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शुक्रवार, 15 जनवरी 2010

गोदाम में धूल खा रही लाखों की दवाएं

लखनऊ, एक तरफ तो यूपी के अस्पताल दवाओं की कमी से जूझ हे हैं, दूसरी ओर उप्र ड्रग्स एंड फार्मासिटिकल लिमिटेड (यूपीडीपीएल) के गोदाम में 60 लाख रुपये की कीमती दवाएं धूल खा रही हैं। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग यूपीडीपीएल से दवाएं नहीं खरीद रहा। क्रय आदेश न मिलने से यहां दवाओं का उत्पादन भी बंद हो गया है। यूपीडीपीएल प्रदेश में दवा बनाने वाली एकमात्र सरकारी संस्था है। स्वास्थ्य विभाग यहां की दवाओं को सरकारी अस्पतालों को मुहैया कराता है। अप्रैल 2009 तक तो सब ठीक रहा लेकिन इसके बाद से स्वास्थ्य विभाग ने यूपीडीपीएल से दवा लेना बंद कर दिया। इस कारण लाखों की जीवन रक्षक दवाएं गोदामों में पड़ी हैं। इनमें मुख्य रूप से एम्पीसिलीन व सिफ्लाक्सिन कैप्सूल, नारफ्लाक्सिन, सिप्रोफ्लाक्सिन, फ्लूक्नोजोल, टिनिडाजोल, एस्कार्बिक एसिड, डाइक्लोफिनेक सोडियम व मेट्रोनिडाजोल की टेबलेट शामिल हैं। मामला संज्ञान में आने पर शासन ने दो माह पहले कई बार स्वास्थ्य विभाग को यूपीडीपीएल से दवा खरीदने के आदेश तो दिए, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य डा. आरआर भारती का कहना है कि यूपीडीपीएल की बनी दवाओं की एक्सपायरी डेट काफी कम अवधि की है। इसी वजह से इन्हें खरीदने में दिक्कतें आ रही हैं।

पंजाब के मंत्रियों की गाडि़यों का चक्काजाम करेंगे ड्राइवर

चंडीगढ़,पंजाब विधानसभा के आगामी बजट सत्र के दौरान मंत्रियों व अधिकारियों के वाहनों का चक्का जाम करेंगे ड्राइवर। यह खुलासा गुरुवार को यहां पंजाब गवर्नमेंट ड्राइवर व टेक्निकल इंप्लाइज यूनियन के पदाधिकारियों व विभिन्न जिलों से आए कर्मचारी नेताओं ने किया। यूनियन नेताओं ने कहा कि फरवरी के पहले सप्ताह पंजाब के सभी जिलों में जिला स्तर पर व प्रदेश स्तर पर यूनियन के पदाधिकारियों का चुनाव कर लिया जाएगा। नेताओं ने कहा कि पहले सभी जिला स्तर पर ड्राइवरों की मांगों को लेकर चक्का जाम किया जाएगा फिर पंजाब विधानसभा के बजट सत्र दौरान मंत्रियों व अधिकारियों के वाहनों का चक्का जाम करके रोष प्रदर्शन किया जाएगा। यूनियन नेताओं ने कहा कि राज्य में ड्राइवरों से हो रहे भेदभाव को बंद करके पंजाब के सरकारी ड्राइवरों को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेशों अनुसार 700 रुपए स्पेशल पे की अदायगी शुरू की जाए। पंजाब के सभी सरकारी वाहनों का बीमा करवाया जाए और किसी हादसे में ड्राइवरों से कुल क्लेम का 50 प्रतिशत लिया जाना बंद किया जाए। डाक्टरों व नर्सो की तर्ज पर ड्राइवरों को भी पल्स पोलियो की ड्यूटी पर जाने का भत्ता दिया जाए। ड्राइवरों को केंद्र की तर्ज पर ओवरटाइम व कनवेंस अलाउंस दिया जाए।

महाराष्ट्र में ट्रेन के आगे कूदीं दो राष्ट्रीय खिलाड़ी

मुंबई, महाराष्ट्र में पिछले कुछ दिनों से बच्चों द्वारा की जा रही आत्महत्याओं की कड़ी में बुधवार को दो और नाम जुड़ गए। अहमदनगर जिले में राष्ट्रीय स्तर की दो खिलाडि़यों वृषाली ठुबे एवं आकांक्षा सोनावने ने ट्रेन के आगे कूदकर खुदकुशी कर ली। दोनों खिलाड़ी 12वीं की छात्रा थीं। दोनों के स्कूल में प्री बोर्ड परीक्षा चल रही थी। 17 वर्षीय वृषाली कबड्डी एवं आकांक्षा तलवारबाजी की राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी थीं। मंगलवार को दोनों ने जीवविज्ञान के पहले पेपर की परीक्षा दी थी। बुधवार की सुबह दोनों स्कूल की यूनीफॉर्म पहनकर साथ ही दूसरी परीक्षा देने निकली थीं, लेकिन स्कूल जाने के बजाय, दोनों रास्ते से ही ऑटो रिक्शापकड़कर अहमदनगर-मनमाड़ रेलवे लाइन के गेट नंबर 30 पर जा पहुंचीं। गेट बंद था और दोनों ओर बड़ी संख्या में लोग गेट खुलने का इंतजार कर रहे थे। तभी दोनों लड़कियां ऑटो से उतरकर रेललाइन के किनारे-किनारे उस तरफ जाने लगीं, जिधर से ट्रेन आने वाली थी। गेट से करीब 100 मीटर दूर पहुंचते ही दोनों लड़कियां सामने से आ रही ट्रेने के सामने कूद गई। ट्रेन की गति तेज थी, इसलिए उन्हें बचाया नहीं जा सका। पुलिस को लड़कियों की जेब से मिले पत्र से उनके विद्यालय का पता चला तो उनके प्रधानाचार्य को इस दुर्घटना की सूचना दी गई। पुलिस को आत्महत्या के कारणों का सही पता नहीं चल सका है। यह घटना भी सूबे में एक पखवाड़े से हो रही बच्चों की आत्महत्याओं की श्रृखला में एक कड़ी मानी जा रही हैं। वृषाली के पिता बीएल ठुबे अहमदनगर के पारनेर तालुका में एक राजनीतिक दल से जुड़े हैं। जबकि आकांक्षा के पिता यशवंत सोनावने जिला सहकारी लेबर फेडरेशन के संचालक हैं।

यूपी-बिहार ने महंगाई पर केंद्र को घेरा

लखनऊ/पटना, केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार द्वारा महंगाई के लिए राज्यों को जिम्मेदार ठहराने के बाद उत्तर प्रदेश और बिहार ने गुरुवार को उनके और केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। यूपी की मुख्यमंत्री मायावती और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि शरद पवार अपनी गैर जिम्मेदाराना बातें बंद करें, क्योंकि महंगाई की असली गुनहगार केंद्र सरकार है जिसकी गलत नीतियों के कारण जनता त्राहि-त्राहि कर रही है। लखनऊ में एक प्रेस कांफ्रेंस में मायावती ने कहा कि तीन मुख्य कारण हैं जिनकी वजह से महंगाई बढ़ रही है। पहला केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियां, दूसरा पेट्रोलियम के दामों में की गई भारी वृद्धि और तीसरा कांग्रेस व पूंजीपतियों की साठगांठ। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का हर फैसला जमाखोरों, मुनाफाखोरों तथा पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने वाला है। केंद्रीय मंत्री विशेषकर शरद पवार जिस प्रकार बयान देते हैं उससे चीनी के दाम आसमान छूने लगते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब देश में चावल की कमी है तो इसके निर्यात की अनुमति केंद्र ने कैसे दे दी? चावल के निर्यात पर उन्होंने तत्काल प्रतिबंध लगाने की मांग की। मायावती ने कहा कि दो साल पहले जब देश में पर्याप्त चीनी पैदा हुई थी तो बफर स्टॉक बनाने के बजाए सस्ते में उसका निर्यात कर दिया। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि प्रदेश के किसानों का पूरा गन्ना जब तक पेर नहीं लिया जाता उनकी सरकार बाहर से चीनी आयात की अनुमति कदापि नहीं देगी। केंद्र सरकार महंगाई के लिए राज्यों को जिम्मेदार ठहराना बंद करे और अपनी गलत आर्थिक नीतियों को सुधारे वरना बसपा देशव्यापी आंदोलन छेड़ेगी। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भी नहीं छोड़ा। पटना में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक बुलाने की घोषणा ठीक वैसी ही है जैसे आग लगने पर गढ्ड़ा खोदना। नीतीश ने कहा कि इस बैठक के स्थान पर प्रधानमंत्री को सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए जिसमें महंगाई को नियंत्रित करने पर गहराई से विचार किया जाए। केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार ने कहा था कि प्रधानमंत्री इस महीने के आखिर में सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों की एक बैठक बुलाएंगे। बिहार के मुख्यमंत्री ने कहा कि महंगाई के लिए केंद्र और उसकी नीतियां पूरी तरह जिम्मेदार हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि महंगाई को नियंत्रित करने के लिए केंद्र के पास कोई दीर्घकालीन नीति नहीं है, जबकि राज्य सरकारें काला बाजारियों और मुनाफाखोरों के प्रति पूरी तरह सतर्क हैं। पवार द्वारा राज्यों को फुटकर बाजार में अपनी एजेंसियों के माध्यम से खाद्य पदार्थ वितरित करने के निर्देश दिए जाने पर नीतीश ने कहा कि अगर कीमतें बढ़ने के लिए राज्य सरकारें जिम्मेदार हैं तो कांग्रेस शासित राज्यों में कीमतें कम क्यों नहीं हो रहीं? उन्होंने बताया कि बिहार में कालाबाजारियों और मुनाफाखोरों के खिलाफ शिकायतों के लिए एक लाइन शुरू की गई है ताकि उनके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जा सके। इसके अलावा उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी की अध्यक्षता में समिति गठित की गयी है।

electricity generation is slow but sure in Haryana --(Dr.) M.M. Goel,

Kurukshetra,- “The progress of electricity generation is slow but sure in Haryana which promise sustainable future of the peoples with their cooperation, patience and responsibility as consumers who should feel concerned for payment of electricity bills and complete no to power theft. The growth rate of capacity of thermal power plants required to be speeded up. We need to do serious introspection on the sustainability issues for power sector in Haryana. We are expected to think of the life style which is needed, affordable and cost effective. ” observed Professor (Dr.) M.M. Goel, Chairman, Department of Economics, Kurukshetra University & Convener Intellectual cell of the Haryana Pradesh Congress Committee in an International Symposium on Sustainable Future (ISSF-2010) being organized by Indira Gandhi Institute of Development Research( IGIDR), Goregaon (Mumbai) on January 11. He shared Dias with eminent personalities from India and abroad most notably Professor Yoginder K. Alagh, Mr. Suresh Prabhu both former ministers of energy at the Government of India., Padam Vibhushan Dr. Man Mohan Sharma , Dr Sonia Valdivisia of UNEP, France, Dr. Martina Prox of Germany.
Sustainability of human survival will be reality with governance structure and manpower planning, said Professor Goel.
To secure sustainable future of the people in India, we need to recognize electricity as the most important infrastructural activity and calls for its sufficiency, efficiency which is possible through good governance conceptualized as SMART administration including SIMPLE, Moral, Action oriented, Responsive and Transparent at all levels of production transmission ,distribution and consumption , said Professor Goel.
Earlier Professor Dilip Nachane, Director IGIDR welcomed the guests and Professor Vinod K Sharma convener ISSF-2010 introduced the guests and proposed vote of thanks.

गुरुवार, 14 जनवरी 2010

एक बगावत ने इकट्ठा कर दिए 10 करोड

नईदिल्ली, हाकी इंडिया भले ही एक-एक रुपए के लिए रो रही हो, लेकिन उसके खिलाडि़यों की बगावत ने पांच दिन में दस करोड़ से ज्यादा जमा कर लिए। यह बताता है कि अगर राष्ट्रीय खेल के आका सही सोच और उचित दिशा पर आगे बढ़ें तो हाकी के लिए करोड़ों जुटाने के लिए भी उन्हें यह नहीं कहना पड़ेगा कि हम फीफा और बीसीसीआई की तरह अमीर संस्था नहीं हैं। आज भारतीय ओलंपिक संघ के अध्यक्ष सुरेश कलमाड़ी और सहारा के एक करोड़ रुपए की मदद देने के बाद बागी खिलाड़ी भले ही हाकी इंडिया के कैंप में वापस हो गए हों, लेकिन हाकी संघ यह स्थिति पैदा न होने से बच सकता था। पांच दिन से बगावत का झंडा बुलंद करने वाले हाकी खिलाडि़यों को सहारा ने तो एक करोड़ की मदद दी ही। इसके अलावा उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने पांच करोड़ रुपए की मदद की घोषणा की। यही नहीं पंजाब, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र सरकार ने भी खिलाडि़यों को वित्तीय मदद देने का आश्वासन दिया है जो एक-एक करोड़ से कम नहीं होगा। हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी टीम को प्रायोजित करने की इच्छा जाहिर की है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तो खुद हाकी इंडिया के अध्यक्ष एके मट्टू को पत्र लिख कर शीर्ष हाकी खिलाडि़यों के वेतन-भत्ते और प्रशिक्षण का व्यय उठाने के लिए कह चुके हैं। हालांकि यह काम हाकी इंडिया के अध्यक्ष को करना चाहिए था। श्री सीमेंट भी टीम को आर्थिक सहायता देने को तैयार है। पंजाब के उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल ने भी पेशकश की कि पंजाब आगामी विश्व कप के लिए भारतीय हाकी टीम को प्रायोजित करने को तैयार है। लंदन में बसे एक भारतीय डाक्टर ने भी खिलाडि़यों को दस लाख रुपये की मदद की पेशकश की है। बजाज अलियांज ने भी टीम के प्रायोजन के लिए दो करोड़ देने को कहे। शाहरुख खान, अमिताभ बच्चन, सलमा आगा जैसे फिल्मी सितारों ने भी मदद का हाथ बढ़ाया है। यही नहीं जाने-माने कामेडियन भगवंत मान और सुप्रसिद्ध पंजाबी गायक बब्बू मान ने कहा हम देश भर में चैरिटी शो करेंगे।

पवार पर बरसीं महिला मंत्री

नई दिल्ली, लगातार बढ़ रही महंगाई के मुद्दे पर केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार न सिर्फ विपक्ष बल्कि अपने सहयोगियों के बीच भी घिरे हैं। बुधवार को कैबिनेट की बैठक में गरीबों का समर्थन पाकर सत्ता में आई तृणमूल नेता ममता बनर्जी खासतौर पर आक्रामक दिखीं। जबकि केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने भी पवार से जानना चाहा कि आखिर सरकार कर क्या रही है? जबकि आमतौर पर हावी रहने वाले पवार सफाई देते दिखे। महंगाई उनकी जेब पर भले ही भारी न हो, जनता की बेचैनी नेताओं को आशंकित करने लगी है। विपक्ष पूरे देश में आंदोलन की तैयारी कर रहा है। खासतौर पर ममता परेशान हैं। उन्होंने पवार से सवाल पूछ लिया। उन्होंने कहा, महंगाई से लोग त्राहि त्राहि कर रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से उन्हें आश्वासन तक नहीं मिल रहा है। सरकार को बताना चाहिए कि महंगाई रोकने के लिए क्या किया जा रहा है। कम से कम जनता को दिखना तो चाहिए कि सरकार महंगाई रोकने को प्रयत्नशील है। सुझाव दिया कि आवश्यक वस्तुओं के निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगा देना चाहिए। अंबिका सोनी ने भी यही सवाल उठाए। बताते हैं कि कुछ दूसरे मंत्रियों ने भी महंगाई पर चुप्पी को गलत बताया और सार्वजनिक वितरण प्रणाली को चुस्त-दुरुस्त बनाने तथा जमाखोरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की।

बंदिशों संग लौटेगी नेपाली बाला

नई दिल्ली, महाराष्ट्र से नेपाली छात्रा को निर्वासित करने के मामले में गृह मंत्रालय की सख्ती ने कुछ असर दिखाया। महाराष्ट्र सरकार ने नेपाली छात्रा नीतू के निर्वासन का फैसला एक माह के लिए स्थगित कर दिया है। अब वह भारत वापस आकर अपनी पढ़ाई पूरी करेगी, लेकिन उस पर बंदिशें लागू रहेंगी। सूत्रों के मुताबिक, पुणे के फिल्म व टेलिविजन इंस्टीट्यूट की छात्रा नीतू सिंह को मीडिया से बातचीत की अनुमति नहीं होगी। संस्थान के बाहर जाने के लिए उसे अधिकृत लोगों की अनुमति लेनी पड़ेगी। वास्तव में इन सख्त शर्तो के पालन पर ही नीतू को भारत वापसी की अनुमति मिली है। एफटीआईआई के निदेशक को इन सभी शर्तो के पालन कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। नीतू सिंह को 5 दिसंबर को महाराष्ट्र सरकार ने उसके देश वापस भेज दिया था। इस बारे में पुणे पुलिस या महाराष्ट्र सरकार ने केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय को भी अंधेरे में रखा। महाराष्ट्र सरकार ने आंतरिक सुरक्षा से जुड़ा मसला बताकर संस्थान व उसके समर्थकों को भी चुप करा दिया था। कई महिला व समाजसेवी संगठनों ने आरोप लगाया था कि नीतू के पति नेपाल की संसद के नामित सदस्य अमरेश सिंह के इशारे पर केंद्र ने यह कदम उठाया है।

महंगाई : मुख्यमंत्रियों से होगा जवाब-तलब

नई दिल्ली,-महंगाई जैसे आम आदमी से जुडे़ मुद्दे पर घटक दलों समेत विपक्ष के निशाने पर आई केंद्र सरकार ने बुधवार को राज्यों को लपेटे में ले लिया। कृषि व खाद्य मंत्री शरद पवार ने दो टूक कह दिया कि बढ़ती कीमतों के लिए अकेले केंद्र ही नहीं बल्कि राज्य सरकारें भी बराबर की जिम्मेदार हैं। पवार की दलीलों के बाद अंतत: प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्रियों का सम्मेलन बुलाने का निर्णय किया, जिसमें महंगाई पर राज्यों की जवाबदेही तय की जाएगी। यह सम्मेलन जनवरी के आखिरी सप्ताह में बुलाया जाएगा। इसमें राज्यों में आवश्यक वस्तु अधिनियम पर अमल और जमाखोरी रोकने जैसे मुद्दों की समीक्षा की जाएगी। केंद्रीय मंत्रिमंडल समिति की बैठक में चौतरफा घिरे पवार ने थोक व खुदरा मूल्यों में भारी अंतर के लिए राज्यों पर आरोप मढ़े। कहा, दाल व खाद्य तेल पर 10 से 15 रुपये प्रति किलो की सब्सिडी देने के बावजूद ज्यादातर राज्यों ने उत्साह नहीं दिखाया। सब्सिडी वाला खाद्य तेल बांटने वाले राज्यों में महाराष्ट्र, आंध्र, तमिलनाडु और हिमाचल प्रमुख हैं। जबकि आंध्र, बंगाल, तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा और हिमाचल में सब्सिडी वाली दालें बेची जा रही हैं। पवार ने कहा जमाखोरी पर पाबंदी लगाने के लिए केंद्र ने राज्यों को आवश्यक वस्तु अधिनियम की शक्ति प्रदान तो कर दी, लेकिन उसका प्रयोग नहीं किया जा रहा है। आवंटित अनाजों को भी राज्य उठाने में हीलाहवाली कर रहे हैं। राज्यों ने आवंटित 20 लाख टन गेहूं में केवल 1.59 लाख टन उठाया है, जबकि 10 लाख टन चावल में 2.9 लाख टन। राशन दुकानों से अधिक से अधिक खाद्यान्न वितरित करने की अपील भी राज्यों से की गई, लेकिन बीपीएल और अंत्योदय अन्न योजना में भी राज्यों ने कोताही बरती है। ऐसे राज्यों के नामों का उल्लेख करते हुए पवार ने केंद्रीय एजेंसियों को सक्रिय करने का ऐलान किया।

हाथी ने सबको रौंदा

लखनऊ, कल यानी 15 जनवरी को बसपा प्रमुख मायावती का जन्म दिन है। उनके लिए इससे बड़ा और कोई तोहफा नहीं हो सकता कि स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद चुनाव में उनकी पार्टी ने एकतरफा जीत हासिल कर ली। बुधवार को जिन 33 सीटों की मतगणना हुई उनमें से 31 सीटों पर बसपा उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की। सिर्फ दो सीटें ऐसी रहीं जहां उसके प्रत्याशी नहीं जीत पाए। इनमें से एक प्रतापगढ़ है, जहां सपा ने जीत दर्ज की। दूसरी सीट रायबरेली है, जहां कांग्रेस जीती है। भाजपा, रालोद का तो सफाया हो गया। बसपा के लिए इस बड़ी जीत के साथ एक खास बात यह भी है कि विधान परिषद के अंदर सरकार का बहुमत हो गया है। अभी तमाम मौके ऐसे आते थे जब विपक्ष के अड़ जाने की वजह से मतदान होने की स्थिति में विधेयक पारित नहीं हो पाते थे। इससे सरकार की किरकिरी होती थी। सौ सदस्यीय विधान परिषद में बसपा पहली बार बहुमत में आई है। इस सदन में अभी तक बसपा के 22 सदस्य थे। 31 बुधवार को जीत गए। अब बसपा सदस्यों की संख्या 53 हो गई है। इसके साथ ही यह भी तय हो गया कि अब विधान परिषद का सभापति भी बसपा का होगा। अभी तक इस सदन में सबसे बड़ी पार्टी सपा थी, जिसके 35 सदस्य थे। स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में ग्राम प्रधान, ब्लाक पंचायत सदस्य, जिला पंचायत सदस्य, सभासद, छावनी परिषद के सदस्य, विधान सभा सदस्य, विधान परिषद सदस्य और सांसद वोट डालते हैं। इन सीटों के लिए पिछली बार वर्ष 2003 में चुनाव हुए थे। उस समय मुलायम सिंह की सरकार थी। बसपा ने यह कहते हुए चुनाव नहीं लड़ा था कि मुलायम सरकार में निष्पक्ष चुनाव की कोई उम्मीद नहीं है। तब सपा ने 22 सीटों पर खुद जीत दर्ज की थी और आठ सीटों पर उसके समर्थित उम्मीदवार जीते थे। इस बार बसपा ने सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। सपा 33 सीटों पर चुनाव लड़ी। जबकि कांग्रेस ने 21 और भाजपा ने 23 सीटों पर उम्मीदवार उतारे। रायबरेली में कांग्रेस की प्रतिष्ठा दांव पर थी। कांग्रेस यह सीट जीत कर अपनी साख बचाने में कामयाब रही। प्रतापगढ़ सीट पर सपा की जीत का श्रेय निर्दलीय विधायक राजा भैया को जाता है। सपा के टिकट पर जीते अक्षय प्रताप सिंह राजा भैया के करीबी हैं। पिछले विधान परिषद के चुनाव में वह निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीते थे। 2004 के लोकसभा चुनाव में वह सपा के टिकट पर सांसद हो गए, जिसकी वजह से उन्होंने इस्तीफा दे दिया। इस बार वह लोकसभा का चुनाव हार गए तो उन्होंने फिर विधान परिषद की ओर रुख किया। तीन सीटों- अलीगढ़, बुलंदशहर और मेरठ-गाजियाबाद निर्वाचन क्षेत्रों की मतगणना गुरुवार को होगी।

बुधवार, 13 जनवरी 2010

सड़क किनारे लगे पेड़ से टकराने से टैंकर चालक घायल

डबवाली (सुखपाल) कल सायं पंजाब क्षेत्र सीतोगुणो सड़क मार्ग पर तेल से भरे टैंकर का स्टेयङ्क्षरग लॉक होने पर सड़क किनारे लगे पेड़ से टकराने से टैंकर चालक घायल हो गया। परिचालक व उसके साथ बैठा उसका साथी बाल-बाल बच गए। प्राप्त जानकारी अनुसार कल सायं बठिण्डा से गुन्जाल (राजस्थान) के तेल से भरे टैंकर को चालक राजीव कुमार पुत्र प्रीतम चन्द निवासी करीवाला (हिमाचल प्रदेश) चला रहा था कि सीतोगुणो सड़क मार्ग पर स्थित गांव हाकूवाला के समीप अकस्मात टैंकर का स्टेयङ्क्षरग लॉक हो गया और टैंकर सड़क किनारे खड़े शीशम के पेड़ से टकरा गया। जिसके फलस्वरूप टैंकर चालक गम्भीर रूप से घायल हो गया। जबकि उसके साथ बैठे परिचालक व उसका साथी बाल - बाल बच गए। हादसे की सूचना मिलते ही गांव के आस-पास के लोग घटनास्थल पर एकत्रित हो गए तथा घायल चालक को टैंकर से बाहर निकाला तथा उपचार हेतु स्थानीय सिविल अस्पताल में दाखिल करवाया।

''पतंजलि योग समिति की महिला शाखा द्वारा लोहड़ी पर्व की पूर्व संध्या पर एक रंगारंग कार्यक्रम

डबवाली(सुखपाल) स्थानीय लूना फैक्टरी वाली गली में ''पतंजलि योग समिति की महिला शाखा द्वारा लोहड़ी पर्व की पूर्व संध्या पर एक रंगारंग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता पतंजलि योग समिति के स्थानीय अध्यक्ष अशोक सोनी ने की। कार्यक्रम का शुभारम्भ नवविवाहित दुल्हनों द्वारा पवित्र अग्रि प्रज्ज्वलित कर किया गया। जहां योग साधक परिवारों ने प्रथम पुत्र व पुत्री होने के उपलक्ष्य में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई। वहीं अन्य महिलाओं व बच्चों ने भी बड़ी संख्या में शामिल होकर कार्यक्रम की शौभा बढ़ाई। कार्यक्रम में उपस्थित हुए लोगों ने पंजाबी गिद्धा व पंजाबी गीतों पर नृत्य कर शाम को ओर भी रंगीन बना दिया। कार्यक्रम के अन्त में योग के प्रचार व प्रसार के लिए सन्तोष मैहता, कुलदीप सोनी, गुरशरण कौर व अनु द्वारा किए गए योगदान के लिए मुख्य योग शिक्षक वियोगी हरि शर्मा ने सम्मानित किया तथा अपने सम्बोधन में उन्होंने कहा कि डबवाली के अन्य क्षेत्रों में भी योग की कक्षाऐं शीघ्र ही आरम्भ की जाऐंगी। अन्त में उन्होंने नवजात शिशुओं व नवविवाहित दुल्हनों को आशीर्वाद दिया। देर सायं तक चले इस कार्यक्रम का सभी ने खूब आनन्द लिया।

लोहड़ी का पर्व धूमधाम से मनाया गया।

डबवाली (सुखपाल) स्थानीय एमएम पब्लिक स्कूल के प्रांगण में लोहड़ी का पर्व धूमधाम से मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ ङ्क्षप्रसीपल श्रीमती डिम्पल मिढा द्वारा अग्रि प्रज्ज्वलित करके की गई। उन्होंने उपस्थित बच्चों व स्कूल स्टॉफ को सर्व प्रथम लोहड़ी पर्व की बधाई दी तथा अपने सम्बोधन में कहा कि आज के दिन गोकुल गांव में विष्णु भगवान ने हिरण का रूप धारण करके लोहता नाम की राक्षसी का वध किया था। जोकि गोकुल गांव के बच्चों को उठाकर ले जाती थी। इस प्रकार गोकुल गांव को लोहता नाम की राक्षसी से छुटकारा मिलने की खुशी में गांव के लोगों ने पवित्र अग्रि के चारों ओर नाच गाकर त्यौहार मनाया जिससे इसकी नाम लोहड़ी पड़ा। इस दिन विष्णु भगवान की पूजा का भी बड़ा महत्त्व है। यह जानकारी देते हुए स्कूल के वाईस ङ्क्षप्रसीपल राजीव मिढा ने बताया कि इस अवसर पर बच्चों व स्कूल स्टॉफ द्वारा कविताऐं, गीत व भंगड़ा प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम के अन्त में सभी को मूंगफली, रेवड़ी व गज्जक वितरित की गई। उधर आज आर्य विद्या मन्दिर सीनियर सैकेण्डरी स्कूल के प्रांगण में लोहड़ी का पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया गया। इस कार्यक्रम का उद्घाटन विद्यालय के प्रधान श्री रामकिशन गुप्ता द्वारा किया गया। विद्यालय में प्रबन्धक कमेटी द्वारा जरूरतमंद 33 बच्चों को जॢसयां व 10 बच्चों को जूते वितरित किए गए। इस अवसर पर विभिन्न सांस्कृतिक प्रतियोगिताऐं भी करवाई गई। जिसमें लेखन प्रतियोगिता में विद्यालय की छात्रा रिम्पी ने प्रथम, प्रीति ने द्वितीय व केशव ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। इस अवसर पर डॉ. भारत भूषण छाबड़ा, जगदीश चन्द्र शर्मा के अलावा स्वामी दयानन्द विद्यालय के बच्चे उपस्थित थे तथा मंच का संचालन श्रीमती अन्जू बांसल व श्रीमती स्नेह टक्कर ने बाखूबी निभाया। उधर चौटाला रोड स्थित डीएवी पब्लिक स्कूल में भी लोहड़ी का पर्व लोहड़ी जलाकर बड़े हर्षोल्लास से मनाया गया। इस अवसर पर बच्चों ने नृत्य करके समय बांधा। वहीं अध्यापकों ने भी अपनी प्रतिभा के जौहर दिखाए। स्कूल की प्रधानाचार्या श्रीमती सरिता गोयल ने विद्यालय के बच्चों को लोहड़ी की बधाई दी और साथ ही बच्चों को भू्रण हत्या का सख्त विरोध करते हुए लड़कियों का सम्मान करने की प्रेरणा दी। उधर गोपाल शिशु वाटिका में भी लोहड़ी का पर्व धूमधाम से मनाया गया। बच्चों में फैंसी ड्रैस प्रतियोगिता करवाई गई।

बाहर खड़ा साईकिल चोरी

डबवाली(सुखपाल) स्थानीय कॉलोनी रोड पर स्थित बालाजी धामक पुस्तक भण्डार के बाहर खड़ा साईकिल चोरी होने का समाचार है। प्राप्त जानकारी अनुसार आज बाद दोपहर समाजसेवी कृष्ण सेतिया अपना घरेलु सामान लेकर अपने साईकिल पर घर जा रहे थे कि किसी कार्य हेतु कॉलोनी रोड पर स्थित श्री मोहन लाल कौशिक की दुकान बालाजी धाॢमक पुस्तक भण्डार पर अपना साईकिल दुकान के बाहर खड़ा कर दुकान के अन्दर चले गए। जब कुछ समय पश्चात दुकान से बाहर आए तो देखा तो वहां से साईकिल गायब था। उन्होंने इधर-उधर काफी तालाश किया। लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। समाजसेवी कृष्ण सेतिया ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि शहर में दिन प्रति दिन बढ़ती हुई चोरियों पर रोक लगाए ताकि आम आदमी बेखौफ होकर अपने घर-दुकान आदि के बाहर अपना व्हीकल खड़ा कर सकें।

तिहाड़ के क्वॉर्टर में रहता था, अब जेल में रहेगा

नई दिल्ली।। वह तिहाड़ जेल कॉम्पलेक्स के क्वॉर्टर में रहता था। यहां रहते हुए
उसने राजधानी में कई संगीन वारदातों को अंजाम दिया। अब पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर तिहाड़ जेल के अंदर भेज दिया है। उसका नाम बचन सिंह उर्फ बहरा (20) है। भरतपुर (राजस्थान) निवासी बचन सिंह का भाई मुकेश तिहाड़ जेल में फोर्थ क्लास कर्मचारी है। उसे जेल परिसर में सरकारी क्वॉर्टर मिला हुआ है। बचन सिंह इसी क्वॉर्टर में रहता था। अडिशनल पुलिस कमिश्नर (क्राइम ब्रांच) नीरज ठाकुर के मुताबिक, बचन सिंह ने सन् 2008 में गुलाबी बाग इलाके से एक लड़की को अगवा किया था। उस केस में पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था। उसके बाद बचन सिंह ने अपना गिरोह कायम किया।
पिछले साल 6 जुलाई की रात समयपुर बादली में मारुति शोरूम का ड्राइवर सुखपाल गुड़गांव से नई आल्टो कार लेकर बादली शोरूम जा रहा था। द्वारका में रेड लाइट पर दो लड़कों ने उससे डाबड़ी तक लिफ्ट देने के लिए कहा। सुखपाल ने इनकार कर दिया। दोनों लड़के जबरन कार में घुसने लगे। सुखपाल ने जोरदार विरोध किया। इस कारण लड़के उसके सीने में गोली मारकर कार लूट कर ले गए। उस केस में क्राइम ब्रांच ने तीन मुलजिमों को गिरफ्तार कर कार को बरामद कर लिया था, लेकिन बचन सिंह नहीं पकड़ा जा सका था। उसकी गिरफ्तारी पर 20 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था। पिछले साल 11 नवंबर की रात विनय नौटियाल नामक बिजनेसमैन अपनी शेवरले ऑप्ट्रा कार में द्वारका सेक्टर 4 से गुजर रहे थे। पेट्रोल पंप के पास पहुंचते ही बचन सिंह ने अपने साथियों लीला, गुड्डू और बिट्टू के साथ मिलकर नौटियाल से कार लूटने की कोशिश की। विनय नौटियाल ने जोरदार विरोध किया, तो उन्हें गोली मार दी गई।16 नवंबर को इस गिरोह ने द्वारका सेक्टर 10 में एक परिवार से होंडा सिटी कार लूटी थी। दो दिन बाद इस कार को उन्होंने नांगलोई इलाके में छोड़ दिया था। इससे दो दिन पहले बचन सिंह ने रोहिणी सेक्टर 22 में सैंट्रो कार लूटी थी। यह कार अब उसकी गिरफ्तारी के बाद उससे बरामद कर ली गई है। उससे पिस्तौल भी जब्त की गई है।

पत्नी की लाश लेकर आते पति की दुर्घटना में मौत

अंबाला, अपनी पत्नी के शव को चंडीगढ़ से कुरुक्षेत्र लाते समय अंबाला-दिल्ली हाइवे पर हुई सड़क दुर्घटना में पति की मौत हो गई। इस हादसे में एक अन्य व्यक्ति की भी मौत हो गई और तीन अन्य घायल हो गए। जानकारी के अनुसार कुरुक्षेत्र के रहने वाले देवी प्रसन्न की पत्नी मूर्ति देवी का रोड एक्सिडेंट हो गया था। उसे इलाज के लिए उसका पति देवी प्रसन्न व अन्य रिश्तेदार चंडीगढ़ ले गए थे, पर सोमवार देर शाम मूर्ति देवी की भी मौत हो गई। उसके शव को लेकर जब उसका पति और अन्य रिश्तेदार एक वाहन से कुरुक्षेत्र लौट रहे थे तो अंबाला-दिल्ली हाइवे पर मॉडल टाउन के पास घने कोहरे और धुंध के चलते उनका वाहन डिवाइडर से जा टकराया। टक्कर से वाहन पलट गया, जिससे देवी प्रसन्न और उसके एक रिश्तेदार अमृत कौशिक की मौत हो गई। इस हादसे में तीन अन्य लोग भी घायल हो गए।

कीमतें कम करने की कवायद शुरू

नई दिल्ली, महंगाई की आंच से बुरी तरह झुलस रही केंद्र सरकार अब बढ़ती कीमतों को रोकने की कवायद शुरू कर रही है। इसके लिए सरकार ने एक पैकेज तैयार किया है जिसके तहत चीनी, गेहूं और दालों की कीमतों को नीचे लाने की कोशिश की जाएगी। खाद्य मंत्रालय के इस पैकेज पर अमल के बाद न सिर्फ बंदरगाहों पर अटकी पड़ी आयातित चीनी को खुले बाजार में बेचा जाएगा बल्कि आयातित दालों की मौजूदा टेंडर प्रक्रिया को भी बदलकर उसे खुले बाजार में डालने की कोशिश की जा रही है। सरकार आसान शर्तो पर खुले बाजार में भारी मात्रा में गेहूं की आपूर्ति बढ़ाना चाहती है ताकि इसकी बढ़ती कीमतों पर भी लगाम लगाई जा सके। खाद्य मंत्रालय के इस पैकेज पर बुधवार को होने वाली केंद्रीय मंत्रिमंडल की मूल्य समिति पर विचार होगा। यह बैठक पहले मंगलवार को होनी थी, लेकिन इसे बुधवार तक के लिए टाल दिया गया है। दरअसल सरकार के कदमों में तेजी महंगाई के मुद्दे पर अचानक सियासत गरमाने की वजह से आई है। कृषि व खाद्य मंत्री शरद पवार सत्तारूढ़ कांग्रेस समेत समूचे विपक्ष के निशाने पर आ गए हैं। हालांकि एनसीपी के नेता डीपी त्रिपाठी ने कहा कि महंगाई के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल को सामूहिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए। खाद्य मंत्रालय ने जो प्रस्ताव तैयार किए हैं, उनमें खाद्य वस्तुओं की आपूर्ति में आड़े आ रही कानूनी अड़चनें खास हैं। इससे कांडला बंदरगाह पर महीनों से डंप आयातित कच्ची चीनी जल्द से जल्द खुले बाजार में पहुंचाने का रास्ता साफ हो जाएगा। कच्ची चीनी के इस स्टॉक को दूसरे राज्यों में ले जाने के लिए कस्टम नियमों में संशोधन करना जरूरी हो गया है। दालों की मांग व आपूर्ति में खास अंतर न होने के बावजूद कीमतों के बहुत बढ़ जाने पर सरकार की चिंताएं बढ़ गई हैं। दरअसल दाल की आयातक सरकारी एजेंसियों के नियमों से जमाखोरी को बढ़ावा मिलता है। उदाहरण के लिए एसटीसी, पीईसी, नैफेड और एमएमटीसी जैसी कंपनियां आयातित दालों को बेचने के लिए हमेशा बड़े सौदों के टेंडर करती हैं। ऐसे में दाल का सौदा बड़ी व्यापारिक कंपनियां करती हैं, जो जिंस बाजार को अपनी अंगुलियों पर नचाती हैं।

तिब्बत सीमा के गांवों में बची आधी आबादी

चमोली, उत्तराखंड के तिब्बत की सीमा से सटे भारतीय गांवों में पलायन तेजी से बढ़ रहा है। आलम यह है कि कई सीमांत गांवों में वर्तमान में जनसंख्या वर्ष 1991 के मुकाबले महज आधी रह गई है। इन गांवों का अपेक्षित विकास न होना पलायन का मुख्य कारण माना जा रहा है। ऐसे में अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर द्वितीय रक्षा पंक्ति माने जाने वाले ग्रामीणों की संख्या में तेजी से आ रही कमी को लेकर जिला प्रशासन चिंतित है। भारत-तिब्बत सीमा पर चमोली जनपद के माणा, नीती, गमशाली, बाम्पा, मलारी, कैलाशपुर, जेलम, जुम्मा समेत 10 गांव बसे हुए हैं। इन गांवों के लोग शीतकाल में छह महीने के लिए जिला मुख्यालय के आसपास बसे गांवों में आ जाते हैं और गर्मी के मौसम में वे फिर वहीं लौट जाते हैं, लेकिन अब वापस होने वाले लोगों की संख्या लगातार कम होती जा रही है। हालात इस कदर खराब हो चुके हैं कि अधिकांश गांवों की जनसंख्या 1991 की तुलना में आधी कम हो चुकी है। अधिकांश गांवों में तो मूलभूत सुविधाओं से भी वंचित हैं। ऐसे में ग्रामीण गांव छोड़कर रोजगार और सुविधा की तलाश में बड़े पैमाने पर बाहर जाने लगे हैं। इन गांवों से लगे तिब्बती गांवों की बात करें, तो वहां चीन (1959 में कब्जे के बाद) पर्यटन विकास की दिशा में उल्लेखनीय कदम बढ़ा रहा है। वहां के गांवों में संचार सुविधाएं मुहैया कराने के बाद न सिर्फ सड़कों का चौड़ीकरण किया गया, बल्कि ल्हासा से किघाई प्रांत तक रेलवे लाइन तक बिछा दी गई, जिससे इन गांवों के लोगों को जनजीवन में आमूल-चूल परिवर्तन देखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बसे गांवों की भूमिका सुरक्षा की दृष्टि से अहम मानी जाती है। भौगोलिक परिस्थितियों से अच्छी तरह वाकिफ होने की वजह से यहां के लोगों को द्वितीय रक्षा पंक्ति के रूप में देखा जाता है। इसके बावजूद भारत के गांवों का विकास न होना भविष्य के लिए खतरा बढ़ाता है। जोशीमठ में तैनात सेना के अफसर भी इस बात से इत्तेफाक रखते हैं कि सीमांत गांवों से ग्रामीणों का पलायन सुरक्षा के लिहाज से अच्छा नहीं है। हालांकि उनका कहना है कि यह देखना होगा कि ये गांव बार्डर पर फ्रंट, इंटरमीडिएट अथवा डैप्थ जोन में से किसमे बसे हैं।

नेताओं का टोल टैक्स भरेगी जनता

नई दिल्ली, नेता जी को यह बात बहुत बुरी लगती थी कि कोई हाईवे पर उन्हें रोके और उनसे पैसा मांगे। लिहाजा उन्होंने सरकार से शिकायत की और सरकार ने उनकी सुन ली। अब नेताजी चौड़े होकर हाईवे और एक्सप्रेस-वे पर फर्राटा भरेंगे। किसी की मजाल नहीं जो उनसे टोल टैक्स भरने को कहे, लेकिन इसका खामियाजा उन लोगों को भुगतना पड़ेगा जो इन्हें चुनकर संसद व विधानसभाओं में भेजती है। जी हां, नेताओं को टोल टैक्स से छूट देने के लिए सरकार ने जनता से ज्यादा टोल वसूलने का फैसला किया है। केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित नई टोल टैक्स पालिसी में विधायकों, सांसदों और सरकारी अफसरों को पहले की तरह टोल टैक्स अदायगी से मुक्त कर दिया गया है। इसके बदले में हाईवे और एक्सप्रेस वेके आसपास बसे लोगों से ज्यादा टोल टैक्स वसूला जाएगा। इसकी खातिर उनकी रियायती पास सुविधा में कटौती कर दी गई है। अभी इन सड़कों पर यात्रा करने वाले स्थानीय लोगों को सामान्य से दो तिहाई शुल्क पर 50 यात्राओं की सुविधा है, लेकिन नई नीति में इनकी संख्या घटाकर 30 कर दी गई है। यानी पूरी बीस यात्राओं की कटौती। जाहिर है अब इन लोगों को ज्यादा बार पास बनवाने पड़ेंगे और ज्यादा खर्च करना पड़ेगा। कोई आश्चर्य नहीं कि उनसे यह बलिदान माननीयों के लिए ही लिया जा रहा है। वर्ष 1997 की टोल नीति के तहत नेताओं और अफसरों को टोल टैक्स से पहले भी मुक्ति थी, लेकिन 2008 में इस छूट को वापस ले लिया गया था। इससे नेता बिरादरी खासी नाराज थी। लिहाजा उन्होंने संसद में हल्ला मचाया और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री कमलनाथ को उनकी बात माननी पड़ी, लेकिन सड़कें बनाने के लिए पैसा तो चाहिए ही, लिहाजा इसका बोझ आम लोगों पर डाल दिया गया है। नई टोल पालिसी जो 1 अप्रैल 2010 से लागू होनी है, में नेताओं पर दरियादिली दिखाने के अलावा और भी कई बदलाव किए गए हैं। जैसे कि तीन एक्सल वाले दस पहिया वाहनों के लिए अलग श्रेणी बना दी गई है। इन पर दो एक्सल वाले छह पहिया सामान्य वाहनों के मुकाबले 25 प्रतिशत ज्यादा टोल वसूला जाएगा। दो लेन की सड़कों पर टोल दरों में कमी करने या उन्हें पूरी तरह टोल मुक्त रखने का निर्णय भी किया गया है। किस सड़क पर टोल लगना है और किस पर नहीं, इसका फैसला सड़क पर आने वाले खर्च और यातायात के मुताबिक किया जाएगा। जिन सड़कों के निर्माण पर प्रति किलोमीटर एक करोड़ रुपये से कम राशि खर्च होगी वे टोल से पूरी तरह मुक्त रहेंगी। जिन सड़कों पर इससे ज्यादा खर्च होगा उन पर टोल लगेगा। प्रति किलोमीटर एक करोड़ से ढाई करोड़ रुपये के खर्च वाली दो लेन सड़कों पर चार लेन के मुकाबले 30 प्रतिशत की दर से टोल की वसूली होगी। जबकि ढाई से साढ़े तीन करोड़ रुपये के खर्च की स्थिति में 50 प्रतिशत की दर से टोल वसूला जाएगा। इससे ज्यादा खर्च की स्थिति में ही पहले की तरह 60 प्रतिशत टोल लगेगा। अभी दो लेन सड़कों पर चार लेन के मुकाबले 60 प्रतिशत की समान दर से टोल वसूला जाता है।

हाईकोर्ट में फिर हारा सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली, एजेंसियां: दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक अभूतपूर्व फैसला सुनाते हुए कहा है कि प्रधान न्यायाधीश का पद सूचना अधिकार कानून के दायरे में आता है और न्यायिक स्वतंत्रता किसी न्यायाधीश का विशेषाधिकार नहीं, बल्कि उसे सौंपी गई जिम्मेदारी है। इस निर्णय से यह स्पष्ट हो गया कि उच्च न्यायालय ने अपनी एकल पीठ की ओर से दो सितंबर 2009 को दिए गए फैसले को कायम रखा। उस फैसले में भी प्रधान न्यायाधीश के कार्यालय को सूचना अधिकार दायरे में बताया गया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट को वह फैसला रास नहीं आया और उसने उसके खिलाफ अपील दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को दिल्ली हाईकोर्ट की ओर से दिए गए ऐतिहासिक फैसले के खिलाफ भी अपील दायर करने की घोषणा की है। यदि ऐसा होता है तो सुप्रीम कोर्ट एक बार फिर अपने मामले की सुनवाई खुद ही करेगा। दिल्ली उच्च न्यायालय के 88 पन्नों के फैसले को प्रधान न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन के लिए एक निजी आघात के रूप में देखा जा रहा है जो लगातार कहते रहे हैं कि उनका पद पारदर्शिता कानून के तहत नहीं आता और वह इस कानून के तहत न्यायाधीशों की संपत्तियों की घोषणा जैसी सूचना प्रकट नहीं कर सकते। उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि न्यायाधीशों की संपत्ति की घोषणा के बारे में उच्चतम न्यायालय की ओर से पारित प्रस्ताव न्यायाधीशों पर बाध्यकारी है। दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एपी शाह, विक्रमजीत सेन और एस मुरलीधर की तीन सदस्यीय पीठ ने कहा, इसकी बमुश्किल कल्पना की जा सकती है कि न्यायाधीशों के सम्मेलन में सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव न्यायाधीशों पर बाध्यकारी न हो और उसकी अहमियत पर सवाल भी उठाए जाएं। फैसले के अनुसार प्रधान न्यायाधीश एक लोक प्राधिकार हैं और उच्चतर न्यायपालिका को अपनी संपत्ति के ब्यौरे को सार्वजनिक करना चाहिए, क्योंकि वे निचली अदालतों के न्यायिक अधिकारियों से कम जवाबदेह नहीं हैं जो सेवा नियमों के तहत संपत्ति की घोषणा के लिए बाध्य हैं। पीठ ने उच्चतम न्यायालय की यह दलील खारिज कर दी जिसमें इस आधार पर प्रधान न्यायाधीश के पद को आरटीआई कानून के दायरे में लाने का विरोध किया गया था कि इससे न्यायिक स्वतंत्रता का अतिक्रमण होगा। फैसले के मुताबिक न्यायिक पदक्रम में न्यायाधीश जितने ऊपर हों, उनके संदर्भ में उतने ही बड़े स्तर की जवाबदेही की जरूरत महसूस की जाती है। अदालत ने यह दलील भी खारिज कर दी कि उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश अपनी संपत्ति की घोषणा करने के लिए बाध्य नहीं हैं। फैसले में यह भी कहा गया है कि सूचना के अधिकार कानून के तहत नागरिकों के जानकारी मांगने के बजाय सार्वजनिक प्राधिकारों को अपनी ओर से सूचना मुहैया कराना जरूरी है। प्रधान न्यायाधीश के पद के आरटीआई कानून के दायरे में होने संबंधी उच्चतम न्यायालय के फैसले में उच्चतम न्यायालय को महज यही राहत मिली है कि नोटिंग, संक्षेप में लिखीं बातें तथा फैसले के मसौदे पारदर्शिता कानून के दायरे में नहीं आते। मुख्य न्यायाधीश एपी शाह ने यह भी कहा कि न्यायपालिका से जुड़ा घोटाला किसी कार्यकारी या विधायिका के किसी सदस्य की संलिप्तता वाले घोटाले के मुकाबले हमेशा से अधिक निंदनीय माना जाता रहा है। उच्चतम न्यायालय को पारदर्शिता में कोताही न बरतने को कहने के बाद दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा कि वह भी अपने न्यायाधीशों की संपत्ति का विवरण जल्द ही सार्वजनिक करेगा। दिल्ली हाईकोर्ट मद्रास और केरल उच्च न्यायालय के बाद देश की ऐसी तीसरी उच्च अदालत होगी जो अपने न्यायाधीशों की संपत्ति का खुलासा करेगी। विधि विशेषज्ञों ने इस फैसले को ऐतिहासिक और युगांतकारी करार देकर इसकी प्रशंसा की है। इसके चलते सुप्रीम कोर्ट को दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने के पहले नए सिरे से विचार करना पड़ सकता है। उसके सामने नैतिकता का सवाल भी खड़ा हो सकता है क्योंकि सूचना आयोग, दिल्ली उच्च न्यायालय की एकल पीठ और उसकी पूर्ण पीठ उसकी दलीलों को खारिज कर चुका है।

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