डबवाली- पिछले कई दिनों से नगर की सड़कों पर मैले कपड़ों में घूम रहे बेसहारा व मानसिक तौर पर विक्षप्त युवक को आज मानवता की सेवा में समॢपत डबवाली जन सहारा सेवा संस्था के प्रधान आरके नीना तथा सदस्यों ने पकड़ कर उसे अच्छी तरह नहलाया तथा नए कपड़े पहनाकर, खाना खिलाया तथा उचित उपचार के पश्चात सम्मान सहित उसके घर तक छोड़ दिया ताकि वह अच्छी प्रकार से अपना जीवन यापन कर सके। Young Flame Headline Animator
सोमवार, 12 जुलाई 2010
डबवाली जन सहारा सेवा संस्था ने बेसहारा व मानसिक तौर पर विक्षप्त युवक को नहलाया
डबवाली- पिछले कई दिनों से नगर की सड़कों पर मैले कपड़ों में घूम रहे बेसहारा व मानसिक तौर पर विक्षप्त युवक को आज मानवता की सेवा में समॢपत डबवाली जन सहारा सेवा संस्था के प्रधान आरके नीना तथा सदस्यों ने पकड़ कर उसे अच्छी तरह नहलाया तथा नए कपड़े पहनाकर, खाना खिलाया तथा उचित उपचार के पश्चात सम्मान सहित उसके घर तक छोड़ दिया ताकि वह अच्छी प्रकार से अपना जीवन यापन कर सके।
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लायंस कल्ब सुप्रीम के नवगठित निदेशक मण्डल की बैठक सम्पन्न हुई।
डबवाली- स्थानीय लायंस कल्ब सुप्रीम के नवगठित निदेशक मण्डल की बैठक गत रात्रि बठिण्डा रोड़ स्थित रसोई रिसोर्ट में प्रधान एमएल ग्रोवर की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक का आगाज लायन नीरजा व लायन सुमन कामरा द्वारा की गई ईश वन्दना से हुआ। सर्व प्रथम लायन लेडी सुधा कामरा द्वारा परिचय उपरान्त कार्यकारिणी का कार्यभार सम्भालने पर कल्ब के सभी सदस्यों को बधाई दी तथा इस वर्ष अधिक से अधिक कार्य करने का संकल्प लिया। प्रधान एमएल ग्रोवर द्वारा इस वर्ष प्रस्तावित सामाजिक कार्यों तथा स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में किए जाने वाले कार्यों पर प्रकाश डाला। बैठक में सर्वसम्मति से आगामी तीन माह के दौरान हड्डियों, पेट के रोगों, रक्तदान शिविर के साथ-साथ वृक्षारोपण का निर्णय लिया गया। यह जानकारी देते हुए पीआरओ लायन मुकेश कामरा ने बताया कि समय बाधता का पुरस्कार एमएल ग्रोवर तथा उपस्थिति का पुरस्कार अजय गर्ग ने प्राप्त किया। इस अवसर पर लायन भूपेन्द्र पाहूजा, विनय सेठी, गुरदीप कामरा, राज मिढ्ढा, सुदेश वर्मा, प्रेम गुप्ता, सुरेन्द्र चावला, नरेश गुप्ता, विपिन अरोड़ा, दीपक ङ्क्षसगला, लोकेश्वर वधवा, पुनीत गर्ग, संजीव गर्ग, संजय कटारिया, बीएस अरोड़ा मौजूद थे। बैठक की मेजबानी लायसन अमरजीत अनेजा तथा लायन अमन चुघ द्वारा की गई।
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आस्कर फर्नाडीस को पत्र लिखकर विनोद बांसल को बी.आर. ओ. पद से हटाने की मांग की
डबवाली- आज शहर के कांग्रेसी नेताओं ने एक अधोहस्ताक्षरी द्वारा अखिल भारतीय चुनाव अधिकारी आस्कर फर्नाडीस को पत्र लिखकर विनोद बांसल को बी.आर. ओ. पद से हटाने की मांग की है। कांग्रेसी नेताओं ने पत्र में लिखा है कि विनोद बांसल ने इसी माह 1 जुलाई को इनेलो के राष्ट्रीय महासचिव तथा स्थानीय विधायक अजय सिंह चौटाला के साथ मिलकर डबवाली में सत्तासीन कांग्रेसी नगरपालिका को गिराया है। जिसमें प्रधान तथा उप-प्रधान को हटा दिया गया है। जोकि कांग्रेसी नेता थे। उन्होंने विनोद बांसल को पार्टी विरोधी गतिविधयों में संलिप्त बताते हुए उक्त पद से हटाए जाने की मांग की है। उक्त पत्र की प्रतिलिपियां कांग्रेस के महासचिव राहुल गांधी, हरियाणा के मुख्यमंत्री चौ. भूपेन्द्र सिंह हुड्डा तथा प्रदेशाध्यक्ष फूलचंद मुलाना को भी भेजी गई हैं। अधोहस्ताक्षरी पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष रामजी लाल, कांग्रेस के शहरी प्रधान नवरतन बांसल, वेदपाल नेहरा, गुरजंट सिंह बराड़, सन्तोष अरोड़ा, नंद लाल, बिमला, पवन कुमार,राम कुमार, रानी व अन्य शामिल हैं।
तेज बारिश से मौसम खुशगवार हुआ
डबवाली-आज आई तेज बारिश से जहां एक ओर मौसम खुशगवार हुआ। वही तेज आंधी से कई जगह वृक्ष उखड़ गए तथा विद्युत की तारें टूट गई। जिसके चलते सड़कों पर यातायात की समस्या उत्पन्न हो गई। प्राप्त जानकारी अनुसार डबवाली-सीतो गुन्नों रोड़ पर कई जगह वृक्षों के गिरने से यातायात बाधित हुआ तथा लोग तेज आंधी तथा बारिश के चलते घन्टों जाम में फंसे रहे। गांव वासियों तथा आस पास के क्षेत्र के लोगों ने टै्रैक्टरों की सहायता से सड़क पर गिरे वृक्षों को हटाए जाने के बाद यातायात को सुचारू किया जा सका। वहीं बारिश के चलते बठिण्डा गोल चौंक, मेन बाजार व न्यू बस स्टैंड रोड़ पर पानी एकत्रित होने से लोगों को परेशानी झेलनी पड़ी।
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ठेकेदार द्वारा घटिया निर्माण सामग्री के प्रयोग से गली टूट कर बिखरने लगी
डबवाली- स्थानीय थाना शहर भवन के साथ लगती गली का निर्माण नगरपालिका द्वारा करवाए अभी कुछ समय ही बीता है कि उक्त गली अभी से टूट कर बिखरने लगी है। शहर के समाज सेवी विनोद कोछड़ व प्रमोद कोछड़ ने संयुक्त रूप से बताया कि गली का निर्माण कुछ माह पूर्व ही इन्टरलॉकिंग ब्रिक्स द्वारा करवाया गया था लेकिन ठेकेदार द्वारा घटिया निर्माण सामग्री के प्रयोग से गली अभी से टूटनी शुरू हो गई है। उन्होंने बताया कि स्थानीय बस स्टैंड से सिरसा मार्ग को जोडऩे वाली यह एकमात्र गली है तथा इस कारण इस पर आवागमन भी ज्यादा रहता है और अभी बारिश का मौसम है शुरू होने वाला है। जिससे ओर अधिक परेशानी बढऩे का अन्देशा है। उधर इसी गली के मध्य में स्थित सतलुज पब्लिक स्कूल के प्रबन्धक ने बताया कि आसपास के क्षेत्र में डेंङ्क्षटग-पेंङ्क्षटग की दुकानें हैं तथा इनके संचालकों द्वारा अवैध अतिक्रमण किया जा रहा है। जिसके चलते विद्यालय में आने-जाने वाले छात्र-छात्राओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। कोछड़ बन्धुओं ने प्रशासन से अपील की है कि कुछ माह पूर्व गली के निर्माण में प्रयुक्त घटिया सामग्री की जां हो तथा शीघ्र अति शीघ्र इसकी रिपेयर करवाई जाए ताकि गली वासियों को भारी दिक्कतों का सामना न करना पड़े।
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रंगे हाथों पकड़ गिया चोर
डबवाली- स्थानीय न्यू बस स्टैंड रोड़ पर बाल पेन बेचने वाले एक युवक को स्टेशनरी की दुकान से सामान उठा कर अपने थैले में डालते हुए लोगों ने रंगे हाथों पकड़ लिया। प्राप्त जानकारी अनुसार स्थानीय क्राईस्ट मिशन स्कूल के समीप स्थित अमन बुक डिपू के संचालक अमन कुमार ने उसकी दुकान पर बाल पेन बेचने आए युवक अजीत खान पुत्र सुलेमान खान निवासी हनुमानगढ़ को उस समय रंगे हाथों पकड़ लिया। जब उसने पेन दिखाते-दिखाते उनकी दुकान से पेनों का डिब्बा अपने थैले में रखने का प्रयास किया। उन्होंने बताया कि उक्त युवक बाल पेन बेचने हेतु आया तथा उसने बाल पेन दिखाने शुरू कर दिए परन्तु कुछ ही समय पश्चात उनकी दुकान पर ग्राहक आ गए। वह उन्हें सामान आदि देने में मशगूल हो गए। इतने में उक्त युवक ने अपने हाथों की सफाई दिखाते हुए एक पेनों से भरा डिब्बा अपने थैले में रख लिया। ऐसा करते उन्होंने उसे देखा तथा रंगेहाथों पकड़ कर थाना शहर पुलिस के हवाले कर दिया। उन्होंने बताया कि पिछले सप्ताह भी इस युवक ने फेवीक्विक का एक पैकेट चुरा लिया था। समाचार लिखे जाने तक पुलिस युवक से पूछताछ कर रही थी।
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मुख्यमंत्री श्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा कल 13 जुलाई को सिरसा जिले के बाढग़्रस्त गांवों के दौरे पर
सिरसा। हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा कल 13 जुलाई को 12 बजे सिरसा जिले के बाढग़्रस्त गांवों का दौरा कर गांव के लोगों की समस्याएं सुनेंगे। उनके साथ हरियाणा के गृह, उद्योग एवं खेल राज्य मंत्री श्री गोपाल कांडा भी होंगे। यह जानकारी देते हुए उपायुक्त श्री सीजी रंजिनीकांथन ने बताया कि श्री हुड्डा अपने इस दौरे में जिन गांवों की भूमि बाढ़ से प्रभावित हुई है, अधिकतर उन गांवों में जाएंगे। वे सुबह दिल्ली से हवाई सफर द्वारा सिरसा के एयरफोर्स स्टेशन पर 12 बजे पहुंचेंगे। तत्पश्चात विभिन्न गांवों का दौरा करेंगे।
लोगों की दुर्दशा के लिए प्रदेश सरकार व प्रशासन की नालायकी और कुप्रबन्धन पूरी तरह से जिम्मेदार--चौटाला
चंडीगढ़,12 जुलाई: इनेलो ने बाढ़ से प्रभावित लोगों को सरकार द्वारा अभी तक कोई राहत व सहायता न पहुंचाए जाने और पीडि़त लोगों को प्रकृति के रहमोकर्म पर छोड़े जाने की तीखी आलोचना करते हुए सरकार से लोगों को तुरन्त राहत सामग्री व सहायता पहुंचाए जाने की मांग की है। इनेलो के प्रधान महासचिव अजय सिंह चौटाला ने आज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अशोक अरोड़ा, विधायक दल के उपनेता शेर सिंह बडशामी, पूर्व कृषि मन्त्री जसविंदर सिंह संधू व इनेलो के जिला प्रधान बूटा सिंह लुखी सहित पार्टी नेताओं के साथ कुरुक्षेत्र जिले के पेहवा, थानेसर और शाहबाद इलाके के बाढ़ प्रभावित करीब बीस गांवों का दौरा कर बाढ़ से हुए नुकसान का जायजा लिया। इससे पहले रविवार को अजय सिंह चौटाला ने पार्टी नेताओं के साथ बाढ़ से प्रभावित कैथल व गुहला-चीका क्षेत्र के गांवों का दौरा कर लोगों की समस्याओं को सुना और बाढ़ से हुए नुकसान का जायजा लिया था। इनेलो नेता इसके बाद अम्बाला जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर बाढ़ से हुए नुकसान का जायजा लेंगे।
अजय सिंह चौटाला ने कहा कि लोगों की दुर्दशा के लिए प्रदेश सरकार व प्रशासन की नालायकी और कुप्रबन्धन पूरी तरह से जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को सरकार व प्रशासन की ओर से अभी तक कोई राहत सामग्री व मदद नहीं प्रदान की गई है। उन्होंने कहा कि सब जगह सरकार व प्रशासन पूरी तरह से पंगु साबित हुआ है और आज प्रदेश में सरकार नाम की कोई चीज नहीं है और पूरी तरह से जंगलराज है। इनेलो विधायक ने कहा कि सामाजिक व धार्मिक संस्थाएं, स्थानीय गैर सरकारी संगठनों व इनेलो कार्यकत्र्ताओं द्वारा लोगों को राहत पहुंचाने के लिए जी-जान से मदद की जा रही है लेकिन कहीं भी सरकार की तरफ से कोई प्रयास नजर नहीं आ रहे। उन्होंने कहा कि किसानों की लाखों एकड़ फसलें न सिर्फ तबाह हो गई हैं बल्कि पशुओं के लिए चारा तक नहीं बचा है। उन्होंने कहा कि प्रभावित लोगों को राहत देना तो दूर अभी तक सरकार व प्रशासन की ओर से कोई अधिकारी पीडि़त लोगों की सुध लेने व उनका हालचाल पूछने भी नहीं पहुंचा।
इनेलो के प्रधान महासचिव ने कहा कि जिन गांवों व कॉलोनियों में पांच-पांच, छह-छह फीट पानी भर गया था अब जैसे ही वहां से पानी उतरना शुरू हुआ है तो कहीं अनाज सड़ रहा है तो कहीं बाढ़ से जानवरों की मौत होने से दूर तक बदबू फैली हुई है। उन्होंने कहा कि इससे न सिर्फ बीमारियां फैलने का गम्भीर खतरा पैदा हो गया है बल्कि लोगों को पीने के लिए साफ पानी भी नहीं मिल पा रहा। सरकार ने अभी तक बिजली व्यवस्था को सुचारू करने व लोगों को पीने का साफ पानी उपलब्ध करवाने के लिए भी कोई इंतजाम नहीं किया और जिन बस्तियों में बदबू फैल रही है वहां पर बीमारियां रोकने के लिए कोई दवाई वगैरह भी नहीं छिड़काई जा रही। उन्होंने बाढ़ प्रभावित लोगों को तुरन्त राहत व सहायता सामग्री पहुंचाए जाने, बीमारियां फैलने से रोकने के लिए विशेष चिकित्साशिविर चलाए जाने और पशुओं के लिए चारे का बंदोबस्त किए जाने की भी मांग की है।
अजय सिंह चौटाला ने कहा कि सरकार ने अगर समय रहते ड्रेनों, रजबाहों व बरसाती नालों की साफ-सफाई और बाढ़ से निपटने के लिए जरूरी आपदा प्रबन्धन तैयारियां की होती तो लोगों को होने वाले इस नुकसान से बचाया जा सकता था। उन्होंने कहा कि सरकार की नालायकी के कारण ही अम्बाला व कुरुक्षेत्र में बाढ़ आने के बाद अन्य जिलों में कोई जरूरी पूर्व प्रबन्ध नहीं किए गए और जिसके चलते कैथल, फतेहाबाद व सिरसा जिले भी बाढ़ की चपेट में आ गए। उन्होंने कहा कि बारिश के मौसम व भारी बारिश की सम्भावनाओं को देखते हुए सरकार को प्रदेश के अन्य जिलों में भी पहले से बचाव व राहत सम्बन्धी सभी जरूरी कदम उठाने चाहिए थे ताकि वहां लोगों को बाढ़ की मार से बचाया जा सकता। उन्होंने कहा कि बाढ़ से हजारों लोगों के मकान टूट गए और कीमती सामान बाढ़ में बह गया। सरकार को तुरन्त प्रभावित लोगों के क्षतिग्रस्त घरों व व्यापारिक संस्थानों और बर्बाद हुई फसलों का सर्वेक्षण व विशेष गिरदावरी करवाकर प्रभावित लोगों को पूरी राहत व मुआवजा राशि प्रदान करनी चाहिए।
अजय सिंह चौटाला ने कहा कि लोगों की दुर्दशा के लिए प्रदेश सरकार व प्रशासन की नालायकी और कुप्रबन्धन पूरी तरह से जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को सरकार व प्रशासन की ओर से अभी तक कोई राहत सामग्री व मदद नहीं प्रदान की गई है। उन्होंने कहा कि सब जगह सरकार व प्रशासन पूरी तरह से पंगु साबित हुआ है और आज प्रदेश में सरकार नाम की कोई चीज नहीं है और पूरी तरह से जंगलराज है। इनेलो विधायक ने कहा कि सामाजिक व धार्मिक संस्थाएं, स्थानीय गैर सरकारी संगठनों व इनेलो कार्यकत्र्ताओं द्वारा लोगों को राहत पहुंचाने के लिए जी-जान से मदद की जा रही है लेकिन कहीं भी सरकार की तरफ से कोई प्रयास नजर नहीं आ रहे। उन्होंने कहा कि किसानों की लाखों एकड़ फसलें न सिर्फ तबाह हो गई हैं बल्कि पशुओं के लिए चारा तक नहीं बचा है। उन्होंने कहा कि प्रभावित लोगों को राहत देना तो दूर अभी तक सरकार व प्रशासन की ओर से कोई अधिकारी पीडि़त लोगों की सुध लेने व उनका हालचाल पूछने भी नहीं पहुंचा।
इनेलो के प्रधान महासचिव ने कहा कि जिन गांवों व कॉलोनियों में पांच-पांच, छह-छह फीट पानी भर गया था अब जैसे ही वहां से पानी उतरना शुरू हुआ है तो कहीं अनाज सड़ रहा है तो कहीं बाढ़ से जानवरों की मौत होने से दूर तक बदबू फैली हुई है। उन्होंने कहा कि इससे न सिर्फ बीमारियां फैलने का गम्भीर खतरा पैदा हो गया है बल्कि लोगों को पीने के लिए साफ पानी भी नहीं मिल पा रहा। सरकार ने अभी तक बिजली व्यवस्था को सुचारू करने व लोगों को पीने का साफ पानी उपलब्ध करवाने के लिए भी कोई इंतजाम नहीं किया और जिन बस्तियों में बदबू फैल रही है वहां पर बीमारियां रोकने के लिए कोई दवाई वगैरह भी नहीं छिड़काई जा रही। उन्होंने बाढ़ प्रभावित लोगों को तुरन्त राहत व सहायता सामग्री पहुंचाए जाने, बीमारियां फैलने से रोकने के लिए विशेष चिकित्साशिविर चलाए जाने और पशुओं के लिए चारे का बंदोबस्त किए जाने की भी मांग की है।
अजय सिंह चौटाला ने कहा कि सरकार ने अगर समय रहते ड्रेनों, रजबाहों व बरसाती नालों की साफ-सफाई और बाढ़ से निपटने के लिए जरूरी आपदा प्रबन्धन तैयारियां की होती तो लोगों को होने वाले इस नुकसान से बचाया जा सकता था। उन्होंने कहा कि सरकार की नालायकी के कारण ही अम्बाला व कुरुक्षेत्र में बाढ़ आने के बाद अन्य जिलों में कोई जरूरी पूर्व प्रबन्ध नहीं किए गए और जिसके चलते कैथल, फतेहाबाद व सिरसा जिले भी बाढ़ की चपेट में आ गए। उन्होंने कहा कि बारिश के मौसम व भारी बारिश की सम्भावनाओं को देखते हुए सरकार को प्रदेश के अन्य जिलों में भी पहले से बचाव व राहत सम्बन्धी सभी जरूरी कदम उठाने चाहिए थे ताकि वहां लोगों को बाढ़ की मार से बचाया जा सकता। उन्होंने कहा कि बाढ़ से हजारों लोगों के मकान टूट गए और कीमती सामान बाढ़ में बह गया। सरकार को तुरन्त प्रभावित लोगों के क्षतिग्रस्त घरों व व्यापारिक संस्थानों और बर्बाद हुई फसलों का सर्वेक्षण व विशेष गिरदावरी करवाकर प्रभावित लोगों को पूरी राहत व मुआवजा राशि प्रदान करनी चाहिए।
सूचना अधिकार अधिनियम कागजी साबित हो रहा है।
सिरसा, 12 जुलाई-जिला परिवहन विभाग में सूचना अधिकार अधिनियम की पालना नहीं की जा रही, जिसके कारण यह अधिनियम कागजी साबित हो रहा है। अधिनियम के अनुसार विभाग को मांगी गई सूचना एक माह के भीतर देना होता है, मगर विभागीय अधिकारी इस अधिनियम के प्रति गंभीर नहीं है, इसलिए वे सूचना देने में आनाकानी कर रहे है।
अग्रसेन कालोनी निवासी आरटीआई कार्यकत्र्ता भूपेश गोयल ने बताया कि उन्होंने जिला परिवहन विभाग से 31 मई को कुछ जानकारियां मांगी थी, मगर एक माह से अधिक का समय व्यतीत हो जाने के बावजूद विभागीय अधिकारियों द्वारा जानकारी नहीं दी गई है। उन्होंने बताया कि सूचना अधिकार के तहत उन्होंने जिला परिवहन विभाग से सिरसा से जमाल के बीच चलने वाली निजि बस के रूट के बारे में जानकारी मांगी थी। इसके अलावा वाहनों के डुप्लीकेट आरसी बनाने की प्रक्रिया पूछी थी, जिसे विभागीय अधिकारियों ने अभी तक नहीं दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग में व्याप्त अनियमितताओं व भ्र्रष्टाचार के चलते कर्मी सूचना अधिकार की पालना करने से कतरा रहे हे। उन्होंने बताया कि निर्धारित समय पूरा हो जाने के कारण अब वे विभाग के प्रथम अपीलीय अधिकारी के समक्ष अपील करेंगे ताकि सच्चाई बाहर आ सके।
अग्रसेन कालोनी निवासी आरटीआई कार्यकत्र्ता भूपेश गोयल ने बताया कि उन्होंने जिला परिवहन विभाग से 31 मई को कुछ जानकारियां मांगी थी, मगर एक माह से अधिक का समय व्यतीत हो जाने के बावजूद विभागीय अधिकारियों द्वारा जानकारी नहीं दी गई है। उन्होंने बताया कि सूचना अधिकार के तहत उन्होंने जिला परिवहन विभाग से सिरसा से जमाल के बीच चलने वाली निजि बस के रूट के बारे में जानकारी मांगी थी। इसके अलावा वाहनों के डुप्लीकेट आरसी बनाने की प्रक्रिया पूछी थी, जिसे विभागीय अधिकारियों ने अभी तक नहीं दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग में व्याप्त अनियमितताओं व भ्र्रष्टाचार के चलते कर्मी सूचना अधिकार की पालना करने से कतरा रहे हे। उन्होंने बताया कि निर्धारित समय पूरा हो जाने के कारण अब वे विभाग के प्रथम अपीलीय अधिकारी के समक्ष अपील करेंगे ताकि सच्चाई बाहर आ सके।
आँखों के आप्रेशन, दांतों के निरीक्षण, ब्लड शूूगर एवं ई.सी.जी. जांच का नि:शुल्क कैम्प आयोजित
सिरसा12 जुलाई- गत दिवस मानव सेवा को समर्पित सिरसा की प्रमुख समाज सेवी संस्था श्री हनुमंत फाउंडेशन द्वारा नेहरू पार्क स्थित श्री हनुमंत चैरिटेबल हस्तपाल द्वारा आर.के.पी. नेहरू पार्क स्कूल में 136वां नेत्र जांच व आप्रेशन, दांतों के निरीक्षण, ब्लड शूगर एवं ई.सी.जी. जांच का नि:शुल्क शिविर आयोजित किया गया। इस सम्बन्ध में फाउडेशन के महासचिव डॉ. आर.के. गुप्ता ने बताया कि इस शिविर का शुभारम्भ मंत्रोच्चारण विधि से श्री हनुमान जी की ज्योति प्रज्जवलित करके किया गया। श्री हनुमंत फाउंडेशन सिरसा की एकमात्र ऐसी संस्था है जो नि:शुल्क स्वास्थ्य सेवाएं देने मे अग्रणी भूमिका निभा रही है तथा प्रचार में कम एवं समाज सेवा में ज्यादा विश्वास रखती है।
इस शिविर में नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रवीन अरोड़ा, डॉ. सीमा पूनियां व उनके स्टाफ द्वारा 300 मरीजों के नेत्र जांच व दंत चिकित्सक डॉ. पुनीत रूस्तगी, बी.डी.एस. द्वारा दांतों की जांच की गई व सामान्य रोगियों की जांच डॉ. आर.के. गुप्ता द्वारा की गई। शिविर के दौरान आप्रेशन हेतु 16 रोगियों का चयन किया गया जिनके आप्रेशन दूरबीन विधि द्वारा डॉ. प्रवीन आई हस्पताल एवं डॉ. सीमा पूनियां द्वारा नि:शुल्क किए जाएंगे। शिविर में आने वाले सभी रोगियों को 5 दिन की दवाईयां भी नि:शुल्क दी गई।
इस शिविर के सफल आयोजन में के.एल. सहगल, सुधीर अरोड़ा, ओमप्रकाश, डॉ. आर.के. गुप्ता, सुरेश सतनालीवाला, केवल कृष्ण कमल, नंद किशोर चुघ, राकेश कुमार, वेदप्रकाश गाबा व फाउंडेशन के कर्मचारियों का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा। फाउंडेशन द्वारा आगामी 137 वां दिनाक 8 अगस्त को लगाया जाएगा।
इस शिविर में नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रवीन अरोड़ा, डॉ. सीमा पूनियां व उनके स्टाफ द्वारा 300 मरीजों के नेत्र जांच व दंत चिकित्सक डॉ. पुनीत रूस्तगी, बी.डी.एस. द्वारा दांतों की जांच की गई व सामान्य रोगियों की जांच डॉ. आर.के. गुप्ता द्वारा की गई। शिविर के दौरान आप्रेशन हेतु 16 रोगियों का चयन किया गया जिनके आप्रेशन दूरबीन विधि द्वारा डॉ. प्रवीन आई हस्पताल एवं डॉ. सीमा पूनियां द्वारा नि:शुल्क किए जाएंगे। शिविर में आने वाले सभी रोगियों को 5 दिन की दवाईयां भी नि:शुल्क दी गई।
इस शिविर के सफल आयोजन में के.एल. सहगल, सुधीर अरोड़ा, ओमप्रकाश, डॉ. आर.के. गुप्ता, सुरेश सतनालीवाला, केवल कृष्ण कमल, नंद किशोर चुघ, राकेश कुमार, वेदप्रकाश गाबा व फाउंडेशन के कर्मचारियों का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा। फाउंडेशन द्वारा आगामी 137 वां दिनाक 8 अगस्त को लगाया जाएगा।
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हरियाणा सरकार बाढ़ के मामले में पंजाब के साथ आरोप-प्रत्यारोप के खेल का हिस्सा नहीं बनेगी-यादव
चंडीगढ़,12 जुलाई- हरियाणा के सिंचाई मंत्री कै0 अजय सिंह यादव ने आज कहा कि हरियाणा सरकार बाढ़ के मामले में पंजाब के साथ आरोप-प्रत्यारोप के खेल का हिस्सा नहीं बनेगी। इसलिये, सीधी बात करते हुए उन्होंने स्पष्टï किया कि यह कहना सरासर गलत है कि हांसी-बुटाना नहर के निर्माण के कारण पानी के बहाव में रूकावट आई है। उन्होंने कहा कि केन्द्रीय जल आयोग की सिफारिश पर नहर के नीचे घग्गर नदी एवं स्थानीय जल प्रवाहों के सुरक्षित बहाव के लिये कुल 2,13,074 क्यूसिक पानी की निकासी के अनेक मार्ग उपलब्ध करवाये गये हैं।
कै0 यादव आज यहाँ एक प्रैस सम्मेलन में हाल ही में आई बाढ़ पर पंजाब प्राधिकारियों की ओर से कुछ समाचार-पत्रों में प्रकाशित हो रही रिपोट्र्स पर प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे थे और उन्होंने इन रिपोट्र्स को पूरी तरह गलत बताया।
कै0 यादव ने कहा कि 6 एवं 7 जुलाई, 2010 को जिला अम्बाला एवं कुरूक्षेत्र में भारी वर्षा होने के साथ-साथ चंडीगढ़ एवं पंजाब के साथ लगती शिवालिक की तलहटी में भी काफी बारिश हुई। इसके फलस्वरूप स्थानीय नालों में जबरदस्त बाढ़ आ गई, जिससे चारों ओर पानी ही पानी हो गया। पंजाब ने अपने क्षेत्र में पचीस धारा के तटबंधों को तोड़ दिया, जिससे बाढ़ का पानी एसवाईएल कैनाल में आ गया। पानी का यह बहाव 5 जुलाई से शुरू हुआ और 6 जुलाई की सायं तक 8,000 क्यूसिक की चरमसीमा पर पहुँच गया। कुरूक्षेत्र के निकट एसवाईएल की क्षमता केवल 6,272 क्यूसिक है, जो 8,000 क्यूसिक पानी के दबाव को सहन नहीं कर पाई और 6 जुलाई को सायं लगभग 5 बजे इसके किलोमीटर 36.9 पर दरार आ गई। इस पानी से कुरूक्षेत्र के क्षेत्र में बाढ़ आ गई लेकिन यह दरार एसवाईएल नहर के नीचे साइफन के बहुत निकट थी और इस दरार से अधिकतर पानी साइफन के माध्यम से बीबीपुर झील में प्रवेश कर गया, जिसकी निकासी सरस्वती ड्रेन के माध्यम से की गई। एसवाईएल की इस दरार को 9 जुलाई, 2010 को भरा गया।
उन्होंने कहा कि अम्बाला छावनी में पानी आने का कारण पंजाब के बड़े क्षेत्र में भारी वर्षा होना था और इससे एयर फोर्स स्टेशन एवं रेलवे स्टेशन सहित सीधे तौर पर अम्बाला छावनी प्रभावित हुई। अम्बाला छावनी के निचले क्षेत्रों में चार से पाँच फुट पानी भर गया। घग्गर नदी का बायां तट, जोकि राष्टï्रीय राजमार्ग नम्बर-1 तथा अम्बाला-चंडीगढ़ रेलवे लाइन के बीच है, से अधिक बहाव के कारण अम्बाला शहर के क्षेत्रों में बाढ़ आ गई। अम्बाला शहर एवं अम्बाला छावनी से समस्त पानी अन्तत: नग्गल क्षेत्र में पहुँच गया और यह क्षेत्र छ: से सात फुट पानी में डूब गया। चूंकि टांगरी नदी पहले ही ऊफान पर थी, इसलिये पानी को तुरंत टांगरी नदी में नहीं डाला जा सका। एसवाईएल नहर पहले ही अपने उच्चतम स्तर पर बह रही थी इसलिये नग्गल क्षेत्र के पानी को शुरू में एसवाईएल नहर के माध्यम से भी नहीं निकाला जा सका। बाद में, जब टांगरी में पानी उतरने लगा और एसवाईएल नहर में भी बहाव कम हो गया, नग्गल क्षेत्र से पानी निकलने लगा और अब तक काफी मात्रा में पानी निकाला जा चुका है।
उन्होंने कहा कि घग्गर नदी के तटबंध में दरार आने से बीएमएल-हांसी-बुटाना ब्रांच बहुद्देशीय लिंक चैनल (हांसी-बुटाना कनाल) में 9 जुलाई,2010 को 2,000 क्यूसिक से अधिक पानी बहने लगा। हांसी-बुटाना कनाल में 2,000 क्यूसिक से अधिक पानी आने के कारण इसमें गांव क्योड़क के निकट दरार आ गई। इस दरार से लगभग 700 क्यूसिक पानी बहने लगा और निकटवर्ती गांवों में बाढ़ आने के बाद इसे कैथल ड्रेन में निकाला गया। इस दरार को भरने के प्रयास किये जा रहे हैं तथा यह किसी भी समय भरी जा सकती है।
मंत्री ने कहा कि पंजाब प्राधिकारी हांसी बुटाना कैनाल द्वारा रूकावट का आरोप लगाकर तथा हरियाणा द्वारा उन्हें गांव मकरौड़ साहिब से करैल तक घग्गर नदी के दूसरे चरण के चैनलाइजेशन पर आपत्ति किये जाने को पंजाब के क्षेत्रों में बाढ़ के लिये हरियाणा सरकार को दोषी ठहरा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम आरोप-प्रत्यारोप के खेल का हिस्सा बनने से इनकार करते हैं। इसलिये, सीधी बात करते हुए उन्होंने स्पष्टï किया कि यह कहना सरासर गलत है कि हांसी-बुटाना कैनाल के निर्माण के कारण पानी के बहाव में रूकावट आई है। उन्होंने कहा कि केन्द्रीय जल आयोग की सिफारिश पर नहर के नीचे घग्गर नदी एवं स्थानीय जल प्रवाहों के सुरक्षित बहाव के लिये कुल 2,13,074 क्यूसिक पानी की निकासी के अनेक मार्ग उपलब्ध करवाये गये हैं।
उन्होंने कहा कि दूसरी ओर तिताना रामनगर समाना मार्ग, जोकि पंजाब क्षेत्र में नहर का अपस्ट्रीम है, की क्षमता एक लाख क्यूसिक से भी कम है। पंजाब क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांव इसके अपस्ट्रीम पर स्थित हैं और इससे स्पष्टï है कि इन गांवों में डाऊनस्ट्रीम नहर के कारण बाढ़ नहीं आई। बहरहाल, पंजाब क्षेत्र में खनौरी पर भाखड़ा मेन लाइन के नीचे साइफन की क्षमता केवल 49,000 क्यूसिक है और केन्द्रीय जल आयोग ने भी कहा है कि खनौरी पर क्षमता को बढ़ाया जाना चाहिये क्योंकि इससे पंजाब क्षेत्र बाढ़ प्रभावित होता है। घग्गर नदी के साथ लगते पंजाब के क्षेत्र में उस समय भी बाढ़ आ जाती थी, जब इस नहर का निर्माण नहीं हुआ था। इस सम्बन्ध में पहले आई बाढ़ों का इतिहास इसका साक्षी है।
पंजाब के इस विवाद के सम्बन्ध में कि हरियाणा द्वारा गांव मकरौड़ साहिब से करैल तक घग्गर नदी के चैनलाइजेशन के दूसरे चरण के निर्माण की अनुमति नहीं दी गई, उन्होंने कहा कि पहले चरण के निर्माण की अनुमति इस शर्त पर दी गई थी कि पहले नदी के बहाव पर नजर रखी जायेगी और केवल उसके बाद ही दूसरे चरण पर निर्णय लिया जायेगा। घग्गर नदी का 22.45 किलोमीटर से प्रथम चरण का निर्माण कार्य जून 2009 में पूरा कर लिया गया था। गत वर्ष इसमें केवल नाममात्र का बहाव था और इस वर्ष के दौरान बड़े पैमाने पर बाढ़ आई। अब घग्गर स्थायी कमेटी के स्तर पर पहले चरण का विश्लेषण किया जायेगा और दूसरे चरण के बारे निर्णय लिया जायेगा।
रंगोई नाले में लगभग 11,000 क्यूसिक पानी बह रहा है, जबकि इसकी अधिकृत क्षमता 7,000 क्यूसिक है। इसके कारण गांव शकरपुर एवं मियोंद के बीच रंगोई नाले की दायीं ओर 4.500 किलोमीटर एवं 5.200 किलोमीटर पर दरार आ गई। दायीं ओर दरार होने कारण बाढ़ का पानी तेजी से घग्गर नदी में जायेगा। गांव के चारों ओर बांधों का निर्माण किया गया है और इससे आबादी के क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा नहीं होगा। जिला प्रशासन द्वारा दरारों को भरने के लिये सेना को बुलाया गया है। उन्होंने कहा कि 11 जुलाई,2010 को गांव खैरकां के निकट राष्टï्रीय राजमार्ग नम्बर-10 पर जलस्तर 19.20 फुट था, जबकि खतरे का निशान 21 फुट का है। चांदपुर में बहाव 20,700 क्यूसिक और रंगोई नाला में 11,000 क्यूसिक है। इस प्रकार, कुल बहाव 31,700 क्यूसिक है।
उन्होंने दोहराया कि इस प्रकार, हरियाणा सरकार या उसके गांववासियों की किसी भी कार्यवाही के कारण पंजाब के क्षेत्र में बाढ़ नहीं आई है। दूसरी ओर, एसवाईएल नहर में बाढ़ के पानी को छोडऩे के लिये पंजाब क्षेत्र में घग्गर के तट पर जान-बूझकर किया गया कटाव वास्तव में हरियाणा के लोगों की कीमत पर पंजाब के गांवों को राहत पहुँचाने का प्रयास है। इसी प्रकार, पंजाब में पानी के दबाव को कम करने के लिये पंजाब क्षेत्र के निकट तटबंधों को क्षतिग्रस्त किया गया, जिससे हांसी-बुटाना कनाल क्षतिग्रस्त हुई और इससे हरियाणा क्षेत्र के गांवों में बाढ़ आ गई।
कै0 यादव ने सुझाव दिया कि ऐसे नुकसानों तथा बाढ़ के पानी के प्रवाह को मोडऩे से रोकने के लिये हरियाणा एवं पंजाब पुलिस द्वारा संवेदनशील स्थलों पर संयुक्त गश्त की जानी चाहिये।
कै0 यादव आज यहाँ एक प्रैस सम्मेलन में हाल ही में आई बाढ़ पर पंजाब प्राधिकारियों की ओर से कुछ समाचार-पत्रों में प्रकाशित हो रही रिपोट्र्स पर प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे थे और उन्होंने इन रिपोट्र्स को पूरी तरह गलत बताया।
कै0 यादव ने कहा कि 6 एवं 7 जुलाई, 2010 को जिला अम्बाला एवं कुरूक्षेत्र में भारी वर्षा होने के साथ-साथ चंडीगढ़ एवं पंजाब के साथ लगती शिवालिक की तलहटी में भी काफी बारिश हुई। इसके फलस्वरूप स्थानीय नालों में जबरदस्त बाढ़ आ गई, जिससे चारों ओर पानी ही पानी हो गया। पंजाब ने अपने क्षेत्र में पचीस धारा के तटबंधों को तोड़ दिया, जिससे बाढ़ का पानी एसवाईएल कैनाल में आ गया। पानी का यह बहाव 5 जुलाई से शुरू हुआ और 6 जुलाई की सायं तक 8,000 क्यूसिक की चरमसीमा पर पहुँच गया। कुरूक्षेत्र के निकट एसवाईएल की क्षमता केवल 6,272 क्यूसिक है, जो 8,000 क्यूसिक पानी के दबाव को सहन नहीं कर पाई और 6 जुलाई को सायं लगभग 5 बजे इसके किलोमीटर 36.9 पर दरार आ गई। इस पानी से कुरूक्षेत्र के क्षेत्र में बाढ़ आ गई लेकिन यह दरार एसवाईएल नहर के नीचे साइफन के बहुत निकट थी और इस दरार से अधिकतर पानी साइफन के माध्यम से बीबीपुर झील में प्रवेश कर गया, जिसकी निकासी सरस्वती ड्रेन के माध्यम से की गई। एसवाईएल की इस दरार को 9 जुलाई, 2010 को भरा गया।
उन्होंने कहा कि अम्बाला छावनी में पानी आने का कारण पंजाब के बड़े क्षेत्र में भारी वर्षा होना था और इससे एयर फोर्स स्टेशन एवं रेलवे स्टेशन सहित सीधे तौर पर अम्बाला छावनी प्रभावित हुई। अम्बाला छावनी के निचले क्षेत्रों में चार से पाँच फुट पानी भर गया। घग्गर नदी का बायां तट, जोकि राष्टï्रीय राजमार्ग नम्बर-1 तथा अम्बाला-चंडीगढ़ रेलवे लाइन के बीच है, से अधिक बहाव के कारण अम्बाला शहर के क्षेत्रों में बाढ़ आ गई। अम्बाला शहर एवं अम्बाला छावनी से समस्त पानी अन्तत: नग्गल क्षेत्र में पहुँच गया और यह क्षेत्र छ: से सात फुट पानी में डूब गया। चूंकि टांगरी नदी पहले ही ऊफान पर थी, इसलिये पानी को तुरंत टांगरी नदी में नहीं डाला जा सका। एसवाईएल नहर पहले ही अपने उच्चतम स्तर पर बह रही थी इसलिये नग्गल क्षेत्र के पानी को शुरू में एसवाईएल नहर के माध्यम से भी नहीं निकाला जा सका। बाद में, जब टांगरी में पानी उतरने लगा और एसवाईएल नहर में भी बहाव कम हो गया, नग्गल क्षेत्र से पानी निकलने लगा और अब तक काफी मात्रा में पानी निकाला जा चुका है।
उन्होंने कहा कि घग्गर नदी के तटबंध में दरार आने से बीएमएल-हांसी-बुटाना ब्रांच बहुद्देशीय लिंक चैनल (हांसी-बुटाना कनाल) में 9 जुलाई,2010 को 2,000 क्यूसिक से अधिक पानी बहने लगा। हांसी-बुटाना कनाल में 2,000 क्यूसिक से अधिक पानी आने के कारण इसमें गांव क्योड़क के निकट दरार आ गई। इस दरार से लगभग 700 क्यूसिक पानी बहने लगा और निकटवर्ती गांवों में बाढ़ आने के बाद इसे कैथल ड्रेन में निकाला गया। इस दरार को भरने के प्रयास किये जा रहे हैं तथा यह किसी भी समय भरी जा सकती है।
मंत्री ने कहा कि पंजाब प्राधिकारी हांसी बुटाना कैनाल द्वारा रूकावट का आरोप लगाकर तथा हरियाणा द्वारा उन्हें गांव मकरौड़ साहिब से करैल तक घग्गर नदी के दूसरे चरण के चैनलाइजेशन पर आपत्ति किये जाने को पंजाब के क्षेत्रों में बाढ़ के लिये हरियाणा सरकार को दोषी ठहरा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम आरोप-प्रत्यारोप के खेल का हिस्सा बनने से इनकार करते हैं। इसलिये, सीधी बात करते हुए उन्होंने स्पष्टï किया कि यह कहना सरासर गलत है कि हांसी-बुटाना कैनाल के निर्माण के कारण पानी के बहाव में रूकावट आई है। उन्होंने कहा कि केन्द्रीय जल आयोग की सिफारिश पर नहर के नीचे घग्गर नदी एवं स्थानीय जल प्रवाहों के सुरक्षित बहाव के लिये कुल 2,13,074 क्यूसिक पानी की निकासी के अनेक मार्ग उपलब्ध करवाये गये हैं।
उन्होंने कहा कि दूसरी ओर तिताना रामनगर समाना मार्ग, जोकि पंजाब क्षेत्र में नहर का अपस्ट्रीम है, की क्षमता एक लाख क्यूसिक से भी कम है। पंजाब क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांव इसके अपस्ट्रीम पर स्थित हैं और इससे स्पष्टï है कि इन गांवों में डाऊनस्ट्रीम नहर के कारण बाढ़ नहीं आई। बहरहाल, पंजाब क्षेत्र में खनौरी पर भाखड़ा मेन लाइन के नीचे साइफन की क्षमता केवल 49,000 क्यूसिक है और केन्द्रीय जल आयोग ने भी कहा है कि खनौरी पर क्षमता को बढ़ाया जाना चाहिये क्योंकि इससे पंजाब क्षेत्र बाढ़ प्रभावित होता है। घग्गर नदी के साथ लगते पंजाब के क्षेत्र में उस समय भी बाढ़ आ जाती थी, जब इस नहर का निर्माण नहीं हुआ था। इस सम्बन्ध में पहले आई बाढ़ों का इतिहास इसका साक्षी है।
पंजाब के इस विवाद के सम्बन्ध में कि हरियाणा द्वारा गांव मकरौड़ साहिब से करैल तक घग्गर नदी के चैनलाइजेशन के दूसरे चरण के निर्माण की अनुमति नहीं दी गई, उन्होंने कहा कि पहले चरण के निर्माण की अनुमति इस शर्त पर दी गई थी कि पहले नदी के बहाव पर नजर रखी जायेगी और केवल उसके बाद ही दूसरे चरण पर निर्णय लिया जायेगा। घग्गर नदी का 22.45 किलोमीटर से प्रथम चरण का निर्माण कार्य जून 2009 में पूरा कर लिया गया था। गत वर्ष इसमें केवल नाममात्र का बहाव था और इस वर्ष के दौरान बड़े पैमाने पर बाढ़ आई। अब घग्गर स्थायी कमेटी के स्तर पर पहले चरण का विश्लेषण किया जायेगा और दूसरे चरण के बारे निर्णय लिया जायेगा।
रंगोई नाले में लगभग 11,000 क्यूसिक पानी बह रहा है, जबकि इसकी अधिकृत क्षमता 7,000 क्यूसिक है। इसके कारण गांव शकरपुर एवं मियोंद के बीच रंगोई नाले की दायीं ओर 4.500 किलोमीटर एवं 5.200 किलोमीटर पर दरार आ गई। दायीं ओर दरार होने कारण बाढ़ का पानी तेजी से घग्गर नदी में जायेगा। गांव के चारों ओर बांधों का निर्माण किया गया है और इससे आबादी के क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा नहीं होगा। जिला प्रशासन द्वारा दरारों को भरने के लिये सेना को बुलाया गया है। उन्होंने कहा कि 11 जुलाई,2010 को गांव खैरकां के निकट राष्टï्रीय राजमार्ग नम्बर-10 पर जलस्तर 19.20 फुट था, जबकि खतरे का निशान 21 फुट का है। चांदपुर में बहाव 20,700 क्यूसिक और रंगोई नाला में 11,000 क्यूसिक है। इस प्रकार, कुल बहाव 31,700 क्यूसिक है।
उन्होंने दोहराया कि इस प्रकार, हरियाणा सरकार या उसके गांववासियों की किसी भी कार्यवाही के कारण पंजाब के क्षेत्र में बाढ़ नहीं आई है। दूसरी ओर, एसवाईएल नहर में बाढ़ के पानी को छोडऩे के लिये पंजाब क्षेत्र में घग्गर के तट पर जान-बूझकर किया गया कटाव वास्तव में हरियाणा के लोगों की कीमत पर पंजाब के गांवों को राहत पहुँचाने का प्रयास है। इसी प्रकार, पंजाब में पानी के दबाव को कम करने के लिये पंजाब क्षेत्र के निकट तटबंधों को क्षतिग्रस्त किया गया, जिससे हांसी-बुटाना कनाल क्षतिग्रस्त हुई और इससे हरियाणा क्षेत्र के गांवों में बाढ़ आ गई।
कै0 यादव ने सुझाव दिया कि ऐसे नुकसानों तथा बाढ़ के पानी के प्रवाह को मोडऩे से रोकने के लिये हरियाणा एवं पंजाब पुलिस द्वारा संवेदनशील स्थलों पर संयुक्त गश्त की जानी चाहिये।
कुख्यात भगौडा तस्कर 10 साल बाद काबू
सिरसा-जिला पुलिस ने दस वर्ष पूर्व पुलिस हिरासत से फरार कुख्यात तस्कर मेजर
सिंह पुत्र जगतार सिंह निवासी बुर्ज कर्मगढ थाना सदर सिरसा हाल गांव मीने वाला गांव अरनियावाली जिला फिरोजपुर पंजाब को फिरोजपुर जेल से प्रोडेक्शन वारंट पर लेकर आई है। स्पैशल स्टाफ पुलिस के प्रभारी उपनिरीक्षक सुरजीत सिंह ने बताया कि आरोपी को आज अदालत में पेश किया जाएगा तथा शहर सिरसा व रानियां पुलिस को आरोपी की गिरफ्तारी के संबंध में सूचना दी गई है ताकि वे आरोपी को जांच में शामिल कर सके।
मामले की जानकारी देते हुए स्पैशल स्टाफ प्रभारी सहायक उपनिरीक्षक सुरजीत सिंह ने बताया कि मेजर सिंह के विरूद्ध 1997 में मादक पदार्थ अधिनियम के तहत दर्ज हुए अभियोग के संबंध में दिल्ली जेल में बंद था। जिसको सिरसा पुलिस रानियां थाना में 1991 में दर्ज हुए भादंसं की धारा 447,477, के लिए वर्ष 2000 में प्रोडेक्शन वारंट पर लेकर आई थी। पुलिस हिरासत में मेजर सिंह बीमारी के कारण सामान्य अस्पताल में दाखिल हो गया और इलाज के दौरान अस्पताल से पुलिस पार्टी को चकमा देकर फरार हो गया था। जिस पर आरोपी के खिलाफ 8 जून 2000 को भादंसं की धारा 223,224 के तहत थाना शहर में अभियोग दर्ज हुआ था। इस मामले में आरोपी को सिरसा अदालत ने 6 नवम्बर 2007 को उदघोषित करार दे दिया। आरोपी का नाम जिला की उदघोषित अपराधी सूचि में शामिल था तथा करीब दस सालों से पुलिस को इसकी तलाश थी। स्पैशल स्टाफ के प्रभारी सहायक उपनिरीक्षक सुरजीत सिंह पर आधारित टीम जिसमें सहायक उपनिरीक्षक सुल्तान सिंह, सहायक उपनिरीक्षक रिसाल सिंह, मुख्य सिपाही कुलबीर, सिपाही सिकंदर सिंह शामिल है, ने महत्वपूर्ण सुराग जुटाकर पता लगाया कि आरोपी फिरोजपुर जेल में मादक पदार्थ अधिनियम मामले में बंद है, जहां दोषी ने अपना नाम अपने आरोपों को छुपाने के लिए महल सिंह पुत्र जगतार सिंह अंकित करवा रखा है। प्रभारी ने बताया कि सिरसा अदालत से प्रोडेक्शन वारंट करवाकर आरोपी को फिरोजपुर जेल से लाया गया है।
फोटो:- आरोपी मेजर सिंह पुलिस पार्टी के साथ सिरसा अदालत में जाते हुए।
सिंह पुत्र जगतार सिंह निवासी बुर्ज कर्मगढ थाना सदर सिरसा हाल गांव मीने वाला गांव अरनियावाली जिला फिरोजपुर पंजाब को फिरोजपुर जेल से प्रोडेक्शन वारंट पर लेकर आई है। स्पैशल स्टाफ पुलिस के प्रभारी उपनिरीक्षक सुरजीत सिंह ने बताया कि आरोपी को आज अदालत में पेश किया जाएगा तथा शहर सिरसा व रानियां पुलिस को आरोपी की गिरफ्तारी के संबंध में सूचना दी गई है ताकि वे आरोपी को जांच में शामिल कर सके।मामले की जानकारी देते हुए स्पैशल स्टाफ प्रभारी सहायक उपनिरीक्षक सुरजीत सिंह ने बताया कि मेजर सिंह के विरूद्ध 1997 में मादक पदार्थ अधिनियम के तहत दर्ज हुए अभियोग के संबंध में दिल्ली जेल में बंद था। जिसको सिरसा पुलिस रानियां थाना में 1991 में दर्ज हुए भादंसं की धारा 447,477, के लिए वर्ष 2000 में प्रोडेक्शन वारंट पर लेकर आई थी। पुलिस हिरासत में मेजर सिंह बीमारी के कारण सामान्य अस्पताल में दाखिल हो गया और इलाज के दौरान अस्पताल से पुलिस पार्टी को चकमा देकर फरार हो गया था। जिस पर आरोपी के खिलाफ 8 जून 2000 को भादंसं की धारा 223,224 के तहत थाना शहर में अभियोग दर्ज हुआ था। इस मामले में आरोपी को सिरसा अदालत ने 6 नवम्बर 2007 को उदघोषित करार दे दिया। आरोपी का नाम जिला की उदघोषित अपराधी सूचि में शामिल था तथा करीब दस सालों से पुलिस को इसकी तलाश थी। स्पैशल स्टाफ के प्रभारी सहायक उपनिरीक्षक सुरजीत सिंह पर आधारित टीम जिसमें सहायक उपनिरीक्षक सुल्तान सिंह, सहायक उपनिरीक्षक रिसाल सिंह, मुख्य सिपाही कुलबीर, सिपाही सिकंदर सिंह शामिल है, ने महत्वपूर्ण सुराग जुटाकर पता लगाया कि आरोपी फिरोजपुर जेल में मादक पदार्थ अधिनियम मामले में बंद है, जहां दोषी ने अपना नाम अपने आरोपों को छुपाने के लिए महल सिंह पुत्र जगतार सिंह अंकित करवा रखा है। प्रभारी ने बताया कि सिरसा अदालत से प्रोडेक्शन वारंट करवाकर आरोपी को फिरोजपुर जेल से लाया गया है।
फोटो:- आरोपी मेजर सिंह पुलिस पार्टी के साथ सिरसा अदालत में जाते हुए।
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कर्मचारी आंदोलन के लिए तैयार रहें : गलगट
सिरसा12 जुलाई- हरियाणा गर्वनमैंट पी.डब्ल्यू.डी. मकैनिकल वर्करज यूनियन द्वारा आगामी 14 जुलाई को आयोजित किए जा रहे जिला स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन को सफल बनाने के लिए सम्पर्क अभियान चलाया जा रहा है। इसी सिलसिले में सोमवार को यूनियन कार्यालय में जिला इकाई की बैठक आयोजित कर टीमों का गठन किया गया।
बैठक को सम्बोधित करते हुए यूनियन के जिला उपाध्यक्ष गुरदेव सिंह रंधावा ने कहा कि कर्मचारी विरोधी नीतियों को लेकर 7 जुलाई से 25 अगस्त तक कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। इसी कड़ी में आगामी 14 जुलाई को सिरसा स्थित जाट धर्मशाला में डबवाली, ऐलनाबाद, चौपटा, डिंग, सिरसा, कालांवाली तथा रानियां ब्लॉक के फील्ड कर्मचारी बढ़-चढ़कर भाग लेंगे। इस सम्बन्ध में यूनियन के जिला कोषाध्यक्ष प्रताप सिंह गलगट ने बताया कि कच्चे कर्मचारियों को पक्का ना करना, निजीकरण को बढ़ावा देना, छठे वेतन आयोग की वेतन विसंगतियां को दूर न करना आदि सरकार की कर्मचारी विरोधी नीतियों को दर्शाता है। तकनीकी पदों पर कार्यरत कर्मचारियों को 1200-2040 का वेतनमान देना, तीनों विभागों में दैनिक वेतनभोगी तथा अनुबन्ध आधार पर कार्यरत कर्मचारियों को पक्का किया जाए। सभी कर्मचारियों को एल.टी.सी. का भुगतान लागू करना व शिक्षा भत्ते में अनावश्यक शर्तें हटाकर 1000 रूपये करना, निजीकरण, ठेकेदारी प्रथा की समाप्ति व एल.ओ.सी. प्रथा बंद करना आदि मांगों के लिए यूनियन ने आंदोलन चलाने का निर्णय लिया है। बैठक में भीमसेन मेहता, प्रधान राजपाल वालिया, प्रधान सुखविन्द्र सिंह मल्ली, पृथ्वी राज छापोला, रामस्वरूप झोरड़, लालाराम, हरीराम जाजड़ा, अमरपाल, निर्मल सिंह, रामस्वरूप टाक, साहब राम सहू, लाजपत लाडवा, फूसाराम टाक, तेलुराम लुगरिया, हरीचन्द मेहता, रामकुमार बिश्नोई इत्यादि नेता उपस्थित थे।
बैठक को सम्बोधित करते हुए यूनियन के जिला उपाध्यक्ष गुरदेव सिंह रंधावा ने कहा कि कर्मचारी विरोधी नीतियों को लेकर 7 जुलाई से 25 अगस्त तक कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। इसी कड़ी में आगामी 14 जुलाई को सिरसा स्थित जाट धर्मशाला में डबवाली, ऐलनाबाद, चौपटा, डिंग, सिरसा, कालांवाली तथा रानियां ब्लॉक के फील्ड कर्मचारी बढ़-चढ़कर भाग लेंगे। इस सम्बन्ध में यूनियन के जिला कोषाध्यक्ष प्रताप सिंह गलगट ने बताया कि कच्चे कर्मचारियों को पक्का ना करना, निजीकरण को बढ़ावा देना, छठे वेतन आयोग की वेतन विसंगतियां को दूर न करना आदि सरकार की कर्मचारी विरोधी नीतियों को दर्शाता है। तकनीकी पदों पर कार्यरत कर्मचारियों को 1200-2040 का वेतनमान देना, तीनों विभागों में दैनिक वेतनभोगी तथा अनुबन्ध आधार पर कार्यरत कर्मचारियों को पक्का किया जाए। सभी कर्मचारियों को एल.टी.सी. का भुगतान लागू करना व शिक्षा भत्ते में अनावश्यक शर्तें हटाकर 1000 रूपये करना, निजीकरण, ठेकेदारी प्रथा की समाप्ति व एल.ओ.सी. प्रथा बंद करना आदि मांगों के लिए यूनियन ने आंदोलन चलाने का निर्णय लिया है। बैठक में भीमसेन मेहता, प्रधान राजपाल वालिया, प्रधान सुखविन्द्र सिंह मल्ली, पृथ्वी राज छापोला, रामस्वरूप झोरड़, लालाराम, हरीराम जाजड़ा, अमरपाल, निर्मल सिंह, रामस्वरूप टाक, साहब राम सहू, लाजपत लाडवा, फूसाराम टाक, तेलुराम लुगरिया, हरीचन्द मेहता, रामकुमार बिश्नोई इत्यादि नेता उपस्थित थे।
शुक्रवार, 9 जुलाई 2010
सिविल हस्पताल में डाक्टरों की कमी व जन सुविधाओं के अभाव को लेकर रोष प्रदर्शन
डबवाली- कम्युनिस्ट पार्टी के स्थानीय नेता कामरेड गणपत राम तथा अखिल भारतीय बाल्मीकि न्याय मंच के प्रतिनिधि सुरेश गोगा के संयुक्त नेतृत्व में आज दलित समाज के लोगों ने स्थानीय सिविल हस्पताल में डाक्टरों की कमी व जन सुविधाओं के अभाव को लेकर रोष प्रदर्शन किया तथा हस्पताल परिसर में धरना दिया। धरने का नेतृत्व कर रहे का. गणपत राम ने बताया कि हस्पताल में पूरी तरह अव्यवस्था फैली हुई है। हस्पताल में न तो कोई चिकित्सक है और न ही कोई चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी। जिसके चलते किसी भी रोगी का स्वस्थ होना मुश्किल है। उन्होंने हस्पताल के एसएमओ डॉ. विनोद महिपाल से मांग की कि जल्द ही चिकित्सकों तथा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को नियुक्त किया जाऐ ताकि हस्पताल में आने वाले रोगियों का सही तथा उचित उपचार हो सके। एसएमओ डॉ. विनोद महिपाल ने धरने पर बैठे लोगों को आश्वासन दिया कि उन्होंने चिकित्सकों तथा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की भर्ती के लिए अपने उच्चाधिकारियों को लिखित में अवगत करवाया है तथा जल्द ही हस्पताल में रिक्त पड़े विभिन्न पदों पर नियुक्तियां करवा दी जाऐंगी।
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कम्युनिस्ट पार्टी,
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लोहगढ़ हैड पर राजस्थान कनाल नहर की ईंटें खिसकने नहर टूटने का खत्तरा मण्डराने लगा
डबवाली- हरियाणा तथा पंजाब प्रदेश में आई बाढ़ से लोगों में हाहाकार मचा हुआ है। हांसी-बुटाना घग्घर नदी आई दरारों से अभी खत्तरा टला ही नहीं था कि उपमण्डल के गांव लोहगढ़ हैड पर राजस्थान कनाल नहर की ईंटें खिसकने से 20 से 25 फुट लम्बे तथा 10 से 15 फुट गहरे गढे बनने से कभी भी नहर टूटने का खत्तरा मण्डराने लगा है। जिसके चलते नहर के साथ स्थित ढाणियों के ग्रामीणों में भय का माहौल पाया जा रहा है। गांव लोहगढ़ के सरपंच नछत्तर सिंह, ब्लॉक समिति के सदस्य गुरप्रीत सिंह, लखवीर सिंह, सुखेदव सिंह, सुखदर्शन सिंह, कुलदीप सिंह, बलकरण सिंह सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि नहर की ईंटें खिसकने व गढों को लेकर ङ्क्षसचाई विभाग गिद्दड़वाह के उच्चाधिकारियों को कई बार शिकायतें दी जा चुकी हैं। लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने बताया कि विभागीय अधिकारियों द्वारा रिपेयर के नाम पर आनन-फानन में मिट्टी के गट्टे दरारों में भरवाकर चले जाते हैं। जो पानी के तेज बहाव में बह जाते हैं। परन्तु नियमानुसार नहर की रिपेयर नहीं की जाती। ग्रामीणों ने बताया कि इस वर्ष की शुरूआत में जनवरी से मार्च तक रिपेयर करने को लेकर नहरबन्दी की गई थी परन्तु रिपेयर के नाम पर एक भी ईंट नहीं लगाई गई। गांव के सरपंच नछत्तर ङ्क्षसह ने बताया कि नहर के साथ स्थित ढाणी हजारां सिंह वाली के निवासी ग्रामीण दिन-रात भय के माहौल में सांस ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि पंजाब प्रदेश द्वारा बाढ़ का पानी राजस्थान कनाल में छोड़ देने से पानी का उफान अपने पूरे यौवन पर है। उन्होंने आशंका जताई की बरसात के बाद पानी का स्तर ओर अधिक बढऩे से नहर कभी भी टूट सकती है। जिसके फलस्वरूप साथ लगते गांव लोहगढ़ के साथ - साथ जोतांवाली, सकता खेड़ा, मुन्नावाली तथा ढाणियों के अतिरिक्त 5 किलोमीटर के एरिया तक रेलवे लाईन को भी खत्तरा हो सकता है। ग्रामीणों ने बताया कि ङ्क्षसचाई विभाग के अधिकारियों द्वारा उनकी इस समस्या के प्रति ध्यान न दिया गया तो वह शीघ्र ही पंजाब प्रदेश के मुख्यमन्त्री प्रकाश सिंह बादल से मुलाकात करेंगे। इस बारे में सम्बन्धित विभाग के जेई सुखचरण सिंह के मोबाईल नम्बर 98147-00710 पर सम्पर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि इस बारे में उच्चाधिकारियों को अवगत करवा दिया गया है तथा वह शीघ्र ही लोहगढ़ का दौरा करेंगे।
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छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाईयों के मालिकों को अपने उद्योगों के एफ्यूलैंट ट्रीटमेंट प्लांटों का स्तर बढ़ाने के निर्देश
सिरसा,9 जुलाई -प्रदेश के पर्यावरण विभाग द्वारा सभी छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाईयों के मालिकों को अपने उद्योगों में पर्याप्त क्षमता के एफ्यूलैंट ट्रीटमेंट प्लांटों का स्तर बढ़ाने के निर्देश दिए गए है। यदि किसी उद्योग में विभाग के मापदंडों के अनुसार ट्रीटमेंट प्लांट नहीं पाए जाते तो उसके खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाएगी। यह बात प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड हरियाणा के चेयरमैन डा. ए.एस चहल ने आज सिरसा जिला के बकरियांवाली कचरा प्रबंधन प्लांट में दौरा करने के पश्चात स्थानीय लोक निर्माण विभाग के विश्राम गृह में पत्रकारों से कही। उनके इस दौरे में उनके साथ पर्यावरण विभाग के वित्तायुक्त श्री जी. प्रसन्ना कुमार, उपायुक्त श्री सी.जी रजिनीकांथन प्रशासनिक अधिकारी व पर्यावरण विभाग अधिकारी भी थे।
उन्होंने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों द्वारा औद्योगिक इकाईयों में औचक निरीक्षण किया जा रहा है। जो भी औद्योगिक इकाईयां प्रदूषण नियंत्रण के मापदंडों में खरा नहीं उतर रही उनके खिलाफ कार्यवाही की जा रही है ओर नोटिस दिए जा रहे है। प्रदेश में औद्योगिक वेस्ट के अलावा प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण शहरों और कस्बों से निकलने वाला कूड़ा कचरा है। विभाग द्वारा राज्य स्तर पर निर्णय लिया गया है कि प्रदेश के सभी शहरों में कचरा प्रबंधन प्लांट स्थापित किए जाएंगे। अभी तक हरियाणा के सिरसा और अंबाला शहर में कचरा प्रबंधन प्लांट स्थापित किए जा चुके है। प्रदेश के अधिकतर शहरों व कस्बों में कचरा प्रबंधन प्लांट स्थापित करने की प्रक्रिया शुरु है। कई शहरों में इसके लिए जमीन अधिग्रहण का कार्य कर लिया गया है। इसके साथ-साथ शहरों में सीवरेज का पानी भी प्रदूषण का एक कारण है। इस पानी को ट्रीट करके खेती योग्य बनाने व अन्य कार्यों में प्रयोग लाने के लिए सभी शहरों में राज्य स्तर पर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगवाने का निर्णय लिया गया है।
उन्होंने बताया कि शहरों में स्थापित अस्पतालों, पैथोलॉजिकल लैब व अन्य स्थानों से निकलने वाले बायोमैडीकल गैस के डिस्पोजल के लिए भी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा कुछ पार्टियों को अनापत्ति प्रमाण पत्र दिया गया है। इन पार्टियों द्वारा बायोमैडीकल वेस्ट का डिस्पोजल सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सभी अस्पतालों, नर्सिंग होम इत्यादि को निर्देश दिए गए है कि वे 31 जुलाई तक अपने-अपने प्रतिष्ठानों में बायोमैडीकल वेस्ट स्टोर करने के लिए इंतजाम करे। यदि कोई संस्थान या प्रतिष्ठान इन मापदंडों पर खरा नहीं उतरेगा तो उसके खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जाएगी।
श्री चहल ने बताया कि प्रदेश में पेंट, रंग रोगन की फैक्टरियों से निकलने वाले वेस्ट के प्रबंधन के लिए विभाग द्वारा हेम्स नामक कंपनी से समझौता किया गया है। यह कंपनी फरीदाबाद जिले के पाली गांव में हजर्ड देश प्लांट लगाएगी। इस प्रकार के वेस्ट को अप्रभावित करके जमीन के अंदर दबाया जाएगा और उस जमीन के ऊपर पार्क जैसी जगह विकसित की जाएगी। इसके साथ-साथ हरियाणा में पॉलीथीन के प्रयोग पर भी रोक लगाई हुई है। कोई भी व्यक्ति चालीस माइक्रो से कम पॉलीथीन का प्रयोग न तो कर सकता है और न ही उसका उत्पादन कर सकता है। इसके साथ-साथ चालीस माइक्रो से अधिक के पॉलीथीन का साईज भी 12 318 इंच से छोटा नहीं होना चाहिए। पॉलीथीन के प्रयोग पर विभाग द्वारा पूरी सख्ताई बरती जा रही है। प्रदेश में विभागीय मापदंडों के खिलाफ पॉलीथीन का प्रयोग करने पर 800 से भी अधिक लोगों के चालान किए जा चुके है। सिरसा जिला में तीन दर्जन से भी अधिक लोगों के चालान किए गए है। उन्होंने स्थानीय प्रशासन के साथ सिरसा जिले के बकरियांवाली स्थित कचरा प्रबंधन प्लांट का दौरा किया और प्लांट का कार्य देख रही कंपनी के अधिकारियों से कहा कि वे विभिन्न प्रकार के कचरे की छिटाई करके खाद तैयार करे, तभी उनकी खाद की बिक्री हो पाएगी। उन्होंने कहा कि इस प्लांट में कुछ कमियां पाई गई। इसीलिए अधिकारियों को निर्देश दिए है कि वे इसे शीघ्र दुरुस्त करवाए जिससे आसपास के क्षेत्र में किसी प्रकार का प्रदूषण न फैले। प्रदूषण की समस्या को लेकर स्थानीय बकरियांवाली गांव के किसानों ने भी अपनी शिकायत उनके सामने रखी। उन्होंने आश्वासन दिया कि उनकी समस्या का शीघ्र समाधान किया जाएगा। उन्होंने आज स्थानीय मिल्क प्लांट और जगदंबा पेपर मील का दौरा कर निरीक्षण किया।
उन्होंने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों द्वारा औद्योगिक इकाईयों में औचक निरीक्षण किया जा रहा है। जो भी औद्योगिक इकाईयां प्रदूषण नियंत्रण के मापदंडों में खरा नहीं उतर रही उनके खिलाफ कार्यवाही की जा रही है ओर नोटिस दिए जा रहे है। प्रदेश में औद्योगिक वेस्ट के अलावा प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण शहरों और कस्बों से निकलने वाला कूड़ा कचरा है। विभाग द्वारा राज्य स्तर पर निर्णय लिया गया है कि प्रदेश के सभी शहरों में कचरा प्रबंधन प्लांट स्थापित किए जाएंगे। अभी तक हरियाणा के सिरसा और अंबाला शहर में कचरा प्रबंधन प्लांट स्थापित किए जा चुके है। प्रदेश के अधिकतर शहरों व कस्बों में कचरा प्रबंधन प्लांट स्थापित करने की प्रक्रिया शुरु है। कई शहरों में इसके लिए जमीन अधिग्रहण का कार्य कर लिया गया है। इसके साथ-साथ शहरों में सीवरेज का पानी भी प्रदूषण का एक कारण है। इस पानी को ट्रीट करके खेती योग्य बनाने व अन्य कार्यों में प्रयोग लाने के लिए सभी शहरों में राज्य स्तर पर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगवाने का निर्णय लिया गया है।
उन्होंने बताया कि शहरों में स्थापित अस्पतालों, पैथोलॉजिकल लैब व अन्य स्थानों से निकलने वाले बायोमैडीकल गैस के डिस्पोजल के लिए भी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा कुछ पार्टियों को अनापत्ति प्रमाण पत्र दिया गया है। इन पार्टियों द्वारा बायोमैडीकल वेस्ट का डिस्पोजल सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सभी अस्पतालों, नर्सिंग होम इत्यादि को निर्देश दिए गए है कि वे 31 जुलाई तक अपने-अपने प्रतिष्ठानों में बायोमैडीकल वेस्ट स्टोर करने के लिए इंतजाम करे। यदि कोई संस्थान या प्रतिष्ठान इन मापदंडों पर खरा नहीं उतरेगा तो उसके खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जाएगी।
श्री चहल ने बताया कि प्रदेश में पेंट, रंग रोगन की फैक्टरियों से निकलने वाले वेस्ट के प्रबंधन के लिए विभाग द्वारा हेम्स नामक कंपनी से समझौता किया गया है। यह कंपनी फरीदाबाद जिले के पाली गांव में हजर्ड देश प्लांट लगाएगी। इस प्रकार के वेस्ट को अप्रभावित करके जमीन के अंदर दबाया जाएगा और उस जमीन के ऊपर पार्क जैसी जगह विकसित की जाएगी। इसके साथ-साथ हरियाणा में पॉलीथीन के प्रयोग पर भी रोक लगाई हुई है। कोई भी व्यक्ति चालीस माइक्रो से कम पॉलीथीन का प्रयोग न तो कर सकता है और न ही उसका उत्पादन कर सकता है। इसके साथ-साथ चालीस माइक्रो से अधिक के पॉलीथीन का साईज भी 12 318 इंच से छोटा नहीं होना चाहिए। पॉलीथीन के प्रयोग पर विभाग द्वारा पूरी सख्ताई बरती जा रही है। प्रदेश में विभागीय मापदंडों के खिलाफ पॉलीथीन का प्रयोग करने पर 800 से भी अधिक लोगों के चालान किए जा चुके है। सिरसा जिला में तीन दर्जन से भी अधिक लोगों के चालान किए गए है। उन्होंने स्थानीय प्रशासन के साथ सिरसा जिले के बकरियांवाली स्थित कचरा प्रबंधन प्लांट का दौरा किया और प्लांट का कार्य देख रही कंपनी के अधिकारियों से कहा कि वे विभिन्न प्रकार के कचरे की छिटाई करके खाद तैयार करे, तभी उनकी खाद की बिक्री हो पाएगी। उन्होंने कहा कि इस प्लांट में कुछ कमियां पाई गई। इसीलिए अधिकारियों को निर्देश दिए है कि वे इसे शीघ्र दुरुस्त करवाए जिससे आसपास के क्षेत्र में किसी प्रकार का प्रदूषण न फैले। प्रदूषण की समस्या को लेकर स्थानीय बकरियांवाली गांव के किसानों ने भी अपनी शिकायत उनके सामने रखी। उन्होंने आश्वासन दिया कि उनकी समस्या का शीघ्र समाधान किया जाएगा। उन्होंने आज स्थानीय मिल्क प्लांट और जगदंबा पेपर मील का दौरा कर निरीक्षण किया।
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छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाईयों के मालिकों को अपने उद्योगों के एफ्यूलैंट ट्रीटमेंट प्लांटों का स्तर बढ़ाने के निर्देश
सिरसा,9 जुलाई -प्रदेश के पर्यावरण विभाग द्वारा सभी छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाईयों के मालिकों को अपने उद्योगों में पर्याप्त क्षमता के एफ्यूलैंट ट्रीटमेंट प्लांटों का स्तर बढ़ाने के निर्देश दिए गए है। यदि किसी उद्योग में विभाग के मापदंडों के अनुसार ट्रीटमेंट प्लांट नहीं पाए जाते तो उसके खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाएगी। यह बात प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड हरियाणा के चेयरमैन डा. ए.एस चहल ने आज सिरसा जिला के बकरियांवाली कचरा प्रबंधन प्लांट में दौरा करने के पश्चात स्थानीय लोक निर्माण विभाग के विश्राम गृह में पत्रकारों से कही। उनके इस दौरे में उनके साथ पर्यावरण विभाग के वित्तायुक्त श्री जी. प्रसन्ना कुमार, उपायुक्त श्री सी.जी रजिनीकांथन प्रशासनिक अधिकारी व पर्यावरण विभाग अधिकारी भी थे।
उन्होंने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों द्वारा औद्योगिक इकाईयों में औचक निरीक्षण किया जा रहा है। जो भी औद्योगिक इकाईयां प्रदूषण नियंत्रण के मापदंडों में खरा नहीं उतर रही उनके खिलाफ कार्यवाही की जा रही है ओर नोटिस दिए जा रहे है। प्रदेश में औद्योगिक वेस्ट के अलावा प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण शहरों और कस्बों से निकलने वाला कूड़ा कचरा है। विभाग द्वारा राज्य स्तर पर निर्णय लिया गया है कि प्रदेश के सभी शहरों में कचरा प्रबंधन प्लांट स्थापित किए जाएंगे। अभी तक हरियाणा के सिरसा और अंबाला शहर में कचरा प्रबंधन प्लांट स्थापित किए जा चुके है। प्रदेश के अधिकतर शहरों व कस्बों में कचरा प्रबंधन प्लांट स्थापित करने की प्रक्रिया शुरु है। कई शहरों में इसके लिए जमीन अधिग्रहण का कार्य कर लिया गया है। इसके साथ-साथ शहरों में सीवरेज का पानी भी प्रदूषण का एक कारण है। इस पानी को ट्रीट करके खेती योग्य बनाने व अन्य कार्यों में प्रयोग लाने के लिए सभी शहरों में राज्य स्तर पर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगवाने का निर्णय लिया गया है।
उन्होंने बताया कि शहरों में स्थापित अस्पतालों, पैथोलॉजिकल लैब व अन्य स्थानों से निकलने वाले बायोमैडीकल गैस के डिस्पोजल के लिए भी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा कुछ पार्टियों को अनापत्ति प्रमाण पत्र दिया गया है। इन पार्टियों द्वारा बायोमैडीकल वेस्ट का डिस्पोजल सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सभी अस्पतालों, नर्सिंग होम इत्यादि को निर्देश दिए गए है कि वे 31 जुलाई तक अपने-अपने प्रतिष्ठानों में बायोमैडीकल वेस्ट स्टोर करने के लिए इंतजाम करे। यदि कोई संस्थान या प्रतिष्ठान इन मापदंडों पर खरा नहीं उतरेगा तो उसके खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जाएगी।
श्री चहल ने बताया कि प्रदेश में पेंट, रंग रोगन की फैक्टरियों से निकलने वाले वेस्ट के प्रबंधन के लिए विभाग द्वारा हेम्स नामक कंपनी से समझौता किया गया है। यह कंपनी फरीदाबाद जिले के पाली गांव में हजर्ड देश प्लांट लगाएगी। इस प्रकार के वेस्ट को अप्रभावित करके जमीन के अंदर दबाया जाएगा और उस जमीन के ऊपर पार्क जैसी जगह विकसित की जाएगी। इसके साथ-साथ हरियाणा में पॉलीथीन के प्रयोग पर भी रोक लगाई हुई है। कोई भी व्यक्ति चालीस माइक्रो से कम पॉलीथीन का प्रयोग न तो कर सकता है और न ही उसका उत्पादन कर सकता है। इसके साथ-साथ चालीस माइक्रो से अधिक के पॉलीथीन का साईज भी 12 318 इंच से छोटा नहीं होना चाहिए। पॉलीथीन के प्रयोग पर विभाग द्वारा पूरी सख्ताई बरती जा रही है। प्रदेश में विभागीय मापदंडों के खिलाफ पॉलीथीन का प्रयोग करने पर 800 से भी अधिक लोगों के चालान किए जा चुके है। सिरसा जिला में तीन दर्जन से भी अधिक लोगों के चालान किए गए है। उन्होंने स्थानीय प्रशासन के साथ सिरसा जिले के बकरियांवाली स्थित कचरा प्रबंधन प्लांट का दौरा किया और प्लांट का कार्य देख रही कंपनी के अधिकारियों से कहा कि वे विभिन्न प्रकार के कचरे की छिटाई करके खाद तैयार करे, तभी उनकी खाद की बिक्री हो पाएगी। उन्होंने कहा कि इस प्लांट में कुछ कमियां पाई गई। इसीलिए अधिकारियों को निर्देश दिए है कि वे इसे शीघ्र दुरुस्त करवाए जिससे आसपास के क्षेत्र में किसी प्रकार का प्रदूषण न फैले। प्रदूषण की समस्या को लेकर स्थानीय बकरियांवाली गांव के किसानों ने भी अपनी शिकायत उनके सामने रखी। उन्होंने आश्वासन दिया कि उनकी समस्या का शीघ्र समाधान किया जाएगा। उन्होंने आज स्थानीय मिल्क प्लांट और जगदंबा पेपर मील का दौरा कर निरीक्षण किया।
उन्होंने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों द्वारा औद्योगिक इकाईयों में औचक निरीक्षण किया जा रहा है। जो भी औद्योगिक इकाईयां प्रदूषण नियंत्रण के मापदंडों में खरा नहीं उतर रही उनके खिलाफ कार्यवाही की जा रही है ओर नोटिस दिए जा रहे है। प्रदेश में औद्योगिक वेस्ट के अलावा प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण शहरों और कस्बों से निकलने वाला कूड़ा कचरा है। विभाग द्वारा राज्य स्तर पर निर्णय लिया गया है कि प्रदेश के सभी शहरों में कचरा प्रबंधन प्लांट स्थापित किए जाएंगे। अभी तक हरियाणा के सिरसा और अंबाला शहर में कचरा प्रबंधन प्लांट स्थापित किए जा चुके है। प्रदेश के अधिकतर शहरों व कस्बों में कचरा प्रबंधन प्लांट स्थापित करने की प्रक्रिया शुरु है। कई शहरों में इसके लिए जमीन अधिग्रहण का कार्य कर लिया गया है। इसके साथ-साथ शहरों में सीवरेज का पानी भी प्रदूषण का एक कारण है। इस पानी को ट्रीट करके खेती योग्य बनाने व अन्य कार्यों में प्रयोग लाने के लिए सभी शहरों में राज्य स्तर पर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगवाने का निर्णय लिया गया है।
उन्होंने बताया कि शहरों में स्थापित अस्पतालों, पैथोलॉजिकल लैब व अन्य स्थानों से निकलने वाले बायोमैडीकल गैस के डिस्पोजल के लिए भी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा कुछ पार्टियों को अनापत्ति प्रमाण पत्र दिया गया है। इन पार्टियों द्वारा बायोमैडीकल वेस्ट का डिस्पोजल सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सभी अस्पतालों, नर्सिंग होम इत्यादि को निर्देश दिए गए है कि वे 31 जुलाई तक अपने-अपने प्रतिष्ठानों में बायोमैडीकल वेस्ट स्टोर करने के लिए इंतजाम करे। यदि कोई संस्थान या प्रतिष्ठान इन मापदंडों पर खरा नहीं उतरेगा तो उसके खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जाएगी।
श्री चहल ने बताया कि प्रदेश में पेंट, रंग रोगन की फैक्टरियों से निकलने वाले वेस्ट के प्रबंधन के लिए विभाग द्वारा हेम्स नामक कंपनी से समझौता किया गया है। यह कंपनी फरीदाबाद जिले के पाली गांव में हजर्ड देश प्लांट लगाएगी। इस प्रकार के वेस्ट को अप्रभावित करके जमीन के अंदर दबाया जाएगा और उस जमीन के ऊपर पार्क जैसी जगह विकसित की जाएगी। इसके साथ-साथ हरियाणा में पॉलीथीन के प्रयोग पर भी रोक लगाई हुई है। कोई भी व्यक्ति चालीस माइक्रो से कम पॉलीथीन का प्रयोग न तो कर सकता है और न ही उसका उत्पादन कर सकता है। इसके साथ-साथ चालीस माइक्रो से अधिक के पॉलीथीन का साईज भी 12 318 इंच से छोटा नहीं होना चाहिए। पॉलीथीन के प्रयोग पर विभाग द्वारा पूरी सख्ताई बरती जा रही है। प्रदेश में विभागीय मापदंडों के खिलाफ पॉलीथीन का प्रयोग करने पर 800 से भी अधिक लोगों के चालान किए जा चुके है। सिरसा जिला में तीन दर्जन से भी अधिक लोगों के चालान किए गए है। उन्होंने स्थानीय प्रशासन के साथ सिरसा जिले के बकरियांवाली स्थित कचरा प्रबंधन प्लांट का दौरा किया और प्लांट का कार्य देख रही कंपनी के अधिकारियों से कहा कि वे विभिन्न प्रकार के कचरे की छिटाई करके खाद तैयार करे, तभी उनकी खाद की बिक्री हो पाएगी। उन्होंने कहा कि इस प्लांट में कुछ कमियां पाई गई। इसीलिए अधिकारियों को निर्देश दिए है कि वे इसे शीघ्र दुरुस्त करवाए जिससे आसपास के क्षेत्र में किसी प्रकार का प्रदूषण न फैले। प्रदूषण की समस्या को लेकर स्थानीय बकरियांवाली गांव के किसानों ने भी अपनी शिकायत उनके सामने रखी। उन्होंने आश्वासन दिया कि उनकी समस्या का शीघ्र समाधान किया जाएगा। उन्होंने आज स्थानीय मिल्क प्लांट और जगदंबा पेपर मील का दौरा कर निरीक्षण किया।
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सिरसा जिला में 15 अरब 23 करोड़ 47 लाख 29 हजार रुपए के ऋण दिए गए
सिरसा,9 जुलाई- सिरसा जिला में विभिन्न राष्ट्रीय कृत एवं कृषि विकास बैंको द्वारा वर्ष 2009-10 के दौरान विभिन्न क्षेत्रों के लिए 15 अरब 23 करोड़ 47 लाख 29 हजार रुपए के ऋण दिए गए, जबकि बैंकों द्वारा 13 अरब 28 करोड़ 32 लाख 99 हजार रुपए के ऋण देने का लक्ष्य रखा गया था। इस प्रकार से बैंकों द्वारा अपने लक्ष्य से आगे बढ़कर 112 प्रतिशत की प्राप्ति की है।
यह जानकारी देते हुए उपायुक्त श्री सी.जी रजिनीकांथन ने बताया कि सबसे अधिक ऋण की राशि कृषि के क्षेत्र में प्रदान की गई। इस क्षेत्र में 12 अरब 83 करोड़ 33 लाख 68 हजार रुपए की राशि के ऋण प्रदान किए गए। इस क्षेत्र के लिए ऋण देने का लक्ष्य 11 अरब 57 करोड़ 53 लाख 74 हजार रुपए निर्धारित किया गया था। कृषि के क्षेत्र में 111 प्रतिशत लक्ष्य की प्राप्ति की गई। उन्होंने बताया कि सबसे अधिक ऋण जिला स्थित पंजाब नैशनल बैंकों की शाखाओं द्वारा प्रदान किया गया।
उन्होंने बताया कि लघु उद्योग के क्षेत्र में 1 अरब 12 करोड़ 34 लाख रुपए के ऋण दिए गए थे। इस क्षेत्र में 1 अरब 4 करोड़ 74 लाख 89 हजार रुपए के ऋण देने का लक्ष्य रखा गया था। इस प्रकार से इस क्षेत्र में 107 प्रतिशत लक्ष्य की प्राप्ति की गई। इसके साथ-साथ जिला में अन्य व्यापारिक गतिविधियां बढ़ाने और रोजगार स्थापित करने के उद्देश्य से भी विभिन्न राष्ट्रीय कृत एवं कृषि बैंकों द्वारा 1 अरब 27 करोड़ 79 लाख 59 हजार रुपए की राशि के ऋण दिए गए। इस प्रकार से इस क्षेत्र में भी 140 प्रतिशत लक्ष्य की प्राप्ति की गई।
श्री रजिनीकांथन ने बताया कि जिला में स्वर्णजयंती ग्राम स्वरोजगार योजना और स्वर्णजयंती शहरी स्वरोजगार योजना के तहत विभिन्न बैंकों द्वारा गत वर्ष के दौरान मार्च के अंत तक 8 करोड़ 20 लाख रुपए की राशि उपलब्ध करवाई गई। स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना के तहत 6 करोड़ 20 लाख रुपए और स्वर्णजयंती शहरी स्वरोजगार योजना के तहत 2 करोड़ रुपए की राशि उपलब्ध करवाई गई। स्वर्ण जयंती ग्रामीण स्वरोजगार योजना के तहत बैंकों द्वारा निर्धारित लक्ष्य से दोगुनी राशि इन योजना के तहत उपलबध करवाकर महिलाओं और युवाओं के लिए रोजगार स्थापित करवाए गए।
यह जानकारी देते हुए उपायुक्त श्री सी.जी रजिनीकांथन ने बताया कि सबसे अधिक ऋण की राशि कृषि के क्षेत्र में प्रदान की गई। इस क्षेत्र में 12 अरब 83 करोड़ 33 लाख 68 हजार रुपए की राशि के ऋण प्रदान किए गए। इस क्षेत्र के लिए ऋण देने का लक्ष्य 11 अरब 57 करोड़ 53 लाख 74 हजार रुपए निर्धारित किया गया था। कृषि के क्षेत्र में 111 प्रतिशत लक्ष्य की प्राप्ति की गई। उन्होंने बताया कि सबसे अधिक ऋण जिला स्थित पंजाब नैशनल बैंकों की शाखाओं द्वारा प्रदान किया गया।
उन्होंने बताया कि लघु उद्योग के क्षेत्र में 1 अरब 12 करोड़ 34 लाख रुपए के ऋण दिए गए थे। इस क्षेत्र में 1 अरब 4 करोड़ 74 लाख 89 हजार रुपए के ऋण देने का लक्ष्य रखा गया था। इस प्रकार से इस क्षेत्र में 107 प्रतिशत लक्ष्य की प्राप्ति की गई। इसके साथ-साथ जिला में अन्य व्यापारिक गतिविधियां बढ़ाने और रोजगार स्थापित करने के उद्देश्य से भी विभिन्न राष्ट्रीय कृत एवं कृषि बैंकों द्वारा 1 अरब 27 करोड़ 79 लाख 59 हजार रुपए की राशि के ऋण दिए गए। इस प्रकार से इस क्षेत्र में भी 140 प्रतिशत लक्ष्य की प्राप्ति की गई।
श्री रजिनीकांथन ने बताया कि जिला में स्वर्णजयंती ग्राम स्वरोजगार योजना और स्वर्णजयंती शहरी स्वरोजगार योजना के तहत विभिन्न बैंकों द्वारा गत वर्ष के दौरान मार्च के अंत तक 8 करोड़ 20 लाख रुपए की राशि उपलब्ध करवाई गई। स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना के तहत 6 करोड़ 20 लाख रुपए और स्वर्णजयंती शहरी स्वरोजगार योजना के तहत 2 करोड़ रुपए की राशि उपलब्ध करवाई गई। स्वर्ण जयंती ग्रामीण स्वरोजगार योजना के तहत बैंकों द्वारा निर्धारित लक्ष्य से दोगुनी राशि इन योजना के तहत उपलबध करवाकर महिलाओं और युवाओं के लिए रोजगार स्थापित करवाए गए।
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बच्चों की बहादुरी के लिए अवॉर्ड देने हेतु आवेदन आमंत्रित
सिरसा, 9 जुलाई -प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही इंडियन काउंसिल फॉर चाइल्ड वैलफेयर योजना के तहत बच्चों की बहादुरी के लिए अवॉर्ड देने हेतु आवेदन आमंत्रित किए गए है जिनकी अंतिम तिथि 30 सितम्बर 2010 है।
यह जानकारी जिला उपायुक्त सी.जी रजिनीकांथन ने देते हुए बताया कि उक्त योजना के तहत उन बहादुर बच्चों को सम्मानित किया जाता है जिन्होंने बहादुरी के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करते हुए अपनी जान की परवाह न करते हुए दूसरों की रक्षा की हो। ऐसे बच्चों को मैडल, प्रमाण पत्र व नकद राशि देकर सम्मानित किया जाता है।
उन्होंने बताया कि जिन बच्चों की आयु 6 से 18 वर्ष के बीच की हो और उन्होंने किसी खतरे की स्थिति के समय बहादुरी से काम किया हो, ऐसे बच्चों के लिए प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही उक्त योजना के तहत प्रत्येक वर्ष अवार्ड कार्यक्रम आयोजित कर सम्मानित किया जाता है। इस कार्यक्रम में देश के प्रतिष्ठित व्यक्ति शिरकत करते है।
श्री रजिनीकांथन ने बताया कि इस योजना के तहत बहादुर बच्चों को विभिन्न प्रकार के अवार्ड जैसे भारत अवार्ड, गीता चोपड़ा अवार्ड, संजय चोपड़ा अवार्ड, बापू गांधी अवार्ड तथा सामान्य अवार्ड इत्यादि देकर प्रधानमंत्री द्वारा गणतंत्र दिवस के एक दिन के पूर्व सम्मानित किया जाता है। इस योजना के तहत बच्चों द्वारा बहादुरी का कार्य 1 जुलाई 2009 से 30 जून 2010 के बीच के समय सीमा में किया जाना चाहिए तभी वह 2011 के अवार्ड कार्यक्रम के लिए आवेदन कर सकते है। इस आवेदन पत्र में प्रार्थियों को अपने द्वारा किए गए बहादुरी के कार्य की पूर्ण जानकारी 250 शब्दों में लिखकर दस्ती तौर पर देनी होगी। जैसे एफआईआर, सीडी या टेप या किसी समाचार पत्र में आई खबर की कटिंग आदि देनी होगी। आवेदक जिस स्कूल का विद्यार्थी हो उसे स्कूल के प्राध्यापक/प्राचार्य द्वारा आवेदन पत्र सत्यापित करवाना होगा या संंबंधित जिला परिषद के अध्यक्ष/ग्राम सरपंच से करवाया जा सकता है। इसके साथ जिला के उपायुक्त/पुलिस अधीक्षक तथा राज्य बाल कल्याण परिषद से भी सत्यापित करवाना होगा।
उन्होंने बताया कि अवार्ड के लिए बच्चों का चयन भारतीय बाल कल्याण परिषद द्वारा गठित हाई पावर कमेटी द्वारा किया जाता है। इस कमेटी में भारत के राष्ट्रपति के सचिव, उपराष्ट्रपति, मानवीय संसाधन विकास मंत्रालय, महिला एवं बाल विकास, युवा एवं खेल मंत्रालय, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, रेल मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, गृह मंत्रालय, श्रम मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय, सूचना एवं प्रसारण विभाग, दूरदर्शन विभाग, पुलिस विभाग सहित कुछ एन.जी.ओ व परिषद के सदस्यों को शामिल किया गया है।
यह जानकारी जिला उपायुक्त सी.जी रजिनीकांथन ने देते हुए बताया कि उक्त योजना के तहत उन बहादुर बच्चों को सम्मानित किया जाता है जिन्होंने बहादुरी के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करते हुए अपनी जान की परवाह न करते हुए दूसरों की रक्षा की हो। ऐसे बच्चों को मैडल, प्रमाण पत्र व नकद राशि देकर सम्मानित किया जाता है।
उन्होंने बताया कि जिन बच्चों की आयु 6 से 18 वर्ष के बीच की हो और उन्होंने किसी खतरे की स्थिति के समय बहादुरी से काम किया हो, ऐसे बच्चों के लिए प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही उक्त योजना के तहत प्रत्येक वर्ष अवार्ड कार्यक्रम आयोजित कर सम्मानित किया जाता है। इस कार्यक्रम में देश के प्रतिष्ठित व्यक्ति शिरकत करते है।
श्री रजिनीकांथन ने बताया कि इस योजना के तहत बहादुर बच्चों को विभिन्न प्रकार के अवार्ड जैसे भारत अवार्ड, गीता चोपड़ा अवार्ड, संजय चोपड़ा अवार्ड, बापू गांधी अवार्ड तथा सामान्य अवार्ड इत्यादि देकर प्रधानमंत्री द्वारा गणतंत्र दिवस के एक दिन के पूर्व सम्मानित किया जाता है। इस योजना के तहत बच्चों द्वारा बहादुरी का कार्य 1 जुलाई 2009 से 30 जून 2010 के बीच के समय सीमा में किया जाना चाहिए तभी वह 2011 के अवार्ड कार्यक्रम के लिए आवेदन कर सकते है। इस आवेदन पत्र में प्रार्थियों को अपने द्वारा किए गए बहादुरी के कार्य की पूर्ण जानकारी 250 शब्दों में लिखकर दस्ती तौर पर देनी होगी। जैसे एफआईआर, सीडी या टेप या किसी समाचार पत्र में आई खबर की कटिंग आदि देनी होगी। आवेदक जिस स्कूल का विद्यार्थी हो उसे स्कूल के प्राध्यापक/प्राचार्य द्वारा आवेदन पत्र सत्यापित करवाना होगा या संंबंधित जिला परिषद के अध्यक्ष/ग्राम सरपंच से करवाया जा सकता है। इसके साथ जिला के उपायुक्त/पुलिस अधीक्षक तथा राज्य बाल कल्याण परिषद से भी सत्यापित करवाना होगा।
उन्होंने बताया कि अवार्ड के लिए बच्चों का चयन भारतीय बाल कल्याण परिषद द्वारा गठित हाई पावर कमेटी द्वारा किया जाता है। इस कमेटी में भारत के राष्ट्रपति के सचिव, उपराष्ट्रपति, मानवीय संसाधन विकास मंत्रालय, महिला एवं बाल विकास, युवा एवं खेल मंत्रालय, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, रेल मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, गृह मंत्रालय, श्रम मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय, सूचना एवं प्रसारण विभाग, दूरदर्शन विभाग, पुलिस विभाग सहित कुछ एन.जी.ओ व परिषद के सदस्यों को शामिल किया गया है।
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हरियाणा सरकार द्वारा प्रदेश के सभी शहरों में कचरा प्रबंधन प्लांट स्थापित करने का निर्णय
चंडीगढ़,9 जुलाई-हरियाणा सरकार द्वारा प्रदेश के सभी शहरों में कचरा प्रबंधन प्लांट स्थापित करने का निर्णय लिया गया है और अब तक हरियाणा के सिरसा तथा अंबाला शहर में कचरा प्रबंधन प्लांट स्थापित किए जा चुके है।
इस संबंध में जानकारी देते हुए हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन डॉ0 ए.एस चहल ने आज बताया कि प्रदेश के अधिकतर शहरों व कस्बों में कचरा प्रबंधन संयंत्र स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू है तथा कई शहरों में इसके लिए जमीन अधिग्रहण का कार्य कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि शहरों में सीवरेज का पानी भी प्रदूषण का एक कारण है। इस पानी को साफ करके खेती योग्य बनाने व अन्य कार्यों में प्रयोग लाने के लिए सभी शहरों में राज्य स्तर पर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगवाने का निर्णय लिया गया है।
हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन डॉ0 ए.एस चहल ने आज सिरसा जिला के बकरियांवाली कचरा प्रबंधन संयंत्र का दौरा किया। इस अवसर पर उन्होंने बताया कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों द्वारा औद्योगिक इकाईयों में औचक निरीक्षण किया जा रहा है, जो भी औद्योगिक इकाईयां प्रदूषण नियंत्रण के मापदंडों में खरा नहीं उतर रही उनके खिलाफ कार्यवाही की जा रही है और नोटिस दिए जा रहे है। प्रदेश में औद्योगिक वेस्ट के अलावा प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण शहरों और कस्बों से निकलने वाला कूड़ा कचरा है।
उन्होंने कहा कि हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा सभी छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाईयों के मालिकों को अपने उद्योगों में पर्याप्त क्षमता के एफ्यूलैंट ट्रीटमेंट प्लांटों का स्तर बढ़ाने के निर्देश दिए गए है। यदि किसी उद्योग में विभाग के मापदंडों के अनुसार ट्रीटमेंट प्लांट नहीं पाए जाते तो उसके खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाएगी।
उन्होंने बताया कि शहरों में स्थापित अस्पतालों, पैथोलॉजिकल लैब व अन्य स्थानों से निकलने वाले बायोमैडीकल गैस के डिस्पोजल के लिए भी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा कुछ पार्टियों को अनापत्ति प्रमाण पत्र दिया गया है। इन पार्टियों द्वारा बायोमैडीकल वेस्ट का डिस्पोजल सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सभी अस्पतालों, नर्सिंग होम इत्यादि को निर्देश दिए गए है कि वे 31 जुलाई तक अपने-अपने प्रतिष्ठानों में बायोमैडीकल वेस्ट स्टोर करने के लिए इंतजाम करें, यदि कोई संस्थान या प्रतिष्ठान इन मापदंडों पर खरा नहीं उतरेगा तो उसके खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जाएगी।
श्री चहल ने बताया कि प्रदेश में पेंट, रंग रोगन की फैक्टरियों से निकलने वाले वेस्ट के प्रबंधन के लिए विभाग द्वारा हेम्स नामक कंपनी से समझौता किया गया है। यह कंपनी फरीदाबाद जिले के पाली गांव में हजर्ड देश प्लांट लगाएगी। इस प्रकार के वेस्ट को अप्रभावित करके जमीन के अंदर दबाया जाएगा और उस जमीन के ऊपर पार्क जैसी जगह विकसित की जाएगी। उन्होंने कहा कि हरियाणा में पॉलीथीन के प्रयोग पर पूर्णत: प्रतिबंध लगाया गया है। पॉलीथीन के प्रयोग पर विभाग द्वारा पूरी सख्ताई बरती जा रही है। प्रदेश में विभागीय मापदंडों के खिलाफ पॉलीथीन का प्रयोग करने पर 800 से भी अधिक लोगों के चालान किए जा चुके है। सिरसा जिला में तीन दर्जन से भी अधिक लोगों के चालान किए गए है।
उन्होंने कचरा प्रबंधन संयंत्र का कार्य देख रही कंपनी के अधिकारियों से कहा कि वे विभिन्न प्रकार के कचरे की छिटाई करके खाद तैयार करे, तभी उनकी खाद की बिक्री हो पाएगी। उन्होंने कहा कि इस प्लांट में कुछ कमियां पाई गई इसीलिए अधिकारियों को निर्देश दिए है कि वे इसे शीघ्र दुरुस्त करवाए जिससे आसपास के क्षेत्र में किसी प्रकार का प्रदूषण न फैले।
इस संबंध में जानकारी देते हुए हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन डॉ0 ए.एस चहल ने आज बताया कि प्रदेश के अधिकतर शहरों व कस्बों में कचरा प्रबंधन संयंत्र स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू है तथा कई शहरों में इसके लिए जमीन अधिग्रहण का कार्य कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि शहरों में सीवरेज का पानी भी प्रदूषण का एक कारण है। इस पानी को साफ करके खेती योग्य बनाने व अन्य कार्यों में प्रयोग लाने के लिए सभी शहरों में राज्य स्तर पर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगवाने का निर्णय लिया गया है।
हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन डॉ0 ए.एस चहल ने आज सिरसा जिला के बकरियांवाली कचरा प्रबंधन संयंत्र का दौरा किया। इस अवसर पर उन्होंने बताया कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों द्वारा औद्योगिक इकाईयों में औचक निरीक्षण किया जा रहा है, जो भी औद्योगिक इकाईयां प्रदूषण नियंत्रण के मापदंडों में खरा नहीं उतर रही उनके खिलाफ कार्यवाही की जा रही है और नोटिस दिए जा रहे है। प्रदेश में औद्योगिक वेस्ट के अलावा प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण शहरों और कस्बों से निकलने वाला कूड़ा कचरा है।
उन्होंने कहा कि हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा सभी छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाईयों के मालिकों को अपने उद्योगों में पर्याप्त क्षमता के एफ्यूलैंट ट्रीटमेंट प्लांटों का स्तर बढ़ाने के निर्देश दिए गए है। यदि किसी उद्योग में विभाग के मापदंडों के अनुसार ट्रीटमेंट प्लांट नहीं पाए जाते तो उसके खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाएगी।
उन्होंने बताया कि शहरों में स्थापित अस्पतालों, पैथोलॉजिकल लैब व अन्य स्थानों से निकलने वाले बायोमैडीकल गैस के डिस्पोजल के लिए भी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा कुछ पार्टियों को अनापत्ति प्रमाण पत्र दिया गया है। इन पार्टियों द्वारा बायोमैडीकल वेस्ट का डिस्पोजल सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सभी अस्पतालों, नर्सिंग होम इत्यादि को निर्देश दिए गए है कि वे 31 जुलाई तक अपने-अपने प्रतिष्ठानों में बायोमैडीकल वेस्ट स्टोर करने के लिए इंतजाम करें, यदि कोई संस्थान या प्रतिष्ठान इन मापदंडों पर खरा नहीं उतरेगा तो उसके खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जाएगी।
श्री चहल ने बताया कि प्रदेश में पेंट, रंग रोगन की फैक्टरियों से निकलने वाले वेस्ट के प्रबंधन के लिए विभाग द्वारा हेम्स नामक कंपनी से समझौता किया गया है। यह कंपनी फरीदाबाद जिले के पाली गांव में हजर्ड देश प्लांट लगाएगी। इस प्रकार के वेस्ट को अप्रभावित करके जमीन के अंदर दबाया जाएगा और उस जमीन के ऊपर पार्क जैसी जगह विकसित की जाएगी। उन्होंने कहा कि हरियाणा में पॉलीथीन के प्रयोग पर पूर्णत: प्रतिबंध लगाया गया है। पॉलीथीन के प्रयोग पर विभाग द्वारा पूरी सख्ताई बरती जा रही है। प्रदेश में विभागीय मापदंडों के खिलाफ पॉलीथीन का प्रयोग करने पर 800 से भी अधिक लोगों के चालान किए जा चुके है। सिरसा जिला में तीन दर्जन से भी अधिक लोगों के चालान किए गए है।
उन्होंने कचरा प्रबंधन संयंत्र का कार्य देख रही कंपनी के अधिकारियों से कहा कि वे विभिन्न प्रकार के कचरे की छिटाई करके खाद तैयार करे, तभी उनकी खाद की बिक्री हो पाएगी। उन्होंने कहा कि इस प्लांट में कुछ कमियां पाई गई इसीलिए अधिकारियों को निर्देश दिए है कि वे इसे शीघ्र दुरुस्त करवाए जिससे आसपास के क्षेत्र में किसी प्रकार का प्रदूषण न फैले।
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