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सोमवार, 26 अक्टूबर 2020

फर्जी फर्मों का मक्कडज़ाल एफआईआर में देरी के लिए कौन जिम्मेवार?

 डबवाली न्यूज़ डेस्क 
फर्जी फर्में बनाकर सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का चूना लगाने वाले समाज के कंटकों के खिलाफ पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज करने में हुई देरी के लिए किसे जिम्मेवार समझा जाए, यह बड़ा सवाल है? जिला पुलिस की ओर से पिछले तीन दिनों में डेढ़ दर्जन फर्मों के खिलाफ धोखाधड़ी व गबन का मामला दर्ज किया है। आबकारी एवं कराधान विभाग की ओर से इन फर्मों के खिलाफ मामले दर्ज करवाए गए है और सिरसा शहर, सिविल लाइन थाना, ओढां और डबवाली थानों में यह मामले दर्ज किए गए है। अचरज की बात तो यह है कि पुलिस की ओर से आबकारी एवं कराधान विभाग के उन पत्रों के हवाले से मामले दर्ज किए गए है, जोकि लगभग 11 माह पूर्व यानि नवंबर-2019 में दिए गए। पिछले 11 माह से विभाग के इन शिकायत पत्रों को आखिर किसने दबा रखा था? किसके आदेश पर पुलिस महकमा हाथ पर हाथ धरे बैठा था? पुलिस विभाग को आखिर किसके इशारे का इंतजार था? दरअसल, कराधान आयुक्त हरियाणा द्वारा नवंबर-2019 में उप आबकारी एवं कराधान आयुक्त सिरसा को अनेक फर्मों के नामों की सूची देकर उनके खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज करवाने के आदेश दिए थे। कराधान विभाग की ओर से इन आदेशों का हवाला देते हुए पुलिस विभाग को 12 दिसंबर 2019 को ही मामला दर्ज करने के लिए पत्र भेजा। कराधान विभाग द्वारा स्वयं को पाक साफ साबित करते हुए गेंद पुलिस विभाग के पाले में डाल दी। अब जिला पुलिस द्वारा अक्टूबर-2020 में दिसंबर-2019 में दिए गए पत्रों का हवाला देते हुए आपराधिक मामला दर्ज किया गया है। ऐसे में पुलिस विभाग पर सवालिया निशान लगते है कि आखिर जिला पुलिस किसके दबाव में काम कर रही थी? उसने एक सरकारी महकमे द्वारा जारी शिकायत पर ही संज्ञान लेने में 10-11 महीने का समय लगा दिया, आखिर क्यों? एफआईआर दर्ज करने में किसका स्वार्थ था? एफआईआर देरी से दर्ज होने से किसे लाभ होना था? वो कौन था जो पुलिस के हाथ रोके हुए था? सवाल अनेक है, जिनका पुलिस महकमे को जवाब देना होगा। अब यदि गृहमंत्री अनिल विज ने संज्ञान न लिया होता तो करोड़ों की चपत लगाने वाली फर्मों के खिलाफ एफआईआर ही दर्ज नहीं होती?

सबूत मिटाने का मिला मौका

पुलिस द्वारा यदि आबकारी एवं कराधान विभाग की शिकायत पर त्वरित कार्रवाई की होती तो फर्जी फर्मों का खेल खेलने वालों को बच निकलने का मौका नहीं मिलता। इसके साथ ही पिछले 10-11 माह में उन्होंने जो नई-नई फर्जी फर्में बनाकर चूना लगाने का कार्य किया है, वह न हो पाता। अब 10-11 माह की अवधि में तो फर्जी फर्मों के कारोबारियों ने सबूत मिटाने का काम कर डाला होगा। ऐसे में एफआईआर में देरी फर्जी फर्म संचालकों के हित में रहीं। 

नवनियुक्त पुलिस अधीक्षक से बड़ी अपेक्षा

कराधान विभाग की ओर से जिला पुलिस के पास पिछले वर्ष नवंबर-दिसंबर में दर्जनों फर्मों के खिलाफ मामला दर्ज करने के लिए शिकायत पहुंचीं लेकिन पुलिस ने इन शिकायतों को ठंडे बस्ते में डाल दिया। नवनियुक्त पुलिस अधीक्षक भूपेंद्र सिंह के संज्ञान में जैसे ही मामला आया, उनकी ओर से बिना देरी के लिए फर्जीबाड़ा करने वालों के खिलाफ मामला दर्ज करवाने के निर्देश दिए गए। हकीकत तो यह है कि फर्जी फर्मों का कारोबार करने वालों के हाथ बड़े लंबे है, इसलिए वे कोई भी कार्रवाई को ठंडे बस्ते में डलवा देते है। मगर, पुलिस अधीक्षक भूपेंद्र सिंह द्वारा जिस प्रकार का स्टेंड लिया गया है, उसकी वजह से उनसे अब अपेक्षाएं भी बढ़ गई है। यदि दर्ज किए गए मामलों को अंजाम तक पहुंचाया जाएगा, तभी समाज को ऐसे कंटकों से मुक्ति मिलेगी, जोकि जनता के खून-पसीने के पैसे को चपत लगा रहे है।

सिरसा है फर्जी फर्मों की राजधानी

जिस प्रकार से सिरसा को एक समय मादक पदार्थों की तस्करी की वजह से शुष्क बंदरगाह कहा जाता था, उसी प्रकार फर्जी फर्मों के मामले में सिरसा को इसकी राजधानी कहा जाता है। चूंकि फर्जी फर्मों के सरगनाओं का ठिकाना सिरसा ही है। पूरे देश में फर्जी फर्मों का काला कारोबार सिरसा से ही संचालित किया जाता है। हरियाणा ही नहीं बल्कि कई प्रदेशों की पुलिस इनके खिलाफ मामले भी दर्ज कर चुकी है, लेकिन फर्जी फर्मों के काले कारोबार से जुटाई अकूत संपत्ति के बल पर वे खुले घूम रहे है। 'एमआरपीÓ के नाम से कुख्यात महेश बांसल, पदम बांसल और रमेश कुमार द्वारा ही फर्जी फर्मों का खेल शुरू किया गया। इस काले धंधे से ही उन्होंने अल्प समय में अकूत संपत्ति जुटाई और अपना साम्राज्य खड़ा कर दिया। यदि मामले में अकेले महेश बांसल से ही पूछताछ की जाए तो पूरे मामले का पटाक्षेप हो सकता है। लेकिन पुलिस द्वारा दर्ज मामले में नामजद होने के बावजूद आजतक उसका कुछ नहीं बिगड़ा और उसका कारोबार आज भी बदस्तूर जारी है, वह नामजद होने के बावजूद खुलेआम घूम रहा है।

एसआईटी पर सवालिया निशान

पुलिस महानिरीक्षक हिसार रेंज द्वारा फर्जी फर्मों के मामले में विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया गया। सहायक उपनिरीक्षक प्रह्लाद को इसका इंचार्ज बनाया गया। सिरसा सहित विभिन्न जिलों में टैक्स चोरी के मामलों की जांच इस एसआईटी को सौंपी गई। लेकिन आज यह एसआईटी पर सवालिया निशान लग रहे है। चूंकि एसआईटी इंचार्ज द्वारा आईजी हिसार के नाम से 5 लाख रुपये मांगने का आडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। जिसमें फर्म संचालक से पैसे का तकाजा किया जा रहा है। यह मामला अब पुलिस महानिदेशक के पास पहुंच चुका है। ऐसे में जिस एसआईटी से यह उम्मीद की जा रही थी कि वह फर्जी फर्मों के मक्कडज़ाल को ध्वस्त करेगा, उस पर धन उगाही के ही आरोप लगने लगें। एसआईटी अपने परिणाम को लेकर भी सवालों के घेरे में है, चूंकि जो भी मामले एसआईटी को सौंपे गए, उन पर कोई निर्णायक परिणाम सामने नहीं आया। या तो मामले में आरोपियों को क्लीन चिट दे दी या क्लीन चिट देने की तैयारी कर दी। एएसआई प्रह्लाद की वजह से आईजी हिसार द्वारा गठित एसआईटी इन दिनों सवालों के घेरे में है।

'गब्बर' के तेवर से मची खलबली

प्रदेश के गृहमंत्री अनिल विज अपनी बेबाक शैली और जनहित में उठाए जाने वाले कड़े कदमों की वजह से अलग पहचान रखते है। पूरे प्रदेश की जनता की उनसे ही उम्मीद है। यही वजह है कि पूरे हरियाणा में लोग न्याय के लिए उनकी ओर निहारते है। प्रदेश में फर्जी फर्मों का भंडाफोड़ तो लोकायुक्त हरियाणा द्वारा गठित तत्कालीन आईजी श्रीकांत जाधव की अगुवाई वाली एसआईटी द्वारा किया गया था। करोड़ों रुपये के घोटाले को एक्सपोज किया गया, लेकिन मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई। कराधान विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत से फर्जी फर्में बनीं, जिन्होंने कागजों में कारोबार दर्शाकर टैक्स की चोरी की और सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये का रिफंड भी लिया। वर्षों से टैक्स चोरी के मामले दबे हुए थे, बीते दिनों उन्होंने अपने तेवर कड़े किए तो सिरसा में दो दिनों में 17 एफआईआर दर्ज कर दी गई और फरीदाबाद में भी दर्जनभर से अधिक एफआईआर दर्ज की गई है। पूरे प्रदेश में हड़कंप मचा हुआ है। उम्मीद जगी है कि फर्जी फर्मों के कारोबार पर अब अंकुश लग पाएगा। बेहतर होगा यदि फर्जी फर्मों के मामले आईजी हिसार द्वारा गठित एसआईटी की बजाए संबंधित जिला पुलिस को ही सौंपे जाए। जिला पुलिस द्वारा कार्रवाई करने पर अपेक्षित परिणाम आ सकते है।

अधिकारियों पर मामले दर्ज होना शेष

आबकारी एवं कराधान आयुक्त हरियाणा की नवंबर-2019 में डीईटीसी (टैक्स)सिरसा को अपने ही महकमे के आधा दर्जन से अधिक अधिकारियों के खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज करवाने के आदेश दिए थे। मगर, इन अधिकारियों के खिलाफ आजतक पुलिस द्वारा मामले दर्ज नहीं किए गए। कराधान आयुक्त की ओर से 22 नवंबर 2019 को तत्कालीन ईटीओ डीपी बैनीवाल, ईटीओ अनिल मलिक, ईटीओ अशोक सुखीजा, एईटीओ ओपीएस अहलावत, टीआई हनुमान सैनी, ईटीओ मालाराम के खिलाफ मामला दर्ज करवाने के लिए कहा गया था। सवाल यह है कि कहीं फर्जी फर्मों की भांति पुलिस द्वारा इन अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज करने में देरी की जा रही है? यदि पुलिस के पास इन अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज करवाने बारे आबकारी एवं कराधान विभाग से शिकायत नहीं पहुंची है, तब कराधान विभाग के अधिकारी इसके लिए जवाबदेह होंगे कि उन्होंने 11 माह का लंबा अरसा बीत जाने पर भी कराधान आयुक्त के आदेशों की पालना क्यों नहीं? अब कराधान विभाग के इन अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज होने में अधिक देरी नहीं की जा सकती क्योंकि मामला अब गृहमंत्री के संज्ञान में है।

रविवार, 25 अक्टूबर 2020

बिजली विभाग की शिकायत पहुंची डा. चौटाला के दरबार,बिजली विभाग द्वारा भेजे गए बिल को लेकर पीडि़त ने लगाई गुहार

डबवाली न्यूज़ डेस्क 
सिरसा। विद्युत निगम की सेवाओं से आज भी आम उपभोक्ता परेशान है। निगम की ओर से गलत बिल भेज दिए जाते है लेकिन उन्हें सुधारा नहीं जाता।उपभोक्ता चक्कर-पर-चक्कर लगाता रह जाता है।एक बार ठीक भी कर देंगे तो अगली बार बिल फिर से गलत बनाकर भेज दिया जाता है। गांव केलनियां निवासी गिरधारी लाल पुत्र खियाराम ने बताया कि निगम की ओर से उसे गलत बिल भेजा गया। मई में उसे भेजे गए बिल में पिछली यूनिट शून्य दर्शायी गई और नई 7322 बनाकर भेज दी। उसने बताया कि निगम द्वारा भेजे 8632 रुपये बिल का उसने भुगतान भी कर दिया। सितंबर माह में जो बिल भेजा उसमें पुरानी यूनिट 6950 दर्शाई और नई 7322 ही दर्शाई। यानि खपत 372 यूनिट बनती थी, जबकि निगम ने उससे 912 यूनिट का बिल भरवा लिया। इस बारे में वह अनेक बार चक्कर लगा चुका। लेकिन निगम अधिकारी न तो सुनते है और न ही बिल ही ठीक करते है। परेशान उपभोक्ता ने आज पूर्व सांसद डा. अजय सिंह चौटाला से मुलाकात कर न्याय की गुहार लगाई। डा. चौटाला ने पीडि़त को न्याय दिलवाने का भरोसा दिलवाया।

सरकार, पर उपदेश बहुतेरे! मास्क न पहनने पर काटे जाते है चालान, खुद बिना मास्क के पब्लिक में

डबवाली न्यूज़ डेस्क 
कोरोना से बचाव के लिए जिला प्रशासन की ओर से बार-बार लोगों से मास्क पहनने का आग्रह किया जा रहा है। मास्क न पहनने से संक्रमण फैलने की आशंका बनी रहती है। इसलिए प्रशासन की ओर से कई टीमें बनाकर मास्क न पहनने वालों के चालान काटने की हिदायत दी गई है।
चालान की राशि भी बढ़ाकर 500 रुपये कर दी गई है। नगर परिषद की कई टीमें बाजारों में घुमकर दुकानदारों के चालान कर चुकी है। कई बार चाय, भोजन कर रहें दुकानदारों के चालान काटे जाने से विवाद उपज चुका है। ग्राहक के मास्क न पहनने पर दुकानदार को ही फटकारा जाता है।पब्लिक को तो जोर जबरदस्ती करके मास्क पहनने के लिए मजबूर किया जाता है। लेकिन नगर आयुक्त श्रीमती संगीता तेतरवाल जब शुक्रवार को ट्रेड टॉवर में पार्किंग व्यवस्था का जायजा लेने बिना मास्क पहने ही पहुंची तो लोगों को यह बहुत अखरा। उनके अगल-बगल के कर्मचारियों ने तो मास्क पहना हुआ था, मगर मैडम को भला किसका डर? यदि वह भी मास्क पहनती तो पब्लिक में बेहतरीन संदेश जाता, लेकिन पर उपदेश बहुतेरे वाली कहावत यहां चरितार्थ हुई। उधर, जिला उपायुक्त रमेश चंद्र बिढ़ान शुक्रवार को जब गांव में दौरा करने पहुंचें तो उन्होंने इस नियम की पालना की। पब्लिक में जाने पर उनके द्वारा मास्क का इस्तेमाल किया गया, जिसने यह संदेश दिया कि कोरोना से जंग में मास्क की अनिवार्यता है। हरेक को इसका इस्तेमाल करना चाहिए।

अतिक्रमण हटाओ अभियान पर सवालिया निशान? अतिक्रमण से अटा पूरा शहर, केवल चंद बाजारों में ही चलता है अभियान

डबवाली न्यूज़ डेस्क
नगर परिषद की कार्यशैली में सुधार की अपेक्षा की जा रही थी। उम्मीद थी कि सिरसा शहर को विभिन्न समस्याओं से छुटकारा मिलेगा। लेकिन नगर परिषद की कार्यशैली की वजह से समस्याएं जस की तस बनी हुई है। पूरा शहर अतिक्रमण से अटा हुआ है, लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है लेकिन नगर परिषद के अभियान केवल चंद बाजारों तक ही सिमटे हुए है। इसी वजह से नगर परिषद की कार्रवाई कटघरे में है? आखिर क्यों नगर परिषद के अधिकारियों को अन्य स्थानों पर हुए अतिक्रमण दिखाई नहीं देते? दरअसल, नगर परिषद द्वारा पुरानी परिपाटी के अनुसार हिसारिया बाजार, रोड़ी बाजार, सदर बाजार, चांदनी चौक, रानियां बाजार में ही आए दिन अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया जाता है। घूम फिरकर इन्हीं बाजारों में सामान जब्ती करना, नोटिस थमाना, वीडियोग्राफी करवाई जाती है। जबकि शहरभर में अतिक्रमण दिखाई नहीं देता? परिषद अधिकारियों का यह दोहरा रवैया अनेक सवाल खड़े करता है? आखिर यह नौटंकी कब तक चलेगी? माना भीड़भाड़ वाले बाजारों में अतिक्रमण हटाओ अभियान की नितांत आवश्यकता है और यह प्राथमिकता में शुमार है। तब सवाल यह है कि आखिर गली बाम्बे वाली, गली पीएनबी वाली, मोहता मार्केट में यह अभियान क्यों नहीं चलाया जाता? गली बाम्बे वाली में तो दोनों ओर 10-10 फुट तक अतिक्रमण बना हुआ है? मोहता मार्केट में तो दुकानदारों ने सारा सामान ही बाहर रखा हुआ है, पैदल चलने के लिए भी जगह नहीं है? सवाल अनेक है, जिनका नगर परिषद को जवाब देना होगा?

अतिक्रमण हटाने में सहयोग करें व्यापारी

अतिक्रमण की वजह से किसी भी शहर की सूरत बिगड़ती है और उसकी छवि भी खराब होती है। दूसरे शहर से आने वाले लोग सिरसा की बदहाली की छवि लेकर जाते है। यदि बाजार अतिक्रमण मुक्त होंगे तो दूसरे भी इससे प्रेरित होंगे। ऐसे में व्यापारियों को स्वयं पहल करनी चाहिए। उन्हें अपनी दुकानों के भीतर ही सामान रखना चाहिए। ग्राहक को जरूरत है तो वह दुकान के भीतर आकर सामान खरीदेगा। एक दूसरे की होड़ में सामान बाहर रखकर अतिक्रमण करना सरासर अनुचित है। यही वजह है कि प्रशासन की ओर से जब-तब सामान जब्त कर लिया जाता है, नोटिस थमाए जाते है। व्यापारियों को यह समझना होगा कि अतिक्रमण मुक्त शहर में उनकी भागीदारी आवश्यक है।

क्यों नहीं दिखाई देता डबवाली रोड का अतिक्रमण?


शहर के बीचोंबीच से निकलने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-9 ही अतिक्रमण की जद में है। रात्रि के समय हवाई पट्टी की भांति खुला-खुला नजर आने वाला यह मार्ग दिन में तंग गली में परिवर्तित हो जाता है। सड़क के दोनों ओर 10-10 फुट से अधिक कब्जा हो जाता है। सांगवान चौक से लेकर अरोड़वंश चौक तक सड़क की बदहाली नगर परिषद के अधिकारियों को दिखाई नहीं देती? इस मार्ग के दोनों ओर अस्पतालों के बाहर जनरेटर व अन्य सामान रखकर स्थायी कब्जा किया गया है। कुछेक ने तो सड़क की जगह पर रेलिंग लगाई हुई है। अनेक अस्पतालों के बाहर तो स्टॉफ की पार्किंग बनाई हुई। जबकि एम्बुलेंस बीच सड़क में ही रूकती है। इसी मार्ग पर कई बैंक है, जिनके बाहर वाहनों का मेला लगा रहता है। यहां पर हर समय जाम की स्थिति रहती है। डबवाली रोड पर ही अनेक शोरूम है, जिनकी ओर से बकायदा टैंट लगाकर अतिक्रमण किया हुआ है। अनेक ने तो शोरूम से अधिक वाहन सड़क पर खड़े किए है। होटल वालों ने सड़क की जगह पर जरनेटर रखे हुए है। सवाल यह है कि डबवाली रोड पर कभी अतिक्रमण हटाओ अभियान इसलिए नहीं चलाया जाता कि यहां पर सभी प्रभावशाली लोग रहते है? क्यों सड़क पर अतिक्रमण करने वालों का सामान जब्त नहीं किया जाता? क्या डबवाली रोड शहर में नहीं आती? जबकि इस मार्ग पर बसों व अन्य वाहनों को रेंगने के लिए मजबूर होना पड़ता है।

अभियान को चिढ़ा रहा जनता भवन रोड

अतिक्रमण हटाओ अभियान को जनता भवन रोड चिढ़ा रही है। शहीद जगदेव सिंह चौक से (रोड़ी गेट) से लेकर अरोड़वंश चौक तक के इस मार्ग पर सड़क के दोनों ओर अतिक्रमण ही अतिक्रमण दिखाई देता है। चौक से शुरू होकर सड़क के आखिर तक दुकानदारों द्वारा किए गए अवैध कब्जे से नजर नहीं हटती। मगर, नगर परिषद के अधिकारियों को शायद ही यह दिखाई देते है? यहां दुकान से अधिक सामान सड़क पर रखा गया है। इसी मार्ग पर दुकानदारों के स्थायी कब्जे भी देखे जा सकते है। सड़क पर रेता-बजरी के टीले देखे जा सकते है, कृषि उपकरणों से किया गया अतिक्रमण देखा जा सकता है। लोहा, एंगल-पत्ती, सरिया सड़क पर बिखरा देखा जा सकता है। लेकिन इसके लिए नगर परिषद के अधिकारियों को आंखें खोलकर रखनी होगी?

अछूता नहीं बरनाला रोड

शहर के वीआइपी एरिया में शुमार बरनाला रोड भी अतिक्रमण से अछूता नहीं है। बस स्टेंड से लेकर बाबा भूमण शाह चौक तक के एरिया में सड़क के दोनों ओर दुकानदारों ने सामान रखकर अतिक्रमण किया हुआ है। इस मार्ग पर सायं के समय पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। दुकानदारों द्वारा कई-कई फुट तक सामान रखा जाता है, फिर ग्राहकों के वाहन खड़े हो जाते है। ऐसे में यह मार्ग तंग गली बन जाता है। बाल भवन की दुकानें ही अतिक्रमण को हवा दे रही है।

सुरखाब चौक से भगवान परशुराम चौक की भी यहीं स्थिति

शहर के बीचोंबीच स्थित सुरखाब चौक से भगवान परशुराम चौक को जाने वाला मार्ग बेहद चौड़ा है। नोहर, भादरा, जमाल, बेगू व डेरा की ओर जाने वाला यह मार्ग हर समय जाम से जूझता है। चूंकि इस मार्ग के दोनों ओर कई दुकानदारों ने 20-20 फुट तक कब्जे जमाए हुए है। लोहे की पाईपें इत्यादि सड़क पर रखे गए है तो किसी ने सड़क की जगह पर ही जनरेटर रखा हुआ है। कुछेक द्वारा तो सड़क की जगह को बपौती बनाया हुआ है और वहां पर बेरिकेड्स लगाए हुए है। मगर, नगर परिषद को कुछ दिखाई नहीं देता?

फर्जी फर्मों के खिलाफ कार्रवाई की शुरूआत, बाबा इंडस्ट्रिज व एसपी इंटरप्राइजिज के संचालकों पर मामला दर्ज

डबवाली न्यूज़ डेस्क
प्रदेश के गृह मंत्री अनिल विज द्वारा दिखाए गए कड़े तेवर का असर दिखाई देने लगा है। आबकारी एवं कराधान विभाग सिरसा में भी हरकत दिखाई दी है।वीरवार को विभागीय अधिकारियों की ओर से दो फर्मों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज करवाया गया है। हालांकि विभागीय अधिकारी पिछले एक साल से दो दर्जन से अधिक फर्मों के खिलाफ मामला दर्ज करवाने के आदेश पर कुंडली मारे हुए है। आबकारी एवं कराधान आयुक्त हरियाणा की ओर से नवंबर-2019 में कैथल व सिरसा की 46 फर्मों के खिलाफ मामला दर्ज करवाने के आदेश दिए गए थे। लेकिन इन फर्मों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। आबकारी एवं कराधान विभाग के ईटीओ विजेंद्र सिंह की ओर से शहर सिरसा थाना में बाबा इंडस्ट्रिज के खिलाफ मामला दर्ज करवाया गया है। शिकायत में बताया गया है कि उक्त फर्म का पता सुरखाब चौक पर इंडियन बैंक के निकट दर्शाया गया है। उक्त फर्म ने जीएसटी नंबर 06डीआईएपीके366आईक्यूआईजेडवी हासिल किया गया था। फर्म संचालक सिंकदरा कुमार पुत्र जगन्नाथ प्रसाद निवासी मीनापुर ने वर्ष 2018 में उक्त फर्म बनाई। फर्जी दस्तावेज से बनाई गई इस फर्म के माध्यम से टैक्स चोरी का खेल खेला गया। ईटीओ विजेंद्र सिंह की शिकायत पर शहर सिरसा पुलिस ने बाबा इंडस्ट्रिज के संचालक सिंकदरा के खिलाफ भादंसं की धारा 406, 419, 420, 465, 471 के तहत मामला दर्ज किया है। मामले की जांच का जिम्मा सहायक उपनिरीक्षक जगमीत सिंह को सौंपा गया है।

सिविल लाइन थाना में भी मामला दर्ज

सुरखाब चौक की भांति एक अन्य फर्म मै. एसपी इंटरप्राइजिज द्वारा हुडा चौक पर भगवती स्वीट्स के निकट अपना पता-ठिकाना बताया गया है। फर्म के संचालक सतपाल पुत्र शिवलाल निवासी सिकंदरपुर द्वारा टीन नंबर 061सीसीपीएस9267पीआईजेडएच हासिल किया गया। आबकारी एवं कराधान विभाग की ओर से सिविल लाइन थाना में दर्ज करवाई गई शिकायत में बताया गया कि फर्जी दस्तावेजों से उक्त फर्म बनाई गई है ताकि जीएसटी की चोरी की जा सकें। पुलिस ने शिकायत के आधार पर भादंसं की धारा 406, 419, 420, 465, 471 व सीजीएसटी एक्ट 2017 की धारा 132 के तहत मामला दर्ज किया है और जांच का जिम्मा सब इंस्पेक्टर राजेश कुमार को सौंपा है।

कब तक बचेंगे विभागीय अधिकारी?
आबकारी एवं कराधान विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों को आखिर कब तक बचाया जा सकेगा। कराधान आयुक्त हरियाणा की ओर से नवंबर-2019 में तत्कालीन ईटीओ डीपी बैनीवाल, ईटीओ अनिल मलिक, ईटीओ अशोक सुखीजा, एईटीओ ओपीएस अहलावत, टीआई हनुमान सैनी, ईटीओ मालाराम के खिलाफ मामला दर्ज करवाने के आदेश दिए थे। डीईटीसी सिरसा को पुलिस में मामले दर्ज करवाने थे लेकिन 11 माह से अधिक का समय बीत जाने पर भी विभाग के इन अधिकारियों के खिलाफ मामले दर्ज नहीं करवाए गए। सवाल यह है कि आखिर इन अधिकारियों को कौन बचा रहा है, और क्यों बचा रहा है, उसका क्या हित है और कब तक बचा पाएगा?

बुधवार, 21 अक्टूबर 2020

झाग-सा बैठा सिरसा में सफाई अभियान ,पखवाड़ा भर चलीं औपचारिकता, फिर वहीं हालात, हर ओर कचरा

डबवाली न्यूज़ डेस्क 
सिरसा। नगर परिषद द्वारा चलाया गया सफाई अभियान एक पखवाड़े में ही सिमट कर रह गया। वैसे तो अभियान की शुरूआत में ही यह हॉफने लगा था। डेरा प्रेमियों व अन्य सामाजिक संगठनों की बदौलत अभियान का श्रीगणेश हो पाया। जिसकी वजह से पखवाड़ाभर औपचारिकता की गई और अब फिर से वही हालात बन चुके है। हर ओर कचरा-ही-कचरा नजर आने लगा है। हैरतअंगेज बात तो यह है कि पखवाड़ाभर चले अभियान में शहर का अधिकांश एरिया इससे अनभिज्ञ ही रहा। जिन क्षेत्रों में महीना, साल, 10 साल से सफाई नहीं हुई, वहां अभियान के दौरान भी स्वच्छता अभियान के बोल सुनाई नहीं पड़ें। कचरे में रहकर जीवनयापन करने वालों की स्थिति आज भी जस की तस बनी हुई है। दरअसल, हर वर्ष स्वच्छता अभियान चलाने की नौटंकी की जाती है। व्यवस्था बदलने की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जाता। हरेक केवल औपचारिकता ही पूरी करने को अपनी ड्यूटी समझता है, इसलिए हालात में कोई बदलाव नहीं आता। न तो नगर परिषद में सफाई कर्मियों की संख्या में बढ़ौतरी की जाती है और न ही सफाई कर्मियों से ली जाने वाली बेगार ही कम होती है। सफाई कर्मियों को वीआईपी एरिया में ही अधिक तैनात किया जाता है। शेष शहर की प्रशासनिक स्तर पर ही अनदेखी होती है। शहर की आधी से अधिक आबादी ने तो महीना-दो महीना नहीं बल्कि कई-कई सालों से सफाई कर्मियों को ही नहीं देखा होगा? सफाई कर्मचारियों को इतना बड़ा एरिया दे दिया जाता है कि अकेले व्यक्ति द्वारा पूरे वार्ड में सफाई करना भी संभव नहीं है। ऐसे में कुछ एरिया में ही सफाई की औपचारिकता पूरी की जाती है, शेष एरिया इससे वंचित ही रहता है। यदि नियमित रूप से सफाई हो तो स्वच्छता अभियान की आवश्यकता ही न पड़े।
स्लम बस्तियों की नहीं बदली तस्वीर
भले ही कागजों में कितने ही सफाई अभियान चला लों लेकिन शहर की स्लम बस्तियों की हालात में कभी बदलाव नहीं आया। जेजे कालोनी, चत्तरगढ़पट्टी, सिंगीकाट मोहल्ला सहित अन्य दलित बस्तियों में सफाई नाम की कोई चीज दिखाई नहीं पड़ती। इन कालोनियों में सफाई के नाम पर महज खानापूर्ति की जाती है। इन कालोनियों की बदत्तर हालात ही नगर परिषद की कारगुजारियों को बयां करती है। 
आज भी खुले में फैंका जाता है कचरा
नगर परिषद की ओर से शहर के सभी 31 वार्डों में न तो कचरे के लिए डंपिग स्थान बनाए गए है और न ही घर-घर से कचरा एकत्रित करने की व्यवस्था। यानि प्रशासन के स्तर पर ही लोगों को खुले में कूड़ा फैंकने के लिए मजबूर किया जाता है। अचरज की बात यह है कि सरकार की ओर से कचरा जलाने पर रोक लगाई गई है और कचरा जलाने पर जुर्माने का भी प्रावधान है। जबकि सफाई कर्मचारी न तो कचरे को कहीं पर डंप करते है और न ही जलाते है। तब कचरा कहां जाता है? घर-घर से कचरा एकत्रित करने वाली गाडिय़ां भी सभी गलियों में नहीं जाती। तब इन गलियों के लोग घर का कचरा कहां फैंकते है? नगर परिषद की ओर से गीला और सूखा कचरा अलग-अलग करवाने की बात कहीं जाती है, जबकि व्यवहार में कचरे के निस्तारण के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है।
बाईपास पर मलबे के ढेर
नगर परिषद द्वारा भले ही मलबा निस्तारण के लिए हिदायतें जारी की गई है, लेकिन मलबे को शहर से दूर फैंकने की बजाए आसपास के एरिया में ही डाल दिया जाता है। नगर परिषद को मिनी बाईपास से जोडऩे वाले मार्ग पर ही मलबे के ढेर लगे है। सीडीएलयू के सामने की दिशा में और सिविल अस्पताल को जाने वाले मार्ग के किनारों पर लोगों ने मलबा डालकर कचरा-कचरा कर रखा है।
पहले सफाई, फिर कचरा
लोगों की आदत भी पुरानी ही बनी हुई है। कचरे में ही रहना। बाजारों में दिनभर गंदगी के बने रहने की वजह भी यही है। सफाई कर्मियों की ओर से सुबह-सवेरे ही सफाई कर दी जाती है। दुकानदार 8-9 बजे के बाद आते है। एक-एक करके सफाई करते है और दुकान का कचरा सड़क पर फैंकते है। यही कचरा हवा के साथ कभी इधर और कभी उधर फैलता। इस कचरे की सफाई अगले दिन सुबह होती है और कुछ देर बाद फिर से कचरा फैला दिया जाता है।

सूचना आयोग ने किया ईओ को तलब , 8 दिसंबर को होगी सुनवाई, आयुक्त जय सिंह बिश्नोई करेंगे सुनवाई

डबवाली न्यूज़ डेस्क 
आरटीआई के एक मामले में निर्धारित समयावधि में सूचना प्रदान न करने के मामले में राज्य सूचना आयोग हरियाणा ने नगर परिषद के ईओ (कार्यकारी अधिकारी) को आयोग में तलब किया है। मामले की सुनवाई के लिए 8 दिसंबर का दिन मुकर्रर किया गया है।राज्य सूचना आयुक्त जय सिंह बिश्नोई मामले की सुनवाई करेंगे। आयोग ने यह नोटिस आरटीआई एक्टिविस्ट पवन पारिक एडवोकेट की शिकायत पर जारी किया है।पवन पारिक ने नगर परिषद से 25 फरवरी 2020 को कुछ जानकारी मांगी थी। आरटीआई में शहर में लगाई गई हाई मास्ट लाईटों के बारे में जानकारी मांगी थी। पूछा गया था कि वर्ष 2016 से 2020 की अवधि के दौरान स्ट्रीट लाईट व हाई मास्ट लाईटों की रिपेयर का ठेका किसे दिया गया था। यह भी पूछा गया है कि स्ट्रीट लाईट के लिए अर्थ का सिस्टम की स्थिति कैसी है? यह भी पूछा गया था कि शहर में कहां-कहां हाई मास्ट लाईटें लगाई गई है और इनमें करंट के प्रवाह से हादसों को रोकने के लिए क्या उपाय किए गए है। आरटीआई में यह भी जानकारी मांगी गई है कि शहर में किन स्ट्रीट लाईट में अर्थिंग की व्यवस्था नहीं की गई है। करंट से बचाव के लिए अर्थ की व्यवस्था की जिम्मेवारी किसकी है। नगर परिषद के राज्य जनसूचना अधिकारी-सह-कार्यकारी अधिकारी की ओर से इस बारे कोई सूचना प्रदान नहीं की गई, जिस पर पवन पारिक ने सूचना आयोग में इस बारे शिकायत की। आयोग ने शिकायत पर संज्ञान लेते हुए नोटिस जारी किया है। नगर परिषद को एक दिसंबर तक आरटीआई का जवाब देने के निर्देश दिए गए है।

जमीनी विवाद में 118 लोगों को नोटिस, 20 फरवरी 2021 को होगी सुनवाई,कोर्ट नोटिस से मचा हड़कंप!

सिरसा। स्थानीय अदालत द्वारा जमीनी विवाद में रानियां रोड क्षेत्र के 118 लोगों को नोटिस जारी किए गए है। कोर्ट नोटिस से परिवादियों में हड़कंप मचा हुआ है।
कोर्ट की ओर से मामले में परिवादियों को 20 फरवरी 2021 को अपना पक्ष रखने के लिए कहा गया है। मामले से अनभिज्ञ लोगों को कुछ सुझाई नहीं पड़ रहा। मिली जानकारी के अनुसार एडिशनल सिविल जज की अदालत की ओर से गुरतेज सिंह पुत्र दयाल सिंह निवासी सुखचैन (सिरसा) की याचिका पर 118 लोगों को नोटिस जारी किया गया है। याचिकाकत्र्ता की ओर से कहा गया है कि उसने 17 मई 1989 में शमशाबादपट्टी का 82 कनाल रकबा (खेवट नंबर 380 खतौनी नंबर 490 जमाबंदी वर्ष 1986-87)चरणदास चेला पूर्णचंद निवासी शमशाबाद से फुल एंड फाइनल पेमेंट करके इकरारनामा किया था और इसकी एवज में तीन लाख 65 हजार रुपये की अदायगी भी की थी। याचिकाकत्र्ता की ओर से कहा गया कि एक सितंबर 1989 को इस प्रोपर्टी को आगे बेच दिया गया। जबकि इसे बेचने का कोई अधिकार नहीं था। याचिकाकत्र्ता की ओर से मामले में देव सिंह पुत्र मीत सिंह निवासी थमनगढ़ (बठिंडा), रामकुमार पुत्र हंसराज निवासी खैरेकां, निहाल सिंह पुत्र मनफूल निवासी मोहम्मदपुरिया, कलावती पत्नी रामकुमार निवासी खैरेकां, कृष्ण कुमार पुत्र बृजलाल निवासी मोहल्ला जेल ग्राऊंड, खैरतीलाल भाटिया पुत्र दर्शन दास निवासी द्वारकापुरी, महावीर प्रसाद पुत्र उदमीराम निवसी खारी सुरेरां,धर्मपाल पुत्र लक्ष्मीचंद निवासी खैरेकां, शोभा वर्मा पुत्र कृष्ण लाल निवासी मोहल्ला जेल ग्राऊंड, मनोज पुत्र रामकुमार निवासी शमशाबादपट्टी सहित 118 लोगों को प्रतिवादी बनाया है।
एडिशनल सिविल जज की अदालत ने मामले में सभी 118 लोगों को नोटिस भेजकर 20 फरवरी 2021 को अपना पक्ष अदालत में रखने के निर्देश दिए है। उधर, रानियां रोड एरिया में इस एरिया में रिहायश करने वाले परिवार कोर्ट से मिलें नोटिस से चौंक गए है। उन्हें समझ नहीं आ रहा कि आखिर कोर्ट ने उन्हें नोटिस क्यों दिए है? उनका क्या विवाद है? चूंकि उन्होंने प्रोपर्टी नियमानुसार खरीदी है और उसकी बकायदा रजिस्ट्री भी करवाई है। ऐसे में लगभग तीन दशक पूर्व के जमीनी विवाद में भेजे गए नोटिस से हड़कंप मचा हुआ है।

महेश्वरी ट्रस्ट व श्री श्याम ट्रस्ट को भी नोटिस

कोर्ट में विचाराधीन वाद में रानियां रोड स्थित श्री श्याम परिवार ट्रस्ट के साथ-साथ महेश्वरी चेरिटी ट्रस्ट को भी नोटिस दिया गया है। कोर्ट की ओर से जिन लोगों को नोटिस जारी किया गया है उनमें स्वामी सत्यानंद सेवा सदन भी शुमार है। ऐसे में कोर्ट द्वारा दिए जाने वाले फैसले से ही तय होगा कि क्या ट्रस्ट द्वारा विवादित क्षेत्र में निर्माण किया हुआ है या नहीं? इसके साथ ही जिनके नाम नोटिस में शुमार है, उनमें कई नामी-गिरामी लोग भी शामिल है।

एचईएसएल के बढ़ते कदमों से उपभोक्ताओं को मिली राहत

डबवाली न्यूज़ डेस्क 
हरियाणा एक्ससर्विसमैन लीग द्वारा किए जा रहे प्रयासों से बिजली उपभोक्ताओं की गलत बिल संबंधी शिकायतों में भारी कमी आई है।एचईएसएल द्वारा ऑन स्पॅाट बिल देने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। जिसकी वजह से उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है। चूंकि ऑन स्पॅाट बिलिंग के कारण गलत रीडिंग की शिकायतों का समाधान हो गया है। एचईएसएल द्वारा पहले सिरसा में सिटी डिविजन और इंडस्ट्रियल एरिया में ऑन स्पॅाट बिलिंग का कार्य शुरू किया गया था। इसके लिए मीटर रीडरों को विशेष रूप से प्रशिक्षित किया गया। उन्हें आधुनिक उपकरण दिए गए है, जिन्हें बिजली के मीटर पर लगाना पड़ता है। मीटर से रीडिंग इस मशीन में चलीं जाती है और मौके पर ही बिजली का बिल निकल आता है। एचईएसएल द्वारा सिरसा के बाद ऐलनाबाद और डबवाली में ऑन स्पॅाट बिलिंग का कार्य शुरू किया गया और इन दिनों रानियां में भी यह सेवा शुरू कर दी गई है। अब कालांवाली में भी ऑन स्पॅाट बिलिंग की सेवा प्रदान करने की तैयारी की जा रही है। 

उपभोक्ताओं को मिलेगी राहत : फौजा सिंह

एचईएसएल के जिला प्रधान सेवानिवृत्त सूबेदार फौजा सिंह ने बताया कि ऑन स्पॅाट बिलिंग से उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है। इस सेवा के शुरू होने से बिल में गड़बड़ी की आशंकाएं निर्मूल हो जाती है। रीडिंग में छेड़छाड़ की गुंजाइश भी खत्म हो जाती है। उन्होंने बताया कि रानियां में भी ऑन स्पॅाट बिलिंग सेवा शुरू की जा चुकी है, जबकि कालांवाली में यह सेवा शुरू करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। शीघ्र ही कालांवाली के उपभोक्ताओं को मौके पर ही बिल प्रदान किया जाएगा।

सोमवार, 19 अक्टूबर 2020



कब जागेगा पब्लिक हेल्थ विभाग?

= एक साल से नहरी पानी को तरस रहे गली पारखांवाली के निवासी

सिरसा। सिरसा शहर को आरओ जैसे नहरी पानी की आपूर्ति करने के लिए गांव पंजुआना में करोड़ों रुपये की लागत से वाटर वक्र्स का निर्माण किया गया। शहरभर में नई पाईप लाइन बिछा दी गई। गलियों में भी पाईप लाइन बिछाकर कनेक्शन देने का काम किया। लेकिन विभागीय अधिकारियों द्वारा इस कार्य में भी भेदभाव किया जा रहा है। अधिकारियों की ओर से प्रभावशाली लोगों के एरिया अथवा गलियों में तो पाईप बिछा दी गई लेकिन शहर के बड़े एरिया में अभी तक नहरी पानी की आपूर्ति सुनिश्चित नही की गई है।

नौहरिया बाजार और भादरा बाजार के बीच गली पारखां वाली के निवासी आज भी नहरी पानी को तरस रहे है। जबकि इस एरिया में विभाग द्वारा नई पाईप लाइन बिछाकर नहरी पानी की आपूर्ति की जा रही है। इस एरिया में अब तक जिस पानी की आपूर्ति की जा रही है वह ट्यूबवेल का हार्ड पानी है। जिसकी वजह से जलजनित रोग की आशंका बनी हुई है। गली पारखां वाली के निवासियों को पंजुआना प्लांट से बड़ी उम्मीद जगी थी कि जल्द ही उन्हें भी नहरी पानी नसीब होगा। लेकिन पब्लिक हेल्थ विभाग के अधिकारी इस कार्य में भेदभाव पूर्ण व्यवहार कर रहे है।

गली निवासी प्रमुख समाजसेवी भीम झूंथरा ने बताया कि उन्होंने एक वर्ष पूर्व 7 अक्टूबर 2019 को उन्होंने पब्लिक हेल्थ विभाग के अधिकारियों से आग्रह किया था कि गली पारखां वाली में भी नहरी पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करें। विभागीय अधिकारियों द्वारा केवल आश्वासन दिया गया। इस दौरान वे 23 दिसंबर 2019 को और 8 फरवरी 2020 को भी पत्र लिख चुके है। लेकिन विभागीय अधिकारी आमजन की सुनने को तैयार नहीं है। उन्हें किसी प्रभावशाली व्यक्ति के फोन या सुविधा शुल्क का इंतजार तो नहीं! कुल मिलाकर गली पारखां वाली के निवासी आज भी नहरी पानी को तरस रहे है।

डाक कर्मियों की लापरवाही, डाक का बैग गुम

 डबवाली न्यूज़ डेस्क 

डाक कर्मियों की छोटी-सी लापरवाही कितने लोगों को प्रभावित कर सकती है, इसका अंदाजा शायद डाक कर्मियों को भी न हों। चूंकि भेजी जाने वाली डाक में न जाने किसका क्या संदेश है?
खासकर छात्रों के लिए तो डाक के गुम जाने से कैरियर ही दांव पर लग जाता है। ऐसा ही एक मामला सामने आया है।
गांव बनवाला निवासी प्रदीप शर्मा व विनोद कुमार ने बताया कि उन्होंने 6 अक्टूबर को ओढां डाकघर से दो पत्र रजिस्ट्री की थी। जिन्हें एक या दो दिन में गतंव्य पर पहुंच जाना चाहिए था। उन्होंने अपने रजिस्ट्री पत्रों को इंटरनेट पर ट्रेक भी किया, जिसमें डाक ओढां ही दर्शाई जा रही थी। चार दिन बीतने पर उन्होंने डाक विभाग में इस बारे पता किया तो कहा गया कि डाक पहुंच गई है। सर्वर डाऊन होने की वजह से ट्रेक गलत दर्शा रहा है। इसलिए वे बेफ्रिक रहें। प्रदीप शर्मा ने बताया कि जब 10 दिन बाद 15 अक्टूबर को ओढां डाकघर में इस बारे पूछा तो तब भी बहानेबाजी की गई। आखिरकार बताया गया कि ओढां से डाक सिरसा भेज दी गई थी। सिरसा में डाक का बैग कहीं गुम हो गया है, इसलिए डाक अपने गतंव्य पर नहीं पहुंचीं। उन्होंने बताया कि उन्होंने यूनिवर्सिटी की आखिरी तारीख से पहले फार्म पहुंचाने के लिए ही रजिस्ट्री की थी लेकिन डाक विभाग के कर्मियों ने उन्हें अंधेरे में रखा। जिसके कारण फार्म भरने की आखिरी तारीख बीत गई। प्रदीप शर्मा की भांति अन्य के साथ भी क्या हुआ होगा, इसका अंदाजा स्वयं डाक विभाग के कर्मचारियों को भी नहीं होगा। हालांकि डाक विभाग द्वारा इस बारे में रजिस्ट्री करवाने वालों को सूचित नहीं किया गया है, जिसके कारण वे लोग आज भी अंधेरे में है।

गबन पर पर्दा डालने की कोशिशें जारी,16.11 लाख में से जमा हुए महज 4.80 लाख, दी जा रही मोहलत

 डबवाली न्यूज़ डेस्क 

 पीले-गुलाबी व हरे राशनकार्ड बनाने की एवज में वसूली गई राशि को डकारने वाले खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अधिकारियों को आज भी बचाने की कोशिशें की जा रही है।लगभग दो साल से वसूली जा रही राशि को सरकारी खजाने में जमा नहीं करवाया गया। आरटीआई में मामले का खुलासा होने के बाद विभागीय अधिकारियों ने राशि गबन करने वालों को नोटिस देने की नौटंकी की। जिन लोगों ने सरकारी धन का गबन किया, उनके खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज करवाने की बजाए उन्हें गबन की राशि जमा करवाने का नोटिस दिया गया। नोटिस के बावजूद राशि जमा नहीं हुई। ऐसे में फिर से नया नोटिस जारी कर दिया गया। अंतिम नोटिस की अवधि भी 5 अक्टूबर को बीत चुकी है। लेकिन विभाग के अधिकारी आज भी पूरे मामले में दोषियों को बचाने की हरसंभव कोशिश कर रहे है।शुक्रवार को विभाग की ओर से ब्यान जारी कर कहा गया कि सिरसा केंद्र के अधिकारी द्वारा हरे कार्ड बनाने की फीस के रूप में चार लाख रुपये जमा करवा दिए गए है। ऐलनाबाद केंद्र के इंचार्ज द्वारा पहले ही 80,500 रुपये की राशि जमा करवा दी गई थी, जिसकी रसीद उन्होंने परिमंडल कार्यालय में जमा करवा दी है। यानि 16 लाख में से महज 4 लाख 80 हजार 500 रुपये की राशि ही जमा हुई है। शेष राशि की वसूली आज भी बाकी है। मगर, विभागीय अधिकारियों द्वारा गबन करने वालों के खिलाफ कोई कदम उठाने की बजाए उन्हें बचाने की अधिक कोशिश की जा रही है। विभाग की ओर से जारी बयान इस आशय की पुष्टि करता है कि गबनकत्र्ताओं को मोहलत प्रदान की जा रही है?

गबन हुआ सिद्ध तो पुलिस कार्रवाई क्यों नहीं?

 राशनकार्ड बनाने की एवज में जो राशि वसूली गई, उसे सरकारी खजाने में जमा करवाया जाना चाहिए था। अधिकारियों ने 13 लाख 65 हजार 85 रुपये जमा करवाए भी लेकिन 16 लाख 11 हजार 395 रुपये डकार गए। लगभग 9 माह पहले इस आशय का खुलासा भी हो चुका था कि अधिकारी राशि डकार रहे है। मगर, विभागीय अधिकारियों ने मामले पर पर्दा डालने की कोशिश की। डकारी गई राशि जमा करवाने से गबनकत्र्ता पाकसाफ नहीं हो जाते? पकड़े जाने पर यदि चोर माल वापस कर देता है तो उसका गुनाह माफ नहीं हो जाता? ऐसे में जिन अधिकारियों की ओर से गबन राशि को जमा करवाया गया है, उनके खिलाफ गबन सिद्ध होता है और उनके खिलाफ विभाग की ओर से पुलिस में एफआईआर दर्ज करवाई जानी चाहिए। इसमें बरती गई ढील गबनकत्र्ताओं के हौंसले बढ़ाएगी, चूंकि पकड़े जाने पर ही पैसा जमा करवाना है। न पकड़े जाने पर पैसा हजम!

आरटीआई ने खोली पोल

 खाद्य एवं आपूर्ति विभाग द्वारा पीले, गुलाबी व हरे राशनकार्ड बनाने की एवज में उपभोक्ताओं से राशि वसूली गई थी। भीम कालोनी निवासी प्रेम जैन ने इस संबंध में आरटीआई मांगी और विभाग द्वारा आरटीआई में ही यह जानकारी दी गई कि पीले-गुलाबी व हरे राशनकार्ड बनाने की एवज में उपभोक्ताओं से 29 लाख 76 हजार 480 की राशि वसूली गई है। यह भी बताया कि इसमें से 13 लाख 65 हजार 85 रुपये जमा करवाई है और 16 लाख 11 हजार 395 रुपये की राशि 

सरकारी खजाने में जमा नहीं करवाई। इसी गबन राशि की वसूली के लिए विभाग की ओर से नोटिस भेजने की नौटंकी की गई।

3.40 लाख डूबाने की तैयारी!

खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की ओर से शुक्रवार को जो बयान जारी किया गया, उसके अनुसार तीन लाख 40 हजार रुपये तो डूबाने की खुद ही तैयारी की गई है। विभाग की ओर से बताया गया कि 13 हजार पीले, 4700 गुलाबी और 12700 हरे राशनकार्ड विभाग से गलत प्रिंट होकर आए थे, जोकि वितरित ही नहीं किए गए। इन कार्डों की राशि तीन लाख 40 हजार रुपये बनती है। ऐसे में 3.40 लाख रुपये का गबन नहीं हुआ।विभाग के दावे को सच माना जाए तो विभागीय अधिकारी यह बताए कि 30 हजार 400 उपभोक्ता पिछले तीन सालों से किस आधार पर डिपूओं से राशन प्राप्त कर रहे है? जबकि उनके राशनकार्ड गलत प्रिंट होने के कारण स्टोर में पड़े है। हकीकत यह है कि इन 30 हजार 400 उपभोक्ताओं को पीले, गुलाबी व हरे राशनकार्ड की एवज में प्रिंट दिया जा चुका है, जिसके आधार पर ही उन्हें राशन प्राप्त हो रहा है। इन उपभोक्ताओं से राशनकार्ड की एवज में शुल्क भी वसूला जा चुका है। विभागीय अधिकारी भले ही 3 लाख 40 हजार रुपये की राशि को डकारने का मंसूबा पाल रहे हों, लेकिन यह कभी कामयाब नहीं होने वाला? चूंकि चोरबाजारी के खिलाफ न केवल 30 हजार 400 उपभोक्ता अपनी गवाही देंगे बल्कि इनसे संबंधित डिपू होल्डर भी सच्चाई बयान करेंगे। तब, गबनकत्र्ताओं को शह देने वालों की खाल भी नहीं बच पाएगी?

आरटीआई में मांगी सूचना न देने का मामल, जिला के सभी तहसीलदार सूचना आयोग में तलब,12 नवंबर तक देना होगा जवाब,24 मार्च को होगी चंडीगढ़ में सुनवाई

 डबवाली न्यूज़ डेस्क 

 राज्य सूचना आयोग हरियाणा ने आरटीआई के एक मामले में सिरसा जिला के तमाम तहसीलदारों को नोटिस देकर आयोग में तलब किया है।तहसीलदारों को 12 नवंबर तक अपना जवाब दाखिल करने का समय दिया गया है और 24 मार्च 2021 को मामले की सूचना आयोग में सुनवाई होगी। राज्य सूचना आयुक्त जय सिंह बिश्नोई की ओर से यह नोटिस जारी किया गया है। आरटीआई एक्टिविस्ट पवन पारिक एडवोकेट की ओर से आरटीआई के मामले में सूचना आयोग में शिकायत दाखिल की थी, जिस पर संज्ञान लेते हुए आयोग ने नोटिस जारी किया है।पवन पारिक ने जिला राजस्व अधिकारी-सह-राज्य जनसूचना अधिकारी सिरसा से आरटीआई में कुछ जानकारी मांगी थी। सूचना जिला के तमाम तहसील कार्यालयों से संबंधित थी, इसलिए डीआरओ द्वारा तहसीलदार सिरसा, डबवाली, ऐलनाबाद, रानियां, नाथूसरी चौपटा, कालांवाली के अलावा उप तहसीलदार गोरीवाला को आरटीआई अग्र-प्रेषित की थी। मगर, आरटीआई का जवाब नहीं दिया गया, जिस पर सूचना आयोग में शिकायत की गई थी। सूचना आयोग ने शिकायत पर संज्ञान लेते हुए जिला राजस्व अधिकारी सिरसा, तहसीलदार सिरसा, डबवाली, ऐलनाबाद, रानियां, नाथूसरी चौपटा, कालांवाली तथा उप तहसीलदार गोरीवाला को नोटिस जारी किया है। 

ये मांगी थी सूचना

पवन पारिक एडवोकेट ने डीआरओ कार्यालय से 8 जून 2020 को डिजिटल डिमार्केशन मशीनों के बारे में जानकारी मांगी थी। पूछा गया था कि विभाग द्वारा किन प्राइवेट फर्मों और आपरेटरों को इस कार्य के लिए प्राधिकृत किया है। डिजिटल डिमार्केशन करने वालों को जारी किए लाईसेंस की प्रति मांगी गई थी। इस बारे में सरकार द्वारा जारी हिदायतों व गाइडलाइंस के बारे में भी जानकारी मांगी थी। यह भी पूछा गया था कि बगैर विभागीय अनुमति के जिला में भूमि की डिमार्केशन करवाई जा सकती है अथवा नहीं। यह भी पूछा गया था कि पंजाब भू-राजस्व अधिनियम 1887 के प्रावधानों के तहत प्लॉट अथवा भूमि की निशानदेही पटवारी और कानूनगो से फीता या जरीब से करवाई जा सकती है। यह भी पूछा गया था कि क्या डिजिटल डिमार्केशन मशीन से पैमाइश करवाना अनिवार्य है। पैमाइश के लिए डिजिटल डिमार्केशन मशीनों के शुल्क बारे भी जानकारी मांगी गई थी। यह भी पूछा गया था कि पिछले 10 वर्षों में किन-किन पटवारियों व कानूनगो द्वारा फीता और जरीब कितनी निशानदेही की गई और कितनी डिजिटल डिमार्केशन मशीन से करवाई गई।

शुक्रवार, 23 मार्च 2012

MARCH 23RD TRIBUTE TO BHAGATH SINGH, RAJGURU, SUKHDEV



An indebted nation pays rich tribute to its martyrs Bhagat Singh, Sukhdev and Rajguru who sacrificed their lives for the country on March 23, 1931. March 23 is observed as Martyrs’ Day to remember the significant contribution of Bhagat Singh, Sukhdev, Rajguru and other important revolutionaries, who paved the way for the independence of the country.

Whenever we recall the freedom struggle in India, the sacrifice of Bhagat Singh, Sukhdev and Rajguru will automatically comes to our mind. They were great patriots of the country who had launched an effective struggle to root out the British rule from the country. They undergone a lot of hardships and sacrificed their lives for the motherland. They were the real sons of this soil and fought till death, without giving up before the oppressing British rule. Many followed their footsteps and further accelerated the freedom movement, which ultimately culminated into Independence. It was only because of their sacrifices that our country has attained its present status.

“Bhagat Singh, along with Sukhdev and Rajguru were hanged to death on March 23, 1931.On his way to gallows he said to the officer, you are very fortunate to witness how revolutionaries smilingly embrace death for the love of their country. “Bhagat Singh, Sukhdev and Rajguru will be remembered forever for their selfless service to the mother India. They took up the armed struggle, and fought against the British administration, but they never caused any harm to the common people. They fought for the people and for the freedom. The heroic spirit of Bhagat Singh, Rajguru and Sukhdev is an unfailing source of inspiration for the youth of the country. These three inspired the theme of young and modern India and millions of youths in the country see them as icons and role models even today. Their contribution, ideals, slogans and thoughts are as relevant today as they were earlier. Their courage, spirit of adventure and patriotism are an example to be followed by one and all.”

We are very fortunate and we should be proud that we are born in this great country where brave youth like Shaheed Bhagat Singh, Shaheed Sukhdev, and Shaheed Rajguru sacrificed their lives for the sake of our freedom. The sacrifices of such great people could not be ignored, which had secured freedom for the country and its people. We have to learn a lot from the life of Shaheed Bhagat Singh, Sukhdev and Rajguru. We should also imbibe the qualities of the great martyr in their day to day life.

Take a pledge on this day and always to protect the hard earned freedom of the country at any cost and frustrate the evil design of the forces that are bent upon to destroy the integrity of our country. Shun evils like Dowry, poverty, gender inequality, drugs, human inequality, child labour, prostitution, and many more. Every individual needs to take steps in order to make India a better place to live. Come on; let’s help to make a clean and green country, and work for national integrity and peace for the development of the country”. “This would be the true tribute to our martyrs,

My mind raced back to my school days when I learnt a Hindi poem by Pt. Makhanlal Chaturvedi called "PUSHP KI ABHILASHA".The lines of the poem have got etched in my mind. The poem accurately represents the pride and passion for the nation. I find these lines very close to my heart. This poem tells us dedication and patriotism towards our country. The stanza of the poems are really soul stirring. Salute to him who wrote these lines and salute to them who shed their blood for our great motherland

Pushp Ki Abhilasha

Chah Nahin Mai SurBala Ke
Gehnon Mein Guntha Jaaon
Chah Nahin Premi Mala Mein
Bindh, Pyari Ko Lalchaon
Chah Nahin Samraton Ke
Shav Par, He Hari Dala Jaaon
Chah Nahin Devon Ke Sar Par
Chadhon, Bhagya Par Itraoon
Mujhey Tod Lena Banmali,
Us Path Par Tum Dena Phaink
Matra Bhoomi Per Sheesh Chadhaney,
Jis Path Jaayen Veer Anek
Translation:
The Yearning (desire) of a Flower

I don't want to be a part of the necklace of the beautiful girl,I don't want to woo the lady love,I don't want to be spread over dead bodies,I don't want to act snob, after someone offers me to the Gods.
Just pluck me Gardner and throw me on the road,which is taken by the brave soldiers to give away their lives for the Motherland !

I pray for the flower’s wish to be granted.*Peace*

How great were those patriots, How great was their pride, For those who sacrificed their lives for the motherland.

Let us pay our rich tributes to the martyrs.

Perhaps this tribute of mine won't be able to add anything new or glorious to their life but yet my heart rending love & respect and it shall remain till the last breath.

शुक्रवार, 16 मार्च 2012

एशिया कपः 100वीं सेंचुरी बना कर सचिन आउट

नई दिल्ली।। आज बजट में लोगों को वित्त मंत्री से तोहफे की उम्मीद थी , लेकिन दिल खुश किया सचिन ने। सचिन ने 100वें शतक के मुकाम को पा ही लिया। हालांकि इसके बाद सचिन तेंडुलकर ज्यादा देर तक नहीं खेल पाए और 114 रन पर आउट हो गए। सचिन पिछले एक साल से महाशतक के लिए इंतजार कर रहे थे। उन्होंने पिछला शतक वर्ल्ड कप में साउथ अफ्रीका के खिलाफ नागपुर में मारा था।

एशिया कप के इस अहम मुकाबले में बांग्लादेश ने आज टॉस जीता और भारत को पहले बैटिंग का न्योता दिया। पिछले मैच में सेंचुरी ठोकने वाले गौतम गंभीर कुछ खास नहीं कर
पाए। वह 11 रन बनाकर बोल्ड हो गए।

लेकिन आज सचिन पूरे रंग में दिखाई दे रहे थे। सचिन ने कोहली के साथ पारी को संभाला। सचिन ने शानदार तरीके से अपनी फिफ्टी पूरी की। एक रन आउट के चांस को छोड़ दें , तो उन्होंने बांग्लादेश के बोलर्स को कोई मौका नहीं दिया। मैदान के हर कोने पर उन्होंने गेंद पहुंचाई।

दूसरे छोर पर भी कोहली ने उनका बखूबी साथ दिया। उन्होंने भी अपनी फिफ्टी पूरी की , लेकिन वह 66 रन बनाकर आउट हो गए। इसके बाद सचिन का साथ देने के लिए रैना मैदान पर आए। लेकिन आज सचिन रुकने के मूड में नहीं थे। वह सेंचुरी के पास पहुंचकर कुछ धीमे जरूर हुए , लेकिन बांग्लादेश के बोलर्स के पास ऐसी कोई बॉल नहीं थी जो उन्हें महाशतक बनाने से रोक पाती। 114 रन बना चुके सचिन को मुर्तजा की गेंद पर मुशफीकुर रहीम ने कैच किया।

भारत ने आज चोटिल विनय कुमार की जगह अशोक डिंडा को टीम में शामिल गया गया , जबकि बांग्लादेश ने टीम में कोई बदलाव नहीं किया।

गुरुवार, 15 मार्च 2012

बंदरों ने मचाया उत्पात, लोग परेशान

डबवाली- शहर आसपास गांवों में बंदरों का आतंक बदस्तुर जारी है। बंदरों के आतंक से आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन प्रशासन द्वारा इस और ध्यान देने से लोगों में रोष पाया जा रहा है। आज प्रात: बठिंडा रोड पर स्थित गुरू नानक शटरिंग स्टोर के मालिक सुच्चा सिंह के घर अचानक दर्जन के करीब बंदर घुय आए और अन्होंने वहां जमकर उत्पाद मचाया। बंदरों के डर से परिवार केे सभी सदस्य घर से बाहर निकल गए। तभी सुच्चा सिंह ने अपने घर में पटाखों की आवाज कर बंदरों को बाहर निकाला। उधर, वार्ड 12 में स्थित गलियों में भी बंदरों ने आज खूब उत्पाद मचाया। शहरवासियों ने प्रशासन से इन बंदरों को पकड़ कर दूर जंगलों छोडऩे की मांग की है। ताकि शहरवासियों को इनके उत्पात से बचाया जा सके।

सड़क हादसे में युवकों की दर्दनाक मौत

डबवाली- बुधवार रात राष्ट्रीय राज मार्ग नं. 10 पर हुए एक सड़क हादसे में दो युवकों की दर्दनाक मौत हो गई। मृतकों की पहचान धर्मवीर गोदारा पुत्र रामदास तथा नरेश सोनी पुत्र प्यारेलाल निवासी ऐलनाबाद के रूप में हुई है। प्राप्त जानकारी अनुसार मृतक धर्मवीर गोदारा व नरेश सोनी मलोट से सिरासा एक विवाह समारोह में शामिल होने जा रहे थे कि गांव चोरमार व टप्पी के बीच उनकी कार सड़क पर खड़े एक ट्राले से टकरा गई। जिसमें दोनों की घटना स्थल पर ही मौत हो गई। वहां से गुजर रहे किसी राहगीर ने हादसे की सूचना डबवाली जन सहारा सेवा संस्था के प्रधान आरके नीना व निकटवर्ती पुलिस थाना ओढां को दी। सूचना पाकर संस्था के सदस्य व ओढां पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों के शवों को गाड़ी से बाहर निकाला गया। ओढां पुलिस द्वारा आवश्यक कार्रवाई उपरांत संस्था की एम्बुलैंस द्वारा दोनों शवों को सिरसा के सामान्य अस्पताल में पहुंचाया गया। पुलिस ने ट्राले को अपने कब्जे में ले लिया है और विभिन्न धराओं के तहत मामला दर्ज कर चालक की तलाश शुरू कर दी गई है। आज प्रात: दोनों शवों का पोस्टमार्टक करवाकर परिजनों को सौंप दिया गया।

निक्का सिंह को सुनाई गई फांसी की सजा से उसके परिवार में मातम का माहौल

डबवाली-
गांव सांवतखेड़ा में वृद्धा की हत्या के मामले में अदालत द्वारा निक्का सिंह को सुनाई गई फांसी की सजा से उसके परिवार में मातम का माहौल है। वहीं दूसरी ओर मृतक महिला के परिजनों इसे न्यायालय का इंसाफ बता रहे है। हालांकि गांव इस मामले में पूरी तरह से खामोश है। वहां पर फांसी की चर्चा तो जरूर है लेकिन इस पर प्रतिक्रिया कोई है।
जिला अतिरिक्त सत्र न्यायालय सिरसा द्वारा मंगलवार को हत्या के मामले में दोषी करार देते हुए फांसी दिये जाने के हुकम के बाद निक्का सिंह के घर पर मातम पसरा हुआ है। परिजन न्यायालय के इस निर्णय से स्तब्ध है।
पत्रकारों की टीम गांव सांवत खेड़ा में निक्का सिंह के घर पहुंची तो निक्का सिंह की माता तेज कौर घर के एक कोने में चारपाई पर पड़ी पुत्र को मिली फांसी की सजा पर आंसू बहा रही थी। कुछ ऐसा ही हाल उसके भाई जग्गा सिंह, चचेरी बहन रानी कौर और गांव के चौकीदार का दायित्व निभा रहे ताया हंसराज का है।
पत्रकारों के समक्ष उसके आंखों से अश्रु धारा बहाते हुए माँ तेज कौर ने कहा कि उसके बेटे के खिलाफ षड्यंत्र करार देते कहा कि न तो गुरदेव कौर के परिवार के साथ कोई दुश्मनी थी और न ही कोई रंजिश थी। बल्कि उनके परिवारों में मेहनत मजदूरी कर अपने बच्चों को जवान किया है। उन्होंने कहा कि हम गरीबों को दो जून की रोटी के लाले पड़े रहते है। इस मामले को लेकर उनका परिवार बिखर गया है। निक्का सिंह की पत्नी हरजिंद्र कौर घटना के दो माह बाद मायके संगरिया चली गई। वहीं उसके भाई जग्गा सिंह ने नम आंखों से कहा कि न्याय तो कुदरत करेंगी लेकिन वे अपने भाई को इंसाफ दिलाने के लिए उच्च न्यायालय में अपील करेंगे।
वहीं दूसरी ओर मृतका गुरदेव कौर के परिवार में न्यायालय द्वारा 395 दिनों को छोटे अंतराल में दिये गये ऐतिहासिक फैसले से संतुष्टि का माहौल है। अपने घर पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए मृतका के भाई अजायब सिंह ने बताया कि अदालत ने तेजी से सौ फीसदी न्याय दे कर अपराधियों को सबक सिखाया है। इससे भविष्य में कुकृत्य को करने से पहले अदालत का फैसला जरूर याद आयेगा। वहीं उसके भतीजे शिवराज सिंह ने अपनी मृतक बुआ की तस्वीर हाथों में ले उसके अपने परिवार की प्रेरणास्त्रोत व बड़ी बजुर्ग बताते हुए कहा कि उसकी कमी महसूस होती है लेकिन अदालत के फैसले से उन्हें राहत मिली है।
इसके गांव के आम लोगों से बात करने पर निक्का सिंह को फांसी की सजा होने की जानकारी होने के बावजूद मुद्दई और मुजरिम एक ही गांव के होने के कारण कोई प्रतिक्रिया व्यक्त करने से बचते रहे।

बुधवार, 14 मार्च 2012

प्रकाश सिंह बादल पांचवीं बार बने पंजाब के मुख्यमंत्री

चंडीगढ़, -प्रकाश सिंह बादल ने बुधवार को पंजाब के मुख्यमंत्री के तौर पर पांचवीं बार शपथ ली। लगातार दूसरी बार अकाली-भाजपा गठबंधन सरकार के उप मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने वाले उनके पुत्र सुखबीर बादल सहित कैबिनेट रैंक के 17 अन्य मंत्रियों ने भी आज शपथ ग्रहण की।
चंडीगढ़ से करीब 25 किलोमीटर दूर चप्पड़ चिड़ी में आयोजित शपथग्रहण समारोह में राज्यपाल शिवराज वी पाटिल ने बादल [मुख्यमंत्री], उनके 50 वर्षीय पुत्र सुखबीर [उप मुख्यमंत्री] और कैबिनेट रैंक के 16 मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। कैबिनेट रैंक के 16 मंत्रियों में से 14 शिअद से और चार भाजपा से हैं। शपथ ग्रहण समारोह में भाजपा, तृणमूल काग्रेस, राकापा, जनता दल [यू] और इनेलो सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता शामिल हुए।
इस अवसर पर मौजूद नेताओं में लालकृष्ण आडवाणी, नितिन गडकरी, राजनाथ सिंह, वसुंधरा राजे, नवजोत सिद्धू [सभी भाजपा से], मुकुल राय, रचपाल सिंह, केडी सिंह [तृणमूल काग्रेस], केंद्रीय मंत्री प्रफुल्ल पटेल [राकापा], जनता दल यू के प्रमुख शरद यादव और इंडियन नेशनल लोकदल [इनेलो] के नेता ओमप्रकाश चौटाला भी सम्मिलित थे। गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल भी इस मौके पर मौजूद थे।
बादल ने मंत्रिमंडल के गठन का काम आज एक साथ ही पूरा कर दिया जिसमें मुख्यमंत्री सहित 18 मंत्री ही हो सकते हैं। अकाली-भाजपा गठबंधन ने विधानसभा चुनाव में 68 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत प्राप्त किया था। काग्रेस को केवल 46 सीटें मिली थीं। बादल सीनियर ने 1997 से 2002 तक और 2007 से 2012 तक दो बार पाच साल का कार्यकाल पूरा किया है।
गठबंधन की आठ महिला विधायकों [शिअद 6 और भाजपा 2] में से केवल बीबी जागीर कौर को मंत्रिमंडल में शामिल किया है जो एसजीपीसी की पूर्व अध्यक्ष हैं। मंत्रिमंडल में बादल परिवार के चार सदस्य हैं। बादल सीनियर और उनके पुत्र के अतिरिक्त अन्य पारिवारिक सदस्य अदेश प्रताप सिंह कैरों [बादल सीनियर के दामाद] और विक्रम सिंह मजीठिया [सुखबीर के साले] हैं।
बादल ने ज्यादातर अपने पूर्व मंत्रियों में भरोसा जताया और सरकार में केवल चार नए चेहरों को ही जगह दी है। इनमें भगत चुनी लाल और अनिल जोशी [दोनों भाजपा से तथा सुरजीत सिंह रखड़ा और शरणजीत सिंह ढिल्लों- दोनों शिअद] हैं। रखड़ा ने पंजाब काग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह के पुत्र रनिंदर को हराया था। लोकसभा के पूर्व उपाध्यक्ष चरणजीत सिंह अटवाल को नवगठित विधानसभा का कार्यवाहक अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
सन् 1966 में पंजाब के पुनर्गठन के बाद से एसएडी ने भाजपा के साथ मिलकर सत्ता में लगातार दूसरी बार आकर एक रिकार्ड बनाया है। इस बार के चुनाव में गठबंधन ने अपने आकड़े में वृद्धि करते हुए 68 सीटें हासिल कीं, जबकि 2007 में इसे 67 सीटें मिली थीं। पिछली बार भाजपा के 19 विधायक थे, लेकिन इस बार उसके 12 विधायक ही रह गए।
बादल सीनियर और सुखबीर क्रमश: लांबी तथा जलालाबाद सीटों से निर्वाचित हुए थे। इन दोनों के अतिरिक्त शपथ लेने वालों में भगत चुनी लाल [भाजपा जालंधर पश्चिम], सरवन सिंह फिल्लौर [शिअद-करतारपुर आरक्षित], अदेश प्रताप कैरों [शिअद-पट्टी], अजीत सिंह कोहड़ [शिअद-शाहकोट], गुलजार सिंह रानिके [शिअद-अटारी] , मदन मोहन मित्तल [भाजपा-आनंदपुर साहिब], परमिंदर सिंह ढींडसा [शिअद-सुनाम], जनमेजा सिंह शेखों [शिअद-मौर], तोता सिंह [शिअद-धर्मकोट] , जागीर कौर [शिअद-भोलथ], सुरजीत कुमार ज्ञानी [भाजपा-फजिलका] , बिक्रम सिंह मजीठिया [शिअद-मजीठा], सिकंदर सिंह मलूका [शिअद-रामपुरा फूल], अनिल जोशी [भाजपा-अमृतसर उत्तर], सुरजीत सिंह रखड़ा [श्अिद-समाना] और शरणजीत सिंह ढिल्लों [शिअद-साहनीवाल] शामिल हैं।
पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन [पीसीए] का मोहाली स्थित स्टेडियम आज सूना था जहा पाच साल पहले बादल सरकार ने शपथ ली थी। इस बार शपथ ग्रहण के लिए चप्पड़ चिड़ी को चुना गया जहा शिअद-भाजपा सरकार ने अपने पिछले कार्यकाल में फतेह बुर्ज स्मारक की स्थापना की थी।
सिख इतिहास के अत्यंत सम्मानित योद्धा बंदा सिंह बहादुर ने अजीतगढ़ जिले के चप्पड़ चिड़ी में 1710 में मुगल सेना की कमान संभाल रहे वजीर खान को लड़ाई में हराया था। यह स्थान राज्य की राजधानी से 25 किलोमीटर दूर है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार अकाली-भाजपा गठबंधन अपने परंपरागत पंथिक एजेंडे को त्यागकर विकास और शाति के एजेंडे पर लगातार दूसरी बार सत्ता में आया है।
शपथ ग्रहण समारोह में पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और बिहार के मुख्यमंत्रियों ममता बनर्जी, जयललिता और नीतीश कुमार को भी आमंत्रित किया गया था, लेकिन अन्य कार्यो में व्यस्त होने का कारण बताकर उन्होंने आने में असमर्थता जताई,

'परमात्मा चाहता था कि जो सर्वे मैंने किया, वह सच साबित हो जाए'

http://youngflamenews.blogspot.in/2012/03/65.html

डबवाली (यंग फ्लेम) चुनाव चाहे लोकसभा के हों, या विधानसभा के, या फिर स्थानीय निकाय के। हर बार चुनावों में राजनीतिक पंडित या विश्लेषक अपने-अपने अनुमान लगाते हैं। बड़े-बड़े मीडिया ग्रुप, टीवी चैनल आदि प्री-पोल अथवा एग्जिट पोल करवाते हैं। इस बहाने यह अनुमान लगाने की कोशिश की जाती है कि परिणाम क्या रहेगा। अनेक वर्षों से हम देखते आए हैं कि ऐसे एग्जिट पोल मुंह के बल गिरे हैं। मतदाता आजकल बेहद समझदार हो गया है। वह किसी को भी अपने दिल की थाह नहीं देता। ऐसे में यह अंदाजा लगाना बड़ा कठिन हो जाता है कि चुनाव में कौनसा दल विजयी होगा या फिर किसकी सरकार आएगी। हालिया पंजाब विधानसभा चुनाव की बात करें तो सब जानते हैं कि पूरे देश का मीडिया, सभी राजनीतिक जानकार, कांग्रेसी और यहां तक कि कुछ हद तक अकाली व भाजपाई भी अंदरखाने यही कह-सुन रहे थे कि इस बार तो कांग्रेस पार्टी की ही सरकार आएगी। असल में बहुत हद तक उनका अनुमान पंजाब के 46 साल के रिकार्ड पर टिका था। यह रिकार्ड चीख-चीखकर बोल रहा था कि पंजाब में आज तक कभी कोई सरकार दोबारा सत्ता में नहीं आई। यानी 5 साल कांग्रेस तो 5 साल अकाली-बीजेपी। लेकिन असलियत क्या है, वास्तविक परिणाम क्या रहने वाले हैं, उनके पीछे कारक क्या रहेंगे, क्या-क्या फैक्टर काम करेंगे और कौन-कौनसे नहीं करेंगे, इन सब बातों का गहन विश्लेषण किसी ने नहीं किया था। और, जिसने किया, वह आज पूरे पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के इस हिस्से में छा गया है। हालांकि विश्लेषण और भी बड़े-बड़े राजनीतिक पंडितों ने किए, मगर जैसे मां सरस्वती उनकी ही जुबान पर विराजमान होनी थीं। यह हैं, डबवाली निवासी तथा सहारण होटल के संचालक व वरिष्ठ पत्रकार महावीर सहारण। पिछली अनेक बार की तरह इस बार भी पंजाब विधानसभा 2012 चुनावों का परिणाम 6 मार्च को आने से लगभग 72 घंटे पहले श्री सहारण ने 'यंग फ्लेम' के माध्यम से जो राजनीतिक विश्लेषण किया था, वह लगभग अक्षरश: सत्य साबित हुआ है। बादल सरकार की वापिसी किसी करिश्मे से कम नहीं कहीं जा सकती है। तमाम मीडिया, ंजाब की नौकरशाही व प्रदेश की अधिकांश जनता द्वारा यह दावा किया जा रहा था कि कांग्रेस शत-प्रतिशत जीत रही है। लेकिन महावीर सहारण तथ्यों सहित अपनी बात पर अडिग थे कि किसी भी सूरत में कांग्रेस का सत्ता में आना मुमकिन नहीं है। अब चुनाव परिणामों के बाद श्री सहारण से एक विशेष बातचीत हमने 'यंग फ्लेम' के पाठकों के लिये की। प्रस्तुत हैं,

उक्त बातचीत के मुख्य अंश:

सहारण साहब, आपने जो पंजाब की 117 सीटों का आंकलन किया था, यह लगभग पूरी तरह सटीक रहा। यह कैसे संभव हुआ?
मैं विगत 3 दशकों से पंजाब, हरियाणा, राजस्थान के चुनावों के बारे में आंकलन कर रहा हूं और हर बार मैंने जो आंकलन किया है, उनके नतीजे लगभग उसके मुताबिक ही आये हैं। सबसे पहले मैंने 1980 में उत्तर भारत के जो 9 राज्यों में चुनाव हुए थे, तब चुनाव नतीजों के बारे में नवभारत टाइम्स ने एक प्रश्नावली देकर प्रतियोगिता करवाई थी, जिसमें पूरे देश में मुझे दूसरा स्थान प्राप्त हुआ था। उस समय मेरी उम्र मात्र 15 वर्ष थी तथा इसके बाद मैं लगातार जहां भी चुनाव हो रहे होते हैं, उन हल्कों में खड़े उम्मीदवारों की स्थिति, जातिगत समीकरण, भीतरघात, मुख्य पार्टी की करगुजारी, उम्मीदवारों द्वारा चलाया गया चुनाव अभियान आदि प्रत्येक पहलू का बारीकी से अध्ययन करने के बाद उस हल्के का संभावित नतीजा तैयार करता हूं तथा निष्पक्ष रूप से जब यह आंकलन करता हूं, तभी नतीजा सटीक आता है। यह हैरानी की बात है कि पंजाब प्रदेश की सभी सरकारी एजेंसियां, भारत सरकार की सरकारी एजेंसियां और यहां तक कि सभी न्यूज़ चैनल्स का ओपीनियन पोल, सभी समाचार पत्र और अकाली-भाजपा के अधिकांश समर्थक भी राज्य में कांग्रेस सरकार आने की बात कर रहे थे, परंतु हुआ इसके बिल्कुलल उलट। मैंने जो विश्लेषण किया, उसमें हरेक हल्के में कौन उम्मीदवार जीत रहा है और क्यूं जीत रहा है, विस्तार से बताया। अब आप 4 मार्च का 'यंग फ्लेम' पड़े http://youngflamenews.blogspot.in/2012/03/65.html चुनावी नतीजों के साथ मिलान करें, आपको पता लग जाएगा कि चुनावी सर्वेक्षण कितना सटीक रहा है। अगर जिला और माझा-मालवा क्षेत्रवार बात करें, तो इसमें 1 प्रतिशत भी फर्क नहीं है, 100 फीसदी वही बात हुई है।

क्या आपने सारे पंजाब में घूमकर ये विस्तृत आंकलन तैयार किया था या किसी और माध्यम से?
जी नहीं, मैं कहीं नहीं जाता हूं, लेकिन हल्कावाइज फीडबैक विभिन्न सूत्रों से ले लेता हूं तथा क्षेत्र विशेष की आम जनता अपने उम्मीदवारों के बारे में, प्रमुख पार्टी की कारगुजारी के बारे में क्या सोचती है, इसके बारे में मेरा आंकलन, मेरे नतीजे को सही करने में मदद करता है।
हमें याद है कि जब राजस्थान में 1993 में विधानसभा चुनाव हुए थे, तब आपने लिखा था कि गंगानगर विधानसभा सीट से तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरोसिंह शेखावत तीसरे नंबर पर रहेंगे, यह केवल आपने ही कहा था। कैसे संभव हो पाई यह सटीक भविष्यवाणी?
उस वक्त श्रीगंगानगर जिले की सभी सीटों का मेरे द्वारा किया गया सर्वेक्षण एक समाचार पत्र में छपा था तथा उस वक्त कोई कतरफा लहर नहीं थी। भादरा, टिब्बी, संगरिया से आज़ाद उम्मीदवार और हनुमानगढ़ से भाजपा दो सीटें पर जीती थी। किसी एक पार्टी की लहर वहां उस वक्त नज़र नहीं आ रही थी, कहीं कांग्रेस जीत रही थी, कहीं भाजपा। जिला श्रीगंगानगर की सभी सीटों का नतीजा मेरे आंकलन के मुताबिक ही रहा। उस वक्त संगरिया के बारे में मैंने लिखा था कि आजाद उम्मीदवार स. गुरजंटसिंह विजयी होंगे, भाजपा के शिवप्रकाश सहारण दो नंबर पर, तत्कालीन विधायक का. हेतराम तीन नंबर पर तथा कांग्रेस प्रत्याशी भजनलाल (तत्कालीन मुख्यमंत्री हरियाणा चौ. भजनलाल के रिश्तेदार) चौथे स्थान पर रहेंगे। जब नतीजा आया तो क्रम यही रहा। श्रीगंगानगर मे तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत के बारे मे आंकलन यही था कि वे तीसरे स्थान पर रहेंगे। कांग्रेस के राधेश्याम तथा जनता दल के सुरेंद्र राठौड़ में 2000 से कम वोटों का मार्जिन रहने का अनुमान लगाया था। नतीजा, राधेश्याम मात्र 1700 वोटों से जीते और भैरोंसिंह स्वत: ही तीसरे नंबर पर चले गये। हालांकि उस आंकलन में यह भी लिखा था कि भैरोंसिंह मौजूदा मुख्यमंत्री हैं और पुन: बनेंगे। लेकिन श्रीगंगानगर से वह पराजित होंगे और फिर से सीएम बने भी।
हमने यह भी सुना था कि पिछले विधानसभा चुनाव में भी आपने पंजाब की सीटों के बारे में अखबारों में छपवाया था और तब भी वही सीटें आई थीं, जो कि आपने पहले से भविष्यवाणी की थी?
मैंने कहा था कि वर्ष 2007 में हुए विधानसभा चुनावों में मालवा बैल्ट में अकाली दल को बुरी तरह से पराजित होना पड़ेगा। हालांकि तब कोई भी इस बात पर विश्वास नहीं कर रहा था तथा बठिंडा, मानसा, मोगा आदि जिलों की मालवा पट्टी में 33 में से शिअद-भाजपा को केवल 5 सीटें ही प्राप्त हुई थीं।

वर्ष 2009 में हरियाणा विधानसभा चुनावों में भी आपने जो भविष्यवाणी की थी, वह एकदम सही बैठी?
हरियाणा विधानसभा चुनाव में सभी सर्वेक्षण व अ$खबारी पंडित चौ. ओमप्रकाश चौटाला की इंडियन नेशनल लोकदल (इनैलो) को केवल 10-12 सीटों पर ही जीता हुआ मान रहे थे। लेकिन मैंने 32 सीटों पर इनैलो के जीतने का आंकलन किया था तथा भाजपा की 4 सीटों पर विजय दिखाई थी। 10 सीटों पर नज़दीकी मुकाबला बताया था। नतीजा भी हूबहू यही आया।

सहारण साहब, जब आपने बठिंडा से हरमिंद्रसिंह जस्सी के हारने की बात कही तो हमे भी यकीन नहीं हुआ। इस बात पर तो कोई विश्वास कर ही नहीं सकता था कि खुद डेरा सच्चा सौदा मुखी कि समधी होने केबावजूद वो कैसे हार सकते हैं?
बठिंडा से सरूपचंद सिंगला, मानसा से प्रेम मित्तल, संगरूर से प्रकाश गर्ग तथा फरीदकोट से दीप मल्होत्रा, डेरा बस्सी से एन.के.शर्मा, आदमपुर से पवन टिन्नू को चुनाव मैदान में उतारने की रणनीति उपमुख्यमंत्री सुखबीर बादल की थी। उस वक्त इसे कोई भी समझ नहीं पाया था, लेकिन मंैने इसको बखूबी भांप लिया था तथा एक ऐसा वर्ग, जो आम तौर पर कांग्रेस के पक्ष में मतदान करता है, ने जातिगत समीकरणों को तरजीह देते हुए शिअद के पक्ष में भारी मतदान किया। इसलिये इन सभी सीटों पर कांग्रेस की बुरी तरह से पराजय हुई तथा कोई भी आदमी 6 मार्च से पहले इस बात को स्वीकार करने को तैयार नहीं था। जहां तक बठिंडा की बात है, डेरा सच्चा सौदा प्रेमी फैक्टर वोट बैंक के खिला$फ गैर डेरा प्रेमी वोट बैंक लामबंद हो गया था तथा उन्होंने उत्साहजनक तरीके से मतदान किया, जोकि सरूप सिंगला की जीत का मुख्य कारण बना।

सहारण जी, आपने मनप्रीत बादल के गिदड़बाहा और मौड़ में तीसरे स्थान पर रहने की बात कही थी और यह बात भी शत-प्रतिशत सच साबित हुई है। इसके साथ ही पीपीपी द्वारा अकाली दल की बजाय कांग्रेस को नुकसान का आपका जो आंकलन था, वो वाकई बिल्कुल सही था और आज कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी द्वारा खुले तौर पर इसे स्वीकार भी किया जा रहा है।
मनप्रीत बादल ने सिर्फ विधानसभा हल्का गिदड़बाहा में ही कांगे्रेस का फायदा किया है, बाकी प्रदेश, खासकर मालवा में उनके द्वारा वामपंथियों से समझौता कांग्रेस की हार का बड़ा कारण बना है। क्योंकि वामपंथी परंपरागत रूप से कंग्रेस के पक्ष में मतदान करते रहे हैं, यह बात मतगणना यानी 6 मार्च से पहले कोई भी समझ नहीं पाया। जबकि मैंने पुरजोर तरीके से मुख्यमंत्री स. बादल साहब, उपमुख्यमंत्री सुखबीर बादल एवं सांसद हरसिमरत कौर बादल को कही कि मनप्रीत फैक्टर ही आपको सत्ता में वापसी करवा रहा है, जबकि आज तो यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी भी हार का ठीकरा पी.पी.पी. पर फोड़ रही हैं, लेकिन 6 मार्च से पहले उनके सलाहकार ये बात नहीं भांप पाये कि मनप्रीत से उन्हें कितना नुकसान होने जा रहा है। उल्टे कांग्रेस तो खुश थी कि मनप्रीत की वजह से शिअद-भाजपा गठबंधन हार रहा है।

भाजपा को कोई भी व्यक्ति 3-4 से अधिक सीटें नहीं दिखा रहा था, आपने ही उसके दहाई का आंकड़ा पार करने की बात कही थी। वो कैसे?
मेरे आंकलन में तो ये भी लिखा है कि भाजपा प्रत्याशी जहां चुनाव लड़ रहे हैं, ऐसी कम से कम 5-6 सीटें हैं, जिस पर कांग्रेस 3 नंबर पर है तथा वह भाजपा को 4-5 पर कैसे समेट सकती है? भाजपा को दर्जन सीटें मिलने के पीछे यही कारण मैंने भांपा। आमतौर पर सट्टा बाजार पर चुनावों के संबंध में लोग विश्वास करतेे हैं, लेकिन इस बार सट्टा बाजार के दावे भी धरे के धरे रह गये, ऐसे नतीजे सामने आये।
लोगों की स्मरण शक्ति बहुत कमजोर है, लोग जल्दी भूल जाते हैं। सट्टा बाजार का आंकलन मेरे मुताबिक कभी भी सही नहीं रहा। वर्ष 2009 में हरियाणा में सट्टा बाजार चौ. चौटाला को 12 सीटेें दर्शा रहा था, जबकि वस्तुत: 32 सीटें आईं। अब 5 मार्च तक सट्टा बाजार पंजाब में शिअद-भाजपा की सरकार बनाने वालों को 1 रू. के 5 रू. दे रहा था। क्या नतीजा आया? शिअद-भाजपा गठबंधन को 68 सीटें मिलीं, जोकि अपने आप में बड़ी जीत कही जा सकती है।

आपके मुताबिक शिरोमणी अकाली दल-भाजपा की हैरतअंगेज जीत के क्या कारण रहे?
मुख्यमंत्री प्रकाशसिंह बादल लगातार 5 साल तक जनता के बीच में रहे। विकास कार्यों की झड़ी उन्होंने लगाई। हालांकि कांग्रेस यही प्रचार करती रही कि हजारों करोड़ का कर्ज प्रदेश पर है। कांग्रेस के मुख्यमंत्री पद के दावेदार अमरेन्द्रसिंह कभी जनता के बीच नहीं गए तथा उन्हें चुनावी सभाओं में 'खुंडा' भेंट करके कांग्रेसी खुश होते रहे, लेकिन प्रदेश की जनता, जो कि आतंकवाद का दौर झेल चुकी है, ने इसे पसंद नहीं किया। मुख्यमंत्री बादल को सहयोगी के रूप में सुखबीर बादल व सांसद हरसिमरत बादल का भी बड़ा सहारा मिला। एक लाख युवाओं को मैरिट के आधार पर नौकरियां दिए जाने के कारण कांग्रेस द्वारा भ्रष्टाचार केआरोपों को लोगों ने स्वीकार नहीं किया। बाकी तमाम फैक्टर जो जीत का कारण रहे, वे हमने चुनाव पूर्व सर्वेक्षण में ही दर्शा दिए थे। अब मीडिया उन कारणों के बारे में अपनी लकीर पीट रहा है।

नतीजे आने के बाद जब आप मुख्यमंत्री प्रकाशसिंह बादल से मिले तो उनकी क्या प्रतिक्रिया थी?
मुख्यमंत्री प्रकाशसिंह बादल, उपमुख्यमंत्री सुखबीर बादल, सांसद हरसिमरत बादल से जब मैं मिला, तो उन्होंने बेहद हैरान होते हुए कहा कि कैसे आपने यह सब बता दिया, जबकि कोई भी इस बात के नजदीक तक नहीं था। मैंने कहा कि मेरे द्वारा किए जाने वाले तथ्यात्मक विश्लेषण की अबकी बार परीक्षा थी तथा परमात्मा ने इस परीक्षा में मुझे पास होने में मदद की है। परमात्मा की कृपा के अलावा कोई ऐसी चीज नहीं थी, जो अबकी बार मेरे द्वारा किए गए सर्वेक्षण को सही साबित कर सके।

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