डबवाली- स्थानीय मलोट रोड़ स्थित चौ. देवी लाल पार्क के सामने स्थित ग्रोवर मेडिकल स्टोर पर बीती रात अज्ञात चोरों द्वारा दुकान का ताला तोड़कर गल्ले में पड़ी रेजगारी पर हाथ साफ कर दिया। उक्त चोरी का पता दुकान के संचालक रूपिन्द्र्र ग्रोवर को उसके पड़ोसी राजू साईकल वाला ने आज प्रात: 5 बजे दी। जब वह अपनी दुकान खोलने हेतु पहुंचा तो उसने देखा कि साथ लगती दुकान के ताले टूटे हुए हैं। उसने तुरन्त इसकी सूचना मोबाईल फोन पर दी। सूचना मिलते ही रूपिन्द्र ग्रोवर अपने पिता डॉ. अमरजीत ग्रोवर व भाई कमल ग्रोवर के साथ अपनी दुकान पर पहुंचा तो उन्होंने देखा कि दुकान के ताले टूटे हुए थे तथा शट्टर खुला था दुकान में रखे काऊंटर में बना गल्ला टूटा हुआ था तथा उसमें रखी 1500 रूपयों की रेजगारी गायब थी। चोरी की सूचना गोल बाजार पुलिस चौकी में दे दी है।
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रविवार, 28 नवंबर 2010
अनियन्त्रित कार वूक्षों से टकराई, दम्पति गम्भीर घायल
डबवाली-रविवार सुबह सिरसा रोड़ स्थित गांव सांवत खेड़ा के समीप एक कारपलट कर सड़क किनारे लगे पेड़ से टकरा गई। जिससे कार में सवार दम्पति गम्भीर रूप से घायल हो गया। घायल दम्पति को डबवाली जनसहारा सेव संस्था के सदस्यों ने ऐम्बूलैंस द्वारा डबवाली के राजकीय अस्पताल में उपचार हेतु दाखिल करवाया। जहां ड्यूटी पर तैनात चिकित्सकों द्वारा उनकी गम्भीर हालत को देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद सिरसा रैफर कर दिया। लेकिन घायल दम्पति अपने बेहतर ईलाज हेतु किराये की टैक्सी लेकर अबोहर के लिए रवाना हो गए। प्राप्त जानकारी अनुसार घायल अमित सक्सेना व उनकी पत्नी रूपाली सक्सेना अबोहर निवासी ने बताया कि वह दिल्ली में टाटा कम्युनिकेशन कम्पनी में कार्यरत हैं और वह रविवार प्रात: अपने घर अबोहर में कुछ दिन पूर्व सड़क हादसे में घायल हुए अपने पिता अरूण सक्सेना का हालचाल पूछने जा रहे थे कि गांव सांवतखेड़ा के समीप गाड़ी के नीचे पत्थर आ जाने से गाड़ी अनियन्त्रित होकर पलट कर सड़क किनारे लगे वृक्षों में जा टकराई। जिससे वह गम्भीर रूप से घायल हो गए। वहां से गुजर रहे राहगीरों ने उन्हें तुरन्त गाड़ी से बाहर निकाला और डबवाली जन सहारा सेवा संस्था को दूरभाष पर सूचना दी तो संस्था के सदस्यों ने उन्हें ऐम्बूलैंस द्वारा उपचार हेतु राजकीय अस्पताल में भर्ती करवाया।
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व्यापारी पर लुटेरों का हमला, एक लाख 10 हजार उड़ाए
डबवाली-शनिवार मध्यरात्रि सूमो पर सवार अज्ञात जनों ने चौटाला रोड़ पर स्थित काली माता मंदिर के समीप डबवाली के एक व्यापारी से मारपीट कर उससे एक लाख दस हजार रुपये के करीब की राशि लूट ली। लुटेरे टाटा सूमो पर सवार हो कर आये थे और उनकी संख्या चार से पांच बताई जाती है। शहर में लगातार एक के बाद एक हो रही आपराधिक वारदातों के बाद शहरवासी सकते में हंै और अपने आप को असुरक्षित महसूस करने लग गये है। डबवाली के राम नगर कालोनी के निवासी कृष्ण कुमार अंगी जो कि लोडिंग व अनलोडिंग का कार्य कर रहे है। शनिवार को अपने सहयोगी गुरजंट सिंह के साथ शहर से कपड़ा व्यापारियों का कपड़ा अपनी गाड़ी यूटीलिटी पर लाद कर संगरियां ले गया था और वापसी आते हुए संगरियां से मुंगफली की बोरियां लाद कर वापिस डबवाली आ रहा था। संगरियां बाईपास के पास खड़ी सफेद रंग की सूमो में सवार लोगों ने उसका पीछा करना आरंभ कर दिया। उन्होंने बताया कि उसने अपनी गाड़ी को चौटाला गांव के अंदर ले गया और उसका पीछा करने वाले लोगों को चकमा देने का प्रयास किया लेकिन लुटेरों ने उसका पीछा नहीं छोड़ा वह अपनी गाड़ी को दौड़ा कर डबवाली शहर की ओर ले आया। लुटेरों ने भी उसका पीछा जारी रखा और उसे चौटाला रोड़ पर स्थित काली माता मंदिर के समीप घेर लिया। लुटेरों ने पहले उसकी गाड़ी पर लाठियों से वार कर उसके शीशा चकनाचूर कर दिया, फिर उसके सहयोगी गुरजंट सिंह से मारपीट करते हुए उसे गाड़ी से बाहर फेंक दिया। गुरजंट सिंह किसी तरह उनके चंगुल से छूट कर वहां से भागने में सफल रहा। लुटेरों ने उसे मारपीट की और उसे जबरदस्ती उसे सूमो में डाल दिया और उसकी यूटीलिटी गाड़ी को भी साथ ले गये। कृष्ण अंगी ने बताया कि लुटेरे उसे अबूबशहर गांव के पास कालातीतर वाली सड़क पर कच्चे रास्ते पर ले गये और वहां उससे मारपीट कर उसके पास मौजूद एक लाख दस हजार रुपये की नगदी छीन ली। जिसमें एक लाख तीन के करीब व्यापारियों के थे बाकी सात हजार रुपये उसके थे। उन्होंने बताया कि रुपये लूटने के बाद लुटेरों ने उसे राजस्थान कनाल नहर में फेंकने के लिए सूमो में से रस्सा निकालने लगे तो वह उन्हें चकमा दे कर वहां से भागने में सफल रहा। सामने से आ रहे दो ट्रेक्टर चालकों को देख कर लुटेरे फरार हो गये। वह किसी तरह अपनी गाड़ी के पास पहुंचा और उसे चला कर डबवाली के सिविल अस्पताल में उपचार के लिए दाखिल हुआ और इस घटना की सूचना अपने परिजनों और पुलिस को दी। इस घटना के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। लुटेरे पूरी रात सड़कों पर अपने जुल्म की दास्तां लिख रहे थे और पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी।
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शनिवार, 27 नवंबर 2010
बीएसएनएल विभाग ने लगाया खुला दरबार
डबवाली- स्थानीय बीएसएनएल के कार्यालय में टेलिफोन उपभोक्ताओं के लिए खुला दरबार आयोजित किया गया। जिसमें बीएसएनएल हिसार विभाग से जीएम एमएम अग्रिहोत्री, डीजीएम ओपी जांगड़, डीईटी अमर ङ्क्षसह सिहाग तथा ऐलनाबाद के एसडीओ भारत भूषण ने विशेष तौर पर शिरकत की। खुले दरबार में टेलिफज्ञेन उपभोक्ताओं ने टेलिफोन सम्बन्धित अपनी शिकायतें प्रस्तुत की। जिसे सीनियर अधिकारियों ने तीन दिनों के अन्दर उनका समाधान करने के आदेश दिए। खुला दरबार में पहुंचे टेलिफोन उपभोक्ताओं को हिसार से विशेष तौर पर पहुंचे जीएम एमएम अग्रिहोत्री ने नए प्लान प्यारी जोड़ी के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जिन उपभोक्ताओं के पास लैंडलाईन कनैक्शन है तो उन्हें प्यारी जोड़ी सिम नि:शुल्क दिया जाऐगा तथा एक लैंडलाईन लोकल काल नि:शुल्क कर सकते हैं तथा लैंडलाईन फोन से 20 पैसे मात्र में काल कर सकते हैं। इसके अलावा किसी भी स्टेट में एसटीडी काल 30 पैसे प्रति मिनट काल की जा सकती है। अग्रिहोत्री ने बताया कि शीघ्र ही मोबाईल पर थ्री-जी इंटरनेट सेवा भी उपलब्ध हो जाऐगी। आए हुए अन्य अधिकारियों ने भी मौजूद उपभोक्ताओं को अन्य स्कीमों के बारे में जानकारी दी।
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भजनों पर झूमे श्रद्धालु
डबवाली- स्थानीय रामलीला ग्राऊण्ड में सतगुरू सेवा समिति के तत्त्वाधान विगत 24 तारीख से जारी संगीतमयी सत्संग ''पाँच शाम कन्हैया के नाम कार्यक्रम में बीती रात्रि परम पूज्य साध्वी सुश्री भुवनेश्वरी देवी बटौत कटड़ा वालों ने अपने प्रवचनों में मनुष्य को गौसेवा की महिमा बताते हुए बाबा गौरख नाथ के जन्म का वृतांत सुनाते हुए बताया कि एक दिन की बात है कि एक साधू भिक्षा मांगते हुए एक गृहणी के द्वार पर जा पहुंचा। जब गृहणी ने उदास हृदय से उन्हें भिक्षा देनी चाही तो साधू ने उसकी उदासी का कारण पूछा। गृहणी ने उन्हें अपनी दु:खभरी दास्तां बताते हुए कहा कि मेरे कोई सन्तान नहीं है तथा मेरी उदासी का बस यही एक कारण है। तत्पश्चात साधू ने उसे विभूति देकर सन्तान प्राप्ति का आशीर्वाद दिया तथा वहां से चले गए। जब साधू वहां से चले गए तो वह असमंजस में पड़ गई तथा उसने अपनी व्यथा अपनी सखी सहेलियों को बताई कि कल सायं एक साधू ने उसे विभूति देते हुए सन्तान प्राप्ति का आशीर्वाद दिया है परन्तु अगर वह विधवा होते हुए ऐसा करती हैं तो वह समाज में कलंकित हो जाऐगी। यह सब सुनकर उसकी सखियों ने उसे मशवरा दिया कि यह विभूति गौबर में डालकर कर रख दे, उसने ऐसा ही किया। समय व्यतीत होता गया। 12 वर्ष गुजर जाने के बाद वही साधू उसके द्वार पर भिक्षा लेने पहुंचा। जब उसने भिक्षाम देही की आवाज़ लगाई तो वही स्त्री बाहर आई तो साधू ने आश्चर्य से पूछा कि मैंने तुम्हें विभूति देकर सन्तान प्राप्ति का आशीर्वाद दिया था तथा मैंने सोचा था कि मुझे भिक्षा देने के लिए घर से तुम्हारा बालक आएगा। यह सब सुनकर उसने सारी कहानी अक्षरश: साधू को सुना दी। कहानी सुनने के पश्चात साधू ने कहा कि वह मुझे वहां ले चले जहां उसने गौबर में विभूति रखी है। वहां पहुंचकर साधू ने जब अलख जगाई तो उस गौबर में से एक सुन्दर बालक बाहर आया। यहीं से वह बालक बाबा गौरखनाथ के नाम से प्रसिद्ध हुआ। इससे पूर्व उन्होंने भजनों द्वारा भी उपस्थिति का मार्गदर्शन किया यथा 'सज-धज कर जब मौत की शहजादी आऐगी न सोना साथ जाऐगा न चाँदी साथ जाऐगी।
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पुरूषों के साथ महिलाओं के बढ़ते यौन संबंध
प्रियंका जैन
करुणा एक घरेलू महि
ला है। एक बार संयोगवश पास के फ्लैट में उसका जाना हुआ। वहां उसने अपना स्केच टंगा पाया। पूछने पर उसे पता चला कि फ्लैट में रहने वाले पुरुष ने ही वह स्केच बनाया था। करुणा उस पुरुष से प्रभावित हो गई और उसके घर आने-जाने लगी। दोनों की दोस्ती बढ़ती गई और कुछ हफ्ते बाद ही उनके बीच शारीरिक संबंध भी स्थापित हो गये। अब करुणा हफ्ते में कम से कम तीन बार उसके साथ शारीरिक संबंध बनाती है। यह बात करुणा के पति और बच्ची को मालूम नहीं है। करुणा को अपने पति से शिकायत रहती है कि उसका पति बहुत ही गुस्से वाला आदमी है और उससे या उसकी बेटी से हमेशा डांट-डपट करता है जबकि उसका प्रेमी बहुत ही शांत स्वभाव का नेक पुरुष है। हालांकि उसके प्रेमी के साथ करुणा का न कोई आर्थिक संबंध है और न ही वह अपने घर या बाल-बच्चे की समस्याएं उसके सामने रखती है। करुणा इस संबंध के लिए खुद को दोषी भी मानती है और अपने विवाह और दाम्पत्य संबंध को कायम रखना चाहती है। वह अपने पति को सब-कुछ बता देना चाहती है, लेकिन उसके गुस्सैल होने की वजह से कुछ कह नहीं पाती और चाहती है कि इसी तरह से जिंदगी चलती रहे। करुणा उन महिलाओं में से है जो विवाहेत्तर संबंध के साथ-साथ वैवाहिक संबंध को भी कायम रखना चाहती है।
सोमया एक प्राइवेट कंपनी में काम करती है। एक दिन सोमया की मुलाकात उसी की कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी अनिल से हुई। अनिल ने उसे तुरंत प्रोपोज किया और उसने स्वीकार कर लिया। उन दोनों की शादी हो गई, लेकिन उनके बीच बहुत जल्द दरार पड़ गई। अनिल बच्चा नहीं चाहता था, बहुत अधिक शराब पीता था और दूसरी शादीशुदा महिलाओं के साथ उसके शारीरिक संबंध थे। सोमया जब भी उसके साथ शारीरिक संबंध बनाना चाहती, वह उसे झिड़क देता था। छह वर्षों के बाद सोमया की मुलाकात कमलेश से हुई। वह बहुत ही आकर्षक व्यक्तित्व का पुरुष था। पहली ही मुलाकात में कमलेश ने सोमया को एक होटल चलने के लिए कहा। सोमया तुरंत तैयार हो गई। वहां उन्होंने शारीरिक संबंध स्थापित किया। हालांकि उसके बाद सोमया को थोड़ी ग्लानि अवश्य हुई, लेकिन उसने उस बात को भुला देना ही उचित समझा। कुछ महीने तक तो उन दोनों का संबंध बरकरार रहा, लेकिन उसके बाद सोमया को पता चला कि उसके और भी कई महिलाओं के साथ संबंध हैं तो उसने कमलेश से रिश्ता तोड़ लिया। लेकिन उसके बाद तो सोमया का प्यार का एक सिलसिला ही शुरू हो गया। उसने जितने मर्दों से प्यार किया, कुछ ही महीने में उस मर्द ने उसे धोखा दिया। लेकिन वह उस मर्द को छोड़कर दूसरे मर्द की आगोश में चली जाती है और अब इस सिलसिले का कोई अंत नहीं लगता।
हालांकि कुछ म
हिलाएं एक बार ठोकर खाने के बाद संभल जाती हैं। कल्पना जब 25 वर्ष की थी तो उसकी शादी उसके प्रेमी के साथ हुई। दो वर्ष के बाद उसके पति ने एक नया बिजनेस शुरू किया। वह ज्यादातर समय घर से बाहर रहने लगा और जब घर में भी होता तो अलग कमरे में पढ़ता-लिखता रहता। इस कारण से एक वर्ष में उन्होंने दो बार ही शारीरिक संबंध स्थापित किये। कल्पना जब अकेले घर में रहते-रहते बोर हो गई तो उसने कम्प्यूटर कोर्स में एडमीशन ले लिया। वह अपने क्लास में अकेली महिला थी। तीसरे दिन इंस्टीच्यूट में उसकी मुलाकात क्लास के एक लड़के से हुई। उन दोनों में दोस्ती हो गई। एक रात क्लास खत्म होने के बाद उसने कल्पना को ड्रिंक के लिए आमंत्रित किया। दोनों ने होटल में ड्रिंक किया और उसने कल्पना को ‘किश’ भी किया। चूंकि कल्पना अपने पति से दूर थी, इसलिए उसे यह अनुभव अच्छा लगा। तीन सप्ताह के बाद उसने कल्पना को एक होटल में बुलाया और वहां शारीरिक संबंध स्थापित किया
। उसके बाद हर हफ्ते ऐसा होने लगा। करीब एक वर्ष बाद उसने कल्पना को होटल बुलाना छोड़ दिया। इससे कल्पना अंदर ही अंदर घुटने लगी। अंत में उसने सारी बात अपने पति को बता दिया। उसका पति एक नेक इंसान था, उसने कल्पना को समझाया और अपनी गलती भी मानी। आज कल्पना अपने पति के साथ खुश है, लेकिन अपने प्रेमी के साथ बितायी हुई रातें उसे बार-बार याद आती है।
वैष्णवी एक शादीशुदा महिला है, लेकिन शादी के कुछ ही वर्ष बाद उसकी दोस्ती एक शादीशुदा मर्द अजय के साथ हो गई। दोनों का परस्पर एक दूसरे के घर में टेलीफोन करना, अक्सर घर से बाहर मिलना और बाहर रातें बिताना- दोनों के घर वालों से छिपी नहीं रह सकी और दोनों को उसकी कीमत तलाक के रूप में चुकानी पड़ी।
आधुनिक समय में करुणा, सोमया, कल्पना और वैष्णवी जैसी महिलाओं की जिंदगी में आज कोई न कोई दूसरा पुरुष ‘वो’ के रूप में आने लगा है। हालांकि पति, पत्नी और ‘वो’ की धारणा समाज में वर्षों से रही है, लेकिन एक समय ‘वो’ आम तौर पर पति के जीवन का ही हिस्सा हुआ करती थी, परन्तु आज ‘वो’ पत्नी के जीवन का भी हिस्सा बनने लगा है। हालांकि ‘वो’ हमेशा से पति-पत्नी के दाम्पत्य जीवन में जहर घुलने का प्रमुख कारण रहा
है। इसके कारण अनगिनत परिवार बर्बाद हो चुके हैं, अनेक बच्चे अनाथ बन चुके हैं, अनेक पति-पत्नियां मौत की सूली पर चढ़ चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद ‘वो’ हमेशा पति और पत्नी के जबर्दस्त आकर्षण का केन्द्र रहा है।
‘वो’ के कारण होने वाली घटनाओं -दुर्घटनाओं की खबरें अखबारों की सुर्खियां बनती रही हैं, लेकिन आज ये घटनायें-दुर्घटनायें सामान्य बात हो गई हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ‘वो’ आज ज्यादा से ज्यादा महिलाओं के दाम्पत्येत्तर जीवन में प्रवेश करने लगा है।
यह बताना तो मुश्किल है कि कितनी महिलायें दाम्पत्येत्तर संबंध रखती हैं, फिर भी यह अनुमान लगाया गया है कि विश्व में 27 से 50 प्रतिशत महिलायें विवाहेत्तर संबंध रखती हैं, यह अलग-अलग देश, संस्कृति और परिवार के वातावरण पर निर्भर करता है। इनमें से कुछ महिलायें तो अपने ‘वो’ अथवा प्रेमी से सच्चा प्यार करती हैं जबकि कुछ मात्र मन बहलाव के लिए ही विवाहेत्तर संबंध रखती हैं।
आज अगर फिल्मों और टेलीविजन धारावाहिकों को समाज का दर्पण माना जाये तो ये फिल्में और टेलीविजन धारावाहिकें भी समाज में दाम्पत्येत्तर संबंधों के विकास को समझने में सहायक साबित हो सकती हैं। हालांकि भारत में दाम्पत्येत्तर संबंधों पर काफी समय पहले से फिल्में बनती रही हैं, लेकिन पहले की इन फिल्मों में ऐसे संबंधों को दाम्पत्य जीवन व परिवार के लिए घातक ही बताये जातेे रहे हैं और इन फिल्में में कभी भी ऐेसे संबंधों की वकालत नहीं की गई। साथ ही इन फिल्मों में मुख्य तौर पर पतियों के दाम्पत्येत्तर संबंध ही दिखाए गए।
भारत में पहली बार संभवतः प्रसिद्ध निर्देशिका अपर्णा सेन की चर्चित फिल्म ‘परोमा’ में किसी शादीशुदा महिला के दाम्पत्येत्तर संबंध को न केवल दिखाया गया, बल्कि दाम्पत्येत्तर संबंध रखने वाली महिला ‘परोमा’ और उसके फोटोग्राफर प्रेमी के प्रति सहानुभूति प्रदर्शित की गई। अपर्णा सेन कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़ी थीं और कम्युनिस्ट पार्टी में भी इस फिल्म को लेकर काफी बहस हुई और इस पार्टी में इस फिल्म की आलोचना की गई।
आज ऐसी फिल्में और धारावाहिकें बड़ी संख्या में बनने लगी हैं जो पत्नियों के दाम्पत्येत्तर संबंधों पर आधारित होती हैं। यही नहीं इन फिल्में में ऐसे दाम्पत्येत्तर संबंधों को औरतों के अधिकार से जोड़ कर इनकी वकालत करने की भी कोशिश की जाती है। टेलीविजन धारवाहिकें तो इस मामले में भारतीय फिल्मों से काफी आगे हैं।
आम तौर पर देखा गया है अधिकतर महिलाएं 30 से 40 वर्ष की उम्र के बाद ही दाम्पत्येत्तर संबंध बनाती हैं। इसके कई कारण हैं। इस उम्र तक वे बच्चे का पालन-पोषण की जिम्मेदारियों से निबट चुकी होती हैं। बच्चे बड़े हो जाते हैं। वे स्कूल -कालेज जाने लगते हैं। पति भी दफ्तर या काम-काज में व्यस्त होते हैं। ऐसे में इन औरतों के पास ऐसे संबंध बनाने के लिये वक्त होता है। पति काम-काज एवं उम्र के दवाब के कारण पत्नी में पहले जैसी रूचि नहीं दिखाता है। वे भावनात्मक तौर पर उपेक्षित महसूस करने लगती हैं। ऐसे में वे समय काटने तथा भावनात्मक एवं शारीरिक सुख और सहारा पाने के लिये किसी पुरुष से संबंध बना लेती हैं। अगर कोई महिला घर से बाहर काम करती हैं तो उनका प्रेमी दफ्तर का ही होता है। लेकिन अगर कोई महिला नौकरी नहीं करती और ज्यादा समय घर में ही रहती है तो उनका प्रेमी पड़ोस का या रिश्ते का कोई व्यक्ति होता है।
अब सवाल यह उठता है कि ये महिलाएं ऐसा क्यों करती हैं? वे अपने दाम्पत्य संबंध को खतरे में डालकर पति और बच्चों का विश्वास तोड़कर अवैध संबंध क्यों बनाती हैं? क्या वे अपने तनाव को दूर करने के लिए या अपनी आर्थिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए ऐसा करती हैं या वे फिल्मों, उपन्यासों और धारावाहिकों से प्रेरित होकर ऐसा करती हैं या मात्र मनबहलाव के लिए ऐसा करती हैं?
जब किसी पुरुष को यह पता चलता है कि उसकी पत्नी उसे धोखा दे रही है, उसके किसी दूसरे पुरुष के साथ संबंध हैं तो वह इसे सहन नहीं कर पाता और किसी भी कीमत पर अपने वैवाहिक रिश्ते को खत्म कर देना चाहता है। बहुत कम पुरुष ही ऐसे होते हैं जो समझौता करते हैं या पत्नी को समझा-बुझाकर सही रास्ते पर लाने की कोशिश करते हैं। दूसरी तरफ महिलाएं समाज की खातिर या बच्चों की खातिर वैवाहिक संबंध को
समाप्त करना नहीं चाहतीं। वे अपनी समस्याओं पर खुलकर पति से बात नहीं करतीं, इस कारण उनकी समस्या दिनोंदिन बढ़ती जाती है। वे पति के सामने अपने अवैध संबंधों को स्वीकार कर पश्चाताप भी नहीं करतीं। ऐसे संबंधों में 50 प्रतिशत प्रेमी-प्रेमिकाओं को या तो अपने पति-पत्नी से अलग होना पड़ता है या तलाक लेना पड़ता है।
हालांकि ऐसे मामलों में तलाक ले लेना कुछ हद तक सही है, क्योंकि एक ही साथ दोनों रिश्तों को कायम रखना मुश्किल है। लेकिन सिर्फ दूसरे
मर्दों के प्रति आकर्षण और अपने क्षणिक शारीरिक सुख के कारण पति और परिवार को धोखा देना तथा अपने बच्चों के भविष्य को दांव पर लगा देना कहां तक उचित है?
करुणा एक घरेलू महि
ला है। एक बार संयोगवश पास के फ्लैट में उसका जाना हुआ। वहां उसने अपना स्केच टंगा पाया। पूछने पर उसे पता चला कि फ्लैट में रहने वाले पुरुष ने ही वह स्केच बनाया था। करुणा उस पुरुष से प्रभावित हो गई और उसके घर आने-जाने लगी। दोनों की दोस्ती बढ़ती गई और कुछ हफ्ते बाद ही उनके बीच शारीरिक संबंध भी स्थापित हो गये। अब करुणा हफ्ते में कम से कम तीन बार उसके साथ शारीरिक संबंध बनाती है। यह बात करुणा के पति और बच्ची को मालूम नहीं है। करुणा को अपने पति से शिकायत रहती है कि उसका पति बहुत ही गुस्से वाला आदमी है और उससे या उसकी बेटी से हमेशा डांट-डपट करता है जबकि उसका प्रेमी बहुत ही शांत स्वभाव का नेक पुरुष है। हालांकि उसके प्रेमी के साथ करुणा का न कोई आर्थिक संबंध है और न ही वह अपने घर या बाल-बच्चे की समस्याएं उसके सामने रखती है। करुणा इस संबंध के लिए खुद को दोषी भी मानती है और अपने विवाह और दाम्पत्य संबंध को कायम रखना चाहती है। वह अपने पति को सब-कुछ बता देना चाहती है, लेकिन उसके गुस्सैल होने की वजह से कुछ कह नहीं पाती और चाहती है कि इसी तरह से जिंदगी चलती रहे। करुणा उन महिलाओं में से है जो विवाहेत्तर संबंध के साथ-साथ वैवाहिक संबंध को भी कायम रखना चाहती है।सोमया एक प्राइवेट कंपनी में काम करती है। एक दिन सोमया की मुलाकात उसी की कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी अनिल से हुई। अनिल ने उसे तुरंत प्रोपोज किया और उसने स्वीकार कर लिया। उन दोनों की शादी हो गई, लेकिन उनके बीच बहुत जल्द दरार पड़ गई। अनिल बच्चा नहीं चाहता था, बहुत अधिक शराब पीता था और दूसरी शादीशुदा महिलाओं के साथ उसके शारीरिक संबंध थे। सोमया जब भी उसके साथ शारीरिक संबंध बनाना चाहती, वह उसे झिड़क देता था। छह वर्षों के बाद सोमया की मुलाकात कमलेश से हुई। वह बहुत ही आकर्षक व्यक्तित्व का पुरुष था। पहली ही मुलाकात में कमलेश ने सोमया को एक होटल चलने के लिए कहा। सोमया तुरंत तैयार हो गई। वहां उन्होंने शारीरिक संबंध स्थापित किया। हालांकि उसके बाद सोमया को थोड़ी ग्लानि अवश्य हुई, लेकिन उसने उस बात को भुला देना ही उचित समझा। कुछ महीने तक तो उन दोनों का संबंध बरकरार रहा, लेकिन उसके बाद सोमया को पता चला कि उसके और भी कई महिलाओं के साथ संबंध हैं तो उसने कमलेश से रिश्ता तोड़ लिया। लेकिन उसके बाद तो सोमया का प्यार का एक सिलसिला ही शुरू हो गया। उसने जितने मर्दों से प्यार किया, कुछ ही महीने में उस मर्द ने उसे धोखा दिया। लेकिन वह उस मर्द को छोड़कर दूसरे मर्द की आगोश में चली जाती है और अब इस सिलसिले का कोई अंत नहीं लगता।
हालांकि कुछ म
। उसके बाद हर हफ्ते ऐसा होने लगा। करीब एक वर्ष बाद उसने कल्पना को होटल बुलाना छोड़ दिया। इससे कल्पना अंदर ही अंदर घुटने लगी। अंत में उसने सारी बात अपने पति को बता दिया। उसका पति एक नेक इंसान था, उसने कल्पना को समझाया और अपनी गलती भी मानी। आज कल्पना अपने पति के साथ खुश है, लेकिन अपने प्रेमी के साथ बितायी हुई रातें उसे बार-बार याद आती है।वैष्णवी एक शादीशुदा महिला है, लेकिन शादी के कुछ ही वर्ष बाद उसकी दोस्ती एक शादीशुदा मर्द अजय के साथ हो गई। दोनों का परस्पर एक दूसरे के घर में टेलीफोन करना, अक्सर घर से बाहर मिलना और बाहर रातें बिताना- दोनों के घर वालों से छिपी नहीं रह सकी और दोनों को उसकी कीमत तलाक के रूप में चुकानी पड़ी।
आधुनिक समय में करुणा, सोमया, कल्पना और वैष्णवी जैसी महिलाओं की जिंदगी में आज कोई न कोई दूसरा पुरुष ‘वो’ के रूप में आने लगा है। हालांकि पति, पत्नी और ‘वो’ की धारणा समाज में वर्षों से रही है, लेकिन एक समय ‘वो’ आम तौर पर पति के जीवन का ही हिस्सा हुआ करती थी, परन्तु आज ‘वो’ पत्नी के जीवन का भी हिस्सा बनने लगा है। हालांकि ‘वो’ हमेशा से पति-पत्नी के दाम्पत्य जीवन में जहर घुलने का प्रमुख कारण रहा
है। इसके कारण अनगिनत परिवार बर्बाद हो चुके हैं, अनेक बच्चे अनाथ बन चुके हैं, अनेक पति-पत्नियां मौत की सूली पर चढ़ चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद ‘वो’ हमेशा पति और पत्नी के जबर्दस्त आकर्षण का केन्द्र रहा है।
‘वो’ के कारण होने वाली घटनाओं -दुर्घटनाओं की खबरें अखबारों की सुर्खियां बनती रही हैं, लेकिन आज ये घटनायें-दुर्घटनायें सामान्य बात हो गई हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ‘वो’ आज ज्यादा से ज्यादा महिलाओं के दाम्पत्येत्तर जीवन में प्रवेश करने लगा है।
यह बताना तो मुश्किल है कि कितनी महिलायें दाम्पत्येत्तर संबंध रखती हैं, फिर भी यह अनुमान लगाया गया है कि विश्व में 27 से 50 प्रतिशत महिलायें विवाहेत्तर संबंध रखती हैं, यह अलग-अलग देश, संस्कृति और परिवार के वातावरण पर निर्भर करता है। इनमें से कुछ महिलायें तो अपने ‘वो’ अथवा प्रेमी से सच्चा प्यार करती हैं जबकि कुछ मात्र मन बहलाव के लिए ही विवाहेत्तर संबंध रखती हैं।
आज अगर फिल्मों और टेलीविजन धारावाहिकों को समाज का दर्पण माना जाये तो ये फिल्में और टेलीविजन धारावाहिकें भी समाज में दाम्पत्येत्तर संबंधों के विकास को समझने में सहायक साबित हो सकती हैं। हालांकि भारत में दाम्पत्येत्तर संबंधों पर काफी समय पहले से फिल्में बनती रही हैं, लेकिन पहले की इन फिल्मों में ऐसे संबंधों को दाम्पत्य जीवन व परिवार के लिए घातक ही बताये जातेे रहे हैं और इन फिल्में में कभी भी ऐेसे संबंधों की वकालत नहीं की गई। साथ ही इन फिल्मों में मुख्य तौर पर पतियों के दाम्पत्येत्तर संबंध ही दिखाए गए।
भारत में पहली बार संभवतः प्रसिद्ध निर्देशिका अपर्णा सेन की चर्चित फिल्म ‘परोमा’ में किसी शादीशुदा महिला के दाम्पत्येत्तर संबंध को न केवल दिखाया गया, बल्कि दाम्पत्येत्तर संबंध रखने वाली महिला ‘परोमा’ और उसके फोटोग्राफर प्रेमी के प्रति सहानुभूति प्रदर्शित की गई। अपर्णा सेन कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़ी थीं और कम्युनिस्ट पार्टी में भी इस फिल्म को लेकर काफी बहस हुई और इस पार्टी में इस फिल्म की आलोचना की गई।
आज ऐसी फिल्में और धारावाहिकें बड़ी संख्या में बनने लगी हैं जो पत्नियों के दाम्पत्येत्तर संबंधों पर आधारित होती हैं। यही नहीं इन फिल्में में ऐसे दाम्पत्येत्तर संबंधों को औरतों के अधिकार से जोड़ कर इनकी वकालत करने की भी कोशिश की जाती है। टेलीविजन धारवाहिकें तो इस मामले में भारतीय फिल्मों से काफी आगे हैं।
आम तौर पर देखा गया है अधिकतर महिलाएं 30 से 40 वर्ष की उम्र के बाद ही दाम्पत्येत्तर संबंध बनाती हैं। इसके कई कारण हैं। इस उम्र तक वे बच्चे का पालन-पोषण की जिम्मेदारियों से निबट चुकी होती हैं। बच्चे बड़े हो जाते हैं। वे स्कूल -कालेज जाने लगते हैं। पति भी दफ्तर या काम-काज में व्यस्त होते हैं। ऐसे में इन औरतों के पास ऐसे संबंध बनाने के लिये वक्त होता है। पति काम-काज एवं उम्र के दवाब के कारण पत्नी में पहले जैसी रूचि नहीं दिखाता है। वे भावनात्मक तौर पर उपेक्षित महसूस करने लगती हैं। ऐसे में वे समय काटने तथा भावनात्मक एवं शारीरिक सुख और सहारा पाने के लिये किसी पुरुष से संबंध बना लेती हैं। अगर कोई महिला घर से बाहर काम करती हैं तो उनका प्रेमी दफ्तर का ही होता है। लेकिन अगर कोई महिला नौकरी नहीं करती और ज्यादा समय घर में ही रहती है तो उनका प्रेमी पड़ोस का या रिश्ते का कोई व्यक्ति होता है।
अब सवाल यह उठता है कि ये महिलाएं ऐसा क्यों करती हैं? वे अपने दाम्पत्य संबंध को खतरे में डालकर पति और बच्चों का विश्वास तोड़कर अवैध संबंध क्यों बनाती हैं? क्या वे अपने तनाव को दूर करने के लिए या अपनी आर्थिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए ऐसा करती हैं या वे फिल्मों, उपन्यासों और धारावाहिकों से प्रेरित होकर ऐसा करती हैं या मात्र मनबहलाव के लिए ऐसा करती हैं?
जब किसी पुरुष को यह पता चलता है कि उसकी पत्नी उसे धोखा दे रही है, उसके किसी दूसरे पुरुष के साथ संबंध हैं तो वह इसे सहन नहीं कर पाता और किसी भी कीमत पर अपने वैवाहिक रिश्ते को खत्म कर देना चाहता है। बहुत कम पुरुष ही ऐसे होते हैं जो समझौता करते हैं या पत्नी को समझा-बुझाकर सही रास्ते पर लाने की कोशिश करते हैं। दूसरी तरफ महिलाएं समाज की खातिर या बच्चों की खातिर वैवाहिक संबंध को
समाप्त करना नहीं चाहतीं। वे अपनी समस्याओं पर खुलकर पति से बात नहीं करतीं, इस कारण उनकी समस्या दिनोंदिन बढ़ती जाती है। वे पति के सामने अपने अवैध संबंधों को स्वीकार कर पश्चाताप भी नहीं करतीं। ऐसे संबंधों में 50 प्रतिशत प्रेमी-प्रेमिकाओं को या तो अपने पति-पत्नी से अलग होना पड़ता है या तलाक लेना पड़ता है।हालांकि ऐसे मामलों में तलाक ले लेना कुछ हद तक सही है, क्योंकि एक ही साथ दोनों रिश्तों को कायम रखना मुश्किल है। लेकिन सिर्फ दूसरे
मर्दों के प्रति आकर्षण और अपने क्षणिक शारीरिक सुख के कारण पति और परिवार को धोखा देना तथा अपने बच्चों के भविष्य को दांव पर लगा देना कहां तक उचित है?
शुक्रवार, 26 नवंबर 2010
युवक की हत्या की गुत्थी सुलझी,चारों आरोपी गिरफ्तार
डबवाली-शहर डबवाली पुलिस ने 24 नवंबर की शाम की एक युवक की हुई हत्या के मा
मले की गुत्थी को सुलझा लिया है। पुलिस ने इस घटना के चारों हत्यारोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार किये गये व्यक्तियों की पहचान विनोद पुत्र अमरजीत निवासी रविदास नंबर मंडी डबवाली, रोहित पुत्र जगसीर निवासी दिवानखेड़ा हाल डबवाली, प्रकाश पुत्र जवाहर लाल निवासी प्रतापनगर डबवाली तथा मुकेश पुत्र कृष्ण लाल निवासी इंदिरा कॉलोनी मंडी डबवाली के रूप में हुई है। चारों हत्यारोपियों को कल डबवाली अदालत में पेश कर रिमांड हासिल किया जाएगा, ताकि इस घटना से जुड़े अन्य तथ्यों तथा वारदात में प्रयुक्त हथियारों की बरामदगी की जा सके। मामले की जानकारी देते हुए शहर डबवाली थाना प्रभारी निरीक्षक बलवंत सिंह ने बताया कि स्कूल के समय की किसी पुरानी रंजिश को लेकर चार युवकों ने डंडे व कापों से वार कर एक युवक जसवीर पुत्र बलदेव सिंह निवासी किलियांवाली पंजाब की मंडी डबवाली स्थित अग्निहोत्री हॉस्पिटल के पास हत्या कर दी थी। उन्होंने बताया कि सूचना मिलते ही सिरसा के पुलिस अधीक्षक श्री सतेन्द्र कुमार गुप्ता, डबवाली के डीएसपी श्री बाबू लाल यादव तथा वे स्वयं पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। थाना प्रभारी ने बताया कि इस घटना में मृतक जसवीर के मामा दर्शन पुत्र बहादुर सिंह निवासी किलियांवाली के बयान पर हत्या का अभियोग दर्ज कर जांच शुरू की। उन्होंने बताया कि हत्या की इस वारदात को सुलझाने के लिए पुलिस अधीक्षक सतेन्द्र कुमार गुप्ता ने शहर डबवाली समेत कई पुलिस टीमों का गठन किया। पुलिस अधीक्षक द्वारा गठित टीमों ने महत्वपूर्ण सुराग जुटाए तथा विभिन्न कोनों से इस हत्या की गुत्थी को सुलझाने के प्रयास किये। अंत: पुलिस को सफलता मिली। थाना प्रभारी ने बताया कि चारों हत्यारोपियों को बठिंडा चौक मंडी डबवाली क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया है। थाना प्रभारी ने बताया कि काबू किये गये चारों हत्यारोपियों ने पुलिस पूछताछ में बताया कि वे जसवीर सिंह निवासी किलियांवाली के साथ शहर डबवाली के सीनियर सेकेंडरी स्कूल में पढ़ते थे और वहां उनका कई बार उसके साथ झगड़ा भी हुआ था। पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने कबूल किया कि स्कूल की पुरानी रंजिश के चलते उन्होने जसवीर की हत्या की।
मले की गुत्थी को सुलझा लिया है। पुलिस ने इस घटना के चारों हत्यारोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार किये गये व्यक्तियों की पहचान विनोद पुत्र अमरजीत निवासी रविदास नंबर मंडी डबवाली, रोहित पुत्र जगसीर निवासी दिवानखेड़ा हाल डबवाली, प्रकाश पुत्र जवाहर लाल निवासी प्रतापनगर डबवाली तथा मुकेश पुत्र कृष्ण लाल निवासी इंदिरा कॉलोनी मंडी डबवाली के रूप में हुई है। चारों हत्यारोपियों को कल डबवाली अदालत में पेश कर रिमांड हासिल किया जाएगा, ताकि इस घटना से जुड़े अन्य तथ्यों तथा वारदात में प्रयुक्त हथियारों की बरामदगी की जा सके। मामले की जानकारी देते हुए शहर डबवाली थाना प्रभारी निरीक्षक बलवंत सिंह ने बताया कि स्कूल के समय की किसी पुरानी रंजिश को लेकर चार युवकों ने डंडे व कापों से वार कर एक युवक जसवीर पुत्र बलदेव सिंह निवासी किलियांवाली पंजाब की मंडी डबवाली स्थित अग्निहोत्री हॉस्पिटल के पास हत्या कर दी थी। उन्होंने बताया कि सूचना मिलते ही सिरसा के पुलिस अधीक्षक श्री सतेन्द्र कुमार गुप्ता, डबवाली के डीएसपी श्री बाबू लाल यादव तथा वे स्वयं पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। थाना प्रभारी ने बताया कि इस घटना में मृतक जसवीर के मामा दर्शन पुत्र बहादुर सिंह निवासी किलियांवाली के बयान पर हत्या का अभियोग दर्ज कर जांच शुरू की। उन्होंने बताया कि हत्या की इस वारदात को सुलझाने के लिए पुलिस अधीक्षक सतेन्द्र कुमार गुप्ता ने शहर डबवाली समेत कई पुलिस टीमों का गठन किया। पुलिस अधीक्षक द्वारा गठित टीमों ने महत्वपूर्ण सुराग जुटाए तथा विभिन्न कोनों से इस हत्या की गुत्थी को सुलझाने के प्रयास किये। अंत: पुलिस को सफलता मिली। थाना प्रभारी ने बताया कि चारों हत्यारोपियों को बठिंडा चौक मंडी डबवाली क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया है। थाना प्रभारी ने बताया कि काबू किये गये चारों हत्यारोपियों ने पुलिस पूछताछ में बताया कि वे जसवीर सिंह निवासी किलियांवाली के साथ शहर डबवाली के सीनियर सेकेंडरी स्कूल में पढ़ते थे और वहां उनका कई बार उसके साथ झगड़ा भी हुआ था। पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने कबूल किया कि स्कूल की पुरानी रंजिश के चलते उन्होने जसवीर की हत्या की।
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खड़े ट्रक में एक अन्य ट्रक द्वारा टक्कर मार देने से खड़ा ट्रक पलटा,एक घायल
डबवाली- स्थानीय मलोट रोड़ स्थित पंजाब बस स्टैण्ड के समीप वर्कशाप के सामने खड़े ट्रक को मलोट की तरफ से आ रहे एक अन्य ट्रक द्वारा टक्कर मार देने से खड़ा ट्रक पलट गया और ट्रक में सो रहा मिस्त्री गम्भीर रूप से घायल हो गया। जिसे घायलावस्था में एक निजी हस्पताल में उपचार हेतु दाखिल करवाया गया। हस्पताल में उपचाराधीन निकटवर्ती गांव माना निवासी नायब ङ्क्षसह पुत्र नछत्तर ङ्क्षसह ने बताया कि उसकी वर्कशाप में ट्रक नम्बर एच. आर. - 57 - 6040 रिपेयर के लिए आया और ट्रक को रिपेयर करने उपरान्त वह ट्रक में ही सो गया। आज प्रात: 4 बजे के करीब मलोट की तरफ से आ रहे एक अन्य ट्रक नम्बर आर. जे. -07-जी. - 4321 ने जोरदार टक्कर मार दी। जिससे खड़ा ट्रक पलट गया और वह गम्भीर रूप से घायल हो गया। धमाके की आवाज़ सुनकर वर्कशाप के साथ लगते मकान से संगत के थाना प्रभारी सन्दीप ङ्क्षसह भाटी के भाई मन्दीप ङ्क्षसह भाटी अपने घर से बाहर आए तथा घायल नैब ङ्क्षसह को तुरन्ट ट्रक से बाहर निकाला तथा निकटवर्ती राज हस्पताल में उपचार के लिए भर्ती करवाया। घटना के बाद ट्रक चालक ट्रक छोड़कर घटनास्थल से फरार हो गया।
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आपराधिक वारदातों से नगर में दहशत का माहौल
डबवाली-गत दिवस बुधवार को युवक की सरेआम हत्या और भरी दोपहरी में अध्यापिका को रॉड मारकर घायल कर देने जैसी घटनाओं की सुर्खियों की स्याही अभी सुखी ही नहीं थी कि वीरवार रात्रि स्वर्णकार पिता पुत्र और उनके एक सम्बन्धी दिल्ली निवासी करियाणा व्यापारी को अज्ञात चार युवक दो अलग-अलग स्थानों पर वारदातों को अंजाम देते हुए घायल कर फरार हो गए। हमलावर युवक लोहे की रॉड व अन्य तेजधार हथियारों से लैस थे। घायलों को अद्र्धबेहोशी की हालत में स्थानीय सिविल अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। नगर में श्रृंखलाबद्ध हो रही आपराधिक वारदातों से नगर में दहशत का माहौल है। पहली वारदात सब्जी मंडी में गुरूद्वारा कलगीधर के सामने स्थित भीटीवाला ज्वैलर्स का मालिक गुरबचन ङ्क्षसह पुत्र हरनेक ङ्क्षसह अपने पुत्र कुलबीर ङ्क्षसह के साथ वीरवार सायं 7 बजे के करीब दुकान को मंगल कर मोटरसाईकलद्वारा अपने गांव भीटीवाला जा रहे थे कि डबवाली से अबोहर रोड़ पर स्थित गोल्डन पैलेस के समीप एक काले रंग की इण्डिका कार ने पीछे से टक्कर मार कर उन्हें गिरा दिया और उसमें सवार चार व्यक्तियों ने अचानक उन पर लाठियों व रॉडों से हमला कर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया। हमलावर व्यक्तियों ने उनकी पिटाई तब तक जारी रखी जब तक वे बेहोश नहीं हो गए। घटना के बाद चारों हमलावर वहां से फरार हो गए। घटना के काफी समय बाद होश आने पर उन्होंने इसकी जानकारी मोबाइल फोन पर अपने परिजनों को दी और परिजनों ने घटनास्थल पर पहुंच कर उन्हें स्थानीय सिविल हस्पताल में उपचार के लिए भर्ती करवाया। जहां चिकित्सकों द्वारा उनकी गम्भीर हालत को देखते हुए सिरसा रेफर कर दिया है लेकिन उनके परिजन उन्हें बेहतर उपचार के लिए बठिंडा के एक निजी अस्पताल में ले गये है। वहीं दूसरी वारदात पंजाब हरियाणा के बार्डर पर स्थित पुलिस नाके के बिल्कुल सामने हुई। सब्जी मंडी में ही स्थित फर्म विशम्भर दास रूल्दू राम के संजय कुमार पुत्र श्रीचंद बीती रात साढ़े 9 बजे के करीब दिल्ली से आए अपने सम्बन्धी जीवन दास को दिल्ली जाने के लिए बस पर चढ़ाने के लिए मोटरसाईकल पर जा रहे थे कि पुलिस नाके के सामने खूह वाली गली में मोटरसाईकल पर सवार चार अज्ञात युवकों ने उन पर तेजधार हथियारों से हमला बोल दिया। हमलावरों में दो युवक केशधारी व दो युवक मौने थे। हमलावर युवकों ने उन्हें घायल कर लहू लुहान कर दिया। उनके शोर मचाने पर आस पास के लोग जमा हो गए। जिससे हमलावर अन्धेरे का लाभ उठाते हुए मौके से फरार हो गए। उक्त घटना में घायल संजय के सिर पर और दिल्ली निवासी जीवन दास की पीठ व टांगों पर गहरी चोटें आई हैं। दोनों को घायल अवस्था में सिविल अस्पताल में भर्ती करवाया गया है, इन घटनाओं की श्रृंखला में वीरवार को बाद दोपहर पुरानी कचैहरी रोड़ पर अज्ञात व्यक्ति ने राजकीय पाठशाला नम्बर एक की अध्यापिका तेजपाल कौर निवासी बठिण्डा को रॉड मारकर घायल कर दिया। यह हादसा उस समय हुआ जब अध्यापिका स्कूल में छुट्टी होने के बाद रिक्शा पर सवार हो कर बस स्टैंड की ओर जा रह थी। नगर में बढ़ रही आपराधिक गतिविधियों से नगरवासियों के चेहरों पर गहरी चिन्ता की लकीरें हैं। जहां नगरवासी अपनी जान माल की सुरक्षा को लेकर दहशत में हंै। वहीं पुलिस तथा प्रशासन के लिए उक्त घटनाऐं चुनौती बनी हुई हंै।
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एक मोटर साइकिल और इंवर्टर और दो बैटरी उड़ा ले गये चोर
डबवाली-बीती रात अज्ञात जनों ने दो अलग-अलग स्थानों पर चोरी की वारदातों को अंजाम देते हुए एक मोटर साइकिल और 18 हजार रुपये की कीमत का इंवर्टर और दो बैटरी उड़ा ले गये। चोरी की घटनाओं की जानकारी थाना शहर पुलिस को दे दी गई है। शहर के सम्राट विक्रमदित्य अस्पताल वाली गली में लवली सिंगला के मकान के बाहर खड़ा भारत भूषण वधवा का हीरो होंडा स्पलैंडर प्लस काले रंग का मोटर साइकिल अज्ञात व्यक्ति चुरा ले गया। भारत भूषण वधवा ने बताया कि वह अपने मोटर साइकिल एचआर25बी/1125 को ताला लगा कर लवली सिंगला से मिलने के लिए घर पर गया। लेकिन कुछ समय बाद बाहर आ कर उसने देखा की वहां से मोटर साइकिल गायब था। वहीं चोरों ने कालोनी रोड़ पर स्थित चुंगी स्कूल के सामने बनी अमर लाल की जूस की दुकान को अपना निशाना बनाया। चोर दुकान का ताला तोड़ कर दो बैटरियों सहित इन्वर्टर चूरा ले गये जिनकी कीमत 18 हजार रुपये आंकी गई है।
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मार लिया मैदान: एशियाड में भारत की लगातार दूसरी गोल्डन हैट्रिक
ग्वांगझू.-16वें एशियन गेम्स में आज भारत को स्वर्णिम शुरुआत देते हुए महिला कबड्डी टीम ने फाइनल मुकाबले में थाइलैंड को हरा दिया है। इसके बाद पुरुष टीम ने भी 37-20 से ईरान को हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया। जीत का सिलसिला यहीं नहीं थमा। 400 मीटर महिला रिले रेस में टीम इंडिया ने पहला स्थान प्राप्त किया। इस जीत के बाद भारत के खाते में 13 स्वर्ण पदक आ गए हैं। 400 मीटर रिले रेस में टीम इंडिया में मंजीत कौर, सिनि जोस, अश्विनि अकुंजी और मंदीप कौर शामिल थीं। दूसरा स्थान कजाकिस्तान और तीसरा स्थान चीन को मिला। इससे पहले महिला कबड्डी फाइनल में टीम इंडिया ने थाइलैंड को 28-14 से पटखनी दी। अब निगाहें पुरुष कबड्डी टीम और मुक्केबाजों पर होंगी। पुरुष कबड्डी टीम के साथ मुक्केबाज विजेंदर सिंह स्वर्ण पदक के करीब खड़े हैं। भारतीय पुरुष व महिला कबड्डी टीमों ने 16वें एशियन गेम्स के फाइनल में प्रवेश कर स्वर्ण पदक की उम्मीद मजबूत कर दी है।
14वें दिन एशियाड में भारत की स्थिति
एथलेटिक्स: महिला टीम को 400 मीटर रिले रेस में मिला स्वर्ण पदक।
कबड्डी: पुरुष कबड्डी में भारत को गोल्ड मेडल। भारत ने ईरान को 37-20 से हराया।
एथलेटिक्सः महिला 4 गुना 100 मीटर रिले दौ़ड़ में भारत को कोई मेडल नहीं।
एथलेटिक्सः 5000 मीटर महिला दौड़ में भारत को सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल। प्रीजा श्रीधरन ने सिल्वर मेडल और कविता राउत ने ब्रॉन्ज मेडल जीता।
कबड्डी: फाइनल में भारतीय महिला टीम ने थाईलैंड को 28-14 से हराया। भारत को 11वां गोल्ड दिलाया।
स्केटिंग: पेयर स्केटिंग में भारत मेडल से चूका। अनूप और अखिल की जोड़ी चौथे नंबर पर रही।
स्केटिंग: पुरुष फ्री स्केटिंग में भारत के अनूप कुमार यामा को ब्रॉन्ज । अखिल छठे नंबर पर रहे।
कराटे: महिला (61 किलोग्राम) 1/8 फाइनल मैच में सुमित्रा को फिलीस्तीन की जुहरिया ने हराया।
कराटे: पुरुष (84 किलोग्राम) 1/8 फाइनल मैच में भारत के सुनील राठी चीन के जियांगू से हारे।
स्केटिंग: महिला स्केटिंग लॉन्ग प्रोग्राम में भारत की आशना रंजन शाह पांचवें और अवनि पंचाल छठे नंबर पर रहीं।
कुश्ती: महिला फ्रीस्टाइल (55 किलोग्राम) 1/8 फाइनल में भारत की गीता ने दक्षिण कोरिया की जिउन उम को हराया।
कुश्ती: महिला फ्रीस्टाइल (63 किलोग्राम) सेमीफाइनल में भारत की सुमन कुंडू मंगोलिया की नसानबर्मा से हारीं।
कराटे: महिला (68 किलोग्राम) क्वार्टर फाइनल में भारत की सिम्मी ताइवान की या ली ल्यू से हारीं।
कुश्ती: महिला फ्रीस्टाइल (63 किलोग्राम) क्वार्टर फाइनल में भारत की सुमन कुंडू ने किर्गिस्तान की नेस्तान कियाजोवा को हराया।
कराटे: पुरुष (75 किलोग्राम) 1/8 फाइनल में भारत के विकास शर्मा कजाकिस्तान के येरमेक से हारे।
कुश्ती: महिला फ्रीस्टाइल (63 किलोग्राम) 1/8 फाइनल में भारत की सुमन कुंडू ने वियतनाम की क्यूएन थी लाउंग को हराया।
नौकायन: कनोइ 200 मीटर फाइनल में भारत के जे.एस. ओनियम नौवें नंबर पर रहे।
कुश्ती: महिला फ्रीस्टाइल (55 किलोग्राम) क्वार्टर फाइनल में भारत की गीता को नॉर्थ कोरिया की योन हुई पाक ने हराया।
कुश्ती: महिला फ्रीस्टाइल (72 किलोग्राम) क्वार्टर फाइनल में भारत की गुरशरण प्रीत कौर कजाकिस्तान की गुजेल से हारीं।
अभी इन खिलाड़ियों पर रहेगी नजर-
विजेंदर सिंह – मुक्केबाजी – 75 किग्रा. वर्ग के फाइनल में
मनप्रीत सिंह – मुक्केबाजी – 91 किग्रा. वर्ग के फाइनल में
संतोष कुमार – मुक्केबाजी – 64 किग्रा. वर्ग के फाइनल में
टीम को बधाई दें
14वें दिन एशियाड में भारत की स्थिति
एथलेटिक्स: महिला टीम को 400 मीटर रिले रेस में मिला स्वर्ण पदक।
कबड्डी: पुरुष कबड्डी में भारत को गोल्ड मेडल। भारत ने ईरान को 37-20 से हराया।
एथलेटिक्सः महिला 4 गुना 100 मीटर रिले दौ़ड़ में भारत को कोई मेडल नहीं।
एथलेटिक्सः 5000 मीटर महिला दौड़ में भारत को सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल। प्रीजा श्रीधरन ने सिल्वर मेडल और कविता राउत ने ब्रॉन्ज मेडल जीता।
कबड्डी: फाइनल में भारतीय महिला टीम ने थाईलैंड को 28-14 से हराया। भारत को 11वां गोल्ड दिलाया।
स्केटिंग: पेयर स्केटिंग में भारत मेडल से चूका। अनूप और अखिल की जोड़ी चौथे नंबर पर रही।
स्केटिंग: पुरुष फ्री स्केटिंग में भारत के अनूप कुमार यामा को ब्रॉन्ज । अखिल छठे नंबर पर रहे।
कराटे: महिला (61 किलोग्राम) 1/8 फाइनल मैच में सुमित्रा को फिलीस्तीन की जुहरिया ने हराया।
कराटे: पुरुष (84 किलोग्राम) 1/8 फाइनल मैच में भारत के सुनील राठी चीन के जियांगू से हारे।
स्केटिंग: महिला स्केटिंग लॉन्ग प्रोग्राम में भारत की आशना रंजन शाह पांचवें और अवनि पंचाल छठे नंबर पर रहीं।
कुश्ती: महिला फ्रीस्टाइल (55 किलोग्राम) 1/8 फाइनल में भारत की गीता ने दक्षिण कोरिया की जिउन उम को हराया।
कुश्ती: महिला फ्रीस्टाइल (63 किलोग्राम) सेमीफाइनल में भारत की सुमन कुंडू मंगोलिया की नसानबर्मा से हारीं।
कराटे: महिला (68 किलोग्राम) क्वार्टर फाइनल में भारत की सिम्मी ताइवान की या ली ल्यू से हारीं।
कुश्ती: महिला फ्रीस्टाइल (63 किलोग्राम) क्वार्टर फाइनल में भारत की सुमन कुंडू ने किर्गिस्तान की नेस्तान कियाजोवा को हराया।
कराटे: पुरुष (75 किलोग्राम) 1/8 फाइनल में भारत के विकास शर्मा कजाकिस्तान के येरमेक से हारे।
कुश्ती: महिला फ्रीस्टाइल (63 किलोग्राम) 1/8 फाइनल में भारत की सुमन कुंडू ने वियतनाम की क्यूएन थी लाउंग को हराया।
नौकायन: कनोइ 200 मीटर फाइनल में भारत के जे.एस. ओनियम नौवें नंबर पर रहे।
कुश्ती: महिला फ्रीस्टाइल (55 किलोग्राम) क्वार्टर फाइनल में भारत की गीता को नॉर्थ कोरिया की योन हुई पाक ने हराया।
कुश्ती: महिला फ्रीस्टाइल (72 किलोग्राम) क्वार्टर फाइनल में भारत की गुरशरण प्रीत कौर कजाकिस्तान की गुजेल से हारीं।
अभी इन खिलाड़ियों पर रहेगी नजर-
विजेंदर सिंह – मुक्केबाजी – 75 किग्रा. वर्ग के फाइनल में
मनप्रीत सिंह – मुक्केबाजी – 91 किग्रा. वर्ग के फाइनल में
संतोष कुमार – मुक्केबाजी – 64 किग्रा. वर्ग के फाइनल में
टीम को बधाई दें
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एशियन गमेस,
एशियन गेमस,
एशियाड,
ग्वांगझू
कानून व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग पर इनेलो ने दिया ज्ञापन
डबवाली-इनेलो ने आज डबवाली में बिगड़ रही कानून व्यवस्था के संबंध में उपमंडल अधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा। इनेलो किसान सैल के जिला प्रधान राधे राम गोदारा के नेतृत्व में इनेलो में आज डबवाली के उपमंडल अधिकारी मुनीश नागपाल को एक ज्ञापन सौंप कर डबवाली में बढ़ रही आपराधिक गतिविधियों पर अंकुश लगाने की मांग की। उपमंडल अधिकारियों को सौंपे ज्ञापन में उन्होंने डबवाली क्षेत्र में लूटपाट, हत्या, नशे के व्यापार व अन्य आपराधिक मामलों में वृद्धि होने पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन इसे रोकने के लिए पूरी तरह से असफल रहा। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि शहर में अपराधियों पर लगाम लगा कर कानून व्यवस्था को कायम किया जाये। इस मौके पर टेक चंद छाबड़ा, डॉ. गिरधारी लाल गर्ग, सुभाष मित्तल, लवली मेहता, गुरचरण सिंह नंबरदार, सुखविंद्र जापानी, महेंद्र डूडी, महावीर सहारण, सुरेंद्र छिंदा व दर्शन सिंह मोंगा, मौजूद थे।
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डबवाली समाचार,
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26/11 की बरसी से पहले भारत विरोधी हवा बनाने पर फारूक को पड़ा मुक्का
चंडीगढ़- दो साल पहले मुंबई पर हुए आतंकवादी हमले की बरसी से ठीक एक दिन पहले अलगाववादी हुर्रियत कांफ्रेंस के नेता मीरवाइज उमर फारूक और बिलाल लोन को कश्मीरी पंडितों का जबरदस्त गुस्सा झेलना पड़ा। पंडितों ने उन पर भारत विरोधी भावनाएं भड़काने का आरोप लगाते हुए हमला कर दिया। दोनों नेता यहां एक सेमिनार में शामिल होने आए थे
हुर्रियत कांफ्रेंस के अध्यक्ष मीर वायज उमर फारूक और बिलाल लोन गुरुवार को किसान भवन में आयोजित एक सेमिनार में हिस्सा लेने पहुंचे। सेमिनार जम्मू कश्मीर डेमोक्रेटिक फ्रीडम पार्टी ने आयोजित किया था। अलग कश्मीर की मांग को लेकर जैसे ही अलगाववादी नेता उमर फारुक ने बोलना शुरू किया, सेमिनार में बैठे कुछ लोगों ने इसका विरोध शुरू किया। ये प्रदर्शनकारी भारत समर्थक नारे लगाने लगे और इसी बीच कुछ लोगों ने फारुक और लोन पर हमला बोल दिया। भीड़ ने फारुक पर मुक्कों से प्रहार किया, जिससे वे कुर्सी से नीचे गिर पड़े।
हांलांकि फारुक को कोई चोट नहीं आई लेकिन प्रदर्शनकारियों, जिनमें अधिकांश कश्मीरी पंडित थे, ने वहां तोड़फोड़ कर दी। कार्यक्रम के दौरान वहां ज्यादा सुरक्षा व्यवस्था नहीं थी, लेकिन घटना के तुरंत बाद वहां बड़ी संख्या में पुलिस बल पहुंच गया। पुलिस ने दर्जन से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया, जिसमें कुछ महिलाएं भी है।
यह तो होना ही था- : उमर
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हुर्रियत की जैसी राजनीति है, उसका अंजाम तो यह होना ही था।
इससे पहले दिल्ली में भी कश्मीर की आजादी पर आयोजित एक सेमिनार में हंगामा हुआ था। यहां कश्मीरी पंडितों ने अलगाववादी नेता सैयद अली गिलानी पर हमला किया था। उन पर भी भारत विरोधी भावनाएं भड़काने का आरोप था। 4 नवंबर को शब्बीर शाह को कश्मीरी पंडितों का गुस्सा झेलना पड़ा था।
हुर्रियत कांफ्रेंस के अध्यक्ष मीर वायज उमर फारूक और बिलाल लोन गुरुवार को किसान भवन में आयोजित एक सेमिनार में हिस्सा लेने पहुंचे। सेमिनार जम्मू कश्मीर डेमोक्रेटिक फ्रीडम पार्टी ने आयोजित किया था। अलग कश्मीर की मांग को लेकर जैसे ही अलगाववादी नेता उमर फारुक ने बोलना शुरू किया, सेमिनार में बैठे कुछ लोगों ने इसका विरोध शुरू किया। ये प्रदर्शनकारी भारत समर्थक नारे लगाने लगे और इसी बीच कुछ लोगों ने फारुक और लोन पर हमला बोल दिया। भीड़ ने फारुक पर मुक्कों से प्रहार किया, जिससे वे कुर्सी से नीचे गिर पड़े।
हांलांकि फारुक को कोई चोट नहीं आई लेकिन प्रदर्शनकारियों, जिनमें अधिकांश कश्मीरी पंडित थे, ने वहां तोड़फोड़ कर दी। कार्यक्रम के दौरान वहां ज्यादा सुरक्षा व्यवस्था नहीं थी, लेकिन घटना के तुरंत बाद वहां बड़ी संख्या में पुलिस बल पहुंच गया। पुलिस ने दर्जन से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया, जिसमें कुछ महिलाएं भी है।
यह तो होना ही था- : उमर
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हुर्रियत की जैसी राजनीति है, उसका अंजाम तो यह होना ही था।
इससे पहले दिल्ली में भी कश्मीर की आजादी पर आयोजित एक सेमिनार में हंगामा हुआ था। यहां कश्मीरी पंडितों ने अलगाववादी नेता सैयद अली गिलानी पर हमला किया था। उन पर भी भारत विरोधी भावनाएं भड़काने का आरोप था। 4 नवंबर को शब्बीर शाह को कश्मीरी पंडितों का गुस्सा झेलना पड़ा था।
गुरुवार, 25 नवंबर 2010
तेजधार हथियारों से हमला, युवक की मौत
डबवाली-बुधवार देर शाम पुराना दलीप होस्पिटल के समीप कुछ युवकों ने रिक्शा पर आ रहे दो दोस्तों पर तेजधार हथियारों से कातिलाना हमला कर दिया। जिससे एक युवक की मौत हो गई। जबकि दूसरे ने भागकर अपनी जान बचाई। थाना शहर पुलिस ने मृतक के मामा के ब्यान पर मामला दर्ज कर छानबीन आरम्भ कर दी है। गांव अबूबशहर निवासी रवि कुमार पुत्र धन्ना राम ने बताया कि वह अपने दोस्त 20 वर्षीय जसवीर पुत्र बलदेव ङ्क्षसह निवासी मण्डी किलियांवाली के साथ बठिण्डा से खरीददारी कर शाम साढ़े 6 बजे के करीब रिक्शा पर अपने घर लोट रहे थे कि पुराना दलीप होस्पिटल के समीप मोटरसाईकल पर सवार चार युवकों ने उन पर तेजधार हथियारों से हमला बोल दिया। जिससे वह तो किसी तरह उनके हाथों से निकलकर भाग गया जबकि उसका दोस्त जसवीर हमलावर युवकों के हत्थे चढ़ गया। हमलावर युवकों ने उसके दोस्त जसवीर पर तेजधार हथियारों से हमला कर गम्भीर रूप से घायल कर दिया। किसी ने इस घटना की जानकारी गली निवासी सुनील कुमार व उसके मामा दर्शन ङ्क्षसह को दी तो वह तुरन्त घटनास्थल पहुंचे और खून से लथपथ जसवीर को स्थानीय राजकीय अस्पताल में उपचार हेतु ले गए। जहां ड्यूटी पर तैनात चिकित्सकों द्वारा उसे मृत घोषित कर दिया। रवि कुमार ने हमलावर युवकों में से दो की पहचान विनोद कुमार तथा मोनू निवासी रविदास नगर के रूप में बताई है अन्य दो युवकों को वह नहीं जानता बताया है। इस हमले का कारण रवि कुमार से स्कूल समय की पुरानी रंजिश होना बताया गया है। जिसका खामियाजा रवि के दोस्त जसवीर को अपनी जान देकर चुकाना पड़ा। घटना की सूचना मिलते ही थाना शहर पुलिस घटनास्थल पर पहुंचकर वहां का जायजा लिया तथा उसके बाद पुलिस सिविल हस्पताल में पहुंची और शव को अपने कब्जे में लेकर कार्रवाई आरम्भ कर दी। घटना की जानकारी मिलते ही सिरसा के एसपी सुरिन्द्र गुप्ता व डीएसपी बाबू लाल सामान्य हस्पताल पहुंचे मृतक के दोस्त रवि कुमार से घटना की विस्तार से जानकारी ली और स्थानीय पुलिस को हमलावरों को शीघ्र गिरफ्तार करने के आदेश दिए। स्थानीय पुलिस ने वीरवार प्रात: आवश्यक कार्रवाई उपरान्त शव का पोस्टमार्टम करवाकर उसके परिजनों को सौंप दिया। डीएसपी बाबू लाल ने बताया कि मृतक के मामा दर्शन ङ्क्षसह के ब्यान पर हमलावर विनोद कुमार व मोनू निवासी रविदास नगर तथा दो अन्य हमलावर युवकों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है और पुलिस की तीन टीमें गठित की गई हैं और पुलिस टीमों द्वारा हमलावरों की गिरफ्तारी के लिए जगह - जगह छापेमारी की जा रही है। मामले की जांच कर रहे एसआई मन्दरूप ङ्क्षसह ने बताया कि हमलावरों को शीघ्र ही गिरफ्तार कर लिया जाऐगा।
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खण्ड डबवाली में पंच सरपंचों को दी वित्तीय प्रबंधन की जानकारी-सिहाग
डबवाली- खण्ड विकास एवं पंचायत अधिकारी के स्थानीय कार्यालय में हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान नीलोखेड़ी के तत्त्वाधान में आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में पंच सरपंचों का प्रशिक्षण जारी है। यह जानकारी देते हुए समन्वयक मैनपाल सिहाग ने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर पंचायती राज के नव निर्वाचित प्रतिनिधियों को उनके अधिकार और कत्र्तव्यों के बारे में जागरूक करना है। मैनपाल सिहाग ने पंच सरपंचों को पंचायत की वित्तीय शक्तियों के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि हरियाणा सरकार द्वारा बनाए गये वित्त नियमों में धारा 39 से लेकर धारा 45 तक ग्राम पंचायत की वित्तीय शक्तियों के बारे में विस्तारपूर्वक बताया गया है। उन्होंने बताया कि धारा 39 में स्पष्ट किया गया है कि सभी ग्राम पंचायतों के पास ग्राम निधि होगी। ग्राम निधि का संचालन सरपंच द्वारा किया जायेगा। धारा 40 में ग्राम निधि के स्त्रोतों के बारे में जानकारी दी गई है जैसे कि स्थानीय प्राधिकरणों के प्राप्त सभी अनुदान, सभी प्रकार के दान, ग्राम पंचायत द्वारा वसूल किए गये सभी कर, शुल्क, ग्राम पंचायत को तालाबों व जोहड़ों के माध्यम से मछली पालन से आय, शामलात भूमि से पट्टे से होने वाली आय, धारा 41 के अनुसार ग्राम पंचायत सरकार की अनुमति से गांवों में सेवा शुल्क और दुकानों पर तह बाजारी फीस लगा सकती है। धारा 42 के अनुसार ग्राम पंचायतें 100 रूपये तक की अवसूली योग्य राशि बट्टे खाते में डाल सकती है। धारा 43 के अनुसार ग्राम पंचायतें अपने सभी खातों का दो साल में एक बार ऑडिट करवाऐंगी। धारा 44 के अनुसार ग्राम पंचायतों द्वारा अपने स्तर पर किये जाने वाले खर्चों के बारे में बताया गया है। जैसे कि गांव में करवाए गये विकास कार्यों के प्रचार के लिए 500 रूपये वार्षिक, पंच सरपंचों के सैमीनार के लिए 500 रूपये वार्षिक, राष्ट्रीय ध्वज खरीदने के लिए 500 रूपये वार्षिक, 26 जनवरी, 15 अगस्त, 2 अक्तूबर जैसे राष्ट्रीय त्यौहारों के लिए 500 रूपये प्रत्येक त्यौहार पर ग्राम पंचायत बच्चों में मिठाईयां, पैन-पैंसिल बांटने के लिए खर्च कर सकती है, किसी मंत्री या प्रशासनिक अधिकारी के गांव में आने पर मनोरंजन खर्च 3000 रूपये तक वार्षिक खर्च कर सकती है। धारा 45 के अनुसार ग्राम पंचायत सरकार की अनुमति से गांव में विशेष कर लगा सकती है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में नीलोखेड़ी से आए दूसरे प्रशिक्षक वजीर सिंह ने भी ग्राम पंचायतों को शामलात भूमि के प्रबंधन के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी देते हुए बताया कि गांव स्तर पर सांझी परिसम्पति के प्रबंधन व रख-रखाव की जिम्मेवारी पंचायत प्रतिनिधियों की होती है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में पंच सरपंचों को हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान नीलोखेड़ी द्वारा तैयार की गई किताब उपलब्ध करवाई गई है। जिसमें पंचायती राज से संबंधित आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गये हैं। इस किताब में हरियाणा सरकार द्वारा पंचायती राज के संदर्भ में किए गये कुछ नये सुधारों का भी विस्तापूर्वक वर्णन किया गया है। इस प्रोग्राम में समाज शिक्षा एवं पंचायत अधिकारी रामप्रकाश ने भी आए हुए प्रतिनिधियों को गांव स्तर पर ग्रामीण विकास की योजनाएं बनाने और लागू करने के लिए प्रेरित किया। आज के प्रशिक्षण कार्यक्रम में गंगा, रामपुरा बिश्रोईयां, बिज्जूवाली, रत्ताखेड़ा के नव निर्वाचित पुरूष व महिला पंच सरपंचों को प्रशिक्षण दिया गया।
लोक अदालत में निपटाए कई मामले
डबवाली- हरियाणा विद्युत निगम द्वारा उपमण्डल के गांव रिसालिया खेड़ा में बुधवार को लोक अदालत का आयोजन किया। जिसमें सिरसा से सीनियर अधिकारी वीपी गुप्ता, स्थानीय विद्युत निगम के एक्सियन बीके रंजन, एसडीओ गुलशन वधवा विशेष तौर पर पहुंचे लोक अदालत में विद्युत उपभोक्ताओं द्वारा कुल 24 शिकायतें पेश की गई। जिसमें सीनियर अधिकारी वीपी गुप्ता ने 9 शिकायतों का निपटारा मौका पर ही कर दिया। एक्सियन बीके रंजन ने बताया कि गांव रिसालियाखेड़ा में आयोजित लोक अदालत में 13 मीटर बदलने तथा 7 बिल ठीक करवाने, एक बीपीएल कनैक्शन तथा तीन अन्य शिकायतें प्रस्तुत हुई। जिसमें 9 का निपटारा मौका पर ही कर दिया तथा शेष शिकायतों का निपटारा भी शीघ्र कर दिया जाऐगा। इस अवसर पर विद्युत निगम कार्यालय से मोहन लाल जेई, गुरबख्श ङ्क्षसह जेई सहित अन्य कर्मचारी उपस्थित थे।
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प्यार में अंधे प्रेमी ने की अंजली की हत्या
दीवार से देकर मार डाला
सिरसा, 25 नवंबर। शक्तिनगर में सोमवार की शाम जिस मासूम अंजली का शव मिला था उसकी हत्या की गई थी। हत्या किसी अनजान व्यक्ति ने नहीं बल्कि उसकी मां के प्रेमी ने की थी। यह पता पुलिस जांच में चला है। सूत्रों की माने तो पुलिस ने अंजली की मां शीला व उसके प्रेमी को काबू कर लिया है। सूत्रों के अनुसार अंजली की मां शीला कुछ समय से अपने पति से अलग शक्तिनगर में किराए के मकान में रह रही थी। उसका चतरगढ़पट्टी निवासी एक व्यक्ति से प्रेम प्रसंग चल रहा था। लंबे समय से प्रेमी शीला के घर आता-जाता था और दोनों शादी करना चाहते थे। शीला भी प्रेमी के संग घर बसाना चाहती थी मगर अंजली प्रेम में रोड़ा बन रही थी क्योंकि शीला का प्रेमी अंजली को साथ नहीं रखना चाहता था। वह सिर्फ शीला को ही अपनाना चाहता था, इसलिए अंजली उसकी आंख की किरकरी बनी हुई थी। सूत्रों के अनुसार प्रेमी अक्सर शीला के घर जाता था,इसलिए चार वर्षीय अंजली मां के प्रेमी के साथ घुलमिल गई थी। घटना वाली रात प्रेमी अंजली को अपने साथ घूमाने के बहाने घर से लेकर गया और बाद में उसे मार दिया। सूत्रों के अनुसार प्रेमी ने बेरहमी से अंजली के दोनों पैर पकड़कर उसका सिर दीवार से दे मारा जिससे उसकी मौत हो गई। बाद में शव को खेत में पटककर वह भाग गया। हालांकि यह भी पता चला है कि शीला अंजली को बेहद प्यार करती थी और उसे मारना व छोडऩा नहीं चाहती थी लेकिन प्रेमी ने शीला को बिना बताए ही अंजली को मौत के घाट उतार दिया।
सिरसा, 25 नवंबर। शक्तिनगर में सोमवार की शाम जिस मासूम अंजली का शव मिला था उसकी हत्या की गई थी। हत्या किसी अनजान व्यक्ति ने नहीं बल्कि उसकी मां के प्रेमी ने की थी। यह पता पुलिस जांच में चला है। सूत्रों की माने तो पुलिस ने अंजली की मां शीला व उसके प्रेमी को काबू कर लिया है। सूत्रों के अनुसार अंजली की मां शीला कुछ समय से अपने पति से अलग शक्तिनगर में किराए के मकान में रह रही थी। उसका चतरगढ़पट्टी निवासी एक व्यक्ति से प्रेम प्रसंग चल रहा था। लंबे समय से प्रेमी शीला के घर आता-जाता था और दोनों शादी करना चाहते थे। शीला भी प्रेमी के संग घर बसाना चाहती थी मगर अंजली प्रेम में रोड़ा बन रही थी क्योंकि शीला का प्रेमी अंजली को साथ नहीं रखना चाहता था। वह सिर्फ शीला को ही अपनाना चाहता था, इसलिए अंजली उसकी आंख की किरकरी बनी हुई थी। सूत्रों के अनुसार प्रेमी अक्सर शीला के घर जाता था,इसलिए चार वर्षीय अंजली मां के प्रेमी के साथ घुलमिल गई थी। घटना वाली रात प्रेमी अंजली को अपने साथ घूमाने के बहाने घर से लेकर गया और बाद में उसे मार दिया। सूत्रों के अनुसार प्रेमी ने बेरहमी से अंजली के दोनों पैर पकड़कर उसका सिर दीवार से दे मारा जिससे उसकी मौत हो गई। बाद में शव को खेत में पटककर वह भाग गया। हालांकि यह भी पता चला है कि शीला अंजली को बेहद प्यार करती थी और उसे मारना व छोडऩा नहीं चाहती थी लेकिन प्रेमी ने शीला को बिना बताए ही अंजली को मौत के घाट उतार दिया।
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खाता खुलवाने के नाम पर मिल रहे हैं धक्के
सांसद के निर्देश का नहीं दिखा असर
सिरसा-नगरपरिषद सिरसा में बैंक में खाता खुलवाने पहुंचे पेंशनधारकों को बैंक कर्मियों की काम न करने की नीति के कारण धक्के खाने पड़ रहे हैं। आज तो बैंक कर्मी काम छोड़कर ही वहां से भाग गए। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत बुढ़ापा, विधवा, विकलांग पेंशन प्राप्त करने वाले पेंशनधारक बैंक खाता खुलवाने के लिए नगरपरिषद कार्यालय में पहुंचे। उपायुक्त सीजी रजिनीकांथन ने आदेश जारी किया था कि सभी प्रकार की पेंशन प्राप्त करने वाले लोगों को अब बैंक से पेंशन मिलेगी। इसके लिए उन्हें बैंक में खाता खुलवाना होगा। जीरो बेलेंस पर खाता खुलवाने के लिए जिले भर में संबंधित नगरपरिषद व नगरपालिका कार्यालय में ही अलग-अलग तिथियों को बैंक कर्मी भेजने की व्यवस्था की गई थी। सिरसा में आज बैंक खाते खुलने थे, लिहाजा बड़ी संख्या में पेंशनधारक वहां पहुंच गए। एक साथ इतने लोगों को देखकर बैंक कर्मी वहां से भाग गए। उनका कहना था कि भीड़ की तुलना में उनकी संख्या बहुत कम है। ऐसे में वे बैंक खाता खोलने की प्रक्रिया पूरी नहीं कर सकते। उधर खाता खुलवाने पहुंचे लोगों का कहना था कि वे दो दिन से किराया खर्च करके नगरपरिषद में आ रहे हैं मगर खाता खोलने की बजाय उन्हें धक्के दिए जा रहे हैं। बैंक खाता खोलने की कोई व्यवस्था नहीं है। इससे से अच्छा था कि उन्हें पहले की तरह की पेंशन का भुगतान किया जाए ताकि इस तरह से धक्के तो नहीं खाने पड़े। उधर नगरपरिषद के चेयरमैन सुरेश कुक्कू ने कहा कि उन्होंने पहले ही प्रशासन को अवगत करा दिया था कि बैंक में खाता खोलने की माकूल व्यवस्था नहीं है। पेंशनधारकों की संख्या को देखते हुए कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई जाए। यदि पर्याप्त संख्या में बैंक कर्मी तैनात किए जाए तो परेशानी नहीं आएगी। उन्होंने इस संबंध में समाज कल्याण विभाग को पत्र लिखा है।
क्या हुआ सांसद के आदेश का
तीन दिन पूर्व सांसद अशोक तंवर ने नगरपरिषद सिरसा का दौरा किया था। अपने दौरे में उन्होंने पेंशनधारकों से मुलाकात की थी। उन्होंने नगरपरिषद के अधिकारियों को निर्देश दिया था कि पेंशनधारकों के बैठने व जलपान की व्यवस्था की जाए। उनकी इस बात से एक बार तो पेंशनधारकों के चेहरों पर खुशी दिखाई दी थी मगर आज जिस तरह से उन्हें इधर-उधर धक्के मिले तो उनकी जुबां पर यही सवाल था कि सांसद के निर्देश का क्या हुआ। उन्हें जलपान तो दूर बैठने तक की जगह नहीं मिली।
सिरसा-नगरपरिषद सिरसा में बैंक में खाता खुलवाने पहुंचे पेंशनधारकों को बैंक कर्मियों की काम न करने की नीति के कारण धक्के खाने पड़ रहे हैं। आज तो बैंक कर्मी काम छोड़कर ही वहां से भाग गए। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत बुढ़ापा, विधवा, विकलांग पेंशन प्राप्त करने वाले पेंशनधारक बैंक खाता खुलवाने के लिए नगरपरिषद कार्यालय में पहुंचे। उपायुक्त सीजी रजिनीकांथन ने आदेश जारी किया था कि सभी प्रकार की पेंशन प्राप्त करने वाले लोगों को अब बैंक से पेंशन मिलेगी। इसके लिए उन्हें बैंक में खाता खुलवाना होगा। जीरो बेलेंस पर खाता खुलवाने के लिए जिले भर में संबंधित नगरपरिषद व नगरपालिका कार्यालय में ही अलग-अलग तिथियों को बैंक कर्मी भेजने की व्यवस्था की गई थी। सिरसा में आज बैंक खाते खुलने थे, लिहाजा बड़ी संख्या में पेंशनधारक वहां पहुंच गए। एक साथ इतने लोगों को देखकर बैंक कर्मी वहां से भाग गए। उनका कहना था कि भीड़ की तुलना में उनकी संख्या बहुत कम है। ऐसे में वे बैंक खाता खोलने की प्रक्रिया पूरी नहीं कर सकते। उधर खाता खुलवाने पहुंचे लोगों का कहना था कि वे दो दिन से किराया खर्च करके नगरपरिषद में आ रहे हैं मगर खाता खोलने की बजाय उन्हें धक्के दिए जा रहे हैं। बैंक खाता खोलने की कोई व्यवस्था नहीं है। इससे से अच्छा था कि उन्हें पहले की तरह की पेंशन का भुगतान किया जाए ताकि इस तरह से धक्के तो नहीं खाने पड़े। उधर नगरपरिषद के चेयरमैन सुरेश कुक्कू ने कहा कि उन्होंने पहले ही प्रशासन को अवगत करा दिया था कि बैंक में खाता खोलने की माकूल व्यवस्था नहीं है। पेंशनधारकों की संख्या को देखते हुए कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई जाए। यदि पर्याप्त संख्या में बैंक कर्मी तैनात किए जाए तो परेशानी नहीं आएगी। उन्होंने इस संबंध में समाज कल्याण विभाग को पत्र लिखा है।
क्या हुआ सांसद के आदेश का
तीन दिन पूर्व सांसद अशोक तंवर ने नगरपरिषद सिरसा का दौरा किया था। अपने दौरे में उन्होंने पेंशनधारकों से मुलाकात की थी। उन्होंने नगरपरिषद के अधिकारियों को निर्देश दिया था कि पेंशनधारकों के बैठने व जलपान की व्यवस्था की जाए। उनकी इस बात से एक बार तो पेंशनधारकों के चेहरों पर खुशी दिखाई दी थी मगर आज जिस तरह से उन्हें इधर-उधर धक्के मिले तो उनकी जुबां पर यही सवाल था कि सांसद के निर्देश का क्या हुआ। उन्हें जलपान तो दूर बैठने तक की जगह नहीं मिली।
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पुलिस अधिकारियों के मोबाइल नंबर सार्वजनिक
सिरसा- जिला पुलिस अधीक्षक सतेंद्र कुमार गुप्ता ने आमजन की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जिलाभर के थाना व चौकी प्रभारियों के नए मोबाइल नम्बर सार्वजनिक किए है ताकि आमजन क्षेत्र में घटित अपराधिक गतिविधियों व पुलिस सहायता लेने के संबंध में तुरंत संबधित थाना प्रभारी को सूचित कर सकते है। नए मोबाइल नम्बरों की श्रृंखला में पुलिस अधीक्षक का मोबाइल नम्बर 97299-97801 है। उपपपुलिस अधीक्षक मुख्यालय का मोबाइल नम्बर 97299-97803 है। डीएसपी ऐलनाबाद का मोबाइल नम्बर 97299-97804 है। डीएसपी डबवाली का मोबाइल नम्बर 97299-97805 है। सीआईए सिरसा प्रभारी का मोबाइल नम्बर 97299-97806 है। शहर सिरसा थाना प्रभारी का नम्बर 97299-97807 है। सिरसा सदर थाना प्रभारी का नम्बर 97299-97808 है। शहर डबवाली थाना प्रभारी का मोबाइल नम्बर 97299-97809 है, जबकि सदर डबवाली थाना प्रभारी का नम्बर 97299-97810 है। रानियां थाना प्रभारी का नम्बर 97299-97811 है। चौपटा थाना प्रभारी का मोबाइल नम्बर 97299-97812 है। ओढां थाना प्रभारी का नम्बर 97299-97813 है। ऐलनाबाद थाना प्रभारी का नम्बर 97299-97814, थाना प्रभारी डिंग 97299-97815, बडागुढा थानाप्रभारी 97299-97816, कालांवाली थानाप्रभारी 97299-97817, रोड़ी थानाप्रभारी 97299-97818 है। पुलिस अधीक्षक के रीडर का नम्बर 97299-97819 है जबकि सुरक्षा शाखा प्रभारी 97299-97820 है। यातायात थाना प्रभारी का नम्बर 97299-97821 है।
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बुधवार, 24 नवंबर 2010
सरकार में घोटाले या घोटालो में सरकार
आज हर जगह कांग्रेस सरकार में हुए घोटालो की चर्चा है. सुना था की पैसो में गर्मी कुछ ज्यादा होती है शायद यही कारण है की नोटों की गर्मी के आगे जहां बिहार की चुनावी तपत फीकी लग रही है वही संघ-कांग्रेस भी अपनी लड़ाई भूल गई है. नेता तो नेता जनता भी सोच रही है जब नेताओ ने घोटालो के पैसो की इतनी गर्मी खाई है तो हम भी कुछ हाथ सेंक ले. भले ही जनता के हाथ कुछ ना लगे लेकिन मुद्दा तो मुद्दा है. खबरिया चैनल भी कॉमनवेल्थ गेम्स में हुए घोटाले को भूल गए तो कांग्रेस भी संघ के पूर्व सरसंघ चालक सुदर्शन द्वारा सोनिया गाँधी को सीआईए का एजेंट कहे जाने को भूलती नजर आ रही है. इससे पहले जहां संघ नेताओ का आतंकवादी घटनाओं में हाथ बताने को लेकर कांग्रेस चर्चा में थी तो वही सुदर्शन द्वारा सोनिया गांधी को सीआईए एजेंट कहने पर कांग्रेस ने खूब बवाल मचाया. दोनों ही तरफ से धरने-प्रदर्शनों का दौर चला. जनता ने भी सभी समाचार खूब दिल से सुने और पढ़े. लेकिन एक के बाद एक घोटालो के उजागर होने से आज कांग्रेस चुप्पी साधे हुए है वही भाजपा को भी बड़ा मुद्दा मिलने से संघ भी चुप हो गया है.
रही बात घोटालो की तो जिस तरह से पहले कॉमनवेल्थ गेम्स फिर महाराष्ट्र के आदर्श हाउसिंग सोसाईटी और अब 2 जी स्पैक्ट्रम घोटाले में सरकार घिरी नजर आ रही है उसे देख तो यही लगता है की यह सभी घोटाले कांग्रेस सरकार में नहीं अपितु घोटालो में कांग्रेस सरकार है. कहने का भाव यह है की यह सभी घोटाले कांग्रेस सरकार में नहीं हुए. अगर ऐसा होता तो किसी भी एक घोटाले के पश्चात सरकार नहीं तो उसका कोई मंत्री-संतरी तो अवश्य कुछ बोलता लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ. कॉमनवेल्थ गेम्स में हुए घोटाले में दिल्ली सरकार की चुप्पी जहां चिंताजनक रही वही केंद्र और सोनिया गाँधी का मौन देश के लिए दुखदायी था. उसके पश्चात महाराष्ट्र जमीन घोटाले के पश्चात मुख्यमंत्री अशोक चव्हान की छुट्टी करने में हुई देरी में भी कहीं ना कहीं कांग्रेस सरकार ही दोषी थी. इन सब के पश्चात बात शुरू हुई 2 जी स्पैक्ट्रम घोटाले की तो देश और राजनितिक पार्टियों में घमासान ही मच गया. रही सही कसर सर्वोच्च न्यालय ने प्रधानमन्त्री से जवाब मांग कर पूरी कर दी. देश के आला नेता प्रधानमन्त्री से जवाब मांगने को शर्म की बात बोल कर राजनीति कर रहे है.
कहते है की नेताओ को तो राजनितिक रोटिया सेंकने का मौका चाहिए. तो भला इससे अच्छा मौका कब और कैसे मिल सकता है. अब तो केंद्र सरकार के साथ रहने वाले लालू-मुलायम भी 2 जी स्पैक्ट्रम घोटाले में प्रधानमंत्री से जवाब मांगने लगे है. अब सबकी नजर देश के युवराज राहुल गाँधी पर टिकी थी की कब वो कुछ बोले और यह मुद्दा किसी तरफ शांत हो जाएँ. अक्सर राहुल गाँधी कांग्रेस के लिए भगवान् साबित हुए है. तो आखिरकार यह मौका भी आ गया लेकिन अबकी बार वो जो कुछ भी बोले वो मेरी समझ में नहीं आया. इसके कई कारण है लेकिन अगर मै एक पत्रकार की नजर से देखूं तो यह ब्यान सिर्फ प्रधानमन्त्री के बचाव में था ना की देश हित में. उन्होंने कहा की अदालत द्वारा प्रधानमन्त्री से जवाब माँगना कोई शर्म की बात नहीं है. शायद सही कहा उन्होंने. जब नेता बेशर्म हो कर देश का अरबो-खरबों रुपया खा सकते है तो जवाब देने में शर्म कैसी. फिर भले ही इससे पहले ऐसा हुआ हो या नहीं. लेकिन उनकी यह टिप्पणी इतना जरुर स्पष्ट कर गई की वाकई आज किसी नेता को जनता के हितो से कोई सरोकार नहीं है.
इन सभी घोटालो में सरकार ही है इससे अच्छा उदहारण और क्या हो सकता है की सरकार शुरू से ही अपने लोगो का बचाव करती रही. चाहे वो कलमाड़ी हो या फिर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री अशोक चव्हान. जबकि राजा के मुद्दे पर क्या कुछ हुआ वो सभी ने देखा और सुना. अभी हाल ही में राजस्थान के भाजपा नेताओ ने सरकारी दस्तावेजो के साथ यह प्रमाणित करने का प्रयास किया है की कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए राजस्थान के पूर्व राज्यपाल के पुत्र को 2000 करोड़ रूपए की राशी बेवजह दी गई. इससे पहले भी जो नाम उजागर हुए है वो सभी सरकार के ही नुमाइंदे है. कुल मिला कर अगर यह कहा जाये की कॉमनवेल्थ गेम्स में हुए घोटाले में हर स्तर के नेताओ का मुहं बंद करने के लिए मोटी रकम दी गई थी तो गलत नहीं होगा. जबकि प्रतिदिन लाखों रुपया खर्च कर चलने वाली संसद की कार्यवाही भी भ्रष्टाचार और घोटालो की भेंट चढ़ रही है. लेकिन कांग्रेस व् सरकार के कानो पर जूं तक नहीं रेंग रही. जब नेताओ की ही नहीं सूनी जा रही तो भले ही जनता कुछ भी बोलती रहे किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता. क्योंकि जब नेताओ का पेट भरा हो तो जनता की सुनता कौन है.
रही बात घोटालो की तो जिस तरह से पहले कॉमनवेल्थ गेम्स फिर महाराष्ट्र के आदर्श हाउसिंग सोसाईटी और अब 2 जी स्पैक्ट्रम घोटाले में सरकार घिरी नजर आ रही है उसे देख तो यही लगता है की यह सभी घोटाले कांग्रेस सरकार में नहीं अपितु घोटालो में कांग्रेस सरकार है. कहने का भाव यह है की यह सभी घोटाले कांग्रेस सरकार में नहीं हुए. अगर ऐसा होता तो किसी भी एक घोटाले के पश्चात सरकार नहीं तो उसका कोई मंत्री-संतरी तो अवश्य कुछ बोलता लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ. कॉमनवेल्थ गेम्स में हुए घोटाले में दिल्ली सरकार की चुप्पी जहां चिंताजनक रही वही केंद्र और सोनिया गाँधी का मौन देश के लिए दुखदायी था. उसके पश्चात महाराष्ट्र जमीन घोटाले के पश्चात मुख्यमंत्री अशोक चव्हान की छुट्टी करने में हुई देरी में भी कहीं ना कहीं कांग्रेस सरकार ही दोषी थी. इन सब के पश्चात बात शुरू हुई 2 जी स्पैक्ट्रम घोटाले की तो देश और राजनितिक पार्टियों में घमासान ही मच गया. रही सही कसर सर्वोच्च न्यालय ने प्रधानमन्त्री से जवाब मांग कर पूरी कर दी. देश के आला नेता प्रधानमन्त्री से जवाब मांगने को शर्म की बात बोल कर राजनीति कर रहे है.
कहते है की नेताओ को तो राजनितिक रोटिया सेंकने का मौका चाहिए. तो भला इससे अच्छा मौका कब और कैसे मिल सकता है. अब तो केंद्र सरकार के साथ रहने वाले लालू-मुलायम भी 2 जी स्पैक्ट्रम घोटाले में प्रधानमंत्री से जवाब मांगने लगे है. अब सबकी नजर देश के युवराज राहुल गाँधी पर टिकी थी की कब वो कुछ बोले और यह मुद्दा किसी तरफ शांत हो जाएँ. अक्सर राहुल गाँधी कांग्रेस के लिए भगवान् साबित हुए है. तो आखिरकार यह मौका भी आ गया लेकिन अबकी बार वो जो कुछ भी बोले वो मेरी समझ में नहीं आया. इसके कई कारण है लेकिन अगर मै एक पत्रकार की नजर से देखूं तो यह ब्यान सिर्फ प्रधानमन्त्री के बचाव में था ना की देश हित में. उन्होंने कहा की अदालत द्वारा प्रधानमन्त्री से जवाब माँगना कोई शर्म की बात नहीं है. शायद सही कहा उन्होंने. जब नेता बेशर्म हो कर देश का अरबो-खरबों रुपया खा सकते है तो जवाब देने में शर्म कैसी. फिर भले ही इससे पहले ऐसा हुआ हो या नहीं. लेकिन उनकी यह टिप्पणी इतना जरुर स्पष्ट कर गई की वाकई आज किसी नेता को जनता के हितो से कोई सरोकार नहीं है.
इन सभी घोटालो में सरकार ही है इससे अच्छा उदहारण और क्या हो सकता है की सरकार शुरू से ही अपने लोगो का बचाव करती रही. चाहे वो कलमाड़ी हो या फिर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री अशोक चव्हान. जबकि राजा के मुद्दे पर क्या कुछ हुआ वो सभी ने देखा और सुना. अभी हाल ही में राजस्थान के भाजपा नेताओ ने सरकारी दस्तावेजो के साथ यह प्रमाणित करने का प्रयास किया है की कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए राजस्थान के पूर्व राज्यपाल के पुत्र को 2000 करोड़ रूपए की राशी बेवजह दी गई. इससे पहले भी जो नाम उजागर हुए है वो सभी सरकार के ही नुमाइंदे है. कुल मिला कर अगर यह कहा जाये की कॉमनवेल्थ गेम्स में हुए घोटाले में हर स्तर के नेताओ का मुहं बंद करने के लिए मोटी रकम दी गई थी तो गलत नहीं होगा. जबकि प्रतिदिन लाखों रुपया खर्च कर चलने वाली संसद की कार्यवाही भी भ्रष्टाचार और घोटालो की भेंट चढ़ रही है. लेकिन कांग्रेस व् सरकार के कानो पर जूं तक नहीं रेंग रही. जब नेताओ की ही नहीं सूनी जा रही तो भले ही जनता कुछ भी बोलती रहे किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता. क्योंकि जब नेताओ का पेट भरा हो तो जनता की सुनता कौन है.
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