सिरसा (यंग फ्लेम) उपमण्डालधीश सिरसा के कार्यालय में व्हीकल रजिस्ट्रेशन की नई सीरीज- एच आर-24/पी शुरू हो चुकी है। इच्छुक व्यक्ति सरकार की हिदायत अनुसार निर्धारित फीस जमा कर अपना मनपसंद नम्बर ले सकता है। उपमंडल अधिकारी रोशन लाल ने बताया कि विशेष जैसे 0111, 0222, 0333, 0444, 0555, 0666, 0777, 0888, 0999, 1111, 2222, 3333, 4444, 5555, 6666, 7777 ,8888, 9999 उक्त सभी नम्बर 25000/- रूपए जमा करवाकर ले सकते हैं व 0786 नम्बर 50000/- रूपए जमा करवाकर ले सकते हैं। इसके अलावा आऊट ऑफ टर्न नम्बर 10000/- रूपए जमा करवाकर प्राप्त कर सकते हैं।
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बुधवार, 10 अगस्त 2011
प्रमोद सोनी सर्वसम्मति से नाट्यशाला के प्रधान बनें
डबवाली (यंग फ्लेम)शहर की धार्मिक संस्था जय श्री राम नगर नाट्यशाला के सभी सदस्यों की एक बैठक पंजाबी धर्मशाला के प्रांगण में सम्पन्न हुई। जिसमें नाट्यशाला के प्रधान औम बाबा ने अपनी कार्यकारिणी को भंग करते हुए वर्ष 2011-12 के लिए सर्व सम्मति से चुनाव करवाने का कार्य नाट्यशाला के वरिष्ठ सदस्य जितेंद्र खेरा एडवोकेट को सौंपा गया। चुनाव से पूर्व बैठक में उपस्थित सभी सदस्यों ने जय श्री राम नगर नाट्यशाला के सतंभ रहे स्व. श्री विनोद धमीजा व नाट्यशाला के हांस्य कलाकार गोपाल नागपाल उर्फ गोप्पा के आकस्मिक निधन पर दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। बैठक में वर्ष 2011-12 के लिए इस बार प्रधान पद के लिए सर्वसम्मति से प्रमोद कुमार सोनी को चुना गया तथा औम बाबा को नाट्यशाला का सरंक्षक बनाया गया। पम्मी वधवा व राकेश शर्मा को सरप्रस्त बनाया गया है और वरिष्ठ उपप्रधान प्यारेलाल सेठी, उपप्रधान विजय कुमार गुप्ता, सचिव औम प्रकाश शर्मा, सहसचिव जोनी व युद्धिष्टर मित्तल, कोषाध्यक्ष संजय चलाना, मुख्यमंच सचिव ब्रिजलाल महेंदु, सहायक मंच सचिव राजेश हाकू, संजीव शाद को बनाया गया। जबकि नाट्यशाला का मुख्य निर्देशक मा. के दिलावर व वासदेव मैहता, सहायक निर्देशक बलजिंद्र सिंह व नवनीत धमीजा को चुना गया। सीनटी निर्देशक लालचंद लाला, बॉबी, राजेंद्र कुमार, हमीद खान को बनाया गया तथा नाट्यशाला के सदस्य पिन्टृू मोंगा को पीआरओ, राहुल धमीजा को ऑडिटर व विष्णू, दविंद्र जसूजा, कपिल बांसल को स्टेज स्टोर कीपर और अमित मैहता को स्टोर इंचार्ज बनाया गया है। मुरारीलाल गर्ग को नाट्यशाला का पुरोहित नियुक्त किया गया है जबकि अधिवक्ता जितेंद्र खेरा को लीगल एडवाईजर बनाया गया है। बैठक में नवनियुक्त प्रधान प्रमोद कुमार सोनी ने नाट्यशाला के सभी सदस्यों को कहा कि नाट्यशाला के कार्यों के लिए पूरा सहयोग करेंगे। नाट्यशाला के सरंक्षक औम बाबा ने सभी सदस्यों को रामलीला व दशहारा पर्व धूमधाम से मनाने के लिए प्रेरित किया और नाट्यशाला को अपने निजि कोष से 11 हजार 101 रूपए की राशि व नाट्यशाला के मंच पर पांच स्व. अवार्ड तथा नाट्यशाला के 5 सदस्यों को उनके द्वारा अच्छा कार्य करने पर 500 -500 रूपए का नकद पुरस्कार देने की घोषणा की। बैठक में उपस्थित सभी सदस्यों ने नाट्यशाला की परंपरा अनुसार बाजार से दान एकत्रित करने से पूर्व अपने निजि कोष से 45 हजार रूपए की राशि नाट्यशाला के सहयोग के लिए दी। नाट्यशाला के प्रधान प्रमोद सोनी ने सभी सदस्यों को बताया कि रामलीला की रिहर्सल 12 अगस्त बुधवार से पंजाबी धर्मशाला में रात्रि 9 बजे से लेकर 11 बजे तक हुआ करेगी। सभी कलाकार समय पर पहुंचे।
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बैटरी फटने से युवक घायल
डबवाली(यंग फ्लेम) चौटाला रोड पर स्थित बीएसएनएल के कार्यालय में जनरेटर का बैंटरा फटने से जनरेटर ऑपरेटर के घायल होने का समाचार है। स्थानीय राजकीय अस्पताल में उपचाराधीन राम भगत पुत्र हवा सिंह ने बताया कि वह बीएसएनएल के कार्यालय में जनरेटर ऑपरेटर का कार्य करता है और वह मंगलवार प्रात: जब वह जनरेटर का सेल्फ लगा रहा था कि अचानक जनरेटर पर लगा बैंटरा एक जोरदार धमाके के साथ फट गया। जिससे बैंटरे के टूकड़े व तेजाब उसके चेहरे पर लगे और वह घायल हो गया। धमाके की आवाज सुनकर कार्यालय में उपस्थित कर्मचारी वहां एकत्रित हो गए और उसे घायलावस्था में डबवाली के राजकीय अस्पताल में उपचार के लिए दाखिल करवाया।
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कांग्रेसियों ने भारत छोड़ो आंदोलन की वर्षगांठ मनाई
डबवाली (यंग फ्लेम)कांग्रेस पार्टी हल्का डबवाली ने मंगलवार 9 अगस्त को भारत छोड़ो आन्दोलन की वर्षगांठ पर स्वतन्त्रता आन्दोलन मे भाग लेने वाले स्वतत्रता सेनानीयो को याद किया।
कांग्रेस कार्यालय मे दरबारा सिंह की अध्यक्षता मे हुई बैठक में वक्ताओ ने कहा कि आज ही के दिन सन 1942 में राष्ट्रपिता महात्मा गाधी के आवहन पर देशभर मे अंगेजो भारत छोड़ो आन्दोलन की शुरूआत की गई जिसमे देश के नागरीको ने बढचढकर भाग लिया, उन्ही लोगो की कुर्बानी व संघर्ष के चलते आज हम आजाद भारत मे सांस ले रहे है। भारत छोड़ो आन्दोलन एक ऐसा जनआन्दोलन बना जिससे मजबूर होकर 5 वर्ष बाद ही अंग्रेजो को भारत छोडऩा पड़ा। वक्ताओं ने आगे कहा कि हालांकि स्वतंत्रता आन्दोलन की शुरूआत सन 1846 में ही हो गई थी लेकिन आन्दोलनकारी टुकड़ीयो मे बंटे हुए थे, इसलिए हजारो की गिनती मे कुर्बानी देने के बाद भी सफलता नहीं मिली थी, राष्ट्रपिता महात्मा गाधी ने देश को एकसुत्र मे पिरोकर इस आन्दोलन की शुरूआत की। इस अवसर पर लोकसभा क्षेत्र सिरसा से युवा कांग्रेस अध्यक्ष अमित सिहाग, कर्मचन्द शर्मा, ब्लाक डबवाली के प्रधान,ब्लाक औढां के प्रधान जगसीर सिंह मिठड़ी,ब्लाक मण्डी डबवाली के प्रधान पवन गर्ग, पूर्व शहरी प्रधान नवरतन बांसल, बख्तावर मल दर्दी, व्यापार मण्डल से ईन्द्र जैन, प्रकाश चन्द बांसल, विधानसभा हल्का डबवाली के युवा उपाध्यक्ष विजय सहारण, ब्लाक डेलीगेट संजय मिढा,शहरी युवा प्रधान अमन भारद्वाज, डा़ भारत भुषण, परमजीत सिंह माखां, पार्षद विनोद बांसल, औम बागड़ी, सुरजीत चावला, राकेश वाल्मिकी, मा.जगदीश शर्मा, राजेन्द्र सिंह गंगा, बलकरण सरपंच मटदादु, सुन्दर कण्डा, रविन्द्र बिन्दु,गुरतेज सिंह सोनी, बिश्म्बर दयाल मेहता, बनारसीदास, शिवनारायण मोटन, मनवीर मान, बिमला पुहाल, पवन रेगर, विक्की बांसल, ईन्द्र शर्मा, प्रदीप सहारण, इकबाल सरपंच मलिकपुरा, गुरचरण सिंह सरपंच चटठा, तेजासिंह सरपंच माखां, जसकरण भाटी, सुरजभान सिंगला औढां, भोला प्रधान जोगेवाला, राजदेवी सांवतखेड़ा, मिठुसिंह सरपंच खोखर,जगसीर सिंह सरपंच जगमालवाली,जितेन्द्र खैरा वकील,कुलवन्त सिंह वकील,ईन्द्रजीत सिंह वकील,भुपेन्द्र सूर्या वकील सहीत सैंकड़ो की संख्या मे कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित थे।
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रविवार, 7 अगस्त 2011
पीएमओ कार्यालय भी कर रहा है आरटीआई का उल्लंघन
सिरसा, 7 अगस्त। सूचना का अधिकार लागू हुए छह साल हो गए हैं मगर अभी तक इस कानून को लेकर अधिकारी गंभीर नहीं है। यहां तक की देश का प्रमुख विभाग पीएमओ (प्रधानमंत्री कार्यालय) भी इसे लेकर गंभीर नहीं है और वहां भी कानून की उल्लंघना की जा रही है। सिरसा निवासी पवन पारीक एडवोकेट ने पीएमओ कार्यालय से आरटीआई के तहत जानकारी मांगी थी कि सोनिया गांधी को राष्ट्रीय सलाहकार परिषद का अध्यक्ष किस आधार पर बनाया गया है तथा परिषद का गठन किस उद्देश्य के लिए किया हुआ है। यह पूरा मामला पीएमओ से संबंधित है, लिहाजा उन्होंने पीएमओ कार्यालय को ही 25 जून को आवेदन किया था। जुलाई माह में पवन पारीक के पास पीएमओ कार्यालय से पत्र आया कि उक्त जानकारी के लिए उनका आवेदन पत्र राष्ट्रीय सलाहकार परिषद के पास भिजवा दिया है और यह कहा कि उक्त जानकारी परिषद की ओर से केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी नई दिल्ली उपलब्ध करवाएगा। इसके उल्ट सलाहकार परिषद ने भी आवेदनकर्ता को एक पत्र भेजा है जिसमें साफ उल्लेख है कि उक्त जानकारी पीएमओ कार्यालय से संबंधित है और वही जानकारी मुहैया करवाएगा। इससे साफ है कि पीएमओ कार्यालय बिना आवेदन को पढ़े ही दूसरे विभाग को अग्रेसित कर देता है जो आरटीआई का उल्लंघन तथा आवेदक को परेशान करने वाला कदम है। उनका कहना है कि पीएमओ कार्यालय ने आरटीआई की धारा 6 (3) का हवाला देकर दूसरे विभाग को आवेदन पत्र स्थानांतरित किया है जबकि इस धारा का प्रयोग करने के क्रम में भारत सरकार, कार्मिक, लोक शिकायत तथा पेंशन मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के कार्यालय ज्ञापन संख्या 10-2-2008 आईआर दिनांक 12 जून 2008 के तहत जारी किए गए प्रावधानों का अनुपालन किया जाना चाहिए जो कि इस प्रकरण में पीएमओ द्वारा यह अनुपालना नहीं की गई है। अब उन्होंने दोबारा से पीएमओ कार्यालय को पत्र भेजा है जिसमें मांगी गई जानकारी जल्द मुहैया करवाने तथा अन्य किसी विभाग को पत्र हस्तानांतरित न करने की मांग की गई है।
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RTI एक्ट 2005,
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शनिवार, 6 अगस्त 2011
मासूम बच्चों की जिंदगी खतरे में, प्रशासन मौन कभी भी हो सकती है बड़ी दुर्घटना
डबवाली (यंग फ्लेम) क्षेत्र में चल रहे लगभग दर्र्जन भर प्
राइवेट स्कूलों में बच्चों को लेकर जाने वालेे इन दिनों खस्ताहाल व पुराने मॉडल के हैं। इन वाहनों में मासूमों की जिंदगी सुरक्षित नहीं है। स्कूली वाहनों में सुरक्षा के मापदंड भी पूरे नहीं किए गए है। इन वाहनों में प्राथमिक उपचार किट तो उपलब्ध तो होनी ही क्या थी, बल्कि इन वाहनों में अग्नि शमन यंत्र भी उपलब्ध नहीं है। वैसे कुछ एक वाहनों को छोड़ दिया जाए तो बाकि सभी वाहनों बच्चों को ले जाने के ज्यादातर मापदंड़ों पर खरे नहीं उतरते हैं। ज्यातातर वाहन तो इस समय अव्यवस्थायों के शिकार हैं तथा दयनीय हालात से गुजर रहे है। इन स्कूलों में शिक्षण करने वाले विद्यार्थियों को उनके गंतव्य से लेकर स्कूल पंहुचने का जिम्मा उठाने के लिए मारूति वन का प्रयोग किया जा रहा है। उन वैनों में छोटे छोटे बच्चों को पशुओं की भांति ठुंसा जाता है। इतना ही नहीं इन वैनो में निर्धारित मापदंड़ों को ठेंगा दिखाते हुए इनमेें घरेलू गैस सिलैंडर प्रयोग किए जाते हैं। घरेलू गैस के प्रयोग से किसी भी समय हादसा हो सकता है। यह गाडिय़ां 10-15 वर्ष पुरानी हैै। यहां तक कि इन गाडिय़ों का बीमा भी नहीें करवाया गया है। कई वाहनों के पीछे शिकायत नम्बर लिखना तो दूर की बात है, जबकि इन वाहनों की नम्बर प्लेट ही नहीं है। कई वाहन चालक गंतव्य से स्कूल तक पंहुचने की जल्दी में गाड़ी को ओवर स्पीड से चलाते हैं, जिसकी वजह से किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकताहै। कई वाहनों पर न तो पीला रंग कि या गया है और न ही स्कूल का नाम अंकित है जिससे यह पता नहीं चलता है कि यह वाहन स्कूल का है या कोई अन्य व्यवासयिक है। वहीं इन स्कूली वाहनों में स्वार मासूमों की जिंदगी पर हर समय खतरे की तलवार लटकी रहती है। जबकि स्कूल प्रशासन अभिभावकों से पूरा वाहन खर्च वसूल करता है, तो व्यवस्था को दुरूस्त करने की उनकी जिम्मेवारी बनती है। जिला प्रशासन को इन वाहनों की ओर ध्यान देना चाहिए ताकि मासूमों की जिंदगी दांव पर लगने से बच जाए।
राइवेट स्कूलों में बच्चों को लेकर जाने वालेे इन दिनों खस्ताहाल व पुराने मॉडल के हैं। इन वाहनों में मासूमों की जिंदगी सुरक्षित नहीं है। स्कूली वाहनों में सुरक्षा के मापदंड भी पूरे नहीं किए गए है। इन वाहनों में प्राथमिक उपचार किट तो उपलब्ध तो होनी ही क्या थी, बल्कि इन वाहनों में अग्नि शमन यंत्र भी उपलब्ध नहीं है। वैसे कुछ एक वाहनों को छोड़ दिया जाए तो बाकि सभी वाहनों बच्चों को ले जाने के ज्यादातर मापदंड़ों पर खरे नहीं उतरते हैं। ज्यातातर वाहन तो इस समय अव्यवस्थायों के शिकार हैं तथा दयनीय हालात से गुजर रहे है। इन स्कूलों में शिक्षण करने वाले विद्यार्थियों को उनके गंतव्य से लेकर स्कूल पंहुचने का जिम्मा उठाने के लिए मारूति वन का प्रयोग किया जा रहा है। उन वैनों में छोटे छोटे बच्चों को पशुओं की भांति ठुंसा जाता है। इतना ही नहीं इन वैनो में निर्धारित मापदंड़ों को ठेंगा दिखाते हुए इनमेें घरेलू गैस सिलैंडर प्रयोग किए जाते हैं। घरेलू गैस के प्रयोग से किसी भी समय हादसा हो सकता है। यह गाडिय़ां 10-15 वर्ष पुरानी हैै। यहां तक कि इन गाडिय़ों का बीमा भी नहीें करवाया गया है। कई वाहनों के पीछे शिकायत नम्बर लिखना तो दूर की बात है, जबकि इन वाहनों की नम्बर प्लेट ही नहीं है। कई वाहन चालक गंतव्य से स्कूल तक पंहुचने की जल्दी में गाड़ी को ओवर स्पीड से चलाते हैं, जिसकी वजह से किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकताहै। कई वाहनों पर न तो पीला रंग कि या गया है और न ही स्कूल का नाम अंकित है जिससे यह पता नहीं चलता है कि यह वाहन स्कूल का है या कोई अन्य व्यवासयिक है। वहीं इन स्कूली वाहनों में स्वार मासूमों की जिंदगी पर हर समय खतरे की तलवार लटकी रहती है। जबकि स्कूल प्रशासन अभिभावकों से पूरा वाहन खर्च वसूल करता है, तो व्यवस्था को दुरूस्त करने की उनकी जिम्मेवारी बनती है। जिला प्रशासन को इन वाहनों की ओर ध्यान देना चाहिए ताकि मासूमों की जिंदगी दांव पर लगने से बच जाए।
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14 अगस्त तक वितरित कर दी जाएगी पेंशन: डा. ख्यालिया
डबवाली (यंग फ्लेम)उपायुक्त डा. युद्धबीर सिंह ख्यालिया ने पेंशनधारकों के खाते खोलने व स्मार्ट कार्ड बनाने के कार्य की स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि जिला में 1,29,574 पेंशनधारकों के बैंकों में खाते खोले जा चुके हैं। खाते खोलने का कार्य अब तक 97.61 प्रतिशत पूरा हो चुका है। इसके साथ-साथ जिला में 1,12,060 खाताधारकों के स्मार्ट कार्ड भी बनाए जा चुके हैं और इन सब स्मार्ट कार्ड धारकों के खातों में पेंशन की राशि भी जमा करवा दी गई है। जिला में 14 अगस्त तक पेंशन वितरण करने का शत-प्रतिशत कार्य पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि फिनो कंपनी द्वारा जिला में अब तक 157 गांवों में शत-प्रतिशत पेंशनधारकों को पेंशन भी वितरित कर दी गई है। रानियां ब्लॉक में पेंशन वितरण करने का शत-प्रतिशत कार्य पूरा कर लिया गया है। जिला के अंतर्गत आने वाले पांच नगर परिषद व नगरपालिकों के 28 वार्डों में पेंशन वितरित करने का कार्य शत-प्रतिशत पूरा कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि जिला में जो 3168 पेंशनधारक बिना खाता खुलवाए हुए रहे हैं उनमें से कुछ की तो मृत्यु हो चुकी है। जिला में पेंशनधारकों के बैंकों में खाते खुलवाने के लिए खंड मुख्यालयों एवं नगरपालिका एवं नगर परिषद मुख्यालयों पर 12 स्थाई एनरोलमेंट केंद्र बनाए गए हैं। पेंशनधारक के खाते या स्मार्ट कार्ड बनाने संबंधी गलती को सुधारने के लिए स्थानीय जिला रैडक्रॉस सोसायटी के कार्यालय में करेक्शन सेंटर स्थापित किया गया है जिसके साथ-साथ एनरोलमेंट संबंधी कार्यों को सुचारू रूप से चलाने के लिए स्थानीय यूथ हॉस्टल में कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है जिसमें पेंशन संबंधी कार्यों से जुड़े सभी विभागों और कंपनियों के कर्मचारी, अधिकारी एक साथ बैठकर कार्य कर रहे हैं।
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रक्तदान कर दी श्रद्धांजलि
डबवाली (यंग फ्लेम)लांयस क्लब सुप्रीम द्वारा आज गिरधारी लाल वधवा मैमोरियल ट्रस्ट के सहयोग से उनकी पुण्यतिथि पर जीएल वधवा एजूकेशन सेंटर पर एक रक्तदान शिविर का आयोजन किया। जिसमें सिरसा से आई शिव शक्ति ब्लड बैंक की टीम ने रक्त एकत्रित किया।
इस मौके पर श्री गिरधारी लाल वधवा को क्लब सदस्यों एवं उनके परिवार सदस्यों ने श्रद्धां-सुमन अर्पित किए। रक्तदान शिविर में कुल 44 यूनीट रक्त एकत्रित किया गया। जिसमें 4 महिलाओं ने भी रक्तदान किया। इस मौके पर लायंस क्लब सदस्य सुमन कामरा, प्रवीन गुप्ता, प्रोमीला रानी, प्रधान गुरदीप कामरा, सचिव राज मिढ़ा, नरेश गुप्ता, बीएस अरोड़ा, योगेश मिढ़ा, विकास जिंदल, सुदेश वर्मा, परमप्रीत सिंह सेठी ने भी रक्तदान किया। इस अवसर पर श्रीमति कंचन वधवा, उनके सुपुत्र अरिहंत वधवा, व राकेश वधवा ने रक्तदान कर अपने पिता स्व. गिरधारी लाल वधवा जी को श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर समाज सेवी पम्मी वधवा, श्रीमति पूनम वधवा, विजय वधवा, श्रीमति नीतू वधवा, देव कुमार शर्मा, राम लाल बागड़ी, औम प्रकाश बाबा, वासदेव मेहता भी उपस्थित थे। अंत में लायंस प्रधान गुरदीप कामरा व राकेश वधवा ने सभी रक्तदानियों का आभार व्यक्त किया।
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विभाग की लापरवाही से लगा छात्र को करंट
डबवाली (यंग फ्लेम)गत दिवस आई बरसात से बिजली के खंभे में स्पार्किंग होने से गांव गोदीकां के स्कूल में पढऩे वाले छात्र को करंट लग गया। जानकारी अनुसार गोदीकां निवासी देवेन्द्र पुत्र मदनलाल जो कि गांव के स्कूल में 10वीं कक्षा में पढ़ता है। गत दिन वह स्कूल की छुट्टी होने के बाद अपने अन्य साथियों के साथ खेलता हुआ घर जा रहा था, कि जैसे ही वह खेलते-खेलते गांव में बने रैस्ट हाऊस के पास पहुंचा तो उसके पास एक बिजली का खंभा था, जिसके चारों तरफ बरसाती पानी पड़ा था। देवेन्द्र खंभे के पास से गुजरा और उसे करंट आ गया। उसने बचाव के लिए शोर मचाया तो आस-पास में मौजूद ग्रामिणों ने मौके पर पहुंचकर देवेन्द्र को गांव के एक निजी चिकित्सक के पास पहुंचाया, जहां उसकी हालत को गंभीर देखते हुए उसे मैट्रो हॉस्पीटल सिरसा उपचार हेतू भेज दिया गया। अब देवेन्द्र की हालत सही बताई जा रही है। वहीं गोदीकां के ग्रामिणों ने बताया कि यह सब बिजली विभाग के कर्मचारियों की लापरवाही से हुआ है, बिजली विभाग के कर्मचारियोंं को खंभे की समस्या के बारे में कई बार अवगत करवाया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।
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कालुआना फलडी नहर का निर्माण शीघ्र ही करवाया जायेगा-डॉ. सिंह
डबवाली (यंग फ्लेम)इण्यिन नेशनल लोकदल के लोग अपने खिलाफ उनके शासन के दौरान किये गये भ्रष्टाचार के आरोप तय होने पर और कोर्ट में चल रहे केसो से लोगो का ध्यान बंटाने के लिए दुष्प्रचार करके जनता को गुमराह कर रहे है। यह बात ड्डमुख्यमन्त्री हरियाणा चौधरी भुपेन्द्र सिंह हुडडा के पूर्व विशेष कार्यधिकारी डा. के.वी. सिंह ने प्रेस विज्ञप्ति में कही। उन्होने कहा कि इण्डियन नेशदल लोकदल के राज के समय हजारो एकड़ भुमि अपने निजी ट्रस्ट व अन्य अपने चेहते ट्रस्टो को बांट दी थी जोकि नगरपालिकाओ तथा पंचायतो से सम्बन्धित थी। ट्रस्ट द्वारा बनाई गई इमारतो मे इनेलो के कार्यालय चल रहे है दुसरी तरफ राजीव गांधी ट्रस्ट को पंचायत द्वारा जनहित में कानुन के दायरे मे आंखो के अस्पताल के लिए भुमि लीज पर दी गई है। इस अस्पताल के बनने से इलाके के लोगो को इलाज की बेहतर सुविधा मिलेगी व लोगो को रोजगार भी मिलेगा। आज हरियाणा की भुमि अधिग्रहण निती सर्वश्रेष्ठ निती है फिर भी हरियाणा के मुख्यमन्त्री चौधरी भुपेन्द्र सिंह हुडडा समय की जरूरतो के अनुसार भुमि अधिग्रहण निती में संशोधन करते रहते है। मुख्यमन्त्री हरियाणा जानते है कि किसानो की रोजी रोटी भुमि से ही चलती है इसीलिए खेदड़ थर्मल पलांट के विस्थापित 122 लोगो को सरकारी नौकरी देकर हरियाणा सरकार ने देश मे एक मिसाल कायम की है।
हरियाणा सरकार की नितीयो के चलते हरियाणा के सभी विपक्षी दलो का जनाधार कम हो रहा है। इसी को देखकर इण्यिन नेशनल लोकदल के लोग बौखलाकर लोगो में दुष्प्रचार कर रहे है। डा.सिंह गांव रिसालियाखेड़ा मे महावीर झटवाल के निवास स्थान व मोडी में कश्मीरा सिंह सरपंच के निवास स्थान पर गये तथा हल्का के लोगो की समस्याऐं सुनी कुशलक्षेम पुछा तथा लोगो आश्वासन दिया कि इस हल्के के 15 गांवो की सिंचाई समस्या को हल करने के लिए घघर नदी से कालुआना फलडी नहर का निर्माण शीघ्र ही करवाया जायेगा। इस अवसर पर गांव रिसालियाखेड़ा में गिरधारी लाल सिलग, पालाराम सोनी, जगदीश कुडिय़ा व उनके साथीयो ने कांगेस पार्टी मे आस्था व्यक्त की तथा डा.सिंह को साथ देने का विश्वास दिलाया। डा.सिंह ने इनका स्वागत किया तथा विश्वास दिलाया कि पार्टी मे इनका पुरा मान सम्मान होगा। इस अवसर पर उनके साथ ब्लाक के प्रधान पवन गर्ग, सतपाल गेदर,साहबराम सरपंच,महावीर सोढा,अमरचन्द शर्मा, लाल चन्द मुन्नावाली,विजय सहारण उप प्रधान हल्का डबवाली,विनोद सरपंच गोदीकां,गांधीसिंह,मास्टर हेतराम,सेठ गोविन्दराम,नरेश सहित सेंकड़ो कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित थे।
गुरुवार, 4 अगस्त 2011
स्प्रे पीने से किसान की मौत
डबवाली (यंग फ्लेम)उपमण्डल के गांव लखुआना में संदिग्ध परिस्थितियों में 25 वर्षीय किसान की मौत हो गई। मृतक की पहचान अनील कुमार पुत्र सूरजा राम निवासी लखुआना के रूप में हुई है। पुलिस को दिए ब्यान में गांव लखुआना निवासी मृतक के चचेरे भाई सुशील कुमार ने बताया कि मंगलवार शाम करीब 7 बजे उसकी ताई कलावती ने उसे जानकारी दी कि अनिल ने खांसी की दवा के भ्रम में स्प्रे पी ली है। जिससे उसकी तबीयत बिगड़ गई है। सूचना पाकर वह मौका पर पहुंचा। उस समय अनिल जमीन पर बेहोश पड़ा था और उसके मुंह से झाग निकल रही थी। वह उसे बेहोशी का हालत में तुरंत उपचार के लिए डबवाली के एक निजी अस्पताल में ले आया और इसकी जानकारी गांव के सरपंच रामजी लाल तथा ब्लाक समिति सदस्य वेदपाल डांगी को दी। वे लोग भी अस्पताल में पहुंच गए लेकिन जहर के प्रभाव के कारण कुछ देर बाद ही अनिल ने दम तोड़ दिया।
मृतक के चचेरे भाई सुशील ने बताया कि उसके ताया सूरजा राम के घर कोई संतान न होने से उसने अपनी बहन के बेटे अनिल को गोद लिया था और कुछ वर्ष पूर्व उसके ताया का देहांत होने पर सारे घर की जिम्मेदारी अनिल के कंधों पर आ गई थी और वह अपनी 4 एकड़ जमीन में खेतीबाड़ी कर अपना व अपने परिवार का गुजर बसर कर रहा था उसने बताया कि अभी दो साल पूर्व राजस्थान के गांव सात कैडी में अनील की शादी हुई थी। उसके पांच माह की एक बेटी रितू है। मामले की जांच कर रहे एएसआई आत्मा राम ने बताया कि मृतक के चचेरे भाई सुशील के उपरोक्त ब्यान के आधार पर दफा 174 सीआरपीसी के तहत इत्तफाकिया मौत की कार्रवाई करते हुए अनिल के शव का बुधवार को डबवाली के सरकारी अस्पताल से पोस्टमार्टम करवाने के बाद उसे उसके परिजनों को सौंप दिया गया।
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बाजारों में धड़ल्ले से हो रहा है पॉलीथीन का प्रयोग
डबवाली (यंग फ्लेम)सरकार द्वारा प्रदेश में पॉलीथीन के प्रयोग पर पूर्ण रूप से पाबंदी लगाई गई है। लेकिन शहर के बाजारों में इसका प्रयोग धड़ल्ले से किया जा रहा है। शायद इन दुकानदारों पर सरकार के आदेशों का कोई प्रभाव नहीं है। इसलिए ये दुकानदार इन आदेशों की धज्जिायां उड़ा रहे है। इस क्रम में पिछले दिनों न्ररपालिका द्वारा पॉलीथीन का प्रयोग रोकने को लेकर अभियान चलाया गया था और इस अभियान के तहत दर्जन भर दुकानदारों के चालान भी काटे गए थे और उन्हे चेतावनी भी थमाई गई थी और तो और जुर्माना भी किया गया था।
इन सब एहतिआतों के बावजूद बाजारों में पॉलीथिन का थोक में प्रयोग किया जा रहा है और सरकार के आदेशों की धज्जिायां उड़ाई जा रही हैं। पिछले दिनों शहर में नगरपालिका द्वारा तमाम दुकानदारों के चालान काटे जाने पर पॉलीथिन का प्रयोग कुछ थम सा गया था और दुकानदारों को रिसाइकिल पोलीथिन का प्रयोग करने का आदेश दिया गया था। लेकिन इसके बाद मार्केट में भले ही रिसाइकिल पोलीथिनों का प्रयोग कुछ दिन हुआ हो पर सब्जी मंडी व बाजारों में इनका प्रयोग धड़ल्ले से किया जा रहा है।इस बारे में शहर निवासी पवन कुमार ने बताया कि पॉलीथीन से उन्हें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। लोगों द्वारा पॉलीथीन का प्रयोग करने के बाद उन्हें गलियों में फैंक दिया जा है जो कि हवा के साथ उड़कर लोगों के घरों व सीवरेज आदि में चला जाता है जिस कारण लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
इस बारे में जब एसडीएम मुनीश नागपाल से बात की गई तो उन्होंने कहा कि पॉलीथीन के प्रयोग पर न्यायलय के आदेशानुसार प्रतिबंध लगाया गया है। इस बारे में नगरपालिका सचिव के निर्देश दिए गए है कि और जो दुकानदार पॉलीथीन का प्रयोग कर रहे है उनके चालान आदि काटे जाए। उन्होंने लोगों से भी पॉलीथीन का प्रयोग न करने की अपील की व कहा कि बाजार से सामान लाते समय वह अपना थैला साथ लेकर जाए।
जनता को गुमराह कर रहा है इनेलो: केवी सिंह
डबवाली (यंग फ्लेम)मुख्यमंत्री के पूर्व ओएसडी एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता डॉ् केवी सिंह ने कहा है कि विपक्षी पार्टी इनेलो मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की बढती लोकप्रियता से बौखला गया है और इसी कारण मुख्यमंत्री पर अनाप-शनाप आरोप लगाए जा रहे हैं। आज जारी एक बयान में डॉ. केवी सिंह ने कहा कि गुडग़ांव की जिस जमीन के अधिग्रहण को इनेलो मुद्दा बना रहा है, वह जमीन किसानों की सहमति से अधिग्रहण की गई थी। कांग्रेस सरकार ने आज तक एक ईंच जमीन किसी बिल्डर को नहीं दी है। जमीन विकास के लिए अधिग्रहण की जाती है और इसकी एवज में किसानों को पूरा मूल्य तथा नौकरी दी जा रही है। इनेलो शासन में जरूर किसानों को धमकाकर जमीन ली जाती थी जो बाद में बिल्डर्स को बेच दी जाती थी, मगर कांग्रेस शासन में ऐसा नहीं है। मुख्यमंत्री हुड्डा की नीति पाक-साफ है और हरियाणा की भूमि अधिग्रहण नीति की प्रशंसना अन्य प्रदेशों में हो रही है। डॉ. सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री की सोच विकासपरक है। सिरसा जिला में अब तक बिना भेदभाव के रिकार्ड विकास कार्य हुए हैं। अबूबशहर में कीनू प्रसंस्करण प्लांट लगाया गया है जिससे अब सिरसा का कीनू विदेशों में जाने लगा है तथा किसानों को पूरा मूल्य मिल रहा है। इसी तरह सिरसा में ओवरब्रिज बनाया गया है। देवीलाल विश्वविद्यालय को करोड़ों की ग्रांट दी गई है जबकि इनेलो शासन में इतने काम नहीं हुए थे।
62676 विद्यार्थियों को मिला आरटीई से लाभ
डबवाली (यंग फ्लेम) राज्य सरकार के निर्णयानुसार प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों में आठवीं तक की कक्षाओं में पढऩे वाले सभी विद्यार्थियों को नि:शुल्क यूनीफॉर्म उपलब्ध करवाई जा रही है। सिरसा जिला में इस योजना के तहत 2 करोड़ 50 लाख 70 हजार रुपए की राशि खर्च करके 62678 सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों को वर्दी उपलब्ध करवाई जा चुकी हैें जिसमें टाई एवं बैज भी शामिल है। शिक्षा के अधिकार (राइट टू एजुकेशन) की अनुपालना में राज्य सरकार द्वारा पहली बार शुरू की गई इस योजना से सिरसा जिला में पहली से आठवीं तक की कक्षाओं में पढऩे वाले 31650 छात्रों को और 31026 छात्राओं को लाभ हुआ है। उक्त जानकारी देते हुए डा. युद्धबीर सिंह ख्यालिया ने बताया कि उक्त योजना के तहत प्रत्येक विद्यार्थी को प्रतिवर्ष 400 रुपए तक की डे्रस उपलब्ध करवाई गई। स्कूल स्तर पर 300 विद्यार्थियों तक स्कूलों में 12 सदस्यीय स्कूल मैनेजमेंट कमेटी का गठन किया गया है और 300 से 500 तक की विद्यार्थियों की संख्या वाले स्कूलों में 1500 सदस्यीय कमेटियों का गठन किया गया है। जिला मौलिक अधिकारी मधु मित्तल ने बताया कि विभाग द्वारा सरकारी स्कूलों में पढऩे वाले अनुसूचित जाति के बच्चों को पहले से ही नि:शुल्क वर्दी उपलब्ध करवाई जा रही है। चूंकि अनुसूचित जाति के बच्चों को पहले जिस कलर की वर्दी उपलब्ध करवाई गई है उसी कलर की वर्दी सामान्य वर्ग के छात्रों को उपलब्ध करवाई गई है। इस योजना के तहत वर्दी का कलर चेेंज करने का अधिकार स्कूल स्तर पर गठित स्कूल मैनेजमेंट कमेटी को दिया गया है। कमेटी आगे से जिस भी कलर की वर्दी छात्रों के लिए खरीदना चाहेगी वे खरीद सकती है। उन्होंने बताया कि राइट टू एजुकेशन के तहत अब पूरे देश में पहली से आठवीं तक की कक्षाओं को सर्वशिक्षा अभियान के तहत शामिल किया गया है।
इंडिया यंग, लीडरशिप ओल्ड!
कांग्रेस में 'प्रजातांत्रिक राजशाही'
पिछले कुछ महीनों में यंगिस्तान को तवज्जो मिलने की उम्मीदें बंधी थीं। युवाओं को यह भाव इसलिए नहीं मिला है, कि देश का उमरदराज नेतृत्व उन पर दांव लगाना चाह रहा है, इसके पीछे सीधा कारण दिखाई पड़ रहा है कि देश में 18 से 30 साल तक के करोड़ों मतदाताओं को लुभाने की गरज से साठ की उमर पार कर चुके नेताओं ने यह प्रयोग किया है कि युवाओं को आगे कर युवा मतदाताओं को अपने से जोड़ा जाए। जब लाल बत्ती की बात आती है तो कमान युवाओं के हाथों से खिसलकर फिर साठ की उमर के कांधों पर चली जाती है।
कहने को तो सभी सियासी पार्टियों द्वारा युवाओं को आगे लाने और उनके हाथ में कमान देने की बातें जोरदार तरीके से की जाती हैं, किन्तु विडम्बना ही कही जाएगी कि सियासी दल युवाओं को आगे लाने में कतराती ही हैं। कांग्रेस में नेहरू गांधी परिवार की पांचवी पीढ़ी राहुल गांधी को आगे लाया जा रहा है, वह भी इसलिए कि उनके नाम को भुनाकर राजनेता सत्ता की मलाई काट सकें। वरना अन्य राजनैतिक दल तो इस मामले में लगभग मौन ही साधे हुए हैं।
जितने भी युवा चेहरे आज राजनैतिक परिदृश्य में दिखाई पड़ रहे हैं उनमें से अधिक को 'अनुकंपा नियुक्ति' मिली हुई है। अपने पिता की सींची राजनैतिक जमीन को 'सिंपेथी' वोट के जरिए ये युवा काट रहे हैं, वरना कम ही एसे युवा होंगे जिन पर पार्टी ने दांव लगाया हो और वे जीतकर संसद या विधानसभा पहुंचे हों। राजनीति में स्थापित 'घरानों' के वारिसान को ही पार्टी चुनाव में उतारती है और फिर आगे जाकर अपने पिताओं की उंगली पकड़कर ये देश की दशा और दिशा निर्धारित करते हैं। कांग्रेस में युवाओं को आगे लाने के हिमायती सबसे ताकतवर महासचिव राजा दिग्विजय सिंह ने तो मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनावों के दो साल पहले ही अपने पुत्र जयवर्धन को राघोगढ़ से कांग्रेस का प्रत्याशी तय कर दिया है। यह प्रजातांत्रिक राजशाही का नायाब उदहारण माना जाएगा।
कांग्रेस में सोनिया गांधी (65), मनमोहन सिंह (79), प्रणव मुखर्जी (77), ए.के.अंटोनी (71) के साथ पार्टी में नेताओं की औसत उमर 74 साल है। भाजपा भी इससे पीछे नहीं है अटल बिहारी बाजपेयी (87), एल.के.आड़वाणी (84), राजनाथ सिंह (60), एम.एम.जोशी (77) तो सुषमा स्वराज (59) के साथ यहां औसत उमर 73 दर्ज की गई है। वामदलों में सीपीआईएम में प्रकाश करात (64), सीताराम येचुरी (59), बुद्धदेव भट्टाचार्य (67), अच्युतानंदन (88) के साथ यहां राजनेताओं की औसत उमर 72 तो समाजवादी पार्टी में मुलायम सिंह यादव (71), अमर सिंह (55), जनेश्वर मिश्र (77), रामगोपाल यादव (65) के साथ यह सबसे यंग पार्टी अर्थात यहां औसत उमर 61 है।
सियासी पार्टियों में एक बात और गौरतलब होगी कि जितने भी युवाओं को पार्टियों ने तरजीह दी है, वे सभी जमीनी नहीं कहे जा सकते हैं। ये सभी पार्टियों में पैदा होने के स्थान पर अवतरित हुए हैं। इनमें से हर नेता किसी न किसी का 'केयर ऑफ' ही है, अर्थात यंगस्तान के नेताओं को उनके पहले वाली पीढ़ी के कारण ही जाना जाता है। ग्रास रूट लेबिल से उठकर कोई भी शीर्ष पर नहीं पहुंचा है।
पिछली बार संपन्न हुए आम चुनावों के पहले रायशुमारी के दौरान एक राजनेता ने जब अपने संसदीय क्षेत्र में अपने कार्यकर्ताओं के सामने युवाओं की हिमायत की तो एक प्रौढ़ कार्यकर्ता ने अपनी पीड़ा का इजहार करते हुए कहा कि जब मैं 29 साल पूर्व आपसे जुड़ा था तब युवा था, आज मेरा बच्चा 25 साल का हो गया है, वह पूछता है कि आप तब भी आम कार्यकर्ता थे, आज भी हैं, इन 29 सालों में आपको क्या मिला, आज मैं जवान हो गया हूं, तो किस आधार पर नेताजी युवाओं को आगे लाने की बात करते हैं।
दुनिया के चौधरी अमेरिका में युवाओं और बुजुर्गों के बीच अंतर की एक स्पष्ट फांक दिखाई पड़ती है। अमेरिका जैसे विकसित देश में जहां युवा पर्यावरण, जीवनशैली, रहन सहन और पारिवारिक मूल्यों के बारे में पुरानी पीढ़ी से अपने मत भिन्न रखती है, वहीं दूसरी ओर आधुनिक जीवनशैली के मामले में युवाओं द्वारा तेज गति से बदलाव चाहा जाता है। वैसे हमारी व्यक्तिगत राय में हर राजनैतिक दलों में युवाओं और बुजुर्गों के बीच संतुलन और तालमेल होना चाहिए। यह सच है कि उमर के साथ ही अनुभव का भंडार बढ़ता है, पर यह भी सच है कि उमर बढऩे के साथ ही साथ कार्य करने की क्षमता में भी कमी होती जाती है। जिस गति से युवाओं द्वारा कार्य को अंजाम दिया जाता है उसी तरह मार्गदर्शन के मामले में बुजुर्ग अच्छी भूमिका निभा सकते हैं।
कितने आश्चर्य की बात है कि जिस ब्यूरोक्रेसी (अफसरशाही) की बैसाखी पर चलकर राजनेता देश को चलता है, उसकी सेवानिवृत्ति की उम्र साठ या बासठ साल निर्धारित है, किन्तु जब बात राजनेताओं की आती है तो चलने, बोलने, हाथ पांव हिलाने में अक्षम नेता भी संसद या विधानसभा में पहुंचने की तमन्ना रखते हैं, यह कहां तक उचित माना जा सकता है। राजनैतिक क्षेत्र में युवा को अलग तरीके से परिभाषित किया जाता है। अघोषित तौर पर कहा जाता है कि राजनीति में युवा अर्थात 45 से 65 साल। इस हिसाब से राहुल गांधी को अगर 'अमूल बेबी' कहा जाता है तो इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं होना चाहिए। विडम्बना तो देखिए सरकार में काम करने वालों की सेवानिवृत्ति की उम्र निर्धारित है, किन्तु सरकार चलाने वालों की नहीं!
हमारे विचार से महज कुछ चेहरों के आधार पर नहीं, वरन् विचारों के आधार पर युवाओं को व्यापक स्तर पर राजनीति में आने प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। कब्र में पैर लटकाने वालों को अब राहुल गांधी से प्रेरणा लेना चाहिए। जब 41 बसंत देखने वाले राहुल गांधी कैबनेट में शामिल होने से खुद को दूर रखे हुए हैं तो फिर साठ पार कर चुके नेता आखिर लाल बत्ती के लिए जोड़तोड़ क्यों करते हैं। उन्हें भी चाहिए कि वे युवाओं को आगे लाने के हिमायती बनें पर राजा दिग्विजय सिंह जैसे नहीं जो खुद तो राजनीतिक मलाई चखने की कामना रखते हैं और अपने ही पुत्र को चुनाव में उतारने की घोषणा भी कर देते हैं, जबकि अभी न प्रत्याशी चुनाव के लिए समीति बनी है और न ही चुनावों की तारीखों की ही घोषणा हुई है। बुजुर्ग राजनैताओं का नैतिक दायित्व यह बनता है कि वे सक्रिय राजनीति से सन्यास लेकर अब मार्गदर्शक की भूमिका में आएं और युवाओं को ईमानदारी से जनसेवा का पाठ पढ़ाएं तभी गांधी के सपनों का भारत आकार ले सकेगा।
- कांग्रेस में भविष्यदृष्टा रहे तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने इक्कीसवीं सदी को युवाओं की सदी घोषित किया था। उनका मानना था कि इक्कीसवीं सदी में युवाओं के मजबूत कांधों पर भारत गणराज्य उत्तरोत्तर प्रगति कर सकता है। आज सत्ता और शक्ति के शीर्ष केंद्र की बागडोर उनकी अर्धांग्नी श्रीमति सोनिया गांधी के हाथों में है। राजीव पुत्र राहुल भी चालीस को टच कर रहे हैं। इक्कीसवीं सदी का पहला दशक बीत चुका है, पर फिर भी युवा आज भी पार्श्व में ही रहने पर मजबूर हैं। कमोबेश यही आलम भाजपा सहित अन्य राजनैतिक दलों का है। भारत गणराज्य में प्रजातंत्र की सरेआम शवयात्रा निकाली जा रही है। आम जनता प्रजातंत्र के शव पर सर रखकर गगनभेदी करूण रूदन कर रहा है, किन्तु नीति निर्धारकों और विपक्ष में बैठे नेताओं को इसकी आवाज नहीं सुनाई दे रही है। कांग्रेस में युवाओं को आगे लाने के हिमायती सबसे ताकतवर महासचिव राजा दिग्विजय सिंह ने तो मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनावों के दो साल पहले ही अपने पुत्र जयवर्धन को राघोगढ़ से कांग्रेस का प्रत्याशी तय कर दिया है। अपने आप में यह ''प्रजातांत्रिक राजशाही'' का नायाब उदहारण माना जाएगा।
पिछले कुछ महीनों में यंगिस्तान को तवज्जो मिलने की उम्मीदें बंधी थीं। युवाओं को यह भाव इसलिए नहीं मिला है, कि देश का उमरदराज नेतृत्व उन पर दांव लगाना चाह रहा है, इसके पीछे सीधा कारण दिखाई पड़ रहा है कि देश में 18 से 30 साल तक के करोड़ों मतदाताओं को लुभाने की गरज से साठ की उमर पार कर चुके नेताओं ने यह प्रयोग किया है कि युवाओं को आगे कर युवा मतदाताओं को अपने से जोड़ा जाए। जब लाल बत्ती की बात आती है तो कमान युवाओं के हाथों से खिसलकर फिर साठ की उमर के कांधों पर चली जाती है।
कहने को तो सभी सियासी पार्टियों द्वारा युवाओं को आगे लाने और उनके हाथ में कमान देने की बातें जोरदार तरीके से की जाती हैं, किन्तु विडम्बना ही कही जाएगी कि सियासी दल युवाओं को आगे लाने में कतराती ही हैं। कांग्रेस में नेहरू गांधी परिवार की पांचवी पीढ़ी राहुल गांधी को आगे लाया जा रहा है, वह भी इसलिए कि उनके नाम को भुनाकर राजनेता सत्ता की मलाई काट सकें। वरना अन्य राजनैतिक दल तो इस मामले में लगभग मौन ही साधे हुए हैं।
जितने भी युवा चेहरे आज राजनैतिक परिदृश्य में दिखाई पड़ रहे हैं उनमें से अधिक को 'अनुकंपा नियुक्ति' मिली हुई है। अपने पिता की सींची राजनैतिक जमीन को 'सिंपेथी' वोट के जरिए ये युवा काट रहे हैं, वरना कम ही एसे युवा होंगे जिन पर पार्टी ने दांव लगाया हो और वे जीतकर संसद या विधानसभा पहुंचे हों। राजनीति में स्थापित 'घरानों' के वारिसान को ही पार्टी चुनाव में उतारती है और फिर आगे जाकर अपने पिताओं की उंगली पकड़कर ये देश की दशा और दिशा निर्धारित करते हैं। कांग्रेस में युवाओं को आगे लाने के हिमायती सबसे ताकतवर महासचिव राजा दिग्विजय सिंह ने तो मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनावों के दो साल पहले ही अपने पुत्र जयवर्धन को राघोगढ़ से कांग्रेस का प्रत्याशी तय कर दिया है। यह प्रजातांत्रिक राजशाही का नायाब उदहारण माना जाएगा।
कांग्रेस में सोनिया गांधी (65), मनमोहन सिंह (79), प्रणव मुखर्जी (77), ए.के.अंटोनी (71) के साथ पार्टी में नेताओं की औसत उमर 74 साल है। भाजपा भी इससे पीछे नहीं है अटल बिहारी बाजपेयी (87), एल.के.आड़वाणी (84), राजनाथ सिंह (60), एम.एम.जोशी (77) तो सुषमा स्वराज (59) के साथ यहां औसत उमर 73 दर्ज की गई है। वामदलों में सीपीआईएम में प्रकाश करात (64), सीताराम येचुरी (59), बुद्धदेव भट्टाचार्य (67), अच्युतानंदन (88) के साथ यहां राजनेताओं की औसत उमर 72 तो समाजवादी पार्टी में मुलायम सिंह यादव (71), अमर सिंह (55), जनेश्वर मिश्र (77), रामगोपाल यादव (65) के साथ यह सबसे यंग पार्टी अर्थात यहां औसत उमर 61 है।
सियासी पार्टियों में एक बात और गौरतलब होगी कि जितने भी युवाओं को पार्टियों ने तरजीह दी है, वे सभी जमीनी नहीं कहे जा सकते हैं। ये सभी पार्टियों में पैदा होने के स्थान पर अवतरित हुए हैं। इनमें से हर नेता किसी न किसी का 'केयर ऑफ' ही है, अर्थात यंगस्तान के नेताओं को उनके पहले वाली पीढ़ी के कारण ही जाना जाता है। ग्रास रूट लेबिल से उठकर कोई भी शीर्ष पर नहीं पहुंचा है।
पिछली बार संपन्न हुए आम चुनावों के पहले रायशुमारी के दौरान एक राजनेता ने जब अपने संसदीय क्षेत्र में अपने कार्यकर्ताओं के सामने युवाओं की हिमायत की तो एक प्रौढ़ कार्यकर्ता ने अपनी पीड़ा का इजहार करते हुए कहा कि जब मैं 29 साल पूर्व आपसे जुड़ा था तब युवा था, आज मेरा बच्चा 25 साल का हो गया है, वह पूछता है कि आप तब भी आम कार्यकर्ता थे, आज भी हैं, इन 29 सालों में आपको क्या मिला, आज मैं जवान हो गया हूं, तो किस आधार पर नेताजी युवाओं को आगे लाने की बात करते हैं।
दुनिया के चौधरी अमेरिका में युवाओं और बुजुर्गों के बीच अंतर की एक स्पष्ट फांक दिखाई पड़ती है। अमेरिका जैसे विकसित देश में जहां युवा पर्यावरण, जीवनशैली, रहन सहन और पारिवारिक मूल्यों के बारे में पुरानी पीढ़ी से अपने मत भिन्न रखती है, वहीं दूसरी ओर आधुनिक जीवनशैली के मामले में युवाओं द्वारा तेज गति से बदलाव चाहा जाता है। वैसे हमारी व्यक्तिगत राय में हर राजनैतिक दलों में युवाओं और बुजुर्गों के बीच संतुलन और तालमेल होना चाहिए। यह सच है कि उमर के साथ ही अनुभव का भंडार बढ़ता है, पर यह भी सच है कि उमर बढऩे के साथ ही साथ कार्य करने की क्षमता में भी कमी होती जाती है। जिस गति से युवाओं द्वारा कार्य को अंजाम दिया जाता है उसी तरह मार्गदर्शन के मामले में बुजुर्ग अच्छी भूमिका निभा सकते हैं।
कितने आश्चर्य की बात है कि जिस ब्यूरोक्रेसी (अफसरशाही) की बैसाखी पर चलकर राजनेता देश को चलता है, उसकी सेवानिवृत्ति की उम्र साठ या बासठ साल निर्धारित है, किन्तु जब बात राजनेताओं की आती है तो चलने, बोलने, हाथ पांव हिलाने में अक्षम नेता भी संसद या विधानसभा में पहुंचने की तमन्ना रखते हैं, यह कहां तक उचित माना जा सकता है। राजनैतिक क्षेत्र में युवा को अलग तरीके से परिभाषित किया जाता है। अघोषित तौर पर कहा जाता है कि राजनीति में युवा अर्थात 45 से 65 साल। इस हिसाब से राहुल गांधी को अगर 'अमूल बेबी' कहा जाता है तो इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं होना चाहिए। विडम्बना तो देखिए सरकार में काम करने वालों की सेवानिवृत्ति की उम्र निर्धारित है, किन्तु सरकार चलाने वालों की नहीं!
हमारे विचार से महज कुछ चेहरों के आधार पर नहीं, वरन् विचारों के आधार पर युवाओं को व्यापक स्तर पर राजनीति में आने प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। कब्र में पैर लटकाने वालों को अब राहुल गांधी से प्रेरणा लेना चाहिए। जब 41 बसंत देखने वाले राहुल गांधी कैबनेट में शामिल होने से खुद को दूर रखे हुए हैं तो फिर साठ पार कर चुके नेता आखिर लाल बत्ती के लिए जोड़तोड़ क्यों करते हैं। उन्हें भी चाहिए कि वे युवाओं को आगे लाने के हिमायती बनें पर राजा दिग्विजय सिंह जैसे नहीं जो खुद तो राजनीतिक मलाई चखने की कामना रखते हैं और अपने ही पुत्र को चुनाव में उतारने की घोषणा भी कर देते हैं, जबकि अभी न प्रत्याशी चुनाव के लिए समीति बनी है और न ही चुनावों की तारीखों की ही घोषणा हुई है। बुजुर्ग राजनैताओं का नैतिक दायित्व यह बनता है कि वे सक्रिय राजनीति से सन्यास लेकर अब मार्गदर्शक की भूमिका में आएं और युवाओं को ईमानदारी से जनसेवा का पाठ पढ़ाएं तभी गांधी के सपनों का भारत आकार ले सकेगा।
एसजीपीसी चुनावों में उम्मीदवार के लिए बैठक
डबवाली (यंग फ्लेम) आगामी 18 सितम्बर को होने वाले शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के चुनावों को लेकर इंडियन बहुजन संदेश पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष करैनल सिंह ने आवास पर बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें क्षेत्र से सिख धर्म में आस्था रखने वाले अनेक लोगों ने भाग लिया। बैठक में होने वाले चुनावों में प्रतिनिधि उतारने के बारे विचार विमर्श किया गया। बैठक में लोगों ने भोला सिंह आरे वाला को उम्मीदवार के तौर सहमति पेश की। इस मौके पर प्रदेशाध्यक्ष करनैल सिंह ने कहा कि जल्द बैठ का आयोजन कर शिरोमणि प्रबंधक कमेटी के चुनावों में उम्मीदवार का नाम घोषित किया जाएगा। इस बारे लोगों के सुझाव लिए जा रहे हैं। इस मौके पर भोला सिंह आरे वाला, बक्शीश पटवारी, अवजीत सिंह, भोला सिंह, हरिन्द्र सिंह, बग्गा सिंह, संतोख सिंह, सुरजीत सिंह, गुरदत्त सिंह सहित अनेक लोग मौजूद थे।
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सास व ननद से मारपीट
डबवाली (यंग फ्लेम)स्थानीय रविदास नगर निवासी कांता देवी ने अपनी बहू सुनीता पर उसके व उसकी बेटी तारो के साथ मारपीट करने का आरोप लगाया है। दोनों को राजकीय अस्पताल में उपचार के लिए दाखिल करवाया गया है। यह जानकारी देते हुए कांता के बेटे नानक ने बताया कि उसकी भाभी सुनीता पत्नी देसराज ने उसकी मां कांता व उसकी बहन तारो के साथ बिजली के बिल को लेकर पिछले तीन दिनों से झगड़ा कर रही है उसकी भाभी सुनीता ने उसकी मां कांता व बहन तारो के साथ दो बार मारपीट की। जिस कारण उन्हें उपचार के लिए डबवाली के राजकीय अस्पताल में दाखिल करवाया गया है। मामले की सूचना पुलिस को दे दी गई है।
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सामाजिक संस्थाओं ने जताया शोक
डबवाली(यंग फ्लेम)दैनिक समाचार पत्र यंग फ्लेम के मुख्य सम्पादक व पाल होम्यो अस्पताल के संचालक डॉ। सुखपाल सिंह के मौसेरे भाई हरजीन्दर सिंह के निधन पर डबवाली युवा कांग्रेस के अध्यक्ष अमन भारद्वाज व गांव बिज्जूवाली व क्षेत्र के गांवों की सामाजिक संस्थानों व राजनितिक लोगों ने एक शोक सभा कर शोक व्यक्त किया। शोक व्यक्त करने वालों में शहीद भगत सिंह युवा कल्ब के प्रधान हेमराज बिरट, आदर्श युवा कल्ब के प्रधान राणा बिरट, सरपंच बिज्जूवाली राजाराम बिरट, सरपंच गोदीकां गिरधारी लाल बिस्सू, सरपंच दारेवाला बलविन्द्र सिंह गिल, सरपंच कालुआना जगदेव सहारण, सरपंच रामगढ़ सतपाल सुथार, पंच देवपाल सोनी, युवा कांग्रेस नेता रोहित मेहता, अनिल कुमार नंदन, विनोद जांगड़ा सहित अनेक लोग मौजूद थे।
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सब्जी मंडी क्षेत्र में फैली गंदगी लोगों के लिए बनी परेशानी
डबवाली (यंग फ्लेम)वैसे तो देखा जाए तो शहर के चारों तरफ गंदगी का साम्राज्य फैला है लेकिन सब्जी मंडी क्षेत्र में गंदगी का बहुत ही बोल-बाला है जहां शायद प्रशासन का ध्यान नहीं जा रहा। सब्जी मंडी में आज कल रेहड्डियों वालों ने अपना कब्जा जमाया हुआ है और सीवरेज भी खुले पड़े है। जिससे कभी भी कोई अनहोनी घटना घट सकती है। बरसात के दि
नों में तो सब्जी मंडी के आसपास खड़ा होना भी मुश्किल हो जाता है क्योंकि वहां पर बरसाती पानी की निकासी न होने के कारण गंदगी का अम्बार लग जाता है और कई दिनों तक बरसाती पानी खड़ा रहता है। जिससे खड़े पानी में मच्छर आदि भिन्नभिनाते रहते है और सब्जी खरीददारी करने आए लोगों को भारी
परेशानी का सामना करना पड़ता है। शहरवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि सब्जी मंडी में खुले पड़े सीवरेज को रिपेयर करके ढक्कन लगाया जाए और अंदर लगी रेहड्डियों को सब्जी मंडी से बाहर निकाला जाए ताकि खरीददारी करने वाले लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े।
नों में तो सब्जी मंडी के आसपास खड़ा होना भी मुश्किल हो जाता है क्योंकि वहां पर बरसाती पानी की निकासी न होने के कारण गंदगी का अम्बार लग जाता है और कई दिनों तक बरसाती पानी खड़ा रहता है। जिससे खड़े पानी में मच्छर आदि भिन्नभिनाते रहते है और सब्जी खरीददारी करने आए लोगों को भारी
परेशानी का सामना करना पड़ता है। शहरवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि सब्जी मंडी में खुले पड़े सीवरेज को रिपेयर करके ढक्कन लगाया जाए और अंदर लगी रेहड्डियों को सब्जी मंडी से बाहर निकाला जाए ताकि खरीददारी करने वाले लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े।
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रविवार, 31 जुलाई 2011
रिक्शा चालक की निर्मम हत्या, खून से सने कपडे मिले
डबवाली-बीती रात किलियांवाली मंडी में ट्रक यूनियन के पास एक रिक्शा चालक का शव बरामद किया है। मृतक के चेहरे और सिर पर चोटों के काफी निशान हैं। किलियांवाली ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस को मौके मृतक
की खून लथपथ कमीज के अलावा ट्रक यूनियन के पास खून के धब्बे मिलने साथ ही मृतक के जमीन पर घसीटे जाने के निशान मिले है। मृतक रिक्शा चालक की पहचान चरनजीत उर्फ चाँद पुत्र संत राम निवासी नरसिंह कालोनी के तौर पर हुई है।
प्राप्त जानकारी अनुसार नरसिंह कालोनी का निवासी 28 वर्षीय चरनजीत रिक्शा चलाता था। जिसका लगभग 7 साल पहले अपनी पत्नी के साथ तलाक हो गया चुका है। जिसके बाद वह अपने भाई रूप लाल के साथ रहता था परन्तु कभी कभार ही घर पर जाता था। उसकी आज प्रात:काल ट्रक यूनियन किल्यांवाली के नज़दीक एक खाली प्लाट में उसकी लाश बरामद हुई। जिसके चेहरे, सिर और पेट पर जख्मों के गहरे निशान थे।
घटना की सूचना पर मिलने पर किलियांवाली चौकी के प्रभारी जीत सिंह मौके पर पहुँच गए। पुलिस को जाँच दौरान ट्रक यूनियन के बरामदो में एक तख्तपोश पर खून के निशान भी मिले है, जिन्हें हत्यारों द्वारा पानी के साथ साफ करने का भी प्रयास किया गया लेकिन वे इसमें सफल नहीं हो पाये। पुलिस को ट्रक यूनियन के साथ लगती गली में से खून के साथ लथपथ मृतक चरनजीत का कमीज़ और बनियान भी बरामद हुए है। पुलिस ने मौके पर चरनजीत को ज़मीन पर घसीटे जाने के निशान भी मिले है।
लम्बी के थाना प्रमुख गुरप्रीत सिंह बेस ने मौके पर पहुँच कर स्थिति का जायज़ा लेकर मौके पर मिले खून से लथपथ कमीज और अन्य प्रमाणों को देखा। उन्होंने बताया कि मृतक के भाई रूप लाल के बयानों के आधार पर अनजाने व्यक्ति खि़लाफ़ हत्या की धारा के अंतर्गत मामला दर्ज करके जाँच आरंभ कर दी गई है। सिवल हस्पताल मलोट में से पोस्टमार्टम उपरांत मृतक की लाश वारिसों को सौंप दी गई।
इस घटना के साथ क्षेत्र के रिक्शा चालकों में शोक की लहर दौड़ गई। रिक्शा यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष सुखविन्दर सिंह ने पुलिस से हत्यारों को खोज कर उन्हें सजा दिलाये जाने की मांग की है।
चित्र 31 डीबीएल1- ट्रक यूनियन के पास मिले रिक्शा चालक के शव के बाद जांच करती हुई पुलिस।
चित्र 31 डीबीएल2- हत्या के बाद बरामद रिक्शा चालक के कपड़े।
प्राप्त जानकारी अनुसार नरसिंह कालोनी का निवासी 28 वर्षीय चरनजीत रिक्शा चलाता था। जिसका लगभग 7 साल पहले अपनी पत्नी के साथ तलाक हो गया चुका है। जिसके बाद वह अपने भाई रूप लाल के साथ रहता था परन्तु कभी कभार ही घर पर जाता था। उसकी आज प्रात:काल ट्रक यूनियन किल्यांवाली के नज़दीक एक खाली प्लाट में उसकी लाश बरामद हुई। जिसके चेहरे, सिर और पेट पर जख्मों के गहरे निशान थे।
घटना की सूचना पर मिलने पर किलियांवाली चौकी के प्रभारी जीत सिंह मौके पर पहुँच गए। पुलिस को जाँच दौरान ट्रक यूनियन के बरामदो में एक तख्तपोश पर खून के निशान भी मिले है, जिन्हें हत्यारों द्वारा पानी के साथ साफ करने का भी प्रयास किया गया लेकिन वे इसमें सफल नहीं हो पाये। पुलिस को ट्रक यूनियन के साथ लगती गली में से खून के साथ लथपथ मृतक चरनजीत का कमीज़ और बनियान भी बरामद हुए है। पुलिस ने मौके पर चरनजीत को ज़मीन पर घसीटे जाने के निशान भी मिले है।
लम्बी के थाना प्रमुख गुरप्रीत सिंह बेस ने मौके पर पहुँच कर स्थिति का जायज़ा लेकर मौके पर मिले खून से लथपथ कमीज और अन्य प्रमाणों को देखा। उन्होंने बताया कि मृतक के भाई रूप लाल के बयानों के आधार पर अनजाने व्यक्ति खि़लाफ़ हत्या की धारा के अंतर्गत मामला दर्ज करके जाँच आरंभ कर दी गई है। सिवल हस्पताल मलोट में से पोस्टमार्टम उपरांत मृतक की लाश वारिसों को सौंप दी गई।
इस घटना के साथ क्षेत्र के रिक्शा चालकों में शोक की लहर दौड़ गई। रिक्शा यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष सुखविन्दर सिंह ने पुलिस से हत्यारों को खोज कर उन्हें सजा दिलाये जाने की मांग की है।
चित्र 31 डीबीएल1- ट्रक यूनियन के पास मिले रिक्शा चालक के शव के बाद जांच करती हुई पुलिस।
चित्र 31 डीबीएल2- हत्या के बाद बरामद रिक्शा चालक के कपड़े।
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