों की जमीन


अलीगढ़: उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में मुर्दा व्यक्ति को जिंदा कर करोड़ों की जमीन हथिया ली गई। शिकायत मिलने पर जिला प्रशासन ने जांच की तो पता चला कि जिस व्यक्ति को जमीन का मालिक बताकर रजिस्ट्री कराई गई, असल में वह यहां कभी रहा ही नहीं है। कर्मचारियों की साठगांठ से सारा खेल दस्तावेज में हुआ। डीएम को जांच रिपोर्ट भेजी गई है। अब मिलीभगत करने वाले सरकारी मुलाजिमों पर कार्रवाई की तैयारी है। मामला अलीगढ़ के टप्पल क्षेत्र के गांव नरवारी का है। यहां पचास बीघे जमीन के बैनामे का खेल जून में हुआ था। भूमि के मालिक दो सगे भाइयों रमजान और छज्जर के होश तब उड़ गए, जब उनकी चार हेक्टेयर भूमि पर कुछ लोग कब्जा हासिल करने के लिए गांव आ धमके। उन्होंने तहसील में छानबीन की। खुलासा हुआ कि उनके पिता चंदरू पुत्र खैराती के स्थान पर हरियाणा के किसी चंदरू पुत्र बहादुर ने स्वयं को जमीन का मालिक बता कर भूमाफिया से साठगांठ कर उनकी जमीन बेच डाली। उसने अपने ग्राम प्रधान से यह लिखवा लिया कि वह नरवारी में भी रहा है। यह जमीन जट्टारी निवासी टोनी अग्रवाल ने गत दो जून को खरीदी थी। पता चलने पर रमजान और छज्जर को 12 जून को डीएम से शिकायत की। शिकायत में रमजान ने कहा कि उसके पिता चंदरू का निधन मई 2004 में हो गया था। उसके बाद राजस्व निरीक्षक ने 21 जुलाई, 2004 को उनके स्थान पर उनके बेटों रमजान, छज्जर, फतेह मोहम्मद, हमीद और हसन की विधवा व उनके बेटे हसरुद्दीन व भूरा के नाम खतौनी में दर्ज कर दिए। इसके बावजूद तहसील के रिकार्ड में हेराफेरी कर हरियाणा के पलवल निवासी चंदरू को ही जमीन का मालिक मान लिया गया। बैनामा हो गया। रमजान ने डीएम से शिकायत करने के साथ ही खरीदार टोनी, चंदरू समेत अन्य के खिलाफ रिपोर्ट लिखवाई है।

फिर लहराएगा किसान का खेत: चौटाला




( डॉ सुखपाल सावंत खेडा)- : इनेलो प्रमुख ने किसानों से वायदा किया कि सरकार बनने पर किसान का खेत फिर लहराएगा और उन्हें गेहूं का न्यूनतम मूल्य 1400 रुपए प्रति क्विंटल दिया जाएगा। इनेलो प्रमुख ओमप्रकाश चौटाला ने कलायत हलका के बालू गांव में आज विशाल चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी सरकार समाज के हर वर्ग के लिए काम करेगी। हर हरियाणावासी का सरकार में हिस्सा होगा। इनेलो प्रमुख ने कलायत के अलावा गन्नौर, रानियां, आदमपुर व लोहारू में भी पार्टी प्रत्याशियों के समर्थन में चुनावी सभाएं करके पार्टी प्रत्याशी के हक में वोट मांगे। चौटाला ने कहा कि सत्ता में आने पर हर घर में एक निशुल्क गैस सलेंडर और चूल्हे के साथ और हर घर में पानी का कनेक्शन भी मुफ्त मिलेगा। उन्होंने कहा कि हर वर्ष हजारों युवकों को रोजगार दिया जाएगा और जिनको रोजगार तत्काल उपलब्ध नहीं होगा, उन्हें प्रतिमाह 3000 रुपए महीना बेरोजगारी भत्ता मिलेगा। उन्होंने कहा कि जब मैं 2000 के चुनाव के बाद मुख्यमंत्री बना था तो जो मैंने कहा वो मैंने करके दिखाया। अब पार्टी ने चुनावी घोषणा पत्र तैयार किया है जिसमें समाज के हर वर्ग के आम आदमी को लाभ पहंुचाने का वायदा किया गया है। जनता के आशीर्वाद से इन वायदों पर नीति बनाकर अमल मेरे मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठते ही शुरू हो जाएगा। कांग्रेस सरकार को कोसते हुए चौटाला ने कहा कि महंगाई, बिजली-पानी की कमी, बिगड़ी कानून व्यवस्था ऐसे मुद्दे हैं जिन्होंने हर हरियाणा वासी को परेशान और हताश किया है। श्री चौटाला ने लोगों का आह्वान किया कि मौजूदा जनविरोधी सरकार को चलता कर इनेलो के उम्मीदवारों को भारी मतों से जिताएं। उन्होंने व्यापारी भाईयों को घोषणा पत्र में किए वायदे गिनवाएं और कहा कि जब पहले उनकी सरकार थी तो व्यापारियों को इंस्पेक्टरी राज समाप्त कर तथा महसूल चंुगी खत्म कर राहत देने का काम किया था। कांग्रेस सरकार की आलोचना करते हुए चौटाला ने कहा कि कांग्रेस लुभावने नारे देकर और कोरी कागजी घोषणाओं के बलबूते पर सभी वर्ग के लोगों का शोषण करती रही है। किसानों को मौजूदा शासनकाल में न बिजली मिली और न ही पानी।

सफोदपोशों की जी-हजूरी में जुटे कर्मचारी


निर्वाचन आयोग की लाख कोशिशों के बावजूद कुछ सरकारी कर्मचारी चुनाव प्रचार करने से बाज नहीं आ रहे हैं। कर्मचारी राजनीतिक मंचों पर खुलेआम भाषणबाजी करते हुए दिखाई पड़ रहे हैं। मगर आयोग की चेतावनी का उनकी सेहत पर कोई असर दिखाई नहीं दे रहा है। प्रदेश भर के पांच लाख कर्मचारियों में से 1 लाख 40 हजार कर्मचारियों की चुनावी डयूटी लगी है। सैकड़ों कर्मचारी बीमारी का बहाना बनाकर लंबी छुट्टी पर चले गए हैं। इन्हीं में से अनेक नेताओं की जी-हजूरी में जुटे हंै। भले ही चुनाव आयोग अधिकारी ऐसे कर्मचारियों की सूची बनाने में लगा हुआ है। जिला निर्वाचन कार्यालय द्वारा ऐसे चार दर्जन कर्मचारियों की सूची बनाई जा चुकी है। इन पर शीघ्र ही आयोग के सख्त रवैये की गाज गिरने वाली है। कर्मचारी चुनावी डयूटी से बचकर अपनी बीमारी का बहाना बना कर विभाग के हाथों में मेडिकल थमा कर चुनावी डयूटियों से नाम कटवा रहे हैं। अकेले भिवानी जिले में ऐसी 400 से अधिक ऐप्लीकेशन लंबित हैं। अनेक कर्मचारी छुट्टी लेने में कामयाब भी रहे हैं। अब तंग आकर आयोग ने अपना रवैया और सख्त कर लिया है। जो भी कर्मचारी आदेशों की पालना न करता पाया गया तो आयोग द्वारा अनुशासनात्मक कार्रवाई के साथ-साथ एफआईआर दर्ज करवाने का मन भी बना लिया है। हरियाणा प्रदेश चुनाव आयोग इस बार भी चुनाव प्रचार में जुटे सरकारी कर्मचारियों पर सख्त कार्यवाही के मूड में है। आयोग द्वारा प्रदेश में 20 हजार से अधिक बूथ बनाए गए हैं। प्रत्येक बूथ पर पर्यवेक्षक सहित पांच सरकारी कर्मचारियों की डयूटी लगाई गई है। इस हिसाब से एक लाख 42 हजार से अधिक सरकारी कर्मचारी चुनावी डयूटी में लगे हुए हैं। इसके बावजूद सैकड़ों कर्मचारी चुनाव आयोग के नियमों को ठेंगा दिखाकर नेताओं के साथ चुनाव प्रचार में मशगूल है। इन कर्मचारियों को आयोग के आदेशों की कतई फिक्र नहीं है। हालांकि आयोग द्वारा ऐसे कर्मचारियों पर टेढ़ी नजर रखी जा रही है, साथ ही चुनावी कार्यक्रमों की गुपचुप तरीके से वीडियो फिल्म तैयार की जा रही है। इससे बेखबर सरकारी कर्मचारी नेताओं की चमचागिरी में लगे हैं।

मां-बेटे ने नहर में कूदकर दी जान


डबवाली( डॉ सुखपाल सावंत खेडा)-
: गांव जंडवाला बिश्नोइयां में मां-बेटे ने नहर में कूदकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। गांव जंडवाला बिश्नोईयां निवासी लखेश्वरी देवी पत्नी स्व. मांगेलाल अपने 20 वर्षीय बेटे संजीव व भतीजे विमल कुमार के साथ रविवार प्रात: खेतों में मजदूरी करने गई थी। शाम को घर वापसी पर लखेश्वरी देवी ने भतीजे विमल को साथ लगते खेत से पशुओं के लिए चारा लाने के लिए भेज दिया तथा खुद अपने बेटे के साथ राजस्थान कनाल में छलांग लगा दी। जब विमल कुमार चारा लेकर घर पहुंचा तो उसने अपनी बुआ व संजीव के घर पर न पहुंचने की सूचना गांव के सरपंच विष्णु सिंह व अन्य लोगों को दी। जब वे राजस्थान कनाल नहर पर उनकी तलाश में पहुंचे तो नहर में उनकी चप्पलें तैर रही थी। सरपंच ने इसकी सूचना तुरंत थाना सदर को दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों की सहायता से मां-बेटे को नहर में इधर-उधर तलाश किया, लेकिन उनका कुछ पता नहीं चला। बाद में किसी ने सूचना दी कि दो शव नहर में तैर रहे हैं। सूचना मिलते ही ग्रामीण व पुलिस अधिकारी मौका पर पहुंचे तथा थाना सदर पुलिस ने ग्रामीणों की सहायता से दोनो शवों को नहर से बाहर निकलवाया। गांव के सरपंच विष्णु सिंह ने बताया कि मृतका लखेश्वरी देवी के बड़े बेटे का कुछ माह पूर्व एक्सीडेंट हो गया था।

त्योहारी मौसम में चमके सोना-चांदी नई दिल्ली


विदेश में तेजी और त्योहारी मौसम के मद्देनजर आभूषण निर्माताओं व स्टाकिस्टों के बीच सोना-चांदी की खूब मांग निकली। इससे स्थानीय सराफा बाजार में मंगलवार को दोनों कीमती धातुएं भड़क गईं। यहां सोना 100 रुपये चढ़कर 15 हजार 900 रुपये प्रति दस ग्राम हो गया। वहीं चांदी भी 450 रुपये उछलकर 26 हजार 550 रुपये प्रति किलो बंद हुई। स्थानीय बाजार में सोना आभूषण के भाव 100 रुपये की तेजी के साथ 15 हजार 750 रुपये प्रति दस ग्राम पर बंद हुए। गिन्नी 12 हजार 900 रुपये प्रति आठ ग्राम पर अपरिवर्तित रही। चांदी साप्ताहिक डिलीवरी 515 रुपये भड़ककर 26 हजार 550 रुपये प्रति किलो हो गई।

डॉलर का खेल खत्म करने की तैयारी


दुनिया भर में छायी अमेरिकी मुद्रा डॉलर को अब चुनौती मिलने जा रही है। हाल में अरब देशों ने चीन, फ्रांस और रूस के साथ मिलकर एक गुप्त अभियान शुरू किया है, जिसके तहत तेल के कारोबार में अमेरिकी मुद्रा का प्रयोग बंद कर दिया जाएगा। न तेल की कीमतें डॉलर में तय होंगी और न ही उनका भुगतान अमेरिकी मुद्रा में होगा। पश्चिम एशिया के वित्तीय इतिहास में यह सबसे बड़ा बदलाव होगा जब तेल के कारोबार में डॉलर का इस्तेमाल बंद हो जाएगा। अरब देशों की इस योजना में चीन, रूस और फ्रांस के साथ जापान भी शामिल है। लिहाजा डॉलर के स्थान पर जापानी मुद्रा येन, चीन की युआन, यूरोपीय यूनियन की यूरो, सोना या फिर अरब देशों की प्रस्तावित संयुक्त मुद्रा के इस्तेमाल पर विचार किया जा रहा है। इस नई संयुक्त मुद्रा के जनक देशों में सऊदी अरब, अबुधाबी, कुवैत और कतर शामिल हैं। इस योजना पर काम करने के लिए रूस, चीन, जापान और ब्राजील में वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक के गवर्नरों की गुप्त बैठकें हो चुकी हैं। अरब देशों और चीन के बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े सूत्रों ने इस योजना की पुष्टि की है। संभवत: यही वजह है कि सोने की कीमतों में उछाल आ रहा है और माना जा रहा है कि अगले नौ साल में इस बदलाव को पूरी तरह मूर्त रूप दे दिया जाएगा। खास बात यह है कि भारत और ब्राजील ने भी तेल के गैर-डॉलर भुगतान व्यवस्था से जुड़ने में दिलचस्पी दिखाई है। यह भी गौरतलब है कि ईरान हाल में यह ऐलान कर चुका है कि अब उसके विदेशी मुद्रा भंडार में डॉलर की जगह यूरो होंगे। डॉलर का वर्चस्व खत्म करने के लिए विभिन्न देशों के बीच हो रही गुप्त बैठकों से अमेरिका अनजान नहीं है, लेकिन उनमें क्या कुछ चल रहा है इस बारे में उसे पूरी जानकारी नहीं है। जबकि इस योजना में जापान जैसा उसका विश्वस्त सहयोगी शामिल है। यह तो निश्चित है कि अमेरिका इस कोशिश के खिलाफ जमकर लड़ेगा, लेकिन चीन इससे ज्यादा चिंतित नहीं है। उसका मानना है कि जिस तरह यूरो सृजन के दौरान अमेरिका ने ब्रिटेन को अलग रहने के लिए राजी कर लिया था उसी तरह का कोई कदम इस बार कारगर साबित नहीं होगा, क्योंकि वार्ता के स्तर पर वे आगे जा चुके हैं।

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